Saturday, October 10, 2026
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ENTERTAINMENT : नाना पाटेकर के निधन से बॉलीवुड में शोक, अधूरी फिल्मों को लेकर चर्चा तेज

नाना पाटेकर के निधन से बॉलीवुड में शोक, अधूरी फिल्मों को लेकर चर्चा तेज

मुंबई | एंटरटेनमेंट डेस्क | 9 अक्टूबर 2026

हिंदी सिनेमा ने खोया एक दमदार कलाकार

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। उनके जाने से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।

अपने दमदार अभिनय से बनाई अलग पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए। उनकी अभिनय शैली, दमदार संवाद अदायगी और अलग अंदाज ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।

उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक कई तरह के किरदार निभाए। उनके अभिनय को आज भी सिनेमा प्रेमी याद करते हैं।

आने वाली फिल्मों की भी हो रही चर्चा

नाना पाटेकर की कुछ फिल्में अभी रिलीज होनी बाकी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी आगामी परियोजनाओं में ‘शक्ति शालिनी’, ‘ईथा’, ‘वेदांतम’ और ‘कुकू की कुंडली’ शामिल हैं। इन फिल्मों की स्थिति और रिलीज से जुड़ी जानकारी निर्माताओं की आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।

सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे

नाना पाटेकर का योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास का अहम हिस्सा रहेगा। उनके प्रशंसक उनके अभिनय और यादगार किरदारों के जरिए उन्हें हमेशा याद रखेंगे।

मुंबई | एंटरटेनमेंट डेस्क | 9 अक्टूबर 2026

हिंदी सिनेमा ने खोया एक दमदार कलाकार

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। उनके जाने से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।

अपने दमदार अभिनय से बनाई अलग पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए। उनकी अभिनय शैली, दमदार संवाद अदायगी और अलग अंदाज ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।

उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक कई तरह के किरदार निभाए। उनके अभिनय को आज भी सिनेमा प्रेमी याद करते हैं।

आने वाली फिल्मों की भी हो रही चर्चा

नाना पाटेकर की कुछ फिल्में अभी रिलीज होनी बाकी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी आगामी परियोजनाओं में ‘शक्ति शालिनी’, ‘ईथा’, ‘वेदांतम’ और ‘कुकू की कुंडली’ शामिल हैं। इन फिल्मों की स्थिति और रिलीज से जुड़ी जानकारी निर्माताओं की आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।

सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे

नाना पाटेकर का योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास का अहम हिस्सा रहेगा। उनके प्रशंसक उनके अभिनय और यादगार किरदारों के जरिए उन्हें हमेशा याद रखेंगे।

HEALTH : रात को सोने से पहले करें ये 7 काम, सुबह उठते ही महसूस होगा फर्क

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत और लाइफस्टाइल पर ध्यान नहीं दे पाते। देर रात तक मोबाइल चलाना, सुबह देर से उठना और नाश्ता छोड़ देना जैसी आदतें हमारी दिनचर्या को प्रभावित कर सकती हैं। अगर आप दिनभर तरोताजा, खुश और एक्टिव रहना चाहते हैं, तो सुबह की कुछ अच्छी आदतें अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।

  1. सुबह जल्दी उठने की आदत डालें
    सुबह समय पर उठने से दिन की शुरुआत व्यवस्थित तरीके से की जा सकती है। रोजाना लगभग एक ही समय पर उठने की कोशिश करें। पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है, इसलिए रात को समय पर सोने की आदत बनाएं।
  2. उठने के बाद पानी पिएं
    सुबह उठने के बाद एक गिलास पानी पीना शरीर में पानी की कमी पूरी करने में मदद कर सकता है। हालांकि, पानी पीने का सही समय और मात्रा हर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार अलग हो सकती है।
  3. 15 से 20 मिनट करें एक्सरसाइज
    सुबह हल्की एक्सरसाइज, योग, स्ट्रेचिंग या वॉक करने से शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। शुरुआत में आप 10 से 15 मिनट की सैर से भी शुरुआत कर सकते हैं।
  4. हेल्दी नाश्ता करें
    सुबह का नाश्ता ऐसा होना चाहिए, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व शामिल हों। आप अपने नाश्ते में पोहा, दलिया, ओट्स, अंडे, दही या मौसमी फल शामिल कर सकते हैं।
  1. सुबह उठते ही मोबाइल न देखें
    सुबह आंख खुलते ही सोशल मीडिया और मैसेज देखने की आदत कई लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। कोशिश करें कि दिन की शुरुआत कुछ समय अपने लिए निकालकर करें।
  2. दिनभर के कामों की योजना बनाएं
    सुबह कुछ मिनट निकालकर अपने जरूरी कामों की सूची बनाएं। इससे समय का बेहतर इस्तेमाल करने और जरूरी कामों को प्राथमिकता देने में मदद मिल सकती है।
  3. अपनी मानसिक सेहत का भी रखें ध्यान
    सुबह कुछ मिनट ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास या शांत बैठने के लिए निकालें। अपने परिवार के साथ समय बिताना और सकारात्मक गतिविधियों में शामिल होना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

