Tuesday, July 7, 2026
Home Blog

SPORTS : आखिरी मिनट में टूटा रोनाल्डो का सपना, मेरिनो के एक गोल ने पुर्तगाल को विश्व कप से किया बाहर

0

फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में स्पेन ने आखिरी पलों में गोल दागकर पुर्तगाल को 0-1 से हरा दिया। मैच का एकमात्र गोल मिकेल मेरिनो ने इंजरी टाइम (90+1वें मिनट) में किया। इस जीत के साथ स्पेन ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जबकि क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

पहले हाफ में दोनों टीमों को नहीं मिली सफलता

मैच के पहले हाफ में दोनों टीमों ने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन कोई भी उन्हें गोल में नहीं बदल सका। स्पेन के लिए मिकेल ओयारजाबाल के पास बढ़त दिलाने का बेहतरीन मौका था, लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से बाहर चला गया। वहीं, गोलकीपर डियोगो कोस्टा ने एलेक्स बेना के शानदार कर्लिंग शॉट को बचाकर पुर्तगाल को शुरुआती झटका लगने से बचाया।

पुर्तगाल ने भी लगातार स्पेन की रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाया। कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कुछ अच्छे हमले किए, जबकि नूनो मेंडेस का डिफ्लेक्टेड शॉट क्रॉसबार से टकराकर लौट आया। इसके बावजूद पुर्तगाल पूरे मैच में गोल करने में नाकाम रही।

इंजरी टाइम में मेरिनो बने स्पेन के हीरो

दूसरे हाफ में दोनों टीमें सतर्क रहीं और मुकाबला गोलरहित आगे बढ़ता रहा। ऐसा लग रहा था कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन 90+1वें मिनट में स्पेन के दो सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने मैच का फैसला कर दिया। फेरान टोरेस ने बेहतरीन पास दिया, जिस पर मिकेल मेरिनो ने शानदार फिनिश करते हुए स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। यही गोल अंत में निर्णायक साबित हुआ।

इस हार के साथ 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप 2026 अभियान समाप्त हो गया। मैच से पहले ही रोनाल्डो ने कहा था कि यह उनके करियर का आखिरी फीफा विश्व कप होगा। उन्होंने अपने विश्व कप करियर में 27 मैचों में 11 गोल किए और लगातार छह अलग-अलग विश्व कप संस्करणों में गोल करने वाले पहले पुरुष फुटबॉलर बनने का रिकॉर्ड बनाया।

स्पेन ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में लगातार छह मैचों में क्लीन शीट रखने वाली पहली टीम बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। अब स्पेन क्वार्टर फाइनल में अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से भिड़ेगा।

WORLD : डील करो वरना करेंगे…, खामनेई की अंतिम सलामी के बीच बौखलाए ट्रंप की ईरान को फिर धमकी

0

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ईरान में उनके मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का कई दिनों तक चलने वाला अंतिम संस्कार हो रहा है.

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को फिर धमकी दी है. ट्रंप ने सोमवार (लोकल टाइम) को दो टूक कहा, ‘या तो वे हमारे साथ समझौता कर लें या फिर हम उनका काम तमाम कर देंगे.’ यूएस प्रेसिडेंट की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ईरान में उनके मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का कई दिनों तक चलने वाला अंतिम संस्कार हो रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने टीवी इंटरव्यू के दौरान जोर देते हुए कहा, वह किसी भी तरह जीतेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम या तो एक समझौता करेंगे या फिर काम को पूरा करके रहेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि ईरान को खत्म करना बहुत आसान होगा, इसमें कोई मुश्किल नहीं आएगी. ट्रंप ने आगे कहा कि वह एक डील करना पसंद करेंगे, क्योंकि वह नहीं चाहते हैं कि ईरान के 9.1 करोड़ लोग प्रभावित हों, लेकिन अगर वह चाहें तो एक घंटे में ईरान के सारे ब्रिज और पावर ग्रिड तबाह कर सकते हैं.

ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ने ईरान में घुसकर केवल इसीलिए कार्रवाई की थी, क्योंकि हम ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मैं सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता, लेकिन यह सत्ता परिवर्तन ही है. उन्होंने फिर दोहराया कि उन्होंने ईरानी नेवी के जहाजों और वायु सेना के सभी विमानों को नष्ट कर दिया था.

