Tuesday, September 29, 2026
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BUSINESS : अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में हलचल तेज, कच्चे तेल की कीमतें और तिमाही नतीजे तय करेंगे इस हफ्ते की दिशा

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Market This Week: इस हफ्ते शेयर बाजार की नजर कई बड़े फैक्टर्स पर रहने वाली है, जिनमें अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं घटनाक्रमों…

इस हफ्ते शेयर बाजार की नजर कई बड़े फैक्टर्स पर रहने वाली है, जिनमें अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं घटनाक्रमों से बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल सबसे अहम ट्रिगर बना हुआ है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेश माहौल पर पड़ता है।

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच घोषित संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।

घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों पर रहेगा। इन नतीजों से कंपनियों की कमाई और आगे के कारोबार की स्थिति का अंदाजा लगेगा।

इसके अलावा, विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई की ट्रेडिंग गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। अगर विदेशी निवेशकों की खरीद या बिकवाली बढ़ती है तो उसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिख सकता है।

शेयर बाजार में इस हफ्ते निवेशकों की नजर सबसे पहले देश के बड़े प्राइवेट बैंकों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञ मिश्रा के अनुसार, शुरुआत में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गजों के परिणामों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। इसके बाद एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, हैवेल्स, इंडसइंड बैंक और श्रेयराम फाइनेंस जैसी कई बड़ी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी।

इस बीच देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.04 प्रतिशत बढ़कर 20,350.76 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर छोटे कारोबारियों से जुड़े लोन सेगमेंट पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में कुछ जोखिम बने रह सकते हैं।

आईसीआईसीआई बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 9.28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 14,755 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बैंक के मुनाफे में यह तेजी मुख्य रूप से प्रोविजनिंग में करीब 90 फीसदी की भारी गिरावट की वजह से आई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीना का कहना है कि इस सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी दिशा तय करने वाली चीज कंपनियों के तिमाही नतीजों की भरमार होगी। इसके साथ ही अमेरिकी मैक्रो आर्थिक डेटा और वैश्विक हालात भी बाजार की चाल पर असर डालेंगे।

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 943.29 अंक यानी 1.21 फीसदी बढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 302.95 अंक यानी 1.25 फीसदी मजबूत हुआ।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि निवेशकों की नजर खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर रहेगी। अगर इसमें स्थायी समाधान की ओर संकेत मिलते हैं तो इसका असर वैश्विक जोखिम वाले एसेट्स, पूंजी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है।

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात लगातार बदल रहे हैं। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग से आवाजाही रोक दी थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। बाद में शुक्रवार को ईरान ने इसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने की बात कही, लेकिन शनिवार को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों पक्षों के बीच बनी समझ का उल्लंघन किया है।

IND vs WI 1st ODI: विराट कोहली और शुभमन गिल के तूफान में उड़ा वेस्टइंडीज, भारत ने 50 गेंद रहते जीता मैच

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शुभमन गिल के शतकों की मदद से भारत ने वेस्टइंडीज को पहले वनडे में 8 विकेट से करारी शिकस्त दी. जानिए मैच की पूरी हाइलाइट्स और रिकॉर्ड्स.
IND vs WI 1st ODI: भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट से जीत दर्ज की. तिरुवनंतपुरम में खेले गए मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट पर 295 रन बनाए थे. जवाब में भारतीय टीम ने 41.4 ओवर में 2 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया. विराट कोहली और शुभमन गिल ने शानदार शतकीय पारियां खेलकर टीम को आसान जीत दिलाई.

रोहित ने दी अच्छी शुरुआत
296 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने शानदार शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए 74 रन जोड़े. रोहित 35 गेंदों में 32 रन बनाकर आउट हुए. उनकी पारी में 2 चौके और 3 छक्के शामिल रहे. उन्हें अल्जारी जोसेफ ने आउट किया.

रोहित के आउट होने के बाद शुभमन गिल और विराट कोहली ने पारी को संभाला. कप्तान शुभमन गिल ने भी वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में शानदार बल्लेबाजी की. उन्होंने 108 गेंदों में 110 रन की पारी खेली, जिसमें 13 चौके और एक छक्का शामिल रहा. यह वेस्टइंडीज के खिलाफ गिल का पहला वनडे शतक था. गिल और कोहली की शतकीय पारियों ने भारत के लिए 296 रन के लक्ष्य को आसान बना दिया.

विराट कोहली ने जड़ा 55वां वनडे शतक
विराट कोहली ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया. उन्होंने गुडाकेश मोती की गेंद पर छक्का लगाकर अपना 55वां वनडे शतक पूरा किया. इसके बाद कोहली ने अपनी पारी को अंत तक ले जाते हुए भारत को जीत दिलाई.

