Monday, September 27, 2021
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यह कैसी सजा : प्रेम विवाह करने पर परिवार को समाज से किया बहिष्कृत, युवती की माैत के बाद शव तीन दिन मोर्चरी में पड़ा रहा, पुलिस ने किया अंतिम संस्कार

प्रतीकात्क तस्वीर
  • सादड़ी थाना इलाके के मांडीगढ़ गांव की घटना: 6 साल पहले युवक ने आबूराेड की युवती से प्रेमविवाह किया था, इससे नाराज पंचाें ने समाज से बहिष्कृत कर दिया था

सादड़ी थाना इलाके के मांडीगढ़ गांव में एक दंपती काे प्यार के बाद शादी करने काे समाज ने ऐसा गुनाह माना कि उनकाे 6 साल तक समाज से बहिष्कृत कर हुक्का-पानी बंद कर दिया। युवती की बीमारी में माैत हाेने के बाद 3 दिन तक समाज के लाेग उसका अंतिम संस्कार करने के लिए रजामंद नहीं हुए। ऐसे में युवती का शव पड़ा रहा। पुलिस के अधिकारियाें समेत अन्य लाेगाें ने अंतिम संस्कार करने के लिए काफी समझाइश का प्रयास किया, मगर काेई तैयार नहीं हाेने पर साेमवार काे पुलिस ने अन्य ग्रामीणाें के सहयाेग से उसका अंतिम संस्कार कराया।

पुलिस के अनुसार मांडीगढ़ में रहने वाला भंवरलाल (33) पुत्र रताराम भील गांव में ही रहता था। करीब दह साल पहले उसका आबूराेड में रहने वाली अपनी स्वजातीय युवती मधु पुत्री पूनाराम भील से प्यार हाे गया। बाद में दाेनाें ने समाज की मर्जी के बिना ही प्रेम विवाह कर लिया था। दाेनाें का प्रेम विवाह करना समाज के स्वयं-भू पंचाें काे काफी नागवार गुजरा। बाद में इन पंचाें ने पंचायती करते हुए दाेनाें काे समाज से बहिष्कृत करने का फरमान जारी कर दिया था। यहां तक उनके रिश्तेदाराें के यहां आने-जाने पर भी पाबंदी लगा दी थी।

कुछ दिन पहले मधु बीमार हो गई। इस पर उसका कुछ दिनाें तक स्थानीय स्तर पर उपचार कराने के बाद हालत गंभीर हाेने पर उसका पति उसे पाली के बांगड़ अस्पताल में उपचार के लिए लेकर आया। यहां पर उपचार के दौरान शुक्रवार काे युवती की माैत हाे गई थी। चाैंकाने वाली बात ताे यह है कि अंतिम संस्कार के दाैरान कई पुलिस अधिकारी भी मांडीगढ़ गांव में पहुंचे थे, इसके बाद भी समाज का निर्णय हाेने का हवाला देते हुए मृतक परिवार के समाजबंधु नहीं पहुंचे।

युवती बीमार हुई तो पाली में उपचार कराया, यहां दम ताेड़ दिया, समाज का फैसला हाेने से लाेगाें ने अंतिम संस्कार से कन्नी काटी

पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए गिड़गिड़ाता रहा, काेई नहीं पसीजा: शनिवार सुबह उसका पति भंवरलाल अपनी पत्नी का शव मांडीगढ़ लेकर आया था। इसके बाद अंतिम संस्कार करने के लिए वह समाज के पंचाें के पंचाें समेत अन्य प्रतिनिधियाें के आगे गिड़गिड़ाता रहा। समाज से बहिष्कृत होने के कारण परिवार के अन्य लोग व समाज के लोग अंतिम संस्कार के लिए नहीं आए। इस कारण शव पड़ा रहा। भंवरलाल बार-बार समाज के लोगों को मनाता रहा, लेकिन कोई नहीं आया। अकेला होने के कारण वह अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहा था|

सुबह पुलिस पहुंची, अन्य ग्रामीणाें काे एकत्रित किया, फिर अंतिम संस्कार
आखिरकार सोमवार सुबह मृतका का पति शव घर में रखकर पुलिस थाने पहुंचा और शव के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगी। इस पर एएसआई मूलाराम मीणा की अगुवाई में पुलिस दल माैके पर पहुंचा। बाद में पूर्व सरपंच केसाराम डांगी के अलावा ईगल रेस्क्यू दल के जितेन्द्रसिंह राठौड़, मांगीलाल, छगन लुहार सहित अन्य ग्रामीणों की मदद से अंतिम संस्कार करवाया गया।

पंचाें के डर से दंपती ने छाेड़ा गांव, केरल में कमाने लगे, फिर भी पीछा नहीं छोड़ा
बताया जाता है कि दाेनाें ने वर्ष 2015 में प्रेम विवाह किया था। इससे नाराज हाेकर पंचाें के फैसलाें के बाद यह दंपती काफी भयभीत हाे गया था। रिश्तेदाराें पर भी पाबंदी लगाने के बाद यह परिवार सामाजिक प्रताड़ना सह रहा था। बाद में यह दंपती समाज के लोगों के डर से कमाने के लिए बाहर चला गया। पता चला है कि वे केरल में ही रहकर अपनी आजीविका चला रहे थे। उनके चार संतानें भी है।

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