वर्ल्ड कप : भारतीय परिवार कार से 50 दिन में 17 देशों का सफर कर सिंगापुर से लंदन पहुंचा, 25 हजार किमी दूरी तय की

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सिंगापुर के माथुर परिवार का क्रिकेट और ड्राइविंग के प्रति जुनून कुछ ऐसा है कि वे टीम इंडिया को चीयर करने के लिए 50 दिन में 17 देशों का सफर कर ब्रिटेन पहुंच गए। इस दौरान परिवार के 6 सदस्यों ने कार से 25,000 किलोमीटर दूरी तय की। परिवार की तीन पीढ़ियां इक्वाटोर से आर्कटिक होते हुए लंदन पहुंचीं।

माथुर परिवार की इस अनूठी रोड ट्रिप को 17 मई को सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त जावेद अशरफ ने हरी झंडी दिखाई थी। 5 जुलाई को परिवार ब्रिटेन के लीड्स शहर पहुंचा, ताकि वह 6 जुलाई का भारत-श्रीलंका का मैच देख सके। अब उन्हें सेमीफाइनल और 14 जुलाई को होने वाले फाइनल मैच का इंतजार है।

फरवरी में डिनर टेबल पर बना प्लान, छह साल के बेटे ने सबसे पहले हां बोला

अदिति सिंगापुर में एक लॉ फर्म से जुड़ी हैं, जबकि बिट्स पिलानी और आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ चुके उनके पति अनुपम सिंगापुर में ही बैंकिंग सेक्टर में कार्यरत हैं। अनुपम ने बताया कि इसी साल फरवरी में डिनर टेबल पर मैंने परिवार के सामने सिंगापुर से लंदन तक रोड ट्रिप का प्रस्ताव रखा। अगले ही दिन मेरे छह वर्षीय बेटे अविव ने कहा- मैं भी ट्रिप में शामिल होऊंगा। फरवरी खत्म होते-होते हमने वीसा, होटल आदि की तैयारी शुरू की।

तीन साल की आव्या और 67 साल के अखिलेश ने दी चैलेंज की हिम्मत

इस ट्रिप की सबसे छोटी सदस्य तीन साल की आव्या है, जिन्हें परिवार के साथ दुनिया घूमना पसंद है। अदिति बताती हैं कि आव्या कई देशों में स्वीमिंग पूल और खेल मैदानों का आनंद लेती रहीं और कार सीट पर बैठे-बैठे कलाकारी करते हुए लंबे सफर में व्यस्त रहीं। इसी तरह ट्रिप के सबसे बुजुर्ग सदस्य अनुपम के पिता 67 वर्षीय अखिलेश माथुर ने कहीं भी खुद को कमजोर महसूस नहीं होने दिया और परिवार को प्रेरित करते रहे। उनकी पत्नी अंजना कहती हैं कि करीब दो महीने परिवार के साथ बिताया यह सफर मेरे जीवन का सबसे अच्छा लम्हा है। मैं इसे एक वाक्य में इस तरह कहूंगी- जो परिवार साथ घूमता है, वह हमेशा साथ रहता है।

उज्बेकिस्तान में मुगल विरासत तो किर्गिस्तान में बर्फबारी का मजा

अनुपम के मुताबिक, किर्गिस्तान में हमारा बर्फीले तूफान से सामना हुआ। हमने सोचा कि यहां कार में ही रात गुजारना ठीक होगा, तभी एक स्थानीय शख्स ने हमें अपने घर में ठहरने की जगह दी। इस ट्रिप के तीन सुंदर अंश थे- ड्राइविंग, क्रिकेट और फैमिली। यदि इनमें से एक भी नहीं होता तो यह यात्रा अधूरी रहती।

  • अदिति ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि हम सभी साथ हैं और ये दुनिया एक परिवार है। यही सोच हमारी यात्रा को इस मुकाम तक ले गई।
  • अखिलेश ने बताया कि पूरे परिवार के साथ विभिन्न देशों का यह सफर मुझे हमेशा याद रहेगा, क्योंकि हमें विभिन्न खूबसूरत संस्कृतियों का अनुभव हुआ।
  • इस ट्रिप में अदिति की मां मोनी माथुर भी शामिल थीं, लेकिन वह सिंगापुर में रहकर ही ट्रिप का वर्चुअल अनुभव लेती रहीं। भोपाल की रहने वालीं मोनी बताती हैं कि मैंने दो महीने 21 देशों के इस सफर को जिया है। मोनी दो माह पहले ही सिंगापुर पहुंची हैं।

आधी दुनिया घूम आया परिवार

परिवार की बहू अदिति माथुर भोपाल के कार्मेल कॉन्वेंट से स्कूलिंग और एनएलआईयू से ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि 2008 में जब मैं पहली बार अपनी होने वाली सास अंजना माथुर से मिली तो उन्होंने मुझसे पूछा था कि यदि दिनभर कार में ही रहना पड़े, तो तुम क्या रह सकती हो? मैंने कहा- हां, क्यों नहीं। 10 साल बाद मुझे पता चला कि आखिर उन्होंने यह सवाल क्यों पूछा था। दरअसल, अदिति के पति अनुपम को ड्राइविंग से बहुत प्यार है। जब वह 10 साल के थे, तब उन्होंने पढ़ा था कि एक दंपती कार से दुनिया घूमने निकला है। बस, तभी से उन्हें ड्राइविंग अच्छी लगने लगी। माथुर परिवार अब तक भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, चिली, आइसलैंड, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देशों में कई यात्राएं साथ-साथ कर चुका है।

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