Thursday, August 27, 2026
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Pakistan: ‘पाकिस्तान का GSP+ दर्जा छीनने की साजिश’, UNHCR में भाषण के बाद इमरान के बेटे पर सरकार ने लगाया आरोप

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पाकिस्तान सरकार ने पूर्व पीएम इमरान खान के बेटे कासिम खान पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूएनएचआरसी में भाषण देकर देश के जीएसपी प्लस दर्जे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जबकि पीटीआई ने इन आरोपों को खारिज किया। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-

पाकिस्तान सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खाने के बेटे कासिम खान पर आरोप लगाया कि उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपने भाषण के जरिये देश के जीएसपी प्लस दर्जे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। इस दर्जे के तहत पाकिस्तान को अपने निर्यात पर कम शुल्क (टैरिफ) का लाभ मिलता है।

किन मंत्रियों ने लगाए कासिम खान पर आरोप?
केंद्रीय सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार, पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी और सिंध के सूचना मंत्री शरजील मेमन ने मिलकर कासिम और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेता जुल्फी बुखारी की आलोचना की। उन्होंने कहा, यह पाकिस्तान का जीएसपी दर्जा छीनने की सोची-समझी साजिश है।

कासिम ने यूएनएचआरसी के सत्र को किया था संबोधित
कासिम ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के सम्मेलन को संबोधित किया था। उन्होंने परिषद से अपील की थी कि वह दखल दे और पाकिस्तान सरकार पर उनके पिता की तुरंत रिहाई के लिए दबाव डाले। इमरान खान अगस्त 2023 से कई मामलों में जेल में बंद हैं।

कासिम ने परिषद के 61वें सत्र के दौरान कहा कि यह परिषद और ओएचसीएचआर पाकिस्तान से इमरान खान के खिलाफ हो रहे कथित उत्पीड़न को तुरंत रोकने के लिए कहे। उन्होंने कहा, पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र के कार्य समूह की राय का पालन करना चाहिए और उनके पिता को रिहा करना चाहिए।

मंत्रियों ने क्या आरोप लगाए?
मंत्रियों ने कहा, कासिम और उनके साथियों का मकसद पाकिस्तान का जीएसपी प्लस दर्जा खत्म करवाना है। उन्होंने आरोप लगाया, यह पाकिस्तान विरोध समूह यूरोपीय संघ में इस्राइली नीति और प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की एक इकाई बीएमएम के नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, जीएसपी प्लस दर्जा मिलने के बाद पाकिस्तान के निर्यात में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है, जिससे कपड़ा क्षेत्र को बड़ा फायदा हुआ और हजारों नौकरियां बनीं।उन्होंने यह भी कहा, पीटीआई अब अपने राजनीतिक फायदे के लिए लोगों की रोजी-रोटी छीनने की कोशिश कर रही है।

मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर जवाब देते हुए मंत्रियों ने कहा, पीटीआई के शासनकाल में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की नेता मरियम नवाज को उनके पिता नवाज शरीफ के सामने गिरफ्तार किया गया था।

इमरान खान की पार्टी ने आरोपों को खारिज किया
हालांकि, पीटीआई ने सरकार के इन आरोपों को खारिज किया। पार्टी ने कहा कि वह पाकिस्तान के जीएसपी प्लस दर्जे को नुकसान पहुंचाने की कोई कोशिश नहीं कर रही।

BUSINESS : चीनी की नई दरें क्या?: 55 रुपये प्रति किलो हुई चीनी की थोक कीमत, सरकार का दावा- एक्स-मिल भाव में 18% की गिरावट

चीनी के आयात की अनुमति र सट्टेबाजी व जमाखोरी पर सरकार के अंकुश का असर अब दिखने लगा है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि चीनी की एक्स-मिल कीमत (थोक भाव) 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है और आने वाले दिनों में इनमें और गिरावट आएगी। हालांकि, मिल भाव में आई गिरावट का असर खुदरा बाजारों में दिखना अभी बाकी है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर मिल और खुदरा भाव में सात-आठ रुपये प्रति किलो का अंतर होता है। पिछले हफ्ते चीनी की एक्स-मिल कीमतें बढ़कर रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं।