कोहली ने 139 रन की नाबाद पारी खेली. इस दौरान उन्होंने 10 चौके और 9 छक्के लगाए. 41.4 ओवर में कोहली ने छक्का लगाकर भारत के लिए विजयी रन बनाया और टीम ने 8 विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया. पहले वनडे में 8 विकेट से जीत के साथ भारतीय टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है.

ग्रीव्स के शतक के बाद कुलदीप का कहर
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत शानदार रही. जॉन कैम्पबेल और जस्टिन ग्रीव्स ने पहले विकेट के लिए 135 रन की साझेदारी की. कुलदीप यादव ने कैम्पबेल को 62 रन पर आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. कैम्पबेल ने 60 गेंदों में 6 चौके और 3 छक्के लगाए.

भारत की जीत में गेंदबाजी के दौरान कुलदीप यादव की भूमिका भी अहम रही. उन्होंने 10 ओवर में 4 विकेट लेकर वेस्टइंडीज के मध्यक्रम को लगातार दबाव में रखा. कुलदीप ने जॉन कैम्पबेल, शाई होप, जस्टिन ग्रीव्स और ज्वेल एंड्रयू को अपना शिकार बनाया. उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा ने दो और नीतीश कुमार रेड्डी ने एक विकेट हासिल किया. शानदार गेंदबाजी के चलते कुलदीप को मैन आफ द मैच का अवार्ड दिया गया.

ग्रीव्स ने जड़ा शतक
ग्रीव्स ने 108 गेंदों में 101 रन की शानदार पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे. यह उनके वनडे करियर का पहला शतक था. ज्वेल एंड्रयू बिना खाता खोले आउट हुए. इसके बाद आमिर जंगू ने पारी को संभाला. उन्होंने 43 गेंदों में नाबाद 58 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 1 छक्का शामिल रहा. रोस्टन चेज ने 24 रन बनाए. अंत में वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 7 विकेट पर 295 रन का स्कोर खड़ा किया.

कोहली ने पूरे किए 15 हजार ODI रन
विराट कोहली ने 15 हजार वनडे रन का आंकड़ा सिर्फ उपलब्धि के तौर पर ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड समय में हासिल किया. उन्होंने यह मुकाम 303वीं पारी में हासिल किया और वनडे इतिहास में सबसे तेज 15 हजार रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन गए. इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था, जिन्होंने 377 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था. यानी कोहली ने सचिन से 74 पारियां कम खेलकर यह उपलब्धि हासिल की.

भारत का वेस्टइंडीज पर दबदबा
आंकड़ा संख्या
कुल वनडे मुकाबले 142
भारत की जीत 72
वेस्टइंडीज की जीत 64
बेनतीजा मैच 4
टाई मैच 2
वेस्टइंडीज ने आखिरी बार 2006 में भारत को द्विपक्षीय वनडे सीरीज में हराया था. इसके बाद दोनों टीमों के बीच खेली गई 13 वनडे सीरीज में भारत ने जीत दर्ज की है. विराट कोहली वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं.

दोनों टीमों की प्लेइंग-11
भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (विकेटकीपर), नमन धीर, नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, गुरनूर बरार, प्रसिद्ध कृष्णा और कुलदीप यादव.

वेस्टइंडीज: जॉन कैम्पबेल, जस्टिन ग्रीव्स, कीसी कार्टी, शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), आमिर जंगू, ज्वेल एंड्रयू, रोस्टन चेज, मैथ्यू फोर्ड, गुडाकेश मोती, अल्जारी जोसेफ और जेडन सील्स.

BUSINESS : दिवाली से पहले बड़ा झटका! AC से TV तक महंगे होंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान, जानें कितनी बढ़ेगी कीमतें

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AC TV Firdge Price Hike: अगर आप इस फेस्टिव सीजन में घर के लिए AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो बजट थोड़ा बढ़ाना पड़ सकता है। अक्टूबर की शुरुआत आपके लिए महंगी खरीदारी लेकर आ सकती है। कंपनियां बढ़ती लागत का असर अब सीधे उत्पादों की कीमतों पर डालने की तैयारी में हैं। कहा जा रहा है कि 1 अक्टूबर से कंपनियां AC, LED TV, वॉशिंग मशीन और फ्रिज जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतों में 8 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।

इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर, स्टील, एल्युमीनियम और क्रूड ऑयल से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है। वहीं करेंसी में उतार-चढ़ाव की वजह से कंपनियों ने दाम बढ़ाने का फैसला किया है। साल 2026 में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की तरफ से यह कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी होगी।

