Thursday, August 13, 2026
Home Blog

NATIONAL : जंतर-मंतर का सीजन-2 आने वाला है, CJP फाउंडर अभिजीत दीपके का एलान

0

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर के सीजन-2 को लेकर बड़ा एलान किया है। उन्होंने लोगों को बताया है कि जंतर-मंतर का सीजन-2 जल्दी ही आएगा।अभिजीत दीपके ने कहा, ‘बहुत से लोग इंस्टाग्राम पर कमेंट कर रहे थे कि जंतर-मंतर का सीजन 2 कब शुरू होगा। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि जंतर-मंतर का सीजन 2 बहुत जल्द शुरू होने वाला है।’

वॉलंटियर्स मीट के लिए नहीं मिल रहा हॉल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वे लोग उन्हें वॉलंटियर्स मीट के लिए हॉल नहीं मिलने दे रहे।

दीपके ने आज बुधवार को कहा कि आज दिल्ली में हमारी वॉलंटियर्स मीट होनी थी, दूर-दूर से हमारी पार्टी से जुड़े लोग आए थे, लेकिन हमारी मीटिंग नहीं होने दी जा रही।अभिजीत दीपके ने कहा, ‘आज दिल्ली में हमारे वॉलंटियर्स की मीटिंग होनी थी। हम हॉल ढूंढ रहे थे, लेकिन कोई भी हमें हॉल किराए पर देने को तैयार नहीं था। हर कोई यही कह रहा था कि ऊपर से दबाव है।’

दीपके ने आगे बताया, ‘बड़ी मुश्किल से हमें यह हॉल मिला था। हमारे पास इसकी रसीद भी है। लेकिन आज सुबह ही हॉल के मालिकों को धमकियां मिलीं। उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने CJP की मीटिंग यहां होने दी, तो उन्हें उल्टा लटका दिया जाएगा।’सीजेपी फाउंडर ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘यह सब BJP कर रही है। उनकी हरकतों और बातों से साफ पता चलता है कि वे देश के युवाओं से डरे हुए हैं।अगर उन्हें लगता है कि ऐसी छोटी-मोटी हरकतों से हम डर जाएंगे, तो वे बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं।’

NATIONAL : वायुसेना की बढ़ेगी ताकत: 60 ट्रांसपोर्ट विमानों के लिए ₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी; किन कंपनियों के बीच टक्कर?

0

भारतीय वायुसेना के पुराने कार्गो विमानों के बेड़े को बदलने के लिए रक्षा मंत्रालय ने करीब ₹1 लाख करोड़ का बड़ा टेंडर जारी किया है। इसके तहत 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे और भारतीय कंपनियां प्रमुख भूमिका में होंगी। कितने विमान भारत में बनेंगे? किन कंपनियों के विमान मुकाबले में हैं?

भारतीय वायुसेना के पुराने हो रहे कार्गो विमानों के बेड़े को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों को प्रमुख भूमिका दी गई है। HAL, टाटा और महिंद्रा इस दौड़ में शामिल हैं।

किन भारतीय कंपनियों के साथ कौन-सी विदेशी कंपनियां मैदान में हैं?
महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्राएर के साथ साझेदारी की है और उसके C-390 ट्रांसपोर्ट विमान की पेशकश की जाएगी। वहीं, टाटा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है और C-130 विमान की पेशकश करेगा। C-130 पहले से ही भारतीय वायुसेना में विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

कितने विमान भारत में बनाए जाएंगे?
इस कार्यक्रम के तहत करीब 20 प्रतिशत विमान सीधे तैयार स्थिति में भारतीय वायुसेना को मिलेंगे। बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है। विमानों का निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विमान निर्माता कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा। इस परियोजना में HAL की भी भूमिका रहेगी

वायुसेना के पास अभी कितने C-130J विमान हैं?
भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल 12 C-130J Super Hercules विमान हैं। इसके अलावा, वायुसेना Airbus के साथ C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। करीब 70 C-295 विमान वायुसेना में शामिल किए जाने हैं, जिनमें अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा।

क्या वायुसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा है यह योजना?
मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। वायुसेना ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भी टेंडर जारी किया है। इसके अलावा, पुराने हॉक ट्रेनर विमानों को बदलने और पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से अधिक ट्रेनर विमानों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।

