Thursday, April 30, 2026
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NATIONAL : बंगलूरू में बारिश का कहर: अस्पताल की दीवार गिरने से सात लोगों की मौत, सीएम सिद्धारमैया ने किया मुआवजे का एलान

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बंगलूरू में मूसलाधार बारिश के चलते अस्पताल की दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लिया और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।

कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में बुधवार शाम हुई भारी बारिश और तेज हवाओं ने भारी तबाही मचाई है। शहर के शिवाजीनगर इलाके में स्थित बोवरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल की एक विशाल चारदीवारी अचानक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम सात लोगों की जान चली गई है। मलबे के नीचे दबने से कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि डॉक्टरों ने घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई है।

हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और बचाव टीमें मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मरने वालों में ज्यादातर सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदार और वहां से गुजर रहे राहगीर शामिल हैं। शाम के वक्त अचानक शुरू हुई तेज बारिश और हवाओं के कारण दीवार का ढांचा दबाव नहीं झेल सका और गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बारिश इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी घटनास्थल का दौरा किया और मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन को राहत कार्य तेज करने और प्रभावितों को हर संभव मदद मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मुआवजे के तौर पर मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये देने का एलान किया है। शहर में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

NATIONAL : मुंबई में चार लोगों की मौत के बाद राजधानी में खरीदने से बच रहे लोग, बाजार पर असर

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गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा बिकने वाला और राहत देने वाला फल तरबूज अब लोगों के बीच डर की वजह बनता जा रहा है। मुंबई में बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के बाजारों में इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। लोग अब तरबूज खरीदने से पहले कई बार सोच रहे हैं, वहीं कई परिवारों ने फिलहाल इसे खाना ही बंद कर दिया है।

राजधानी के आजादपुर, कृष्णा नगर, करोल बाग, शाहदरा, पटपड़गंज और लक्ष्मी नगर जैसे इलाकों के फल विक्रेताओं का कहना है कि पिछले दो दिनों में तरबूज की बिक्री में साफ गिरावट आई है। जहां पहले ग्राहक बिना पूछे पूरा तरबूज खरीद लेते थे, अब वह बार-बार पूछ रहे हैं कि फल कहां से आया है, ताजा है या नहीं और कहीं ये इंजेक्शन वाला तो नहीं।

पहले दिनभर में 40 से 50 तरबूज आसानी से बिक जाते थे, लेकिन अब मुश्किल से 20-25 ही बिक रहे हैं। ग्राहक सिर्फ पूछते हैं और बिना खरीदे चले जाते हैं। खबर का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। – अर्जुन (फल विक्रेता)

मुंबई की घटना के बाद लोगों में डर बैठ गया है। लोग पूछ रहे हैं कि तरबूज सुरक्षित है या नहीं। हम समझाते हैं कि ताजा माल है, लेकिन डर इतनी जल्दी नहीं जाता। -शिवम (फल विक्रेता, आजादपुर मंडी)

कटे हुए तरबूज की बिक्री लगभग बंद हो गई है। लोग पूरा फल लेने से भी बच रहे हैं। अफवाह और डर का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ता है। -राजन (फल विक्रेता)

गर्मी के सीजन में तरबूज ही सबसे ज्यादा बिकता है। लेकिन इस बार ग्राहक संदेह में हैं। अगर यही हाल रहा तो सीजन का बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।

उधर, आम लोगों में भी डर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर बच्चों वाले परिवार ज्यादा सतर्क हो गए हैं। लोग अब खुले में बिक रहे कटे हुए फलों से दूरी बना रहे हैं। -चंद्र प्रकाश (निवासी, दिलशाद गार्डन)

बच्चों के लिए गर्मी में रोज तरबूज लाते थे, लेकिन मुंबई की खबर सुनने के बाद डर लग रहा है। जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी, घर में तरबूज नहीं लाएंगे। -प्राजकता (गृहिणी, मयूर विहार)

आजकल फल भी भरोसे के नहीं रहे। बाहर से लाल और मीठा दिखने वाला तरबूज अंदर से खराब निकलता है। बच्चों की सेहत के साथ रिस्क नहीं ले सकते। -ज्योतिसना (ग्रहणी, मालवीय नगर)

