Wednesday, August 26, 2026
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BUSINESS : 3 साल की SIP में गोल्ड फंड ने इक्विटी को पछाड़ा, 10,000 रुपये महीने का निवेश 6.59 लाख पर पहुंचा

तीन साल के SIP रिटर्न में SBI और Axis के गोल्ड फंड सबसे आगे रहे। 10,000 रुपये की मासिक SIP से SBI Gold Fund में निवेश की वैल्यू 6.59 लाख रुपये पहुंच गई। जबकि इक्विटी फंड में यह करीब 4.90 लाख रुपये रही।

Gold Vs Mutual Fund Return: तीन साल के SIP रिटर्न की दौड़ में गोल्ड फंड ने इक्विटी फंड को काफी पीछे छोड़ दिया है। वैल्यू रिसर्च (Value Research) के आंकड़ों के अनुसार, SBI गोल्ड फंड ने तीन साल में 44.11 फीसदी का SIP रिटर्न दिया, जबकि एक्सिस गोल्ड फंड का रिटर्न 43.84 फीसदी रहा। यानी अगर किसी निवेशक ने तीन साल तक हर महीने 10,000 रुपये की SIP की होती, तो SBI गोल्ड फंड में उसका कुल निवेश 3.60 लाख रुपये होता जो रिटर्न के साथ बढ़कर 6.59 लाख रुपये हो जाता। वहीं, टॉप इक्विटी फंड में इतनी ही रकम निवेश करने पर रिटर्न करीब 4.90 लाख रुपये होता।

टॉप दो स्थानों पर गोल्ड फंड
तीन साल के SIP रिटर्न की सूची में SBI गोल्ड फंड पहले और एक्सिस गोल्ड फंड दूसरे स्थान पर रहा। तीसरे नंबर पर SBI हेल्थकेयर अपॉर्चुनिटीज फंड और चौथे स्थान पर बैंक ऑफ इंडिया स्मॉलकैप फंड रहे। इन दोनों ने 21.36 फीसदी का SIP रिटर्न दिया। यानी SBI गोल्ड फंड का रिटर्न तीसरे स्थान के फंड से 22.75 प्रतिशत अंक ज्यादा रहा।

Investment Tips: डूबते बाजार में SIP बंद करने का मन करता है? जानिए कैसे गिरते बाजार में भी जारी रख सकते है निवेश

रैंक फंड का नाम 3 साल का SIP रिटर्न
1 एसबीआई गोल्ड फंड 44.11%
2 एक्सिस गोल्ड फंड 43.84%
3 एसबीआई हेल्थकेयर अपॉर्च्युनिटीज फंड 21.36%
4 बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड 21.36%
5 एचएसबीसी मिडकैप फंड 21.26%
6 आईटीआई स्मॉल कैप फंड 21.17%
7 यूटीआई हेल्थकेयर फंड 20.79%
8 एसबीआई चिल्ड्रन्स फंड 20.25%
9 इनवेस्को इंडिया मिड कैप फंड 19.94%
10 व्हाइटओक कैपिटल मिड कैप फंड 19.57%
Source: Value Research, आंकड़े 24 अगस्त 2026 तक।
10,000 रुपये की SIP से कितना बना पैसा
36 महीने तक 10,000 रुपये प्रति माह निवेश करने पर कुल 3.60 लाख रुपये जमा होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, SBI गोल्ड फंड में इसकी वैल्यू 6.59 लाख रुपये और एक्सिस गोल्ड फंड में 6.57 लाख रुपये हो गई। इसके मुकाबले SBI हेल्थकेयर अपॉर्च्युनिटीज फंड और बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड में यह रकम 4.90 लाख रुपये रही। HSBC मिडकैप फंड में SIP की वैल्यू 4.89 लाख रुपये पहुंची।

फंड का नाम 3 साल का SIP रिटर्न ₹10,000 की मासिक SIP की वैल्यू
एसबीआई गोल्ड फंड 44.11% ₹6.59 लाख
एक्सिस गोल्ड फंड 43.84% ₹6.57 लाख
एसबीआई हेल्थकेयर अपॉर्च्युनिटीज फंड 21.36% ₹4.90 लाख
बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड 21.36% ₹4.90 लाख
एचएसबीसी मिडकैप फंड 21.26% ₹4.89 लाख
Source: Value Research, आंकड़े 24 अगस्त 2026 तक।

1 साल के रिटर्न पर तस्वीर बदली
वहीं बात करें, पिछले 1 साल के रिटर्न की, तो इसका SIP डेटा एक अलग नजरिया देता है। बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने तीन साल में तो 21.36 फीसदी का रिटर्न दिया लेकिन पिछले एक साल में 50.13 फीसदी का SIP रिटर्न दिया। वहीं, 3 साल के रिटर्न वाली सूची में 6th नंबर वाले फंड ITI स्मॉल कैप फंड ने एक साल में 42.06 फीसदी का रिटर्न दिया। जबकि एक्सिस गोल्ड फंड और SBI गोल्ड फंड ने क्रमशः 38.45 फीसदी और 37.83 फीसदी का रिटर्न दिया। ये आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग अवधि में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड बदल सकते हैं, इसलिए म्यूचुअल फंड की तुलना करते समय निवेश की अवधि भी महत्वपूर्ण होती है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

NATIONAL : अभिजीत दीपके ने बढ़ाई टीम CJP, नए महासचिव से लेकर राष्ट्रीय प्रवक्ता तक की नियुक्ति, जानें किसे क्या मिला जिम्मा?

