Saturday, July 25, 2026
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WORLD : अमेरिका ने फिर फोड़ा टैरिफ बम: भारत समेत 17 देशों पर लगाया 10 फीसदी शुल्क, क्या पाकिस्तान का नाम भी है शामिल?

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अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर सख्ती करते हुए भारत सहित 17 देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के तहत की गई समीक्षा के बाद लिया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।

अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर कार्रवाई करते हुए भारत सहित 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने शुक्रवार को 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की। यह फैसला सभी देशों पर लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले लिया गया।

यूएसटीआर के बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर जैमीसन ग्रीर ने उन 60 अर्थव्यवस्थाओं पर अंतिम कार्रवाई की है, जिन्होंने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने और उसे लागू करने में विफलता दिखाई है। ग्रीर ने कहा, “यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार में पैदा हुई विकृतियों को दूर करने की दिशा में है, ताकि दुनिया भर के श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके।”


सूची में शामिल कौन-कौन से देश?
10 प्रतिशत शुल्क भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर लागू होगा। इससे पहले प्रस्तावित सूची में भारत को 12.5 प्रतिशत शुल्क वाले देशों की श्रेणी में रखा गया था। इस संबंध में जारी संघीय नोट में कहा गया कि जून में प्रस्तावित शुल्क की घोषणा के बाद भारत ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया।
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14 जून को भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। ट्रंप प्रशासन ने ये दोनों जांच उस समय शुरू की थीं, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पिछले वर्ष लगाए गए “पारस्परिक शुल्क (रिसिप्रोकल टैरिफ)” को आपातकालीन शक्तियों के तहत अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिसकी अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही है।
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भारत ने यूएसटीआर की दोनों जांचों पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता के दौरान चर्चा की जा सकती है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था।

WORLD : पाकिस्तान को भारत की दो टूक, आतंकवाद रुके बिना सिंधु जल संधि नहीं; तीस्ता पर बांग्लादेश को भी साफ संदेश

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तीस्ता नदी परियोजना और सिंधु जल संधि पर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश के साथ विकास परियोजनाएं आपसी सहमति के रोडमैप के तहत आगे बढ़ेंगी, जबकि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि सीमा पार आतंकवाद बंद होने तक स्थगित रहेगी।

नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार को तीस्ता नदी परियोजना और सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश के साथ विकास परियोजनाएं आपसी सहमति के तय रोडमैप के अनुसार आगे बढ़ती हैं। वहीं पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पहले जैसा ही है और सीमा पार आतंकवाद बंद होने तक संधि स्थगित रहेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में भारत की विकास सहायता से जुड़ी परियोजनाएं दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से तय रोडमैप के आधार पर संचालित होती हैं। इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा भी की जाती है। उन्होंने कहा कि तीस्ता नदी परियोजना पर भारत अपने विचार पहले ही बांग्लादेश को बता चुका है और इस मुद्दे से जुड़े सभी पहलुओं को अपने समग्र दृष्टिकोण में शामिल करेगा।

सिंधु जल संधि पर भारत का रुख बरकरार
सिंधु जल संधि पर पूछे गए सवाल के जवाब में रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और पहले जैसा ही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित है।

आतंकवाद पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यदि पाकिस्तान भविष्य में किसी बदलाव की उम्मीद करता है तो उसे विश्वसनीय तरीके से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद करना होगा। भारत का मानना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्था साथ-साथ नहीं चल सकती।

दो पड़ोसी देशों पर अलग, लेकिन स्पष्ट नीति
विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से साफ है कि भारत ने बांग्लादेश के साथ विकास सहयोग को आपसी सहमति और नियमित समीक्षा से जोड़ते हुए संतुलित रुख अपनाया है। वहीं पाकिस्तान के मामले में भारत ने दोहराया है कि सीमा पार आतंकवाद समाप्त होने तक सिंधु जल संधि पर उसका वर्तमान रुख बरकरार रहेगा।

GUJARAT : घर-गाड़ियां सब डूबे, स्कूल भी बंद: बारिश से गुजरात में बाढ़ जैसे हालात; मौत के मुंह से 1200 लोगों का रेस्क्यू

