Friday, August 7, 2026
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SPORTS : 2027 वनडे वर्ल्डकप क्वालिफायर 21 फरवरी से 23 मार्च तक: विजेता को मेन ड्रॉ में सीधी एंट्री; वेस्टइंडीज पर क्वालिफायर खेलने का खतरा

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 2027 आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के क्वालिफायर टूर्नामेंट की विंडो तय कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 टीमों वाला यह टूर्नामेंट 22 फरवरी से 23 मार्च 2027 तक खेला जाएगा। हालांकि, टूर्नामेंट की मेजबानी किस देश को मिलेगी, इसका फैसला अभी बाकी है।

मेजबान देश पर सस्पेंस बरकरार
रिपोर्ट के अनुसार, आईसीसी ने क्वालिफायर के कार्यक्रम को लगभग अंतिम रूप दे दिया है, लेकिन मेजबान देश पर अभी सहमति नहीं बनी है। यह टूर्नामेंट 2027 वनडे विश्व कप में जगह बनाने का आखिरी मौका होगा। 2027 विश्व कप का आयोजन चार अक्तूबर से 21 नवंबर के बीच दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होगा।

नया क्वालिफिकेशन फॉर्मेट लागू
आईसीसी ने जुलाई 2026 में 14 टीमों वाले विश्व कप के लिए नया क्वालिफिकेशन सिस्टम घोषित किया था। इसके तहत क्वालिफायर जीतने वाली टीम सीधे विश्व कप के 12 टीमों वाले मुख्य चरण में पहुंचेगी। वहीं, क्वालिफायर में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें नए सुपर सीरीज चरण में खेलेंगी। इस चरण के जरिए मुख्य ग्रुप स्टेज के लिए एक और टीम का फैसला होगा।

किन टीमों को मिलेगा मौका?
क्वालिफायर में कुल 10 टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें 30 सितंबर 2026 तक की आईसीसी वनडे रैंकिंग के आधार पर मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को छोड़कर सबसे निचली रैंकिंग वाली दो पूर्ण सदस्य टीमें शामिल होंगी। इसके अलावा आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप लीग दो की शीर्ष चार टीमें और  विश्व कप क्वालिफायर प्लेऑफ से क्वालिफाई करने वाली चार टीमें शामिल होंगी।

वेस्टइंडीज पर टिकी रहेंगी निगाहें
वनडे रैंकिंग की दौड़ में सबसे ज्यादा नजर वेस्टइंडीज पर रहेगी, जो फिलहाल 10वें स्थान पर है। कैरेबियाई टीम के पास 30 सितंबर की कट-ऑफ से पहले भारत के खिलाफ केवल दो वनडे मैच खेलने का मौका है। वेस्टइंडीज सीधे विश्व कप में जगह बना पाएगी या उसे क्वालिफायर खेलना पड़ेगा, इसका फैसला काफी हद तक अफगानिस्तान और आयरलैंड के बीच होने वाली वनडे सीरीज के नतीजों और रैंकिंग समीकरणों पर भी निर्भर करेगा।

NATIONAL : भालू के हमले में कांकेर में भाई-बहन की मौत, तीसरे की हालत गंभीर

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नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव मरकाटोला में मादा भालू ने 2 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. मादा भालू के हमले में 1 ग्रामीण की हालत गंभीर है. ग्रामीणों का कहना है कि भालू काफी देर तक दोनों शवों के पास बैठकर उनको नोचता-खसोटता रहा. गांव वालों ने बताया कि मंगलवार को भालू के बच्चे की मौत हो गई थी. बच्चे की मौत के बाद से मादा भालू लगातार इलाके में बच्चे के शव के पास बैठी रही. जिस जगह पर मादा भालू अपने बच्चे के शव के साथ बैठी थी वो स्कूल से सटा हुआ इलाका है.

भालू के हमले में 2 ग्रामीणों की मौत, 1 की हालत गंभीर

गांव वालों ने बताया कि आज सुबह एक ग्रामीण अपने बैल को चराने के लिए खेतों में गया तभी मादा भालू ने उसपर हमला बोल दिया. भाई को भालू से भिड़ते देख बहन भी मौके पर पहुंची लेकिन भालू ने उसपर भी हमला कर उसकी जान ले ली. दो लोगों की मौत के बाद से इलाके में दहशत का माहौल बन गया. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर स्थानीय विधायक गांव वालों के साथ पहुंचे. आनन-फानन में घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस की टीम को दी गई. पुलिस और वन विभाग की टीम ने काफी कोशिश की कि भालू के चंगुल से दोनों शवों को बाहर निकाला जा सके. लेकिन भालू लगातार शवों के पास बैठा रहा और शवों को नोचता रहा.

