Wednesday, July 29, 2026
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NATIONAL : इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का पाग पहनाकर स्वागत,

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संसद में मॉनसून सत्र चल रहा है. इस दौरान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान आज यानी सोमवार, 27 जुलाई को पहली बार संसद पहुंचे हैं. परिसर में पहुंचते ही भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सांसदों ने मकर द्वार पर गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया. इस दौरान नेताओं ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाए. वहीं, बीजेपी नेता और लोकसभा सांसद संजय जायसवाल ने धर्मेंद्र प्रधान को पाग पहनाया.

धर्मेंद्र प्रधान के आने से पहले बीजेपी सांसद मकर द्वार पर जमा हुए और उनके स्वागत का इंतजार करने लगे. जैसे ही वे संसद परिसर में दाखिल हुए, पार्टी के साथियों ने उन्हें अंदर तक पहुंचाया, उनका अभिवादन किया और एकजुटता दिखाते हुए उन्हें एक खास टोपी भी भेंट की.

धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने के बाद विपक्ष ने भी तुरंत प्रतिक्रिया किया. प्लेकार्ड और नारों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने ‘शिक्षा चोरी’ के नारे लगाए.

NEET विवाद के बाद देश में पेपर लीक रोकने वाले कानून को और सख्त बनाने के मकसद से लाए जा रहे ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पर संसद में चर्चा की तैयारी के बीच विपक्ष और NDA के बीच हंगामा हुआ.

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और कथित NEET पेपर लीक को लेकर हो रहे देशव्यापी विरोध का फायदा उठाने की कोशिश करने वाली ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ को रोकने के लिए लिया गया.

लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच एनडीए के किसी सीनियर मंत्री का इस्तीफा देना एक दुर्लभ घटना थी.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व वाले आंदोलन की मुख्य मांग थी और यह इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के तीसरे दौर से कुछ घंटे पहले ही आया.

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NATIONAL : करूर भगदड़ मामला: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार का फैसला बदला, पीड़ितों को नौकरी देने का आदेश रद्द

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मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के आदेश को रद्द कर दिया है. तमिलनाडु की विजय सरकार ने पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी. कोर्ट ने इस फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताया. कहा, अनुकंपा के आधार पर इस तरह नौकरियां देने से गलत नजीर बनेगी.

पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, इस तरह भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने से इसी आधार पर नौकरियों की मांग करने वालों की बाढ़ आ जाएगी. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 10 जुलाई 2026 को इस घटना में जान गंवाने वाले 31 लोगों के परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि यह फैसला पूरी तरह से गैर-कानूनी और राजनीतिक कदम था. वकील मोहम्मद रशीद के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मानवीय आधार पर नौकरी देने के लिए तय की गई चार प्रमुख गाइडलाइंस के तहत करूर भगदड़ के पीड़ित इस श्रेणी में पात्र नहीं आते हैं. सरकार का तर्क था कि यह नौकरियां एक नीतिगत फैसले के तहत दी गई थीं, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

हाई कोर्ट का फैसला युवाओं के लिए एक बड़ी जीत : याचिकाकर्ता के वकील
याचिकाकर्ता के वकील क्लीटस ने इस फैसले को राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ी जीत बताया. उन्होंने कहा, “यह पूरे भारत के लिए एक अहम फैसला है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मुआवजे के आदेशों का पालन करने के तरीके पर निर्देश और गाइडलाइंस दे चुका है. तमिलनाडु में मुआवजे के आदेशों के लिए पहले से ही एक सरकारी आदेश (GO) मौजूद है. उसी के आधार पर हमने अपनी दलीलें पेश कीं. इसके बाद, कोर्ट ने उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत करूर घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी दी जा रही थी. सरकार ने अपने पक्ष में चार घटनाओं का जिक्र किया था.”

