Wednesday, September 2, 2026
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WORLD : US ठिकानों पर ईरान के हमले से आगबबूला हुए ट्रंप, बोले – ‘हम उन्हें…’

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक पोस्ट करते हुए, उसे आधिकारिक तौर पर एक असफल राष्ट्र बताया है. साथ ही उन्होंने ईरान पर अमेरिकी के बारे में फेक न्यूज रखने की बात कही है.

अमेरिकी ठिकानों पर तेहरान के ताबड़तोड हमलों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आग बबूला हो गए हैं. गुस्से में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को आधिकारिक तौर पर एक असफल राष्ट्र करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस बात को कहा है.

ट्रंप ने कहा, ‘ईरान आधिकारिक तौर पर एक फेल्ड नेशन है. यह खत्म हो चुका है. उनके पास न तो नेवी है, न एयरफोर्स, और न ही कोई करेंसी है. वे अपने सैनिकों या पुलिस को पैसे नहीं दे पा रहे हैं. महंगाई 300% पर है. इसके अलावा ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि उनका नेतृत्व पूरी तरह से बिखर चुका है. देश का ठीक से प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है.’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि उनके पास बस USA के बारे में गलत खबर है. उन्हें अपने प्रदर्शनकारी को मारने की इच्छा है. अब तक एक लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. उनपर मानवता के खिलाफ वॉर ऑफ क्राइम का मुकदमा चलना चाहिए. साथ ही बकवास करने की आदत है.

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिका करेगा जोरदार हमला

इसके अलावा ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा है कि अमेरिकी सेना पर हमले के बाद ईरान पर अमेरिका जोरदार हमला करेगा. जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों का बदला लिया जाएगा. ट्रंपने कहा, हम उनपर जोरदार हमला करेंगे. इसका जवाब दिया जाएगा.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने रात में एक मिसाइल को एयर डिफेंस से गुजरने दिया, वह किसी चीज से टकराने वाली नहीं थी. बाकी मिसाइलों को रोक दिया गया. फिर भी बातचीत की थोड़ी उम्मीद बाकी है.ट्रंप ने कहा कि वे बहुत बेताबी से मिलना चाहते हैं. बस मुझे नहीं पता कि क्या आप उनके साथ किसी समझौते पर भरोसा कर सकते हैं. उनपर लगाए गए प्रतिबंधों का असर बहुत जोरदार हो रहा है.

ईरान के अधिकारी मान रहे अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल निर्यात में कमी का असर
इधर, ईरान के अधिकारी अब अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल निर्यात में कमी के असर को ज्यादा मान रहे हैं. इलाके के इंटेलिजेंस सूत्रों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती आर्थिक मुश्किलों से अशांति फेल सकती है. ईरान की करेंसी रियाल गिरकर 21 लाख प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर आ गई है. यह अबतक का सबसे निचला स्तर है. अमेरिकी सूत्र ने फॉक्स न्यूज को बताया है कि रविवार को ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर कम से कम 8 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं है. कोई खास असर नहीं हुआ है. यह हमला लराक द्विप पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लॉन्चरों पर अमेरिकी हमले के बाद किया गया था. अमेरिकी सेना ने तब हमला किया जब उन्हें आईआरजीसी की तरफ से रॉकेट लॉन्च की तैयारी का पता चला. इसका मकसद हॉर्मुज में नई समुद्री बारूदी सुरेंगे बिछाना था. सेंट्रल कमांड ने इसे उन ताकतों के खिलाफ सीमित और सटीक कार्रवाई बताया, जो समुद्री बारूदी सुरंगे बिछा रही थीं. ईरान के अधिकारियों का कहना है कि तेल निर्यात में गिरावट के चलते प्रतिबंधों का असर बढ़ता जा रहा है. फिर भी तेहरान ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह अपना रुख बदलने या अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार है.