क्या इन विमानों से हवा में ईंधन भरने का काम भी लिया जाएगा?
मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल केवल सैनिकों और उपकरणों की तेज आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय वायुसेना इन विमानों का इस्तेमाल हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर के रूप में भी कर सकती है। इसके अलावा, इनसे उपकरणों और सैनिकों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

NATIONAL : 13 आरोपियों पर राउज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा, आज से आरोपों पर दलील संभव

0

एजेंसी ने कहा कि चार्जशीट के हिस्से लगातार अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जो बातें अभी तक अदालत में नहीं कही गईं और चार्जशीट का हिस्सा हैं, उनका मीडिया में सार्वजनिक होना बेहद चौंकाने वाला है।

राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। अदालत में बृहस्पतिवार (13 अगस्त) से आरोपों पर दलीलें शुरू होने की संभावना है। यह मामला सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है।

कार्यवाही के दौरान सीबीआई ने बताया कि मीडिया में प्रकाशित हो रहे गवाहों के नामों में कुछ नाबालिग भी हो सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि चार्जशीट के हिस्से लगातार अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जो बातें अभी तक अदालत में नहीं कही गईं और चार्जशीट का हिस्सा हैं, उनका मीडिया में सार्वजनिक होना बेहद चौंकाने वाला है। कोर्ट ने जिम्मेदार मीडिया से ऐसी सामग्री प्रकाशित करने से बचने को कहा। सीबीआई के अनुसार, एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ-रसायन विज्ञान के पीवी कुलकर्णी, भौतिकी की मनीषा संजय हवालदार तथा वनस्पति एवं प्राणि विज्ञान की मनीषा गुरुनाथ मांढरे पेपर लीक के प्रमुख स्रोत थे।

राजस्थान से शुरू हुई कार्रवाई, मई में 13 आरोपियों तक पहुंची जांच
सीबीआई ने 13 मई को राजस्थान में मंगीलाल, दिनेश और विकास बिवल को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल से 29 अप्रैल को टेलीग्राम के जरिए लीक पीडीएफ मिलने की बात सामने आई। इसी दिन गुरुग्राम के यश यादव, नासिक के शुभम खैरनार और पुणे के धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया गया। लोखंडे पर सबूत मिटाने के लिए मोबाइल नष्ट करने की कोशिश का आरोप है।
विज्ञापन

14 मई को पुणे से मनीषा संजय वाघमारे पकड़ी गईं। चार्जशीट के मुताबिक वह मौद्रिक लाभ के लिए पेपर लीक और उसके प्रसार की साजिश में प्रमुख भूमिका निभा रही थीं। वह उम्मीदवारों और विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी थीं। उनकी पूछताछ के बाद 15 मई को लातूर से कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी, 16 मई को पुणे से मनीषा मांढरे और 17 मई को लातूर के कोचिंग सेंटर संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर गिरफ्तार हुए। 22 मई को मनीषा संजय हवालदार तथा 26 मई को तेजस शाह और डॉ. मनोज शिरुरे की गिरफ्तारी हुई।

डिलीट चैट और लीक प्रश्नपत्र वाले पीडीएफ से साजिश के सबूत मिले
सीबीआई के मुताबिक मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग में डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और लीक प्रश्नों वाले पीडीएफ बरामद हुए। एजेंसी ने जब्त डिजिटल व संचार उपकरणों तथा दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया।

NATIONAL : कैश कांड में पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ पाई

0

जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में लोकसभा की तीन सदस्यीय जांच समिति ने तीनों आरोप साबित माने हैं। समिति के अनुसार, सरकारी आवास में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिली, सबूतों से छेड़छाड़ हुई।

नई दिल्ली: घर में नकदी मिलने के मामले में लोकसभा की जांच समिति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने उनके सरकारी आवास से बरामद बेहिसाब नकदी को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण को टालमटोल वाला और असंतोषजनक बताया है।

तीन सदस्यीय न्यायाधीश जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी। समिति ने कहा कि वर्मा के सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिलने, महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ और जांच के दौरान टालमटोल व भ्रामक स्पष्टीकरण देने के आरोप साबित हुए हैं।

