Sunday, September 19, 2021
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बातचीत : करतारपुर कॉरिडोर पर भारत विरोधी कोई गतिविधि नहीं होगी, सांझा बैठक से आई भरोसे की बात

अमृतसर. भारत के डेरा बाबा नानक और पाकिस्तान के करतारपुर को जोड़ने वाला करतारपुर कॉरिडोर पिछले करीब एक साल से अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाया हुआ है। हालांकि समय-समय पर इस गलियारे को भारत विरोधी गतिविधियों की आशंकाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन भरोसेभरी एक बात सामने आई है कि ऐसा कुछ नहीं होने दिया जाएगा। रविवार को पाकिस्तान की तरफ से आश्वस्त हो चुके भारतीय विदेश मंत्रालय का यह बयान सामने आया है।

रविवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान के वाघा में करतारपुर गलियारे को लेकर अहम पहलुओं पर चर्चा के लिए दोनों देशों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा) एससीएल दास और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पीएआई-पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान) दीपक मित्तल ने किया। वहीं बैठक में पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल की अध्यक्षता में 20 पाकिस्तानी अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल शामिल रहा।

इस दौरान भारत ने डेरा बाबा नानक और आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ से संबंधित संभावित चिंताओं के बारे में अवगत कराया, जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी पर तटबंध सड़क या उसके किनारे पर पाकिस्तान द्वारा बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया था और इसे अंतरिम रूप से भी नहीं बनाया जाना चाहिए। इस बैठक के दौरान भारत की ओर से बनाए जा रहे पुल का विवरण सांझा किया गया और पाकिस्तान से उनकी तरफ से पुल बनाने का आग्रह किया गया। यह बाढ़ संबंधी चिंताओं को दूर करेगा और तीर्थ यात्रा को सुगम बनाएगा।

पाकिस्तान जल्द से जल्द से जल्द पुल बनाने के लिए सहमत है। भारत ने नवंबर 2019 में गुरु नानक देव जी की 550 वीं जयंती के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए गलियारे को चालू करने के लिए अंतरिम व्यवस्था करने की पेशकश की है। करतारपुर कॉरिडोर पर जारी बैठक के बीच पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि, ‘पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर को संचालित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध और सहयोग कर रहा है। 70% से अधिक गुरुद्वारा का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। हमें आज उत्पादक चर्चा होने की उम्मीद है।’

भारत की तरफ से रखी गई ये मांग

भारत ने पाकिस्तान से अनुरोध किया कि हमारी ओर से अपेक्षित उच्च मांग को देखते हुए 5,000 तीर्थयात्रियों को हर रोज गलियारे का उपयोग कर गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने की अनुमति दी जाए। साथ ही भारत ने पाकिस्तान से अनुरोध किया कि 10,000 अतिरिक्त तीर्थयात्रियों को विशेष अवसरों पर जाने की अनुमति दी जाए। केवल भारतीय नागरिकों को ही नहीं, बल्कि ओसीआई कार्ड रखने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों को भी करतारपुर सुविधा का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

भारत के दबाव के आगे झुका पाकिस्तान
इससे पहले करतारपुर कॉरिडोर वार्ता से पहले पाकिस्तान ने भारतीय दबाव में 10 सदस्यीय पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से खालिस्तान समर्थक गोपाल चावला को हटा दिया, लेकिन यहां भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और उसने उसमें दूसरे खालिस्तान समर्थक को शामिल कर लिया। करतारपुर कॉरिडोर की गतिविधियों में पीएसजीपीसी समन्वयक की भूमिका निभाने वाली है। लिहाजा भारत ने इसमें खालिस्तान समर्थक तत्वों की उपस्थिति पर आपत्ति व्यक्त की थी। अब भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हमने पुष्टि की है कि गोपाल सिंह चावला (पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) जैसे व्यक्तियों को उन जगहों से हटा दिया गया है, जिसको लेकर हमें आपत्ति है।

क्यों है करतारपुर कॉरिडोर की महत्ता
भारत-पाकिस्तान सीमा के साथ करतारपुर मार्ग पंजाब में गुरदासपुर से तीन किलोमीटर दूर है। एक बार खुलने के बाद यह सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान के करतारपुर में ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब तक सीधी पहुंच की अनुमति देगा, जहां गुरु नानक देव का 1539 में निधन हो गया था। सूत्रों ने कहा कि करतारपुर गलियारे पर काम 31 अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है, जो गुरु नानक देव की 550वीं जयंती से पहले है। यह गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर साहिब को गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक मंदिर से जोड़ेगा और भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के वीजा-मुक्त आवागमन की सुविधा प्रदान करेगा, जिन्हें सिख संस्थापक गुरु नानक देव द्वारा 1522 में स्थापित करतारपुर साहिब जाने की अनुमति लेनी होगी।

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