Friday, October 9, 2026
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NATIONAL : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज फिर विपक्ष का हल्ला बोल, कांग्रेस-AAP-वामपंथी दल करेंगे चुनाव आयोग का घेराव

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विपक्ष आज फिर दिल्ली में मार्च करेगा। कांग्रेस, AAP और वामपंथी दल 1 बजे CEO कार्यालय पहुंचकर SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन आज भी जारी रहेगा। 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों के मार्च और हिरासत के एक दिन बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और वामपंथी दल आज दोपहर 1 बजे दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक संयुक्त विरोध मार्च निकालेंगे। विपक्ष SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

AAP और वामपंथी दल आज कांग्रेस के साथ इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। संयुक्त मार्च कश्मीरी गेट स्थित CEO कार्यालय की ओर बढ़ेगा। AAP और वामपंथी दलों की भागीदारी से आज का प्रदर्शन विपक्ष के संयुक्त विरोध के तौर पर होगा।

कल चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़े थे सांसद
इससे पहले मंगलवार, 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला था। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया था।

प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ गए और तिरंगा लहराया। इसके बाद राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत अन्य कांग्रेस सांसद आकाशवाणी भवन के अंदर घुसकर ईसी दफ्तर जाने की कोशिश की जहां, उन्हें वहीं रोक दिया गया। बाद में वहीं पर राहुल गांधी समेत अन्य नेता धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि संसद के दोनों सदनों के करीब 300 सांसदों को चुनाव आयोग से मिलने से रोका गया।

आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हटाए गए नेता
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दो सहयोगियों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ने नहीं दिया गया। देर रात आकाशवाणी भवन परिसर में धरना दे रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, हालांकि बाद उन्हें किंग्सवे कैंप लेजकर छोड़ दिया गया।

पहले भी जंतर-मंतर पर हो चुका है प्रदर्शन
SIR को लेकर विरोध का यह सिलसिला पहले भी दिल्ली में दिखाई दे चुका है। पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी और SFI तथा AISA समेत कई वामपंथी छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।

अब 6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद आज विपक्ष एक बार फिर सड़क पर उतरने जा रहा है। कांग्रेस, AAP और वामपंथी दलों का संयुक्त मार्च दोपहर 1 बजे दिल्ली CEO कार्यालय की ओर होगा और प्रदर्शन के केंद्र में SIR में कथित अनियमितताओं के साथ CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहेगी।

NATIONAL : सदनों के स्थगित होने के 40 दिन बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक समापन नहीं

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संसद के दोनों सदनों को स्थगित किए जाने के 40 दिन बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक रूप से समापन नहीं हुआ है और इसने इन अटकलों को हवा दी है कि सरकार नया सत्र बुलाए बिना कोई महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है।

लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचारी ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा कि दोनों सदनों का 40 दिन तक सत्रावसान नहीं होना एक नया रिकॉर्ड है।

उन्होंने कहा कि 2015 में संसद के दोनों सदनों का 28 दिन बाद सत्रावसान किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही थी।ऐसी अटकलें हैं कि सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन का प्रस्ताव फिर से लाने की योजना बना रही है ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सके।

बजट सत्र के दौरान इस संबंध में पिछला प्रयास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के कारण सफल नहीं हो पाया था।

जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने की स्थिति में लोकसभा में प्रतिनिधित्व घटने को लेकर खासकर दक्षिणी राज्यों के विपक्षी दलों की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीट की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव कर रही है।

लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की बैठक 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी थी। आमतौर पर इसके अगले तीन से चार दिन के भीतर सत्रावसान की अधिसूचना जारी कर दी जाती है जिससे सत्र का औपचारिक समापन हो जाता है। हालांकि, इस बार मंगलवार सुबह तक सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं की गई।

बजट सत्र 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था और 20 अप्रैल को उसका सत्रावसान किया गया था।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति संसद का सत्र बुलाते हैं और उसका सत्रावसान करते हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है।

BUSINESS : द बोनस मार्केट अपडेट: रेपो रेट बढ़ने के बाद लाल निशान पर बंद हुआ बाजार; सेंसेक्स 429 अंक टूटा, निफ्टी भी पस्त

