Monday, August 31, 2026
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WORLD : PoK के सिर पर पाकिस्तान ने बिठाया ‘लूजर पीएम’, कौन हैं इफ्तिखार अली गिलानी?

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भारी धांधली और विरोध प्रदर्शनों के बीच इफ्तिखार अली गिलानी को नया प्रधानमंत्री चुना गया है. इसे लोकतंत्र का मजाक कहा जा रहा है क्योंकि गिलानी आम चुनाव में अपनी सीट हार गए थे. इसके बावजूद इस्लामाबाद और नवाज शरीफ के इशारे पर उन्हें ‘चोर दरवाजे’ से असेंबली में लाया गया और पीएम बना दिया गया. अपनी ही पार्टी PML-N के नेताओं और आम जनता के भारी विरोध के बीच बने इस ‘लूजर पीएम’ से पूरे PoK में गुस्सा बहुत बढ़ गया है.

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में लोकतंत्र के नाम पर एक बार फिर ऐसा सर्कस रचा गया है, जिसने पूरी दुनिया के सामने इस्लामाबाद का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है. अब पीओके की जनता के सिर पर एक ‘लूजर पीएम’ बिठा दिया गया है. ये भारी विरोध प्रदर्शनों, खून-खराबे और धांधली के गंभीर आरोपों के बीच शुक्रवार को बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को PoK का नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया. इफ्तिखार गिलानी खुद अपनी सीट पर चुनाव हार गए थे लेकिन इसके बावजूद राजनीति खेलकर उन्हें पीओके का ‘लूजर कैंडिटेट’ को प्रधानमंत्री बना दिया.

जिसे PoK की जनता ने ठुकराया, उसी को बना दिया प्रधानमंत्री
पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के इफ्तिखार गिलानी ने मुजफ्फराबाद स्थित तथाकथित विधानसभा में कुर्सी तो हासिल कर ली, लेकिन इस चुनाव की सबसे शर्मनाक सच्चाई ये है कि गिलानी खुद अपनी सीट पर चुनाव हार गए थे. जनता द्वारा पूरी तरह नकार दिए जाने के बाद भी इस्लामाबाद के आकाओं और नवाज शरीफ के इशारे पर उन्हें ‘चोर दरवाजे’ यानी टेक्नोक्रेट रिजर्व सीट से विधानसभा में घुसाया गया और अब वजीर-ए-आजम की कुर्सी पर बैठा दिया गया है. इस घटिया राजनीतिक खेल के बाद PoK की जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है और सड़कों पर दोबारा हिंसा भड़कने की आशंका तेज हो गई है.

इफ्तिखार गिलानी को क्यों कहा जा रहा है ‘लूजर पीएम’?
राजनैतिक विश्लेषकों और PoK की जनता की नजरों में बैरिस्तर इफ्तिखार अली गिलानी सिर्फ एक ‘कठपुतली’ ही नहीं, बल्कि पूरी तरह एक ‘लूजर पीएम’ हैं. इसके पीछे एक-दो नहीं, बल्कि कई ठोस कारण मौजूद हैं जो उनके राजनीतिक वजूद पर सवाल खड़े करते हैं.

जनता की अदालत में करारी हार: लोकतंत्र का पहला नियम होता है जनमत. तीन चरणों में, 27 जुलाई, 2 अगस्त और 3 अगस्त हुए आम चुनावों में PoK की जनता ने गिलानी को सीधे तौर पर वोट देने से मना कर दिया. वो अपनी सीधी चुनावी सीट से बुरी तरह हार गए. जब किसी नेता को उसके अपने इलाके की जनता खारिज कर देती है, तो उसे पूरे प्रदेश का नेतृत्व सौंपना सीधे-सीधे जनादेश का अपमान है.

‘चोर दरवाजे’ से असेंबली में एंट्री: चुनाव हारने के बाद अपनी साख बचाने और इस्लामाबाद की वफादारी भुनाने के लिए गिलानी ने शॉर्टकट रास्ता चुना. उन्हें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित 8 सीटों में से एक ‘टेक्नोक्रेट सीट’ का सहारा देकर असेंबली में घुसाया गया. यानी वो जन-प्रतिनिधि नहीं, बल्कि मनोनित मोहरा बनकर सदन में पहुंचे.

बिना जनादेश का ‘डमी लीडर’: PoK की 53 सीटों वाली विधानसभा में 45 सीटों पर जनता सीधे वोट डालती है. गिलानी इनमें से एक भी सीट जीतने में नाकाम रहे. एक ऐसा नेता जिसके पास खुद का कोई वोट बैंक या जनादेश नहीं है, वो न तो स्वतंत्र फैसले ले सकता है और न ही जनता के हक में आवाज उठा सकता है. वो पूरी तरह से इस्लामाबाद में बैठे अपने आकाओं के इशारों पर नाचने को मजबूर रहेगा.

