चूरू में अचानक मौसम का मिजाज बदल जाने से आई धूल भरी आंधी ने पूरे आसमान को ढंक दिया और बाजारों में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि बाद में हुई बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और मौसम खुशनुमा हो गया।
जिले में सोमवार को मौसम ने अचानक करवट ली और एक बार फिर रेतीले तूफान ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। जिले के कई हिस्सों में उत्तर दिशा से उठे धूल भरे बवंडर ने देखते ही देखते आसमान को अपनी चपेट में ले लिया। काली-पीली आंधी के कारण दिन में ही अंधेरे जैसे हालात बन गए और लोगों को वाहनों की लाइट जलाकर सफर करना पड़ा।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का असर रतनगढ़, तारानगर, रतननगर और सरदार शहर सहित कई क्षेत्रों में देखने को मिला। दोपहर बाद तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी शुरू हुई, जिसने कुछ ही मिनटों में दृश्यता को काफी कम कर दिया। करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर धूल का गुबार इतना घना था कि कुछ मीटर दूर तक भी देख पाना मुश्किल हो गया।
आंधी के दौरान बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दुकानदारों ने सामान को सुरक्षित करने के लिए जल्दबाजी में दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं, जबकि राहगीरों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली। तेज हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में पेड़ों की टहनियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं। खुले स्थानों पर रखा सामान भी प्रभावित हुआ और लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।
धूल भरी आंधी के बाद मौसम ने एक और करवट ली और जिले के कई हिस्सों में हल्की बारिश शुरू हो गई। बारिश से वातावरण में फैली धूल बैठ गई और लोगों को भीषण गर्मी व उमस से राहत मिली। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहावना हो गया और लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी तंत्र के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में इस तरह के मौसम परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञों ने चूरू जिले में अगले कुछ दिनों तक तेज हवाएं, धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।
रेतीली आंधी और हल्की बारिश के इस मिश्रित मौसम ने जहां कुछ समय के लिए जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं बारिश के बाद लोगों को गर्मी से राहत भी मिली। किसानों और आमजन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह राहत पहुंचाता रहेगा।
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाना और देश को तेल बेचने की अनुमति देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, ईरान की ओर से कहा गया है कि एक औपचारिक समझौते की राह में अभी भी बड़ी बाधाएं हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष का कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें अब कामयाब होती दिख रही हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान संवर्धित यूरेनियम को लेकर अपनी जिद छोड़ने को तैयार है। माना जा रहा है कि
अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले इस समझौते में 60 दिवसीय युद्धविराम का विस्तार शामिल हो सकता है। हाल ही में ईरान और पाकिस्तान ने अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बातचीत में प्रगति होने के संकेत दिए थे, जिससे इस समझौते पर सहमति बनने की संभावना नजर आ रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर खुलने के आसार अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में एक समझौते के करीब पहुंच गया है। हालांकि, उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया था। माना जा रहा है कि इस प्रस्तावित समझौते से भविष्य में तनाव बढ़ने पर रोक लग सकती है और ऊर्जा आपूर्ति में अस्थायी राहत मिलने की संभावना है।
हालांकि, ईरानी मीडिया ने ट्रंप के दावे पर आपत्ति जताई है। ईरान ने रविवार को ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य अपनी पिछली स्थिति में लौट आएगा। ईरान की अर्ध-आधिकारिक फार्स समाचार एजेंसी ने कहा कि तेहरान होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखेगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने केवल गुजरने वाले जहाजों की संख्या को पूर्व-युद्ध स्तर पर लौटने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की है।
60 दिवसीय शांति समझौते के प्रमुख पहलू क्या हैं? होर्मुज जलडमरूमध्य: ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है जिसे ईरान ने 28 फरवरी से बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मची हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 60 दिनों की अवधि के दौरान जलडमरूमध्य बिना किसी टोल के खोला जाएगा और तेहरान जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने पर सहमत होगा। ईरान का परमाणु कार्यक्रम: एक रिपोर्ट के अनुसार इस सौदे में ईरान द्वारा अपने संवर्धित यूरेनियम को छोड़ने की स्पष्ट प्रतिबद्धता शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किस तरह सौंपेगा। इस मुद्दे पर आगे होने वाली परमाणु वार्ता में चर्चा की जाएगी।
