अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बरकरार हैं। इस बीच ट्रंप ने ईरान को युद्ध की धमकी दी है। ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ जंग कभी भी छिड़ सकती है। ईरान ने अमेरिका को जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
तेहरान: ईरान की सेना ने आशंका जताई है कि उनके देश के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले फिर शुरू हो सकते हैं। सेना ने यह भी कहा है कि “सबूत दिखाते हैं कि अमेरिका किसी भी समझौते या संधि के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है।” यह बयान तब आया है, जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार के लिए बैठक की है। ट्रंप ने पहले भी कई बार ईरान को चेतावनी देते हुए युद्धविराम जारी रखने और होर्मुज जलडमरूदध्य को खोलने को कहा है। हालांकि, ईरान होर्मुज को खोलने को तैयार नहीं है।
ईरानी सैन्य मुख्यालय के उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर असादी ने ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कहा, “अमेरिकी अधिकारियों के कार्य और बयान मुख्य रूप से मीडिया-प्रेरित हैं, जिनका पहला उद्देश्य तेल की कीमतों में गिरावट को रोकना और दूसरा, उस गड़बड़ी से खुद को बाहर निकालना है जो उन्होंने खुद पैदा की है।” उन्होंने आगे कहा, “सशस्त्र बल अमेरिकियों की किसी भी नई हिमाकत या मूर्खता का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।”

ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान किए गए हमलों में बचे बमों में विस्फोट हो जाने पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजी) के 14 सदस्य मारे गए। ईरान की मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के करीबी माने जाने वाली वेबसाइट ‘नूरन्यूज’ की खबर के अनुसार, यह विस्फोट तेहरान के उत्तर-पश्चिम में स्थित जंजन शहर के पास हुआ। सात अप्रैल को युद्धविराम शुरू होने के बाद से यह आईआरजी के सदस्यों की सबसे बड़ी संख्या में मौत का मामला है। खबर में कहा गया है कि युद्ध के दौरान गोला-बारूद समेत क्लस्टर बम गिराए गए थे।
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा प्रस्तावों से वे ‘खुश नहीं हैं’, साथ ही यह भी कहा कि कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले हैं।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, जब वे मरीन वन से रवाना हो रहे थे, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं, तो देखते हैं आगे क्या होता है।” उन्होंने ईरान के नेतृत्व को बंटा हुआ और असमंजस में बताया।
ट्रंप ने कहा कि वे सब समझौता करना चाहते हैं, लेकिन सब कुछ अस्त-व्यस्त है, और जोड़ते हुए कहा कि नेतृत्व ‘बहुत बिखरा हुआ’ है और अंदर ही अंदर मतभेद हैं।
प का कहना था कि ईरान के अंदर की ये खींचतान उसकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि वहां के नेता ‘एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं’ और ‘उन्हें खुद नहीं पता कि असली नेता कौन है’, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना काफी कमजोर हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार हाल के संघर्ष के बाद देश के पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, और रक्षा क्षमता भी सीमित रह गई है।
ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा कि या तो तनाव बढ़ेगा या फिर समझौता होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य कदमों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार ऐसी मंजूरी पहले कभी नहीं ली गई और कई लोग इसे पूरी तरह असंवैधानिक मानते हैं।


