Monday, March 23, 2026
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NATIONAL : पंजाब के व्यापारियों ने भगवंत मान सरकार पर जताया भरोसा, सरकारी खजाने में आए 111 करोड़

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पंजाब की मान सरकार की ‘एकमुश्त निपटान स्कीम’ को व्यापारियों का भारी समर्थन मिला है. पुराने टैक्स बकाये के जरिए अब तक सरकारी खजाने में 111.16 करोड़ रुपये आ चुके हैं. हालांकि, इस राहत का फायदा सिर्फ 31 मार्च तक ही उठाया जा सकता है. इसके बाद सरकार नरम रुख छोड़कर सख्त एक्शन लेगी और करीब 8,000 संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी.

पंजाब में बकाये टैक्स को निपटाने के लिए लाई गई ‘एकमुश्त निपटान स्कीम’ (OTS) को व्यापारियों का जबरदस्त साथ मिल रहा है. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने रविवार को चंडीगढ़ में बताया कि इस स्कीम के जरिए अब तक 111.16 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आ चुके हैं. लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला जैसे बड़े शहरों के व्यापारियों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, जो दिखाता है कि भगवंत मान सरकार की नीतियों पर लोगों को कितना यकीन है.

वित्त मंत्री चीमा ने साफ कहा कि इस स्कीम का मकसद व्यापारियों को पुराने टैक्स के बोझ से आजाद करना और मुकदमों के चक्कर से बचाना है. अब तक करीब 7,845 व्यापारियों ने अपने 298.39 करोड़ रुपये के बकाये को निपटाने के लिए अर्जी दी है. यह स्कीम उन कारोबारियों के लिए एक नई शुरुआत करने का सुनहरा मौका है, जो पुराने बकाये के ब्याज और जुर्माने में भारी छूट चाहते हैं.

हालांकि, हरपाल सिंह चीमा ने व्यापारियों को एक कड़ी चेतावनी भी दी है. उन्होंने साफ कर दिया है कि राहत की यह खिड़की सिर्फ 31 मार्च, 2026 तक ही खुली है. अगर इस डेडलाइन तक किसी ने अपना बकाया नहीं चुकाया, तो सरकार नरमी छोड़कर सख्त एक्शन मोड में आ जाएगी. इसके अलावा वित्त मंत्री ने यह भी साफ किया कि विभाग ने पहले ही ऐसी 8,000 संपत्तियों की लिस्ट तैयार कर ली है, जिन पर समय सीमा खत्म होते ही कानूनी कार्रवाई और कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

हरपाल सिंह चीमा ने अपील करते हुए कहा, ‘अभी सरकार रियायत दे रही है और रास्ता आसान है, लेकिन 31 मार्च के बाद कोई समझौता नहीं होगा. बिना किसी छूट के पूरी वसूली की जाएगी.’ उन्होंने व्यापारियों से आग्रह किया कि वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें और इस स्कीम का फायदा उठाकर राज्य के विकास में अपना योगदान दें. सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि पंजाब का व्यापारिक माहौल भी और पारदर्शी बनेगा.

NATIONAL : नवी मुंबई में DRI का एक्शन, 9.25 करोड़ का चीनी वॉकी-टॉकी जब्त

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नवी मुंबई बंदरगाह पर डीआरआई ने बड़ी कार्रवाई की है और 9 करोड़ रुपये से ज्यादा की वॉकी-टॉकी और सेकंड हैंड हार्ड डिस्क बरामद किया है. मामले की पुलिस जांच कर रही है.राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने नवी मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर 11,060 प्रतिबंधित वॉकी-टॉकी सेट और सेकंड-हैंड हार्ड डिस्क ड्राइव (HDDs) ज़ब्त किए हैं. जिनकी कुल कीमत 9.25 करोड़ रुपये है. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी.

शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार मुंबई की दो फर्मों के मालिक—एक पिता-पुत्र की जोड़ी ने बिना अनुमति के ये सामान आयात किया था. ऐसे में उन्हें सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है. विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर DRI अधिकारियों की एक टीम ने 2.5 करोड़ रुपये के वॉकी-टॉकी और 6.75 करोड़ रुपये मूल्य के सेकंड-हैंड एचडीडीएस को जब्त किया.

अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित सामानों को 21 करोड़ रुपये के अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के बीच छिपाकर रखा गया था. चीन से भेजे गए आठ कंटेनरों में आए 30.25 करोड़ रुपये के पूरे माल को गलत घोषणा (misdeclaration) के आरोप में ज़ब्त कर लिया गया.साथ ही इस तरह के वॉकी-टॉकी को दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. क्योंकि ये अनुमत आवृत्तियों (frequencies) से बाहर काम करते हैं और इनका उपयोग अनधिकृत संचार के लिए किया जा सकता है. जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होता है. इन उपकरणों के लिए विशिष्ट लाइसेंस की आवश्यकता होती है.