NATIONAL : दलबदल कानून: 10वीं अनुसूची पर कपिल सिब्बल की याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस; क्या-क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की 10वीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती देने वाली वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। इस व्याख्या के तहत किसी राजनीतिक दल में विलय का रास्ता अपनाकर विधायक दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बच सकते हैं। कपिल सिब्बल ने यह याचिका खुद पक्षकार बनकर दायर की है।

सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका क्यों दायर की गई है। सिब्बल ने कहा कि विलय की वजह से देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से चुनाव में मिले बहुमत का फैसला अल्पमत में बदला जा सकता है।

उन्होंने गोवा मामले का भी जिक्र किया, जो अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सिब्बल ने कहा, इस प्रक्रिया से चुनाव का फैसला बदला जा सकता है। बहुमत अल्पमत में बदल सकता है और अल्पमत बहुमत बन सकता है।

जज ने क्या कहा?
नोटिस जारी करने के बावजूद जस्टिस नरसिम्हा ने इस मामले से कुछ दूरी बनाई। उन्होंने कहा, ऐसे मुद्दों का फैसला आमतौर पर विधायकों को करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें आमतौर पर सदन के अंदर उठाया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो तो कम से कम राजनीतिक दलों के सामने उठाया जाना चाहिए।

कपिल सिब्बल ने क्या चुनौती दी है?
अपनी याचिका में सिब्बल ने 10वीं अनुसूची में राजनीतिक दलों के विलय से जुड़े प्रावधानों की सांविधानिक व्याख्या पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्याख्या की वजह से छोटे गुट दूसरे राजनीतिक दलों के साथ विलय करके दलबदल कानून की सख्ती से बच निकलते हैं।

सिब्बल ने कहा कि इस तरह के कई मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने बताया कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से दायर याचिका भी जस्टिस नरसिम्हा की पीठ के सामने लंबित है। इस याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें शिवसेना के कुछ सांसदों के शिंदे गुट वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी गई थी।

कई दलों के नेताओं के विलय का मामला
हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी से जुड़े कई विधायक भाजपा और दूसरे दलों में शामिल हुए हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित है।

इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि किसी राजनीतिक दल की मंजूरी के बिना भी उसका विधायक दल किसी दूसरे दल में विलय कर सकता है।

NATIONAL : सीजेपी प्रदर्शन हिंसा: उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को भेजी चिट्ठी

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा तथा तोड़फोड़ में शामिल अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप), यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और भारतीय बौद्ध समेत विभिन्न संगठनों ने आग्रह बढ़ाया है, कुछ संगठनों ने गृह मंत्री अमित शाह तथा दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

सामाजिक व धार्मिक संगठनों का कहना है कि संगठनों ने कहा है कि प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों पर पथराव करने और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने वाले पहचाने गए अपराधियों के खिलाफ तुरंत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

उन्होंने साफ किया कि जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए। लेकिन जिनके आपराधिक इतिहास हैं, उन पर सख्त कार्रवाई कर समाज को कड़ा संदेश देना जरूरी है। संगठनों ने सीजेपी से भी आग्रह किया है कि ऐसे तत्वों के पक्ष में न उतरें।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि सीजेपी ने खुद माना है कि प्रदर्शन में अराजकतत्व घुस गए थे। ऐसे में जरूरी है कि प्रदर्शनकारियों और अपराधियों में अंतर कर सीजेपी उनसे दूरी बनाकर समाज को साफ संदेश दें।

सीजेपी ने नीट परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था सुधार की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पथराव, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए तथा कई सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए। पुलिस ने दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और लोक सेवक पर हमले के आरोप में चार एफआईआर दर्ज कीं। जांच में सीसीटीवी, ड्रोन और बाडी कैमरे की फुटेज के साथ चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल कर प्रदर्शन स्थलों पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की जा रही है।

अब तक 989 ऐसे अपराधियों की पहचान
अब तक 989 ऐसे अपराधियों की पहचान हुई है जो जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल थे। इसमें हत्या आरोपित 101, हत्या के प्रयास वाले 62, डकैती व लूट के 284, दुष्कर्म के 61, पॉक्सो के छह, छेड़छाड़ के 25 समेत कई अन्य मामलों में आरोपित या लिप्त अपराधियों की पहचान हुई है।

भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में अपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने पुलिस से अपील की है कि पहचाने गए अपराधियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जा सकें।

यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह प्रदर्शन एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा लग रहा है। गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में उन्होंने मामले में कार्रवाई के साथ विस्तृत जांच पर जोर दिया है।

NATIONAL : एंटी-रैगिंग नियमों की अनदेखी पर केंद्र सरकार की सख्ती, देश के 107 बड़े शिक्षण संस्थानों को थमाया नोटिस

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देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए बनाए गए कड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इस बात की जानकारी सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का पालन न करने पर देश के 107 उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन लापरवाह संस्थानों में 18 बड़े मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं।

क्यों हुई कार्रवाई और क्या थीं कमियां?
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद में जानकारी दी कि इन संस्थानों ने रैगिंग रोकने से जुड़े सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया था। जांच में मुख्य तौर पर दो बड़ी कमियां पाई गईं।

सुकांत मजूमदार ने पहली कमी के तौर पर शपथपत्र की अनदेखी पर जोर दिया। मजूमदार ने बताया कि इन संस्थानों ने अपने यहां पढ़ने वाले नए छात्रों और उनके माता-पिता या अभिभावकों से अनिवार्य रूप से ‘एंटी-रैगिंग शपथपत्र’ नहीं भरवाए थे।

इसके अलावा रिपोर्ट जमा न करना भी एक बड़ा कारण बना। मंत्री ने बताया कि संस्थानों ने यूजीसी द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट भी जमा नहीं की थी।

रैगिंग के खिलाफ सख्त है सरकार
इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी का साफ निर्देश है कि देश के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। इसके तहत हर संस्थान के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे प्रवेश के समय ही छात्रों से एंटी-रैगिंग शपथपत्र लें और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखें।

Iran-US War: क्या ईरान ने मानी हार? ट्रंप बोले- ‘हमले रोकने की गुहार लगाई; खुद बढ़ाया बातचीत का हाथ

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका से सैन्य हमले रोकने और बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है। ट्रंप के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और यदि समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर हमले रोकने और बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि दोनों देशों के बीच नया युद्धविराम समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।

क्या ईरान ने खुद अमेरिका से बातचीत की पहल की?
वॉटरफोर्ड टाउनशिप जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए संपर्क किया है। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने हमसे बेहद विनम्रता से कहा, ‘कृपया हमले रोकिए, आइए बैठकर बात करते हैं।’ फिलहाल हम उसी स्थिति में हैं। अब देखते हैं क्या होता है। अगर समझौता नहीं हुआ तो हम फिर पहले जैसी कार्रवाई करेंगे।”

हमले रोकने के पीछे क्या वजह रही?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगभग दो सप्ताह तक ईरान पर सैन्य हमले करता रहा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श शुरू किया। सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने के संभावित परिणामों को लेकर प्रशासन के भीतर भी गंभीर चर्चा हुई।

क्या अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी जताई थी चिंता?
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने सैन्य अभियान के विस्तार को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने अमेरिकी हथियारों के भंडार, विशेष रूप से गोला-बारूद की उपलब्धता और अन्य रणनीतिक प्रभावों पर सवाल उठाए थे।

सेंटकॉम कमांडर ने क्या सलाह दी थी?
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास चल रहे बमबारी अभियान को रोकने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि यह अभियान अपनी प्रभावशीलता की सीमा तक पहुंच चुका है और अब इससे अपेक्षित सैन्य लाभ नहीं मिल रहा है।

क्या कई सलाहकारों की राय ने बदला ट्रंप का फैसला?
एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एडमिरल कूपर की सलाह के अलावा कई सैन्य और असैन्य सलाहकारों की राय ने भी ट्रंप के फैसले को प्रभावित किया। इन्हीं सुझावों के बाद शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान पर अपने सैन्य हमलों को रोकने का निर्णय लिया।

क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और दोनों देशों के बीच सीधे तथा मध्यस्थों के जरिए संपर्क बना हुआ है। उन्होंने कहा, “हम अभी ईरान से बात कर रहे हैं। बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है।”