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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार सुबह संगठन का विस्तार करते हुए कई अहम नियुक्तियों का ऐलान किया। पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के रिक्त पदों को भरने के साथ पांच नए राष्ट्रीय संगठन महासचिवों की नियुक्ति की है।

पांच नेताओं को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी
पार्टी की ओर से की गई नियुक्तियों में पांच नेताओं को राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें रेखा शर्मा, अक्षय शिंदे, प्रेम आकाश, अनाम उज्जमा और बालाकृष्ण शुक्ला शामिल हैं। सीजेपी का कहना है कि इन नियुक्तियों के जरिए संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

नॉर्थ जोन को-ऑर्डिनेशन कमिटी का भी गठन
संगठन विस्तार के तहत सीजेपी ने नॉर्थ जोन के लिए विशेष को-ऑर्डिनेशन कमिटी का भी ऐलान किया है। पार्टी के अनुसार, समिति का उद्देश्य उत्तरी भारत में संगठन के कामकाज और समन्वय को मजबूत करना है। इस समिति में आदेश प्रधान गुर्जर, आजाद मोहित, मोहम्मद फरहान खान, विश्वेष कर्नवाल, उज्ज्वल पांडे, पूजा सैनी, आफताब सिंह विर्क, अर्शदीप सिंह कोचर, जाहिद अहमद माले, महविश अली, श्रेष्ठ सिंह खेरा, अजय देशवाल, डॉ. विवेक सांगवान, मुकेश ऑलराउंडर, राम जाखड़, हर्ष कार्तिकेय सिंह और एडवोकेट आरुषि घई को शामिल किया गया है। पार्टी की ओर से की गई इन नियुक्तियों को संगठन के विस्तार और आगामी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

SPORTS : टेस्ट करियर में सबसे ज्यादा ओवर फेंकने वाले गेंदबाज, लिस्ट में भारतीय दूसरे नंबर पर

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टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों को लंबे-लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं. कई गेंदबाजों ने अपने करियर में हजारों ओवर फेंके हैं, लेकिन इस मामले में एक गेंदबाज सबसे आगे है. आइए जानते हैं उनके नाम.

टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों को लंबे-लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं. कई गेंदबाजों ने अपने करियर में हजारों ओवर फेंके हैं, लेकिन इस मामले में एक गेंदबाज सबसे आगे है. खास बात यह है कि इस लिस्ट में भारत के दिग्गज अनिल कुंबले दूसरे नंबर पर मौजूद हैं. श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट करियर में सबसे ज्यादा 7339.5 ओवर गेंदबाजी की है. वहीं अनिल कुंबले ने 6808.2 ओवर फेंककर दूसरा स्थान हासिल किया है. इस लिस्ट में शेन वॉर्न और जेम्स एंडरसन जैसे दिग्गज गेंदबाज भी 8n शामिल हैं.

मुरलीधरन सबसे आगे, कुंबले दूसरे नंबर पर

  1. मुथैया मुरलीधरन – 7339.5 ओवर

श्रीलंका के दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. उन्होंने 1992 से 2010 के बीच कुल 133 टेस्ट मैच खेले और 7339.5 ओवर गेंदबाजी की. इस दौरान मुरलीधरन ने 800 विकेट अपने नाम किए और उनका गेंदबाजी औसत 22.73 रहा.

  1. अनिल कुंबले – 6808.2 ओवर

भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले इस रिकॉर्ड लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं. उन्होंने 1990 से 2008 के बीच 132 टेस्ट मैच खेले और कुल 6808.2 ओवर गेंदबाजी की. कुंबले ने अपने टेस्ट करियर में 619 विकेट लिए और उनका औसत 29.65 रहा.

  1. शेन वॉर्न – 6784.1 ओवर

ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वॉर्न इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं. वॉर्न ने 1992 से 2007 के बीच 145 टेस्ट मैच खेले और 6784.1 ओवर फेंके. उन्होंने इस दौरान 708 विकेट हासिल किए और उनका गेंदबाजी औसत 25.42 रहा.

  1. जेम्स एंडरसन – 6672.5 ओवर

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने अपने लंबे टेस्ट करियर में 6672.5 ओवर गेंदबाजी की. उन्होंने 2003 से 2024 के बीच 188 टेस्ट मैच खेले, जो इस लिस्ट में शामिल खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा मैचों में से एक है. एंडरसन ने 704 विकेट हासिल किए और उनका गेंदबाजी औसत 26.46 रहा.

यह भी पढ़ें- 8-8 ओवर का मैच, रिंकू सिंह ने 414 के तूफानी स्ट्राइक रेट से ठोके इतने रन

  1. नाथन लियोन – 5853.1 ओवर

ऑस्ट्रेलिया के ऑफ स्पिनर नाथन लियोन इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर हैं. उन्होंने 2011 से अब तक 143 टेस्ट मैच खेले और 5853.1 ओवर गेंदबाजी की. लियोन के नाम 571 टेस्ट विकेट हैं और उनका गेंदबाजी औसत 30.21 है.