WORLD : नेपाल से बहकर उत्तर प्रदेश तक पहुंचीं लाशें ! कुशीनगर में गंडक नदी से 3 शव बरामद

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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर अब भारत तक पहुँच गया है. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से तीन अज्ञात शव बरामद किए गए हैं, जो संभवतः बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए हैं.नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर अब भारत तक दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, आशंका है कि ये शव नेपाल में आई बाढ़ के तेज बहाव के साथ बहकर भारतीय क्षेत्र में पहुंचे.

मृतकों की नहीं हो पाई है पहचान
तीनों शव शुक्रवार को कुशीनगर के खड्डा इलाके के मदनपुर-सुकरौली क्षेत्र में बैराज के पियर नंबर-3 के पास नदी में दिखाई दिए. राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की निगरानी टीम ने शवों को नदी में बहते देखा, जिसके बाद उन्हें बाहर निकाला गया. फिलहाल मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है.

अधिकारियों ने शवों की पहचान के लिए नेपाल के सीमावर्ती जिलों के प्रशासन से भी संपर्क किया है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या ये शव नेपाल में बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों के हैं.

सिर्फ शव ही नहीं, मलबा भी बहकर आया
अधिकारियों के मुताबिक, गंडक नदी में वाहन, घरेलू सामान, गैस सिलेंडर, ड्रम, फर्नीचर और लकड़ियां समेत कई तरह का मलबा भी बहता हुआ देखा गया है. नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र में पहुंचा, जिससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में भी असर पड़ा.

गंडक नदी में निगरानी बढ़ा दी गई
कुशीनगर प्रशासन ने गंडक नदी और उसके किनारे के संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी है. पुलिस, SDRF और प्रशासन की टीमें लगातार हालात पर नजर रख रही हैं.

इससे पहले पड़ोसी महराजगंज जिले में भी नेपाल से बहकर आने की आशंका वाले शव बरामद हुए थे. यानी नेपाल की बाढ़ का असर अब सिर्फ सीमा पार बढ़े नदी के जलस्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज बहाव के साथ शव और मलबा भी भारतीय क्षेत्र तक पहुंच रहा है.

WEATHER : मानसून की चाल: देश में 14 फीसदी कम बारिश, पर जहां बरसा वहां आफत; जून से अगस्त तक कैसा रहा हाल?

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इस बार मानसून में देशभर में बारिश कम हुई है, लेकिन कई इलाकों में थोड़े समय में बहुत तेज बारिश हुई। अगस्त में बारिश सामान्य से करीब 16% कम रही और जून से अगस्त तक कुल कमी करीब 14% पहुंच गई। फिर भी कई राज्यों में भारी बारिश से बाढ़, जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ा। पढ़िए रिपोर्ट

इस बार मानसून का मिजाज बदला-बदला है। इसकी असली कहानी केवल इस बात से नहीं समझी जा सकती कि देश में कितनी बारिश हुई। इस बार बारिश कब, कहां और कितनी तेज हुई, यह ज्यादा बड़ा सवाल बन गया है।

अगस्त में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 16% कम रही। इससे जून से 31 अगस्त तक पूरे मानसून का बारिश घाटा बढ़कर करीब 14% हो गया। लेकिन इसी बीच कुछ इलाकों में कुछ घंटों में इतनी तेज बारिश हुई कि बाढ़ और जलभराव का खतरा पैदा हो गया। यानी देश में बारिश कम हुई, लेकिन जहां पानी गिर रहा है, वहां कई बार आफत बनकर गिर रहा है।

मौसम विज्ञान विभाग की 31 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में छत्तीसगढ़ में कहीं 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई। बिहार, झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश हुई। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक सितंबर को भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर रहने का अनुमान है। इसके उलट दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह बारिश की गतिविधि कमजोर रहने की संभावना है।

कम बारिश का मतलब बाढ़ का खतरा कम नहीं
देश का औसत आंकड़ा जमीन पर पैदा होने वाली परेशानी की पूरी तस्वीर नहीं बताता। मसलन, किसी इलाके में पूरे महीने बारिश कम रही। लेकिन दो-तीन दिनों में बहुत तेज बारिश से ही खेतों में पानी भर गया। शहरों में नाले उफनाने लगे। पहाड़ों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। 18 अगस्त को उत्तराखंड, गांगेय क्षेत्र पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई।

Weather Update IMD rain prediction flood hit Odisha monsoon trend in UP Rajasthan and other regions hindi news
मौसम की खबर: बाढ़ग्रस्त ओडिशा को बारिश से फिलहाल राहत नहीं, यूपी-राजस्थान और अन्य जगह मानसून का मिजाज कैसा?