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में वृद्धि की घोषणा के बाद बाजार कमजोर रहा। सेंसेक्स 429.11 अंक गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 173.05 अंक की गिरावट के साथ 22,603.05 के स्तर पर आ गया।

बाजार में यह कमजोरी संक्षिप्त सुधार के बाद आई। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। यह केंद्रीय बैंक की लगभग चार साल में पहली दर वृद्धि है। इस नीतिगत निर्णय के बावजूद बाजार में सतर्क प्रतिक्रिया देखने को मिली। हिन्दalco के शेयर में 3 फीसदी की गिरावट आई। Infy के शेयर भी 2 फीसदी नीचे गिरे। निफ्टी मेटल सूचकांक में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो सूचकांक भी 1.5 फीसदी से अधिक गिरा।

आरबीआई का क्या रहा फैसला?
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। समिति ने रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ा दिया है। अब यह दर 5.50 फीसदी हो गई है। यह केंद्रीय बैंक की लगभग चार साल में पहली दर वृद्धि है। इस दर वृद्धि से बाजार में कमजोरी देखी गई। नीतिगत निर्णय के बावजूद बाजार में सतर्क प्रतिक्रिया रही।

किन क्षेत्रों पर पड़ा असर?
आरबीआई की रेपो रेट वृद्धि के बाद विभिन्न क्षेत्रों में रुझान मिश्रित रहे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, मीडिया, निजी बैंक और वित्तीय शेयरों ने कुछ मजबूती दिखाई। हालांकि, ऑटो और धातु शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, एफएमसीजी और रियल एस्टेट क्षेत्र भी गिरावट के साथ बंद हुए। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), फार्मा, तेल और गैस, सीमेंट और स्वास्थ्य सेवा के शेयर भी दबाव में रहे।

वैश्विक बाजारों का क्या रहा हाल?
भारतीय बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा। लंदन समय के अनुसार सुबह 8:35 बजे स्टॉक्स यूरोप 600 सूचकांक 0.6 फीसदी गिर गया। एसएंडपी 500 वायदा में मामूली बदलाव देखा गया। नैस्डेक 100 वायदा 0.2 फीसदी नीचे आया। डाव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज औसत वायदा भी 0.2 फीसदी गिरा। एमएससीआई एशिया पैशिफिक सूचकांक 0.9 फीसदी और एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स सूचकांक 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।

NATIONAL : चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून पर नई याचिका, जज के बेटे का ईसी से क्या कनेक्शन? जानें मामला

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मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर के बंटे फैसले को जया ठाकुर ने क्यूरेटिव याचिका के जरिए चुनौती दी है। याचिका में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा के बेटे के चुनाव आयोग से जुड़े होने का हवाला दिया गया है। क्या इससे फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठता है? क्यूरेटिव याचिका में क्या मांग की गई है और 2023 का कानून विवाद में क्यों है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर के बंटे हुए फैसले को अब दोबारा चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल कर इस फैसले को वापस लेने और मामले की नए सिरे से सुनवाई की मांग की है। याचिका में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि फैसले के बाद उन्हें जानकारी मिली कि न्यायमूर्ति शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से स्थायी वकील के रूप में पेश होते हैं। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने मामले में पक्षपात की आशंका और न्यायिक औचित्य का मुद्दा उठाया है।

मामला मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। 23 सितंबर को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस सवाल पर अलग-अलग राय दी थी कि इस मामले को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। बाद में दोनों न्यायाधीश इस बात पर सहमत हुए कि मामले को प्रधान न्यायाधीश के पास भेजा जाए, ताकि उचित संख्या वाली पीठ का गठन किया जा सके। अब क्यूरेटिव याचिका में 23 सितंबर के आदेश को ही वापस लेने की मांग की गई है।

