Saturday, September 18, 2021
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झारखंड : फुटबॉल से रुका 8 पंचायत के 20 गांवों में बाल विवाह, 650 लड़कियां नाम रोशन कर रहीं

रांची. झारखंड में 2013 में बरतोली गांव की गांधी देवी जब हड़िया (नशीला पेय) बेचती थीं, तो महज 7 साल की उसकी बेटी शीतल ग्राहकों को हड़िया परोसती। पिता बेरोजगार, लेकिन पैसे के लालच में बेटी की शादी करने के सपने देखने लगा। पास के ही हलदमा गांव की प्रियंका काे भी 12 साल में ही ब्याहा जा रहा था, लेकिन कोच आनंद गोपाल के समझाने के बाद दोनों का परिवार किसी तरह माना। इसका सबब बना फुटबाल। अब ग्रेजुएशन के पार्ट वन में पढ़ रही शीतल टोप्पो झारखंड की तेजी से उभरती हुई फुटबॉलर है। फीफा ने रूस में आयोजित फुटबॉल वर्ल्ड कप में मैच देखने के लिए बतौर मेहमान उसे बुलाया था।

 

अंडर-17 नेशनल फुटबॉल कप 2016 का खिताब झारखंड के नाम करने वाले टूर्नामेंट में उसने कुल 13 गोल किए थे। मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी बनीं। वहीं प्रियंका कच्छप अक्टूबर 2018 में लंदन में अपने खेल का जौहर दिखा चुकी है। अब यहां बरतोली, हलदमा समेत आसपास की 8 पंचायत के 20 आदिवासी गांव में बाल विवाह रुक गया है। शीतल और प्रियंका के बाद अब गांव की 6 और लड़कियां फुटबॉल खेलने के लिए डेनमार्क जा रही हैं।

 

6 लड़कियां डेनमार्क जाएंगी
शीतल और प्रियंका के बाद अब गांव की 6 और लड़कियां फुटबॉल खेलने के लिए डेनमार्क जा रही हैं। अंशु कच्छप, अनिता, लक्ष्मी, चिंटु कुमारी, सोनी मुंडा और संध्या टोप्पो 21 जुलाई को रांची से डेनमार्क के लिए रवाना होंगी। कोच अंशु हैं।

 

कोच ने समझाया तो माना गांव
गांव में 650 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं। कोच आनंद गोपाल ने गांव के लोगों को बाल विवाह का नुकसान समझाया तो 2013 के बाद गांव का नजारा बदल गया। अब गांव में बाल विवाह नहीं होता है।

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