Friday, September 17, 2021
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दो आरोपी 9 महीने से पेश नहीं हुए, जज ने तिहाड़ जेल के सुपरिंटेंडेंट को बुलाया

चंडीगढ़. पिछले साल देश में हजारों करोड़ों का बिटकॉइन घोटाला सामने आया था। चंडीगढ़ पुलिस ने भी कुछ लोगों पर इस घोटाले में केस दर्ज किया था। लेकिन एक साल बाद भी चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इस केस का ट्रायल शुरू नहीं हो सका है।

इसका कारण ये है कि केस के मुख्य आरोपियों को चंडीगढ़ पुलिस 9 महीने से डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश नहीं कर सकी है। केस में शामिल दो आरोपी विवेक भारद्वाज और पंकज अदलखा को आखिरी बार 22 अक्टूबर 2018 को पुलिस ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट(सीजेएम)की कोर्ट में पेश किया था लेकिन तब से इनके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट तो जारी हो रहे हैं, लेकिन वे कोर्ट में नहीं आ पा रहे हैं।

ये आरोपी इस समय तिहाड़ जेल दिल्ली और पुणे की सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन्हें पेश करने के लिए अक्टूबर 2018 से कोर्ट की तरफ से प्रोडक्शन वारंट जारी किए जा रहे थे लेकिन जब इन्हें पेश नहीं किया गया तो सीजेएम अभिषेक फुटेला की कोर्ट ने तिहाड़ जेल के सुपरिटेंडेंट को कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस कर दिया।

इसके अलावा कोर्ट ने पुणे जेल के सुपरिटेंडेंट को विवेक भारद्वाज को पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट भेजा। तिहाड़ जेल की तरफ से कोर्ट में बताया गया था कि विवेक भारद्वाज को पुणे जेल में ट्रांसफर कर दिया गया है। बिटकॉइन घोटाले के मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज, उसके भाई विवेक भारद्वाज, गेन बिटकॉइन कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर पंकज अदलखा और हेमंत भोपे को सबसे पहले पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

इसके बाद ये चारों अलग-अलग राज्यों की पुलिस कस्टडी में रहने के बाद पिछले साल चंडीगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़े थे। इससे पहले चंडीगढ़ पुलिस ने संचित अलाघ और राजेश कुमार को गिरफ्तार किया था। उन्होंने पुलिस पूछताछ में अमित भारद्वाज और अन्य आरोपियों की मिलीभगत का खुलासा किया था।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि संचित और राजेश ने अलग-अलग कंपनियों के नाम से बैंक खाते खोले हुए थे। ये कंपनियां केवल कागजों में ही चल रही थी। मामले के शिकायतकर्ताओं ने इन फर्जी कंपनियों के नाम पर खुले बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए थे।

यह है मामला: सेना से रिटायर्ड कर्नल ने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि 2016 में उनकी मुलाकात अमित और अजय भारद्वाज समेत अन्य से विशाल कादियान ने दुबई में करवाई थी। उन्होंने शिकायतकर्ता को बिटकॉइन में पैसा लगाकर कुछ ही समय में बहुत तगड़ा मुनाफा कराने का लालच दिया था। उन्होंने बिटकॉइन खरीद इसे माइनिंग के क्षेत्र में लगाने की बात कही थी। इसके बाद रिटायर्ड कर्नल ने अमित और अजय के खातों में डेढ़ से दो करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। लेकिन, जब मार्च में पुणे पुलिस ने अमित और अजय को बिटकॉइन से जुड़े 30 हजार करोड़ रुपए के घोटाले में गिरफ्तार किया तो रिटायर्ड कर्नल को भी खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ। उन्होंने ऑनलाइन अपने बिटकॉइन की जानकारी ली तो उनके खाते में एक भी बिटकॉइन नहीं था। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी।

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