पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवारों सहित कई नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जानें क्या है पूरा मामला।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पुलिस ने रेजीनगर उपचुनाव में भाग्य आजमा रहे निर्दलीय उम्मीदवार को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 2021 के एक पुराने मामले में की गई है। इससे पहले नंदीग्राम सीट से ताल ठोक रहे कांग्रेस के प्रत्याशी पर भी कार्रवाई हुई है।
6 अक्तूबर को होने हैं चुनाव रेजीनगर में हुई कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) से भी जुड़े हैं। एजेयूपी का नेतृत्व हुमायूं कबीर करते हैं। सैफुल की गिरफ्तारी से एक दिन पहले नंदीग्राम में कांग्रेस के मिलन प्रधान को भी पकड़ा गया था। मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार हैं। सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी भूमि अधिग्रहण आंदोलन के लगभग दो दशक पुराने मामले में हुई। गौरतलब है कि 6 अक्तूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने हैं।
किन दो सीटों पर उपचुनाव की नौबत, कारण क्या? मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली की है, जबकि हुमायूं कबीर ने 2026 विधानसभा चुनाव में नवादा सीट बरकरार रखने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ दी। एजेयूपी ने रेजीनगर उपचुनाव के लिए कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है।
एजेयूपी प्रमुख पर क्या आरोप हैं? बहरामपुर पुलिस ने शनिवार को एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर को नोटिस भेजा। उन्हें 21 सितंबर को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने को कहा गया है। यह मामला दो समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कथित साजिश से जुड़ा है। पुलिस ने गत 14 सितंबर को मामला दर्ज करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जारी की थी।
पार्टी के राज्य सचिव क्यों गिरफ्तार हुए? पुलिस ने 18 सितंबर को एजेयूपी के राज्य सचिव आशिक इकबाल को भी गिरफ्तार किया। उन्हें मुर्शिदाबाद जिले में वाहन जांच के दौरान पुलिस पिकेट पर पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक उनके पास से बड़ी मात्रा में नकली मुद्रा और अवैध हथियार मिले। इकबाल के साथ यात्रा कर रहे एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है।
ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल लाने वाले टैंकरों का किराया रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. जानिए महंगे क्रूड और शिपिंग कॉस्ट से भारत को कितना नुकसान हो सकता है और पेट्रोल-डीजल के अलावा LPG, LNG और CNG पर इसका क्या असर पड़ेगा.
अगर आप इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, एलपीजी का संकट अब नहीं होगा. तो रुकिये. एक नई आफत दस्तक देने वाली है. ईरान युद्ध ने तेल की दुनिया में एक ऐसा खेल शुरू कर दिया है, जिसका असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमत पर नहीं पड़ रहा. अब तेल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना भी बहुत महंगा हो गया है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि फारस की खाड़ी से चीन तक तेल ले जाने वाले बड़े सुपरटैंकरों का किराया इस हफ्ते पहली बार 10.35 लाख डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपये रोज के पार पहुंच गया. युद्ध से पहले यही किराया करीब 2.08 लाख डॉलर रोज था. यानी जहाज का खर्च करीब पांच गुना हो गया.एक तरह से तेल से ज्यादा पड़ रहा जहाज का किराया. पेट्रोल-डीजल की सप्लाई तो आसानी से हो जाएगी, लेकिन LPG-CNG सप्लाई पर संकट है.
आप सोच रहे होंगे कि आखिर जहाज वालों ने किराया इतना क्यों बढ़ा दिया, तो जवाब है कि खतरा बढ़ गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलना खतरे से खाली नहीं. कभी भी मिसाइलें आकर गिर सकती हैं. इसीलिए इंश्योरेंस महंगा हो गया है और कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते पर जहाज भेजने से बच रही हैं. नतीजा यह कि जो जहाज जोखिम लेकर जा रहे हैं, वे उसका पैसा भी वसूल रहे हैं. एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, टैंकरों की कमी ने फ्रेट रेट को ऊपर धकेला है. भारत के लिए क्यों आफत
भारत के लिए मुश्किल ज्यादा है. क्योंकि भारत दुनिया का बड़ा क्रूड इंपोर्टर है और अरब देशों से आने वाले तेल को भी समुद्र के रास्ते लाना पड़ता है. सितंबर में अरबियन गल्फ से भारत आने वाले VLCC टैंकर का फ्रेट अगस्त के मुकाबले करीब दोगुना हो गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक रोज का चार्टर रेट करीब 2.5 लाख डॉलर तक पहुंच गया. इसके साथ इंश्योरेंस और जहाज के ईंधन की लागत भी बढ़ी है.
