Tuesday, September 1, 2026
Home Blog

BUSINESS : 20 Petrol पर 31 अगस्त को आएगा बड़ा फैसला? इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल की मात्रा बताने, वाहन-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस बनाने और पुराने वाहनों के लिए ट्रांजिशन प्लान की मांग की गई है।

नई दिल्ली: पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को अहम सुनवाई होने वाली है। याचिका में केंद्र और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल में मिले इथेनॉल की सटीक मात्रा की जानकारी अनिवार्य और एक समान तरीके से दी जाए। सुप्रीम कोर्ट की 31 अगस्त की कॉज लिस्ट के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ करेगी।

क्या है याचिका में मांग?
नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि पेट्रोल पंप के हर डिस्पेंसिंग नोजल पर साफ और आसानी से दिखाई देने वाला लेबल लगाया जाए। इसमें यह बताया जाए कि बेचे जा रहे पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ग्राहकों को दिए जाने वाले हर फ्यूल बिल पर भी इथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाए, ताकि उपभोक्ता को पेट्रोल खरीदते समय इसकी पूरी जानकारी मिल सके।

कौन सा इथेनॉल ब्लेंड सही?
याचिका में केंद्र से एक आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से सर्च की जा सकने वाली व्हीकल-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है। इसमें वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध हो कि कौन सी गाड़ी किस इथेनॉल ब्लेंड के लिए उपयुक्त है। इससे वाहन मालिकों को यह समझने में मदद मिल सकेगी कि उनकी गाड़ी E20 या दूसरे इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ कितनी अनुकूल है।

याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई है।
इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

यह समिति देश में मौजूद अलग-अलग वाहनों पर E20 पेट्रोल की वास्तविक स्थिति और उसके असर की जांच कर सार्वजनिक रिपोर्ट दे।
रिपोर्ट में ईंधन की माइलेज, इंजन की उम्र, मेंटेनेंस खर्च, वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस पर पड़ने वाले प्रभाव की भी जानकारी देने की मांग की गई है।
पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
याचिका में इथेनॉल ब्लेंडिंग के पर्यावरणीय प्रभाव की भी समीक्षा की मांग की गई है। इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, इथेनॉल उत्पादन में पानी की खपत और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई है।

इसके अलावा, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के ईंधन उत्पादन की ओर जाने से पशु चारे की उपलब्धता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी अध्ययन करने की मांग की गई है।

डॉक्यूमेंट सार्वजनिक करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि E20 ईंधन के अनिवार्य रोल-आउट का समर्थन करने वाली सभी नीतिगत फाइलों, तकनीकी अध्ययनों, सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक परामर्श के रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाए।

पुराने वाहनों के लिए भी ट्रांजिशन प्लान की मांग
याचिका में पुराने और E20 के साथ अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी ट्रांजिशन फ्रेमवर्क बनाने की मांग की गई है।

इसमें जहां तकनीकी, आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से संभव हो, वहां कम इथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता पर भी विचार करने की बात कही गई है। इसके लिए विशेषज्ञों की रिपोर्ट और सार्वजनिक परामर्श के आधार पर फैसला लेने की मांग की गई है।

WORLD : भागवत का कनाडा दौरा: ‘जरूरतमंदों की मदद भारत की परंपरा’; संघ प्रमुख महाशक्ति और विश्वगुरु अवधारणा पर भी बोले?

0

अमेरिका के बाद कनाडा दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और संघ की कार्यप्रणाली को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा- भारत ने कभी किसी जरूरतमंद की मदद से इनकार नहीं किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। अमेरिका यात्रा के बाद कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया। भागवत ने कहा कि जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

बकौल मोहन भागवत, भारतीय परंपरा सिखाती है कि जीव-जगत और निर्जीव वस्तुओं को भी अपना माना जाए। भारत में विविधता को एकता के लिए चुनौती नहीं माना जाता, बल्कि विविधता को ही एकता का स्वरूप समझा जाता है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान रखने वाले लोग पूरी धरती को एक परिवार मानते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर, आकार और रंग-रूप में अंतर होने के बावजूद मूल रूप से सभी मनुष्य एक हैं। इसलिए दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है।

तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य की तरफ संकेत करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। उन्होंने भारत के प्राचीन यात्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मैक्सिको से साइबेरिया तक गए। उन्होंने हिमालय को पैदल पार किया और छोटी नावों से दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंचे, लेकिन किसी देश को जीतने के लिए नहीं गए। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यतागत मूल्यों को दुनिया तक पहुंचाया।

भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये सभी मानव जीवन की विविधताएं हैं और हिंदू सभी का सम्मान एवं स्वीकार करते हैं।उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी लोगों पर अत्याचार हुआ तो भारत ने उन्हें शरण दी। उनके मुताबिक, भारत में बाहर से आए अनेक लोग आज भी अपनी परंपराओं और विशिष्टताओं के साथ रहते हैं। ऐसे कई लोग भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिम, ईसाई और यहूदी समुदाय भी मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों के लोग भी यहां शरण लेते रहे हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन कनाडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) ने किया। कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों ने लोकगीत भी प्रस्तुत किए। यहां कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मंच पर मौजूद रहे। उन्होंने कनाडा और भारत के रिश्तों में नए उत्साह का स्वागत किया। केनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस साल के अंत में कनाडा की दूसरी यात्रा दोनों देशों के संबंधों में आई नई गति को दर्शाएगी। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।

भारतवंशियों ने क्या संदेश दिए?
मोहन भागवत की कनाडा यात्रा को लेकर रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स में पूर्व अधिकारी रहे कार्तिक त्रिवेदी ने कहा, उन्होंने 15 वर्षों तक कनाडा की सेवा की और हमेशा अपनी हिंदू पहचान पर गर्व किया। उन्होंने भागवत को के वक्तव्य और सुनने के अवसर को महत्वपूर्ण मौका बताया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद भारतीय मूल के एक अन्य शख्स पथिक शुक्ला ने कहा कि दुनिया में जारी युद्धों के बीच भागवत की यात्रा सकारात्मक संदेश देती है। वहीं, हिंदू सभा मंदिर के पुजारी राजिंदर प्रसाद ने भागवत की अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा यात्रा को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के जरिए भारतीय मूल्यों और संस्कृति को दुनिया के सामने रखने तथा शांति और मानवता का संदेश देने का प्रयास हो रहा है।

WORLD : कनाडा में भागवत बोले- मदद करना भारत की परंपरा:विविधता ही हमारे देश की खूबसूरती, ‘ये मेरा, वह तुम्हारा’ की सोच से ऊपर उठना होगा

0

RSS प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि मुश्किल वक्त में दूसरों की मदद करना भारत की पुरानी परंपरा रही है। दुनिया में कहीं भी संकट आया और भारत से मदद मांगी गई तो भारत ने कभी पीछे हटकर इनकार नहीं किया। कई बार भारत ने बिना मदद मांगे भी दूसरों की सहायता की है।

भागवत ने कहा- भारत में विविधता एकता के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी खूबसूरती है। देश में अलग-अलग जाति, पंथ, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन ये सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि ‘ये मेरा, वो तुम्हारा’ जैसी सोच से ऊपर उठने की जरूरत है। अलग-अलग रूप और पहचान के बावजूद सभी में एक ही दिव्यता है। इसलिए दूसरों को अलग या पराया मानने के बजाय सभी के साथ भाईचारे और सेवा की भावना रखनी चाहिए।भागवत बोले- भारत ने मुस्लिम-ईसाई सभी को स्वीकार किया

भागवत ने कहा कि हिंदू सभी का सम्मान और स्वीकार करते हैं। दुनिया में कहीं किसी पर अत्याचार हुआ और उसने शरण मांगी, तो उसे भारत में जगह मिली। भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, पारसी और दूसरे समुदाय रहते हैं। लोग सिर्फ शरण लेने ही नहीं, बल्कि ज्ञान हासिल करने के लिए भी भारत आए।

उन्होंने कहा कि इंसान को फूल की तरह होना चाहिए। कली फूल बने और अपनी खुशबू पूरे वातावरण में फैलाए। इसी तरह व्यक्ति को विकसित होकर मानवता के लिए समर्पित होना चाहिए। एक हिंदू की सोच यह होनी चाहिए कि मुझे भी आगे बढ़ना है, मुझे सफल होना है, क्योंकि मुझे सेवा करनी है।

भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें

विविधता एकता की अभिव्यक्ति है: भागवत ने कहा कि भारत में विविधता कभी एकता के लिए समस्या नहीं रही। भारतीय परंपरा सिर्फ ‘विविधता में एकता’ की बात नहीं करती, बल्कि विविधता को ही एकता का हिस्सा मानती है। इसे स्वीकार करना, सम्मान देना और सेलिब्रेट करना चाहिए।
अलग-अलग हैं, लेकिन सब एक हैं: उन्होंने कहा कि भारत में कई जातियां, पंथ और भाषाएं हैं। सब कुछ अलग-अलग है, लेकिन हम यह नहीं कहते कि सभी एक जैसे हैं, हम कहते हैं कि सब एक हैं। विविधता प्रकृति का स्वभाव है, जबकि एकता वास्तविकता है।
हर चीज में दिव्यता है: भागवत ने कहा कि ईश्वर ने जो कुछ बनाया है, वह अलग-अलग रूप, आकार और रंगों में उसकी सुंदरता और पवित्रता को दिखाता है। हर चीज दिव्य है, इसलिए हर चीज एक है।

‘मेरा-तुम्हारा’ की सोच संकीर्णता है: उन्होंने कहा कि अगर हम सोचते हैं कि ‘यह मेरा है और वह तुम्हारा है’ तो यह सही नहीं है। दुनिया की हर चीज को अपना मानना चाहिए, लेकिन मालिक के तौर पर नहीं, भाई के तौर पर। शरीर, रंग और रूप अलग होने के बावजूद हर व्यक्ति की गरिमा और महत्व बराबर है।
दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है: भागवत ने कहा कि जब हम सभी को एक मानते हैं तो दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य बन जाता है। यह सोच इंसान को ऐसी खुशी और संतुष्टि देती है, जो स्थायी होती है। उन्होंने कहा कि भारत को मिला यह ज्ञान दुनिया के साथ साझा करना भी हमारा कर्तव्य है।
कार्यक्रम में 8 प्रांतों से पहुंचे 2,500 से ज्यादा लोग

टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम का आयोजन कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) ने किया था। कार्यक्रम में पूर्व कनाडाई रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मौजूद थे। आयोजकों के मुताबिक, कनाडा के आठ प्रांतों से 2,500 से ज्यादा लोग पहुंचे।

मोहन भागवत 17 दिनों के तीन देशों के विदेश दौरे पर हैं और कनाडा उनके दौरे का दूसरा पड़ाव है। वह 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। अमेरिका में कार्यक्रमों के बाद अब वे कनाडा पहुंचे हैं। दौरे में अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन भी शामिल हैF

भागवत बोले- मुसलमानों को भारत से निकालना हिंदुत्व नहीं:धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक; सभी रास्ते ईश्वर तक जाते हैं

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा, ‘अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। हिंदू होने का मतलब यह मानना है कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा एक समान है।’ उन्होंने यह बात शनिवार को न्यूयॉर्क के ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में कही। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम से पहले तिरंगे का अपमान, रिजिजू बोले- RSS या भाजपा की आलोचना करने की आजादी लेकिन देश का अपमान महंगा पड़ेगा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम स्थल के बाहर भारतीय झंडे के अपमान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- हमने हमेशा कहा है कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह बहुत महंगा पड़ेगा।

WORLD : PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की होगी आज बैंठक, S-400 से एनर्जी तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

0

नई दिल्ली: भारत और रूस के रिश्तों के लिहाज से सोमवार का दिन काफी अहम है. किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है. यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी. माना जा रहा है कि बातचीत में ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा, व्यापार और भुगतान व्यवस्था जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं.

ऊर्जा और उर्वरक की सप्लाई पर होगी चर्चा
भारत के लिए रूस से मिलने वाला कच्चा तेल और उर्वरक काफी महत्वपूर्ण है. पश्चिम एशिया में तनाव और दुनियाभर में सप्लाई को लेकर बनी संदेह के बीच भारत चाहता है कि रूस से इन जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे.

मोदी और पुतिन की बातचीत में लंबे समय के तेल और उर्वरक समझौतों पर चर्चा हो सकती है. इसके साथ ही भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने के उपायों पर भी विचार संभव है.

S-400 और रक्षा सहयोग भी एजेंडे में
रक्षा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों का एक मजबूत आधार रहा है. ऐसे में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े मुद्दे भी बैठक में उठ सकते हैं. इसकी शेष डिलीवरी, अतिरिक्त मिसाइलों की उपलब्धता और सिस्टम के रखरखाव को लेकर दोनों पक्ष बातचीत कर सकते हैं.

भारत में रक्षा उपकरणों की मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादन और सह-निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

UPI और सुरक्षित पेमेंट सिस्टम पर नजर
रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के लिए सुरक्षित भुगतान व्यवस्था काफी जरूरी हो गई है. दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और डिजिटल भुगतान के दूसरे विकल्पों को मजबूत करने पर जोर दे सकते हैं. इसी संदर्भ में UPI जैसे भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम की संभावनाएं भी चर्चा में आ सकती हैं.