अपनी ही पार्टी में साख का संकट: गिलानी की नाकामी का आलम ये है कि उन्हें अपनी ही पार्टी का पूरा समर्थन हासिल नहीं है. PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया और वोटिंग सेशन का बहिष्कार कर दिया. जो नेता अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का भरोसा नहीं जीत पाया, वो ‘लूजर’ नहीं तो और क्या है?

मुजफ्फराबाद में बुलाई गई तथाकथित विधानसभा की बैठक में कुल 44 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया. इसमें इफ्तिखार गिलानी को 30 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के मुख्तार अहमद को सिर्फ 14 वोटों से ही संतोष करना पड़ा.

वैसे तो PoK की इस तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, लेकिन इस समय वहां केवल 46 सदस्य ही मौजूद हैं. पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर चुनाव हिंसा और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण टाल दिए गए थे. वोटिंग के दौरान पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और पार्टी के अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आए

नवाज शरीफ का हुक्म: बृहस्पतिवार को ही PML-N के सुप्रीम लीडर नवाज शरीफ ने लाहौर से गिलानी के नाम पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद मुजफ्फराबाद में सिर्फ नाटक होना बाकी थाअपनों का ही बहिष्कार: PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर अपनी ही पार्टी के इस फैसले से इतने नाराज हुए कि वो वोटिंग सेशन में शामिल ही नहीं हुए.

PoK में हुए इस चुनाव का इतिहास किसी प्रहसन से कम नहीं है. कुल 53 सीटों वाले इस ढांचे में 45 सीटों पर जनता सीधे वोट डालती है, जबकि 8 सीटें रिजर्व होती हैं. अब तक हुई 38 डायरेक्ट सीटों की गिनती में PML-N को 25 और PPP को 12 सीटें मिली हैं, जबकि एक सीट अवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी ने जीती और PML-N को समर्थन दे दिया.
आरक्षित 8 सीटों में से भी 6 सीटें फर्जी तरीके से PML-N को ही दे दी गईं. यानी जिस नेता को सीधे चुनाव में जनता ने पूरी तरह बाहर कर दिया था, उसे ही रिजर्व सीट के जरिए जबरन वजीर-ए-आजम बनाकर जनता के सिर पर लाद दिया गया.
जून से जल रहा है PoK: ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ का भड़का गुस्सा
PoK की जनता सालों से इस्लामाबाद के जुल्मों, आसमान छूती महंगाई, भारी-भरकम बिजली बिलों और पाकिस्तानी सेना की तानाशाही से तंग आ चुकी है. जून की शुरुआत से ही ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ के बैनर तले हजारों लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी पुलिस और सुरक्षा बलों ने सीधी गोलियां चलाईं, जिसमें कई आम नागरिकों और जवानों की मौत हो चुकी है.

पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर बैन तक लगा दिया था, लेकिन जनता का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है. आंदोलनकारी खास तौर पर शरणार्थियों के नाम पर आरक्षित 12 सीटों और चुनावों में बड़े पैमाने पर की जा रही धांधली का विरोध कर रहे हैं. अब एक ऐसे ‘हारे हुए नेता’ का प्रधानमंत्री बनना आग में घी डालने जैसा काम करेगा.

क्या ढहने वाला है इस्लामाबाद का ये नाटक?
PoK में आज जो हालात हैं, वे ये बताने के लिए काफी हैं कि वहां की जनता अब पाकिस्तान के इस फर्जी लोकतंत्र और कठपुतली सरकारों से तंग आ चुकी है. भुखमरी, बेरोजगारी और अब इस ‘लूजर पीएम’ के थोपे जाने से वहां के लोगों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है.
इफ्तिखार गिलानी का प्रधानमंत्री बनना इस्लामाबाद के लिए कोई जीत नहीं, बल्कि उस जन-आक्रोश की ज्वाला को और भड़काने का जरिया बन गया है जो आने वाले दिनों में पाकिस्तान के अवैध कब्जे की पूरी इमारत को ढहा देगा.

WORLD : नेपाल ने विदेशी मदद को दी मंजूरी: भारत भेजेगा टनल रेस्क्यू और मेडिकल टीमें, 57.5 टन राहत सामग्री पहुंची

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नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के लिए अब विदेशी मदद लेने का रास्ता साफ हो गया है। काठमांडू सरकार ने पहले विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अब सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों और खोज-बचाव टीमों को प्रभावित इलाकों में काम करने की अनुमति दी जा रही है।

भारत ने नेपाल के अनुरोध पर तुरंत मदद की पेशकश की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी में है। सबसे पहले एक सर्वे टीम भेजी जा रही है, जो प्रभावित इलाकों का जायजा लेकर जरूरी उपकरणों और बचाव अभियान की जरूरतों का आकलन करेगी।

