Tuesday, February 10, 2026
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Retired सैनिकों पर हुए थर्ड डिग्री टॉर्चर का मामला, सामने आई सच्चाई ने उड़ाए सबके होश

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एस.एच.ओ. बख्शी नगर द्वारा सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों सुरेश कुमार और चंदर शेखर (दोनों सगे भाई) को थर्ड डिग्री टॉर्चर और दुर्व्यवहार किए जाने के बारे में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा दी गई हालिया रिपोर्टों का जम्मू पुलिस द्वारा पुरजोर खंडन किया गया है। पुलिस का कहना है कि ये खबरें पूरी तरह से गुमराह करने वाली और वास्तव में गलत हैं।

पुलिस अधिकारियों ने जानकारी देते बताया कि 13 जनवरी (लोहड़ी) की मध्य रात्रि एस.एच.ओ. बख्शी नगर गश्त ड्यूटी कर रहे थे। इस दौरान जब वह आर्य समाज मंदिर, बख्शी नगर के पास पहुंचे तो उन्होंने पाया कि 3-4 व्यक्तियों ने अपनी गाड़ी जेके 17 8314 को सड़क के बीच में पार्क किया था। साथ ही बख्शी नगर बाजार जो कि एक प्रमुख आवासीय क्षेत्र भी है, में एक दूसरे के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए लड़ रहे थे।

जब एस.एच.ओ. ने उनकी गाड़ी के पास आकर उनसे शोर-शराबा न करने और सड़क से अपनी गाड़ी हटाने का अनुरोध किया तो आरोपी चंद्र शेखर और सुभाष कुमार ने एस.एच.ओ. के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। एस.एच.ओ. ने धैर्य दिखाते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की लेकिन उक्त सुरेश कुमार और चंद्र शेखर ने पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया। इस हमले में एस.पी.ओ. अनिल शर्मा और एस.पी.ओ. जय कृष्ण घायल हो गए। यह सारी घटना पास में लगे सी.सी.टी.वी. में कैद हो गई है। जांच अधिकारी ने उनके दुर्व्यवहार और पुलिस पार्टी पर हमले का सी.सी.टी.वी. फुटेज भी इक्ट्ठा किया है जो महत्वपूर्ण सबूत का हिस्सा है। पुलिस ने इस घटना को अपने मोबाइल फोन के कैमरों में भी रिकॉर्ड किया है जो सबूत का हिस्सा है।

एस.पी.ओ. अनिल शर्मा और एस.पी.ओ. जय कृष्ण को घायल हालत में इलाज के लिए जी.एम.सी. में ट्रांसफर कर दिया गया और उक्त आरोपियों को डीके बासु मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बाद पुलिस स्टेशन बख्शी नगर में विभिन्न धाराओं के तहत जी.एम.सी., जम्मू से उनके मेडिकल के बाद रात को एक बजे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और उनकी गिरफ्तारी को अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता।

यहां यह उल्लेख करना उचित है कि लिखने की गलती के कारण झगड़े (आई.पी.सी. की धारा 160) की जगह अनजाने में धारा 160 बी.एन.एस. जोड़ दी गई थी। जांच के पहले चरण में ही इसे ठीक कर दिया गया और धारा 194 बी.एन.एस. जोड़ दी गई।

लॉकअप और परिसर सहित पूरा पुलिस स्टेशन सी.सी.टी.वी. की निगरानी में है और आरोपियों को कोई शारीरिक यातना या थर्ड डिग्री नहीं दी गई। उनके परिवार के सदस्य अगली सुबह बख्शी नगर पुलिस स्टेशन गए और उन्हें आरोपियों से मिलने दिया गया। उनका मेडिकल सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू से कराया गया और अगले दिन माननीय अदालत से 24 घंटे के भीतर उनका रिमांड मांगा गया। उक्त आरोपी 14 जनवरी से 17 जनवरी 2025 तक जेल में बंद रहे और 15 जनवरी को अम्फाला जेल में बंद रहे। माननीय कोर्ट ने भी 15 जनवरी को तत्काल मामले में आरोपी व्यक्तियों को जमानत दे दी।

