Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : उद्धव सेना ने अपने 6 बागी सांसदों को भेजा लीगल नोटिस, एकनाथ शिंदे बोले- चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए अपने छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनन संभव नहीं है. वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस नोटिस को बेअसर बताते हुए कहा कि उनके सांसदों ने इस पत्र को कूड़ेदान में फेंक दिया और इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है.

शिवसेना (UBT) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को भेजे गए नोटिस में बगावत करने वाले 6 सांसदों से कहा कि उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में और शिवसेना (UBT) के चुनाव चिह्न पर लड़कर जीता था. उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव में इन सांसदों ने शिंदे गुट के उम्मीदवारों के खिलाफ जीत हासिल की थी. सावंत ने कहा कि मूल राजनीतिक दल यानी शिवसेना (UBT) ने न तो किसी विलय की प्रक्रिया शुरू की है और न ही शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी है.

अरविंद सावंत ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से जानकारी मिली है कि ये सांसद खुद को शिंदे गुट में विलय होने का दावा कर रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस विलय को मान्यता देने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि किसी विधायी दल (लेजिस्लेचर पार्टी) का विलय तभी संभव है, जब पहले मूल राजनीतिक दल का विधिवत विलय हो. मूल दल का विलय नहीं हुआ है, इसलिए संसदीय दल के विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता और ऐसा विलय कानून में मान्य भी नहीं है.

अरविंद सावंत ने बताया कि पार्टी पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आग्रह कर चुकी है कि शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुने गए सांसदों के किसी भी कथित विलय या अलग समूह को मान्यता न दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक लोकसभा अध्यक्ष ने इस संबंध में कोई फैसला नहीं दिया है. बता दें कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट), नागेश पाटिल-अष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) 22 जून को शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो गए थे.

हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने अब तक उनके विलय के दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई निर्णय नहीं सुनाया है. नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि सभी छह सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिल चुके हैं, जरूरी दस्तावेज जमा कर चुके हैं और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे सांसदों ने वह चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी. ऐसी चिट्ठियों पर कौन ध्यान देता है? सदन में दो-तिहाई बहुमत मायने रखता है. यह ठाकरे गुट की हताशा है और इस नोटिस का हमारे सांसदों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.’

उधर, अधिकांश बागी सांसदों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हिंगोली से सांसद नागेश अष्टीकर ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें इसका जवाब देने की कोई जरूरत नहीं लगती. इस बीच, शिवसेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि छहों सांसदों ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. पार्टी के मुताबिक, अमित शाह ने उनके संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग और पर्याप्त वित्तीय सहायता का भरोसा दिया.

NATIONAL : ‘पवार को कांग्रेस में विलय करने के बजाय NDA में शामिल होना चाहिए’, NCP के विलय पर बोले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले

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विपक्षी कांग्रेस और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के संभावित विलय की अटकलों के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठले ने कहा है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी को भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में शामिल हो जाना चाहिए।

रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया (आठवले गुट) के प्रमुख ने शनिवार को कहा कि उन्होंने स्वयं अतीत में पवार को अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी थी।

लेकिन अब कांग्रेस की ताकत खत्म हो चुकी है। कांग्रेस में जाने के स्थान पर उन्हें राजग में आना चाहिए। व्यंग करते हुए कहा कि वह आरपीआई में भी अपनी पार्टी का विलय कर सकते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने हाल ही में सुझाव दिया था कि तृणमूल कांग्रेस और राकांपा (शरदचंद्र पवार) जैसी पार्टियों का कांग्रेस में विलय हो जाना चाहिए जिससे भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प तैयार किया जा सके। राउत ने यह भी कहा था कि शरद पवार को इन छोटी पार्टियों को कांग्रेस में विलय कराने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय की नाकामी पर मुहर! सरकार को सौंपी जाएगी SIT की रिपोर्ट

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है. दान चोरी केस में पूर्व महासचिव चंपत राय की नाकामी पर मुहर लग सकती है. मामले में एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है. रिपोर्ट बुधवार (15 जुलाई) यानी आज शासन को सौंपी जा सकती है. रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की लापरवाही और निगरानी में कमी की बात कही गई है.

