Sunday, September 26, 2021
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उपलब्धि : पंजाब यूनिवर्सिटी की तीन छात्राओं का एचसीएस ज्युडिशरी में चयन; एक के पिता एसडीओ, दूसरी किसान की बेटी और तीसरी की आर्मी बैकग्राउंड

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ीं तीन छात्राओं ने एचसीएस ज्युडिशरी क्लियर किया है। श्वेता शर्मा ने हरियाणा ज्युडिशरी एग्जाम में पहला रैंक हासिल किया है। श्वेता ने पहली कोशिश में ही हरियाणा समेत चार राज्यों में हुई परीक्षा को पास किया है। वहीं अंजली नरवाल ने हरियाणा ज्युडिशरी एग्जाम में 9वीं रैंक हासिल की। साल 2018 में उन्होंने पीसीएस ज्युडिशरी का एग्जाम भी क्लियर किया था। तब से वह पंजाब के मोहाली में ट्रेनिंग कर रहीं हैं। रवनीत ने पहली बार में ही इस एग्जाम को क्लियर कर अपने दादा के सपने को पूरा किया।

अंजली नरवाल।

 

पढ़ाई भी की और सोशल मीडिया पर भी रहीं एक्टिव

25 साल की श्वेता शर्मा पंजाब के रोपड़ की रहने वाली हैं। उन्होंने पीयू से ही लॉ की पढ़ाई की है। बताती हैं कि  सारा सारा दिन पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ये एग्जाम दिए थे। उन्होंने अपने नोट्स अच्छे से बनाकर ही टॉपिक क्लियर किए थे। वह लगातार पढ़ाई करती थीं और बीच में ब्रेक लेकर सोशल मीडिया पर एक्टिव भी रहती थीं। श्वेता के परिवार में किसी ने भी वकालत की पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने अपनी बहन के साथ वकालत की पढ़ाई शुरू की थी। पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ करने के बाद उन्हाेंने पिछले साल मार्च 2019 में यह एग्जाम दिया था। अप्रैल में नतीजे तो आए, पर 107 सीटों में से केवल नौ आवेदक सिलेक्ट होने के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था। उन 9 में वह खुद शामिल थीं। सेवामुक्त जज जस्टिस एके सिकरी की जांच के बाद आवेदकों को 30-30 ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। इसके बाद 27 आवेदक सिलेक्ट हुए। पर इसके लिए उन्हें 9 महीने का इंतजार करना पड़ा। श्वेता के पिता रोपड़ थर्मल प्लांट में एसडीओ हैं।

रवनीत।

अंजली सुप्रीम कोर्ट में सेवा देना चाहती हैं
अंजली नरवाल ने बताया- पीसीएस ज्युडिशरी का एग्जाम क्लियर करने के बाद ही उन्होंने हरियाणा ज्युडिशरी के लिए भी तैयारी शुरू की और 2019 में एग्जाम दिया। वह पिछले 3-4 साल से इसकी तैयारी कर रहीं थी। उनका सपना सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं देने का है। अंजली ने एलएलबी और एलएलएम में भी टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल किया। अंजली के पिता सुभाष नरवाल खेती करते हैं। पानीपत के रहने वाले हैं और बेटी के करियर को देखते हुए उन्होंने 9-10 साल पहले ही बेहतर कोचिंग और एजुकेशन के लिए उसे चंडीगढ़ भेज दिया था। इससे पहले अंजली ने यूजीसी नेट और जेआरएफ भी पहले ही अटेंप्ट में क्लियर किया था।

श्वेता ने पहली कोशिश में ही हरियाणा समेत चार राज्यों में हुई परीक्षा को पास किया ह

रवनीत ने दादा के सपने को बनाया अपना
रवनीत के दादा बलदेव सिंह रिटायर्ड आईपीएस हैं। इन्हीं के सपने को अपना सपना बनाकर रवनीत ने कानून की पढ़ाई और फिर ज्युडिशरी की तैयारी की। यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआईएलएस) से एलएलबी की और फिर सिंबायॉसिस लॉ स्कूल पुणे से एलएलएम में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। यूनिवर्सिटी में चुनाव हो, विमर्श या कोई अन्य एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज- रवनीत ने मूट कोर्ट और डिबेट जैसे कंपटीशन के अलावा बाकी सभी से दूरी बनाए रखी, ताकि ज्युडिशरी की तैयारी साथ-साथ चलती रहे। कर्नल वरिंदर सिंह और होम मेकर रजनी की इस बेटी का कहना है- उनके परिवार में ज्यादातर लोग आर्मी बैकग्राउंड से हैं। वह सेंट एन्स कॉन्वेंट स्कूल सेक्टर 32 और गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 16 की स्टूडेंट रही हैं।

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