एस.एच.ओ. बख्शी नगर आजाद अहमद मन्हास एक पेशेवर पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें दो राष्ट्रपति वीरता पदक और दो जम्मू-कश्मीर पुलिस वीरता पदक, डी.जी. डिस्क से सम्मानित किया गया है और आगे शौर्य चक्र वीरता पदक के लिए उनका नाम भेजा गया है। उन्होंने घाटी में 5 साल और जम्मू संभाग में 5 साल आतंकवाद विरोधी अभियानों में सेवा की है और अपनी बहादुरी और असाधारण साहस के लिए वह जाने जाते हैं।

जब यह मामला जम्मू और कश्मीर पूर्व सेवा लीग के सम्मानित सदस्यों और अन्य लोगों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, तो तुरंत सुपरवाइजर अधिकारी से घटना की रिपोर्ट मांगी गई और इस संबंध में एस.एच.ओ. बख्शी नगर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। जम्मू पुलिस पूरी तरह कार्यरत है और बिना किसी बाहरी प्रभाव के जांच और कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक शांति आदि बनाए रखने का अपना कार्य जारी रखे हुए है।

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को सरकार की मंजूरी, 34,300 करोड़ रुपए का होगा कुल निवेश

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केंद्र सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) को मंजूरी दे दी। इस मिशन का लक्ष्य भारत को महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और हरित ऊर्जा (Green Energy) की दिशा में देश की प्रगति को तेज करना है। मिशन के तहत 16,300 करोड़ रुपए सरकार खर्च करेगी, जबकि 18,000 करोड़ रुपए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) से निवेश के रूप में आएंगे। यह योजना सात वर्षों तक चलेगी।

किन खनिजों पर रहेगा फोकस?

क्रिटिकल मिनरल मिशन का उद्देश्य कॉपर, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देना है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, पवन टरबाइन, बिजली नेटवर्क और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए आवश्यक हैं।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

  • देश और विदेशी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और खनन को बढ़ावा देना।
  • महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भरता हासिल करना।
  • खनिज प्रसंस्करण (Mineral Processing) और रीसाइक्लिंग के लिए नई तकनीकों को विकसित करना।
  • भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) और निजी कंपनियों को विदेशों में खनिज ब्लॉक अधिग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • खनिज भंडारण सुविधा (Stockpile) का निर्माण करना ताकि संकट के समय आपूर्ति बनी रहे।
  • मिनरल प्रोसेसिंग पार्क्स की स्थापना और खनिजों की रीसाइक्लिंग को समर्थन देना।
  • क्रिटिकल मिनरल टेक्नोलॉजी पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना।

तेजी से मंजूरी प्रक्रिया और नीतिगत सुधार

इस मिशन के तहत, सरकार खनिज खनन परियोजनाओं के लिए तेजी से मंजूरी प्रक्रिया तैयार करेगी और खनिजों की खोज को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

खनन क्षेत्र में बड़े सुधार

सरकार ने 2023 में खनिज और खनन (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन किया था, जिसके बाद 24 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई। इसके अलावा, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) पिछले तीन वर्षों में 368 अन्वेषण परियोजनाएं चला चुका है और 2024-25 में 195 परियोजनाएं चल रही हैं। वर्ष 2025-26 में, GSI 227 नई परियोजनाएं शुरू करेगा।

आयात शुल्क में छूट

सरकार ने वित्त वर्ष 2025 के बजट में अधिकांश महत्वपूर्ण खनिजों पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, जिससे देश में इन खनिजों की उपलब्धता बढ़ेगी और कंपनियों को प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह मिशन भारत को क्रिटिकल मिनरल आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

Taxpayers हो जाएं सावधान‍! CBIC ने दी फर्जी GST समन से सतर्क रहने की सलाह, अपनाएं ये तरीके

