Sunday, August 30, 2026
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WORLD : वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अब अमेरिका का कब्जा, ट्रंप का दावा- दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी ऑयल डील

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ 65 अरब बैरल से अधिक के प्रमाणित कच्चे तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण का ऐतिहासिक समझौता किया है। जानें इस ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ तेल सौदे के सभी पहलू।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। इस समझौते के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित कच्चे तेल के भंडार पर नियंत्रण हासिल करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फैसले की जानकारी देते हुए इसे “विश्व इतिहास की सबसे बड़ी ऑयल डील” करार दिया है।

किन नेताओं के बीच हुआ यह ऐतिहासिक समझौता?
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल सौदे की रूपरेखा और बातचीत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच गहन कूटनीतिक चर्चा के बाद तय हुई है। इस समझौते में निजी व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ भी रणनीतिक साझेदारी की गई है। सबसे खास बात यह है कि इस विशाल तेल सौदे को हासिल करने के लिए अमेरिकी करदाताओं का एक भी डॉलर खर्च नहीं हुआ है।

अमेरिका के तेल रिजर्व पर असर और आम जनता को राहत
इस सौदे के लागू होने से अमेरिका के ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में दूरगामी बदलाव देखने को मिलेंगे 65 अरब बैरल का यह नया भंडार जुड़ने से अमेरिका का कुल राष्ट्रीय तेल रिजर्व दोगुने से भी अधिक हो जाएगा। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि कच्चे तेल की भारी आपूर्ति से आने वाले समय में अमेरिकी नागरिकों के लिए पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कटौती होगी। वर्षों से आर्थिक संकट और बदहाली झेल रहे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को इस सौदे के जरिए नई गति मिलने की उम्मीद है।

मादुरो की गिरफ्तारी और वैश्विक तेल बाजार की हलचल
यह ऐतिहासिक डील पिछले कई महीनों के अमेरिकी कूटनीतिक दबाव, कड़े प्रतिबंधों और प्रत्यक्ष निगरानी के बाद संभव हुई है। यह समझौता वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक अमेरिकी सैन्य अभियान के जरिए हिरासत में लिए जाने और नारको-टेररिज्म के आरोपों में अमेरिका स्थानांतरित किए जाने के 9 महीने बाद हुआ है। अगस्त के शुरुआती हफ्तों में अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व गिरकर 300 मिलियन बैरल से नीचे आ गया था, जिसके बाद अमेरिका के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ करना बेहद जरूरी हो गया था। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल कच्चा तेल है, जो दुनिया की कुल आपूर्ति का लगभग 17% है। हालांकि, जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण वेनेजुएला अब तक अपनी क्षमता का 1% से भी कम उत्पादन कर पा रहा था।

BUSINESS : जियो के आईपीओ को सेबी की मंजूरी: 27 करोड़ नए शेयर जारी कर बाजार में उतरेगी कंपनी, निवेशकों के लिए खास क्या?

सेबी की मंजूरी के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की राह का बड़ा नियामकीय पड़ाव पार हो गया है। कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अब शेयर का भाव और आईपीओ से जुटाई जाने वाली कुल रकम तय होना बाकी है।

जियो प्लेटफॉर्म्स को अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और कनेक्टिविटी कंपनी ने शेयर बाजार में उतरने की दिशा में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है।

27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करने की तैयारी में कंपनी
कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की तैयारी में है। हर शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। खास बात यह है कि आईपीओ में ऑफर फॉर सेल का कोई हिस्सा नहीं होगा। यानी मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

सेबी ने जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट की प्रोसेसिंग स्थिति में बताया कि 28 अगस्त, 2026 वाले सप्ताह में कंपनी को टिप्पणियां जारी की गईं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आधिकारिक ऑफर डॉक्यूमेंट पोर्टल पर भी जियो के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी की स्थिति पहले ‘अप्रूव्ड’ दिखाई गई थी।