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने बिना नाम लिए चंपत राय की जिम्मेदारी की ओर इशारा किया है. इस आपराधिक साजिश में चंपत राय की भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है, हालांकि मामले में पुलिस विवेचना जारी है. एसआईटी द्वारा मामले में अनिल मिश्रा को नियमों में बदलाव का सबसे बड़ा जिम्मेदार माना गया है.

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रिपोर्ट में सामने आ रही चोरी की प्रमुख वजह
रिपोर्ट में बैंक के साथ तय SOP में बदलाव और नियमों को शिथिल करना चोरी की प्रमुख वजह बताई गई है. दान की गणना करने के लिए भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी को भी चोरी का बड़ा कारण माना गया. एसआईटी की रिपोर्ट में पता चला है कि आउटसोर्सिंग के जरिए हाउसकीपिंग कर्मियों से चढ़ावे की गणना कराई जा रही थी.

एसआईटी के अनुसार ट्रस्ट पदाधिकारियों की सिफारिश पर गणना के लिए कर्मियों की भर्ती हुई थी. कमजोर निगरानी और ढीली व्यवस्था के कारण चंदा चोरी की गुंजाइश बनी. एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे होने की आशंका है. इसको लेकर बुधवार को शासन के पास रिपोर्ट सौंपी जा सकती है.

मामले के दो आरोपियों की रिमांड
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में की जांच कर रही अयोध्या पुलिस को दो आरोपियों की रिमांड मिली है. मंगलवार को अदालत ने दो आरोपियों रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की 14 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर कर ली. मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने कोर्ट से सात दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने 14 घंटे की पुलिस कस्टडी की अनुमति दी.

NATIONAL : ‘विपक्ष के लिए सारे दरवाजे खोल दें..’: चुनाव आयोग पर भड़के पूर्व CEC एसवाई कुरैशी, बोले-मेरी वजह से BJP को फायदा

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देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एसवाई कुरैशी अपनी एक नई किताब को लेकर अभी खूब चर्चा में हैं। अब उन्होंने मौजूदा चुनाव आयोग (ECI) पर यह आरोप लगाकर कि वह विपक्ष के साथ अन्यायपूर्ण रवैया अपना रहा है, सनसनी मचा दी है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है कि यह सिर्फ आरोप नहीं है, चुनाव आयोग विपक्ष के साथ सही बर्ताव नहीं कर रहा है।

‘विपक्ष को सहयोग की जरूरत होती है’
पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सीईसी ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाले मौजूदा चुनाव आयोग की अपने कार्यकाल से तुलना की है और कहा है कि उनके समय विपक्ष को प्राथमिकता देने की नीति थी, जबकि अभी उसके साथ अनुचित व्यवहार हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘मेरी घोषित नीति थी कि विपक्ष का साथ दें..क्योंकि वे उपेक्षित होते हैं.. सत्ता से दूर होते हैं, उन्हें हमारे सहयोग की जरूरत है…सरकार के पास तो बहुत कुछ होता है।’

मैंने अपने सभी अधिकारियों से कहा था विपक्ष के लिए अपने सारे दरवाजे खोल दें..। अगर वे कल का समय मांगते हैं तो उन्हें आज का समय दें। अगर आपके पास दो तरह के अनुरोध आते हैं, एक विपक्ष से और दूसरा सरकार से तो विपक्ष को प्राथमिकता दें।


