Tuesday, June 9, 2026
Home Blog

NEET UG री-एग्जाम: वायुसेना के हेलिकॉप्टर 18 जगह पहुंचाएंगे प्रश्नपत्र, GPS निगरानी और पासवर्ड से होगी सुरक्षा

0

क्या इस बार NEET परीक्षा में पेपर लीक की कोई गुंजाइश बचेगी? 21 जून को होने जा रही दोबारा परीक्षा के लिए सरकार ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसमें वायुसेना के हेलिकॉप्टर से लेकर सेना, GPS निगरानी और पासवर्ड सिस्टम तक शामिल हैं।

मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए 21 जून को दोबारा होने जा रही नीट-यूजी की परीक्षा के प्रश्नपत्र वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर दिल्ली से देश के 18 लोकेशन पर पहुंचाएंगे। यहां से पेपर को सेना के लॉजिस्टिक सेंटर और वहां से 551 परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी सेना और अर्द्धसैनिक बलों को दी गई है।

पीएम नरेंद्र मोदी की निगरानी में नीट को पेपरलीक से बचाने के लिए पूरी तरह सरकारी तंत्र का प्रयोग किया गया है। पहली बार सरकारी प्रोफेसरों व वरिष्ठ शिक्षकों से पेपर तैयार करवाकर हिंदी, अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में अनुवाद कराया गया। इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने वाली प्रौद्योगिकी का भी प्रयोग हुआ है।

पूरी प्रक्रिया में सरकार से इतर किसी भी बाहर व्यक्ति को जिम्मेदारी नहीं दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के लिए बजट तैयार करने वाली टीम भी सीधे जुड़ी है। कुल 23 लाख प्रश्नपत्र छपने हैं और इसके लिए जिस तरह बजट बनाने के दौरान टीम काम करती है, उसी तर्ज पर प्रश्न पत्र तैयार हुए हैं।

लॉजिस्टिक सेंटर से परीक्षा केंद्र तक जीपीएस से निगरानी
प्रश्न पत्र पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है…इसमें शिक्षा मंत्रालय, संचार मंत्रालय के अधीनस्थ डाक विभाग, रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय व केंद्रीय गृहमंत्रालय के साथ वरिष्ठ अफसर हैं। समिति पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय को सीधे रिपोर्ट करेगी।

हवाई जहाज से उतारने के बाद पेपर के स्टील बॉक्स सेना के लॉजिस्टिक सेंटर तक पहुंचाए जाएंगे…डाक विभाग और सेना के वाहनों से केंद्रों तक पेपर पहुंचाने वाले वाहन जीपीएस के साथ लाइव कैमरे जोड़े जा रहे हैं।

WORLD : H-1B वीजा मामले में ट्रंप को बड़ा झटका, कोर्ट ने 1 लाख डॉलर वाली फीस को रद्द किया

0

वाशिंगटन: अमेरिका के एक फेडरल जज ने सोमवार (लोकल टाइम) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी, जिसमें एच-1बी वीजा प्रोग्राम के तहत स्पेशल रोल के लिए विदेशी वर्कर को हायर करने वाले एम्प्लॉयर पर 100,000 अमेरिकी डॉलर की फीस लगाने का प्रस्ताव था.

पोलिटिको के अनुसार अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज रिचर्ड स्टर्न्स ने फैसला सुनाया कि सितंबर 2025 की घोषणा के जरिए एच-1बी वीजा एप्लीकेशन के लिए राष्ट्रपति के प्रस्तावित पेमेंट, जिसे अमेरिकी विदेश मंत्रालय और अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने तेजी से लागू किया, शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का उल्लंघन करता है.

ट्रंप और उनके साथियों ने तर्क दिया है कि इस प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को नजरअंदाज करने या नौकरी से निकालने के लिए किया गया है, ताकि कम सैलरी पर विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखा जा सके. ट्रंप ने अपने बयान में कहा, ‘एच-1बी प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल अमेरिकियों को साइंस और टेक्नोलॉजी में करियर बनाने से रोककर नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा पैदा करता है, जिससे इन फील्ड में अमेरिकी लीडरशिप खतरे में पड़ जाती है.’

स्टर्न्स का फैसला छह महीने बाद आया जब वाशिंगटन, डी.सी. के एक फेडरल जज ने यू.एस. चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा फाइल किए गए ऐसे ही एक केस में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के पक्ष में फैसला सुनाया था. इसमें कहा गया था कि कांग्रेस ने प्रेसिडेंट को 100,000 अमेरिकी डॉलर की फीस लगाने का अधिकार दिया था. हालांकि, उस पहले वाले केस में जज हॉवेल का फैसला फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले से पहले जारी किया गया था, जिसने बाद में स्टर्न्स के फैसले को गाइड करने में मदद की.

