जेल में बैठकर चुनाव लड़ना हुआ आसान, Supreme Court ने इस मुद्दे पर की तीखी टिप्पणी

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सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की बात कही है। हाल ही में कोर्ट ने इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि जेल में रहकर चुनाव लड़ना अब एक सामान्य बात बन चुकी है जो सही नहीं है। यह टिप्पणी तब आई जब दिल्ली विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार ताहिर हुसैन की याचिका पर सुनवाई हो रही थी। ताहिर हुसैन पर दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है।

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जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करनी थी लेकिन सुनवाई टल गई। ताहिर हुसैन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल ने मंगलवार को फिर से सुनवाई की मांग की। इस पर जस्टिस मित्तल ने कहा कि आजकल जेल में रहकर चुनाव जीतना बहुत आसान हो गया है और इससे रोकना चाहिए। ताहिर हुसैन के वकील ने कहा कि उनका नामांकन पहले ही स्वीकार किया जा चुका है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई मंगलवार को तय की।

वहीं ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद के रूप में पहचान मिली है और अब उन्हें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मुस्तफाबाद सीट से टिकट दिया है। ताहिर ने हाई कोर्ट से चुनाव प्रचार के लिए जमानत मांगी थी और उन्हें कस्टडी पैरोल मिल गया था ताकि वह नामांकन भर सकें। इसके पहले, जम्मू कश्मीर में भी एक नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी और ताहिर ने इसी आधार पर जमानत मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेल में रहकर चुनाव लड़ना और जीतना एक असामान्य स्थिति बन चुकी है और इसे रोकना चाहिए ताकि यह प्रक्रिया पारदर्शी और उचित बनी रहे।

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