Tuesday, October 6, 2026
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BUSINESS : जीएसटी 2.0 में बदलाव संभव: ₹5 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पर ही चलेगा आपराधिक केस? ये नियम भी बदलेंगे

जीएसटी परिषद सात अक्तूबर की बैठक में गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने और आपराधिक मुकदमे की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। सामान्य कर विवादों में गिरफ्तारी के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने पर जोर देने की तैयारी है। जीएसटी कानून के कई अपराधों के प्रावधान नरम करने और छोटे करदाताओं को राहत देने पर भी विचार हो रहा है।

जीएसटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जीएसटी परिषद सात अक्तूबर को होने वाली बैठक में कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने और गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही, कर चोरी से जुड़े अपराधों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सरकार का जोर अब गिरफ्तारी के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए कार्रवाई करने पर है। ये प्रस्ताव मंजूर होने पर जीएसटी के तहत कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदल सकता है।

गिरफ्तारी नियमों में क्या बदलाव होने जा रहा है?
जीएसटी परिषद के सामने केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 में बदलाव का प्रस्ताव है। अभी इस धारा के तहत तय शर्तें पूरी होने और निर्धारित अपराध होने का विश्वास करने के आधार पर आयुक्त किसी अधिकारी को गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, यह शक्ति कर अधिकारियों से वापस ली जा सकती है। इसके बाद किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर परिषद की मुहर लगना बाकी है।

आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा कितनी बढ़ेगी?
अभी जीएसटी के बड़े अपराधों में एक करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड के मामलों में आयुक्त स्तर के अधिकारी की मंजूरी के बाद गिरफ्तारी हो सकती है। प्रस्ताव में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि पांच करोड़ रुपये तक की कर चोरी माफ हो जाएगी। ऐसे मामलों में भी सरकार टैक्स वसूल सकती है और ब्याज तथा जुर्माना लगा सकती है। गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिए आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है।

किन मामलों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है?
प्रस्ताव का उद्देश्य सामान्य कर विवादों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखना है। वस्तुओं के वर्गीकरण, उनकी कीमत तय करने या इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कारोबारी और कर अधिकारी अलग-अलग राय रखते हैं। ऐसे विवादों में हर मामले को आपराधिक मुकदमे तक ले जाने के बजाय टैक्स वसूली और आर्थिक दंड पर जोर दिया जा सकता है। देर से रिटर्न दाखिल करने, कर भुगतान में देरी या कारोबार की नकदी स्थिति के कारण भुगतान अटकने जैसे मामलों में भी टैक्स, ब्याज और उचित जुर्माना चुकाकर राहत पाने का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि, यह प्रस्तावित बदलावों के लागू होने पर निर्भर करेगा।

जीएसटी कानून में कितने अपराधों से जुड़े प्रावधान बदल सकते हैं?
प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी कानून में आपराधिक कार्रवाई से जुड़े 24 अपराधों के प्रावधानों को नरम करने, नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा रूप में बनाए रखने पर विचार किया जा रहा है। न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव भी है, ताकि अदालत हर मामले में कैद की सजा देने के लिए बाध्य न हो। इसके अलावा, सजा की एक श्रेणी में अधिकतम कैद की अवधि तीन साल से घटाकर दो साल करने की बात है। हर मामले में जुर्माने का विकल्प उपलब्ध कराने और छोटे करदाताओं के लिए देर से भुगतान पर लगने वाले शुल्क में राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है।

टैक्स वसूली पर जोर क्यों दे रही है सरकार?
जीएसटी लागू होने के समय, एक जुलाई 2017 को फर्जी बिल और कर चोरी पकड़ना मुश्किल था। रिटर्न में दर्ज हर बिल का दूसरे पक्ष के रिकॉर्ड से मिलान करना आसान नहीं था। इसलिए गिरफ्तारी की शक्ति को डर पैदा करने वाले उपाय के रूप में शामिल किया गया था। अब व्यवस्था में विक्रेता की ओर से दर्ज जानकारी और खरीदार की ओर से दावा किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान किया जा सकता है। इससे फर्जी क्रेडिट का पता शुरुआती स्तर पर लगाने और उसे आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। सरकार अब इसी तकनीकी व्यवस्था के आधार पर जांच मजबूत करने और टैक्स, ब्याज व जुर्माने के जरिये कार्रवाई करने पर जोर दे रही है।

