Saturday, October 3, 2026
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NATIONAL : अधीर रंजन ने ममता बनर्जी को दिया कांग्रेस में लौटने का प्रस्ताव, तृणमूल ने दिया ये जवाब

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अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी से कांग्रेस में लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि बंगाल में कांग्रेस उनका नेतृत्व स्वीकार करेगी. इस पर TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आने पर पार्टी इस पर चर्चा करेगी.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से कांग्रेस में लौटने की अपील की. उन्होंने कहा कि ममता अपने साथ बचे हुए विधायकों और सांसदों को लेकर कांग्रेस में शामिल हो जायें. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार करने और उनके साथ काम करने के लिए तैयार है.

अलग इकाई की जरूरत नहीं : चौधरी
तृणमूल कांग्रेस में जारी बगावत का हवाला देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हार के बाद पार्टी के पास ज्यादा कुछ नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि इस समय किसी अलग राजनीतिक इकाई की जरूरत नहीं है. ममता बनर्जी ने करीब तीन दशक पहले कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनायी थी.

‘आपके नेतृत्व में बंगाल में काम करेंगे’
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन का सहारा ले चुकी हैं. इसलिए उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बंगाल में कांग्रेस उनके नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार है. चौधरी ने ममता से अपना ‘बोझ पीछे छोड़कर’ कांग्रेस में शामिल होने की अपील भी की.

‘बोझ’ वाले बयान में अभिषेक का संदर्भ
चौधरी की ‘बोझ’ वाली टिप्पणी को ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के संदर्भ के तौर पर देखा गया. हालांकि, अधीर रंजन ने अपने बयान में अभिषेक का नाम नहीं लिया.

TMC ने कहा- औपचारिक प्रस्ताव आये तो होगी चर्चा
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने अधीर रंजन के प्रस्ताव पर कहा कि पार्टी इस पर तभी विचार करेगी, जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव आता है. उन्होंने कहा कि चौधरी ने वही कहा, जो उन्हें लगा और फिलहाल तृणमूल एक अलग पार्टी है.

सौगत रॉय बोले- अभिषेक के बिना फैसला संभव नहीं
सौगत रॉय ने अधीर रंजन चौधरी की ‘बोझ’ वाली टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी के बारे में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता. उन्होंने अभिषेक को तृणमूल का नेता और राष्ट्रीय महासचिव बताया. साथ ही कहा कि अगर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव आता है, तो उस पर पार्टी में चर्चा हो सकती है.

TMC के भीतर संगठनात्मक संकट का दावा
यह बयान ऐसे समय आया है, जब तृणमूल कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के बाद संगठनात्मक संकट और बगावत को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है. खबर है कि कुछ बागी विधायकों ने खुद को भाजपा सरकार के सामने वास्तविक विधायी विपक्ष के रूप में पेश करने की कोशिश की है.

बागी सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता चुना
बागी सांसदों के एक समूह ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया है. वे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गये हैं और केंद्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दिया है.

BJP ने TMC के राजनीतिक भविष्य पर उठाए सवाल
इस बीच, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता देवजीत सरकार ने भी तृणमूल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि तृणमूल का गठन कांग्रेस से अलग होकर माकपा से लड़ने के लिए हुआ था. उसी मुद्दे पर वह सत्ता में आयी थी. देवजीत ने कहा कि अब तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर है. इसलिए उसके पास कोई और मकसद नहीं बचा है.

