Monday, August 10, 2026
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NATIONAL : भारी बारिश का रेड अलर्ट, दिल्ली-NCR, यूपी और उत्तराखंड में अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम? जानिए ताजा अपडेट

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शनिवार को दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में जमकर बारिश हुई। सड़कों में घंटों तक पानी जमा रहा। रविवार और सोमवार को मौसम कैसा रहने वाला है? मौसम विभाग ने इसकी जानकारी दी है।

देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। सड़कों में पानी जमा हुआ है। पहाड़ों में लैंडस्लाइडिंग और बादल फटने का डर लगातार बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों (10-11 अगस्त 2025) के लिए दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड और हिमाचल के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली-एनसीआर में दो दिन बारिश का है अनुमान
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को जमकर बारिश हुई। सुबह से बारिश का दौर शुरू हो गया, जो शनिवार शाम तक चलता रहा। दिल्ली की सड़कों में पानी जमा हो गया। दिल्ली एनसीआर में आज भी बारिश होने की संभावना जताई गई है। आसमान में काले बादल छाए हुए हैं। रविवार और सोमवार यानी दो दिन बारिश होने का अनुमान है। इस बीच दिल्ली का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27.5 डिग्री सेल्सियस रहने का भी अनुमान है।

यूपी के इन जिलों में होगी बारिश
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने लखनऊ, बाराबंकी, गोरखपुर और बहराइच में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी यूपी में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। तापमान 30 डिग्री से नीचे रह सकता है।

बिहार में भी भारी बारिश का अलर्ट
बिहार में मानसून ने जोर पकड़ लिया है। बांका, भागलपुर, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। रविवार और सोमवार को बिहार के कई जिलों में बारिश होने का अनुमान है। इस बीच तापमान 30-34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, लेकिन उमस भरी गर्मी बनी रहेगी।

हरियाणा के मानेसर, झज्जर, रेवारी और नूंह जैसे क्षेत्रों में रविवार और सोमवार को हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना है। इस दौरान 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश का रेड अलर्ट
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश दोनों ही पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड के कई जिलों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। हिमाचल में भी भारी बारिश के कारण सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। अगले 48 घंटों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है।

WORLD : ‘शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की कोई भूमिका नहीं’, बांग्लादेश की आपत्ति के बाद नई दिल्ली का दो टूक जवाब

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और हसीना द्वारा बांग्लादेश सरकार को लेकर दिए गए बयानों का समर्थन नहीं किया जाता।

नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली का स्टैंड क्लियर कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और वहां दिए गए बयानों का सरकार समर्थन नहीं करती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ‘भारत किसी भी ऐसे मंच पर कही गई बातों का समर्थन नहीं करता, खासकर उन टिप्पणियों का जो बांग्लादेश की मौजूदा सरकार को लेकर की गई हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

नेतन्याहू के साथ बातचीत पर भी विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
वहीं, विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन पर बातचीत की भी जानकारी दी। जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इसके अलावा पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी बातचीत हुई।

बांग्लादेश ने जताई थी आपत्ति
दरअसल, शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई है।

WORLD : चीन को भारत का करारा जवाब, अरुणाचल प्रदेश के 27 ऐतिहासिक स्थानों को आधिकारिक नक्शे में किया शामिल

चीन द्वारा बार-बार नाम बदलने की चालबाज़ियों को जवाब देते हुए भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया है।

नई दिल्ली: चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बार-बार बदले जाने के बीच भारत ने शुक्रवार को राज्य के 27 स्थानों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र में शामिल किया। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर इन्हें औपचारिक रूप से चिह्नित करने का उद्देश्य, इनकी सटीक पहचान को सुगम बनाना और जन-सामान्य के बीच बेहतर जागरूकता पैदा करना है

अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को ‘‘निरर्थक और बेतुका’’ बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस ‘‘अटल’’ सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश ‘‘हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।

आधिकारिक नक्शे में लोंग जू भी शामिल

भारत के आधिकारिक मानचित्र में शामिल किए गए 27 स्थानों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित लोंग जू भी शामिल है। यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती टकराव वाले स्थानों में से एक था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था।

