Tuesday, February 10, 2026
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अमेरिका में साल 2023 में वीजा खत्म होने के बाद अवैध रुकने वालों में सबसे ज्यादा भारतीय छात्र

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अमेरिकी सांसदों को एक विशेषज्ञ ने बताया है कि 2023 में भारत के 7,000 से अधिक छात्र और आगंतुक अमेरिका में निर्धारित समय से अधिक अवधि तक ठहरे। उन्होंने देश की आव्रजन नीतियों में कई सुधारों का सुझाव दिया, जिनमें एच-1बी वीजा से संबंधित सुधार भी शामिल हैं। ‘सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज’ की जेसिका एम. वॉन ने अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका संबंधी समिति को बताया कि निर्धारित समय से अधिक ठहरने वालों में सबसे अधिक संख्या एफ और एम श्रेणी के वीजा धारकों की रही।

एफ-1 के तहत वीजा में किसी व्यक्ति को किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय, सेमिनरी, कंजर्वेटरी, अकादमिक हाई स्कूल, प्राथमिक विद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान या भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्णकालिक छात्र के रूप में अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती है। एम-1 वीजा भाषा प्रशिक्षण के अलावा व्यावसायिक या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को मिलता है।

श्रीलंका में अडानी के विंड पावर प्रोजेक्ट पर जबरदस्त बवाल, विरोध के पीछे कौन ?

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श्रीलंका में अडानी ग्रुप की 500 मेगावाट की विंड पावर परियोजना को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। यह परियोजना उत्तरी श्रीलंका के  मन्नार और पुनेरिन में स्थापित की जा रही है, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। हालांकि, इस प्रोजेक्ट के खिलाफ स्थानीय लोगों और कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

 क्या है अडानी की परियोजना ?   
अडानी ग्रुप को  2023 में श्रीलंकाई कैबिनेट  से इस परियोजना की मंजूरी मिली थी। यह भारत द्वारा श्रीलंका में ग्रीन एनर्जी इन्वेस्टमेंट  का एक बड़ा हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 50 करोड़ डॉलर बताई जा रही है और इसे 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है।  इस परियोजना का उद्देश्य श्रीलंका को  स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और उसकी बिजली जरूरतों को पूरा करना है। इससे  श्रीलंका की ऊर्जा निर्भरता  घटेगी और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध भी मजबूत होंगे।

विरोध के कारण  
विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह परियोजना स्थानीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर  मन्नार क्षेत्र , जो प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।  कुछ स्थानीय समूहों को डर है कि इस परियोजना से उनकी ज़मीन छीनी जा सकती है और उन्हें विस्थापित होना पड़ सकता है। श्रीलंका में कुछ राजनीतिक दलों ने भी इस परियोजना का विरोध किया है। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि चीन समर्थित गुट इस विरोध को बढ़ावा दे सकते हैं, क्योंकि चीन पहले भी श्रीलंका में ऊर्जा और बुनियादी ढांचे  के क्षेत्र में निवेश करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के निवेश से श्रीलंका की विदेश नीति पर असर पड़ सकता है और चीन तथा अन्य देश इसे रणनीतिक खतरे के रूप में देख सकते हैं।

कोई ‘छुपा हुआ हाथ’ !
अडानी ग्रुप की यह परियोजना ऐसे समय पर सामने आई है जब  भारत और चीन  के बीच श्रीलंका में प्रभाव बढ़ाने की होड़  जारी है। श्रीलंका में पहले ही हंबनटोटा पोर्ट और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं में चीन का बड़ा निवेश रहा है। अब जब भारत श्रीलंका में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश कर रहा है, तो कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन समर्थित लॉबी अडानी प्रोजेक्ट को असफल करने की कोशिश कर रही है।

श्रीलंका सरकार का रुख    
श्रीलंका सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है और इससे श्रीलंका को  बिजली संकट से उबरने में मदद मिलेगी। सरकार ने स्थानीय लोगों को यह आश्वासन भी दिया है कि उनकी ज़मीन और पर्यावरण को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।  अडानी की यह परियोजना श्रीलंका के लिए आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका विरोध यह संकेत देता है कि यह केवल स्थानीय लोगों का विरोध नहीं है , बल्कि इसके पीछे बड़े राजनीतिक और रणनीतिक हित भी जुड़े हो सकते हैं।

