Friday, September 11, 2026
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SPORTS : प्रैक्टिस के बाद अभिषेक ने उड़ाई तिरंगे वाली पतंग, दुबे ने भी अजमाया हाथ

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अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले अभिषेक शर्मा ने दिल्ली में जमकर बल्लेबाजी अभ्यास किया. प्रैक्टिस के बाद वह तिरंगे वाली पतंग उड़ाते नजर आए, जिससे उनका अलग और हल्का-फुल्का अंदाज देखने को मिला.

अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले भारतीय टीम ने गुरुवार को दिल्ली में जमकर अभ्यास किया. तेज धूप के बीच टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने नेट्स में करीब आधे घंटे तक बल्लेबाजी की. हालांकि, प्रैक्टिस सेशन खत्म होने के बाद अभिषेक का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. बल्ला छोड़ने के बाद वह हाथ में डोर थामकर तिरंगे वाली पतंग उड़ाते नजर आए. इसका वीडियो BCCI ने शेयर किया. आधे घंटे तक अभिषेक ने रेंज हिटिंग की.

अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में हुए प्रैक्टिस सेशन के दौरान अभिषेक शर्मा ने अपनी पावर-हिटिंग पर खास ध्यान दिया. उन्होंने करीब आधे घंटे तक बल्लेबाजी का अभ्यास किया और इस दौरान स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ खुद को परखा. अभिषेक का खास फोकस रेंज हिटिंग पर रहा. उन्होंने नेट्स में स्पिनर्स के खिलाफ कई लंबे-लंबे छक्के लगाए. इसके अलावा तेज गेंदबाजों के सामने भी उन्होंने आक्रामक शॉट खेलने का जमकर अभ्यास किया.

टीम इंडिया का प्रैक्टिस सेशन खत्म होने के बाद मैदान पर दिलचस्प नजारा देखने को मिला. अभिषेक शर्मा मैदान के एक किनारे गए और वहां पतंग उड़ाने लगे. उनके साथ शिवम दुबे भी नजर आए. खास बात यह रही कि अभिषेक जिस पतंग को उड़ा रहे थे, वह तिरंगे के रंग में थी. अभिषेक ने करीब 10 से 15 मिनट तक पतंगबाजी का लुत्फ उठाया. इस दौरान वह काफी सहज नजर आए. अभिषेक को यह पतंग कहां से मिली, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.

जिस अंदाज में अभिषेक शर्मा पतंग की डोर संभाल रहे थे, उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि पतंगबाजी उनके लिए बिल्कुल नई चीज नहीं है. वह काफी सहजता के साथ पतंग को हवा में नियंत्रित करते नजर आए. उनके अंदाज से यह भी लगा कि उन्हें पतंग उड़ाना पसंद है और वह पहले भी पतंगबाजी करते रहे होंगे. नेट्स में लंबे-लंबे छक्के लगाने के बाद अभिषेक का यह हल्का-फुल्का अंदाज प्रैक्टिस सेशन का दिलचस्प पल रहा. पहले उन्होंने बल्ले से गेंदों को हवा में उड़ाया और अभ्यास खत्म होने के बाद दिल्ली के आसमान में तिरंगे वाली पतंग उड़ाते दिखाई दिए.

ENTERTAINMENT : एआर रहमान संग काम कर बेहद खुश हैं आनंदी जोशी, बोलीं- ‘उन्हें अपना गुरु मानती हूं’

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नसिंगर आनंदी जोशी ने हाल ही में दिग्गज सिंगर ए.आर. रहमान की तारीफ की और उन्हें अपना गुरु बताया. वो उनके साथ लगातार काम करने को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं.

मल्टीटैलेंटेड सिंगर आनंदी जोशी अपने गुरु ए.आर. रहमान के साथ लगातार काम करने को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के गाने ‘देखिए जहां जाइए कहीं’ में आनंदी ने अपनी आवाज दी है. इस गाने को जावेद अख्तर ने लिखा है, जबकि आनंदी के साथ जावेद अली और रब्बानी मुस्तफा खान ने इसे अपनी आवाज दी है. गाने में सनी देओल और प्रीति जिंटा नजर आ रहे हैं. आनंदी के लिए इस गाने का हिस्सा बनना इसलिए भी खास है, क्योंकि वो लंबे समय से ए.आर. रहमान को अपना गुरु मानती हैं.

प्रेग्नेंसी के दौरान रिकॉर्ड किया गाना
इससे पहले आनंदी ने एआर रहमान की फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ के गाने ‘जरा जरा मन खुलावते’ में उनके साथ काम किया था. दिलचस्प बात ये है कि ‘देखिए जहां जाइए कहीं’ का सफर आनंदी की जिंदगी के एक बेहद खास दौर के साथ भी जुड़ा हुआ है. उन्होंने ये गाना तब रिकॉर्ड किया था, जब उन्हें पता चला कि वो प्रेग्नेंट हैं. आनंदी इस पूरे सफर को किसी आशीर्वाद से कम नहीं मानतीं.