2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. भारत चाहता है कि रूस अपने बाजार में भारतीय फार्मा, आईटी, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों के लिए ज्यादा अवसर खोले. इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, हाईटेक तकनीक और उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है.

WORLD : मोदी, जिनपिंग और पुतिन एक मंच पर, किर्गिस्तान में जुटे दुनिया के दिग्गज, भारत के लिए क्यों खास?

0

SCO Summit 2026: 10 सदस्यों वाले SCO की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी और अब इसके 25 साल पूरे हो रहे हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने थे जिसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस भी इसमें शामिल हुए।

बिश्केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आज से हो रहा है और कल तक चलेगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई नेता शामिल हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में भाग लेने और अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने के लिए रविवार को किर्गिस्तान पहुंच चुके हैं। हवाई अड्डे पर कैबिनेट ऑफ मिनिस्टर्स के चेयरमैन कासिमालिएव आदिलबेक अलेशोविच ने उनका स्वागत किया। उनके स्वागत के लिए किर्गिज पारंपरिक नृत्य का भी आयोजन किया गया था।

SCO देशों के किन नेताओं से मोदी की मुलाकातें?
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी समिट के दौरान कई SCO नेताओं से मिलेंगे जिनमें झापारोव और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं। शनिवार को रवाना होने से पहले दिए बयान में मोदी ने कहा कि वह इस क्षेत्र के लिए भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं जो ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, SCO के सदस्यों के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्र के लिए काम करेगा जो ‘आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ’ से मुक्त हो। मोदी छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग किर्गिस्तान पहुंचे
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रविवार को SCO समिट में हिस्सा लेने के लिए किर्गिस्तान पहुंच चुके हैं। वहां पहुंचने के बाद शी जिनपिंग ने कहा ‘मैं SCO बिश्केक समिट में शामिल होने और सभी पक्षों के साथ मिलकर SCO के 25 साल के विकास के अनुभव पर फिर से विचार करने, सहयोग की योजनाओं पर चर्चा करने और संगठन का भविष्य बनाने के लिए उत्सुक हूं।’ उन्होंने कहा कि वह संगठन के लगातार नए विकास को बढ़ावा देने के लिए दूसरे सदस्यों के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं।

SCO के गठन के 25 साल पूरे
10 सदस्यों वाले SCO की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी और अब इसके 25 साल पूरे हो रहे हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने थे जिसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस भी इसमें शामिल हुए। 2026 के लिए रोटेटिंग चेयरमैनशिप किर्गिस्तान के पास है और मुख्य सत्र बिश्केक के बाहर अला-आर्चा स्टेट रेजिडेंस में आयोजित किए जाएंगे। नेताओं के कार्यक्रम 30 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेंगे जबकि काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की पूर्ण बैठक 1 सितंबर को तय की गई है। इस समिट की थीम है ‘SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ।’

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SCO?
भारत के लिए एससीओ हमेशा से काफी महत्वपूर्ण रहा है। इस समिट की प्राथमिकताओं में आतंकवाद का मुकाबला करना, क्षेत्रीय स्थिरता और सीमा-पार खतरों पर तालमेल बिठाना शामिल है। इस एजेंडे में यूरेशियन ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, व्यापार और आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल बदलाव पर भी ध्यान दिया जाएगा। उम्मीद है कि सदस्य देश व्यापार को आसान बनाने के लिए SCO समझौते, बाजार तक बेहतर पहुंच और वैल्यू-चेन इंटीग्रेशन पर चर्चा करेंगे। साथ ही प्रस्तावित SCO डेवलपमेंट बैंक और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के लिए दूसरे फाइनेंसिंग तरीकों पर भी बातचीत होगी।

1 सितंबर को होने वाले राष्ट्राध्यक्षों के सत्र के दौरान ‘बिश्केक घोषणापत्र’ और समिट से जुड़े अन्य दस्तावेजों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। भारत के लिए यह मध्य एशिया के साथ व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में संबंध मजबूत करने का मौका है वहीं रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा और पेमेंट के मामले में सहयोग पर भी बातचीत हो सकती है। समिट के आखिर में किर्गिस्तान SCO की बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंप देगा जो 2027 तक संगठन की अगुवाई करेगा और 2027 में नेताओं की समिट की मेजबानी करेगा।

WORLD : PoK के सिर पर पाकिस्तान ने बिठाया ‘लूजर पीएम’, कौन हैं इफ्तिखार अली गिलानी?

