मौसम में हुए बदलाव से जनजीवन प्रभावित, 500 से अधिक सड़कें बंद, बिजली-पानी की भी सप्लाई बाधित

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हाल ही में हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं, जब अफगानिस्तान से आ रही पश्चिमी हवाओं के साथ जमीनी स्तर से लेकर मध्य स्तर तक अधिक नमी की मात्रा ने प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात, बादल फटने और वर्षा का सिलसिला शुरू कर दिया। इससे जहां एक तरफ प्रदेश में तीन महीनों के सूखे का असर कम हुआ, वहीं दूसरी तरफ जनजीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है।

चंबा जिले के पांगी घाटी के कोकरोलू गांव में हिमस्खलन के कारण बर्फ के नीचे दबे हुए एक व्यक्ति को स्थानीय ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाला। इसी तरह, लाहुल स्पीति के दालंग क्षेत्र में भी हिमस्खलन हुआ, जिसमें दो पर्यटक बर्फ में दब गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने बहादुरी से बचाया।

वहीं, कांगड़ा के बड़ा भंगाल घाटी के लुहारड़ी क्षेत्र में बादल फटने के कारण ऊहल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे बरोट बांध के गेट खोलने पड़े। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ताजा हिमपात भी हुआ है। रोहतांग में जहां छह फीट बर्फ गिरी, वहीं अटल टनल रोहतांग में साढ़े चार फीट, कोठह में चार फीट, और किन्नौर में करीब डेढ़ फीट बर्फबारी हुई है। यह स्थिति राज्य के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

राज्य में पिछले 24 घंटों में कुल्लू जिले के सेऊबाग क्षेत्र में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भारी वर्षा और ताजा हिमपात के कारण प्रदेश भर में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जिससे पांच नेशनल हाईवे सहित 583 सड़कें बंद हो गई हैं। इन बंद सड़कों के कारण यात्रा और परिवहन की स्थिति बेहद जटिल हो गई है। इसके अलावा, 2263 ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण सैंकड़ों गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, 279 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे पानी की आपूर्ति में भी दिक्कतें आई हैं।

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