भारत में 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का ट्रायल जल्द शुरू हो सकता है. केंद्र सरकार ने RBI के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल कागज के नोट बंद करने की कोई योजना नहीं है.
भारत में जल्द ही प्लास्टिक जैसे दिखने वाले पॉलिमर बैंक नोट चलन में आ सकते हैं. केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट फील्ड ट्रायल के लिए जारी किए जाएंगे. यह भारत में पॉलिमर नोट लाने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है.
लोकसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि RBI इन नोटों को पहले सीमित स्तर पर जारी करेगा. ट्रायल का मकसद यह जांचना है कि भारत की अलग-अलग जलवायु और इस्तेमाल की परिस्थितियों में ये नोट कितने टिकाऊ और उपयोगी साबित होते हैं. अगर परीक्षण सफल रहता है, तभी इन्हें बड़े पैमाने पर जारी करने पर विचार किया जाएगा.
क्यों खास हैं पॉलिमर नोट? RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं. ये जल्दी फटते नहीं हैं, पानी और गंदगी का असर भी इन पर कम पड़ता है. दुनिया के कई देशों में पहले से ही पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और वहां इनकी लाइफ पारंपरिक नोटों से अधिक पाई गई है. ऐसे में भारत जैसे देश, जहां नकदी का इस्तेमाल अभी भी बड़े पैमाने पर होता है, वहां ये नोट ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं.
क्या बंद हो जाएंगे कागज के नोट? सरकार ने इस बात को लेकर किसी भी तरह की आशंका को खारिज कर दिया है. वित्त राज्य मंत्री ने साफ कहा है कि फिलहाल कागज के नोटों को बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. पॉलिमर नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही चलन में रहेंगे. यानी लोगों को अपने पास मौजूद कागजी नोट बदलवाने की जरूरत नहीं होगी.
डिजिटल पेमेंट पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पॉलिमर नोट आने से डिजिटल भुगतान पर कोई असर पड़ेगा. इसका सही आकलन तभी किया जा सकेगा, जब ये नोट नियमित रूप से बाजार में चलने लगेंगे. केंद्रीय बैंक का मानना है कि नकद भुगतान और डिजिटल पेमेंट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और भविष्य में भी दोनों साथ-साथ चलते रहेंगे.
अगर फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीयों की जेब में पारंपरिक कागज के नोटों के साथ नए पॉलिमर नोट भी दिखाई दे सकते हैं. इससे नोटों की टिकाऊ क्षमता बढ़ेगी और उन्हें बार-बार बदलने की जरूरत भी कम होगी.
जोधपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। शहर के निकटवर्ती डांगियावास स्थित आसरनाडा रेलवे स्टेशन के पास में एक युवक चलती ट्रेन से नीचे गिर गया। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, मगर बाद में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को कार्रवाई के उपरांत परिजन के सुपुर्द किया।
डांगियावास पुलिस ने बताया कि डीडवाना जिले के खंगार निंबी जोधा निवासी 36 साल का नेपाल सिंह पुत्र अर्जुन सिंह ट्रेन से अपने घर की तरफ लौट रहा था। आसरनाडा रेलवे स्टेशन के समीप ट्रेन के पहुंचने पर वह टे्रन से नीचे गिर गया और वह बुरी तरह घायल हो गया। उसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई। उसके भाई मीठूसिंह ने मर्ग में रिपोर्ट दी है।
कारगिल विजय दिवस पर पीएम मोदी ने देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन विजय के वीरों के अदम्य पराक्रम की बदौलत भारत ने कारगिल युद्ध में ऐतिहासिक जीत हासिल की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कारगिल विजय दिवस पर कहा कि अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारत के वीर सैनिकों द्वारा प्रदर्शित अदम्य साहस सदैव राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। मोदी ने कहा कि भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असाधारण वीरता और समर्पण का परिचय देने वाले वीर सैनिकों के प्रति देश अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ’’अत्यंत विषम परिस्थितियों में उनके अदम्य साहस का प्रदर्शन सदैव राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। देशभक्ति की उनकी अटूट भावना और कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।’’ कारगिल विजय दिवस ’ऑपरेशन विजय’ के वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और अटूट संकल्प को सम्मान देने का अवसर है। यह दिवस कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय की स्मृति में मनाया जाता है और देश की संप्रभुता की रक्षा करने वाली अदम्य राष्ट्रीय भावना का उत्सव है।
कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को 1999 में ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता की याद में मनाया जाता है। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने कारगिल जिले में पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों के कब्जे वाले भारतीय इलाकों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। यह दिन देश के वीर जवानों के साहस, बलिदान और अदम्य शौर्य को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।
सीजेपी का आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन जंतर-मंतर पर अभी भी हलचल बनी हुई है। कई प्रदर्शनकारी अब भी मौके पर डटे हैं, कुछ समर्थक रात बिताने की तैयारी में हैं। मंच हटाने और साफ-सफाई का काम जारी है। आखिर आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर का क्या है मौजूदा हाल, पढ़िए पूरी खबर।
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शन स्थल पर पूरी तरह सन्नाटा नहीं पसरा है। कई समर्थक अब भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। शनिवार देर शाम तक मंच हटाने और पूरे इलाके में साफ-सफाई का काम जारी रहा। आंदोलन की सफलता की खुशी में समर्थकों ने केक काटकर जश्न भी मनाया।
हालांकि, अधिकांश प्रदर्शनकारी अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं, लेकिन अभी बड़ी संख्या में समर्थक अभी भी जंतर-मंतर रोड के फुटपाथ पर टेंट लगाकर और गद्दे बिछाकर रात बिताने की तैयारी करते दिखाई दिए। उनका कहना है कि वे रविवार सुबह ट्रेन से अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगे।
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिला। प्रदर्शन स्थल से अधिकांश सुरक्षाकर्मी हट चुके हैं, जबकि जंतर-मंतर की ओर आने वाले प्रमुख रास्तों पर एहतियातन पुलिस बल की तैनाती अभी भी बनी हुई है।
उधर, सीजेपी द्वारा आंदोलन वापस लेने के बाद जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा भी बहाल कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने भी सभी मेट्रो स्टेशनों पर सामान्य यात्री सेवाएं शुरू कर दी हैं। डीएमआरसी के अनुसार, दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अब पूरी तरह खुले हैं।
गौरतलब है कि सरकार से प्रमुख मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया। यह आंदोलन एक महीने से अधिक समय तक चला, जिसकी सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल भी की। अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा था कि परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे का ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग न हो, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया।
सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान शनिवार दोपहर को सीजेपी पदाधिकारियों व केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच अंतिम दौर की बात होनी थी, बावजूद इसके प्रदर्शनकारियों का हुड़दंग रुका नहीं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने अचानक पत्थरबाजी शुरू कर दी। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल पत्थरबाजों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। फिर हल्का लाठीचार्ज किया।
पत्थरबाजी में दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला और एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गए। वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से किए जा रहे हंगामे को बढ़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की। इससे पहले सोमवार, मंगलवार और बुधवार को भी जंतर-मंतर के पास जमकर बवाल हुआ था।
सीपी से लेकर एनडीएमसी सेंटर तक प्रदर्शनकारियों का कब्जा था। शनिवार दोपहर करीब 2 बजे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था। देश भक्ति के गीत चल रहे थे और प्रदर्शनकारी भारत माता के नारे लगा रहे थे। उस समय कनॉट प्लेस की तरफ से प्रदर्शनकारियों का एक समूह आया।
करीब दो बजे एनडीएमसी बिल्डिंग चौराहे के पास प्रदर्शनकारियों ने अचानक नारेबाजी करने के दौरान पहले पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतल और चप्पल-जूते फेंके और फिर पथराव शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी करीब 15 मिनट तक पत्थरबाजी करते रहे। पुलिस को स्थिति को संभालने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इससे कुछ प्रदर्शनकारी युवतियां मामूली रूप से घायल हो गईं। अन्य प्रदर्शनकारी एक युवती को पानी पिलाते और उनके ऊपर पानी डालते दिखे।