ट्रैक्यूलाइज भालू पर ग्रामीणों ने किया हमला

वन विभाग की टीम ने बड़ी मुश्किल से मादा भालू को ट्रैंक्यूलाइज किया. जैसे ही भालू बेहोश हुआ और वन विभाग की टीम उसे लेकर जाने लगी, तभी गांव वालों ने बेहोश भालू पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया. वन विभाग और पुलिस की टीम ने भी ग्रामीणों को रोकने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित ग्रामीण भालू पर हमला करने को अमादा दिखाई दिए. कड़ी मशक्कत के बाद बेहोश भालू और मृतकों के शवों को मौके से निकाला गया.

पीड़ित परिवार को मिली आर्थिक मदद

पीड़ित परिवारवालों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई है. वन विभाग और स्थानीय विधायक ने कहा है कि जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बाकी की राहत राशि भी परिवार को दे दी जाएगी.

BUSINESS : इस साल या 2027 में, हाथ में कब आएंगे प्लास्टिक के नोट? RBI गवर्नर ने दिया जवाब

पिछले कुछ दिनों से भारत में प्लास्टिक के नोटों (Plastic Notes) को लेकर बड़ी चर्चा है। लेकिन, सवाल है कि देश में प्लास्टिक के नोट आएंगे कब? इसका जवाब रिजर्व बैंक के गवर्नर ने दे दिया है। RBI मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद मीडिया से बात करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अगले फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में पॉलिमर नोट चलन में आ जाएंगे।”

पॉलिमर नोट मौजूदा कागज़ी नोटों के साथ ही चलन में लाए जाएंगे; कागज़ी करेंसी को बदलने की कोई योजना नहीं है। भारत में पिछले कुछ सालों में करेंसी का स्वरुप लगातार बदला है। नोट के डिजाइन से लेकर सिक्योरिटी तक भारत में मुद्रा पर काफी काम हुआ है, और अब इसी कड़ी में देश के अंदर प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले 2009 में प्रस्तावित एक पायलट प्रोजेक्ट को “तकनीकी दिक्कतों” के कारण रोक दिया गया था। अगर यह नया ट्रायल सफल रहता है, तो सेंट्रल बैंक ₹100 और ₹500 जैसे बड़े मूल्य के नोटों के लिए भी पॉलीमर नोट लाने पर विचार कर सकता है।कागजी नोट से कैसे बेहतर प्लास्टिक करेंसी?

कम कीमत वाले नोट चुनने से कामकाज में भी आसानी होती है। ज़्यादा कीमत वाले नोटों के उलट, ₹10 और ₹20 के नोट ज़्यादातर बैंक शाखाओं से बांटे जाते हैं, न कि ATM से। इससे RBI को कैश डिस्पेंसर और कैश रीसाइक्लर में तुरंत अपग्रेड किए बिना ही इन नोटों को टेस्ट करने का मौका मिलता है।

पॉलिमर बैंकनोट नमी, गंदगी और फटने के प्रति ज़्यादा मज़बूत होते हैं। ऐसे में कागज़ी नोटों की तुलना में इनकी उम्र ज़्यादा होगी।

₹10 और ₹20 के नोट चलन में मौजूद कुल नोटों की संख्या का लगभग 25% हिस्सा हैं, जबकि कुल वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 1.4% है।

चलन में इनकी ज़्यादा संख्या और कम मॉनेटरी वैल्यू इन्हें इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए सही डिनॉमिनेशन बनाती है, क्योंकि अगर कोई ऑपरेशनल दिक्कत आती है, तो इससे होने वाला फाइनेंशियल असर कम रहेगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट से RBI को पॉलीमर नोटों की टिकाऊपन, लोगों की स्वीकार्यता, छपाई की क्षमता और नकली नोट बनाने वालों द्वारा इनके डिज़ाइन और सुरक्षा फीचर्स की नकल करने की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलेगी।मौजूदा ATM पॉलीमर नोटों की पहचान करने के लिए नहीं बने हैं, और ज़्यादा कीमत वाले नोटों के लिए बड़े पैमाने पर इनके इस्तेमाल से पहले कैलिब्रेशन और सॉफ़्टवेयर में बदलाव की ज़रूरत पड़ सकती है।

