Saturday, April 11, 2026
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NATIONAL : बाल्टी में डुबोया, फिर जमीन पर पटककर मारा: पत्थर दिल मां ने 6 साल के बेटे को दी बर्बर मौत, हार्ट अटैक का झूठा नाटक बेनकाब

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पुणे से सामने आई इस दिल दहला देने वाली वारदात ने ममता के आंचल को लहूलुहान कर दिया है. एक महिला ने अपने अवैध प्रेम संबंधों को परवान चढ़ाने के लिए उस मासूम की बलि दे दी, जिसे उसने खुद जन्म दिया था. इस पत्थर दिल मां की करतूत ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है.

पुणे से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो इंसानियत को शर्मसार कर देगी. एक मां ने अपने ही जिगर के टुकड़े को मौत के घाट उतार दिया. सिर्फ इसलिए क्योंकि वो उसके प्रेम संबंध में बाधा बन रहा था.

मोहब्बत में अंधी एक मां ने अपने ही छह साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी. ये सनसनीखेज वारदात पुणे की है, जहां बसरीन मेहबूब शेख नाम की महिला ने अपने प्रेमी राम विनायक कजेवाड के साथ मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया.बताया जा रहा है कि बसरीन पहले से शादीशुदा थी और उसके तीन बच्चे थे. लेकिन उसे अपने पड़ोसी राम से प्यार हो गया. जब इस रिश्ते का खुलासा हुआ, तो परिवार में विवाद बढ़ गया और वो पुणे आकर अपने प्रेमी के साथ रहने लगी.

लेकिन इस अवैध रिश्ते में सबसे बड़ी रुकावट उसका ही मासूम बेटा आवेज बन रहा था. और फिर 4 अप्रैल की रात एक खौफनाक प्लान तैयार किया गया.दोनों ने मिलकर पहले बच्चे को बाथरूम में पानी से भरी बाल्टी में डुबोया और जब इससे भी मन नहीं भरा तो उसे दीवार और जमीन पर पटक-पटक कर मार डाला. सोचिए एक मां अपने ही बच्चे के साथ ऐसा कैसे कर सकती है?

हत्या के बाद कहानी यहीं खत्म नहीं होती. दोनों आरोपी बच्चे के शव को कार में डालकर करीब 350 किलोमीटर दूर बीड जिले के धर्मापुरी ले गए. पूरे रास्ते कार में मासूम का शव पड़ा था और मां के चेहरे पर न आंसू और न ही पछतावा था.गांव पहुंचते ही एक नया ड्रामा रचा गया. कहा गया कि बच्चे की मौत हार्ट अटैक से हुई है. लेकिन सच ज्यादा देर छिप नहीं सका.

वहीं, उसका प्रेमी राम विनायक कजेवाड अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है. ये घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते विश्वास और इंसानियत के गिरते स्तर की डरावनी तस्वीर है.

NATIONAL : डोसा या जहर? दो मासूम बेटियों की मौत ने लिया खौफनाक मोड़, ब्लड रिपोर्ट में जहर, डायरी ने खोला बेटे की चाहत का राज

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अहमदाबाद के चांदखेड़ा में डोसा खाने के बाद दो मासूम बेटियों की मौत मामले में बड़ा मोड़ आया है. माता-पिता के ब्लड में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक की अधिक मात्रा मिली है. घर से सेल्फोस पैकेट और पुत्र प्राप्ति का जिक्र वाली डायरी भी बरामद हुई. पुलिस अब सामूहिक आत्महत्या के प्रयास के एंगल से जांच कर रही है, अंतिम निष्कर्ष एफएसएल रिपोर्ट पर निर्भर है.

अहमदाबाद में डोसा खाने के बाद दो मासूम बेटियों की शंकास्पद मौत का मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है. अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में रहने वाले प्रजापति परिवार की इस घटना में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. माता-पिता के ब्लड सैंपल में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक की अधिक मात्रा मिलने के बाद यह मामला अब फूड पॉइजनिंग से आगे बढ़कर सामूहिक आत्महत्या के प्रयास की आशंका की दिशा में जांच का केंद्र बन गया है. हालांकि, पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है

चांदखेड़ा पुलिस थाने के इंस्पेक्टर एम.के. मकवाना के अनुसार, अस्पताल में भर्ती पिता विमल और मां भावना के ब्लड सैंपल जांच के लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी भेजे गए थे. रिपोर्ट में दोनों के शरीर में एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई है. डॉक्टरों से इस रासायनिक मौजूदगी के कारणों पर राय ली जा रही है.

