भाजपा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर तीखा हमला बोला। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों के दौरान 54 विदेश यात्राएं की और इन पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च हुए। पार्टी ने कहा कि उनकी घोषित आय और विदेश यात्राओं पर स्पष्ट विसंगति नजर आती है। साथ ही, यात्राओं के फंडिंग के स्रोतों की जानकारी भी मांगी।
भाजपा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में कहा कि 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये रही, जबकि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद से उनके विदेश दौरों पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
पात्रा ने बृहस्पतिवार को सवाल उठाया कि इतने बड़े खर्च की फंडिंग किसने की? क्या विदेशी संस्थाओं ने फंडिंग की? अगर हां, तो एफसीआरए की मंजूरी कहां है? उन्होंने आगे कहा अगर खर्च निजी फंड से हुआ, तो टैक्स और विदेशी मुद्रा संबंधी खुलासे कहां हैं? या फिर किसी तीसरे पक्ष ने खर्च उठाया? पात्रा ने कहा, यात्रा का विवरण तो सार्वजनिक है लेकिन पैसे का लेन-देन पूरी तरह गायब है। उन्होंने राहुल गांधी के पद को देखते हुए इन दौरों की पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू पर भी चिंता जताई।
कांग्रेस ने कहा-भाजपा आर्थिक नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए राहुल के विदेश दौरों को उठा रही भाजपा पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक नाकामी से जुड़े विषयों से ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर निशाना साध रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि भाजपा नेता संबित पात्रा ने मंत्री पद पर अपना दावा पेश करने के लिए राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का मामला उठाया है। लेकिन उन्हें मंत्री बनने के लिए बेहतर विषय की तलाश करनी चाहिए। रमेश ने कहा, यह सब भाजपा के संबित पात्रा की ध्यान भटकाने की कोशिश है।
असली मुद्दा अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने का है। असली मुद्दे विदेश नीति में असफलताएं हैं। रमेश ने दावा किया कि मोदी समझौता करने वाले प्रधानमंत्री हैं और वह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से बेनकाब हो चुके हैं।
नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में भारत ने होर्मुज और लाल सागर जैसे सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से सुरक्षित आवाजाही को जरूरी बताया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के संकट पर चिंता जताते हुए शांति की अपील की। साथ ही, उन्होंने आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की बात कही। आइए विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं…
नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के बड़े सम्मेलन में भारत ने कहा है कि होर्मुज और लाल सागर समेत दुनिया के सभी रास्तों और जलमार्गों से जहाजों का सुरक्षित आना-जाना बहुत जरूरी है। अगर इन रास्तों में कोई रुकावट आती है, तो इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसलिए सभी समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना दुनिया के सभी देशों की एक बड़ी और सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस दो दिन के सम्मेलन के पहले दिन बृहस्पतिवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के सामने अपनी बात पूरी मजबूती से रखी। उन्होंने समझाया कि पश्चिम एशिया में जो लड़ाई और तनाव चल रहा है, उस पर खास ध्यान देने की जरूरत है। समंदर के रास्तों में जहाजों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है और ऊर्जा व तेल की सप्लाई वाले ढांचे में भी मुश्किलें आ रही हैं। भारत ने साफ कहा है कि वह इस तनाव को कम करने और शांति वापस लाने के लिए जो भी कोशिशें होंगी, उनका पूरा समर्थन करेगा।
चुनाव आयोग ने गुरुवार को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की है। यह SIR का तीसरा फेज होगा।पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।
SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।
मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद की बैठक 21 मई को होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सभी केंद्रीय मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्रियों और अन्य केंद्रीय राज्य मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है।सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी।
यह बैठक बंगाल और असम में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत और पुडुचेरी में राजग की दोबारा सरकार बनने के बाद हो रही है। प्रधानमंत्री प्रमुख नीतिगत और शासन संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए समय-समय पर मंत्रिपरिषद की बैठकें करते रहे हैं, लेकिन 21 मई की बैठक का राजनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि यह विधानसभा चुनावों के बाद हो रही है।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (14 मई 2026) को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में कैबिनेट मंत्री को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि कोई मंत्री निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं जा सकता. मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पैनल के स्ट्रक्चर पर चिंता व्यक्त की. वर्तमान में इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, ‘अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है? एक मंत्री कभी भी अपने प्रधानमंत्री के फैसले के खिलाफ नहीं जाएगा, जिससे फैसला हमेशा 2:1 के बहुमत से सरकार के पक्ष में ही रहेगा.’
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के लिए नियुक्ति प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बनाए रखने से संबंधित है. अदालत ने आगे कहा कि यदि भारत के चीफ जस्टिस केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया जा सकता है?
बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा, ‘अगर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए CBI की नियुक्ति में निष्पक्षता जरूरी है तो लोकतंत्र को बचाने और साफ-सुथरे चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में और भी ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए. चयन समिति में तीसरा सदस्य सरकार का ही मंत्री क्यों होना चाहिए? इस कमेटी में सरकार के मंत्री की जगह कोई स्वतंत्र सदस्य होना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे.’
लाइव लॉ के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए रिटायर IAS अधिकारी एस.एन. शुक्ला ने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए न केवल चुनाव आयुक्तों को चुनने वाले नए कानून को चुनौती दी, बल्कि उस कानून के तहत हुई वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए.
एस.एन. शुक्ला ने स्पष्ट किया कि उनकी यह चुनौती सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पिछले (अनूप बरनवाल) फैसले के आधार पर नहीं है, बल्कि उन्होंने RTI के जरिए ऐसे ठोस सबूत जुटाए हैं जो इन नियुक्तियों में कानूनी खामियों को साबित करते हैं. उनका कहना है कि वर्तमान नियुक्तियां कानून के सही मापदंडों पर खरी नहीं उतरती हैं, इसलिए उन्हें रद्द किया जाना चाहिए.
मिडिल ईस्ट में जारी तनातनी के बीच होर्मुज स्ट्रेट से सटे ओमान तट पर गुजरात का एक और मालवाहक जहाज डूब गया। हाजी अली’ नाम का जहाज 13 मई की सुबह ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था, इसी दौरान उसपर ड्रोन या मिसाइल जैसा हथियार से हमला किया गया, हमले के बाद जहाज में आग लग गई। हालांकि, ओमान कोस्टगार्ड ने सभी 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया।
भारत ने बुधवार को ओमान के तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान अनुसार ओमान के तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुआ हमला किसी भी हालत में मंजूर नहीं है। हम इस बात की निंदा करते हैं कि व्यावसायिक जहाजों और आम नाविकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
वहीं, विदेश मंत्रालय ने सभी भारतीय चालक दल के सुरक्षित होने की पुष्टि करते हुए ओमानी अधिकारियों का आभार जताते हुए लिखा, “जहाज पर सवार भारतीय क्रू सुरक्षित हैं और हम उन्हें बचाने के लिए ओमानी अधिकारियों को धन्यवाद देते हैं।” भारत फिर से कहता है कि कमर्शियल शिपिंग को टारगेट करने और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालने, या किसी और तरह से नेविगेशन और कॉमर्स की आजeदी में रुकावट डालने से बचना चाहिए।
यह जहाज बेरबेरा पोर्ट से शारजाह जा रहा था। सुबह करीब 3:30 बजे ओमान के समुद्री तट के पास जहाज हादसे का शिकार हुआ। जहाज में सवार क्रू मेंबर्स ने बताया कि जहाज से किसी विस्फोटक जैसी चीज के टकराने की आवाज सुनाई दी थी। इसके बाद जहाज में आग लग गई। हालात बिगड़ने पर सभी 14 क्रू मेंबर्स ने लाइफ बोट की मदद से जहाज छोड़ा। इस दौरान ओमानी अधिकारियों ने आगे बढ़कर भारतीय क्रू मेंबर्स की मदद की।
गौरतलब है कि इससे पहले 7 मई को होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा गुजरात के द्वारका का एक और मालवाहक जहाज MSV AL फैज नूरे सुलेमानी-I भी अमेरिका और ईरान नेवी के बीच फायररिंग का शिकार हुआ था।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर गुरुवार देर शाम नीट (UG) परीक्षा दोबारा कराने को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव, स्कूली शिक्षा सचिव, एनटीए महानिदेशक और सीबीएसई चेयरपर्सन सहित कई बड़े अधिकारी शामिल हुए।
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली सबसे बड़ी परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) को रद्द किए जाने के बाद अब सरकार पूरी तरह से एक्शन में आ गई है। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के दोबारा कराने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। यह खबर उन सभी छात्रों के लिए बहुत जरूरी है जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने के मुद्दे पर पहली उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की है। इस अहम बैठक में शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। इस मीटिंग का मुख्य मकसद यही था कि रद्द हुई परीक्षा को अब नए सिरे से कैसे कराया जाए ताकि आगे कोई भी गड़बड़ी न हो। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बार ‘री-नीट’ पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से हो, जिससे दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो।
यह खास बैठक इसलिए बुलाई गई क्योंकि हाल ही में नीट-यूजी परीक्षा में कई तरह की बड़ी गड़बड़ियों और पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे थे। इन आरोपों के कारण छात्रों में भारी गुस्सा था और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पुरानी परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। अब चूंकि परीक्षा दोबारा होनी है (RE-NEET), इसलिए नया शेड्यूल बनाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए शिक्षा मंत्री ने खुद मोर्चा संभालते हुए यह बैठक बुलाई। इस उच्च स्तरीय बैठक में इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया कि परीक्षा के पेपर को लीक होने से कैसे बचाया जाए। अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने और पेपर बांटने के तरीके में कड़े बदलाव करने पर लंबी चर्चा की। सरकार की कोशिश है कि नया सिस्टम ऐसा हो जिसे कोई भी हैक या लीक न कर सके। इसके लिए नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी गहराई से विचार किया जा रहा है ताकि परीक्षा पूरी तरह से सुरक्षित रहे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में हुई इस बैठक के बाद अब जल्द ही ‘री-नीट’ परीक्षा की नई तारीखों का ऐलान होने की उम्मीद है। छात्रों को अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखने की सलाह दी जा रही है। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि छात्रों का कीमती साल बर्बाद न हो और उन्हें जल्द से जल्द एक साफ-सुथरी परीक्षा देने का मौका मिले। सरकार के इस कड़े कदम से उन लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो पूरी ईमानदारी से इस परीक्षा की तैयारी करते हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के घर हुई इस खास बैठक में शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने मुख्य रूप से हिस्सा लिया। इनके अलावा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह और सीबीएसई (CBSE) के चेयरपर्सन भी इस अहम चर्चा का हिस्सा बने।
