LIFESTYLE : शरद पूर्णिमा पर क्या सच में आसमान से अमृत बरसता है

0
246

शरद पूर्णिमा सोमवार 6 अक्टूबर को है. मान्यता है कि, इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है और आकाश से अमृत की वर्षा होती है. इसलिए इस दिन चंद्रमा के प्रकाश के नीचे खीर रखते हैं.

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को बहुत ही पवित्र, शुभ और रहस्यमयी रात माना जाता है. आश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा (Kojagiri) कहा जाता है जोकि इस साल सोमवार 6 अक्टूबर 2025 को है. ऐसी मान्यता है कि इस पूर्णिमा को चंद्रमा जब अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है तब चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है. आइए जानते हैं क्या सच में शरद पूर्णिमा पर आसमान से अमृत बरसता है? इससे क्या रहस्य और मान्यताएं जुड़ी हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा जब अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है, तब वह अपनी उच्च स्थिति में होता है. ऐसी स्थिति में चंद्रमा शुभ फल प्रदान करता है. इसलिए इस समय चंद्रमा की किरणों में विशेष औषधीय गुण आ जाते हैं. इसलिए शरद पूर्णिमा को अमृत बरसने वाली रात भी कहा जाता है.

शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर आसमान के नीचे रखने की भी परंपरा है. लोग रात में चंद्रमा के प्रकाश के नीचे खीर रखते हैं और फिर अगली सुबह इसी खीर को खाते हैं. इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि, चंद्रमा से निकलने वाला औषधीय या अमृत गुण खीर में आ जाता है, जिससे यह खीर सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है.

विज्ञान की मानें तो, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, इसलिए चंद्रमा का प्रकाश पृथ्वी तक सबसे अधिक पहुंचता है. ऐसी स्थिति पूरे साल में केवल शरद पूर्णिमा पर ही बनती है.

एक कारण यह भी है कि शरद की रात का वातावरण शुद्ध और ठंडा भी होता है. इस समय चंद्रमा के किरणों की पराबैंगनी ऊर्जा (UV rays) का स्तर बहुत नियंत्रित होता है.इसलिए जब दूध या खीर को चंद्रमा की रोशनी में खा जाता है, तो उसकी रासायनिक संरचना में हल्का परिवर्तन होता है, जिससे वह पचने में आसान और स्वास्थ्यवर्धक बनता है. पारंपरिक और धार्मिक रूप से यही ‘अमृत बरसना’ एक प्रतीकात्मक रूप है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here