चोपड़ा ने इसके लिए मिलों की ओर से भाव बढ़ाने को जिम्मेदार ठहराया था। कहा, कीमतों में उछाल बुनियादी वजहों से नहीं आया है। देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। खाद्य सचिव ने कहा, भले ही विपणन वर्ष 2025-26 अक्तूबर-सितंबर) के लिए चीनी का उत्पादन पहले के 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह गया है, फिर भी देश में स्टॉक काफी है। घरेलू मांग 285 लाख टन है।

10 लाख टन आयात को मिली मंजूरी

चीनी के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी। इसके साथ ही थोक खरीदारों के लिए भंडार सीमा भी लागू की थी।

कीमतों पर कितना असर

मिल भावों में गिरावट का खुदरा बाजार की कीमतों पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। चीनी की कीमत मंगलवार को लगभग एक रुपये बढ़कर करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

BUSINESS : 35 रुपये प्रति किलो मिलेगा प्याज: कांदा एक्सप्रेस के जरिये रियायती दरों पर आपूर्ति करने की कोशिश, योजना क्या?

प्याज संकट से निपटने के लिए सरकार देश के हर हिस्से में कांदा एक्सप्रेस के जरिये रियायती दरों पर आपूर्ति करने की कोशिश में जुटी है। इसके तहत 800 मीट्रिक टन प्याज की पहली खेप बुधवार को दिल्ली पहुंचेगी। इसे एनसीसीएफ, नैफेड और केंद्रीय भंडार पर 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा। कांदा एक्सप्रेस चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी भी जाएगी।

प्याज की ढुलाई के लिए कांदा एक्सप्रेस से महाराष्ट्र के नासिक से बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति की जा रही है। बाजार में अनियंत्रित कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है। देश भर में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 43 से 45 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो एक साल पहले करीब 27 रुपये था। थोक मूल्य एक साल पहले 21.23 रुपये के मुकाबले 35.58 रुपये हो गया है।

नैफेड के दिल्ली एनसीआर में 12 स्टोर

देश में 4500 खुदरा विक्रय केंद्र…देश में राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ के करीब 4500 खुदरा विक्रय केंद्र हैं। जबकि नैफेड के दिल्ली एनसीआर में 12 स्टोर हैं। बाकी मोबाइल वैन और ट्रक से प्याज की बिक्री होगी। केंद्रीय भंडार के देश भर में 114 स्टोर हैं। इससे पहले 2024-25 में भी प्याज के लिए कांदा एक्सप्रेस चलाई गई थी।

NATIONAL : स्वाइन फ्लू : दिल्ली में 2308 मरीज, नोएडा में 24 घंटे में बढ़े आठ गुना केस; एनसीआर के अस्पताल अलर्ट मोड में

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दिल्ली में बीमारी के मामले बढ़कर 2,308 व इन्फ्लुएंजा ए+बी के 3,000 हो गए हैं। वहीं, गौतमबुद्ध नगर जिले में मंगलवार को एक ही दिन में 105 नए मामले सामने आने से हड़कंप मच गया।  

दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली में बीमारी के मामले बढ़कर 2,308 व इन्फ्लुएंजा ए+बी के 3,000 हो गए हैं। वहीं, गौतमबुद्ध नगर जिले में मंगलवार को एक ही दिन में 105 नए मामले सामने आने से हड़कंप मच गया।  

राजधानी में मौसमी फ्लू और वेक्टर जनित बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने अंतर-विभागीय समीक्षा बैठक के बाद कहा कि सभी अस्पताल अलर्ट पर हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष एच1एन1 प्रमुख सबटाइप हैं, जबकि पिछले साल एच3एन2 थे। वहीं, डेंगू के 570 और मलेरिया के 215 केस मिले हैं। राहत की बात है कि डेंगू-मलेरिया से इस साल कोई मौत नहीं हुई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों की तैयारी, सर्विलांस, दवाओं और टेस्टिंग सुविधाओं की समीक्षा की। कहा, तैयारियां सिर्फ रिपोर्ट और आंकड़ों तक सीमित न रहें, असर जमीन पर दिखना चाहिए। पिछले हफ्ते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ बैठक में केंद्र सरकार ने पूरा सहयोग का आश्वासन दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, केंद्र की एडवाइजरी सभी अस्पतालों और विभागों को भेज दी गई है। एएलआई/एचएआरआई सर्विलांस को और मजबूत किया जाएगा। मामलों की जल्द पहचान, समय पर रिपोर्टिंग और एंटीवायरल दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
डेंगू-मलेरिया नियंत्रण के लिए स्प्रेइंग और फॉगिंग तेज करने को कहा गया है।