WORLD : शेख हसीना का बांग्लादेश वापसी का ऐलान, नए अध्याय की शुरुआत या खेल रहीं बड़ा दांव

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बांग्लादेश में हिंसक छात्र आंदोलन के चलते 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, बल्कि उन्हें अपना देश भी छोड़कर भागना पड़ा था। तब से वे भारत में अज्ञात स्थान पर रह रही हैं। बुधवार को उस घटना के 2 साल पूरे होने पर शेख हसीना ने पहली बार मीडिया से बात की किया। वे इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली जुड़ी। इस दौरान कैमरा ऑफ था और वे ऑडियो लिंक के जरिए संवाद कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह दिसम्बर में बांग्लादेश जरूर लौटेंगी।

शेख हसीना बोलते-बोलते रो पड़ीं

अपने संबोधन के दौरान शेख हसीना भावुक हो गईं और रो पड़ीं। हसीना ने रूंधे गले से कहा कि वे दो सालों से अपने प्यारे बांग्लादेश को तकलीफ झेलते हुए देख रही हैं। हसीना ने कहा कि ये वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था। जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने बलिदान दिया था।बंद कैमरे पर 25 मिनट के संबोधन के दौरान हसीना ने कहा कि पिछले दो साल में बांग्लादेश के लोगो ने बहुत दर्द झेला है। हर तरफ डर फैला हुआ है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि वह इस साल दिसम्बर में बांग्लादेश लौटेंगी। फिर चाहे उनकी जान की क्यों न चली जाए। हसीना ने कहा कि वे मुझे फर्जी मुकदमों में फंसाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन झूठे मुकदमों, दिखावटी सुनवाई और मौत की सजा से नहीं डरेंगी।

एक्सपर्ट ने बताया हसीना का साहसिक कदम

एक्सपर्ट शेख हसीना के इस कदम को बहुत बोल्ड और साहसिक कदम के रूप में देख रहे हैं। खासतौर पर जिस तरह से उन्हें बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान देश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल से नरसंहार का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई है।

तारिक रहमान सरकार ने क्या कहा?

भारत में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार भड़की हुई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कहा कि यह देश की संप्रभुता और जुलाई आंदोलन में मारे गए लोगों को अपमान है। बांग्लादेश ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया और कहा कि इसे ऐसे समय में आयोजित किया गया जब 5 अगस्त को जुलाई आंदोलन के 2 साल पूरे हुए हैं। बांग्लादेश की तारिक सरकार इसे दूसरी बरसी के रूप में मना रही थी।

NATIONAL : रिजिजू बोले- सरकार परिसीमन बिल पर विशेष सत्र नहीं लाएगी, मानसून सत्र में ही लाने पर विचार, राहुल से समर्थन के लिए बात की

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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया है कि सरकार की मौजूदा मानसून सत्र को बढ़ाने या कोई विशेष सत्र बुलाने की कोई योजना नहीं है।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक के संबंध में संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।

हालांकि, रिजिजू ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

संविधान संशोधन के लिए सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हो पाने के कारण प्रस्तावित विधेयक अप्रैल में बजट सत्र के दौरान लोकसभा से पारित नहीं हो सका था।

अप्रैल में हुए मतदान के दौरान 528 सांसद उपस्थित थे, जिससे दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। सरकार को विधेयक के विरोध में पड़े 230 वोटों के मुकाबले 298 वोट मिले, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को 54 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। सरकार ने अब इस अंतर को काफी हद तक कम कर दिया है।सरकार इस विवादास्पद विधेयक को पारित कराने की कोशिश कर रही है क्योंकि उसे विश्वास है कि उसके पास पर्याप्त संख्या बल है: तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना से हुए दलबदल के कारण।

एनडीए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब भी पहुंच रहा है।

संसद के चल रहे मानसून सत्र में 20 जुलाई को मुख्य न्यायिक न्यायाधीश के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘पुलिस कार्रवाई’, अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित गबन विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर सदन की कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति की मांग के बीच लगातार स्थगन देखने को मिल रहा है।

