निर्यात के मामले में स्मार्टफोन दूसरे स्थान पर, जल्द ही डीजल ईंधन को पछाड़ सकता है!

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भारत से स्मार्टफोन का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और अब यह एचएस कोड आधारित उत्पादों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। अगर यह रफ्तार बनी रही तो स्मार्टफोन जल्द ही डीजल ईंधन के निर्यात को भी पछाड़ सकता है। एचएस कोड एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार वर्गीकरण प्रणाली है जो उत्पादों के निर्यात और आयात को आसानी से पहचानने में मदद करता है।

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वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 के अप्रैल से नवंबर तक भारत ने 13.1 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन निर्यात किए हैं। इस दौरान स्मार्टफोन का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 46% बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024 के पहले आठ महीनों में 8.9 अरब डॉलर का स्मार्टफोन निर्यात हुआ था।

स्मार्टफोन निर्यात में वृद्धि का प्रमुख कारण सरकार की पीएलआई योजना (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) है जिसके तहत प्रमुख कंपनियाँ जैसे ऐपल और सैमसंग भारत में स्मार्टफोन का उत्पादन और निर्यात बढ़ा रही हैं। ऐपल के मामले में भारत में आईफोन उत्पादन करने वाली कंपनियां जैसे फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन ने भारत में बड़ी मात्रा में आईफोन का उत्पादन शुरू किया है।

वित्त वर्ष 2023 में स्मार्टफोन निर्यात 11 अरब डॉलर तक पहुँच गया था और यह निर्यात के मामले में 5वें स्थान पर था। लेकिन अब यह श्रेणी में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। अगर यह गति बनी रही तो स्मार्टफोन निर्यात आने वाले वर्षों में डीजल ईंधन के निर्यात को भी पछाड़ सकता है।

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यह बदलाव सरकार की सही नीतियों जैसे पीएलआई योजना और वैश्विक कंपनियों के निवेश के परिणामस्वरूप हुआ है। इसने न केवल निर्यात में वृद्धि की है बल्कि देश में स्मार्टफोन उत्पादन में भी तेजी लाई है।

यहां तक कि वित्त वर्ष 2025 के पहले आठ महीनों में स्मार्टफोन निर्यात का दो-तिहाई हिस्सा केवल आईफोन का था। इस प्रकार भारत अब स्मार्टफोन उत्पादन और निर्यात में एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

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