Friday, June 19, 2026
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SPORTS : फीफा वर्ल्ड कप में 68 साल बाद दिखा दुर्लभ नजारा! पांचवें दिन के सभी मैच रहे बराबरी पर, टूटा पुराना रिकॉर्ड

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FIFA वर्ल्ड कप 2026 का पांचवां दिन पूरी तरह से ड्रॉ मैचों के नाम रहा। 15 जून का दिन कमजोर मानी जाने वाली टीमों (अंडरडॉग्स) के लिए शानदार रहा। सबसे पहले, केप वर्डे ने अपने मजबूत डिफेंस के दम पर यूरोपियन चैंपियन और 2010 वर्ल्ड कप विजेता स्पेन को 0-0 से ड्रॉ पर रोका।

इसके बाद, बेल्जियम और मिस्र का मैच 1-1 से ड्रॉ रहा, जबकि सऊदी अरब और उरुग्वे का मैच भी 1-1 से ड्रॉ हुआ।

आखिरी मैच सबसे रोमांचक रहा, जिसमें ईरान और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा। ईरान-न्यूजीलैंड मैच वर्ल्ड कप में एक ऐतिहासिक पल बन गया; टूर्नामेंट के एक ही दिन में चार मैच ड्रॉ होने की घटना 68 साल में पहली बार हुई। ऐसी अनोखी घटना इससे पहले 15 जून 1958 को स्वीडन में हुए वर्ल्ड कप के दौरान देखी गई थी। उस समय स्वीडन और वेल्स (0-0), वेस्ट जर्मनी और नॉर्दर्न आयरलैंड (2-2), पैराग्वे और यूगोस्लाविया (3-3) और इंग्लैंड और ऑस्ट्रिया (2-2) के बीच मैच ड्रॉ रहे थे।

ग्रुप G: न्यूजीलैंड ने मजबूत ईरान को ड्रॉ पर रोका; चार शानदार टीम गोल

लॉस एंजिल्स में खेले गए ग्रुप G के मैच में, न्यूजीलैंड ने मजबूत ईरान को 2-2 से ड्रॉ पर रोका। मैच में चार शानदार टीम गोल हुए। एलिजा जस्ट ने 7वें मिनट में न्यूजीलैंड को शुरुआती बढ़त दिलाई। रामिन रेजियन ने 33वें मिनट में स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद एलिजा जस्ट ने 54वें मिनट में अपना दूसरा गोल करके न्यूजीलैंड को फिर से आगे कर दिया। हालांकि, ठीक दस मिनट बाद, 64वें मिनट में मोहम्मद मोहेब्बी ने नेट में जोरदार शॉट मारा और रोमांचक मैच को 2-2 से बराबर कर दिया।

ग्रुप H: उरुग्वे का मैच ड्रॉ; कोई भी दक्षिण अमेरिकी देश नहीं जीता

मियामी में ग्रुप H के एक मैच में, सऊदी अरब ने उरुग्वे को 1-1 से ड्रॉ पर रोका और उरुग्वे के दूसरे हाफ में किए गए जोरदार हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। इस नतीजे के साथ, ग्रुप की सभी टीमें अब एक-एक पॉइंट पर बराबरी पर हैं। इस ड्रॉ के साथ, मौजूदा वर्ल्ड कप में अब तक मैदान पर उतरीं सभी चार दक्षिण अमेरिकी टीमें अपना पहला मैच जीतने में नाकाम रही हैं।

ग्रुप G: मिस्र की पहली जीत की तलाश जारी; बेल्जियम का मैच 1-1 से ड्रॉ रहा

सिएटल में बेल्जियम और मिस्र के बीच ग्रुप G का पहला मैच 1-1 से ड्रॉ पर खत्म हुआ। मिस्र के इमाम अशूर ने 20वें मिनट में अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। 66वें मिनट में, मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी ने गलती से गेंद को अपने ही नेट में डाल दिया। बेल्जियम ने आखिरी समय में जीत के लिए ज़ोरदार कोशिश की, लेकिन गोल नहीं कर पाए। मिस्र अभी भी वर्ल्ड कप के इतिहास में अपनी पहली जीत का इंतज़ार कर रहा है।