इंदौर में पहली से आठवीं तक के प्राइवेट स्कूल संचालक और शिक्षकों ने निकाली विरोध रैली, दिया धरना

मध्य प्रदेश में एमपी बोर्ड और सभी प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के द्वारा आज हड़ताल करते हुए स्कूलों को बंद रखा गया,संगठन ने पहली से आठवीं तक की मान्यता नवीकरण के मुद्दे पर यह हड़ताल की है। इंदौर के रीगल चौराहे पर भी संगठन के कई लोगों ने इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया और इस फैसले को लेकर आक्रोश जताया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थान से जुड़े लोग मौजूद रहे,सभी लोग रैली के रूप में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पहुंचे धरना दिया।

दरअसल मान्यता नवीनीकरण के मामले में कई नए नियम शासन के द्वारा जोड़े गए हैं। जिसमें रजिस्टर्ड किरायानामा के कार्य को लेकर काफी समस्याओं का सामना प्राइवेट स्कूल संचालकों को करना पड़ रहा है। इस संबंध में पहले भी शासन प्रशासन से ज्ञापन देकर मांग की गई थी, लेकिन अभी तक इस समस्या का हल नहीं हो पाया है।

स्कूल संचालकों का कहना है कि अगर रजिस्टर्ड किरायानामा कंपलसरी किया जाता है तो इससे कई सारे विद्यालयों पर ताला लग जाएगा। इसी के विरोध में प्राइवेट स्कूल संचालक और प्राइवेट स्कूलों से संबंधित संगठन विरोध कर रहे हैं।अब देखना होगा की स्कूल संचालकों की इस हड़ताल के बाद राज्य शासन क्या निर्णय लेती है।

एसटीआर परसापानी में मिली युवक की लाश, पुलिस जांच में जुटी

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में आने वाले सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बागड़ा बफर जॉन के अंतर्गत परसापानी बीट में एक 30 साल के युवक का शव मिला है। यह शव 7 दिन पुराना है और अभी शव की पहचान नहीं हो पाई है, एसटीआर की सूचना पर माखन नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई थी और घटनास्थल के आसपास पुलिस ने तलाश शुरू की, लेकिन पुलिस को मृतक के कपड़े या कोई भी अभी सबूत नहीं मिला है। युवक की पहचान नहीं हो पाई है,युवक की मौत का कारण भी पता नहीं चल पाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बागड़ा बफर रेंज के परसापनी बीट के जंगल में बीट गार्ड और चौकीदार शाम 4 बजे गश्त कर रहे थे। जंगल में एक स्थान पर उन्हें दुर्गंध आई पास जाकर देखा तो एक युवक का शव पड़ा हुआ था। जो एक सप्ताह पुराना था तत्काल सूचना पर माखन नगर पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। युवक की मौत का कारण अभी पता नहीं चल पाया है।

महाकुंभ भगदड़ में छतरपुर की एक और महिला की मौत, MP के अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि

प्रयागराज महाकुंभ भगदड़ में छतरपुर जिले की एक ओर महिला की मौत की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि मृतक महिला शीला सोनी छतरपुर शहर के लोधी कुईया झंडा बाबा के समीप की रहने वाली है। महिला शीला सोनी अपने परिवार जनों के साथ स्नान करने गई थी, जहां भगदड़ के दौरान उसकी मौत हो गई।

छतरपुर जिले से दो महिलाओं की अभी तक कुंभ स्नान के दौरान मौत की पुष्टि हो चुकी है।

‘यमुना में जहर’ वाले बयान पर कंवरपाल गुर्जर का हमला, बोले- केजरीवाल के आरोप गैर जिम्मेदाराना

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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से हरियाणा में यमुना में जहर मिलाने के आरोप पर पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

”राजनीतिक जीवन में ऐसे घटिया आरोप लगाते किसी को नहीं सुना”

यमुनानगर में मीडिया से बातचीत करते हुए गुर्जर ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसे घटिया आरोप लगाते किसी को नहीं सुना। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी हमारी जनता है, हम दिल्ली के हैं, दिल्ली हमारी राजधानी है। इस तरह के आरोप लगाना पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना है और बेबुनियाद है। पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इसी हरियाणा की यमुना का आचमन मुख्यमंत्री नायब सैनी ने लिया, जिसे सब मीडिया ने देखा। उन्होंने कहा कि वास्तव में दिल्ली में जो इंतजाम यमुना को लेकर किए जाने थे, वह नहीं किए गए।

पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना बयान हैः गुर्जर

गुर्जर ने कहा कि किसी को भी इतने घटिया स्तर के आरोप नहीं लगाने चाहिए। यह पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना बयान है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है ।उन्होंने कहा कि दिल्ली हमारी राजधानी है, वहां भी हमारे भाई रहते हैं। हम भारतीय हैं सबके लिए काम करते हैं। इस तरह के आरोप लगाना बहुत ही गैर जिम्मेदारना है।

डिफाल्टर उपभोक्ता पर बिजली निगम ने कसा शिकंजा, 27 करोड़ की हुई रिकवरी

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बिजली निगम ने जनवरी माह के अंत तक रिकवरी को लेकर शिकंजा कस दिया। अंबाला शहर डिवीजन से ही बकाया 27 करोड़ की रिकवरी की गई। यह रिकवरी 50 हजार से ऊपर की रकम वाले उपभोक्ता से की गई। अब निगम 10 हजार से लेकर 50 हजार तक बकाया बिजली बिल वाले उपभोक्ता पर शिकंजा कसेगा। इन डिफाल्टर उपभोक्ताओं से रिकवरी की जाएगी। निगम ने इसके लिए सूची तैयार कर ली है। इस सूची में घरेलू, वाणिज्यिक श्रेणी के उपभोक्ता शामिल हैं।

अंबाला शहर डिवीजन में बिजली निगम के 31 हजार डिफाल्टर उपभोक्ता में से 15 हजार उपभोक्ता ने बिजली निगम का बकाया बिल का पैसा जमा करवा दिया है। निगम ने कुल 40 करोड़ में से 27 करोड़ की रिकवरी कर ली है, जबकि 13 करोड़ अभी भी बकाया है। अभी 16 हजार डिफाल्टर उपभोक्ता रह गए हैं। इन उपभोक्ता से रिकवरी के लिए निगम अभियान चलाएगा। इन डिफाल्टर उपभोक्ता में 10 से लेकर 50 हजार रकम के उपभोक्ता शामिल हैं।
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शहर डिवीजन में 236 ट्रांसफार्मर में से 136 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे, जबकि करीब 100 पुराने ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इन ट्रांसफार्मर की क्षमता दोगुनी की जाएगी। इनमें से ज्यादा ट्रांसफार्मर को लेकर एस्टीमेट तैयार हो चुके हैं। फरवरी माह में सभी ट्रांसफार्मर को लेकर एस्टीमेट पूरे किए जाएंगे। इसके बाद नए ट्रांसफार्मर लगाने के साथ पुराने ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

निर्मला सीतारमण लगातार 8वें बजट के साथ रचेंगी इतिहास

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लगातार 8वां बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाएंगी। उम्मीद है कि आम बजट में कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने तथा महंगाई और स्थिर वेतन वृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग को राहत देने के उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही सीतारमण पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा अलग-अलग समयावधि में पेश किए गए 10 बजटों के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी। देसाई ने 1959-1964 के दौरान वित्त मंत्री के रूप में कुल छह बजट और 1967-1969 के बीच चार बजट पेश किए थे। सीतारमण को 2019 में भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनाया गया था। इसी साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। तब से सीतारमण ने सात बजट पेश किए हैं।

स्वतंत्र भारत का पहला आम बजट 26 नवंबर, 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और बाद में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में वित्त मंत्री के तौर पर कुल 10 बजट पेश किए हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने नौ मौकों पर बजट पेश किया। प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आठ बजट पेश किए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1991 से 1995 के बीच लगातार पांच बार बजट पेश किया, जब वह पी वी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री थे।