अच्छी लाइफस्टाइल बनाने के लिए बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। सुबह की छोटी-छोटी आदतें धीरे-धीरे आपकी दिनचर्या को बेहतर बना सकती हैं। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक शांति पर ध्यान देकर आप अपने दिन की शुरुआत बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

BUSINESS : भारतीय बाजार और कारोबार से जुड़ी बड़ी खबरें

भारतीय बिजनेस जगत में शेयर बाजार, नई तकनीक, स्टार्टअप और कंपनियों की कारोबारी गतिविधियां निवेशकों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। देश की अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक की नजर नए व्यावसायिक अवसरों पर है।

शेयर बाजार पर निवेशकों की नजर

भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहती है। वैश्विक बाजारों के रुझान, कच्चे तेल की कीमतें, कंपनियों के तिमाही नतीजे और आर्थिक नीतियां बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।

स्टार्टअप और डिजिटल बिजनेस के बढ़ते अवसर

भारत में डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े व्यवसायों के नए अवसर सामने आ रहे हैं। छोटे कारोबारी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।

छोटे व्यापारियों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार, कारोबार शुरू करने से पहले बाजार की मांग, लागत, प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की जरूरतों को समझना जरूरी है। सही बिजनेस प्लान और वित्तीय प्रबंधन से कारोबार को लंबे समय तक सफल बनाने में मदद मिल सकती है।

भारतीय बिजनेस सेक्टर में बदलती तकनीक और ग्राहकों की जरूरतों के साथ नए अवसर विकसित हो रहे हैं। कारोबारियों को बाजार की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर व्यावसायिक निर्णय लेने चाहिए।

NATIONAL : Gen Z Protest Latest News: युवा सड़कों पर क्यों उतर रहे हैं? जानें पूरी कहानी

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नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026: भारत में Gen Z यानी युवा पीढ़ी से जुड़े विरोध प्रदर्शन एक बार फिर चर्चा में हैं। वोटर लिस्ट में बदलाव और चुनावी पारदर्शिता को लेकर युवा आंदोलन तथा विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। इसी बीच, दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।

दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रदर्शन की तैयारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Cockroach Janata Party (CJP) और कुछ छात्र संगठनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना बनाई है। आंदोलन से जुड़े लोगों की मांग है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच हो और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

आंदोलन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं। हालांकि, चुनाव अधिकारियों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

पुलिस कार्रवाई और हिरासत को लेकर विवाद

प्रदर्शन से पहले आंदोलन के कुछ सदस्यों और छात्रों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में सदस्यों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। इन दावों की पूरी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटनाओं के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हुआ है। वहीं, अधिकारियों ने कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

Gen Z आंदोलन क्यों महत्वपूर्ण है?

Gen Z आंदोलन केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। भारत और पड़ोसी देशों में युवा बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महंगाई और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

भारत में इससे पहले परीक्षा पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी युवा प्रदर्शन हुए थे। नेपाल में सितंबर 2025 के Gen Z आंदोलन ने भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंधों के खिलाफ व्यापक विरोध का रूप लिया था और इसके बाद वहां राजनीतिक बदलाव हुए।

नेपाल के Gen Z आंदोलन से क्या सबक मिलता है?