इसके साथ भारत मेडिकल टीम भी भेज रहा है। भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज और तकनीकी टीमें उपलब्ध कराने की पेशकश की है, ताकि बाढ़ से टूटी कनेक्टिविटी को जल्द बहाल किया जा सके। एक बेली ब्रिज पहले से नेपाल में मौजूद है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद बदला फैसला
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद उनके देशों की ओर से नेपाल सरकार पर दबाव बढ़ा था। एक वरिष्ठ नेपाली अधिकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार मांग कर रहा था कि कम से कम खोज-बचाव विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को नेपाल आने की अनुमति दी जाए। इसके बाद सरकार ने कुछ चुनिंदा इलाकों में सीमित विदेशी विशेषज्ञों को अनुमति देने का फैसला किया।

रसुवा और नुवाकोट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में कई लोगों के फंसे या लापता होने की खबर है। मुश्किल हालात और सीमित प्रगति के बीच विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू की जरूरत महसूस की जा रही है।

फॉरेंसिक जांच में भी मिलेगी विदेशी विशेषज्ञों की मदद
बाढ़ और मलबे के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं। नेपाल में डीएनए टेस्टिंग और फॉरेंसिक पहचान की क्षमता सीमित होने के कारण विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया गया है। इससे लापता लोगों की पहचान और शवों को उनके परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारत ने भेजी 10 टन और राहत सामग्री
भारत ने नेपाल को तीसरी खेप में 10 टन मानवीय सहायता भेजी है। इसमें पोर्टेबल जनरेटर, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और पानी साफ करने वाली टैबलेट शामिल हैं। इसी फ्लाइट से 11 सदस्यीय डॉक्टर, पैरामेडिक और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम भी भेजी जा रही है। 26 अगस्त से अब तक भारत की ओर से नेपाल को दी गई कुल राहत सहायता 57.5 टन हो चुकी है। नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। विदेशी विशेषज्ञों की मदद मिलने से सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।

NATIONAL : जम्मू-कश्मीर के राजौरी में भारी गोलीबारी, LoC पर घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम, सेना का सर्च ऑपरेशन जारी

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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में LoC पर संदिग्ध गतिविधि दिखने के बाद सेना ने की फायरिंग। घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह पहला बड़ा सीजफायर उल्लंघन है।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना के मुस्तैद जवानों ने आतंकवादियों की घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात LoC के पास संदिग्ध गतिविधियों को देखने के बाद भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाला और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सीमा पार से भी जवाबी फायरिंग की गई। दोनों ओर से करीब डेढ़ से दो घंटे तक रुक-रुक कर छोटे हथियारों से भारी गोलीबारी होती रही। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार रात करीब 10:00 बजे राजौरी सेक्टर के तारकुंडी इलाके में हुई। भारतीय जवानों ने सीमा पर कुछ संदिग्ध आतंकियों को रेंगते हुए आगे बढ़ते देखा था, जिसके तुरंत बाद सेना ने चेतावनी के तौर पर और घुसपैठ रोकने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि, तकरीबन डेढ़ घंटे चली इस पूरी गोलाबारी में भारतीय पक्ष की ओर से किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बड़ी हिमाकत
सुरक्षा विश्लेषकों और सैन्य सूत्रों का कहना है कि यह सीजफायर उल्लंघन पिछले साल मई (7 से 10 मई) के दौरान भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद का सबसे बड़ा उल्लंघन है। महज 22 मिनट चले उस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने LoC पार किए बिना 26 सटीक मिसाइलों से मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मुख्यालयों को तबाह कर दिया था। उस कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने पहले भी कई बार नागरिक इलाकों को निशाना बनाया था और अब एक बार फिर अपनी आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल से ध्यान भटकाने के लिए इस सीजफायर उल्लंघन का सहारा लिया है।

इलाके में अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी
रात भर चली इस भारी गोलाबारी के बाद शनिवार सुबह से ही भारतीय सेना ने पूरे तारकुंडी और राजौरी के अग्रिम रिहायशी और जंगली इलाकों में एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रात के अंधेरे और गोलीबारी की आड़ में कोई भी घुसपैठिया भारतीय सीमा के भीतर दाखिल न हो पाया हो। पूरे राजौरी सेक्टर में सुरक्षा ग्रिड को अलर्ट पर रखा गया है और अत्याधुनिक उपकरणों से सीमा पार की हर हरकत पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

NATIONAL : त्योहार से पहले महंगाई की मार: मुंबई में एक सितंबर से नौ रुपये लीटर महंगा होगा दूध; क्यों बढ़ाई गई कीमत?