यानी भारत के लिए मुसीबत सिर्फ यह नहीं कि तेल 100 डॉलर के आसपास पहुंच गया. असली बात यह है कि एक बैरल तेल को भारत तक लाने की लागत में कई चीजें जुड़ रही हैं. जैसे क्रूड की कीमत, जहाज का किराया, युद्ध का इंश्योरेंस और लंबा समुद्री रास्ता. अगस्त में भारत ने करीब 1.9 करोड़ टन क्रूड इंपोर्ट किया, लेकिन इसके लिए बिल 11.7 अरब डॉलर रहा. पिछले साल इसी महीने 1.96 करोड़ टन तेल के लिए बिल 9.9 अरब डॉलर था. यानी मात्रा करीब 3% कम हुई, लेकिन बिल 18% बढ़ गया.
फर्क क्या पड़ेगा भारत को विदेश से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा तो रिफाइनरी की लागत बढ़ेगी. ऊपर से उस तेल को भारत तक लाने का जहाज भी महंगा हो गया तो खर्च और बढ़ गया. रिपोर्ट के मुताबिक भारत का अप्रैल-जुलाई का क्रूड इंपोर्ट बिल 63.37 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था, जो एक साल पहले के मुकाबले 56% ज्यादा था. एक अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी भारत के सालाना इंपोर्ट बिल पर करीब 18,000 करोड़ रुपये का असर डाल सकती है.
असली चिंता गैस की लेकिन यहां कहानी सिर्फ पेट्रोल और डीजल की नहीं है. असली चिंता गैस की तरफ भी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सिर्फ क्रूड ऑयल ही नहीं गुजरता, बल्कि दुनिया की बड़ी मात्रा में LNG और LPG भी इसी रास्ते से आती-जाती है. सितंबर में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य औसत से काफी नीचे चली गई और एक दिन सिर्फ चार जहाजों के गुजरने का डेटा सामने आया. इसी दौरान एक बड़े गैस कैरियर के जरिए करीब 4.7 लाख बैरल LPG के निकलने की जानकारी भी सामने आई.
यही वजह है कि भारत के लिए LPG और LNG की सप्लाई ज्यादा मुश्किल हो गया है. भारत के क्रूड इंपोर्ट को रूस समेत दूसरे स्रोतों से कुछ हद तक संभाला जा सकता है, लेकिन गैस की सप्लाई में समुद्री रास्ते का जोखिम अलग तरह का है. Kpler के मुताबिक भारत की क्रूड सप्लाई फिलहाल काफी हद तक संभली हुई है, लेकिन लंबे समय तक होर्मुज में परेशानी रही तो LPG और LNG की सप्लाई तथा शिपिंग लागत पर दबाव बढ़ सकता है. और यहीं से CNG का कनेक्शन आता है. CNG सीधे LPG या क्रूड से नहीं बनती, लेकिन देश के गैस सिस्टम में LNG और सीएनजी की उपलब्धता और कीमत अहम होती है. अगर अंतरराष्ट्रीय LNG महंगी होती है या सप्लाई में दिक्कत आती है तो गैस की कुल लागत पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए पेट्रोल पंप पर खड़ी कार के मालिक को सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं देखनी चाहिए. लंबे संकट की स्थिति में गैस से चलने वाले वाहनों और उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है. भारत के ऊर्जा आयात में LPG और LNG दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है.
तो फिर भारत कर क्या रहा है? पहला तरीका है तेल खरीदने के रास्ते और देशों को बदलना. रूस भारत का बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है और भारतीय रिफाइनर अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर किसी एक रास्ते पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं. S&P Global के मुताबिक भारतीय रिफाइनरों ने सितंबर तक की क्रूड जरूरत के लिए सप्लाई सुरक्षित कर रखी थी और रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ था. इसके अलावा भारत ने वेनेजुएला जैसे दूसरे स्रोतों से भी खरीद बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं.
