Tuesday, September 15, 2026
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UP : यूपी में बाढ़ का विकराल रूप! 26 जिलों में 3.53 लाख लोग प्रभावित, बलिया के 48 गांव पानी में, आज फिर बारिश का अलर्ट

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उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है, जिससे 26 जिले प्रभावित हैं और करीब 3.53 लाख लोग मुश्किल में हैं. मौसम विभाग ने आज भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है.

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है. लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रदेश के कई जिलों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि 26 जिलों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है. कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत एवं बचाव अभियान जारी है.

गंगा-घाघरा उफान पर, बलिया में 48 गांव प्रभावित
पूर्वांचल में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है. बलिया में गंगा और घाघरा दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. जिले के 48 गांव बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं. निचले इलाकों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ी हैं. बलिया के दियरांचल में हालात और चुनौतीपूर्ण हैं. सरयू का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में घरों तक पानी पहुंच गया है. ग्रामीण मचान पर रात गुजारने को मजबूर हैं और मवेशियों के चारे की समस्या भी गहराती जा रही है.

26 जिलों में बाढ़, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर
बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में अब तक 17,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है. कई जगह राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

वाराणसी में गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर
वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर चुका था. नदी के बढ़ते पानी का असर घाटों और निचले इलाकों में दिखाई दिया. प्रयागराज में भी गंगा-यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद प्रशासन ने राहत शिविर और बाढ़ चौकियां सक्रिय की थीं. हालांकि शनिवार को दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई, फिर भी निचले इलाकों में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

चित्रकूट से लेकर पूर्वांचल तक संकट
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने वाले हैं. करीब 800 प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की तैयारी है.

आज फिर बारिश बढ़ा सकती है परेशानी
बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने 6 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में बारिश होने पर जलस्तर और जलभराव की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा. बलिया समेत गंगा और घाघरा के किनारे बसे गांवों में प्रशासन की नजर जलस्तर और कटान पर बनी हुई है. बारिश और नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बनी हुई है.

प्रशासन अलर्ट, राहत-बचाव अभियान जारी
बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव दल तैनात हैं. नावों के जरिए लोगों और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है. प्रशासन की ओर से लोगों से नदी और बाढ़ के पानी के पास जाने से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की जा रही है.

NATIONAL : गर्मी का कैलेंडर क्यों बदल रहा?: अब अप्रैल-अक्तूबर भी तपेंगे, दुनिया की आधी जमीन पर बढ़ा गर्मी का मौसम

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गर्मी अब सिर्फ मई से अगस्त तक का मौसम नहीं रह गई है। दुनिया की करीब आधी जमीन पर अत्यधिक गर्मी का मौसम लंबा हुआ है। कहीं गर्मी अक्तूबर तक खिंच रही है, तो उत्तर-पश्चिम भारत में वसंत की ओर गर्म दिनों का विस्तार हुआ है। 45 साल के आंकड़ों में यह बदलाव सामने आया है। ऐसे में सवाल है कि जब गर्मी का समय ही बदल रहा है, तो क्या अप्रैल से अक्तूबर तक हीट अलर्ट और बचाव की तैयारी करनी होगी। आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं…

गर्मी अब सिर्फ मई, जून, जुलाई और अगस्त तक सीमित नहीं रह गई है। दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्म दिनों का सिलसिला गर्मियों की पारंपरिक सीमा से बाहर निकल रहा है। कहीं गर्मी शरद ऋतु तक खिंच रही है, तो कहीं वसंत में ही तेज गर्मी दस्तक दे रही है। यानी अप्रैल से अक्तूबर तक गर्मी का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। 45 साल के वैश्विक मौसम आंकड़ों के नए विश्लेषण में सामने आया है कि दुनिया की करीब आधी भूमि पर अत्यधिक गर्मी का मौसम पहले के मुकाबले लंबा हो चुका है। उत्तर-पश्चिम भारत भी उन इलाकों में है, जहां गर्म दिनों का विस्तार वसंत की ओर ज्यादा हुआ है।

