Thursday, June 25, 2026
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NATIONAL : हाईकोर्ट का एक फैसला कैसे बना आपातकाल की बड़ी वजह? इसी ने इंदिरा के करियर पर लगाया था सबसे बड़ा दाग

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देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लागू किया गया, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि कई महीने पहले तैयार हो चुकी थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द करने, बढ़ते विपक्षी आंदोलन और राजनीतिक संकट के बीच सरकार ने आपातकाल का फैसला लिया। 21 महीने तक चले इस दौर को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है। आखिर ऐसा क्या हुआ था कि अदालत के फैसले के सिर्फ 13 दिन बाद इंदिरा को देश में आपातकाल लागू करना पड़ा?

25 जून 1975 की रात भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे विवादास्पद रातों में से एक मानी जाती है। इसी रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर देश में आंतरिक आपातकाल लागू किया गया। इसके साथ ही नागरिकों के कई मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई, हजारों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और केंद्र सरकार के हाथों में असाधारण शक्तियां केंद्रित हो गईं।

25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक करीब 21 महीने चले इस दौर को भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। आपातकाल को लेकर आज भी बहस होती है कि यह देश की स्थिरता के लिए जरूरी कदम था या फिर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सबसे बड़ा प्रहार।

हालांकि, आपातकाल की कहानी 25 जून की रात से शुरू नहीं होती। इसकी पृष्ठभूमि कई महीनों से तैयार हो रही थी। बढ़ता विपक्षी आंदोलन, आर्थिक चुनौतियां, सरकार विरोधी प्रदर्शन और सबसे बढ़कर 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला, जिसने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया था। इस फैसले ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया और अगले 13 दिनों में घटनाएं इतनी तेजी से बदलीं कि अंततः देश आपातकाल की ओर बढ़ गया।

ऐसे में सवाल है कि आपातकाल लागू करने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी के खिलाफ क्या फैसला दिया था? अदालत के निर्णय के बाद राजनीतिक संकट कैसे गहराया? और आखिर 25 जून 1975 की रात ऐसा क्या हुआ कि देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया? आइए विस्तार से जानते हैं।

The Court Ruling That Challenged Indira Gandhi and Set the Stage for the Emergency
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी – फोटो : अमर उजाला
12 जून 1975 को क्या हुआ?
12 जून का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला समझने के लिए 1971 में जाना होगा। जब लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने समाजवादी नेता राज नारायण को हराया था। चुनाव में हार के बाद राज नारायण ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी और अधिकारियों का दुरुपयोग किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रचार में सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया और सरकारी कर्मचारी उनके चुनाव अभियान में शामिल रहे।

करीब चार साल तक चली सुनवाई के बाद 19 मार्च 1975 को एक अभूतपूर्व घटना हुई। इंदिरा गांधी अदालत में गवाही देने वाली भारत की पहली प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने लगभग पांच घंटे तक न्यायालय में सवालों के जवाब दिए। इसके बाद 12 जून को इहालाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया। इसके 13 दिन बाद 25 जून की रात को देश में आपातकाल लगा। आइये जानते हैं इन 13 दिनों की पूरी कहानी…

12 जून 1975: हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
12 जून 1975 की सुबह इलाहाबाद हाई कोर्ट के कक्ष संख्या 15 में न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने फैसला सुनाया। 238 पृष्ठों के निर्णय में अदालत ने 14 आरोपों में से 12 को खारिज कर दिया, लेकिन दो आरोपों को सही माना।

पहला आरोप
इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे यशपाल कपूर ने औपचारिक रूप से सरकारी पद छोड़ने से पहले ही उनके चुनाव एजेंट के रूप में काम करना शुरू कर दिया था।

दूसरा आरोप
उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने चुनावी सभाओं के लिए मंच, बिजली और अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं। अदालत ने माना कि यह सरकारी मशीनरी का चुनावी उपयोग था, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन था।

अदालत ने उनके 1971 के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया और उन्हें छह वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए 20 दिन का समय दिया गया। देश में पहली बार किसी मौजूदा प्रधानमंत्री का चुनाव अदालत ने रद्द किया था। इससे सरकार की वैधता पर सवाल उठने लगे।