  1. स्टुअर्ट ब्रॉड – 5616.2 ओवर

इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने टेस्ट क्रिकेट में 5616.2 ओवर गेंदबाजी की. उन्होंने 2007 से 2023 के बीच 167 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान 604 विकेट हासिल किए. ब्रॉड का टेस्ट गेंदबाजी औसत 27.68 रहा.

  1. कोर्टनी वॉल्श – 5003.1 ओवर

वेस्टइंडीज के महान तेज गेंदबाज कोर्टनी वॉल्श इस सूची में सातवें स्थान पर हैं. उन्होंने 1984 से 2001 के बीच 132 टेस्ट मैच खेले और 5003.1 ओवर डाले. वॉल्श ने अपने टेस्ट करियर में 519 विकेट लिए और उनका औसत 24.44 रहा.

NATIONAL : दिल्ली में झमाझम बारिश से थम गई रफ्तार, 18 उड़ानें रद्द और 166 प्रभावित; IMD ने क्या कहा

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भारी बारिश के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों में लगातार दूसरे दिन भी हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों और व्यस्त सड़कों पर मंगलवार सुबह से ही जलभराव हो गया। सड़कें पानी में डूब गईं और कई जगह वाहन पानी के बीच से गुजरते नजर आए। इससे शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई।

दिल्ली एयरपोर्ट पर भी बारिश का असर
भारी बारिश का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से 18 उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि 166 उड़ानों में देरी हुई है।

इससे पहले सोमवार को भी खराब मौसम के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर स्थिति काफी प्रभावित हुई थी। सोमवार को 26 उड़ानें रद्द, 15 उड़ानें दूसरे शहरों के लिए डायवर्ट की गईं, जबकि 390 से ज्यादा उड़ानों में देरी हुई।

AIIMS से सुप्रीम कोर्ट तक जलभराव
दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों में बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। राम मनोहर लोहिया अस्पताल, AIIMS, अशोका रोड और सुप्रीम कोर्ट के आसपास भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली।

AIIMS के पास फ्लाईओवर के लूप पर भारी जलभराव होने से यातायात की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। वहीं कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल से सटे बाबा खड़क सिंह मार्ग पर भी वाहन पानी के बीच से गुजरते दिखाई दिए।इसके अलावा संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, ITO, आरके पुरम और फिरोजशाह रोड समेत दिल्ली के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई।

दिल्ली-NCR में ट्रैफिक पर असर
भारी बारिश के कारण दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के कई इलाकों में भी यातायात प्रभावित हुआ। सोमवार की बारिश के बाद दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा के कई हिस्सों में सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर गया था। कई प्रमुख मार्गों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। मंगलवार को भी बारिश जारी रहने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।

दिल्ली में सामान्य से ज्यादा बारिश
लगातार हो रही बारिश के कारण दिल्ली में इस मानसून सीजन की बारिश सामान्य से ऊपर पहुंच गई है। 24 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, सफदरजंग में 246.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 191.1 मिमी होती है। यानी यहां सामान्य से 29 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। ऐसा ही हाल पालम में रहा, जहां 227.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक है। लोधी रोड में 233.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 22 प्रतिशत ज्यादा है। रिज क्षेत्र में 243 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक है। वहीं अयानगर में 266.3 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 66 प्रतिशत ज्यादा है।

IMD ने जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में बारिश से फिलहाल पूरी राहत मिलने के आसार कम हैं। IMD के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली के कई हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज बारिश होने की भी संभावना है। इसके अलावा गरज के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली के अलावा एनसीआर के गुरुग्राम और फरीदाबाद के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन दोनों इलाकों में भी आगे बारिश होने की संभावना है। वहीं, नोएडा में आसमान में घने बादल छाए हुए हैं, हालांकि मौसम विभाग ने फिलहाल शहर के लिए कोई विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की है।

WORLD : अमेरिका ने ईरान पर लगाए ‘अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध’, भारत पर ये असर

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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे ‘अभूतपूर्व’ बताया है.उन्होंने कहा कि इसका मक़सद विदेशों में ईरान के ‘आर्थिक रास्ते बंद करना’ है.इस मिशन के तहत अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं. दर्जनों लोगों, कंपनियों और जहाज़ों के नाम प्रतिबंधों की सूची में जोड़े गए हैं.अमेरिका ने कहा है कि वह उन विदेशी बैंकों, कंपनियों और बिचौलियों पर दबाव बढ़ाएगा, जो ईरान के साथ अब भी काम कर रहे हैं. इसमें कुछ ऐसी गतिविधियां रोकने के लिए डेडलाइन तय करना भी शामिल है, जिन्हें अमेरिका ईरान के व्यापार और कमाई में मददगार मानता है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ अमेरिका की ईरान पर प्रस्तावित इन नई पाबंदियों से ईरान को भारत के चावल, चाय और दवाओं के निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है. भारतीय निर्यातकों ने सोमवार को यह आशंका जताई. हाल के वर्षों में इन सामानों का बड़ा हिस्सा दुबई के बंदरगाह के रास्ते ईरान पहुंचता रहा है.