पुलिस ने उस डेरी के मालिक और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं जहां से डोसा बनाने के लिए खीरू खरीदा गया था. डेरी के सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किए गए हैं और खीरू खरीदने वाले अन्य ग्राहकों से भी पूछताछ की गई है. अब तक की जांच में यह सामने आया है कि खीरू से बनी चीजें खाने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं हुई.

पुलिस अब दो संभावित दिशाओं में जांच कर रही है. पहला, क्या डोसा खाने से मौत हुई, और दूसरा, क्या घर में किसी कारण से सामूहिक आत्महत्या का प्रयास किया गया. इंस्पेक्टर मकवाना ने बताया कि विमल और भावना सहित परिजनों से पूछताछ जारी है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगा.

जांच के दौरान पुलिस को घर से गेहूं को सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होने वाले सेल्फोस पाउडर के पैकेट भी मिले हैं. विमल ने बताया कि उसने 27 मार्च को रामनगर से सेल्फोस के करीब 10 पैकेट खरीदे थे. कुछ पैकेट गेहूं में उपयोग किए गए जबकि बाकी अलग रखे गए थे. पुलिस ने बरामद पैकेटों को भी जांच के लिए एफएसएल भेज दिया है.

जांच के दौरान पुलिस को घर से एक डायरी भी मिली है, जिसमें पुत्र प्राप्ति की इच्छा का उल्लेख है. विमल की पहले से एक बेटी थी और बाद में दूसरी बेटी हुई थी. डायरी में पुत्र जन्म होने पर मंदिर में दर्शन करने की बात लिखी गई है. हालांकि परिवार लगातार डोसा खाने की वजह से तबीयत बिगड़ने का ही बयान दे रहा है और अब तक उनके बयानों में कोई विरोधाभास सामने नहीं आया है.

पुलिस का कहना है कि यदि सामूहिक आत्महत्या का प्रयास साबित होता है तो दोनों मासूम बेटियों की हत्या और पत्नी की हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हो सकता है. अगर जांच में पत्नी की भूमिका सामने आती है तो मामला और जटिल हो जाएगा.

जानकारी के मुताबिक, प्रजापति परिवार ने 1 और 2 अप्रैल को खरीदे गए खीरू से घर में डोसा बनाया था. इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर पति-पत्नी अपने दो मासूम बेटियों के साथ अस्पताल में भर्ती हुए, जहां तीन महीने की राहा और चार साल की मिस्टी की मौत हो गई. शुरुआत में बच्चियों के दादा गौरीशंकर प्रजापति ने डोसा खाने से मौत होने की आशंका जताई थी.

पुलिस को 5 अप्रैल को मामले की जानकारी मिली, जब चार साल की बच्ची की मौत हुई. इससे पहले 4 अप्रैल को तीन महीने की बच्ची की मौत हो चुकी थी और परिजनों ने इसे सामान्य मृत्यु मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था. बाद में पुलिस जांच शुरू होने पर परिवार की सहमति से शिशु का शव निकालकर एफएसएल की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया.

NATIONAL : हर्षित भट्ट मौत मामले में तीन दोस्तों पर हत्या का केस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुले कई राज

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छात्र हर्षित भट्ट की मौत के मामले में थाना सेक्टर 126 में पुलिस ने हर्षित के तीन दोस्तों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है. हर्षित की मौत सेक्टर 94 के पानी भरे गड्ढे में डूबने से हुई थी. पुलिस अब तीनों छात्रों से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है.

नोएडा में 23 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है. यह एफआईआर परिजनों की तहरीर के आधार पर थाना सेक्टर 126 में दर्ज की गई है, जिसमें हर्षित के साथ मौजूद तीन छात्रों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साफ हुआ है कि हर्षित की मौत डूबने से हुई. रिपोर्ट के अनुसार, उसके फेफड़ों में मिट्टी भर गई थी.