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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), जो GST जैसे अप्रत्यक्ष करों का प्रबंधन करता है, ने एक एडवाइजरी जारी कर जनता को फर्जी और धोखाधड़ी वाले GST समन से सतर्क रहने की सलाह दी है। CBIC ने करदाताओं को आगाह किया है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध समन या नोटिस प्राप्त होता है, तो वे इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत जीएसटी इंटेलिजेंस निदेशालय (DGGI) या केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) प्राधिकरण को इसकी सूचना दें।

कैसे करते हैं ठग फर्जी समन जारी

कुछ लोगों द्वारा फर्जी समन बनाए और भेजे जाने की खबरें सामने आई हैं. ये समन CBIC के डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) या CGST कार्यालयों के तहत चल रही किसी जांच के तहत भेजे जाने का दावा करते हैं. CBIC ने बताया कि ये फर्जी समन असली समन से काफी मिलते-जुलते होते हैं। इन दस्तावेजों में विभाग का लोगो और फर्जी डॉक्युमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) शामिल होते हैं, जिससे ये प्रामाणिक और वास्तविक दिखते हैं।

फर्जी जीएसटी समन से बचने के लिए क्या करें

CBIC ने सलाह दी है कि वे ऐसी किसी भी संचार सामग्री की प्रामाणिकता को ऑनलाइन वेरिफाई करें। इसके लिए कदम उठाएं:

  • CBIC पोर्टल के इस सेक्शन पर जाएं (esanchar.cbic.gov.in/DIN/DINSearch)
  • Verify CBIC-DIN विंडो में जाएं
  • संचार की प्रामाणिकता की जांच करें
  • यदि यह संचार असली है, तो ऑनलाइन सुविधा इसकी पुष्टि करेगी

संदिग्ध समन मिलने पर क्या करें?

  • तुरंत DGGI या CGST प्राधिकरण से संपर्क करें
  • फर्जी समन या अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी प्रदान करें
  • अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा करने से बचें

जीएसटी फर्जी समन के मामलों को देखते हुए CBIC ने जनता को सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है।

जानिए किस बात को लेकर गुस्से में था नाथूराम गोडसे? जिसके चलते मारी महात्मा गांधी को गोली

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हर साल 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है, ताकि भारत की आज़ादी के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया जा सके। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी। इस दिन को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में याद किया जाता है, क्योंकि इस दिन ने अहिंसा, सत्य और एकता के प्रतीक नेता को खो दिया। आखिर क्यों नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी? जानें….

जानें कौन थे नाथूराम गोडसे?
नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 को ब्रिटिश भारत के बारामती में हुआ था। वह हिंदू राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे और बाद में हिंदू महासभा में शामिल हो गए। गोडसे ने हिंदू राष्ट्रवादी विचारों को फैलाने के लिए अखबार अग्रणी के संपादक के रूप में भी काम किया।

गोडसे ने क्यों बरसाई महात्मा गांधी पर गोलियां?
नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या के बारे में कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कई कारण बताए कि क्यों उन्होंने यह कदम उठाया। उनका मानना था कि गांधी की नीतियां मुसलमानों के पक्ष में थीं, जो हिंदुओं के खिलाफ थीं। गोडसे ने गांधी पर पाकिस्तान के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया और भारतीय विभाजन के कारण हुए हिंसा और दर्द के लिए महात्मा गांधी को जिम्मेदार ठहराया।

इस बात पर भड़के थे गोडसे
गोडसे की एक प्रमुख शिकायत थी कि भारतीय सरकार ने पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए देने का निर्णय लिया था, जिसे कश्मीर विवाद के कारण रोक दिया गया था। गांधी ने यह सुनिश्चित करने के लिए भूख हड़ताल की थी कि यह भुगतान किया जाए। गोडसे ने इसे भारत के खिलाफ एक कदम माना और उनका मानना था कि गांधी को हटाना भारत के भविष्य के लिए जरूरी था।

कैसे की महात्मा गांधी की हत्या?
30 जनवरी 1948 को शाम करीब 5:00 बजे महात्मा गांधी दिल्ली के बिड़ला हाउस में अपनी शाम की प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे। जैसे ही वे प्रार्थना स्थल के पास पहुंचे, गोडसे भीड़ से आगे बढ़े और उन्होंने गांधी जी को करीब से तीन गोलियां मारीं। गांधी जी बेहोश हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