सूत्रों ने बताया कि संसद भवन स्थित गांधी के कार्यालय में हुई यह बैठक सरकार की ओर से “विश्वास बढ़ाने का एक उपाय” थी।

पिछले 10 दिनों में रिजिजू की गांधीजी से यह दूसरी मुलाकात थी।

गांधी से मुलाकात के बाद, रिजिजू ने संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।

सूत्रों ने बताया कि रिजिजू गतिरोध को तोड़ने के प्रयास में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी दलों से भी संपर्क करेंगे।

20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से लोकसभा में प्रश्नकाल पूरा नहीं हो पाया है। हंगामे के बीच बिना चर्चा के पांच विधेयक पारित किए जा चुके हैं।

“सदन के अंदर हो या बाहर, नारेबाजी करना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। तख्तियां दिखाकर और नारेबाजी करके आप सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं,” अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से कहा।

बिरला ने कहा कि कई सदस्यों ने उनसे संपर्क करके कहा है कि महत्वपूर्ण प्रश्न सूचीबद्ध हैं, लेकिन चल रहे मानसून सत्र में विपक्ष द्वारा उत्पन्न व्यवधान के कारण सदन प्रश्नकाल शुरू करने में सक्षम नहीं है।

WORLD : होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की बातचीत में प्रगति, शिपिंग रूट पर बनी सहमति

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया और सुरक्षित शिपिंग रूट तय करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों देश ऐसे समुद्री मार्ग पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो न तो ईरान के तट से सटे मौजूदा उत्तरी मार्ग पर होगा और न ही ओमान के दक्षिणी मार्ग पर। प्रस्तावित रास्ता दोनों देशों के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करते हुए जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार भी करीबी नजर बनाए हुए है। भारत के अधिकारी ईरान और ओमान, दोनों के संपर्क में हैं और वार्ता की प्रगति पर लगातार नजर रख रहे हैं। हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से भारत के तेल और गैस आयात पर भी असर पड़ा था।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत पहले यह देखेगा कि दोनों देशों के बीच बातचीत किस नतीजे पर पहुंचती है। इसके बाद नए समुद्री मार्ग की सुरक्षा, स्थिरता और व्यावहारिक उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।

जानकारों के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग स्ट्रेट के मध्य हिस्से में या दोनों देशों के क्षेत्रीय जल के बीच ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (टीएसएस) के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे जहाजों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और दोनों देशों की निगरानी व नियंत्रण की भूमिका भी बनी रहेगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना तकनीकी रूप से संभव है। होर्मुज स्ट्रेट की चौड़ाई लगभग 21 से 33 समुद्री मील (लगभग 61 किमी) है, इसलिए बीच में सुरक्षित समुद्री गलियारा विकसित किया जा सकता है। फिलहाल दोनों देश संयुक्त कार्य समूह के जरिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि नए रूट से खाड़ी देशों और भारतीय बंदरगाहों के बीच कुल समुद्री दूरी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, क्योंकि स्ट्रेट का हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा है और अधिकांश यात्रा अरब सागर में होती है।

भारत का ईरान और ओमान के साथ संबंध

यदि नया मार्ग दोनों देशों की सहमति से सुरक्षित रूप से लागू होता है, तो जहाजों पर हमलों और नियंत्रण संबंधी विवादों का जोखिम कम होगा। इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थिर रहेगी और भारतीय तेल कंपनियों के लिए बीमा तथा मालभाड़े की लागत में भी कमी आ सकती है। भारत के ईरान और ओमान, दोनों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईरान बोला- नया रूट अलग, होर्मुज खोलने का सवाल अलग

ईरान ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर सहमति बनने का यह मतलब नहीं है कि समुद्री मार्ग पूरी तरह खोल दिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यह समझौता केवल सुरक्षित जहाज संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियों, नौसैनिक नाकेबंदी और क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण होर्मुज की स्थिति प्रभावित हुई है।

बघाई ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों पर किसी भी बाहरी दबाव या धमकी का असर नहीं पड़ने देगा। उनके अनुसार, ओमान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना एक अलग मुद्दा है।

