Sunday, September 20, 2026
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BUSINESS : त्योहारों से पहले वापस लौटेगी चीनी की मिठास, जमाखोरी रोकने और आयात बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा एक्शन

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Sugar Price : सरकार ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसके लिए कारोबारियों की स्टॉक लिमिट तय की गई है. साथ ही बाहर से चीनी आयात करने का भी प्लान है. इतना ही नहीं, सरकार इस बार पेराई सत्र जल्दी शुरू करने की भी तैयारी कर रही है.

नई दिल्ली. देश के कई शहरों में चीनी के भाव 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए हैं. अब चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. पिछले एक महीने में चीनी के औसत दाम करीब 48.18 से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. सरकार का कहना है कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.

सरकार ने साफ किया है कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना नहीं है. एथनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% से घटकर 2025-26 में 9% रह गई है. सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहा है. गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी, ज्यादा बारिश और जलभराव से नुकसान हुआ है. इसके साथ ही त्योहारों से पहले मांग बढ़ी है और कुछ जगहों पर जमाखोरी व सट्टेबाजी ने भी कीमतों पर असर डाला है.

अनुमान से कम रहा उत्पादन
इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 LMT उत्पादन का अनुमान लगाया था. सरकार का कहना है कि देश में इतना चीनी स्टॉक मौजूद है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है. हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया में भी चीनी की सप्लाई प्रभावित हुई है. 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई है. इसका मतलब है कि दो महीने में ही कीमत में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

सरकार के मुताबिक, भारत में सामान्य तौर पर हर साल 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 LMT है. ज्यादा उत्पादन होने पर चीनी का स्टॉक बढ़ जाता है और मिलों का पैसा फंस जाता है, जिससे किसानों को गन्ने का भुगतान भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में अतिरिक्त चीनी से एथेनॉल बनाने की नीति से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर यह है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के गन्ना बकाये का 97% भुगतान किसानों को किया जा चुका है.

जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के बड़े कदम
1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है.
1 सितंबर से बड़े खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे.
केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच कर रही हैं.
घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है.
राज्यों और चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के लिए कहा गया है.
सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से ज्यादा हो सकता है.
सरकार उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों दोनों के हितों का ध्यान रखेगी और चीनी के दाम, स्टॉक और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी.

NATIONAL : 6 साल में साइबर क्राइम की 54 लाख शिकायतें, FIR सिर्फ 2.4 प्रतिशत पर

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दिल्ली। देश में साइबर अपराध की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इनके मामलों में एफआईआर दर्ज होने की दर बेहद कम है। 2019 से 2024 के बीच छह साल में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर करीब 53.93 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से सिर्फ 1.30 लाख मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। यानी कुल शिकायतों का करीब 2.4% ही एफआईआर में बदला।

राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट में साइबर अपराध से जुड़े ये आंकड़े सामने आए हैं। 31 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल हैं। समिति ने साइबर अपराध की शिकायतों पर कार्रवाई और अपराध के आंकड़ों को दर्ज करने के तरीके को लेकर चिंता जताई है।

छह साल में 78 गुना बढ़ीं शिकायतें

रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराध की शिकायतों में छह साल के दौरान करीब 78 गुना बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद शिकायत और एफआईआर के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। समिति ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस कार्रवाई और फॉलो-अप में देरी का मुद्दा भी उठाया।

FIR नहीं होने से अपराध के आंकड़े प्रभावित

समिति ने कहा कि कई मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय गैर-संज्ञेय रिपोर्ट तक सीमित रहती है। इससे गंभीर अपराध आधिकारिक आंकड़ों में कम दिखाई दे सकते हैं और पीड़ितों को न्याय मिलने में भी परेशानी होती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्यों की ओर से NCRB को अपराध के आंकड़े भेजने में डेढ़ से दो साल तक की देरी होती है। इससे पुलिसिंग, सुरक्षा नीति और बजट तैयार करने में पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।