कारोबारियों और कर प्रशासन पर इसका क्या असर होगा?
एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने इसे अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़े बदलाव के तौर पर देखा है। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी के जरिए डर पैदा करने वाली व्यवस्था से तकनीक के आधार पर धोखाधड़ी पकड़ने और आर्थिक दायित्व तय करने की दिशा में बदलाव है। जीएसटी नेटवर्क के आंकड़ों से गड़बड़ियों का पता लगाने पर जोर बढ़ सकता है। प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि इससे सामान्य कर विवादों में कारोबारियों पर गिरफ्तारी का दबाव कम होगा, जबकि सरकार के पास बकाया टैक्स वसूलने और जुर्माना लगाने की शक्तियां बनी रहेंगी।

सोना-चांदी के आयात पर मिल रही छूट खत्म करने की तैयारी
सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंसियों को मिलने वाली एकीकृत जीएसटी की छूट खत्म हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद सात अक्तूबर को इस प्रस्ताव पर विचार करेगी। फिलहाल इन कीमती धातुओं के आयात पर तीन प्रतिशत जीएसटी लगता है, लेकिन 2017 से बैंकों और नामित एजेंसियों को इससे छूट मिली हुई है। छूट खत्म होने पर इन एजेंसियों और सर्राफा एक्सचेंजों के लिए कर व्यवस्था समान हो जाएगी।

BUSINESS : क्या कर अधिकारियों से छिनेगा सीधे गिरफ्तारी का अधिकार? जानें आगामी बैठक के बड़े प्रस्ताव

7 अक्तूबर की जीएसटी काउंसिल बैठक में टैक्स अफसरों के सीधे गिरफ्तारी अधिकार खत्म करने और न्यायिक मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर फैसला संभव है। फर्जी आईटीसी और कानूनी बदलावों की पूरी रिपोर्ट पढ़ें और ताजा अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के प्रवर्तन ढांचे में जल्द ही बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। कानून के गैर-अपराधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए टैक्स अधिकारियों से करदाताओं को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लिया जा सकता है। सितंबर 2025 में आयोजित 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कर दरों के सरलीकरण पर बड़े निर्णय लिए गए थे। अब 7 अक्तूबर 2026 को होने जा रही 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में प्रवर्तन संबंधी नीतिगत सुधारों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि केंद्रीय और राज्य वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती है, तो जीएसटी प्रवर्तन विभागीय गिरफ्तारी से हटकर अदालती निगरानी के अधीन आ जाएगा।

वर्तमान जीएसटी कानून में गिरफ्तारी के क्या नियम हैं?
मौजूदा व्यवस्था के तहत सेंट्रल जीएसटी एक्ट की धारा 69 टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार प्रदान करती है। इसके अंतर्गत कमिश्नर स्तर के अधिकारियों के पास यह शक्ति है कि वे कानून में निर्दिष्ट गंभीर अपराधों के संदेह में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का आदेश दे सकें।

गिरफ्तारी के आधार: गिरफ्तारी का यह अधिकार मुख्य रूप से फर्जी बिल जारी करने, धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने व उसका उपयोग करने और ग्राहकों से टैक्स वसूल कर सरकार के पास जमा न कराने जैसे गंभीर मामलों तक सीमित है। अपराधों का वर्गीकरण: कानून में 5 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े को संज्ञेय और गैर-जमानती माना गया है, जबकि 5 करोड़ रुपये से कम की राशि वाले मामले जमानती होते हैं।

अदालती प्रक्रिया: कमिश्नर की मंजूरी के बाद कर अधिकारी स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तारी करते हैं। गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है, जहां रिमांड या जमानत का फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के तहत अदालत द्वारा किया जाता है।

अक्तूबर की बैठक में प्रस्तावित नए बदलाव क्या हैं?
प्रस्तावित जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत टैक्स अधिकारियों की सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति को समाप्त करने की योजना है।

न्यायिक अनुमति अनिवार्य: नए ढांचे के तहत किसी भी करदाता की गिरफ्तारी के लिए पहले अदालत से न्यायिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
कंपाउंडिंग और पेनल्टी पर जोर: जीएसटी अधिकारियों का मुख्य ध्यान कर चोरी की राशि, ब्याज और वित्तीय जुर्माना वसूलने पर होगा।