19 जून को डीआरएचपी दाखिल
कंपनी ने 19 जून को डीआरएचपी दाखिल किया था। दस्तावेज के मुताबिक, शेयरों का भाव बुक बिल्डिंग प्रक्रिया से तय होगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि आईपीओ के जरिए कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी। जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 19 जून को आईपीओ की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की थी। उस दिन जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने डीआरएचपी को मंजूरी दी थी। इसके बाद रिलायंस ने शेयर बाजारों को बताया था कि प्रस्तावित आईपीओ जरूरी नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा। इसी दिन रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, “जियो की प्रस्तावित लिस्टिंग दुनिया को दिखाएगी कि भारत वैश्विक स्तर, वैश्विक क्षमता और वैश्विक मूल्य वाली टेक्नोलॉजी कंपनियां बना सकता है।”

कई साल पुरानी है जियो की योजना
जियो को शेयर बाजार में लाने की योजना कई साल पुरानी है। 2019 में रिलायंस की वार्षिक आम बैठक में मुकेश अंबानी ने जियो और रिलायंस रिटेल, दोनों को अगले पांच वर्षों में सूचीबद्ध करने की दिशा में बढ़ने की बात कही थी। इसके बाद नवंबर 2019 में जियो प्लेटफॉर्म्स को रिलायंस के डिजिटल और कनेक्टिविटी कारोबार की होल्डिंग कंपनी के रूप में शामिल किया गया।

BUSINESS : दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी 3.89 रुपये महंगी, 29 अगस्त सुबह 6 बजे से बढ़े हुए रेट पर मिलेगी गैस

CNG Price Hike: दिल्ली और एनसीआर में सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों का सफर महंगा हो गया है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने सीएनजी के दामों में 3.89 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की है. नई दरें शनिवार 29 अगस्त सुबह 6 बजे से लागू हो जाएंगी. इस फैसले के बाद राजधानी में सीएनजी 83.09 रुपये से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलो मिलेगी. यह बढ़ोतरी नोएडा और गाजियाबाद समेत आसपास के सभी इलाकों में लागू होगी.

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाने वालों को महंगाई का झटका लगा है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने सीएनजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है. शनिवार, 29 अगस्त सुबह 6 बजे से सीएनजी के दाम 3.89 रुपये प्रति किलो बढ़ जाएंगे. इस इजाफे के बाद दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 86.98 रुपये प्रति किलो हो जाएगी. अब तक राजधानी में यह 83.09 रुपये प्रति किलो मिल रही थी. बढ़ी हुई नई दरें दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी तुरंत लागू होंगी. इससे ऑटो, कैब और प्राइवेट कार चालकों का सफर महंगा हो जाएगा.

मई में भी 11 दिनों के अंदर 6 रुपये महंगी हुई थी सीएनजी
दिल्ली-एनसीआर में इससे पहले मई के महीने में भी महज 11 दिनों के भीतर सीएनजी के दाम 6 रुपये तक बढ़ाए गए थे. उस दौरान 26 मई को 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद राजधानी में सीएनजी 81.09 रुपये से बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थी. इसके साथ ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी दरें बढ़कर 88.70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई थीं.

पब्लिक सेक्टर की कंपनी IGL ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें ‘काफी ज़्यादा’ हैं. कंपनी ने कहा कि ‘लागत का असर तेज़ी से बढ़ रहा है’, इसलिए ‘सीएनजी सप्लाई की निरंतरता और भरोसेमंदता बनाए रखते हुए इनपुट गैस की लागत में हुई बढ़ोतरी की आंशिक भरपाई के लिए अब 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम का बदलाव करना जरूरी हो गया है’.कंपनी ने अपने बयान में इसके साथ ही कहा, ‘इस बदलाव के बाद भी दिल्ली में CNG की खुदरा कीमत ग्राहकों के लिए सबसे किफायती विकल्पों में से एक बनी हुई है.’ इसमें आगे कहा गया, ‘सीएनजी ग्राहक आयातित स्पॉट एनएलजी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के असर से काफी हद तक बचे हुए हैं.’

BUSINESS : 1 सितंबर से 9 रुपए महंगा होगा दूध, इस शहर में डेयरी एसोसिएशन ने कर दिया ऐलान

चीनी, प्याज और अंडों के बाद अब दूध के दाम बढ़ने वाले हैं. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने एक सितंबर से दूध के दाम में 9 रुपए का इजाफा करने का ऐलान कर दिया है.