अब तक, एशियाई परिसंघ की नौ में से छह टीमें खेल चुकी हैं और कोई भी नहीं हारी है। इन छह मैचों में, एशियाई टीमों ने दो जीत और चार ड्रॉ हासिल किए हैं।

SPORTS : गिल-ईशान के शतकीय तूफान में उड़ा अफगानिस्तान, भारत ने 170 रन से जीता दूसरा वनडे, सीरीज पर भी कब्जा

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भारत ने अफगानिस्तान को दूसरे वनडे में 170 रन से हराकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है. शुभमन गिल और ईशान किशन के तूफानी शतकों के बाद अर्शदीप सिंह और गुरनूर बरार ने कमाल की गेंदबाजी से मेहमान टीम को 44.3 ओवर में ही 232 रन पर ढेर कर दिया. भारत ने 403 रन का विशाल लक्ष्य दिया था.

नई दिल्ली. अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में भारत ने 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है. लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे मैच को भारत ने 170 रन से जीतकर सीरीज पर कब्जा जमा लिया. पहले बैटिंग करते हुए शुभमन गिल और ईशान किशन ने गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए शतक ठोके और टीम को 402 रन के पहाड़नुमा स्कोर तक पहुंचाया. जवाब में अफगानिस्तान के बल्लेबाज बोझ तले दब गए. गुरनूर बरार, अर्शदीप सिंह और डेब्यूटेंट प्रिंस यादव की तेज रफ्तार गेंदबाजी के आगे अफगानिस्तानी पारी सिर्फ 232 रन पर ही सिमट गई. अफगानिस्तान की यह रनों के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी हार है. सीरीज का तीसरा मुकाबला 20 जून को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा.

गुरनूर, अर्शदीप और प्रिंस की तिकड़ी ने बरपाया कहर
403 रन के बड़े लक्ष्य को हासिल करने उतरी अफगानिस्तान की तरफ से किसी भी टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज द्वारा बड़ी पारी की जरूरत थी, लेकिन शीर्ष क्रम के 4 बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पाए और इस वजह से टीम को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा. अफगानिस्तान की तरफ से सबसे ज्यादा 79 रन रहमत शाह ने बनाए. इसके अलावा, सेदिकुल्लाह अटल ने 42, रहमानुल्लाह गुरबाज ने 41, और इब्राहिम जादरान ने 21 रन की पारी खेली. इसके अलावा कोई भी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों का सामना नहीं कर सका. भारत की तरफ से अर्शदीप सिंह ने 9 ओवर में 45 रन देकर 3 और गुरनुर बरार ने 10 ओवर में 60 रन देकर 3 विकेट लिए. अपना पहला मैच खेल रहे प्रिंस यादव को 2, जबकि वाशिंगटन सुंदर को 1 विकेट मिला.

NATIONAL : बंगाल नतीजों के बाद UP 2027 की राह अब आसान नहीं? अखिलेश यादव की सपा को इन 8 मोर्चों पर करना होगा काम?

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी और ममता बनर्जी की जीत को लेकर आश्वस्त थे. अब बंगाल के रुझानों के बाद चर्चा है कि अखिलेश यादव इससे क्या सीख लेते हैं?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. जहां भारतीय जनता पार्टी बहुमत के आंकड़े से आगे निकलती दिख रही है. समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीजेपी 190 सीटों पर आगे थी. वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 94 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है. इस पूरे चुनाव में अखिलेश यादव की सक्रियता और ममता बनर्जी के पक्ष में उनके दावे अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं.

ममता बनर्जी की संभावित हार के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम से अखिलेश यादव को क्या सीख लेनी चाहिए, खासकर तब जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है.