गौतमबुद्ध नगर जिले में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या सिर्फ 24 घंटे आठ गुना बढ़कर 120 पहुंच गई। सोमवार तक जिले में सिर्फ 15 मरीज थे। मरीजों की संख्या में तेज वृदि्ध को देखते हुए सख्त गाइडलाइन जारी की गई है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी के मुताबिक, मंगलवार को आए सभी मामलों की जांच निजी अस्पतालों में कराई गई है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, स्वाइन फ्लू के लिए विशेष लैब नहीं होने से पीजीआई में जांच की जा रही है। जिला अस्पताल में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच महंगी होने के कारण सभी संदिग्ध मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। इससे वास्तविक संक्रमितों की संख्या सामने आने में अंतर दिख सकता है। विभाग ने समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेने की अपील की है।

GUJARAT : गुजरात के सूरत में वंदे भारत पर पथराव, कोच के अंदर बैठीं थी यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन रेलवे की जिस वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर रही थीं। सूरत में मंगलवार को उसी ट्रेन पर पथराव की घटना सामने आई। इस ट्रेन में उनके अलावा दमन दीव और लक्ष्यदीप के प्रशासक प्रफुल पटेल भी मौजूद रहे। रेलवे ने पथराव की घटना के बाद एक युवक को अरेस्ट किया है।

गुजरात के सूरत में मंगलवार को बड़ी घटना सामने आई। मुंबई से अहमदाबाद जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर सूरत में पत्थर फेंकने की घटना सामने आई। जिस वंदे भारत ट्रेन पर पथराव की यह घटना हुई। उसमें यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सवार थीं। वंदे भारत पर पथराव की सूचना पर हड़कंप मच गया। रेलवे ने घटना की सूचना तुंरत जीआरपी को दी। जिस कोच पर पथराव हुआ। उसके अंदर ही यूपी की राज्यपाल मौजूद थीं। रेलवे ने इस घटना की पुष्टि की है, हालांकि अच्छी बात यह रही कि आनंदीबेन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। रेलवे ने इस घटना के बाद एक युवक को हिरासत में लिया। जानकारी के अनुसार यह हमला सूरत के उतरान रेलवे स्टेशन के पास हुआ। आनंदीबेन पटेल अपने परिवार के साथ अहमदाबाद जा रही थीं। पुलिस ने वंदे भारत पर पत्थर फेंकने वाले एक युवक को अरेस्ट किया है। जानकारी के अनुसार युवक मानसिक तौर पर अस्थिर है।

पथराव में टूटी कोच की खिड़की
सूरत के पास वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव में कोच की खिड़की को नुकसान पहुंचा। वह टूट गई। हालांकि आनंदीबेन पटेल को नुकसान नहीं पहुंचा। वंदे भारत में उनकी बेटी अनार पटेल भी साथ में थीं। रेलवे के आधिकारियों ने बताया है कि यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल सुरक्षित हैं, पत्थर फेंके जाने पर कोच की खिड़की टूटी गई। पश्चिम रेलवे के वडोदरा डिवीजन के पीआरओ अभिनव सक्सेना ने कहा कि मुंबई से अहमदाबाद आ रही ट्रेन 22916 वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थर फेंकने की घटना हुई। जैसे ही पथराव की घटना हुई तो हमने तुरंत जीआरपी को सूचित किया।