AC की कीमत 5-8% तक बढ़ सकती है
नई कीमत बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर एयर कंडीशनर पर पड़ सकता है। इंडस्ट्री के मुताबिक AC की कीमतों में करीब 5-8% तक इजाफा हो सकता है। वहीं, कुछ कंपनियां LED TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन की कीमतों में करीब 3-4% तक बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। हालांकि, हर कंपनी कीमत बढ़ाने का फैसला एक ही तारीख से लागू नहीं करेगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लू स्टार, गोदरेज अप्लायंसेज, हायर, डाइकिन और सुपर प्लास्ट्रोनिक्स अलग-अलग कैटेगरी में कीमत बढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं। LG और बॉश होम कंफर्ट ने भी AC की कीमतों में करीब 5 फीसदी की बढ़ोतरी की है। वहीं पैनासोनिक अभी लागत और बाजार की स्थिति के आकलन में जुटी हुई है।

ब्लू स्टार के एमडी बी थियागराजन का कहना है कि युद्ध के कारण तांबा, लोहा और प्लास्टिक समेत सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार लागत लगभग 15% बढ़ गया है, जबकि जीएसटी के लगभग 10% लाभ से खरीदारों पर कुल प्रभाव करीब 5% तक कम होगा।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट कमल नंदी का कहना है कि पिछली कीमत समीक्षा के बाद कमोडिटी लागत में 8-10% की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कैटेगरी में 5-7% की कीमत बढ़ोतरी जरूरी हो गई है। हालांकि, कंपनियां इसे अलग-अलग समय पर लागू कर सकती हैं। कुछ अक्टूबर से और कुछ नवंबर से नई कीमतें लागू कर सकती हैं।

NATIONAL : UPI पर चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सरकार के फैसले को दी चुनौती

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केंद्र सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। PIL में इस व्यवस्था को कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू करने का आरोप लगाते हुए इसे रद्द या स्थगित करने की मांग की गई है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में कहा गया है कि यह शुल्क पर्याप्त कानूनी सुरक्षा उपायों, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू किया गया है।

क्या है मामला?
सरकार ने 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाएगा। हालांकि, 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा। यह शुल्क व्यापारियों को देना होगा।

अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर पीआईएल में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित एमडीआर व्यवस्था को चुनौती दी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है।

याचिका के अनुसार, नयी व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के सामान्य पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर का प्रावधान है। इसके साथ ही 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।

याचिका में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह प्रावधान कार्यपालिका को बिना स्पष्ट दिशानिर्देश के यह अधिकार देता है कि कौन सा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम शुल्क मुक्त रहेगा।

याचिका में शुल्क दरों, लेनदेन सीमा, अधिकतम सीमा और अलग-अलग क्षेत्रों के वर्गीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि ये प्रावधान एक प्रेस बयान के जरिये घोषित किए गए हैं और शुल्क तय करने वाला पूरा आदेश आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित नहीं किया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि यह व्यवस्था मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा इससे कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसमें उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष बोझ और डिजिटल भुगतान से वंचित होने की आशंका भी जताई गई है।

पुनर्विचार की अपील
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने वाली व्यवस्था को रद्द या स्थगित करने का अनुरोध किया है। वैकल्पिक रूप से, उसने पारदर्शी परामर्श, आंकड़ों के प्रकाशन, प्रभाव आकलन और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए सुरक्षा उपायों के बाद इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की अपील की गई है। याचिका में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार से स्वतंत्र समीक्षा कराने का भी आग्रह किया गया है।

BUSINESS : इंडिगो फ्लाइट का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया:गुवाहाटी से बेंगलुरु आ रहा था विमान, सभी यात्री सुरक्षित; 47 दिन में इंडिगो से जुड़ा छठा मामला

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बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इंडिगो की फ्लाइट 6E 6542 का पिछला हिस्सा लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गया। रविवार दोपहर गुवाहाटी से आ रहे प्लेन को केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दिक्कत हुई थी।

फ्लाइट ने जब पहली बार लैंडिंग की कोशिश की तो उसका पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। इसके बाद उसने गो-अराउंड किया (यानी विमान ने वापस उड़ान भर ली)। इसके बाद दूसरी बार दोपहर 1:34 बजे प्लेन ने सुरक्षित लैंडिंग की।

अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि फ्लाइट में कितने लोग सवार थे। हालांकि, सभी यात्री सुरक्षित हैं।

यह पिछले 47 दिनों में इंडिगो की किसी फ्लाइट में आई दिक्कत (इमरजेंसी लैंडिंग, डायवर्जन और तकनीकी खराबी) से जुड़ा छठा मामला है।