15 नवंबर 1949 को गोडसे और उनके साथी को दी गई फांसी
गोडसे को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और दिल्ली के लाल किले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया। नवंबर 1949 में उन्हें और उनके साथी नारायण आप्टे को फांसी की सजा सुनाई गई। दोनों को 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई। महात्मा गांधी की हत्या एक दुखद और अविस्मरणीय घटना थी, लेकिन उनकी शिक्षाएं, जो अहिंसा और सत्य पर आधारित हैं, आज भी पूरी दुनिया में लोगों को प्रेरित करती हैं।

Kashmir में दिखा Himalaya का जानवर, Social Media पर खूब वायरल हो रहा वीडियो, आप भी देखें

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कश्मीर की एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कश्मीर के गुरेज में हिमालयी ऊदबिलाव देखे गए हैं।

जानकारी के अनुसार हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी चल रही है। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि हिमालयी ऊदबिलाव गुरेज की किशनगंगा नदी में इंद्रधनुषी ट्राउट खा रहा है। गुरेज के मार्कूट निवासी शांगू ने इस वीडियो को रिकॉर्ड किया गया है। उक्त फुटेज इन सेमी एक्वेटिक मैमल्स (अर्ध-जलीय स्तनधारी) के जीवन की एक दुर्लभ झलक पेश करती है। इन मैमल्स को स्थानीय रूप से शिना भाषा में वदुर के रूप में जाना जाता है।

वहीं वीडियो रिकॉर्ड करने वाले शांगू ने बताया कि वह किशनगंगा नदी के पास रहता है। उसने बचपन में 2001-2002 के आसपास पहले भी एक बार यहां एक ऊदबिलाव देखा था।

कांग्रेस दिल्ली में ‘AAP’ को हराने के लिए BJP के साथ चुनाव लड़ रही है : अरविंद केजरीवाल

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में कांग्रेस पर तीखा हमला किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी को हराने के लिए बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बीजेपी के खिलाफ कुछ नहीं बोलते, बल्कि सिर्फ केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ ज़हर उगलते हैं। केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस दिल्ली में एक भी सीट नहीं जीत रही है और वह बीजेपी की मदद से आम आदमी पार्टी को हराने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस समर्थकों से अपील

केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थकों से बात करते हुए कहा कि कई लोग उनसे मिले और बताया कि वे कांग्रेस को वोट देंगे, लेकिन जब उन्होंने पूछा कि दिल्ली में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है तो लोग कहने लगे कि वे आदत से कांग्रेस का बटन दबाते हैं। केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस के नेता पार्टी को हराने में लगे रहते हैं जबकि उनके समर्थक जितना काम करते हैं, पार्टी उतना हारती जाती है।

बीजेपी जीतने पर 25 हजार का नुकसान: केजरीवाल

केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थकों से अपील की कि अगर वे कांग्रेस को वोट देते हैं तो इसका मतलब है कि वे बीजेपी को फायदा पहुंचा रहे हैं। अगर बीजेपी की सरकार बनी, तो उनके लिए हर महीने करीब 25,000 रुपये का अतिरिक्त खर्चा हो सकता है। केजरीवाल ने चेतावनी दी कि बीजेपी के जीतने से दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाएं बंद हो जाएंगी।

भाजपा एजेंट के रूप में काम कर रहे राजीव कुमार

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयुक्त राजीव कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह भारतीय जनता पाटर्ी (भाजपा) के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। श्री केजरीवाल ने चुनाव आयोग से मिले नोटिस पर कहा कि दिल्ली में पैसे बंट रहे हैं, रोज चादरें बंट रही हैं यह चुनाव आयोग को दिखाई नहीं देता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राजनीति कर रहा है, क्योंकि श्री राजीव कुमार को सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुमार को किसी सीट से चुनाव लड़ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे पता है ये दो दिन में मुझे जेल में डालेंगे, डाल दें मुझे जेल में। जिस तरह की भाषा चुनाव आयोग ने लिखी है, यह उनका काम नहीं है। अगर राजनीति करनी है राजीव कुमार लड़ लें दिल्ली की एक सीट से चुनाव। श्री केजरीवाल की चुनाव आयोग को लेकर यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब आज ही नया नोटिस भेजकर उनसे 31 जनवरी सुबह 11 बजे तक पांच सवालों के जवाब सबूतों के साथ मांगे गए हैं।