लोंग जू के पास बना ये गांव भी चिह्नित
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के पास स्थित माजा गांव को भी मानचित्र में चिह्नित किया गया है। इस सूची में बिसा गांव के अलावा क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला को भी शामिल किया गया है।

जहां से शुरू हुआ था 1962 का युद्ध वो इलाका भी शामिल
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई वाले दर्रों में से एक थाग ला को भी आधिकारिक मानचित्र में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के शुरुआती संघर्षों में से एक इसी क्षेत्र में हुआ था। जयरामपुर को भी इसमें शामिल किया गया है। यह चांगलांग जिले का एक महत्वपूर्ण रसद केंद्र है, जिसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमा सीमा क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रदेश के ये इलाके भी शामिल
इस सूची में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश स्थित शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन और छोटा कुंडुन भी शामिल हैं। इसके अलावा धन बाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर, तवांग रोड पर स्थित रामनगर जसवंतगढ़ (जहां भारतीय शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक है), सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांवों को भी शामिल किया गया है। इस सूची में 1962 के युद्ध के नायक त्रिलोक सिंह थापा की याद में बनाए गए शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक और बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग अभयारण्य के पास स्थित कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर भी शामिल हैं।

चीन के गलत दावों पर क्या है भारत का कहना
चीन की ओर से भारतीय क्षेत्रों को ‘‘काल्पनिक नाम’’ देने के प्रयासों को भारत लगातार खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि इस तरह ‘‘बेबुनियाद विमर्श’’ गढ़ने की कोशिशें ‘‘अटल सच्चाई’’ को नहीं बदल सकतीं और इससे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

चीन ने कई नकली लिस्ट की जारी
चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में जांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों के नामों वाली दूसरी सूची जारी की गई और 2023 में 11 अन्य स्थानों के नामों की एक और सूची जारी की गई। चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है।

BUSINESS : भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, रूस से कच्चा तेल खरीदना होगा मुश्किल

रॉयटर, वाशिंगटन। अमेरिका में सीनेट ने लंबे समय से लंबित रूस की तेल और गैस बिक्री पर लगने वाले प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक (बिल) को मंजूरी दे दी है।

इस विधेयक से संबंधित कानून लागू होने का सर्वाधिक असर भारत, चीन, जापान और यूरोप के कुछ देशों पर पड़ सकता है। इन देशों के माल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप 100 प्रतिशत तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकेंगे।इस विधेयक के प्रस्तावकों में रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज सांसद दिवंगत लिंडसे ग्राहम भी शामिल थे। इस विधेयक को सितंबर में प्रतिनिधि सभा में पेश किए जाने की संभावना है।

वहां से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा और उनके हस्ताक्षर के बाद ये प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। ग्राहम यूक्रेन के कट्टर समर्थक अमेरिकी नेता थे।इस विधेयक के जरिये रूस पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य साढ़े चार वर्ष से यूक्रेन से युद्ध लड़ रहे रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है जिससे वह समझौते के लिए बाध्य हो।

रूस पर प्रतिबंध के समर्थन में 86 वोट और विरोध में 11 वोट पड़े। इस प्रतिबंध के लागू होने का व्यापक असर रूस के साथ ही भारत और चीन पर पड़ेगा।भारत यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात कर रहा है। यह आयात प्रतिदिन 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल का है। ईरान युद्ध छिड़ने के बाद भारत रूस से गैस का भी आयात कर रहा है।

NATIONAL : थरूर बोले- RSS की मूल विचारधारा अब भी वही, लेकिन भागवत के बयानों में दिख रहा बदलाव

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा को लेकर कहा है कि संगठन का मूल उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है और इस विचार में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनके बोलने के तरीके और नई पीढ़ी को लेकर उनके नजरिए में बदलाव दिखाई देता है।

थरूर ने यह बात मुंबई में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के कार्यक्रम में कही। इसी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं से बातचीत की थी। भागवत ने युवाओं को लेकर कहा था कि नई पीढ़ी को केवल निर्देश देने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए और उनसे संवाद किया जाना जरूरी है।