DGCA ने जांच शुरू की

हादसे के बाद इस प्लेन की उड़ान रोक दी गई है और उसकी तकनीकी जांच चल रही है। पूरी तरह ठीक पाए जाने के बाद ही इसे दोबारा उड़ाया जाएगा।

इंडिगो ने कहा कि उन्होंने नियमों के मुताबिक सभी अफसरों को जानकारी दे दी है। कंपनी के लिए यात्रियों और स्टाफ की सुरक्षा सबसे पहले है।

इस प्लेन को आगे कोयंबटूर भी जाना था। बेंगलुरु से कोयंबटूर जाने वाले यात्रियों के लिए तुरंत दूसरा प्लेन लगाया गया, ताकि किसी को परेशानी न हो।

उड्डयन विभाग (DGCA) ने इंडिगो की इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

सिर्फ 42 दिनों में इंडिगो फ्लाइट्स से जुड़ी 5 घटनाएं

22 सितंबर 2026: लंदन से दिल्ली आ रही फ्लाइट में तकनीकी खराबी (धुआं) के कारण वापस लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

15 सितंबर 2026: अगरतला से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट के कार्गो हिस्से में धुएं की चेतावनी मिलने पर उसे तुरंत लखनऊ डायवर्ट किया गया।

3 सितंबर 2026: दोहा से बेंगलुरु आ रही फ्लाइट के पायलट की अचानक तबीयत खराब होने (फूड पॉइजनिंग) के कारण मस्कट में इमरजेंसी लैंडिंग हुई।

1 सितंबर 2026: गोवा से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का हवा में एक इंजन फेल होने के कारण उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद गोवा में वापस लैंडिंग हुई।

11 अगस्त 2026: कोलकाता से चेन्नई जाने वाली फ्लाइट का बायां इंजन काम करना बंद कर देने पर चेन्नई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

तकनीकी खराबी होने पर यात्रियों को सुविधाएं देती हैं एयरलाइंस

अगर तकनीकी खराबी की वजह से फ्लाइट में 2 से 4 घंटे की देरी होती है, तो एयरलाइन को यात्रियों को मुफ्त नाश्ता, खाना और पानी देना पड़ता है। यदि देरी रात भर के लिए हो जाए या 24 घंटे से ज्यादा खिंच जाए, तो यात्रियों के रुकने के लिए फ्री होटल और आने-जाने की गाड़ी की व्यवस्था करना भी कंपनी की जिम्मेदारी होती है।

इसके अलावा, एयरलाइन को हर आधे घंटे में फ्लाइट का सही अपडेट देना जरूरी है, और अगर आप चाहें तो अपनी यात्रा रद्द करके पूरे पैसे वापस ले सकते हैं या बिना किसी अतिरिक्त खर्च के दूसरी फ्लाइट चुन सकते हैं।

NATIONAL : तमिलनाडु का RTI छूट वाला फैसला वापस, विरोध के बाद कुछ ही घंटों में पीछे हटी थलपति विजय सरकार, समझें पूरा मामला

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तमिलनाडु सरकार ने RTI एक्ट से ‘पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट’ को छूट देने वाला अपना नोटिफिकेशन जारी करने के कुछ ही घंटों बाद वापस ले लिया। सरकार के इस कदम की कांग्रेस के कार्ति पी. चिदंबरम और BJP की तमिलिसाई सुंदरराजन समेत कई राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की।

चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने 21 सितंबर को एक आदेश जारी किया। इस आदेश पर तमिलनाडु में सियासत गरमाने लगी। बयानबाजी तेज हो गई। विवाद बढ़ने पर थलपति विजय सरकार ने आदेश वापस ले लिया। जिस आदेश पर विवाद हुआ, वह था राज्य की कानून-व्यवस्था मशीनरी को RTI एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाना। इस आदेश का राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर कड़ा विरोध हुआ था।

कानून मंत्री ने दी जानकारी
बिजली और कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने X पर पोस्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24, उप-धारा (4) के तहत, मानव संसाधन प्रबंधन विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के संबंध में तमिलनाडु सरकार के सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को दी गई छूट वापस ले ली गई है।

टीवीके के सहयोगी दलों ने भी किया था विरोध
यह पोस्ट मंत्री के उस बयान के लगभग एक घंटे बाद आया जिसमें उन्होंने RTI से छूट देने के पीछे का तर्क समझाया था। हालांकि उससे विरोध शांत नहीं हुआ, जिसमें TVK के सहयोगी भी शामिल थे। अब वापस लिए गए आदेश में कानून-व्यवस्था विंग को खुफिया और सुरक्षा संगठन के तौर पर वर्गीकृत करने की कोशिश की गई थी, जिससे यह जानकारी सार्वजनिक करने के पारदर्शिता नियमों के दायरे से बाहर हो जाता।