दूसरा तरीका है बीमा और स्टॉक की सुरक्षा. सरकार ने मई में 1.5 अरब डॉलर का भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल शुरू किया था, जिसमें 1.4 अरब डॉलर की सरकारी गारंटी है, ताकि युद्ध जैसे हालात में समुद्री बीमा की उपलब्धता बनी रहे. साथ ही भारतीय रिफाइनर पहले से क्रूड खरीदकर सप्लाई को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं. यानी भारत का प्लान साफ है कि जहां संभव हो वहां होर्मुज पर निर्भरता घटाओ, दूसरे देशों से तेल लो और जरूरी ऊर्जा सप्लाई पहले से सुरक्षित रखो. लेकिन अगर युद्ध और समुद्री जोखिम लंबे समय तक चलते हैं तो महंगा फ्रेट, महंगा क्रूड और महंगा गैस इंपोर्ट आखिरकार भारत की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर दबाव डाल सकता है.
आईएनएस ‘मालवन’ का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है। पुराने ‘मालवन’ को 19 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2003 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था।
करवार: भारतीय नौसेना की ताकत में एक और इजाफा हुआ है। स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी के दूसरे ‘एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) आईएनएस ‘मालवन’ को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। करवार में आयोजित कमीशनिंग समारोह में इस युद्धपोत को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। आईएनएस ‘मालवन’ को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है। इसके नौसेना में शामिल होने से समुद्री सीमाओं की निगरानी के साथ-साथ पनडुब्बी रोधी अभियानों में भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ कर सकेगा अभियान
भारतीय नौसेना के अनुसार, आईएनएस ‘मालवन’ बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वय करते हुए विभिन्न अभियानों में हिस्सा लेने में सक्षम है। इसे उथले पानी में निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
आईएनएस ‘मालवन’ का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों के साथ किया गया है। यह माहे श्रेणी का दूसरा पनडुब्बी रोधी शैलो वाटर क्राफ्ट है। युद्धपोत को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में बढ़ती स्वदेशी निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इसके निर्माण से देश की नौसैनिक डिजाइन, उपकरण निर्माण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण की क्षमता को भी बढ़ावा मिला है।
‘बाघ नख’ से प्रेरित है युद्धपोत का प्रतीक चिह्न
आईएनएस ‘मालवन’ के प्रतीक चिह्न में ‘बाघ नख’ को दर्शाया गया है। इसे साहस, युद्ध कौशल, फुर्ती और दुश्मन पर सटीक प्रहार की क्षमता का प्रतीक माना गया है। प्रतीक चिह्न के चारों ओर बनी समुद्री लहरें भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति नौसेना की सतर्कता और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पोत का ध्येय वाक्य ‘साइलेंट क्लॉज’ इसकी गुप्त, तेज और प्रभावी कार्रवाई की क्षमता को दर्शाता है।
पूर्व माइंसवीपर पोत के नाम पर रखा गया ‘मालवन’
आईएनएस ‘मालवन’ का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है। पुराने ‘मालवन’ को 19 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2003 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था।
एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की कमीशनिंग
आईएनएस ‘मालवन’ के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की। समारोह में पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि युद्धपोतों के निर्माण में नौसेना अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण का प्रभावी मॉडल है। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने भविष्य के युद्धों में सफलता के लिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त अभियानों की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुंबई के चर्चित दिशा सालियान डेथ केस की जांच अब सीबीआई कर रही है। सीबीआई के जांच संभालने के बाद इस मामले में दिशा के पिता सतीश सालियान ने आदित्य ठाकरे और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को नोटिस भेजा है।
मुंबई: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में सीबीआई जांच के बीच आरोपों में घिरे आदित्य ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दिशा के पिता सतीश सालियन ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी (एसपी) नेता व महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। दिशा के पिता ने इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन की न्याय की लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।
दिशा सालियन मौत का मामला 28 साल की दिशा सालियन की मौत 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची रिहायशी इमारत से गिरने के कारण हुई थी। पुलिस ने इस घटना को आकस्मिक मौत माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की। इसके छह दिन बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच मुंबई पुलिस ने की थी लेकिन दिशा सालियान के पिता इससे संतुष्ट नहीं हुए थे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। काफी लंबी जद्दोजहद के बाद अब इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