इसी दिन छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक पानी बरसा। 25 अगस्त को झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 20 सेमी तक बारिश हुई। महीने के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश में मंदाकिनी खतरे के निशान से करीब छह मीटर ऊपर पहुंच गई।

10 साल में अगस्त कभी सूखा, कभी लबालब
┌──────┬──────────┬────────────┐
│ वर्ष │ बारिश │ सामान्य से │
├──────┼──────────┼────────────┤
│ 2016 │ 238.4 │ 6.8% कम │
│ 2017 │ 228 │ 13% कम │
│ 2018 │ 241.4 │ 8% कम │
│ 2019 │ 00 │ 15% ज्यादा │
│ 2020 │ 327 │ 27% ज्यादा │
│ 2021 │ 195.9 │ 24% कम │
│ 2022 │ 263.7 │ 3% ज्यादा │
│ 2023 │ 162.7 │ 36% कम │
│ 2024 │ 293.9 │ 15% ज्यादा │
│ 2025 │ 268.1 │ 5% ज्यादा │
└──────┴──────────┴────────────┘

आईएमडी के 1971–2020 के औसत के मुताबिक अगस्त में देश में 254.9 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है। इसी सामान्य आंकड़े से हर साल की वास्तविक बारिश की तुलना कर यह तय किया जाता है कि बारिश सामान्य से कम रही या ज्यादा।

NATIONAL : प्रयागराज एयरफोर्स स्टेशन के पास पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 7 की मौत, 22 झुलसे; कई मकान जमींदोज,घायलों को चारपाई पर लेकर भागे लोग, इलाके में मची चीख-पुकार

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कौशांबी। प्रयागराज और कौशांबी की सीमा पर सोमवार दोपहर पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में दोपहर करीब साढ़े 12 बजे हुए इस धमाके में अब तक सात लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 22 लोग झुलसकर घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पटाखा फैक्ट्री पूरी तरह जमींदोज हो गई और आसपास के करीब आठ मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें तीन मकान पूरी तरह ढह गए।

हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। धुएं का गुबार कई मीटर तक फैल गया और लगातार हो रहे धमाकों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। घायलों को स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में चारपाई और अन्य साधनों से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। घटनास्थल का मंजर इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोग अपनों की तलाश में मलबे के बीच भटकते नजर आए।

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मोहम्मदपुर गांव प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर स्थित है और मनौरी एयरफोर्स स्टेशन घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू कराया गया।

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पुलिस, एयरफोर्स, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के करीब 200 जवान राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। मलबा हटाने के लिए करीब दस बुलडोजर लगाए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि अभी भी कुछ लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। ऐसे में मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पटाखा फैक्ट्री करीब 800 वर्गफीट क्षेत्र में बनी एक मंजिला इमारत में संचालित हो रही थी। फैक्ट्री के मालिक का नाम आदिल बताया गया है। पुलिस के अनुसार फैक्ट्री के आसपास नई बस्ती भी बस रही थी, जिसके कारण विस्फोट की चपेट में आसपास के कई मकान आ गए।

विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के मकानों की दीवारें और छतें तक क्षतिग्रस्त हो गईं। एक मकान की तीसरी मंजिल में करीब आठ फीट का बड़ा छेद होने की बात सामने आई है।