आम जनता को एक सितंबर से महंगाई का बहुत बड़ा झटका लगने वाला है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दूध की कीमतों में सीधे 9 रुपए की बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है. यह ऐलान मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने किया है. कीमतें बढ़ने के साथ ही मुंबई में दूध का मौजूदा होलसेल दाम 93 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 102 रुपए प्रति लीटर हो जाएगा.

मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने यह फैसला डेयरी जानवरों की बढ़ती कीमतों और जानवरों के चारे की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए लिया है. एसोसिएशन के प्रेसिडेंट चंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ये नई कीमतें मुंबई में 1 सितंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेंगी. यह फैसला जोगेश्वरी के दीवान सेंटर हॉल में हुई एक मीटिंग में लिया गया.

जानवरों के चारे में 25 फीसदी की बढ़ोतरी- एसोसिएशन

इस मीटिंग में यह बताया गया कि डेयरी जानवरों की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ जानवरों के चारे जैसे अनाज, तुरचुनी, चना चुन्नी की कीमतों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. यह भी कहा गया कि चारे, खली वगैरह की कीमतों में बढ़ोतरी से दूध प्रोड्यूसर्स पर फाइनेंशियल बोझ पड़ रहा है.

अब 102 रुपए बिकेगा दूध

बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट को देखते हुए दूध की कीमत 9 रुपए प्रति लीटर बढ़ाकर 102 रुपए लीटर कर दी गई है. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने साफ किया कि यह फैसला दूध प्रोड्यूसर्स को बढ़ती कॉस्ट से राहत देने के लिए लिया गया है.

दिल्ली-एनसीआर में दूध के रेट क्या हैं?

बता दें कि दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में अभी फुल क्रीम दूध 72 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है. वहीं लोकल दूधवाले 80 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से दूध बेच रहे हैं. गाय के दूध की कीमत 65 रुपए प्रति लीटर से 70 रुपए प्रति लीटर है. हालांकि स्थानीय डेयरी फार्म या खुला दूध विक्रेताओं के दाम इलाके के हिसाब से अलग-अलग होते हैं.

दूध का प्रकार (आधा लीटर)
(एक लीटर)
फुल क्रीम दूध (Full Cream Milk)(Amul Gold / Mother Dairy Full Cream) 36 रुपए 72 रुपए
टोंड दूध (Toned Milk)(Amul Taaza / Mother Dairy Toned) 29 – 30 रुपए 58 – 60 रुपए
गाय का दूध (Cow Milk)(Amul Cow Milk / Mother Dairy Cow Milk) 31 – 32 रुपए 62 – 64 रुपए
डबल टोंड / डाइट दूध (Double Toned)(Mother Dairy Live Lite / Amul Slim n Trim) 25 – 26 रुपए 50 – 52 रुपए
भैंस का दूध (Buffalo Milk – A2/Special) 38 – 40 रुपए 75 – 80 रुपए
टोकन मिल्क (Mother Dairy Token / Bulk Vended) — 54 रुपए

NATIONAL : वाल्मीकि निगम विवाद: मंत्री बी नागेंद्र ने दिया इस्तीफा, बोले- पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए हट रहा हूं

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वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला फिर कर्नाटक की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा के लगातार दबाव के बीच मंत्री बी. नागेंद्र ने पद छोड़ने का एलान किया। उनका कहना है कि वह पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए हट रहे हैं। क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मंत्रिमंडल से इस्तीफे का एलान कर दिया। उन पर लंबे समय से पद छोड़ने का दबाव था। भाजपा लगातार उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रही थी। नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया है, जिससे दल को शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा और खुद को उसकी ‘मनुवादी राजनीति’ का शिकार बताया।

यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि जिस निगम में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, वह अनुसूचित जनजातियों के विकास से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, निगम के धन को अलग-अलग खातों में भेजे जाने के आरोपों की जांच हुई है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