लॉन्च के एक हफ्ते बाद ही चीनी DeepSeek AI लाया भूचाल, US में 600 अरब डॉलर का पहुंचाया नुकसान, कई देशों ने किया बैन

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लॉन्च के एक हफ्ते बाद ही चीन के DeepSeek AI को कुछ देशों में ब्लॉक कर दिया गया है। इटली और आयरलैंड पहले ऐसे देश बने हैं, जहां इस ऐप को एपल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है। इन देशों के रेगुलेटरी अधिकारी ऐप की डेटा नीतियों की जांच कर रहे हैं, जिससे इसकी प्राइवेसी पॉलिसियों पर सवाल उठ रहे हैं।  वहीं DeepSeek AI अमेरिका में लॉन्च होते ही बड़ी चर्चा का केंद्र बन गया है। इस ऐप ने अमेरिकी बाजार में हंगामा मचा दिया और बड़ी कंपनियों के लिए नई चुनौती पैदा कर दी है। सिर्फ दो दिनों में, DeepSeek ने Nvidia को लगभग 600 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया, और कंपनी की मार्केट वैल्यू में अरबों डॉलर की गिरावट आई।

अमेरिकी नेवी की चेतावनी 
अमेरिकी नेवी ने अपने कर्मियों को DeepSeek AI का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। नेवी ने इस ऐप को सिक्योरिटी और एथिकल कारणों से इस्तेमाल करने से बचने की चेतावनी दी है। इस बारे में अमेरिकी नेवी ने एक ईमेल भेजकर अपने मेंबर्स को बताया कि उन्हें DeepSeek के मॉडल को डाउनलोड, इंस्टॉल और इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह वॉर्निंग अमेरिकी नेवी के AI उपयोग नीति के तहत जारी की गई है।

DeepSeek ने अमेरिकी बाजार को हिला दिया 
यह चेतावनी DeepSeek R1 के रिलीज के बाद जारी की गई है, जो अमेरिकी ऐप स्टोर में Apple के ChatGPT को भी पीछे छोड़ चुका है। चूंकि DeepSeek का ओरिजिन चीन है, इसे डेटा सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऐप यूजर्स के डेटा को चीन में स्टोर करता है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिका में चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध 
अमेरिका में चीनी कंपनियों के खिलाफ यही रवैया रहा है, और पहले ही Huawei और ZTE जैसी कंपनियों पर बैन लगाया जा चुका है। DeepSeek AI एक ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म है, जिसका मतलब है कि कोई भी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके अपना ऐप्लिकेशन बना सकता है। ओपन सोर्स होने और इसकी सस्ती सर्विसेस के कारण यह ऐप तेजी से लोकप्रिय हुआ है, लेकिन इसका असर अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ा है।

 डेटा पॉलिसी पर उठ रहे सवाल 
DeepSeek ने अपनी लॉन्चिंग के कुछ ही दिनों में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की, और ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर डाउनलोड के मामले में ChatGPT को भी पीछे छोड़ दिया। हालांकि, इसकी डेटा हार्वेस्टिंग नीतियों को लेकर चिंता जताई जा रही है। अन्य चीनी ऐप्स की तरह DeepSeek भी यूजर डेटा इकट्ठा करता है, जिसमें IP एड्रेस और चैट जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल है। यही कारण हो सकता है कि इसे चीन के बाहर अपना अस्तित्व बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

