NATIONAL : भारत और पाकिस्तान सीजफायर के बीच आयी अच्छी खबर, जानकर चीन-पाक को लगेगी मिर्ची

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भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का पाकिस्तान को ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया है कि अब वो आगे फिर इस तरह का दुस्साहस करने से पहले अब सौ बार सोचेगा. इस बार उसे ऐसी मार पड़ी कि भारत की शर्तों पर सीजफायर के लिए मजबूर होना पड़ा. उसी के अनुरोध के बाद भारत ने अपनी हामी भरी है. इस तरह 22 अप्रैल के हमले के बाद भारतयीय सेना ने 7 मई को संयुक्त अभियान चलाकर अब पाकिस्तान का घमंड पूरी तरह से तोड़ दिया है.

पाकिस्तान के खिलाफ सेना के ज्वाइंट ऑपरेशन से पहले खुद पीएम मोदी ने कहा था कि आतंकियों को मिट्टी में मिला देंगे और भारतीय सेना ने बहावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद में बिल्कुल वही किया. इस अभियान में पाकिस्तान के कई आतंकियों को ढेर कर दिया गया.

घरेलू मोर्चे पर अच्छी खबर

इन सबके बीच भारत के लिए घरेलू मोर्चे पर अच्छी खबर है. भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई का अनुमान है कि भारत की जीडीपी 6.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ सकती है. सीआईआई के अध्यक्ष संजीव पुरी का कहना है कि देश की इकोनॉमी भू-राजनीतिक मुद्दों के अल्पकालिक प्रभाव से उबरने के लिए काफी मजबूत है.

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटव्यू में उन्होंने कहा कि भारत को बढ़ती व्यापार बाधाओं को देखते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते करने चाहिए. ऊर्जा, परिवहन, धातु, रसायन और आतिथ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निजी निवेश में वृद्धि के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेश में ‘कुछ सतर्कता’ आ सकती है.

6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी जीडीपी

सीआईआई के अध्यक्ष भारत के जीडीपी ग्रोथ पर कहा कि हम 6.5 प्रतिशत की दर की उम्मीद कर रहे हैं. हमारा मानना ​​है कि ये संख्या मौलिक रूप से हासिल की जा सकती है, क्योंकि तथ्य ये है कि हम एक उचित रूप से अच्छी नींव, मजबूत आर्थिक आधार के साथ शुरुआत कर रहे हैं.”

संजीव पुरी ने कहा कि हाल के दिनों में ब्याज दर में कमी आई है. मुद्रास्फीति नरम होती जा रही है. एक अप्रैल से व्यक्तिगत आयकर में छूट मिल रही है. पिछले वर्ष की दूसरी छमाही में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर प्रस्तावित उच्च शुल्क और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संरक्षणवाद की प्रवृत्ति पर, उन्होंने ये माना कि  इस समय व्यापार में अधिक से अधिक बाधाएं आ रही हैं.

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) करने चाहिए जो पारस्परिक रूप से लाभकारी और राष्ट्रीय हित में हों. संजीव पुरी का मानना है कि इसलिए भारत जिन देशों को आगे बढ़ा रहा है और उनमें से बड़े देश अमेरिका और यूरोपीय संघ हैं, वे महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से जो कुछ भी करना है, वह करना चाहिए, और मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण ये द्विपक्षीय व्यापार समझौते हैं.

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