एसवाई कुरैशी, पूर्व सीईसी

‘मेरे कार्यकाल में विपक्ष बहुत कंफर्टेबल था’
कुरैशी का दावा है कि उनके कार्यकाल में विपक्ष, खास तौर पर बीजेपी को बहुत फायदा हुआ, क्योंकि उन्होंने नीति ही ऐसी बना रखी थी। उनके मुताबिक, ‘..क्योंकि हमें पूरे देश का भरोसा जीतना होता है, विशेष तौर पर विपक्ष का। इसलिए हमारे समय में विपक्ष हमारे साथ बहुत ही ज्यादा कंफर्टेबल था।’

‘मेरी नीति से बीजेपी को फायदा हुआ’
एसवाई कुरैशी ने यहां तक दावा किया कि ‘मेरे पूरे कार्यकाल में बीजेपी सबसे प्रमुख विपक्षी पार्टी थी..अगर उसके कुछ नेता आज मेरी आलोचना करते हैं तो वे इसे नजरअंदाज कर रहे हैं…मेरी नीति से विपक्ष को लाभ होता था, खासकर बीजेपी को, इसे याद रखना बहुत जरूरी है।’ एसवाई कुरैशी अपनी किताब में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के उस बयान को शामिल करने को लेकर चर्चित हुए हैं, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने आत्महत्या करने की बात कही थी।

‘विपक्ष के प्रति चुनाव आयोग बहुत अन्यायपूर्ण’
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त से जब यह पूछा गया कि क्या आपको भी लगता है कि मौजूदा चुनाव आयोग का विपक्ष के साथ रवैया थोड़ा अन्यायपूर्ण है, तो उन्होंने कहा, ‘थोड़ा अन्यायपूर्ण…यह बहुत ही कम है…बेशक यह बहुत ही ज्यादा अन्यायपूर्ण है।…यही वजह है कि 23 विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई हैं।’

‘चुनाव आयोग का रवैया अन्यायपूर्ण’
कुरैशी ने मौजूदा चुनाव पर सीधा मोर्चा खोलते हुए यहां तक आरोप लगाया कि ‘चुनाव आयोग उन्हें (विपक्ष) सुनने का मौका नहीं दे रहा है,यह स्वीकार्य नहीं है। वो जो कर रहे हैं और जिस तरह से बचकर निकल रहे हैं, वह मुझे हैरान कर रहा है। चुनाव आयोग से यह उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्हें सबको साथ लेकर चलना है।’ पूर्व सीईसी का यह बयान इसलिए बहुत अहम हो जाता है कि विपक्ष ने अभी चुनाव आयोग और खासकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

मीडिया पर भी बरसे एसवाई कुरैशी
उन्होंने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि ‘इसका बड़ा हिस्सा सरकार से सवाल पूछने की जगह विपक्ष से सवाल पूछता है। नेहरू के समय चली जाती है।’
‘लोकतंत्र में आपको सरकार से सवाल पूछना चाहिए और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है।’
‘हम यहां देख रहे हैं कि विपक्ष मुलाकात के लिए भीख मांगता रहता है और आप समय नहीं देते हैं। इसलिए विपक्ष को सीजेआई को लिखना पड़ा है।’

WORLD : कूटनीति की नई उड़ान… कतर से अमेरिका-बेल्जियम तक, आज से 6 देशों के दौरे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से कई देशों के दौरे पर जाएंगे. इस दौरे में पश्चिम एशिया, अमेरिका और बेल्जियम शामिल है. इस दौरे का उद्देश्य पश्चिम एशिया में ऊर्जा और भारतीय समुदाय के हितों की रक्षा करना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान को शुरू करना है. इसके साथ ही भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की बैठक में भाग लेना है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से चार देशों का दौरा शुरू करेंगे. वे कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जाएंगे. वहां वे इन देशों के विदेश मंत्रियों और नेताओं से मुलाकात करेंगे. इसके बाद वे अमेरिका और बेल्जियम भी जाएंगे, जहां संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ की महत्वपूर्ण बैठकें होंगी. इस दौरे को पश्चिम एशिया में अहम साझेदारों के साथ नई दिल्ली के लगातार संपर्क बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. ये देश ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं और यहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय भी रहते हैं.