घायल अवस्था में स्वरूप रानी अस्पताल पहुंची एक महिला रानी ने बताया कि बिजली का खंभा गिरने के बाद फैक्ट्री में रखे बारूद में तेज धमाका हुआ। इसके बाद आसपास का पूरा इलाका दहल गया और कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। महिला के मुताबिक उसके परिवार के पांच लोग मलबे में दब गए थे, जिन्हें प्रशासन की मदद से बाहर निकाला गया।

हादसे में जान गंवाने वालों में दो बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। मृतकों के नाम प्रवीण, उम्र करीब 13 वर्ष और प्रियांशी, उम्र करीब पांच वर्ष बताए गए हैं। हादसे में कई अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में घायलों को लगातार पहुंचाया जा रहा है। एसआरएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एके वर्मा के अनुसार अस्पताल में अब तक सात लोगों को लाया गया, जिनमें दो मृतक और पांच घायल थे। एक घायल की हालत गंभीर बताई गई है, जिसे सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। घायलों में बच्चे भी शामिल हैं।

धमाके के बाद घटनास्थल पर भयावह स्थिति पैदा हो गई। आसपास के ग्रामीण बिना समय गंवाए राहत कार्य में जुट गए। कई झुलसे और घायल लोगों को चारपाई पर रखकर सुरक्षित स्थानों और अस्पताल तक पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मलबा हटाने की कोशिश भी की।

एक प्रत्यक्षदर्शी मुनीश कुमार पांडे के मुताबिक करीब साढ़े 12 बजे धमाके शुरू हुए। उनका दावा है कि गोदाम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और धमाकों की वजह से आसपास के मकानों को भारी नुकसान हुआ।

हादसे के बाद कई परिवारों के सदस्य मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई है। एक महिला ने बताया कि उसकी बेटी का परिवार घटनास्थल के पास बने मकान में रह रहा था। महिला के अनुसार घर में उसकी बेटी, दामाद, दो बेटे और एक बेटी समेत पांच लोग थे और मकान ढहने के बाद सभी के मलबे में दबे होने की आशंका थी।

एक बच्ची ने बताया कि हादसे के समय घर में वह, उसका छोटा भाई और मां मौजूद थे। उसके मुताबिक वह किसी तरह बाहर निकल आई, जबकि उसके परिवार के अन्य सदस्य मलबे में दब गए।

विस्फोट के बाद फैक्ट्री के आसपास स्थित खेतों में भी बारूद फैल गया। सुरक्षा को देखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम लगातार पानी का छिड़काव कर रही है, ताकि बारूद हवा में उड़कर किसी अन्य स्थान पर खतरा पैदा न करे। राहत कार्य के साथ-साथ घटनास्थल को सुरक्षित बनाने की कार्रवाई भी की जा रही है।

लाइसेंस निरस्त होने की बात ने खड़े किए गंभीर सवाल
कौशांबी के जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई की बात भी कही गई है।

प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस करीब दो वर्ष पहले निरस्त किए जाने की बात कही जा रही है। अब जांच एजेंसियां इस बिंदु की भी पड़ताल कर रही हैं कि लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद फैक्ट्री में पटाखों और विस्फोटक सामग्री का काम किस तरह जारी था।

एडीजी समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे
घटना की गंभीरता को देखते हुए एडीजी ज्योति नारायण भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से हादसे की जानकारी ली और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। अधिकारी उन्हें मलबा हटाने, घायलों को अस्पताल पहुंचाने और घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी देते रहे।

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने पर है। हादसे की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और सुरक्षा नियमों की किस स्तर पर अनदेखी की गई।

NATIONAL : LPG का कमर्शियल सिलेंडर हुआ ₹9.50 तक महंगा, जानिए आपके शहर का दाम

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नई दिल्‍ली: ऑयल मार्केटिंग करने वाली सरकारी कंपनियों IOC, HPCL, BPCL ने 19 किलो वाले कमर्शियल या हलवाई सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में इसके दाम में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब इसका नया दाम 2747.50 रुपये हो गया है। इससे एक महीने पहले यानी एक अगस्त को इस सिलेंडर के दाम में 209 रुपये की कटौती की गई थी। घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव की सूचना नहीं है।