उन्होंने यह भी कहा, ‘यूएस की पॉवरफुल नेवी ने अब तक की सबसे बड़ी नाकाबंदी लगाई और दो महीने तक एक भी जहाज नाकाबंदी को पार नहीं कर सका. फिर हम शायद एक समझौते के करीब पहुंचे, इसलिए हमने नाकाबंदी में ढील दी. मुझे नहीं पता लेकिन शायद हम एक समझौते पर पहुंच जाएं.’ ट्रंप ने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद तेल की कीमतों में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ.

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम सलामी सोमवार (6 जुलाई) सुबह तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर से शुरू हुई. यात्रा की शुरुआत ईरान का राष्ट्रगान बजाकर की गई. हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम सुबह से ही सड़कों पर जुटने लगा. खामेनेई के ताबूत को तेहरान के प्रमुख मार्गों से ले जाया जाएगा. इस दौरान सीनियर सरकारी अफसर, धार्मिक नेता और सेना के टॉप अधिकारी भी मौजूद रहे.

ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम और सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी के मुताबिक, यह ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक जमावड़ा है. तेहरान से होते हुए जनाजा पवित्र शहर कोम पहुंचेगा, जहां पार्थिव शरीर को दफन करने की अंतिम रस्में अदा की जाएंगी.

BUSINESS : माइक्रोसॉफ्ट ने एक झटके में खत्म कीं 4800 नौकरियां, AI निवेश के बीच क्यों उठाया बड़ा कदम?

अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी (Microsoft Layoffs) का फैसला किया है। यह कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 2.1 फीसदी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर तेजी से बढ़ते निवेश और कारोबार में दक्षता बढ़ाने की रणनीति के तहत कंपनी ने यह कदम उठाया है।

टेक सेक्टर में AI पर भारी खर्च के बीच छंटनी का यह नया दौर लगातार जारी है। इस साल अमेजन और मेटा (Amazon Meta Layoffs) भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं।

अनुमान है कि बड़ी टेक कंपनियां 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 700 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करेंगी। ऐसे में कंपनियों पर AI से बेहतर रिटर्न हासिल करने और बढ़ती लागत को नियंत्रित करने का दबाव भी बढ़ रहा है।

माइक्रोसॉफ्ट ने सोमवार को यह घोषणा ऐसे समय की है, जब कंपनी के शेयर इस साल दबाव में रहे हैं। 2026 की पहली छमाही में माइक्रोसॉफ्ट का शेयर करीब 23 फीसदी गिर चुका है। यह 2022 के बाद उसका सबसे खराब पहला छह महीनों का प्रदर्शन माना जा रहा है।

इससे पहले भी कंपनी 2026 में अमेरिका में अपने करीब 7 फीसदी कर्मचारियों, यानी लगभग 9,000 लोगों को स्वैच्छिक सेपरेशन (Voluntary Buyout) का ऑफर दे चुकी है। माइक्रोसॉफ्ट हर साल जून में वित्त वर्ष खत्म होने के बाद नए बजट और खर्च की योजना बनाते समय कर्मचारियों की संख्या में बदलाव करती रही है।

हालांकि AI की बढ़ती मांग से माइक्रोसॉफ्ट के Azure Cloud कारोबार को लगातार फायदा मिल रहा है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के AI मॉडल बेचने वाला एक्सक्लूसिव प्लेटफॉर्म था। लेकिन AI सेवाओं के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने की लागत कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव डाल रही है।

2026 के लिए $190 अरब के खर्च का अनुमान
कंपनी ने अप्रैल में चालू तिमाही के लिए Azure की बिक्री का अनुमान वॉल स्ट्रीट की उम्मीदों से बेहतर बताया था। साथ ही 2026 के लिए करीब 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान भी जारी किया, जो बाजार के अनुमान से काफी ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब कई नियमित कारोबारी कामों को ऑटोमेट कर रहा है। इससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर बिजनेस पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से मेमोरी चिप्स महंगे होने के कारण Microsoft को Xbox कंसोल की कीमतें भी बढ़ानी पड़ी हैं, जबकि इसकी मांग पहले से ही कमजोर बनी हुई है।