45 साल के आंकड़ों में गर्मी को लेकर क्या बड़ा बदलाव दिखा?
नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज की कैथरीन इवानोविच और उनके सहयोगियों ने 1980 से 2024 तक के वैश्विक जलवायु आंकड़ों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने 1980 के दशक में दर्ज अत्यधिक गर्म दिनों की तुलना 2015 से 2024 के आंकड़ों से की। अध्ययन के मुताबिक, करीब 50 फीसदी वैश्विक भूमि क्षेत्र में अत्यधिक शुष्क गर्मी का मौसम लंबा हुआ। वहीं करीब 48 फीसदी क्षेत्र में आर्द्र गर्मी का मौसम भी बढ़ा। यानी समस्या केवल यह नहीं है कि गर्मी ज्यादा तेज हो रही है, बल्कि गर्मी के आने और रहने का समय भी बदल रहा है

क्या दुनिया के हर हिस्से में गर्मी एक ही तरह बढ़ रही है?
गर्मी के मौसम में यह बदलाव हर जगह एक जैसा नहीं है। पश्चिमी अमेरिका, पूर्वी चीन, उत्तरी अफ्रीका और पूर्वी यूरोप में अत्यधिक गर्मी का विस्तार पुराने गर्मी के मौसम के बाद यानी शरद ऋतु की ओर ज्यादा हुआ। इसके उलट पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी अफ्रीका और उत्तर-पश्चिम भारत में वसंत की ओर गर्म दिनों का विस्तार ज्यादा देखा गया।

पूर्वी रूस के कुछ हिस्सों में इसका उल्टा असर दिखाई दिया और वहां अत्यधिक गर्मी का मौसम छोटा हुआ। वैज्ञानिकों ने हर क्षेत्र में वहां के अत्यधिक गर्म दिनों के आधार पर अलग-अलग हीट सीजन तय किया और फिर 1980 के दशक की तुलना में हाल के वर्षों में इसकी सीमा में आए बदलाव को देखा।
उत्तर-पश्चिम भारत के लिए यह बदलाव क्यों अहम है?
उत्तर-पश्चिम भारत उन क्षेत्रों में है, जहां अत्यधिक गर्म दिनों का विस्तार वसंत की ओर ज्यादा हुआ है। इसका मतलब है कि सामान्य गर्मी के मौसम से पहले ही तेज गर्मी वाले दिन बढ़ सकते हैं। अप्रैल में अचानक अत्यधिक गर्मी पड़ने पर शरीर को गर्म मौसम के अनुसार ढलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। यही वजह है कि मौसम के सामान्य कैलेंडर से बाहर पड़ने वाली गर्मी स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा परेशानी पैदा कर सकती है। भारत जैसे देश में इसका असर लोगों की दिनचर्या के साथ खेती, पानी और गर्मी से बचाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

क्या केवल तापमान बढ़ना ही इसके पीछे की वजह है?
अध्ययन का अहम निष्कर्ष यह है कि गर्मी के मौसम में हुए बदलाव को केवल औसत तापमान बढ़ने से नहीं समझाया जा सकता। वैज्ञानिकों ने यह भी जांचा कि अगर पुराने मौसम में केवल औसत तापमान के बराबर बढ़ोतरी कर दी जाए, तो अत्यधिक गर्म दिनों का वितरण कैसा होगा। करीब 80 फीसदी भूमि क्षेत्र में वास्तविक बदलाव और केवल तापमान बढ़ने वाले अनुमान के बीच अंतर मिला। कई जगह वास्तविक बदलाव अनुमान से उलटी दिशा में था। शोधकर्ताओं ने नमी में बदलाव, भूमि उपयोग और बड़े स्तर पर बदलते मौसम के पैटर्न को इसके संभावित कारण माना है।

अप्रैल और अक्तूबर की गर्मी शरीर के लिए कितनी मुश्किल हो सकती है?
मौसम से बाहर पड़ने वाली अत्यधिक गर्मी स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती है। अप्रैल में अचानक तेज गर्मी पड़ने पर शरीर अभी गर्म मौसम के लिए तैयार नहीं हुआ होता। दूसरी तरफ अक्तूबर तक गर्मी खिंचने पर शरीर कई महीनों की गर्मी के तनाव से पहले ही गुजर चुका होता है। फीनिक्स इसका एक उदाहरण है। 2024 में वहां लगातार 113 दिन तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। अक्तूबर में लगातार 21 दिन रिकॉर्ड गर्मी दर्ज हुई। इससे पता चलता है कि अत्यधिक गर्मी अब गर्मी के पारंपरिक महीनों तक सीमित नहीं रह गई है।