पुलिस के अनुसार, हर्षित की मौत सेक्टर 94 में बने एक तालाबनुमा गड्ढे में डूबने से हुई थी. घटना के समय उसके साथ उसके तीन दोस्त भी मौजूद थे. परिजनों ने इस घटना को संदिग्ध बताते हुए शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया.

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. अब इस मामले में मौजूद तीनों छात्रों के बयान दर्ज किए जाएंगे. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय क्या हुआ और किन परिस्थितियों में हर्षित की मौत हुई. मामले की जांच के दौरान पुलिस हर पहलू पर ध्यान दे रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके. फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी.

बता दें, हर्षित भट्ट एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का छात्र था और इंदिरापुरम की शिप्रा रिवेरा सोसायटी में रहता था. उसकी मौत सेक्टर 94 में बने एक तालाबनुमा गड्ढे में डूबने से हुई थी. घटना के समय उसके साथ तीन दोस्त भी मौजूद थे, जिन्हें अब नामजद आरोपी बनाया गया है.

इस घटना के बाद से ही परिजन लगातार इसे संदिग्ध मान रहे थे. उनका कहना था कि सिर्फ डूबने की बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्होंने पुलिस में शिकायत दी. परिजनों की इसी तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीनों छात्रों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. पीड़ित परिजनों का कहना है कि हर्षित तैरना भी जानता था.

NATIONAL : मथुरा-वृंदावन का होगा कायाकल्प, परिक्रमा मार्ग को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए 21.28 करोड़ मंजूर

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उत्तर प्रदेश सरकार ने वृंदावन परिक्रमा मार्ग के सौंदर्यीकरण के लिए 21.28 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर की है, जिसकी पहली किश्त 10.90 करोड़ जारी हो चुकी है. फसाड विकास, ब्रज शैली सजावट और आधुनिक साइनेज लगाए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देना है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या-काशी-प्रयागराज के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन को विशिष्ट पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने वृंदावन परिक्रमा मार्ग को अधिक आकर्षक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए भवनों के फसाड विकास और आधुनिक साइनेज लगाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है. इस परियोजना के लिए 21.28 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से प्रथम किश्त के रूप में 10.90 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं.

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह पहल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के साथ धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी. सरकार का उद्देश्य मथुरा-वृंदावन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है.उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में इस परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है. इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है, जो निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य पूरा करेगा.

सरकार की योजना के तहत वृंदावन परिक्रमा मार्ग के किनारे स्थित भवनों के बाहरी स्वरूप को आकर्षक बनाया जाएगा. इस परियोजना में भवनों के फसाड विकसित करने के साथ मार्गदर्शन के लिए आधुनिक और स्पष्ट साइनेज लगाए जाएंगे. इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम और व्यवस्थित बनाना है.

परिक्रमा मार्ग पर स्थित भवनों, दरवाजों और दीवारों को पारंपरिक ब्रज शैली में सजाया और संवारा जाएगा. पूरे मार्ग को एकरूपता और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ मनोहारी वातावरण भी मिल सके.सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

वृंदावन का परिक्रमा मार्ग लगभग 10-12 किलोमीटर लंबा पवित्र मार्ग है, जिसे कृष्ण भक्त नंगे पैर राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए पूरा करते हैं. यह मार्ग यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन घाटों और कई प्रमुख मंदिरों से होकर गुजरता है.इस मार्ग में बांके बिहारी मंदिर, निधिवन और गोविंद देव जी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं. श्रद्धालुओं को परिक्रमा पूरी करने में सामान्यतः तीन से चार घंटे का समय लगता है.

परिक्रमा की शुरुआत और समापन प्रायः इस्कॉन मंदिर वृन्दावन या गोविंद देव जी मंदिर से किया जाता है. यह मार्ग उन स्थानों से होकर गुजरता है जहां भगवान कृष्ण ने ग्वाल-बालों के साथ लीलाएं की थीं.पर्यटन मंत्री ने बताया कि मथुरा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन चुका है. सरकार धार्मिक स्थलों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दे रही है.

वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 10.24 करोड़ पर्यटकों ने मथुरा का भ्रमण किया, जो क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता और पर्यटन संभावनाओं को दर्शाता है. रंगोत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी और राधा अष्टमी जैसे अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.सरकार का लक्ष्य ब्रज क्षेत्र में पर्यटन विकास कार्यों को गति देना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि मथुरा-वृन्दावन विश्व स्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो सके.