13 जून 1975: इस्तीफे की मांग शुरू
फैसले के अगले ही दिन विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया और इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग की। उनका तर्क था कि जब चुनाव अवैध घोषित हो चुका है तो नैतिक रूप से प्रधानमंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है। प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा इंडिया आफ्टर नेहरू में लिखते हैं कि कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के समर्थन में व्यापक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया। हरियाणा के तत्कलीन मुख्यमंत्री बंसीलाल बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिल्ली लाने लगे, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी और जनता का बड़ा हिस्सा अब भी प्रधानमंत्री के साथ है। उनके समर्थन में नारे लगाए गए, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जगमोहनलाल सिन्हा के पुतले भी जलाए गए।

14 से 19 जून 1975: समर्थन और विरोध का दौर
गुहा ने बताया कि इस दौरान इंदिरा गांधी कई बार बाहर आकर समर्थकों को संबोधित करती रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की कुछ राजनीतिक ताकतें विदेशी शक्तियों के साथ मिलकर उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं और उनके विरोधियों के पास अपार संसाधन उपलब्ध हैं। मामला कानूनी विवाद से आगे बढ़कर अस्तित्व की राजनीतिक लड़ाई बन गया।

20 जून 1975: बोट क्लब की विशाल रैली
गुहा बताते हैं कि इस शक्ति प्रदर्शन का चरम 20 जून 1975 को देखने को मिला, जब दिल्ली के बोट क्लब मैदान में इंदिरा गांधी ने एक विशाल रैली को संबोधित किया। अपने दोनों बेटों और बहू सोनिया गांधी की मौजूदगी में उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार की सार्वजनिक सेवा की विरासत का उल्लेख किया और कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक देश की सेवा करती रहेंगी।

21-22 जून 1975: कांग्रेस में मंथन
कांग्रेस के भीतर चर्चा शुरू हुई कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है तो आगे क्या होगा। कुछ नेताओं ने अस्थायी इस्तीफे की सलाह दी, लेकिन इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं दिखीं। सत्ता के भीतर असुरक्षा और अनिश्चितता बढ़ने लगी।

23 जून 1975: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इंदिरा गांधी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। पूरे देश की नजर अदालत पर थी। अब सबको सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का इंतजार था।

24 जून 1975: आधी राहत, आधा संकट
न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर ने इंदिरा गांधी को सीमित राहत दी। उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने की अनुमति मिली, लेकिन सांसद के रूप में मतदान करने और वेतन लेने पर रोक लगा दी गई। यानी उन्हें पूरी राहत नहीं मिली थी और उनका राजनीतिक भविष्य अब भी सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर था। दिलचस्प बात यह थी कि न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने भी अपने फैसले में संकेत दिया था कि जिन चुनावी उल्लंघनों के आधार पर उन्होंने फैसला सुनाया, वे कानून में वर्णित सबसे गंभीर चुनावी अपराधों की श्रेणी में नहीं आते। रामचंद्र गुहा बताते हैं कि इसी बीच कांग्रेस और सरकार के भीतर यह चर्चा शुरू हुई कि संकट को टालने के लिए इंदिरा गांधी अस्थायी रूप से इस्तीफा दे सकती हैं। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि मामले का अंतिम फैसला आने तक वरिष्ठ कांग्रेस नेता जगजीवन राम को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन इंदिरा गांधी इस विकल्प के लिए तैयार नहीं हुईं और राजनीतिक संकट लगातार गहराता गया।

इतिहासकार ग्यान प्रकाश अपनी पुस्तक Emergency Chronicles में लिखते हैं कि इंदिरा गांधी को यह विश्वास नहीं था कि अगर वह अस्थायी रूप से प्रधानमंत्री पद छोड़ती हैं तो बाद में आसानी से सत्ता में लौट पाएंगी। प्रकाश के अनुसार, उन्हें लगने लगा था कि उनके खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक साजिश चल रही है। वह आशंकित थीं कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन उनके विरोधियों को समर्थन दे रहे हैं। इस संदर्भ में वह अक्सर चिली के राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे के तख्तापलट का उदाहरण देती थीं। ग्यान प्रकाश के मुताबिक, ऐसे समय में उनके पुत्र संजय गांधी, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे, हरियाणा के मुख्यमंत्री बंसीलाल, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता लगातार उन्हें पद पर बने रहने की सलाह दे रहे थे।