पिता के निशाने पर आदित्य ठाकरे दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट जो याचिका दाखिल की थी। उसमें नए सिर से एफआईआर दर्ज करके जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली सहित कई लोगों से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की गई थी। 500 करोड़ रुपये के नोटिस में पिता ने आदित्य ठाकरे पर इंसाफ की लड़ाई के उद्देश्य पर सवाल उठाने और इसे राजनीति से प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
नोटिस में क्या कहा गया है कानूनी नोटिस में कहा गया है कि ऊपर बताए गए आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी भरोसेमंद सबूत या आधार के लगाए गए हैं और इनका मकसद सिर्फ आपके गलत और छिपे हुए इरादों को पूरा करना है। ये आरोप मेरे क्लाइंट (सतीश सालियन) की ईमानदारी, विश्वसनीयता और नेकनीयती पर सीधा और गंभीर सवाल उठाते हैं। इसमें एक दुखी पिता को जो सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता था। एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद से न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। नोटिस में ठाकरे पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उन्होंने (आदित्य ठाकरे) ने गलत तरीके से यह दावा किया कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच कर ली है और उन्हें क्लीन चिट दे दी है।
सार्वजनिक माफी की मांग सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से माफी की मांग की है, जो लिखित और सार्वजनिक हो। यह माफी सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित की जानी चाहिए। वीडियो माफी कम से कम तीन मिनट की होनी चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए। गौरतलब हो कि सीबीआई द्वारा इस मामले में अपनी एफआईआर में नाम शामिल किए जाने के दो दिन बाद बुधवार को आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया।
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने फैंस को गुड न्यूज दी है. कपल फिर से पेरेंट्स बन गया है. दीपिका ने बेटी को जन्म दिया है. कपल ने खुद इस खुशखबरी को सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके फैंस को दी है.
दीपिका पादुकोण अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर चर्चा में थीं. वो दूसरी मां बनने वाली थीं. ऐसे में अब एक्ट्रेस और रणवीर सिंह ने खुद फैंस को गुड न्यूज दी है. उनके घर पर एक बार फिर से किलकारी गूंज उठी है. दीपिका ने नन्ही परी को जन्म दिया है. बेटी दुआ के बाद कपल के घर फिर से लक्ष्मी आई है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लग गया है.
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने खुद दूसरी बार पेरेंट्स बनने की खबर को कंफर्म किया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर की है, जिसमें बेटी के पैर का निशान छपा है. इसे साझा करने के साथ ही कपल ने जानकारी दी है कि उनके घर पर नन्ही परी आई है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग उन्हें खूब बधाइयां दे रहे हैं.
आपको बता दें कि इसके एक दिन पहले ही दीपिका और रणवीर सिंह को सिद्धिविनायक मंदिर में स्पॉट किया गया था. कपल गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचा था और इस दौरान दोनों अपने लुक को लेकर काफी चर्चा में थे. दीपिका को लेकर रणवीर काफी केयरी दिखे थे. अब बप्पा के आशीर्वाद के बाद ही रणवीर सिंह और दीपिका ने बेटी का घर में वेलकम किया है.
आपको बता दें कि दीपिका और रणवीर सिंह ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की अनाउंसमेंट 19 अप्रैल, 2026 को किया था. उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करके दूसरी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया था. दीपिका और रणवीर सिंह ने हाल ही में बेटी दुआ का जन्मदिन भी सेलिब्रेट किया था और उनका चेहरा भी रिवील किया था. दीपिका और रणवीर ने 14-15 नवंबर, 2018 को शादी की थी और इसके बाद उन्होंने 8 सितंबर 2024 को बेटी दुआ का वेलकम किया था. अब 19 सितंबर को कपल ने दूसरी बेटी का वेलकम किया है.
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह का प्रोफेशनल फ्रंट
बहरहाल, अगर दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के प्रोफेशनल फ्रंट के बारे में बात की जाए तो एक्ट्रेस अपकमिंग फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं. इसमें वो शाहरुख खान के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए नजर आएंगीं. फिल्म को क्रिसमस 2026 के मौके पर रिलीज किया जाएगा. वहीं, रणवीर सिंह को आखिरी बार फिल्म ‘धुरंधर 2’ में देखा गया था. इसने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ 1800 करोड़ से ज्यादा वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था.