ईरान-अमेरिका टकराव की वजह से पैदा हुई दिक्कतों से निपटने के लिए भारत ने पश्चिम एशिया से तेल और गैस की बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की है. इसके बाद जयशंकर न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां वे 13 जुलाई को 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के वास्ते भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे.

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इसके बाद, वे 14-15 जुलाई को भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्री-स्तरीय बैठक में शामिल होने और EU तथा बेल्जियम के अपने समकक्षों के साथ बातचीत करने के लिए ब्रुसेल्स जाएंगे.

दो कैरिबियाई देशों की यात्रा पूरी की
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कैरिबियाई देश की दो दिन की यात्रा के दौरान भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्षों के बीच त्रिनिदाद और टोबैगो के विदेश और कैरिकॉम मामलों के मंत्रालय की इमारत को सौर ऊर्जा से चलाने, वेक्टर कंट्रोल, नेल्सन द्वीप (जहां भारतीय प्रवासी शुरू में रुके थे) के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करनेपर साइन हुआ. साथ ही यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंडीज में आयुर्वेद पर एक ‘इंडियन चेयर’ स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए.

डॉ. जयशंकर ने प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की और पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं पर हुई प्रगति की समीक्षा की. चर्चाओं में बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, फोरेंसिक, स्वास्थ्य सेवा और क्षमता निर्माण में सहयोग के मुद्दे भी शामिल थे.

NATIONAL : लाल किला की सुरक्षा में लापरवाही, डमी बम नहीं पकड़ पाए 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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लाल किला सुरक्षा में लापरवाही के चलते 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए हैं. स्वतंत्रता दिवस से पहले हुए एक डमी बम ड्रिल में चूक के चलते यह कार्रवाई की गई. वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने लाल किला परिसर में घुसपैठ की कोशिश कर रहे 5 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे थे.

दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक को लेकर बड़ा एक्शन लिया है. लाल किले की सुरक्षा में तैनात 7 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. इनमें कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल शामिल हैं. दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन सभी को ड्यूटी में लापरवाही की वजह से सस्पेंड किया गया है.

पुलिस हर रोज 15 अगस्त के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सिक्योरिटी ड्रिल्स कर रही है. शनिवार को स्पेशल सेल की एक टीम ने एक ऐसा ही ड्रिल किया.टीम ने सिविल ड्रेस में लाल किला परिसर में प्रवेश किया और एक डमी बम ले गई. इस दौरान वहां तैनात पुलिसकर्मी उस डमी बम का पता नहीं लगा सके, जो सुरक्षा में बड़ी चूक मानी गई. इसी के चलते उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.

वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने 5 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, ये सभी लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे थे और जबरन लाल किला परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे थे. इन सभी की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है और ये दिल्ली में मजदूरी करते हैं.पुलिस ने इन लोगों के पास से कुछ बांग्लादेशी डॉक्यूमेंट्स भी बरामद किए हैं. फिलहाल इनसे पूछताछ की जा रही है ताकि इनकी मंशा का पता लगाया जा सके. पुलिस का कहना है कि सुरक्षा को लेकर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा और जो भी इसमें लापरवाही करेगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

WORLD : 15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता, 99% भारतीय उत्पादों पर ड्यूटी खत्म

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भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो रहा है. इससे ब्रिटेन जाने वाले 99% भारतीय उत्पादों पर टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएगा. वहीं, वहां काम करने वाले करीब 75 हजार भारतीय पेशेवरों को दोहरे टैक्स से 5 साल की बड़ी राहत मिलेगी. यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और कारोबारियों के लिए गेमचेंजर साबित होगा.

भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच व्यापारिक रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. आगामी 15 जुलाई 2026 से दोनों देशों के बीच ‘व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता’ (CETA) आधिकारिक तौर पर लागू हो जाएगा. इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद अहम समझौता (DCC) भी इसी दिन से प्रभाव में आएगा. इस ऐतिहासिक कदम से न सिर्फ 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी ड्यूटी (टैक्स) के सीधी एंट्री मिलेगी, बल्कि वहां काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए दोहरे टैक्स से छूट की सीमा भी 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है.

इस नए व्यापारिक ढांचे के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा मिलने वाला है. अब तक जिन सामानों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगता था, वे अब बिना किसी ड्यूटी के वहां आसानी से बिक सकेंगे. प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाला 70 प्रतिशत तक का टैक्स, समुद्री उत्पादों पर 21.5 प्रतिशत, इंजीनियरिंग व ऑटो पार्ट्स पर 18 प्रतिशत, चमड़े व जूतों पर 16 प्रतिशत तथा कपड़ों पर 12 प्रतिशत तक का भारी-भरकम आयात शुल्क अब शून्य हो जाएगा. सीधी भाषा में कहें तो, भारत के छोटे-बड़े कारखानों, किसानों व मछुआरों का सामान अब ब्रिटेन के बाजारों में अपनी सही कीमत पर बिकेगा. इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ताकत मिलेगी. हालांकि, डेयरी उत्पादों, अनाज, सेब जैसे भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को बाहरी आयात के दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है.

सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि भारत की सर्विस इंडस्ट्री के लिए भी यह समझौता एक टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. ब्रिटेन ने 137 ऐसे सर्विस सेक्टर्स में भारत को एंट्री दी है, जिनमें हमारा खासा दबदबा है. इनमें आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज़, शिक्षा, टेलीकॉम से लेकर हेल्थकेयर तक शामिल हैं. सबसे बड़ी राहत ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों को मिली है. नए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत, अब अस्थायी तौर पर ब्रिटेन जाने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां के दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान (डबल टैक्स) से 5 साल तक की छूट मिलेगी. इससे 75 हजार से ज्यादा पेशेवरों के साथ-साथ करीब 900 कंपनियों को सीधा आर्थिक फायदा होगा. इसके अलावा, एक नई और खास व्यवस्था के तहत 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक व शास्त्रीय संगीतकारों को भी हर साल ब्रिटेन में काम करने के विशेष मौके मिलेंगे.

स्टील उद्योग की रक्षा के साथ आम आदमी का फायदा
किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में घरेलू उद्योगों की रक्षा सबसे अहम होती है. कुल 30 अध्यायों वाले इस ढांचे में भारत ने अपने स्टील निर्यातकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. 1 जुलाई 2026 से ब्रिटेन द्वारा स्टील पर लागू किए जा रहे नए सख्त नियमों के बावजूद, भारत के 85 प्रतिशत स्टील निर्यात को इसके असर से बाहर रखा गया है. बाकी बचे हिस्से को भी खास कोटा सिस्टम के जरिए संरक्षित किया गया है. यह व्यापार समझौता केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा. इससे महिलाओं, युवाओं, स्टार्टअप्स व एमएसएमई (MSME) सेक्टर को दुनिया के एक बड़े उपभोक्ता बाजार से जुड़ने का सीधा मौका मिलेगा. मई 2021 में जिस साझेदारी की नींव रखी गई थी, वह 14 दौर की लंबी बातचीत के बाद अब जमीन पर उतरकर भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने के लिए तैयार है.

NATIONAL : पंजाब कांग्रेस में फैसले की घड़ी, 12 घंटे में राहुल गांधी करेंगे चन्नी की किस्मत तय

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पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी ने कनार्टक, केरल और तमिलनाडु को लेकर जिस तरह के फैसले लिए हैं लगता है कि पंजाब को लेकर भी वो सख्त रुख़ अपनाएंगे और पंजाब में चन्नी जैसे नेताओं से उसी तरह निबटेंगे.

