Saturday, September 25, 2021
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एक दूल्हे के साथ दो दुल्हनों ने लिए फेरे:दिनेश ने एक साथ सीता और गीता के साथ लिए सात फेरे,

जिले के आनंदपुरी स्थित कडदा गांव में शनिवार रात काे एक अनाेखा विवाह हुआ। यहां एक दूल्हे ने एक साथ दाे दुल्हनों के साथ सात फेरे लिए। दाेनाें ही दुल्हनाें के परिजन भी शादी में शामिल हुए। सामान्य शादी की तरह इस शादी के कार्ड भी छपवाए गए थे और इस पर बाकायदा दाेनाें ही दुल्हनाें के नाम भी छपवाए गए थे।

आनंदपुरी कड़दा गांव में शनिवार रात को एक दूल्हे ने दो दुल्हनों संग शादी रचाई। युवक ने दोनों के साथ सात फेरे लिए।

एक साथ दो लड़कियों से शादी का राज्य में हला मामला

इस विवाह काे लेकर परिवार में उत्साह का माहाैल था। दूल्हे के सेहरे और दाेनाें दुल्हनाें के सिर पर ओढ़ाई चुनरी पर लाइटिंग की गई थी। यह अनूठी कडदा गांव के दिनेश पुत्र कमजी पटेल ने रचाई। एक साथ दाे लड़कियाें से शादी का यह राज्य में संभवत: पहला मामला है। दिनेश ने बरजडिया निवासी सीता और आंबा निवासी गीता से एक साथ शादी की। इस शादी में पूरा गांव शामिल हुआ। सोशल मीडिया पर शादी से जुड़े वीडियाे वायरल हुए ताे शादी चर्चा में आ गई।

बताया जा रहा है कि एक युवती काे दिनेश पहले ही नातरा कर घर ले आया था। जबकि दूसरी से सगाई के बाद शादी रचाई। इसमें दूल्हे और दाेनाें दुल्हनाें के परिजन भी शामिल हुए और वे खुश भी हैं। आदिवासी अंचल के ग्रामीण क्षेत्र में एक से ज्यादा पत्नी रखने की परंपरा है। इसके लिए महिला को पत्नी बनाकर नातरे भी लाया जाता है। सालों से चली आ रही इस परंपरा के कारण इसे समाज में गलत नहीं माना जाता है।

पेशे से ठेकेदार है दूल्हा

आनंदपुरी का कड़दा निवासी दूल्हा दिनेश पटेल, जो कि पेशे से एक संपन्न निर्माण कारीगर है। वह गुजरात क्षेत्र में ठेकेदारी के काम भी करता है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में विरोध हुआ तो शादी नहीं हो पाई, चूंकि अभी लॉकडाउन में दिनेश को ठेकेदारी संबंधित कार्य बंद है। ऐसे में उसने वर्षों बाद अघोषित रिश्ते को मजबूत करते हुए सामाजिक स्तर मान्यता देने के लिए विधि-विधान से विवाह किया।

दिनेश की शादी का कार्ड जिसमें दोनों दुल्हनों के नाम छपवाए गए थे।
दिनेश की शादी का कार्ड जिसमें दोनों दुल्हनों के नाम छपवाए गए थे।

 

इसलिए चट मंगनी पट ब्याह

पुष्ट सूत्रों की मानें तो क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के निर्देशन में पिछले दिनों आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों की एक बैठक हुई। इसमें कोरोना को लेकर सरकारी सख्ती और गाइडलाइन पर मंथन हुआ। यहां पर 25 अप्रैल के बाद सभी तरह के सामाजिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति बन गई। इस बीच दिनेश ने मौका पाकर आनन-फानन में विवाह की तैयारी की। साथ ही प्रतिबंध तिथि से एक दिन पहले विवाह की रस्म पूरी की।

बकायदा कार्ड भी छपाया

खास यह भी रहा कि युवक ने शादी को मान्यता दिलाने के लिए कार्ड भी छपाए। उसमें स्वयं के साथ युवतियों के पिता और गांव के नाम छपवाए। इतना ही लॉकडाउन के बीच जितना संभव हुआ। सभी मिलने वालों को कार्ड के माध्यम से निमंत्रण भी भेजा। कथित तौर पर युवक की ओर से कोरोना गाइड लाइन की पूरी पालना भी कराई गई। शायद यही कारण थे कि गांव के बहुत से लोग शादी में नहीं पहुंचे। इसकी एक वजह गांव में कुछ लोगों के कोरोना पॉजिटिव होना भी सामने आया है।

बिल्कुल हुआ है विवाह

गांव के पूर्व सरपंच एवं वर्तमान में सरपंच पति बापूलाल कटारा ने बताया कि नातरा प्रथा आदिवासी समाज का हिस्सा है। दिनेश ने भी इसी प्रथा के तहत दोनों युवतियों को पत्नी का दर्जा दे रखा था। शनिवार रात को उसने विवाह के माध्यम से रिश्तों को मुहर लगा दी है।

दक्षिण राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में नातरा प्रथा का चलन
दक्षिण राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर के साथ चित्तौड़गढ़ जिले के अधिकांश हिस्सों में नातरा प्रथा का चलन है। ये एक सामाजिक बुराई है, जिसमें बिन शादी किए युवक-युवती जिंदगी भर तक साथ रहते हैं। इस रिश्ते को कानूनी तौर पर मान्यता नहीं है, लेकिन समाज स्तर पर कुछ दण्ड के साथ इस बुराई को मान्यता दी जाती है। हकीकत में इस बुराई से कई बसे बसाए घर टूट जाते हैं। कई बार तो महिला परिवार, पति और बच्चों को तो कई बार युवक उसके परिवार को छोड़कर किसी और महिला के साथ हो जाता है।

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