RSS से जुड़ी ABVP ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के हाई-प्रोफाइल चुनाव में सेंट्रल पैनल के चार में से तीन पद जीते, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन – जिन्हें NSUI का टिकट नहीं मिला था उन्होंने ने उपाध्यक्ष के पद पर शानदार जीत…
नई दिल्ली: RSS से जुड़ी ABVP ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के हाई-प्रोफाइल चुनाव में सेंट्रल पैनल के चार में से तीन पद जीते, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन – जिन्हें NSUI का टिकट नहीं मिला था उन्होंने ने उपाध्यक्ष के पद पर शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस की नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) को कोई सीट नहीं मिली, हालांकि उसके उम्मीदवार अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद बहुत कम अंतर से हारे। NSUI के प्रदर्शन पर उसके बागी उम्मीदवार दीपांशु शोकीन का भी असर पड़ा, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 13,700 से ज़्यादा वोटों के बड़े अंतर से उपाध्यक्ष का पद हासिल किया। NSUI सेंट्रल पैनल के चार में से कोई भी पद नहीं जीत पाई, जबकि ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार जीत दर्ज की और उसके उम्मीदवार यश डबास ने अध्यक्ष का पद हासिल किया। यह जीत ऐसे समय में मिली जब हाल के महीनों में जंतर-मंतर पर Gen Z के विरोध-प्रदर्शन और सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना (जिसमें DU के पांच छात्रों की मौत हो गई थी) को लेकर युवाओं में काफी हलचल थी। अध्यक्ष पद की दौड़ में डबास को 24,576 वोट मिले और उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया।
आप को बता दें कि अ NSUI का टिकट न मिलने के बाद भी वे विजयी रहे। संयुक्त सचिव पद के लिए, ABVP के उम्मीदवार को 16,615 वोट मिले, जबकि समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार को 15,778 वोट मिले। सचिव पद की दौड़ में, ABVP उम्मीदवार को 21,650 वोट मिले, जबकि NSUI उम्मीदवार को 14,869 वोट मिले। ABVP ने प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के पद फिर से हासिल कर लिए, जो उसने 2025 में भी जीते थे। NSUI, जिसने पिछले साल वाइस प्रेसिडेंट का पद जीता था, इस बार एक भी पद नहीं जीत पाई।
शौकीन और विशेष यादव समेत निर्दलीय उम्मीदवारों ने ज़बरदस्त टक्कर दी। उन्होंने ABVP और NSUI, दोनों के काफ़ी वोट काटकर नतीजों पर असर डाला। शौकीन ने ABVP के इशू मौर्य और NSUI के वीर छत्रथ, दोनों को बड़े अंतर से हराया, वहीं समाजवादी छात्र सभा (SCS) के यादव को जॉइंट सेक्रेटरी पद के मुक़ाबले में 15,778 वोट मिले। ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट पाकर जॉइंट सेक्रेटरी का पद जीता, जबकि NSUI उम्मीदवार गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले और वे मुक़ाबले में तीसरे स्थान पर रहे।
ट्रंप ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध वाले कानून पर दस्तखत किए हैं. रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान है, भारत-चीन पर भी असर पड़ सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पर दस्तखत कर इसे कानून बना दिया है. इस कानून के तहत रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे. साथ ही, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर भी भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने का रास्ता साफ किया गया है. इनमें चीन और भारत भी शामिल हैं. अमेरिका फिलहाल भारत पर 18% और चीन पर 34% टैरिफ लगाता है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को H.R. 5334, यानी लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पर दस्तखत किए. यह कानून रूस और ईरान के खिलाफ मौजूदा प्रतिबंधों को आगे बढ़ाता है. इसमें रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंध, टैरिफ और दूसरी पाबंदियों का विस्तार किया गया है.
कानून के तहत ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है. यह कानून राष्ट्रपति के दस्तखत के 30 दिन के भीतर प्रभावी होगा. इसके तहत उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक शुल्क लगाया जा सकता है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के आधार पर रूस के कच्चे तेल या नेचुरल गैस के टॉप-5 खरीदारों में शामिल रहे हैं. हालांकि, कानून ट्रंप को इसके अमल को लेकर काफी अधिकार देता है. वह तय कर सकते हैं कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए, टैरिफ की दर कितनी हो और प्रतिबंधों के प्रावधानों में छूट दी जाए या नहीं.