इस सुधार से उद्योग और व्यापार जगत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अधिकारियों द्वारा अचानक की जाने वाली गिरफ्तारी और उत्पीड़न के डर से मुक्ति मिलेगी। गिरफ्तारी केवल अदालत में सुनवाई और अनुमति के बाद ही संभव हो सकेगी। दूसरी ओर, कर अधिकारियों की भूमिका मुख्य रूप से कर वसूली तक सीमित होगी, जबकि गंभीर अपराधों में गिरफ्तारी का काम कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अदालती प्रक्रिया के माध्यम से होगा।

जीएसटी फर्जीवाड़े और गिरफ्तारियों के आंकड़े क्या बताते हैं?
हाल के वर्षों में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी पंजीकरण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है:

वित्त वर्ष 2025-26: सेंट्रल जीएसटी विंग ने 74,782 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी का पता लगाया और 358 लोगों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा, फर्जी और आधार कार्ड के दुरुपयोग से किए गए गलत रजिस्ट्रेशन मामलों में 60 लोग गिरफ्तार किए गए। हाल ही में फिनो पेमेंट्स बैंक के तत्कालीन एमडी एवं सीईओ ऋषि गुप्ता को ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अवैध धन को शेल कंपनियों के जरिए घुमाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

वित्त वर्ष 2024-25: 58,773 करोड़ रुपये के आईटीसी घोटाले में 178 लोगों को और फर्जी पंजीकरण मामले में 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
वित्त वर्ष 2023-24: 36,373 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में 182 गिरफ्तारियां और फर्जी रजिस्ट्रेशन में 67 गिरफ्तारियां हुई थीं।
7 अक्तूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक देश में कर सुधारों की दिशा तय करेगी। इंस्पेक्टर राज के डर को कम कर न्यायिक निगरानी और डेटा-संचालित कर वसूली को बढ़ावा देने से कारोबारियों को सुगम माहौल मिलेगा, वहीं गंभीर धोखाधड़ी पर कानूनी शिकंजा भी बना रहेगा।

NATIONAL : ‘6 साल जेल में रहा, तब भी नहीं सीखी’, संजय दत्त ने मराठी बोलने से किया इनकार, ताकते रह गए महाराष्ट्र के मंत्री

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महाराष्‍ट्र में ऑटो-टैक्‍सी वालों के ल‍िए अन‍िवार्य मराठी भाषा व‍िवाद के बीच संजय दत्त का एक बयान चर्चा में है। एक्‍टर ने राज्य के पर‍िवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के कहने के बावजूद मंच पर मराठी बोलने से इनकार कर द‍िया। दो टूक शब्‍दों में कहा- मैं 6 साल येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी नहीं सीखी।

‘6 साल जेल में रहा, तब भी नहीं सीखी’, संजय दत्त ने मराठी बोलने से किया इनकार, ताकते रह गए महाराष्ट्र के मंत्री
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर हालिया विवाद ने एक नया रंग ले लिया है। राज्य में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए कामचलाऊ मराठी सीखना अनिवार्य करने के बीच संजय दत्त का ताजा बयान सामने आया है। मामला मुंबई में रविवार को आयोजित एक दही हांडी कार्यक्रम का है। बॉलीवुड एक्‍टर ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान जब संजय दत्त ने माइक लिया तो हिंदी में बोलने लगे। इस पर मंत्री जी ने उन्‍हें टोका और मराठी में बात करने का अनुरोध किया। लेकिन 67 साल के एक्‍टर ने दो टूक शब्‍दों में कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे। संजय दत्त ने मजाकिया लहजे में कहा, ‘मैं 6 साल तक येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी भाषा नहीं सीख पाया।’

संजय दत्त का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए बुनियादी या कामचलाऊ मराठी भाषा जानना अनिवार्य किया है। इसको लेकर खूब शोर मचा हुआ है। खासकर उत्तर भारतीयों को लेकर। हालांकि, संजय दत्त का अंदाज मजाकिया था, लेकिन अब इसको लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है।

आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं तो मैंने सोचा कि उनके आने के बाद, क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं।

प्रताप सरनाईक बोले- आजकल मैं सबको मराठी सिखा रहा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इवेंट के वीडियो में संजय दत्त और प्रताप सरनाईक स्टेज पर खड़े हैं। इसी बीच मंत्री जी कहते हैं, ‘आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं।’ यह बात परिवहन मंत्री ने हालिया नियम के संदर्भ में कही। उनकी बात पर जहां मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर थोड़ी हंसी बिखर गई, वहीं प्रताप सरनाईक ने मराठी में आगे कहा, ‘तो मैंने सोचा कि उनके आने के बाद, क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।’