NATIONAL : पैर फिसला और फिर… झरने के तेज बहाव में समा गईं 3 सहेलियां, रोंगटे खड़े कर देगी ये घटना

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आंध्र प्रदेश के अनंतगिरी हिल्स में एक झरने पर सेल्फी लेते समय तीन नाबालिग लड़कियों की डूबकर मौत हो गई. चार लड़कियां वहां घूमने गई थीं, जिनमें से एक को बचा लिया गया. पुलिस के अनुसार, फिसलन भरी चट्टानों पर खड़े होकर सेल्फी लेते समय उनका संतुलन बिगड़ गया.

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है, जहां दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गई तीन लड़कियों के लिए सेल्फी मौत का पैगाम बन गई. अक्सर हम पिकनिक और घूमने-फिरने का प्लान बनाते हैं ताकि रोज की भागदौड़ से थोड़ा सुकून मिल सके. जंबुवलसा गांव गांव की चार सहेलियों ने भी कुछ ऐसा ही सोचा था. परीक्षाएं खत्म हुई थीं, तो सबने मिलकर तय किया कि पास की पहाड़ियों में स्थित मुलागुम्मी झरने घूमकर आते हैं. घर से सब हंसते-खेलते निकले थे, लेकिन किसे पता था कि एक सेल्फी उन सबकी जिंदगी की आखिरी तस्वीर बन जाएगी.

इस दर्दनाक हादसे में 17 साल की त्रिशा, 16 साल की रत्नकुमारी और 16 साल की पवित्रा की जान चली गई. ये तीनों सहेलियां अनंतगिरी की पहाड़ियों में बने इस खूबसूरत झरने की मस्ती में खोई हुई थीं. तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद हर किसी की रूह कंपा दी. बताया जा रहा है कि लड़कियां झरने के एकदम करीब वाली चट्टानों पर खड़ी होकर सेल्फी ले रही थीं. पहाड़ों पर होने की वजह से इन पत्थरों पर काफी काई जमी थी, जिसकी वजह से वहां फिसलन थी.

घटना के वक्त ये चारों सहेलियां झरने के बेहद करीब पहुंच गई थीं. पहाड़ों पर स्थित इस झरने की चट्टानों पर पानी की वजह से काफी फिसलन थी।. पुलिस के मुताबिक, ये लड़कियां बेहतर सेल्फी लेने की कोशिश कर रही थीं, तभी अचानक वे फिसलन भरी चट्टानों पर अपना संतुलन खो बैठीं और सीधे गहरे पानी में जा गिरीं. दुखद बात यह रही कि इनमें से किसी को भी तैरना नहीं आता था. पानी के तेज बहाव के सामने उनकी हर कोशिश नाकाम साबित हुई. वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने जब लड़कियों की चीखने की आवाज सुनी तो वे तुरंत उनकी तरफ दौड़े. ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक लड़की को तो किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिसे तुरंत अस्पताल भर्ती कराया गया है. लेकिन बाकी तीनों सहेलियों की किस्मत ने साथ नहीं दिया और वे पानी के तेज बहाव के साथ आंखों से ओझल हो गईं.

सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से तीनों लड़कियों के शव बरामद किए गए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुलागुम्मी झरना देखने में भले ही छोटा और शांत लगता है, लेकिन इसके नीचे पानी का बहाव बहुत खतरनाक है. खास तौर पर गीली चट्टानों पर चलना जोखिम भरा होता है, जहां जरा सा पैर फिसलने का मतलब सीधा मौत से सामना है.

इस हादसे ने पूरे जंबुवलसा गांव में मातम फैला दिया है. एक ही मोहल्ले की तीन जवान बेटियों के शव जब गांव पहुंचे, तो हर आंख नम हो गई. ये लड़कियां अभी अपने करियर के सपने बुन ही रही थीं कि एक छोटी सी लापरवाही ने सब कुछ खत्म कर दिया. यह घटना उन सभी पर्यटकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो रोमांच के चक्कर में सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं. प्रशासन ने भी अपील की है कि पानी के किनारे सेल्फी लेते वक्त सावधानी बरतें, क्योंकि आपकी एक गलती पूरे परिवार को उम्र भर का गम दे सकती है.