सबसे लंबा बजट भाषण सीतारमण ने एक फरवरी, 2020 को दो घंटे 40 मिनट का दिया। वर्ष 1977 में हीरूभाई मुलजीभाई पटेल का अंतरिम बजट भाषण अब तक का सबसे छोटा भाषण है, जिसमें केवल 800 शब्द हैं। बजट पारंपरिक रूप से फरवरी के आखिरी दिन शाम पांच बजे पेश किया जाता था। वर्ष 1999 में समय बदला गया और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिंह ने सुबह 11 बजे बजट पेश किया। तब से बजट सुबह 11 बजे पेश किया जाता है। इसके बाद 2017 में बजट पेश करने की तिथि बदलकर एक फरवरी कर दी गई, ताकि सरकार मार्च के अंत तक संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर सके।

Closing Bell: बाजार में रही तेजी, सेंसेक्स 76,759 और Nifty 23,249 पर बंद

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शेयर बाजार आज यानी 30 जनवरी को हरे निसान पर बंद हुआ। सेंसेक्स-निफ्टी में आज दिनभर उतार-चढ़ाव रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 226 अंक उछलकर 76,759 के स्तर पर जबकि निफ्टी भी 86 अंक मजबूत हुआ, ये 23,249 के स्तर पर बंद हुआ। आज पावर और FMCG शेयर्स में तेजी रही। वहीं IT और ऑटो शेयर्स में गिरावट रही।

जापान के निक्‍केई में 0.21% की तेजी

  • एशियाई बाजार में जापान के निक्‍केई में 0.21% की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स और कोरिया का कोस्पी आज बंद है।
  • NSE के डेटा के अनुसार, 29 जनवरी को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 2,586 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस दौरान घरेलू निवेशकों (DIIs) ने 1,792 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
  • 29 जनवरी को अमेरिका का डाओ जोंस 0.31% की गिरकर 44,713 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 0.47% गिरकर 6,039 पर बंद हुआ। नैस्डैक इंडेक्स में 0.51% की गिरावट रही।

कल बाजार में रही थी तेजी

इससे पहले कल यानी 29 जनवरी को शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 631 अंक की तेजी के साथ 76,532 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 205 अंक की तेजी रही, ये 23,163 के स्तर पर बंद हुआ।

Economic Survey 2024-25: 31 जनवरी को होगा पेश, बजट से पहले अर्थव्यवस्था की तस्वीर होगी साफ

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आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2024-25 को 31 जनवरी को संसद में पेश किया जाएगा। यह रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था का व्यापक विश्लेषण करेगी और आर्थिक नीतियों, विकास दर, प्रमुख सेक्टर्स जैसे एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की स्थिति पर रोशनी डालेगी।

इस सर्वे को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया गया है, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार मीडिया के सवालों के जवाब देंगे।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?

आर्थिक सर्वेक्षण सरकार द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो देश की आर्थिक सेहत और वित्तीय प्रगति का आकलन करता है। यह रिपोर्ट बीते वित्त वर्ष के प्रदर्शन का लेखा-जोखा देती है और आने वाले वर्षों के लिए संभावनाओं और नीतिगत दिशा की झलक दिखाती है।

इस रिपोर्ट को वित्त मंत्रालय के अंतर्गत तैयार किया जाता है और इसमें आर्थिक सुधारों, सरकारी योजनाओं, औद्योगिक विकास, व्यापार नीति और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का विश्लेषण किया जाता है।

इकोनॉमिक सर्वे का महत्व और उद्देश्य

  • विकास की समीक्षा: देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन और विकास दर का मूल्यांकन।
  • चुनौतियों की पहचान: महंगाई, बेरोजगारी, राजकोषीय घाटा जैसी आर्थिक चुनौतियों पर फोकस।
  • भविष्य की नीतियां: बजट से पहले सरकार के आर्थिक एजेंडे और प्राथमिकताओं का संकेत।
  • विभिन्न सेक्टर्स की स्थिति: कृषि, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और व्यापार के रुझानों का विश्लेषण।

दो भागों में होता है पेश

2015 के बाद से आर्थिक सर्वेक्षण को दो भागों में प्रस्तुत किया जाने लगा।

पहला भाग: बजट से पहले पेश किया जाता है, जिसमें अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति, सरकारी वित्तीय स्थिति और प्रमुख आर्थिक रुझानों की जानकारी होती है।
दूसरा भाग: जुलाई या अगस्त में जारी किया जाता है, जिसमें विस्तृत आर्थिक आंकड़े और सेक्टर-वार विश्लेषण शामिल होते हैं।

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