मणिपुर में हाल ही में हुई राजनीतिक घटनाओं ने राज्य को एक नई दिशा में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को राज्य के नए मुख्यमंत्री का नाम तय करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यदि इस मुद्दे पर 12 फरवरी तक कोई हल नहीं निकलता, तो विधानसभा को भंग कर दिया जाएगा और राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। इस स्थिति के बीच मणिपुर की राजनीति में गहरी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। बीजेपी के लिए यह 48 घंटे बेहद अहम हैं, क्योंकि इन घंटों में पार्टी को नए मुख्यमंत्री का चयन करना और विधानसभा सत्र बुलाना होगा।

बीजेपी के लिए 48 घंटे का समय
12 फरवरी तक बीजेपी को मणिपुर के नए मुख्यमंत्री का नाम तय करना होगा। यदि पार्टी ऐसा नहीं कर पाती, तो विधानसभा को भंग कर दिया जाएगा। राज्य में विधानसभा का आखिरी सत्र 12 अगस्त 2024 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। ऐसे में, यदि 12 फरवरी तक सत्र शुरू नहीं होता तो संविधान के अनुसार विधानसभा भंग होगी और राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। बीजेपी के लिए यह 48 घंटे बेहद अहम हैं, क्योंकि इन घंटों में पार्टी को नए मुख्यमंत्री का चयन करना और विधानसभा सत्र बुलाना होगा।