किन 5 देशों पर कार्रवाई का खतरा? भारत 40% से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है. इसलिए उस पर टैरिफ का खतरा है. भारत के अलावा रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. इससे पहले अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को यह कानून पास किया था. प्रस्ताव को 214-211 वोटों के अंतर से मंजूरी मिली थी. कानून में रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा मॉस्को के रक्षा उद्योग से जुड़े सहयोगियों और रूस की कथित शैडो फ्लीट पर भी कार्रवाई का प्रावधान है.
किस देश को मिलेगी छूट? रूस से गैस खरीदने वाले किसी देश को शुल्क से छूट मिल सकती है. इसके लिए जरूरी है कि संबंधित अवधि में उस देश का रूसी गैस आयात रूस के कुल गैस निर्यात का 15% से कम हो और उसने रूसी गैस आयात कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हों. कानून रूस की शैडो फ्लीट और रूसी ऊर्जा उत्पादन या प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले विदेशी लोगों को भी निशाना बनाता है. इसमें जहाजों के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, बीमाकर्ता और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं.
Sugar Price : सरकार ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसके लिए कारोबारियों की स्टॉक लिमिट तय की गई है. साथ ही बाहर से चीनी आयात करने का भी प्लान है. इतना ही नहीं, सरकार इस बार पेराई सत्र जल्दी शुरू करने की भी तैयारी कर रही है.
नई दिल्ली. देश के कई शहरों में चीनी के भाव 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए हैं. अब चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. पिछले एक महीने में चीनी के औसत दाम करीब 48.18 से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. सरकार का कहना है कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
सरकार ने साफ किया है कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना नहीं है. एथनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% से घटकर 2025-26 में 9% रह गई है. सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहा है. गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी, ज्यादा बारिश और जलभराव से नुकसान हुआ है. इसके साथ ही त्योहारों से पहले मांग बढ़ी है और कुछ जगहों पर जमाखोरी व सट्टेबाजी ने भी कीमतों पर असर डाला है.
अनुमान से कम रहा उत्पादन इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 LMT उत्पादन का अनुमान लगाया था. सरकार का कहना है कि देश में इतना चीनी स्टॉक मौजूद है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है. हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया में भी चीनी की सप्लाई प्रभावित हुई है. 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई है. इसका मतलब है कि दो महीने में ही कीमत में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
सरकार के मुताबिक, भारत में सामान्य तौर पर हर साल 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 LMT है. ज्यादा उत्पादन होने पर चीनी का स्टॉक बढ़ जाता है और मिलों का पैसा फंस जाता है, जिससे किसानों को गन्ने का भुगतान भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में अतिरिक्त चीनी से एथेनॉल बनाने की नीति से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर यह है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के गन्ना बकाये का 97% भुगतान किसानों को किया जा चुका है.
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के बड़े कदम 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है. 1 सितंबर से बड़े खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे. केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच कर रही हैं. घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है. राज्यों और चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के लिए कहा गया है. सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से ज्यादा हो सकता है. सरकार उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों दोनों के हितों का ध्यान रखेगी और चीनी के दाम, स्टॉक और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी.