महानगरों में अब क्या हो गया है दाम
सूत्रों से मिली सूचना के मुताबिक आज से दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का दाम 2747.50 रुपये हो गया है। इससे पहले इसका दाम 2738 रुपये था। मुंबई में इस सिलेंडर की कीमत अब 2701 रुपये हो गई है जबकि पहले यह 2691 रुपये थी। मतलब कि प्रति सिलेंडर कीमत में 10 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। चेन्नई में इसका दाम 2916.50 रुपये हो गया है। इससे पहले वहां इसकी कीमत 2906 रुपये थी। मतलब वहां कीमतों में 10.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उल्लेखनीय है कि इस सिलेंडर का उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग सर्विसेज आदि देने वाले कारोबारी करते हैं।

अगस्त में घटी थी कीमतें
इससे पहले एक अगस्त से इस सिलेंडर की कीमतों में 192 रुपये तक की कमी हुई थी। तब दिल्ली में इसका दाम 2930 रुपये से घट कर 2738 रुपये रह गया था। उससे भी एक महीने पहले मतलब कि एक जुलाई 2026 को भी 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती की गई थी। उस समय भी घरों में यूज होने वाले 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

इस साल कीमतें हो गई करीब दूनी
इस साल जनवरी से ही लगातार 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हो रहा है। पिछले साल 1 दिसंबर को इस सिलेंडर की कीमत 1580.50 रुपये थी। इस साल एक जनवरी में यह बढ़कर 1691.50 रुपये हो गया। फिर फरवरी में इसे बढ़ाकर 1740.50 रुपये कर दिया गया। मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से इसकी कीमत में दो बार बढ़ोतरी की गई थी। एक मार्च को इसकी कीमत बढ़ कर 1768.50 रुपये हुई और 7 मार्च को 1883 रुपये पहुंच गई। फिर 1 अप्रैल को यह 2078.50 रुपये का हो गया। मई में इसमें फिर इसकी कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। तब दिल्ली में इसकी कीमत 3,071.50 रुपये पर पहुंच गई थी। जून में इसकी कीमत में 42 रुपये का इजाफा किया गया था। हां, जुलाई और अगस्त में इसकी कीमतों में जरूर क्रमश: 183.50 रुपये और 192 की कटौती की गई थी।

रसोई गैस सिलेंडरों का क्या हाल
हम-आपके घरों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर में 14.2 किलो गैस भरा होता है। इस सिलेंडर की कीमत में इस महीने भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें आखिरी बार बदलाव 7 जून 2026 को हुआ था। इस समय दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। कोलकाता में इसकी कीमत 968 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये है।

NATIONAL : अन्ना हजारे की बिगड़ी तबीयत, किडनी की समस्या के चलते मुंबई के हॉस्पिटल में कराए गए भर्ती

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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की तबियत खराब होने के बाद उन्हें सोमवार को बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें वायरल फीवर और डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। रात खबर लिखे जाने डॉक्टरों द्वारा उनके ब्लड सहित अन्य स्वास्थ्य जांच जारी थी।

मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (89) को सोमवार रात करीब 8:30 बजे न्यू मरीन लाइन्स के पास बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। उन्हें वायरल इन्फेक्शन होने का शक है। अन्ना हजारे को पहले रालेगण सिद्धि के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें सड़क मार्ग से मुंबई लाया गया। क्योंकि उनका क्रिएटिनिन लेवल बढ़ गया था, जो किडनी की समस्या का संकेत है।

अन्ना हजारे का इलाज कर रहे डॉ गौतम भंसाली ने कहा कि हम कई तरह के टेस्ट कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्हें वायरल इन्फेक्शन है। उनमें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) बहुत ज़्यादा है और किडनी फेल होने के लक्षण दिख रहे हैं। खबर लिखे जाने तक टेस्ट चल रहे थे। पता चला है कि रालेगण सिद्धि के कई ग्रामीण भी हजारे के साथ अस्पताल आए थे।