WORLD : बीच हवा में 1600 करोड़ का अमेरिकी ड्रोन गायब! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर रहस्यमयी तरीके से हुआ लापता

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अमेरिका की नौसेना का एक खास निगरानी ड्रोन MQ-4C ट्राइटन आज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर अचानक लापता हो गया. यह वही ड्रोन है जिसे अमेरिका का सबसे महंगा ड्रोन माना जाता है. दी वॉर जोन की रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान के दौरान इसने इमरजेंसी अलर्ट भी भेजा था. यह ड्रोन करीब तीन घंटे तक फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी करने के बाद इटली के सिगोनेला स्थित अपने बेस की ओर लौट रहा था. फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के अनुसार, अचानक ड्रोन ने अपना रास्ता थोड़ा ईरान की ओर मोड़ा और उसी दौरान 7700 कोड भेजा, जो सामान्य इमरजेंसी का संकेत होता है. इसके बाद ड्रोन तेजी से नीचे उतरने लगा और कुछ ही देर में रडार से गायब हो गया.

अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया. यह घटना ऐसे समय हुई है जब दो दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ था और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए खोलने पर सहमति जताई थी.

MQ-4C ट्राइटन ड्रोन की बात करें तो यह बेहद एडवांस और महंगा ड्रोन है, जिसकी कीमत 200 मिलियन डॉलर (करीब 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा) बताई जाती है. यह ड्रोन लंबे समय तक आसमान में रहकर बड़े इलाके की निगरानी कर सकता है. इसे खास तौर पर समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए तैयार किया गया है. यह ड्रोन 50,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकता है और 24 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार काम कर सकता है. इसकी रेंज करीब 7,400 नॉटिकल मील है, जिससे यह बहुत दूर तक निगरानी कर सकता है. यह ड्रोन अक्सर P-8A पोसीडॉन जैसे गश्ती विमानों के साथ मिलकर काम करता है और उन्हें जरूरी जानकारी देता है. साल 2025 तक अमेरिकी नौसेना के पास ऐसे 20 ड्रोन थे और आगे 7 और खरीदने की योजना थी.

इस बीच, अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण अमेरिका को भारी खर्च का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका हर सेकंड करीब 10,300 डॉलर यानी लगभग 9.8 लाख रुपये खर्च कर रहा है. एक दिन में सबसे ज्यादा खर्च हथियारों और मिसाइलों पर होता है, जो करीब 320 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3,040 करोड़ रुपये है. इसके अलावा हवाई अभियान पर रोज करीब 245 मिलियन डॉलर (करीब 2,327 करोड़ रुपये) खर्च हो रहे हैं. समुद्री ऑपरेशन पर करीब 155 मिलियन डॉलर (लगभग 1,472 करोड़ रुपये) खर्च हो रहे हैं.

THAAD, पैट्रियट और एजिस जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर रोज लगभग 95 मिलियन डॉलर (करीब 902 करोड़ रुपये) खर्च हो रहे हैं. खुफिया और साइबर ऑपरेशन पर करीब 45 मिलियन डॉलर (लगभग 427 करोड़ रुपये) और सैनिकों व अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 30 मिलियन डॉलर (करीब 285 करोड़ रुपये) खर्च हो रहा है. यह घटना ऐसे समय हुई है, जब हालात पहले से ही संवेदनशील हैं, और इस ड्रोन के लापता होने से तनाव और बढ़ सकता है.

NATIONAL : पति-पत्नी और 22 दिन के मासूम की संदिग्ध मौत, पिता और बेटे की लाश के पास मिला हथौड़ा

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अयोध्या में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की संदिग्ध मौत से हड़कंप मच गया. पति और 22 दिन के बेटे का शव घर में मिला, जबकि पत्नी का शव रेलवे ट्रैक पर मिला. प्राथमिक जांच में हत्या के बाद आत्मघाती कदम की आशंका जताई जा रही है. पुलिस और फोरेंसिक टीम मामले की जांच में जुटी है.

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है. यहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों – पति, पत्नी और उनके महज 22 दिन के मासूम बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई.

