एचपीयू और कॉलेजों में प्रवेश के समय विद्यार्थियों को देना होगा नशा न करने का शपथ पत्र

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) व काॅलेजों में अगले शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रवेश के समय विद्यार्थियों को नशा न करने का शपथ पत्र भरना होगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय प्रशासन अभिभावकों को भी जागरूक करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन पत्र लिखकर व ई-मेल भेजकर अभिभावकों को जागरूक करेगा। यह निर्णय विश्वविद्यालय में आयोजित हुई 35वीं यूनिवर्सिटी कोर्ट की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने की। बैठक के दौरान राज्यपाल ने प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा एक गंभीर समस्या है, इसे जड़ से खत्म करने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। इसके लिए काॅलेज स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है।

विश्वविद्यालय को पुनर्प्रतिष्ठापित करने के लिए मिलकर करने होंगे प्रयास
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को पुनर्प्रतिष्ठापित करने के लिए मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। बैठक में राज्यपाल ने वर्ष 2021-22 तथा 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट को अनुमोदित किया तथा वर्ष 2018-19 का वार्षिक लेखे को भी अनुमोदित किया। बैठक में राज्यपाल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार, नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति, नशामुक्त हिमाचल, रोजगारपरक शिक्षा और उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण, अनुसंधान और नवोन्मेष तथा खेल और शारीरिक शिक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने समय पर वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा वार्षिक लेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के दिए निर्देश
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने बैठक में एचपीयू के अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाए और इसे लागू करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीरता से कदम उठाए, ताकि सत्र 2025-26 से इसे लागू किया जा सके। बैठक में उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया तथा विधायक सुरेश कुमार ने भी अपने सुझाव दिए। रजिस्ट्रार डाॅ. वीरेंद्र शर्मा ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। इस मौके पर राज्यपाल के सचिव चंद्र प्रकाश वर्मा, कुलपति प्रो. एसपी बंसल, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. राजिंद्र वर्मा तथा विश्वविद्यालय कोर्ट के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

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