राज्यपाल के अकाउंट ने साझा की तस्वीरें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और गुजरात के पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल ने कुछ दिन की छुट्‌टी लेकर अपने गृह राज्य पहुंची थीं। उन्होंने इसके बाद दादरा नगर हवेली, दमन एवं दीप समेत जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेशों का दौरान किया था। उनके साथ वहां के प्रशासक प्रफुल पटेल भी मौजूद रहे थे। यूपी राज्यपाल के हैंडल से वंदेभारत एक्सप्रेस की यात्रा की तस्वीरें साझा की हैं। इसमें लिखा है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज वापी से अहमदाबाद तक वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा के दौरान फिल्म और टीवी अभिनेता अनंग देसाई एवं अन्य सहयात्रियों से भेंट कर फिल्म जगत और अन्य विषयों पर संवाद किया। दादरा नगर हवेली व दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल पटेल भी उपस्थित रहे। तस्वीरों में उनकी बेटी अनार पटेल भी मौजूद हैं। आनंदीबेन पटेल लंबे वक्त से यूपी की राज्यपाल हैं। उन्होंने राज्यपाल की पारी की शुरुआत मध्य प्रदेश से की थी।

NATIONAL : अयोध्या में गरमाया संतों का विरोध, चंपत राय के खिलाफ आंदोलन का ऐलान

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राम मंदिर चढ़ावे के कथित विवाद को लेकर मंगलवार को कारसेवकपुरम के पास ओम आश्रम में संतों की बैठक के दौरान हंगामा हो गया। संतों ने आरोप लगाया कि बैठक के बीच पुलिस और खुफिया विभाग के जवान पहुंचे और उन्हें आश्रम से बाहर निकालकर वहां ताला लगा दिया।

अयोध्या (एजैंसी): राम मंदिर चढ़ावे के कथित विवाद को लेकर मंगलवार को कारसेवकपुरम के पास ओम आश्रम में संतों की बैठक के दौरान हंगामा हो गया। संतों ने आरोप लगाया कि बैठक के बीच पुलिस और खुफिया विभाग के जवान पहुंचे और उन्हें आश्रम से बाहर निकालकर वहां ताला लगा दिया। इस दौरान संतों ने नाराजगी जताते हुए चंपत राय के खिलाफ नारे भी लगाए।

कम्प्यूटर बाबा की अध्यक्षता में हुई बैठक में संतों ने राम मंदिर चढ़ावे के कथित घोटाले की उच्चस्तरीय जांच के साथ सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। संतों का आरोप है कि एसआईटी की जांच में छोटे आरोपियों पर कार्रवाई हुई, जबकि बड़े लोगों को बचाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बैठक स्थल पर पुलिस और एलआईयू की मौजूदगी को लेकर संतों और पुलिस के बीच तनातनी की स्थिति बनी।

बैठक के बाद कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि संत समाज निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो एक लाख संतों के साथ अयोध्या पहुंचकर आंदोलन किया जाएगा। संतों ने कहा कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच चाहते हैं तथा वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

NATIONAL : बीजेपी का चिदंबरम के बयान पर तीखा पलटवार, संबित पात्रा बोले- गोलगप्पे वाले भी राहुल गांधी से ज्यादा समझदार

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बीजेपी प्रवक्ता ने पी. चिदंबरम के पुराने बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर तीखा तंज कसा और सब्जी बेचने वाली ‘अम्मा’ से लेकर गोलगप्पे वालों तक का जिक्र किया।

बीजेपी ने मंगलवार को ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) की ‘सफलता की कहानी’ का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी ने कहा कि गोलगप्पे और सब्जी बेचने वाले लोग भी पार्टी नेता राहुल गांधी से कहीं ज्यादा समझदार हैं। बीजेपी ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता पी चिंदमबरम ने यूपीआई की शुरुआत का मजाक उड़ाया था, जबकि बीते एक दशक में यह दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बनकर उभरा है। यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को की गई थी।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चिदंबरम ने यूपीआई को एक ‘बड़ी गलती’ बताया था और दावा किया था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। पात्रा संसद में चर्चा के दौरान पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम की ओर से यूपीआई के बारे में की गई उस टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब लोग डिजिटल भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