एच-1बी वीजा प्रोग्राम एम्प्लॉयर्स को हाई-स्किल्ड विदेशी वर्कर्स के लिए अर्जी देने की इजाजत देता है, ताकि वे खास कामों में कुछ समय के लिए पोस्ट भर सकें, जिनके लिए कम से कम बैचलर डिग्री जरूरी है. कैलिफ़ोर्निया स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के मुताबिक, एच-1बी वर्कर के लिए अर्जी देते समय, एम्प्लॉयर को अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ लेबर से सर्टिफाइड एक एप्लीकेशन जमा करनी होगी, जिसमें यह बताया गया हो कि एच-1बी वर्कर के काम करने से उसी तरह काम करने वाले अमेरिकी वर्कर्स की सैलरी और काम करने के हालात पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.

अमेरिकी कांग्रेस ज़्यादातर प्राइवेट एम्प्लॉयर्स के लिए हर साल मिलने वाले एच-1बी वीजा की संख्या लिमिट करती है, अभी यह लिमिट 65,000 तय है, और मास्टर डिग्री या उससे ज़्यादा डिग्री वाले लोगों के लिए 20,000 की छूट है.

शुरू से ही एच-1बी वीजा प्रोग्राम को कांग्रेस लगातार इस तरह से बदल रही है कि इसका मकसद एम्प्लॉयर्स की लेबर जरूरतों को पूरा करना है, साथ ही अमेरिकी वर्कर्स के हितों की रक्षा करना है ताकि यह पक्का हो सके कि उन्हें गलत तरीके से नौकरी से न निकाला जाए.

कांग्रेस ने प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए बार-बार इसे लागू करने के तरीके को बढ़ाया है, पेनल्टी बढ़ाई है, और एच-1बी पिटीशन की फीस पर कानून बनाया है. कांग्रेस ने प्रोग्राम को इस तरह से भी बदला है कि यह कई सरकारी और नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइज़ेशन्स के लिए उनके पब्लिक सर्विस मिशन को पूरा करने में खास तौर पर फायदेमंद हो और उन्हें 65,000 लोगों की लिमिट से छूट दी है.

सितंबर में ट्रंप ने एक घोषणा की जिसमें नए एच-1बी वीजा अर्जियों पर 100,000 अमेरिकी डॉलर की बहुत ज़्यादा फ़ीस लगाई गई. इससे एच-1बी वीजा का मकसद ही कमजोर हो गया. इससे शिक्षा और हेल्थकेयर जैसे जरूरी क्षेत्रों में मजदूरों की भारी कमी को दूर करना मुश्किल हो गया, और आखिर में स्टाफ की कमी और बढ़ गई.

जैसा कि डीएचएस ने कई लिखे हुए डॉक्यूमेंट्स के जरिए लागू किया है, यह पॉलिसी 21 सितंबर, 2025 के बाद फाइल की गई किसी भी एप्लीकेशन पर असर डालती है, और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी को यह तय करने का पूरा अधिकार देती है कि कौन सी अर्जियाँ फीस के दायरे में आएंगी या छूट के लिए होगी. इससे यह चिंता बढ़ गई है कि इसे उन एम्प्लॉयर्स के खिलाफ लागू किया जा सकता है जिन्हें ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन पसंद नहीं करता.

BUSINESS : एयरटेल-Vi को बड़ी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द किया एकमुश्त स्पेक्ट्रम चार्ज

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया को बड़ी राहत देते हुए सरकार के ‘वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज’ (OTSC) वाले आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है. अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि सरकार पुराने लाइसेंस की वित्तीय शर्तों को पिछली तारीख से नहीं बदल सकती. इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों पर लटक रही भारी-भरकम देनदारी का बड़ा संकट टल गया है.

टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनियों, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) को बॉम्बे हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी कानूनी तथा वित्तीय राहत मिली है. अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए ‘वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज’ (OTSC) को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. यानी इन कंपनियों के सिर पर कई सालों से लटक रही एक भारी-भरकम देनदारी की तलवार अब हट गई है.

कोर्ट ने अपने कड़े फैसले में साफ कर दिया है कि सरकार के पास यह अधिकार बिल्कुल नहीं है कि वह लाइसेंस जारी करने के बरसों बाद, पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिवली) से वित्तीय शर्तों में कोई मनमाना बदलाव करे. इस फैसले से न सिर्फ कंपनियों को अपनी जमा कराई गई बैंक गारंटी वापस मिलेगी, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर में लंबे समय से छाई एक बड़ी अनिश्चितता भी खत्म हो जाएगी.

