NATIONAL : उत्तराखंड में लिए जा रहे घोड़े-खच्चरों के सैंपल, चारधाम से पहले इस वजह से अलर्ट है सरकार

0
69

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है. रुद्रप्रयाग जिले में कुछ घोड़े-खच्चरों में इक्वाइन इनफ्लुएंजा की पुष्टि होने के बाद राज्य सरकार ने स्थिति पर नजर रखने और समय रहते नियंत्रण के निर्देश दिए हैं. इसी क्रम में गुरुवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से कुल 885 घोड़े-खच्चरों के सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए संबंधित लैब में भेजा गया है.

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देश के बाद विभाग ने तेजी से कदम उठाए हैं. विभाग की ओर से न केवल राज्य के भीतर बल्कि अन्य राज्यों से आने वाले घोड़े-खच्चरों की भी स्वास्थ्य जांच की जा रही है. विभाग के निदेशक डॉ. नीरज सिंघल ने जानकारी दी कि अब तक राज्यभर से कुल 2696 सैंपल लिए जा चुके हैं. इनमें से श्रीनगर और पशुलोक लैब से 1033 सैंपल प्राप्त हुए हैं.

अब तक प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, 24 घोड़े-खच्चरों में इक्वाइन इनफ्लुएंजा की पुष्टि हुई है, जबकि 712 सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई है. पॉजिटिव पाए गए घोड़ों का इलाज शुरू कर दिया गया है. विभागीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दवाइयों और वैक्सीनेशन की व्यवस्था भी कर रही हैं.

इक्वाइन इनफ्लुएंजा एक विषाणुजनित रोग है, जो मुख्यतः घोड़े, खच्चर और गधों को प्रभावित करता है. यह रोग तेजी से फैलता है और संक्रमित पशु को बुखार, खांसी, कमजोरी जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं. हालांकि यह रोग आमतौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन अगर समय पर इलाज न हो तो यह यात्रा मार्गों पर लगे जानवरों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है, जिससे यात्रा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.

चारधाम यात्रा के लिए हजारों की संख्या में घोड़े-खच्चर हर वर्ष गौरीकुंड, सोनप्रयाग, यमुनोत्री और बदरीनाथ मार्गों पर लगाए जाते हैं. ऐसे में किसी भी पशु रोग का फैलाव न केवल इन जानवरों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकता है.

पशुपालन विभाग यात्रा मार्गों पर लगाए जाने वाले सभी घोड़े-खच्चरों का हेल्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य करने की योजना बना रहा है. इसके तहत किसी भी जानवर को बिना जांच और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के यात्रा में शामिल नहीं किया जाएगा. सभी पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है और विभागीय टीमें क्षेत्रवार जाकर हेल्थ चेकअप कर रही हैं.

पशुपालन विभाग ने आमजन और पशुपालकों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1962 जारी किया है, जिस पर इक्वाइन इनफ्लुएंजा या किसी भी अन्य पशु रोग संबंधी जानकारी, सहायता या रिपोर्टिंग के लिए संपर्क किया जा सकता है. विभागीय अधिकारी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि किसी भी लक्षण दिखाई देने पर घोड़े-खच्चरों को यात्रा से रोका जाए और उन्हें नजदीकी पशु अस्पताल में दिखाया जाए.

राज्य सरकार और पशुपालन विभाग द्वारा की जा रही यह कार्रवाई समय की मांग है, जिससे चारधाम यात्रा के दौरान पशु स्वास्थ्य और जनसुरक्षा दोनों को सुनिश्चित किया जा सके. इक्वाइन इनफ्लुएंजा जैसे रोगों पर समय रहते नियंत्रण और इलाज न केवल जानवरों को राहत देगा बल्कि यात्रा के संचालन को भी सुगम बनाएगा. विभाग की ओर से की जा रही निरंतर निगरानी और सक्रियता इस दिशा में सराहनीय कदम है.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here