0

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भारी धांधली और विरोध प्रदर्शनों के बीच इफ्तिखार अली गिलानी को नया प्रधानमंत्री चुना गया है. इसे लोकतंत्र का मजाक कहा जा रहा है क्योंकि गिलानी आम चुनाव में अपनी सीट हार गए थे. इसके बावजूद इस्लामाबाद और नवाज शरीफ के इशारे पर उन्हें ‘चोर दरवाजे’ से असेंबली में लाया गया और पीएम बना दिया गया. अपनी ही पार्टी PML-N के नेताओं और आम जनता के भारी विरोध के बीच बने इस ‘लूजर पीएम’ से पूरे PoK में गुस्सा बहुत बढ़ गया है.

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में लोकतंत्र के नाम पर एक बार फिर ऐसा सर्कस रचा गया है, जिसने पूरी दुनिया के सामने इस्लामाबाद का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है. अब पीओके की जनता के सिर पर एक ‘लूजर पीएम’ बिठा दिया गया है. ये भारी विरोध प्रदर्शनों, खून-खराबे और धांधली के गंभीर आरोपों के बीच शुक्रवार को बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को PoK का नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया. इफ्तिखार गिलानी खुद अपनी सीट पर चुनाव हार गए थे लेकिन इसके बावजूद राजनीति खेलकर उन्हें पीओके का ‘लूजर कैंडिटेट’ को प्रधानमंत्री बना दिया.

जिसे PoK की जनता ने ठुकराया, उसी को बना दिया प्रधानमंत्री
पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के इफ्तिखार गिलानी ने मुजफ्फराबाद स्थित तथाकथित विधानसभा में कुर्सी तो हासिल कर ली, लेकिन इस चुनाव की सबसे शर्मनाक सच्चाई ये है कि गिलानी खुद अपनी सीट पर चुनाव हार गए थे. जनता द्वारा पूरी तरह नकार दिए जाने के बाद भी इस्लामाबाद के आकाओं और नवाज शरीफ के इशारे पर उन्हें ‘चोर दरवाजे’ यानी टेक्नोक्रेट रिजर्व सीट से विधानसभा में घुसाया गया और अब वजीर-ए-आजम की कुर्सी पर बैठा दिया गया है. इस घटिया राजनीतिक खेल के बाद PoK की जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है और सड़कों पर दोबारा हिंसा भड़कने की आशंका तेज हो गई है.

इफ्तिखार गिलानी को क्यों कहा जा रहा है ‘लूजर पीएम’?
राजनैतिक विश्लेषकों और PoK की जनता की नजरों में बैरिस्तर इफ्तिखार अली गिलानी सिर्फ एक ‘कठपुतली’ ही नहीं, बल्कि पूरी तरह एक ‘लूजर पीएम’ हैं. इसके पीछे एक-दो नहीं, बल्कि कई ठोस कारण मौजूद हैं जो उनके राजनीतिक वजूद पर सवाल खड़े करते हैं.

जनता की अदालत में करारी हार: लोकतंत्र का पहला नियम होता है जनमत. तीन चरणों में, 27 जुलाई, 2 अगस्त और 3 अगस्त हुए आम चुनावों में PoK की जनता ने गिलानी को सीधे तौर पर वोट देने से मना कर दिया. वो अपनी सीधी चुनावी सीट से बुरी तरह हार गए. जब किसी नेता को उसके अपने इलाके की जनता खारिज कर देती है, तो उसे पूरे प्रदेश का नेतृत्व सौंपना सीधे-सीधे जनादेश का अपमान है.

‘चोर दरवाजे’ से असेंबली में एंट्री: चुनाव हारने के बाद अपनी साख बचाने और इस्लामाबाद की वफादारी भुनाने के लिए गिलानी ने शॉर्टकट रास्ता चुना. उन्हें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित 8 सीटों में से एक ‘टेक्नोक्रेट सीट’ का सहारा देकर असेंबली में घुसाया गया. यानी वो जन-प्रतिनिधि नहीं, बल्कि मनोनित मोहरा बनकर सदन में पहुंचे.

बिना जनादेश का ‘डमी लीडर’: PoK की 53 सीटों वाली विधानसभा में 45 सीटों पर जनता सीधे वोट डालती है. गिलानी इनमें से एक भी सीट जीतने में नाकाम रहे. एक ऐसा नेता जिसके पास खुद का कोई वोट बैंक या जनादेश नहीं है, वो न तो स्वतंत्र फैसले ले सकता है और न ही जनता के हक में आवाज उठा सकता है. वो पूरी तरह से इस्लामाबाद में बैठे अपने आकाओं के इशारों पर नाचने को मजबूर रहेगा.