NATIONAL : पिकनिक मनाने आए पुणे के आठ छात्रों की डूबकर मौत, महाराष्ट्र के रायगढ़ में बड़ा हादसा

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महाराष्ट्र के रायगढ़ में एक बड़ा हादसा सामने आया है। रायगढ़ के दिवेआगर बीच पर पुणे से आए आठ छात्रों की डूबने से मौत हो गई। एक निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाले छात्र पिकनिक के लिए पुणे से रायगढ़ पहुंचे थे। छात्र नहाते वक्त पर बड़ी लहरों में फंस गए।

मुंबई: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बड़ा हादसा सामने आया है। पुणे के एक निजी कोचिंग क्लास से आए आठ छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा रायगढ़ जिले के दिवेआगर बीच पर हुआ। समुद्र में नहाने के दौरान तेज लहरों की चपेट में आने पर छात्र खुद को नहीं बचा पाए। छात्र महाराष्ट्र के पुणे जिले के आलंदी से पिकनिक मनाने आए थे। कड़ी मशक्कत के बाद समुद्र से सभी आठ छात्रों के शव बाहर निकाल लिए गए। पुणे से रायगढ़ के इस बीच की दूरी करीब 166 किलोमीटर है।

जानकारी के अनुसार सभी छात्र पुणे के आलंदी के रहने वाले हैं। वे दिवेआगर बीच नहाते वक्त ही हादसे का शिकार बने। ये छात्र पुणे के आलंदी की एक प्राइवेट कोचिंग क्लास से आए थे। सभी छात्र 11वीं और 12वीं कक्षा के साइंस के स्टूडेंट हैं। स्थानीय लोग पीड़ितों को बचाने के लिए दौड़े और उन्हें बोरली प्राइमरी हेल्थ सेंटर ले गए। जहां पहुंचने पर मेडिकल अधिकारियों ने सभी आठों को मृत घोषित कर दिया।

प्रसिद्ध तीर्थस्थल है यह बीच
पुलिस और अधिकारियों ने इस दुखद घटना की जांच शुरू कर दी है। ऐसा मान जा रहा है कि समुद्र के पानी की गहराई और लहरों का अंदाजा नहीं होने के कारण यह दर्दनाक हादसा होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है। दिवेआगर रायगड के श्रीवर्धन तालुका का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। सभी छात्रों के शवों को आगे की कार्रवाई के लिए बोर्ली पंचतन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है।

चार किलोमीटर लंबा है यह बीच
यह बीच लगभग 4 किलोमीटर लंबा है और नारियल, सुपारी तथा सुरु के पेड़ों से घिरा हुआ है। पर्यटकों के लिए यहां जेट स्की, बनाना राइड और बोट राइड जैसी कई वाटर एक्टिविटी उपलब्ध हैं। सुबह के समय यहां हजारों की संख्या में सीगल्स दिखाई देते हैं और यहां से सूर्यास्त का नजारा बहुत मनमोहक होता है। यहां प्रसिद्ध सुवर्णा गणेश मंदिर और प्राचीन रूपनारायण मंदिर भी स्थित हैं।

सुनेत्रा पवार ने की कलेक्टर से बात
इस हादसे को लेकर राज्य की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार रायगढ़ के कलेक्टर से बात की। उन्होंने दिवेआगर बीच पर हुई दुखद घटना में मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सुनेत्रा पवार ने प्रशासन को सभी जरूरी मदद तुरंत उपलब्ध कराने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

JAMMU KASHMIR : बर्फबारी से पहले घुसपैठ की चुनौती, सीमा से अंदरूनी इलाकों तक सुरक्षा तंत्र अलर्ट

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बर्फबारी से पहले जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ रोकने और आतंकवाद रोधी अभियानों को मजबूत करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है। सेना कमांडर और डीजीपी लगातार सीमावर्ती व संवेदनशील जिलों का दौरा कर ऑपरेशनल तैयारियों, सुरक्षा ग्रिड और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का जायजा ले रहे हैं।

बर्फबारी शुरू होने से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है। सीमा से लेकर अंदरूनी इलाकों तक सुरक्षा तंत्र की तैयारियों को परखने के लिए सेना और पुलिस के शीर्ष अधिकारी फील्ड में पहुंच रहे हैं। उत्तरी कमान के प्रमुख पिछले दस दिनों में लद्दाख, दक्षिण कश्मीर व अखनूर के अग्रिम इलाकों का दौरा कर सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैयारियों की समीक्षा की।

