Saturday, September 26, 2026
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BUSINESS : सेंसेक्स 1248 और निफ्टी 384 अंक गिरा, अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा ब्याज मिलने से विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे, महंगा कच्चा तेल भी वजह

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भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव काफी बढ़ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.66% गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 383.71 अंक यानी 1.64% टूटकर 23,063.10 पर आ गया। बाजार में गिरावट की शुरुआत कमजोर रही और पूरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा। बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और व्यापक बाजार में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी बड़ी गिरावट रही?
गुरुवार के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के अंत में 73,600 के आसपास और निफ्टी 23,100 के नीचे बंद हुआ। एक दिन में सेंसेक्स का करीब 1,248 अंक टूटना बाजार में बिकवाली की तीव्रता को दिखाता है। निफ्टी में भी 384 अंकों से अधिक की गिरावट रही।बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बाजार पर क्या असर पड़ा?
बाजार में दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में बॉन्ड यील्ड का 19 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचना शामिल रहा। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे निवेशकों के लिए फिक्स्ड-इनकम एसेट्स का आकर्षण बढ़ सकता है। गुरुवार को यील्ड में उछाल के साथ इक्विटी बाजार में भी जोखिम कम करने की प्रवृत्ति दिखाई दी।

क्या सिर्फ बड़े शेयरों में ही बिकवाली हुई?
नहीं। गुरुवार को व्यापक बाजार में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों करीब 1% नीचे रहे। इससे संकेत मिलता है कि दबाव केवल सेंसेक्स और निफ्टी की बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की।

कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे?
गुरुवार को सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। खास तौर पर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव अधिक रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 2% तक टूटे। वित्तीय शेयरों में गिरावट का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा।

एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस में कितनी गिरावट आई?
बाजार की प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। दोनों शेयरों में करीब 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय क्षेत्र में व्यापक बिकवाली के बीच इन शेयरों में गिरावट ने बाजार के कमजोर सेंटीमेंट को और स्पष्ट किया।

गुरुवार की गिरावट से क्या संकेत मिलते हैं?
गुरुवार का कारोबार दिखाता है कि बाजार फिलहाल कई दबावों के बीच है। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी के साथ मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल इंडेक्स में एक साथ गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 73,580.54 और निफ्टी 23,063.10 पर बंद हुए। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर बाजार की दिशा, बॉन्ड यील्ड और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के रुख पर रहेगी।

पांच में गिरावट के पांच बड़े कारण क्या?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल
वैश्विक बॉन्ड मार्केट में मची बिकवाली के कारण 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 15 बेसिस अंक बढ़कर 19 साल के उच्चतम स्तर 5.11% पर पहुंच गई है। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 102 से106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ने, वित्तीय घाटा होने और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंताएं गंभीर हो गई हैं।

बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में भारी बिकवाली
घरेलू स्तर पर, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा इंश्योरेंस एजेंटों के कमीशन कैप और डिस्ट्रीब्यूशन पेआउट्स में कटौती के प्रस्ताव ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी। इस नियामक बदलाव के कारण वित्तीय और बीमा सेक्टर के हैवीवेट शेयरों, जैसे एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसने सूचकांकों को नीचे धकेल दिया।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां मिल रहे सुरक्षित रिटर्न के आकर्षण के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार बड़ी बिकवाली की जा रही है। घरेलू संस्थागत निवेशकों के सपोर्ट के बावजूद, विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) का दबाव बढ़ गया है।

महंगा वैल्यूएशन और डेरिवेटिव एक्सपायरी का दबाव
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय सूचकांक अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में काफी महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे थे। किसी नए सकारात्मक ट्रिगर के न होने और आज ही मंथली फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) एक्सपायरी होने के कारण ट्रेडर्स ने आक्रामक रूप से प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

BUSINESS : सोने-चांदी के दाम में लगातार चौथे दिन गिरावट, चांदी ₹7 हजार सस्ती होकर ₹2.28 लाख किलो पर आई, सोना ₹1231 गिरा