अपनी ही पार्टी में साख का संकट: गिलानी की नाकामी का आलम ये है कि उन्हें अपनी ही पार्टी का पूरा समर्थन हासिल नहीं है. PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया और वोटिंग सेशन का बहिष्कार कर दिया. जो नेता अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का भरोसा नहीं जीत पाया, वो ‘लूजर’ नहीं तो और क्या है?

मुजफ्फराबाद में बुलाई गई तथाकथित विधानसभा की बैठक में कुल 44 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया. इसमें इफ्तिखार गिलानी को 30 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के मुख्तार अहमद को सिर्फ 14 वोटों से ही संतोष करना पड़ा.

वैसे तो PoK की इस तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, लेकिन इस समय वहां केवल 46 सदस्य ही मौजूद हैं. पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर चुनाव हिंसा और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण टाल दिए गए थे. वोटिंग के दौरान पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और पार्टी के अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आए

नवाज शरीफ का हुक्म: बृहस्पतिवार को ही PML-N के सुप्रीम लीडर नवाज शरीफ ने लाहौर से गिलानी के नाम पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद मुजफ्फराबाद में सिर्फ नाटक होना बाकी थाअपनों का ही बहिष्कार: PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर अपनी ही पार्टी के इस फैसले से इतने नाराज हुए कि वो वोटिंग सेशन में शामिल ही नहीं हुए.

PoK में हुए इस चुनाव का इतिहास किसी प्रहसन से कम नहीं है. कुल 53 सीटों वाले इस ढांचे में 45 सीटों पर जनता सीधे वोट डालती है, जबकि 8 सीटें रिजर्व होती हैं. अब तक हुई 38 डायरेक्ट सीटों की गिनती में PML-N को 25 और PPP को 12 सीटें मिली हैं, जबकि एक सीट अवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी ने जीती और PML-N को समर्थन दे दिया.
आरक्षित 8 सीटों में से भी 6 सीटें फर्जी तरीके से PML-N को ही दे दी गईं. यानी जिस नेता को सीधे चुनाव में जनता ने पूरी तरह बाहर कर दिया था, उसे ही रिजर्व सीट के जरिए जबरन वजीर-ए-आजम बनाकर जनता के सिर पर लाद दिया गया.
जून से जल रहा है PoK: ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ का भड़का गुस्सा
PoK की जनता सालों से इस्लामाबाद के जुल्मों, आसमान छूती महंगाई, भारी-भरकम बिजली बिलों और पाकिस्तानी सेना की तानाशाही से तंग आ चुकी है. जून की शुरुआत से ही ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ के बैनर तले हजारों लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी पुलिस और सुरक्षा बलों ने सीधी गोलियां चलाईं, जिसमें कई आम नागरिकों और जवानों की मौत हो चुकी है.

पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर बैन तक लगा दिया था, लेकिन जनता का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है. आंदोलनकारी खास तौर पर शरणार्थियों के नाम पर आरक्षित 12 सीटों और चुनावों में बड़े पैमाने पर की जा रही धांधली का विरोध कर रहे हैं. अब एक ऐसे ‘हारे हुए नेता’ का प्रधानमंत्री बनना आग में घी डालने जैसा काम करेगा.

क्या ढहने वाला है इस्लामाबाद का ये नाटक?
PoK में आज जो हालात हैं, वे ये बताने के लिए काफी हैं कि वहां की जनता अब पाकिस्तान के इस फर्जी लोकतंत्र और कठपुतली सरकारों से तंग आ चुकी है. भुखमरी, बेरोजगारी और अब इस ‘लूजर पीएम’ के थोपे जाने से वहां के लोगों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है.
इफ्तिखार गिलानी का प्रधानमंत्री बनना इस्लामाबाद के लिए कोई जीत नहीं, बल्कि उस जन-आक्रोश की ज्वाला को और भड़काने का जरिया बन गया है जो आने वाले दिनों में पाकिस्तान के अवैध कब्जे की पूरी इमारत को ढहा देगा.