अति आत्मविश्वास से बचना होगा
राजनीति में आत्मविश्वास जरूरी है, लेकिन अति आत्मविश्वास अक्सर नुकसानदायक साबित होता है. ममता बनर्जी की जीत को लेकर लगातार दावे करना और ग्राउंड रियलिटी को नजरअंदाज करना एक बड़ी रणनीतिक भूल मानी जा रही है. अखिलेश यादव के लिए यह संकेत है कि उन्हें चुनावी आकलन में अधिक संतुलन और सतर्कता बरतनी होगी. साल 2024 में 37 लोकसभा सीटें जीतने के बाद अखिलेश यादव, उत्साह और आत्मविश्वास से लबरेज हैं लेकिन कई बार उनका आत्मविश्वास, अतिआत्मविश्वास में बदलता दिखता है.

कम अंतर वाली सीटों पर फोकस
चुनाव जीतने का गणित सिर्फ बड़ी लहर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि करीबी मुकाबले वाली सीटें ही सत्ता का रास्ता तय करती हैं. यूपी जैसे बड़े राज्य में अखिलेश यादव को माइक्रो-मैनेजमेंट और बूथ स्तर की रणनीति मजबूत करनी होगी. साल 2022 के चुनाव परिणामों में करीब 49 सीटें ऐसी थीं जिन पर हार जीत का फैसला 5000 से भी कम मतों पर हुआ था. उदाहरण के लिए बहराइच सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा, जहां अनुपमा जायसवाल ने सिर्फ 407 वोट से जीत हासिल की. छिबरामऊ में सपा के अरविंद सिंह यादव ने बीजेपी की अर्चना पांडेय को 1118 वोट से हराया, जबकि इटावा में बीजेपी की सरिता भदौरिया 3981 वोट से जीतीं.

विवादित चेहरों से दूरी
राजनीति में चेहरे बहुत मायने रखते हैं. विवादित नेताओं या बयानों से जुड़ाव पूरे नैरेटिव को प्रभावित कर सकता है. यह सीख साफ है कि पार्टी की छवि को लेकर सजग रहना जरूरी है, खासकर तब जब विपक्ष लगातार मुद्दा बनाने की कोशिश में हो. भारतीय जनता पार्टी, सपा पर यह आरोप लगातार लगाती रही है कि पार्टी के रिश्ते माफियाओं से रहे हैं. अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं से सपा का रिश्ता रह भी चुका है. बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि साल 2017 तक सपा के सरकार में कानून और व्यवस्था नाम की चीज नहीं थी. हालांकि सपा इन दावों को खारिज करती रही है.

कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण और ऊर्जा
किसी भी चुनाव की रीढ़ कार्यकर्ता होते हैं. यदि संगठन में अनुशासन की कमी हो या जमीनी कार्यकर्ता असंतुष्ट हों, तो उसका असर सीधे वोटिंग पर पड़ता है. अखिलेश यादव के लिए यह जरूरी है कि वे संगठन को मजबूत करें और कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट संदेश और दिशा बनाए रखें. इसके लिए भी साल 2022 का उदाहरण ज्यादा सटीक है जब मतदान के बाद कई विधानसभा सीटों और जिलों से यह खबरें आईं कि सपा के कार्यकर्ताओं ने डीएम, एसडीएम और चुनाव अधिकारियों की गाड़ियां चेक की. यह सब तब हो रहा था जब राज्य में 1-2 चरण के मतदान बचे थे. कौशांबी, आजमगढ़, वाराणसी तक में ऐसे मामले सामने आए थे.

