NATIONAL : धराली आपदा में लापता 67 लोगों का जारी होगा मृत्यु प्रमाण पत्र, केंद्र सरकार से मिली मंजूरी

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उत्तराखंड के धारली में आई आपदा के बाद अभी तक 67 लोगों का कोई पता नहीं लग पाया है. ऐसे में उन सभी के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है. इसके बाद अब उन 67 लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा. उत्तराखंड के धारली में 5 अगस्त को आई आपदा के बाद से 67 लोग अभी तक लापता हैं. यह आपदा उत्तरकाशी के धारली में आई थी, जहां खीर गंगा में मलबा आने से वहां सब कुछ उसमें ही दफन हो गया था, जिसमें 67 लोग लापता हैं. 51 दिन बीत जाने के बाद भी इन लोगों का कोई सुराग नहीं लग पाया है.

बता दें कि उत्तरकाशी जिले के धरौली व हर्षिल में आई आपदा में लापता लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. शासन ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया के लिए अभिहित व अपीलीय अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं. मृत्यु पंजीकरण के बाद लापता लोगों के परिवार को आपदा राहत के तहत आर्थिक सहायता मिल सकेगी. 5 अगस्त को धरौली आपदा में खीर गंगा में आए मालवा में सब कुछ दफन हो गया था. आपदा में 67 लोग लापता थे. लगभग 51 दिन बीत जाने के बाद भी आज तक उनका कोई पता नहीं लग पाया है.

राज्य सरकार ने आपदा में लापता लोगों का मृत्यु प्रमाण पत्र व उनका पंजीकरण करने के लिए मानकों में छूट देने के लिए गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था. महारजिस्ट्रार गृह मंत्रालय ने लापता लोगों का मृत्यु पंजीकरण करने की अनुमति दे दी है. सचिव स्वास्थ्य डॉक्टर आर. राजेश कुमार ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के धारली व हर्षिल में आई आपदा में लापता लोगों के मृत्यु पंजीकरण के लिए भीम के लिए उप जिला अधिकारी को नियुक्त किया गया है. वह जिला अधिकारी को अपीलीय अधिकारी नामित किया गया है. जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 के तहत लापता लोगों को 7 साल के बाद ही मृत घोषित करने का प्रावधान है.

चमोली जिले के रेडी में 2021 में आपदा में सैकड़ों मजदूर लापता हो गए थे. उस समय भी केंद्र सरकार ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में छूट दी थी. अब गृह मंत्रालय की 2021 की तर्ज पर ही धारली आपदा में लापता लोगों का मृत्यु पंजीकरण करने की अनुमति दी गई है.

आपदा में लापता लोगों की मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सबसे पहले प्रश्न का मूल निवास वाले स्थान पर लापता व्यक्ति की शिकायत दर्ज करनी होगी. इसके बाद शिकायत को घटा वाले क्षेत्र के प्रोग्राम मजिस्ट्रेट यानी सीएम के पास भेजा जाएगा. लापता व्यक्ति के बारे में कोई आपत्ति न मिलने पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा. मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही परिजनों को आपदा राहत के तहत आर्थिक सहायता मिल सकेगी. उत्तराखंड के कई इलाकों में आई आपदा के बाद से कई लोग लापता हैं. इस प्रकार के केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास से लोगों को बेहद राहत मिलने की उम्मीद है.

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