तीन चरणों में शांति: प्रस्तावित शांति वार्ता तीन चरणों में सामने आएगी। इसमें पश्चिम एशिया संघर्ष को औपचारिक रूप से समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का समाधान करना और एक व्यापक समझौते पर बातचीत के लिए 30-दिवसीय बातचीत शुरू करने की कोशिश की जाएगी। ईरानी तेल की बिक्री: होर्मुज को फिर से खोलने की अमेरिकी मांग के बदले में, ईरानी पक्ष ने जलडमरूमध्य की निगरानी, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी को खत्म करने और ईरानी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है। ईरान के विदेशी धन: ईरान ने अपने विदेशी धन को जब्ती से मुक्त करने की भी मांग की है। हालांकि, इस पर अमेरिका ने कहा है कि यह केवल ठोस रियायतों के बाद ही संभव होगा।
लेबनान में लड़ाई भी हो खत्म: समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच युद्ध खत्म किया जाए। बीते दिनों बेरूत पर इस्राइली हमले ने इस शांति योजना को खतरे में डाल दिया था। अमेरिका ने कहा था कि अगर हिजबुल्ला फिर से हथियार जुटाने या हमले भड़काने की कोशिश करता है तो तेल अवीव को कार्रवाई करने की अनुमति दी जाएगी।
समझौते पर क्या है ईरान का रुख? ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और तेहरान के बीच मध्यस्थता की वार्ताओं में मतभेद गहरे और महत्वपूर्ण बने हुए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि एक औपचारिक समझौते की राह में अभी भी बड़ी बाधाएं हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 28 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने से जुड़ी खबरों को सख्ती से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से फैलाया गया झूठ करार दिया है।
ट्रम्प ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि इस तरह की रिपोर्ट्स का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान को किसी भी प्रकार की भारी आर्थिक सहायता देने का कोई प्रस्ताव नहीं है।दरअसल, हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता होता है तो अमेरिका की ओर से ईरान को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये (करीब 300 अरब डॉलर) का आर्थिक पैकेज दिया जा सकता है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई थीं और इसे लेकर कई तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली थीं।
हालांकि, ट्रम्प ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से भ्रामक जानकारी है और इसे राजनीतिक उद्देश्य से फैलाया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि उनकी नीतियों के तहत अमेरिका किसी भी ऐसी योजना में शामिल नहीं है, जिसमें ईरान को बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता दी जाए।इसी बीच, फ्रांस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भी मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने एक बार फिर ईरान से जुड़े मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान में कोई निवेश नहीं कर रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को भविष्य में जरूरत पड़ने पर ईरान में निवेश करने का अधिकार जरूर होगा, लेकिन वर्तमान समय में ऐसी कोई योजना या निर्णय नहीं लिया गया है।ट्रम्प के इस बयान के बाद ईरान को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की ईरान नीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों का असर वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
एयर इंडिया ने मंगलवार को घरेलू उड़ानों के लिए नया ‘बेसिक फेयर’ ऑप्शन लॉन्च किया है. इसमें यात्रियों को मुफ्त भोजन (कॉम्प्लिमेंट्री मील) नहीं मिलेगा. ये फैसला बढ़ती ऑपरेशनल लागत और वित्तीय दबाव के बीच लिया गया है.
इसे चुनिंदा घरेलू रूट्स पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है. इस नई कैटेगरी के जुड़ने के बाद एयर इंडिया के इकोनॉमी क्लास किरायों में अब चार विकल्प हो गए हैं- वैल्यू, क्लासिक, फ्लेक्स और ‘बेसिक फेयर’.
एयरलाइन ने क्या कहा? एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि बेसिक फेयर पूरी तरह वैकल्पिक (ऑप्शनल) होगा.यात्रियों के पास पहले से मौजूद वैल्यू, क्लासिक और फ्लेक्स किराया श्रेणियों को चुनने का विकल्प भी रहेगा. इन तीनों श्रेणियों में मुफ्त भोजन और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. इनकी संख्या उच्च किराया श्रेणियों में बढ़ती जाती है.
एयर इंडिया के अनुसार, नया बेसिक फेयर उन यात्रियों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है जो कम कीमत में यात्रा करना चाहते हैं और अतिरिक्त सुविधाओं के बजाय सस्ता किराया पसंद करते हैं. फिलहाल, इस प्लान को चुनिंदा घरेलू मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है. कंपनी ने कहा है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया और फीडबैक के आधार पर भविष्य में इसे जारी रखने या विस्तार देने पर फैसला लिया जाएगा.
