NATIONAL : चुनाव आयोग के TMC सिंबल फ्रीज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, 21 को सुनवाई संभव

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TMC Symbol Row in Supreme Court: ममता बनर्जी ने 28 साल पुरानी पार्टी के नाम और उसके चुनाव चिन्ह को इलेक्शन कमीशन द्वारा फ्रीज किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुरुवार को पार्टी के असली नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सिंबल को ECI द्वारा फ्रीज करने को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा की दो सीटों के उपचुनाव के बीच टीएमसी और उसके बागी गुट को सुनने के बाद तृणमूल कांग्रेस और इसके चुनाव चिन्ह को अंतिम फैसले तक फ्रीज कर दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी ने ममता तृणमूल कांग्रेस और ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाली बागी गुट ने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस बनाई है। आयोग ने दोनों को क्रमश: फुटबॉल प्लेयर और लिफाफा सिंबल आवंटित किया है।

केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुरुवार को टीएमसी के के असली नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। ममता बनर्जी ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए सोमवार (21 सितंबर) को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने याचिका का जिक्र किए जाने की संभावना है।

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और पार्टी पर वर्चस्व को लेकर ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच उत्पन्न मतभेदों के आधार पर यह फैसला लिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद हैं और दोनों ही असली टीएमसी होने का दावा कर रहे हैं। आयोग ने यह निर्णय पश्चिम बंगाल में होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया है। चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 के तहत यह अंतरिम कदम उठाया। आयोग के अनुसार चुनाव से पहले दोनों पक्षों के दावों पर पूरी तरह से फैसला करना संभव नहीं था, इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए टीएमसी का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस का नाम और पारंपरिक ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने, और नंदीग्राम उपचुनाव से उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के हटने के बाद, ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और अपने बयानों के जरिए केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को नया नाम ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और चुनाव चिह्न ‘फुटबॉल प्लेयर’ दिए जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वैकल्पिक नाम-चिह्न देना सिर्फ उपचुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए था, इसे आयोग के फैसले की स्वीकार्यता न माना जाए। वे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।

लोकतंत्र के इतिहास का ‘काला दिन’:
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि हम संवैधानिक कुर्सी का अनादर नहीं करते, लेकिन आज का दिन हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में एक ‘काला दिन’ है।

पहले से तय थी पूरी साजिश:
ममता बने कहा कि उनकी पार्टी से नाम और सिंबल छीनने की यह कोशिश अचानक नहीं हुई, बल्कि इसे बहुत पहले से और एडवांस में प्लान किया गया था।
‘न नाम रहने दूंगा, न निशान’:
केंद्र की सत्ता पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विरोधियों ने पहले ही कह दिया था कि ‘नाम भी रखने दूंगा, निशान भी नहीं रखने दूंगा’। उन्होंने चेतावनी दी कि जो आज सत्ता में हैं, वो कल नहीं भी हो सकते हैं, उन्हें अपनी सीमाएं समझनी चाहिए।
पार्टियों को तोड़ने का खेल:
ममता ने केंद्र सरकार पर विपक्षी दलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी को तोड़ा गया और अब वही फॉर्मूला टीएमसी पर आजमाया जा रहा है।
नंदीग्राम में ‘खेला’:
नंदीग्राम उपचुनाव में उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा अचानक नाम वापस लेने और सीएम शुभेंन्दु अधिकारी से मिलने को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया।
कांग्रेस उम्मीदवार को खुला समर्थन:
अपनी उम्मीदवार के हटने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने बड़ा सियासी दांव चलते हुए नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बिना शर्त खुला समर्थन देने का एलान कर दिया, ताकि बीजेपी के खिलाफ ‘इंडिया’ गठबंधन मजबूत रहे।
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया:
चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले को उन्होंने पूरी तरह गैर-कानूनी बताया और इसके खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

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