विशेष पुलिस आयुक्त को मौके पर दिया गया उपचार दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार विशेष पुलिस आयुक्त शुक्ला ने हेलमेट पहना हुआ था। पत्थरबाजी के दौरान एक पत्थर उनके हेलमेट से नीचे गर्दन पर लगा, जबकि दूसरा उनके हाथ में लगा। उसके बावजूद वह जंतर-मंतर पर डटे रहे। अमर उजाला संवाददाता ने देखा कि उनका स्टाफ उन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दे रहा था। हालांकि विशेष पुलिस आयुक्त व एसआई के अलावा काफी पुलिसकर्मियों को चोटें लगी हैं। गोविंदपुरी थानाध्यक्ष उमेश यादव को पैर में, एसीपी अनिल शर्मा को पैरों में व डीसीपी जसबीर को हाथों में चोटें लगी हैं।
प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर पथराव केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद जंतर-मंतर पर पथराव शुरू हो गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का लाठीचार्ज किया।
जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के चलते नई दिल्ली के इलाके में भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम की स्थिति रही। दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली के इन इलाकों में भारी भीड़ ट्रैफिक कंजेशन को देखते हुए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की थी। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि वे फिलहाल नई दिल्ली की ओर जाने से बचें। पुलिस के मुताबिक, इलाके में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है और कई मार्गों पर जाम की स्थिति बनी हुई है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी केवल आदेश नहीं मानती, बल्कि हर बात का तर्क चाहती है। उन्होंने युवाओं के साथ संवाद, अपनापन और सही उदाहरण पेश करने पर जोर दिया।
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर एवं देश के बाकी हिस्सों में जारी प्रदर्शनों के बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर बड़ा संदेश दिया है। भागवत ने शनिवार को दिल्ली में कहा कि आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए।
मोहन भागवत शनिवार को विश्व मांगल्य सभा द्वारा ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज के युवाओं का स्वभाव पहले की पीढ़ी से अलग है। नई पीढ़ी का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पहले के समय में माता-पिता की बात बिना किसी सवाल के मान ली जाती थी।
उन्होंने कहा, ‘जब हम छोटे थे तो माता-पिता जो कहते थे, वही अंतिम होता था। कोई बहस नहीं होती थी। श्रद्धा थी और प्रतिक्रिया भी नहीं होती थी। लेकिन अब समय बदल गया है। नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उन्हें हर बात का तर्क बताना पड़ता है।’ बता दें कि उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर GenZ में नाराजगी देखने को मिल रही है।
भागवत ने कहा कि आज का माहौल भौतिक साधनों और प्रचार से काफी प्रभावित है। ऐसे में युवाओं को भ्रम और गलत सूचनाओं से बाहर निकालने की जरूरत है। भागवत ने कहा, ‘नई पीढ़ी को बहुत अपनापन देने की जरूरत है, उन्हें समय देने की जरूरत है और सबसे ज्यादा संवाद की जरूरत है। आज डिक्टेशन नहीं, डिस्कशन की जरूरत है। ऑर्डर नहीं, कॉन्शसनेस (जागरूकता) की जरूरत है।’
RSS प्रमुख ने कहा कि आज परिवारों में आपसी बातचीत पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। उनका मानना है कि बच्चों और युवाओं के साथ नियमित संवाद ही उन्हें सही दिशा दे सकता है। भागवत ने कहा कि केवल आदेश देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि परिवार और समाज को युवाओं के साथ समय बिताना होगा और उनकी बात भी सुननी होगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी को लेकर यह धारणा सही नहीं है कि वह पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने कहा, ‘अगर समाज में लोग अपने जीवन से अच्छे और प्रमाणिक उदाहरण पेश करेंगे, तो उसका असर नई पीढ़ी पर जरूर पड़ेगा। नई पीढ़ी को सही आदर्श नहीं मिलते। जहां उन्हें अच्छे और सच्चे उदाहरण मिलते हैं, वहां वे समाज के लिए अपना जीवन तक समर्पित कर देते हैं।’
देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। असम के 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जहां 7.21 लाख लोग प्रभावित और 6 लोगों की मौत हुई है। राहत-बचाव अभियान जारी है। वहीं, गुजरात में भी मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पढ़ें पूरी खबर..
