Chamba: आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे पांगी के 96 एसएमसी शिक्षक

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चम्बा जिले की दुर्गम घाटी पांगी के स्कूलों में तैनात 96 एसएमसी शिक्षक 21 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। इससे यहां के स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। घाटी के करीब 13 स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई की व्यवस्था एसएमसी के सहारे ही है। वहीं कई वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में भी शिक्षकों का आधा स्टाफ एसएमसी के तहत ही तैनात किया गया है। ऐसे में एक साथ शिक्षकों के हड़ताल पर जाने से पढ़ाई बिल्कुल बंद हो जाएगी। इस बारे में शिक्षकों ने शिक्षा विभाग को पहले ही अल्टीमेटम दिया था।

13 वर्षों के उपरांत भी सरकार ने बनाई कोई स्थायी नीति
एसएमसी के तहत तैनात शिक्षकों का कहना है कि 2012 से दुर्गम व जनजातीय क्षेत्रों में सैंकड़ों अध्यापक अपनी कर्त्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन 13 वर्षों के उपरांत भी सरकार द्वारा कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है, जिसके चलते राज्य कार्यकारिणी के आदेश पर 21 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों के लिए दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था करने के बारे में विभाग ने भी एक स्कूल से दूसरे स्कूलों में डैपुटेशन पर व्यवस्था करने की तैयारी कर ली है।

इन स्कूलों में तैनात हैं एसएमसी शिक्षक
एसएमसी के सहारे चल रहे स्कूलों में राजकीय प्राथमिक पाठशाला कुमार, घिसल, राजकीय प्राथमिक पाठशाला निचला कुठल, राजकीय प्राथमिक पाठशाला हमीरकुंड, राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिचम, चलासरी, हिलुटवान, राजकीय प्राथमिक पाठशाला खजियार, पुंटो, राजकीय प्राथमिक पाठशाला उडैनी, रेई मौझी तथा राजकीय प्राथमिक पाठशाला अजोग शामिल हैं। वहीं कई वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएं ऐसी हैं, जहां एसएमसी के अलावा दूसरे स्थायी शिक्षक भी तैनात हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हिलौर में 9 एसएमसी अध्यापक हैं। वहीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेचू में 5, पुर्थी में 7, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय धरवास में 5, किलाड़ में 4 तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रेई में 3 अध्यापक एसएमसी के तहत सेवाएं दे रहे हैं।

क्या कहते हैं प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक चम्बा
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक चम्बा बलवीर सिंह ने कहा कि जिन स्कूलों में शिक्षक हड़ताल पर जा रहे हैं, उन स्कूलों में आसपास के स्कूलों से शिक्षकों की तैनाती डैपुटेशन के तहत की जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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