Saturday, September 25, 2021
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BJP के दिग्गज नेता रामेश्वर पाटीदार का निधन, सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई घटाकर बचाई थी 2 लाख एकड़ जमीन

भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व सांसद रामेश्वर पाटीदार (82) का मंगलवार को हृदयाघात से उनके पैतृक गांव खलघाट में निधन हो गया। वे बाबूजी के नाम से मशहूर रहे। नर्मदा तट स्थित मुक्तिधाम में उनकी अंत्येष्ठि की गई। खरगोन-बड़वानी लोकसभा के 16 बार के कार्यकाल में 5 बार वे निर्वाचित हुए। लगभग 14 साल तक सांसद रहे।

पिछले दिनों पाटीदार के हाल जानने पहुंचे थे लोस व राज्यसभा सांसद।
  • खरगोन संसदीय सीट पर 5 बार निर्वाचित हुए, लगभग 14 साल सांसद रहे

सांसद गजेंद्र पटेल, पूर्व विधायक गजानंद पाटीदार सहित अन्य शामिल हुए। भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्रसिंह राठौर, पूर्व राज्य मंत्री व पाटीदार समाज अध्यक्ष बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि जनसंघ काल से आज तक पार्टी की नीति सिद्धांत से जुड़े रहे। सौभाग्य है कि उनके साथ काम करने का मौका मिला। उनके जाने से खाली जगह की भरपाई मुश्किल है।

भाजपा-कांग्रेस दोनों ने दी श्रद्धांजलि

मंत्री नरोत्तम मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव व पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने सोशल मीडिया में श्रद्धांजलि दी। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के जिला संयोजक अरुण पालीवाल बताते हैं विद्यार्थी जीवन में 1962 से जनसंघ के लिए प्रचार में जुटे।

गुजरात के सरदार सरोवर से डूब में जा रही क्षेत्र की दो लाख एकड़ कृषि भूमि आंदोलन के माध्यम से बांध की ऊंचाई कम करवाकर बचाई। 1975 में आपातकाल के विरोध में गिरफ्तार हुए व 19 माह जेल में रहे। किसान व वकील होकर तीन बार पार्टी जिलाध्यक्ष भी रहे। 7 बार लोकसभा चुनाव लड़े। इसमें 5 बार जीत दर्ज की।

राजनीति की पारी, 1977 में पहली बार चुने गए थे

लोस चुनाव में सुभाष यादव को 1977, 1989 व 1991 में व बोंदरसिंह मंडलोई को 1996 व 1998 में पराजित कर निर्वाचित हुए। निमाड़ में कृषि सुधार के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सहित निमरानी, कसरावद, खरगोन, सेंधवा में बड़े उद्योगों की स्थापना व क्षेत्र के 30 हजार आदिवासियों को नवाड़ के पट्टे दिलाने में भूमिका रही है। 1980 में उनके बुलावे पर अटल बिहारी बाजपेयी खरगोन आए थे। तब उन्होंने खंडवा-नरडाना रेल लाइन सर्वे की मांग उठाई। 1999 में रेललाइन के सर्वे के लिए मंजूरी मिली।

बाबूजी की गुमठी पर बैठते थे बंकिम जोशी

पूर्व विधायक स्व. बंकिम जोशी के साथ पार्टीगत वैचारिक मतभेद के बावजूद एक-दूसरे के प्रति पूरा सम्मान था। सुबोध जोशी बताते हैं पाटीदार पोस्ट ऑफिस चौराहा की तरफ से जब भी निकलते थे पत्रकार बाबूजी की गुमठी पर केंद्र की योजनाएं व क्रियान्वयन बताते व सलाह-मशविरा करते थे। उम्र का अंतराल होने के बावजूद संबंध पारिवारिक थे।

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