एक अपराध के साथ कई मामले दर्ज नहीं होते

समिति ने NCRB के ‘प्रिंसिपल ऑफेंस रूल’ का भी जिक्र किया। इसके तहत किसी घटना में कई अपराध होने पर मुख्य अपराध को ही दर्ज किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अपहरण के बाद लूट और वीडियो ऑनलाइन लीक होने की स्थिति में रिकॉर्ड में सिर्फ अपहरण मुख्य अपराध के रूप में दर्ज हो सकता है। इससे साइबर अपराध, लूट या अन्य जुड़े अपराधों का अलग डेटा सामने नहीं आ पाता।

समिति के मुताबिक, ऐसे मामलों में सेकेंडरी अपराधों का डेटा छूटने से देश में साइबर अपराध की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आती।

NATIONAL : मुंबई में गणेश विसर्जन की तैयारी पूरी:BMC ने 278 लोकेशन पर 383 तालाब बनाए, 25 हजार वॉलेंटियर तैनात

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मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान मूर्तियों के इको-फ्रैंडली विसर्जन के लिए BMC ने 278 जगहों पर 383 तालाब बनाए हैं। शहर में विसर्जन की व्यवस्था संभालने के लिए 25 हजार कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

ज्यादातर सार्वजनिक गणेश मंडलों की मूर्तियों का विसर्जन आखिरी दिन होगा। घरों में रखी मूर्तियों का विसर्जन उत्सव के दूसरे दिन से शुरू हो गया था।

दरअसल, अलग-अलग परंपराओं के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन स्थापना के डेढ़ दिन और पांच दिन बाद किया जाता है।

12 दिन का गणेश उत्सव 14 सितंबर को शुरू हुआ था और 25 सितंबर को खत्म होगा।

BMC ने 6 फीट से बड़ी मूर्तियों के लिए 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थलों पर जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें 44 समुद्र तट और जेटी, जबकि 23 प्राकृतिक झीलें शामिल हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के निर्देशों के मुताबिक, 6 फीट तक की मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में करना जरूरी है।

BMC ने नागरिकों से प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों का इस्तेमाल करने की अपील की है।

समुद्र तटों पर रेत के ऊपर 1,194 स्टील प्लेटें बिछाई गई हैं। चौपाटियों और समुद्र तटों पर 23 जर्मन राफ्ट्स, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस और 10 मोटरबोट तैयार रखी गई हैं।

लाइफगार्ड और निगरानी की व्यवस्था

BMC ने 1,132 लाइफगार्ड तैनात किए हैं। पूजा सामग्री के कचरे के लिए 498 निर्माल्य कलश और 326 निर्माल्य डंपर लगाए गए हैं। भीड़ पर नजर रखने के लिए 228 कंट्रोल रूम और 75 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए गए हैं।

प्रमुख विसर्जन स्थल स्वराज्यभूमि (गिरगांव चौपाटी) पर BMC ने 12 कृत्रिम तालाब और 20 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए हैं। यहां 22 राफ्ट्स, 90 टॉयलेट, 3 एम्बुलेंस और करीब 1,000 कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।

विसर्जन मार्गों पर मरम्मत का काम

विसर्जन मार्गों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 281 जगहों पर रास्ते में बाधा बन रहे केबल हटाए गए हैं। 506 सड़कों पर 4,279 गड्ढे और 171 ड्रेनेज कवर ठीक किए गए हैं। 515 जगहों पर पेड़ों की छंटाई भी की गई है।

मुंबई के समुद्र तट पर ब्लू-बटन जेलीफिश और स्टिंगरे मौजूद हैं। इसलिए समुद्र में मूर्ति विसर्जन के लिए उतरते समय खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

BMC के आपदा प्रबंधन विभाग ने हर सार्वजनिक गणेश मंडल के कम से कम 8 से 10 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया है। इन स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने, बिजली हादसों, आग और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी गई है। उन्हें फर्स्ट एड और CPR का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

NATIONAL : ChatGPT से नकल… छात्र की आत्महत्या के बाद IIT बॉम्बे में प्रदर्शन, संस्थान का भी आया बयान

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आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या से कैंपस के छात्रों में काफी गुस्सा है. छात्र पर परीक्षा में ChatGPT के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं, हालांकि प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई से इनकार किया.

IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सेकंड इयर के स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया. उसके सुसाइड के बाद आईआईटी पवई में कैंपस के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. उन सभी के बीच सुसाइड के मामलों को लेकर बहुत आक्रोश है. इस मामले पर DCP दत्तात्रेय नलावड़े ने कहा, ” IIT पवई में एक छात्र ने सुसाइड कर लिया. इसके बाद, कुछ IIT छात्र इकट्ठा हुए और अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे.”

उन्होंने कहा, “IIT प्रशासन उनसे बातचीत करके कोई अच्छा समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है. कैंपस में सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं और मामले की जांच की जा रही है.”

ChatGPT पर अपलोड किया था क्वेश्चन पेपर
दरअसल, सुसाइड के एक दिन पहले परीक्षा के दौरान छात्र को परीक्षा हॉल में मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था. उसने क्वेश्चन का जवाब पाने के लिए क्वेश्चन पेपर को ChatGPT पर अपलोड किया था. IIT बॉम्बे के मुताबिक, इस मामले की जानकारी होने के बाद छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई. इंस्ट्रक्टर और डिपार्टमेंट के हेड ने छात्र से इस मामले पर बात भी की थी. उन्होंने उसे समझाया और भरोसा दिलाया कि इस घटना का उसके एकेडमिक करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.

इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया. बाद में शाम को वह अपने कमरे में मृत पाया गया. IIT बॉम्बे ने छात्र की मौत पर गहरा दुख जाहिर किया है. संस्थान की ओर से छात्र के दोस्तों, सहपाठियों, शिक्षकों और इस घटना से प्रभावित दूसरे लोगों को जरूरी सहयोग दिया जा रहा है. संस्थान ने कहा है कि छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारी कर रहे हैं.

कहां का रहने वाला था छात्र?
मुंबई के पवई में IIT बॉम्बे के छात्र की आत्महत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने बताया कि पवई पुलिस ने ADR के तहत केस दर्ज किया है और आगे की जांच चल रही है. मृतक छात्र साहिल वाकोडे महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला था. उसका परिवार मुंबई पहुंच चुका है. पुलिस IIT बॉम्बे के छात्रों के बयान भी दर्ज कर रही है.अभी तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ है.

छात्रों ने क्या लगाया आरोप?
छात्रों का आरोप है कि जिस छात्र पर नकल करने का आरोप था, उसे एक साल के लिए सस्पेंड करने की धमकी दी गई थी. उन्होंने कहा कि अगर सस्पेंड किया जाता, तो छात्र को हॉस्टल खाली करना पड़ता और कैंपस के बाहर रहना पड़ता. छात्रों के अनुसार, ऐसी कार्रवाई से छात्र का इंजीनियरिंग कोर्स चार साल से बढ़कर पांच साल या उससे ज्यादा का भी हो सकता था.

DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक

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दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 की मतगणना शुरू हो गई है. जानिए कौन जीतेगा अध्यक्ष पद और क्या हैं ताजा अपडेट. विजय जुलूस पर लगी रोक.
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU Election 2026) के लिए वोटों की गिनती शनिवार को शुरू हो गई है. नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में मतगणना चल रही है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के नतीजे आज घोषित किए जाने की उम्मीद है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था. इस बार मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी के 52 केंद्रों पर दो चरणों में कराया गया.

20 उम्मीदवार मैदान में
DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं.

अध्यक्ष पद पर ABVP ने यश डबास और NSUI ने विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया था. उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP की ओर से इशू मौर्य, जबकि NSUI की ओर से वीर छत्रथ मैदान में थे.