अमेरिका इस अभियान को “ऑपरेशन इकोनॉमिक आइसोलेशन” (आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की नीति) कह रहा है. अमेरिका के मुताबिक़ वो ऐसे सभी देशों को अलग-थलग कर देगा जो ईरान के साथ किसी भी तरह का व्यापार करते हैं.

यह अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है, जब दोनों देशों के बीच का युद्धविराम बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है. ईरान की अर्थव्यवस्था को कई महीनों के सैन्य संघर्ष से भारी नुक़सान हुआ है. तेल निर्यात और विदेशी व्यापार में रुकावट आई है. महंगाई बहुत बढ़ गई है. राष्ट्रीय मुद्रा की क़ीमत भी गिरी है.

अपने भाषण में अमेरिका के वित्त मंत्री ने साफ़ तौर पर इस अभियान को ईरान पर सैन्य दबाव का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सशस्त्र बलों ने “नींव तैयार कर दी है”.

शिपिंग, सोने के कारोबार और ईरानी विमानन जैसे क्षेत्रों पर अमेरिका कई सालों से अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लगा रहा है. अब जो बदलाव हुआ है, उसमें नए क्षेत्रों को शामिल करने के अलावा, पहले से लागू प्रतिबंधों को और सख़्त किया जा रहा है.इसके अलावा, ईरान के साथ विदेशों में काम करने वाले लोगों या संस्थाओं के ख़िलाफ़ और सख़्ती का एलान किया गया है.सबसे बड़ा बदलाव पांच क्षेत्रों से जुड़ा है: डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग.

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के फॉरेन एसेट कंट्रोल ऑफ़िस (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) ने इन पांच क्षेत्रों को आधिकारिक तौर पर ईरानी अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों की सूची में शामिल किया है, जिन पर 2023 के कार्यकारी आदेश के तहत प्रतिबंध लागू हो सकते हैं.

यह आदेश डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान जनवरी 2020 में जारी किया था. शुरुआत में इसमें ईरान के निर्माण, खनन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल क्षेत्र शामिल थे. इसमें वित्त मंत्रालय को बाद में दूसरे क्षेत्रों को भी जोड़ने की अनुमति दी गई थी.

उसी साल वित्तीय क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया गया था. 2024 में तेल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र जोड़े गए.

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि पांच और क्षेत्रों को जोड़ने से ईरान से जुड़ी उन गतिविधियों का दायरा बढ़ गया है, जिन पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

मंत्रालय के मुताबिक, विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय इन क्षेत्रों में ईरानी अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों के लिए किसी भी व्यक्ति पर प्रतिबंध लगा सकता है. चाहे वो किसी भी देश में रहता हो.

अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस फ़ैसले से इन क्षेत्रों में काम करने वाली वो विदेशी संस्थाएं जो ईरान के साथ किसी भी तरह कारोबार करती हैं, अमेरिका के निशाने पर आ जाएंगी.

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि ईरान पैसे भेजने और प्रतिबंधों से बचने के लिए डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल करता है. वह अपने हथियार कार्यक्रमों के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी हासिल करने की कोशिश करता है. ईरानी रियाल की क़ीमत गिरने से अपनी संपत्ति बचाने के लिए सोने का सहारा लेता है. विमानन और शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल उपकरण, पैसा और तेल का निर्यात करने के लिए करता है.

अमेरिका ने अपने इस अभियान के तहत क़रीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाज़ों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफ़एसी) के मुताबिक, इनमें से कुछ ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के लिए उपकरण मुहैया कराने में शामिल थे. कुछ साइबर ऑपरेशन में शामिल थे. जबकि दूसरे तेल के निर्यात और उससे होने वाली कमाई को ट्रांसफ़र करने में शामिल थे.

अमेरिका के निशाने पर आए ये लोग और संस्थाएं अलग-अलग देशों से हैं. सब पर प्रतिबंध लगाने का आधार भी अलग-अलग है.

नए पैकेज में एक और बड़ा बदलाव उन कई गतिविधियों पर रोक है, जो ईरान पर व्यापक प्रतिबंधों के बावजूद पहले ओएफ़एसी के जनरल लाइसेंस के तहत संभव थीं.

पहले दूसरे देशों में पढ़ने के लिए ईरानी छात्र, छात्राओं को कई तरह की छूटें मिली थीं. अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ ईरानी यूनिवर्सिटीज़ के साथ अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स के लिए स्टूडेंट एक्सचेंज के समझौते कर सकती थीं. इसमें ईरानी यूनिवर्सिटी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना भी शामिल था.

कुछ एडमिशन और ट्यूशन से जुड़ी सेवाओं, कुछ ऑनलाइन कोर्स, कुछ नॉन-कमर्शियल एजुकेशनल और रिसर्च गतिविधियों के साथ कुछ एकेडमिक और प्रोफ़ेशनल परीक्षाएं आयोजित करने की भी कुछ शर्तों के तहत अनुमति थी.

लेकिन इस लाइसेंस के निलंबन के बाद अब इन गतिविधियों को इस जनरल लाइसेंस का लाभ नहीं मिलेगा. अमेरिका ने कहा है कि अब इनमें से जुड़ी किसी भी गतिविधि के लिए अलग से आवेदन करना होगा.