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सोमवार से गुरुवार तक सोने-चांदी के भाव लगातार 4 दिन तक गिरे। क्या गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर से गोल्ड-सिल्वर के भाव चढ़ेंगे। क्योंकि, आगे करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं। इन त्योहारों में सोने-चांदी की डिमांड बढ़ जाती है। अगर पिछले चार दिनों की बात करें तो इस अवधि में चांदी करीब 7000 रुपये और सोना करीब 2,500 रुपये सस्ता हो चुका है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक गुरुवार को भी 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,231 रुपये सस्ता होकर 1.51 लाख रुपये पर आ गया। वहीं, एक किलो चांदी 4,518 रुपये टूटकर 2.28 लाख रुपये पर पहुंच गई।

क्या सोने-चांदी में यह गिरावट आगे भी रहेगी जारी

ऑस्ट्रेलिया के हेज फंड मैनेजर राफेल लैम का मानना है कि सोने में हाल की गिरावट टेंपरेरी है। उनका लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड पिछले साल लॉन्च होने के बाद से निवेशकों को 200% से ज्यादा नेट रिटर्न दे चुका है। लैम का तर्क है कि सोने की लॉन्ग-टर्म तेजी को सहारा देने वाली मुख्य ताकतें अभी भी बरकरार हैं।

क्यों बढ़ेंगे सोने के दाम

ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक लैम ने कहा कि “बड़े बाजारों की राजकोषीय हालत टिकाऊ नहीं है”, खासकर अमेरिकी सरकार का 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज और केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी सोने को मीडियम से लॉन्ग टर्म में सपोर्ट देगी। उन्होंने कहा कि नजदीकी समय में कीमतें अमेरिका-ईरान युद्ध, रियल ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों से तय होंगी। लैम, मार्क लांडाऊ के साथ 1.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (1.1 अरब अमेरिकी डॉलर) के एल1 गोल्ड फंड को को-मैनेज करते हैं।

ईरान युद्ध और ब्याज दरों का दबाव

जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से सोने पर दबाव है। एनर्जी की कीमतें चढ़ने और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने के दांवों से सोने जैसी ब्याज न देने वाली धातु पर असर पड़ा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 16% गिर चुका है।

लैम ने एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान युद्ध के बाद से सोने के बाजार और कीमतों के लिए कुछ विपरीत हवाएं जरूर आई हैं, लेकिन हमारे हिसाब से ये बहुत टेंपरेरी हैं। सोने की मांग को चलाने वाले ज्यादातर मुख्य कारक मीडियम टर्म में बने रहेंगे, बल्कि और मजबूत होंगे।”

सोना 4,286 डॉलर प्रति औंस पर

सिडनी में गुरुवार शाम सोना 4,286.01 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। लैम ने कहा, “जब सोने की कीमत 4,000 डॉलर के नीचे गई, तो हमने अपनी लॉन्ग पोजिशन काफी आक्रामक तरीके से बढ़ानी शुरू की। अब हम इसे वहीं रखे हुए हैं, यानी लो-टू-मिड 60% नेट लॉन्ग।” उन्होंने कहा कि अगर सोने की कीमत में और तेजी की उम्मीद सच होती है, तभी फंड लॉन्ग पोजिशन घटाने पर विचार करेगा।

NATIONAL : नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार को मिली जमानत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूछा- 19 साल पुराने मामले में कार्रवाई क्यों

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नंदीग्राम के कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने जमानत के लिए फिर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। बुधवार को उनके दो अधिवक्ताओं मिलन मुखोपाध्याय और अयन भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत में मामले का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि मिलन उपचुनाव के प्रत्याशी हैं और जमानत याचिका पर सुनवाई में समय लगेगा, इसलिए जल्द सुनवाई की जाए। अदालत ने जमानत याचिका दायर करने की अनुमति दे दी। इस सप्ताह मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार
मिलन को पिछले शुक्रवार पूर्व मेदिनीपुर के चंडीपुर से 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास, लोगों को जुटाने और लूटपाट समेत नंदीग्राम थाने में तीन और खेजुरी थाने में एक मामला दर्ज था।
इससे पहले मिलन ने पांच अन्य मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने उपचुनाव से पहले गिरफ्तारी पर सवाल उठाया।

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजुमदार ने कहा कि गिरफ्तारी वारंट 2007 से लंबित थे और आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद मिलन समेत अन्य लोगों के खिलाफ लंबित वारंट भी लागू किए गए हैं।