मुंबई में तबेला दूध 1 सितंबर से 9 रुपये प्रति लीटर महंगा हो जाएगा। कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर पहुंच जाएगी। उत्पादकों ने पशुओं, चारे और फीड की बढ़ती लागत को इसकी वजह बताया है। त्योहारों से पहले यह बढ़ोतरी रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर असर डाल सकती है।

मुंबई में रोजाना ताजा तबेला दूध खरीदने वाले लोगों को एक सितंबर से ज्यादा कीमत चुकानी होगी। दूध उत्पादकों ने कीमत में नौ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके बाद 93 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला तबेला दूध 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। नई दरें एक सितंबर, 2026 से लागू होंगी और 28 फरवरी, 2027 तक प्रभावी रहेंगी। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जिससे मुंबई के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

पशु, चारा और फीड महंगे होने से बढ़ी कीमत
मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, डेयरी पशुओं की कीमत बढ़ने और पशु आहार पर खर्च बढ़ने के कारण दूध की पुरानी कीमत पर बिक्री करना मुश्किल हो रहा था।उत्पादकों का कहना है कि अनाज समेत कई तरह के पशु आहार की कीमतों में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। चारे और ऑयल केक की बढ़ी कीमत ने भी दूध उत्पादन की लागत बढ़ा दी है। उनके मुताबिक, लगातार बढ़ती लागत के कारण कीमतों में बदलाव करना जरूरी हो गया था।

NATIONAL : वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर BJP ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया, 10 प्वाइंट्स में जानें क्या है इसमें

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भारतीय जनता पार्टी 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध करती है। भाजपा वन्दे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। अतः भारतीय जनता पार्टी संकल्प करती है:

19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए वन्दे मातरम् के प्रथम दो पदों तक गायन सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट विरोध करेगी।

पूर्ण वन्दे मातरम् के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा करेगी, इसे भारत का राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत मानेगी

1950 में संविधान सभा की घोषणा तथा 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान किए जाने से स्थापित स्थिति की दृढ़ता से पुष्टि करेगी।

राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण अथवा संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने के हर प्रयास का विरोध करेगी।

कांग्रेस को स्मरण कराएगी कि उसकी कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव भारत के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। 1937 का राजनीतिक समझौता 1950 के संवैधानिक निर्णय और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को उजागर करेगी, जिसमें वन्दे मातरम् के गायन को सीमित किया गया था, जिसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां तथा बाद में बढ़ती सांप्रदायिक और अलगाववादी मांगों की राजनीति शामिल थी।

महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को जन-जन तक पहुंचाएगी, जिसमें उन्होंने वन्दे मातरम् को “साम्राज्यवाद-विरोधी नारा” और “शुद्धतम राष्ट्रीय भावना” से जुड़ा हुआ बताया था।

भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से देशव्यापी अभियान चलाएगी, जिसके अंतर्गत वन्दे मातरम् का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत भारत के हर कोने तक पहुंचाई जाएगी।

विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता का अभियान चलाया जाएगा, ताकि छह पदों वाले पूर्ण राष्ट्रीय गीत और उसके इतिहास को विस्मृति में न जाने दिया जाए तथा आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि वन्दे मातरम् के साथ भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी स्मृतियां जुड़ी हैं।
राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए वन्दे मातरम् के सम्मान और विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे स्मरण रखें कि वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई थी। पीढ़ियों के भारतीयों ने इन्हें स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रगौरव के मंत्र के रूप में अपनाया। इस विरासत को आज की वोट-बैंक राजनीति की गणित में सीमित नहीं किया जा सकता। 1947 में भारत की स्वतंत्रता का जयघोष ‘वंदे मातरम्’ था, और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ का महाघोष भी ‘वंदे मातरम्’ ही होगा।

NATIONAL : UGC-NET जून 2026 के नतीजे घोषित: NTA ने 84 विषयों के परिणाम किए जारी, 3 विषयों की दोबारा होगी परीक्षा

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी-नेट (UGC-NET) जून 2026 परीक्षा के 84 विषयों के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार आधिकारिक एनटीए वेबसाइट पर जाकर अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके अपना स्कोरकार्ड और योग्यता की स्थिति (qualification status) देख सकते हैं।

3 विषयों के नतीजे अभी नहीं, दोबारा होगी परीक्षा
यह परीक्षा मूल रूप से 87 विषयों के लिए आयोजित की गई थी। लेकिन कुछ पेपरों में गड़बड़ी की खबरों के बाद, एनटीए ने तीन विषयों- अंग्रेजी (English), वाणिज्य (Commerce) और समाजशास्त्र (Sociology) की परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया है। यही वजह है कि इन तीनों विषयों के उम्मीदवारों के अंतिम परिणाम अभी जारी नहीं किए गए हैं।

इन तीन विषयों के लिए पुन: परीक्षा (re-examination) 9 और 10 सितंबर को आयोजित की जाएगी। परीक्षा पूरी होने के बाद इन विषयों के नतीजे अलग से घोषित किए जाएंगे।

