पंजाब में लागू होने जा रही नई शराब नीती, जानें क्या आएगा बदलाव

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पंजाब सरकार राज्य की नई आबकारी नीति बनाने में जुट गई है और शराब नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राज्य सरकार को अगले वित्त वर्ष के दौरान आबकारी राजस्व में 6 से  7 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। आबकारी नीति तैयार करने के लिए 4 सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति की कल तीसरी बैठक हुई। कैबिनेट उप-समिति की अंतिम बैठक 2 दिन में होने की उम्मीद है।

नई आबकारी नीति को अभी मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से हरी झंडी मिलनी बाकी है। सूत्रों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए आबकारी राजस्व लक्ष्य 10,145 करोड़ रुपए है और राज्य सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए यह लक्ष्य 11,000 करोड़ रुपए तक निर्धारित कर सकती है। पंजाब सरकार करीब एक हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रही है। चालू वित्त वर्ष में जनवरी तक राज्य सरकार को आबकारी राजस्व के रूप में 8584.33 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा मार्च तक लक्ष्य पार कर लेने की संभावना है। आबकारी विभाग इस बात से संतुष्ट है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान मोहाली, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला और रोपड़ में शराब की रिकॉर्ड बिक्री हुई है, जिससे आबकारी राजस्व में बढ़ोतरी हुई है।

उल्लेखनीय है कि कैबिनेट सब-कमेटी में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कुलदीप सिंह धालीवाल, हरभजन सिंह ईटीओ और तरुणप्रीत सिंह सौंद शामिल हैं। समिति राज्य की आबकारी नीति को अंतिम रूप दे रही है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब सरकार नए वित्त वर्ष से शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने की तैयारी में है। नई शराब नीति फरवरी के अंत में होने वाली कैबिनेट बैठक में पेश की जाएगी। यह भी पता चला है कि शराब ठेकेदार टैंडर आधारित प्रणाली का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे एकाधिकार पैदा हो जाएगा। शराब के लिए खुले कोटे का भी विरोध हो रहा है, क्योंकि बाजार में शराब की अधिक आपूर्ति के कारण उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे न केवल कीमतों को लेकर विवाद पैदा होगा, बल्कि पंजाब से दूसरे राज्यों में शराब की तस्करी का रास्ता भी खुल जाएगा।

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