उधर, वन विभाग ने तेंदुआ पकडऩे के लिए जाल बिछा दिया है। मलिहाबाद में लोगों से रात में न निकलने की सलाह दी है। लोगों को झुंड में चलने के लिए कहा गया है। आसपास के जंगल में वन विभाग की टीम तेंदुए की लोकेशन जुटा रही है।

रात में निकलता तेंदुआ

तेंदुआ रात में ही शिकार करने के साथ यात्रा भी करता है। दिनभर जंगल व झाडिय़ों में छिपा रहता है। तीन दिन से तेंदुए के नए पगमार्क न मिलने से माना जा रहा है कि उसने क्षेत्र बदल दिया है। आशंका है कि तेंदुआ शहरी सीमा में आ सकता है। डीएफओ डॉ. आरके सिंह ने मलिहाबाद गांव में तेंदुए की पुष्टि की है।

कठवारा में भी देखे गए थे तेंदुए के पगमार्क

गोमती नदी के किनारे बसे माल और बक्शी का तालाब सीमा के कठवारा जंगल में भी कुछ माह पूर्व तेंदुए की लोकेशन मिली थी। कठवारा गांव में बड़ी आबादी के साथ ही मवेशी भी पलते हैं। गोमती नदी के कछार और कठवारा जंगल में भोजन-पानी का बेहतर इंतजाम होने के कारण ही तेंदुआ यह इलाका नहीं छोड़ रहा था। तेंदुए के पगमार्क वन क्षेत्र की सुरक्षा में लगे कैमरों में कैद हो गए थे।

लखनऊ में दहशत बने थे ये वन्यजीव

1993 से अब तक कई तेंदुए और बाघ-बाघिन लखनऊ में दहशत फैला चुके हैं
1993 में कुकरैल के जंगल में खूंखार हो गए एक बाघ को मारना पड़ा था
कुछ साल पहले करीब सौ दिन तक काकोरी व आसपास के इलाके में दहशत कायम करने वाला व्यस्क बाघ पकड़ा गया था
वर्ष 2009 में माल के कमालपुर लधौरा में तेंदुआ पकड़ा गया
2009 में मोहनलालगंज में दहशत फैलाने वाले बाघ को फैजाबाद में मारा गया था
2012 में माल के उतरेहटा गांव में तेंदुआ पकड़ा गया
अप्रैल 2012 में काकोरी के रहमान खेड़ा में बाघ पकड़ा गया
21-22 अप्रैल 2013 की रात पीजीआइ के पास रानी खेड़ा में तेंदुआ पकड़ा गया
तीन साल पहले आशियाना के एक घर में घुसे तेंदुए को पुलिस ने मारा
इसके कुछ दिन बाद ही ठाकुरगंज के एक प्राथमिक स्कूल में तेंदुआ पकड़ा गया
अभी डेढ़ माह पूर्व ही गोसाईगंज में तेंदुआ पकड़ा गया था