जून में हुई थी परीक्षा, योग्यता के लिए अहम
यूजीसी-नेट जून 2026 की परीक्षा देश भर में 22 जून से 30 जून के बीच आयोजित की गई थी। यह परीक्षा जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF), सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) की पात्रता और पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश (PhD admission) के लिए उम्मीदवारों की योग्यता निर्धारित करने के लिए आयोजित की जाती है। एनटीए ने 84 विषयों के लिए परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह परिणाम जारी किए हैं।

उम्मीदवारों के लिए जरूरी निर्देश
एनटीए ने नतीजों के साथ ही संबंधित कट-ऑफ (cut-offs) और योग्यता विवरण भी जारी कर दिए हैं। सफल उम्मीदवारों का चयन जेआरएफ, असिस्टेंट प्रोफेसर या पीएचडी प्रवेश के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों के अधीन होगा। एनटीए ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अपने परिणाम को ध्यान से जांचें और भविष्य के संदर्भ के लिए इसकी एक प्रति डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें।

BUSINESS : असफलता के बाद बड़ी वापसी की तैयारी में ISRO, 4 सितंबर को लॉन्च होगा भारत की तीसरी आंख ‘हॉक्स आई’ सैटेलाइटGSLV Mk II

रॉकेट ने हाल ही में NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने में अहम भूमिका निभाई थी. यह भारत-अमेरिका का एक ऐतिहासिक मिशन था, जिसे दुनिया का सबसे महंगा अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट माना जाता है.

अपने भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) रॉकेट के लगातार दो बार फेल होने के बाद, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) एक अहम वापसी मिशन की तैयारी कर रहा है. 4 सितंबर की सुबह, ISRO अपने सबसे महत्वाकांक्षी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (पृथ्वी पर नज़र रखने वाले उपग्रह) में से एक को जियो-सिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV F17) रॉकेट के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजने की कोशिश करेगा.

इस मिशन में EOS 5 (जिसे पहले GISAT 1A के नाम से जाना जाता था) सैटेलाइट शामिल है. इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह भारत को पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की बहुत ज़्यादा ऊंचाई से देश का लगातार ‘बर्ड्स आई व्यू’ (ऊपर से नज़ारा) दे सके. अगर यह मिशन सफल होता है, तो सैटेलाइट भारत को अपने इलाके, समुद्र तट, मौसम प्रणालियों और आपदा की आशंका वाले इलाकों पर लगातार नज़र रखने की अभूतपूर्व क्षमता देगा. इसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा लगा होने के कारण यह भारत की सीमाओं को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा. यह एक ऐसा सैटेलाइट है जिसका भारत का रणनीतिक समुदाय लंबे समय से इंतज़ार कर रहा था.

ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने NDTV को कन्फर्म किया कि लंबे समय तक कोई लॉन्च न होने के बाद स्पेस एजेंसी आखिरकार लॉन्च पैड पर लौट रही है. यह लॉन्च भारतीय स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बहुत व्यस्त समय की शुरुआत हो सकता है. डॉ. नारायणन ने कन्फर्म किया कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो EOS-5 को शुक्रवार, 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.

डॉ. नारायणन के अनुसार, ISRO की योजना अभी से मार्च 2027 के बीच सात लॉन्च करने की है, जिसमें गगनयान ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम का बहुप्रतीक्षित G1 मिशन (पहली बिना क्रू वाली उड़ान) भी शामिल है. उन्होंने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप भी तैयार किया है. ISRO 12 सैटेलाइट तैयार करने और आठ लॉन्च व्हीकल मिशन पूरे करने का लक्ष्य रख रहा है. ये मिशन कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और साइंटिफिक रिसर्च में मदद करेंगे और साथ ही भविष्य के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट और एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम के लिए आधार तैयार करेंगे. इस वापसी को खास बनाने वाली बात यह है कि यह कितनी मुश्किल परिस्थितियों में हो रही है.

भारत का बहुत भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) लगातार दो बार फेल होने के बाद कई जांच और वैलिडेशन टेस्ट पूरे होने तक अभी रुका हुआ है. मई 2025 में EOS 09 को ले जा रहा PSLV C61 मिशन फेल हो गया था. उस झटके के बाद, 13 जनवरी 2026 को EOS N1 और कई कस्टमर सैटेलाइट ले जा रहा PSLV C62 मिशन भी फेल हो गया. PSLV प्रोग्राम के लंबे और शानदार इतिहास में ऐसी लगातार विफलताएं पहले कभी नहीं देखी गईं. इसे दशकों से दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल में से एक माना जाता रहा है.

ISRO के लिए अच्छी बात यह है कि EOS 5 को ले जाने वाले GSLV Mk II में PSLV वाले इंजन या ज़रूरी प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया गया है. जिन समस्याओं की वजह से PSLV फ्लीट को रोका गया है, वे GSLV व्हीकल से जुड़ी नहीं लगतीं. इस अंतर से यह भरोसा मिलता है कि PSLV की नाकामियों की जांच जारी रहने के बावजूद आने वाला मिशन सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकता है. यह मिशन ISRO के लिए भावनात्मक रूप से भी अहम है.