WORLD : नेपाल ने विदेशी मदद को दी मंजूरी: भारत भेजेगा टनल रेस्क्यू और मेडिकल टीमें, 57.5 टन राहत सामग्री पहुंची

0

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के लिए अब विदेशी मदद लेने का रास्ता साफ हो गया है। काठमांडू सरकार ने पहले विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अब सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों और खोज-बचाव टीमों को प्रभावित इलाकों में काम करने की अनुमति दी जा रही है।

भारत ने नेपाल के अनुरोध पर तुरंत मदद की पेशकश की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी में है। सबसे पहले एक सर्वे टीम भेजी जा रही है, जो प्रभावित इलाकों का जायजा लेकर जरूरी उपकरणों और बचाव अभियान की जरूरतों का आकलन करेगी।

इसके साथ भारत मेडिकल टीम भी भेज रहा है। भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज और तकनीकी टीमें उपलब्ध कराने की पेशकश की है, ताकि बाढ़ से टूटी कनेक्टिविटी को जल्द बहाल किया जा सके। एक बेली ब्रिज पहले से नेपाल में मौजूद है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद बदला फैसला
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद उनके देशों की ओर से नेपाल सरकार पर दबाव बढ़ा था। एक वरिष्ठ नेपाली अधिकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार मांग कर रहा था कि कम से कम खोज-बचाव विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को नेपाल आने की अनुमति दी जाए। इसके बाद सरकार ने कुछ चुनिंदा इलाकों में सीमित विदेशी विशेषज्ञों को अनुमति देने का फैसला किया।

रसुवा और नुवाकोट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में कई लोगों के फंसे या लापता होने की खबर है। मुश्किल हालात और सीमित प्रगति के बीच विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू की जरूरत महसूस की जा रही है।

फॉरेंसिक जांच में भी मिलेगी विदेशी विशेषज्ञों की मदद
बाढ़ और मलबे के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं। नेपाल में डीएनए टेस्टिंग और फॉरेंसिक पहचान की क्षमता सीमित होने के कारण विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया गया है। इससे लापता लोगों की पहचान और शवों को उनके परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारत ने भेजी 10 टन और राहत सामग्री
भारत ने नेपाल को तीसरी खेप में 10 टन मानवीय सहायता भेजी है। इसमें पोर्टेबल जनरेटर, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और पानी साफ करने वाली टैबलेट शामिल हैं। इसी फ्लाइट से 11 सदस्यीय डॉक्टर, पैरामेडिक और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम भी भेजी जा रही है। 26 अगस्त से अब तक भारत की ओर से नेपाल को दी गई कुल राहत सहायता 57.5 टन हो चुकी है। नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। विदेशी विशेषज्ञों की मदद मिलने से सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।

NATIONAL : जम्मू-कश्मीर के राजौरी में भारी गोलीबारी, LoC पर घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम, सेना का सर्च ऑपरेशन जारी

0

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में LoC पर संदिग्ध गतिविधि दिखने के बाद सेना ने की फायरिंग। घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह पहला बड़ा सीजफायर उल्लंघन है।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना के मुस्तैद जवानों ने आतंकवादियों की घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात LoC के पास संदिग्ध गतिविधियों को देखने के बाद भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाला और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सीमा पार से भी जवाबी फायरिंग की गई। दोनों ओर से करीब डेढ़ से दो घंटे तक रुक-रुक कर छोटे हथियारों से भारी गोलीबारी होती रही। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार रात करीब 10:00 बजे राजौरी सेक्टर के तारकुंडी इलाके में हुई। भारतीय जवानों ने सीमा पर कुछ संदिग्ध आतंकियों को रेंगते हुए आगे बढ़ते देखा था, जिसके तुरंत बाद सेना ने चेतावनी के तौर पर और घुसपैठ रोकने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि, तकरीबन डेढ़ घंटे चली इस पूरी गोलाबारी में भारतीय पक्ष की ओर से किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बड़ी हिमाकत
सुरक्षा विश्लेषकों और सैन्य सूत्रों का कहना है कि यह सीजफायर उल्लंघन पिछले साल मई (7 से 10 मई) के दौरान भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद का सबसे बड़ा उल्लंघन है। महज 22 मिनट चले उस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने LoC पार किए बिना 26 सटीक मिसाइलों से मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मुख्यालयों को तबाह कर दिया था। उस कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने पहले भी कई बार नागरिक इलाकों को निशाना बनाया था और अब एक बार फिर अपनी आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल से ध्यान भटकाने के लिए इस सीजफायर उल्लंघन का सहारा लिया है।