थरूर ने कहा कि वह करीब एक दशक से संघ प्रमुख के बयानों पर नजर रखते आए हैं। उनके मुताबिक, भागवत के हालिया वक्तव्यों में संवाद और नई पीढ़ी को समझने पर जिस तरह जोर दिया जा रहा है, वह पहले के मुकाबले अलग दिखाई देता है। हालांकि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि इसे RSS की मूल विचारधारा में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी संगठन की विचारधारा और उसके नेताओं के संवाद के तरीके में अंतर हो सकता है। उनके अनुसार, RSS का हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र से जुड़ा मूल नजरिया अभी भी मौजूद है, लेकिन भागवत जिस तरह युवाओं के सवालों को सुनने और उनसे बातचीत करने की बात कर रहे हैं, वह लोकतांत्रिक संवाद के लिहाज से एक अच्छा संकेत है।

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थरूर ने अलग-अलग विचारधारा वाले लोगों के साथ बातचीत को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम में किसी ऐसे व्यक्ति के साथ मंच साझा करना, जिसकी विचारधारा अलग है, इसका मतलब यह नहीं कि दोनों के विचार एक हो गए। लोकतंत्र में असहमति के बावजूद बातचीत की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए। उन्होंने उन लोगों पर भी प्रतिक्रिया दी जो भागवत के साथ एक ही मंच पर जाने को लेकर उनकी आलोचना कर रहे हैं।

कांग्रेस सांसद ने बदलती राजनीति में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में Gen-Z देश का सबसे बड़ा वोटिंग समूह बनने जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाताओं के सवालों और उनकी अपेक्षाओं को समझना जरूरी होगा। उनका कहना था कि राजनीति पुराने तौर-तरीकों के सहारे लंबे समय तक नहीं चल सकती।

थरूर ने कहा कि दक्षिण एशिया की राजनीतिक पार्टियों को भी बदलते समय के साथ अपनी कार्यशैली में बदलाव करना होगा। युवा अब सवाल पूछते हैं, जानकारी हासिल करते हैं और राजनीतिक दलों से सीधे जवाब चाहते हैं। ऐसे में केवल भाषण देने या आदेश देने के बजाय संवाद की जरूरत है।

उन्होंने कांग्रेस के भीतर अपनी स्थिति को लेकर भी बात रखी। थरूर ने कहा कि वह ऐसी पार्टी का हिस्सा हैं जिसकी विचारधारा उन्हें अपने विचारों के सबसे करीब लगती है। उन्होंने कांग्रेस को लोकतांत्रिक ढांचे में असहमति की गुंजाइश रखने वाली पार्टी बताया। उनका कहना था कि राजनीतिक दल के भीतर अलग राय रखना लोकतंत्र का हिस्सा है।

युवा आंदोलनों और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी थरूर ने आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीतिक दल किसी मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन उन्हें जनता से वैसा समर्थन नहीं मिल पाता जैसा बाद में किसी आंदोलन को मिल जाता है। ऐसे मामलों में सिर्फ जनता को दोष देने के बजाय राजनीतिक दलों को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उनके संदेश और लोगों की वास्तविक चिंताओं के बीच दूरी कहां रह गई।

थरूर ने यह भी कहा कि कांग्रेस को लोगों की नब्ज बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है। युवाओं के बीच बेरोजगारी, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और अवसर जैसे मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। राजनीतिक दल अगर इन सवालों पर युवाओं से सीधे संवाद नहीं करेंगे तो उनके लिए नई पीढ़ी से जुड़ना मुश्किल हो सकता है।

इससे पहले मोहन भागवत ने युवाओं से संवाद के दौरान Gen-Z को लेकर कहा था कि नई पीढ़ी को एंटी-नेशनल समझना सही नहीं है। उन्होंने कहा था कि जब उनकी पीढ़ी Gen-Z की उम्र में थी, तब बड़े लोगों की बात को आम तौर पर मान लिया जाता था और सवाल कम पूछे जाते थे। आज की पीढ़ी सवाल करती है और अपनी बात खुलकर रखना चाहती है।