आनंदी जोशी ने की बात
अपने इस सफर के बारे में आनंदी ने बताया, ‘पिछले साल नवंबर में मैं रहमान सर के स्टूडियो में किसी और चीज की रिकॉर्डिंग के लिए गई थी. उसे रिकॉर्ड करने के बाद मुझे ये धुन गाकर देखने के लिए कहा गया. उस वक्त मुझे गाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, क्योंकि गाना अभी बन ही रहा था और इसका प्रोडक्शन भी बाकी था. करीब छह महीने बाद जब मुझे पता चला कि मेरी आवाज में ये गाना फाइनल हो गया है, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.’

आनंदी ने कहा, ‘सबसे खास बात ये है कि आज जो गाना आप सुन रहे हैं, उसमें करीब 80-90 परसेंट हिस्सा उसी पहले वर्जन का है, जिसे मैंने नवंबर में रिकॉर्ड किया था. रहमान सर की कंपोजिशन और जावेद अख्तर जी के लिखे गाने का हिस्सा बनना आज भी मेरे रोंगटे खड़े कर देता है. ये गाना मेरे लिए बेहद खास है और मैं इसका हिस्सा बनकर खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं.’

एआर रहमान को अपना गुरु मानती हैं आनंदी
आनंदी ने आगे कहा, ‘मैं रहमान सर को अपना गुरु मानती हूं. उनके संगीत ने मुझे जिंदगी को समझने में बहुत मदद की है और उनके साथ बिताया हर पल मेरे लिए सीखने जैसा होता है. जब मुझे यह गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिला, उसी वक्त मुझे पता चला था कि मैं प्रेग्नेंट हूं. मेरी प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में मुझे पता चला कि ये गाना मेरी आवाज में आ रहा है. बाद में जब मैं नौवें महीने में थी, तब लिरिक्स में बदलाव की वजह से गाने की दो लाइनें दोबारा रिकॉर्ड करनी थीं. मैं चाहती थी कि इसे जल्द से जल्द कर लूं, क्योंकि मुझे डर था कि अगर मुझे लेबर पेन शुरू हो गया तो मैं ये सुधार नहीं कर पाऊंगी.’

एआर रहमान संग काम कर बेहद खुश हैं आनंदी जोशी, बोलीं- ‘उन्हें अपना गुरु मानती हूं

उन्होंने आगे कहा, ‘जब मैंने ये बात बताई, तो सार्थक और रहमान सर दोनों ने बहुत प्यार से बात की और अगले ही दिन मुझे उन लाइनों को रिकॉर्ड करने का मौका मिल गया. रिकॉर्डिंग के बाद मेरी रहमान सर से बात भी हुई, जो मेरे लिए बेहद खास पल था. अब मेरा बच्चा भी आ चुका है और गाना भी रिलीज हो गया है. इसलिए मुझे लगता है कि इस गाने का सफर मेरी प्रेग्नेंसी के सफर के साथ-साथ चला. यह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है.’

NATIONAL : सीतापुर में बवाल, BJP कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर कोतवाली पहुंचे मंत्री

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सीतापुर में सड़क चौडीकरण के दौरान मंदिर के चबूतरे हटाने पर बवाल हो गया.इस दौरान बीजेपी कार्यकर्त्ता को पुलिस गिरफ्तार कर लायी, जिसके बाद मंत्री राकेश राठौर कोतवाली पहुंचे.

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के दौरान मंदिर के चबूतरे को तोड़े जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस के बीच हुई झड़प और फिर हिरासत में लेने के बाद मामला इतना गरमा गया कि राज्य सरकार में मंत्री राकेश राठौर कोतवाली जा पहुंची पहुंचे. उन्होंने कार्यकर्ता को छोड़ने की मांग की इस दौरान वे भावुक होकर रोने लगे.

राज्य मंत्री का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. अंत में पुलिस से नोकझोंक के बाद राज्यमंत्री ने कार्यकर्त्ता को छुडवा लिया. इस दौरान कोतवाली में काफी गहमा-गहमी रही.

क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, नगर के बाल्दा कालोनी सड़क चौड़ीकरण का निर्माण कार्य सीतापुर नगर पालिका करा रही हैं. इस दौरान अतिक्रमण भी हटाया जा रहा हैं. ईओ प्रभारी सीमा सिंह की देखरेख में गुरूवार को काम हो रहा था. इसी दौरान रम्पा टॉकिज के सामने स्थित मंदिर के चबूतरे को तोड़ा गया, जिसका भाजपा कार्यकर्ता जितेन्द्र मिश्र और उनके बेटे शुभम ने विरोध किया. विरोध के दौरान झड़प हो गई. इसी दौरान इस दृश्य को एक पत्रकार ताज मोबाइल में कैद कर रहा था तभी विवाद खड़ा हो गया.

पत्रकार की शिकायत पर गिरफ्तार हुए कार्यकर्त्ता
पत्रकार की शिकायत के बाद भाजपा कार्यकर्ता जितेन्द्र और उनके बेटे शुभम को पुलिस ने टांग लिया और फिर कोतवाली लॉकअप में बंद कर दिया. जितेन्द्र नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर ‘गुरू’ के खास हैं. मंत्री ने तत्काल कोतवाल से लेकर कप्तान से छोड़ने की सिफारिश की, पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन तो दिया लेकिन शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक जब नही छोड़ा तब मंत्री समर्थकों के साथ कोतवाली पैदल ही पहुंच गए. एएसपी आलोक सिंह भी आ गये. मंत्री तभी माने जब कोतवाली से पिता-पुत्र को छोड़ाकर अपने साथ लेकर चले गये. इस दौरान वह बेहद भावुक भी हुए और आरोप भी जड़े.