‘अम्मा’ से लेकर गोलगप्पे वाले तक, राहुल पर बीजेपी का तंज

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, ‘चिदंबरम जी, आपके क्षेत्र में, मेरे क्षेत्र में और देश के हर हिस्से में सब्जी बेचने वाली ‘अम्मा’ भी राहुल गांधी से कहीं ज्यादा समझदार है।’ उन्होंने कहा, ‘चिदंबरम ने गोलगप्पे बेचने वालों का मजाक उड़ाया था। आज गोलगप्पे की दुकानों पर भी पेटीएम से भुगतान की सुविधा मौजूद है। गोलगप्पा बेचने वाले भी राहुल गांधी से कहीं ज्यादा समझदार है। राहुल गांधी को उनसे सीखना चाहिए।’

पात्रा ने कहा, ‘सब्जी बेचने वाले की समझ को कमतर करके मत आंकिए। छोटे-मोटे काम करने वाले की समझ को भी कमतर करके मत आंकिए। लोग गांधी परिवार और उसके वंशजों से कहीं ज्यादा समझदार हैं।’

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी चिदंबरम की टिप्पणी से जुड़ा वीडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट किया और लिखा, ‘उन्हें गलत साबित करने के 10 साल पूरे हुए।’
कांग्रेस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए दावा किया कि आज भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा जिस बुनियाद पर खड़ा है, उसकी आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ही रखी थी। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, ‘और सबसे जरूरी बात, आइए उन छोटी सोच वाले और श्रेय लेने के भूखे लोगों को नजरअंदाज करें, जो काम तो बहुत कम करते हैं, लेकिन बातें बहुत ज्यादा करते हैं-भले ही वे ‘टेलीप्रॉम्प्टर’ की मदद से ऐसा करते हों।’
Pellet Gun Case में FIR के बाद क्या बोले राहुल और प्रियंका गांधी ?

पात्रा ने यूपीआई की ‘सफलता की कहानी’ बयां करते हुए कहा कि शुरुआत में यूपीआई के जरिये 1.78 करोड़ लेन-देन हुए थे, जिनका कुल मूल्य ₹0.07 लाख करोड़ था।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में यूपीआई से किए जाने वाले लेन-देन की संख्या 2016-17 के 1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ हो गई, जो इसमें 13,000 गुना की जबरदस्त बढ़ोतरी को दिखाता है।

पात्रा ने कहा कि 2025-26 में यूपीआई के जरिये हुए लेन-देन का कुल मूल्य बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया, जबकि 2016-17 में यह केवल ₹0.07 लाख करोड़ था, यानी इससमें करीब 4,000 गुना बढ़ोतरी हुई।

उन्होंने कहा, ‘आज यूपीआई रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मंच बन गया है और यह 11 देशों में उपलब्ध है। यूपीआई सुविधा उपलब्ध कराने वाले बैंकों की संख्या भी 2016-17 में 44 से बढ़कर आज 703 हो गई है।’
यूपीआई की वृद्धि की सराहना करते हुए पात्रा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तंज कसा। इसके लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘सिलसिला’ के एक मशहूर गाने की कुछ पंक्तियों का इस्तेमाल किया।

पात्रा ने कहा, ‘ये कहां आ गए हम यूं ही साथ चलते-चलते! सिलसिला! वो गाना याद आ रहा है। कौन साथ चल रहा है? जनता और मोदी जी; जनता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार।’
उन्होंने कहा, ‘दूसरी ओर, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) है। वे कहते हैं : ‘तुम होते तो ऐसा होता, तुम होते तो वैसा होता।’ इससे उनका मतलब यह है कि अगर वे सत्ता में होते, तो शायद व्हॉट्सएप का नाम ‘राजीव गांधी गप-शप योजना’ रखा जाता और हर प्रतिमा का नामकरण गांधी परिवार के नाम पर किया जाता।’

NATIONAL : अब गांव में ही मिलेगा रोजगार! केंद्र ने शुरू किया ‘मिशन समृद्ध गांव’; गरीबी खत्म करने का लक्ष्य

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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में ‘मिशन समृद्ध गांव’ योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के माध्यम से गांवों में गरीबी खत्म करने का लक्ष्य है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में ‘मिशन समृद्ध गांव’ योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के माध्यम से गांवों में गरीबी खत्म करने का लक्ष्य है।