इसके अलावा सेकंड-हैंड एचडीडीएस का आयात भी विदेश व्यापार महानिदेशालय की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता है.

ENTERTAINMENT : जब चली गई थी नरेंद्र चंचल की आवाज, बोले मां ने दी सजा, सिर पर चढ़ गया शोहरत का नशा

नरेंद्र चंचल की लाइफ से जुड़ा एक बेहद रहस्यमयी और डराने वाला वाकया आज भी उनके फैंस के बीच चर्चा का विषय रहता है. कहते हैं कि सफलता पाने के बाद एक बार उनके मन में अहंकार ने दस्तक दी थी.

भक्ति संगीत की दुनिया में जब भी माता के भजनों का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम जो जहन में आता है, वो है नरेंद्र चंचल. अपनी आवाज से करोड़ों भक्तों के दिलों में जगह बनाने वाले नरेंद्र चंचल सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि आस्था का एक प्रतीक बन गए थे. लेकिन उनकी सफलता की इस कहानी के पीछे कुछ ऐसे अनसुने और हैरान कर देने वाले किस्से भी छिपे हैं.

नरेंद्र चंचल ने न केवल धर्म और भक्ति के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई बल्कि बॉलीवुड की चकाचौंध में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया. लेकिन आज हम उनके लाइफ के उसी मोड़ की बात कर रहे हैं, जिसने उनके सोचने का नजरिया ही बदल दिया था.नरेंद्र चंचल मुख्य रूप से माता रानी के भजनों और दुर्गा पूजा के गीतों के लिए घर-घर में फेमस थे, लेकिन उनकी प्रतिभा केवल भजनों तक सीमित नहीं रही. हिंदी सिनेमा में उन्हें असली पहचान मिली ऋषि कपूर की सुपरहिट फिल्म ‘बॉबी’ से. इस फिल्म का गाना ‘बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो’ इतना लोकप्रिय हुआ कि इसने नरेंद्र चंचल को रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा सितारा बना दिया.

फिल्मों में काम मिलने के बाद नरेंद्र चंचल ने भजन और माता के गीत नहीं गाने का मन बनाया. एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा था, ‘मुझे फिल्मी गानों से काफी शोहरत और पैसा मिल रहा था. इसके बाद मैंने फैसला किया कि अब भजन नहीं , सिर्फ फिल्मों के ही गाने गाऊंगा. सफलता का नशा सिर चढ़ गया था.’

नरेंद्र चंचल ने आगे कहा, ‘एक दिन मैं फिल्म म्यूजिकल नाइट के लिए आगरा गया था. उससे पहले काली माता मंदिर के आगे माथा टेकने गया. यहां मैं माता के गीत भी गाता था. वहां कुछ भक्त-कीर्तन कर रहे थे. उन्होंने मुझसे एक भजन गाने के लिए कहा. तब मैंने तबीयत का बहाना बनाया और बिना गाना गाए वहां से लौट आया. लेकिन उस रात ऐसा कुछ हुआ कि मेरी आवाज ही चली गई. मैं समझ गया कि माता रानी ने मुझे मेरी गलती और अहंकार की सजा दे दी है.’

नरेंद्र चंचल इसके बाद कई महीनों तक बिना आवाज के रहे. उनका लंबा ट्रीटमेंट चला और जब चमत्कारिक रूप से वो ठीक हुए तो उन्होंने सिर्फ भजन गाने का ही फैसला किया. उन्होंने फिल्मों गानों को छोड़ दिया. जिसके बाद उन्होंने फिल्म ‘आशा’ का ‘तूने मुझे बुलाया शेरा वालिए’ और ‘अवतार का ‘चलो बुलावा आया है’ गाए और खूब शोहरत पाई.

नरेंद्र चंचल का जन्म पंजाब के अमृतसर की नमक मंडी में 16 अक्टूबर 1940 को हुआ था. वह धार्मिक पंजाबी परिवार से थे और धार्मिक वातावरण में पले बढ़े थे. उन्हें बचपन से ही भजन और आरती में दिलचस्पी थी और इसीलिए उन्होंने छोटी उम्र में जगरातों में गाना शुरू कर दिया था. कई सालों तक स्ट्रगल करने के बाद वह बॉलीवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा बने थे. 22 जनवरी 2021 को उनका दिल्ली में निधन हो गया था.