ईओ ने बताया आपसी विवाद
जबकि ईओ प्रभारी सीमा सिंह का कहना हैं कि अतिक्रमण में आने वाले चबूतरे को हटवाया जा रहा था. इसी दौरान आपस में विवाद के चलते दो पक्षों में झड़प हुई थी. सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के चलते पिता-पुत्र को पुलिस पकड़ कर ले गई थी.

LIFESTYLE : किराये के छोटे से घर में मंदिर रखने की जगह नहीं? आजमाएं ये 6 तरीके, कम जगह में बनेगा खूबसूरत पूजा का कोना

छोटे फ्लैट्स और कम जगह वाले भारतीय घरों में पूजा के लिए मंदिर स्पेस की काफी दिक्कत होती है, लेकिन थोड़ी-सी समझदारी से आप छोटे घर में भी सुंदर मंदिर स्पेस बना सकते हैं. आइए हम आपको छोटे मंदिर स्पेस के लिए कुछ शानदार आइडियाज बताते हैं, जो आपके बहुत काम आएंगे.

Small Pooja Room Ideas: भारतीय घरों में हमेशा से ही पूजा रूम के लिए अलग से जगह बनाई जाती थी. पहले लोगों के पास खुला स्पेस हुआ करता था, लेकिन समय के साथ अब जैसे-जैसे लोग बड़े-बड़े घरों की बजाय छोटे फ्लेट्स में शिफ्ट होने लगे हैं, तो जगह की कमी की वजह से अक्सर लोग मंदिर की जगह को लेकर सबसे ज्यादा परेशान होते हैं.

अपार्टमेंट और फ्लैट्स में जगह पहले के मुकाबले काफी कम होता है. ऐसे में पूजा के लिए अलग कमरा बनाना हर किसी के संभव नहीं रह गया. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि घर में मंदिर या पूजा का कोना नहीं बनाया जा सकता. बस थोड़ी-सी समझदारी से आप दीवार, कोने या खाली जगह का इस्तेमाल करके छोटा और सुंदर पूजा स्पेस तैयार कर सकते हैं.

आइए इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे 6 आसान और स्मार्ट आइडियाज के बारे में बताएंगे, जो छोटे भारतीय घरों में खूब जंचेंगे. इनको ट्राई करके आप अपने छोटे से घर में खूबसूरत पूजा का कोना भी बना पाएंगे.

बाजार में आजकल बने हुए मंदिर भी मिल जाते हैं, लड़की और मार्बल दोनों में ही मंदिर मिल रहे हैं. अगर आप घर छोटा है और आपको मार्बल वाला व्हाइट मंदिर पसंद है तो आपके लिए छोटा मार्बल स्टैंड बेहतर रहेगा. ज्यादा बड़ा मंदिर रखने के बजाय छोटा-सा मार्बल प्लेटफॉर्म बनवाएं और पीछे पैनल लगाएं. नीचे एक छोटा ड्रॉअर या शेल्फ हो तो रोज काम आने वाली पूजा सामग्री आसानी से रखी जा सकती है.

अगर आपका अपार्टमेंट 1 बीएचके हैं और फर्श पर मंदिर रखने की जगह नहीं है तो दीवार का इस्तेमाल करें. लकड़ी का छोटा वॉल-माउंटेड मंदिर कम जगह लेता है और देखने में भी सुंदर लगता है. अगर आप चाहे तो इसके नीचे छोटा कैबिनेट या ड्रॉअर रख सकते हैं, जिसमें पूजा की सामग्री, अगरबत्ती, कपूर और दीये रखे जा सकते हैं. पूजा की चीजों के अलावा आप अपना जरूरत का सामान भी रख सकते है.

बहुत छोटी जगह वाले घरों में फ्लोटिंग शेल्फ एक अच्छा विकल्प है. दीवार पर दो या तीन शेल्फ लगाकर ऊपर वाली शेल्फ पर भगवान की मूर्तियां रखी जा सकती हैं. नीचे वाली शेल्फ पर दीया, घंटी, अगरबत्ती और पूजा की दूसरी चीजें रखें. इससे फर्श खाली रहेगा और घर भी ज्यादा खुला हुआ लगेगा.

अगर आप पूजा की जगह को कमरे से थोड़ा अलग दिखाना चाहते हैं तो आप अपने घर में लकड़ी की जाली का पार्टिशन लगा सकते हैं. इसके पीछे एक छोटा मंदिर या पतला कैबिनेट बनाया जा सकता है. जाली से पूजा का कोना अलग भी दिखेगा और कमरे में रोशनी और हवा भी बनी रहेगी. यह आइडिया ड्रॉइंग रूम के एक हिस्से के लिए बेस्ट रहेगा. ड्रॉइंग रूम में काफी स्पेस होता है, ऐसे में आप वहां पर मंदिर बना सकते हैं.