ABVP ने 4-0 से जीत का किया दावा
ABVP की DUSU वाइस प्रेसिडेंट पद की उम्मीदवार इशू मौर्य ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “हमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों पर भरोसा है. हमें पूरा यकीन है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) 4-0 से जीत हासिल करेगी. अगर तुलना करें, तो इस बार वोटिंग पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हुई है… उन्हें ABVP के हर उम्मीदवार और खुद संगठन पर भरोसा है. इसीलिए मुझे पूरा यकीन है कि इस बार ABVP निर्णायक बहुमत से जीतेगी.”

1,000 EVM की हुई थी व्यवस्था
चुनाव के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की व्यवस्था की गई थी. इनमें से 960 मशीनों का इस्तेमाल मतदान के लिए किया गया, जबकि 40 को रिजर्व में रखा गया था.

पहले चरण में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक मतदान हुआ. शाम के छात्रों के लिए दूसरे चरण में दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक वोट डाले गए.

कॉलेज चुनावों में ABVP के जीत के दावे
केंद्रीय नतीजों से पहले ABVP ने कई कॉलेजों में अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है. संगठन के मुताबिक, अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग), डॉ बीआर आंबेडकर कॉलेज, भारती कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में उसके उम्मीदवारों ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है.

ABVP के अनुसार, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग) में उसके पैनल ने 6-0 से जीत दर्ज की। भारती कॉलेज में सभी आठ और शिवाजी कॉलेज में सभी छह पदों पर उसके उम्मीदवार विजयी रहे. हालांकि, ये दावे संगठन की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर लगाई रोक
DUSU चुनाव के नतीजों से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी थी. यह रोक सड़कों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल में भी लागू होगी.

कोर्ट ने सभी छात्र संगठनों और चुनाव लड़ रहे 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर चुनाव आचार नियमों के कथित उल्लंघन पर जवाब भी मांगा है. अदालत ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी को Lyngdoh Committee की सिफारिशों और पहले के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में ‘एक्सप्लेनर’ लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी ‘हिंदुस्थान समाचार’ से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह ‘प्रभात खबर डॉट कॉम’ से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक ‘सक्सेस स्टोरीज’ लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग’ से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

Tamil Nadu: विधानसभा से चुनाव पहले गरमाया भाषा विवाद, उदयनिधि स्टालिन बोले- तमिलनाडु में हिंदी की कोई जगह नहीं

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तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हिंदी बनाम तमिल भाषा विवाद गरमाने लगा है। दरअसल, डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी भाषा को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कहा कि तमिल को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है।

तमिलनाडु के डिप्टी मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी भाषा को लेकर फिर साफ और सख्त रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हिंदी थोपने का विरोध कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लंबे इतिहास और आंदोलन से जुड़ा हुआ है।

‘1937 के आंदोलन से आज तक वही रुख’
उदयनिधि स्टालिन ने बताया कि सबसे पहला हिंदी विरोध आंदोलन 1937-38 में समाज सुधारक पेरियार ने शुरू किया था, जब स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य बनाने का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि (कलाईनार) भी 14 साल की उम्र में तिरुवरूर में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। स्टालिन ने याद दिलाया कि 21 फरवरी 1940 को सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा और हिंदी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई।

‘तमिल को किसी सहारे की जरूरत नहीं’
उन्होंने कहा कि कई लोग सवाल उठाते हैं कि जब देश के दूसरे राज्यों में हिंदी स्वीकार कर ली गई है, तो तमिलनाडु ही इसका विरोध क्यों करता है। इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि तमिल भाषा इतनी मजबूत और समृद्ध है कि उसे किसी दूसरी भाषा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। डिप्टी सीएम ने द्रविड़ आंदोलन की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीएमके ही वह पार्टी है जिसने राज्य में दो-भाषा नीति को लागू रखा और साफ कहा कि यहां हिंदी के लिए कोई जगह नहीं होगी।

‘तमिल को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने में डीएमके की अहम भूमिका’
उन्होंने यह भी दावा किया कि डीएमके ने ही राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु रखा और तमिल भाषा को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उदयनिधि स्टालिन के इस बयान को तमिलनाडु की भाषा राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में लंबे समय से हिंदी विरोध और क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा काफी संवेदनशील रहा है।

