जैसे जैसे महाकुम्भ का पहला स्नान करीब आ रहा है कुम्भ नगरी प्रयागराज के महाकुम्भ शेत्र में अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। देश के 13 अखाड़ों और हज़ारों साधू-संतों से घिरे महाकुम्भ शेत्र में हर जगह भक्ति और धार्मिक जय-जय कार के नारे सुनाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में महाकुम्भ शेत्र में जंगम बाबा का एक दल अखाड़े पहुंचा। जंगम बाबा खानदानी शिव भक्त होते हैं और केवल साधू संतों से ही दान लेते हैं। यह महाकुंभ और कुम्भ के दौरान सभी 13 अखाड़ों में जा कर वहां के साधू संतों से दान लेते हैं।

बता दें कि आदिकाल से ही इनकी यह परंपरा चली आ रही है। जंगम बाबा शिव के जयकारे लगाते हैं और श्रृष्टि की रचना का पाठ गाना गाकर बताते हैं। जंगम बाबा की माने तो इनका जन्म शिव जी के जांघ से हुआ है….शिव की कथा और शिव के ही नाम से दान दक्षिणा लेते हैं। यह सभी जंगम बाबा पंजाब, हरियाणा से आये हुए हैं।
अखाड़ों की माने तो इनको दान देना अनिवार्य होता है। जंगम बाबा महाकुंभ और कुम्भ के दौरान ही आते हैं। इनमे ख़ास बात यह है की ये साधू संतो से दान लेते है जो खुद ही आम श्रधालुओं से दान लेते है।