इसके बाद संजय दत्त ने झट से माइक हाथ में लिया और पहले ‘हर हर महादेव’ के नारे लगाए, फिर मजाकिया लहजे में ही जवाब दिया, ‘प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।’ फिर एक्टर ने इसके बाद प्रताप सरनाईक के कंधे पर हाथ रखा और उन्हें अपना पुराना दोस्त और भाई बताया। संजय दत्त ने आगे कहा, ‘मैं प्रताप भाई का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यहां बुलाया। हमारा रिश्ता बहुत पुराना है, 25 साल हो गए हैं।’

यूजर्स बोले- काश, ये बात ऑटो-टैक्‍सी वाले भी बोल बाते
बहरहाल, स्टेज पर संजय दत्त की यह बेबाकी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। एक यूजर ने लिखा है, ‘सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।’ एक दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, ‘उन्होंने इसे स्टाइल के साथ नजरअंदाज किया।’ एक तीसरे यूजर ने लिखा, ‘मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्‍शा और टैक्‍सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।’ इसी बात पर आगे तंज कसते हुए एक यूजर ने कहा, ‘विडंबना देख‍िए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।’

कुछ यूजर्स बोले- पूरी जिंदगी महराष्‍ट्र में रहे, फिर भी मराठी नहीं आती
हालांकि, इस बीच कई यूजर्स ऐसे भी हैं जो संजय दत्त के मराठी में नहीं बोलने से नाराज दिखे। एक ने लिखा, ‘आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।’ एक अन्‍य ने लिखा, ‘संजय दत्त बचपन से मुंबई में रह रहे हैं और वे खुद कहते हैं कि येरवडा जेल में 6 साल बिताने के बाद भी वे मराठी नहीं सीख पाए। उन्होंने बिना किसी शर्म के सबके सामने यह बात खुलकर मानी।’

बीजेपी विधायक ने मंत्री प्रताप सरनाईक पर साधा निशाना
संजय दत्त के बयान पर अब भारतीय जनता पार्टी के विधायक नरेंद्र मेहता ने सवाल उठाए हैं। उन्‍होंने इसे प्रताप सरनाईक की ‘कथनी और करनी’ से जोड़ा है। कहा, ‘अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्‍शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।’

2026 में अब तक रिलीज हो चुकी हैं संजय दत्त की 6 फिल्‍में
बहरहाल, संजय दत्त के वर्कफ्रंट की बात करें तो इस साल अभी तक उनकी 6 फिल्‍में रिलीज हो चुकी हैं। इनमें प्रभास के साथ ‘द राजा साब’, रणवीर सिंह के साथ ‘धुरंधर: द रिवेंज’, ध्रुव सरजा के साथ ‘केडी: द डेविल’, रितेश देशमुख के साथ ‘राजा श‍िवाजी’, ‘आख‍िरी सवाल’ और हालिया रिलीज अरबी फ‍िल्म ‘7 डॉग्स’ में कैमियो रोल शामिल है। आगे वह ‘बाप’ और ‘खलनायक रिटर्न्‍स’ में नजर आने वाले हैं।

WORLD : हिंद-प्रशांत में सैन्य सहयोग मजबूत करने की कवायद, जापान के साथ राफेल एफ4 ने किया हवाई अभ्यास

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फ्रांस ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने के लिए करीब 40 हजार किलोमीटर लंबे वैश्विक हवाई मिशन पर राफेल एफ4 लड़ाकू विमानों को उतारा है। फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल का ‘पेगास 26’ मिशन 8 सितंबर को फ्रांस से रवाना हुआ और ग्रीनलैंड, कनाडा तथा अलास्का के रास्ते जापान पहुंचा। जापान के बाद यह दल इंडोनेशिया और भारत गया। करीब 40 दिन के इस मिशन के मध्य अक्टूबर में फ्रांस लौटने की योजना है। यह जानकारी द योमिउरी शिंबुन के अंग्रेजी संस्करण ‘द जापान न्यूज’ ने अपनी विशेष रिपोर्ट में दी है।

2023 से शुरू हुई थी राफेल एफ4 लड़ाकू विमान की तैनाती
रिपोर्ट में मिशन के दौरान राफेल एफ4 लड़ाकू विमानों और फ्रांसीसी सैन्य परिवहन विमानों की गतिविधियों तथा जापान के साथ हुए हवाई अभ्यास का प्रत्यक्ष विवरण दिया गया है। फ्रांसीसी दल में नौ विमान और करीब 300 सैन्यकर्मी शामिल हैं। इसके केंद्र में राफेल एफ4 लड़ाकू विमान हैं, जिनकी तैनाती 2023 से शुरू हुई थी। इस संस्करण में नेटवर्क आधारित संचार क्षमता को काफी मजबूत किया गया है और यह लंबी दूरी की आधुनिक मिसाइलों से लैस हो सकता है।