वहीं पुलिस महानिदेशक ने डोडा, जम्मू, पुंछ-राजोरी और कश्मीर संभाग के बडगाम समेत विभिन्न जिलों में पहुंचकर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। उत्तर कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने चार सितंबर को लद्दाख के अग्रिम इलाकों का दौरा कर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों की ऑपरेशनल तैयारी देखी।

लद्दाख में सेना के सामने चीन और पाकिस्तान की चुनौती है। बर्फबारी के दौरान यह चुनौती और ज्यादा बढ़ जाती है। इसके बाद छह और 12 सितंबर को उन्होंने सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दक्षिण कश्मीर के अंदरूनी इलाकों का दौरा किया। काउंटर टेररिज्म ग्रिड की समीक्षा की। यहां सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद रोधी अभियानों और जवानों की तैयारी पर जानकारी ली थी। दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम व शोपियां जिले आते है जो सुरक्षा दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है।14 सितंबर को उन्होंने अखनूर सेक्टर के अग्रिम क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति और सैन्य इकाइयों की तैयारी का जायजा लिया गया। लगातार हो रहे ये दौरे सीमा सुरक्षा के साथ आतंकवाद रोधी मोर्चे पर भी सेना की सक्रियता को दर्शाते हैं।

जिलों में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था परख रहे डीजीपी
दूसरी ओर डीजीपी नलिन प्रभात भी अलग-अलग जिलों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। डोडा, जम्मू, पुंछ-राजोरी और कश्मीर संभाग के बडगाम समेत अन्य इलाकों में पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय सुरक्षा स्थिति और चुनौतियों की जानकारी ली है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सर्दियों में ऊंचे पहाड़ी दर्रों पर बर्फ जमने के बाद घुसपैठ के रास्ते सीमित हो जाते हैं। ऐसे में उससे पहले सीमा पार से आतंकियों को भेजने की कोशिश की आशंका बनी रहती है। जम्मू संभाग में पुंछ-राजोरी से लेकर अखनूर तक और कश्मीर में नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों में निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही अंदरूनी इलाकों में सक्रिय आतंकियों और उनके मददगार नेटवर्क पर कार्रवाई भी जरूरी है।

BUSINESS : आज नो यूपीआई डे मनाएंगे दिल्ली के कई व्यापारी संगठन, शुल्क व्यवस्था के विरोध में करेंगे अपील

डिजिटल पेमेंट पर बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली के कई व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्तूबर को नो यूपीआई डे मनाने का एलान किया है। इस दिन व्यापारी यूपीआई से भुगतान नहीं लेने की अपील करेंगे। व्यापारियों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने की व्यवस्था का वे विरोध करेंगे।

दिल्ली व्यापार महासंघ और फेडरेशन ऑफ दिल्ली ट्रेड एसोसिएशन ने इस अभियान को समर्थन दिया है। संगठनों ने व्यापारियों से 2 अक्तूबर को यूपीआई का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। व्यापारिक संगठनों के मुताबिक, इस अभियान के जरिये डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा। व्यापारियों ने बताया कि छोटे कारोबार में यूपीआई का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क कारोबार पर असर डाल सकता है।

सीबीएसई ने स्कूलों को डिजिटल भुगतान बढ़ाने के निर्देश दिए
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने संबद्ध स्कूलों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्कूलों को फीस के साथ कैंटीन, लाइब्रेरी और अन्य सेवाओं के भुगतान के लिए यूपीआई और रुपे कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है। कम इंटरनेट वाले क्षेत्रों में यूपीआई लाइट, यूपीआई लाइटएक्स और यूपीआई 123पे जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है।