अयोध्या और धार्मिक भावनाएं
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या का सेंटिमेंट बेहद संवेदनशील और प्रभावी है. इस मुद्दे पर किसी भी तरह की चूक राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती है. इसलिए धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संतुलित राजनीति करना एक महत्वपूर्ण सीख है. साल 2024 में सपा अयोध्या में फैजाबाद लोकसभा निर्वाचन लोकसभा क्षेत्र में जीत गई. पार्टी के प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने बड़ी जीत हासिल की. 2024 के बाद 18वीं लोकसभा के पहले दिन से लेकर बीते विशेष सत्र तक, कई मौकों पर अखिलेश ने बीजेपी को अयोध्या की हार का जिक्र करना नहीं भूले. जून 2024 में ही उस वक्त बड़ा विवाद हुआ जब अखिलेश ने अवधेश प्रसाद को ‘अयोध्या का राजा’ तक कह दिया था.

विकास मॉडल को अपडेट करना होगा
मौके बे मौके, अखिलेश यादव अपनी सरकार के काम को गिनाते रहे हैं. यह जरूरी भी है ताकि सपा को लेकर विपक्ष के नैरेटिव को ध्वस्त किया जा सके. हालांकि एक समय के बाद एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर का बार-बार जिक्र करना मतदाताओं को अखिलेश के आत्ममुग्ध होने का एहसास करा सकते हैं. अब वोटर्स इससे आगे की अपेक्षा रखते हैं. सिर्फ ‘एक्सप्रेसवे’ की राजनीति अब पर्याप्त नहीं है. हालांकि अखिलेश इस दिशा में कदम भी आगे बढ़ा रहे हैं. हाल के दिनों में उन्होंने यूपी बोर्ड के टॉपर्स को लैपटॉप दिया. वहीं महिलाओं के लिए भी सरकार आने पर एक निश्चित धनराशि देने का ऐलान भी किया है.

सामाजिक समीकरणों का विस्तार
यूपी की राजनीति जातीय समीकरणों पर टिकी रही है, लेकिन बदलते दौर में व्यापक सामाजिक गठजोड़ बनाना जरूरी है. केवल पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. अन्य जातियों और वर्गों को जोड़ने की रणनीति पर गंभीरता से काम करना होगा. सपा चीफ भले ही पीडीए की बात कर रहे हैं और दावा करते रहे हैं कि साल 2024 में यह फॉर्मूला चला लेकिन स्पष्ट तौर पर यह कहीं दिखता नजर नहीं आता कि मुस्लिम और यादव वोट के अलावा अखिलेश और किसी वर्ग को अपने साथ जोड़ पाए हों.

ब्राह्मणों को साधने के लिए अखिलेश ‘हाता नहीं भाता’ जैसे जुमलों का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन उनकी पार्टी के मंच पर इस वर्ग की कमी कहीं न कहीं महसूस की जाती है. उधर, सपा चीफ दलितों की बात भले कर रहे हों लेकिन दलितों के बीच सपा के प्रति विश्वास जगाना अभी भी बाकी है. सपा, कांशीराम, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंतियां मनाती है लेकिन सिर्फ इतने से दलितों का भरोसा जीतना आसान नहीं है.

NATIONAL : संजय राउत की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 3 सांसद, 6 बागियों को कारण बताओ नोटिस

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उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) आज अपने सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई है. पार्टी में एक और फूट की अटकलें तेज हो गई हैं; ऐसी खबरें हैं कि बागी सांसदों का एक गुट महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहा है.

यह इमरजेंसी मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है, जब एक दिन पहले ही खबर आई थी कि बागी गुट ने पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह का समर्थन होने का दावा किया है और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से संपर्क किया है, जिससे महाराष्ट्र में नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है.

2022 में शिंदे की बगावत जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए उद्धव गुट ने अपने सभी नौ सांसदों को दिल्ली में बैठक बुलाई गई और व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का निर्देश देते हुए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है.

