Friday, September 24, 2021
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छत्तीसगढ़ : आज हरेली तिहार, पहली बार प्रदेश सरकार भी इसे मनाएगी

रायपुर . राज्य बनने के बाद पहली बार हरेली को राज्य सरकार एक उत्सव के रूप में मना रही है। इस उत्सव पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने निवास से बैलगाड़ी पर सवार होकर निकलेंगे। राज्य के पहले पारंपरिक त्यौहार हरेली की शुरुआत भूपेश बघेल राजधानी रायपुर में करेंगे, जहां पर वे सीएम हाउस से बैलगाड़ी पर सवार होकर संस्कृति विभाग तक जाएंगे। वहां वे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर बिलासपुर जाएंगे।

इस उत्सव के लिए प्रदेश के सभी मंत्रियों आैर प्राधिकरणों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग आैर कांग्रेस संस्कृति प्रकोष्ठ ने हरेली त्यौहार के लिए तैयारी पूरी कर ली है। पहली बार भव्य रूप से मनाए जाने के साथ ही सीएम बघेल ने हरेली पर छुट्टी की घोषणा की है। यह पहला मौका होगा, जब हरेली के उत्सव में ग्रामीणों व किसानों के साथ सरकार शामिल होगी। त्यौहार की शुरुआत सुबह 9 बजे सीएम हाउस से होगी।

यहां पर सजी-धजी तीन बैलगाड़ियों पर सवार होकर सीएम बघेल आैर उनके मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य निकलेंगे। इस दौरान 50 गेड़ी की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 डांस ग्रुप के अलावा हरी साड़ी में सज-धजकर 50 महिलाएं भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी।

सीएम ने कहा: हमन अपन संस्कृति ल कइसे बचाबो : मुख्यमंत्री बघेल ने हरेली तिहार पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समय की चुनौती है कि हम अपनी संस्कृति को बचाएं। सीएम ने छत्तीसगढ़ी में कहा है कि छत्तीसगढ़ के सब्बो निवासी मन ला हरेली तिहार के बहुत बहुत बधाई। हमर छत्तीसगढ़ के कृषि, संस्कृति के अनुसार हरेली हा पहली तिहार ए। गांव-गंवई के जिनगी मा खेती के स्थान महतारी असन होथे। खेती हा महतारी असन हमर भरन पोसन करथे। एखरे सेती सावन के अमावस के ए तिहार हा जन जन के जिनगी से जुड़ जथे।

हरेली हा हमर धरती माता के हरियाली के संदेस लेके आथे, अउ संग में हमर संस्कृति के संदेस घलो लेके आथे। हमर सामने ए समय चुनौती हे कि हम अपन संस्कृति ला कइसे बचाबो। आप मन के सरकार हा इही बात ला सोच के हरेली तिहार के छुट्टी देके फैसला करीस हे। आवव, हम अपन परंपरा ला, नवा जीवन देबर हरेली ला खूब धूम धाम से मनावन। गोठान के साफ सफाई करन। गऊ माता अउ पसुधन के जतन करन. नांगर, रापा, कुदारी के पूजा करन अउ गुड़-चीला के भोग चढ़ावन , लइका-जवान मन गेंड़ी चढ़ैं।

गांव देहात के पारंपरिक खेल कूद के आयोजन करन. हरेली के रंग ला उत्साह ले भरना हे । मुख्यमंत्री ने कहा भाई बहिनी अउ सब्बो सियान मन से मनुहार करत हंव कि आवव एक नवा सुरुआत करन अउ हरेली ला हम अपन बर अउ नवा पीढ़ी बर छत्तीसगढ़ के संस्कृति के पहिचान बनावन. हमन छत्तीसगढ़ म नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी योजना सुरु करे हन, उखरो उद्देस्य इही हे. मोला विस्वास हे कि इही योजना हा छत्तीसगढ़ के चारो चिन्हारी ला फेर से जीवन दीही अउ हम सबके सपना साकार होही।

यह है महत्व  : छत्तीसगढ़ में त्यौहारों की शुरुआत हरेली से होती है। इस दिन किसान खेती में उपयोग होने वाले सभी औजारों की पूजा करते हैं। गाय-बैलों की भी पूजा की जाती है। इस दिन कुलदेवता और ग्राम देवता की भी पूजा की जाती है। गेंड़ी सहित कई तरह के पारंपरिक खेल का आयोजन किया जाता है। इस दिन गाय-बैलों को बीमारी से बचाने के लिए बरगंडा व नमक खिलाया जाता है।

दरवाजे पर लगाते हैं लोहे की कील, इसका वैज्ञािनक महत्व भी : बारिश के दिनों का संक्रमण न फैले, इसलिए दरवाजे व वाहनों पर नीम की पत्तियां लगाते हैं। लोहार घर की चौखट पर कील गाड़ते हैं, जिससे घर के सदस्य अनिष्ट से दूर रहें। वैज्ञानिकों का मानना है कि लोहे की कील टिटनेस के कीटाणुओं से बचाती हैं।

हाईकोर्ट में नहीं रहेगी छुट्‌टी : बिलासपुर हाईकोर्ट और निचली अदालतों में हरेली पर गुरुवार को छुट्टी नहीं रहेगी।

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