टेंडर प्रक्रिया शुरू होते ही शराब खपाने में लगे ठेकेदार के गुर्गे! राते के अंधेरे में जोरों पर तस्करी का खेल

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सरकार की नई आबकारी नीति आने के बाद मार्च-अप्रैल माह में शासकीय शराब दुकानों की टेंडर प्रकिया शुरू हो गई है। पांढुर्ना जिले को मिलाकर टोटल 117 शराब दुकान संचालित हैं। लेकिन आबकारी विभाग में दुकानों के टेंडर प्रकिया शुरू होते ही एक बार फिर शराब माफिया एक्टिव हो गया है। शहरी सहित ग्रामीण अंचलों में होने वाली शराब दुकान के ठेकेदार के गुर्गों द्वारा बीते कुछ दिनों से रोजाना ही रात और अलसुबह अपने चौपहिया वाहन से कुचियों और ढाबों में शराब की सफ्लाई अवैध रूप से की जा रही है।

दरअसल 01 अप्रैल से संचालित शराब दुकानों के ठेकेदार बदल जाएंगे। इसी को लेकर शराब दुकान में रखे स्टॉक को हर ठेकेदार अपने क्षेत्र के साथ ही अन्य ठेकेदार के क्षेत्र में कम दामों में बेच रहे हैं। यह पूरा खेल बकायदा रात के अंधेरे में किया जा है। सूत्रों की मानें तो दिन में बकायदा शराब माफिया द्वारा कितनी शराब और क्या दामों में जगह पर लाकर दी जाएगी। यह तय होता है और बकायदा ऑर्डर की गई, शराब का 50 प्रतिशत पेमेंट ऑनलाइन लिया जाता है और रात के वक्त मौके में शराब की सफ्लाई पहुंचती है। शराब माफिया के हौंसले इतने बुलंद है कि वह बेखौफ होकर नशे के कारोबार में खुल कर काम कर रहे है। ऐसा नही है कि इसकी भनक पुलिस और आबकारी विभाग को नही है। लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदारों से सांठगांठ कर ये पूरा नशे का कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। हालांकि पुलिस समय समय पर जरूर अवैध शराब बिक्री और उसके परिवहन करने वालो पर कार्यवाही करती है। लेकिन जिस आबकारी विभाग का मुख्य कार्य शराब से सम्बंधित है। वह कागजों में कार्रवाई को अंजाम दे रहा है। यह कहना गलत नही होगा कि यह पूरा खेल आबकारी अधिकारियों के आशीर्वाद से किया जा रहा है।

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