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गुजरात में कुदरत की मार से भारी तबाही हुई है। वलसाड और नवसारी समेत कई जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात हैं। प्रशासन ने 22,000 लोगों को सुरक्षित निकाला है और सेना तथा NDRF की टीमें लगातार बचाव में लगी हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने राज्य को पूरी सहायता का आश्वासन दिया है।

दक्षिण गुजरात में भारी बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर हैं और सड़कें पानी में डूब चुकी हैं। राहत और बचाव दल लगातार लोगों की जान बचाने में लगे हैं।

क्या बारिश ने थाम दी गुजरात की रफ्तार?
गुजरात के दक्षिण हिस्से में बीते कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। सबसे ज्यादा खराब हालात वलसाड और नवसारी जिलों में बने हुए हैं। इसके अलावा सूरत, अहमदाबाद, खेड़ा, तापी और डांग में भी भारी बारिश हुई है। वलसाड जिले का उमरगाम तालुका बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां बुधवार सुबह छह बजे से गुरुवार शाम छह बजे तक यानी 36 घंटों में रिकॉर्ड 1,200 मिमी बारिश दर्ज की गई। नवसारी जिले के चिखली में 800 मिमी और खेरगाम में 650 मिमी पानी बरसा। घर, गाड़ियां सब डूब चुके हैं।

अहमदाबाद और खेड़ा में भी गुरुवार को जोरदार बारिश हुई। अहमदाबाद के धोलेरा में महज 12 घंटे में 339 मिमी बारिश हुई। वहीं अहमदाबाद शहर में 225 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। इससे कई सोसायटियों में पानी भर गया और लोग घंटों जाम में फंसे रहे। तापी और डांग के 23 तालुकों में 12 घंटे के भीतर 200 मिमी से अधिक बारिश हुई।

राहत और बचाव कार्य की सात बड़ी बातें
22 हजार से ज्यादा लोग शिफ्ट: वलसाड जिले से 12,000 और नवसारी से 10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया है।
फौज और NDRF की तैनाती: बचाव कार्य के लिए सेना की दो टुकड़ियां वलसाड और नवसारी में लगाई गई हैं। NDRF और SDRF की कई टीमें मौके पर काम कर रही हैं।

एयरलिफ्ट कर बुलाई टीमें: राहत काम को तेज करने के लिए ओडिशा से NDRF की चार अतिरिक्त टीमों को एयरलिफ्ट करके मंगवाया गया है।
1,200 से अधिक सड़कें बंद: पानी भरने से चार राष्ट्रीय राजमार्ग, तीन राज्य राजमार्ग और कई पंचायत सड़कें बंद हो गई हैं।
ट्रेन सेवाएं प्रभावित: रेल पटरियों पर पानी भरने से मुंबई जाने वाली कई ट्रेनें रद्द की गईं या उनका रूट छोटा किया गया। यात्रियों की सुविधा के लिए वेस्टर्न रेलवे ने हेल्प डेस्क शुरू की है।

कई इलाके अंधेरे में डूबे: जलभराव की वजह से 35 से ज्यादा बिजली सब-स्टेशन ठप हो गए हैं। इससे कई क्षेत्रों में बिजली गुल है।
स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद: मौसम के खतरे को देखते हुए प्रभावित जिलों में शुक्रवार को सभी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला किया गया है।
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केंद्र से मदद की गारंटी और मौसम का अलर्ट?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बात की है। उन्होंने राज्य के हालात की जानकारी ली और हर संभव मदद का भरोसा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री से बात कर जरूरी सहायता देने की बात कही है। सूरत में भी 2,200 लोगों को शेल्टर होम में शिफ्ट किया गया है।

मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड, डांग, नर्मदा, वडोदरा, छोटा उदयपुर, पंचमहल और दाहोद में ‘रेड अलर्ट’ घोषित है। वहीं अहमदाबाद, गांधीनगर, साबरकांठा, आनंद और खेड़ा में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण गुजरात में अब तक सीजन की 62 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

सूरत में बारिश से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बंद
गुजरात के सूरत में भारी बारिश के कारण अंबिका नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी पुल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। सुरक्षा के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे 4) पर ईएनए (पलसाना) और खरेल (नवसारी) के बीच वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है। पानी का स्तर कम होते ही यातायात फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

SPORTS : 15 साल 99 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने इंटरनेशनल डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर और शेफाली वर्मा का रिकॉर्ड तोड़ा