फ्रांस राफेल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल और ड्रोन के साथ समन्वित अभियान की क्षमता पर भी परीक्षण कर रहा है।राफेल के साथ ए400एम और ए330 एमआरटीटी परिवहन एवं ईंधन भरने वाले विमान भी मिशन में शामिल हैं। ए330 एमआरटीटी हवा में ही राफेल को ईंधन उपलब्ध करा सकता है। इससे कम दूरी वाले लड़ाकू विमान भी लंबी दूरी के अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

जापान में हुआ हवाई युद्धाभ्यास
फ्रांसीसी हवाई दल जापान के हयाकुरी एयरबेस पहुंचा और करीब एक सप्ताह वहां रहा। जापान की वायु आत्मरक्षा बल के साथ नौवहन प्रशिक्षण, फॉर्मेशन फ्लाइंग, हवा में ईंधन भरने और लड़ाकू अभ्यास किए गए। दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने ‘डॉगफाइट’ यानी काल्पनिक हवाई युद्ध का भी अभ्यास किया।कांतो क्षेत्र में टोक्यो के हानेदा और नारिता जैसे व्यस्त हवाई अड्डे होने के कारण अभ्यास के दौरान सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों के पायलटों ने लड़ाकू विमानों के सेंसर से एक-दूसरे की स्थिति पर नजर रखी और रेडियो के जरिए उड़ान मार्ग तथा ऊंचाई की लगातार पुष्टि की।

फ्रांस के वायु एवं अंतरिक्ष बल प्रमुख जनरल जेरोम बेलांजे ने कहा कि इस तरह की ‘एरियल डिप्लोमेसी’ क्षेत्रीय सहयोग का व्यापक नेटवर्क मजबूत करती है। उनके मुताबिक जितना अधिक सहयोग होगा, रणनीतिक प्रतिस्पर्धियों के लिए अस्थिर करने वाली गतिविधियां करना उतना ही कठिन होगा।उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत में किसी मानवीय या सुरक्षा संकट की स्थिति में जापान की मदद के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए क्षेत्र की बेहतर समझ और दोनों देशों की सेनाओं के बीच संचालन क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

भारत के लिए क्यों अहम
फ्रांस के इस मिशन का भारत तक पहुंचना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत और फ्रांस पहले से रक्षा क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं और भारत के पास फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान हैं। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता के बीच फ्रांस की इस तरह की लंबी दूरी की तैनाती भारत, जापान और अन्य साझेदार देशों के साथ उसकी बढ़ती रणनीतिक भागीदारी को भी रेखांकित करती है।

NATIONAL : सीईपीए बातचीत का पांचवां दौर शुरू, मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई

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आज 05 अक्तूबर 2026 को अश्विना माह के कृष्ण पक्ष की दशमी है। आज से सीईपीए बातचीत का पांचवां दौर शुरू होगा। इसके साथ हीमुख्य चुनाव आयुक्त अधिकारों को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई होगी।

सीईपीए बातचीत का पांचवां दौर शुरू
भारत और कनाडा के मुख्य वार्ताकार ओटावा में सोमवार से ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (CEPA) के लिए बातचीत का पांचवां दौर शुरू करेंगे। इसका मकसद इस साल के आखिर तक बातचीत पूरी करना है। पांच दिन चलने वाली यह बातचीत 9 अक्तूबर को खत्म हो सकती है। बातचीत का चौथा दौर 18 सितंबर को यहां खत्म हुआ था। बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है क्योंकि दोनों देश इस साल के आखिर तक बातचीत पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का आज से भारत दौरा शुरू

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन सोमवार से तीन दिन के लिए भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। उनकी इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और भारत-EFTA आर्थिक साझेदारी पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पार्मेलिन के बीच सोमवार को द्विपक्षीय बातचीत होनी है।इसके साथ ही पार्मेलिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे, जो उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन करेंगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इस यात्रा के दौरान स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त अधिकारों को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अधिकारों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो संविधान के तहत पूरे चुनाव आयोग को दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वाद सूची के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले को सुनेगी। (संबंधित खबर यहां पढ़ें)