ENTERTAINMENT : बुर्ज खलीफा में अधूरा पड़ा घर का काम, तनाव के बीच दुबई जा रहा एक्टर

टीवी और बॉलीवुड एक्टर राम कपूर का कहना है कि तनाव के बीच दुबई लौटने के अलावा उनके पास कोई और चारा नहीं है, क्योंकि बुर्ज खलीफा स्थित उनके घर का काम अभी भी अधूरा पड़ा है.मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल रखा है, लेकिन इन सबके बीच एक्टर राम कपूर ने एक बड़ा फैसला लिया है. एक्टर अगले हफ्ते वापस दुबई जाने की तैयारी कर रहे हैं.

दरअसल, राम कपूर का दुबई के बुर्ज खलीफा में अपना एक घर है, जिसका काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है. हालांकि, वहां के मौजूदा हालात सफर के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं, लेकिन डेडलाइन के दबाव और काम पूरा करने की मजबूरी ने उन्हें यह जोखिम उठाने पर मजबूर कर दिया है. राम कपूर का कहना है कि अब उनके पास घर लौटने और काम निपटाने के अलावा ‘कोई और चारा नहीं बचा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में अपने फैसले के बारे में बताते हुए राम कपूर ने माना कि अब और देर करना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा, ‘पिछली बार, हम वहां करीब एक हफ्ते के लिए गए थे. मैंने सोचा था कि मैं मुंबई वापस आकर इंतजार करूंगा कि हालात थोड़े शांत हो जाएं, फिर दोबारा काम शुरू करूंगा. लेकिन अब मेरे पास कोई और चारा नहीं है.’

‘मेरा काम अभी भी बाकी है, और ऐसा नहीं लगता कि हालात जल्द ही ठीक होंगे, बल्कि वे और बिगड़ते ही जा रहे हैं. यह सिलसिला महीनों तक, या उससे भी ज्यादा समय तक चल सकता है. अगर ऐसा ही रहा, तो मैं अब और देर नहीं कर सकता. हालात जैसे भी हों, मुझे वहां जाकर अपने तय किए गए टाइमलाइन के हिसाब से काम पूरा करना ही होगा.’

एक्टर राम कपूर ने बताया कि यह जल्दी इसलिए है क्योंकि बुर्ज खलीफा में उनके घर पर काम चल रहा है, जो अभी रुका हुआ है. उन्होंने कहा, ‘बुर्ज खलीफा में मेरे घर पर काम चल रहा है. हमें जरूरी परमिशन मिल गई थीं और काम पूरा करने के लिए एक तय समय-सीमा भी मिली थी, लेकिन अब सब कुछ ठप पड़ गया है. मैं समय-सीमा बढ़ाने की गुजारिश कर सकता हूं, लेकिन हमें नहीं पता कि यह हालात कब तक रहेंगे. इसलिए, हमने सोचा है कि काम जारी रखा जाए और जैसा पहले से तय था, उसी हिसाब से काम पूरा करने की कोशिश की जाए. दुबई में मेरे जितने भी जान-पहचान वाले लोग हैं, वे सब भी अपनी जिंदगी को जितना हो सके, वैसे ही जी रहे हैं. यह कोई बहुत अच्छी स्थिति तो नहीं है, लेकिन मैं घबरा नहीं रहा हूं.’

पिछली बार के ट्रिप के उलट, इस बार राम कपूर अकेले ही सफर करेंगे, जबकि उनकी पत्नी गौतमी यहीं रुकेंगी. उन्होंने कहा, ‘मैं अकेला ही जा रहा हूं. यहां कुछ जरूरी काम निपटाने के बाद, मैं मंगलवार को फ़्लाइट से रवाना हो जाऊंगा. मुझे लगता है कि इस बार मैं वहां करीब दो हफ्ते तक रहूंगा.’राम कपूर ने कहा कि उनके परिवार वाले इस ट्रिप की जरूरत को समझते हैं। उन्होंने बताया, “मेरे बच्चे काफी हद तक मेरी ही तरह हैं. भले ही वे शुरू में घबरा जाते हैं, लेकिन एक बार जब मैं उनसे बात करता हूं, तो वे शांत हो जाते हैं. असल में, वे अपनी मां को ही दिलासा देने लगते हैं. गौतमी को चिंता तो होती है, लेकिन वह समझती है कि यह जरूरी है और मैं इस तय समय-सीमा को छोड़ नहीं सकता.’

तनाव के बावजूद, राम कपूर ने शहर के सुरक्षा ढांचे पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा, ‘दुबई बहुत ही व्यवस्थित है और सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम है. यहां तक कि जहां मेरा घर है, वह भी देश की सबसे सुरक्षित इमारतों में से एक है; यह बात मैंने गौतमी को भी समझाई है.’