  • सूत्रों के मुताबिक, आज विधान परिषद के लिए वोटिंग खत्म होने के बाद, शिवसेना (UBT) से अलग हुए 6 सांसद औपचारिक रूप से एक नया गुट बना सकते हैं. परभणी के सांसद संजय बंडू जाधव को इस नए बने संसदीय समूह का नेता घोषित किए जाने की संभावना है.
  • संजय राउत की मीटिंग में शामिल होने के लिए न आने वाले 6 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
  • एकनाथ शिंदे के गुट ने उद्धव सेना के 6 सांसदों के टूटने का दावा किया था. शिवसेना MLC चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा था कि महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ शुरू हो गया है, जिसके तहत छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे पर भरोसा जताते हुए शिवसेना का दामन थामा है.
  • संजय राउत ने संसद पहुंचने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि जो आएंगे वो हमारे और जो नहीं आएंगे, वो बेईमान और गद्दार हैं.
  • संजय राउत ने 17 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा था कि कल यानी 18 जून को हम मेज सजाएंगे, थाली लगाएंगे, जिसको भी नमक चखने आना हो, आ जाए. अगर आज की स्थिति देखी जाए, तो अभी तक सिर्फ तीन सांसद मीटिंग में शामिल होने पहुंचे हैं.
  • संसदीय दल की मीटिंग के लिए सिर्फ तीन सांसद पहुंचे हैं. इनमें अनिल देसाई, अरविंद सावंत, राजा भाऊ वाजे और संजय राउत शिवसेना (यूबीटी) का नाम शामिल है. सांसदों की उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए कॉपी तैयार की गई है.
  • संजय राउत और अरविंद सावंत संसदीय दल की बैठक के लिए संसद भवन रवाना हुए. यह मीटिंग पुरानी संसद भवन में होगी.
  • शिवसेना (UBT) के विधायकों को तोड़ने की कोशिशों के बारे में लगाई जा रही अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विरोधियों को चुनौती दी है कि अगर वे ऐसा कर सकते हैं, तो करके दिखाएं. बालासाहेब ठाकरे की विरासत का जिक्र करते हुए, उन्होंने विरोधियों पर लोकतंत्र को कमजोर करने और दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उनकी पार्टी राजनीतिक दबाव का विरोध करती रहेगी.

‘जहां ठाकरे, वहां शिवसेना…’
सांसद अरविंद सावंत के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, “शिंदे की शिवसेना कब से असली शिवसेना बन गई? असली शिवसेना तो यहां है. जहां ठाकरे, वहां शिवसेना.”

सांसदों को कार्रवाई की चेतावनी!

पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं होंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इस अहम बैठक से यह तय होने की उम्मीद है कि क्या उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय पार्टी पर कंट्रोल बनाए रखेंगे या उन्हें एक और नुकसानदेह विभाजन का सामना करना पड़ेगा. यह स्थिति 2022 में शिंदे के विद्रोह की वजह से महा विकास अघाड़ी सरकार के गिरने के चार साल बाद बनी है.

इन अटकलों के बीच, सूत्रों का दावा है कि बागी सेना (UBT) सांसदों के एक समूह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनौपचारिक रूप से मुलाकात की. उन्होंने दावा किया कि उन्हें पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन हासिल है, जो दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा है.

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब शिवसेना के सूत्रों ने इसे बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया ‘ऑपरेशन टाइगर’ बताया है, जिसकी निगरानी कथित तौर पर दिल्ली में रहने के दौरान एकनाथ शिंदे ने की थी.

NATIONAL : राष्ट्रपति मुर्मू दो दिन के ओंकारेश्वर दौरे पर, पीएम मोदी के फ्रांस दौरे का आखिरी दिन

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आज 18 जून 2026 को जेष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है। आज से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ओंकारेश्वर दौरे पर रहेंगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस में कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे।

शुरुआत राष्ट्रपति से। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को इंदौर होते हुए ओंकारेश्वर जाएंगी। उनका यह दौरा दो दिन का है। उनकी सुरक्षा के लिए करीब 1500 जवान और अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। राष्ट्रपति ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के साथ सिकल सेल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। राष्ट्रपति मुर्मू ओंकारेश्वर से करीब चार किलोमीटर पहले स्थित शिवकोठी हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगी। उनकी अगवानी के लिए प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति दो दिन ओंकारेश्वर में प्रवास करेंगी। पहले दिन वे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगी और यहीं रात्रि विश्राम करेंगी। दूसरे दिन वे सिकल सेल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम में शामिल होंगी।