बेसिक फेयर पूरी तरह ऑप्शनल एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि बेसिक फेयर पूरी तरह ऑप्शनल होगा. यात्रियों के पास पहले से मौजूद वैल्यू, क्लासिक और फ्लेक्स किराया श्रेणियों को चुनने का विकल्प भी रहेगा. इन तीनों श्रेणियों में मुफ्त भोजन और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. इनकी संख्या हाई किराया श्रेणियों में बढ़ती जाती है.
एयर इंडिया के अनुसार, नया बेसिक फेयर उन यात्रियों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है जो कम कीमत में यात्रा करना चाहते हैं और अतिरिक्त सुविधाओं के बजाय सस्ता किराया पसंद करते हैं. फिलहाल इस योजना को चुनिंदा घरेलू मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है. कंपनी ने कहा है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया और फीडबैक के आधार पर भविष्य में इसे जारी रखने या विस्तार देने पर फैसला लिया जाएगा.
कमजोर मानसून के चलते मुंबई में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले बांधों में जलस्तर तेजी से घटने के कारण सिर्फ 10.35 प्रतिशत जल भंडारण शेष रह गया है। बीएमसी ने जल संकट को देखते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।
मानसून में देरी के चलते मुंबई में पानी की संकट गहरा गया है। आर्थिक राजधानी के जलाशयों के जलस्तर घटकर 10.35 प्रतिशत रह जाने के मद्देनजर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने औद्योगिक, व्यावसायिक और खेल प्रतिष्ठानों को होने वाली जलापूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की।बीएमसी ने निर्माण कार्य परियोजनाओं और स्विमिंग पूलों के लिए पानी के कनेक्शन भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं। जलापूर्ति में कटौती संबंधी यह निर्णय बुधवार से प्रभावी होगा।
बीएमसी ने पहले ही 15 मई 2026 से शहर में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू कर दी थी। अब पेयजल संरक्षण के लिए 17 जून से अतिरिक्त प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। इसके तहत नए निर्माण कार्यों के लिए पानी के नए कनेक्शन की मंजूरी पर रोक लगा दी गई है, जबकि मौजूदा निर्माण स्थलों और सभी स्विमिंग पूलों की जल आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जाएगी। औद्योगिक, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और स्पोर्ट्स क्लबों को मिलने वाले पानी में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। बिसलेरी जैसी कंपनियों के बोतलबंद पानी और एरेटेड ड्रिंक यानी कोकाकोला, पेप्सी, स्प्राइट, फैंटा बनाने वाले प्लांट्स को केवल कर्मचारियों की पीने की जरूरत के हिसाब से सीमित पानी दिया जाएगा। बीएमसी ने चेतावनी दी है कि पेयजल का दुरुपयोग या बर्बादी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नागरिकों से पानी बचाने में सहयोग की अपील भी की है।
मुंबई को प्रतिदिन लगभग 4,664 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान औसत आपूर्ति 4,100 मिलियन लीटर प्रति दिन है। 16 जून तक, महानगर को पानी की आपूर्ति करने वाली झीलों में संयुक्त जल भंडार कुल क्षमता का केवल 10.35% था, जो पर्याप्त वर्षा होने तक जल आपूर्ति बनाए रखने में एक चुनौती पेश कर रहा है। राज्य के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के बाद, बीएमसी पीने के पानी के प्रबंधन के लिए मितव्ययिता उपायों को लागू कर रहा है।
सार्वजनिक शौचालयों का संचालन करने वाले संगठनों को टैंकर, कुएं या बोरवेल के पानी के उपयोग को अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है। बोरवेल और कुएं के पानी का उपयोग गैर-पीने योग्य उद्देश्यों जैसे वाहन धोने, बागवानी और सड़कों व परिसरों की सफाई के लिए किया जाना चाहिए।
प्रमुख प्रतिष्ठानों, जिनमें सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आरसीएफ, एचपीसीएल, बीपीसीएल, नौसेना, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को सीवेज उपचार संयंत्रों से उपचारित अपशिष्ट जल का परिचालन और द्वितीयक उद्देश्यों के लिए पुन: उपयोग करने की सलाह दी गई है। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें
संजय राउत के बयान ने और बढ़ाया सस्पेंसमहाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. शिवसेना उद्धव गुट के कई सांसदों के पाला बदलने के कयास हैं. खबरों के मुताबिक टीएमसी वाली पटकथा शिवसेना में भी देखने को मिल सकती है.