क्या है मामला?
यह मामला 14-15 मार्च 2025 की दरम्यानी रात नई दिल्ली स्थित पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में लगी आग के बाद सामने आया था। उस समय वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे। आग बुझाने के बाद स्टोर रूम में जले और अधजले 500 रुपये के नोटों के बंडल और ढेर मिलने की बात सामने आई थी। बाद में नकदी जलने का एक वीडियो भी सामने आया था। वर्मा ने आरोपों से इनकार करते हुए इसे उन्हें फंसाने की साजिश बताया था।

तत्कालीन भारत के सीजेआई के आदेश पर हुई आंतरिक जांच में वर्मा के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने की थी। समिति के गठन के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले ही यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। अब यह स्पष्ट नहीं है कि संसद समिति की रिपोर्ट और निष्कर्षों पर आगे की कार्रवाई करेगी या नहीं। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम का इस्तेमाल केवल पद पर कार्यरत न्यायाधीश के खिलाफ ही किया जा सकता है।

सबूत नहीं रखे गए सुरक्षित
जांच में समिति ने यह दर्ज किया कि बरामद नकदी को न तो जब्त किया गया और न ही उसकी गिनती की गई। मौके पर कोई इन्वेंट्री या पंचनामा तैयार नहीं हुआ और नकदी के नमूने भी सुरक्षित नहीं रखे गए। इसके बावजूद समिति ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य नकदी की मात्रा को बहुत बड़ी और पर्याप्त साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

समिति ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा के स्पष्टीकरण समय के साथ बदलते रहे। शुरुआती जवाब में उन्होंने नकदी की जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि उनके परिवार या कर्मचारियों ने ऐसी नकदी नहीं देखी या हटाई।

बाद में उनके बचाव में नकदी की जब्ती और गिनती नहीं होने, नकली नोट होने की संभावना, नकदी प्लांट किए जाने, साजिश, कर्मचारियों की भूमिका और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले लोगों द्वारा नकदी हटाए जाने जैसी दलीलें सामने आईं। हालांकि, समिति ने कहा कि नकदी प्लांट किए जाने, चोरी, छेड़छाड़ या किसी साजिश को लेकर कोई शिकायत या एफआईआर सामने नहीं लाई गई।

जांच में खुद गवाही देने नहीं आए वर्मा
समिति के मुताबिक, अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पूरे होने और बचाव पक्ष की गवाही का चरण शुरू होने के बाद न्यायमूर्ति वर्मा कार्यवाही से हट गए। उन्होंने खुद गवाही नहीं दी और न ही अपने परिवार, निजी कार्यालय, घरेलू कर्मचारियों या सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी व्यक्ति को गवाह बनाया।

NATIONAL : साढ़े तीन साल में 13580 दलाल, 65 रेलकर्मी गिरफ्तार किए गए; रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी

0

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक 65 रेल कर्मचारियों और 13580 दलालों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने तत्काल टिकट की अवैध बिक्री में रेलवे कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत के आरोपों पर भी जानकारी दी। उन्होंने लिफ्ट, एस्केलेटर और Lok
नई दिल्ली: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद को बताया कि जून 2026 तक साढ़े तीन साल की अवधि में 65 रेल कर्मचारियों और 13,580 दलालों को गिरफ्तार किया गया। वैष्णव ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में तत्काल टिकट की कथित अनधिकृत बिक्री के संबंध में यह जानकारी दी।

निर्दलीय सांसद उमेशभाई बाबूभाई पटेल ने तत्काल टिकट की बिक्री में रेलवे कर्मचारियों और दलालों के बीच कथित मिलीभगत का मुद्दा उठाते हुए पूछा था कि क्या सरकार ने पिछले तीन वर्ष में रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है क्योंकि पश्चिम रेलवे जोन में तत्काल टिकट बेचने वाले दलालों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं।

रेल मंत्री ने कहा कि रेल अधिनियम, 1989 की धारा 143 के तहत दोषियों (जिनमें रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। पिछले 3 वर्षों, यानी 2023 से 2025 और जून 2026 तक, भारतीय रेल के 65 कर्मियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से नौ को कानून के संबंधित प्रावधान के तहत पश्चिम रेलवे जोन में गिरफ्तार किया गया।