गर्मी से बचाव के लिए प्रशासन को क्या बदलना होगा?
शोधकर्ताओं के मुताबिक गर्मी से बचाव की व्यवस्थाएं केवल पारंपरिक गर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर वसंत में ही अत्यधिक गर्मी शुरू हो रही है या शरद ऋतु तक जारी रह रही है, तो जरूरत के मुताबिक अप्रैल और अक्तूबर में भी हीट अलर्ट, कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक पूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी पड़ सकती हैं। प्रशासन को यह देखना होगा कि किस इलाके में अत्यधिक गर्मी कब शुरू हो रही है और कब तक रह रही है। यानी पुराने हीट कैलेंडर की जगह स्थानीय मौसम के बदलाव के हिसाब से तैयारी करनी पड़ सकती है।
शुष्क और आर्द्र गर्मी में क्या अंतर है?
करीब 50 फीसदी वैश्विक भूमि पर अत्यधिक शुष्क गर्मी का मौसम लंबा हुआ।
करीब 48 फीसदी भूमि पर आर्द्र गर्मी का मौसम बढ़ा।
उत्तर-पश्चिम भारत में गर्म दिनों का विस्तार वसंत की ओर ज्यादा हुआ।
पश्चिमी अमेरिका, पूर्वी चीन, उत्तरी अफ्रीका और पूर्वी यूरोप में गर्मी का विस्तार शरद ऋतु की ओर ज्यादा देखा गया।
पूर्वी रूस के कुछ हिस्सों में अत्यधिक गर्मी का मौसम छोटा हुआ।

शुष्क गर्मी का असर फसलों और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है। वहीं आर्द्र गर्मी में इंसानी शरीर के लिए पसीने के जरिए खुद को ठंडा करना मुश्किल हो जाता है। अगर अत्यधिक गर्मी के साथ दूसरी आपदाएं, जैसे जंगल की आग, भी जुड़ जाएं तो खतरा और बढ़ सकता है

वैज्ञानिक अब आगे क्या पता लगाएंगे?
वैज्ञानिक अब जलवायु मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश करेंगे कि बदलते गर्मी के मौसम में जलवायु परिवर्तन की भूमिका कितनी है और क्षेत्रीय मौसम के पैटर्न का योगदान कितना है। इसके लिए अलग-अलग इलाकों में अत्यधिक गर्म दिनों के समय और उनकी दिशा में हुए बदलाव को समझना जरूरी है। 1980 के दशक और हाल के वर्षों के आंकड़ों की तुलना ने पहले ही यह संकेत दिया है कि गर्मी का मौसम कई जगह अपनी पुरानी सीमा से बाहर निकल रहा है। ऐसे में आने वाले समय में गर्मी की तैयारी भी केवल मई से अगस्त तक सीमित रखने के बजाय पूरे बदलते मौसम को ध्यान में रखकर करनी पड़ सकती है।

क्या अब अप्रैल से अक्तूबर तक बदलना होगा गर्मी का कैलेंडर?
दुनिया के करीब आधे भू-भाग में अत्यधिक गर्मी के मौसम के लंबा होने की तस्वीर यह सवाल खड़ा करती है कि गर्मी को देखने का पुराना तरीका अब कितना कारगर है। कहीं गर्मी शरद ऋतु तक पहुंच रही है और कहीं वसंत में ही तेज गर्मी शुरू हो रही है। उत्तर-पश्चिम भारत में भी वसंत की ओर गर्मी का विस्तार ज्यादा देखा गया है। इसका मतलब है कि गर्मी से बचाव की तैयारी को भी बदलते मौसम के साथ बदलना होगा। अब सवाल केवल यह नहीं है कि गर्मी कितनी पड़ेगी, बल्कि यह भी है कि गर्मी कब शुरू होगी और कब खत्म होगी।

SPORTS : महिला एशिया कप के फाइनल में भारत का श्रीलंका से सामना, जानें कब और कहां खेला जाएगा मुकाबला, ऐसे देखें लाइव

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विमेंस एशिया कप 2026 का फाइनल मुकाबला 13 सितंबर को दुबई में भारत और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह फाइनल मैच कब, कहां और कैसे देखा जा सकता है।

Women’s Asia Cup 2026 Final: महिला एशिया कप 2026 अपने अंतिम और सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला 13 सितंबर 2026 को भारत और श्रीलंका की महिला टीमों के बीच दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। एशिया की दो सबसे मजबूत टीमें इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के इरादे से मैदान में उतरेंगी। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि आप इस मैच को कब, कहां और कैसे देख सकते हैं।