इस बैठक में केवल एनटीए और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी ही मौजूद नहीं थे, बल्कि स्कूलों के बड़े अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के आयुक्तों (कमिश्नरों) ने भी अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नई परीक्षा की तैयारियों को लेकर इस चर्चा में भाग लिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में आयोजित ‘कलाम और कवच’ सम्मेलन में कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता सेनाओं के आपसी तालमेल पर निर्भर करेगी। उन्होंने जल, थल, वायु, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में सभी बलों को एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आज के समय में युद्ध लड़ने का तरीका पूरी तरह से बदल चुका है। अब युद्ध केवल जमीन, समुद्र या हवा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर दुनिया तक पहुंच गया है। ऐसे में देश की सुरक्षा तभी पक्की हो सकती है जब हमारी सभी सेनाएं और रक्षा से जुड़े विभाग एक साथ मिलकर काम करें। नई दिल्ली में आयोजित ‘कलाम और कवच’ नाम के एक बड़े रक्षा सम्मेलन में उन्होंने यह अहम बात कही है। यह सम्मेलन देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए आयोजित किया गया था।
रक्षा मंत्री ने एक वीडियो संदेश में कहा कि आधुनिक युद्ध में अलग-अलग रहकर सफलता नहीं मिल सकती है। जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय रक्षा बल जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में कितनी कुशलता से एक साथ आते हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि देश की ताकत इस बात से तय होगी कि हमारी सेनाएं, प्रयोगशालाएं और उद्योग कितनी जल्दी एक साथ सोचते हैं और काम करते हैं। इसके साथ ही रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि यह नए भारत की ताकत और आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति का सीधा सुबूत है।
इस सवाल का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि आज के समय में भू-राजनीतिक तनाव, साइबर खतरे और नई तरह की युद्ध तकनीकों को देखते हुए हम पुरानी सोच के भरोसे नहीं रह सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें हमेशा तैयार रहना होगा और नया सोचना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय के युद्ध के मैदान में उसी की जीत होगी जो किसी भी नए विचार या तकनीक को बहुत जल्दी हथियार बनाकर सेना तक पहुंचा सकेगा। इसलिए सेनाओं के साथ-साथ रक्षा नीति बनाने वालों, वैज्ञानिकों और उद्योगों को बिल्कुल करीब आकर काम करना होगा।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर होना केवल देश की अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि हमारी रणनीति के लिए भी एक बहुत बड़ी जरूरत है। अगर कोई देश अपने अहम रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता है, तो संकट के समय में वह हमेशा कमजोर ही साबित होगा। इसलिए भारत को अपने देश के अंदर ही हथियारों को डिजाइन करना, बनाना और उन्हें आधुनिक करना होगा। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भी स्वदेशी तकनीक को देश के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी बताया है।
नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में हुए इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में सेना के बड़े अधिकारी, रक्षा उद्योग से जुड़े लोग, वैज्ञानिक और कई विशेषज्ञ शामिल हुए। इस कार्यक्रम में कई उच्च स्तरीय चर्चाएं हुईं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े युद्ध, हाइपरसोनिक तकनीक और क्वांटम तकनीक जैसे आधुनिक विषयों पर बात की गई। इसके अलावा देश में हथियार बनाने की क्षमता को बढ़ाने और अंतरिक्ष के क्षेत्र में तरक्की को लेकर भी चर्चा की गई। इस सम्मेलन में एक खास प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें भारत की प्राइवेट कंपनियों और छोटे उद्योगों द्वारा बनाए गए नए रक्षा उपकरणों को दिखाया गया।
नई दिल्ली, 15 मई (हि.स)। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। सीएनजी के दाम भी दो रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं। नई दरें आज से लागू हो गई हैं। करीब चार साल बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत में इजाफा किया गया है।
दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में उछाल आया है।
कोलकाता में पेट्रोल 3.29 रुपये बढ़कर अब 108.74 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 3.14 रुपये बढ़कर 106.68 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा है। दक्षिण भारत के बड़े शहर चेन्नई में पेट्रोल के दामो में 2.83 रुपये का उछाल आया है और नई कीमत 103.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
कोलकाता में डीजल की कीमत में 3.11 रुपये का इजाफा हुआ है। वहां एक लीटर डीजल 95.13 रुपये में मिल रहा है। मुंबई में भी डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 93.14 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। चेन्नई में डीजल की कीमत में 2.86 रुपये का इजाफा किया गया है। वहां डीजल अब 95.25 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