ट्रंप ने बातचीत को लेकर क्या दावा किया?
ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की मांग नहीं करता। उन्होंने कहा, “अगर हम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे होते तो वे बैठक की मांग नहीं करते। वे सिर्फ इसलिए मिलना चाहते हैं क्योंकि हमने उन पर बहुत कड़े हमले किए हैं।”

क्या ईरान ने सीधे और परोक्ष दोनों माध्यमों से संपर्क किया?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अपने प्रतिनिधियों (सुरोगेट्स) के जरिए भी संदेश भेजा और सीधे तौर पर भी संपर्क किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से और सीधे दोनों तरह से बैठक का अनुरोध किया और अब हम बातचीत कर रहे हैं।”

मिसाइल इंटरसेप्टर को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका के पास विभिन्न प्रकार के पर्याप्त हथियार और मिसाइल इंटरसेप्टर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि देश लगातार अपने रक्षा भंडार को और मजबूत कर रहा है।

बाइडन प्रशासन पर क्यों साधा निशाना?
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की आलोचना करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में बड़ी मात्रा में हथियार यूक्रेन भेजे गए। उन्होंने कहा, “हम अपने रक्षा भंडार को फिर से मजबूत कर रहे हैं। हमारे पास पर्याप्त हथियार हैं, यहां तक कि मध्यम श्रेणी के हथियार भी हमारी जरूरत से कहीं ज्यादा हैं।”

पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को लेकर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है। उनके मुताबिक, देश अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए लगातार इन प्रणालियों का निर्माण कर रहा है।

क्या बातचीत नाकाम होने पर फिर होंगे हमले?
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति पूरी तरह मौजूदा वार्ता के परिणाम पर निर्भर करेगी। उन्होंने दोहराया कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई और कोई समझौता नहीं बन पाया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि हमने ईरान की सैन्य क्षमता को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है। वे मिलना चाहते हैं और हम मिल रहे हैं। देखते हैं क्या होता है। समझौते की संभावना है। उन्होंने अपने प्रतिनिधियों के जरिए और सीधे दोनों तरह से बैठक का अनुरोध किया है। अच्छी बातें हो सकती हैं। अगर वे बैठक चाहते हैं तो इसकी वजह यही है कि हमने उन पर बहुत कड़े हमले किए हैं

WORLD : सीमा पर शांति, व्यापार में रफ्तार: क्या बदलने वाला है भारत-चीन का रिश्ता? बीजिंग वार्ता से मिले संकेत

बीजिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन की विदेश मामलों की उप-मंत्री हुआ चुनयिंग के बीच सोमवार को बैठक हुई। इस बैठक में भारत और चीन ने सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया।

बीजिंग में सोमवार को विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन की विदेश मामलों की उप-मंत्री हुआ चुनयिंग के बीच बैठक हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति जताई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन की उप-विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में दोनों देशों के नेताओं की सहमति को आगे बढ़ाने और आपसी हितों वाले मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया।

क्या भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा देने पर बनी सहमति?
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा की और भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया। दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देकर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की।

भारतीय दूतावास ने बैठक को लेकर क्या कहा?
दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा क विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री ने चीन की विदेश मामलों की उप-मंत्री सुश्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और दोनों नेताओं के उस विजन को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की, जिसके तहत भारत और चीन एक-दूसरे के साझेदार हैं और एक-दूसरे के लिए विकास के अवसर हैं। इसमें व्यापार और आर्थिक संबंधों, संस्कृति तथा लोगों के बीच आदान-प्रदान के माध्यम से पारस्परिक लाभ वाले परिणाम शामिल हैं। दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया।’

क्या विक्रम मिस्री की चीन यात्रा में कई अहम बैठकें हुईं?
यह बैठक विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन की आधिकारिक यात्रा का हिस्सा है। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं।

सुन हैयान के साथ किन मुद्दों पर हुई बातचीत?
इससे पहले दिन में विदेश सचिव ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और चीन के नेताओं द्वारा दिए गए निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर चर्चा की। इसमें आपसी प्राथमिकता वाले मुद्दों का समाधान तथा राजनीतिक, शैक्षणिक, थिंक-टैंक और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

