प्रशांत की गिरफ्तारी से गरमाई बिहार की राजनीति, बिहार की सियासत में हलचल

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सोमवार तड़के जिला प्रशासन ने पटना के गांधी मैदान में बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर अनशन कर रहे जनसुराज नेता प्रशांत किशोर को गिरफ्तार कर लिया। पीके की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में अचानक गरमाहट आ गई है। अनशन के जरिए पीके ने छात्रों और युवाओं की समस्याओं को उठाकर उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश की थी।

क्यों किया गया प्रशांत किशोर को गिरफ्तार?
प्रशांत किशोर बीपीएससी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के विरोध में 2 जनवरी से गांधी मैदान में आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धरना स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुनें और समाधान करें। जब सीएम ने अनशन स्थल पर जाने से इनकार कर दिया, तो पीके ने सुझाव दिया कि छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल ही मुख्यमंत्री से मिले। यह प्रस्ताव भी ठुकरा दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पीके को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी बनी पीके की सियासी सफलता का आधार
पीके की गिरफ्तारी ने उनके अभियान को नई धार दी है। कभी राजनीति सिखाने वाले प्रशांत किशोर ने अपने राजनीतिक सफर में जो विराम देखा था, उसे अब यह अनशन और गिरफ्तारी संजीवनी देने का काम कर रही है। युवाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाकर उन्होंने अपनी विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करने की कोशिश की है।

क्या बदलेंगे बिहार के सियासी समीकरण?
नीतीश कुमार की सरकार ने पीके को गिरफ्तार कर उनके आंदोलन को रोकने की कोशिश जरूर की, लेकिन यह कदम पीके के पक्ष में जाता नजर आ रहा है। छात्र और युवाओं के बीच बढ़ती उनकी लोकप्रियता बिहार विधानसभा चुनाव में असर डाल सकती है।

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