समाचार देखने के बाद मैंने फिलहाल तरबूज खरीदना बंद कर दिया है। बाजार में कौन-सा फल कितना सुरक्षित है, यह समझना मुश्किल हो गया है। -वंदना (ग्रहण, करोल बाग)

तरबूज सुरक्षित फल है और इससे मौत नहीं होती, लेकिन दूषित, मिलावटी या गलत तरीके से रखा गया तरबूज गंभीर फूड पॉइजनिंग, एलर्जी या किडनी मरीजों में जटिलताएं पैदा कर सकता है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। -डॉ. अमितेश आग्रवाल (निदेशक प्रोफेसर एंड यूनिट हेड, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन, जीटीबी अस्पताल)

मुंबई में हुई घटना के बाद दिल्ली के लोग तरबूज को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कई लोगों का आरोप है कि बाजार में चमकदार दिखाने के लिए फलों में केमिकल इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। मुंबई में हुई दर्दनाक घटना ने दिल्ली के लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है। गर्मी में राहत देने वाला तरबूज अब शक की नजर से देखा जा रहा है।

LIFESTYLE : देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवाओं की तेजी से बढ़ रही संख्या

भारत में हार्ट अटैक के खतरे का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और यह अब हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवा सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं।इस तरह के बढ़ते मामले सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में इसे लेकर हुए अध्ययन मे’ सामने आया है कि करीब 80 प्रतिशत ऐसे मरीज जिन्हें पहले मेडिकल जांच में ‘लो-रिस्क’ माना गया था, वे बाद में हार्ट अटैक का शिकार हो गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में हर वर्ष होने वाली करीब एक करोड़ मौत का लगभग 25 से 27 प्रतिशत यानी करीब 25 से 27 लाख मौत कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (सीवीडी) के कारण होती हैं, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति की मौत दिल से जुड़ी बीमारी से होती है। साफ है कि हार्ट अटैक देश में यह एक ‘साइलेंट महामारी’ बनता जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा खतरा अब युवाओं के सामने है।

देश में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के आंकड़े भी बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से सडन डेथ के 32,457 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 35 हजार से अधिक हो गई। इस मामले में वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े अभी तक जारी नहीं हुए हैं।

दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलाजिस्ट डॉ. मोहित दयाल गुप्ता के नेतृत्व में 2023 से 2025 के बीच एकत्रित मरीजों के डाटा पर आधारित हुआ क्लिनिकल विश्लेषण भारत में हार्ट डिजीज के बदलते पैटर्न को दर्शाता है।

हार्ट अटैक का शिकार होने वाले 20–30 वर्ष के युवाओं की संख्या पांच से 10 प्रतिशत के बीच है। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है, साथ ही इस उम्र में भी अचानक और बिना चेतावनी के हार्ट अटैक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

30 से 40 वर्ष की उम्र में यह खतरा और बढ़ जाता है, जहां तनाव, अनियमित दिनचर्या, मोटापा और शुरुआती डायबिटीज प्रमुख कारण बनते हैं। जबकि 40 से 50 वर्ष की आयु में इस तरह के लगभग 25 प्रतिशत मामले सामने आए। 50 से 60 वर्ष का वर्ग अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित (30 से 35 प्रतिशत) बना हुआ है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु दर सबसे अधिक देखी जाती है।

दिल्ली की स्थिति भी चिंताजनक है। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) व अन्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में दिल और रक्त संचार संबंधी बीमारियों से 34 हजार से अधिक मौतें दर्ज की गईं जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज बढ़ोतरी दर्शाती हैं। पिछले दो दशकों में दिल्ली में तीन लाख से ज्यादा लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण जान गंवा चुके हैं।

विशेषज्ञ इसके पीछे प्रदूषण, तनावपूर्ण जीवनशैली, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को प्रमुख कारण मानते हैं। यह भी सामने आया कि पश्चिमी देशों के आधार पर तैयार किए गए रिस्क कैलकुलेटर भारत के लिए पूरी तरह से कारगर नहीं हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अलग हार्ट रिस्क आंकलन माडल विकसित करने की जरूरत है। साथ ही लोगों को ‘नार्मल रिपोर्ट’ के भरोसे न रहकर नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

NATIONAL : आज श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत को हरी झंडी दिखाएंगे रेल मंत्री वैष्णव, 2 मई से शुरू होंगी नियमित सेवाएं