क्या है स्पेक्ट्रम विवाद
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के चर्चित 2G स्पेक्ट्रम फैसले के बाद गरमाया था. उस समय दूरसंचार विभाग (DoT) ने एकतरफा फैसला लेते हुए तय किया कि जिन टेलीकॉम कंपनियों के पास जुलाई 2008 से 6.2 MHz से ज्यादा का स्पेक्ट्रम है, उनसे एक अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा. सरकार का तर्क यह था कि कंपनियों को स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के साथ-साथ स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए भी अलग से एकमुश्त रकम चुकानी चाहिए. इसके लिए सरकार ने 2012 में कंपनियों को डिमांड नोटिस भेज दिए थे, जिसे एयरटेल और वोडाफोन ने सीधे अदालत में चुनौती दी.

कंपनियों ने अदालत में दी मजबूत दलीलें
इस मामले में एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का पक्ष बेहद स्पष्ट था. कंपनियों ने दलील दी कि भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 या उनके किसी भी लाइसेंस समझौते में ऐसा कोई नियम नहीं है जो सरकार को पिछली तारीख से इस तरह का कोई भी अतिरिक्त चार्ज लगाने की शक्ति देता हो. इसके अलावा, कंपनियां नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी (NTP) 1999 के तहत पहले से ही रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल का पालन कर रही थीं. इसका मतलब है कि जब भी उन्हें अतिरिक्त स्पेक्ट्रम दिया गया, उन्होंने उसी अनुपात में सरकार को अपना रेवेन्यू-शेयर भी बढ़ाकर चुकाया. ऐसे में यह नया वन-टाइम चार्ज पूरी तरह से अनुचित था.

बीच में नहीं बदल सकते नियम
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ ने कंपनियों के तर्कों को शत-प्रतिशत सही ठहराया. कोर्ट ने कहा कि टेलीकॉम लाइसेंस अपने आप में एक ‘कॉन्ट्रैक्ट’ (अनुबंध) है, और सरकार भी इसकी कानूनी शर्तों से पूरी तरह बंधी हुई है. अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘मैच शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदले जा सकते.’ सरकार ने इस चार्ज को ‘जनहित’ का नाम देने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि केवल सरकारी खजाना भरना जनहित नहीं हो सकता. इसके लिए अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के 2016 के एयरसेल मामले के पुराने फैसले से भी अपनी स्पष्ट असहमति जताई.

आम उपभोक्ता के लिए इस फैसले के मायने
भले ही यह मामला सीधे तौर पर टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच का था, लेकिन इसका असर आम मोबाइल ग्राहकों पर भी पड़ता है. अदालत ने याद दिलाया कि 1999 की टेलीकॉम पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को सस्ती टेलीकॉम सेवाएं देना और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी सुधारना था. अब जब एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के ऊपर से इस भारी जुर्माने का दबाव हट गया है, तो उनके पास भविष्य की तकनीक और नेटवर्क सुधारने के लिए अधिक पूंजी होगी. एयरटेल ने भी फैसले का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि इस कदम से सेक्टर में निवेश को भारी बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा फायदा बेहतर नेटवर्क और सर्विस के रूप में ग्राहकों तक पहुंचेगा.

NATIONAL : भारत का परमाणु जखीरा बढ़कर 190 पहुंचा, पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात किए, 2025 में सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर रहा

0

भारत तेजी से परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाने में लगा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) द्वारा सोमवार को जारी ईयर बुक से खुलासा हुआ है। भारत के पास कुल 190 जबकि पाकिस्तान के पास सिर्फ 170 वॉरहेड हैं। भारत चीन और पाकिस्तान को ध्यान में रखकर लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार बनाने में जुटा है। तैनात हैं 26 परमाणु वॉरहेड

भारत के परमाणु हथियारों की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में भारत ने एक भी परमाणु वॉरहेड नहीं तैनात किया था, लेकिन 2026 में 12 परमाणु हथियारों को तैनात कर रखा है। पिछले साल सैन्य भंडार में 180 वॉरहेड का भंडारण किया जो 2026 में बढ़कर 190 हो गया है। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

दुनिया में परमाणु वॉरहेड की संख्या
वर्ष 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ देशों, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल के पास कुल 12,187 परमाणु वॉरहेड हैं। इसमें से 9745 वॉरहेड सेना के भंडार गृह में हैं जो इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 4012 परमाणु वॉरहेड पहले से तैनात हैं।