फ्लैट में कोई ऐसा कोना है जिसका इस्तेमाल नहीं हो रहा? उसे पूजा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. कोने में एक छोटी लकड़ी की शेल्फ या कैबिनेट लगाकर उस पर देवी-देवताओं की मूर्तियां रख सकते हैं. हालांकि शेल्फ पर आप ज्यादा मूर्तियां न रखें, एक दो मूर्ति काफी है, ताकि दिये वगैरा के लिए भी जगह बच चाए. आप चाहे तो पीछे हल्का डिजाइन वाला पैनल लगा सकते हैं या आजकल ऑनलाइन कलरफुल और डिजाइनर वॉलपेपर भी चिपका सकते हैं. इससे यह छोटा-सा कोना घर का खूबसूरत हिस्सा बन जाएगा.

छोटे घरों के लिए स्लाइडिंग डोर वाला मंदिर भी काफी स्मार्ट ऑप्शन है. पूजा के समय दरवाजा खोलें और बाकी समय बंद कर दें. लकड़ी, कांच या जाली वाले स्लाइडिंग दरवाजे मंदिर को सुंदर लुक देते हैं और कमरे में अलग से जगह घेरते भी नहीं हैं.

छोटी जगह को बड़ा दिखाने के लिए सबसे जरूरी है कि पूजा के आसपास सामान का ढेर न लगाएं. मंदिर का फर्श जितना खाली रहेगा, जगह उतनी ही खुली लगेगी.गर्म और हल्की लाइटिंग, हल्के रंगों का बैक पैनल और कम लेकिन व्यवस्थित डेकोरेटिव पूजा के कोने को ज्यादा खूबसूरत बना सकती है.
अगर संभव हो तो मंदिर के नीचे स्टोरेज बनवाएं, ताकि पूजा की जरूरी चीजें नजरों के सामने बिखरी न रहें.

NATIONAL : लेडी शराब तस्कर नेहा के ‘किलर लुक’ ने मचाई थी सनसनी, अब बेल पर टिकी नजर; जीजा ईशान संग कोर्ट में अर्जी

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समस्तीपुर में 75 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार हुई मॉडल लुक वाली नेहा झा और उसके जीजा ईशान की जमानत अर्जी कोर्ट में दाखिल हो गई है. दोनों फिलहाल जेल में हैं. सोशल मीडिया पर नेहा के जेल से बाहर आने की कई पोस्ट वायरल हो रही हैं, लेकिन अभी उसे बेल नहीं मिली है. दोनों की जमानत अर्जी पर 19 सितंबर को विशेष उत्पाद न्यायालय-2 में सुनवाई होगी.

मामला 4 सितंबर का है. 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट कोच में आरपीएफ और सीआईबी की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की थी. कार्रवाई के दौरान नेहा झा और उसके जीजा ईशान को 75 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया. गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में आरपीएफ की टीम ट्रेन में जांच करती दिखाई दे रही थी. इसी दौरान नेहा के व्यवहार और उसके चेहरे के हावभाव को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा शुरू हो गई. कुछ लोगों ने उसके वीडियो और तस्वीरों पर मीम्स बनाए. इसके बाद नेहा से जुड़ी कई पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने लगीं. इसी दौरान नेहा के जेल से बाहर आने को लेकर भी कई पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए. हालांकि, नेहा अभी जेल से बाहर नहीं आई है.

गांव के गांव डूबे, लाखों लोग बेघर… बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात
नेहा के मामले में सोशल मीडिया पर कई ऐसी पोस्ट भी शेयर की गईं, जिनकी पुष्टि नहीं हुई है. इनमें कुछ तस्वीरें और वीडियो AI की मदद से तैयार किए जाने की बात सामने आई है. वर्तमान स्थिति यह है कि नेहा और ईशान दोनों जेल में हैं और दोनों ने अपने अधिवक्ता के जरिए जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन किया है. नेहा और ईशान की बेल अर्जी पर 19 सितंबर को विशेष उत्पाद न्यायालय-2 में सुनवाई निर्धारित की गई है. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से भी अपना पक्ष रखा जाएगा. इसके बाद अदालत मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों के आधार पर जमानत अर्जी पर फैसला करेगी.

SIT कर रही मामले की जांच

उधर, शराब तस्करी के इस मामले में जांच भी जारी है. एसआईटी टीम कथित शराब तस्करी के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे कहां ले जाया जा रहा था और इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच अभी जारी है और फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है.

नेहा की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी उसकी जमानत नहीं हुई है. नेहा और ईशान ने बेल अर्जी दाखिल की है और 19 सितंबर को कोर्ट में इसकी सुनवाई होगी. सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोनों को जमानत मिलती है या उन्हें जेल में ही रहना होगा.