स्कूलों को अभिभावकों और छात्रों के लिए डिजिटल भुगतान संबंधी जागरूकता और सहायता व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड ने फीस भुगतान के लिए भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जुड़ने की सलाह दी है। ईआरपी सिस्टम के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था जोड़कर वेतन और अन्य नियमित भुगतान ऑनलाइन किए जा सकेंगे। शिक्षकों के प्रशिक्षण में डिजिटल भुगतान की जानकारी और छात्रों के लिए वित्तीय साक्षरता मॉड्यूल शामिल करने को भी कहा गया है। अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

NATIONAL : AIIMS और डॉक्टरों ने Cisplatin और Carboplatin की कमी पर जताई चिंता, सप्लाई चेन प्रभावित होने से बढ़े दवा के दाम

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ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के महासचिव राजीव सिंघल ने सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन दवाओं की कमी का मुख्य कारण प्लैटिनम आधारित कच्चे माल की सीमित वैश्विक उपलब्धता को बताया है।

देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान एम्स (AIIMS) और देश भर के जाने-माने कैंसर विशेषज्ञों (Oncologists) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो बेहद महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक दवाओं की भारी किल्लत (Shortage) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बाजार में इन दवाओं की अचानक बढ़ती मांग और इनके दामों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण लाखों मरीजों का कैंसर ट्रीटमेंट बीच में ही रुकने या प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

दवाओं की कमी के लिए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को जिम्मेदार माना जा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक कच्चे माल (API) की वैश्विक कमी के चलते कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी की दवाएं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की बाजार में गंभीर कमी हो रही हैं। बढ़ती लागत और मूल्य नियंत्रण के कारण कई दवा कंपनियों ने इनका उत्पादन कम या बंद कर दिया है, जिससे देशभर के कैंसर मरीजों के इलाज पर असर पड़ने लगा है।

Cisplatin और Carboplatin दोनों दवाओं का इस्तेमाल कई तरह के कैंसर जैसे फेफड़े, यूरीनरी ब्लैडर, ओवरी, सिर एवं गर्दन, Cervical और testicular cancer समेत कई प्रकार के कैंसरों का उपचार करने में किया जाता है। कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए ये दवाएं लाइफ लाइन का काम करती हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक इन दवाओं की कमी होने से कैंसर के मरीजों की कीमोथेरेपी में देरी हो सकती है और उनकी जान को खतरा हो सकता है। एक्सपर्ट का मानना है कि दवाओं की उपलब्धता को गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इन दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी करने की अनुमति दी है।

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एम्स के एक्सपर्ट के मुताबिक सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन दवाएं कैंसरों के इलाज की आधारभूत दवाएं हैं। इनकी कमी कैंसर मरीजों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे इलाज में देरी हो सकती है और मरीजों के ठीक होने की संभावना प्रभावित हो सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार कैंसर का इलाज करने वाली इन दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति करें और इनका घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे। एक्सपर्ट ने बताया अगर दवाओं की कमी लम्बे समय तक बनी रही तो डॉक्टरों को कम प्रभावी उपचार विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं या इलाज में देरी करनी पड़ सकती है। कम प्रभावी दवाओं का सेवन कैंसर पर उतना असरदार प्रदर्शन नहीं करेगा जिससे उनकी जान के लिए खतरा बढ़ सकता है।

AIOCD ने बताया कैंसर की दवाओं की कमी का सही कारण
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के महासचिव राजीव सिंघल ने सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन दवाओं की कमी का मुख्य कारण प्लैटिनम आधारित कच्चे माल की सीमित वैश्विक उपलब्धता को बताया है। एक्सपर्ट ने बताया इन दवाओं की कमी मूल्य निर्धारण नहीं बल्कि सप्लाई चेन की समस्या है और कंपनियां सामान्य आपूर्ति बहाल करने के प्रयास कर रही हैं।