The Court Ruling That Challenged Indira Gandhi and Set the Stage for the Emergency
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी – फोटो : अमर उजाला
25 जून 1975 (दिन): रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली को संबोधित किया। उन्होंने इंदिरा गांधी से इस्तीफे की मांग दोहराई और 29 जून से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। जेपी ने पुलिस और सेना से भी संविधान और नैतिकता के अनुरूप काम करने की अपील की।

25 जून 1975 (शाम): आपातकाल की तैयारी
प्रधानमंत्री के करीबी सलाहकारों ने स्थिति की समीक्षा की। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे ने आंतरिक आपातकाल लगाने का कानूनी मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की सिफारिश भेजी गई।

25 जून 1975 (रात): राष्ट्रपति की मंजूरी
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर हस्ताक्षर कर दिए और देश में “आंतरिक अशांति” (Internal Disturbance) के आधार पर आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी।

26 जून 1975 की सुबह: देश को आपातकाल की जानकारी
इतिहासकार रामचंद्र गुहा की किताब के अनुसार, आपातकाल लागू होने के बाद इंदिरा गांधी ने देश और विदेश में इसे उचित ठहराने की व्यापक कोशिश की। उन्होंने अपनी मित्र और कलाकार पुपुल जयकर को लिखे एक संदेश में कहा कि बढ़ती हिंसा, नफरत और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए आपातकाल आवश्यक था। उन्होंने दावा किया कि केवल लगभग 900 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अधिकांश को जेलों में नहीं बल्कि आरामदायक स्थानों पर रखा गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में शांति और अमन-चैन का माहौल है व आपातकाल का उद्देश्य देश को सामान्य लोकतांत्रिक गतिविधियों की ओर वापस ले जाना है।

हालांकि गुहा लिखते हैं कि वास्तविकता इससे अलग थी। देशभर में पुलिस विपक्षी नेताओं, छात्र कार्यकर्ताओं, मजदूर संगठनों और कांग्रेस विरोधी समूहों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर रही थी। जयप्रकाश नारायण और मोरारजी देसाई जैसे बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि हजारों लोगों को मीसा (MISA) कानून के तहत बिना मुकदमे जेलों में बंद कर दिया गया। गुहा के अनुसार, गिरफ्तार लोगों की संख्या इंदिरा गांधी द्वारा बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक थी।

गुहा बताते हैं कि आपातकाल के शुरुआती महीनों में इंदिरा गांधी ने विदेशी मीडिया को कई साक्षात्कार दिए। उन्होंने लंदन के संडे टाइम्स से कहा कि आपातकाल सत्ता बचाने के लिए नहीं बल्कि जयप्रकाश नारायण द्वारा पैदा की गई कथित असंवैधानिक चुनौती का जवाब था। उन्होंने दावा किया कि देश को अव्यवस्था और विघटन से बचाने व आर्थिक कार्यक्रमों को लागू करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। Saturday Review को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि आपातकाल लोकतंत्र को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि उसकी रक्षा के लिए लगाया गया है। उन्होंने पश्चिमी मीडिया की आलोचना करते हुए कहा कि भारत की तुलना पाकिस्तान और चीन जैसे अधिनायकवादी देशों से करना अनुचित है।

रामचंद्र गुहा के अनुसार, आपातकाल के दौरान सरकार ने अनुशासन और नैतिकता को प्रमुख नारे के रूप में प्रचारित किया। सरकारी प्रचार तंत्र ने “अनुशासन ही देश को महान बनाता है”, “काम ज्यादा, बातें कम” और ”स्वदेशी खरीदें, भारतीय बनें” जैसे नारे पूरे देश में फैलाए। इसके साथ ही इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व को मजबूत नेतृत्व के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। बड़े-बड़े होर्डिंगों और सरकारी प्रचार में उन्हें व्यवस्था और स्थिरता की गारंटी के रूप में दिखाया गया।

मौलिक अधिकारों पर रोक
आपातकाल लागू होने के बाद नागरिकों के कई मौलिक अधिकार प्रभावी रूप से निलंबित हो गए। 27 जून 1975 को अनुच्छेद 358 और 359 लागू किए गए।