NATIONAL : बेंगलुरु से आई सबसे बड़ी खुशखबरी, वायुसेना को मिलेंगे नए तेजस और एचटीटी 40 फाइटर ट्रेनर, पवन हंस को ध्रुव एनजी

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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में भारतीय वायुसेना को नए लड़ाकू विमान सौंपने जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू की मौजूदगी में एलसीए तेजस ट्विन सीटर ट्रेनर और एचटीटी 40 विमान एयरफोर्स को मिलेंगे. इसके साथ ही पवन हंस लिमिटेड को आधुनिक ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर भी सौंपे जाएंगे.

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की ताकत में तगड़ा इजाफा होने जा रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में वायुसेना को एलसीए तेजस एफओसी ट्विन सीटर ट्रेनर और एचटीटी 40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपेगा. इस खास कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू मौजूद रहेंगे. इसके साथ ही पवन हंस लिमिटेड को ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर भी दिए जाएंगे. तेजस के नए ट्रेनर एयरक्राफ्ट से भारतीय पायलटों को आधुनिक फाइटर जेट उड़ाने की बेहतरीन ट्रेनिंग मिलेगी. वहीं ध्रुव हेलीकॉप्टर देश के सिविल एविएशन सेक्टर को और मजबूत करेगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह स्वदेशी तकनीक की दिशा में ऐतिहासिक कदम है.

  1. एलसीए तेजस ट्रेनर विमान में क्या है खास?
    एलसीए तेजस का एफओसी ट्विन सीटर एक एडवांस्ड फाइटर ट्रेनर विमान है. यह दो सीटों वाला सुपरसोनिक जेट है जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है. इसका मुख्य काम भारतीय वायुसेना के नए पायलटों को फाइटर जेट उड़ाने की ट्रेनिंग देना है. यह सिर्फ ट्रेनिंग के लिए ही नहीं बना है. जरूरत पड़ने पर यह जेट असली फाइटर प्लेन की तरह दुश्मनों पर हमला भी कर सकता है. इसमें आधुनिक ग्लास कॉकपिट और रडार सिस्टम मौजूद हैं. यह सटीक हथियारों और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को दागने में पूरी तरह सक्षम है.

एचटीटी-40 पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किया गया टर्बोप्रॉप ट्रेनर विमान है. इसका उपयोग वायुसेना के नए कैडेट्स को पहली स्टेज की बेसिक उड़ान सिखाने के लिए किया जाएगा. जब युवा पायलट पहली बार विमान उड़ाना सीखते हैं तो उनकी शुरुआत इसी विमान से होगी. इसमें आधुनिक डिजिटल स्क्रीन और एडवांस्ड सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं.

आपात स्थिति में पायलट को बचाने के लिए इसमें जीरो-जीरो इजेक्शन सीट मौजूद है. यह कम रफ्तार पर भी बेहतरीन संतुलन बनाए रखता है जिससे उड़ान की ट्रेनिंग काफी सुरक्षित हो जाती है.

  1. पवन हंस को मिलने वाला ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर कितना दमदार है?
    ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर देश के नागरिक उड्डयन सेक्टर के लिए बहुत बड़ा कदम है. यह एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर का आधुनिक सिविल वर्जन है. पवन हंस इसका इस्तेमाल वीआईपी मूवमेंट और दूरदराज के इलाकों में संपर्क बढ़ाने के लिए करेगा. इसके अलावा इसका उपयोग समुद्र में तेल निकालने वाले प्लेटफॉर्म्स तक राहत सामग्री और लोग पहुंचाने में किया जाएगा. इसमें दो ताकतवर इंजन लगे हैं जो खराब मौसम में भी सुरक्षित उड़ान तय करते हैं. इसका नया केबिन ज्यादा आरामदायक है और इसमें आधुनिक नेविगेशन उपकरण लगे हैं.