क्या शिवसेना उद्धव गुट को ही पार्टी में बगावत की आशंका है? एनडीटीवी से पार्टी नेता संजय राउत ने जो कहा है कि उससे ये सवाल उठ रहा है. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वही पुरानी पटकथा, वैसी ही सुगबुगाहट और उसी तरह की बेचैनी तैरने लगी है, जिसने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी की सरकार को उखाड़ फेंका था. क्या शिवसेना (UBT) यानी उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 7 सांसद बागी होने की राह पर हैं? दिल्ली से लेकर मुंबई के मातोश्री तक इस समय फोन की घंटियां घनघना रही हैं. दावा किया जा रहा है कि दिल्ली का भाजपा नेतृत्व सीधे उद्धव सांसदों के संपर्क में है. सूत्र बताते हैं कि सांसदों को कोई बड़ा “ऑफर” दिया गया है और महिला आरक्षण, परिसीमन के लिए एनडीए इन सांसदों को अपने पाले में लाने या बाहर से समर्थन जुटाने की जोरदार तैयारी में है!
शिवसेना उद्धव को भी लग रहा है डर! कैमरे पर “ऑल इस वेल” बोल रहे उद्धव के नेता संजय राउत ने ही गुट में टूट का इशारा अपने एक पोस्ट से कर दिया. सोमवार रात संजय राउत ने खुद अपने एक सोशल मीडिया X पोस्ट से इस डर को हवा दे दी, लिखा, “त्रिपुरा में नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष शिव कुंडू से मिलिए. मानिए या न मानिए, तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसद आधिकारिक तौर पर उनकी पार्टी में “विलय” हो गए! ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र के दल बदलुओं को भी खुद को बचाने के लिए किसी “कुंडू” को ढूंढना पड़ेगा! आखिरकार, संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल कानून) तो यही कहती है!”
उद्धव की पार्टी में भी टीएमसी वाली पटकथा? अगर ये सिर्फ़ TMC की टूट पर प्रतिक्रिया थी तो महाराष्ट्र के दल-बदलुओं की याद अचानक क्यों आई, वो भी उस समय में जब उन्हीं की पार्टी में टूट की बड़ी चर्चा है? साफ मतलब था, उद्धव गुट के भीतर बगावत की खिचड़ी पक रही है और अगर बागी सांसदों को दलबदल कानून से बचना है, तो उन्हें टीएमसी के बागियों की तरह किसी अनजान या छोटी पार्टी में अपना विलय करना पड़ेगा. यानी जो बगावत ममता बनर्जी की टीएमसी में देखी गई थी, क्या वैसी ही पटकथा अब उद्धव ठाकरे के साथ लिखी जा रही है?
ये सांसद व्यक्तिगत रूप से पहुंचे
अरविंद सावंत
अनिल देसाई
संजय दीना पाटिल
राजाभाऊ वाजे (नासिक)
बाकी के 5 सांसद मीटिंग से नदारद रहे, दावा हुआ, ऑनलाइन जुड़े!
संजय जाधव (परभणी)
संजय देशमुख (वाशिम)
ओमराजे निंबाळकर (धाराशिव)
भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
नागेश पाटील आष्टीकर (हिंगोली)
5 सांसद करेंगे खेल? दिलचस्प बात यह है कि ये वही पांच सांसद हैं जो इसके ठीक एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी उन्हें बधाई देने नहीं पहुंचे थे. हालांकि, पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि ये सांसद ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग के दौरान उद्धव ठाकरे की सिर्फ नागेश पाटील आष्टीकर से ही बात हो पाई. कार्यकर्ताओं में भ्रम न फैले, इसलिए उद्धव ठाकरे ने अनुपस्थित सांसदों से दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है.
संजय देशमुख ने दिखा दिए तेवर? इस आग में घी डालने का काम किया उद्धव के सांसद संजय देशमुख ने. “मातोश्री” की बैठक से गायब रहने के ठीक दूसरे दिन वे शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलने पहुंच गए. इस पर सफाई देते हुए उद्धव नेता अनिल देसाई ने कहा, “संजय देशमुख के घर पर बेटी को देखने के लिए लोग आने वाले थे, उन्होंने स्पष्टीकरण दिया है कि वे किसी काम के सिलसिले में मिले थे. लेकिन अलग गुट बनाना या किसी के साथ जाने की बात में कोई तथ्य नहीं है। मीडिया में साल भर से ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा है, लेकिन न टाइगर दिखता है और न ऑपरेशन.”