पीएम मोदी का फ्रांस दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे पर हैं। इस दौरे में वह गुरुवार को अपनी यात्रा के अंतिम चरण के लिए पेरिस जाएंगे, जहां वह कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम विवाटेक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

कोयला मंत्रालय का कार्यक्रम

कोयला मंत्रालय गुरुवार को मुंबई में सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर तीसरे रोड शो का आयोजन करने जा रहा है। इससे पहले नई दिल्ली और हैदराबाद में इसका आयोजन हो चुका है।

सीएम योगी का कानपुर दौरा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को उन्नाव और कानपुर के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री पहले उन्नाव में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद कानपुर पहुंचकर कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

NATIONAL : झारखंड की दो और मिजोरम की एक राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान, जानें कहां-कौन मार सकता है बाजी

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40 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जबकि भाजपा नीत एनडीए के पास 24 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। असली मुकाबला दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी के बीच माना जा रहा है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए दोनों खेमे सक्रिय हैं। एनडीए ने अपने विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराया है, जबकि इंडिया गठबंधन लगातार बैठकें कर रहा है।

उधर, मिजोरम की एकमात्र सीट के लिए सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) और मुख्य विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जबकि भाजपा और कांग्रेस ने मतदान से दूर रहने का फैसला किया है।

विधानसभा सचिवालय के अतिरिक्त सचिव लालथंगमाविया ने बताया कि मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। मतदान और मतगणना के लिए सभी सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जेडपीएम ने अपने प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एमएनएफ ने अधिवक्ता और लेखिका जोथानसांगी हमार को मैदान में उतारा है। 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में जेडपीएम के 27 विधायक हैं, जबकि एमएनएफ के 10 विधायक हैं। भाजपा के दो और कांग्रेस का एक विधायक है। कांग्रेस विधायक सी. न्गुनलियनचुंगा ने कहा कि पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वह मतदान नहीं करेंगे। वहीं भाजपा ने भी अपने दोनों विधायकों के मतदान से दूर रहने की घोषणा की है।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में SIT के हाथ लगे अहम सुराग, कई पेनड्राइव में लिया CCTV डाटा

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने तीसरे दिन भी जांच जारी रखी. टीम ने सीसीटीवी फुटेज का डाटा करीब दर्जनभर पेनड्राइव में लिया है और एसबीआई कर्मचारियों से भी पूछताछ की. आरोपी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने आरोपों को निराधार बताया, जबकि परिवार ने उन्हें साजिश का शिकार बताया है.

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज हो गई है. तीसरे दिन भी जांच के लिए एसआईटी टीम पहुंची और कई लोगों से पूछताछ की. इसी बीच खबर आई है कि एसआईटी के हाथ अहम सुराग लगे हैं. एसआईटी ने करीब दर्जनभर पेनड्राइव में CCTV के डाटा को लिया है, जिसकी जांच होगी.

जानकारी के मुताबिक मंगलवार को एसआईटी ने एसबीआई के बैंक कर्मियों से भी उनके कामकाज पर डिटेल्स में पूछताछ की है. हालांकि इस मामले के एक आरोपी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है. वहीं टिल्लू यादव के घरवालों ने भी उन्हें बेगुनाह बताया.

परिजनों का कहना है कि टिल्लू यादव को साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. परिवार ने दावा किया कि उनका रहन-सहन सामान्य है और उनके पास वैसी संपत्ति नहीं है, जैसी चर्चा की जा रही है. टिल्लू यादव का घर अयोध्या की एक छोटी और संकरी गली में स्थित है, जो राम की पैड़ी से करीब 50 मीटर और राम मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है.