NATIONAL : FCRA संशोधन विधेयक 2026 संयुक्त संसदीय समिति को क्यों भेजा गया? जानिए संसद की इस प्रक्रिया का पूरा कानूनी मतलब

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विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा ने बहुमत से संसद की संयुक्त समिति को भेज दिया है। इसका उद्देश्य विधेयक की धाराओं की विस्तृत जांच, संबंधित पक्षों की राय और संभावित बदलावों पर विचार करना है, जिसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट देगी।

इन दिनों काफी चर्चा में रहे विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद में चल रही बहस के बीच लोकसभा ने इसे संसद की संयुक्त समिति (Joint Committee of Parliament) को भेजने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से विधेयक को समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे लोकसभा ने मंजूर कर लिया। प्रस्तावित समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। इस कदम का मतलब यह नहीं है कि विधेयक खारिज हो गया या कानून बनना रुक गया। संयुक्त समिति अब विधेयक की धाराओं की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा को देगी।

दरअसल, FCRA संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त समिति के पास भेजने का मुख्य औपचारिक उद्देश्य इसकी बड़े स्तर पर संसदीय जांच करना है। प्रस्तावित विधेयक विदेशी अंशदान लेने वाले संगठनों के पंजीकरण और विदेशी धन से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव होने की बात है। विपक्ष समेत कई पक्षों ने विधेयक के भारतीय समाज पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं। खास तौर पर विदेशी धन से बनी संपत्तियों पर सरकार के प्रस्तावित अधिकार को लेकर चर्चा हुई है। ऐसे में दोनों सदनों के सदस्यों वाली समिति को प्रावधानों की बारीकी से जांच का अवसर मिलेगा।

संयुक्त संसदीय समिति क्या होती है ?
सरल भाषा में संसद की संयुक्त समिति Joint Parliamentary Committee , JPC दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों से मिलकर बनने वाली विशेष समिति होती है। यह एक अस्थायी (तदर्थ) समिति है।

किसी विधेयक को ऐसी समिति को भेजने के लिए संबंधित सदन प्रस्ताव पारित करता है और दूसरे सदन से भी सदस्यों को शामिल किया जाता है।
ऐसी समितियां किसी खास विधेयक की गहराई से जांच करने के लिए बनाई जाती हैं। राज्यसभा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार विधेयक पर बनी संयुक्त समितियां विशेष काम पूरा होने तक कार्य करती हैं और काम पूरा होने के बाद उनका कार्य समाप्त हो जाता है।

पहले भी वक्फ संशोधन विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों वाली संयुक्त समिति को भेजा जा चुका है।
समिति का काम विधेयक को अपने स्तर पर कानून बनाना नहीं, बल्कि सदनों के सामने विचार के लिए रिपोर्ट और सुझाव रखना होता है।
इसके बाद विधेयक की अंतिम मंजूरी संसद के दोनों सदनों की प्रक्रिया से ही होती है।

संयुक्त समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें सरकार पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होतीं। इसका मतलब है कि समिति किसी धारा को बदलने, हटाने या नई व्यवस्था जोड़ने की सलाह दे सकती है, लेकिन सरकार हर सिफारिश को स्वीकार करने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं है। फिर भी ऐसी समिति की रिपोर्ट का संसदीय और राजनीतिक महत्व काफी होता है।

संसदीय समिति की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं
संयुक्त समिति के अधिकार क्या होते हैं
एक बात साफ है कि समिति खुद विधेयक को कानून में नहीं बदल सकती। अंतिम निर्णय संसद के दोनों सदनों को ही लेना होता है। लेकिन संयुक्त समिति विधेयक की धाराओं और उनसे पैदा होने वाले कानूनी प्रभावों की जांच कर सकती है। वह संबंधित मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों से जानकारी मांग सकती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के विचार भी लिए जा सकते हैं। समिति विधेयक की भाषा में बदलाव की जरूरत पर विचार कर सकती है और अपनी रिपोर्ट में संशोधन सुझा सकती है। उसका पूरा अधिकार उस प्रस्ताव से तय होता है, जिसके जरिए समिति गठित की जाती है।

NATIONAL : 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म, दिल्ली-NCR में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे ये 5 गंभीर सवाल

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पुलिस को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी.