नागेंद्र ने क्या-क्या कहा?
बी नागेंद्र ने कहा कि वह भाजपा की ओर से दी जा रही ‘झूठी धमकियों’ से नहीं डरते और मुख्यमंत्री से मिलने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर बात करेंगे। नागेंद्र ने कहा, ‘मैं भाजपा की झूठी धमकियों से नहीं डरूंगा। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा। मैं मुख्यमंत्री से मिलने जा रहा हूं। मेरी वजह से पार्टी को शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। मैं मुख्यमंत्री के साथ इस मामले पर विस्तार से चर्चा करूंगा।’

सीएम डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने मुझे फ़ोन करके बताया। वह मुझसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं। शायद वह कृष्णा ऑफिस में होंगे। उन्होंने फोन पर कहा कि वह घर पर हैं या कृष्णा में कहीं हैं, मैं वहां पहुंचूंगा। आपने ही मुझे अभी बताया कि उन्होंने इसकी घोषणा कर दी है। मुझे भी फोन आया था। मैं उनसे मिलूंगा। उन्होंने फैसला किया है कि वह न सिर्फ मंत्री पद से, बल्कि एमएलए पद से भी इस्तीफा देंगे। इससे उन्हें बहुत दुख पहुंचा है। क्योंकि वह एक बेगुनाह इंसान हैं। मैंने इसकी जांच की है, मैंने सभी रिपोर्ट देखी हैं, मैंने सबसे बात की है। इसलिए उन्हें अपराधी की तरह दिखाना, जिस तरह से भाजपा ने चार बार जीत चुके एक दलित नेता के साथ बर्ताव किया है, इससे न सिर्फ़ उन्हें दुख पहुंचा है, बल्कि पूरे समुदाय और गरीब लोगों को भी दुख पहुंचा है, आज हर कोई दुखी है।

क्या है पूरा मामला?
महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम का विवाद मई 2024 में सामने आया था। निगम के लेखा अधिकारी पी. चंद्रशेखरन की मृत्यु के बाद मिले एक नोट में धन के अनधिकृत हस्तांतरण का आरोप लगाया गया था। इसके बाद जांच शुरू हुई। जांच में निगम के बैंक खाते से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेजे जाने के आरोप सामने आए। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, करीब 89.63 करोड़ रुपये के कथित अवैध हस्तांतरण की बात कही गई। कुछ रिपोर्टों में कुल कथित धन हेरफेर करीब 187 करोड़ रुपये बताया गया है। ये आरोप जांच एजेंसियों के हैं और इन पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।

NATIONAL : वाल्मीकि स्कैम: बी नागेंद्र ने दूसरी बार दिया कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा, प्रेस ब्रीफिंग में रो पड़े

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कर्नाटक में कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को डीके कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। वह दो साल में दूसरी बार ऐसा करने वाले मंत्री बन गए। नागेंद्र पर 89 करोड़ के घोटाले का आरोप है। बता दें इसी महीने की शुरुआत में कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इससे पहले वह 2024 में सिद्धरमैया सरकार में भी मंत्री रहे थे।

शुक्रवार शाम को इस्तीफे के एलान के साथ ही नागेंद्र भावुक हो गए और रोने लगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेंद्र ने कहा, ‘मैं संविधान में विश्वास करता हूं। हमने कई बार BJP से कहा कि वे विधानसभा में आकर मुझ पर लगे आरोपों पर चर्चा करें, लेकिन वे नहीं आए। सबूत कहां है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि BJP मनुस्मृति लागू करना चाहती है और उसकी आदिवासी-विरोधी सोच है; साथ ही कहा कि उन पर इसलिए हमला किया जा रहा है क्योंकि मैं दलित हूं। इसके बाद उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं।’

नागेंद्र पर क्या है आरोप?
बता दें भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में 89 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।

यह मामला तब सामने आया जब मई 2024 में निगम के अकाउंट्स ऑफिसर चंद्रशेखरन पी।ने आत्महत्या कर ली और एक नोट छोड़ा जिसमें बिना मंजूरी के फंड ट्रांसफर करने का आरोप लगाया गया था। जांच में पता चला कि निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम कई अन्य खातों में ट्रांसफर की गई थी।