दवाओं की कमी कैसे सेहत पर पड़ सकती है भारी
बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल की वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मानसी खंडेरिया ने कैंसर की दवाओं में होने वाली कमी को को बेहद गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने इन दवाओं को कैंसर का इलाज करने का आधार बताया है। दवाओं की उपलब्धता में देरी सीधे उपचार की समयसीमा और परिणामों को प्रभावित कर सकती है। वहीं फोर्टिस हॉस्पिटल, बेंगलुरु की डॉ. नीति रायजादा ने कहा कि सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन ऑन्कोलॉजी में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी दवाओं में शामिल हैं। इनकी कमी के कारण डॉक्टरों को वैकल्पिक उपचार अपनाने पड़ सकते हैं, जो हमेशा समान रूप से प्रभावी नहीं होते।

मेहंगी दवाओं के लिए API की कीमतों में बढ़ोतरी है जिम्मेदार
सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि पिछले दो-तीन सप्ताह से पूरे देश में इन दोनों दवाओं की भारी कमी है। डॉक्टर ने बताया कैंसर के लगभग 60-70 प्रतिशत मरीजों को सिस्प्लैटिन या कार्बोप्लैटिन दवाओं की जरूरत पड़ती है। API की कीमत बढ़ने और सरकारी मूल्य नियंत्रण (DPCO) के कारण कई कंपनियों ने इन दवाओं का उत्पादन बंद कर दिया है जो कैंसर के मरीजों के इलाज को प्रभावित करेंगी। देश के सभी डॉक्टरों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वो इस मामले में हस्तक्षेप करें और दवा कंपनियों को इन जीवनरक्षक दवाओं का उत्पादन फिर से शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करे, ताकि कैंसर मरीजों को इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो।

NATIONAL : कर्नाटक SIR में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप, NDA नेताओं ने EC से की शिकायत

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कर्नाटक में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में गड़बड़ियों को लेकर NDA ने मुख्य चुनाव अधिकारी से शिकायत की है. उनका आरोप है कि बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन नहीं कर रहे, बल्कि सामूहिक रूप से फॉर्म भरे जा रहे हैं. इससे मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है.

नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी को शिकायत सौंपी. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हो रही हैं. आरोप में कहा गया है कि बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन नहीं कर रहे हैं. इसके बजाय कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और अधिकारियों के घरों में सामूहिक रूप से फॉर्म भरे जा रहे हैं. वहीं व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लोगों को शिविरों में बुलाया जा रहा है.

नेताओं ने कहा कि इससे मतदाता सूची में गड़बड़ी हो रही है. नेताओं ने मांग की है कि सभी गणना फॉर्मों की दोबारा घर-घर जाकर जांच हो. इसके साथ ही गड़बड़ी में शामिल अधिकारियों और नेताओं पर सख्त कार्रवाई होने की मांग की है.

नेताओं ने पत्र में लिखा, हम कर्नाटक राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए यह पत्र लिख रहे हैं. एसआईआर करने वाले अधिकारी स्वीकृत प्रक्रिया की बिल्कुल भी परवाह नहीं कर रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर हो रही है.

उन्होंने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के तहत, बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को SIR दिशानिर्देश के अनुसार घर-घर जाकर जरूरी सत्यापन करना होता है. हर घर के सदस्यों की पहचान की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करनी होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा है.

नेताओ ने पत्र में लिखा कि इसके सबूत सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं और मुख्यधारा की मीडिया ने भी इसे दिखाया है. उन्होंने कहा कि राज्य के कई अन्य हिस्सों से भी ऐसी कई शिकायतें मिल रही हैं. उन्होंने कांग्रेस सरकार पर अधिकारियों का गलत इस्तेमाल करने और एसआईआर प्रक्रिया को कमजोर करने का भी आरोप लगाया.

