NATIONAL : रेप-मर्डर कर अर्धनग्न फेंका, 15 साल बाद नेहा अहलावत को मिला न्याय… एक गलती से ऐसे फंसा मोनू कुमार

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चंडीगढ़ पुलिस ने 15 साल पुराने रेप और मर्डर मामलों की गुत्थी डीएनए की मदद से सुलझा ली. 38 वर्षीय टैक्सी ड्राइवर मोनू कुमार को तीन महिलाओं के हत्या और रेप के मामलों में जोड़ा गया. पुलिस ने 100 से अधिक डीएनए नमूने जांचे और लगातार प्रयासों के बाद 2024 में आरोपी को पकड़ा. 2010 के नेहा अहलावत केस में कोर्ट ने उसे दोषी ठहराया है.

चंडीगढ़ पुलिस ने एक ऐसी अपराध कहानी का पता लगाया है, जो 15 साल तक शहर को चुपचाप दहशत में रखे हुए थी. 38 साल का टैक्सी ड्राइवर मोनू कुमार, जो सेक्टर 38 वेस्ट की शाहपुर कॉलोनी का रहने वाला है, पिछले कई वर्षों से नशे की बुरी लत में था और इसी के चलते वह शहर की सुनसान, जंगल जैसी जगहों पर अकेली महिलाओं को निशाना बनाता था. चंडीगढ़ जिला अदालत ने मोनू कुमार को दोषी करार दिया है

पुलिस को हर बार उसके हाथ खाली लगते थे, क्योंकि वह इतनी सावधानी से वार करता था कि कोई डिजिटल निशान नहीं छोड़ता था. न मोबाइल फोन, न आधार, न बैंक खाता. लेकिन उसने एक गलती कर दी, जो उसे पकड़वा गई. उसने अपने पीड़ितों के शरीर और कपड़ों पर डीएनए के निशान छोड़ दिए थे.

यह कहानी शुरू होती है 2010 के एक दर्दनाक मामले से. जब 21 साल की एमबीए छात्रा नेहा अहलावत 30 जुलाई 2010 की शाम करीब 6 बजे अपने घर सेक्टर 38 वेस्ट से स्कूटर लेकर अंग्रेजी बोलने की क्लास के लिए निकली थी. लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी. उसी रात भारी बारिश के बीच, उसका अर्धनग्न, खून से सना शव करन टैक्सी स्टैंड के पास झाड़ियों में मिला.

शव पर चोटों के निशान थे और गला घोंटकर उसकी हत्या की गई थी. बाद में सीएफएसएल ने उसके कपड़ों पर मौजूद वीर्य के नमूनों से रेप की पुष्टि की थी. इस केस में उस समय कोई सुराग नहीं मिला और 2020 में यह केस अनसुलझा मानकर बंद कर दिया गया. लेकिन यह केस बंद हुआ जरूर, पर खत्म नहीं हुआ. क्योंकि उसी डीएनए के जरिए पुलिस को 15 साल बाद सच्चाई तक पहुंचना था.

इस दौरान चंडीगढ़ के जंगलनुमा क्षेत्रों में इसी तरह के दो और मामले हुए. सभी महिलाओं को अकेला देखकर निशाना बनाया गया. बारिश के मौसम का फायदा उठाया गया. हमलावर उन्हें सुनसान इलाके में ले जाता, उन पर हमला करता, गला घोंटता और फिर झाड़ियों में शव फेंक देता. कई मामलों में हत्या के बाद भी रेप के संकेत मिले. तीनों मामलों में डीएनए मिला, जो एक ही व्यक्ति का था.

पुलिस के लिए यह एक लंबी और धैर्य की परीक्षा थी. कई बार पुलिस ने आरोपियों के स्केच बनाए, कई संदिग्धों से पूछताछ हुई. 2009 में हिमाचल प्रदेश के एक पॉक्सो केस में आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था. उसी दौरान पुलिस को शक हुआ कि शायद वही आरोपी चंडीगढ़ में सक्रिय हो सकता है. लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं था.

