Friday, September 24, 2021
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सांस लेने में क्यों होती है दिक्कत और जानें इस तकलीफ से बचाव के तरीके

सांस लेने में दिक्कत एक आम समस्या है। ज्यादा खाना खाने के बाद भी सांस लेने में परेशानी अनुभव हो सकती है, लेकिन यदि ऐसा बार-बार होता है और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहती है तो ध्यान देने की जरूरत है।

एम्स के डॉ. नबी वली के अनुसार, सांस लेने में दिक्कत कई तरह की हो सकती है, जैसे छाती में अकड़न महसूस हो सकती है, सांस फूल सकती है या सांस चढ़ने जैसा अनुभव हो सकता है। यदि भरपूर ऑक्सीजन मिलने के बाद भी सांस लेने में परेशानी हो रही है तो यह कोई गंभीर समस्या हो सकती है।

डॉ. नबी वली के अनुसार, सांस लेने में परेशानी के कुछ लक्षण हैं, जिन्हें जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, उतना बेहतर है। जैसे बेचैनी होना, भ्रम की स्थिति बनना, चक्कर आना, छाती के साथ गर्दन में दर्द महसूस होना, सांस लेते समय तेज आवाज आना, बेहोश होना, अचानक थकान महसूस होना। यदि ये लक्षण एक महीने से ज्यादा समय से हैं तो तत्काल डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि लेटते समय सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो रही है तो भी मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत है। खांसी भी इसका एक अहम संकेत होती है। यदि तीन हफ्तों या इससे अधिक समय तक खांसी बनी हुई है तो समझिए सांस लेने में परेशानी हो रही है। सांस लेने में मुश्किल आने पर टखनों में सूजन आ जाती है।

क्यों होता है ऐसा

अधिकांश मामलों में ऑक्सीजन की कमी से सांस लेने में परेशानी होती है, लेकिन अन्य मामलों में यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। हार्ट संबंधी समस्या की शुरुआत भी सांस की समस्या से होती है। बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन के कारण भी सांस लेने में समस्या हो सकती है। जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है, इन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है। श्वास नली क्षतिग्रस्त होने से भी सांस लेने में दिक्कत होती है।

सांस लेने में दिक्कत का इलाज

डॉ. रचिता नरसरिया के अनुसार, हार्ट या फेफड़ों की समस्याओं के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके अलावा एलर्जी, लो ब्लड प्रेशर, एनीमिया, दिल बढ़ना, कोरोनरी धमनी रोग भी इसके प्रमुख कारण होते हैं। इन बीमारियों का इलाज करके सांस की दिक्कत से बचा जा सकता है। होम्योपैथी में इसका कारगर इलाज बताया गया है।

इसके अलावा फेफड़ों को मजबूत बनाने वाले योगासन करके इस समस्या से बचा जा सकता है। जो लोग अत्यधिक शराब या धूम्रपान का सेवन करते हैं, उन्हें खतरा अधिक रहता है, इसलिए इन बुरी चीजों से दूर रहें। प्रदूषण से बचें। अपना वजन कंट्रोल रखें। मोटापे के कारण शरीर को हर काम में ज्यादा मेहनत करना पड़ती है और सांस फूलती है। अपनी जीवनशैली बदलें। फैट्स वाले खाद्यपदार्थों के बजाए फल और सब्जियों का सेवन अधिक करें। इसके अलावा नट्स, बीज और मछली का सेवन फेफड़ों को मजबूती देता है। इनमें एंटीऑक्सिडेंट्स और ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है, जो फेफड़ों को हर तरह के संक्रमण से बचाता है। जिन चीजों से एलर्जी है, उनसे दूर रहें।

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