WORLD : अमेरिका से LPG सिलेंडर से लदा जहाज, रूस से पेट्रोल-डीजल… आज आई डबल गुड न्यूज

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पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बाधित होने के बीच भारत को ऊर्जा आपूर्ति में दोहरी अच्छी खबर मिली है. कर्नाटक के मंगलुरु में एक जहाज रूसी क्रूड ऑयल लेकर पहुंचा है, जबकि अमेरिका से LPG से लदा एक और जहाज सफलतापूर्वक डॉक हो गया.

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के मद्देनजर भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए कई कदम उठा हैं, जिसके नतीजे अब जमीनी स्तर पर दिखने लगे हैं. इसी बीच रूस से कच्चे तेल से लदा ‘एक्वा टाइटन’ और अमेरिका से एलपीजी लेकर निकला जहाज ‘पिक्सिस पायोनियर’ रविवार सुबह कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया. इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये जहाज मूल रूप से चीन जा रहा था, लेकिन बीते दिनों अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल को बिक्री के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किया था. इसके बाद इस जहाज को दक्षिण चीन सागर में कोर्स बदलकर भारत की ओर मोड़ दिया गया था. इसी क्रम में रूसी क्रूड ऑयल से लदा जहाज एक्वा टाइटन शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को कर्नाटक के मंगलुरु पोर्ट पहुंच गया है, जहां वह समुद्र में लंगर डाले खड़ा है. यहां से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा.

अधिकारियों के अनुसार, जहाज से कच्चे तेल को सीधे रिफाइनरी तक पहुंचाने के लिए समुद्र के अंदर बिछी पाइपलाइनों का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परिवहन के दौरान होने वाले जोखिम को भी कम किया जा सकेगा. भारत सरकार की इस सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय तालमेल की वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की आशंका काफी हद तक कम हो गई है.

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच वैश्विक ईंधन कीमतों को स्थिर करने के लिए अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल को लेकर नरमी दिखाई, जिसका सीधा फायदा भारत को मिला है.

मंगलुरु पहुंचे ‘एक्वा टाइटन’ के अलावा अमेरिका के टेक्सास से LPG लेकर जहाज ‘पिक्सिस पायोनियर’ रविवार सुबह भारत पहुंच गया है. जहाज में मंगलुरु पोर्ट पर सफलतापूर्वक डॉक हो गया. रूस-अमेरिका से आई ये दोनों खेप ऐसे वक्त में आई हैं, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है.

वहीं, इससे पहले मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण माहौल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते दो भारतीय-फ्लैग LPG टैंकर भारत पहुंचे थे. 16 मार्च को एलपीजी लेकर ‘शिवालिक’ (Shivalik) गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा. इसके बाद 17 मार्च को नंदा देवी जहाज एलपीजी लेकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट पहुंचा था. ये दोनों जहाज ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी समुद्री सैन्य गतिविधियों और बाधाओं को पार कर भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचे थे. इन जहाजों के जरिए आई एलपीजी देश के घरेलू गैस वितरण आपूर्ति नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

ENTERTAINMENT : ‘धुरंधर 2’ के बड़े साहब को था डर, कहीं सलमान से ना हो जाएं रिप्लेस, बोले- कॉल करने की सोची

फिल्म ‘धुरंधर’ की सबसे बड़ी मिस्ट्री रहे बड़े साहब का किरदार निभाने वाले दानिश इकबाल बताते हैं कि जब सलमान खान और इमरान हाशमी का नाम सामने आने लगा था, तो वो डर गए कि कहीं उन्हें आदित्य धर ने फिल्म से रिप्लेस तो नहीं कर दिया.

‘धुरंधर द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर दहाड़ रही है. वर्ल्डवाइड फिल्म की कमाई 500 करोड़ पार हो गई है. आदित्य धर की फिल्म ने ये कारनामा महज चार दिनों में किया. ‘धुरंधर 2’ इस समय बॉलीवुड की सबसे सफल फिल्म बनने की राह पर है. डायरेक्टर ने अपने विजन और स्केल से सभी को हैरान करके रख दिया है.

दिसंबर में जब धुरंधर का पहला पार्ट आया था, तब फिल्म में एक नाम की बड़ी चर्चा थी. बड़े साहब का नाम काफी सुना गया, जिससे सभी के मन में ये सवाल उठा कि आखिर बड़े साहब कौन हैं. देखते ही देखते, ये एक बड़े राज में बदल गया. अब जब धुरंधर का दूसरा पार्ट आया, तो इस राज से पर्दा उठा. फिल्म में बड़े साहब, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को बताया गया है.

