Sunday, September 19, 2021
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बरसात के मौसम में गंदा पानी और दूषित भोजन फैलाते हैं ये बीमारियां

बरसात के मौसम में जल-निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण पीने का पानी दूषित हो जाता है। इन दिनों मक्खियां भी बहुत तेजी से संक्रमण फैलाती हैं। गंदे पानी और दूषित भोजन की वजह से लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं परेशान करती हैं

जब भी बारिश का जिक्र होता है तो सभी को सबसे पहले गर्मागर्म चाय-पकौड़ों की याद आती है पर इस मौसम में सेहत का ध्यान रखना और ज्यादा जरूरी है क्योंकि वातावरण में मौजूद नमी मच्छर और बैक्टीरिया के कारण कई तरह की बीमारियां परेशान करती हैं।

वायरस की वजह से होने वाले हेपेटाइटिस नामक लिवर संक्रमण के कई प्रकार हैं, पर बरसात के मौसम में दूषित खानपान के कारण सबसे ज्यादा हेपेटाइटिस ए और ई की समस्या होती है। आम बोलचाल की भाषा में इसे जॉन्डिस या पीलिया भी कहते हैं।

लक्षण

बुखार, कमजोरी, भोजन में अरुचि, जी मिचलाना, आंखों, त्वचा और यूरिन की रंगत में पीलापन आदि।

जांच एवं उपचार

लिवर फंक्शन टेस्ट और वायरल सेरोलॉजी के जरिए जॉन्डिस की पहचान हो जाती है। संक्रमण होने के 15 से 45 दिनों के बाद व्यक्ति में इसके लक्षण नजर आते हैं। हालांकि उपचार के बाद इस समस्या का समाधान हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति को घी-तेल, मिर्च-मसाले से दूर रहने और बेडरेस्ट की सलाह दी जाती है। उपचार के लगभग 15 दिनों बाद व्यक्ति पूर्णतः स्वस्थ हो जाता है, लेकिन उसके बाद भी खानपान के मामलों में संयम और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।

2. टाइफाइड

यह सल्मोनल्ला एंटेरिका सेरोटाइप टाइफी नामक बैक्टीरिया की वजह से फैलने वाला गंभीर संक्रामक रोग है। दरअसल संक्रमित व्यक्ति के मल में भी यह बैक्टीरिया जीवित रहता है। खुले में शौच की आदत और सीवेज सिस्टम की व्यवस्था दुरुस्त न होने की वजह से यह लोगों को भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह बैक्टीरिया महीनों तक जीवित रहता है और बहुत तेजी से फैलता है। इसी वजह से संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ होने में कम से कम दो सप्ताह का समय लगता है।

लक्षण

सिर और पूरे शरीर में दर्द, बुखार, खांसी, लूज मोशन, भोजन में अरुचि आदि।

उपचार

पुराने समय में इसे मियादी बुखार कहा जाता था यानी यह अपनी निश्चित अवधि पूरी करने के बाद ही दूर होता है। हालांकि अब एंटीबायोटिक्स की मदद से लगभग दो सप्ताह के बाद यह समस्या दूर हो जाती है।

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