दोनों टीमें अब तक अजेय, फाइनल में होगी कड़ाके की टक्कर
इस टूर्नामेंट में भारत और श्रीलंका दोनों ही टीमों का सफर बेहद शानदार और एकतरफा रहा है। श्रीलंकाई महिला टीम ने लीग स्टेज में अपने तीनों मैच जीतकर धमाकेदार शुरुआत की और फिर दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में पाकिस्तान की महिला टीम को मात देकर फाइनल का टिकट कटाया। वहीं, भारतीय महिला टीम ने भी लीग स्टेज में अपने तीनों मैच जीते और पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को हराकर फाइनल में जगह बनाई। दोनों ही टीमें इस पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही हैं और उन्हें अभी तक किसी भी टीम से हार का सामना नहीं करना पड़ा है। ऐसे में 13 सितंबर को फैंस को एक बेहद हाई-वोल्टेज और रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।

कब, कहां और कैसे देखें IND-W vs SL-W एशिया कप 2026 का फाइनल?
यदि आप भी भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले इस ऐतिहासिक फाइनल मैच का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो मैच से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां नीचे दी गई हैं:

मैच की तारीख: 13 सितंबर 2026 (रविवार)
वेन्यू: दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम, दुबई (UAE)
टॉस का समय: भारतीय समयानुसार (IST) शाम 7:30 बजे
मैच शुरू होने का समय: भारतीय समयानुसार (IST) शाम 8:00 बजे

लाइव स्ट्रीमिंग की जानकारी
भारत और श्रीलंका का यह फाइनल मुकाबला भारत में सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के विभिन्न चैनलों पर लाइव प्रसारित किया जाएगा। फैंस इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग अपने मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर SonyLIV ऐप और वेबसाइट पर देख सकते हैं। एशियाई क्रिकेट की दो महाशक्तियों के बीच यह खिताबी भिड़ंत बेहद दिलचस्प होने वाली है। अब देखना यह होगा कि कौन सी टीम अपनी अजेय लय बरकरार रखते हुए एशिया कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम करती है।

BUSINESS : जोमैटो से खाना मंगवाना हुआ और महंगा, अब कैश ऑन डिलीवरी COD ऑर्डर करने पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज

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ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो (Zomato) से खाना मंगवाना अब उन लोगों के लिए थोड़ा और महंगा हो गया है जो डिजिटल पेमेंट के बजाय कैश ऑन डिलीवरी (COD) यानी नकद भुगतान का विकल्प चुनना पसंद करते हैं। कंपनी ने अब कैश से भुगतान करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त चार्ज वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे खाने का कुल बिल बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स द्वारा साझा की गई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए कैश ऑन डिलीवरी चार्ज की शुरुआती कीमत कम से कम 5 रुपये है, जो अलग-अलग लोकेशन और ऑर्डर के हिसाब से बढ़कर लगभग 20 रुपये तक पहुंच सकती है। इस नए बदलाव के पीछे का मुख्य कारण ग्राहकों को डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर बढ़ावा देना और नकद राशि को संभालने में आने वाले लॉजिस्टिक खर्च को संतुलित करना माना जा रहा है।

अगर आप भी फूड डिलीवरी ऐप्स पर अतिरिक्त शुल्क या छुपे हुए चार्जेस से बचना चाहते हैं, तो समझदारी इसी में है कि आप कैश ऑन डिलीवरी की बजाय यूपीआई (UPI), क्रेडिट कार्ड या वॉलेट जैसे ऑनलाइन पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल करें। इससे न केवल आपको इस नए अतिरिक्त चार्ज से राहत मिलेगी, बल्कि आपका खाना भी थोड़े कम खर्च में आपके घर तक पहुंच जाएगा।

Zomato पर लगते हैं ये चार्जेज
जोमैटो (Zomato) से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते वक्त आपके बिल में सिर्फ खाने की कीमत ही नहीं, बल्कि कई तरह के अन्य शुल्क भी जुड़ जाते हैं, जो आपके कुल खर्च को काफी बढ़ा देते हैं। इनमें मुख्य रूप से डिलीवरी चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस, खाने के सामान पर लगने वाला जीएसटी, डिलीवरी पार्टनर फीस पर जीएसटी, प्लेटफॉर्म फीस पर जीएसटी, रेस्टोरेंट द्वारा लिया जाने वाला पैकिंग चार्ज और अब हाल ही में जुड़ा कैश ऑन डिलीवरी (COD) का एक्स्ट्रा चार्ज शामिल है। इन सभी छोटे-बड़े शुल्कों के कारण ऑर्डर का फाइनल अमाउंट काफी ज्यादा हो जाता है।