शिवसेना शिंदे गुट बोला- ये UBT का अंदरूनी मामला दूसरी तरफ, नागपुर से महायुति के विधायक, महाराष्ट्र सरकार में शिंदे गुट मंत्री आशीष जयस्वाल ने “ऑपरेशन टाइगर” पर कहा, “यह UBT का अंदरूनी मामला है. अगर उनकी पार्टी के लोग नाराज हैं और छोड़ कर जा रहे हैं, तो यह उनका विषय है, हम ऐसा कोई उठाव नहीं करवा रहे हैं. और वैसे भी, ऐसी चीजें बगावत, पहले से बताकर नहीं की जातीं.” बगावत की सुरों का खुद इशारा करने वाले संजय राउत ने दिल्ली में पत्रकारों के सामने फिर “ऑल इस वेल” दोहराया! लेकिन सवालों की बौछार में फिर इशारा दे गए, राउत ने कहा, “सांसदों ने अपनी आई (मां), बच्चों की शपथ ली है। किसी ने साईं बाबा की तो किसी ने मां तुळजा भवानी की शपथ ली है कि वे पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे. हमारी पार्टी के सभी 9 सांसद एकजुट हैं. अमित शाह, मोदी और फडणवीस की पार्टी में कोई विश्वसनीयता नहीं बची है, वे पैसे देकर पार्टी फोड़ रहे हैं.”उद्धव ठाकरे के जितना कार्यकर्ताओं से मिलने वाला कोई नेता नहीं है. शरद पवार के बाद वे ही सबसे ज्यादा लोगों से मिलते हैं. मोदी का खौफ सिर्फ ईडी का खौफ है.”
लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि संजय राहुत ने एनडीटीवी से खास बातचीत में ये भी कह दिया कि-लोग कसम तो खाते रहते हैं, कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी.
राजाभाऊ वाजे के बयान से बढ़ी हलचल संजय राउत भले ही दिल्ली में बैठकर ऑल इज़ वेल का राग अलाप रहे हों, लेकिन नासिक से यूबीटी सांसद राजाभाऊ वाजे के एक ताजा बयान ने 19 जून को होने वाले शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर बड़ी हलचल का इशारा दे दिया है. 19 जून को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस कार्यक्रम है, जहां उद्धव ठाकरे को अपना शक्ति प्रदर्शन करना है. लेकिन उद्धव के सांसद राजाभाऊ वाजे ने कहा, “मुंबई में 19 तारीख के शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मैं शामिल हो पाऊंगा या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता. 19 तारीख को मैं दिल्ली से लौट रहा हूं, और मेरे निर्वाचन क्षेत्र में भी कुछ कार्यक्रम हैं. उसके बाद अगर समय मिला, तो मुंबई जाने को लेकर फैसला लूंगा.
उद्धव को लगेगा सबसे बड़ा झटका! मराठी मानुस और बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वाली इस पार्टी के टूटने का इतिहास पुराना है, लेकिन उद्धव ठाकरे के दौर में यह सबसे घातक साबित हुआ है। अगर यह 7 सांसदों वाली बगावत सच साबित होती है, तो यह पार्टी को फिर से खड़ा ना कर पाने वाली टूट साबित हो सकती है!
राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर पकड़े गए हैं। अब तक हुई रिकवरी भी इन्हीं पांचों ने कराई है। चोरी कुबूल भी की है। इससे ये स्पष्ट हो गया है कि इनकी इसमें भूमिका है लेकिन इतने संवेदनशील जगह से रकम पार करते रहने और पकड़ा न जाना कई सवाल खड़े करता है।
जब वह पकड़े गए हैं तब तक करोड़ों की रकम इधर से उधर की जा चुकी है। ऐसे में अंदेशा है कि क्या इसके पीछे किसी बड़े शख्स की साजिश है। वह ट्रस्ट से जुड़ा या फिर किसी अन्य विभाग आदि से है। फिलहाल इसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
चर्चाएं तमाम, कयास का भी दौर जारी इतने संवेदनशील व बड़े मामले में अब तक ट्रस्ट के किसी बड़े जिम्मेदार ने कोई बयान जारी नहीं किया है। हर कोई खामोश है। इसलिए तमाम तरह की चर्चाओं व कयास का दौर जारी है। ट्रस्ट से जुड़े जुड़े दो ऐसे लोग भी हैं, जिन पर कई सवाल उठ रहे हैं। उनकी कोई भूमिका है या नहीं, ये तभी पता चल सकेगा जब कोई एजेंसी या एसआईटी मामले की विस्तृत जांच करेगी।
टिन्नू का जिक्र सबसे अधिक ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी का टिन्नू करीबी है। वह दशकों से उनसे जुड़ा है। जिन पांच संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है, उसमें शामिल रमाशंकर का टिन्नू रिश्तेदार भी है। सूत्रों के मुताबिक टिन्नू का हस्तक्षेप हर किसी काम में रहता था। इसलिए उस पर सवाल उठ रहे हैं। उसको लेकर ट्रस्ट के एक पूर्व पदाधिकारी ने कैमरे सामने गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस अधिकारी भी खामोश पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले में कोई लिखित शिकायत तक नहीं मिली है। लिहाजा पूछताछ आदि का सवाल ही नहीं उठता है। पुलिस के बड़े अधिकारी भी खामोश हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पूछताछ से लेकर रिकवरी की प्रक्रिया में पुलिस की एक टीम लगी है। आठ करोड़ से अधिक का हेरफेर… अब तक 2.98 करोड़ की रिकवरी राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ सकती है।
मामले के खुलासे के बाद से ट्रस्ट गोपनीय जांच में जुटा है। लेकिन पदाधिकारी लगातार चुप्पी साधे हैं। आधिकारिक तौर पर पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया है। लेकिन करोड़ों का गबन की रिकवरी की जद्दोजहद में सभी जुटे हैं।
पकड़े गए संदिग्धों के अलावा और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं इसका पता लगाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक गबन की राशि सही आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन संदिग्धों से पूछताछ में मिली जानकारी व साक्ष्यों के आधार पर आठ करोड़ से अधिक के खेल का अंदेशा है।
संदिग्धों के घर व ठिकानों के साथ बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह रकम उसने दान राशि से गायब की थी। जेवरात भी मिले हैं।पुलिस ने शनिवार को रुदौली के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में मंदिर कर्मचारी लवकुश के घर छापा मारा गया। इस दौरान 10-12 लाख रुपये बरामद किए गए।
रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों को नहीं है बोलने का अधिकार : पांडेय सीतापुर में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने खैराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राम मंदिर के चढ़ावा मामले में सवाल उठाने वाले पहले अपना इतिहास देख लें। उन्होंने रामभक्तों व कारसेवकों पर गोली चलवाई थी, उन्हें इस मामले में बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।
राम मंदिर के दान में घपले की जांच करेगी 3 सदस्यीय एसआईटी, 15 दिन में देगी रिपोर्ट अयोध्या में श्रीराम मंदिर को मिले दान में गबन के तूल पकड़ने के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन शामिल हैं। दल सात दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देगा।
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के बीच टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना जब्त किया गया है। 50 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्तियां भी पता चली हैं। आगे पढ़ें रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर के खजाने और चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) 15 जून 2026 को अयोध्या पहुंची। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से छह घंटे तक पूछताछ की और डिजिटल साक्ष्य खंगाले।
कार्रवाई से पहले, पांच मुख्य संदिग्धों से करीब दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी कार और तीन आईफोन बरामद हुए। इस घोटाले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सामने आया है। 13 जून 2026 को टिन्नू के पैतृक आवास पर छापेमारी में भारी मात्रा में शुद्ध सोना जब्त किया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई करोड़ रुपये हो सकती है। जांच में पता चला है कि टिन्नू के पास अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियां हैं। वह कभी ऑटो रिक्शा चलाता था। अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास उसका एक 70 कमरों वाला छात्र छात्रावास भी है। एसआईटी जल्द ही इस छात्रावास की भी जांच कर सकती है।
सोमेश आनंद और केडी तिवारी पर संदेह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर सोमेश आनंद भी आया है। वह मंदिर निर्माण के मुख्य प्रभारी गोपाल राव का कथित भतीजा बताया जा रहा है। सोमेश ने एक साल में देश के विभिन्न राज्यों की 50 से अधिक संदिग्ध यात्राएं की हैं। वह अयोध्या रेलवे स्टेशन से बोरों में भारी सामान भरकर ट्रेन से दक्षिण भारत जाता था। वापसी में वह हवाई जहाज से खाली हाथ अयोध्या लौटता था। फिलहाल सोमेश के बैंक खातों और हवाई टिकटों की बारीकी से जांच की जा रही है।