13580 दलालों को गिरफ्तार किया गया
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, 13,580 दलालों को गिरफ्तार किया गया और रेल अधिनियम, 1989 की धारा 143 के तहत दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। वैष्णव ने टिकट आरक्षण प्रणाली के दुरूपयोग को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा नियमित जांच और अभियानों समेत कई उपायों का भी जिक्र किया।

191 एस्केलेटर और 240 लिफ्ट लगाई गईं
बाबूभाई ने पश्चिम रेलवे जोन के रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर और फुट ओवरब्रिज के बंद पड़े होने के संबंध में भी सवाल पूछे थे। रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम रेलवे में 46 स्टेशनों पर 191 एस्केलेटर और 86 रेलवे स्टेशनों पर 240 लिफ्ट लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम रेलवे के किसी भी स्टेशन पर कोई लिफ्ट, एस्केलेटर या ‘फुट ओवर ब्रिज’ (एफओबी) स्थायी रूप से बंद नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर रखरखाव, मरम्मत या संचालन से जुड़े अन्य कारणों से लिफ्ट, एस्केलेटर और एफओबी कुछ समय के लिए बंद रहते हैं, तो भी स्टेशन पर यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म के बीच आने-जाने के अन्य रास्ते खुले रहते हैं।

वैष्णव ने एक और प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि रेलवे स्टेशनों पर मुफ़्त एसी (वातानुकूलित) और गैर-एसी प्रतीक्षा कक्ष के अलावा, भारतीय रेल ने आधुनिक ‘एयर-कंडीशंड वेटिंग हॉल’ भी बनाए हैं, जिनके लिए यात्रियों को बहुत कम शुल्क अदा करना पड़ता है।

NATIONAL : केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला बिल लोकसभा में पास, विपक्ष के हंगामे के बीच हुआ पारित

0

लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला केरल (Alteration of Name) Bill, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। इससे पहले केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था।केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला केरल (Alteration of Name) Bill, 2026 मंगलवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया। बिल के पारित होने के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे।

‘केरल’ से ‘केरलम’ होगा राज्य का नाम
इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। विपक्षी सांसद 20 जुलाई को NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी और बयान की मांग कर रहे थे।

विपक्ष की नारेबाजी के बीच बिल पेश
विधेयक पेश किए जाने के दौरान सदन में लगातार हंगामा जारी रहा। कृष्ण प्रसाद टेन्नेटी, जो उस समय पीठासीन थे उन्होंने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि, विपक्ष की नारेबाजी जारी रही।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने वाले विधेयक पर चर्चा नहीं होने को लेकर विपक्ष की आलोचना की। रिजिजू ने कहा कि यह दुखद है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल भी इस विधेयक पर बोलने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

बिना चर्चा ध्वनिमत से पास हुआ बिल
जब सदन में हंगामा नहीं रुका तो केरल का नाम बदलने वाला विधेयक बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

फरवरी में केंद्रीय कैबिनेट ने दी थी मंजूरी
इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।

2024 में केरल विधानसभा ने पास किया था प्रस्ताव
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम ‘केरलम’ है। इसमें यह भी कहा गया कि राज्यों का गठन 1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर किया गया था और 1 नवंबर को केरल पिरवी दिवस भी मनाया जाता है।

प्रस्ताव में कहा गया था कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम बोलने वाले लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की मजबूत मांग रही है। हालांकि, संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। केरल विधानसभा ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम ‘केरलम’ करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की थी।

केंद्र से संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव की मांग
इसके बाद केरल सरकार ने केंद्र सरकार से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। अब लोकसभा में केरल (Alteration of Name) Bill, 2026 के पारित होने के साथ राज्य के नाम में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

NATIONAL : शोरगुल में सिमटा मॉनसून सत्र! आखिरी दिन भी संसद में गतिरोध बरकरार रहने के आसार

0

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष किसी समझौते पर पहुंचेंगे या फिर गतिरोध आखिरी दिन भी जारी रहेगा. लोकतंत्र में विरोध और असहमति जरूरी है.

20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होना है, यानी कल सत्र का आखिरी दिन है. लेकिन पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव ने सदन की कार्यवाही को बुरी तरह प्रभावित किया है. एक तरफ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सदन में जवाब मांग रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार का आरोप है कि विपक्ष चर्चा चाहता ही नहीं, बल्कि सदन को लगातार बाधित कर रहा है.