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यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक चलती थी, अब जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे देश की सबसे आधुनिक ट्रेन सीधे जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े शहर और रेलवे केंद्र तक पहुंचेगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव आज जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित श्रीनगर-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन, जो पहले श्रीनगर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक चलती थी, अब जम्मू तवी तक चलेगी, जिससे देश की सबसे आधुनिक ट्रेन सीधे जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े शहर और रेलवे केंद्र तक पहुंचेगी।

हरी झंडी दिखाने के बाद, केंद्रीय मंत्री उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) की दो सबसे उल्लेखनीय इंजीनियरिंग संरचनाओं, अंजी ब्रिज और चेनाब ब्रिज का निरीक्षण करेंगे। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी, तब इसमें 8 कोच थे। तब से, यह ट्रेन लगातार पूरी क्षमता से चल रही है और यात्रियों की ओर से इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

ट्रेन में 20 कोच जोड़ने का निर्णय मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे ट्रेन की बैठने की क्षमता दोगुनी से भी अधिक हो गई है और आरक्षण व प्रतीक्षा सूची पर दबाव काफी कम हो गया है, खासकर तीर्थयात्रा और पर्यटन के व्यस्त मौसम में।

उन तीर्थयात्रियों के लिए, जिनकी सीटें कई दिन पहले ही बिक जाती थीं, घाटी की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों के लिए और स्थानीय लोगों के लिए, जो रोजमर्रा की यात्रा के लिए इस सेवा पर निर्भर हैं, विस्तारित कोचों के कारण अब ट्रेन द्वारा उन्हें वापस भेजे जाने की संभावना बहुत कम हो गई है।

जम्मू-तवी तक विस्तार के साथ ही, 20 कोचों वाली वंदे भारत एक्सप्रेस अपने सबसे बड़े यात्री शहर तक पूरी क्षमता के साथ पहुंच गई है। यह ट्रेन अंततः उस मांग के अनुरूप बनाई गई है, जिसे इसने हमेशा से प्रेरित किया है।

हरी झंडी दिखाने के साथ ही पहली यात्रा शुरू होगी, लेकिन विस्तारित जम्मू-तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस 2 मई 2026 से नियमित सेवा में आ जाएगी। लगभग 266 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले इस कॉरिडोर पर दो जोड़ी सेवाएं संचालित होंगी।

BHAKTI : 60 साल बाद इस ‘दिव्य योग’ में होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, आज से रजिस्ट्रेशन शुरू

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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो रहे हैं. इस बार की यात्रा 60 साल बाद आ रहे दिव्य ‘अग्नि अश्व वर्ष’ महासंयोग में हो रही है, जिसे हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष का द्वार माना जाता है. जून के पहले सप्ताह से यात्री रवाना होंगे.

अगर आप कैलाश मानसरोवर यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल, इस यात्रा के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू हो रहा है. दिलचस्प बात ये है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार एक दिव्य योग में होने जा रही है, जिसमें भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के श्रद्धालु शामिल होंगे. यात्रा जून के पहले सप्ताह से शुरू होगी और पहले जत्थे को रवाना किया जाएगा.

बताया जा रहा है कि इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर 60 साल बाद तिब्बती और हिमालयी ज्योतिष का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है. इस योग का नाम है अग्नि अश्व वर्ष, जोकि हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष का द्वार कहा जाता है. तिब्बती ज्योतिष में 60 सालों का चक्र होता है. इस साल अग्नि तत्व और अश्व का दुर्लभ संगम बना है. यही वजह है कि 2026 में होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा में तीनों धर्मों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे.

कैलाश मानसरोवर यात्रा करवाने के लिए सरकार तेजी से तैयारियां करने में जुटी हुई है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड के रास्ते आयोजित की जाएगी और इसमें 500 श्रद्धालुओं को शामिल करने का प्लान बनाया गया है.

