Tuesday, September 21, 2021
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मप्र : कहां गया व्यापमं घोटाले का सुराग देने वाला पत्र, न शिवराज काे मालूम न जांच एजेंसियाें काे

भाेपाल . व्यापमं महाघाेटाला उजागर करने वाले गुमनाम पत्र का कोई छोर नहीं मिल रहा है। उस पत्र की जानकारी न ताे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान काे है और न ही जांच एजेंसियों काे। भास्कर ने जब शिवराज सिंह से पूछा कि आखिर वह गुमनाम पत्र कहां गया? तो शिवराज ने कहा कि यह अहम बात नहीं है कि वह पत्र कहां है। महत्वपूर्ण यह है कि उसी पत्र के आधार पर व्यापमं घोटाले के सुराग मिले।

इसी आधार पर उन्होंने फोन पर तत्कालीन इंदौर आईजी विपिन माहेश्वरी को बताया था कि पीएमटी में कुछ गड़बड़ चल रहा है। माहेश्वरी वर्तमान में पुलिस मुख्यालय में एडीजी शिकायत के पदस्थ हैं। वे भी इस पत्र के सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं। शिवराज ने मंगलवार काे दावा किया कि उनकी सूचना पर ही इंदौर पुलिस ने एक-दो संदिग्धों को पकड़ा। उनसे हुई पूछताछ में पता चला था कि यह बड़ा नेटवर्क है। इसके बाद मामले की जांच एसटीएफ को दे दी गई।

सीबीआई का तर्क… हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर व्यापमं मामलों में एफआईआर की थी। हमने सिर्फ वही केस लिए जो पहले से पंजीबद्ध थे। हमने एसटीएफ से शिकायतें नहीं ली थीं और न ही हमें किसी भी तरह का कोई पत्र प्राप्त हुआ।

 जानिए गुमनाम पत्र पर किसने क्या कहा

मुझे एक पत्र मिला था, जिसके संबंध में मैंने तब इंदौर के आईजी माहेश्वरी को बताया था : उस पत्र में पीएमटी परीक्षाओं में धांधली की बात लिखी थी। पूरा मजमून मुझे याद नहीं है। बहुत पुरानी बात हो गई, लेकिन इतना याद है कि उसी पत्र के आधार पर इंदौर आईजी को फोन पर पीएमटी में गड़बड़ी की सूचना दी थी। जांच में जब बात बढ़ी तो मामला एसटीएफ को दिया। वो पत्र कहां है, यह महत्वपूर्ण नहीं है। उस पत्र के आधार पर इतने बड़े घोटाले का सुराग लगा यह अहम बात है। सरकार के पास कोई काम नहीं है। किसान परेशान हैं, लेकिन सरकार उनके मुद्दों पर चर्चा करने की बजाय ऐसे मुद्दे उठा रही है। – शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री

मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि एेसा काेई पत्र शिवराज जी काे कभी मिला ही नहीं : अलग-अलग एजेंसियों से हमने उस गुमनाम पत्र की जानकारी मांगी, लेकिन वह पत्र अब तक नहीं मिला, जिसके आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोटाला उजागर करने का दावा किया था। 21 जुलाई 2013 काे शिवराज सिंह चाैहान ने सदन में कहा था कि उन्हें 20 जून 2013 काे एक गुमनाम पत्र मिला था। मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने सदन काे गुमराह किया है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि एेसा काेई पत्र शिवराज जी काे मिला ही नहीं था। यदि उनके पास पत्र है ताे वे जांच एजेंसियों काे वह पत्र उपलब्ध करवाएं। – बाला बच्चन, गृहमंत्री

पत्र किसे दिया इसकी जानकारी हमें नहीं है : हमने ऐसा सुना था कि कोई गुमनाम पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री को मिला था, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कोई पत्र नहीं था और न ही हमें उस पत्र के बारे में कोई जानकारी है कि वह पत्र किसे दिया गया।
विजय रमन, एसटीएफ की जांच की मानिटरिंग के लिए बनी एसआईटी के सदस्य

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