जब समाचार चैनेल ने नागेंद्र से पूछा कि क्या पार्टी आलाकमान ने उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा था, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, मैं अपने फैसले खुद लेता हूं।’ कर्नाटक में नागेंद्र प्रमुख ST नेता हैं जो पार्टी द्वारा शिवकुमार को CM बनाने के फैसले लेने से पहले सिद्धरमैया की कैबिनेट में आदिवासी कल्याण मंत्री थे।

विवाद के बीच जून 2024 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। शिवकुमार के पद संभालने के बाद 3 अगस्त को उन्हें फिर से शामिल किया गया और योजना एवं सांख्यिकी विभाग का जिम्मा दिया गया।

कैसा रहा अब तक का सियासी सफर?
नागेंद्र ने 2008 में BJP के टिकट पर और फिर 2013 में कुदलिगी से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और बेल्लारी (ST-रिजर्व्ड) सीट से लगातार दो बार जीते।

उन्होंने कहा कि वे BJP को उसके प्रस्तावित विरोध मार्च के लिए कोई मुद्दा नहीं देना चाहते थे। कर्नाटक BJP ने राज्य में कांग्रेस सरकार की कथित नाकामियों को उजागर करने के लिए 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी, बेरोजगारी और भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा, नागेंद्र की पार्टी में वापसी भी उस 200 किलोमीटर लंबी पदयात्रा में एक बड़ा मुद्दा बनने की उम्मीद थी। राज्य BJP प्रमुख बी.वाई।विजयेंद्र ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी इसका उद्घाटन करेंगे।

SPORTS : आज के ही दिन क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय खेल दिवस, जानिए इसका इतिहास और महत्व

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नई दिल्ली: देश में खेलों की परंपरा का जश्न मनाने और भारतीय खेल के दिग्गजों को श्रद्धांजलि देने के लिए 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है. खास बात यह है कि यह हॉकी के दिग्गज मेजर ध्यानचंद को भी श्रद्धांजलि है. गुरुवार यानि 29 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय खेल दिव के दिन भारतीय हॉकी के दिग्गज मेजर ध्यानचंद का 119वां जयंती है.

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को अहमदाबाद के एक राजपूत परिवार में हुआ था. अपने पिता समेश्वर सिंह की तरह ही वे भारतीय सेना में शामिल हो गए और वहीं उन्हें इस खेल से लगाव हो गया. भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी का मूल नाम ध्यान सिंह था, लेकिन वे चांदनी रात में ही अभ्यास करते थे और इसलिए उनके साथियों ने उनका नाम ध्यानचंद रख दिया.

22 साल से अधिक के करियर में उन्होंने 400 गोल किए और टीम को तीन ओलंपिक पदक दिलाए. दिल्ली में राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम का नाम बदलकर 2002 में मेजर ध्यानचंद हॉकी स्टेडियम कर दिया गया. भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उन्होंने न केवल मैदान पर अपने वीरतापूर्ण प्रदर्शन से खेल में योगदान दिया, बल्कि बाद के वर्षों में कोच के रूप में भी योगदान दिया. वह पटियाला में राष्ट्रीय खेल संस्थान में मुख्य कोच थे. इसके साथ ही भारतीय हॉकी के दिग्गज मेजर ध्यानचंद के नाम पर हर साल खेल रत्न पुरस्कार दिया जाता है.

क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय खेल दिवस?
राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर मेजर ध्यानचंद के जीवन और उनके योगदान को याद करने के लिए और उनके योगदान को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है. इस दिन बच्चों और युवाओं के लिए खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं और उन्होंने मेजर ध्यानचंद के बारे में अवगत कराया जाता है.

इस तरह मनाएंगे राष्ट्रीय खेल दिवस
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर केंद्रीय युवा मामले और खेल और श्रम मंत्री मनसुख मदविया ने नागरिकों से कम से कम एक घंटे के लिए आउटडोर खेलों में भाग लेने के लिए कहा है. इसके साथ ही मंत्री ने नागरिकों से चार साल पहले राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए फिट इंडिया आंदोलन में भाग लेने का आग्रह किया.