क्या सीपीपीसीसी के साथ भी बढ़े राजनीतिक संपर्क?
मिस्री ने चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप-महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने राजनीतिक स्तर और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।

क्या दोनों देश रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करना चाहते हैं?
ये बैठकें नई दिल्ली और बीजिंग के बीच जारी राजनयिक संवाद को रेखांकित करती हैं। दोनों देश सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में संवाद और सहयोग के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

जयशंकर ने चीन के सामने कौन-सी अहम शर्त रखी थी?
पिछले सप्ताह बुधवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से कहा था कि सामान्य राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली के लिए सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता बनाए रखना एक ‘अनिवार्य शर्त’ है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंध आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए।

NATIONAL : जंतर-मंतर आंदोलन: सिर्फ सरकारी FIR ही होंगी वापस, निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों में जारी रहेगी कार्रवाई

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जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं।

जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर, जिनमें महिला पत्रकारों से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य आपराधिक आरोप शामिल हैं, वापस नहीं ली जाएंगी। इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

केंद्र सरकार ने पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए भरोसा दिया था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी के तहत दिल्ली पुलिस अपनी ओर से दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि सोमवार शाम तक इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए।

दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार, आंदोलन के दौरान दिल्ली में करीब 20 एफआईआर दर्ज हुईं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और हिंसा से जुड़े हैं। वहीं करीब पांच एफआईआर निजी शिकायतों पर दर्ज की गई हैं। इनमें दो महिला पत्रकारों द्वारा छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।

चूंकि ये निजी शिकायतों पर आधारित मामले हैं, इसलिए इन्हें सरकार या पुलिस अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकती। इन मामलों में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में दिल्ली पुलिस स्वयं शिकायतकर्ता है, केवल उन्हीं में अभियोजन पक्ष अदालत से मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करेगा। इसके लिए पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। एलजी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी। अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी कि मुकदमा वापस लिया जाए या नहीं।

NATIONAL : संसद में अब होगा काम, पेपर लीक बिल पर मान गए सारे दल, लोकसभा में होगी 8 घंटे की महाबहस

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संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर आठ घंटे तक चर्चा होगी. सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने के बाद गतिरोध समाप्त हुआ है. कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के बहस में हिस्सा लेने की संभावना है. NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद लाए गए इस विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.

संसद के मानसून सत्र में कई दिनों से जारी गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा होगी.

संसद के मानसून सत्र में कई दिनों से जारी गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा होगी. सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति के बाद सदन में इस अहम विधेयक पर करीब आठ घंटे तक बहस कराने का फैसला लिया गया है. माना जा रहा है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर यह संसद की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक होगी.

समाचार एजेंसी एएनआई सूत्रों के हवाले से बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के फ्लोर लीडर्स के साथ बैठक की थी. इसी बैठक में गतिरोध खत्म करने और विधेयक पर विस्तार से चर्चा कराने पर सहमति बनी. इसके बाद संसद में इस बिल पर व्यापक बहस का रास्ता साफ हो गया.

राहुल गांधी संभालेंगे कांग्रेस का मोर्चा
कांग्रेस ने भी इस चर्चा में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पार्टी की ओर से इस विधेयक पर मुख्य वक्ता होंगे. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के भी बहस में हिस्सा लेने की संभावना है. इससे पहले मंगलवार सुबह विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक में अंतिम रणनीति तय की जाएगी.

सोमवार को सरकार इस विधेयक पर चर्चा शुरू कराना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे और लगातार नारेबाजी के कारण कार्यवाही बाधित होती रही. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी. अब दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के बाद मंगलवार को विधेयक पर विस्तृत बहस होगी.
क्या है एंटी पेपर लीक बिल?

देशभर में NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा कानून को और सख्त बनाने के लिए यह संशोधन विधेयक पेश किया है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे लोकसभा में पेश किया था. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल गिरोह और परीक्षा माफिया पर कड़ा शिकंजा कसना है.