जाति आधारित घटनाओं से जुड़ी जांच रहेगी सीक्रेट
निर्मल कुमार ने पहले तर्क दिया था कि केवल कुछ हिस्से, जैसे जाति-आधारित घटनाओं से जुड़ी जांच, ही RTI एक्ट के दायरे से बाहर होंगे। उन्होंने दावा किया कि ऐसे सवालों के जवाब से अक्सर समाज में और भ्रम पैदा होता है। इससे पहले दिन में, 21 सितंबर के GO 57 का गजट प्रकाशन वायरल हो गया था और हर तरफ से इसकी आलोचना हो रही थी।

सरकारी आदेश में क्या
सरकार के जीओ में सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को राज्य सरकार द्वारा स्थापित खुफिया और सुरक्षा संगठन बताया गया था, जिस पर एक्ट की धारा 24 के तहत RTI एक्ट लागू नहीं होता। यह विंग सांप्रदायिक और जातिगत झड़पों, राजनीतिक दलों, छात्रों और खेतिहर मजदूरों से जुड़े आंदोलनों और राजनीतिक आधार पर दर्ज मामलों को वापस लेने के अनुरोधों से संबंधित मामलों को देखता है।

कार्ति चिदंबरम ने भी साधा निशाना
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार का फैसला एक बुरी मिसाल कायम करता है और RTI एक्ट का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, न कि सीमित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह आदेश लागू रहता, तो कानून लागू करने के दौरान कथित उल्लंघनों के रिकॉर्ड तक पहुंच बंद हो जाती। VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने इस नोटिफिकेशन को बेहद चौंकाने वाला बताया और कहा कि यह मानवाधिकारों के दमन का रास्ता बनाने जैसा है। कांग्रेस और VCK, TVK सरकार की सहयोगी पार्टियां हैं।

भड़का विपक्ष
DMK सांसद कनिमोझी ने कहा कि पारदर्शिता का वादा करके सत्ता में आई सरकार के लिए यह शर्मनाक है कि वह अपने कार्यकाल के सिर्फ चार महीने बाद ही लोगों को सवाल पूछने से रोकने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य में 500 से ज्यादा कथित हत्याएं हो चुकी हैं।

AMMK के संस्थापक TTV दिनाकरन ने सीधे मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय से बात करते हुए इस नियम में बदलाव का कड़ा विरोध किया और कहा कि ऐसी किसी भी छूट को मामले को छिपाने की कोशिश (कवर-अप) के तौर पर देखा जाएगा। AIADMK के डी जयकुमार ने RTI एक्ट को कथित तौर पर कमजोर करने की कोशिश के लिए प्रशासन की तुलना ईदी अमीन सरकार से की।

NATIONAL : कुणाल घोष की कार पर दो दिन में दूसरी बार हमला, शीशा तोड़ा; सुरक्षाकर्मी पर बंदूक तानने का लगाया आरोप

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टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि दो दिनों में उनकी कार पर दूसरी बार हमला हुआ। उन्होंने हमलावरों पर शीशा तोड़ने और सुरक्षाकर्मी पर बंदूक तानने का आरोप लगाया। भाजपा ने आरोपों से इनकार किया है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुणाल घोष ने रविवार को आरोप लगाया कि उनकी कार पर लगातार दूसरे दिन हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि कोलकाता के नर्केलडांगा इलाके में बाइक सवार लोगों ने उनकी कार को घेर लिया और हथौड़े से शीशे तोड़ दिए। घोष के मुताबिक, हमलावरों में से एक ने उनके सुरक्षाकर्मी पर बंदूक भी तानी।

घोष ममता बनर्जी के खेमे से जुड़े टीएमसी विधायक हैं और बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह घटना शनिवार को हुगली के उत्तरपाड़ा में उनकी कार पर कथित पथराव और अंडे फेंके जाने की घटना के एक दिन बाद हुई।

‘कल हमला हुआ था, आज मारने की कोशिश की’
कुणाल घोष ने पत्रकारों को कार के टूटे शीशे के टुकड़े दिखाते हुए कहा कि शनिवार को उत्तरपाड़ा में उनकी कार पर हमला हुआ था और रविवार को उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया “कल उत्तरपाड़ा में मुझ पर हमला हुआ था। आज वे मुझे मारना चाहते थे।” घोष के अनुसार, वह अपने विधानसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, तभी बाइक सवार लोगों ने उनकी कार को घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हथौड़े से कार का शीशा तोड़ा और उनके सुरक्षाकर्मी की ओर हथियार ताना। रविवार की घटना को लेकर घोष ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है