दिल्ली-NCR में एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली शर्मनाक घटना सामने आई है. यह घटना 4 अगस्त 2026 की रात की है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी अपने कजिन (भाई) से मिलने नोएडा जा रही थी.

तेज़ बारिश और अंधेरे के कारण वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई. उसी दौरान वहां से एक खाली स्लीपर बस गुजरी. किशोरी के इशारा करने पर बस रुकी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने उसे नोएडा के सेक्टर-63 ले जाने की बात कहकर बस में बिठा लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया.

पुलिस को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. उस समय बस में कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था.

यह बस परी चौक (ग्रेटर नोएडा) से दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर लगभग 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही. बस की स्लीपर बर्थ के चारों ओर पर्दे लगे थे. पुलिस जांच कर रही है कि क्या इन पर्दों की आड़ में वारदात को अंजाम दिया गया. आखिरकार आरोपियों ने पीड़िता को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर छोड़ दिया और फरार हो गए. इसके बाद पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाना पुलिस से संपर्क कर घटना की जानकारी दी.

पुलिस की कार्रवाई

शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को तिमारपुर बस पार्किंग इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है.

जांच में सामने आया कि बस में पहले कुछ खराबी आ गई थी, जिसके चलते उसे मरम्मत के लिए सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा) के वर्कशॉप में ले जाया गया था. मरम्मत के बाद दोनों आरोपी खाली बस को तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में परी चौक पर उन्हें किशोरी मिली.

कानूनी प्रावधान

पीड़िता के नाबालिग (16 वर्ष से अधिक, 18 वर्ष से कम) होने के कारण इस मामले में सामान्य आपराधिक कानून के साथ-साथ ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012’ (POCSO Act) के कड़े प्रावधान लागू होते हैं.

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 70: यह धारा सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) से संबंधित है. यदि पीड़िता 18 वर्ष से कम आयु की है और आरोपी दोषी साबित होते हैं, तो धारा 70(2) के तहत न्यूनतम आजीवन कारावास या मृत्युदंड और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

POCSO Act: यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से विशेष सुरक्षा प्रदान करता है. इसके तहत गंभीर यौन हमले के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों (Special Courts) की व्यवस्था है.

जांच और प्रशासनिक चूक पर 5 बड़े सवाल
पिकेट चेकिंग पर सवाल: नोएडा से दिल्ली के बीच 47 किलोमीटर के सफर के दौरान चिल्ला बॉर्डर और मयूर विहार जैसे कई प्रमुख पुलिस चेकिंग पॉइंट आते हैं. पुलिस बल और ट्रैफिक पिकेट की मौजूदगी के बावजूद इस कमर्शियल बस की एक बार भी चेकिंग क्यों नहीं हुई?

चालान के बावजूद परिचालन की छूट क्यों?: जिस वाहन पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे और परमिट नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा था, उसे सड़कों पर बेरोकटोक चलने की अनुमति ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा कैसे दी गई?

सुरक्षा मानकों में लापरवाही क्यों?: निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य सुरक्षा मानकों (पारदर्शी कांच, फंक्शनल सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन) की नियमित जांच करने में परिवहन विभाग क्यों विफल रहा?

इमरजेंसी सिस्टम की विफलता: बस में ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन की वर्तमान स्थिति क्या थी? इतने लंबे रूट पर वारदात के दौरान किसी भी आपातकालीन निगरानी प्रणाली (Emergency Response Mechanism) से ऑटोमैटिक अलर्ट क्यों जारी नहीं हुआ?

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों पर नरमी क्यों?: सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाली प्राइवेट बस ऑपरेटर कंपनियों के खिलाफ नियमित ऑडिट और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

अधिकार क्षेत्र को लेकर पुलिस में खींचतान

घटना के बाद दिल्ली और ग्रेटर नोएडा पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद सामने आया है. ग्रेटर नोएडा पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले उन्हें सूचित नहीं किया था. गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, कथित घटना उनके अधिकार क्षेत्र में शुरू हुई थी.