अनुच्छेद 358 के तहत
नागरिकों को अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गईं, जिनमें शामिल थीं:

बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार
संगठन बनाने का अधिकार
देश में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार
अनुच्छेद 359 के तहत
सरकार ने नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अदालत जाने के अधिकार से भी वंचित कर दिया। इसका असर विशेष रूप से अनुच्छेद 14, 21 और 22 पर पड़ा, जो समानता, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियां
आपातकाल लागू होते ही हजारों विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तार होने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे:

जयप्रकाश नारायण
मोरारजी देसाई
अटल बिहारी वाजपेयी
लालकृष्ण आडवाणी
इन गिरफ्तारियों के लिए मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) का उपयोग किया गया। शाह आयोग के अनुसार लगभग 35 हजार लोगों को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा गया।

NATIONAL : PM मोदी का 4 जुलाई को पिंक सिटी का दौरा, रिफाइनरी से लेकर मेट्रो तक की मिलेगी सौगात

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को जयपुर शहर को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं जिसके तहत शहर की परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी.

जयपुर नगर निगम की ओर से पट्टा वितरण और लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया. इस दौरान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी रही. मुख्यमंत्री ने 631 करोड़ रुपये की लागत से 1538 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि विकास के इन कार्यों से प्रदेश की आधारभूत ज़रूरतें पूरी होंगी और विकास को नई गति मिल सकेगी.

4 जुलाई को बड़ी सौगात देने जा रहे पीएम मोदी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को जयपुर शहर को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं जिसके तहत शहर की परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी. जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना 13 हजार करोड़ रुपया की लागत से विकसित की जाएगी. इस परियोजना का शिलान्यास खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को करेंगे.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जयपुर मेट्रो फेज-2 राजधानी में यातायात को अधिक सुगम बनाने, यात्रा समय कम करने और शहरी विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगीं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में ऐसी कई योजनाएं शुरू हुई हैं, जिन्होंने शहरों को विकास का इंजन बनाया हैं.

प्रधानमंत्री 4 जुलाई को राजस्थान दौरे पर रहेंगें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान की बाड़मेर में पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन 4 जुलाई को करेंगें. पचपदरा रिफाइनरी का पहले 21 अप्रैल को उद्घाटन होना थां. इससे एक दिन पहले 20 अप्रैल को रिफाइनरी में आग लग गई थीं. इसके बाद पीएम मोदी का दौरा स्थगित करना पड़ा था. अब रिफाइनरी के साथ प्रधानमंत्री जयपुर मेट्रो फेस-2 का शिलान्यास भी करेंगें.

प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा नें अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक ली. बैठक में मुख्यमंत्री ने रिफ़ाइनरी और मेट्रो सहित विभिन्न लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरियों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह से जुड़ी तैयारियों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दीं.

BUSINESS : शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स और निफ्टी उछले

नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। आज के कारोबार की शुरुआत भी बढ़त के साथ हुई थी। हालांकि बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बनने के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों की चाल में थोड़ी गिरावट भी आई, लेकिन थोड़ी देर बाद ही खरीदारों ने लिवाली का जोर बना कर स्थिति को संभाल लिया।

सुबह 10 बजे तक का कारोबार होने के बाद सेंसेक्स 0.69 प्रतिशत और निफ्टी 0.62 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे।

10 बजे तक का कारोबार होने के बाद स्टॉक मार्केट के दिग्गज शेयरों में से इंटर ग्लोबल एवियशन, अदानी एंटरप्राइजेज, ट्रेंट लिमिटेड, टेक महिंद्रा और बजाज फाइनेंस के शेयर 4.95 प्रतिशत से लेकर 2.97 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, बजाज ऑटो, एनटीपीसी, ओएनजीसी, टाटा स्टील और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 2.74 प्रतिशत से लेकर 1.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार करते हुए नजर आ रहे थे।