NATIONAL : पंजाब कांग्रेस में होगी टूट!: राहुल के खास चन्नी नाराज, रंधावा शाह से मिले; चुनाव से पहले होगा बड़ा खेला

0

पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुरों ने पार्टी की फूट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राहुल गांधी के खास माने जाने वाले पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी हाईकमान के फैसले से नाराज हो गए हैं।

जिस दिन पंजाब में बगावत हुई उसी दिन सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलते हैं और इस पूरे प्रकरण पर पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों कहते हैं कि भाजपा में सबका स्वागत है।

सूबे में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस में बगावत की टाइमिंग ने पार्टी के समक्ष एक बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने सितंबर 2021 में अंदरूनी राजनीतिक विवाद और कलह के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस्तीफा लेकर दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का सीएम बनाया था। आज वही पूर्व सीएम चन्नी राहुल गांधी के फैसले को चुनौती दे रहे हैं।

कई नाखुश नेता भाजपा के संपर्क में
शुक्रवार को जो घटनाक्रम हुआ उससे सूबे की सियासत में बड़े खेल की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। उधर, भाजपा सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के कई नाखुश नेता भाजपा के संपर्क में हैं। दरअसल, भाजपा पंजाब में अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में लगी है। सत्ता में आने के लिए भाजपा हर तरह की रणनीति पर काम करने की तैयारी में है क्योंकि पार्टी जानती है कि पंजाब में उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अभी सूबे में भाजपा के केवल दो ही विधायक हैं।

ढिल्लों बोले-भाजपा में सबका स्वागत
सात महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसी स्थिति में पंजाब कांग्रेस में एक बड़ी कलह छिड़ जाने को भाजपा अपने लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं देख रही है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी जून 2022 से पहले कांग्रेस के बड़े नेता और दो बार के विधायक रहे हैं।

लिहाजा कई कांग्रेसी नेताओं के गैर सियासी संबंध आज भी उनके साथ बहुत अच्छे हैं। चूंकि अब कांग्रेस में बगावत के सुर उठ रहे हैं तो लाजिमी है कि ढिल्लों भी नाराज नेताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। शुक्रवार को कांग्रेस में बगावत संबंधी प्रकरण पर ढिल्लों ने साफ कहा कि भाजपा एक बहुत बड़ा परिवार है और यहां आने वाले हर नेता का स्वागत है।

ढिल्लों के अलावा सूबे के कई कांग्रेसी नेता राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा के भी संपर्क में हैं। उधर, सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा की शुक्रवार को ही शाह से मीटिंग की टाइमिंग ने भी अटकलों का बाजार खासा गर्म रखा। हालांकि इन सभी अटकलों को रंधावा ने खारिज कर दिया है।

कांग्रेस हाईकमान के पंजाब में पार्टी नेतृत्व को न बदलने के फैसले के बाद चन्नी ने कुछ विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों समेत 60 से अधिक नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को दबाव में लेने की कोशिश की है।

हालांकि इसी मसले पर कांग्रेस हाईकमान ने पिछले दिनों पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठक कर उन्हें नेतृत्व न बदलने के फैसले पर संतुष्ट किया था मगर उसके बावजूद बगावत हो गई। ऐसी स्थिति में अब कांग्रेस हाईकमान का रुख अहम होगा। यदि हाईकमान ने फैसला नहीं बदला तो चन्नी गुट के नेता बड़ा फैसला ले सकते हैं और ऐसे में भाजपा इस पूरे प्रकरण में अपना सियासी फायदा उठाने में चूकेगी नहीं।

हाईकमान पीछे नहीं हटेगा : वैद
पंजाब में 16 में से 5 विधायक ही पूर्व सीएम चन्नी की बैठक में पहुंचे। सात सांसदों में से चन्नी और वड़िंग को छोड़ दिया जाए तो अन्य पांच सांसदों ने भी इस बैठक से दूरी बनाए रखी। इसी तरह कई पूर्व विधायक और अन्य पूर्व मंत्री, सांसद व अन्य नेता भी चन्नी की बैठक में नहीं गए। इन सभी नेताओं का मौन हाईकमान के साथ खड़े रहने का इशारा कर रहा है।