डेटा को कैसे संभालता है DeepSeek 
इटली के रेगुलेटरी अधिकारियों ने कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वह यूजर डेटा को कैसे संभालती है। इतालवी समाचार एजेंसी ANSA के अनुसार, इटली के डेटा सुरक्षा प्रमुख, पास्क्वेल स्टैनजियोन ने कहा कि वे यह जांचने के लिए कार्रवाई करेंगे कि क्या ऐप यूरोपीय संघ के डेटा सुरक्षा नियमों का पालन करता है। इसी तरह, आयरिश डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने भी DeepSeek को पत्र भेजकर डेटा प्रोसेसिंग के बारे में जानकारी मांगी है।

 भारत में स्थिति 
भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि DeepSeek से देश की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह खारिज किया है कि DeepSeek से भारत के संवेदनशील डेटा का चीन को भेजे जाने का कोई खतरा है। ऐप को एक स्टार्टअप द्वारा विकसित किया गया है और भारत में इस प्रकार के 7,000 स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं।

ट्रंप इन चार देशों पर बरसाने जा रहे ‘कहर’, लिस्ट में सबसे ऊपर भारत, बोले- बेशक PM मोदी से दोस्ती लेकिन…

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, चीन और ब्राजील को “बड़े टैरिफ मेकर” करार देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए।  ट्रंप ने इन चारो देशों को “टैरिफ लगाने वाले बड़े खिलाड़ी” बताया और आरोप लगाया कि ये देश अमेरिका को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम अब और नुकसान नहीं सहेंगे और अमेरिका को सबसे पहले रखेंगे।” ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि उनका प्रशासन इन देशों पर उच्च शुल्क लगाएगा, ताकि अमेरिकी उद्योग और श्रमिकों को लाभ हो। उन्होंने कहा कि बेशख  मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छी दोस्ती है लेकिन अमेरिका सबसे ऊफर है। ट्रंप ने ये भी कहा कि  “ये चारों देश अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हम अमेरिका को पहले रखेंगे और इन देशों पर टैरिफ बढ़ाएंगे।”

फ्लोरिडा में हाउस रिपब्लिकन्स के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों की प्राथमिकता उनके अपने देश के हित हैं, लेकिन अमेरिका इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “ये देश अपने लिए अच्छा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमारे लिए नुकसानदायक हैं। अब हम उन पर टैरिफ लगाएंगे ताकि अमेरिका का फायदा हो।” यह बयान ऐसे समय आया है जब खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने वॉशिंगटन में मुलाकात कर सकते हैं। दोनों नेताओं ने सोमवार रात फोन पर बातचीत भी की, जिसमें भारत की अवैध प्रवासियों पर राय सामने आई, हालांकि टैरिफ का मुद्दा उठा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।

ट्रंप ने अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ मॉडल की बात करते हुए कहा कि विदेशी कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन करना होगा, नहीं तो उन्हें भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “अगर आप टैरिफ से बचना चाहते हैं, तो अपना प्लांट अमेरिका में लगाएं।” उन्होंने अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि अब हमें अपने सैनिकों के लिए जरूरी स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य सामग्री खुद बनानी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “कभी हम रोजाना एक जहाज बनाते थे, लेकिन अब हमारी उत्पादन क्षमता कम हो गई है। हमें इसे सुधारना होगा।”

चीन पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप ने कहा कि चीन ने अमेरिका के साथ व्यापार में बड़े स्तर पर अन्याय किया है। उन्होंने BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका) को भी चेतावनी दी कि अगर वे डॉलर का इस्तेमाल बंद करने की बात करेंगे, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप का यह बयान उनके आर्थिक एजेंडे को साफ दिखाता है। वह अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और नौकरियां वापस लाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “जैसे ही हम दूसरे देशों पर टैरिफ लगाएंगे, अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों पर टैक्स कम कर देंगे। इससे नौकरियां और फैक्ट्रियां फिर से अमेरिका में लौटेंगी।”

स्वीडन में कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की गोली मारकर हत्या (Video)