देश के कई हिस्सें में भारी बारिश हो रही है। कई जगह बारिश के पानी में गाड़ियां बह गई है। असम के कई हिस्से बाढ़ के कारण अभी भी जलमग्न हैं। अधिकारियों ने बताया कि 11 जिले बाढ़ की चपेट में आए हैं। इससे 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, मरने वालों की संख्या 47 हो गई है।
बाढ़ की वजह से कितना नुकासान हुआ? असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित जिले गोलाघाट, होजई, कामरूप, चराइदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, शिवसागर, नागांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया हैं। कुल 37 राजस्व सर्कल और 883 गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि बाढ़ के कारण 25,375.44 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है।
बाढ़ का समसे ज्यादा असर क्या हुआ? अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ का सबसे गंभीर असर शिवसागर जिले में देखा गया है, जहां 3,75,682 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद चराइदेव में 1,86,351 और जोरहाट में 1,15,764 लोग प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पुष्टि की कि अब तक बाढ़ के कारण 47 लोगों की मौत हुई है। शिवसागर में 4, जबकि चराइदेव जिले में दो लोग बाढ़ की चपेट में आए। बाढ़ की ताजा रिपोर्ट में किसी के लापता होने की सूचना नहीं है।
कितने लोगो को राहत वितरण केंद्रों पर पहुंचाया गया है? प्रशासन ने प्रभावित जिलों में राहत सुविधाएं शुरू की हैं। अभी 103 राहत शिविर और 255 राहत वितरण केंद्र चल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि 24,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि 2.39 लाख से अधिक लोगों को राहत वितरण केंद्रों के जरिए मदद मिली है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि सबसे अधिक प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, अग्निशमन व आपातकालीन सेवाएं और जिला प्रशासन की टीमें राहत व बचाव अभियान में जुटी हैं।
गुजरात में क्या हाल है? वहीं, गुजरात में मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर हैं और सड़कें पानी में डूब चुकी हैं। राहत और बचाव दल लगातार लोगों की जान बचाने में लगे हैं। वाव-थराद जिले के भाभर शहर में जोरदार बारिश हुई। लाटी बाजार इलाके में दुकानों के अंदर बाढ़ का पानी घुस गया।
केंद्र से मदद की गारंटी और मौसम का अलर्ट? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बात की है। उन्होंने राज्य के हालात की जानकारी ली और हर संभव मदद का भरोसा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री से बात कर जरूरी सहायता देने की बात कही है। सूरत में भी 2,200 लोगों को शेल्टर होम में शिफ्ट किया गया है।
ट्रंप ने कराया सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता, प्रिंस सलमान को इजरायल से नहीं, इस देश से ज्यादा डर
सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते की खूब चर्चा हो रही है। इस समझौते में एक देश पर हमले को दूसरे देश पर हमला बताया गया है। कहा जा रहा है कि सऊदी अरब को इजरायल के हमले का खतरा है। एक पाकिस्तानी प्रोफेसर ने यह बताया है कि इस समझौते को अमेरिका की मंजूरी से लागू किया गया है।
लंदन: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार को रियाद में एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस सौदे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता 9 सितंबर को कतर पर हुए इजरायली हवाई हमले के लगभग 10 दिन बाद हुआ, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया। कई रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया कि इस समझौते से भारत और इजरायल को खतरा बढ़ गया है। हालांकि, पाकिस्तानी की रहने वाली किंग्स कॉलेज लंदन में डिपार्टमेंट ऑफ वार स्टडीज में सीनियर फेलो आयशा सिद्दीका ने बताया है कि सऊदी अरब ने यह सौदा ईरान को ध्यान में रखते हुए किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सौदे को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है।
दि प्रिंट में लिखे एक लेख में आयशा सिद्धीका ने कहा, इस समझौते के समय ने पाकिस्तान में दो व्यापक प्रभाव पैदा किए हैं। पहला यह कि इजरायली आक्रमण से भयभीत और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए अमेरिका पर भरोसा न करने वाला सऊदी अरब सुरक्षा के लिए पाकिस्तान की ओर देखने लगा है। और दूसरा, यह कि यह समझौता एक व्यापक सुरक्षा समझौते की ओर ले जा सकता है जिसमें पाकिस्तान मध्य पूर्व में शांति का गारंटर बन सकता है। ऐसी धारणाएं, निश्चित रूप से, भारत के साथ हाल ही में युद्ध की स्थिति के बाद, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “पांच जेट” मार गिराए जाने के बयान के बाद, पाकिस्तान के आत्मविश्वास के अनुमानों पर आधारित हैं.