खेल के क्षेत्र में भी 2013 से लागू एक लाइसेंस को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है. इसके तहत ईरान और अमेरिका के बीच प्रोफ़ेशनल और एमेच्योर स्पोर्टिंग इवेंट और एक्सचेंज प्रोग्राम की अनुमति थी. इसमें टूर्नामेंट्स और एग्ज़ीबिशन, खिलाड़ियों की स्पॉन्सरशिप, कोचिंग, रेफ़रिंग और स्पोर्ट्स एजुकेशन शामिल थी.

इन देशों पर पड़ेगा असर
चीन, ईरानी तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार रहा है और नई पाबंदियों का उस पर भी बड़ा असर पड़ सकता हैइमेज स्रोत,ATTA KENARE/AFP/GettyImages
इमेज कैप्शन,चीन, ईरानी तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार रहा है और नई पाबंदियों का उस पर भी बड़ा असर पड़ सकता है
अमेरिका के ईरान पर लगाए गए इन नए प्रतिबंधों का असर भारत पर भी पड़ सकता है.

रॉयटर्स के मुताबिक़ भारत ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में रहा है. हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 के 17 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर से 90 फ़ीसदी से अधिक गिर चुका है. अब भारत से ईरान को ज़्यादातर उन्हीं सामानों का निर्यात होता है, जिन्हें मानवीय आधार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है.

भारतीय निर्यातकों को डर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इन नए प्रतिबंधों से भारत और ईरान के कमज़ोर हो चुके व्यापार पर और बुरा असर होगा.

यूएई ने पिछले हफ़्ते अगले आदेश तक ईरान के साथ सभी व्यापारिक गतिविधियां, एक्सचेंज और वित्तीय लेन-देन रोक दिए थे.

हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के बयानों से पता चलता है कि इस इकोनॉमिक प्रेशर के फ़ोकस में चीन है. हाल के सालों में चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार रहा है. अमेरिका ने इन नए प्रतिबंधों के ज़रिए ईरान और चीन के कारोबार को रोकने या कम करने की कोशिश की है.

रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल निर्यात का 80 फ़ीसदी से ज़्यादा चीन जाता है. इसका एक बड़ा हिस्सा छोटी और स्वतंत्र रिफाइनरियां ख़रीदती हैं. ख़ास तौर पर शानदोंग प्रांत की रिफाइनरियां. अमेरिका के प्रतिबंध दोबारा लागू होने के बाद चीन की बड़ी सरकारी कंपनियों ने सीधे ईरानी तेल ख़रीदना काफ़ी हद तक बंद कर दिया है. लेकिन स्वतंत्र रिफाइनरियां सस्ता ईरानी तेल ख़रीदती रही हैं.

नए प्रतिबंधों के पैकेज से पहले भी इस कारोबार पर दबाव था. अमेरिका ने कई बार उन शिपिंग कंपनियों, रिफाइनरियों और बिचौलियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनके बारे में वॉशिंगटन का कहना है कि वे चीन को ईरानी तेल बेचने में शामिल रहे हैं.

ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर के अनुमान के मुताबिक, अगस्त में चीन को ईरान का तेल निर्यात क़रीब 5 लाख 34 हज़ार बैरल प्रतिदिन रहा. जुलाई में यह क़रीब 8 लाख 23 हज़ार बैरल था. इस साल की शुरुआत में एक समय यह क़रीब 15 लाख 80 हज़ार बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था.

वीडियो कैप्शन,मक्का समझौते पर क्या बोले ट्रंप?
चीन के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी ईरान के विदेशी व्यापार नेटवर्क का अहम हिस्सा रहा है. दोनों देशों के बीच कारोबार की मात्रा ही इसकी अहमियत की वजह नहीं है. दुबई कई सालों से ईरान को सामान दोबारा निर्यात करने, पैसे ट्रांसफ़र करने और ईरानी कंपनियों और कारोबारियों की गतिविधियों के लिए प्रमुख रास्तों में से एक रहा है.

हालांकि, अब इस रास्ते में भी रुकावट है. 18 अगस्त को अमीरात ने ईरान के साथ सभी व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन रोक दिए थे. उसने ईरान पर अपने इलाक़े की ओर मिसाइल दागने का आरोप लगाया था.

रिपोर्टों में अलग-अलग वजहों से तुर्की और इराक़ के नाम भी आए हैं. तुर्की ईरान का कारोबारी साझेदार है. वह सामान और भुगतान के लिए वैकल्पिक ज़मीनी रास्तों में से एक भी है. अमीरात का रास्ता बंद होने के बाद कुछ भारतीय निर्यातकों ने कहा है कि वे ईरान के साथ अपना कारोबार तुर्की के रास्ते से करने पर विचार कर रहे हैं.

इराक़ भी कई वर्षों से ईरान के सबसे अहम क्षेत्रीय बाज़ारों में से एक रहा है. ख़ास तौर पर गैस, बिजली और ग़ैर-तेल सामान के लिए. अमेरिकी दबाव बढ़ने पर बैंक, शिपिंग कंपनियां और तीसरे देशों के बिचौलिये निशाने पर आ सकते हैं. इससे चीन के अलावा ईरान के क्षेत्रीय व्यापार के रास्ते भी प्रभावित हो सकते हैं.