इस यात्रा को विदेश मंत्रालय हर साल जून से अगस्त-सितंबर के बीच दो अलग-अलग रास्तों से आयोजित करता है. एक रास्ता लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और दूसरा नाथू ला दर्रा (सिक्किम) है. ये यात्रा अपने धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक अहमियत के लिए जानी जाती है. हर साल सैकड़ों लोग यह यात्रा करते हैं. हिंदुओं के लिए भगवान शिव का निवास स्थान होने के नाते इसका धार्मिक महत्व जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा के रूट
लिपुलेख दर्रा मुख्य मार्ग है. इस रास्ते से यात्रा दिल्ली से शुरू होती है और टनकपुर, पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी और लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरती है. भारत-चीन सीमा तक यह रास्ता पूरी तरह से गाड़ियों के चलने लायक है और इसमें कैलाश पर्वत की पवित्र बाहरी परिक्रमा और भीतरी परिक्रमा शामिल है. श्रद्धालु मानसरोवर झील पर रुककर हवन और पूजा करते हैं.

नाथू ला दर्रा रूट सिक्किम के रास्ते से है,. यह यात्रा भी दिल्ली से ही शुरू होती है और नाथू ला पार करने से पहले गंगटोक तक जाती है. भू-राजनीतिक पाबंदियों के कारण इस रास्ते का इस्तेमाल कम किया जाता है. लिपुलेख दर्रा रूट की तरह ही, इस रास्ते में भी बहुत कम ट्रेकिंग करनी पड़ती है और यात्रा ज्यादा आरामदायक होती है.

कैलाश मानसरोवर के पात्रता, डॉक्यूमेंट्स
तीर्थयात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को MEA पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करना होगा. इसके लिए वैध भारतीय पासपोर्ट या OCI कार्ड, अपडेटेड मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और सरकार की ओर से जारी पहचान पत्र होना जरूरी होता है. चुने गए तीर्थयात्रियों को विदेश मंत्रालय की ओर से पूरी यात्रा योजना और दिशानिर्देश प्राप्त होते हैं. साथ ही प्रस्थान से पहले ओरिएंटेशन सत्र भी आयोजित किए जाते हैं.

कैलाश मानसरोवर के लिए पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए शरीर को अनुकूल बनाना क्यों जरूरी है?

यात्रा से पहले ज्यादा ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन के स्तर के साथ तालमेल बिठाने के लिए शरीर को अनुकूल बनाना जरूरी है. एक्यूट माउंटेंस सिकनेस, हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (HAPE) और हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा (HACE) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम करता है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा में आमतौर पर कितना समय लगता है?

इस यात्रा में आमतौर पर 1520 दिन लगते हैं, जो रास्ते और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है.

इस यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

ज्यादा ऊंचाई, कम ऑक्सीजन का स्तर और ऊबड़-खाबड़ इलाका. इन सभी चीजों के मेल की वजह से यह यात्रा शारीरिक रूप से बहुत थकाने वाली हो जाती है, यहां तक कि सेहतमंद यात्रियों के लिए भी.

BUSINESS : महंगे ईंधन ने रोकी उड़ानों की रफ्तार, मार्च में 1.46 करोड़ यात्री उड़े; जानें क्यों घटी ग्रोथ?

एयरलाइंस सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2025-26 अच्छा साबित नहीं हुआ है। इस दौरान एयर इंडिया से जुड़ी घटनाओं, इंडिगो एयरलाइन की संचालन संबंधी दिक्कतें और विमान हादसों ने पूरे सेक्टर पर असर डाला है। वहीं, महंगे हवाई ईंधन ने भी इंडस्ट्री की रफ्तार को धीमा कर दिया। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी सीमित ही रह गई।

पूरे वित्त वर्ष में हवाई यात्रियों की संख्या में केवल 1.4 फीसदी की हल्की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष के आखिरी महीने मार्च में यह बढ़ोतरी सिर्फ 1 फीसदी तक ही सीमित रही। हालांकि, इस अवधि में विमानन क्षेत्र की कुल क्षमता में कुछ कमी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद यात्रा की मांग में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी बहुत सीमित रही है। मार्च 2026 में घरेलू यात्री ट्रैफिक में सालाना आधार पर केवल 1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे वित्त वर्ष 2026 में भी ग्रोथ सिर्फ 1.4 फीसदी तक ही सीमित रही। इसी के साथ यह वित्त वर्ष हल्की बढ़त के साथ समाप्त हुआ है। जबकि मार्च 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस महीने कुल 14.68 मिलियन यानी करीब 1.46 करोड़ घरेलू यात्रियों ने हवाई यात्रा की है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि, मार्च 2026 में एयरलाइंस ने अपनी क्षमता को मार्च 2025 के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत कम रखा। हालांकि, फरवरी 2026 की तुलना में मार्च में क्षमता में 10.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। इसके बावजूद, पैसेंजर लोड फैक्टर में अच्छा सुधार देखने को मिला। मार्च 2026 में यह बढ़कर 89.5 फीसदी तक पहुंच गया, जो मार्च 2025 के 86 प्रतिशत के स्तर से काफी बेहतर है।