पंजाब कांग्रेस के एससी विंग के अध्यक्ष व पूर्व विधायक कुलदीप वैद कहते हैं कि यह घटनाक्रम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि किसी को हाईकमान के फैसले पर ऐतराज था तो केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर वहां अपनी बात रखी जा सकती थी। चन्नी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में तो फैसले पर सहमति जताई थी तो अब अचानक क्या हो गया। वैद कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में कौन, किसके लिए क्या रोल प्ले कर रहा है, हाईकमान सब जानता है। उनके अनुसार हाईकमान न तो कमजोर है न ही पीछे हटने वाला है। यह प्रेशर पाॅलिटिक्स उचित नहीं है।

NATIONAL : जलालाबाद नहीं, अब परशुरामपुरी कहिए… योगी सरकार ने बदला यूपी के इस बड़े जिले में शहर का नाम

0

उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख शहर का नाम बदल दिया है। सूबे के शाहजहांपुर का जलालाबाद शहर अब परशुरामपुरी के नाम से जाना जाएगी। इस संबंध में बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से मंजूरी देते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र जारी कर दिया गया। यूपी सरकार ने गृह मंत्रालय को भेजे अपने प्रस्ताव में कहा था कि शाहजहांपुर का जलालाबाद शहर भगवान परशुराम की जन्मस्थली के तौर पर जाना जाता है। परशुराम का प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर भी शहर में मौजूद है। ऐसे में जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का प्रस्ताव नगर पालिका परिषद की बैठक में पारित कर दिया गया है।

गृह मंत्रालय की तरफ से आई इस मंजूरी में कहा गया है कि 27 जून 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से जलालाबाद का नाम बदलने के लिए पत्र भेजा गया था। केंद्र सरकार को शाहजहांपुर के इस शहर का नाम परशुरामपुरी करने में कोई आपत्ति नहीं है। पत्र में आगे कहा गया है कि यूपी सरकार से गृह मंत्रालय का अनुरोध है कि वह नए नाम की वर्तनी देवनागरी (हिंदी), रोमन (अंग्रेजी) और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखते हुए अधिसूचना जारी करे।

जलालाबाद का नाम बदले जाने पर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से लोकसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर स्थित जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ करने की अनुमति देने पर गृह मंत्री अमित शाह का हार्दिक धन्यवाद और आभार।’

जितिन प्रसाद ने आगे लिखा है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार, वंदन और अभिनंदन। आपके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आए इस निर्णय ने सम्पूर्ण सनातनी समाज को गर्व का क्षण प्रदान किया है। भगवान परशुराम जी के चरणों में कोटि-कोटि नमन। आपकी कृपा मात्र से ही इस पुनीत कार्य में निमित्त बन सका। आपकी कृपा दृष्टि संपूर्ण जगत पर बनी रहे।’

NATIONAL : दिल्ली में रोजाना निकलने वाले कचरे से बनी गैस से चल सकती हैं 17 हजार कारें, CSE की रिपोर्ट में दावा

0

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे से 17 हजार कारें चलाई जा सकती हैं। दिल्ली में हर
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। क्या आपको पता है, यदि कचरे का सदुपयोग कर लिया जाए तो उससे आपकी गाड़ी का ईंधन भी बन सकता है। इतना ही नहीं दिल्ली-एनसीआर को वायु प्रदूषण जैसे बड़े संकट से भी निजात मिल सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार घरों से निकलने वाला कचरा ईंधन का बड़ा स्रोत है।

लेकिन देश की राजधानी दिल्ली इस दिशा में इसलिए पस्त हो जाती है क्योंकि यहां अब तक भी गीला-सूखा कचरा दिखावों और कागजों में ही अधिक अलग होता है। लोगों की खराब आदतें और सरकारी एजेंसियों की अन्यमनस्कता के चलते इस पर कभी सफल परिणाम नहीं निकल सके।

हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की ‘बायो सीएनजी फ्राम म्युनिसिपल सालिड वेस्ट’ पर एक रिपोर्ट आई है जिसके अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन जितना कचरा निकलता है उससे रोजाना करीब 17 हजार कार चलाई जा सकती हैं। सीएसई की यह रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में हर दिन 5,210 टन गीला कचरा पैदा होता है।


इस कचरे से हर दिन 174 टन यानी एक लाख 74 हजार किलो बायो-सीएनजी तैयार की जा सकती है। राजधानी में यदि किसी वाहन चालक की कार दिनभर औसतन दस किलो सीएनजी खर्च करती है तो इस हिसाब से 17,400 कारों के लिए ईंधन की जरूरत पूरी हो सकती है। इसी तरह यदि इस कचरे से एलपीजी गैस बनाई जाए तो 94 टन एलपीजी तैयार होगी, जिससे हर रोज 6,600 सिलिंडर भरे जा सकते हैं।

गीले कचरे से खाद बनाने की तुलना में बायो सीएनजी बनाना कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल है। रिपोर्ट बताती है कि गीले कचरे से खाद बनाने के दौरान आसपास के लोग बदबू की शिकायत करते हैं। इसका सही प्रबंधन नहीं होने की स्थिति में कचरा सड़ते समय उससे निकलने वाला द्रव (लिचेट) भूजल में जाकर उसे जहरीला बनाता है।

इसकी तुलना में बायो सीएनजी संयंत्र के पास बदबू नहीं होती व खाद बनाने वाले संयंत्र की तुलना में यह दो से तीन गुना कम जमीन पर ही काम कर सकता है। बड़े स्थानीय निकायों को इस तरह के संयंत्र लगाने चाहिए जिससे बायो-सीएनजी का उत्पादन किया जा सके।

साथ ही शहरों को हर तीन साल में अपने यहां से निकलने वाले कचरे का आडिट भी कराना चाहिए। इसके जरिए पता लगाया जाना चाहिए कि किसी खास शहर में कितना और कैसा कचरा पैदा हो रहा है। उसी अनुसार उसके प्रबंधन की योजना बनाई जाए।

विदेश में : जर्मनी, कनाडा और अमेरिका में भी इसका सफल प्रयोग हो रहा।
दिल्ली ही नहीं, सभी बड़े शहरों को गीले कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए खाद से बायो सीएनजी बनाने की तरफ शिफ्ट होना चाहिए। शहरी स्थानीय निकाय अपने कचरे से ईंधन बनाकर खुद के वाहनों की ईंधन जरूरतों को भी पूरा कर सकते हैं। इससे ईंधन का खर्च बचेगा और कचरे का प्रबंधन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। -कैफी जावेद, ठोस कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ, सीएसई

सूखे और गीले कचरे के बेहतर निपटान की दिशा में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। बायोगैस प्लांट हालांकि एक पुरानी तकनीक है, लेकिन दिल्ली में अभी तक इस पर ढंग से काम नहीं किया गया। कचरे के स्मार्ट प्रबंधन से प्रदूषण भी कम होगा और ईंधन के नए स्रोत भी मिलेंगे। लैंडफिल साइट्स के अलावा गोशालाओं के गोबर से भी गैस बनाई जा सकती है। – डॉ. जेपीएस डबास, पूर्व प्रधान विज्ञानी, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा

देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित बायो सीएनजी प्लांट की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य प्रतिदिन 28 टन सीएनजी उत्पादन का है। ऐसा करने के लिए हमें एजेंसी को रोजाना 800 टन गीला कचरा देना होगा। इसकी तैयारी चल रही है। -रोहित सिसोनिया, अपर आयुक्त इंदौर नगर निगम

NATIONAL : भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग पर खरगे ने सरकार से पूछे तीखे सवाल; कन्हैया ने शिक्षा पर कैसे घेरा?