अभी तक के कारोबार में स्टॉक मार्केट में 2,754 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हो रही थी। इनमें से 1,528 शेयर मुनाफा कमा कर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि 1,226 शेयर नुकसान उठा कर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में से 22 शेयर लिवाली के सपोर्ट से हरे निशान में बने हुए थे। दूसरी ओर आठ शेयर बिकवाली के दबाव में लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि निफ्टी में शामिल 50 शेयरों में से 35 शेयर हरे निशान में और 15 शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आ रहे थे।

बीएसई का सेंसेक्स आज 399.85 अंक की तेजी के साथ 77,391.07 अंक के स्तर पर खुला। कारोबार की शुरुआत होते ही बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण यह सूचकांक फिसल कर 77,280.49 अंक तक आ गया। इसके बाद खरीदारों ने लिवाली का जोर बना दिया, जिससे इस सूचकांक की स्थिति में सुधार होने लगा। बाजार में लगातार जारी खरीद बिक्री के बीच सुबह 10 बजे तक का कारोबार होने के बाद सेंसेक्स 530.35 अंक की बढ़त के साथ 77,521.57 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

सेंसेक्स की तरह ही एनएसई के निफ्टी ने आज 104.20 अंक की छलांग लगा कर 24,125.85 अंक के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बनने पर यह सूचकांक लुढ़क कर 24,107.80 अंक के स्तर तक पहुंच गया। इसके बाद खरीदारों ने लिवाली का जोर बना दिया, जिससे इस सूचकांक की चाल में तेजी आ गई। बाजार में लगातार जारी लिवाली और बिकवाली के बीच सुबह 10 बजे तक का कारोबार होने के बाद निफ्टी 150.05 अंक की मजबूती के साथ 24,171.70 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

इसके पहले पिछले कारोबारी दिन बुधवार को सेंसेक्स 790.54 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,991.22 अंक के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी ने 197.55 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,021.65 अंक के स्तर पर बुधवार के कारोबार का अंत किया था।

RAJASTHAN : राजस्थान में मानसून की दस्तक तेज, 25 जिलों में आज भी बारिश-आंधी का अलर्ट

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जयपुर, 25 जून (हि.स.)। राजस्थान में मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही प्री-मानसून गतिविधियां भी जोर पकड़ने लगी हैं। मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 25 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है।

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार भरतपुर, जयपुर, नागौर, सीकर और श्रीगंगानगर सहित कई जिलों में बुधवार को एक इंच या उससे अधिक वर्षा हुई। वहीं पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना रहा। श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर और उदयपुर संभाग के जिलों में दिनभर हल्के बादल छाए रहे और उमस का असर महसूस किया गया। कई क्षेत्रों में शाम के समय बारिश और बूंदाबांदी का दौर भी चला।

प्रदेश में श्रीगंगानगर के बाद फलोदी में 42 डिग्री, जैसलमेर में 40.7, बीकानेर में 40.4, बाड़मेर में 40.3 और चित्तौड़गढ़ में 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान मापा गया। पाली में 39.3, जोधपुर और दौसा में 39.2, जबकि जालोर और हनुमानगढ़ में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

भरतपुर जिले के कामां में 40, पहाड़ी में 15 और डीग में 8 मिमी बारिश हुई। नागौर के लाडनूं में 47 मिमी वर्षा हुई, जबकि अजमेर जिले के केकड़ी में 11 और सावर में 16 मिमी बारिश हुई। सीकर के रींगस में 31, हनुमानगढ़ के डबलीराठन में 36 तथा श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान में 26 मिमी बारिश हुई।

बीकानेर, झुंझुनूं, अलवर, बारां, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ के कई इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दिनों में प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आने तथा लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि कुछ पश्चिमी जिलों में फिलहाल गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है।

BUSINESS : सर्राफा बाजार में सस्ता हुआ सोना, चांदी के भाव में बदलाव नहीं

नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। घरेलू सर्राफा बाजार में आज शुरुआती कारोबार के दौरान सोने की कीमत में गिरावट का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। भाव में आई कमजोरी के कारण आज चेन्नई के अलावा देश के ज्यादातर दूसरे सर्राफा बाजार में सोना 250 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 270 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। वहीं चेन्नई में सोने के भाव में 2,100 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 2,290 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की बड़ी गिरावट आई है। चांदी के भाव में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सोने की कीमत में आई कमजोरी के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,44,320 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 1,45,630 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,32,290 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 1,33,490 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। चांदी के भाव में बदलाव नहीं होने के कारण ये चमकीली धातु दिल्ली सर्राफा बाजार में आज भी 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है।