मामला देवराकोट रेलवे फाटक के पास का है, जहां सबसे पहले पुलिस को एक महिला का शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा होने की सूचना मिली. मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने शव की जांच की तो उसके पास मिले मोबाइल फोन के जरिए उसकी पहचान गेरू गांव निवासी शिवानंद रावत की पत्नी के रूप में हुई. महिला का शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में मिला, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी थी.

इस जानकारी के आधार पर पुलिस जब महिला के घर पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद मिला. काफी देर तक आवाज देने के बाद भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया. अंदर का दृश्य और भी भयावह था. कमरे में महिला के पति और 22 दिन के बेटे का शव पड़ा हुआ था. पास ही एक हथौड़ा भी मिला, जिससे हत्या की आशंका और गहरा गई.

प्राथमिक जांच में पुलिस यह मानकर चल रही है कि महिला ने पहले अपने पति पर हथौड़े से हमला कर उसकी हत्या की, इसके बाद अपने मासूम बेटे का गला दबाकर उसे मार डाला और फिर खुद रेलवे ट्रैक पर जाकर आत्मघाती कदम उठा लिया. हालांकि, पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की हर एंगल से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को खंगाल रही है.

घटना की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा. फिलहाल पूरे मामले ने इलाके में दहशत और शोक का माहौल पैदा कर दिया है.

ENTERTAINMENT : 500 करोड़ में बनी साउथ की मोस्ट अवेटेड फिल्म का 5 मिनट का फुटेज लीक, कंप्लेन दर्ज

तमिल एक्टर थलपति विजय की अपकमिंग फिल्म ‘जन नायगन’ के मेकर्स को तगड़ा झटका लगा है. दरअसल, उनकी फिल्म का 5 मिनट का एक क्लिप ऑनलाइन लीक हो गया है.

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने एक्टर थलपति विजय पिछले लंबे समय से अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जन नायगन’ को लेकर चर्चा में हैं. उनकी इस फिल्म का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. ‘जन नायगन’ को पहले 9 जनवरी को पोंगल के मौके पर रिलीज करने का प्लान था, लेकिन सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट ना मिलने की वजह से इसकी रिलीज टाल दी गई. अब ‘जन नायगन’ एक बार फिर चर्चा में आ गई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ‘जन नायगन’ का 5 मिनट का एक क्लिप ऑनलाइन लीक हो गया है. लीक हुए फुटेज में टाइटल क्रेडिट और विजय का इंट्रोडक्शन सीन शामिल है. इस 500 करोड़ी फिल्म का 5 मिनट का सीन लीक होना मेकर्स के लिए बड़ा झटका है. विजय ने सख्त एक्शन लेते हुए कहा कि जो लोग इस लीक प्रिंट को शेयर करेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज की गई है.

विजय ने अपने ऑफिशियल एक्स पर लिखा, ‘जन नायगन के लीक हुए क्लिप शेयर करने वाले सभी अकाउंट्स के खिलाफ साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज की गई है. अधिकारी इसमें शामिल हर ID को ट्रैक कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’

विजय की आखिरी फिल्म है जन नायकन!
बता दें कि ‘जन नायगन’ को विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद वो राजनीति में पूरी तरह एक्टिव होने वाले हैं. ऐसे में विजय के फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

‘जन नायगन’ का निर्देशन एच. विनोद ने किया है. इसमें पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, गौतम वासुदेव मेनन, प्रकाश राज, नारायण और मामिता बैजू जैसे एक्टर्स काम कर रहे हैं. फिल्म का संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने तैयार किया है.

NATIONAL : होर्मुज में भारतीय जहाजों की रफ्तार पर ब्रेक, 16 कंटेनर कर रहे नेवी के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार

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होर्मुज स्ट्रैट में फंसे 16 भारतीय जहाजों को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना की अनुमति का इंतजार है. 5 अप्रैल के बाद से किसी भी भारतीय पोत ने यह मार्ग पार नहीं किया है. नौसेना सुरक्षित रास्तों और एस्कॉर्ट ऑपरेशंस के जरिए जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है.

पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और सीजफायर के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रैट से समुद्री आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, 5 अप्रैल के बाद से अब तक कोई भी भारतीय-ध्वज वाला जहाज होर्मुज को पार नहीं कर पाया है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना वर्तमान में हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी.