दाऊद का रोल एक्टर दानिश इकबाल ने प्ले किया है. इस फिल्म के बाद से उनकी पॉपुलैरिटी काफी बढ़ चुकी है. हाल ही में एक्टर ने जूम को बताया कि उन्हें नहीं अंदाजा था कि वो फिल्म के बड़े साहब निकलेंगे. उन्हें इस रोल में ढलने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. कई घंटों तक मेकअप के बाद, वो दाऊद को कैमरा पर प्ले कर पाए.

दानिश ने कहा, ‘मुझे नहीं मालूम था कि दाऊद बड़े साहब है. उस वक्त तक इसकी कोई चर्चा नहीं थी. मुझे सिर्फ यही कहा गया कि आपको दाऊद का रोल प्ले करना है. वो बिस्तर पर है और उसके सभी सीन्स उसी सेटिंग में शूट होंगे. लेकिन मुझे बड़े साहब का कोई आइडिया नहीं था. जब उसका नाम स्क्रिप्ट में ऐसे सामने आया कि रणवीर का किरदार उसे ढूंढ रहा है, तब जाकर हर कोई सोचने लगा कि ये बड़े साहब कौन है. ये चर्चा हुई थी कि शायद ओसामा बिन लादेन और परवेज मुशर्रफ होंगे. तभी मैंने सोचा कि क्या दाऊद बड़े साहब है.’

दानिश आगे बताते हैं कि जब धुरंधर का पहला पार्ट रिलीज हुआ और बड़े साहब की कास्टिंग की बात उठने लगी, तो वो डर गए थे. उस दौरान ये कहा जा रहा था कि फिल्म में बड़े साहब या तो सलमान खान हैं या इमरान हाशमी. ऐसे में दानिश को डर था कि कहीं आदित्य धर ने उन्हें रिप्लेस ना कर दिया हो. एक्टर ने कहा, ‘जब दाऊद का रोल प्ले करने के लिए इतने सारे नाम सामने आने लगे, तो मैंने सोचा कि आदित्य धर को फोन करूं कि कहीं उन्होंने मुझे रिप्लेस तो नहीं कर लिया.’

GUJARAT : तेज हवाओं में रस्सी टूटी, लहरों में डोलने लगा जहाज… मुंद्रा पोर्ट पर मच गई अफरा-तफर

गुजरात में कच्छ के मुंद्रा पोर्ट पर तेज हवाओं ने कुछ देर के लिए खौफनाक मंजर खड़ा कर दिया. यहां बंधा हुआ एक विशाल मालवाहक जहाज अचानक अनियंत्रित होकर बहने लगा. रस्सी टूटते ही पोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई, हालांकि समय रहते हालात काबू में कर लिए गए और बड़ा हादसा टल गया.

गुजरात के कच्छ में स्थित मुंद्रा पोर्ट पर एक बड़ा हादसा टल गया. यहां तेज हवाओं के कारण एक विशाल मालवाहक जहाज अचानक अनियंत्रित हो गया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं. दरअसल, मुंद्रा पोर्ट के CT-3 टर्मिनल पर एमएससी एलेक्जेंड्रा नाम का एक बड़ा कार्गो शिप खड़ा था. पिछले कुछ दिनों से कच्छ समेत पूरे गुजरात में मौसम खराब बना हुआ है.

तेज हवाओं और समुद्र में उठ रही ऊंची लहरों के कारण जहाजों को संभालना मुश्किल हो गया है. इसी बीच तेज हवाओं का दबाव इतना बढ़ गया कि जहाज को बांधकर रखने वाली मजबूत रस्सियों में से एक अचानक टूट गई. यह रस्सी जहाज को एंकरेज पर स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी थी. जैसे ही रस्सी टूटी, शिप संतुलन खो बैठा और पानी की लहरों के बीच डोलने लगा. यह देख पोर्ट पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई.

पोर्ट प्रशासन के अनुसार, जहाज को सुरक्षित रखने के लिए पांच अलग-अलग पॉइंट्स पर मजबूत रस्सियों से बांधा गया था. लेकिन हवा की गति इतनी तेज थी कि एक रस्सी उस दबाव को सहन नहीं कर पाई और टूट गई. इससे जहाज कुछ समय के लिए अनकंट्रोल हो गया.हालांकि, गनीमत रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर नहीं है. पोर्ट प्रबंधन ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए जहाज को फिर से नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए और हालात को काबू में कर लिया.