दिल्ली में 24 कैरेट सोना आज 1,44,470 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,32,440 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,44,320 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,32,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,44,370 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,32,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।

इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,45,630 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,33,490 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,44,320 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,32,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,370 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,32,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,44,470 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,32,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,370 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,32,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,44,470 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,32,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,44,320 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,32,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

NATIONAL : कमजोर मानसून बड़ी चुनौती: देश पर सूखे का साया, 22 दिनों में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश; महंगाई बढ़ने का खतरा

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देश में मानसून के शुरुआती महीने में 43% कम बारिश हुई है, जिससे कई राज्यों में खेती और खरीफ फसलों पर खतरा बढ़ गया है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्यों में बारिश की भारी कमी से बुवाई और उत्पादन पर असर दिखने लगा है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून का पहला महीना खत्म होने में सिर्फ एक सप्ताह बचा है, लेकिन अब तक बीता यह सीजन देश के अन्नदाताओं और अर्थव्यवस्था के लिए सूखे जैसी बड़ी चुनौती लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, एक से 22 जून तक देशभर में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश हुई है। मानसून की स्थिति में अगर तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो देश के प्रमुख कृषि राज्यों में खरीफ की खेती पर तगड़ी मार पड़ सकती है। इससे न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में मांग प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य महंगाई का खतरा भी तेजी से बढ़ेगा। 

दरअसल, देश में सबसे ज्यादा खरीफ उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र में सामान्य से 82 फीसदी और गुजरात में 75 फीसदी कम बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ में 69 फीसदी और मध्य प्रदेश में 52 फीसदी कम बरसात दर्ज की गई है। वहीं, झारखंड में सामान्य से 66 फीसदी, ओडिशा में 48 फीसदी और बिहार, उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना में 43-43 फीसदी कम पानी बरसा है। दक्षिण भारत के कर्नाटक में 40 फीसदी और केरल में 28 फीसदी कम बारिश हुई है।


खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा असर : शिवराज
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 2 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक मानसून ऐसे ही कमजोर रह सकता है। इसका असर खरीफ फसलों और संवेदनशील इलाकों पर पड़ेगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

देश में अब तक कुल खरीफ क्षेत्र का करीब 10 फीसदी हिस्सा ही बोया गया है। 22 जून तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1.17 करोड़ हेक्टेयर रहा। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि (1.13 करोड़ हेक्टेयर) से थोड़ा अधिक है, लेकिन पानी की कमी से आगे की बुवाई और बोई जा चुकी फसलों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश
सरकार ने 111 जिलों को अति-संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया है। यानी इन जिलों में कमजोर मानसून की सबसे अधिक माग पड़ेगी, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा 25 फीसदी से भी कम है और वे बारिश पर ही निर्भर हैं। इनमें अकेले 20 जिले सिर्फ महाराष्ट्र में हैं।

आरबीआई की बड़ी चेतावनी
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.7 फीसदी से कम है। कमजोर मानसून वृद्धि दर को और नीचे खींच सकता है।

BUSINESS : बाजार में तेजी के बीच सस्ता हो गया सोना-चांदी, 10 ग्राम गोल्ड के लिए देने होंगे आज इतने रुपये

पिछले हफ्ते आए उछाल के दाम सोने के दाम कम हुए हैं. कीमतें गिरी हैं. साथ ही चांदी भी सस्ती हो गई है. आइए बताते हैं कि दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में आज के लेटेस्ट भाव क्या चल रहे हैं.

Gold Silver Rate Today: शेयर बाजार में आज थोड़ा हरियाली देखने को मिल रही है. मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स खबर लिखे जाने तक करीब 280.56 अंकों की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है. लेकिन, दूसरी ओर सोने और चांदी के दाम में गिरावट देखने को मिल रही है. 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड के दाम 490 रुपये की गिरावट के साथ 107,650 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं. वहीं, चांदी भी 820 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गई है.