मध्य प्रदेश के चयनित ब्लॉकों में पायलट मॉडल के रूप में शुरुआत कर इसे पूरे देश में लागू किया जाना है। इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य ऐसे मॉडल गांव विकसित करना है, जहां हर परिवार के पास रोजगार हो, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों और लोगों को मजबूरी में पलायन न करना पड़े।

मिशन के तहत मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी और देवास जिले के खातेगांव ब्लॉक में पायलट मॉडल विकसित किए जाएंगे, जहां विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय के माध्यम से गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और समग्र ग्राम विकास को साकार किया जाएगा। सफल मॉडल को बाद में देश के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।

NATIONAL : अब आधिकारिक तौर पर केरल हो गया केरलम, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की अधिसूचना जारी कर दी है, जो मंगलवार से प्रभावी हो गया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने हाल ही में इस बिल को मंजूरी दी थी।

गृह मंत्रालय ने केरल का नाम ‘केरलम’ अधिसूचित किया।

यह बदलाव मंगलवार से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने नाम परिवर्तन बिल को मंजूरी दी थी।

मंगलवार को जारी एक गजट नोटिफिकेशन में गृह मंत्रालय ने कहा, “केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2026 की धारा 1 की उप-धारा (2) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 25 अगस्त, 2026 को वह तारीख तय करती है जब उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।”

इसी महीने राष्ट्रपति मुर्मू ने बिल को दी थी मंजूरी
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल का नाम बदलकर केरलम करने वाले बिल को मंजूरी दे दी थी जिसके बाद यह कानून बन गया। लोकसभा ने 11 अगस्त को केरल (नाम परिवर्तन) बिल पास किया था और उसके बाद राज्यसभा ने 12 अगस्त को इसे मंजूरी दी।

जून 2024 में केंद्र को भेजा था प्रस्ताव
राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केरल विधानसभा ने 2024 में एक प्रस्ताव पास किया था जिसमें केंद्र से राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के लिए कानून लाने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा, “बिल में यह प्रावधान है कि केरल राज्य को केरलम राज्य के नाम से जाना जाएगा और इसलिए केरल का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव है।”

विधानसभा ने सर्वसम्मति से पास किया था प्रस्ताव
केरल सरकार ने प्रस्तावित नाम परिवर्तन पर राज्य विधानसभा का प्रस्ताव जून 2024 में केंद्र को भेजा था। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने बिल को राज्य विधानसभा के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा, जिसके बाद विधानसभा ने सर्वसम्मति से बिल से सहमत होते हुए एक प्रस्ताव पास किया।

NATIONAL : डिफेंस सेक्टर में आएगी बड़ी क्रांति! DRDO की घातक मिसाइल तकनीक से अब निजी कंपनियां बनाएंगी हथियार

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क्या भारत का डिफेंस सेक्टर अब पूरी तरह बदलने वाला है? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की घातक मिसाइल तकनीकों को भारतीय निजी रक्षा कंपनियों को भी देने की मंजूरी दे दी है.

भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की ओर से विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय रक्षा कंपनियों को सौंपने की अनुमति दे दी है. इस मंजूरी के बाद घरेलू रक्षा उद्योग निर्धारित मानकों और नियामकीय शर्तों के अनुरूप देश में ही मिसाइलों का निर्माण कर सकेंगे.

इस निर्णय को रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को गति देने वाला अहम कदम माना जा रहा है. इससे निजी कंपनियों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों की भूमिका और मजबूत होगी. साथ ही, डीआरडीओ की ओर से विकसित उन्नत तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर बड़े स्तर पर उत्पादन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस पहल से देश की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और रक्षा क्षेत्र का औद्योगिक ढांचा और अधिक सशक्त होगा. इसके अलावा एमएसएमई, स्टार्टअप्स और अन्य तकनीकी साझेदारों को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी.

सरकार का लक्ष्य रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है. यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नवाचार और तकनीकी सुधारों को भी प्रोत्साहित करेगा.

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