खराब मौसम के दौरान बंदरगाहों पर काम करना जोखिम भरा हो गया है. खासकर बड़े और भारी जहाजों को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह विशाल जहाज रस्सी टूटने के बाद लहरों के बीच डोलने लगता है. फिलहाल पोर्ट प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरतने की बात कही जा रही है.

NATIONAL : जिससे लव मैरिज की, वो शादीशुदा निकला… युवती ने दे दी जान….

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ग्वालियर में एक युवती ने पति की असलियत सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली. दरअसल, उसका पति पहले से शादीशुदा निकला, उसके बच्चे भी थे. युवती ने जान देने से पहले 11 सेकेंड का वीडियो बनाया, जिसमें अपनी मौत के लिए पति और उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराया है. फिलहाल, अब पुलिस मामले की जांच कर रही है.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में झूठ बोलकर शादी करने का मामला सामने आया है. यहां एक युवती ने पति की सच्चाई सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली. मौत से पहले उसने 11 सेकंड का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. इस वीडियो ने पूरे मामले की परतें खोल दी हैं, जो पुलिस जांच का अहम सबूत बन गया है.

मामला ग्वालियर के पुरानी छावनी इलाके का है. यहां ट्रांसपोर्ट नगर की रहने वाली 26 वर्षीय वैष्णवी की मुलाकात करीब एक साल पहले राजू भदौरिया उर्फ सत्यनारायण से हुई थी. आरोपी ने खुद को सेना में तैनात जवान बताया और अपनी असल पहचान छुपाकर युवती से नजदीकियां बढ़ाईं. दोनों के बीच दोस्ती हुई और जल्द ही यह रिश्ता प्यार में बदल गया.

करीब छह महीने पहले दोनों ने आर्य समाज मंदिर और नोटरी के माध्यम से शादी कर ली. लेकिन शादी के बाद आरोपी ने वैष्णवी को अपने घर ले जाने के बजाय सिरोल स्थित ईस्ट मैरेडियन टाउनशिप में किराए के फ्लैट में रखा. यहीं से शक की शुरुआत हुई.

कुछ समय बाद वैष्णवी को पता चला कि उसका पति सेना में नहीं है. यह सच सामने आने के बाद भी उसने रिश्ते को संभालने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही एक और बड़ा खुलासा हुआ. आरोपी पहले से शादीशुदा था. शुरुआत में उसने बच्चों की बात छुपाई, लेकिन बाद में यह भी सामने आ गया कि वह दो बच्चों का पिता है.

इस सच्चाई ने वैष्णवी को पूरी तरह तोड़ दिया. पति की धोखेबाजी से आहत होकर दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे. 11 फरवरी 2026 को जब वैष्णवी आरोपी के घर पहुंची, तो वहां आरोपी, उसकी पहली पत्नी और बहन ने उसके साथ मारपीट की. इस घटना ने उसे अंदर तक झकझोर दिया.इसके बाद वैष्णवी ने आरोपी को फोन कर साथ रहने की बात कही, लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया. इस इनकार ने वैष्णवी को गहरे सदमे में डाल दिया.

आहत होकर वैष्णवी ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और जान दे दी. लेकिन इससे पहले उसने एक 11 सेकंड का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. इस वीडियो में उसने मौत के लिए पति और पति के परिवार वालों को जिम्मेदार ठहराया.

यह वीडियो अब इस मामले का बड़ा सबूत बन गया है. पुलिस ने वीडियो के आधार पर आरोपी पति राजू भदौरिया, उसकी पहली पत्नी मधु और बहन प्रीति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है.ग्वालियर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विदिता डागर ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है. पुलिस वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है.

नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में आता है खुदकुशी का ख्याल तो ये बेहद गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)

NATIONAL : श्राद्ध कर चुके बेटों के सामने जिंदा लौटी मां… 11 साल बाद हुआ चमत्कार, DJ बजवाकर फैमिली ने किया डांस

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जिस मां को बेटों ने दुनिया से जा चुका मान लिया था… जिसके नाम का श्राद्ध तक कर दिया गया था… वही मां 11 साल बाद अचानक जिंदा लौट आई. ये कहानी बागपत के दोझा गांव की है, जिसने लोगों को चौंकाने के साथ भावुक कर दिया. 80 साल की लीलावती घर लौटीं तो परिवार वालों ने जश्न मनाया. बेटे -बहुएं सब DJ पर जमकर नाचे.