दिल्ली। देश में साइबर अपराध की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इनके मामलों में एफआईआर दर्ज होने की दर बेहद कम है। 2019 से 2024 के बीच छह साल में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर करीब 53.93 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से सिर्फ 1.30 लाख मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। यानी कुल शिकायतों का करीब 2.4% ही एफआईआर में बदला।
राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट में साइबर अपराध से जुड़े ये आंकड़े सामने आए हैं। 31 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल हैं। समिति ने साइबर अपराध की शिकायतों पर कार्रवाई और अपराध के आंकड़ों को दर्ज करने के तरीके को लेकर चिंता जताई है।
छह साल में 78 गुना बढ़ीं शिकायतें
रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराध की शिकायतों में छह साल के दौरान करीब 78 गुना बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद शिकायत और एफआईआर के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। समिति ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस कार्रवाई और फॉलो-अप में देरी का मुद्दा भी उठाया।
FIR नहीं होने से अपराध के आंकड़े प्रभावित
समिति ने कहा कि कई मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय गैर-संज्ञेय रिपोर्ट तक सीमित रहती है। इससे गंभीर अपराध आधिकारिक आंकड़ों में कम दिखाई दे सकते हैं और पीड़ितों को न्याय मिलने में भी परेशानी होती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्यों की ओर से NCRB को अपराध के आंकड़े भेजने में डेढ़ से दो साल तक की देरी होती है। इससे पुलिसिंग, सुरक्षा नीति और बजट तैयार करने में पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।
एक अपराध के साथ कई मामले दर्ज नहीं होते
समिति ने NCRB के ‘प्रिंसिपल ऑफेंस रूल’ का भी जिक्र किया। इसके तहत किसी घटना में कई अपराध होने पर मुख्य अपराध को ही दर्ज किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अपहरण के बाद लूट और वीडियो ऑनलाइन लीक होने की स्थिति में रिकॉर्ड में सिर्फ अपहरण मुख्य अपराध के रूप में दर्ज हो सकता है। इससे साइबर अपराध, लूट या अन्य जुड़े अपराधों का अलग डेटा सामने नहीं आ पाता।
समिति के मुताबिक, ऐसे मामलों में सेकेंडरी अपराधों का डेटा छूटने से देश में साइबर अपराध की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आती।
मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान मूर्तियों के इको-फ्रैंडली विसर्जन के लिए BMC ने 278 जगहों पर 383 तालाब बनाए हैं। शहर में विसर्जन की व्यवस्था संभालने के लिए 25 हजार कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
ज्यादातर सार्वजनिक गणेश मंडलों की मूर्तियों का विसर्जन आखिरी दिन होगा। घरों में रखी मूर्तियों का विसर्जन उत्सव के दूसरे दिन से शुरू हो गया था।
दरअसल, अलग-अलग परंपराओं के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन स्थापना के डेढ़ दिन और पांच दिन बाद किया जाता है।
12 दिन का गणेश उत्सव 14 सितंबर को शुरू हुआ था और 25 सितंबर को खत्म होगा।
BMC ने 6 फीट से बड़ी मूर्तियों के लिए 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थलों पर जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें 44 समुद्र तट और जेटी, जबकि 23 प्राकृतिक झीलें शामिल हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के निर्देशों के मुताबिक, 6 फीट तक की मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में करना जरूरी है।
BMC ने नागरिकों से प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
समुद्र तटों पर रेत के ऊपर 1,194 स्टील प्लेटें बिछाई गई हैं। चौपाटियों और समुद्र तटों पर 23 जर्मन राफ्ट्स, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस और 10 मोटरबोट तैयार रखी गई हैं।
लाइफगार्ड और निगरानी की व्यवस्था
BMC ने 1,132 लाइफगार्ड तैनात किए हैं। पूजा सामग्री के कचरे के लिए 498 निर्माल्य कलश और 326 निर्माल्य डंपर लगाए गए हैं। भीड़ पर नजर रखने के लिए 228 कंट्रोल रूम और 75 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए गए हैं।
प्रमुख विसर्जन स्थल स्वराज्यभूमि (गिरगांव चौपाटी) पर BMC ने 12 कृत्रिम तालाब और 20 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए हैं। यहां 22 राफ्ट्स, 90 टॉयलेट, 3 एम्बुलेंस और करीब 1,000 कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।
विसर्जन मार्गों पर मरम्मत का काम
विसर्जन मार्गों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 281 जगहों पर रास्ते में बाधा बन रहे केबल हटाए गए हैं। 506 सड़कों पर 4,279 गड्ढे और 171 ड्रेनेज कवर ठीक किए गए हैं। 515 जगहों पर पेड़ों की छंटाई भी की गई है।
मुंबई के समुद्र तट पर ब्लू-बटन जेलीफिश और स्टिंगरे मौजूद हैं। इसलिए समुद्र में मूर्ति विसर्जन के लिए उतरते समय खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
BMC के आपदा प्रबंधन विभाग ने हर सार्वजनिक गणेश मंडल के कम से कम 8 से 10 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया है। इन स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने, बिजली हादसों, आग और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी गई है। उन्हें फर्स्ट एड और CPR का प्रशिक्षण भी दिया गया है।