जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बहुप्रतीक्षित बजट सत्र 3 मार्च, 2025 से शुरू होने वाला है। इस बजट सत्र की तैयारियां जोरों पर हैं। सत्र का उद्घाटन जम्मू में उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा करेंगे। इसके साथ ही वह सदस्यों को संबोधित करेंगे और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। अधिकारियों के अनुसार सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है।

विधानसभा परिसर के आसपास सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं। प्रतिभागियों को समायोजित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जा रहा है। सत्र में प्रमुख वित्तीय चर्चाएं और बजट पर विचार-विमर्श शामिल होगा। केंद्र शासित प्रदेश के लिए यह सत्र महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है। बजट सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब जम्मू-कश्मीर प्रशासन केंद्र शासित प्रदेश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुनियादी ढांचे के विकास, कल्याणकारी कार्यक्रमों और नीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
पर्यटन, कृषि और शिक्षा क्षेत्रों पर होगा ध्यान केंद्रित
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि बजट में पर्यटन, कृषि और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जम्मू और कश्मीर में राजनीतिक और विकासात्मक परिदृश्य में बदलाव के साथ, सभी की निगाहें विधायी कार्यवाही पर होंगी, जो जम्मू और कश्मीर में भविष्य के शासन के लिए माहौल तैयार करेगी। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नैशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के तहत यह पहला बजट पेश किया जाएगा क्योंकि उमर सरकार ने 16 अक्तूबर, 2024 को सत्ता संभाली थी, जिससे 6 साल के केंद्रीय शासन का अंत हुआ।
5 गैर निर्वाचित सदस्यों का नामांकन
हालांकि विधानसभा में 5 गैर-निर्वाचित सदस्यों का नामांकन, सत्र का एक महत्वपूर्ण पहलू अनिश्चित बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत इन सीटों के प्रावधान के बावजूद, न तो राजभवन और न ही राज्य सरकार ने उन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू की है। पुनर्गठित जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 निर्वाचित सदस्य हैं, जिसमें 5 मनोनीत सदस्यों को शामिल करने पर 95 तक विस्तार की संभावना है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, उप-राज्यपाल को महिलाओं के प्रतिनिधित्व को अपर्याप्त समझे जाने पर विधानसभा में दो महिलाओं को नामित करने का अधिकार देता है। इसके अतिरिक्त, 2023 का संशोधन तीन और सदस्यों के नामांकन की अनुमति देता है जिनमें दो कश्मीरी प्रवासी और एक महिला शामिल है, और एक पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पी.ओ.जे.के.) से विस्थापित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करेगा।
नामांकन प्रक्रिया अधर में लटकी
इस कानूनी ढांचे के बावजूद नामांकन प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। सरकार के अंदरूनी सूत्रों का सुझाव है कि इस मामले पर चर्चा रुकी हुई है। इस बारे में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है कि नामांकन केवल एल.जी. द्वारा किया जाना चाहिए या निर्वाचित सरकार की सलाह पर किया जाना चाहिए। अक्तूबर 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले ऐसी अटकलें थीं कि ये पांच मनोनीत सदस्य सत्ता के संतुलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि नैशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के समर्थन से 42 सीटों का आरामदायक बहुमत हासिल कर लिया है। पिछले नवम्बर में पहला विधानसभा सत्र जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के ईद-गिर्द घूमता रहा।