पश्चिम बंगाल एसआईआर के मामले में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के एसआईआर से जुड़े मामले में सुनवाई करेंगा। बता दें कि बंगाल की वोटर लिस्ट में 27 लाख से ज्यादा लोगों के नाम कटे हैं। इसके साथ ही हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि वोटर लिस्ट से 27 लाख नाम कटने के लिए भाजपा या चुनाव आयोग नहीं, बल्कि खुद ममता बनर्जी जिम्मेदार है।

5वां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (केईसी 2026) का आज आखिरी दिन है। नई दिल्ली में “प्रवाह के युग में सुदृढ़शीलता” विषय के तहत आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम लगभग 30 देशों के 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित 180 से अधिक नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, वित्तीय विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विचारकों को एक साथ आए।

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक सोमवार को सुबह 11 बजे सचिवालय के शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिह सुकखू की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक को लेकर कर्मचारियों, बेरोजगारों और आम परिवारों की नजरें टिकी हैं। सबसे बड़ा फोकस नौकरियों के पिटारे पर रहने की संभावना है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल सोमवार को शाम 4 बजे नई दिल्ली में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में पार्टी के महासचिवों और राज्य प्रभारियों की बैठक करेंगे। इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस कमेटी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 15 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में 10 जनपथ पर AICC सचिवों की बैठक बुलाई थी।

NATIONAL : 3 से 5 अक्टूबर तक दिल्ली में आयोजित होगा 5वां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन, भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

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नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि 5वां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (केईसी 2026) 3 से 5 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। “बदलाव के दौर में लचीलापन” थीम पर आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर के प्रमुख नीति निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, वित्तीय विशेषज्ञ और विचारक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में लगभग 30 देशों से 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। सम्मेलन का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन करेंगे, जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि लगातार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और झटकों के बीच आर्थिक नीतियां किस प्रकार विकास,…

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि 5वां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (केईसी 2026) 3 से 5 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। “बदलाव के दौर में लचीलापन” थीम पर आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर के प्रमुख नीति निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, वित्तीय विशेषज्ञ और विचारक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में लगभग 30 देशों से 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।

सम्मेलन का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन करेंगे, जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि लगातार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और झटकों के बीच आर्थिक नीतियां किस प्रकार विकास, खुलेपन और संस्थागत विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बना सकती हैं।

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण “बदलाव के दौर में लचीलापन: भारत की आर्थिक प्राथमिकताएं” विषय पर विशेष पूर्ण सत्र होगा, जिसमें वैश्विक आर्थिक विखंडन, तकनीकी बदलाव और बार-बार आने वाले झटकों के बीच भारत कैसे विकास की गति बनाए रख सकता है, व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है और निवेश बढ़ा सकता है, इस पर चर्चा होगी। इस सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विशेष संबोधन देंगी, जबकि फ्रांस की पूर्व लोक कार्रवाई एवं लेखा मंत्री और कोर्ट डेस कॉम्प्टेस की अध्यक्ष एमेली डी मोंटचेलिन चर्चा में भाग लेंगी।

सम्मेलन के समापन सत्र “भारत और विश्व: अनुकूलनशीलता का अनूठा स्वरूप” का संचालन एन.के. सिंह करेंगे। इस सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर विशेष समापन संबोधन देंगे, जबकि सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज यो चर्चा में शामिल होंगे। चर्चा का केंद्र यह होगा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता कैसे बनाए रखे और नए साझेदारी अवसरों का लाभ कैसे उठाए।

तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था भी सम्मेलन का एक बड़ा विषय होगा। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया “कनेक्टिविटी से एआई तक: डिजिटल अर्थव्यवस्था का नया ढांचा” विषय पर मुख्य भाषण देंगे। इस सत्र में डिजिटल अवसंरचना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई संचार प्रणालियों की भूमिका पर चर्चा होगी।

वहीं केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत “पूंजी के रूप में संस्कृति: विरासत से क्षितिज तक” विषय पर मुख्य वक्तव्य देंगे, जिसमें सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास के संसाधन के रूप में देखने पर विचार किया जाएगा।

सम्मेलन का पहला पूर्ण सत्र “जोखिम के लिए मूल्य निर्धारित दुनिया” होगा, जिसमें ऊर्जा झटकों, सप्लाई चेन बाधाओं और व्यापार के बढ़ते भू-राजनीतिक उपयोग का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा होगी। इस सत्र की अध्यक्षता लॉर्ड निकोलस स्टर्न करेंगे, जबकि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा मुख्य वक्तव्य देंगे। वहीं शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन चर्चा में भाग लेंगे।