भागवत ने यह भी कहा था कि नई पीढ़ी से आदेश के रूप में बात करने के बजाय संवाद किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अगर युवाओं से बातचीत नहीं होगी तो उनके भीतर मौजूद सवाल और असंतोष अलग-अलग रूपों में सामने आ सकते हैं।

थरूर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाता लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन राजनीतिक संवाद ने युवाओं की भागीदारी का तरीका भी बदल दिया है। ऐसे माहौल में RSS और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक संगठनों के सामने चुनौती यही है कि वे नई पीढ़ी के सवालों को किस तरह समझते और उनका जवाब देते हैं।

थरूर ने भागवत के बयान को इसी बदलते राजनीतिक माहौल में एक संकेत के तौर पर देखा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि संवाद की भाषा में बदलाव को RSS की मूल विचारधारा में बदलाव मानना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि आने वाले समय में राजनीतिक संगठन युवाओं से कितनी गंभीरता से बातचीत करते हैं और उनके सवालों को अपनी राजनीति में कितनी जगह देते हैं।

WORLD : सरकार बोली- विदेशी फंडिंग से जुड़ा बिल आंतरिक मामला:दूसरे देश कमेंट न करें; अमेरिकी सांसद ने कहा था- ये बिल ईसाइयों पर सीधा हमला

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सरकार ने FCRA (विदेशी फंडिंग विनियमन) संशोधन विधेयक पर साफ कर दिया कि यह भारत का आतंरिक मामला है। किसी दूसरे देश को इस पर कमेंट करने का अधिकार नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों जिनमें अमेरिका भी शामिल है। वहां विदेशी फंड और विदेशी अंशदान को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं।

दरअसल भारत ने अमेरिकी सांसद रिले मूर की टिप्पणी का जवाब दिया है। मूर ने 4 अगस्त को X पर लिखा था कि FCRA बिल ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है।

FCRA संशोधन विधेयक इसी साल बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। मानसून सत्र में इस पर चर्चा होनी है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह चर्चा का जवाब दे सकते हैं।

4 अगस्त को अमेरिकी सांसद का पोस्ट, लिखा- बिल आया तो संबंध बिगड़ेंगे

अमेरिकी सांसद रिले एम मूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ईसाई धर्म भारत में तब से मौजूद है। जब प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ दशकों बाद संत थॉमस मलाबार तट पर पहुंचे थे।

लेकिन ईसाई धर्म के इस लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन) कानून में ऐसा संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की अनुमति मिल सकती है।

यह ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है। यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।

FCRA क्या है, कानून क्यों बना, 2026 में क्या बदलाव, 3 सवाल-जवाब…

सवाल-1: FCRA कानून में सरकार क्या बदलाव करना चाहती है और क्यों?

जवाब: 1976 में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, यानी FCRA बनाया। मकसद- विदेशी ताकतें NGOs, शिक्षण संस्थानों और ट्रस्टों को पैसा देकर भारत के अंदरूनी मामलों को प्रभावित न कर सकें।

2010 में मनमोहन सिंह सरकार और 2020 में मोदी सरकार ने इसे और सख्त किया। जैसे- NGOs अब सिर्फ 20% विदेशी पैसा प्रशासनिक खर्च में लगा सकते हैं, पहले 50% की लिमिट थी। यह पैसा सिर्फ दिल्ली की एक तय SBI ब्रांच के खाते में ही आ सकता है। सब-ग्रांट पर भी रोक लगा दी गई, यानी बड़ी एनजीओ छोटी एनजीओं को फंड नहीं दे सकतीं।