NATIONAL : 12 साल बाद शशि थरूर को याद आई अपनी गलती, बेटों संग 80s की फोटो शेयर कर किया करेक्शन

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सोशल मीडिया पर इन दिनों 80s का दौर फिर लौट आया है. लोग AI की मदद से अपनी तस्वीरों को पुराने जमाने के अंदाज में बदल रहे हैं. इसी बीच शशि थरूर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं. लेकिन वजह कोई AI तस्वीर नहीं, बल्कि उनकी खुद की एक पुरानी फोटो है.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर 80 के दशक की अपनी एक पुरानी तस्वीर दोबारा शेयर की है. तस्वीर में वह सूट पहने नजर आ रहे हैं और उनकी गोद में उनके दोनों बेटे ईशान और कनिष्क हैं. दोनों उस समय छोटे बच्चे थे.

थरूर ने यह तस्वीर पहली बार साल 2014 में शेयर की थी. तब उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा था कि यह फोटो उन्होंने न्यूयॉर्क में ली थी. लेकिन अब करीब 12 साल बाद उन्होंने अपने पुराने कैप्शन की गलती सुधार दी.

थरूर ने बुधवार रात तस्वीर को दोबारा शेयर करते हुए बताया कि फोटो असल में न्यूयॉर्क की नहीं, बल्कि जेनेवा की थी. उन्होंने अपने पुराने कैप्शन को गलत बताते हुए इस बात का करेक्शन किया.

तस्वीर वही रही, यादें भी वही रहीं, लेकिन 12 साल बाद थरूर ने उस तस्वीर से जुड़ी जगह की जानकारी को सोशल मीडिया पर साक्षा कर सुधार लिया.दरअसल, इन दिनों सोशल मीडिया पर 80s का ट्रेंड तेजी से चर्चा में है. लोग AI टूल्स की मदद से अपनी तस्वीरों को 80 के दशक के लुक में बदल रहे हैं. थरूर भी इस ट्रेंड में शामिल हुए, लेकिन उनका तरीका थोड़ा अलग था.

उन्होंने अपनी असली 80s की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया कि उन्हें AI की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि उनके पास उस दौर की वास्तविक तस्वीरें मौजूद हैं. ट्रेंड के दौर में शशि का एक पुरानी तस्वीर पोस्ट करना और 12 साल बाद किया गया छोटा-सा सुधार सोशल मीडिया पर थरूर की पोस्ट को दिलचस्प बना रहा है.

NATIONAL : पॉलीथिन में भरा मिर्च पाउडर और बैंक लूटने पहुंच गया… 4 लाख कैश लेकर भागा… नागपुर के BSc पास युवक की कहानी

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महाराष्ट्र के नागपुर में SBI की शाखा में दिनदहाड़े लूट की वारदात सामने आई है. आरोपी ने कथित तौर पर बैंक कर्मचारी की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर करीब 4 लाख रुपये लूट लिए. CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी को करीब 30 मिनट के भीतर पकड़ लिया. पुलिस का कहना है कि लूटी गई रकम बरामद कर ली गई है.

महाराष्ट्र के नागपुर में दिनदहाड़े SBI में लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है. आरोपी ने कथित तौर पर बैंक कर्मचारी की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर करीब 4 लाख रुपये की नकदी लूट ली और मौके से फरार हो गया. हालांकि, पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी को करीब आधे घंटे के भीतर पकड़ लिया. इसी के साथ लूटी गई रकम भी बरामद कर ली है.

घटना नागपुर के सक्करदरा इलाके में स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक शाखा की है. पुलिस के अनुसार, घटना के समय बैंक में रोजाना की तरह कामकाज चल रहा था. इसी दौरान एक युवक आम ग्राहक की तरह बैंक के अंदर दाखिल हुआ. आरोपी बैंक के कैश काउंटर के पास पहुंचा और मौके का इंतजार करने लगा.

इसके बाद उसने अचानक अपने पास रखा मिर्च पाउडर बैंक कर्मचारियों की आंखों में झोंक दिया. मिर्च पाउडर पड़ने के बाद कर्मचारियों को आंखों में जलन होने लगी और बैंक के अंदर अफरा-तफरी मच गई. पुलिस के मुताबिक, इसी बीच आरोपी ने कैश काउंटर से करीब 4 लाख रुपये की नकदी उठाई और बैंक से बाहर निकलकर फरार हो गया.

यह पूरी घटना बैंक में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई. जानकारी मिलने के बाद सक्करदरा पुलिस मौके पर पहुंची और CCTV फुटेज की जांच शुरू की. पुलिस ने फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने और उसकी तलाश शुरू की. पुलिस के अनुसार, घटना के करीब 30 मिनट के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से लूटी गई रकम भी बरामद कर ली गई है.

पुलिस ने आरोपी की पहचान सूरज भोजराज बोरकर के रूप में की है. उसकी उम्र 28 साल है. आरोपी BSc पास है और बेरोजगार है. वह नागपुर के ग्रामीण इलाके का रहने वाला है. आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद सक्करदरा थाना पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने बैंक लूट की प्लानिंग कब और कैसे बनाई.

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि वारदात में आरोपी अकेला था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था. इसके अलावा पुलिस आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है. घटना का CCTV वीडियो सामने आया है. फुटेज में बैंक के अंदर हुई वारदात और आरोपी की गतिविधियां कैद हो गई हैं.