राष्ट्रीय खेल दिवस पर फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में राष्ट्रीय खेल दिवस पर इंदिरा गांधी स्टेडियम में फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत की थी. इस मूवमेंट का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है. यह मूवमेंट लोगों को शारीरिक गतिविधि और खेल को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है. यह मूवमेंट लोगों को बीमारियों से बचने के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करने में मदद करता है. विभिन्न संस्थाएं विशेष फिटनेस कार्यक्रम और खेल आयोजनों का आयोजन करके इस दिन को मनाती हैं.

NNATIONAL : राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पद से हटाने की मांग, जज ने सीजेआई को लिखा पत्र

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत से राजस्थान हाईकोर्ट में किसी दूसरे हाईकोर्ट से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग, मामलों की सूची में हेरफेर, पक्षपात और अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं। जस्टिस मेहता ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से जस्टिस शर्मा का राजस्थान से बाहर तबादला करने की भी मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत से आग्रह किया है कि वे राजस्थान हाईकोर्ट के प्रमुख के तौर पर किसी दूसरे हाईकोर्ट से एक नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करें। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर कई आरोप भी लगाए हैं।

तीन पत्रों में हटाने की मांग
एक प्रमुख विधि पोर्टल ‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को लिखे तीन पत्रों में जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को तुरंत हटाने की मांग की। उन पर प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग, मामलों की सूची तैयार करने में हेरफेर और कुछ वकीलों व पक्षों के प्रति पक्षपात करने का आरोप लगाया गया।

दूसरे राज्य से मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग
राजस्थान हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होकर पहुंचे जस्टिस मेहता ने कथित तौर पर कई बार सीजेआई से किसी दूसरे राज्य से नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए मंजूरी मांगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा न करना ‘संस्थान के हित के पूरी तरह खिलाफ’ है।

‘अनुरोध को लगातार नजरअंदाज करना हित के खिलाफ’
जस्टिस मेहता ने एक पत्र में कहा,’मैं आपसे बार-बार अनुरोध कर रहा हूं कि राजस्थान हाईकोर्ट के लिए किसी दूसरे राज्य से मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का फैसला लें, ताकि इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को रोका जा सके। मेरी राय में, इस अनुरोध को लगातार नजरअंदाज करना संस्थान के हित के पूरी तरह खिलाफ है।’

जजों की नाराजगी का किया दावा
2 अगस्त के अपने पत्र में जस्टिस मेहता ने राजस्थान के अपने दौरों का जिक्र किया और दावा किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कई जजों ने उनसे मुलाकात की और जस्टिस शर्मा के कथित व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा अक्सर अपने साथी जजों को बदले की कार्रवाई, जैसे स्थानांतरण की धमकी देते हैं।

न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पर सवाल
जस्टिस मेहता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज के तरीके की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि उनके व्यवहार से ‘नेतृत्व के गुणों की पूरी तरह कमी’ जाहिर होती है।

मामलों की सूची और प्रशासनिक शक्तियों पर आरोप
10 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने कुछ वकीलों और पक्षों के प्रति कथित पक्षपात के कई मामलों का जिक्र किया और जस्टिस शर्मा द्वारा मामलों की सूची और प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। पत्र में एक आपराधिक मामले में दिए गए आदेश का भी जिक्र किया गया और आरोप लगाया गया कि जिस तरह से मामले को निपटाया गया, उससे कुछ पक्षों के प्रति पक्षपात का संकेत मिलता है। जस्टिस मेहता ने कहा कि इन सभी मामलों को एक साथ देखने पर ‘कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग’ का संकेत मिलता है।

‘घोर कुप्रबंधन’ और ‘संदिग्ध गतिविधियों’ का आरोप
17 अगस्त के अपने पत्र में जस्टिस मेहता ने कहा कि उन्होंने जस्टिस शर्मा के कथित ‘घोर कुप्रबंधन’ और ‘गंभीर रूप से संदिग्ध गतिविधियों’ के बारे में सीजेआई को पहले ही बता दिया था। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम जारी रखने की इजाजत क्यों दी जा रही है।