शनिवार को भी कार पर हुआ था हमला
इससे एक दिन पहले, शनिवार को हुगली जिले के उत्तरपाड़ा इलाके में भी कुणाल घोष की कार को कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। उस समय वह ममता बनर्जी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सेरामपुर जा रहे थे।

घोष के अनुसार, उनकी कार को रोककर उस पर पत्थर और अंडे फेंके गए, जिससे वाहन के शीशे टूट गए। इस घटना को लेकर भी उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही थी। हालांकि, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर पुलिस की ओर से तत्काल कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया था।

पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे घोष
पहली घटना के बाद कुणाल घोष क्षतिग्रस्त कार लेकर कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे थे। उनके मुताबिक, उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। रविवार की घटना के बाद भी उनकी क्षतिग्रस्त कार को नर्केलडांगा पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

कुणाल घोष ने भाजपा पर लगाए आरोप
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है और सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े लोगों पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। उत्तरपाड़ा के भाजपा विधायक दिपांजन चक्रवर्ती ने घोष के आरोपों को ‘ड्रामा’ बताया। भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने दावा किया कि घोष प्रचार हासिल करने के लिए खुद अपनी गाड़ी पर हमले करवा रहे हैं और इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है।

UP : सीएम योगी ने सपा-कांग्रेस को बताया सनातन विरोधी, कहा- रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे, इनसे रहें सावधान

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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास व रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कांग्रेसी व सपाई नहीं गए, क्योंकि उन्हें भय था कि कहीं जालीदार टोपी छिटक न जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास व रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कांग्रेसी व सपाई नहीं गए, क्योंकि उन्हें भय था कि कहीं जालीदार टोपी छिटक न जाए। उन्होंने चेताया कि रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे, इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। वह रविवार को गोमतीनगर के एक स्कूल में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष (1926-2026) के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में अशोक सिंहल के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।

सीएम ने कहा कि गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने के लिए हमें एकजुट होकर कार्य करना है। रामद्रोही अयोध्या को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। रामभक्तों पर गोलियां चलाने वालों का खुद को राम भक्त ठहराने का प्रयास करना विश्व हिंदू परिषद की वैचारिक विजय है। अशोक सिंघल ने जिस ज्योति को 1980 के दशक में प्रज्ज्वलित किया था, वह ज्वाला बनकर सकल हिंदू समाज के संरक्षण व संवर्धन के लिए अहर्निश लगी है। वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने के दौरान आरएसएस के संपर्क में आए औरसनातन धर्म के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उनके जीवन का एक ही संकल्प था कि जब तक राम का काम नहीं होगा, तब तक विश्राम नहीं लूंगा। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में बिखरे हुए समाज को एकजुट किया।

2 नवंबर 1990 को रामभक्तों पर तत्कालीन रामद्रोही सरकार ने गोलियां चलवाईं, तब अशोक सिंहल सीना तानकर खड़े हो गए। उनका सपना अब भव्य राम मंदिर के रूप में दिख रहा है। इस अवसर पर विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, आरएसएस के प्रांत प्रचारक कौशल, संत श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी, रविंद्र कीर्ति स्वामी जी, भंते शीलरत्न, सरदार निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्य गिरि, विहिप के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, एमएलसी महेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।

सीएम ने कहा कि मेरे गुरु अवैद्यनाथ राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष थे। अशोक सिंहल के साथ गोरखपुर व कारसेवकपुरम में राम मंदिर आंदोलन आदि की बैठकें होती थीं। पहले अयोध्या में परिक्रमा करने पर रोक लगती थी, आज भव्य दीपोत्सव होता है। अब रामपथ, धर्मपथ, भक्ति पथ व जन्मभूमि पथ फोरलेन से जुड़े हैं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, मां शबरी के नाम पर भोजनालय, निषादराज के नाम पर यात्री विश्रामालय हैं। संतों के नाम पर मंदिर-मूर्तियां भी हैं। कभी अंधेरे में रहने वाली अयोध्या अब सोलर सिटी बन गई है।

गो-माता को पशु कहने वाले पशुवत
सीएम ने कहा कि नकलची गाय को पशु घोषित करने का ज्ञापन देते हैं। गाय को पशु कहने वालों की बुद्धि पशुवत है। पहले यूपी में अवैध बूचड़खानों में गोमाता कटती थी। हमने सख्त कानून बनाया और 7700 से अधिक गोशाला का निर्माण भी कराया। हम 16 लाख गायों का संरक्षण कर रहे हैं। जो अवैध बूचड़खाने संचालित कर रहे थे, गोमाता की तस्करी करा रहे थे। उनसे प्रश्न पूछिए। हमने अशोक सिंघल से जो सीखा, उसे धरातल पर उतारा है।