बागपत के दोझा गांव की एक शाम को लोग शायद कभी भूल नहीं पाएंगे. ढलती धूप, गांव की गलियों में हलचल, और एक घर के बाहर बजता तेज डीजे… इस जश्न में खुशी के आंसू थे, हैरानी थी, और एक ऐसा चमत्कार था, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया. क्योंकि जिस मां को 11 साल पहले इस दुनिया से जा चुका मान लिया गया था… जिसके नाम का श्राद्ध तक कर दिया गया था… वही मां अचानक जिंदा घर लौट आई थी.

यह कहानी है 80 साल की लीलावती की… एक ऐसी मां, जिसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह जाए. साल 2015… फरवरी का महीना. दोझा गांव में लीलावती के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. 9 फरवरी को उनके पति का निधन हो गया. घर में मातम पसरा था. परिवार इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि तीन महीने बाद एक और घटना हो गई. लीलावती अचानक लापता हो गईं.

पहले तो परिवार को लगा कि शायद वह कहीं आस-पास होंगी, लेकिन जैसे-जैसे घंटे दिनों में बदले और दिन हफ्तों में, चिंता बढ़ती गई. बेटे, बहुएं, रिश्तेदार- सब उन्हें ढूंढने निकल पड़े. गांव-गांव, शहर-शहर, रिश्तेदारी, अस्पताल, यहां तक कि आसपास के जिलों में भी तलाश की गई, लेकिन लीलावती का कहीं कोई सुराग नहीं मिला.

महीनों की तलाश के बाद भी जब कुछ हाथ नहीं लगा, तो परिवार की उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी. हर दरवाजा खटखटाने के बाद जब सन्नाटा ही मिला, तो आखिरकार उन्होंने मान लिया कि लीलावती अब इस दुनिया में नहीं रहीं.दिल भारी था, लेकिन परंपराएं निभानी थीं. परिवार ने भारी मन से उनका श्राद्ध कर दिया. उस दिन घर में एक अजीब सन्नाटा था- जैसे किसी ने उम्मीद की आखिरी किरण भी बुझा दी हो.

समय बीतता गया… दिन महीनों में बदले, महीने सालों में… और धीरे-धीरे जिंदगी अपनी रफ्तार पकड़ने लगी. लेकिन दिल के किसी कोने में मां की याद हमेशा जिंदा रही.

उधर, हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर के राजौरी में एक अलग कहानी चल रही थी. भारतीय सेना के जवानों को एक दिन एक लावारिस बुजुर्ग महिला मिली. वह कमजोर थीं, थकी हुई थीं और अपनी पहचान बताने में असमर्थ थीं. लेकिन सेना के जवानों ने उन्हें यूं ही नहीं छोड़ दिया. उन्होंने उनकी देखभाल की, खाना दिया, इलाज कराया और सबसे अहम- उनकी पहचान जानने की कोशिश शुरू की.

दिनों की मेहनत और लगातार प्रयासों के बाद धीरे-धीरे उनकी पहचान सामने आई- वह कोई और नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली लीलावती थीं.फिर वो पल आया, जिसने सब कुछ बदल दिया. सेना के जवानों ने लीलावती के परिवार से संपर्क किया. फोन की घंटी बजी, और जब दूसरी तरफ से मां की सलामती की खबर मिली.

परिवार को पहले तो यकीन ही नहीं हुआ. जिनकी मौत मानकर उन्होंने सारे संस्कार कर दिए थे, वो जिंदा हैं. जब सच्चाई सामने आई, तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

परिवार के लोग तुरंत राजौरी के लिए रवाना हुए. दिल में हजारों सवाल, आंखों में उम्मीद और डर- क्या वाकई मां मिलेंगी? और फिर वो पल आ गया. जैसे ही उन्होंने लीलावती को देखा, सबकी आंखों से आंसू बहने लगे. 11 साल बाद मां सामने थीं. वक्त जैसे थम गया था. लीलावती ने भी अपने बेटों को पहचाना- और बस, उस पल ने दर्द, हर इंतजार को खत्म कर दिया.

जब लीलावती अपने गांव दोझा लौटीं, तो वहां का नजारा बिल्कुल अलग था. खबर फैली- मां वापस आ गईं. गांव के लोग इकट्ठा हो गए. घर के बाहर डीजे बजने लगा. बेटे, बहुएं, पोते- सब खुशी से झूम उठे. आंसुओं के बीच हंसी थी, दर्द के बाद जश्न था. 80 साल की लीलावती खुद भी इस जश्न में शामिल हुईं. वो भी मुस्कुरा रही थीं, झूम रही थीं… जैसे जिंदगी ने उन्हें दूसरा मौका दिया हो.