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच केंद्रीय बैंकों की भूमिका भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण विषय रहेगी। “बदलाव के दौर में सेंट्रल बैंकिंग” सत्र में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा विशेष संबोधन देंगे।

इसके अलावा, सम्मेलन में राजकोषीय संघवाद, औद्योगिक नीति, पूंजी बाजार विकास, नियामकीय निगरानी, विकास वित्त, घरेलू और विदेशी पूंजी जुटाने की रणनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी। केंद्र और राज्यों के वित्तीय संबंधों, औद्योगिक परिवर्तन में नीति की भूमिका तथा भारत के पूंजी बाजारों को और गहरा करने के उपायों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।

WORLD : प्रधानमंत्री मोदी के न्योते पर भारत आएंगे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन, पांच अक्टूबर से तीन दिवसीय दौरा

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स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन 5 से 7 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे, जहां वे पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय सहयोग और टीईपीए (TEPA) समझौते की समीक्षा करेंगे।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन 5 से 7 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस वर्ष यह उनका दूसरा भारत दौरा है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, टेक्नोलॉजी और निवेश समेत कई अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी।

एक साल में दूसरी बार भारत आ रहे राष्ट्रपति पार्मेलिन
व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति पार्मेलिन की यह भारत की पहली राजकीय यात्रा होगी और इस साल उनका दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वह फरवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे।

पीएम मोदी ने दिया था निमंत्रण
इस यात्रा के दौरान उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा। इस यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने न‍िमंत्रण द‍िया था।मंत्रालय ने बताया क‍ि भारत के राष्ट्रपति की स्विट्जरलैंड की आखिरी राजकीय यात्रा 2019 में हुई थी। इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में स्विट्जरलैंड की आधिकारिक यात्रा की थी और इसके बाद 2018 में भी वहां गए थे।

भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग की प्रगति की होगी समीक्षा
मंत्रालय ने बताया क‍ि पांच अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पार्मेलिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी। दोनों नेता कई क्षेत्रों में भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इनमें व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, गतिशीलता और संस्कृति और जनसंपर्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मिलेंगे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति
मंत्रालय ने बताया क‍ि बैठक के दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा करेंगे। इसके अलावा, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को लेकर भी चर्चा होगी। राष्ट्रपति पार्मेलिन भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन भी करेंगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी राष्ट्रपति पार्मेलिन से मुलाकात करेंगे।

क्यों खास है स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का दौरा
मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति पार्मेलिन का यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि वह सात अक्टूबर 2026 को दूसरे इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट में हिस्सा लेंगे। इस समिट का आयोजन भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने की पहली सालगिरह के मौके पर किया जा रहा है। ईएफटीए देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है।

दौरे से ये उम्मीद
मंत्रालय ने बताया क‍ि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से दोस्ताना रिश्ते रहे हैं। राष्ट्रपति पार्मेलिन की इस यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और आपसी हित के नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित रूप से होने वाली उच्च स्तरीय बातचीत को भी आगे बढ़ाएगी।

BUSINESS : भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट, चौथे दौर की व्यापार वार्ता शुरू, 2030 तक 70 अरब डॉलर का लक्ष्य

India Canada CEPA: भारत और कनाडा के बीच CEPA को लेकर चौथे दौर की व्यापार वार्ता शुरू हो गई है। दोनों देश साल के अंत तक समझौता पूरा करने और 2030 तक व्यापार 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA को लेकर सोमवार को चौथे दौर की व्यापार वार्ता शुरू हो गई। पांच दिनों तक चलने वाली इस बातचीत में दोनों देश वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, मूल नियमों (Rules of Origin) और तकनीकी व्यापार बाधाओं समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। दोनों देशों ने इस साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। बातचीत का यह दौर जुलाई में कनाडा की राजधानी ओटावा में हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद शुरू हुआ है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही कूटनीतिक खटास के बीच व्यापार वार्ता की बहाली को आर्थिक रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

मोदी और कार्नी ने तय किया है साल के अंत तक समझौते का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस साल मार्च में नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान CEPA वार्ता को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी। दोनों नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि व्यापक व्यापार ढांचा दोनों देशों की साझेदारी के लिए लंबे समय तक टिकने वाला आर्थिक आधार तैयार कर सकता है। भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाने की साझा महत्वाकांक्षा भी जताई है।

