Friday, September 24, 2021
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गुजरात : सिकलसेल की बीमारी : एक ही दिन उठी दो जवान बेटियों की अर्थी

सिलवासा. दानह के आंबोली में 24 घंटों में दो बहनों की रहस्यमय बीमारी से मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़ा हो गया है। एक ओर देश की सर्वश्रेष्ठ सरकारी अस्पताल का खिताब विनोबा भावे सिविल अस्पताल को प्राप्त होने के बावजूद प्रदेश में 50 फीसदी आदिवासी लोग सिकलसेल बीमारी से ग्रस्त हैं। ऐसे में कहीं न कहीं स्वास्थ्य के संबंधित विभागों की लापरवाही सामने आ रही है।

24 घंटों में दो बहनों की मौत
जानकारी के अनुसार आंबोली कारभारीपाडा में 24 घंटों में बड़ी बहन मनीषा गुलाब धोड़ी (22) और उसकी छोटी बहन ममता गुलाब धोड़ी (19) की मौत हो गई है। मनीषा 12वीं उत्तीर्ण होकर वेलुगाम में स्थित एक कंपनी में स्टोर इंचार्ज का काम करती थी। जबकि छोटी बहन ममता भी 12वीं उत्तीर्ण होने के बाद मनीषा के साथ ही काम करती थी, साथ ही बाहर से कॉलेज के पहले वर्ष की तैयारी भी कर रही थी। 26 नवंबर को दोनों बहनों को बुखार आया था और तबीयत अधिक खराब हो जाने पर 108 की मदद से दोनों को खानवेल सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से छोटी बहन ममता को सिलवासा के विनोबा भावे सिविल अस्पताल में रेफर किया गया। वहीं 27 नवंबर को बड़ी बहन मनीषा की भी हालत नाजुक हो गई जिसे सिलवासा अस्पताल में रेफर किया जा रहा था लेकिन बीच रास्ते में ही उसे खून की उल्टियां होने लगी। इसके बाद रास्ते ही में उसने दम तोड़ दिया। इसलिए उसे वापस खानवेल लाया गया।
पहली की अंत्येष्टि के समय ही दूसरी बहन की सूचना
दूसरे दिन 28 नवंबर की सुबह मनीषा का अंतिम संस्कार रखा गया। एक ओर आंबोली में मनीषा के शव को अग्निदाह दिया जा रहा था तभी सूचना मिली कि सिलवासा अस्पताल में भर्ती छोटी ममता की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद शाम के समय छोटी बहन ममता का भी अंतिम संस्कार किया गया। चौबीस घंटों में एक के बाद एक दोनों बहनों की मौत हो जाने के बाद परिवार पर मानो पहाड़ टूट पड़ा। इस घटना के बाद आंबोली सहित प्रदेश भर में शोक की लहर है।
दानह के सिविल अस्पताल को कई बार मिल चुका है राष्ट्रीय अवॉर्ड
दानह स्वास्थ्य विभाग कई राष्ट्रीय अवॉर्ड प्राप्त कर चुका है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के कार्यों पर सवाल उठना भी लाजिमी है। 28 नवंबर को आंबोली के कारभारी पाडा में रहने वाले गुलाब लहनु धोड़ी काे अपनी दो जवान बेटियों की श्मशान यात्रा एक ही दिन दो बार निकालने का समय आया। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 50 फीसदी आदिवासी लोग सिकलसेल की बीमारी से पीड़ित है। ऐसी बीमारी से ग्रसित मरीजों को कई जानलेवा तकलीफों का सामना करना पड़ता है। दोनों बहनें भी इसी बीमारी से पीड़ित होने की जानकारी मिली है। इस संदर्भ में स्वास्थ्य निदेशक डॉ दास से मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इससे दु:खद और क्या हो सकता है
मै मेरी दोनों बेटियों को 108 के जरिये खानवेल अस्पताल में ले गया जहां उन पर जरूरी इलाज नहीं हुआ। एक-दो घंटे तक उन्हें जमीन पर सुलाया गया। यहां का स्टाफ भी जरूरी जानकारी और जवाब नहीं देते। बड़ी बेटी मनीषा ने 27 नवंबर को जबकि छोटी बेटी ममता ने 28 नवंबर को दम तोड़ दिया। दोनों बेटियों को एक ही दिन दो बार अंतिम संस्कार करना पड़ा, इससे दु:खद क्या हो सकता है। हम मनीषा की शादी आने वाले साल में करने वाले थे। जिसे हमें अंतिम विदाई देनी पड़ी है। मेरी कुल 4 बेटियां है। ये दोनों बेटियां बड़ी थी, जबकि अन्य दो बेटियां छोटी है। – गुलाब लाहनु धोड़ी, मृतक बेटियों के पिता, आंबोली कारभारीपाडा
सिकलसेल खून की बीमारी से पीड़ित थी मनीषा
खानवेल अस्पताल में 26 नवंबर के दिन कारभारी पाडा की मनीषा और ममता धोड़ी को 108 के जरिए लाया गया था। जिसमें ममता की हालत नाजुक होने पर उसे तुरंत सिलवासा रेफर किया गया और मनीषा का इलाज यहीं पर चल रहा था। 27 नवंबर को मनीषा की हालत भी नाजुक हो गई तो उसे सिलवासा रेफर किया गया था, लेकिन बीच रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मनीषा के डेंगू के टेस्ट हमने दो बार किए थे। फिर पता चला कि मनीषा सिकलसेल खून की बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण खून के रक्त कण गोल आकार के स्थान पर दांतवाले आकार के होते है जो एक दूसरे के साथ जुड़ जाते है। जिसे लेकर अनेक तकलीफें होती है। दोनों बहनों के डेंगू टेस्ट निगेटिव आए थे लेकिन दोनों बहनों को वायरल फीवर था। – डॉ गणेश वरनेकर, प्रभारी, खानवेल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

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