आभूषणों की जिम्मेदारी और जमीन का सौदा इस मामले में केडी तिवारी का नाम भी सामने आया है। उनके पास रामलला के आभूषणों को संभालने की मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। सुरक्षा अधिकारियों ने उनके आवास पर भी छापेमारी की थी। केडी तिवारी द्वारा हाल ही में खरीदी गई डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन का सौदा जांच के दायरे में है। उन्होंने मीडिया से कहा, “मेरी ड्यूटी महज श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषणों को तौलकर उन्हें रसीद देने तक सीमित थी, उसके बाद मैं उसे ट्रस्ट के वरिष्ठों को सौंप देता था; आगे गहनों के साथ क्या खेल होता था, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।
भारतीय वायुसेना के लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 87 उन्नत स्वदेशी यूएवी खरीदे जाएंगे। इसके लिए करीब 10 घरेलू कंपनियों ने बोलियां जमा कर दी हैं। यह कदम चीन-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने में मील का पत्थर साबित होगा।
देश की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में भारत ने एक और ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ा दिया है। भारतीय वायुसेना के लिए 87 मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-रेंज, एंड्योरेंस मानव रहित विमानों (यूएवी) की खरीद के लिए करीब 10 भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी बोलियां जमा की हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बोलियां लगाने का आज आखिरी दिन था।
इस महा-परियोजना की दौड़ में देश के कई बड़े नाम शामिल हैं। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ-साथ सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड, अडानी डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) और राफे एमफाइब्र लिमिटेड जैसी निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां मैदान में हैं। रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल ही इस मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। भारतीय कंपनियों को अपनी तैयारी और प्रतिक्रिया बेहतर करने के लिए मंत्रालय ने दो बार समय-सीमा भी बढ़ाई थी।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत की विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता को कम करना है। ये ड्रोन अत्याधुनिक निगरानी और युद्धक क्षमताओं से लैस होंगे। इनमें रीयल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही क्षमताएं शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन ड्रोनों के साथ स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को जोड़ने की भी योजना है। ये ड्रोन न केवल सीमाओं की चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में भी सक्षम होंगे।
सशस्त्र बलों ने एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन के बाद इन ड्रोनों की विशिष्टताओं को अंतिम रूप दिया है। पाकिस्तान और चीन के साथ लगती सीमाओं पर प्रभावी निगरानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक भारतीय सेनाएं अपनी ड्रोन आवश्यकताओं के लिए मुख्य रूप से अमेरिका और इस्राइल जैसे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रही हैं। अब इस स्वदेशी सौदे से भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक नया युग शुरू होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (16 जून, 2026) को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 देशों के नेताओं की बैठक को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया और दुनिया को संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें.
उन्होंने कहा कि भारत का दृढ विश्वास है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है.
जी-7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में बैठ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो टूक कहा कि हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं. इस संघर्ष से पश्चिम एशिया में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मैरिटाइम ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है. भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी.’
उन्होंने कहा, ‘ग्लोबल मैरिटाइम ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना डर के अपना कार्य कर सकें.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘आज का विश्व पहले से कहीं अधिक इंटर-कनेक्टेड और इंटर-डिपेंडेंट है. किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि सिर्फ उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती. मोबिलिटी, डेटा, कैपिटल और तकनीक, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में साझेदारियों का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, लेकिन साझेदारियां तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो. आज सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रैटजिक ऐसेट कोई मिनरल, तकनीक या मार्केट नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘विश्वास की तकनीक और सप्लाई चेन्स को हथियार के रूप में नहीं, वैश्विक भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. विश्वास की विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे. विश्वास की वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुजरना पड़ा. अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की. इन व्यवस्थाओं का आधार भी भरोसा ही था, लेकिन अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुंच रही है. कोविड ने हमें आईना दिखाया कि भरोसा और एकजुटता के दावे कितने खोखले थे.
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था कि Trust but Verify (विश्वास करो, लेकिन सत्यापन भी करो). यह आज के समय में भी प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप भरोसेमंद नियमों पर आधारित दुनिया का निर्माण करें.’