दिल्ली के प्रीत विहार स्थित भारत पेट्रोलियम के पंप पर एक ग्राहक ने इस पर कहा, “हम इसके बारे में क्या कर सकते हैं? ये सभी चीजें दूसरे देशों से आती हैं। इनका उत्पादन यहां नहीं होता। इसलिए सरकार जो भी कदम उठा रही है, वह देश के हित में है। पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने पर विपक्ष हमलावर है। कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, ”महंगाई मैन ने जनता पर हंटर चलाया।” सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि आगे बढ़ना है, तो साइकिल ही विकल्प है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमत में यह बढ़ोतरी कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण ईंधन बेचने वाली कंपनियों को लगातार हो रहे नुकसान के बीच की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच संयुक्त अरब अमीरात और चार यूरोपीय देशों की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाकर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। यह यात्रा यूएई के साथ रणनीतिक वार्ता से शुरू होगी और नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के साथ आगे बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। प्रधानमंत्री की इस यात्रा का उद्देश्य मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। ऊर्जा प्रवाह की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न व्यापार व्यवधानों को कम करना और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना इस यात्रा का प्रमुख केंद्र बिंदु रहने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि अगले छह दिनों में प्रधानमंत्री भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई विविध विषयों पर विश्व के कई नेताओं से बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का पहला गंतव्य संयुक्त अरब अमीरात होगा जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान करने पर केंद्रित व्यापक वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री यूरोप यात्रा पर रवाना होने से पहले खाड़ी देश में लगभग चार घंटे बिताएंगे।
मोदी-अल नाहयान के बीच हुई वार्ता के बाद, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच दो महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। इन समझौतों का उद्देश्य तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह से अस्थिर कर दिया है जिसका मुख्य कारण तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण पारगमन मार्ग है जिसके माध्यम से दुनिया की कुल पेट्रोलियम आपूर्ति के लगभग 20 प्रतिशत का आवागमन होता है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 वर्षों में कुल निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं इसलिए प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारतीय समुदाय के कल्याण पर चर्चा करने का भी एक अवसर होगा। अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यात्रा करेंगे। यह 2017 के बाद नीदरलैंड की उनकी दूसरी यात्रा होगी। इस दौरान वह राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी की यात्रा बहुआयामी साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने का अवसर प्रदान करेगी। नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक गंतव्यों में से एक है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 अरब डॉलर का था। यह यूरोपीय देश भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने कुल 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है। अधिकारियों ने बताया कि मोदी की यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल पर रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय बैठकों और घनिष्ठ सहयोग की गति को और आगे बढ़ाएगी। प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड के बाद स्वीडन की यात्रा पर जाएंगे। वह प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर 17 से 18 मई तक दो-दिवसीय यात्रा के लिए स्वीडन जा रहे हैं। मोदी ने इससे पहले 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन की यात्रा की थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ बातचीत करेंगे। इसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी और आपसी व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशे जाएंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत में दोनों पक्ष हरित ऊर्जा बदलाव, कृत्रिम मेधा, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन संबंधी उपाय और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान देंगे। अपनी यात्रा के चौथे चरण में, मोदी 18 से 19 मई तक नॉर्वे की यात्रा करेंगे। वहां वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की भी नॉर्वे की पहली यात्रा होगी।
प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्जा से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने और व्यापार एवं निवेश पर ध्यान देने का अवसर है। तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में होगा, जिसमें मोदी और नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के उनके समकक्ष शामिल होंगे। यह शिखर सम्मेलन अप्रैल 2018 में स्टॉकहोम और मई 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित पिछले दो शिखर सम्मेलनों पर आधारित होगा और इससे नॉर्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों को अधिक रणनीतिक आयाम मिलने की उम्मीद है।
अपनी यात्रा के अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर 19 से 20 मई तक इटली की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे मोदी ने आखिरी बार जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए हो रही है। मोदी की इटली यात्रा का मुख्य उद्देश्य निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवोन्मेष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करना है।