BUSINESS : भारत AI सैटेलाइट लॉन्च करने वाला चौथा देश बना:अंतरिक्ष से ही तस्वीरों को समझकर तुरंत जानकारी भेजेगा; बॉर्डर निगरानी से आपदा तक में मददगार

भारत ने ऐसा पहला AI सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है, जो सिर्फ तस्वीरें खींचकर धरती पर नहीं भेजेगा, बल्कि उनका एनालिसिस भी स्पेस में ही करेगा। इससे बॉर्डर निगरानी और आपदा में मदद मिलेगी। साथ ही तस्वीरों और डेटा को धरती तक भेजने में लगने वाला समय और खर्च कम होगा।

हैदराबाद की कंपनी टेकमीटूस्पेस का एमओआई-1ए सैटेलाइट स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन से रात 11:48 बजे लॉन्च किया गया।

कंपनी के मुताबिक यह भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है। अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के बाद भारत ऐसी क्षमता वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।

कंपनी टेकमीटूस्पेस के सीईओ रौनक कुमार सामंत राय के मुताबिक अगर किसी सैटेलाइट ने 300 जीबी डेटा जुटाया है और उसमें से केवल 5 जीबी जानकारी काम की है तो AI जरूरी डेटा की पहचान करके वही जानकारी धरती पर भेज सकता है। इससे डेटा ट्रांसफर का समय और खर्च कम होगा।

इस तकनीक का इस्तेमाल बाढ़, जंगलों, फसलों, खनन क्षेत्रों और सीमा या जमीन की निगरानी में किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, बाढ़ की स्थिति में सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता लगा सकता है कि पानी कितने इलाके में फैला है और फिर जरूरी जानकारी ही धरती पर भेज सकता है।

टेकमीटूस्पेस के फाउंडर और सीईओ रौनक कुमार, जिन्होंने 2023 में कंपनी की शुरुआत की थी।
टेकमीटूस्पेस के फाउंडर और सीईओ रौनक कुमार, जिन्होंने 2023 में कंपनी की शुरुआत की थी।
2028 में अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की तैयारी

कंपनी ने 2028 में अंतरिक्ष में बड़ा डेटा सेंटर बनाने की योजना भी बनाई है। इसके लिए 100-100 किलो वजन वाले ज्यादा क्षमता के सैटेलाइट भेजने की तैयारी है।

इनमें बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज रखने की योजना है। कई सैटेलाइट को जोड़कर अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण करने की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।

NATIONAL : आसमान में भारत की ताकत होगी दोगुनी! 114 राफेल जेट का फ्रांस ने सौंपा मेगा ऑफर

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फ्रांस ने 114 राफेल मल्टीरोल फाइटर जेट की खरीद के लिए भारत को विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव सौंप दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस मेगा डील में 94 राफेल भारत में बनाने, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशीकरण पर खास जोर दिया गया है।

नई दिल्ली: भारत के सबसे बड़े रक्षा खरीद कार्यक्रमों में शामिल 114 राफेल मल्टीरोल फाइटर जेट की डील अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। फ्रांस ने भारत को इस सौदे के लिए अपना डिटेल्ड टेक्निकल और कमर्शियल प्रस्ताव सौंप दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस संभावित डील का फिलहाल रक्षा मंत्रालय का अधिग्रहण विंग और भारतीय वायुसेना (IAF) विस्तृत मूल्यांकन कर रहे हैं।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस साल मई में फ्रांस को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) भेजा था। इसके जवाब में फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने अपना विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। प्रस्ताव में स्थानीय विनिर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और अधिक स्वदेशी कंटेंट को प्रमुखता दी गई है।

114 में से 94 राफेल भारत में बनाने की योजना
फ्रांसीसी प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 114 में से 94 राफेल लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इसके लिए किसी भारतीय औद्योगिक साझेदार के साथ उत्पादन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में डसॉल्ट एविएशन के अलावा MBDA, सफ्रान (Safran) और थेल्स (Thales) जैसी फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनियां भी भाग लेंगी।

भारतीय कंपनियों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस परियोजना से भारत के एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। टाटा समूह, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) समेत कई भारतीय रक्षा कंपनियों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस कार्यक्रम से भारतीय उद्योग को करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का कारोबार मिलने की संभावना है।