दो मामलों में हो चुकी है गिरफ्तारी
राज्य ने यह भी कहा कि बाकी पांच मामलों में मिलन मुख्य आरोपित नहीं हैं और उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हाई कोर्ट ने इस पर तत्काल कोई निर्देश नहीं दिया। इधर, हल्दिया अनुमंडल अदालत ने मिलन को तीन अक्टूबर तक जेल हिरासत में भेजा था।

इसके बाद कांथी अदालत ने उन्हें पांच अक्टूबर तक जेल हिरासत में भेज दिया। बुधवार को खेजुरी थाने में दर्ज एक मामले में उन्हें फिर कांथी अदालत में पेश किया गया। अभी तक दो मामलों में उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है।

NATIONAL : वांगचुक बोले-सरकार के खिलाफ बोला, मेरा एनकाउंटर हो सकता है, लेह हिंसा को लेकर कहा- गृहमंत्री इस्तीफा दें, हिंसा की जिम्मेदारी लें

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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आशंका जताई कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें ‘मुठभेड़’ में मारा जा सकता है। उन्होंने लेह में पिछले साल हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर 24 सितंबर, 2025 को हुए प्रदर्शन के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा की उस घटना को एक साल पूरा होने के मौके पर एक सभा को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान के खतरे को लेकर चेतावनियां मिली हैं और यदि इससे देश को जागरूक करने में मदद मिलती है तो वह कोई भी नतीजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

आशंका है कि कहीं मुझे मुठभेड़ में मार दिया जाये
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने मुझे जेल में डाला। अब इस बात की भी आशंका है कि कहीं मुझे मुठभेड़ में मार दिया जाये। लोग मुझसे कहते हैं कि आपको मुठभेड़ में मार दिया जायेगा। अगर ऐसा होता है तो होने दें ताकि देश तो जाग जाये। उन्होंने न्यायिक जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की और चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट जारी नहीं की गई तो पुलिस गोलीबारी की जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘‘जन न्यायाधिकरण’’ का गठन किया जायेगा। पिछले साल के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के लिए गृह मंत्री को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए वांगचुक ने कहा कि इस घटना के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।अमित शाह से मांगा इस्तीफा
वांगचुक ने कहा कि आज लद्दाख से मैं कहता हूं अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए। लद्दाख में जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने स्थानीय युवाओं के खिलाफ एके-47 समेत स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर शाह के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए वांगचुक ने इस मांग का समर्थन किया, लेकिन लद्दाख की स्थिति पर गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया।

राहुल गांधी की चुप्पी पर उठाए सवाल
वांगचुक ने कहा कि राहुल गांधी ने आवाज उठाई और पूछा कि छात्रों के खिलाफ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, उन्होंने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। मैं इसका समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा कि लेकिन यदि उन्होंने पहले अमित शाह के इस्तीफे की मांग की थी, तो फिर लद्दाख में जो कुछ हुआ उसका क्या, जहां एके-47 का इस्तेमाल किया गया और लोगों की मौत हुई, गोलियां उनके सिर और सीने में लगीं। पिछले साल के प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की मौत स्वचालित हथियारों से की गई गोलीबारी में हुई।लद्दाख के लिए न्याय की जिम्मेदारी पूरे देश की
उन्होंने कहा कि लद्दाख के लिए न्याय केवल केंद्र शासित प्रदेश के लोगों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है। लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में 24 सितंबर की हिंसा की पहली बरसी पर बृहस्पतिवार को बंद रखा गया। लेह और कारगिल में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम रही, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। वांगचुक ने आरोप लगाया कि भारी सुरक्षा तैनाती और पाबंदियों के कारण बृहस्पतिवार के कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही। उन्होंने कहा कि सीमित भागीदारी को आंदोलन की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के विपरीत बना डर का माहौल
लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को ‘झूठा, निराधार और भ्रामक’ बताते हुए कहा कि 2025 की हिंसा के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित प्रार्थना सभा में शामिल होने से किसी को नहीं रोका गया था। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख ने भारत के साथ रहने का विकल्प इसलिए चुना क्योंकि उसे लोकतंत्र और सम्मान के साथ जीने के अधिकार में भरोसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख में स्थिति ने भय का माहौल पैदा कर दिया है और कहा कि यह उन लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के विपरीत है, जिनके साथ लोगों ने भारत को चुना था। वांगचुक ने कहा कि 2014 से 2019 तक देश में चीजें अच्छी चल रही थीं, जब वे (भाजपा) सत्ता में आए थे।
अमित साह की आलोचन की
उन्होंने शाह की आलोचना करते हुए कहा कि जब से वह गृह मंत्री बने हैं, तब से हर जगह दंगों की घटनाएं हुई और अशांति का माहौल है। लद्दाख में वादे किए गए और फिर तोड़ दिए गए। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के एक तरफ चीन था और दूसरी तरफ भारत। लद्दाख ने भारत को इसलिए चुना क्योंकि हमें विश्वास था कि भारत में लोकतंत्र है और हम सिर ऊंचा करके जी सकेंगे। उन्होंने कहा कि आज लद्दाख में ऐसा दमन किया जा रहा है कि मेरे विचार में चीन भी तिब्बत के साथ ऐसा नहीं कर रहा है।

