चीन अमेरिका से 200 बोइंग जेट खरीदने पर सहमत हो गया है। ये दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। हालांकि, अनुमान 500 जेट के ऑर्डर का था। अमेरिकी वित्त मंत्री ने ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले कहा था कि चीन बड़े बोइंग ऑर्डर की घोषणा कर सकता है। नौ साल पहले जब ट्रंप 2017 में चीन दौरे पर गए थे तब बीजिंग ने 300 बोइंग विमान खरीदने पर सहमति व्यक्त की थी। अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में कौन सा नया मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं? जानिए इस खबर में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज चैनल को बताया कि चीन 200 बोइंग जेट खरीदने पर सहमत हो गया है। यह पहला मौका है जब बीते लगभग एक दशक में अमेरिका में निर्मित वाणिज्यिक जेट को चीन खरीदने वाला है। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच होने वाले इस सौदे का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक खरीदारी की ये खबर आने के बाद बोइंग के शेयर में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
ट्रंप के इस बयान के बावजूद ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने सिंगल-आइजल 737 मैक्स या बड़े और अधिक महंगे ट्विन-आइजल 777X या 787 जेट में जिक्र कौन से मॉडल के विमान का किया है। खास बात ये है कि बोइंग मुख्य कार्यकारी अधिकारी केली ऑर्टबर्ग और जीई एयरोस्पेस मुख्य कार्यकारी अधिकारी लैरी कल्प उन अमेरिकी अधिकारियों के समूह में शामिल थे जो ट्रंप के साथ चीन गए थे।

बता दें कि नवंबर 2017 में ट्रंप की यात्रा के दौरान, बीजिंग ने 300 बोइंग विमान खरीदने पर सहमति व्यक्त की थी। करीब नौ साल के बाद चीन दौरे पर गए ट्रंप की जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान एक बड़े बोइंग ऑर्डर की घोषणा की उम्मीद है। हालांकि, 200 की संख्या अमेरिका की उम्मीद से कम है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग जगत के सूत्रों ने चर्चा के दौरान कम से कम 500-जेट के सौदे की उम्मीद जताई थी। ऐसे में 200 बोइंग की खरीदारी पर सहमति आंकड़ों के लिहाज से काफी कम है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में हवाई यात्रा करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। एयरलाइंस विमानों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में मौजूदा स्थिति में जितने विमानों की जरूरत है, उसके मुकाबले 200 बोइंग जेट की डील आवश्यक नए विमानों की संख्या से काफी कम है।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर हुए विवादों के कारण बोइंग दुनिया के दूसरे सबसे बड़े विमानन बाजार से बाहर हो गया है। बोइंग कंपनी को बीजिंग और वाशिंगटन के बीच तनाव के अलावा दो दुर्घटनाओं के बाद उपजी चिंताओं के कारण भी मार झेलनी पड़ी है। बोइंग उत्पादन समस्याओं के अलावा 737 मैक्स मॉडल से जुड़े संकट का भी सामना कर रहा है। नकारात्मकता के बीच प्रतिद्वंद्वी कंपनी- एयरबस ने चीनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यूरोपीय विमान निर्माता- एयरबस ने साल 2008 में तियानजिन में ए320 की असेंबली लाइन खोली। इससे चीनी एयरलाइंस को लुभाने में मदद मिली।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का विमानन बाजार इतना बड़ा है कि वह एयरबस जैसे केवल एक विमान निर्माता कंपनी पर निर्भर नहीं रह सकता। बोइंग और एयरबस दोनों के बाजार अनुमानों के अनुसार, चीन को 2045 तक कम से कम 9,000 नए जेटलाइनर की जरूरत होगी।
खबरों के मुताबिक ट्रंप ने अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं के दौरान बोइंग विमानों की खरीद बढ़ाने के लिए कई देशों पर आक्रामक रूप से दबाव डाला था। उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, बोइंग सौदे पर अमेरिका और चीन के बीच कई महीनों से बातचीत चल रही थी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार विवाद के कारण प्रयास विफल रहे। बोइंग मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऑर्टबर्ग ने पिछले महीने रॉयटर्स को बताया था कि ट्रंप प्रशासन से मिल रहे समर्थन के कारण कंपनी को पूरी उम्मीद है कि बोइंग चीन के साथ एक बड़े सौदे को अंतिम रूप देने में सफल रहेगी।