घटना के बाद बैंक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. दिनदहाड़े एक व्यक्ति के बैंक में दाखिल होने, कर्मचारियों की आंखों में मिर्च पाउडर डालने और नकदी लेकर फरार होने की घटना ने लोगों को चौंका दिया है. फिलहाल सक्करदरा पुलिस इंस्पेक्टर रमेश खुणे और उनकी टीम मामले की जांच कर रही है.

NATIONAL : पति ने पत्नी को सौंप दिया प्रेमी के हाथों में, बचपन का प्यार पाने को तोड़ दी सारी सरहदें

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लखनऊ में शादी के करीब एक साल बाद एक महिला अपने बचपन के प्रेमी के साथ घर से चली गई. पति ने पले उसे खोजा जब वह प्रेमी के साथ मिली तो महिला ने पति के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया और प्रेमी के साथ जिंदगी बिताने की जिद पर अड़ गई. इसके बाद पति ने जबरदस्ती करने के बजाय खुद दोनों की मंदिर में शादी करा दी.

शादी के बाद जिंदगी जिस रिश्ते के साथ आगे बढ़नी थी, उसमें पुराना प्यार अचानक फिर सामने आ गया. लखनऊ के मलिहाबाद में एक महिला अपने बचपन के प्रेमी के साथ घर से चली गई. पति ने उसे ढूंढने के लिए थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस ने तलाश की तो महिला प्रेमी के साथ हरदोई में मिल गई. इसके बाद मामला थाने पहुंचा, जहां परिवार वालों ने उसे समझाने की कोशिश की. लेकिन महिला ने अपना फैसला पहले ही कर लिया था. उसने साफ कह दिया कि वह पति के साथ नहीं रहना चाहती और अपने पुराने प्रेमी के साथ ही जिंदगी बिताएगी. इसके बाद जो हुआ, वह इस पूरे मामले का सबसे अलग पहलू है. पति ने पत्नी पर दबाव डालने या उसे जबरन अपने साथ ले जाने के बजाय खुद उसका हाथ उसके प्रेमी के हाथ में सौंप दिया. दोनों की मंदिर में शादी कराई गई और महिला अपने प्रेमी के साथ चली गई.

बताया जा रहा है कि सोनाली और उसके प्रेमी की पहचान स्कूल के दिनों से थी. दोनों ने साथ पढ़ाई की थी. लंबे समय तक साथ रहने और बातचीत के दौरान उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. दोनों के बीच रिश्ता आगे बढ़ता गया. परिवार को इसकी जानकारी थी या नहीं, इसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं, लेकिन करीब एक साल पहले परिवार ने सोनाली की शादी मलिहाबाद के रहने वाले एक पीआरडी जवान विक्की से कर दी. शादी के बाद सोनाली ससुराल पहुंच गई और पति के साथ रहने लगी. लेकिन पुरानी कहानी वहीं खत्म नहीं हुई. बताया जा रहा है कि शादी के बाद भी सोनाली का अपने बचपन के प्रेमी से संपर्क बना रहा. दोनों फोन पर बातचीत करते थे. वक्त बीतता गया, लेकिन पुराने रिश्ते की डोर पूरी तरह नहीं टूटी.

5 सितंबर को सोनाली अचानक ससुराल से गायब हो गई. जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटी तो परिवार वालों ने उसकी तलाश शुरू की. रिश्तेदारों से लेकर आसपास के इलाकों तक खोजबीन की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला. पति विक्की ने मलिहाबाद थाने में पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराई. मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने महिला की तलाश शुरू की. आसपास के जिलों में भी जानकारी भेजी गई. पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. जांच के दौरान महिला की लोकेशन हरदोई में मिली. इसके बाद पुलिस ने तलाश तेज की और बुधवार को सोनाली को उसके प्रेमी के साथ हरदोई से बरामद कर लिया.

महिला के बरामद होने के बाद पुलिस उसे लेकर मलिहाबाद थाने पहुंची. वहां दोनों पक्षों को बुलाया गया. इसके बाद शुरू हुई बातचीत. परिवार की तरफ से सोनाली को समझाने की कोशिश की गई. पुलिसकर्मियों ने भी उसे समझाया कि वह अपने पति के साथ वापस जाए और शादीशुदा जिंदगी को आगे बढ़ाए. घंटों तक बातचीत चलती रही. लेकिन सोनाली अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हुई. उसने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती. उसका कहना था कि वह अपने प्रेमी के साथ ही जिंदगी बिताना चाहती है. परिवार के लोग उसे समझाते रहे, लेकिन उसकी जिद कायम रही.

थाने में जब सोनाली ने पति के साथ रहने से इनकार किया तो माहौल कुछ देर के लिए शांत हो गया. एक तरफ करीब एक साल पुरानी शादी थी, दूसरी तरफ पत्नी का पुराना प्रेमी. ऐसे में पति के सामने भी बड़ा सवाल था कि वह क्या करे? मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अब पति के फैसले की हो रही है. विक्की ने पत्नी की इच्छा के खिलाफ जाने के बजाय कहा कि अगर वह अपने प्रेमी के साथ खुश है तो वह उसके साथ रह सकती है. बताया जा रहा है कि उसने साफ कहा कि रिश्ते में जबरदस्ती की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. इसके बाद मामला किसी विवाद या टकराव की तरफ जाने के बजाय आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की गई.