पंजाब में कांग्रेस पार्टी का जो संकट बना हुआ है, उस पर अगले 12 घंटों में कुछ अहम फैसले आ सकते हैं. राहुल गांधी ने विदेश से लौटने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मुलाकात की और माना जा रहा है कि पंजाब में नेतृत्व को लेकर जो पेंच फंसा हुआ है, उसको सुलझाने पर विस्तृत चर्चा हुई है. इसके बाद पंजाब के प्रभारी महासचिव और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दिल्ली बुलाया गया है. बघेल मंगलवार देर रात को ही दिल्ली पहुंच रहे हैं. हालांकि भूपेश बघेल ने संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल को फोन पर पूरी जानकारी दे दी है, मगर अब उनकी मुलाकात राहुल गांधी और खरगे से होनी है.

बघेल पांच दिनों तक चंडीगढ़ में थे और लगभग पंजाब कांग्रेस के सभी नेताओं से मुलाकात की है. उन्होंने चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा से भी बातचीत की है. उधर राहुल गांधी के दिल्ली आने और खरगे से मुलाकात के बाद चन्नी भी दिल्ली पहुंच रहे हैं. इसके साथ ही पंजाब कांग्रेस के अन्य नेताओं का दिल्ली आने का सिलसिला जारी है, यानि पूरी पंजाब कांग्रेस बुधवार को आपको दिल्ली में ही दिखाई देगी. लगता है पंजाब में अब फैसले की घड़ी आ चुकी है.

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि राहुल गांधी के पास क्या विकल्प है. राहुल गांधी चाहें तो अपने पुराने फैसले पर कायम रह सकते हैं और चन्नी और रंधावा जैसे नेताओं को कह सकते हैं कि उनको पार्टी आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. वे सब पंजाब वापस जाएं, मिलजुल कर चुनाव लड़ें और मुख्यमंत्री का फैसला बाद में किया जाएगा. राहुल गांधी यह भी कह सकते हैं मुख्यमंत्री का चेहरा कोई नहीं होगा.


पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी ने कनार्टक, केरल और तमिलनाडु को लेकर जिस तरह के फैसले लिए हैं लगता है कि पंजाब को लेकर भी वो सख्त रुख़ अपनाएंगे और पंजाब में चन्नी जैसे नेताओं से उसी तरह निबटेंगे.

मगर कांग्रेस दफ्तर के गलियारों में जो बातें हो रही है, उससे यह लगता है कि शायद राहुल गांधी पंजाब को लेकर कुछ और भी फैसला कर सकते हैं. माना जा रहा है कि पंजाब से जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उससे राहुल गांधी चरणजीत सिंह चन्नी की बात सुनने के लिए भी तैयार हैं और जरूरत पड़ा तो पंजाब में एक नया फॉर्मूला भी सामने आ सकता है, क्योंकि राहुल गांधी और खरगे को भी लगने लगा है कि केन्द्रीय नेतृत्व को अपने जिद पर अड़ा नहीं रहना चाहिए.

पंजाब में ये दोनों क्या करेंगे? अभी तो किसी को मालूम नहीं लेकिन जो भी फैसला होगा, वो पंजाब में कांग्रेस का भविष्य तय करेगी. वैसे होने को तो पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग खुद अपना इस्तीफा देकर राहुल गांधी और खरगे की मुश्किलों को आसान कर सकते हैं. लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी की बात मान ली गई तो कांग्रेस आलाकमान के इक़बाल पर सवाल उठ जाएगा और कल को किसी भी अन्य प्रदेश का नेता या मुख्यमंत्री भी ऐसा कर सकता है. पंजाब कांग्रेस को हमेशा सिरदर्द देता आया है और इस बार देखना होगा कि राहुल गांधी इससे कैसे पार पाते हैं.

NATIONAL : क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से खराब हो रहीं आपकी गाड़ियां? उठते सवालों पर गडकरी का बड़ा खुलासा

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केंद्रीय परिवहन मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘ज्यादा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं. यह पैसे देकर अभियान चलाया जा रहा है.’