12 अगस्त 2021 को इसी तरह के एक सैटेलाइट को ऑर्बिट में भेजने की पिछली कोशिश नाकाम रही थी. तब, EOS 03 (असली GISAT सैटेलाइट) को ले जाने वाला GSLV F10 रॉकेट, स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई खराबी के कारण फेल हो गया था. क्रायोजेनिक इंजन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाया, जिससे स्पेसक्राफ्ट खो गया. इस नाकामी की वजह से भारत उस क्षमता को हासिल नहीं कर पाया, जिसकी वैज्ञानिक लंबे समय से कोशिश कर रहे थे, और ISRO को फिर से नए सिरे से काम शुरू करना पड़ा. EOS 5 असल में उसी खोए हुए मिशन का अगला वर्जन है.

इस सैटेलाइट को स्पेस में एक खास जगह पर तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. ज़्यादातर अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर ऑर्बिट करते हैं और किसी जगह के ऊपर से कभी-कभी ही गुज़रते हैं, लेकिन EOS 5 भूमध्य रेखा (equator) से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से काम करेगा. इतनी ऊंचाई से, यह सैटेलाइट भारतीय इलाके के ऊपर स्थिर रहेगा और लगातार उपमहाद्वीप और आसपास के समुद्री इलाकों पर नज़र रखेगा. इस क्षमता को अक्सर आसमान में एक स्थायी ‘बाज़ जैसी नज़र’ (hawk’s eye) रखने जैसा बताया गया है.

उम्मीद है कि यह सैटेलाइट दिन भर भारत के भू-भाग की बार-बार तस्वीरें लेगा, जिससे चक्रवात, बाढ़, बादल फटने, जंगल की आग और तेज़ी से होने वाली दूसरी घटनाओं पर तुरंत नज़र रखी जा सकेगी. वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों, मौसम की भविष्यवाणी करने वालों, कृषि योजनाकारों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगभग रियल-टाइम जानकारी मिल सकती है. सैटेलाइट के सिर के ऊपर से गुज़रने के लिए घंटों या दिनों तक इंतज़ार करने के बजाय, फ़ैसला लेने वाले एक ऐसे स्पेसक्राफ्ट से लगातार अपडेट पा सकेंगे, जो कभी भी भारत से अपनी नज़र नहीं हटाता.

यह क्षमता ऐसे देश के लिए बहुत ज़रूरी है जो मौसम की बड़ी घटनाओं के प्रति तेज़ी से संवेदनशील होता जा रहा है. हिंद महासागर में तेज़ी से बनने वाले चक्रवात, हिमालय में बादल फटना और अचानक बाढ़ आने जैसी घटनाओं पर लगातार अंतरिक्ष-आधारित निगरानी से फ़ायदा मिल सकता है.

इस लॉन्च से GSLV Mk II रॉकेट को अपनी परिपक्वता और विश्वसनीयता साबित करने का एक और मौका भी मिलेगा.

इस रॉकेट ने हाल ही में NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने में अहम भूमिका निभाई थी. यह भारत-अमेरिका का एक ऐतिहासिक मिशन था, जिसे दुनिया का सबसे महंगा अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट माना जाता है. उस मिशन की सफलता ने GSLV Mk II प्लेटफ़ॉर्म पर भरोसा बढ़ाया और जटिल क्रायोजेनिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में ISRO की तरक्की को दिखाया.

इसलिए, स्पेस एजेंसी के लिए EOS 5 मिशन सिर्फ़ एक और सैटेलाइट लॉन्च करने से कहीं ज़्यादा है. यह मुश्किलों के बाद मज़बूती से वापसी का टेस्ट है. यह कई महीनों तक कोई लॉन्च न होने के बाद गति को फिर से हासिल करने का मौका है. यह उस क्षमता को आखिरकार हासिल करने का मौका है जिसे भारत ने पांच साल पहले चाहा था, लेकिन EOS 03 के ऑर्बिट तक न पहुंच पाने के कारण खो दिया था.

सबसे अहम बात यह है कि यह उस गतिविधि के ज़ोरदार दौर की शुरुआत है, जिसकी ISRO को उम्मीद है. इसमें नेविगेशन, कम्युनिकेशन और वैज्ञानिक मिशन के साथ-साथ भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की तैयारी भी शामिल होगी.

4 सितंबर को भोर से पहले के शांत समय में, सबकी नज़रें एक बार फिर श्रीहरिकोटा पर होंगी. महीनों की अनिश्चितता और मुश्किलों के बाद, ISRO वापसी की तैयारी कर रहा है. वह अपने साथ एक ऐसा सैटेलाइट ले जा रहा है जिसे अंतरिक्ष की सीमा से भारत पर लगातार नज़र रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है. अगर यह सफल होता है, तो EOS 5 आसमान में भारत का स्थायी प्रहरी बन सकता है और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए गतिविधियों के एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे सकता है.