थाने में मौजूद लोगों के मुताबिक, पति ने पत्नी से कहा कि वह जिस व्यक्ति के साथ खुश रहना चाहती है, उसके साथ रहे. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी. जरूरी कानूनी औपचारिकताओं के बाद सोनाली और उसके प्रेमी की शादी कराने का फैसला लिया गया. यह फैसला सुनकर वहां मौजूद लोगों के लिए भी स्थिति कुछ असामान्य थी. जिस महिला को उसका पति कुछ दिन पहले तक तलाश रहा था, उसी पत्नी की शादी अब उसके पुराने प्रेमी के साथ कराने की तैयारी हो रही थी.

इसके बाद स्थानीय मंदिर में दोनों की शादी कराई गई. हिंदू रीति-रिवाज से शादी की रस्में पूरी हुईं. प्रेमी जोड़े ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया. सबसे अलग दृश्य तब रहा जब महिला का पति भी इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बना. जिस हाथ को करीब एक साल पहले उसने शादी के बाद थामा था, उसी हाथ को उसने अब उसके पुराने प्रेमी के हाथ में सौंप दिया. इसके बाद सोनाली अपने प्रेमी के साथ चली गई.

NATIONAL : अब खाने के पैकेट पर चीनी, नमक या फैट ज्यादा हुआ, तो लगेगा लाल अलर्ट! FSSAI के नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

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अब आपके खाने के पैकेट में खतरे का लाल निशान हो सकता है. पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या वसा की मात्रा ज्यादा होने पर लाल रंग का लेबल लगाने के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इस मामले पर FSSAI और याचिकाकर्ता वकील राजीव द्विवेदी अब कोर्ट में आमने-सामने हैं.

अगर आप भी आमतौर पर पैकेज्ड फूज खाने के शौकीन हैं तो अब इन्हें खरीदते वक्त स्वाद और ब्रांड के साथ ही साथ उसमें लगे लाल निशान पर भी ध्यान देना होगा. पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या फैट तय सीमा से ज्यादा होने पर फ्रंट पैक पर साफ स्वास्थ्य चेतावनी लगाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. इस मुद्दे पर FSSAI और पेटिशनर वकील राजीव द्विवेदी के सुझावों में बड़ा अंतर सामने आया है.

FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि खाने के पैकेट के सामने चेतावनी के लिए लाल रंग का हेक्सागन लेबल लगाया जाएगा. इसका फॉन्ट पीछे दी गई न्यूट्रीशन टेबल से एक पॉइंट बड़ा होना चाहिए.

शुरुआती प्रस्ताव में FSSAI ने कहा था कि यह चेतावनी तभी जरूरी होगी, जब किसी पैक्ड फूड में चीनी, फैट और नमक में से कम से कम दो पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा हों.लेकिन अब याचिकाकर्ता वकील राजीव द्विवेदी ने इस नियम पर सवाल उठाया है.

इनमें से एक भी तत्व ज्यादा हो तो लगे लेबल

द्विवेदी का कहना है कि अगर किसी पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या वसा में से सिर्फ एक की मात्रा भी तय सीमा से ज्यादा है, तो भी सामने चेतावनी लगनी चाहिए.उनके मुताबिक दो पोषक तत्वों की शर्त काफी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट भी FSSAI और केंद्र सरकार की धीमी प्रक्रिया पर नाराजगी जता चुका है. कोर्ट ने साफ कहा है कि बच्चों और आम लोगों की सेहत किसी भी कॉर्पोरेट मुनाफे से ज्यादा अहम है. केंद्र ने अब तीन महीने के भीतर नियमों में बदलाव का भरोसा दिया है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन, 2020 में जरूरी संशोधन किए जाने हैं.

फूड कंपनियां क्यों कर रही हैं विरोध?

दूसरी तरफ करीब 100 अरब डॉलर के फूड मेन्यूफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को रीप्रेजेंट करने वाली AIFPA ने नियमों का विरोध किया है. कंपनियों का सबसे बड़ा सवाल है कि खतरे का आकलन 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर के आधार पर क्यों हो.

उनका तर्क है कि लोग अचार जैसी चीजें 100 ग्राम नहीं, बल्कि एक बार में करीब 5 ग्राम खाते हैं. इसलिए चेतावनी तय करते समय सर्विंग साइज देखा जाना चाहिए.
कंपनियों को यह भी डर है कि सख्त सीमा लागू हुई तो नमकीन, भुजिया, समोसे और पापड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी लाल चेतावनी के दायरे में आ सकते हैं. बड़ी कंपनियां फॉर्मूला बदलने के लिए रिसर्च लैब का इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन छोटे और कुटीर निर्माताओं के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा.

ग्राहकों को पता होना चाहिए की उनके रोजमर्रा में खाए जाने वाले पैकेज्ड फूड में आखिर कितना नमक, चीनी और फैट है. फिलहाल अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार है. अदालत के फैसले से यह तय होगा कि पैकेट खरीदते समय ग्राहक को सिर्फ ब्रांड दिखेगा या उसकी सेहत से जुड़ी चेतावनी भी नजर आएगी.