नतीजा यह है कि जिस संसद में जनता के मुद्दों पर बहस और समाधान होना चाहिए था, वहां लगातार नारेबाजी, हंगामा और स्थगन देखने को मिला. दरअसल, विवाद की शुरुआत 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए छात्रों के मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर हुई. विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया और कुछ छात्रों को गंभीर चोटें आईं. इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी लगातार गृह मंत्री अमित शाह से संसद के भीतर जवाब देने की मांग कर रहे हैं.

विपक्ष का कहना है कि गृह मंत्री को सदन में आकर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की गई. राहुल गांधी ने इस मामले में एक घायल प्रदर्शनकारी छात्र को मीडिया के सामने भी पेश किया था. 19 वर्षीय साहिल लोचब के शरीर पर छर्रों के निशान होने का दावा किया गया. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और छात्र की दाईं आंख में छर्रा लगने से उसकी आंख को नुकसान पहुंचा.

हंगामे की भेंट चढ़ा सत्र

राहुल गांधी ने अपने आवास पर साहिल से हुई बातचीत का वीडियो भी जारी किया था. इसके बाद से ही यह मामला संसद में विपक्ष के विरोध का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है. विपक्ष की ओर से यह भी दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से कई लोग घायल हुए. समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने आरटीआई के हवाले से दावा किया कि पैलेट गन से 10 बच्चे घायल हुए हैं.

दूसरी तरफ सरकार और सत्तापक्ष लगातार इन आरोपों को लेकर विपक्ष से तथ्य और जवाब मांग रहा है. सरकार का कहना है कि 20 जुलाई की कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी को देखा जाना चाहिए और पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. इसी बीच बुधवार को इस राजनीतिक टकराव में बड़ा मोड़ आया. दोपहर करीब 12 बजे गृह मंत्री अमित शाह मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. अमित शाह ने विपक्ष को प्रस्ताव दिया कि बुधवार दोपहर 3 बजे से इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की जाए और वह गुरुवार दोपहर 3 बजे सदन में आकर विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देंगे.

शाह ने यह भी कहा कि चर्चा जितने समय तक चलानी हो, चलाई जाए और वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं. अमित शाह के इस बयान के करीब 10 मिनट बाद राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई. राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कोई लेक्चर नहीं चाहिए, उन्हें अपने सवालों के जवाब चाहिए. विपक्ष की तरफ से यह सवाल उठाया गया कि अगर गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं तो 20 जुलाई की घटना के इतने दिनों बाद चर्चा की पेशकश क्यों की जा रही है.

वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष पहले गृह मंत्री के सदन में आने की मांग कर रहा था और अब जब गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार हैं तो विपक्ष अपना रुख बदल रहा है. इसके बाद करीब पौने 3 बजे गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष को एक चिट्ठी भी लिखी. इसमें उन्होंने विपक्ष के साथ चर्चा के लिए समय और अवधि पर सहमति बनाने की अपील की. शाह ने कहा कि वह निर्धारित समय के दौरान सदन में मौजूद रहकर इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेना चाहते हैं और विपक्ष के सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हैं. लेकिन इसके बावजूद सदन में गतिरोध खत्म नहीं हुआ.

सरकार के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा

दोपहर 3 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो उम्मीद थी कि शायद अब चर्चा का रास्ता खुलेगा, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा. न तो चर्चा शुरू हो सकी और न ही सदन सामान्य तरीके से चल पाया. हंगामे के बीच कार्यवाही फिर स्थगित करनी पड़ी. यानी गृह मंत्री की ओर से चर्चा की पेशकश के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी. संसद के बाहर भी दोनों पक्षों का राजनीतिक प्रदर्शन जारी रहा. बुधवार सुबह विपक्षी सांसद संसद परिसर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए. समाजवादी पार्टी के सांसद अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को लेकर दान पेटी के साथ प्रदर्शन करते रहे. कांग्रेस ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

वहीं दूसरी तरफ झारखंड में छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी पर हमला बोला. बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों पर चयनात्मक राजनीति कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर राहुल गांधी वास्तव में छात्रों की आवाज उठाना चाहते हैं तो उन्हें झारखंड जाकर वहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों से भी मिलना चाहिए. इसी राजनीतिक खींचतान के बीच संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग नारे भी सुनाई दिए.