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर इंजन में खराबी से लेकर माइलेज में कमी तक, कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. इस पर अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार (7 जुलाई) को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सवाल उठाने वालों को चुनौती देते हुए कहा कि वह ऐसी एक भी कार का नाम बताएं, जिसमें इस ईंधन की वजह से कोई समस्या आई हो.

‘विकसित भारत’ कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा, कोयला, पेट्रोल आदि पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है. इसकी वजह से ईंधन इम्पोर्ट पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है, इसलिए देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘E20 पेट्रोल की वजह से किसी कार में समस्या आने का कोई मामला सामने नहीं आया है. क्या देश में कोई ऐसी कार है, जिसमें ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई समस्या आई हो? बस एक का नाम बताइए.’

केंद्रीय परिवहन मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘ज्यादा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं. यह पैसे देकर अभियान चलाया जा रहा है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारत ने पहले ही 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है. इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है. एथनॉल गन्ना, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बनता है.’

गडकरी ने उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें आरोप लगाए जा रहे थे कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथेनॉल बनाने के काम में शामिल हैं और इसीलिए वह अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं और उनकी कंपनियां एथेनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि देश में एथेनॉल की अधिकता है, इसलिए मक्के से एथनॉल बनाने के कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इनकम हुई है. गडकरी ने कहा, ‘जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया तो मक्के की बाजार कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल थी और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1800 रुपये प्रति क्विंटल था. इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर 2800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई.’ उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये आए.’

NATIONAL : पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का दस्तावेज, नागरिकता का सबूत नहीं; विदेश मंत्रालय ने किया स्पष्ट

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विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल यात्रा और पहचान का दस्तावेज़ है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। वहीं, वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 1.5 करोड़ पासपोर्ट सेवाएं दी गईं।

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल यात्रा और पहचान संबंधी दस्तावेज है, न कि भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण। पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर मंत्रालय ने कहा कि हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन नागरिकता का निर्धारण संबंधित कानूनों और अन्य वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है।

नागरिकता पर मंत्रालय की सफाई
मंत्रालय की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विभिन्न मंचों पर पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में लेकर भ्रम की स्थिति देखी जाती रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है।

1.5 करोड़ लोगों को मिली सेवाएं
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों (RPO) और विदेशों में भारतीय मिशनों ने मिलकर करीब 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान कीं। सरकार लगातार पासपोर्ट सेवाओं को अधिक सरल, तेज और सुलभ बनाने पर काम कर रही है।

545 केंद्रों तक पहुंचा नेटवर्क
देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) की संख्या बढ़कर 545 हो गई है। पिछले वर्ष 10 नए POPSK खोले गए थे और इस वर्ष भी 10 नए केंद्र शुरू किए जाने की योजना है।

कई मामलों में पांच दिन में पासपोर्ट
अधिकारियों ने बताया कि पासपोर्ट सेवा प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। कई मामलों में पासपोर्ट जारी होने का समय घटकर पांच कार्यदिवस तक पहुंच गया है। वहीं, पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर आवेदकों को 45 मिनट से कम समय में प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिल रही है।

भारतीय पासपोर्ट की बढ़ी पहुंच
मंत्रालय के अनुसार भारतीय नागरिकों को फिलहाल 27 देशों में वीजा-फ्री प्रवेश, 47 देशों में वीजा ऑन अराइवल और 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है।

केवल 10 प्रतिशत भारतीयों के पास पासपोर्ट
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि देश की कुल आबादी की तुलना में अभी लगभग 10 प्रतिशत भारतीयों के पास ही पासपोर्ट है। मंत्रालय के मुताबिक अब तक 1.47 करोड़ चिप-युक्त ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक चिप और उन्नत बायोमेट्रिक सुरक्षा तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे दस्तावेजों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ी है।

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