जज की पत्नी के खिलाफ कथित कार्रवाई का भी जिक्र
इस चिट्ठी में राजस्थान हाईकोर्ट के एक मौजूदा जज की तरफ से मिली जानकारी का भी जिक्र था। यह जानकारी जस्टिस शर्मा द्वारा उस जज की पत्नी के खिलाफ कथित तौर पर ‘बदले की भावना से की गई कार्रवाई’ के बारे में थी। उनकी पत्नी जिला न्यायपालिका में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं।

‘बदले की भावना के बावजूद अहम पद पर बने’
जस्टिस मेहता ने लिखा, “यह बहुत चिंता की बात है कि बदले की भावना वाले ऐसे रवैये के बावजूद जस्टिस एस.पी. शर्मा अभी भी हाईकोर्ट में अहम पद पर बने हुए हैं।”

जुलाई की शिकायत में भी लगाए गए थे आरोप
ये बातें उन आरोपों का भी हिस्सा थीं, जो 25 जुलाई, 2026 की एक अलग शिकायत में शामिल थे। यह शिकायत वकील पूजा त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ को सौंपी थी और इसकी प्रति जस्टिस मेहता और अन्य लोगों को भी भेजी गई थी।

स्थायी लोक अदालतों में नियुक्तियों पर सवाल
शिकायत में जयपुर और अजमेर में स्थायी लोक अदालतों में नियुक्तियों के दौरान आधिकारिक पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। साथ ही, नियुक्त किए गए कुछ लोगों के साथ कथित पारिवारिक या करीबी निजी संबंधों का भी जिक्र किया गया था।

नियुक्तियों में करीबी लोगों को लाभ देने का आरोप
आरोपों में यह भी शामिल था कि जयपुर मेट्रो नंबर 1 के लिए नियुक्त मध्यस्थ जस्टिस शर्मा के बचपन के दोस्त और उनकी बेटी के ससुर थे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि अन्य नियुक्तियों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों या सहयोगियों को शामिल किया गया था।

चार महिला वकीलों के नाम आगे बढ़ाने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि जस्टिस शर्मा ने हाईकोर्ट में पदोन्नति के लिए चार महिला वकीलों के नाम आगे बढ़ाए थे, जबकि वे सक्रिय रूप से वकालत नहीं कर रही थीं और उनके संबंध जस्टिस शर्मा के करीबी वरिष्ठ वकीलों या सेवानिवृत्त जजों से थे।

कॉलेजियम से जल्द कदम उठाने की अपील
जस्टिस मेहता ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से जल्द से जल्द कदम उठाने और जस्टिस शर्मा का राजस्थान से बाहर तबादला करने का आग्रह किया।

‘नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति हो’
उन्होंने लिखा,’इसलिए मेरा विनम्र अनुरोध है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम जल्द से जल्द बैठक करे और यह सुनिश्चित करे कि राजस्थान हाईकोर्ट में एक नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति हो और जस्टिस एस.पी. शर्मा का उनके अनुचित आचरण को देखते हुए तुरंत राज्य से बाहर तबादला कर दिया जाए।’ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस मेहता के पत्रों की प्रतियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अन्य सदस्यों और भारत के राष्ट्रपति को भी भेजी गई थीं।

नवंबर 2016 में बने थे हाईकोर्ट के जज
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को नवंबर 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था और बाद में तबादले के बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में भी काम किया। वे राजस्थान हाईकोर्ट लौट आए और 28 सितंबर, 2025 से उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

WORLD : नेपाल बाढ़ त्रासदी: अब तक 584 लोगों की मौत, 1942 अभी भी लापता; 93,000 से अधिक प्रभावित