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स्वीडन (Sweden) में कुरान जलाने (Quran burning) वाले सलवान मोमिका ( Salwan Momika)की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मोमिका इस्लाम का आलोचक था और उसने 2023 में  ईद के अवसर पर स्वीडन के स्टॉकहोम की सबसे बड़ी मस्जिद के सामने मुस्लिम धार्मिक ग्रंथ कुरान को जलाकर सुर्खियों में आया था।  इस घटनै के बाद कई देशों में बवाल मच गया था और इस्लाम धर्म के अनुयायियों ने इसका विरोध किया था।

कौन है सलवान मोमिका?
सलवान मोमिका ने खुद को इराक में एक ईसाई मिलिशिया का प्रमुख बताया था। उनका संगठन, जिसे ‘इमाम अली ब्रिगेड्स’ कहा जाता है, 2014 में स्थापित हुआ था। इस पर युद्ध अपराधों के आरोप भी लगते रहे हैं।  मोमिका ने 2017 में मोसुल के बाहरी इलाके में अपना सशस्त्र समूह भी स्थापित किया था। वह अपनी कड़ी आलोचना के लिए जाने जाते थे, विशेष रूप से इस्लाम और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उनके बयानों और कार्रवाइयों के लिए।सलवान मोमिका की हत्या के मामले में अभी तक किसी भी व्यक्ति या समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है। हत्या के कारणों पर जांच जारी है, लेकिन यह माना जा रहा है कि उनकी हत्या धार्मिक और राजनीतिक कारणों से हो सकती है, खासकर इस्लाम के प्रति उनके कट्टर आलोचकों के कारण। स्वीडन की पुलिस ने हत्या की जांच शुरू कर दी है, और इसे एक गंभीर मामला माना जा रहा है।

क्या है मामला?
सलवान मोमिका ने ईद के मौके पर स्वीडन के स्टॉकहोम में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान जलाया था, जिससे कई मुस्लिम देशों में आक्रोश फैल गया था। इसके बाद, स्वीडन में कुरान जलाने की घटनाओं पर बहस छिड़ गई, और कई देशों ने इस घटना की निंदा की थी। सलवान ने अपने इस कृत्य को धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में प्रस्तुत किया था, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे धार्मिक अपमान मानता था।

 

 विरोध और प्रतिक्रियाएँ 
सलवान मोमिका की कुरान जलाने की घटना ने दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन और विवाद उत्पन्न किया। कई मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने इसे निंदनीय और अवमाननापूर्ण बताया था। स्वीडन सरकार ने इस मामले पर कई बयान दिए, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं को लेकर सवाल उठे थे कि क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है या नहीं।

भूकंप के झटकों से फिर दहला ताइवान, 5.6 रही तीव्रता

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ताइवान में बृहस्पतिवार सुबह 5.6 तीव्रता का भूकंप आया और इसके बाद भूकंप के कम से कम 12 अन्य मामूली झटके महसूस किए गए। केंद्रीय मौसम एजेंसी और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, ताइवान में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए लेकिन सबसे जोरदार 5.6 तीव्रता का भूकंप पूर्वाह्न 10 बजकर 11 मिनट पर चियाई काउंटी के दापू कस्बे में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इस भूकंप का केंद्र राजधानी ताइपे से लगभग 250 किलोमीटर (155 मील) दक्षिण में था। इस भूकंप के कारण ताइपे में इमारतें हिल गईं।

इसके कुछ ही देर बाद दापू में भूकंप के कम से कम 12 मामूली झटके आए। इस दौरान जान-माल का नुकसान होने की फिलहाल कोई सूचना नहीं मिली है। ये 21 जनवरी को दापू में आए 6.4 तीव्रता के भूकंप के बाद के झटके थे। दापू में 21 जनवरी को आए भूकंप में 15 लोगों को मामूली चोटें आईं थीं और इमारतों एवं एक राजमार्ग पुल को नुकसान पहुंचा था। पिछले साल अप्रैल में द्वीप के पर्वतीय क्षेत्र वाले पूर्वी तट हुआलियन में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके कारण कम से कम 13 लोग मारे गए थे और 1,000 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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