NATIONAL : NTA की सुरक्षा अब CISF के हवाले, 39 जवान संभालेंगे गोपनीय क्षेत्र; पेपर लीक के बाद सुरक्षा चक्र और कड़ा

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NEET पेपर लीक के बाद NTA ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। 39 CISF जवानों की तैनाती और गोपनीय क्षेत्रों की निगरानी के साथ अब प्रश्नपत्र से लेकर साइबर सिस्टम तक सुरक्षा का कड़ा पहरा रहेगा।

नई दिल्ली: पेपर लीक को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली स्थित NTA कार्यालय में अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के 39 जवान तैनात किए गए हैं। ये जवान परीक्षा से जुड़े गोपनीय क्षेत्रों की निगरानी, प्रवेश नियंत्रण और कर्मचारियों व आगंतुकों की जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे। संवेदनशील परीक्षा सामग्री तक किसी भी अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए गोपनीय क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया गया है और वहां होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

CISF के जवानों को मिंटो रोड स्थित भारत सरकार के प्रेस भवन में बनाए गए गोपनीय क्षेत्रों के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर तैनात किया गया है। इन जवानों की जिम्मेदारी में प्रवेश नियंत्रण और जांच व्यवस्था शामिल होगी।


कर्मचारियों और आगंतुकों की तलाशी के लिए एक्स-रे सामान जांच मशीनों और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर यानी DFMD का इस्तेमाल किया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भवन में गोपनीय क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में आवाजाही और कामकाज की सख्त निगरानी की जाएगी, ताकि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा के लिए एक पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

गृह मंत्रालय ने मंजूर किया CISF सुरक्षा कवच
अधिकारी ने बताया कि इन परिसरों के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की सुरक्षा व्यवस्था को गृह मंत्रालय ने मंजूरी दी है। NTA के नए सुरक्षा ढांचे का उद्देश्य केवल कार्यालय की भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री, तकनीकी प्रणालियों और संवेदनशील कामकाज को अनधिकृत पहुंच से बचाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है।

ओखला से मिंटो रोड पहुंचा NTA का संवेदनशील काम
NTA ने हाल ही में अपने पुराने ओखला कार्यालय से गोपनीय और संवेदनशील कामकाज को मिंटो रोड स्थित नए परिसर में स्थानांतरित किया है। सरकारी भारत मुद्रणालय भवन में NTA को 55,000 वर्ग फुट से अधिक का समर्पित कार्यालय स्थान दिया गया है। NTA को भवन की पांचवीं मंजिल और चौथी और छठी मंजिल के कुछ हिस्से आवंटित किए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में गोपनीय और संवेदनशील कामकाज को नए आवंटित भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रेस भवन के अन्य हिस्सों में पहले से ही CISF की सुरक्षा व्यवस्था है। अब NTA के परीक्षा संबंधी गोपनीय क्षेत्रों के लिए भी अलग और समर्पित सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

NTA परीक्षा चक्र के दौरान इस्तेमाल होने वाली तमाम प्रणालियों की सुरक्षा की भी समीक्षा कर रहा है। इसमें उम्मीदवारों का पंजीकरण, शुल्क भुगतान, प्रवेश पत्र, कंप्यूटर आधारित परीक्षा, ओएमआर प्रसंस्करण, परिणाम प्रणाली और परीक्षा से जुड़ा अन्य ढांचा शामिल है। हर परीक्षा चक्र से पहले परीक्षा से जुड़ी सभी प्रणालियों की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए NTA के प्रौद्योगिकी विभाग और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े विभाग के बीच समन्वय किया जा रहा है।

पेपर लीक ने खोली थी सुरक्षा व्यवस्था की खामियां
NTA की सुरक्षा व्यवस्था में यह बड़ा बदलाव 2024 NEET-UG पेपर लीक के बाद सामने आई खामियों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इस मामले के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था और NTA की परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे थे। CBI की आरोपपत्र में तीन विषय विशेषज्ञों को लीक हुए प्रश्नपत्र का प्राथमिक स्रोत बताया गया था। आरोपपत्र के मुताबिक, NTA के गोपनीय विभाग में प्रवेश करने और वहां से बाहर निकलने के दौरान इन विशेषज्ञों की जांच या तलाशी नहीं ली गई थी।

NATIONAL : वसुधैव कुटुंबकम भूल जाइए, अब परिवार एक रखना बड़ी चुनौती:सुप्रीम कोर्ट जज बोले- परिवार के विवादों में थोपा फैसला न्याय नहीं लगता, मध्यस्थता सबसे बेहतर

