Tuesday, September 28, 2021
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होम लोन लेने का यह है सही समय

हाल ही में आई RBI की क्रेडिट पॉलिसी लगभग उम्मीद के मुताबिक ही रही। रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। एक्सपर्ट मदन सबनवीस के मुताबिक कर्ज लेने वालों के लिए यह स्थिति बेहतर है। जिनकी कर्ज पर नया घर खरीदने की इच्छा है वे जल्द योजना बनाएं, क्योंकि अब ब्याजदर कम होने की संभावना कम है और भविष्य में यह बढ़ सकती है। बैंक भी पिछले साल दिए गए मोरेटोरियम के बाद NPA स्तर बढ़ने से रिटेल लोन देने में काफी सावधानी बरत रहे हैं।

फिक्स्ड और फ्लोटिंग, दोनों प्रकार के होम लोन की ब्याज दरों के अपने अपने फायदे व नुकसान हैं। जब यह होम लोन पर ब्याज दरों के बीच चयन करने की बात आती है, तो वह चुनें जो आपकी जरूरत के हिसाब से सही हो।

फिक्स्ड रेट होम लोन: फिक्स्ड ब्याज दरों के मामले में, लोन की ब्याज दर पूरी भुगतान अवधि में समान रहती है और इसलिए ही आपके लोन की EMI भी पूरी लोन भुगतान अवधि के दौरान समान रहती है।

फायदे

इस होम लोन की दर स्थिर रहती है, आपको ठीक-ठीक पता होगा कि लोन के लिए आपको कितना ब्याज देना पड़ता है, इससे आपको लोन भुगतान की योजना बनाने में मदद मिलती है।

फिर से, चूंकि दर पूरी लोन अवधि के दौरान समान रहती है, तो यदि लोन अवधि के दौरान किसी भी समय बैंक की ब्याज दर बढ़ती है तो भी आप सुरक्षित रहते हैं।

नुकसान

फिक्स्ड ब्याज दर आमतौर पर फ्लोटिंग रेट ब्याज दर से 1 से 2.5% तक अधिक होती है।

लोन अवधि के दौरान किसी भी समय अगर बैंक की ब्याज दरें कम होती हैं तो आपके लोन की दरें अपरिवर्तित रहेगी, जिससे आपको रेट्स गिरने का फायदा नहीं मिलेगा ।

फ्लोटिंग रेट होम लोन: फ्लोटिंग के मामले में, आपके लोन की ब्याज दर घटती और बढ़ती रहती हैं। ये ब्याज दरें बेंचमार्क दर में परिवर्तन के अनुसार कई फैक्टर्स पर निर्भर होती है जैसे कि RBI की नीतियां और अन्य बाहरी फैक्टर।

फायदे

फ़्लोटिंग ब्याज दर होम लोन फिक्स्ड ब्याज दर की तुलना में सस्ती होती है।

RBI के नियमों के मुताबिक, फ्लोटिंग रेट होम लोन लेने वाले व्यक्तियों को कोई प्री-पेमेंट या फोरक्लोज़र फीस नहीं देनी होती है।

नुकसान

फ्लोटिंग रेट होम लोन के साथ एकमात्र समस्या यह है कि इसकी EMI ब्याज दर में बदलाव के साथ बदल जाती है, जो आपके मासिक बजट में में परेशानी पैदा कर सकती है।

आपको कितना लोन मिल सकता है?

आमतौर पर बैंक कुल मासिक आय का 40 प्रतिशत लेने वाले के व्‍यक्तिगत खर्च के रूप में मानती है, इस प्रकार से शेष बची राशि के आधार पर लोन उपलब्ध करवाती है। जैसे किसी व्यक्ति की आय 60,000 रूपए प्रति माह है, तो बैंक मानती है, कि जीवन यापन में उसके 25,000 रूपए व्‍यय हो जाते हैं। यदि उस व्यक्ति के अन्य लोन चुकाने में 20,000 रूपए खर्च हो जाते है, तो बैंक केवल शेष बची राशि 15,000 रूपए को ही पात्रता राशि के रूप में स्वीकार करती है |

होम लोन का फार्मूला कुछ इस तरह से होता है :

होम लोन की पात्रता = मासिक बचत/बराबर मासिक किस्‍त (EMI) प्रति लाख x एक लाख रुपए। अगर आप एक लाख का लोन लेते है, जिसका टैन्योर 20 वर्ष है, इस पर आपको 10 प्रतिशत ब्‍याज देना होता है, तो आपकी EMI लगभग 965 रूपए होती है। यदि फॉर्मूले के अनुसार देखे तो पात्रता 15,000/965 x 1 लाख रु. = 15.54 लाख रु. होती है |

होम लोन पर अधिकतम है 3.5 लाख रुपए की छूट

सेक्शन 80E और 80EEA के तहत ब्याज भुगतान के लिए कटौती इनकम टैक्स सेक्शन 24b के तहत उपलब्ध 2 लाख रुपए की कटौती के अतिरिक्त है। इन कटौती का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, धारा 24 के तहत 2 लाख रुपए की कटौती का लाभ पहले लेना चाहिए। आप होम लोन पर ब्याज के लिए कुल 3.5 लाख रुपए की कटौती का दावा कर सकते हैं।

जॉइंट होम लोन के मामले में, दोनों लोन लेने वाले व्यक्तियों को 80C के तहत 2 लाख रुपए तक के ब्याज भुगतान पर टैक्स कटौती लेने का अधिकार है। 80EE / 80EEA के तहत टैक्स छूट भी लेना भी इसके तहत लिया जा सकता है।

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