Tuesday, September 28, 2021
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जीका वायरस से बचने का अनूठा तरीका

कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच पुणे में जीका वायरस का खतरा 75 गांवों में मुंह बाए खड़ा है। प्रशासन ने इन गांवों में टीकाकरण को तेज करने का आदेश दिया है। इस बीच पुणे के बेलसर गांव ने जीका वायरस के खतरे को कम करने के लिए एक अनूठी पहल की है। पंचायत ने गांव की महिलाओं को 4 महीने तक प्रेगनेंसी से दूर रहने की सलाह दी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर उनकी काउंसलिंग कर रही है। साथ ही स्थानीय पुरुषों को फ्री में कंडोम बांटें जा रहे हैं।

बेलसर ग्राम पंचायत के लोग प्रशासन के इस फैसले से सहमत हैं।
बेलसर ग्राम पंचायत के लोग प्रशासन के इस फैसले से सहमत हैं।

गांव के सरपंच और स्वास्थ्य संगठन ने मिलकर महिलाओं को अगले 4 महीने तक गर्भवती होने से रोकने के लिए पुरुषों को कंडोम का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। पंचायत के उपसरपंच धीरज जगताप का कहना है कि जीका वायरस का सबसे अधिक खतरा गर्भवती महिलाओं को रहता है। जीका वायरस की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बेहद गलत असर पड़ने की आशंका रहती है। उसके दिमांग पर भी असर पड़ सकता है इसलिए हमने महिलाओं को अगले चार महीने तक गर्भवती होने से रोकने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम महिलाओं को घर-घर जाकर समझा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम महिलाओं को घर-घर जाकर समझा रही है।

पुरुष के वीर्य से ट्रांसफर हो सकता है जीका वायरस

जीका वायरस का पहला मरीज पुणे के बेलसर गांव में ही मिला था। यहां एक 55 वर्षीय महिला में वायरस की पुष्टि हुई थी। बेलसर गांव में केंद्र और राज्य की कई टीमें आकर जांच कर चुकी हैं। उपसरपंच धीरज जगताप का कहना है कि पुरुषों के ‘वीर्य’ में जीका वायरस मिलने की वजह से गांव ने यह फैसला लिया है। सुरक्षित यौन संबंध बनाने की वजह से संक्रमण महिलाओं में नहीं फैलेगा। पंचायत के मुताबिक, हेल्थ डिपार्टमेंट ने भी इस तरीके को कारगार बताया है।

मानसिक रूप से बच्चे को बीमार कर सकता है जीका

गांव के लोगों की जांच करने वाले डॉक्टर, भरत शितोले ने बताया कि जीका एडीज एजिप्टी मच्छर से फैलता है। गर्भवती महिलाओं को जीका होने का खतरा अधिक होता है। पुरुष के वीर्य में यह वायरस चार महीने तक जीवित रहता है। जीका बच्चे के मस्तिष्क के विकास को बाधित कर सकता है। यहां तक ​​कि समय से पहले प्रसव भी करा सकता है, इसलिए सावधानी रखना बेहद जरूरी है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे चार महीने तक गर्भधारण से बचें या कंडोम का इस्तेमाल करें। इसी वजह से ग्रामीणों को कंडोम बांटे जा रहे हैं।

1940 में मिला था पहला केस

जीका वायरस का पहला केस 1940 में युगांडा में मिला था। इसके बाद इस वायरस ने तेजी के साथ अफ्रीका के कई हिस्सों में अपने पैर पसार लिए। दक्षिण प्रशांत और एशिया के कुछ देशों को छूते हुए ये लैटिन अमेरिका तक पहुंच गया। ब्राजील में इसने अपना प्रकोप दिखाया था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये 2014 के फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान एशिया और दक्षिण प्रशांत की तरफ से आया होगा। हालांकि, इस दावे की पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।

क्या हैं लक्षण?

ये वायरस एडीज इजिप्टी नाम के मच्छर से फैलता है। ये वही मच्‍छर है जिसके कारण पीला बुखार, डेंगू व चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलती हैं। जीका, संक्रमित मां से सीधे नवजातों में फैलता है। ये वायरस ब्लड ट्रांसफ्यूजन व यौन संबन्धों से भी फैलता है। जीका को तुरंत पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षणों की व्याख्या सटीकता के साथ अब तक नहीं हुई है, लेकिन कहा जाता है कि मच्छरों के काटने के तीन से बारह दिनों के भीतर चार में से तीन व्यक्तियों में तेज बुखार, रैशेज, सिर दर्द और जोड़ों में तेज दर्द होने के लक्षण दिख सकते हैं।

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