QS वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स में भारत ने बनाई खास जगह

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पहली बार जारी किए गए QS वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स में भारत को दुनिया के उन देशों में शामिल किया गया है, जो भविष्य में सबसे ज्यादा मांग वाली स्किल्स, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल और ग्रीन टेक्नोलॉजीज में रोजगार के लिए तैयार हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की और X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “यह देखकर गर्व होता है! पिछले एक दशक में, हमारी सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें नवाचार एवं उद्यमिता में आगे बढ़ाने पर काम किया है। इस इंडेक्स से प्राप्त जानकारी हमारे लिए बेहद उपयोगी है क्योंकि हम युवा सशक्तिकरण और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

QS वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स: मुख्य पैरामीटर

यह इंडेक्स चार मुख्य बिंदुओं पर देशों का आकलन करता है:

  • स्किल्स फिट: शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच तालमेल।
  • अकादमिक रेडीनेस: भविष्य की इंडस्ट्री की मांगों के लिए शिक्षा प्रणाली की तैयारी।
  • फ्यूचर ऑफ वर्क: नौकरी बाजार की बदलती जरूरतों के प्रति तत्परता।
  • इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन: कौशल आधारित औद्योगिक विकास के लिए देश की क्षमता।
भारत की रैंक और प्रदर्शन
  • QS इंडेक्स में भारत को कुल मिलाकर 25वीं रैंक मिली है और इसे “फ्यूचर स्किल्स कंटेंडर” के रूप में पहचान दी गई है।
  • फ्यूचर ऑफ वर्क पैरामीटर में भारत को दुनिया में दूसरी सर्वोच्च रैंक (99.1) मिली, जो केवल अमेरिका से कम है।
  • रिपोर्ट ने भारत की AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने की क्षमता की सराहना की है।
भारत के सुधार और चुनौतियां

हालांकि भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है, रिपोर्ट में सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की ओर भी इशारा किया गया:

  • उच्च शिक्षा प्रणाली और उद्योग सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत।
  • डिजिटल, AI और ग्रीन स्किल्स में स्नातकों को बेहतर तरीके से तैयार करना।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत वयस्क शिक्षा पाठ्यक्रम विकसित करना।
भविष्य की संभावनाएं

QS के उपाध्यक्ष Matteo Quacquarelli ने कहा, “भारत की युवा जनसंख्या और स्टार्टअप संस्कृति इसे वैश्विक स्तर पर मजबूत बना रही है। GDP की तेजी से वृद्धि और तकनीकी नवाचार इसे दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर रहे हैं।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025-2030 के बीच भारत की अर्थव्यवस्था औसतन 6.5% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ेगी। इस प्रगति के साथ, देश के छात्रों और श्रमिकों को नई स्किल्स से लैस करना जरूरी होगा ताकि वे बदलती वैश्विक जरूरतों के अनुरूप बने रह सकें।

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