बिल में क्या-क्या बड़े प्रावधान?
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए सजा को काफी सख्त किया गया है. अब ऐसे मामलों में कम से कम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा.
अगर कोई संगठित गिरोह या परीक्षा माफिया इस तरह के अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसके लिए कम से कम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएं, ताकि मुकदमों का जल्द निपटारा हो सके और दोषियों को समय पर सजा मिले.सरकार का दावा है कि यह कानून देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा.

NATIONAL : ‘पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और चार दोषियों को फांसी हो’, दिल्ली पुलिस बोली- जानवर बन गए थे सभी

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दिल्ली पुलिस ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के सनसनीखेज मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की है। पुलिस ने कहा कि दोषियों ने पीड़ित पर बेरहमी से हमला करते हुए जानवरों के स्तर तक गिर गए।

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की। पुलिस ने अदालत में कहा कि दोषियों ने पीड़ित पर लगातार हमला करते हुए ‘जानवरों के स्तर तक गिरकर’ अपराध किया। यह दलील अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के समक्ष दी गई। दोषियों की सजा पर कड़कड़डूमा कोर्ट में बहस हुई और अब 31 जुलाई को फैसला आएगा।

कोर्ट में पुलिस ने कहा- बेरहमी से हत्या हुई, शरीर पर 51 घाव मिले
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा का अपहरण कर बेरहमी से हत्या हुई। दोषियों ने उनकी मृत्यु के बाद भी यातना देना जारी रखा। शर्मा के शरीर पर 51 घाव मिले, जिनमें से 18 नुकीले हथियारों से थे। पांडे ने इसे सुनियोजित और जघन्य हत्या बताया।

‘हत्या के वक्त कसाई बन गए थे’
उन्होंने कहा कि दोषियों ने अपराध के दौरान “कसाई का रूप ले लिया था”। अभियोजक ने इसे 2020 दिल्ली दंगों में मारे गए 53 लोगों के संदर्भ में देखने की बात कही। पीड़ित ने कोई उकसावा नहीं दिया था, बल्कि दोषियों ने जानबूझकर हत्या की। उन्होंने दोषियों को कोई नरमी न देने की अपील की।

बचाव पक्ष की दलीलें
हुसैन के अधिवक्ताओं राजीव मोहन और तारा नरूला ने मौत की सजा का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई है। वकीलों ने बताया कि 11 आरोपियों में से छह को बरी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि मौत की सजा दुर्लभतम मामलों में ही दी जाती है और हुसैन का जेल में आचरण अच्छा रहा है।

31 जुलाई को आएगा फैसला
अदालत ने 13 जुलाई को हुसैन और चार अन्य को शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। शर्मा पर 2020 दिल्ली दंगों के दौरान भीड़ ने हमला किया, उनका शव नाले में मिला। अदालत ने कहा कि हुसैन भारी हथियारों से लैस भीड़ का सदस्य था। यह भीड़ हिंदुओं के खिलाफ दंगे, आगजनी और लूटपाट के लिए इकट्ठा हुई थी, जिसने शर्मा की बर्बर हमले में हत्या की। हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 365, 147, 148, 153ए, 188 और 149 के तहत दोषी ठहराया गया।

समझाने से नाराज होकर दंगाइयों ने ले ली थी जान
वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई घायल हो गए थे। इसी दौरान जब अंकित शर्मा आरोपियों को शांत करने और उनसे कानून हाथ में नहीं लेने का आग्रह कर रहे थे। तभी उन्हें पकड़ लिया गया और उनकी जान लेने के बाद शव नाले में फेंक दिया गया था।

कौन है ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन ने 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीतकर पार्षद बना। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित पौरारा गांव का रहने वाला है। पांच भाइयों में ताहिर सबसे बड़ा है। 2017 के चुनावी हलफनामे में उसने 18 करोड़ की घोषित संपत्ति थी। 2020 के दिल्ली दंगों में ताहिर का नाम आया। दंगों में ताहिर का नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उसे पर्टी से निष्कासित कर दिया।

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