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एनवी अंजारिया ने पारिवारिक विवादों पर कहा कि कोर्ट से मिले समाधान अक्सर नकली लगते हैं। कई पक्षों को लगता है कि उन पर न्याय थोपा गया है, जो उनके लिए भ्रम जैसा होता है और अन्याय का रूप ले सकता है।जस्टिस अंजारिया ने पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता को सबसे सही बताया। उन्होंने कहा कि ये इंसानी भावनाओं और संवेदनशीलता से जुड़े विवाद होते हैं।

जस्टिस अंजारिया ने कहा, “भारत के संस्कार और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भूलिए। अब हम एक परिवार को भी एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”जस्टिस अंजारिया गुवाहाटी में ईस्टर्न जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे। जहां वे ‘फैमिली विवादों में ADR बनाम न्यायिक फैसला: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे।

फैमिली कोर्ट में बढ़ रही विवादों की संख्या

जस्टिस अंजारिया ने दो दिन चले सम्मेलन के समापन समारोह में कहा कि फैमिली विवाद का समाधान सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया भी है। फैमिली मुकदमों में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने बताया कि फैमिली विवादों की बढ़ती संख्या का मुद्दा जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 2008 में ही उठाया था।

उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि जहां भी मौका मिले उस कानूनी उपाय को अपनाकर मुकदमों की संख्या बढ़ाई जाए। मौजूदा समय में स्थिति और खराब है। फैमिली विवाद लगातार बढ़ते हुए एक के बाद एक नए विवादों को जन्म दे रहे हैं।

फैमिली कोर्ट्स एक्ट पर सवाल

जस्टिस अंजारिया ने पूर्वोत्तर राज्यों के कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों से पूछा कि क्या फैमिली कोर्ट्स एक्ट को अलग नजरिए से देखा गया है। क्या इसके प्रावधानों को ध्यान से पढ़ा है। इसके उद्देश्य में कहा गया है कि कानून फैमिली विवादों के समाधान के लिए बनाया गया था। इस कानून में सुलह और सामाजिक रूप से बेहतर नतीजे हासिल करने पर जोर था। इसमें प्रक्रिया के नियमों का पालन मकसद नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि फैमिली कोर्ट के जज को अलग-अलग रोल निभाने पड़ते हैं। उसे सुलह कराने वाला और मध्यस्थ बनना होता है। जज पति-पत्नी या परिवार के सदस्यों के बीच विवाद में पंच बन सकता है। उसकी जिम्मेदारी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाओं के इस्तेमाल की जरूरत सामने आई और उनके नए तरीकों पर काम करना पड़ा।

जज का दावा- मध्यस्थता कानूनी प्रक्रिया की कमियों को दूर करती है

जस्टिस अंजारिया ने कहा, “मेरा मानना है कि फैमिली विवाद सुलझाने के लिए सबसे सही व्यवस्था मध्यस्थता है। यह इंसानी मनोविज्ञान और मानसिकता को समझकर विवाद का समाधान खोजती है। यह दोनों पक्षों के लिए फायदे वाली स्थिति बनाती है। साथ ही कानूनी प्रक्रिया में जो कमी रह जाती है, यह उसे दूर कर देती है।

मध्यस्थता के अलावा कही ये बातें…

कोर्ट एक तरह से कई दरवाजों वाली व्यवस्था है। इसमें लोक अदालत, पंचाट, सुलह और मध्यस्थता जैसी अलग-अलग वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाएं शामिल हैं।
फैमिली विवादों की शुरुआत में ही उनकी जांच की जा सकती है। विवाद की प्रकृति और मुद्दों के आधार पर मामला उससे जुड़े विशेषज्ञ मध्यस्थ के पास भेजा जा सकता है।
मध्यस्थता प्रक्रिया और मध्यस्थता कानून में एक कमी है, शादी टूटने से जुड़े कई मामलों में मध्यस्थता के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से तलाक पर समझौता कर लेते हैं।
अगर ऐसा मामला सुप्रीम कोर्ट में आता है, तो सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कार्रवाई करता है। लेकिन निचली अदालतों और हाईकोर्ट के पास मध्यस्थता से हुए समझौते के आधार पर तुरंत तलाक की डिक्री देने का अधिकार नहीं है।
समझौता बना रहता है, लेकिन तलाक की डिक्री जारी नहीं हो पाती। इसके बाद पक्षों को संयुक्त आवेदन देना पड़ता है और एक बार फिर मुकदमेबाजी से गुजरना पड़ता है।
मध्यस्थता कानून की धारा 27 मध्यस्थता से हुए समझौते और उसकी शर्तों को लागू करने से जुड़ी है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुई है। इस धारा के तहत समझौता बाध्यकारी और लागू करने योग्य होना चाहिए।

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