अमेरिकी वित्त मंत्री ने नए प्रतिबंधों के पैकेज का ऐलान करते समय यह भी कहा कि वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अमेरिकी सेना की टीमें दूसरी सरकारों के संपर्क में हैं. उन्होंने कहा कि हर देश को वॉशिंगटन की ओर से बताई गई गतिविधियों को बंद करने के लिए एक डेडलाइन दी जाएगी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने जुलाई में अपने आकलन में अनुमान लगाया था कि 2026 में ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है.

ईरान में घरेलू हालात भी बहुत मुश्किल हो गए हैं. यह आंकड़ों और लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी कई रिपोर्टों, दोनों से पता चलता है. ख़ुद ईरानी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, इस साल जुलाई में सालाना महंगाई दर 66 फ़ीसदी पहुंच गई. खाने-पीने की चीज़ों की क़ीमतें पिछले साल जुलाई के मुक़ाबले क़रीब 128 फ़ीसदी बढ़ गईं.

इसी समय, परिवारों की परचेज़िंग पावर (क्रय शक्ति) में गिरावट और औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों में रुकावट ने ईरानी अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है. उन्हें इस स्थिति के जारी रहने के सामाजिक असर की चिंता है.तेल निर्यात में गिरावट ने ईरान की विदेशी मुद्रा कमाई के सबसे अहम स्रोतों में से एक को सीमित कर दिया है. वहीं, शिपिंग में रुकावट, समुद्री पाबंदियों और बिचौलियों के नेटवर्क पर दबाव ने ईरानी तेल को बेचने और उसकी ढुलाई को और मुश्किल बना दिया है.

NATIONAL : जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने उठाया कदम, दो महीने में बाजार में लानी होगी आयातित चीनी

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Sugar Price Relief: सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात से जुड़े नियम बदले हैं। अब आयातित रॉ शुगर को व्हाइट या रिफाइंड शुगर में बदलकर दो महीने के भीतर घरेलू बाजार में बेचना होगा, जिससे चीनी की जमाखोरी से राहत मिलेगी और कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

DGFT Sugar Rules: केंद्र सरकार ने चीनी के आयात से जुड़े एक अहम नियम में बदलाव किया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के नए करिजेंडम के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत आयात की गई रॉ शुगर (कच्ची चीनी) को व्हाइट या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा। इसके तहत अब हर खेप के लिए अलग से अधिकतम दो महीने की समयसीमा तय की गई है। इससे पहले आयातित रॉ शुगर को उचित समय में रिफाइंड कर 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचने का नियम था। लेकिन अब उसे बदल कर कम कर दिया गया है।

क्या है नया नियम
बिल ऑफ एंट्री वह दस्तावेज होता है, जो सामान भारत पहुंचने पर कस्टम्स के सामने जमा किया जाता है। अब हर आयातित खेप के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने की समयसीमा लागू होगी। यानी चीनी को लंबे समय तक स्टॉक में रखने की गुंजाइश कम हो जाएगी। हालांकि, आयात से जुड़े बाकी सभी नियम और शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी।

देश में चीनी की कमी नहीं
इस बीच, चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और खुदरा बाजार में कीमतें नीचे आने की उम्मीद है। ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार, चीनी की कीमतें बढ़ने के पीछे कारोबारियों और थोक उपभोक्ताओं की सट्टेबाजी वाली खरीद के साथ खराब मौसम के कारण उत्पादन में कमी जैसे कारण रहे हैं।

10 लाख टन आयात से शुरू हुई नरमी
नीरज शिरगांवकर ने कहा कि चीनी मिलें कृत्रिम कमी पैदा करने या मिल स्तर पर कीमतें बढ़ाने में शामिल नहीं थीं। उनके मुताबिक, सरकार द्वारा 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद कीमतों में नरमी शुरू हो गई है। इसी बीच ISMA के मुताबिक, सितंबर के अंत तक देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है। चीनी मिलों का संचालन करीब 15 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा और अक्टूबर में मिलों से लगभग 10 से 12 लाख टन चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है।

अक्टूबर में 24-25 लाख टन होगी मांग
अक्टूबर में देश में चीनी की मांग करीब 24 से 25 लाख टन रहने का अनुमान है। ISMA का कहना है कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर कोई कमी नहीं है और आने वाले समय में खुदरा बाजार में कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

HEALTH : घर में किसी को H1N1 है तो बाकी लोग कैसे बचें? इन बातों का रखें ध्यान

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घर में किसी को H1N1 होने पर मरीज को अलग कमरे में रखना, हाथों की सफाई, मास्क का इस्तेमाल, खांसते और छींकते वक्त नाक मुंह ढकना और निजी सामान अलग रखना सबसे जरूरी हैं.

दिल्ली एनसीआर में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इस साल अब तक दिल्ली में इन्फ्लूएंजा A के 2,392 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 1,777 मामले अकेले H1N1 के हैं. ऐसे में अगर घर में किसी एक शख्स को H1N1 हो जाए, तो बाकी लोगों तक इसका फैलना रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. डॉक्टरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू कोई नया या अनजान वायरस नहीं है, यह पहले भी फैलता रहा है, बस कुछ बुनियादी सावधानियां अपना कर इसे आसानी से रोका जा सकता है.

मरीज को अलग कमरे में रखें
घर में जिसे भी H1N1 के लक्षण दिखें, उसे तुरंत बाकी परिवार से अलग कर देना चाहिए. मरीज को अलग कमरे में रखें और जितना हो सके नजदीक न जाएं, क्योंकि यह वायरस मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है.