0

कांग्रेस ने वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी ने कहा कि सरकारी नीतियों से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई है, जबकि पासपोर्ट सेवाएं महंगी और वीजा व्यवस्था कमजोर हुई है। कांग्रेस ने विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या पर भी सवाल उठाए। पढ़िए रिपोर्ट-

वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत की स्थिति को को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कथित पुराने बयान का जिक्र किया और उसको लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले दावा किया था कि विदेश जाने और वहां रहने वाले लोग भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को जानते हैं।

उन्होंने कहा, सेवाओं में सुधार करने के बजाय मोदी सरकार ने पासपोर्ट बनवाना महंगा कर दिया है। उनके अनुसार, सामान्य पासपोर्ट का शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि तत्काल सेवा का शुल्क बढ़कर 5,000 रुपये हो गया है।

खरगे ने कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अभी तक कोविड महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि 2019 में 1.09 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए थे। जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 99.5 लाख रह गई।

उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार इस कमी को छिपाने के लिए एनआरआई (प्रवासी भारतीय) के आगमन को भी विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों में जोड़ रही है? खरगे ने यह भी पूछा, भारत का आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल अब भी इतना पुराना और जटिल क्यों है कि वह 1990 के दशक की वेबसाइट जैसा लगता है?

उन्होंने कहा, ‘अतिथि देवो भवः’ की भूमि भारत में कोई भी पर्यटकों का इस तरह स्वागत नहीं करना चाहता।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, अगर भारतीय पासपोर्ट की ताकत कम हुई है। पर्यटन अब तक पूरी तरह नहीं संभला है। वीजा सेवाएं कमजोर हैं और लोगों को खराब सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, तो फिर सरकार जिस वैश्विक सम्मान का प्रचार करती है, वह आखिर कहां है? उन्होंने कहा कि सच्चाई कुछ और है और मोदी सरकार की वजह से भारत की छवि प्रभावित हो रही है।

NATIONAL : असम राइफल्स के काफिले पर मणिपुर में हमला, दो जवान बलिदान; घात लगाकर किए गए हमले में पांच घायल

0

मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई है। शुक्रवार को राज्य के बिष्णुपुर जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने असम राइफल्स के काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में असम राइफल्स के दो जवान बलिदान हो गए, जबकि पांच घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में दो जवानों बलिदान हो गए, जबकि कम से कम पांच अन्य जवान घायल हुए हैं। इस हमले ने एक बार फिर राज्य में सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में हुआ। असम राइफल्स के जवानों का वाहन इंफाल से बिष्णुपुर की ओर जा रहा था। तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।

मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमलावरों ने अचानक गोलीबारी की, जिसमें एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दो जवान, जिनमें एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) और एक जवान शामिल हैं, मौके पर ही बलिदान हो गए। जबकि पांच जवान गंभीर रूप से घायल हैं।’ घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत इलाज के लिए भेजा गया। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उनमें से एक की स्थिति नाजुक है।

‘सफेद वैन में सवार होकर भाग निकले आंतकी’
मामले में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि व्यस्त सड़क पर जवानों के वाहन पर हमला करने के बाद हमलावर एक सफेद वैन में सवार होकर भाग निकले। जवानों ने संयम बरतते हुए जवाबी कार्रवाई की ताकि कोई नागरिक हताहत न हो। सुरक्षा बल ने हमले के पीछे छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इस घटना को लेकर गुवाहाटी के रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि शाम लगभग 5:50 बजे, 33 असम राइफल्स के जवानों की एक वाहन-आधारित टुकड़ी अपने पटसोई कंपनी ऑपरेटिंग बेस से नाम्बोल कंपनी ऑपरेटिंग बेस की ओर बढ़ रही थी। मणिपुर के विमुक्त क्षेत्र, नाम्बोल सबल लेईकाई में, हाईवे पर अज्ञात आतंकवादियों ने इस टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया। इस कार्रवाई में, असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए और पांच घायल हो गए, जिन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। अभी तक, किसी भी समूह ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। घटना में शामिल आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी है।

हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
मणिपुर पिछले कुछ समय से हिंसा और तनाव की चपेट में है। ऐसे में इस ताजा हमले ने राज्य में शांति बहाली के प्रयासों को चुनौती दी है। अधिकारियों का कहना है कि हमले के पीछे किन संगठनों का हाथ है, इसकी जांच की जा रही है। असम राइफल्स पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीमा सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात सबसे अहम अर्धसैनिक बल है। जवानों पर इस तरह का हमला सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस घटना पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार बातचीत की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और हमलावरों को पकड़ने के लिए संयुक्त अभियान की योजना बनाई जा रही है।

पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह ने जताया दुख
वहीं इस घटना पर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘नाम्बोल सबल लेईकाई में हमारे बहादुर 33 असम राइफल्स के जवानों पर हुए हमले की खबर सुनकर मैं बहुत दुखी हूं। दो जवानों की जान जाना और कई अन्य का घायल होना हम सभी के लिए एक गहरा आघात है। शहीदों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। उनका साहस और बलिदान हमेशा हमारे दिलों में रहेगा। इस जघन्य अपराध के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।’

NATIONAL : 2019 से जेल में बंद नीरव मोदी के पास कानूनी विकल्प खत्म, क्या जल्द लाया जाएगा भारत?

0

भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को अंतिम कानूनी जंग में भी शिकस्त मिली है। माना जा रहा है कि अब नीरव मोदी को जल्द भारत लाया जा सकता है। दरअसल, यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट ने एक अहम फैसले में किसी भी तरह की राहत देने से इन्कार कर दिया।

13,000 करोड़ रुपये से अधिक के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का भगोड़ा नीरव मोदी यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में अंतिम कानूनी जंग हार गया है। इसके साथ ही उसके भारत प्रत्यर्पण में बची आखिरी कानूनी रुकावट भी दूर हो गई। सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन सरकार की ओर से नीरव के प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और उसे जल्द ही भारत लाया जा सकता है।

यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में कैसे पहुंचा मुकदमा?
ब्रिटेन की अदालतों में अपील के सभी रास्ते खत्म होने जाने के बाद नीरव ने इस साल अप्रैल में स्ट्रॉसबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने मोदी की याचिका को गुमनाम रखने की अनुमति दी थी। इससे पूरी प्रक्रिया गोपनीय बनी रही। यह कोर्ट ऐसे मामलों के लंबित रहने के दौरान उनसे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है।

क्या भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नीरव को कोई राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रत्यर्पण को चुनौती देने के उसके सारे कानूनी रास्ते अब आधिकारिक रूप से बंद हो गए हैं। उसने यह याचिका तब दायर की गई थी जब ब्रिटेन हाईकोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण को चुनौती देने की इजाजत देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि जेल की स्थितियों और व्यवहार के बारे में भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं।

2019 से जेल में बंद है, भारत प्रत्यर्पण कब?
नीरव मार्च 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। राजनयिक सूत्रों ने यह भी बताया कि ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से उसे सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है।

NATIONAL : चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, 8 आरोपियों को जेल… राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में क्या-क्या हुआ?

0

अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है. इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे, आठों आरोपियों की न्यायिक हिरासत, 79.85 लाख रुपए की बरामदगी और सीसीटीवी फुटेज में चोरी के सबूत सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी केस में दिन-प्रतिदिन नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. शुक्रवार को भी तीन नए घटनाक्रम हुए, जिसमें पहला सुबह-सुबह ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा हुआ. इसके बाद दोपहर में सभी आठों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इसके तीसरा घटनाक्रम- यह पता चला कि सात आरोपियों के पास से 79.85 लाख कैश मिला है, जबकि 8वें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से कुछ नहीं मिला. बता दें कि 25 जून को ट्रस्ट की तरफ से श्रीराम जन्मभूमि कोतवाली में चंदा चोरी के आरोप में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर केस दर्ज कराया गया था. FIR में कुछ अज्ञात का भी नाम है. आइए जानते हैं आज का पूरा घटनाक्रम…

अयोध्या के चर्चित राम मंदिर चंदा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है. इस बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो प्रमुख सदस्यों चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. चंपत राय जहां ट्रस्ट महासचिव थे तो वहीं अनिल मिश्रा ट्रस्टी (ट्रस्टी वह व्यक्ति या संस्था होती है, जिसे किसी संपत्ति, पैसे या व्यवसाय को संभालने की कानूनी जिम्मेदारी सौंपी जाती है) थे. चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को SIT की प्रारंभिक जांच और सीएम योगी के कड़े रुख से जोड़कर देखा जा रहा है.

- Advertisement -

News of the Day