नेपाल के आंदोलन की पहली वर्षगांठ सितंबर 2026 में मनाई गई। इस दौरान रिपोर्टों में सामने आया कि भ्रष्टाचार और जवाबदेही से जुड़ी मांगों के बावजूद घायलों के पुनर्वास, रोजगार और पीड़ित परिवारों की सहायता जैसे मुद्दों पर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

नेपाल का अनुभव दिखाता है कि किसी आंदोलन के बाद राजनीतिक बदलाव होना और उसकी सभी मांगों का पूरा होना अलग-अलग बातें हैं।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन पर है। प्रदर्शन में कितने लोग शामिल होंगे, पुलिस की क्या व्यवस्था रहेगी और आंदोलन की मांगों पर आगे क्या प्रतिक्रिया मिलेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

Gen Z से जुड़े आंदोलन भारत में चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर युवाओं की बढ़ती भागीदारी को सामने ला रहे हैं। हालांकि, आंदोलन से जुड़े आरोपों, हिरासत के दावों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है।

NATIONAL : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज फिर विपक्ष का हल्ला बोल, कांग्रेस-AAP-वामपंथी दल करेंगे चुनाव आयोग का घेराव

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विपक्ष आज फिर दिल्ली में मार्च करेगा। कांग्रेस, AAP और वामपंथी दल 1 बजे CEO कार्यालय पहुंचकर SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन आज भी जारी रहेगा। 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों के मार्च और हिरासत के एक दिन बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और वामपंथी दल आज दोपहर 1 बजे दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक संयुक्त विरोध मार्च निकालेंगे। विपक्ष SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

AAP और वामपंथी दल आज कांग्रेस के साथ इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। संयुक्त मार्च कश्मीरी गेट स्थित CEO कार्यालय की ओर बढ़ेगा। AAP और वामपंथी दलों की भागीदारी से आज का प्रदर्शन विपक्ष के संयुक्त विरोध के तौर पर होगा।

कल चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़े थे सांसद
इससे पहले मंगलवार, 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला था। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया था।

प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ गए और तिरंगा लहराया। इसके बाद राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत अन्य कांग्रेस सांसद आकाशवाणी भवन के अंदर घुसकर ईसी दफ्तर जाने की कोशिश की जहां, उन्हें वहीं रोक दिया गया। बाद में वहीं पर राहुल गांधी समेत अन्य नेता धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि संसद के दोनों सदनों के करीब 300 सांसदों को चुनाव आयोग से मिलने से रोका गया।

आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हटाए गए नेता
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दो सहयोगियों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ने नहीं दिया गया। देर रात आकाशवाणी भवन परिसर में धरना दे रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, हालांकि बाद उन्हें किंग्सवे कैंप लेजकर छोड़ दिया गया।

पहले भी जंतर-मंतर पर हो चुका है प्रदर्शन
SIR को लेकर विरोध का यह सिलसिला पहले भी दिल्ली में दिखाई दे चुका है। पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी और SFI तथा AISA समेत कई वामपंथी छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।

अब 6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद आज विपक्ष एक बार फिर सड़क पर उतरने जा रहा है। कांग्रेस, AAP और वामपंथी दलों का संयुक्त मार्च दोपहर 1 बजे दिल्ली CEO कार्यालय की ओर होगा और प्रदर्शन के केंद्र में SIR में कथित अनियमितताओं के साथ CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहेगी।

NATIONAL : सदनों के स्थगित होने के 40 दिन बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक समापन नहीं

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संसद के दोनों सदनों को स्थगित किए जाने के 40 दिन बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक रूप से समापन नहीं हुआ है और इसने इन अटकलों को हवा दी है कि सरकार नया सत्र बुलाए बिना कोई महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है।

लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचारी ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा कि दोनों सदनों का 40 दिन तक सत्रावसान नहीं होना एक नया रिकॉर्ड है।

उन्होंने कहा कि 2015 में संसद के दोनों सदनों का 28 दिन बाद सत्रावसान किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही थी।ऐसी अटकलें हैं कि सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन का प्रस्ताव फिर से लाने की योजना बना रही है ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सके।

बजट सत्र के दौरान इस संबंध में पिछला प्रयास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के कारण सफल नहीं हो पाया था।

जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने की स्थिति में लोकसभा में प्रतिनिधित्व घटने को लेकर खासकर दक्षिणी राज्यों के विपक्षी दलों की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीट की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव कर रही है।

लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की बैठक 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी थी। आमतौर पर इसके अगले तीन से चार दिन के भीतर सत्रावसान की अधिसूचना जारी कर दी जाती है जिससे सत्र का औपचारिक समापन हो जाता है। हालांकि, इस बार मंगलवार सुबह तक सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं की गई।

बजट सत्र 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था और 20 अप्रैल को उसका सत्रावसान किया गया था।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति संसद का सत्र बुलाते हैं और उसका सत्रावसान करते हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है।

BUSINESS : द बोनस मार्केट अपडेट: रेपो रेट बढ़ने के बाद लाल निशान पर बंद हुआ बाजार; सेंसेक्स 429 अंक टूटा, निफ्टी भी पस्त

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में वृद्धि की घोषणा के बाद बाजार कमजोर रहा। सेंसेक्स 429.11 अंक गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 173.05 अंक की गिरावट के साथ 22,603.05 के स्तर पर आ गया।

बाजार में यह कमजोरी संक्षिप्त सुधार के बाद आई। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। यह केंद्रीय बैंक की लगभग चार साल में पहली दर वृद्धि है। इस नीतिगत निर्णय के बावजूद बाजार में सतर्क प्रतिक्रिया देखने को मिली। हिन्दalco के शेयर में 3 फीसदी की गिरावट आई। Infy के शेयर भी 2 फीसदी नीचे गिरे। निफ्टी मेटल सूचकांक में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो सूचकांक भी 1.5 फीसदी से अधिक गिरा।

आरबीआई का क्या रहा फैसला?
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। समिति ने रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ा दिया है। अब यह दर 5.50 फीसदी हो गई है। यह केंद्रीय बैंक की लगभग चार साल में पहली दर वृद्धि है। इस दर वृद्धि से बाजार में कमजोरी देखी गई। नीतिगत निर्णय के बावजूद बाजार में सतर्क प्रतिक्रिया रही।

किन क्षेत्रों पर पड़ा असर?
आरबीआई की रेपो रेट वृद्धि के बाद विभिन्न क्षेत्रों में रुझान मिश्रित रहे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, मीडिया, निजी बैंक और वित्तीय शेयरों ने कुछ मजबूती दिखाई। हालांकि, ऑटो और धातु शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, एफएमसीजी और रियल एस्टेट क्षेत्र भी गिरावट के साथ बंद हुए। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), फार्मा, तेल और गैस, सीमेंट और स्वास्थ्य सेवा के शेयर भी दबाव में रहे।

वैश्विक बाजारों का क्या रहा हाल?
भारतीय बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा। लंदन समय के अनुसार सुबह 8:35 बजे स्टॉक्स यूरोप 600 सूचकांक 0.6 फीसदी गिर गया। एसएंडपी 500 वायदा में मामूली बदलाव देखा गया। नैस्डेक 100 वायदा 0.2 फीसदी नीचे आया। डाव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज औसत वायदा भी 0.2 फीसदी गिरा। एमएससीआई एशिया पैशिफिक सूचकांक 0.9 फीसदी और एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स सूचकांक 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।

NATIONAL : चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून पर नई याचिका, जज के बेटे का ईसी से क्या कनेक्शन? जानें मामला

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मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर के बंटे फैसले को जया ठाकुर ने क्यूरेटिव याचिका के जरिए चुनौती दी है। याचिका में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा के बेटे के चुनाव आयोग से जुड़े होने का हवाला दिया गया है। क्या इससे फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठता है? क्यूरेटिव याचिका में क्या मांग की गई है और 2023 का कानून विवाद में क्यों है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर के बंटे हुए फैसले को अब दोबारा चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल कर इस फैसले को वापस लेने और मामले की नए सिरे से सुनवाई की मांग की है। याचिका में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि फैसले के बाद उन्हें जानकारी मिली कि न्यायमूर्ति शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से स्थायी वकील के रूप में पेश होते हैं। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने मामले में पक्षपात की आशंका और न्यायिक औचित्य का मुद्दा उठाया है।