अप्रैल 2026 में घोषित एविएशन टर्बाइन फ्यूल की औसत कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह कीमतें पिछले महीने के मुकाबले 9.2 फीसदी और सालाना आधार पर 18.2 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे भी बनी रह सकती हैं। जिससे एटीएफ की दरों पर और दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना भी एविएशन सेक्टर के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इन परिस्थितियों के कारण आने वाले समय में हवाई यात्रियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
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ENTERTAINMENT : खालिस्तानियों के निशाने पर दिलजीत दोसांझ, वैंकूवर कॉन्सर्ट में हंगामा, सिंगर के खिलाफ लगे नारे

दिलजीत दोसांझ ने कुछ दिन पहले कनाडा के वैंकूवर में अपना शानदार कॉन्सर्ट किया था. अब ताजा जानकारी के मुताबिक, उस शो में कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा मचाया था. उन्होंने दिलजीत को अपना अगला टारगेट बनाया.

दिलजीत दोसांझ अब ग्लोबल स्टार बन चुके हैं. इंडिया में कॉन्सर्ट के बाद, वो अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपों में शोज करते हैं. वहां भी दिलजीत का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता है. 23 अप्रैल को दिलजीत ने कनाडा के वैंकूवर में अपने औरा टूर की शुरुआत की थी. वहां करीब 50,000 से ज्यादा इंडियन्स आए थे. ये पल सिंगर के लिए बेहद खास था, जिसका जिक्र उन्होंने बीते दिनों जिम्मी फॉलन के लेट नाइट शो पर भी किया था. मगर इस कॉन्सर्ट में एक और बवाल खड़ा हुआ, जिसकी जानकारी अब सामने आ रही है.

दिलजीत के वैंकूवर कॉन्सर्ट में कुछ खालिस्तानी समर्थक घुस गए थे, जो वहां सिंगर के खिलाफ नारे लगा रहे थे. जानकारी के मुताबिक, मामला काफी गंभीर हो गया था. मगर सिक्योरिटी ने कुछ ही देर में उन्हें शो से बाहर किया और माहौल को शांत किया. कहा जा रहा है कि दिलजीत खालिस्तानियों का अगला निशाना हैं.

दरअसल, शो के दौरान अचानक कुछ लोग खालिस्तान के झंडे लेकर अंदर घुस आए और नारेबाजी शुरू कर दी. इन लोगों ने भारत के खिलाफ भी नारे लगाए और दिलजीत पर बीजेपी और आरएसएस का एजेंट होने के आरोप लगाए. मौके पर मौजूद सिक्योरिटी टीम ने जब हालात संभालने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारी उनसे भिड़ गए. कुछ देर के लिए कॉन्सर्ट का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया, हालांकि बाद में स्थिति को काबू में कर लिया गया.

सूत्रों के मुताबिक हंगामा करने वालों में पवनदीप सिंह बस्सी और मनदीप सिंह रवि नाम के दो लोग शामिल बताए जा रहे हैं. इन पर आरोप है कि ये सिख्स फोर जस्टिस (SFJ) से जुड़े हुए हैं, जो भारत में बैन संगठन है और इसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने आगे भी दिलजीत दोसांझ के शो में विरोध करने की चेतावनी दी है.

हालांकि दिलजीत ने अभी तक खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई किसी भी नारेबाजी पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. सिंगर पिछले कुछ वक्त से ही गुरपतवंत सिंह पन्नू के निशाने पर नजर आए हैं. उन्होंने दिलजीत को कई बार धमकी दी, मगर सिंगर ने उसका असर अपने ऊपर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने हमेशा प्यार फैलाने की बात कही.