बुलियन. कॉम पर आज सोना और चांदी दोनों गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं. देश की राजधानी दिल्ली में भी सोने और चांदी के दाम में कमी आई है. दिल्ली में आज चांदी काफी सस्ती हुई है. चांदी 1040 रुपये की गिरावट के साथ 123,060 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है. वहीं, सोना भी 590 रुपये गिरकर 107,160 रुपये पर आ गया है.

वहीं, देश की आर्थिक राजाधानी लखनऊ में भी गोल्ड-सिल्वर के दाम कम हुए हैं. सुबह 9 बजकर 50 मिनट तक मुंबई में 10 ग्राम गोल्ड अभी 560 रुपये की गिरावट के साथ 107,380 रुपये पर आ गया है. साथ ही, चांदी के भाव भी कम हो गए हैं.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी सोने और चांदी के भाव आज कम हुए हैं. लखनऊ में अभी गोल्ड 580 रुपये टूटकर 107,390 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. चादी 970 रुपये सस्ती होकर 123,380 रुपये प्रति किलोग्राम पर है.

एमसीएक्स पर भी गिरे सोने-चांदी के भाव
वहीं, एमसीएक्स पर भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. 3 अक्टूबर को एक्सपायर होने वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट के दाम कम हुए है. इस कॉन्ट्रैक्ट वाली 10 ग्राम सोने के दाम आज करीब 561 रुपये गिरकर 107161 रुपये पर आ गए हैं. वहीं, 5 दिसंबर 2025 को एक्सपायर होने वाले सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट के रेट भी करीब 1,000 रुपये कम हुए हैं. चांदी के दाम 0.80 फीसदी कम होकर 123699 रुपये प्रति किलोग्राम पर हैं.

SPORTS : रोहित शर्मा को मिला पद्मश्री सम्मान, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

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भारतीय क्रिकेट के दिग्गज रोहित शर्मा को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से नवाजा गया. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके रोहित शर्मा को मंगलवार (23 जून) को पद्मश्री से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया.

रोहित शर्मा का नाम जनवरी 2026 में घोषित पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल किया गया था. खेल जगत में उनके असाधारण योगदान, भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और बतौर बल्लेबाज शानदार उपलब्धियों के लिए उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया.

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में कुल 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कार दिए गए, जिनमें 2 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 56 पद्मश्री सम्मान शामिल रहे. इससे पहले 25 मई को भी पद्म पुरस्कारों के लिए सम्मान समारोह आयोजित हुआ था, जिसमें राष्ट्रपति ने 66 हस्तियों को सम्मानित किया था.

रोहित शर्मा के अलावा विजय अमृतराज, अलका याज्ञनिक और ममूटी जैसी कई नामी हस्तियां भी सम्मानित की गईं. रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में शुमार हैं. उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं.

NATIONAL : टेलीग्राम 7 दिन बाद चालू, प्ले स्टोर पर वापस आया:NEET परीक्षा में गड़बड़ी के बाद लगा था बैन, मैसेज एडिट पर 30 जून तक रोक रहेगी

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इंस्टेंट मैसेजिंग एप टेलीग्राम 7 दिन बाद भारत में फिर से चालू हो गया है। नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के नकली और लीक पेपर सर्कुलेट होने के विवाद के बाद केंद्र सरकार ने एप और उससे जुड़ी वेब सर्विसेज को 22 जून तक ब्लॉक कर दिया था।

21 जून को NEET री-एग्जाम होने के बाद एप पर लगा अस्थायी प्रतिबंध खत्म हो गया है। इसके बाद 23 जून की सुबह से एप गूगल प्ले स्टोर पर दोबारा दिखने तो लगा, लेकिन कई यूजर्स ने एप डाउनलोड नहीं हो पाने की शिकायत की।

वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि ‘एप डाउनलोड करने के बाद वे साइन अप नहीं कर पा रहे हैं या चैट एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। कुछ मामलों में यह समस्या जियो और एयरटेल दोनों नेटवर्क के यूजर्स हुई। वहीं, आईफोन यूजर्स के लिए टेलीग्राम एप स्टोर पर अवेलेबल नहीं था।

हालांकि, मंगलवार देर रात कंपनी ने पोस्ट कर सभी तरह की सर्विस चालू होने की जानकारी दी।

यूजर्स 30 जून तक मैसेज एडिट नहीं कर पाएंगे

भले ही टेलीग्राम की भारत में वापसी हो गई है, लेकिन सरकार ने कंपनी को आगामी 30 जून तक अपने प्लेटफॉर्म पर ‘मैसेज-एडिटिंग’ फीचर की सुविधा बंद रखने के निर्देश दिए हैं। यानी यूजर भेजे गए मैसेज में कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे।

सरकार ने टेलीग्राम को ब्लॉक क्यों किया?