मामला मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। 23 सितंबर को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस सवाल पर अलग-अलग राय दी थी कि इस मामले को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। बाद में दोनों न्यायाधीश इस बात पर सहमत हुए कि मामले को प्रधान न्यायाधीश के पास भेजा जाए, ताकि उचित संख्या वाली पीठ का गठन किया जा सके। अब क्यूरेटिव याचिका में 23 सितंबर के आदेश को ही वापस लेने की मांग की गई है।

याचिका में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा को लेकर क्या सवाल उठाया गया?
याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने अपनी क्यूरेटिव याचिका में कहा है कि उन्हें फैसले के बाद मीडिया में आई खबरों से न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा के बेटे के चुनाव आयोग से जुड़े होने की जानकारी मिली। याचिका के मुताबिक, इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट से इस जानकारी की पुष्टि की गई और पता चला कि सिद्धार्थ शर्मा 10 जुलाई 2024 से चुनाव आयोग के पैनल में शामिल हैं। याचिका में इसे न्यायमूर्ति शर्मा के सामने चल रहे उस मामले से जोड़ते हुए निष्पक्षता की आशंका जताई गई है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था को चुनौती दी जा रही थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि न्याय सिर्फ किया ही नहीं जाना चाहिए, बल्कि वह पूरी तरह निष्पक्ष होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। याचिका में इसी आधार पर न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाया गया है। हालांकि, यह याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आधार हैं, जिन पर आगे सुप्रीम कोर्ट को विचार करना होगा।

क्यूरेटिव याचिका में किस तरह की दलील दी गई है?
याचिका में कहा गया है कि मामला ‘रेजनेबल लाइकलीहुड ऑफ बायस’ यानी पक्षपात की उचित आशंका और ‘रियल डेंजर टेस्ट’ के सिद्धांत के दायरे में आता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी न्यायाधीश के परिवार का सदस्य उस संस्था की ओर से पेश हो रहा हो, जिसकी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है, तो न्यायिक औचित्य का सवाल उठता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई शुरू होने से पहले अपने बेटे की चुनाव आयोग से जुड़ी पेशेवर भूमिका की जानकारी देनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि इस जानकारी के सामने आने के बाद 23 सितंबर के फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठता है और इसलिए उसे वापस लेकर मामले की दोबारा सुनवाई होनी चाहिए।

23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में आखिर क्या हुआ था?
23 सितंबर को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई के बाद अलग-अलग राय दी थी। मुख्य सवाल यह था कि 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। न्यायमूर्ति दत्ता ने बड़ी पीठ को भेजने की जरूरत से असहमति जताई, जबकि न्यायमूर्ति शर्मा ने माना कि मामले में महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल हैं और इसे संविधान पीठ के सामने जाना चाहिए। मतभेद के बावजूद दोनों न्यायाधीशों ने मामले को प्रधान न्यायाधीश के प्रशासनिक पक्ष में भेजने पर सहमति जताई, ताकि उचित संख्या वाली पीठ बनाई जा सके। पीठ ने प्रधान न्यायाधीश से स्थायी पांच सदस्यीय संविधान पीठ बनाने की संभावना पर भी विचार करने को कहा था।

विवाद में 2023 का चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून क्यों अहम है?
2023 का कानून मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान करता है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इस व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखा गया है। इसी बदलाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सवाल पैदा होते हैं। केंद्र की ओर से मामले में कहा गया था कि याचिकाओं में महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं और इसलिए उन्हें पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। अब नई क्यूरेटिव याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले 23 सितंबर के आदेश को वापस लेने की मांग पर विचार का सवाल है।

NATIONAL : ‘भारत दिखा रहा दुनिया को रास्ता’: मोहन भागवत ने अशोक सिंघल का दिया उदाहरण, कहा – समाज की बेहतरी के लिए करें काम

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही समाज व दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को एक संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह बात नागपुर जिले के देओलापुर में ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में कई पहलों का उद्घाटन करते हुए कही, जो वीएचपी के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थीं।

उन्होंने कहा, ‘हमारे जीवन, समाज, धर्म की सुरक्षा और दुनिया की बेहतरी के लिए, जो रास्ता हर गुजरते दिन के साथ जरूरी होता जा रहा है। वह यह है कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीना चाहिए और सफल होना चाहिए। हर किसी का जीवन संतोषजनक होना चाहिए, और हम सभी को कुछ न कुछ करना चाहिए।’