NATIONAL : बाली के होटल में हार्ट अटैक से Air India के पायलट की मौत, दिल्ली से विमान उड़ाकर पहुंचे थे इंडोनेशिया

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एअर इंडिया के 40 वर्षीय फर्स्ट ऑफिसर की इंडोनेशिया के बाली में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वे दिल्ली से उड़ान भरकर बाली पहुंचे थे और होटल में आराम ….

एअर इंडिया के एक पायलट की इंडोनेशिया के बाली में बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वह 40 वर्ष के थे और फ‌र्स्ट आफिसर थे। एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली से उड़ान भरकर बाली पहुंचे फ‌र्स्ट ऑफिसर होटल में आराम कर रहे थे तभी उन्हें बेचैनी महसूस हुई।

उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां पता चला कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। तमाम कोशिशों के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। एअर इंडिया ने उनकी मौत पर दुख जताया है और कहा कि एयरलाइन परिवार के साथ लगातार संपर्क में है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

एयरलाइन अधिकारी ने कहा कि पायलट की कुछ महीने सभी अनिवार्य चिकित्सा जांच हुई थी। पायलट को पहले से कोई ज्ञात मेडिकल समस्या नहीं थी। एयरलाइन ने यह भी कहा कि पायलट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा निर्धारित उड़ान समय सीमा के भीतर ही काम किया था यानी उन पर काम का अतिरिक्त दबाव नहीं था।

NATIONAL : पुडुचेरी में फिर खिल सकता है कमल, एग्जिट पोल्स में NDA को 18+ सीटें, बहुमत के जादुई आंकड़े के पार

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पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के ‘पोल ऑफ पोल्स’ में NDA को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है.

पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव को लेकर सामने आए अलग-अलग एग्जिट पोल अब एक साझा रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं. ‘पोल ऑफ पोल्स’ के समेकित विश्लेषण में NDA स्पष्ट बढ़त के साथ उभरता दिख रहा है. 30 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 16 है और ज्यादातर सर्वे NDA को इस आंकड़े के पार ले जाते नजर आ रहे हैं.

तीन प्रमुख एजेंसियों Axis My India, Peoples Pulse और Praja Poll के आंकड़ों पर नजर डालें तो NDA की स्थिति मजबूत दिखती है. Axis My India के अनुसार NDA को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं, जिससे वह बहुमत के करीब या उससे ऊपर पहुंचता है. Peoples Pulse भी NDA को 16 से 20 सीटों के दायरे में दिखाता है, जबकि Praja Poll सबसे ज्यादा अनुमान देते हुए NDA को 19 से 25 सीटों तक पहुंचा रहा है. इन तीनों सर्वे का औसत यही संकेत देता है कि NDA पुडुचेरी में सरकार बनाने की स्थिति में है.

दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन इन अनुमानों में पीछे नजर आ रहा है. Axis My India उसे 6 से 8 सीटें देता है, जबकि Peoples Pulse के अनुसार उसे 10 से 12 सीटें मिल सकती हैं, जो उसके लिए थोड़ा बेहतर संकेत है. Praja Poll का अनुमान 6 से 10 सीटों के बीच है. कुल मिलाकर कांग्रेस गठबंधन के लिए तस्वीर चुनौतीपूर्ण दिखती है, हालांकि कुछ सर्वे उसे दोहरे अंक तक पहुंचने की संभावना भी दिखा रहे हैं.

इस चुनाव में एक दिलचस्प पहलू TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) की मौजूदगी भी है. Axis My India के अनुसार उसे 2 से 4 सीटें मिल सकती हैं, लेकिन Peoples Pulse और Praja Poll दोनों ही उसे कोई सीट नहीं देते. इससे संकेत मिलता है कि TVK का असर सीमित रह सकता है और वह कुछ चुनिंदा सीटों तक ही सिमटा रह सकता है.

अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 0 से 3 सीटें जाने का अनुमान है. संख्या भले कम हो, लेकिन करीबी मुकाबले में यही सीटें सरकार बनाने के समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं.

अलग-अलग सर्वे में सीटों के आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन रुझान एक ही दिशा में है- NDA बहुमत के करीब या उससे आगे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि और कम सीटों का गणित नतीजों को तेजी से बदल सकता है. ऐसे में 2-3 सीटों का फर्क भी सत्ता का संतुलन बदल सकता है.