स्वदेशी हथियारों के एकीकरण पर होगी जांच
भारतीय पक्ष फ्रांस के प्रस्ताव में स्वदेशी हथियार प्रणालियों, खासकर ‘अस्त्र’ बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल के एकीकरण से जुड़े प्रावधानों की भी विस्तार से जांच करेगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि डील में स्वदेशीकरण का स्तर कितना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लक्ष्य को मजबूती मिल सके।

IAF की घटती स्क्वाड्रन क्षमता होगी मजबूत
इस खरीद का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायुसेनाकी घटती लड़ाकू स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करना है। पुराने मिग लड़ाकू विमानों की चरणबद्ध विदाई और LCA Mk1A व भविष्य के LCA Mk2 कार्यक्रमों में देरी के कारण वायुसेना को नए लड़ाकू विमानों की जरूरत महसूस हो रही है। राफेल पहले से ही IAF के सबसे सक्षम लड़ाकू विमानों में शामिल है।

176 तक पहुंच जाएगी राफेल विमानों की संख्या
भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना पहले ही 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। यदि 114 नए राफेल की खरीद पूरी हो जाती है, तो भारत के राफेल बेड़े की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने विमानवाहक पोतों के लिए 31 राफेल-एम लड़ाकू विमान शामिल करने की भी इच्छा जताई है। यदि यह प्रस्ताव भी मंजूर होता है, तो भारतीय सशस्त्र बलों के पास 200 से अधिक राफेल विमान हो सकते हैं।

NATIONAL : ‘कानून को भूल जाओ और सिर्फ सॉफ्टवेयर के पीछे भागो…’ , SIR को लेकर बॉम्बे HC का चुनाव आयोग पर तंज

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गोवा के एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम SIR वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट कर रहा है। हाई कोर्ट ने बुधवार को हुई सुनवाई में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में दिख रही गड़बड़ी की आलोचना की।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, ‘टेक्नोलॉजी के बजाय कानून का पालन किया जाना चाहिए। आखिरकार, यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी वोटर छूट न जाए।’

बॉम्बे हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार
हाई कोर्ट ने ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ और ‘मतदाता पंजीकरण नियम’ के प्रविधानों के बारे में चुनाव आयोग से सवाल किए और SIR प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी का स्पष्टीकरण मांगा।

जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की डिवीजन बेंच ने कहा, ‘SIR ने असल में, चाहे किसी भी निर्देश के तहत हो, पूरे सिस्टम को सस्पेंड कर दिया है। यह धारा 22, नियम 21A और उन सभी नियमों को सस्पेंड करता है और कहता है कि सारे कानूनों को भूल जाओ। अब आप सॉफ्टवेयर को मानो। ऐसा नहीं हो सकता। इसका क्या स्पष्टीकरण है?’

बेंच ने कहा, ‘हमें कानून में दिखाएं कि आपको बिना सुनवाई के नाम हटाने का अधिकार किसने दिया। अगर आप किसी का नाम हटाने की योजना बना रहे हैं तो आपको उस व्यक्ति को पहले सुनवाई का मौका देना होगा।’

गोवा में सांता क्रूज निर्वाचन क्षेत्र के एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए, जबकि उन्होंने अपना पता बदलने की जानकारी भी ‘फॉर्म 8’ में भरकर चुनाव आयोग को दी थी।

EC का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील गौरीश अग्नि ने हाई कोर्ट को बताया कि सिस्टम SIR के दौरान ‘फॉर्म 8’ की प्रोसेसिंग की इजाजत नहीं देता था, जिसके बाद उनके नाम हटा दिए गए थे।

कानून को भूल जाओ…
हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘हमारी समझ से, कानून हर समय काम करना चाहिए। ERO के पास सॉफ्टवेयर की चाबी होनी चाहिए, चाहे उसे कोड कहें या कुछ और। इससे वह अपने आदेश के अनुसार सॉफ्टवेयर को खोल सके, उसमें जानकारी डाल सके या उसे हटा सके। यह चाबी किसी तीसरे व्यक्ति के पास नहीं हो सकती।’