उन्होंने कहा कि तीन बातें ध्यान रखने योग्य हैं। पहला, पाकिस्तान दशकों से सऊदी अरब की मदद करता रहा है। दूसरा, यह वास्तव में इजरायल का नहीं, बल्कि ईरान का मामला है। और तीसरा, इस कदम को संभवत अमेरिका की मौन स्वीकृति प्राप्त है। उनके इस बयान का आधार यह भी है कि अमेरिका कभी भी ऐसा नहीं करेगा, जिसका नकारात्मक असर इजरायल पर पड़े। अमेरिका और इजरायल पक्के दोस्त हैं। कतर भी अमेरिका का खास है। इसके बावजूद अमेरिका ने इजरायली हमले को लेकर कतर का समर्थन नहीं किया। यह बताता है कि अगर सऊदी अरब अकेले अपने दम पर यह समझौता करता तो अमेरिका जरूर इसमें अड़ंगा लगाता।
सऊदी पाकिस्तान में पुराने संबंध
इस समझौते में बहुत कुछ नया नहीं है, जैसा पाकिस्तानी राजनेता ढोल पीट रहे हैं। पाकिस्तान 1980 के दशक से सऊदी अरब को सैन्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है। इसमें सिर्फ नया शब्द रणनीतिक है, जो कथित तौर पर परमाणु सुरक्षा से जुड़ा है। यह कुछ ऐसा है, जिसे सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान से चाहता रहा है। दरअसल, पाकिस्तान ने 1960 के दशक से ही सऊदी राजशाही को सुरक्षित रखा है। ब्रिटिश राष्ट्रीय अभिलेखागार के गोपनीय आंकड़ों के अनुसार, एक दौरे पर आए जनरल शेर अली खान पटौदी ने सऊदी अरब को उनके तत्कालीन मिस्र के प्रशिक्षकों के अहंकार से अवगत कराया और उन्हें पाकिस्तान की सेना पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद जनरल अयूब खान के नेतृत्व में एक छोटी टुकड़ी भेजी गई, जिन्हें सऊदी अरब ने अपनी टुकड़ी से अहमदिया अधिकारियों को वापस बुलाने के लिए कहा, जिसका
सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते की खूब चर्चा हो रही है। इस समझौते में एक देश पर हमले को दूसरे देश पर हमला बताया गया है। कहा जा रहा है कि सऊदी अरब को इजरायल के हमले का खतरा है। एक पाकिस्तानी प्रोफेसर ने यह बताया है कि इस समझौते को अमेरिका की मंजूरी से लागू किया गया है।
लंदन: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार को रियाद में एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस सौदे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता 9 सितंबर को कतर पर हुए इजरायली हवाई हमले के लगभग 10 दिन बाद हुआ, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया। कई रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया कि इस समझौते से भारत और इजरायल को खतरा बढ़ गया है। हालांकि, पाकिस्तानी की रहने वाली किंग्स कॉलेज लंदन में डिपार्टमेंट ऑफ वार स्टडीज में सीनियर फेलो आयशा सिद्दीका ने बताया है कि सऊदी अरब ने यह सौदा ईरान को ध्यान में रखते हुए किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सौदे को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है।
दि प्रिंट में लिखे एक लेख में आयशा सिद्धीका ने कहा, इस समझौते के समय ने पाकिस्तान में दो व्यापक प्रभाव पैदा किए हैं। पहला यह कि इजरायली आक्रमण से भयभीत और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए अमेरिका पर भरोसा न करने वाला सऊदी अरब सुरक्षा के लिए पाकिस्तान की ओर देखने लगा है। और दूसरा, यह कि यह समझौता एक व्यापक सुरक्षा समझौते की ओर ले जा सकता है जिसमें पाकिस्तान मध्य पूर्व में शांति का गारंटर बन सकता है। ऐसी धारणाएं, निश्चित रूप से, भारत के साथ हाल ही में युद्ध की स्थिति के बाद, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “पांच जेट” मार गिराए जाने के बयान के बाद, पाकिस्तान के आत्मविश्वास के अनुमानों पर आधारित हैं.