हाथों की सफाई सबसे जरूरी
डॉक्टरों के मुताबिक हाथों की सफाई वायरस को फैलने से रोकने का सबसे आसान और असरदार तरीका है. बार बार साबुन पानी से हाथ धोना या सैनिटाइजर इस्तेमाल करना घर के हर शख्स के लिए जरूरी है, खासकर मरीज की देखभाल करने के बाद.

मास्क लगाना नहीं भूलें
मरीज और उसकी देखभाल करने वाले, दोनों को मास्क पहनना चाहिए. डॉक्टरों की सलाह है कि कोरोना के दौरान अपनाए गए तरीके यहां भी दोहराने चाहिए, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना, मास्क लगाना और नियमित रूप से हाथ धोते और सैनिटाइज करते रहें.

इन बातों का ध्यान रखें
मरीज़ को खांसते या छींकते वक्त हमेशा रुमाल या टिशू से नाक और मुंह ढककर रखना चाहिए. इस्तेमाल किए गए टिशू को तुरंत बंद डस्टबिन में फेंक दें, ताकि वायरस के फैलने का खतरा कम हो जाए .

निजी सामान अलग रखें
मरीज के तौलिये, बर्तन, कपड़े और दूसरी निजी चीज़ें बाकी परिवार से अलग रखे. इन चीजों को शेयर करने से वायरस आसानी से दूसरे सदस्यों तक पहुंच सकता है.

घर को हवादार और साफ रखें
घर के कमरों में हवा का वेंटिलेशन, और जिस जगह मरीज़ रह रहा हो वहां नियमित सफाई जरूरी है. दरवाज़ों के हैंडल, स्विच बोर्ड जैसी बार बार छुई जाने वाली जगहों को भी साफ करते रहें.

कमजोर इम्यूनिटी वालों का रखें खास ध्यान
बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोग फ्लू की गंभीर चपेट में जल्दी आ सकते हैं. ऐसे लोगों को मरीज़ से जितना हो सके दूर रखें, और उनकी सेहत पर खास नजर रखें.

लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलें
अगर परिवार के किसी और शख्स को भी बुखार, खांसी, गले में खराश या बदन दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें. सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लें .

NATIONAL : ‘इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति का हाथ, लाल चौक पर फांसी मिले’, कश्मीर पंडितों की हिट लिस्ट पर भड़के पूर्व DGP

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वैद ने कहा, ”मेरा मानना ​​है कि सरकार को एक सीनियर अधिकारी, चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, इंटेलिजेंस चीफ और सिक्योरिटी फोर्स के प्रमुख को शामिल करके एक सुरक्षा प्लान बनाना चाहिए.”

जम्‍मू: कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का बड़ा बयान सामने आया है. उन्‍होंने कहा क‍ि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली ‘हिट-लिस्ट’ से साफ पता चलता है कि इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति का हाथ है. पूर्व डीजीपी ने इस मामले में मिसाल कायम करने वाली सजा की मांग करते हुए कहा, “प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता इस हिट-लिस्ट के पीछे के लोगों का पर्दाफाश करना होनी चाहिए. पहचान होने के बाद, इसके पीछे के व्यक्ति को लाल चौक पर फांसी दी जानी चाहिए.”

पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा ऑनलाइन जारी की गई धमकी भरी नई चिट्ठी में प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम, घर के पते, मोबाइल नंबर और यहां तक कि गाड़ियों के नंबर भी दिए गए हैं. एक महीने में यह दूसरी धमकी है.वैद ने कहा कि सरकार को हिट-लिस्ट के पीछे के मास्टरमाइंड और सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं को संवेदनशील निजी डेटा लीक करने वाले मुखबिर, दोनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.

ह‍िट-ल‍िस्‍ट के पीछे के लोगों का पर्दाफाश होना चाह‍िए
उन्‍होंने कहा, “इतनी बारीक और निजी जानकारी लीक करना साफ तौर पर किसी अंदरूनी व्यक्ति का काम है. या तो विभाग के अंदर का कोई व्यक्ति या उनके बहुत करीब का कोई व्यक्ति निगरानी कर रहा है और यह डेटा आतंकी आकाओं तक पहुंचा रहा है. वरना, पाकिस्तान को उनके रास्तों, घरों और गाड़ियों के नंबर कैसे पता चलेंगे?” वैद ने कहा क‍ि प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता इस हिट-लिस्ट के पीछे के लोगों का पर्दाफ़ाश करना होनी चाहिए. इसके बाद इसके पीछे के व्यक्ति को लाल चौक पर फांसी दी जानी चाहिए.वैद्य ने कहा कि इस खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

वैद ने कहा, ”मेरा मानना ​​है कि सरकार को एक सीनियर अधिकारी, चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, इंटेलिजेंस चीफ और सिक्योरिटी फोर्स के प्रमुख को शामिल करके एक सुरक्षा प्लान बनाना चाहिए. मैं इस पर चर्चा करना चाहूंगा कि पैकेज के तहत घाटी में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है. वे आसान और ‘सॉफ्ट’ टारगेट हैं, जिन्हें आतंकवादी निशाना बनाना चाहते हैं। वे सुरक्षा बलों का सामना नहीं कर सकते और उनकी संख्या कम हो रही है। इसीलिए आतंकवादी ऐसे आसान टारगेट की तलाश में हैं.”