केंद्र सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सर्विसेज पर 22 जून तक के लिए ब्लंकेट ब्लॉक यानी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। सरकार का आरोप था कि यह प्लेटफॉर्म नीट परीक्षा से जुड़े लीक और फर्जी पेपर्स, भ्रामक कंटेंट और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़ी अन्य गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा था।

यह प्रतिबंध 21 जून को हुई नीट की दोबारा परीक्षा के समय लागू रखा गया, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, इस री-एग्जामिनेशन के दौरान किसी भी गड़बड़ी की खबर सामने नहीं आई है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सरकार के फैसले को सही माना

सरकार के ऑर्डर को टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, पिछले हफ्ते मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के प्रतिबंध को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि देश के इतने बड़े नेशनल-लेवल मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सरकार की पाबंदियां जरूरी हैं।

कोर्ट ने टेलीग्राम की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने कहा था कि बैन लगाने में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

टेलीग्राम बैन किया तो वॉट्सएप क्यों नहीं?

टेलीग्राम पर अपराधियों को पहचान छिपाने और लाखों का ग्रुप बनाने की आजादी मिलने के कारण, इस पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना पड़ा। वहीं, वॉट्सएप भारतीय नियमों को मानता है। यहां यूजर को ट्रैक करना आसान है…

वॉट्सएप टेलीग्राम
मोबाइल नंबर जरूरी ‘यूजरनेम’ से पहचान छिपती है
वॉट्सएपम में चैट डिफॉल्ट एन्क्रिप्टेड और ग्रुप मेंबर्स सीमित (1,024) हैं टेलीग्राम में असीमित लोग जुड़ सकते हैं, जिससे पेपर जल्दी वायरल होते हैं
भारत में ऑफिस। एआई से निगरानी होती है वहीं टेलीग्राम में इसकी कमी है

टेलीग्राम पर रोक के बाद भी राजस्थान के भीलवाड़ा से NEET का फर्जी पेपर बेचने की कोशिश की गई है। इस मामले में पुलिस एक स्टूडेंट को हिरासत में लिया है। आरोपी टेलीग्राम का इस्तेमाल अमेरिका के वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए कर रहा था। उसके टेलीग्राम चैनल का नाम पेपर माफिया है।

उधर, टेलीग्राम पर NEET री-एग्जाम तक रोक जारी रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ लगाई याचिका खारिज कर दी। केंद्र ने 16 जून को टेलीग्राम पर 22 जून तक रोक लगाने का आदेश दिया था।

NATIONAL : कॉकरोच जनता पार्टी: प्रदर्शन का समय बढ़ाने मांग दिल्ली पुलिस ने ठुकराई, अभिजीत दीपके बोले- यहां से नहीं हटेंगे

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इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे भी लगाए। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने पर अभिजीत दीपके का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान करना है। दीपके ने कहा, ‘हम यहां आज के छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए आए हैं’।

कथित परीक्षा अनियमितताओं, बार-बार होने वाले पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर युवा नेतृत्व वाले संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना दूसरा बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। छात्र हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा से जुड़े सवालों के जवाब मांग रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और परीक्षा प्रबंधन में कथित खामियों के खिलाफ आवाज उठाई।

दीपके ने की थी थाली-चम्मच लाने की अपील
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन में शामिल होने वालों से ‘थाली और चम्मच’ लेकर आने की अपील की थी। उनके आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग थालियां और चम्मच लेकर पहुंचे और उन्हें बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी को लिखा खुला पत्र
इस प्रदर्शन से पहले अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र भी लिखा था। इस पत्र में उन्होंने छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी। वहीं, सीजेपी लगातार परीक्षा संबंधी मामलों के प्रबंधन को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रही है।

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