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज के आकार की तुलना में ‘अच्छे कामों में लगे’ लोगों की संख्या पर्याप्त नहीं है और उन्होंने सामाजिक कार्यों में लोगों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने के दो तरीके हैं – या तो अच्छे काम करके या सिर्फ़ उन लोगों को याद करके जिन्होंने अच्छे काम किए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग यह जानते हुए भी कि क्या करने की जरूरत है, मानते हैं कि ऐसा काम किसी और को करना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि उनके पास नौकरी है और परिवार की जिम्मेदारी है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि कोई और समाज के लिए कुछ अच्छा करे।’ उन्होंने आगे कहा कि जब कुछ अच्छा होता है, तो उसमें पूरे समाज का योगदान झलकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता दिखाते हैं, वे दूसरों को मुश्किल रास्ते चुनने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

भागवत ने कहा, ‘जब आप बहुत कुछ देते हैं, तो बदले में आपको बहुत कुछ मिलता भी है।’ उन्होंने दिवंगत मोरोपंत पिंगले और विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल का उदाहरण दिया, जिन्होंने एक बड़े मकसद के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और आज उन्हें व्यापक रूप से सम्मान मिलता है।

भागवत ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने निजी फायदे पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खुद को समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया और अंततः प्रमुख नेता बने। उन्होंने कहा कि जब भी वर्तमान में कुछ अच्छा होता है, तो दुनिया उन लोगों को याद करती है जिन्होंने अतीत में ऐसे कामों की शुरुआत की थी, और उन्हें याद करना ही उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

NATIONAL : ‘भारत दिखा रहा दुनिया को रास्ता’: मोहन भागवत ने अशोक सिंघल का दिया उदाहरण, कहा-समाज की बेहतरी के लिए करें काम

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करते हुए समाज और दुनिया के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने अशोक सिंघल और मोरोपंत पिंगले का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छे कार्यों के जरिए समाज में योगदान देना और दूसरों को प्रेरित करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही समाज व दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को एक संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह बात नागपुर जिले के देओलापुर में ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में कई पहलों का उद्घाटन करते हुए कही, जो वीएचपी के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थीं।

मोहन भागवत ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘हमारे जीवन, समाज, धर्म की सुरक्षा और दुनिया की बेहतरी के लिए, जो रास्ता हर गुजरते दिन के साथ जरूरी होता जा रहा है। वह यह है कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीना चाहिए और सफल होना चाहिए। हर किसी का जीवन संतोषजनक होना चाहिए, और हम सभी को कुछ न कुछ करना चाहिए।’

अच्छे लोगों को याद करने के क्या तरीके हैं?
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज के आकार की तुलना में ‘अच्छे कामों में लगे’ लोगों की संख्या पर्याप्त नहीं है और उन्होंने सामाजिक कार्यों में लोगों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने के दो तरीके हैं – या तो अच्छे काम करके या सिर्फ़ उन लोगों को याद करके जिन्होंने अच्छे काम किए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग यह जानते हुए भी कि क्या करने की जरूरत है, मानते हैं कि ऐसा काम किसी और को करना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि उनके पास नौकरी है और परिवार की जिम्मेदारी है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि कोई और समाज के लिए कुछ अच्छा करे।’ उन्होंने आगे कहा कि जब कुछ अच्छा होता है, तो उसमें पूरे समाज का योगदान झलकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता दिखाते हैं, वे दूसरों को मुश्किल रास्ते चुनने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

अशोक सिंघल का उदाहरण देकर क्या कहा?
भागवत ने कहा, ‘जब आप बहुत कुछ देते हैं, तो बदले में आपको बहुत कुछ मिलता भी है।’ उन्होंने दिवंगत मोरोपंत पिंगले और विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल का उदाहरण दिया, जिन्होंने एक बड़े मकसद के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और आज उन्हें व्यापक रूप से सम्मान मिलता है।

भागवत ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने निजी फायदे पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खुद को समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया और अंततः प्रमुख नेता बने। उन्होंने कहा कि जब भी वर्तमान में कुछ अच्छा होता है, तो दुनिया उन लोगों को याद करती है जिन्होंने अतीत में ऐसे कामों की शुरुआत की थी, और उन्हें याद करना ही उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

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