अपनी आय और मुनाफे को बढ़ाने के लिए कंपनी समय-समय पर इन शुल्कों में बदलाव करती रहती है। इससे पहले जोमैटो ने इस साल मार्च के महीने में अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी, जिसके तहत इस चार्ज को 12.50 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया गया था। मौजूदा समय में कंपनी के मोबाइल ऐप पर नजर डालें तो प्लेटफॉर्म फीस बिना जीएसटी के लगभग 14.99 रुपये तक दिखाई जा रही है।

NATIONAL : नंदीग्राम उपचुनाव : ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगा रीतब्रत गुट

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पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है. ऐसे में, टीएमसी के बागी गुट ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है. यह फैसला बीजेपी विरोधी वोटों को एकजुट रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का एलान हो चुका है. टीएमसी के बागी गुट ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का खुला ऑफर दिया है. रीतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले तृणमूल खेमे के नेता मदन मित्रा ने कहा कि अगर ममता नंदीग्राम से मैदान में उतरती हैं, तो उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा. इसके साथ ही नंदीग्राम के एक अन्य नेता अबू ताहेर ने भी यही बात कही है.

2021 में यहां से हार चुकी हैं ममता बनर्जी
नंदीग्राम विधानसभा सीट से ममता बनर्जी 2021 में विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी और वे भाजपा के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से मात खा गई थीं. इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में भी हरा दिया. शुभेंदु अधिकारी इस बार नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही विधानसभा सीटों से चुनाव जीतने में सफल रहे, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी.

ममता बनर्जी को रीतब्रत खेमे का ऑफर
अब नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. बंगाल की सत्ता परिवर्तन के बाद ये उपचुनाव हो रहे हैं, जिसके चलते ममता बनर्जी को टीएमसी के बागी गुट ने खुला ऑफर दिया है. ऐसे में माना जा रहा है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं. इस मसले पर मदन मित्रा ने कहा कि इस फैसले का मकसद बीजेपी विरोधी वोटों के बंटवारे को रोकना और ममता बनर्जी को नंदीग्राम में आसानी से जीत दिलाना है.

भाजपा विरोधी वोट को एकजुट रखने का प्रयास
मदन मित्रा ने कहा कि इससे यह साबित होगा कि हम बीजेपी को विपक्ष के वोट बांटने का मौका नहीं देना चाहते. उन्होंने यह बात उस आरोप के संदर्भ में कही जिसमें बागी गुट को बीजेपी की ‘बी-टीम’ बताया जा रहा है. टीएमसी के बागी गुट का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनाव के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने अब तक यह तय नहीं किया है कि पार्टी के मान्यता प्राप्त नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का हक है.

पार्टी पर कब्जे की लड़ाई जारी
पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही तृणमूल कांग्रेस तीन धड़ों में बंट गई है. रीतब्रत खेमे ने टीएमसी विधायकों को अपने साथ मिलाकर पार्टी पर कब्जा जमा रखा है, जिसे लेकर ममता का मामला अदालत में चल रहा है. टीएमसी के चुनाव चिह्न का समाधान अब तक नहीं हुआ है. यह मामला निर्वाचन आयोग के पास लंबित है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय 12 सितंबर को हो सकता है. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को उस दिन तलब किया है. यह बैठक दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में होगी.

MAHARASHTRA : गणेश उत्सव पर पुणे में 10 दिन शराबबंदी पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन को लगाई फटकार; क्या सवाल उठाए?

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गणेश उत्सव के दौरान पुणे में 10 दिन शराब की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल किया कि पूरे महाराष्ट्र में सिर्फ पुणे को ही क्यों चुना गया। अदालत ने इसे मनमाना बताते हुए कहा कि हर शराब पीने वाला व्यक्ति उपद्रव नहीं करता। अब सवाल है कि क्या प्रशासन यह आदेश वापस लेगा और पुणे में शराब की बिक्री पर लगी रोक हटेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…

गणेश उत्सव के दौरान पुणे में 10 दिन तक शराब की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पुणे प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल किया कि पूरे महाराष्ट्र में सिर्फ पुणे को ही शराबबंदी के लिए क्यों चुना गया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का व्यापक प्रतिबंध मनमाना है और इससे पुणे के लोगों पर गलत छवि बनती है। अदालत ने प्रशासन से आदेश वापस लेने को कहा, वरना उचित न्यायिक आदेश पारित करने की चेतावनी दी