याचिका में न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा को लेकर क्या सवाल उठाया गया?
याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने अपनी क्यूरेटिव याचिका में कहा है कि उन्हें फैसले के बाद मीडिया में आई खबरों से न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा के बेटे के चुनाव आयोग से जुड़े होने की जानकारी मिली। याचिका के मुताबिक, इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट से इस जानकारी की पुष्टि की गई और पता चला कि सिद्धार्थ शर्मा 10 जुलाई 2024 से चुनाव आयोग के पैनल में शामिल हैं। याचिका में इसे न्यायमूर्ति शर्मा के सामने चल रहे उस मामले से जोड़ते हुए निष्पक्षता की आशंका जताई गई है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था को चुनौती दी जा रही थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि न्याय सिर्फ किया ही नहीं जाना चाहिए, बल्कि वह पूरी तरह निष्पक्ष होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। याचिका में इसी आधार पर न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाया गया है। हालांकि, यह याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आधार हैं, जिन पर आगे सुप्रीम कोर्ट को विचार करना होगा।

क्यूरेटिव याचिका में किस तरह की दलील दी गई है?
याचिका में कहा गया है कि मामला ‘रेजनेबल लाइकलीहुड ऑफ बायस’ यानी पक्षपात की उचित आशंका और ‘रियल डेंजर टेस्ट’ के सिद्धांत के दायरे में आता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी न्यायाधीश के परिवार का सदस्य उस संस्था की ओर से पेश हो रहा हो, जिसकी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है, तो न्यायिक औचित्य का सवाल उठता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई शुरू होने से पहले अपने बेटे की चुनाव आयोग से जुड़ी पेशेवर भूमिका की जानकारी देनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि इस जानकारी के सामने आने के बाद 23 सितंबर के फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठता है और इसलिए उसे वापस लेकर मामले की दोबारा सुनवाई होनी चाहिए।

23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में आखिर क्या हुआ था?
23 सितंबर को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई के बाद अलग-अलग राय दी थी। मुख्य सवाल यह था कि 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। न्यायमूर्ति दत्ता ने बड़ी पीठ को भेजने की जरूरत से असहमति जताई, जबकि न्यायमूर्ति शर्मा ने माना कि मामले में महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल हैं और इसे संविधान पीठ के सामने जाना चाहिए। मतभेद के बावजूद दोनों न्यायाधीशों ने मामले को प्रधान न्यायाधीश के प्रशासनिक पक्ष में भेजने पर सहमति जताई, ताकि उचित संख्या वाली पीठ बनाई जा सके। पीठ ने प्रधान न्यायाधीश से स्थायी पांच सदस्यीय संविधान पीठ बनाने की संभावना पर भी विचार करने को कहा था।

विवाद में 2023 का चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून क्यों अहम है?
2023 का कानून मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान करता है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इस व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखा गया है। इसी बदलाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सवाल पैदा होते हैं। केंद्र की ओर से मामले में कहा गया था कि याचिकाओं में महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं और इसलिए उन्हें पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। अब नई क्यूरेटिव याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले 23 सितंबर के आदेश को वापस लेने की मांग पर विचार का सवाल है।

NATIONAL : ‘भारत दिखा रहा दुनिया को रास्ता’: मोहन भागवत ने अशोक सिंघल का दिया उदाहरण, कहा – समाज की बेहतरी के लिए करें काम

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही समाज व दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को एक संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह बात नागपुर जिले के देओलापुर में ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में कई पहलों का उद्घाटन करते हुए कही, जो वीएचपी के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थीं।

उन्होंने कहा, ‘हमारे जीवन, समाज, धर्म की सुरक्षा और दुनिया की बेहतरी के लिए, जो रास्ता हर गुजरते दिन के साथ जरूरी होता जा रहा है। वह यह है कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीना चाहिए और सफल होना चाहिए। हर किसी का जीवन संतोषजनक होना चाहिए, और हम सभी को कुछ न कुछ करना चाहिए।’

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज के आकार की तुलना में ‘अच्छे कामों में लगे’ लोगों की संख्या पर्याप्त नहीं है और उन्होंने सामाजिक कार्यों में लोगों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने के दो तरीके हैं – या तो अच्छे काम करके या सिर्फ़ उन लोगों को याद करके जिन्होंने अच्छे काम किए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग यह जानते हुए भी कि क्या करने की जरूरत है, मानते हैं कि ऐसा काम किसी और को करना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि उनके पास नौकरी है और परिवार की जिम्मेदारी है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि कोई और समाज के लिए कुछ अच्छा करे।’ उन्होंने आगे कहा कि जब कुछ अच्छा होता है, तो उसमें पूरे समाज का योगदान झलकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता दिखाते हैं, वे दूसरों को मुश्किल रास्ते चुनने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

