राजस्थान की मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार के फैसले को पलटते हुए नगर निगमों का विलय कर दिया है. इससे नगर निगमों की संख्या घटकर 10 हो गई है. इस पर अशोक गहलोत ने निशाना साधा है.

भजनलाल सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसले को पलटते हुए नगर निगमों की संख्या घटा दी है. अब राजस्थान में नगर निगमों की संख्या 13 से घटकर 10 हो गई है. इस फैसले पर अशोक गहलोत भड़के हुए हैं और सीएम भजनलाल को गुजरात मॉडल की याद दिला रहे हैं.
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने X पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, ” जनवरी, 2025 में गुजरात सरकार ने वहां नगर निगमों की संख्या बढ़ाते हुए 9 नए नगर निगम बनाए जिसकी वजह शहरी विकास को तेज करना बताया गया. गुजरात मॉडल को भाजपा सरकारें आदर्श मानती हैं परन्तु राजस्थान की भाजपा सरकार इस गुजरात मॉडल को पूरी तरह फेल मानती है.”
उन्होंने आगे कहा, ” इसलिए ही यहां सुनियोजित शहरी विकास के लिए जनसंख्या के अनुपात में हमारी सरकार के दौरान बनाए गए नगर निगमों, नगर पालिकाओं की संख्या को घटाया जा रहा है. ऐसा देश में संभवत: पहला उदाहरण होगा जिसमें विकास के क्रम में सरकार उल्टी दिशा में चल रही है.”
नए फैसले के तहत जयपुर, जोधपुर और कोटा में एक-एक नगर निगम ही होगा. इन तीनों शहरों में पहले दो-दो नगर निगम हुआ करते थे. इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. जयपुर में नगर निगम ग्रेटर और नगर निगम हेरिटेज का विलय किया गया है. जोधपुर और कोटा में नगर निगम उत्तर और दक्षिण का विलय कर दिया गया है. गहलोत सरकार में नगर निगमों की संख्या बढ़ाई गई थी.
अशोक गहलोत ने 2019 में नगर निगमों की संख्या बढ़ाई थी. ऐसे में नई सरकार के फैसले पर कांग्रेस का कहना है कि सरकार जनता के हितों को नजरअंदाज कर रही है. भजनलाल सरकार में केवल नगर निगमों को लेकर ही नहीं बल्कि जिलों को लेकर भी फैसले किए गए हैं. अशोक गहलोत ने पांच साल के कार्यकाल में 17 नए जिले बनाए थे जिनमें से नौ को अब खत्म किया जा चुका है. जबकि तीन संभाग भी खत्म कर दिए गए.