भ्रष्टाचार-विरोधी और समाज सुधार अभियानों में शामिल रहने के लिए मशहूर अन्ना हजारे 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के दौरान देशभर में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मजबूत लोकपाल कानून की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी।

पिछले ही महीने हजारे ने इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के प्रोबेशनर्स के एक ग्रुप से कहा था कि भारत के युवा ही देश का भविष्य हैं और ईमानदारी व निस्वार्थ सेवा राष्ट्र-निर्माण के लिए जरूरी गुण हैं। अलग-अलग राज्यों के 20 आईपीएस प्रोबेशनर्स का यह ग्रुप (जिन्होंने हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग ली थी) जुलाई के आखिर में पश्चिमी महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में स्थित हजारे के पैतृक गांव ‘रालेगन सिद्धि’ गया था। उन्होंने वहां के वॉटरशेड डेवलपमेंट और ग्रामीण बदलाव के मॉडल का अध्ययन किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान अन्ना हजारे ने जोर देकर कहा था कि शांतिपूर्ण आंदोलन और लोकतांत्रिक बातचीत ही जनता की शिकायतों को दूर करने के एकमात्र तरीके हैं। सीजेपी का विरोध-प्रदर्शन खत्म होने के बाद उन्होंने कहा था कि कोई भी मुद्दा बातचीत से ही सुलझता है। बातचीत से समाधान निकलते हैं। तनाव पैदा करने और गलत रास्ते पर चलने से कुछ भी हल नहीं होगा। बातचीत सबसे जरूरी चीज है। मैंने 22 बार भूख हड़ताल की है, लेकिन कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। मामलों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। समाज का कल्याण और जो सही हो, वही किया जाना चाहिए।

इससे पहले पिछले महीने भी अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ गई थी। दरअसल उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में अहिल्यानगर में दो घंटे का ‘मौन आंदोलन’ किया था। मौन आंदोलन के दौरान फफक-फफकर रोने लगे। अन्ना ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास सुबह 11 बजे अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया और दोपहर एक बजे इसे समाप्त किया गया। इसके बाद वह इसी जिले में स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। कहा गया कि अन्ना हजारे की तबीयत ठीक नहीं थी फिर वो इसमें शरीक हुए। वो यहां कुछ देर रुके और फिर चले गए।

NATIONAL : BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !

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नई दिल्ली। भाजपा (BJP) नेतृत्व देश की नई पीढ़ी (New Generation) खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए अपनी आगे बनने वाली सरकारों (Governments) का नेतृत्व युवाओं (Youth) को सौंपे जाने की तैयारी में है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि उसकी भावी सरकारों के मुखिया साठ साल से कम उम्र के होंगे।

हालांकि, सरकार में वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया जाएगा। अगले साल भाजपा को सात राज्यों के चुनाव में जाना है, जिनमें पांच राज्यों में अभी उसके मुख्यमंत्री है। वहां पर यह बदलाव साफ दिखाई देगा। भाजपा के देशभर में अभी 17 मुख्यमंत्री हैं। इनमें पांच की ही उम्र साठ साल से अधिक है। सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं, जिनकी उम्र 47 वर्ष है। सबसे ज्यादा उम्र के त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा (73 वर्ष) हैं। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, मणिपुर के वाय खेमचंद सिंह साठ साल के ज्यादा के हैं।

भाजपा नेतृत्व ने संगठन में नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपकर साफ कर दिया था, कि अब वह नई पीढ़ी को आगे लाने जा रही है। जेन जी के आंदोलन के बने माहौल में भाजपा अब अपने इस फैसले को राज्यों में भी लागू करेगी। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कुछ अपवाद रखे जा सकते हैं।

गुजरात में हर्ष सांघवी नया चेहरा
भाजपा की इस कवायद में आने वाले चुनाव वाले राज्यों में गुजरात में पार्टी के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भावी नेता के रूप में उभर रहे हैं। मणिपुर की स्थिति अलग है। वहां पर अलग तरह से फैसला लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश और पंजाब जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वहां पार्टी अघोषित रूप से युवा चेहरे को सामने रखेगी।