भागवत ने कहा, ‘जब आप बहुत कुछ देते हैं, तो बदले में आपको बहुत कुछ मिलता भी है।’ उन्होंने दिवंगत मोरोपंत पिंगले और विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल का उदाहरण दिया, जिन्होंने एक बड़े मकसद के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और आज उन्हें व्यापक रूप से सम्मान मिलता है।

भागवत ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने निजी फायदे पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खुद को समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया और अंततः प्रमुख नेता बने। उन्होंने कहा कि जब भी वर्तमान में कुछ अच्छा होता है, तो दुनिया उन लोगों को याद करती है जिन्होंने अतीत में ऐसे कामों की शुरुआत की थी, और उन्हें याद करना ही उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

NATIONAL : ‘भारत दिखा रहा दुनिया को रास्ता’: मोहन भागवत ने अशोक सिंघल का दिया उदाहरण, कहा-समाज की बेहतरी के लिए करें काम

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करते हुए समाज और दुनिया के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने अशोक सिंघल और मोरोपंत पिंगले का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छे कार्यों के जरिए समाज में योगदान देना और दूसरों को प्रेरित करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही समाज व दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को एक संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह बात नागपुर जिले के देओलापुर में ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में कई पहलों का उद्घाटन करते हुए कही, जो वीएचपी के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थीं।

मोहन भागवत ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘हमारे जीवन, समाज, धर्म की सुरक्षा और दुनिया की बेहतरी के लिए, जो रास्ता हर गुजरते दिन के साथ जरूरी होता जा रहा है। वह यह है कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीना चाहिए और सफल होना चाहिए। हर किसी का जीवन संतोषजनक होना चाहिए, और हम सभी को कुछ न कुछ करना चाहिए।’

अच्छे लोगों को याद करने के क्या तरीके हैं?
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज के आकार की तुलना में ‘अच्छे कामों में लगे’ लोगों की संख्या पर्याप्त नहीं है और उन्होंने सामाजिक कार्यों में लोगों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने के दो तरीके हैं – या तो अच्छे काम करके या सिर्फ़ उन लोगों को याद करके जिन्होंने अच्छे काम किए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग यह जानते हुए भी कि क्या करने की जरूरत है, मानते हैं कि ऐसा काम किसी और को करना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि उनके पास नौकरी है और परिवार की जिम्मेदारी है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि कोई और समाज के लिए कुछ अच्छा करे।’ उन्होंने आगे कहा कि जब कुछ अच्छा होता है, तो उसमें पूरे समाज का योगदान झलकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता दिखाते हैं, वे दूसरों को मुश्किल रास्ते चुनने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

अशोक सिंघल का उदाहरण देकर क्या कहा?
भागवत ने कहा, ‘जब आप बहुत कुछ देते हैं, तो बदले में आपको बहुत कुछ मिलता भी है।’ उन्होंने दिवंगत मोरोपंत पिंगले और विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल का उदाहरण दिया, जिन्होंने एक बड़े मकसद के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और आज उन्हें व्यापक रूप से सम्मान मिलता है।

भागवत ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने निजी फायदे पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खुद को समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया और अंततः प्रमुख नेता बने। उन्होंने कहा कि जब भी वर्तमान में कुछ अच्छा होता है, तो दुनिया उन लोगों को याद करती है जिन्होंने अतीत में ऐसे कामों की शुरुआत की थी, और उन्हें याद करना ही उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

NATIONAL : कॉकरोच जनता पार्टी बोली- CEC के हर फैसले की हो जांच, ज्ञानेश कुमार को बताया गद्दार

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP और लेफ्ट छात्र संगठनों ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें संगठन ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है.मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठन AISF ने मोर्चा खोल दिया है. बुधवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई.

केवल पद से हटाना पर्याप्त नहीं जांच होनी
सौरव दास ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को केवल पद से हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए और दोष साबित होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए.

उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि ज्ञानेश कुमार गद्दार हैं, देशद्रोही हैं. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि ज्ञानेश कुमार झूठे नंबर वन हैं.
सौरव दास ने दावा किया कि अगर ऐसे लोग सिस्टम में बैठे रहेंगे तो देश की तरक्की कभी नहीं होगी.