WORLD : ट्रंप की जान पर बन आई, पैसेंजर प्लेन से टकराने से बचा अमेरिकी राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने हेलीकॉप्टर मरीन वन से उड़ान भर रहे थे. तभी कुछ ऐसा हुआ कि पूरे एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की जान हलक में अटक गई. राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर मरीन वन एक यात्री विमान से टकराने से बच गया. हेलीकॉप्टर यात्री विमान के बेहद करीब पहुंच गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी तरह की गलती के कारण जनवरी 2025 में 67 लोगों की जान ले चुकी है. उस हादसे के बाद कई नियम बनाए गए, लेकिन लगता है कि कोई भी सबक हासिल नहीं किया गया है. अब पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है. अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बताया कि मंगलवार को मरीन वन और रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भर रहे एक कमर्शियल जेट के बीच कुछ समय के लिए तय न्यूनतम दूरी नहीं रह गई. हालांकि एजेंसी ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी खतरे में नहीं थे और दोनों विमान सुरक्षित अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच गए. FAA ने कहा कि शुरुआती सुरक्षा समीक्षा में कुछ समय का ‘लॉस ऑफ सेपरेशन’ पाया गया, जिसके बाद दोनों विमान एक-दूसरे से दूर चले गए.


67 मौतों के बाद भी नहीं सीखा सिस्टम
इस घटना ने इसलिए ज्यादा चिंता बढ़ा दी है क्योंकि जनवरी 2025 में इसी एयरपोर्ट के पास एक सैन्य हेलीकॉप्टर और एक कमर्शियल जेट की हवा में टक्कर हो गई थी. उस हादसे में 67 लोगों की मौत हुई थी. उस दुर्घटना के बाद FAA ने रीगन एयरपोर्ट के आसपास हेलीकॉप्टर और यात्री विमानों के एक साथ संचालन पर स्थायी रोक लगा दी थी. मार्च में हेलीकॉप्टर ट्रैफिक संभालने के कुछ पुराने तरीकों पर भी रोक लगा दी गई थी. अब सवाल उठ रहा है कि जब नियम पहले से लागू थे तो वही स्थिति दोबारा कैसे बन गई.


ट्रंप की सुरक्षा में भी बड़ी चूक?
FAA के नियमों के मुताबिक एयरपोर्ट के आसपास उड़ रहे दो विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील यानी 2.4 किलोमीटर की दूरी और 500 फीट की ऊंचाई की दूरी होना अनिवार्य है. लेकिन इस घटना में यह न्यूनतम दूरी टूट गई. यही वजह है कि अब सिर्फ आम हवाई सुरक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

WORLD : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: 48 घंटे में स्थिति होगी साफ

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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने खुद अमेरिका से संपर्क किया है और दोनों देशों के बीच बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगले 48 घंटे बेहद अहम होंगे और इसी दौरान साफ हो जाएगा कि दोनों देशों के बीच समझौता होता है या नहीं।

ट्रंप ने यह बयान लॉस एंजिल्स से लास वेगास जाते समय पत्रकारों से बातचीत में दिया। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे लगातार बातचीत चल रही है और हालात सही दिशा में बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के लिए समझौता करना ही सबसे अच्छा विकल्प होगा।


क्या ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद अमेरिका से संपर्क किया है और बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है और अब अगले दो दिन पूरी दुनिया के लिए अहम साबित हो सकते हैं। ट्रंप का दावा है कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। बताया जा रहा है कि जुलाई में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 14 सूत्रीय समझौता टूटने के बाद इस समुद्री मार्ग को लेकर तनाव काफी बढ़ गया था। अब अमेरिका, ईरान और ओमान मिलकर एक अंतरिम समझौते पर काम कर रहे हैं ताकि इस समुद्री रास्ते को फिर से सुरक्षित तरीके से खोला जा सके।
ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?
बातचीत की संभावना जताने के साथ-साथ ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। ट्रंप ने कहा कि जल्द ही इस बात को औपचारिक समझौते का हिस्सा बनाया जाएगा कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समुद्री मार्ग हर हाल में खोला जाएगा। अगर ईरान सहयोग करता है तो शांति से समाधान निकलेगा, लेकिन यदि उसने अड़चन पैदा की तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

NATIONAL : अभिजीत दीपके बोले- पॉलिटिकल पार्टी नहीं बनाएंगे, कॉकरोच जनता पार्टी प्रेशर ग्रुप की तरह काम करेगी, देश को जन-आंदोलन की जरूरत

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने बुधवार को अपनी रणनीति के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उनका संगठन एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेगा. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर आंदोलन के बाद देशभर में युवाओं के मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति बनाने के लिए दो दिवसीय कोर कमेटी की बैठक बुलाई है. बैठक से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “फिलहाल, सीजेपी एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेगा.”