उन्होंने कहा कि तीन बातें ध्यान रखने योग्य हैं। पहला, पाकिस्तान दशकों से सऊदी अरब की मदद करता रहा है। दूसरा, यह वास्तव में इजरायल का नहीं, बल्कि ईरान का मामला है। और तीसरा, इस कदम को संभवत अमेरिका की मौन स्वीकृति प्राप्त है। उनके इस बयान का आधार यह भी है कि अमेरिका कभी भी ऐसा नहीं करेगा, जिसका नकारात्मक असर इजरायल पर पड़े। अमेरिका और इजरायल पक्के दोस्त हैं। कतर भी अमेरिका का खास है। इसके बावजूद अमेरिका ने इजरायली हमले को लेकर कतर का समर्थन नहीं किया। यह बताता है कि अगर सऊदी अरब अकेले अपने दम पर यह समझौता करता तो अमेरिका जरूर इसमें अड़ंगा लगाता।
सऊदी पाकिस्तान में पुराने संबंध
इस समझौते में बहुत कुछ नया नहीं है, जैसा पाकिस्तानी राजनेता ढोल पीट रहे हैं। पाकिस्तान 1980 के दशक से सऊदी अरब को सैन्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है। इसमें सिर्फ नया शब्द रणनीतिक है, जो कथित तौर पर परमाणु सुरक्षा से जुड़ा है। यह कुछ ऐसा है, जिसे सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान से चाहता रहा है। दरअसल, पाकिस्तान ने 1960 के दशक से ही सऊदी राजशाही को सुरक्षित रखा है। ब्रिटिश राष्ट्रीय अभिलेखागार के गोपनीय आंकड़ों के अनुसार, एक दौरे पर आए जनरल शेर अली खान पटौदी ने सऊदी अरब को उनके तत्कालीन मिस्र के प्रशिक्षकों के अहंकार से अवगत कराया और उन्हें पाकिस्तान की सेना पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद जनरल अयूब खान के नेतृत्व में एक छोटी टुकड़ी भेजी गई, जिन्हें सऊदी अरब ने अपनी टुकड़ी से अहमदिया अधिकारियों को वापस बुलाने के लिए कहा, जिसका
पालघर, 23 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के तटीय जिले पालघर में भारी बारिश के कारण डहाणु और तलासरी तहसीलों के कई गांवों का संपर्क कट गया है। निचले इलाकों में पानी भरने और बिजली गुल होने के कारण बृहस्पतिवार को व्यापक स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि आपदा राहत दलों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 218 परिवारों के 891 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है, जबकि लगभग दो लाख लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं।
जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने बताया कि जिले में बुधवार रात से ही मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे डहाणु और तलासरी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।उन्होंने बताया कि जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को बृहस्पतिवार को बंद रखने के निर्देश दिए गए थे।जिलाधिकारी ने बताया, ‘तलासरी और डहाणु में राहत एवं बचाव कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया गया है।’
उन्होंने बताया कि वसई-विरार महानगरपालिका के आपातकालीन राहत दल और भारड़ (चारोटी) स्थित स्थानीय बचाव दल भी फंसे हुए लोगों की मदद कर रहे हैं। जिलाधिकारी जाखड़ के अनुसार, जिले के एक नाले में एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ है। मृतक की पहचान की कोशिश की जा रही है।कुर्जे और धामणी बांध पूरी तरह भर जाने के कारण उनसे पानी छोड़ा जा रहा है।जिलाधिकारी ने कहा, ‘नहरों के किनारे बसे सभी गांवों को अत्यधिक सतर्क रहने को कहा गया है और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।’
इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना किसी जरूरी काम के यात्रा न करें और जलभराव वाले रास्तों, पुलों तथा उफान पर मौजूद नदी-नालों से दूर रहें।बाढ़ के कारण बिजली ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे लगभग दो लाख आबादी अंधेरे में डूब गई है।महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के कल्याण क्षेत्र के उप मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अजीत इगतपुरीकर ने एक बयान में बताया कि बाढ़ का पानी 17 बिजली उपकेंद्रों में घुस गया, जिसके कारण सुरक्षा के तौर पर अधिकारियों को 106 बिजली आपूर्ति लाइनों को बंद करना पड़ा।
डोलरपाड़ा और बोर्डी में बिजली उपकेंद्र पूरी तरह से पानी में डूब गए। डोलरपाड़ा उपकेंद्र में रात भर फंसे रहे एक संचालक और सुरक्षा गार्ड को बृहस्पतिवार सुबह स्थानीय ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाला।बयान में कहा गया है कि बिजली कंपनी एनडीआरएफ के साथ मिलकर काम कर रही है और जलभराव वाले क्षेत्रों में नावों के जरिए डूबे हुए बिजली संयंत्रों व उपकरणों की जांच की जा रही है। पूरे जिले में कुल 16 ऊंचे और 13 छोटे बिजली के खंभे उखड़ गए हैं।
एमएसईडीसीएल के मुख्य अभियंता चंद्रमणि मिश्रा ने भरोसा दिया कि बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी ठाणे जिले के बदलापुर और वांगणी में भी भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ है, जहां 27 बिजली के खंभे गिर जाने से बुधवार शाम से लगभग 27 हजार उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति बाधित है।