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
CJP ने ऐलान किया है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा.
सौरव दास ने देशभर के युवाओं और समर्थकों से दिल्ली पहुंचने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जाएगा.

CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी 2 अक्टूबर की रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रदर्शन का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को देशभर से कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचेंगे.

दीपके ने अपने पोस्ट में कहा था कि अगर पुलिस प्रदर्शनकारियों को किसी जगह रोकती है, तो वहीं से आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा. उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने और महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने की बात कही.

पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP और लेफ्ट से जुड़े नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए.
सौरव दास ने आरोप लगाया कि पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर संगठन चिंतित हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया था.
दास ने दावा किया कि कुछ लोगों को चोटें आईं और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया.

10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर CJP ने क्या कहा?
सौरव दास ने कहा कि सरकार को इस बात का डर है कि अगर देश का युवा एकजुट हो गया तो राजनीतिक स्थिति बदल सकती है. उन्होंने युवाओं से 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने की अपील की.

NATIONAL : राहुल गांधी और प्रियंका पर अब दर्ज हुई पुलिसकर्मियों से मारपीट की FIR, ड्यूटी में बाधा डालने का भी आरोप

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े कांग्रेस सांसद एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत प्रियंका वाड्रा पर गुरुवार को दूसरी एफआईआर दर्ज की गई।पुलिस सूत्रों के हवाले से यह बताया जा रहा है कि उन पर आरोप है कि राजधानी में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों से कथित रूप से मारपीट करते हुए कर्तव्य में बाधा डालने का कृत्य किया है।वहीं, बुधवार को दोनों भाई-बहन पर आकाशवाणी में जबरन घुसकर अराजकता करने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।

क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला बुधवार को जनपथ और जंतर-मंतर के आसपास हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घटी घटनाओं के सिलसिले में दर्ज किया गया है। इस प्रदर्शन में भाग लेने वाले कई अन्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।

बुधवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडी’ के नेताओं ने जनपथ स्थित एक दक्षिण भारतीय रेस्टोरेंट में दोपहर के भोजन के बाद जंतर-मंतर की ओर अचानक धरना देने के लिए मार्च निकाला। जब पुलिस ने विपक्षी सांसदों की बसों को रास्ते में ही रोक दिया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिसकर्मियों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य महिला नेताओं के साथ हाथ में संविधान की कॉपी लेकर सड़क पर ही लेट गईं। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उन्हें और अन्य नेताओं को सड़क से हटाकर हिरासत में लिया।

कई सांसदों समेत 91 लोग हिरासत में लिए गए
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रदर्शन के दौरान कुल 91 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कई सांसद और वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में यह प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान कांग्रेस, टीएमसी, सीपीआई-एम, सीपीआई, आरजेडी और आईयूएमएल समेत कई प्रमुख दलों के सांसद मौजूद थे।

जांच में जुटी दिल्ली पुलिस
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज और साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ‘कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया था। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और बल प्रयोग की घटनाओं की गहनता से समीक्षा की जा रही है।’

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने बिना आवश्यक अनुमति के सड़क जाम कर सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया।

NATIONAL : इंडिया गठबंधन की लंच पॉलिटिक्स: ‘मेरे खिलाफ 45 एफआईआर, लक्ष्य 100 का’; राहुल बोले- हर एफआईआर मेरे लिए मेडल

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मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित विपक्षी सांसदों के साथ लंच के बाद राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का एलान किया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और अपने खिलाफ दर्ज 45 एफआईआर पर कहा कि उनका लक्ष्य 100 एफआईआर का है।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली के जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में इंडिया ब्लॉक के सांसदों के साथ लंच किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहेगा। खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से बार-बार गलत फैसले लिए जा रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए भी ऐसा करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे देश में लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है और संविधान की भी अनदेखी की जा रही है। खरगे ने कहा कि विपक्ष का मकसद लोगों की आवाज पूरे देश तक पहुंचाना है।