अब 2026 में सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए…

  1. संस्थाओं को अपना काम और इलाका साफ बताना होगा: विदेशी पैसा किस खास काम के लिए और किस राज्य या UT में इस्तेमाल होगा। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखा जाएगा। पहले सामाजिक, धार्मिक जैसी ब्रॉडर कैटेगरी लिख दी जाती थी। ये नियम जून 2026 में लागू हो चुका है।
  2. विदेशी चंदे से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगाः धार्मिक गतिविधियों की लिस्ट में कई काम जैसे- पूजा स्थल बनवाना, धार्मिक शिक्षा, सत्संग वगैरह करवाने की अनुमति है, लेकिन अब विदेशी पैसे से दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ये नियम भी जून 2026 में लागू हो चुका है।
  3. रजिस्ट्रेशन नहीं, तो प्रॉपर्टी अथॉरिटी मैनेज करेगीः अगर किसी संस्था के FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म हो जाए, रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाए या रद्द हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी प्रॉपर्टीज की सुरक्षा, मैनेजमेंट और रखरखाव सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी करेगी। यही वो मुख्य प्रावधान है, जिसे FCRA संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश हुआ था और अभी संसद में पास होना बाकी है।

सरकार ने संशोधन विधेयक पेश करते हुए तर्क दिया था कि ये बदलाव FCRA के ऑपरेशनल गैप भरने के लिए किए जा रहे हैं। अब तक कोई साफ कानून नहीं था कि जब किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द या खत्म हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी संपत्ति और बचा पैसा किसके पास जाएगा? डेजिग्नेटेड अथॉरिटी इसी खाली जगह को भरती है। सरकार ने बताया कि उसका मकसद पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही व राष्ट्रीय सुरक्षा है।

जवाब: संशोधन विधेयक को लेकर 3 चिंताएं हैं…

  1. सालों पुरानी जमीन खोने का डर

अगर NGO रजिस्ट्रेशन रिन्यू करवाने के लिए समय पर आवेदन नहीं भेजते हैं या गृह मंत्रालय से उनका आवेदन खारिज हो जाता है, तो संपत्ति सरकार की तरफ से नामित अधिकारी के पास चली जाएगी। NGO को डर है कि इससे सालों में तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर उनके हाथ से निकल जाएगा।

कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने गृह मंत्री अमित शाह को विधेयक से जुड़ी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि NGO के कामकाज से जुड़े फॉर्म भरने में कुछ छोटी-मोटी गलतियां हो जाती है। ऐसी गलतियों पर लाइसेंस रद्द करने या संपत्ति जब्त करने जैसा सख्त एक्शन न लिया जाए। सिर्फ देश-विरोधी गतिविधियों पर ऐसा एक्शन हो।

यह भी आशंका जताई जा रही है कि जिनका लाइसेंस बरसों पहले ही खत्म हो चुका, उन पर भी नियम लागू होगा। हालांकि गृह मंत्री शाह ने साफ कहा कि ये संशोधन रेट्रोस्पेक्टिव नहीं होंगे, यानी पुराने मामलों पर लागू नहीं होंगे।

गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के सदस्यों से मिलकर आश्वासन दिया था कि FCRA संशोधन विधेयक ईसाइयों के खिलाफ नहीं है।
गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के सदस्यों से मिलकर आश्वासन दिया था कि FCRA संशोधन विधेयक ईसाइयों के खिलाफ नहीं है।
सवाल-3: क्या सरकार इसे पारित करा पाएगी?

जवाब: FCRA संशोधन बिल एक सामान्य विधेयक है। इसे पास कराने के लिए सदन में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों का सिर्फ साधारण बहुमत, यानी 50%+1 की जरूरत है।

लोकसभा में 543 सदस्य हैं। 3 सीटें खाली हैं। अगर सभी सदस्य मौजूद रहते हैं, तो बहुमत के लिए चाहिए 271 वोट। NDA के पास अभी 318 सीटें हैं।

राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 123 वोट चाहिए। NDA के पास 152 है। यानी दोनों सदनों में बिल पारित कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल है।

NATIONAL : E20 पेट्रोल पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कार की टंकी खोलकर बोले – ‘दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली’

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E20 पेट्रोल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर दावा किया है कि E20 ईंधन से कार और स्कूटर प्रभावित हो रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम सफल है और इसे लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। करीब 53 सेकेंड के वीडियो में राहुल गांधी कार की पेट्रोल टंकी खोलकर E20 लिखे ढक्कन को दिखाते हैं और दावा करते हैं कि इस ईंधन से लोगों की कार और स्कूटर खराब हो रहे हैं।

