Sunday, September 19, 2021
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गंभीर मसला : पाकिस्तान में हजारों हिंदुओं की अस्थियों को गंगा प्रवाहन का इंतजार, दुबई के कारोबारी सलारिया बने परिवारों का सहारा

पाकिस्तान में हिंदू मान्यता के हजारों लोगों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित किए जाने के इंतजार में हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जहां यह बेहद जरूरी क्रिया है, वहीं इस क्रिया को पूरा करने में उनके परिजनों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें वीजा नहीं मिलना, दोनों देशों के बीच की तल्खी और संबंधित परिवारों की आर्थिक हालत इनमें बड़ी दुविधाएं हैं। इन परिवार का सहारा बन इनके प्रियजनों की अस्थियां गंगा में विसर्जित करने की इच्छा पूरी करने का बीड़ा भारतीय मूल के दुबई के कारोबारी जोगिंदर सिंह सलारिया ने उठाया है।

पहल चैरिटेबिल ट्रस्ट (पीसीटी ह्यूमैनिटी) के संस्थापक जोगिंदर सिंह सलारिया गुरदासपुर जिले के गांव ख्यालां से ताल्लुक रखते हैं। उनका दुबई में बड़ा कारोबार है, जिसमें भारत-पाकिस्तान समेत कई देशाें के लोग काम करते हैं। सलारिया भले ही दुबई में रह रहे हैं, पर उनका मन हमेशा पंजाब में ही रहता है। इसी के चलते वह अक्सर यहां आते रहते हैं। हाल ही में तीन दिन के लिए गांव आए सलारिया ने अपने घर पर ही हेल्थ चेकअप कैंप और लंगर का आयोजन किया। इस कैंप से 400 लोगों ने मदद ली, जिन्हें दवाइयां वगैरह भी ट्रस्ट की तरफ से दी गई। इस दौरान सलारिया ने एक बेहद अहम मसले के बारे में विस्तार से बात की।

सलारिया बताते हैं पाकिस्तान में हिंदू मान्यता के हजारों लोगों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित किए जाने के इंतजार में हैं। कराची व अन्य अल्पसंख्यक इलाकों में विभिन्न शहरों में स्थित श्मशान घाट में वर्ष 2009 से अब तक हजारों हिंदुओं की अस्थियां पोटलियों में, कलशों में रखी हैं, पर इन्हें विसर्जित नहीं किया जा सका। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जिंदगी का सफर पूरा कर चुके इन हिंदुओं के परिजनों की चाहत है कि उनके फूल (अस्थियां) पवित्र गंगा नदी में प्रवाहित कर सकें, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो रहा।

सलारिया की मानें तो उन्होंने पाकिस्तान में मृतक हिंदुओं के परिजनों से संपर्क किया है। वह चाहते हैं उन सभी की अस्थियों को भारत लाकर गंगा जी में प्रवाहित करवाया जाए। उनकी आत्मिक शांति के लिए पाठ वगैरह करवाया जाए। हमारी कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके यह पुण्यकर्म पूरा हो सके, कर दिया जाए। सरकारों से भी अपील की गई है लोगों को कानून में थोड़ी ढील दी जाए। जिस तरह सिख भावनाओं का मान रखते हुए करतारपुर कॉरिडाेर का निर्माण किया है, ठीक उसी तरह हिंदू भाई-बहनों की आत्मिक शांति आर उनके परिवारों की भावनाओं को भी सिरे चढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाए जाने की जरूरत है।

दिक्कत कहां आ रही है, इस बात के जवाब में सलारिया बताते हैं कि इसमें तीन तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं। एक तो बहुत सारे परिवारों की आर्थिक हालत इसमें आड़े आ रही है, दूसरा दोनों देशों के बीच चलती रहती तकरार के चलते लोगोें के मन में डर की भावना है कि अगर पाकिस्तान से भारत आएंगे तो किसी तरह की कोई परेशानी खड़ी न हो जाए। इसके अलावा तीसरी बड़ी दिक्कत काफी लोगों को वीजा की है। दोनों देशों के हाई कमिशन के बीच कई तरह की उठा-पटक चलती रही है। दोनों देशों की सरकारों को इस दिशा में एक सराहनीय कदम उठाना चाहिए।

उधर, इस बार में जालंधर में रह रहे भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पंजाब प्रधान सन्नी शर्मा का कहना है कि इस अति संवेदनशील मुद्दे को प्रमुखता के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखा जाएगा और बहुत जल्द ही पाकिस्तान में लॉकर्स में रखी हिंदू भाई-बहनों की अस्थियों को भारत लाकर हरिद्वार में गंगा जी में प्रवाहित किया जाएगा। दूसरी ओर एक सवाल यह भी दिल-ओ-दिमाग को झंझोड़ देने वाला है कि अगर इन परिवारों को बरसों से न्याय का इंतजार है तो हिंदुत्व की राजनीति करने वाली भाजपा को अब तक इस मुद्दे की भनक क्यों नहीं लगी। अब से पहले क्यों भाजपा या इससे पहले की सरकारों ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।

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