उन्होंने कहा, “पहले आंदोलन की सफलता के बाद हमसे लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं. इसके साथ ही हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. जंतर-मंतर का आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश के युवाओं का आंदोलन बन गया. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के बाद संगठन की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए दो दिनों तक देशभर में युवाओं के लिए किस तरह काम किया जाए और आगे की रणनीति क्या हो, इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी.”

राजनीति में आने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में अभिजीत दीपके ने कहा कि आज जनता का राजनीति, मीडिया और सरकार जैसी संस्थाओं पर भरोसा कम हुआ है. उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में दोबारा विश्वास कायम करने के लिए जनआंदोलन और जनदबाव की जरूरत है. उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से लोग निराश हैं और इसी वजह से युवाओं ने देशभर में अपना आक्रोश दिखाया है. जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब आगे भी जारी रहेगा.

NATIONAL : ‘मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर न चलाएं सियासत’, राहुल गांधी पर बीजेपी नेता संबित पात्रा का तीखा हमला

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बुधवार को मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर छात्र आंदोलन को लेकर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी को बताया बेबुनियाद
बीजेपी की प्रतिक्रिया राहुल गांधी की उस मीडिया वार्ता के तुरंत बाद आई, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों के साथ संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने का दावा किया था। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उनको बेबुनियाद और झूठा करार दिया।
संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान नहीं हुई कोई फायरिंग
उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उनके साथ कुछ बच्चे भी थे, जिन्होंने दिल्ली प्रोटेस्ट में भाग लिया, लेकिन बच्चे तो बच्चे होते हैं, मासूम होते हैं…और ये बच्चे पूरे देश के बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी इस मंच पर संसद के अंदर और संसद के बाहर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कहा था कि 20 जुलाई को दिल्ली में ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान कोई फायरिंग नहीं हुई थी।

बीजेपी ने फिर दोहराई अपनी बात
उन्होंने कहा कि उस समय भी हमने कहा था और आज भी हम कर रहे हैं, क्योंकि यह बहुत संवेदनशील विषय है, कहीं भटकाव न हो और कहीं लोगों को इसमें कुछ सच न लगे, इसलिए बहुत ठहराव और पूरी जिम्मेदारी के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि 20 जुलाई को दिल्ली में ‘संसद चलो’ आंदोलन के दौरान कोई गोली नहीं चली।
स्कूल कॉलेज के दौरान हमनें भी आंदोलनों में लिया भाग
उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक गलत परंपरा है। कभी भी राजनीति में मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर सियासत करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। बच्चों का कोई दोष नहीं है। हमने भी स्कूल-कॉलेज के दौरान आंदोलनों में भाग लिया। जो बच्चे आज राहुल गांधी के साथ थे, मैं उनको कहना चाहता हूं कि बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप हमारे बच्चे हैं, हम सब आपके साथ खड़े हैं…प्रधानमंत्री भी आपके साथ हैं।
सबके सामने लाना चाहता है विपक्ष का प्रोपेगंडा
बीजेपी नेता ने कहा कि हम विपक्ष और राहुल गांधी के झूठे प्रोपेगंडा को उजागर करना चाहते हैं। देश के सब बच्चे हमारे बच्चे हैं, इसलिए जीवन में कभी आंदोलनों से घबराना नहीं चाहिए, लेकिन झारखंड के बच्चे भी तो बच्चे ही हैं। झारखंड के बच्चों से भी तो राहुल गांधी का सामना होना चाहिए, ताकि नेता विपक्ष उनके भी दर्द को जानें।

बीजेपी नेता ने दिया आर्टिकल का हवाला
एक समाचार पत्र में छपे आर्टिकल का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी पेपर धांधली ने एक गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा को मानसिक रोगी बना दिया है, लेकिन राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं जा रहे हैं? शायद इसलिए क्योंकि झारखंड में इंडी गठबंधन की सरकार है।

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