पुणे में ही 10 दिन की शराबबंदी क्यों?
मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ होटल मालिकों और वाइन शॉप मालिकों के संगठनों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में पुणे कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 14 सितंबर से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है। अदालत ने पूछा कि जब मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे इलाकों में ऐसी रोक नहीं लगाई गई, तो सिर्फ पुणे को क्यों चुना गया।

क्या शराबबंदी से पुणे के लोगों को बदनाम किया जा रहा?
अदालत ने कहा कि केवल एक जिले में इस तरह का प्रतिबंध लगाना पुणे के निवासियों के लिए एक तरह का कलंक है। पीठ ने सवाल किया कि क्या प्रशासन यह दिखाना चाहता है कि शराब पीने के बाद केवल पुणे के लोग ही गलत व्यवहार करते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए पूरे जिले में शराब की बिक्री पर 10 दिन की रोक लगाना उचित नहीं हो सकता।

कानून-व्यवस्था के नाम पर पूरा कारोबार कैसे रोका जा सकता?
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन को गणेश उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक जगहों पर परेशानी रोकने की चिंता समझ में आती है। लेकिन लाइसेंस लेकर कारोबार करने वालों के व्यापार पर 10 दिन का पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति सड़क पर उपद्रव करेगा या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा, ऐसा नहीं माना जा सकता।

प्रशासन को क्या फैसला लेने का निर्देश दिया गया?
अदालत ने पुणे कलेक्टर की ओर से पेश वकील से कहा कि वह दिन में बाद में अदालत को बताए कि शराबबंदी का आदेश वापस लिया जाएगा या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर प्रशासन ने आदेश वापस नहीं लिया तो वह उचित आदेश पारित करेगा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने हल्के अंदाज में यह भी टिप्पणी की कि अगर आदतन शराब पीने वालों को 10 दिन तक शराब नहीं मिली तो वे अस्पतालों में पहुंच सकते हैं। अदालत की मुख्य चिंता यह थी कि कानून-व्यवस्था के नाम पर सभी लाइसेंसधारियों के कारोबार पर एक साथ रोक लगाना उचित नहीं है।

NATIONAL : वनतारा से 13 महीने बाद घर लौटी हथिनी माधुरी, नंदनी मठ में फूलों से हुआ स्वागत, लगा जश्न जैसा माहौल

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कोल्हापुर की ‘महादेवी’ के नाम से मशहूर हथिनी माधुरी 13 महीने बाद अपने घर नंदनी मठ लौट आई है। उसे हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) के निर्देश पर 30 जुलाई 2025 को जामनगर के वनतारा में इलाज के लिए भेजा गया था। HPC ने 9 सितंबर 2026 को माधुरी को कोल्हापुर लौटने की मंजूरी दी, जिसके बाद वनतारा ने सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन करने का आश्वासन दिया है।

कोल्हापुर की ‘महादेवी’ के नाम से मशहूर हथिनी माधुरी 13 महीने बाद अपने घर वापस लौटी है। हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने 9 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में माधुरी को कोल्हापुर लौटने की मंजूरी दी गई थी। वनतारा ने स्पष्ट किया है कि वह HPC के सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगा। माधुरी की वापसी कुछ शर्तों के साथ हुई है, जैसे उसकी 24 घंटे देखभाल, हर दो हफ्ते में मेडिकल जांच और उसे किसी भी जुलूस या कमर्शियल काम में शामिल न करना। माधुरी के लौटने से नंदनी मठ के लोगों में ख़ुशी का माहौल है, सभी ने उसका जमकर स्वागत किया।

माधुरी का फूलों से स्वागत
माधुरी के लौटने पर नंदनी मठ में भावुक माहौल था, वह 13 महीने बाद अपने घर वापस लौटी थी। माधुरी के लौटने पर लोगों ने उसका फूलों से स्वागत किया। नंदिनी मठ के परिसर में माधुरी के स्वागत के लिए खास रंगोली भी बनाई गयी थी, इसके साथ ही अनंत अंबानी को धन्यवाद देने वाले होर्डिंग भी लगाए गए थे। लोगों के चेहरे पर माधुरी के लौटने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। इसके कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहें।