बीजेपी सांसद राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग करते नजर आए, जबकि विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी करते रहे. यानी जिस सदन में देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, महंगाई, सुरक्षा और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, वहां राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा दिखाई दिए. इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार थी तो चर्चा आखिर हो क्यों नहीं पाई और अगर विपक्ष को सरकार से जवाब चाहिए था तो सदन को चलने क्यों नहीं दिया गया. सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष की मंशा चर्चा करना नहीं बल्कि सरकार को घेरना और सदन को बाधित करना है. वहीं विपक्ष का तर्क है कि सरकार को पहले 20 जुलाई की घटना पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू समेत सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए हैं.

आखिरी दिन भी रहेगा गतिरोध?

सरकार का कहना है कि संसद जनता के पैसे से चलती है और सदन को बाधित करना देश के संसाधनों की बर्बादी है. विपक्ष का जवाब है कि सरकार अगर गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है तो उसे विपक्ष की मांगों को स्वीकार करते हुए जवाब देना चाहिए. इस बीच संसद की कार्यवाही पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. आम तौर पर संसद की कार्यवाही के प्रति मिनट और प्रति घंटे खर्च के अलग-अलग अनुमान सामने आते रहे हैं. इसलिए इस मुद्दे पर किसी एक निश्चित आंकड़े को आधिकारिक तथ्य के रूप में पेश करने से पहले स्रोत की पुष्टि जरूरी है. हालांकि इतना साफ है कि सदन की कार्यवाही बाधित होने से संसदीय समय का नुकसान होता है और इसका सीधा असर उस कामकाज पर पड़ता है जिसके लिए संसद का सत्र बुलाया जाता है.

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष किसी समझौते पर पहुंचेंगे या फिर गतिरोध आखिरी दिन भी जारी रहेगा. लोकतंत्र में विरोध और असहमति जरूरी है. विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और जवाब मांगना है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब देना है. लेकिन सवाल और जवाब की यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया तभी पूरी हो सकती है, जब सदन में चर्चा हो. अगर चर्चा की जगह सिर्फ नारेबाजी और स्थगन रह जाए तो नुकसान किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि संसदीय व्यवस्था और जनता के समय का होता है. आखिरकार सवाल यही है कि संसद में जवाब चाहिए तो चर्चा जरूरी है और चर्चा चाहिए तो सदन चलना भी जरूरी है. अब देखना होगा कि मॉनसून सत्र के आखिरी दिन राहुल गांधी बनाम अमित शाह की यह राजनीतिक जंग किसी समाधान तक पहुंचती है या संसद का आखिरी दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ जाता है.

NATIONAL : संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन आज: अमित शाह देंगे जवाब, बनेगी बात या मचेगा बबाल?

0

20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र आज 13 अगस्त को 19वीं और आखिरी बैठक के साथ समाप्त होगा. छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर हंगामे के बीच कई अहम विधेयकों पर भी काम हुआ.

20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र आज यानी गुरुवार को अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है. आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक आज (Sansad Monsoon Session) इस सत्र की 19वीं और आखिरी बैठक है. पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबर्दस्त तकरार, हंगामे और वाकयुद्ध देखने को मिला.

जहां एक तरफ विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन पर पुलिसिया कार्रवाई और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा, वहीं सरकार ने जनहित के कई अहम विधेयकों को पटल पर रखकर विधायी कार्यों को गति देने की कोशिश की. अब सबकी नज़रें आज के आखिरी दिन की कार्यवाही पर टिकी हैं, क्योंकि गृहमंत्री अमित शाह खुद छात्रों के मुद्दे पर सदन में गरजने के लिए तैयार हैं.

छात्रों के मुद्दे पर आज बोलेंगे अमित शाह?(Parliament Monsoon Session last day)
मानसून सत्र के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा छात्रों का उग्र प्रदर्शन और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई का रहा. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह के सीधे जवाब की मांग पर अड़ा हुआ था और सदन में जमकर हंगामा किया था. हालांकि, राजनीतिक गलियारों से खबर है कि गृहमंत्री अमित शाह ने खुद सामने आकर कहा है कि वे चर्चा से भागने वाले नहीं हैं और आज सत्र के आखिरी दिन वे सदन में विपक्ष के हर सवाल का चुन-चुनकर जवाब दे सकते हैं.