दरअसल राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि आमतौर पर लोग कहते हैं कि ‘दाल में काला है’, लेकिन इस मामले में ‘पूरी दाल ही काली है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार की कई लाइनें लगी हुई हैं और E20 ईंधन भी उनमें से एक है। राहुल गांधी का कहना है कि इससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है क्योंकि वाहन खराब होने और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला?
हालांकि राहुल गांधी के इस बयान के पहले केंद्र सरकार की ओर से भी इस मामले पर जानकारी दी गई थी। दरअसल केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का बायोफ्यूल ब्लेंडिंग कार्यक्रम सफल रहा है और E20 को लेकर कुछ लोग बेवजह विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में मिलाया जा रहा एथेनॉल पूरी तरह घरेलू स्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का भी खंडन किया था, जिनमें अमेरिका से बड़े पैमाने पर एथेनॉल आयात किए जाने का दावा किया गया था। दूसरी ओर, E20 को लेकर कुछ वाहन मालिकों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। खासकर 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि इस मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज कम होने, इंजन के कुछ पार्ट्स जल्दी घिसने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी दिक्कतें महसूस हो रही हैं।

E20 ईंधन क्यों ला रही सरकार?
दरअसल सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने जैसे लक्ष्य पूरे करने की कोशिश की जा रही है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने भी E20 ईंधन के विरोध में देशभर में टाउन हॉल अभियान चलाने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह अलग-अलग राज्यों में वाहन मालिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और अनुभवों को सामने लाएगी। दुनिया में ब्राजील एथेनॉल के इस्तेमाल का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, जहां कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से वाहन और ईंधन व्यवस्था विकसित की गई।

NATIONAL : प्रयागराज से पूर्वांचल को साधेंगे, यूपी में आज चुनावी शंखनाद करेंगे राहुल गांधी

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प्रयागराज से कांग्रेस उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान की शुरुआत करने जा रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को केपी इंटर कॉलेज मैदान पर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। दो घंटे के इस कार्यक्रम में नीट, आरओ/एआरओ पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस इसे पूर्वांचल के युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति के तौर पर देख रही है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से पूर्वांचल के युवाओं को साधेंगे। साथ ही यूपी में चुनावी शंखनाद भी करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान पर शाम को दो घंटे छात्रों से संवाद करेंगे। प्रयागराज प्रतियोगी छात्रों का शहर है। राजस्थान व उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के सफल समापन के साथ संगम को मथने लिए कांग्रेस ने प्रयागराज को चुना है। कांग्रेस के कई बड़े नेता पहुंच चुके हैं। शनिवार को यूपी के तकरीबन 25 जिलों के शहर व जिला अध्यक्ष समेत कांग्रेस के प्रदेश में सभी छह सांसद व कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे।

राहुल गांधी शाम 6:30 से 8:30 बजे तक केपी इंटर कॉलेज मैदान पर छात्रों से सीध संवाद करेंगे। वह नीट के साथ आरओ/आरआरओ व अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दे के साथ भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी, भर्तियों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी पर बात करेंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। राहुल छात्र संवाद में शामिल होने से पहले अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। वहां तकरीबन ढाई घंटे वह रहेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसद, विधायक और प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों एवं वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव से संबंधित तैयारियों को लेकर विचार-विमर्श भी करेंगे।

NATIONAL : मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सरकार का बड़ा दांव, FCRA बिल पर अमित शाह संभालेंगे मोर्चा; कांग्रेस ने भी जारी किया व्हिप

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मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सरकार FCRA संशोधन बिल पेश कर उसे पास कराने की तैयारी में है। गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दे सकते हैं। एनडीए और कांग्रेस ने सांसदों को मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं डिलिमिटेशन बिल पर सरकार विपक्ष से बातचीत कर रही है और जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र की संभावना भी है।