पीएमम मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक “सेवा संकल्प अभियान” के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में सेवा और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करेगी। प्रदेश भाजपा मुख्यालय से सोमवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई। इतिहास

मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित इस अभियान का उद्देश्य उनके सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

अभियान को लेकर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला सोमवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह शामिल हुए।

NATIONAL : 6.25 करोड़ के भुगतान प्रस्ताव पर नहीं बनी सहमति, अब सुभाष चंद्र केस की सुनवाई करेगी बड़ी बेंच

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NCLT ने सुभाष चंद्र की दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय बेंच का गठन किया है। इससे पहले दो सदस्यीय बेंच में बहुमत की राय नहीं बन सकी थी। अब ₹6.25 करोड़ के रिपेमेंट प्लान पर 1 सितंबर 2026 को सुबह 10:15 बजे सुनवाई होगी।

सुभाष चंद्र से जुड़े दिवालिया मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की सुनवाई अब पांच सदस्यीय बेंच करेगी। इससे पहले दो सदस्यीय बेंच इस मामले में किसी एक राय पर नहीं पहुंच पाई थी। ऐसे में सुभाष चंद्र की ओर से पेश किए गए 6.25 करोड़ रुपये के रिपेमेंट प्लान पर अंतिम फैसला नहीं हो सका था।

अब पांच सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई 1 सितंबर 2026 को सुबह 10:15 बजे करेगी। इस सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी, क्योंकि इससे यह साफ हो सकता है कि सुभाष चंद्र के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।

दो सदस्यीय बेंच में नहीं बन पाई सहमति
मामले की सुनवाई पहले NCLT की दो सदस्यीय बेंच कर रही थी। हालांकि, दोनों सदस्यों के बीच मामले को लेकर एक जैसी राय नहीं बन सकी। किसी मामले में जब बेंच के सदस्यों के बीच सहमति नहीं बनती है और बहुमत की राय सामने नहीं आती, तो अंतिम आदेश देना मुश्किल हो जाता है।

यही स्थिति सुभाष चंद्र के मामले में भी सामने आई। दो सदस्यीय बेंच ने माना कि मामले में कोई बहुमत वाली राय सामने नहीं आई है। इसलिए बेंच की ओर से अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा सका।

₹6.25 करोड़ के रिपेमेंट प्लान पर नजर
इस मामले में सुभाष चंद्र की ओर से 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़ा एक रिपेमेंट प्लान पेश किया गया है। इसी प्रस्ताव और उससे जुड़े अन्य मुद्दों पर NCLT में सुनवाई चल रही है।

अब पांच सदस्यीय बेंच मामले को नए सिरे से देखेगी। बड़ी बेंच के सामने मामले के सभी संबंधित पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इसके बाद यह तय हो सकता है कि भुगतान योजना को लेकर क्या फैसला लिया जाए और सुभाष चंद्र से जुड़ी दिवालिया प्रक्रिया को आगे किस तरह बढ़ाया जाए।

1 सितंबर को होगी अहम सुनवाई
NCLT की पांच सदस्यीय बेंच 1 सितंबर 2026 को सुबह 10:15 बजे इस मामले की सुनवाई करेगी। दो सदस्यीय बेंच में अंतिम आदेश नहीं आने के बाद अब बड़ी बेंच का गठन इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुभाष चंद्र का नाम जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज से जुड़े विवादों और वित्तीय मामलों के कारण पहले भी सुर्खियों में रहा है। अब 6.25 करोड़ रुपये के रिपेमेंट प्लान और दिवालिया मामले पर NCLT की पांच सदस्यीय बेंच क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

NATIONAL : चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों का आज से पक्का मोर्चा: जाम करेंगे रोड, ये हैं मुद्दे