NATIONAL : देशभर में गणेश विसर्जन आज- मुंबई में 25000 जवान तैनात, 350 से ज्यादा कुंड बनाए गए

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12 दिनों तक चलने वाले भव्य गणेश उत्सव का आज अनंत चतुर्दशी के दिन समापन हो रहा है। इसके साथ ही महाराष्ट्र भर में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन की शुरुआत हो चुकी है। मुंबई की सड़कों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है और पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह से ही मुंबई के प्रसिद्ध पंडालों और घरों से गणेश मूर्तियों की विसर्जन यात्राएं निकलनी शुरू हो गईं। पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद ‘गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के गूंजते जयकारों और ढोल-ताशों की थाप पर भक्त झूमते नजर आए।
प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी
बता दें कि लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मुंबई पुलिस और बीएमसी (BMC) ने चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र भर में 24000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
दूसरी ओर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने भी लगभग 25000 कर्मचारियों को विसर्जन ड्यूटी पर लगाया है। लोगों की सुविधा के लिए तालाब, गोताखोर, एंबुलेंस, मेडिकल टीमें, क्रेन और तमाम आपातकालीन सेवाएं तैनात की गई हैं।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से की अपील
इतना ही नहीं प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें, तय किए गए विसर्जन स्थलों का ही उपयोग करें और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सहयोग करें।

लालबाग में दिखा खास नजारा
गौरतलब है कि हर साल की तरह इस बार भी लालबाग इलाके में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। प्रसिद्ध ‘लालबागचा राजा’ समेत कई बड़े सार्वजनिक मंडलों के दर्शन और विसर्जन यात्रा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे हैं। सड़कों पर फूलों की वर्षा और गुलाल उड़ाते हुए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है।

NATIONAL : ‘हताश नेता की झूठी गूंज’, भाजपा ने CEC-SIR विवाद पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का उड़ाया मजाक

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चुनाव आयोग को लेकर सियासत गर्म है। एक तरफ जहां राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमतियों को लेकर लोकतंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा किया।

वहीं भाजपा की ओर से सांसद व प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बिंदुवार पलटवार करते हुए उस खबर पर ही सवाल खड़ा किया जिसमें आयोग के अंदर ही दरार की बात कही गई है।

सुंधाशु ने कहा कि उक्त अखबार की पूरी खबर में कहीं भी इसका साक्ष्य नहीं दिया गया कि एक भी फैसला बिना सर्वसम्मति के हुआ। अगर दो आयुक्त विरोध में हों तो फैसला हो ही नहीं सकता है।

एक दिन पहले ही आयोग ने भी विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि एक साल में 40 फैसले लिए गए और सभी सर्वसम्मति से थे। सुधांशु ने कहा कि राहुल गांधी को ऐसी खबरों के आधार पर बहस नहीं खड़ी करनी चाहिए क्योंकि 2012 में इसी अखबार में कहा गया था कि सेना सत्ता पर कब्जा करना चाहती थी।

सुधांशु ने कहा कि संविधान के नियमों के अनुसार आयोग को एसआइआर कराने का अधिकार है। और यह संविधान के अनुरूप है कि वोटर वही हो जो भारतीय नागरिक हो।