ठाणे नगर निगम के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रमुख यासीन तड़वी ने बताया कि ठाणे शहर में बृहस्पतिवार सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों के दौरान 99.32 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस मानसून सीजन में अब तक कुल 1,893.78 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जो पिछले साल इसी अवधि में हुई 1,270.48 मिलीमीटर बारिश से काफी अधिक है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा से स्वीकार कर लिया है। साथ ही नए शिक्षा मंत्री की भी नियुक्ति कर दी गई है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के चंद घंटे बाद ही प्रह्लाद जोशी को नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया है।
नीट एग्जाम पेपर लीक विवाद के चलते धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के चंद घंटे बाद ही नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम की घोषणा कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद आज शाम एक बयान में प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने की की पुष्टि हो गई है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर, भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री की सलाह पर, राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के अलावा शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा जाए।
प्रह्लान जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे, जबकि मां मालतीबाई गृहणी थीं। प्रह्लाद जोशी, कर्नाटक के धारवाड़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं। वे पांच बार सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं। यानी नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पास अभी नवीकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है।
इससे पहले वे कोयला, खान और संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर, जोशी स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की केंद्र की कोशिशों का नेतृत्व कर रहे हैं। अपने मंत्रालय को लेकर उनका मुख्य लक्ष्य 2030 तक 500 GW नवीकरणीय और गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य पाना है।
साधारण परिवार से आने वाले प्रह्लाद जोशी की स्कूलिंग रेलवे स्कूल और हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ से संबंद्ध के.एस, आर्ट्स कॉलेज, हुबली से बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की। रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेज के दिनों में ही वे सामाजिक कार्यों और जनहित मुद्दों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आगे चलकर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में एक्टिव हो गए।
एक तरफ हुबली में एक छोटा इंडस्ट्रियल बिजनेस चलाया और दूसरी तरफ RSS से जुड़ गए। हुबली में 1992–1994 ईदगाह मैदान तिरंगा आंदोलन का नेतृत्व किया था। कर्नाटक में ‘कश्मीर बचाओ आंदोलन’ का नेतृत्व किया। इसके बाद 1998 में BJP के धारवाड़ जिला अध्यक्ष का पद दिया गया है। इसके 6 साल बाद यानी 2004 में धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
इसी सीट से लगातार चार और बार (2009, 2014, 2019, 2024) जीत हासिल की। हालांकि इस बीच वे 2014 से 2016 तक कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे और 2019 से 2024 तक संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री बने।
नए शिक्षा मंत्री के पद पर नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब शिक्षा मंत्रालय NEET-UG विवाद के बाद बड़े सुधार लागू कर रहा है। इन सुधारों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन, पेपर लीक रोकने के लिए कड़े उपाय और 2027 से NEET के लिए कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली अपनाना शामिल है।
बता दें कि नीट पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर आज पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली के जंतर मंतर और देशभर के अलग-अलग राज्यों में परीक्षाओं में गड़बड़ियों के चलते काफी दिनों से शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।
विरोध प्रदर्शन के 35वें दिन अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने देश-विरोधी ताकतों को स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा, ‘चार दशकों से जयादा समय से मैंने खुद को छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा में सुधार के काम के लिए समर्पित किया है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव होती है।’
इस्तीफे के कुछ घंटों बाद, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि केंद्र द्वारा उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने ‘अच्छी नीयत’ से विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया है।