विपक्ष के वो 2 तीखे बाण जिससे हिला सदन
संसद के इस 24 दिनों के लंबे सफर में विपक्ष आक्रामक रणनीति के साथ उतरा. विपक्ष ने मुख्य रूप से दो मोर्चों पर सरकार की घेराबंदी की:छात्र आंदोलन और पुलिसिया कार्रवाई: छात्रों की मांगों और उन पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे गए.राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा: विपक्ष ने इस मुद्दे पर लगातार नारेबाजी की और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग की, जिससे कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई.

जानिए किन-किन बिलों पर हुआ काम?(Sansad Monsoon Session last day)
हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के नेतृत्व में सरकार ने सर्वदलीय बैठक के वादे के मुताबिक कई महत्वपूर्ण विधायी काम पूरे किए. जानिए इस सत्र के दौरान जो प्रमुख बिलों पर काम हुआ वह हैं:

एंटी-पेपर लीक बिल को सदन में आगे बढ़ाया गया, ताकि परीक्षाओं में धांधली रुके.
सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा अहम विधेयक पेश किया गया.
केरल का नाम बदलने की प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) संशोधन विधेयक पर भी अहम प्रगति देखने को मिली.
यह भी पढ़ें: सुबह-सुबह भारत में थर्राई धरती…लेह लद्दाख में आया 5.5 तीव्रता का भूकंप, मची अफरातफरी

19 बैठकों का क्या निकला नतीजा?
आज सत्र का 19वां और अंतिम दिन है. सर्वदलीय बैठक में सरकार ने बार-बार अपील की थी कि नियमों के तहत हर मुद्दे पर बहस होगी, लेकिन विपक्ष के भारी हंगामे के कारण कई बार कीमती समय चढ़ गया. अब आज देखना होगा कि आखिरी दिन गृहमंत्री के जवाब के बाद सदन सुचारू रूप से चलता है या फिर भारी शोर-शराबे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होता है. सत्र का पूरा रिपोर्ट कार्ड लोकसभा सचिवालय की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा.

BUSINESS : पहले 10 व 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोट छपेंगे, जानें वित्त मंत्री ने संसद में क्या बताया

क्या जल्द ही हमारी जेबों में प्लास्टिक के नोट होंगे? सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि 10 और 20 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी गई है। जानें यह ट्रायल कब शुरू होगा और इससे आम जनता को क्या फायदा होगा।

नोट पानी में भीगकर गल गया या जेब में रखे-रखे फट गया- हम सभी कभी न कभी इस परेशानी से जरूर रूबरू हुए हैं। लेकिन अब जल्द ही इस समस्या का हमेशा के लिए अंत हो सकता है। सरकार ने देश में कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोटों को आजमाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। सदन में वित्त मंत्री की आरे से दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने फील्ड ट्रायल के लिए 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब (एक बिलियन) पॉलीमर नोटों को जारी करने की मंजूरी दे दी है।

आखिर क्या है सरकार का यह नया फैसला और किस कानून के तहत मिली है मंजूरी?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बाद सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। यह प्रस्ताव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत भेजा गया था, जिसमें फील्ड ट्रायल के लिए 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोट छापने की बात कही गई थी। सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। अगर यह फील्ड ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो भविष्य में इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जा सकेंगे।


क्या पुराने कागज वाले नोट पूरी तरह बंद हो जाएंगे?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि इन नए पॉलीमर नोटों को बाजार से पुराने नोटों को हटाकर नहीं, बल्कि अभी चल रहे कागज के नोटों के साथ ही जारी किया जाएगा**। यानी आपके पास पुराने और नए दोनों तरह के नोटों को इस्तेमाल करने का विकल्प होगा।
विज्ञापन

ये नए प्लास्टिक वाले नोट आपकी जेब में कब तक आएंगे और इस पर कितना खर्च होगा?
अगर आप सोच रहे हैं कि ये नोट कल से ही मिलने लगेंगे, तो थोड़ा इंतजार करना होगा। वित्त मंत्री ने बताया कि रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुताबिक, इन नोटों की खरीद की प्रक्रिया अभी बिल्कुल शुरुआती चरण में है। यही वजह है कि अभी यह तय कर पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है कि ये नोट ठीक किस तारीख से बाजार में आएंगे या इन्हें बनाने में कुल कितना खर्च आएगा।