ENTERTAINMENT : न बड़ा स्टार, न करोड़ों का बजट… फिर कैसे सरप्राइज हिट हुई नीम करोली बाबा की ‘हनुमान अंश’?

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महज 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने अब तक इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 163 करोड़ रुपये कमा लिए हैं. कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये फिल्म हिट कैसे हो गई?

नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचा रही है. 7 अगस्त को बिना किसी बड़े प्रचार-प्रसार के रिलीज हुई इस धार्मिक फिल्म ने उत्तर और पश्चिम भारत के दर्शकों को खींचकर थिएटर्स तक ला खड़ा किया है.

जहां एक ओर यश की बड़े बजट वाली फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी, वहीं महज 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने 160 करोड़ रुपये से ज्यादा का शानदार कारोबार कर लिया है. अब सवाल ये उठता है कि फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के लोगों और बाबा के भक्तों द्वारा बनाई गई यह छोटी सी फिल्म आखिर लोगों के दिलों को इतना कैसे छू रही है, क्या इसके पीछे कोई चमत्कार है या कोई और कारण?

नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म
विशाल चतुर्वेदी के लेखन और निर्देशन में बनी यह फिल्म लक्ष्मी नारायण शर्मा, जिन्हें दुनिया नीम करौली बाबा के नाम से जानती है, के जीवन को बेहद सादगी के साथ प्रस्तुत करती है. फिल्म दर्शकों को उनके बचपन के दिनों में ले जाती है, जब मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने ध्यान लगाना और साधु का जीवन अपनाना शुरू कर दिया था. इसके बाद उनकी अध्यात्म यात्रा और भविष्य देखने की दिव्य शक्तियों से लेकर उनकी बढ़ती प्रसिद्धि तक के हर पहलू को बहुत सुंदर तरीके से दिखाया गया है.

फिल्म का मुख्य फोकस नीम करौली बाबा के जीवन की उन महत्वपूर्ण घटनाओं पर है, जो उनके चमत्कारों और आम लोगों के जीवन पर पड़े सकारात्मक प्रभाव से जुड़ी हैं. फिल्म कहीं से भी किसी संत की जीवनी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हुई नजर नहीं आती. मेकर्स का मकसद किसी बड़े तकनीकी सिनेमा से चौंकाना नहीं, बल्कि बाबा की महान शख्सियत से लोगों को रूबरू कराना है. ठीक बाबा की जिंदगी की तरह इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी भी इसकी सादगी ही है.

फिल्म के एक्टर का कमाल काम
फिल्म का मूल उद्देश्य दर्शकों को गुरु की शिक्षाओं और उनकी आध्यात्मिक शक्तियों का अहसास कराना है. मुख्य किरदार में नए कलाकार शोभिनव सत्या ने कमाल का काम किया है. उन्होंने एक ऐसे साधु का किरदार निभाया है जो हर मुश्किल, अपमान या कठिन परिस्थिति में भी मुस्कुराता रहता है. ठीक वैसे, जैसे रामायण में अरुण गोविल राम के किरदार में दिखाई दिए थे. बिना किसी दिखावे और सीधे-सादे अंदाज में बनी इस फिल्म को देखकर बाबा के पुराने भक्त तो खुश हो ही रहे हैं, साथ ही नए दर्शक भी उनके जीवन और विचारों से गहराई से जुड़ रहे हैं.

सिनेमा की दुनिया में एक अलग पहचान
रजनीश (ओशो) पर बनी अमेरिकी डॉक्यूमेंट्री ‘वाइल्ड वाइल्ड कंट्री’, वेब सीरीज ‘आश्रम’ या ‘MSG: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ जैसी फिल्मों की भीड़ के बीच ‘हनुमान अंश’ एक बिल्कुल अलग एक्सपीरियंस देती है. यह किसी कमर्शियल सुपरहीरो की तरह मुख्य किरदार को महिमामंडित नहीं करती, बल्कि एक आम इंसान की अंदरूनी अच्छाई और मूल्यों पर भरोसा जताती है. यही वजह है कि एक साधारण जीवन जीने वाले संत की यह कहानी आज करोड़ों लोगों के दिलों में उतर चुकी है.

क्या सिनेमा जगत में शुरू होगा नया दौर?
फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में दूसरे आध्यात्मिक गुरुओं पर भी फिल्में बनाने का एक नया ट्रेंड शुरू होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल देश का दर्शक नीम करौली बाबा की सादगी और शिक्षाओं के प्रभाव में पूरी तरह से लीन नजर आ रहा है.

खैर, ताज्जुब की बात तो यह है कि अपने पांचवें हफ्ते में ही फिल्म ने अकेले 55 करोड़ रुपये कमा डाले हैं, जो भारतीय सिनेमा में अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है. धार्मिक लोग इसे हनुमान जी का चमत्कार मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे इस तरह से भी देख रहे है कि हाल फिलहाल में रिलीज हुई फिल्मों का कंटेंट कमजोर है, ये ही वजह है कि दर्शक हनुमान अंश की तरफ पहुंचे. बाकी काम सोशल मीडिया के प्रचार-प्रसार, नेताओं-अभिनेताओं की तारीफों ने पूरा कर दिया.

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