अपने घर लौटने पर खुश है माधुरी
माधुरी की घर वापसी ने 13 महीने पहले हुई उसकी विदाई की यादें भी ताजा कर दीं। जब वह नंदनी मठ से वनतारा जा रही थी, तब मायूस होकर उसने ग्रामीणों के दिए फल नहीं खाए थे और उसकी आंखें नम हो गईं थीं।

लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल जुदा थी। घर पहुंचते ही माधुरी ने वहां रखे फल और गन्ने चाव से खाए। उसे इस तरह मुस्कुराते और खाते देख वहां मौजूद लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। लंबे इंतजार के बाद अपनी प्यारी माधुरी को पाकर नंदनी के लोगों के लिए यह पल किसी बड़े जश्न से कम नहीं था।

उसकी खास देखभाल और निगरानी की जरूरत
30 जुलाई 2025 को हाई-पावर्ड कमेटी के निर्देश पर हथिनी माधुरी को जामनगर के वनतारा भेजा गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी सही माना था। वनतारा का कहना है कि उसने माधुरी को सिर्फ समिति के आदेश पर देखभाल के लिए रखा था, न कि अपनी कस्टडी में लेने के लिए। लगातार इलाज के बाद माधुरी की सेहत अब ठीक है, लेकिन पुरानी दिक्कतों के चलते अभी भी उसकी खास देखभाल और निगरानी की जरूरत है। स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए वनतारा ने महाराष्ट्र सरकार से बातचीत के बाद 6 अगस्त 2025 को कहा था कि वह लोगों की भावनाओं और नियमों का पूरा सम्मान करेगा।

HPC ने कोल्हापुर लौटने की दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, माधुरी से जुड़े सभी पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) के सामने पेश कीं। समिति ने जरूरी रिपोर्ट्स की समीक्षा की और महाराष्ट्र के नंदानी के उस केंद्र का जायजा भी लिया, जहां माधुरी को वापस भेजा जाना है। इसके बाद, 9 सितंबर 2026 को HPC ने उसे कोल्हापुर लौटने की हरी झंडी दी। हालांकि, वापसी के लिए कुछ सख्त शर्तें तय की गई हैं, माधुरी को किसी भी जुलूस या अन्य कार्यों में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, उसकी 24 घंटे देखरेख होगी और हर 15 दिन में उसका मेडिकल चेकअप कराया जाएगा।

NATIONAL : एयर इंडिया के पायलट की दिल्ली के होटल में संदिग्ध मौत, लेओवर के दौरान रुके थे, जांच शुरू

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लेओवर पर रुके एयर इंडिया के एक पायलट की शुक्रवार शाम वसंत कुंज स्थित एक होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक पायलट की उम्र 40 वर्ष के आसपास थी और वे मूल रूप से मुंबई के रहने वाले थे। उन्होंने हाल ही में एयर इंडिया एक्सप्रेस से ट्रांसफर लेकर एयर इंडिया जॉइन किया था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

कब सामने घटना
शुरुआती जानकारी के अनुसार लगातार कॉल करने के बाद भी जवाब न मिलने पर पायलट के भाई ने होटल मैनेजर से संपर्क किया। इसके बाद होटल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने मास्टर-चाबी की मदद से कमरे के दरवाजा खोला तो पायलट अचेत अवस्था में पड़े मिले। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गुरुवार को किया था होटल में चेक-इन
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पायलट ने गुरुवार को होटल में चेक-इन किया था। शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में मृतक पायलट के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम की अंतिम मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल पुलिस होटल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

क्या बोला एयर इंडिया
मामले में एयर इंडिया के प्रवक्ता ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एयरलाइन कॉकपिट क्रू के अपने साथी के निधन से बेहद दुखी है। कंपनी लगातार पीड़ित परिवार के संपर्क में है और इस कठिन समय में उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है।

NATIONAL : बंगाल के स्कूलों में मोबाइल पर सख्ती, कक्षा में लाने और इस्तेमाल पर रोक ,माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी की नई गाइडलाइन

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने राज्य के लगभग 17 हजार माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के मोबाइल फोन लाने और इस्तेमाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार, स्कूल के समय में प्रार्थना सभा, कक्षाओं, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान छात्रों के मोबाइल फोन लाने और उपयोग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों, जैसे दूर-दराज से आने वाले छात्रों की सुरक्षा या चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति में संस्थान प्रमुख की पूर्व अनुमति मिलने पर ही मोबाइल लाने की छूट दी जा सकती है। ऐसे मामलों में भी मोबाइल फोन बंद या साइलेंट मोड में रखना होगा और बिना अनुमति उसका उपयोग नहीं किया जा सकेगा। स्कूल चाहें तो ऐसे उपकरणों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी कर सकते हैं।