महंगाई के मोर्चे पर आम जनता के लिए क्या राहत भरी खबरें हैं?
इस बड़े फैसले के साथ-साथ देश की आर्थिक सेहत और महंगाई को लेकर भी संसद में महत्वपूर्ण आंकड़े रखे गए:
घटती महंगाई: देश में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) में लगातार गिरावट देखी जा रही है। यह साल 2023-24 के 5.4 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 4.6 प्रतिशत और फिर 2025-26 में महज 2.1 प्रतिशत पर आ गई थी।
हालिया उछाल का कारण: पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में झटका लगा, साथ ही सब्जियों के मौसमी दाम बढ़े और अल नीनो के असर के चलते साल 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई। हालांकि, यह अभी भी आरबीआई के 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य से नीचे ही है।

आम लोगों की जेब में अधिक पैसा बचाने के लिए सरकार ने क्या बड़े कदम उठाए हैं?
सरकार लगातार ऐसे नीतिगत फैसले ले रही है जिससे आम और मध्यम वर्ग के परिवारों की क्रय शक्ति बची रहे:
जीएसटी दरों में सुधार: जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में टैक्स ढांचा सुधारा गया है, जिसमें 18% की मानक दर और 5% की रियायती दर रखी गई है। इससे कई चीजों पर टैक्स का बोझ कम हुआ है।

टैक्स में बड़ी छूट: इनकम टैक्स में सालाना 12 लाख रुपये (और नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद 12.75 लाख रुपये) तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इससे लोगों के हाथों में खर्च करने के लिए अधिक पैसा बच रहा है।
ईंधन और तेल सस्ता: मार्च 2026 में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके अलावा खाने के तेल (क्रूड पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल आदि) पर भी सीमा शुल्क घटाया गया है।

NATIONAL : हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा अब तक क्या कार्रवाई हुई?

0

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरियाणा के संत रामपाल के संस्थानों से प्रकाशित पुस्तकों में हिंदू देवी देवताओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि इस मामले में क्या सरकार कोई ठोस कदम उठाने जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या याची की शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई की गई है। अदालत ने सरकारी वकील को 15 जुलाई को होने वाली सुनवाई में इसका ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह जानकारी पेश किए जाने के बाद जरूरी होने पर याचिका के निजी पक्षकारों को नोटिस जारी किया जाएगा। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। याचिका में संस्थान की ऐसी पुस्तकों को तत्काल प्रतिबंधित करने व विशेष अनुसंधान दल से मामले की जांच कराने का आग्रह किया है।

याची ट्रस्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री का कहना था कि संत रामपाल संस्थान की कई पुस्तकों में हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक व अश्लील बातें लिखी गई हैं। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। इसकी शिकायत प्रमुख सचिव गृह से की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील मनीष मिश्र से मामले में राज्य सरकार की प्रस्तावित या की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा अब तक क्या कार्रवाई हुई? मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई होनी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरियाणा के संत रामपाल के संस्थानों से प्रकाशित पुस्तकों में हिंदू देवी देवताओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि इस मामले में क्या सरकार कोई ठोस कदम उठाने जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या याची की शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई की गई है। अदालत ने सरकारी वकील को 15 जुलाई को होने वाली सुनवाई में इसका ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह जानकारी पेश किए जाने के बाद जरूरी होने पर याचिका के निजी पक्षकारों को नोटिस जारी किया जाएगा। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। याचिका में संस्थान की ऐसी पुस्तकों को तत्काल प्रतिबंधित करने व विशेष अनुसंधान दल से मामले की जांच कराने का आग्रह किया है।

सरकार की प्रस्तावित या की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा
याची ट्रस्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री का कहना था कि संत रामपाल संस्थान की कई पुस्तकों में हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक व अश्लील बातें लिखी गई हैं। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। इसकी शिकायत प्रमुख सचिव गृह से की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील मनीष मिश्र से मामले में राज्य सरकार की प्रस्तावित या की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

- Advertisement -

News of the Day