Tuesday, September 28, 2021
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पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार की बदली तस्वीर, महज 5 सालों में पूरे हुए 700 प्रोजेक्ट

नई दिल्ली। सरकारी काम मतलब देरी, पिछले कई सालों से यही अवधारणी चली आ रही थी। लेकिन पिछले 5 सालों में ये बात बदली है और मोदी सरकार में सरकारी कामों में तेजी आई है। पिछले पांच सालों में करीब 700 प्रोजेक्ट ऐसे थे जो तय समय से पूरे हुए या फिर समय से पहले खत्म हो गए। इन प्रोजेक्ट में कई महत्वकांक्षी योजनाएं भी शामिल थी।

पीएमओ के सूत्रों के मुताबिक, एक घटना ने समय पर या समय से पहले प्रोजेक्ट को पूरा करने की पीएम मोदी की इच्छा को मिशन मोड में डाला। 12 जुलाई 2017 को पीएम मोदी के सामने एक लंबित योजना का मामला सामने आया। पीएम मोदी उस वक्त हैरान रह गए जब अधिकारियों ने उन्हें बताया कि, जिस प्रोजेक्ट की समीक्षा वो कर रहे हैं वो साल 1975 में पास हुआ था लेकिन अभी तक काम शुरु नहीं हुआ।

दरअसल, ये रेलवे प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल का था और पीएम मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली बैठक में इस प्रोजेक्ट के शुरु होने के बारे में जानकारी अपडेट करें। सबसे बड़ी बात है कि, ये एकमात्र प्रोजेक्ट नहीं था जो इतन समय से लंबित था, बल्कि सूत्रों के अनुसार बैठक में एक दर्जन राज्यों के दर्जनों मामले सामने आए जो पिछले 40 सालों से लंबित पड़ा था। अधिकतर प्रोजेक्ट रेलवे, पेट्रोलियम और सड़के से जुड़े थे।

मीटिंग में ये बात सामने आई कि, उस वक्त जो पैसे तय किए गए थे इन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए उसका खर्च अब 100 गुणा अधिक आएगा। पीएम मोदी ने सभी चीफ सेक्रेटरी से कहा कि, 10 सालों से पुराने लंबित पड़े प्रोजेक्ट की लिस्ट तैयार की जाए और सूचना दी जाए। इस बैठक के बाद ही पीएम मोदी ने पीएमओ में मीटिंग बुलाकर कहा कि, एक सिस्टम बनाया जाए जिसमें हर प्रोजेक्ट और योजना की डेडलाइन और उसे पूरा करने की दिशा  में किए जा रहे प्रयास के रिपोर्ट को हर हफ्ते पेश किए जाए।

जब पीएमओ में ऑनलाइन सिस्टम बना तो उसकी निगरानी खुद पीएम मोदी करने लगे। लंबित प्रोजेक्ट की लिस्ट बनाई गई और तीन रिमाइंडर के बाद उस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी खुद पीएमओ उठा लेता था। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर लगातार तीन रिमाइंडर पर हालात नहीं सुधरी तो पीएमओ ने रात 12 बजे प्रोजेक्ट हेड को हटा दिया।

2017 में बजट पेश होने के बाद 34 ऐसी योजनाएं थी जिनपर अमल नहीं हुआ था। उन सभी योजनाओं से जुड़े अधिकारियों को हटा दिया गया था। वहीं पीएमओ ने लेटर मॉनिटरिंग में ऐसे सिस्टम दिए कि, पीएम मोदी सीधे तौर पर मंत्री से फाइल या उससे जुड़े सवाल-जवाब का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

इसके साथ ही हर महीने की अंतिम हफ्ते में होने वाली प्रगति मीटिंग में सभी राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और दूसरे विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जुड़ते हैं। तमाम योजनाओं और प्रोजेक्ट को पूरा करने में राज्य सरकारों की भी अहम भूमिका होती है पीएम मोदी ने इस मीटिंग में उन्हें भी साथ में लिया। हालांकि शुरुआत में कुछ विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर राज्य सरकार के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया। लेकिन फिर बाद में ये नियमित रुप से होने लगी। इस मीटिंग के जरिए योजनाओं और प्रोजेक्ट के प्रगति के बारे में पता चला और उनमें आने वाली दिक्कतें सामने आई।

ये काम समय से आगे चल रहे हैं

देश के सभी गांवों को खुले में शौच करने से मुक्त करने का प्रोजेक्ट 2 अक्टूबर 2019 को पूरा होने का समय रखा गया था। अब ये प्रोजेक्ट सितंबर के महीने में ही पूरा हो जाएगा। 

उज्जवला योजना और हर घर बिजली देने का लक्ष्य भी समय से पहले पूरे किए गएं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी को घर देने का वादा 2022 तक पूरा करने का समय रखा गया था। इस लक्ष्य को 2020 तक पूरा करने की तैयारी है। 

5 सालों में 700 ऐसे प्रोजेक्ट थे जो 2014 के बाद शुरु हुए और 2019 से पहले पूरे हुए।

 

 

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