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) पानी और किसानों के कर्जा माफी जैसे मुद्दों को लेकर मंगलवार यानी 1 सितंबर से चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर पक्का मोर्चा लगाने जा रहा है जो 7 सितंबर तक जारी रहेगा। इस दौरान किसान सेक्टर 48-49 की एयरपोर्ट को जोड़ने वाली रोड को एक तरफ से जाम करेंगे।

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि चंडीगढ़ बॉर्डर पर एसकेएम का यह पहला बड़ा प्रदर्शन है। इस दिन-रात के मोर्चे के दौरान किसानों की मांगों पर प्रतिदिन चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि वह मंगलवार को सुबह चंडीगढ़ पहुंच जाएंगे, जिसके बाद ही बॉर्डर पर यह मोर्चा शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्य मांगों में पानी से संबंधित पुराने समझौते रद्द करना शामिल है।

इसके अलावा, गन्ने के किसानों को उचित और समय पर भुगतान की वह मांग कर रहे हैं। धरने में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों जैसे अहम मुद्दों पर भी आवाज उठाई जाएगी। नेताओं ने कहा कि वे सरकार के बातचीत के आमंत्रण पर पूरी तरह तैयार हैं। यूनियन ने मोर्चे की पूरी तैयारी कर ली है जिसके लिए किसानों ने अपने स्तर पर पुख्ता प्रबंध किए हैं। प्रदर्शनकारी अपने साथ लंगर का सारा जरूरी सामान लेकर जाएंगे। धरने वाले स्थान पर ही लंगर तैयार किया जाएगा।

NATIONAL : सोनिया गांधी की किताब नहीं छापेगा पेंगुइन, कुछ हिस्से हटाने को कहा, लेखिका नहीं हुईं राजी

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सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ को भारत में प्रकाशित करने से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने मना कर दिया है. प्रकाशक ने किताब के कुछ हिस्सों में बदलाव और संपादन की मांग की थी, जिसे लेखिका ने स्वीकार नहीं किया.कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ को भारत में प्रकाशित करने से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) पीछे हट गया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पेंगुइन ने किताब के एक हिस्से में कुछ संपादकीय (Author) बदलाव और अंश हटाने की मांग की थी, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया.

किताब का प्रकाशन की तारीख 10 नवंबर 2026 रखी गई थी. इसकी घोषणा अमेरिका स्थित Alfred A. Knopf, Penguin Random House के एक डिवीजन, ने की थी. नॉप ने पहले संस्करण की एक लाख प्रतियां छापने की बात कही थी.

द इंडियन एक्सप्रेस ने नॉप, सोनिया गांधी के एजेंट डेविड गॉडविन और PRHI CEO गौरव श्रीनागेश से प्रस्तावित बदलावों और कटौतियों पर सवाल भेजे थे, लेकिन रिपोर्ट के समय कोई टिप्पणी नहीं मिली. यह भी स्पष्ट नहीं है कि किताब के किस हिस्से में बदलाव मांगे गए थे.

पेंगुइन के दो अन्य विवादित मामले
सोनिया गांधी की किताब से पहले पेंगुइन इंडिया दो अन्य चर्चित पुस्तकों को लेकर भी सुर्खियों में रहा. जिसमें जनरल एमएम नरवणे की ‘Four Stars of Destiny’: पेंगुइन ने इस संस्मरण को प्रकाशित नहीं किया था, हालांकि उसके पास प्रकाशन अधिकार थे. किताब की प्रतियां अनधिकृत तरीके से प्रसारित होने का मामला सामने आया था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इसकी एक हार्ड कॉपी भी दिखाई थी. किताब के गलवान घाटी में भारत-चीन झड़प और अग्निपथ योजना से जुड़े हिस्से पहले मीडिया में सामने आ चुके थे.

इससे पहले जून में PRHI ने जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित ग्राफिक किताब The Once and Future Riot को प्रकाशित करने से मना कर दिया था. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कानूनी जांच के दौरान भारत के गलत नक्शे समेत किताब की कुछ चीजों पर आपत्ति जताई गई थी. सैको ने कहा था कि उनसे कुछ उद्धरण बदलने और किताब का एक हिस्सा हटाने को भी कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

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