NATIONAL : पूर्व CM अशोक गहलोत के बयान से गरमाई सियासत, बीजेपी नेताओं ने गहलोत पर किए पलटवार, देखिए ये खास रिपोर्ट

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जयपुर: पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयानों ने कांग्रेस की अंदरूनी ही नहीं बल्कि पूरे सूबे की सियायत को उफान पर ला दिया. गहलोत के बयान ने कांग्रेस के भीतर मौजूद पुराने मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है. वहीं भाजपा को बैठे बिठाए मुद्दा मिला गया. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस नेता मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, लेकिन उनकी राजनीति में मोहब्बत दिखाई नहीं देती, यह कैसी मोहब्बत है जो अपनी ही पार्टी के लोगों के बीच बांटी जा रही है.यात्रा की गाइड और यात्रा की जानकारी

BJP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अंतर कलह से उबर नहीं पाई है..कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर आने से रोकने की साजिश को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयानों पर तेज गर्मी में राजनीतिक पारा चढ़ गया है… भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यसभा उम्मीदवार डॉ सतीश पूनिया,पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को घेरा.. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस के अंदरूनी विवाद को लेकर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेता मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, लेकिन उनकी राजनीति में मोहब्बत दिखाई नहीं देती. शेखावत ने कहा कि यह कैसी मोहब्बत है जो अपनी ही पार्टी के लोगों के बीच बांटी जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत स्वार्थ, महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति और राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने ही सहयोगियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करते हैं. शेखावत ने कहा कि अपनी लाइन लंबी करने के बजाय दूसरों की लाइन मिटाने की राजनीति कांग्रेस में लंबे समय से चल रही है और आज भी वही स्थिति दिखाई दे रही है.

भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश पूनिया ने भी कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाए. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस लगातार आभासी राजनीति में उलझी हुई है और आत्मविश्लेषण करने से बच रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह समझने का प्रयास नहीं कर रही कि जनता लगातार उसे क्यों नकार रही है. पूनिया के अनुसार कांग्रेस गंभीर अंतर्कलह से गुजर रही हैराजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर कहा कि कांग्रेस में अंतर्कलह कोई नई बात नहीं है. यह स्थिति पिछले दस वर्षों से लगातार बनी हुई है, पुराने चांवल है जो खटक रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को भाजपा की चिंता छोड़कर अपने संगठन पर ध्यान देना चाहिए. चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए कहा, जो उनके घर को खटक रहा है, पहले उसे देखें. हमारे घर को देखने की बजाय अपना घर संभालें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी संघर्ष खुलकर सामने आ रहा है, जिससे पार्टी की वास्तविक स्थिति उजागर हो रही है.

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान पर तंज कसते हुए कहा कि गहलोत साहब को अब कांग्रेस आलाकमान पूछ नहीं रहा है. इसलिए वह विद्रोही तेवर दिखाकर दोबारा आलाकमान में अपना स्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. राठौड़ ने कहा कि गहलोत के दर्द की अभी तक कोई दवा नहीं हुई है और जब भी उन्हें मौका मिलता है, उनका दर्द बाहर आ जाता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति किसी से छिपी नहीं है. पार्टी की ए और बी टीम लगातार एक-दूसरे पर गोल दाग रही हैं, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है.

मानेसर का घटनाक्रम उस समय का है जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया थे. तब भी पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उन पर आरोप जड़े थे. अब फिर जब सतीश पूनिया राज्यसभा में बीजेपी के उम्मीदवार बने है मानेसर का जिन्न बाहर आ गया.

NATIONAL : राजस्थान में 15 नवम्बर तक बारिश से टूटी सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता

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राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने मंगलवार को सचिवालय में सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और एनएचएआई की चल रही परियोजनाओं की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी कार्य त्वरित गति तथा पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। राज्य सरकार ने अस्थाई मरम्मत के लिए 645 करोड़ रुपये और स्थाई मरम्मत के लिए 800 करोड़ रुपये का बजट पहले ही जारी कर दिया है। विभाग द्वारा कार्य शुरू कर दिए गए हैं और मुख्य सचिव ने 15 नवम्बर तक पेच रिपेयर वर्क उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भावना के अनुरूप अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहकर कार्य समय पर पूर्ण करें। अपवाद की स्थिति में ही निविदा की तिथि बढ़ाई जाए तथा वर्क ऑर्डर जारी करने तक की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी की जाए।

मुख्य सचिव ने एनएचएआई की 7919 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अंतर्विभागीय मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने के लिए सभी विभागों को सामंजस्य के साथ काम करना होगा।

