Thursday, September 23, 2021
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World Organ Donation Day 2021: जानें कौन अंग दान कर सकता है और कौन नहीं?

दुनियाभर में ऐसे हज़ारों लोग हैं जिन्हें दिल, लिवर, किडनी, आंखें, फेफड़े, पैनक्रियाज़ आदि जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सख्त जरूरत है। इनमें से कुछ ही लोगों को समय पर अंग मिल पाता है। जीवन रक्षक अंगों की कम आपूर्ति की पीछे जिसको लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ा कारण है। इसलिए, विश्व अंग दान दिवस का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पंजीकृत अंग दाता बनने के लिए प्रोत्साहित करना और निधन के बाद पर अपने स्वस्थ अंगों को दान करने का संकल्प लेना है। अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग अंग दाता बनेंगे, तो अंग खराब होने के कारण अपनी जान गंवाने वाले कई लोगों को बचाया जा सकता है।

अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग अंग दाता बनेंगे तो अंग खराब होने के कारण अपनी जान गंवाने वाले कई लोगों को बचाया जा सकता है। हर साल 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है।

हर साल 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है। वहीं, भारत राष्ट्रीय अंग दान दिवस 27 नवंबर को हर साल मनाता है।

क्या है अंग दान?

अधिकांश लोग अंग दाता बनने के लिए पंजीकरण करा सकते हैं, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। अगर कोई व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु का है, तो उसे अंगदान करने के लिए माता-पिता या वयस्क अभिभावक की सहमति की आवश्यकता होती है।

अगर मृत्यु के बाद अंगदान के लिए पंजीकरण कराया जाता है, तो एक व्यक्ति का चिकित्सक मूल्यांकन किया जाता है ताकि मेडिकल टीम उनके स्वास्थ्य की जांच कर सके और कौन से अंग दान किए जा सकते हैं इसका फैसला कर सके। मृत्यु के बाद अंगदान के इस रूप को शवदान कहा जाता है।

अंगदान का दूसरा रूप तब होता है जब कोई व्यक्ति जीवित होता है। इस तरह का दान किडनी और लिवर जैसे कुछ अंगों तक ही सीमित है। किडनी मनुष्य के पास दो होती है, वो एक दान कर दूसरे पर जीवित रह सकता है। वहीं, लिवर दान के दौरान इस अंग का एक हिस्सा निकाला जाता है, जिसमें दौबारा बढ़ने की क्षमता होती है।

कौन अंग दान नहीं कर सकता?

एक व्यक्ति अंग दान तब नहीं कर पाएगा अगर वो कुछ बीमारियों से जूझ रहा हो। जो लोग HIV, कैंसर जैसे शरीर में तेज़ी से फैलने वाली बीमारी और ऐसे गंभीर संक्रमणों से जूझ रहे होते हैं, वे मौत के बाद अंग दान नहीं कर सकते। जीवित अंगदान में मधुमेह, किडनी या हृदय रोग, कैंसर और एचआईवी आदि से पीड़ित लोगों को बाहर रखा जा सकता है

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