लंच के बाद राहुल गांधी ने कहा कि अब विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, “हम अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे, जो प्रदर्शन के लिए तय जगह है।” राहुल गांधी ने बताया कि विपक्षी सांसद पहले मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली। अब वे जंतर-मंतर पर एक साथ बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

विपक्षी सांसदों के साथ लंच के बाद राहुल गांधी ने कहा कि करीब 300 सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। अब विपक्षी सांसद तय प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर जाएंगे और वहां एक साथ प्रदर्शन करेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि उनके लिए ज्ञानेश कुमार देश के वैध मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा। एफआईआर को लेकर उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से 45 एफआईआर हैं और उनका लक्ष्य 100 एफआईआर का है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज हर एफआईआर उनके लिए एक मेडल है।

खरगे की बुलाई बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी पहुंचे। बैठक जनपथ स्थित सागर रत्ना में रखी गई थी। इसमें इंडिया गठबंधन के दूसरे दलों के सांसदों के भी शामिल होने की जानकारी सामने आई। विपक्षी सांसदों की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब वे चुनाव आयोग से सीधे मुलाकात कर अपनी शिकायतें रखने की मांग कर रहे हैं। बैठक के बाद कांग्रेस सांसदों ने एक साथ बस से रवाना हुए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि चाहे हजारों एफआईआर दर्ज कर दी जाएं, वे इससे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी एफआईआर को लेकर कहा कि क्या वे इससे डरने वाले हैं? उन्होंने कहा कि वे सिर्फ लंच के लिए आए हैं और लंच करेंगे। हुड्डा ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि एक एफआईआर दर्ज हुई है, जिसमें उनका नाम भी शामिल है। कांग्रेस सांसद शफी परंबिल ने कहा कि प्रदर्शन जारी रहेगा।

एक दिन पहले क्या हुआ था?
छह अक्तूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर मार्च किया था। विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग से सवाल कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मार्च को आकाशवाणी भवन के पास बैरिकेड लगाकर रोक दिया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं ने वहीं धरना दिया। कई घंटे चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं और सांसदों को हिरासत में लिया।

चुनाव आयोग ने क्या-क्या कहा?
विपक्ष की ओर से सीईसी से मुलाकात की मांग के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि छह अक्तूबर को शाम चार बजे तक किसी राजनीतिक दल ने औपचारिक तौर पर मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा था। आयोग के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के जरिए उसे करीब 240 विपक्षी सांसदों के चुनाव आयुक्तों से मिलने की जानकारी मिली थी। आयोग ने कहा कि वह सांसदों से मिलने के लिए तैयार था, लेकिन मुलाकात चुनाव आयोग के परिसर में तय प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए थी। विपक्ष की ओर से संसद भवन एनेक्सी में मिलने की मांग की गई थी।

NATIONAL : ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग, जंतर मंतर पर CEC के समर्थन में अग्रवाल समाज का प्रदर्शन

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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर अग्रवाल और वैश्व संगठनों के सदस्यों ने ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन किया। राहुल गांधी, अखिलेश यादव के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अग्रवाल समाज ने ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग भी की।

रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अग्रवाल और वैश्व समाज के संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथ में तख्तियां लेते हुए विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी भी की। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के समर्थन की बात।

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प्रदर्शन में शामिल लोगों ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। साथ ही ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग की।

SIR को लेकर विपक्ष पर निशाना
जपा नेता जय भगवान गोयल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज की सराहना करते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा है।

जय भगवान गोयल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के नाम हटाने की कार्रवाई की, जिसके कारण पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अब विपक्ष को लगता है कि चुनाव में मिली हार के पीछे चुनाव आयोग और विशेष रूप से ज्ञानेश कुमार की भूमिका हो सकती है।

विपक्ष पर लगाए आरोप
भाजपा नेता गोयल ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता चुनाव में हार के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सपा सांसद अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत विपक्ष के कई नेता चुनावी परिणामों के लिए चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं। विपक्ष के पास जनता का समर्थन नहीं है, इसलिए वह चुनाव आयोग को निशाना बना रहा है।

भाजपा नेता ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अन्य चुनाव आयुक्तों के माध्यम से केंद्र सरकार को पत्र भेजकर ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर शिकायत की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपनी मनमर्जी से फैसले लेते हैं।

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