भारत-कनाडा के बीच कितना है व्यापार?
भारत और कनाडा के बीच 2024-25 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस दौरान कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत कनाडा को मुख्य रूप से दवाइयां, मशीनरी के हिस्से और मैकेनिकल उपकरण, लौह एवं इस्पात से जुड़े उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑर्गेनिक केमिकल्स, आभूषण, रत्न एवं कीमती पत्थर, कपड़े और टेक्सटाइल, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स निर्यात करता है। वहीं, कनाडा से भारत आने वाली प्रमुख वस्तुओं में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का गूदा, रत्न एवं कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से और लौह एवं एल्युमिनियम स्क्रैप शामिल हैं।

कूटनीतिक रिश्तों में सुधार के बीच व्यापार पर जोर
भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में भी सुधार के संकेत मिले हैं। मार्क कार्नी की भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में आई तल्खी को कम करने की दिशा में अहम कदम माना गया था। पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने कनाडा पर खालिस्तानी चरमपंथ से जुड़े तत्वों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने और भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।

NATIONAL : फिर चारों ओर फैल गए खटमल, CJP के प्रदर्शन पर भड़के CM सुवेंदु अधिकारी, बोले इन्हें जड़ से उखाड़ना होगा

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मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध प्रदर्शन के ठीक दो दिन बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। रविवार को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बिना नाम लिए कॉजपा पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में “खटमल फिर से चारों तरफ दिखाई देने लगे हैं”, इसलिए आम जनता को सतर्क और एकजुट रहने की जरूरत है।

यह पूरा मामला तब गरमाया जब 2 अक्टूबर को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में कॉजपा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया था। कॉजपा का आरोप था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की थी।

सीएम ने अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी समारोह में लिया हिस्सा
इसी प्रदर्शन के जवाब में कोलकाता में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने अपनी बात रखी। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल की धरती पर किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को पनपने नहीं देगी।

‘देशविरोधी ताकतों को पहचानकर समाज से पूरी तरह जड़ से उखाड़ा होगा’
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय का भी जिक्र किया। एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर ‘आजादी’ के नारे लगाए जाने के विरोध में “राष्ट्रवादी युवाओं” ने मोर्चा खोला था। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ऐसी देशविरोधी ताकतों को पहचानकर समाज से पूरी तरह जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। उनके इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

NATIONAL : ‘अभिजीत दीपके, आशुतोष और मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है’, कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास का दावा

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने दावा किया है कि सरकार उन्हें, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह और सीजेपी के अन्य नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। हालांकि, दास ने चेतावनी दी कि ऐसी कोई तानाशाही का नहीं आएगी।

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “अगर सरकार सोचती है कि ऐसे तानाशाही कदम कारगर होंगे, तो वह गलतफहमी में है! युवा पीढ़ी जाग उठी है। हम सभी से अपील करते हैं कि हमारे अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखें, चाहे हम साथ हों या न हों। हम हमेशा जेल या इससे भी बदतर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहे हैं। लेकिन यह एक बड़ी गलती होगी। युवा इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। विरोध प्रदर्शन जारी रहना चाहिए। भारत की जनता को 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले सबसे बड़े जन आंदोलन को सुनिश्चित करना चाहिए।”

अभिजीत दीपके ने दी प्रतिक्रिया
सौरव दास की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए अभिजीत दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “कितने लोगों को गिरफ्तार करोगे? अमितशाह? 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है…”

महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके पुणे पहुंचे। छात्रों से मुलाकात के बाद दीपके ने कहा, “मैं यहां विरोध कर रहे छात्रों से मिलने आया हूं। पेपर लीक के लगातार मामलों की वजह से उनका भविष्य खतरे में है। सरकार इन लीक को लेकर गंभीर नहीं है। CJP उनकी मांगों का समर्थन करती है और जब तक MPSC के चेयरमैन इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह विरोध जारी रहेगा।”

अभिजीत दीपके ने कहा, “मुझे लगता है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं करते, तब तक ऐसे चुनावों में भाग लेने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि विजेता पहले से ही तय है। बीजेपी उन राज्यों में जीत रही है जहां वह ‘मोदी लहर’ के चरम पर भी जीत हासिल नहीं कर पाई थी और यह ज्ञानेश कुमार की वजह से हो रहा है। ज्ञानेश कुमार के जाने और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के स्थिर होने के बाद ही हमें पता चलेगा कि भाजपा वास्तव में कितनी सीटें जीतती है।”

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