अगला हफ्ता संसद के मॉनूसन सत्र का आखिर हफ्ता है और ये इसलिए अहम है क्योंकि सरकार इस हफ्ते FCRA बिल (विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक) लाने और इसे पास कराने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह खुद इस बिल पर जवाब दे सकते हैं। मॉनसून सत्र में अब तक विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है और गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर 20 जुलाई के प्रोटेस्ट में हुए लाठीचार्ज पर जवाब देने की मांग कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने बिल की तैयारी पूरी कर ली है। विपक्ष भले ही इसका विरोध कर रहा है लेकिन सरकार के सीनियर मंत्रियों ने इसे लेकर अलग अलग संगठनों से मीटिंग भी की है। शनिवार और रविवार को भी इस पर काम किया जाएगा। एनडीए ने अपने सभी सांसदों से सोमवार से लगातार सदन में मौजूद रहने को कहा है। कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है और अगले हफ्ते सदन में रहने को कहा है

कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
कांग्रेस ने विपक्ष के दूसरे दलों से भी कहा है कि वे भी अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करें। कांग्रेस ने अपने व्हिप में कहा है कि सभी सांसद सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें।

डिलिमिटेशन बिल पर विपक्ष से बातचीत कर रही सरकार
डिलिमिटेशन बिल को लेकर भी सरकार विपक्ष से बातचीत कर रही है। संसदीय कार्यमंत्री किरन रीजीजू तीन बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बात कर चुके हैं। सरकार के सूत्रों का दावा है ये बिल पास कराने के लिए हमारे पास पूरे नंबर हैं। साथ ही इसकी संभावना से भी इनकार नहीं किया कि डिलिमिटेशन बिल को पास कराने के लिए मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद 15 अगस्त के बाद स्पेशल सत्र बुलाया जा सकता है। संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और यह 13 अगस्त तक प्रस्तावित है।

NATIONAL : आईआईटी का 57वां दीक्षांत समारोह आज, पीएम मोदी जेन जी को देंगे डिग्रियां और मेधावी छात्रों को पदक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री जेन जी से लेकर 74 वर्षीय शोधार्थी सहित 3036 छात्रों को डिग्री प्रदान करेंगे।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह शनिवार को आयोजित होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री जेन जी से लेकर 74 वर्षीय शोधार्थी सहित 3036 छात्रों को डिग्री प्रदान करेंगे।

प्रधानमंत्री इस अवसर पर मेधावी छात्रों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक और अन्य प्रतिष्ठित पदक भी देंगे। वे आईआईटी दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित एआई संचालित उच्च-प्रदर्शन सुपरकंप्यूटिंग सुविधा परम प्रज्ञा का उद्घाटन भी करेंगे। आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने प्रेस वार्ता के दौरान ये बताया। कहा कि इस वर्ष 3036 छात्रों को डिग्री मिलेगी।

इनमें 587 पीएचडी, 567 एमटेक और 1049 बीटेक के छात्र शामिल हैं। संस्थान ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 600 करोड़ रुपये के प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य किया है। पिछले एक वर्ष में 196 नए पेटेंट दाखिल किए गए और 26 नए स्टार्टअप स्थापित हुए। आईआईटी दिल्ली ने देशभर के 18 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ शैक्षणिक और शोध सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रगति की है, जिसमें 30 देशों के साथ 88 सक्रिय समझौते शामिल हैं।

प्रशासनिक और छात्र कल्याण पहल
आईआईटी दिल्ली ने छात्र कल्याण के लिए कई नई पहल की हैं। प्लेसमेंट में चयनित पूर्व छात्रों को अंतिम वर्ष के छात्रों का मेंटर बनाया गया है। कॉल फॉर अ फ्रेंड कार्यक्रम छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान कर रहा है। संस्थान के उप निदेशक अरविंद नेमा ने बताया कि पिछले वर्ष अक्तूबर से सभी प्रशासनिक कार्य पेपरलेस हो गए हैं।

परिसर विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था
आईआईटी दिल्ली के सोनीपत और अबू धाबी परिसर में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। झज्जर स्थित परिसर के लिए मिली जमीन को मिट्टी की गुणवत्ता के कारण वापस लौटाया जा रहा है। आरकेपुरम में संकाय सदस्यों और छात्रों के लिए आवास की व्यवस्था की जाएगी। दीक्षांत समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कार्यक्रम स्थल पर मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा।

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