उन्होंने राहुल से पूछा कि 1987 में पहली बार यह तय हुआ कि 26 जनवरी 1987 से पहले जन्मे को भारतीय माना जाएगा। यह कांग्रेस के समय का कानून है और इसका अर्थ है कि उसके बाद जो भी वोटर बनेगा उससे सवाल पूछए जाएंगे।2003 में संशोधन हुआ माता पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके बाद यह भी संशोधन हुआ कि माता पिता में कोई भी एक अवैध रूप से भारत न आया हो। ऐसे मे क्या यह जरूरी नहीं कि जो भी नया वोटर बन रहा है उससे कुछ सवाल पूछे जाएं। इसीलिए फआर्म 6 के साथ घोषणापत्र लाया गया है।सुधांशु ने कहा कि कांग्रेस को घुसपैठियों से प्रेम है क्योंकि वह उसके भरोसे चुनाव जीतती है। यही कारण है 2024 चुनाव से पहले कांग्रेस के एक नेता ने बंग्लादेश के अखबार में आर्टिकल लिखा कि मोदी हैज टू गो(मोदी को जाना होगा)। जब चुनाव भारत में हो रहे थे तो बंग्लादेश के अखबार मे क्यों आर्टिकल लिखा गया। जबकि 70 फीसद मुस्लिम आबादी वाले असम के ढूबरी में कांग्रेस को सबसे बडी जीत मिली।

ऐसे कई और इलाके हैं जहां घुसपैठियों का सबसे ज्यादा संदेह है। कई घुसपैठियों ने तो वापस जाते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने चार बार वोट डाले हैं।

बंग्लादेश के सांसद अख्तर हुसैन ने भी कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई तो मुश्किल होगी क्योंकि उनके कई लोग वापस आने लगेंगे। इस सबके तार कांग्रेस से जुड़े हैं।

राहुल ने कहा था कि एंटी इनकंबैंसी स्थापित नियम है। इस पर सुधांशु ने चुटकी लेते कहा कि यह कांग्रेस और खासतौर पर गांधी परिवार के लिए है। क्योंकि खुद राहुल और सोनिया गांधी भी अपने पुस्तैनी सीट रायबरेली और अमेठी से सपा के समर्थन के बगैर नहीं जीत पाते हैं।

वायनाड में मुस्लिम लीग का समर्थन चाहिए होता है। जब तक देश में बूथ लूटा जाता रहा, वोटर आइ कार्ड की जरूरत नहीं थी, सीसीटीवी नहीं होते थे कांग्रेस रिपीट करती रही। जबस चुनाव स्वच्छ होने लगे कांग्रेस विदा हो गई। तमिलानाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्य हैं जहां कांग्रेस दशकों से गायब है।

क्या यह भी चुनाव आयोग के कारण हो रहा है। कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा आयोग पर न फोड़े। सुधांशु ने तीखा तंज किया और कहा- नग्न व्यक्ति नृत्य करे और कहे कि कपड़ा फट गया जैसी कांग्रेस की हालत है।

सुधांशु ने कांग्रेस के काल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की भी याद दिलाई और यह वीडियो भी दिखाया जिसमें तत्कालीन कैबिनेट सचिव टीएन शेषन ने कहा था कि राजीव गांधी ने चुनाव की तिथि के लिए आयोग को निर्देश देने की बात कही थी।

सुधांशु ने एक और सवाल खड़ा किया और कहा कि राज्यों में चुनाव आयुक्त नियुक्त होते हैं। कितने राज्यों में उनकी नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष शामिल होता है। कितनी जगह राज्य के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।

एसआईआर के सभी विषय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाए गए थे और वहीं से मुहर लगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाना चाहता है तो ले आए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

बिना सियासी जमीन के जमींदार बनना चाहती है कांग्रेस
भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस बौखलाहट में है। देश गवाह है कि खुद को सत्ता की स्वभाविक पार्टी समझने वाली ग्रांड ओल्ड पार्टी बिना जनाधार की जागीरदारी , बिना जमीन की जमींदारी के गुरूर सुरूर में अभी भी है। और इसीलिए केंद्र और राज्यों में सिमटती सिकुड़ती गई।

जबकि भाजपा 2014, 2019, 2024 के चुनाव में अकेले क्रमशः 282 सीट और 38% वोट, 303 सीट और 38% वोट, 240 सीट और 37% वोट हासिल कर श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निरंतरता के साथ बिना कांग्रेस के सपोर्ट, रहम-रिमोट के तीसरे कार्यकाल में प्रवेश कर गई।

चुनाव में लगी चोट को चुनाव तंत्र की खोट साबित करने की सोच, सनक, साजिश, सियासत ने हार की हताशा ने कांग्रेस को हुड़दंगी तमाशा बना दिया है ।