बेंच ने कहा, ‘टेक्नोलॉजी के बजाय कानून का पालन किया जाना चाहिए। इसे वोटर के हित में काम करना चाहिए। आखिरकार, यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी वोटर छूट न जाए।’

गौरीश अग्नि ने बताया कि SIR अवधि के दौरान, फॉर्म 8 पर कार्रवाई नहीं हो सकी और कोई बदलाव नहीं किया गया।

कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘इसका मतलब कानून और नियमों को ठंडे बस्ते में डालना है। तब तो आप कोई बिल्कुल अलग प्रक्रिया शुरू करके कानून और नियमों को ही सस्पेंड कर रहे हैं।’

हाई कोर्ट ने आगे कहा, ‘इसका असर यह होता है कि आप कुछ समय के लिए कह रहे हैं कि हम नियमों और कानूनों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जैसे कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। हम अपनी मर्जी से काम करेंगे।’

बेंच ने आगे कहा, ‘हम इस बात और इसके असर से बहुत परेशान हैं। यहां छह वोटर हैं। हम सोच रहे हैं कि ऐसे और कितने लोग होंगे जो कोर्ट तक नहीं पहुंचे हैं।’

NATIONAL : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन आज: अनुमति नहीं, जंतर मंतर के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज जंतर मंतर पर प्रदर्शन होना है। प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। जंतर मंतर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

बृहस्पतिवार को किसी भी आम व्यक्ति को जंतर मंतर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। जंतर मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं। जनपथ की तरफ से आने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया गया है। पैदल आने वाले लोगों को भी बैरिकेड के आगे जाने नहीं दिया जा रहा है। बृहस्पतिवार को जंतर-मंतर पहुंचने वाले कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों से अंदर जाने की अनुमति मांगी। उन्हें आगे जाने नहीं दिया गया।

वामदलों के छात्र संगठन निकालेंगे जंतर-मंतर तक मार्च
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर तक मार्च निकालेंगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। संगठन के एक सदस्य ने बताया कि प्रस्तावित मार्च के लिए दोनों संगठनों को अनुमति नहीं मिली है। इसके बावजूद वे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर की ओर बढ़ेंगे। मार्च में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

सीजेपी का मुंबई में प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे और अक्तूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी 2 अक्तूबर को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करेगी।

जंतर-मंतर पर आज प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं, पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई
दिल्ली पुलिस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और संभावित भीड़ को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन में करीब 3,000 से 4,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को भी तैनात किया है।

अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए), राज्यसभा सदस्य मनोज झा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दो अक्टूबर को प्रदर्शन का आह्वान किया है। आयोजकों ने मतदाता सूचियों और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सीईसी कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग की है।

पुलिस ने जंतर-मंतर और नयी दिल्ली जिले के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर बैरिकेड लगाए हैं। प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है, ताकि आवाजाही नियंत्रित की जा सके और बिना अनुमति भीड़ एकत्र न हो। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर आयोजकों ने चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और उसके संचालन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं।

पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लोगों से दो अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। बुधवार को एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और मनोज झा ने संवाददाता सम्मेलन कर प्रदर्शन की घोषणा की थी।

प्रदर्शन में लोगों को जुटाने में लगे आप नेता
आम आदमी पार्टी ने लोगों से 2 अक्तूबर को सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने का आह्वान किया है। पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया हटाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन में युवाओं और विभिन्न संस्थाओं से शामिल होने की अपील की है। इस दौरान आप नेता मनीष सिसौदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, प्रदेशाध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने युवाओं से प्रदर्शन में पहुंचने का आह्वान किया।

आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसौदिया ने कहा कि वोट का अधिकार लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इसे बचाने के लिए लोगों को जंतर-मंतर पहुंचना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मुद्दा बताया।

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