वैद ने कहा कि मैं सुरक्षा प्लान इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि कुछ दफ्तर काफी सुरक्षित होते हैं, जैसे डिप्टी कमिश्नर ऑफिस, डायरेक्टोरेट, सचिवालय. इन जगहों पर कोई भी हथियार लेकर नहीं आ सकता है. इस तरह के दफ्तरों में कश्मीरी पंडितों की ड्यूटी लगाएं. मेरा यह भी मानना है कि सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी देनी चाहिए. इसके साथ ही क्या करना है और क्या नहीं, इसकी भी जानकारी देनी चाहिए. इन्हें हथियार भी देने चाहिए, ताकि कोई अगर हमला कर रहा है, तो ये भी अपनी सुरक्षा कर सकें.

NATIONAL : मुंबई में 22 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा गिरी, हादसे में 2 लोगों की मौत

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भुलेश्वर इलाके में शनिवार रात राजा गणपति मंडल की करीब 3 टन वजनी गणेश प्रतिमा पंडाल में स्थापित करने से पहले ही गिर गई, जिसके चलते 2 लोगों की मौत हो गई औऱ 5 लोग घायल हो गए हैं.

मुंबई स्थित भुलेश्वर इलाके में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ. भुलेश्वरचा राजा गणपति मंडल की करीब 3 टन वजनी गणेश प्रतिमा पंडाल में स्थापित किए जाने से पहले ही तकनीकी वजह से गिर गई. हादसा बलराम मर्चेंट रोड, कबूतरखाना, जय अंबे चौक, भुलेश्वर इलाके में हुआ.

जानकारी के मुताबिक, 22 अगस्त की रात करीब 9:51 बजे गणेश प्रतिमा के आगमन समारोह के दौरान यह हादसा हुआ. प्रतिमा गिरने की चपेट में आने से कुल 7 लोग प्रभावित हुए, जिनमें 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हैं. मृतकों की पहचान संकते नेवसे (33) और बृजेश हेमंत जोशी (30) के रूप में हुई है. संकते नेवसे भुलेश्वरचा राजा गणपति मंडल के अध्यक्ष थे. उन्हें रिलायंस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

घायल हुए लोगों में बच्चे भी, जी.टी. अस्पताल में चल रहा इलाज
दूसरे मृतक बृजेश हेमंत जोशी पेशे से अकाउंटेंट थे और गणेश भक्त के तौर पर कार्यक्रम में मौजूद थे. उन्हें जी.टी. अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. बृजेश के परिवार में उनकी करीब 2 साल की एक संतान है. उनके पिता का काफी समय पहले निधन हो गया था और तब से परिवार की जिम्मेदारी बृजेश के कंधों पर थी.

हादसे में वैभव घेनंद (38) और पवन चौरसिया (25) घायल हुए हैं. दोनों का जी.टी. अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है. इसके अलावा 5 वर्षीय लावण्या गनेर, 7 वर्षीय दिव्या गनेर और 26 वर्षीय कुणाल काशीद घायल हुए हैं. तीनों का जे.जे. अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है. सैफी अस्पताल में इस हादसे से संबंधित किसी घायल के भर्ती होने की सूचना नहीं है.

NATIONAL : भाजपा राहुल गांधी से डरी हुई है: संजय राउत

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पुणे, 22 अगस्त (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने शनिवार को दावा किया कि भाजपा ‘‘घबराई हुई’’ है और इसी वजह से प्रशासन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को अनुमति देने से पहले कई शर्तें लगायीं।

राज्यसभा सदस्य राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि निकट भविष्य में भाजपा का पतन देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवक के पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की राहुल गांधी की मांग के आगे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।

शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के छह घंटे से अधिक समय तक चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल हुए युवक साहिल लोचब के मामले में प्राथमिकी दर्ज की।

राउत ने शनिवार शाम पुणे में आयोजित गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने अनुमति देने के लिए 30 शर्तें रखीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी किसी दूसरे देश से आए हैं और क्या सत्तारूढ़ दलों के नेताओं को भी ऐसी शर्तों का सामना करना पड़ता है।

शिवसेना (उबाठा) नेता राउत ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है, क्योंकि भाजपा घबराई हुई है। सितंबर के बाद भाजपा का पतन शुरू हो जाएगा। वे राहुल गांधी से डरे हुए हैं।’’

शिवसेना (उबाठा) नेता और मुंबई की पूर्व महापौर विशाखा राउत के जाति प्रमाणपत्र को अधिकारियों द्वारा अमान्य किए जाने के बारे में राउत ने आरोप लगाया कि यह ‘‘बदला लेने’’ के लिए किया गया और केवल विपक्षी नेताओं को ही इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

पुणे, 22 अगस्त (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने शनिवार को दावा किया कि भाजपा ‘‘घबराई हुई’’ है और इसी वजह से प्रशासन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को अनुमति देने से पहले कई शर्तें लगायीं।

राज्यसभा सदस्य राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि निकट भविष्य में भाजपा का पतन देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवक के पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की राहुल गांधी की मांग के आगे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।

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