हथियार सेवानिवृत्त करने वाले देश
तीन देशों में हथियार सेवानिवृत्त

सिपरी के अनुसार अमेरिका, रूस और फ्रांस सिर्फ तीन देशों ने परमाणु हथियारों को सेवानिवृत्त किया है। अमेरिका ने कुल 1342, रूस ने 1020 और फ्रांस ने 80 वॉरहेड को बेड़े से सेवानिवृत्त किया है। इजरायल के पास सिर्फ 90 हथियारों का जखीरा है। इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

सैन्य संघर्ष का बढ़ता दायरा
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में तीन देशों के बीच सैन्य संघर्ष था जो 2025 में बढ़कर छह हो गया। कुल 13 देशों के बीच सैन्य तनातनी की स्थिति रही। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 162 देशों को सबसे अधिक हथियार बेचा गया। इसमें यूक्रेन, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे कई देश शामिल हैं।

India US Deal: भारत-अमेरिका के बीच होने वाली है बड़ी ट्रेड डील, 1 जून से दिल्ली में शुरू होगा फाइनल राउंड, रुबियो ने दिए थे संकेत

भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही बड़ी ट्रेड डील शुरू होने वाली है। इससे पहले दोनों देशों के बीच भारत में 1 से 4 जून के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस डील के बारे में हाल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए थे।

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच अगले दौर की द्विपक्षीय वार्ता 1 से 4 जून 2026 तक भारत में होने जा रही है। इस चार दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौते की बारीकियों को फाइनल करना और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत बातचीत को तेजी से आगे बढ़ाना है।

यह घटनाक्रम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देश व्यापार समझौते के बिल्कुल अंतिम विवरणों पर काम कर रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि यह डील आने वाले कुछ हफ्तों में फाइनल हो जाएगी।

बैठक में इन 5 मुद्दों पर होगी चर्चा
भारत आ रही अमेरिकी मुख्य वार्ताकार (Chief Negotiator) की अगुवाई वाली टीम और भारतीय अधिकारियों के बीच होने वाली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। इन मुद्दों में ये प्रमुख हैं:

  1. बाजार तक पहुंच: दोनों देशों के उत्पादों को एक-दूसरे के बाजारों में आसान एंट्री दिलाना।
  2. गैर-टैरिफ उपाय: व्यापार में आने वाली उन तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना जो टैक्स (टैरिफ) के दायरे में नहीं आतीं।
  3. कस्टम और व्यापार सुगमीकरण: सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान और डिजिटल बनाना ताकि माल की आवाजाही तेजी से हो सके।
  4. निवेश प्रोत्साहन: दोनों देशों के बीच नए निवेश और कॉर्पोरेट पार्टनरशिप के अवसरों को बढ़ाना।
  5. आर्थिक सुरक्षा समन्वय: बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों महाशक्तियों की आर्थिक सुरक्षा को एक सुर में लाना।

कब तक हो सकती है डील?
अपने भारत दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को इस डील को लेकर काफी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि यह समझौता अगले हफ्ते या उसके बाद वाले हफ्ते में हो जाएगा। हम बिल्कुल अंतिम बारीकियों पर चर्चा कर रहे हैं। मेरे पास आशान्वित होने की पूरी वजह है कि हम एक बड़े व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं।’
यह समझौता सिर्फ टैरिफ के बारे में नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश को मजबूत करने और भविष्य में मिलकर काम करने के लिए स्थितियां तैयार करने के बारे में है।

फरवरी 2026 से चल रही तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच इस बड़ी डील की नींव 7 फरवरी 2026 को पड़ी थी। उस समय दोनों देशों ने आपसी और समान लाभ वाले व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क पर संयुक्त बयान जारी किया था।

इसी प्रक्रिया के तहत भारतीय अधिकारियों की एक टीम ने 20 से 23 अप्रैल 2026 तक वाशिंगटन डीसी का दौरा कर अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने बैठक की थी। अब जून की शुरुआत में भारत में होने वाली यह बैठक इस पूरी डील का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

BUSINESS : उज्ज्वला योजना में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे:अब तक 9 सिलेंडर दिए जाते थे, इंटरनेशनल मार्केट में LPG के दाम 46% तक बढ़ने का असर

उज्ज्वला योजना (PMUY)में अब साल के सिर्फ पहले 4 गैस सिलेंडरों पर ही ₹300 की अतिरिक्त छूट मिलेगी, पहले यह 9 सिलेंडरों पर मिलती थी। सब्सिडी की यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते (डीबीटी) में भेजी जाती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने सोमवार को बताया कि, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतें 46% तक बढ़ने से यह फैसला लिया गया है।

14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत रविवार (7 जून) को 29 रुपए बढ़ने के बाद दिल्ली में 942 रुपए है। ऐसे में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सिलेंडर 642 रुपए में मिल रहा है।