बैठक में 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले पीडब्ल्यूडी के कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जो 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं उन्हें 31 दिसम्बर तक और शेष कार्य मार्च 2026 तक पूरे किए जाएं। उन्होंने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम (PMIS) की सराहना करते हुए कहा कि हर प्रोजेक्ट की 3–4 उच्च गुणवत्ता की फोटो अपलोड की जाएं और सुगम पथ ऐप के माध्यम से सड़कों की निगरानी नियमित रूप से की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं को समय पर पूरा करने और आमजन को शीघ्र लाभ दिलाने के लिए हर माह बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बीते दो वर्षों में राज्य में 24,976 करोड़ रुपये की लागत से 36,140 किमी सड़कों का निर्माण हो चुका है, जबकि 2024–25 और 2025–26 की बजट घोषणाओं में 15,000 करोड़ रुपये के 12 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

बैठक में लिए गए 5 बड़े निर्णय
सड़कों की त्वरित मरम्मत पर जोरमुख्य सचिव ने बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। 15 नवम्बर तक सभी पेच रिपेयर कार्य उच्च गुणवत्ता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
निविदा प्रक्रिया में सख्तीअपवाद की स्थिति में ही निविदा तिथि बढ़ाई जाए और वर्क ऑर्डर जारी करने तक तय समयसीमा का पालन अनिवार्य किया जाए।
एनएचएआई परियोजनाओं के लिए स्पेशल टास्क फोर्सएनएचएआई–एनएच कार्यों में तेजी लाने और विभागीय विवादों के समाधान के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए गए।
लम्बित कार्यों की समयसीमा तय50 करोड़ से अधिक लागत के 35 कार्यों को 31 दिसम्बर तक और शेष 8 कार्यों को मार्च 2026 तक पूर्ण करने की समयसीमा तय की गई।
पीएमआईएस और सुगम पथ ऐप पर निगरानी बढ़ेगीमुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम को सुदृढ़ करने और सुगम पथ ऐप के जरिए सड़कों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए।

WORLD : ‘दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील’; ट्रंप ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर किया अमेरिकी नियंत्रण का दावा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है. ट्रंप के मुताबिक इससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुने से अधिक हो जाएंगे और पेट्रोल की कीमतों में कमी आने में मदद मिलेगी.

‘दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील’; ट्रंप ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर किया अमेरिकी नियंत्रण का दावा65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, ट्रंप ने बताया दुनिया की सबसे बड़ी डीलवाशिंगटन:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े ऊर्जा समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण हासिल कर लिया है. ट्रंप ने इसे “विश्व इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा” बताया और कहा कि इससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुने से अधिक हो जाएंगे, घरेलू आपूर्ति बढ़ेगी और लंबे समय तक पेट्रोल की कीमतों में कमी आएगी. ट्रंप के अनुसार यह समझौता विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के सहयोग से हुआ है. इस घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर की घोषणा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी. उन्होंने लिखा है कि ‘संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी वेनेजुएला के साथ विश्व इतिहास के सबसे बड़े तेल समझौते पर एक समझौता किया है! मेरे निर्देश पर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की अत्यंत सम्मानित अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ मिलकर और निजी क्षेत्र की साझेदारी के माध्यम से वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर अमेरिका का बहुमत नियंत्रण सुनिश्चित कर लिया है. यह सब अमेरिकी करदाताओं पर किसी भी लागत के बिना किया गया है. यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिकी तेल भंडार को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगा, तेल आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और लंबे समय तक सभी अमेरिकियों के लिए पेट्रोल की कीमतों में महत्वपूर्ण कमी लाएगा. साथ ही, यह वेनेजुएला को भी जबरदस्त सफलता और समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ाने में मदद करेगा. यह समझौता वेनेजुएला और अमेरिका के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को और अधिक सशक्त बनाएगा. इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व विषय पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद. अमेरिका को फिर महान बनाएं!’ ट्रंप ने कहा कि यह सौदा अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और भविष्य में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मददगार साबित होगा.

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब करीब नौ महीने पहले ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर अमेरिका लाया गया था. मादुरो पर मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-टेररिज्म से जुड़े आरोप लगाए गए थे. मादुरो के सत्ता से हटने के बाद ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए थे कि अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में फिर से अवसर दिए जा सकते हैं.

ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों की चुनौती
अमेरिकी प्रशासन पर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर दबाव बढ़ रहा है. ईरान युद्ध छह महीने से जारी है और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार अगस्त की शुरुआत में अमेरिका का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 30 करोड़ बैरल से नीचे पहुंच गया था. वर्ष 2026 की शुरुआत से इसमें 10 करोड़ बैरल से अधिक की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में ट्रंप प्रशासन इस समझौते को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने और घरेलू बाजार को स्थिर करने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रहा है.

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