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नेपाल में लैंगटांग नेशनल पार्क के पास ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़। 584 मौतें (579 नेपाल, 5 तिब्बत), 1942 लापता। 93,000 प्रभावित। रेस्क्यू अभियान जारी।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ से जो तबाही मची थी, उसमें मरने वालों की संख्या 584 तक पहुंच गई है। इसमें से 579 लोग नेपाल में और 5 लोग तिब्बत से हैं। दरअसल हुआ है कि हिमालय में लैंगटांग नेशनल पार्क के पास एक बड़े ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा। इससे पानी, कीचड़, पत्थर और बर्फ का बड़ा प्रवाह नदी-घाटियों से होकर गुजरा। इससे कई गाँव बह गए, बिजली घर, सड़कें और पुल टूट गए। इसी के चलते ये हादसा हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के अधिकारियों के अनुसार 1,942 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें सैकड़ों विदेशी भी हैं जो काम, ट्रेकिंग या तीर्थ यात्रा के लिए वहाँ थे। रेड क्रॉस का कहना है कि मौतों का आँकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कुछ सबसे प्रभावित इलाके अभी भी पहुँच से बाहर हैं।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज (IFRC) ने बताया कि कम से कम 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल मदद की जरूरत है। हजारों घर पूरी तरह नष्ट हो गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। संयुक्त राष्ट्र की नेपाल रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर लीला पीटर्स यहिया ने कहा कि 40 से ज्यादा पुल टूट गए या क्षतिग्रस्त हो गए और 40 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें पूरी तरह नष्ट हो गईं।

नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर से 100 से ज्यादा लोगों को बचाया गया। कई घायलों को काठमांडू के अस्पतालों में भेजा गया। कुछ शव बाढ़ वाले इलाके से सैकड़ों किलोमीटर दूर चितवन जिले तक बहकर पहुँचे, जो भारत की सीमा के पास है। शुक्रवार सुबह मलबे से बने एक अस्थायी बाँध के ओवरफ्लो होने से बचाव कार्य कुछ समय के लिए रोक दिया गया। इससे आगे और बाढ़ का खतरा बढ़ा। रसुवा जिले में लोग नदी के बढ़ते पानी से बचने के लिए पहाड़ियों की तरफ भागे।

बिदुर (नुवाकोट जिला) में त्रिशूली नदी फिर से उफनने लगी, इसलिए बचाव दल और वापस लौटे लोगों को दोबारा सुरक्षित जगह जाने को कहा गया। बिदुर शहर काफी हद तक बर्बाद हो चुका है। ज्यादातर घर बह गए। कुछ इमारतों के अवशेष कीचड़ में डूबे पड़े हैं। ज्यादातर प्रभावित इलाकों तक सिर्फ सेना के हेलीकॉप्टर से ही पहुँचा जा सकता है। बिदुर आर्मी कैंप से हेलीकॉप्टर हर पाँच मिनट में आ-जा रहे हैं।

नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी मदद ठुकरा दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियाँ खुद सर्च और रेस्क्यू कर रही हैं। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपनी टीमें भेजने की पेशकश की थी। तिब्बत की तरफ से जानकारी बहुत कम है। चीनी अधिकारियों ने वहाँ सिर्फ पाँच मौतों की पुष्टि की है।

नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है।[Read more]

NATIONAL : मुश्किल में नेपाल, मदद को आगे आया भारत; जयशंकर बोले- बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी 10 टन राहत सामग्री

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नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के बीच भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने 10 टन आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में वह नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।

नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल की बाढ़ से निपटने की कोशिशों में सहायता के लिए 10 टन आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं।

हर मुश्किल में नेपाल के साथ भारत
जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति भी अपनी सहानुभूति व्यक्त की। भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और दवाइयां नेपाल के राहत प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम हैं।

बाढ़ से प्रभावित नेपाल को सहायता भेज रहा भारत
भारत पड़ोसी देश नेपाल के उत्तरी जिलों में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ के बाद भारतीय वायु सेना के विमानों से राहत सामग्री भेज रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) पहल के तहत नेपाल को दवाइयों और राशन समेत आपातकालीन सहायता की खेप भेजी जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, सरकार प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचावकर्मियों को भी नेपाल भेजने की योजना बना रही है।तिब्बत से लगे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता करीब 400 लोगों में कम से कम 105 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।बाढ़ से नदी किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही हुई और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत की ओर से सुबह करीब नौ बजे (स्थानीय समयानुसार) भोटे कोशी नदी में बाढ़ आई। उन्होंने बताया कि अचानक आई बाढ़ से रसुवा और धादिंग जिलों के अलावा काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला भी प्रभावित हुआ।

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