लागत ₹1600 पार, सरकार उठा रही ₹700 का बोझ

एडिशनल सेक्रेटरी ने बताया कि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से घरेलू LPG सिलेंडर की वास्तविक लागत बढ़कर 1600 रुपए से ज्यादा हो गई है। इससे तेल कंपनियों को हर सिलेंडर पर 700 रुपए का नुकसान (अंडर रिकवरी) हो रहा है।

पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपए पहुंच गई, जो इससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपए थी। केंद्रीय कैबिनेट ने इसके लिए कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है। जबकि ग्राहकों को मिलने वाली सब्सिडी इस राहत राशि के अतिरिक्त है।

पेट्रोल-डीजल पर कंपनियों को हर दिन ₹600-700 करोड़ का नुकसान एडिशनल सेक्रेटरी ने ब्रीफिंग में यह भी बताया कि LPG के अलावा तेल कंपनियां वर्तमान में डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर 6 रुपए प्रति लीटर की नुकसान झेल रही हैं। इस कारण कंपनियों को हर दिन करीब 600 से 700 करोड़ रुपए का दैनिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट तनाव से सऊदी LPG बेंचमार्क 46% महंगा हुआ

भारत अपनी LPG जरूरतों का 60% हिस्सा आयात करता है। इसकी लैंडेड कॉस्ट सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती है, जिसे सऊदी अरामको हर महीने की शुरुआत में फिक्स करती है। पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है।

फरवरी में LPG का सऊदी सीपी बेंचमार्क करीब 543 डॉलर प्रति टन था, जो अब जून में बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। यानी संकट शुरू होने के बाद से अब तक LPG का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क 46% बढ़ चुका है। इससे प्रोपेन 39% और ब्यूटेन 52% महंगी हुई है।

दुनिया में सबसे सस्ती कुकिंग गैस भारत में मिल रही

इस बीच सरकार का कहना है कि दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय परिवारों को सबसे सस्ती कुकिंग गैस मिल रही है।

भारत में घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत पड़ोसी देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसी एडवांस इकोनॉमी के मुकाबले काफी कम है।

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत का बोझ सरकार खुद उठा रही है और इसे आम उपभोक्ताओं पर पास-ऑन नहीं होने दिया गया है।

होटल-रेस्टोरेंट के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3,113.50 का हुआ

होटल और बिजनेस में इस्तेमाल होने वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर खुद-ब-खुद बदलती हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान 5 बार दाम बढ़ने के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम का कॉमर्शियल सिलेंडर 3,113.50 रुपए, यानी करीब 164 रुपए प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है। इसकी तुलना में घरेलू उपभोक्ता केवल 66 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर रहे हैं।

होर्मुज रूट बंद होने के बाद भी भारत ने जारी रखी सप्लाई

दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल और भारत की 54% LPG का आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही होता है। इस मार्ग पर संघर्ष के कारण जहां अधिकांश कॉमर्शियल ट्रैफिक रुक गया, वहीं भारत ने बेहतर तालमेल के जरिए अपने जहाजों की आवाजाही जारी रखी। भारतीय झंडे वाले टैंकर लगातार इस रास्ते से कच्चे तेल और एलपीजी की खेप लेकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे, जिससे देश में किसी भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की किल्लत नहीं हुई।

घरेलू प्रोडक्शन 60% बढ़ाया, अमेरिका-कनाडा से शुरू की खरीद

सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% से अधिक बढ़ाते हुए करीब 32 टीएमटी (TMT) से 52 टीएमटी तक पहुंचा दिया। इसके साथ ही होर्मुज रूट के बाहर के देशों जैसे अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी गैस की खरीद शुरू की गई। उपलब्ध गैस की सप्लाई में घरों के साथ अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्रायोरिटी यूजर्स को प्राथमिकता दी गई।

दूसरी तरफ मांग के दबाव को कम करने के लिए ग्राहकों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। घरेलू गैस की कॉमर्शियल मार्केट में चोरी रोकने के लिए ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को बढ़ाकर 90% तक कर दिया गया है।

LPG से पहले पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े

पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े हैं। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG करीब ₹6 प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

इसके बावजूद कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कच्चे तेल के महंगे होने का कुछ बोझ सरकारी तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं।

LPG गैस सिलेंडर की कीमत कैसे तय होती है

तेल और गैस कंपनियां जिस कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन खरीदती हैं या रिफाइन करती हैं, यदि सरकार के निर्देश पर आम जनता को उससे कम कीमत पर ईंधन बेचा जाए, तो उस लागत और बिक्री मूल्य के अंतर को ‘अंडर-रिकवरी’ कहा जाता है। यह सीधे तौर पर ग्राहकों को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों द्वारा सहा गया घाटा है।

क्या है होर्मुज स्ट्रेट?

यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% और भारत का 54% LPG आयात इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जिसके चलते यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे संवेदनशील रूट माना जाता है।

NATIONAL : 23 मिनट, छह नायक और निशाने पर आतंकी: कहानी ऑपरेशन सिंदूर के जांबाजों की, जिनकी बदौलत घुटनों पर आया पाकिस्तान

0

ऑपरेशन सिंदूर हुए आज एक साल हो गए। भारत ने आज के दिन ही पाकिस्तान में पनप रहे करीब 100 आतंकियों को मारा गया था। ऐसे में हम आज उन छह जांबाजों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए। ग्रुप कैप्टन रंजीत सिद्धू, मनीष अरोड़ा, अनिमेष पटनी, कर्नल कोषांक लांबा, सुशील बिष्ट और रिजवान मलिक की बहादुरी ने दुश्मन को चार दिन में सरेंडर कराया।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की खूबसूरत बायसरन घाटी में आतंकियों ने जो खूनी खेल खेला था, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस कायराना हमले में 26 मासूम पर्यटकों की जान गई थी, जिसके बाद पूरे भारत में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। लेकिन भारत खामोश बैठने वाला नहीं था। और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। आज उस घटना को एक साल बीत चुका है और यह मौका है उन नायकों को याद करने का, जिन्होंने इस ऑपरेशन के जरिए दुश्मन को उनके घर में घुसकर करारा जवाब दिया। यह कहानी सिर्फ जज्बे की नहीं है, बल्कि ‘इंसान और मशीन’ के उस बेजोड़ तालमेल की है, जिसने पाकिस्तान को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।

ग्रुप कैप्टन सिद्धू इस पूरे ऑपरेशन की मुख्य कड़ी थे। वे भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित नंबर-17 गोल्डन एरोस’ स्क्वाडन के कमांडिंग ऑफिसर हैं, जो रफाल फाइटर जेट उड़ाती है। उन्होंने न केवल खुद रफाल उड़ाया, बल्कि ऐसी रणनीति बनाई जिससे पाकिस्तान के एयरबेस थर्रा गए। उन्होंने अपने रफाल विमानों के जरिए उन सुखोई-30-MKI विमानों को सुरक्षा (कवर फायर) दी, जो पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइलें दागने जा रहे थे। उनकी सूझबूझ से यह मिशन सफल रहा और उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया।

ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा
ग्रुप कैप्टन अरोड़ा ने उस समय उड़ान भरी जब मौत हर तरफ मंडरा रही थी। मिशन लीडर के तौर पर उनका लक्ष्य पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकी ठिकाने थे। जब पाक एयर डिफेंस ने उन्हें घेरने की कोशिश की, तो उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर विमान को जमीन के बेहद करीब उड़ाया। रात के अंधेरे में इतनी नीची उड़ान भरकर उन्होंने दुश्मन के रडार को अंधा कर दिया और अपने लक्ष्यों को पूरी तरह नष्ट कर सुरक्षित वापस लौटे।

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में पटनी का मुकाबला न सिर्फ पाकिस्तान से था, बल्कि चीन की जासूसी तकनीक से भी था। चीन के सैटेलाइट लगातार पाकिस्तान को भारत की लोकेशन भेज रहे थे। पटनी ने चतुराई दिखाते हुए हर बार सैटेलाइट की रेंज में आते ही अपनी यूनिट की लोकेशन बदल दी। उनकी यूनिट ने 300 किलोमीटर दूर से ही पाकिस्तानी विमान को मार गिराया, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।

कर्नल कोषांक लांबा
भारतीय थल सेना की तरफ से कर्नल लांबा ने युद्ध का रुख मोड़ दिया। उन्होंने बेहद कम समय में एम777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों को चिनूक हेलीकॉप्टर्स की मदद से दुर्गम पहाड़ियों पर तैनात किया। दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच भी उनकी यूनिट डटी रही और 40 किलोमीटर की दूरी तक पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को अपनी तोपों से नेस्तनाबूद कर दिया।

लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट
लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने आधुनिक तकनीक का बेजोड़ प्रदर्शन किया। उन्होंने पारंपरिक अनुभव के साथ-साथ स्पेस टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया। लेटेस्ट सैटेलाइट डेटा के जरिए उन्होंने आतंकियों के छिपे हुए ठिकानों की सटीक पहचान की और उन पर ऐसा हमला किया कि आतंकियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस वैज्ञानिक सोच के लिए उन्हें वीर चक्र दिया गया।
स्क्वाडन लीडर रिजवान मलिक
स्क्वाडन लीडर रिजवान मलिक ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे ‘आत्मघाती’ माने जाने वाले हिस्से को अंजाम दिया। वे पूरी तरह से दुश्मन की मिसाइल रेंज में थे, जहां मौत सामने खड़ी थी। इसके बावजूद, असाधारण धैर्य के साथ उन्होंने एक के बाद एक दो सटीक हमले किए और पाकिस्तान के दो महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया।

कैसे फेल हुई चीन-पाकिस्तान की जासूसी?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन के सैटेलाइट्स से लगातार भारतीय सेना की लोकेशन मिल रही थी। लेकिन ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी ने इस जासूसी तंत्र को पूरी तरह फेल कर दिया। जैसे ही चीनी सैटेलाइट लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश करता, भारतीय यूनिट अपनी जगह बदल देती। नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान खाली ठिकानों पर हमला करता रहा और भारतीय एयर डिफेंस की वजह से दुश्मन का एक भी ड्रोन या मिसाइल भारतीय सीमा के अंदर प्रवेश नहीं कर सकी।

23 मिनट का वो ‘प्रलय’ जिसने मचाई तबाही
थल सेना के कर्नल लांबा और लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने यह साबित किया कि भारतीय सेना तकनीक और साहस में दुश्मन से मीलों आगे है। चिनूक हेलीकॉप्टर और एम777 तोपों के मेल ने पहाड़ियों पर बैठे आतंकियों के लिए काल का काम किया। सैटेलाइट तस्वीरों के सटीक इस्तेमाल से आतंकियों के ठिकानों को नक्शे से ही मिटा दिया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गर्व से कहा है कि इस ऑपरेशन में तीनों सेनाओं के बीच जो तालमेल दिखा, उसने पाकिस्तान को ऐसा दर्द दिया है जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा।

‘इंसान और मशीन’ का घातक मेल
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का राज जांबाज सैनिकों का फौलादी जिगर और रफाल, सुखोई, ब्रह्मोस एवं एस-400 जैसे आधुनिक हथियारों का सही इस्तेमाल था। जब इंसान का अटूट दिमाग और मशीन की अचूक ताकत मिलती है, तो जीत निश्चित होती है। आज हमारे ये असली हीरो सीमाओं पर डटे हैं ताकि देश चैन की नींद सो सके। इन सैनिकों के जज्बे ने पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम कर महज चार दिनों में उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

NATIONAL : ‘सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’: काकोली घोष बोलीं- 40 साल से राजनीति में संघर्ष कर रही; बहुत सहन किया

0

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। सांसद काकोली घोष के नेतृत्व में 20 सांसदों ने बगावत कर दी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की जगह मांगी है। सांसदों ने राज्य में कुशासन, बेरोजगारी और केंद्रीय योजनाओं को रोकने का आरोप लगाया है।

देश की राजनीति में बहुत बड़ी हलचल है। दिल्ली में एक बड़ा धमाका हुआ है। लोकसभा सांसद काकोली घोष ने बगावत कर दी है। उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। काकोली घोष ने दावा किया है कि उनके साथ 20 सांसद हैं। इन सभी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है। उन्होंने एक पत्र सौंपा है। सांसदों ने सदन में अलग बैठने की मांग की है। इस कदम से पश्चिम बंगाल की राजनीति गर्मा गई है। ममता बनर्जी की पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा है। दिल्ली से कोलकाता तक हड़कंप मच गया है।

बंगाल के विकास के लिए बड़ा कदम
काकोली घोष ने अपनी बात साफ रखी है। वे पश्चिम बंगाल का विकास चाहती हैं। इसके लिए वे केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगी। उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। काकोली घोष ने कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था खराब है। वहां कुशासन और बेरोजगारी बहुत बढ़ गई है। वे इस बदहाली के खिलाफ लड़ रही हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दे दिया है। अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें आश्वासन दिया है। वे समय मिलते ही सांसदों को चर्चा के लिए बुलाएंगे।

केंद्रीय योजनाओं को रोकने का आरोप
सांसद काकोली घोष ने अपनी लाचारी भी जताई। उन्होंने कहा कि सभी 20 सांसद लोकसभा में काम नहीं कर पा रहे थे। पूरे देश में केंद्र सरकार की योजनाएं चल रही हैं। लेकिन बंगाल में इन्हें लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जनता ने हमें चुनकर भेजा है। हमें मतदाताओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। जनता के हक के लिए यह फैसला जरूरी था।

सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं-काकोली घोष
काकोली घोष ने डर और दबाव की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी से नहीं डरती हैं। वे यहां बिल्कुल अकेली बैठी हैं। सभी 20 सांसदों ने बैठकर पत्र पर दस्तखत किए हैं। उन्होंने आगे कहा मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सहन किया है। उन्होंने बताया कि वे 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नहीं आईं। वे 40 साल से राजनीति में संघर्ष कर रही हैं। ऐसे लोगों की बातों का उन पर कोई असर नहीं होता।

NATIONAL : ईरान का जवाबी हमला, इजरायल पर की सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों की बारिश, तेल अवीव में धमाकों की आवाजें

0

ईरान और इजरायल में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
तेहरान: इजरायल के अटैक के बाद ईरान की ओर से जवाबी हमला किया जा रहा है। ईरान ने शनिवार तड़के फिर से इजरायल पर मिसाइलों की बारिश की है। इससे कुछ घंटे पहले शुक्रवार शाम को भी ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार की थी। ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल को निशाना बनाया है। शनिवार सुबह यरुशलम और तेल अवीव में सायरन और विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। ईरान ने इजराल के खिलाफ अपने इस ऑपरेशन को ‘ट्रू प्रॉमिस 3’ नाम दिया है। ईरान के हमलों में इजरायल के कई इलाकों में नुकसान हुआ है।

इजरायल के अधिकारियों ने शुक्रवार देर रात बताया है कि ईरान की ओर से अब तक 150 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। तेल अवीव में शनिवार सुबह कम से कम दो ईरानी मिसाइलें जमीन पर गिरी हैं। ईरान के मिसाइल हमलों में अब तक 50 से ज्यादा इजरायली घायल हुए हैं। वहीं एक शख्स की मौत की पुष्टि हुई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से कहा गया है कि उन्होंने इजरायल में दर्जनों सैन्य केंद्रों और एयरबेस पर हमले किए गए हैं।

शुक्रवार रात से शुरू किए हमले
ईरान ने शुक्रवार रात से इजरायल पर हमले शुरू किए हैं। ईरानी मिसाइल हमले में इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाया गया, जिससे इमारतों को नुकसान हुआ और दर्जनों लोग घायल हुए। ईरान ने किर्यात कंपाउंड पर भी हमला किया है, इसे इजरायल का पेंटागन कहा जाता है। फॉक्स न्यूज के ट्रे यिंगस्ट ने इजरायल के सैन्य मुख्यालय किर्यात के नजदीक नुकसान की बात कही है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन दल इमारतों में जाकर उन लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो फंसे हुए हो सकते हैं।

ईरान के राजदूत ने UN सुरक्षा परिषद को बताया कि इजराइल के हमलों में 78 लोग मारे गए और 320 से ज्यादा घायल हुए हैं। राजदूत ने कहा कि मरने वालों में ज्यादातर आम नागरिक थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल के तेल अवीव पर मिसाइलों से हमला किया है। इससे पहले शुक्रवार तड़के इजरायल ने ईरान के कई शहरों में हमले किए थे। इसमें ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इस हमले के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने कहा है कि ईरानी सेना इजरायल को भारी चोट पहुंचाएगी।

NATIONAL : ‘मेरे साथ साजिश हुई, वरना मैं बनता कांग्रेस अध्यक्ष’, अशोक गहलोत के दावे से मचा हड़कंप

0

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि मुझे लगता है मेरे साथ साजिश हुई वरना मैं आज कांग्रेस का अध्यक्ष होता. हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया.

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने रविवार को ऐसा दावा किया जिसके बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया. गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी और कांग्रेस आलाकमान उन्हें ही कांग्रेस अध्यक्ष बनाना चाहते थे लेकिन उनके साथ साजिश की गई और उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया गया.

पत्रकारों से बातचीत में अशोक गहलोत ने कहा, “कौन कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहेगा जब सोनिया गांधी ने मुझसे कहा तो क्या मैं मना करूंगा, मुझे लगता है कि मेरे साथ साजिश की गई. मैं तो खुद कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहता था.”

मानेसर कांड पर भी बोले अशोक गहलोत
वहीं मानेसर कांड को लेकर अशोक गहलोत ने कहा, “ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे सचिन पायलट हों, चाहे वो डोटासरा हों, चाहे वो टीकाराम जूली हों, चाहे वो सीपी जोशी हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे.”

राजस्थान कांग्रेस पर हाईकमान को भरोसा- गहलोत
उन्होंने आगे कहा, “सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमान के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग. जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाx जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ. सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमान का पहले था, आज भी है.”

- Advertisement -

News of the Day