हर चुनाव राजनैतिक दलों के लिए सबक-संदेश होता है, कोई भी हार जीत स्थाई नहीं होती, जनतंत्र में जनादेश की ताकत को अहंकार, अराजकता की आफत से अपहरण करने की सनक सियासी सेहत के लिए हानिकारक होती है ।

NATIONAL : दिल्ली SIR: लालकृष्ण आडवाणी और एस जयशंकर समेत सभी VVIPs का वेरिफिकेशन पूरा, नहीं कटेगा नाम

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (L.K. Advani ), पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar), दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख लोगों को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में ‘विसंगतियों’ को लेकर नोटिस जारी किए गए थे. इनमें से ज्यादातर को 2002 में दिल्ली में हुए पिछले SIR से ‘अनमैप्ड’ होने के कारण नोटिस दिया गया था. ऐसे ज्यादातर प्रमुख मतदाता नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में वोटर थे.

पिछले कुछ दिनों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) समेत चुनाव अधिकारियों की टीमों ने ऐसे मतदाताओं के घर जाकर उनके विवरण का सत्यापन किया. अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के बाद इन मतदाताओं के नाम 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं.

क्यों जारी हुआ था नोटिस
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर आसीन लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल और सार्वजनिक सेवाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के नाम अगर चुनावी डेटाबेस में चिन्हित थे और 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में नहीं मिले, तो उन्हें नोटिस जारी किए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान उनसे जरूरी दस्तावेज हासिल करना था.

33.13 लाख मतदाताओं का है नाम
दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि करीब 33.13 लाख मतदाताओं को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में विसंगतियों के कारण नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है. इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिनके विवरण 2002 में तैयार की गई पिछली SIR की मतदाता सूची से मैच नहीं हो सके थे. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा. किसी भी नाम को हटाने से पहले मतदाता को सुनवाई का अवसर देना और उचित कारण वाला अपील योग्य आदेश पारित करना जरूरी है.

NATIONAL : सरकार बोली-UPI पर लगने वाला शुल्क 4 हिस्सों में बंटेगा, ये पैसा खजाने में नहीं जाएगा; फिर दोहराया कि कस्टमर चार्ज नहीं देगा

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केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा हाई वैल्यू वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला किया है. इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह डिजिटल पेमेंट पर एक नया टैक्स है. इसके अलावा सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसका बोझ ऐसे आम यूजर्स पर पड़ेगा, जो दिन भर में कई छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं. इसपर गुरुवार को सरकारी सूत्रों ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी मर्चेंट फीस का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा.15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा. हालांकि, रकम चाहे कितनी भी हो, व्यक्ति-से-व्यक्ति (Person-to-Person) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.

सरकारी खजाने में नहीं जाएगा पैसा
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की इस आलोचना को खारिज करते हुए कि यह ग्राहकों पर लगाया गया टैक्स है, सरकारी सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित MDR से एक पैसा भी सरकारी खजाने में नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि इकट्ठा की गई रकम UPI इकोसिस्टम में बैंकों और दूसरी संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी.

इकट्ठा किए गए कुल MDR का 40 फीसदी ग्राहकों के बैंकों को, 30 फीसदी पेमेंट गेटवे को, 20 फीसदी UPI ऐप को और बाकी 10 फीसदी UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा.

ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ
उन्होंने कहा, ‘2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) MDR शुल्क और यूजर्स पर इसके असर से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करेंगे.’ सूत्रों ने यह भी साफ किया कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई सेस या सरचार्ज.

मर्चेंट फीस पर जीएसटी
सूत्रों ने आगे कहा कि UPI पर मर्चेंट फीस की वजह से ग्राहकों के वापस कैश इस्तेमाल करने की आशंका बेबुनियाद है. उन्हें यह भी उम्मीद है कि GST काउंसिल ग्राहकों के व्यापक हित में 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट फीस पर लगने वाले 18 फीसदी GST की समीक्षा करेगी, जैसा कि इंश्योरेंस प्रीमियम के मामले में किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘IBA जल्द ही 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क लगाने के बारे में फैली गलतफहमियों और अफवाहों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा.’ 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाने का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए कमाई का एक टिकाऊ ढांचा बनाना है.

MDR वह फीस है जो मर्चेंट (व्यापारी) डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं.