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भारतीय क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत हुई है। वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल 99 दिन की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ अपना टी-20 इंटरनेशनल डेब्यू करके इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर (16 साल 205 दिन) और शेफाली वर्मा (15 साल 239 दिन) जैसे दिग्गजों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। मैच से पहले तिलक वर्मा द्वारा वैभव को पहली भारतीय कैप सौंपी गई, जो उनके करियर का एक यादगार पल बन गया।

ओल्ड ट्रैफर्ड से खास कनेक्शन
यह संयोग ही है कि वैभव सूर्यवंशी ने जिस ओल्ड ट्रैफर्ड (मैनचेस्टर) मैदान पर अपना टी-20I डेब्यू किया, उसी मैदान से महान सचिन तेंदुलकर की ऐतिहासिक यादें जुड़ी हैं। 14 अगस्त 1990 को 17 साल 112 दिन की उम्र में सचिन ने इसी मैदान पर अपना पहला टेस्ट शतक (नाबाद 119 रन) जड़कर टीम को हार से बचाया था।

इंग्लैंड और भारत की प्लेइंग-11 में बदलाव
दूसरे टी-20 मुकाबले के लिए इंग्लैंड ने अपनी टीम में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की टीम में वापसी हुई है, जबकि जोश टंग अपना टी-20 डेब्यू कर रहे हैं। इन दोनों को साकिब महमूद और ल्यूक वुड की जगह शामिल किया गया है।

इंग्लैंड की प्लेइंग-11: फिल सॉल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियम डॉसन, आदिल रशीद, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग।

भारत की संभावित प्लेइंग-11: संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती।

भारत बनाम इंग्लैंड: टी-20 आंकड़े
भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक कुल 31 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले गए हैं, जिनमें भारत का पलड़ा भारी रहा है। भारत ने 18 मुकाबले जीते हैं, जबकि इंग्लैंड के नाम 12 जीत दर्ज हैं और एक मैच बेनतीजा रहा है। इंग्लैंड की सरजमीं पर दोनों टीमों के बीच 10 भिड़ंत हुई हैं, जिसमें मेजबान इंग्लैंड ने 5 और भारत ने 4 मैचों में जीत हासिल की है, वहीं एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया था।

NATIONAL : ‘छात्र सड़क पर हैं तो हम भी उनके साथ’: राहुल गांधी की बस यात्रा से गरमाई सियासत, गांधी स्मृति पहुंचा विपक्ष

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नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सियासत अब संसद से निकलकर सड़क पर आ गई है। राहुल गांधी विपक्षी सांसदों के साथ बस में सवार होकर गांधी स्मृति पहुंचे और छात्रों के समर्थन में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। रास्ते में पुलिस की रोक, राहुल का बयान और विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन…आखिर इस बस यात्रा के पीछे क्या संदेश था और सरकार पर किस बात को लेकर सबसे बड़ा हमला बोला गया?

देश की राजधानी दिल्ली में नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर सियासी तापमान और बढ़ गया है। गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में इंडिया गठबंधन के सांसद एकजुट होकर गांधी स्मृति पहुंचे। राहुल गांधी अपने सरकारी आवास से विपक्षी नेताओं के साथ एक बस में सवार होकर निकले। इस दौरान कांग्रेस, आरजेडी, सीपीआई(एम) समेत कई विपक्षी दलों के सांसद उनके साथ मौजूद रहे।

हालांकि, यात्रा शुरू होने से पहले कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई। राहुल गांधी के आवास के बाहर दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी और बस को आगे बढ़ने से रोक दिया। कुछ मिनट तक चली बातचीत के बाद पुलिस ने रास्ता खोल दिया, जिसके बाद विपक्षी नेताओं का काफिला गांधी स्मृति के लिए रवाना हो गया।

‘छात्र सड़क पर हैं, इसलिए हम भी सड़क पर हैं’
रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्र अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में विपक्ष का कर्तव्य है कि वह उनके साथ खड़ा रहे। उन्होंने कहा, ‘हम पहले इंडिया गेट जाना चाहते थे, लेकिन हमें अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद हमने गांधी स्मृति जाने का फैसला किया, वहां भी हमें कुछ देर रोका गया। हमारा सबसे बड़ा संदेश देश के छात्रों के लिए है कि हम आपके साथ हैं और आपकी आवाज संसद से लेकर सड़क तक उठाएंगे।’