टर्निंग पॉइंट आया 2022 में, जब पुलिस को एक और महिला की लाश मिली. डीएनए प्रोफाइलिंग की गई और यह उसी डीएनए से मेल खाया जो नेहा और दूसरी महिला के केस से मिला था. यानी हत्यारा वही था. लेकिन वह कौन था, यह अब भी रहस्य था.इसके बाद पुलिस ने एक बड़ा दांव खेला. नवंबर और दिसंबर 2023 में, चंडीगढ़ पुलिस ने प्रशासन के साथ मिलकर एक रक्तदान शिविर आयोजित किया. इस दौरान अनुमति लेकर खून के नमूने भी एकत्र किए गए ताकि डीएनए मैच किया जा सके. एफएसएल टीम ने सैकड़ों डीएनए नमूनों की जांच की. यह मेहनत चल ही रही थी कि इसी दौरान आरोपी ने अपनी तीसरी वारदात को अंजाम दिया.

इस बार शिकार बनी मोहाली की रहने वाली शनीचरा देवी. आरोपी ने उसी तरह हमला किया, जैसा वह पहले करता था. सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी और उसे सेक्टर 54 के जंगल क्षेत्र में घसीटकर ले गया. लेकिन इस बार वह इतना नशे में था कि रेप नहीं कर पाया. फिर भी उसके वीर्य के अंश महिला की साड़ी में मिले. यही डीएनए, जो पहले दो मामलों का भी था, आखिरकार पुलिस को करीब ले आया.

एफएसएल की टीम ने तुरंत पुलिस को सूचित किया कि डीएनए मैच हो चुका है. पुलिस ने जब अपने रिकॉर्ड खंगाले तो शक शाहपुर कॉलोनी के टैक्सी ड्राइवर मोनू कुमार पर गया. पुलिस जब उसके घर पहुंची, तो वह वहां नहीं था. वह अपने टैक्सी वाहन के साथ अमृतसर निकल गया था. इसके बाद पुलिस ने उसके घर के बाहर सादे कपड़ों में जवान तैनात कर दिए.

6 मई 2024 को जब मोनू वापस आया, तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पहले तो उसने सब कुछ नकार दिया. लेकिन जब पुलिस ने बताया कि उसका डीएनए तीनों केस से मैच हुआ है, तो उसने तीनों हत्याओं की बात कबूल कर ली. इस बार उसके पास उसका मोबाइल फोन भी था. मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैकिंग से पता चला कि वह सेक्टर 54 के उसी इलाके में मौजूद था, जहां शनीचरा देवी का शव मिला था.

पूरी जांच एसआईटी ने की, जिसकी अगुवाई एसएसपी कनवदीप कौर ने की. उन्होंने बताया कि इस केस में तकनीक और पुलिस की लगातार मेहनत सबसे बड़ा हथियार बनी. उन्होंने टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि 100 से ज्यादा डीएनए नमूने जांचे गए और हर सुराग को बारीकी से देखा गया. लेकिन पुलिस का कहना है कि चूंकि आरोपी एक इंटर-स्टेट टैक्सी ड्राइवर था, इसलिए हो सकता है कि उसने पड़ोसी राज्यों में भी ऐसे अपराध किए हों. इसलिए पुलिस ने अन्य राज्यों से भी संपर्क किया है.

इस बीच, 2010 को नेहा अहलावत के परिवार ने कई साल तक पुलिस की नाकामी पर सवाल उठाए थे. लेकिन इस गिरफ्तारी और अब कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें राहत मिली है. गुरुवार को चंडीगढ़ की जिला अदालत ने मोनू कुमार को आईपीसी की धारा 302 और 376 के तहत दोषी करार दिया. सजा का ऐलान 28 नवंबर 2025 को किया जाएगा.

इसमें आजीवन कारावास या फांसी की सजा दी जा सकती है. अन्य दो मामलों में भी आरोप तय किए जा चुके हैं और मुकदमे जारी हैं. नेहा के परिवार की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार यह आंसू राहत के थे. अदालत में मौजूद कई लोग भी भावुक हो गए. 15 साल की यह जांच बताती है कि अपराध कितना भी छुपा हो, सच कभी नहीं छुपता. डीएनए ने वह कर दिखाया, जो इंसानी आंखें और हाथ नहीं कर पाए थे.

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