इलाके में अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी
रात भर चली इस भारी गोलाबारी के बाद शनिवार सुबह से ही भारतीय सेना ने पूरे तारकुंडी और राजौरी के अग्रिम रिहायशी और जंगली इलाकों में एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रात के अंधेरे और गोलीबारी की आड़ में कोई भी घुसपैठिया भारतीय सीमा के भीतर दाखिल न हो पाया हो। पूरे राजौरी सेक्टर में सुरक्षा ग्रिड को अलर्ट पर रखा गया है और अत्याधुनिक उपकरणों से सीमा पार की हर हरकत पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

NATIONAL : त्योहार से पहले महंगाई की मार: मुंबई में एक सितंबर से नौ रुपये लीटर महंगा होगा दूध; क्यों बढ़ाई गई कीमत?

मुंबई में तबेला दूध 1 सितंबर से 9 रुपये प्रति लीटर महंगा हो जाएगा। कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर पहुंच जाएगी। उत्पादकों ने पशुओं, चारे और फीड की बढ़ती लागत को इसकी वजह बताया है। त्योहारों से पहले यह बढ़ोतरी रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर असर डाल सकती है।

मुंबई में रोजाना ताजा तबेला दूध खरीदने वाले लोगों को एक सितंबर से ज्यादा कीमत चुकानी होगी। दूध उत्पादकों ने कीमत में नौ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके बाद 93 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला तबेला दूध 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। नई दरें एक सितंबर, 2026 से लागू होंगी और 28 फरवरी, 2027 तक प्रभावी रहेंगी। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जिससे मुंबई के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

पशु, चारा और फीड महंगे होने से बढ़ी कीमत
मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, डेयरी पशुओं की कीमत बढ़ने और पशु आहार पर खर्च बढ़ने के कारण दूध की पुरानी कीमत पर बिक्री करना मुश्किल हो रहा था।उत्पादकों का कहना है कि अनाज समेत कई तरह के पशु आहार की कीमतों में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। चारे और ऑयल केक की बढ़ी कीमत ने भी दूध उत्पादन की लागत बढ़ा दी है। उनके मुताबिक, लगातार बढ़ती लागत के कारण कीमतों में बदलाव करना जरूरी हो गया था।

NATIONAL : वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर BJP ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया, 10 प्वाइंट्स में जानें क्या है इसमें

0

भारतीय जनता पार्टी 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध करती है। भाजपा वन्दे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। अतः भारतीय जनता पार्टी संकल्प करती है:

19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए वन्दे मातरम् के प्रथम दो पदों तक गायन सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट विरोध करेगी।

पूर्ण वन्दे मातरम् के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा करेगी, इसे भारत का राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत मानेगी

1950 में संविधान सभा की घोषणा तथा 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान किए जाने से स्थापित स्थिति की दृढ़ता से पुष्टि करेगी।

राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण अथवा संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने के हर प्रयास का विरोध करेगी।

कांग्रेस को स्मरण कराएगी कि उसकी कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव भारत के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। 1937 का राजनीतिक समझौता 1950 के संवैधानिक निर्णय और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को उजागर करेगी, जिसमें वन्दे मातरम् के गायन को सीमित किया गया था, जिसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां तथा बाद में बढ़ती सांप्रदायिक और अलगाववादी मांगों की राजनीति शामिल थी।

महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को जन-जन तक पहुंचाएगी, जिसमें उन्होंने वन्दे मातरम् को “साम्राज्यवाद-विरोधी नारा” और “शुद्धतम राष्ट्रीय भावना” से जुड़ा हुआ बताया था।

भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से देशव्यापी अभियान चलाएगी, जिसके अंतर्गत वन्दे मातरम् का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत भारत के हर कोने तक पहुंचाई जाएगी।

विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता का अभियान चलाया जाएगा, ताकि छह पदों वाले पूर्ण राष्ट्रीय गीत और उसके इतिहास को विस्मृति में न जाने दिया जाए तथा आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि वन्दे मातरम् के साथ भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी स्मृतियां जुड़ी हैं।
राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए वन्दे मातरम् के सम्मान और विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे स्मरण रखें कि वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई थी। पीढ़ियों के भारतीयों ने इन्हें स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रगौरव के मंत्र के रूप में अपनाया। इस विरासत को आज की वोट-बैंक राजनीति की गणित में सीमित नहीं किया जा सकता। 1947 में भारत की स्वतंत्रता का जयघोष ‘वंदे मातरम्’ था, और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ का महाघोष भी ‘वंदे मातरम्’ ही होगा।

- Advertisement -