अगर ‘पोल ऑफ एग्जिट पोल्स’ की बात करें तो पुडुचेरी में NDA को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है. अनुमान के मुताबिक NDA करीब 18 सीटों के साथ बहुमत में है, जबकि कांग्रेस करीब 9 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. TVK को 2 और अन्य के खाते में 1 सीट जाने का अनुमान है, जिससे NDA की सरकार बनती दिख रही है.

NATIONAL : असम में लगातार तीसरी बार कांग्रेस की हार, BJP को बहुमत के आसार; हिमंत सरमा सबसे पॉपुलर

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Assam Exit Poll: असम विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी के लिए खुशखबरी लेकर आए हैं। वोट वाइब के एग्जिट पोल के अनुसार, राज्य में भाजपा अपने दम पर बहुमत की सरकार बना सकती है। वहीं, वोट शेयर के मामले में बीजेपी को टक्कर दे रही कांग्रेस इस मामले में काफी पीछे नजर आ रही है। वहीं, मुख्यमंत्री पद के लिए हिमंत बिस्वा सरमा पॉपुलर बने हुए हैं। असम में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं। अंतिम नतीजे चुनाव आयोग की तरफ से 4 मई को जारी किए जाएंगे।

किसे कितनी सीटें मिलने का अनुमान
बीजेपी की अगुवाई वाला गठबंधन 90 से 100 सीटें अपने नाम कर सकता है। इसमें अकेले भाजपा ही 72 से 78 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है। जबकि, कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 23 से 33 सीटें मिलने का अनुमान है। एग्जिट पोल के अनुसार, कांग्रेस के 22 से 30 सीटें मिल सकती हैं। जबकि, AIUDF को 0 से 6 सीटें मिलने सकती हैं।

हिमंत बिस्वा सरमा बनाम गौरव गोगोई
वोट वाइब के सर्वे में शामिल 51.2 प्रतिशत लोगों ने हिमंत बिस्वा सरमा को सीएम चेहरा चुना है। जबकि, इस रेस में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई 37.2 फीसदी लोगों की पसंद हैं। जबकि, AIUDF के बदरुद्दीन अजमल को 1.9 फीसदी, राजौर दल के अखिल गोगोई को 1.8 प्रतिशत प्रतिभागियों का समर्थन मिला।

वोट शेयर में कांग्रेस ने दी बड़ी टक्कर
असम विधानसभा चुनाव के इस एग्जिट पोल में कांग्रेस भले ही सीटों के मामले में पीछे चल रही हो, लेकिन वोट शेयर के मामले में कड़ी टक्कर दी है। वोट वाइब के अनुसार, कांग्रेस का वोट शेयर 41.2 फीसदी रहा है। जबकि, भाजपा का वोट शेयर 46.1 फीसदी रहा। AIUDF के मामले में आंकड़ा 2.8 प्रतिशत और अन्य में 9.8 प्रतिशत रहा।

सबसे बड़े मुद्दे
वोट वाइब के अनुसार, 2026 असम विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी रहा। वहीं, दूसरे नंबर पर घुसपैठ, तीसरे पर भ्रष्टाचार, चौथे पर महंगाई और पांचवें पर विकास की कमी रहा। राज्य में भाजपा के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ने जबरदस्त समर्थन दिया है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम मतदाताओं का रुझान कांग्रेस की तरफ रहा।

असम में कितनी हुई थी वोटिंग
9 अप्रैल को हुए एक चरण के मतदान में असम में 85.38 प्रतिशत मतदान हुआ था। राज्य में पुरुषों की भागीदारी 84.80 प्रतिशत रही, वहीं महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 85.96 प्रतिशत दर्ज किया गया। राज्य में हुई भारी वोटिंग के बाद एक ओर जहां कांग्रेस ने इसे बदलाव के संकेत करार दिया था। वहीं, सरमा ने कहा था कि भारी मतदान ऐतिहासिक है। इससे पहले 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में राज्य में भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2 मई 2021 के घोषित हुए नतीजों में भाजपा ने 60 सीटें अपने नाम की थीं। वहीं, कांग्रेस के खाते में 29 सीटें आईं थीं। भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को कुल 76 सीटें मिली थीं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले अलायंस ने 49 सीटें मिली थीं। राज्य में बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत थी।

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