परिवार का कहना है कि जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आएगी और टिल्लू यादव निर्दोष साबित होंगे. इधर, राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद और एसआईटी जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या दौरे पर रहेंगे. मुख्यमंत्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट और राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मदिन के अवसर पर अयोध्या पहुंचेंगे.

इस दौरान वह महंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देंगे. मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं. सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा रहा है और कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों की एसआईटी जांच जारी है.

NATIONAL : मानसून सत्र में फिर संविधान संशोधन बिल लाएगी सरकार, परिसीमन हर हाल में लागू करने की रणनीति

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सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें जरूरी दो-तिहाई समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी और गैर-एनडीए दलों से बातचीत तेज की गई है। द्रमुक को साधने के लिए हर राज्य में सीटें बढ़ाने और त्रिभाषा फॉर्मूले पर सहमति बनाने की कोशिश चल रही है। पढ़िए रिपोर्ट-

तृणमूल कांग्रेस के बाद शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट से उत्साहित मोदी सरकार ने महिला आरक्षण एवं परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए सरकार की ओर से जहां गैरकांग्रेसी दलों से नए सिरे से संपर्क साधा जा रहा है, खासतौर पर द्रमुक को विधेयक में हर राज्य में आनुपातिक आधार पर 50 फीसदी सीटें बढ़ाने संबंधी प्रावधान जोड़ने का आश्वासन दिया गया है। द्रमुक के साथ त्रिभाषा फाॅर्मूले पर भी बीच का रास्ता निकालने पर बातचीत हो रही है।

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत की बाधा पार कर चुकी सरकार के सामने असली चुनौती लोकसभा की है। वहां द्रमुक के बिना सरकार की बात नहीं बनने वाली। यही कारण है कि उसे मनाने के मोर्चे पर खुद गृह मंत्री अमित शाह जुटे हैं। चूंकि तमिलनाडु चुनाव के नतीजों के बाद द्रमुक ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक से दूरी बना ली है। सरकार को उम्मीद है कि संबंधित बिल सहित कुछ अन्य सियासी मुद्दाें पर द्रमुक के साथ बीच की राह निकाली जा सकती है।
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद केंद्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। अगर शिवसेना यूबीटी में टूट से सरकार के पास सांसदों के समर्थन का आंकड़ा 324 हो जाएगा, जो दो-तिहाई बहुमत (360) से 36 कम है। ऐसे में 22 सांसदों वाली द्रमुक की भूमिका अहम है।

गर सरकार को द्रमुक का साथ मिला तो समर्थन का आंकड़ा 346 तक पहुंच जाएगा। ऐसे में 14 अतिरिक्त सांसदों का आंकड़ा जुटाने के लिए पार्टी एनसीपी पवार (7), वाईएसआर (4), जेएमएम (3) जैसे कुछ गैरकांग्रेसी दलों से समर्थन जुटाने की मुहिम शुरू करेगी।

सपा से भी संपर्क साधेंगे : सरकार की रणनीति प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के लिए सपा (37) से भी संपर्क साधने की है। एक मंत्री के मुताबिक, अगर द्रमुक का साथ मिला, तो संविधान संशोधन बिल की राह आसान हो जाएगी। तब कई दल या उसके सांसद समर्थन के लिए राजी हो जाएंगे।
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NATIONAL : राहुल गांधी के भाषण पर लोकसभा में दूसरे दिन भी हंगामा, सदन में किताब-पत्रिका के आधार पर बोलने को लेकर क्या हैं नियम

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लोकसभा के बजट सत्र में लगातार दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर हंगामा हुआ है. कांग्रेस नेता ने मंगलवार को भी कारवां पत्रिका में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब पर आधारित लेख का हवाला देने की कोशिश की.

उन्होंने जब ऐसा करना शुरू किया तो इस पर सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई. उस समय सदन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे.

वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि “सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए. हम शांतिपूर्ण तरीक़े से नेता प्रतिपक्ष को सुनना चाहते हैं. इस मुद्दे पर कल चेयर ने फ़ैसला दिया था. जब फ़ैसला दिया जा चुका है तो ये बार-बार उसी मुद्दे का हवाला नहीं दे सकते हैं.”

संसद परिसर के बाहर रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी की वजह से बाक़ी सांसदों को बोलने का मौक़ा नहीं मिल पा रहा है और वो (राहुल गांधी) जिस मुद्दे पर बोलना चाह रहे हैं उस पर स्पीकर का फ़ैसला आ चुका है.

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विषय पर नहीं आते हैं और अप्रकाशित किताब का हवाला देने पर तुले हुए हैं.

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राहुल गांधी ने दूसरे दिन क्या कहा?
मंगलवार को दोपहर दो बजे राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए. उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति के भाषण में एक बहुत ही ज़रूरी बात राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है- पाकिस्तानियों, चीनियों और हमारे बीच संबंध के बारे में है. इस लेख में एक बहुत ही ज़रूरी बात है जिसे मैंने प्रमाणित किया है. इसमें पीएम के रिएक्शन के बारे में बताया गया है. हमारे राष्ट्रपति का भाषण उस रास्ते के बारे में था जो भारत को अपनाना है.”

“इंटरनेशनल मामलों में मुख्य मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच टकराव है. यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का मुख्य हिस्सा है. मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन और भारत के बीच जो हुआ और हमारे पीएम ने उस पर कैसे रिएक्ट किया, उसके बारे में एक बयान देने दीजिए. मुझे क्यों रोका जा रहा है?”

NATIONAL : कोटा से छात्रों की आवाज बुलंद करेंगे राहुल गांधी, पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर शुरू होगा ‘छात्रों की गूंज’ अभियान

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छात्रों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने की कोशिश में राहुल गांधी एक नए अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस पहल के तहत वे देशभर के विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे। अभियान की पहली कड़ी राजस्थान के कोटा से शुरू होगी, जहां हजारों प्रतियोगी छात्र पढ़ाई और करियर की तैयारी में जुटे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे के बाद छात्रों से जुड़े सवालों को लेकर देशव्यापी अभियान की तैयारी में हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में छात्रों के बीच जाकर पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी, एडमिशन में आने वाली दिक्कतों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य मुद्दों पर संवाद करेंगे।

देश के कोचिंग हब में होगी अभियान की शुरुआत
इस अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से होगी, जिसे देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब माना जाता है। राहुल गांधी आम यात्रियों की तरह दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से जन शताब्दी एक्सप्रेस के जरिए कोटा के लिए रवाना होंगे। वहां पहुंचकर वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं तथा सुझावों को सुनेंगे।

‘छात्रों की गूंज’
कांग्रेस ने अपने इस नए छात्र संपर्क कार्यक्रम को ‘छात्रों की गूंज’ नाम दिया है। इस पहल की सबसे अलग बात यह होगी कि कार्यक्रम के दौरान नेताओं के भाषण नहीं होंगे। राहुल गांधी खुद शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक लगभग साढ़े चार घंटे छात्रों के बीच रहकर उनसे सीधे संवाद करेंगे।

इस दौरान राहुल नीट समेत समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को समझना, उनके अनुभवों को जानना और शिक्षा, रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनके सुझाव प्राप्त करना है।

“जिम्मेदारी और ईमानदारी- दोनों मोदी सरकार की सोच से परे हैं”
राहुल गांधी ने अपने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि “मेरे युवा और Gen Z साथियों, एक बात मेरे मन में साफ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए: भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पर जिम्मेदारी और ईमानदारी- दोनों मोदी सरकार की सोच से परे हैं। पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियां, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले – इन्हीं औजारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है। याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूं- देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती ‘छात्रों की गूंज’ को, आइए कोटा में हुंकार बनाएं।

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