ट्रंप ने ओबामा का आदेश पलटा, उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी का भी बदल दिया नाम

0
85

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर उत्तर अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी का नाम फिर से ‘माउंट मैकिन्ले’ कर दिया। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसका नाम बदलकर ‘डेनाली’ रखा था। हालांकि, चोटी के आसपास का राष्ट्रीय उद्यान ‘डेनाली नेशनल पार्क एंड प्रिजर्व’ ही कहलाएगा। इस आदेश पर ट्रंप ने सोमवार को हस्ताक्षर किए। अपना फैसला सुनाते हुए ट्रंप ने कहा, “हम ‘माउंट मैकिन्ले’ के नाम को बहाल करेंगे। यह एक महान राष्ट्रपति, विलियम मैकिन्ले, का सम्मान है, जो इस नाम के हकदार हैं।” इससे पहले ट्रंप ने  ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ का नाम घोषित किया है।

चोटी का नाम बदलने के इस फैसले में रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की का अहम योगदान रहा। उन्होंने नाम बदलने की प्रक्रिया को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आदेश में कहा गया, “यह आदेश राष्ट्रपति मैकिन्ले के प्रति सम्मान व्यक्त करता है, जिन्होंने हमारे देश के लिए अपना जीवन दिया और अमेरिका की विरासत को मजबूत किया। इस आदेश के तहत, 30 दिनों के भीतर ‘माउंट मैकिन्ले’ का नाम आधिकारिक रूप से बहाल किया जाएगा।” हालांकि, विलियम मैकिन्ले, जो अमेरिका के 25वें राष्ट्रपति थे, कभी अलास्का नहीं गए थे और उनका इस पहाड़ से कोई सीधा जुड़ाव नहीं था।

ओबामा ने 2015 में इस चोटी का नाम बदलकर ‘डेनाली’ कर दिया था, जो अलास्का के मूल निवासियों द्वारा सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा नाम है। ‘डेनाली’ का अर्थ कोयुकॉन एथाबास्कन भाषा में “महान” या “ऊंचा” होता है। ट्रंप के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। पर्यावरण और सांस्कृतिक समूहों ने इस कदम की आलोचना की है। सिएरा क्लब के भूमि संरक्षण कार्यक्रम के निदेशक एथन मैनुएल ने इसे अलास्का के मूल निवासियों की परंपरा की अनदेखी बताया। उन्होंने कहा, “यह चोटी सदियों से अलास्का के लोगों के लिए ‘डेनाली’ रही है।

 

यह कदम ट्रंप की सांस्कृतिक लड़ाई छेड़ने की मंशा दिखाता है।” ट्रंप ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान एक और बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर  ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखा जाएगा।  उन्होंने कहा,  “यह खाड़ी अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, इसे अब आधिकारिक रूप से ‘गुल्फ ऑफ अमेरिका’ कहा जाएगा।” इन फैसलों पर भारी विवाद शुरू हो गया है। कई लोगों का मानना है कि ये कदम सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और पर्यावरण नीति पर बहस को और बढ़ावा देंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here