घी और तेल की चिकनाई तथा चीनी से परहेज करने वाले लोग भी क्या बर्फी, लड्डू-पेड़े के स्वाद का मजा ले सकते हैं? क्या इन लोगों को ऐसी बर्फी, लड्डू और पेड़े खाने को मिल सकते हैं, जिनमें घी, तेल और चीनी का प्रयोग ही न किया गया हो? क्या घी या तेल और चीनी के बगैर भी इस तरह की मिठाइयां बनाई जा सकती हैं? अमूमन, आपको इन सभी प्रश्नों के उत्तर तो ‘ना’ में ही मिलेंगे। लेकिन, हमीरपुर जिले के नादौन उपमंडल के एक छोटे से गांव जंदली गुजरां में आपको इस तरह की अत्यंत स्वादिष्ट, पौष्टिक गुणों से भरपूर और घी-तेल एवं चीनी से रहित मिठाइयां मिल जाएंगी।

ये गुणकारी मिठाइयां किसी बड़े उद्यम या फैक्टरी में नहीं बन रही हैं। बल्कि, एक आम ग्रामीण महिला द्वारा बनाया गया एक छोटा सा महिला स्वयं सहायता समूह ही ये मिठाइयां बना रहा है। राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह की इन गुणकारी मिठाइयों ने सिर्फ जिला हमीरपुर में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। नादौन उपमंडल के रंगस क्षेत्र के गांव जंदली गुजरां की अनीता ठाकुर ग्रामीण क्षेत्रों की आम महिलाओं की तरह ही अपना जीवन-यापन कर रही थीं। वह गाय-भैंस का दूध बेचकर हर माह कुछ आय अर्जित कर रही थी।
अपनी आय बढ़ाने के लिए उन्होंने आतमा परियोजना की मदद से छोटे पैमाने पर पनीर और खोआ का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह के गठन के लिए प्रेरित किया। अनीता ठाकुर ने राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह का गठन किया और कृषि विज्ञान केंद्र में अचार, चटनी, आंवला कैंडी और अन्य मिठाइयां बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।