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (नॉर्दर्न रेंज) मधुर वर्मा ने कहा, “हमने पूरी तरह से पेशेवर तरीके से काम किया है. BNS के नए कानूनी प्रावधानों के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों की ज़ीरो FIR या शिकायत कहीं भी दर्ज की जा सकती है और जांच शुरू की जा सकती है.”

निर्भया कांड से 2026 तक: क्या वाकई कुछ बदला?

यह मामला 2012 के चर्चित निर्भया कांड की याद दिलाता है. उस घटना के बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों और जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2013 लागू किया गया था, जिसमें स्टॉकिंग, वॉयरिज्म और यौन उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कानून बनाए गए. इसके बाद 2018 में और कड़े संशोधन किए गए तथा ‘निर्भया फंड’ का गठन हुआ.

इसके बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक है. NCRB 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ 4,41,534 अपराध और दुष्कर्म के 29,536 मामले दर्ज किए गए. आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि दर्ज दुष्कर्म के मामलों में 96.8% आरोपी पीड़िता के परिचित थे.

यह घटना दर्शाती है कि केवल कानून सख्त बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि सड़कों पर पुलिस पेट्रोलिंग, ट्रांसपोर्ट सेफ्टी और प्रशासनिक निगरानी की सक्रियता ही ऐसे अपराधों को रोकने में निर्णायक साबित हो सकती है.

NATIONAL : आत्मनिर्भर भारत की आसमानी ताकत! राजनाथ सिंह ने IAF को सौंपे तेजस-HTT-40 ट्रेनर, पवन हंस को मिले ध्रुव NG हेलीकॉप्टर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बेंगलुरू में HAL द्वारा निर्मित स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों के हस्तांतरण समारोह में शिरकत की। इस कार्यक्रम के तहत भारतीय वायुसेना को एलसीए तेजस FOC ट्रेनर विमान और HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंपे गए।

भारत की रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता के लिए शुक्रवार का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में आयोजित एक विशेष पूजा समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों की नई खेप भारतीय वायुसेना (IAF) और पवन हंस लिमिटेड को सौंपी।

इस महत्वपूर्ण हस्तांतरण कार्यक्रम के तहत HAL ने भारतीय वायुसेना को दो एलसीए तेजस FOC (फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस) ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान और HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंपे। इसके साथ ही, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए चार ‘ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन’ (Dhruv NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड (PHL) को प्रदान किए गए। HAL के अधिकारियों के अनुसार, दो तेजस FOC ट्रेनर विमान मिलने के बाद 2010 के अनुबंध के तहत सभी चार ट्विन-सीटर विमानों की डिलीवरी अब पूरी हो चुकी है।

यह 4.5 जनरेशन का हल्का, हर मौसम में उड़ान भरने वाला बहुउद्देश्यीय विमान है, जिसे विशेष रूप से वायुसेना के पायलटों को आधुनिक लड़ाकू ट्रेनिंग देने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही 70 एचटीटी-40 (HTT-40) बेसिक ट्रेनर विमानों के अनुबंध के तहत भी पहली डिलीवरी की शुरुआत हो गई है, जिससे भारत के नए पायलटों की शुरुआती ट्रेनिंग और मजबूत होगी।

एक बार में 14 यात्रियों को ले जाने में सक्षम
दूसरी ओर, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए ‘ध्रुव एनजी’ का शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि है। यह भारत में निर्मित पहला नागरिक प्रमाणित 5.5 टन का लाइट ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर है। यह एक बार में 14 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ्तार 285 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका उपयोग वीआईपी यात्रा, एयर एम्बुलेंस, आपदा राहत और ऑफशोर ऑपरेशन्स में किया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह हैंडओवर भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती देता है। अब भारत न केवल सैन्य उड्डयन में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि नागरिक और वाणिज्यिक विमानन के क्षेत्र में भी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

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