300 रुपये अधिकतम चार्ज
15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा. यह चार्ज कस्टमर नहीं, बल्कि मर्चेंट देंगे और 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी. लोगों के बीच होने वाले पेमेंट और रोजमर्रा के ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट मुफ्त रहेंगे.

रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी जरूरी सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के हर ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये की फ्लैट फीस लगेगी. कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन (म्यूचुअल फ़ंड, स्टॉक ब्रोकिंग) के लिए 0.02% की कम दर लागू होगी, जिसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये होगी.

UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक की कमाई करने वाले छोटे मर्चेंट किसी भी नए चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेंगे. इससे सभी मर्चेंट ट्रांजैक्शन का लगभग 96% हिस्सा सुरक्षित रहेगा.

MDR लगाने का क्या है मकसद?
UPI प्लेटफॉर्म चलाने वाली NPCI ने 15 सितंबर को कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के बारे में एक सर्कुलर जारी किया. इस कदम का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए कमाई का एक टिकाऊ ढांचा बनाना है.

छोटे मर्चेंट द्वारा UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास फंड बनाया जाएगा, जिसमें कुल MDR कलेक्शन का 5% हिस्सा योगदान के तौर पर डाला जाएगा. इस पहल से UPI का दायरा बढ़ेगा, लगातार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में छोटे व्यवसायों को शामिल करने की रफ्तार बढ़ेगी.

NATIONAL : राहुल बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने वोट चोरी की, मैंने उनकी नियुक्ति का विरोध किया था, सरकार ने उन्हें कानून से ऊपर रखा

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SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का उदाहरण देते हुए एंटी-इंकम्बेंसी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठना संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़ी ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने कहा कि वह हाल में खबरों में आई कुछ बातों पर अपनी राय रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और अपनी जिंदगी के 50 से ज्यादा साल एक राजनीतिक परिवार के बीच बिताए हैं। उनके मुताबिक, भारत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ एक बुनियादी राजनीतिक ताकत है, जो तेजी से किसी भी सरकार के खिलाफ माहौल बना सकती है और किसी को भी इससे छूट नहीं मिलती।

इंदिरा गांधी का उदाहरण देकर समझाया ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ का असर

राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने बांग्लादेश युद्ध जीता था और उस समय वह अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं। इसके बावजूद एक-दो साल के भीतर उन्हें जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में ऐसा कई नेताओं के साथ लगातार होता रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, कांग्रेस के नेताओं को भी इसका सामना करना पड़ा है और क्षेत्रीय दलों के नेता भी सत्ता-विरोधी लहर से प्रभावित होते रहे हैं।

‘मोदी, शाह और बीजेपी के साथ ऐसा क्यों नहीं होता?’

राहुल गांधी ने आगे कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में ऐसा क्यों नहीं होता। उन्होंने इसी संदर्भ में SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़ी रिपोर्ट का जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर एक सामान्य और प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी को लेकर यह सवाल अलग तरीके से सामने आता है।‘वोट चोरी से चुने सांसद कानून बना रहे, ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें’

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग वोट का संस्थागत संरक्षक है और उन्होंने चुनावों में कथित गड़बड़ी से जुड़े सबूत पहले ही सामने रखे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनावों में धांधली होने की पुष्टि के लिए पर्याप्त जानकारी मौजूद है। उन्होंने कहा कि जिन सवालों को वह लगातार उठाते रहे, उन्हें नजरअंदाज किया गया, जबकि देश की जनता ने उन पर भरोसा किया।

‘ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो चुनाव आयुक्त सवाल उठा रहे हैं’

राहुल गांधी ने कहा कि अब दो चुनाव आयुक्त भी उस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जिसकी जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पास है। उन्होंने दावा किया कि वोटिंग सिस्टम में हुई कथित अव्यवस्था और नुकसान के लिए ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी प्रक्रिया के जरिए हुआ। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।

‘वोट चोरी से कानून चोरी और फिर संस्था चोरी’