मोबाइल से पढ़ाई पर पड़ रहा असर

शिक्षा विभाग के अनुसार, कई छात्र स्कूल में मोबाइल लाकर कक्षा और अवकाश के दौरान गेम खेलते हैं, चैट करते हैं, फिल्में डाउनलोड करते हैं और मिड-डे मील या अन्य गतिविधियों के रील व वीडियो बनाते हैं। आठवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों में यह प्रवृत्ति अधिक देखी गई है। इससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है और शिक्षक व अन्य छात्रों का ध्यान भी भंग होता है।

जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश

बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि शिक्षक-शिक्षिकाएं छात्रों को डिजिटल उपकरणों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के बारे में नियमित रूप से जागरूक करें। साथ ही अभिभावकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें, ताकि वे अनावश्यक रूप से बच्चों को मोबाइल लेकर स्कूल न भेजें। यदि किसी आपात स्थिति में छात्र को मोबाइल लाना आवश्यक हो, तो अभिभावकों को पहले स्कूल कार्यालय से संपर्क करना होगा।

साइबर सुरक्षा और अनुशासन पर जोर

दिशा-निर्देश में स्कूलों को साइबर सुरक्षा, तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी सलाह दी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के अधिकांश छात्र अब भी स्कूल में स्मार्टफोन नहीं लाते, लेकिन जिन स्कूलों में यह समस्या सामने आ रही है, वहां इससे अनुशासन, पढ़ाई और छात्रों के बीच समानता पर असर पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है। ट्रैवलगाइड पढ़ें

NATIONAL : मोदी करेंगे मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा, उसके बाद होगा कैबिनेट का विस्तार

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प्रधानमंत्री ने अपनी टीम के केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के कामकाज की व्यापक समीक्षा भी की है और उनके बारे में संगठन का फीडबैक भी लिया है। ऐसे में फेरबदल की स्थितियां बनती नजर आ रही हैं।

Modi Cabinet Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन और सरकार के लिए अगला एक महीना गहमागहमी से भरा रह सकता है। केंद्र सरकार में जिस तरह से विभिन्न मंत्रालयों और मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा हो रही है, उसे देखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावनाएं बनती दिख रही है। दूसरी तरफ संगठन में भी केंद्रीय संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति, राज्यों के संगठन प्रभारियों व चुनावी वाले राज्यों के लिए चुनाव प्रभारियों व सह प्रभारियों की जल्द नियुक्ति की जा सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तीसरे कार्यकाल का दो साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन कैबिनेट का विस्तार और फेरबदल नहीं हुआ है। इस बीच कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद मंत्रालय खाली भी हुए हैं। बीते कुछ महीनों से इसे लेकर कवायद भी चल रही है, लेकिन कोई न कोई मामला ऐसा आ जाता है कि इस काम को टाल दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपनी टीम के केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के कामकाज की व्यापक समीक्षा भी की है और उनके बारे में संगठन का फीडबैक भी लिया है। ऐसे में फेरबदल की स्थितियां बनती नजर आ रही हैं। दूसरी तरफ भाजपा संगठन की नई टीम बनने के बाद अभी संगठन में कुछ और महत्वपूर्ण समितियों व दायित्वों का फैसला होना बाकी है। इसे लेकर जल्द ही फैसला होने के आसार हैं।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यों के प्रवासों में तेजी आई है। चुनावी राज्यों के लिए गतिविधियां तेज हुई हैं। सूत्रों के अनुसार इस बीच पार्टी नेतृत्व पहले चुनावी राज्यों को लेकर संगठन संबंधी सारे कामों को पूरा कर लेना चाहता है।

अपने ही राज्यों के साथ तालमेल में कमी
कई मंत्री अपनी ही राज्य सरकारों के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं, बल्कि उनके अपने गृह राज्य में कई बार टकराव भी दिखा। संगठन को साथ लेकर चलने में अच्छी स्थिति नहीं है। अभी यह तय नहीं है कि फेरबदल कब हो, लेकिन बदलाव को लेकर समीक्षा का काम किया जा चुका है। फैसला समीक्षा से ज्यादा राजनीतिक स्थितियों पर निर्भर करेगा।

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।

एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।

हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।

काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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