वर्तमान में 16 भारतीय झंडे वाले जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से (फारस की खाड़ी) में फंसे हुए हैं. इनमें एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG), कच्चे तेल के वाहक, कंटेनर पोत और ड्रेजर तथा रासायनिक पदार्थ ले जाने वाले जहाज शामिल हैं.

एलपीजी पोत ‘जग विक्रम’ अभी भी शारजाह में खड़ा है और निर्देशों का इंतजार कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में 5-6 जहाजों के जल्द ही नेवी की क्लीयरेंस मिलने के बाद होर्मुज पार करने की संभावना है. सरकारी सूत्रों की मानें तो 5 से 6 जहाजों का पहला बैच जल्द ही नौसेना की हरी झंडी के बाद होर्मुज पार कर सकता है. इसे लेकर ईरानी अधिकारियों और चालक दल के साथ बातचीत जारी है.

गुरुग्राम स्थित भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से 6 अप्रैल तक फारस की खाड़ी, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में 30 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें 23 जहाज़ों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल और ड्रोन हमले भी शामिल थे, तथा 10 लोगों की मौत हुई. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि क्षेत्र में कितनी अस्थिरता और जोखिम बना हुआ है.

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नौसेना की सतर्कता और आपसी तालमेल के प्रयास भारतीय जहाजों/कंटेनरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. आने वाले दिनों में होर्मुज से आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है.

इस बीच, ईरान की ओर से मिले ताजा संकेत होर्मुज पर कड़े नियंत्रण की संभावना की ओर इशारा करते हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है. आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे समुद्री व्यापार को गति मिल सकेगी.

BUSINESS : सावधान! अब 10000 से ऊपर के डिजिटल पेमेंट में लगेगा 1 घंटे का ‘होल्ड’, RBI लाया नया नियम

RBI ने 10000 से ज्यादा के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर फ्रॉड रोकने के लिए 1 घंटे का टाइम लैग और कैंसिल करने का ऑप्शन देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे यूज़र्स को सोचने का समय मिल सके.

ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कुछ सख्त कदम उठा रहा है. RBI ने डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए 10,000 हजार से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर नए सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव खासतौर पर Authorised Push Payments (APP) से जुड़े बढ़ते फ्रॉड को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसके तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए गए हैं, जो आम यूज़र्स की सुरक्षा को मजबूत करेंगे.

सबसे अहम बदलाव यह है कि अगर कोई ग्राहक 10,000 से ज्यादा की रकम किसी नए व्यक्ति या अकाउंट में ट्रांसफर करता है तो उस पर 1 घंटे का अनिवार्य समय अंतराल (time lag) लगाया जा सकता है. यानी पैसा तुरंत ट्रांसफर नहीं होगा, बल्कि एक घंटे तक रुका रहेगा. इस दौरान ग्राहक को ट्रांजैक्शन को कैंसल करने का पूरा ऑप्शन मिलेगा, जिससे अगर उसे किसी तरह का शक हो या गलती का एहसास हो तो वह पैसे को जाने से रोक सकता है.

RBI के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़े बताते हैं कि ₹10,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड मामलों का लगभग 45 प्रतिशत होते हैं, लेकिन रकम के हिसाब से इनका हिस्सा करीब 98.5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. इसी कारण इस श्रेणी पर खास ध्यान दिया गया है. इसके अलावा अगर कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगता है तो बैंक ग्राहक से दोबारा कन्फर्म कर सकता है और उसे संभावित धोखाधड़ी के बारे में अलर्ट भी करेगा, इससे धोखाधड़ी के मामले कम हो सकते हैं.

हालांकि, यह नियम मर्चेंट पेमेंट (जैसे UPI से खरीदारी), ई-मैंडेट और चेक से होने वाले भुगतानों पर लागू नहीं होगा. ग्राहकों की सुविधा के लिए ‘व्हाइटलिस्टिंग’ का ऑप्शन भी दिया जाएगा, जिससे वे भरोसेमंद लोगों या खातों को पहले से मंजूरी देकर इस देरी से बच सकते हैं. RBI ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए यह जरूरी कदम उठा रही है.

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