Tuesday, September 28, 2021
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क्यों चलता है RJD में जगदानंद का सिक्का?

बिहार की सिसायत में अभी जगदानंद सिंह सुर्खियों में हैं। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष हैं।15 जुलाई 1945 को उनका जन्म हुआ और इस हिसाब से उनकी उम्र 75 पार की है। बिहार सरकार में जल संसाधन विभाग, ऊर्जा विभाग, वन पर्यावरण जैसे कई विभागों में मंत्री रहे हैं। सांसद भी रहे। अनुशासन के कड़े हैं।

लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने खुलेआम उनके खिलाफ विद्रोह ठान रखा है। 10 दिनों तक जगदानंद दफ्तर भी नहीं गए। तेजस्वी के साथ हालांकि अब प्रकट हो रहे हैं। वजह क्या है, उनके इतने अहम होने की?

फॉरवर्ड चेहरा हैं

लालू ने MY समीकरण को साधने में अपने कार्यकाल के दौरान आक्रामक राजनीति की, जिस वजह से सामान्य वर्ग को वोटर बहुत हद तक उनसे डरता और चिढ़ता था। जगदानंद उन दिनों से उस पार्टी में अगड़ों का चेहरा माने जाते हैं, जो घोषित तौर पर उसके विरोध की राजनीति करती थी। रघुवंश बाबू के जाने के बाद तो उस कद के वह अकेले और कद्दावर नेता हैं, जिनका पार्टी के भीतर और बाहर भी सम्मान और स्वीकार्यता है।

संबंधों को निबाहने वाले नेता

लालू प्रसाद ने जिस तरह से पार्टी को चलाया है, चुनाव के समय तेजस्वी यादव जिस बात के लिए माफी मांग रहे थे, जगदानंद ने वह छवि बदली है। वह संगठन चलाने के तरीके को सुधारना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी में काफी बदलाव किया भी है। लालू प्रसाद लंबे समय तक जेल में रहे, अस्पताल में रहे और इस बीच पार्टी को जगदानंद सिंह देखते रहे। वे लालू प्रसाद के साथ मित्र धर्म निभा रहे हैं। संबंधों को निबाहने में विश्वास रखते हैं, इसलिए तेज प्रताप यादव के बोल को भी झेल जाते हैं। नाराज भी होते हैं तो लालू प्रसाद उन्हें मना लेते हैं।

पार्टी कार्यालय में दिखता है उनका काम

जगदानंद सिंह ने पार्टी की कई परिपाटी को बदल दिया। वह अनुशासन को पसंद करते हैं। परिपाटी यह कहती है कि किसी भी सभा में अध्यक्ष अपना आसन नहीं छोड़ते, जैसे कि राजद के स्थापना दिवस के दिन तेजस्वी यादव जब मंच पर पहुंचे तो बाकी सारे नेताओं ने उठकर उनका अभिवादन किया। जगदानंद सिंह बैठे रहे। पार्टी दफ्तर की पूरी सजावट जगदानंद सिंह के सौंदर्य बोध को दिखाती है। उन्होंने कैंपस में समाजवादी नेताओं की फोटो, उनके विचार टंगवाए। फूलों के खूबसूरत गमले लगवाए। अब पटना स्थित कार्यालय में एक खूबसूरत कांफ्रेंस कमरा भी बन गया है।

बड़ी पार्टी बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रही

राष्ट्रीय जनता दल में रहते हुए भी अनुशासन का पालन करवा रहे हैं। यह बड़ी बात है। अब लोग लालू प्रसाद की उस पार्टी को पसंद भी नहीं कर सकते, जिसका जुलूस निकलने पर लोग दुकानें इसलिए बंद कर देते थे कि सामानों की लूटपाट न हो जाए। हुड़दंगी पार्टी को अनुशासित पार्टी बनाने में वे लगे हुए हैं। उनके नजदीकी बताते हैं कि पार्टी से जुड़े कागजातों को भी उन्होंने दुरुस्त करवाया है। विधान सभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल को सबसे बड़ी पार्टी बनाने में उनकी भी बड़ी भूमिका रही। पिछले दिनों उन्होंने जुलूस-धरने के दिन पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को सेल्फी खींचने और धक्कामुक्की के लिए डांट लगाई थी।

बेटा और पार्टी में से एक को चुनना था तो पार्टी को चुना

उनके बेटे सुधाकर सिंह ने जब भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया तो जगदानंद सिंह ने बेटे के खिलाफ प्रचार किया और चुनाव में हरा कर दम मारे। उस समय घर से बाहर तक उनकी आलोचना हुई। लेकिन वे अड़े रहे। बाद के दिनों में सुधाकर राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हुए और अभी रामगढ़ से विधायक हैं।

आत्मानुशासन की भी बात करते हैं

वे अनुशासन के साथ आत्मानुशासन की भी बात करते हैं। सुबह नियमित रुप से 11 बजे वीरचंद पटेल रोड स्थित पार्टी ऑफिस पहुंच जाते हैं और शाम 5 बजे तक रहते हैं। घर से लंच लेकर आते हैं। प्रवक्ताओं के लिए अलग चैंबर उन्होंने बनवाया। राजद कार्यायल में 22 सीसीटीवी कैमरे लगे है। इससे पार्टी का कोना-कोना उनकी निगरानी में होता है।

कोई व्यक्ति कहीं देर तक बैठा दिखा तो वे ऑफिस स्टाफ को फोन कर टोक देते हैं कि क्यों इतनी देर तक बैठाए हुए हो ? पार्टी में उनका विरोध तेजप्रताप यादव कर रहे हैं और दूसरी तरफ लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव, जगदानंद सिंह के साथ खड़े हैं। RJD में यह बड़ा बदलाव है।

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