राहुल गांधी ने अपने आरोपों को एक कड़ी से जोड़ते हुए कहा कि अगर वोट की चोरी होती है तो उससे कानून की चोरी होती है और कानून की चोरी के बाद संस्थाओं की चोरी होती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा सिलसिला है जो लगातार आगे बढ़ता है। राहुल गांधी के मुताबिक, अगर संसद में कोई सांसद कथित तौर पर चोरी किए गए वोट के आधार पर पहुंचा है, तो उसके द्वारा बनाया गया कोई भी कानून गैर-कानूनी माना जाएगा और उसके जरिए किया गया संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी होगा।राहुल गांधी ने एंटी-इंकम्बेंसी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पिछले 50 वर्षों से सत्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास जाती रही है, लेकिन अचानक वहां एंटी-इंकम्बेंसी गायब हो जाती है।

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का भी उदाहरण दिया और कहा कि वहां भी ऐसा ही होता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कभी समाजवादी पार्टी तो कभी BSP की सरकार रही है, लेकिन वहां भी एंटी-इंकम्बेंसी के गायब होने का सवाल उठता है।

राहुल गांधी का दावा- ‘लोकतंत्र पर पहले कभी नहीं हुआ ऐसा हमला’

राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जिसका सामना भारतीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 का लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव ‘फेक’ थे। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान पारित किए गए कानून अवैध हैं और संस्थाओं को संचालित करने वाले लोग भी अवैध हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दो जूनियर चुनाव आयुक्तों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ‘बहुत अच्छा काम’ किया है।यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं, हर नागरिक का सवाल’

राहुल गांधी ने कहा कि उनके मुताबिक मौजूदा विवाद को सिर्फ वोट तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे हर भारतीय नागरिक के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति से जुड़ा मुद्दा बताया। राहुल गांधी ने दोहराया कि विपक्ष लगातार मतदान प्रक्रिया में समस्या होने की बात उठा रहा है और इसी वजह से SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।

NATIONAL : यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो आज से: गृह मंत्री अमित शाह करेंगे व्यापार मेले का उद्घाटन, सीएम योगी रहेंगे साथ

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इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में पांच दिवसीय उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस) के चौथे संस्करण का आज शुक्रवार को शुभारंभ होने वाला है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 11 बजे इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन करने करेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसका उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। ट्रेड शो में पहली बार आस्ट्रिया, जापान, रूस, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम साझेदार देश के तौर पर सहभागिता कर रहे हैं।

तैयारी और लक्ष्य को साझा किया

इन देशों की भागीदारी से व्यापार साझेदारी, तकनीकी सहयोग, सोर्सिंग, निवेश और नए बाजारों तक प्रदेश के उत्पादों की पहुंच के अवसर बढ़ेंगे। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खरीदारों की बीटूबी बैठक, सेक्टोरल नीति सत्र से प्रदेश में निवेश की नई संभावनाएं तैयार की जाएंगी। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता कर यूपीआइटीएस की तैयारी और लक्ष्य को साझा किया।

मंत्री ने कहा कि यूपीआइटीएस प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं, निर्यातकों और कारोबारियों को देश और दुनिया के बाजारों से जोड़ने का बड़ा मंच है। इसमें 2,400 से अधिक प्रदर्शकों, 1.5 लाख से अधिक बीटूबी खरीदारों एवं आगंतुकों, 4.5 लाख से अधिक सामान्य आगंतुकों के अलावा 85 देशों के 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है।अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी बढ़ रही

प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं। सरकार ऐसा ईकोसिस्टम विकसित कर रही है, जिसमें उद्यम आगे बढ़े, नवाचार करें और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें। यूपीआइटीएस स्थानीय उद्यमों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने के साथ निवेश, व्यावसायिक विस्तार और रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा। कार्यक्रम से पहले ही अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी बढ़ रही है।अब तक 72 देशों से विदेशी खरीदारों के पंजीकरण हो चुके हैं। होस्टेडबायर प्रोग्राम के माध्यम से वास्तविक खरीदारों, आयातकों, वितरकों, रिटेलर्स, सोर्सिंग एजेंट्स, प्रोक्योरमेंट प्रमुखों, व्यापार संघों और व्यावसायिक उद्यमों को जोड़ा जा रहा है। ट्रेड शो में वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पहल के साथ इस साल वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुजीन को विशेष पहचान दी जाएगी।

प्रदेश के विभिन्न जिलों की पारंपरिक पाक विधियों, स्थानीय व्यंजनों और खाद्य विरासत को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इस मौके पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील, जिलाधिकारी मेधा रुपम आदि मौजूद रहे।

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