लीलावती के पोते बिल्लू बताते हैं कि दादी 11 साल पहले लापता हो गई थीं. हमने उन्हें मृत मान लिया था, श्राद्ध भी कर दिया था. जब सेना के जवानों का फोन आया कि वो जिंदा हैं, तो यकीन ही नहीं हुआ. आज हम बहुत खुश हैं. वहीं उनके बेटे सतीश कहते हैं कि जब हमें पता चला कि मां जिंदा हैं, तो हम तुरंत राजौरी पहुंचे. मां ने हमें पहचान लिया… वो पल शब्दों में नहीं बता सकता. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है.

इस कहानी में सेना की भूमिका सबसे खास रही. जवानों ने बुजुर्ग महिला की देखभाल की, उन्हें उनके परिवार तक पहुंचाया. यह इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल थी.

कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ देती है, जहां सब खत्म लगता है… लेकिन कहीं न कहीं एक नई शुरुआत हमारा इंतजार कर रही होती है. लीलावती की वापसी ने यही साबित किया कि कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं… बस वक्त के साथ फिर से जी उठती हैं.

NATIONAL : ‘नजरदोष के नाम पर पिलाया नशीला पानी, फिर लाइट…’ ढोंगी अशोक खरात को लेकर छात्रा की आपबीती

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आस्था का फायदा उठाकर आरोपी अशोक खरात ने विश्वास जीतकर अपराध किया. धमकी और भय के कारण पीड़िता लंबे समय तक चुप रही. अब जांच एजेंसियां अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही हैं और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं.

आस्था के नाम पर महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ करने वाले पाखंडी अशोक खरात को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं. ढोंगी बाबा अशोक खरात ने कई महिलाओं को ठगकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं. 17 तारीख को उसकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण नासिक में दर्ज हुई एफआईआर है. 24 वर्षीय डी-फार्मेसी की पढ़ाई कर रही एक विवाहित महिला को भी उसने इसी तरह अपना शिकार बनाया.

यह महिला अपने पति के साथ बाबा का आशीर्वाद लेने उसके ऑफिस गई थी. वहां अशोक खरात ने दोनों के हाथ देखकर कहा कि उनके विवाह को ‘नजर’ लग गई है और उसे दूर करना जरूरी है, वरना महिला की जान को खतरा हो सकता है. इसके लिए उसने उन्हें एक प्लास्टिक की बोतल में भरा पानी दिया और तीन दिन तक बेडरूम में रखने को कहा. उसने कहा कि यदि पानी काला हो गया, तो नजरदोष दूर हो जाएगा.

लोगों से बाबा के बारे में अच्छी बातें सुनकर दंपति को उस पर विश्वास हो गया. इसके बाद बाबा ने महिला के पति को केबिन से बाहर भेज दिया और महिला से दरवाजा बंद करने को कहा. फिर उसने उसे तांबे के बर्तन में रखा पानी पिलाया, जिसका स्वाद खारा और कड़वा था. पानी पीने के बाद महिला को चक्कर और मितली होने लगी. इसी दौरान बाबा ने उसे कहा कि जितना ज्यादा पानी पिएगी, उतना अच्छा फल मिलेगा.

इसके बाद उसने महिला से एक गिलास सिर पर रखकर आंखें बंद कर गायत्री मंत्र जपने को कहा. महिला ने उसकी बात मानी, लेकिन तभी बाबा ने कमरे की लाइट बंद कर पीछे से उसे पकड़ लिया और उसके साथ जबरदस्ती की. उसने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार बताते हुए महिला को ‘राधा’ कहा और उसके साथ अनैसर्गिक संबंध बनाए.

घटना के बाद बाबा ने महिला को धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे और उसके पति को जान से मार देगा. बाबा का डर और लोगों का उस पर विश्वास होने के कारण महिला ने लंबे समय तक यह बात छिपाकर रखी. इसके बाद महिला का कॉलेज में दाखिला हुआ. बाबा ने उसे कहा कि हर परीक्षा से पहले आशीर्वाद लेने आना जरूरी है, वरना वह उसके पति को सब कुछ बताकर उसे मार देगा. इस डर से महिला हर बार उसके पास जाती रही. 2023 से दिसंबर 2025 के बीच बाबा ने उसे कई बार ऑफिस बुलाकर बार-बार दुष्कर्म किया.

मार्च 2026 में महिला के एक रिश्तेदार ने उसे बताया कि अशोक खरात एक ढोंगी बाबा है और वह इसी तरह महिलाओं का शोषण करता है. शुरुआत में महिला बहुत डर गई, लेकिन रिश्तेदार के समर्थन से उसने हिम्मत जुटाई और पूरा मामला सामने आया. इसके बाद 17 मार्च को महिला ने नासिक शहर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अशोक खरात को गिरफ्तार कर लिया.

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