पहले हुई रणनीति बैठक, फिर निकला विपक्ष का काफिला
गांधी स्मृति मार्च से पहले राहुल गांधी ने अपने आवास पर विपक्षी सांसदों की बैठक बुलाई थी। बैठक में नीट पेपर लीक, संसद में सरकार को घेरने की रणनीति और छात्रों के समर्थन में संयुक्त कार्यक्रम पर चर्चा हुई। इसके बाद सभी नेताओं ने एक साथ बस से गांधी स्मृति जाने का फैसला किया। बैठक की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी। इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई औ
र बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। इस बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ भी आवास के बाहर जुटने लगी।
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विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
आरजेडी सांसद संजय यादव ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक हुए, लेकिन आज तक किसी बड़े आरोपी को सजा नहीं मिली। उनके मुताबिक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता खत्म हो चुकी है और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। वहीं, सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष गांधी स्मृति इसलिए जा रहा है क्योंकि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा छात्रों के साथ एकजुटता और लोकतांत्रिक विरोध का प्रतीक है।

क्यों निकाली गई यह बस यात्रा?
विपक्षी दलों का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों के समर्थन का संदेश है जो नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों से प्रभावित हुए हैं। गांधी स्मृति पहुंचकर नेताओं ने छात्रों के संघर्ष के प्रति एकजुटता जताने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाने और छात्र आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि देने का संदेश दिया। साथ ही पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों और आंदोलनरत युवाओं के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया।

हिरासत में लिए गए थे राहुल गांधी
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सात लोक कल्याण मार्ग स्थित पीएम आवास के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया, जबकि दूसरी ओर जंतर-मंतर पर इसी मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा; इस दौरान स्थिति को संभालते हुए दिल्ली पुलिस ने मंगलवार शाम को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिन्हें कुछ घंटे बाद छत्रसाल स्टेडियम से रिहा कर दिया गया।

NATIONAL : ओडिशा से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान में ऐसा क्या, जिन्हें हटाने में हिचक रही है मोदी सरकार, जान लीजिए ये पांच कारण

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साल 2021 के जुलाई महीने की शुरुआत में देश के शिक्षा मंत्री बने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिल्ली की सड़कें ‘अशांत’ हैं। सीजेपी प्रोटेस्ट और दिल्ली पुलिस के बल प्रयोग की गूंज संसद तक है, लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी हो सकता है, जानिए आखिर क्या हैं इसके पीछे के कारण?

भुवनेश्वर: दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रमुख मांग है कि नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा दें। सीजेपी के संसद मार्च के बाद भी ऐसी स्थिति नहीं दिख रही है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली सरकारों में ऐसा कम ही हुआ है कि आंदोलन और विपक्ष की मांग पर किसी मंत्री ने पद छोड़ा हो। गुजरात से दिल्ली तक के सफर में पीएम मोदी ने अपने हिसाब से फैसले ले आए हैं, हालांकि इसके बाद भी सवाल उठा रहा है कि सरकार क्यों इतने बड़े प्रदर्शन के बाद सरकार बहुत ज्यादा चिंतित भी नहीं दिख रही है।

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान उन सात मंत्रियों में शामिल हैं। जो लगातार तीसरे कार्यकाल में सरकार का हिस्सा हैं। इनमें राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, राव इंद्रजीत सिंह और डॉ. जितेंद्र सिंह का नाम शामिल है। गृह मंत्री अमित शाह और एस. एस जयशंकर भी धर्मेंद्र प्रधान समेत सात नेताओं से बाद में मोदी सरकार का हिस्सा बने हैं। वे अब तक कई अहम विभाग संभाल चुके हैं।

अगर धर्मेंद्र प्रधान कुछ और वक्त तक शिक्षा मंत्री रहते हैं तो वह जल्द ही डॉ. मुरली मनोहर जोशी का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। मुरली मनोहर जोशी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में लगभग 6 वर्ष 2 महीने (1998–2004) तक इस पद पर रहे। मुरली मनोहर जोशी को क्रॉस करने के बाद उनसे आगे मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, अर्जुन सिंह, के एल श्रीमाली रह जाएंगे। अर्जुन सिंह ने दो कार्यकाल को मिलकर कुल आठ साल 183 दिन शिक्षा मंत्री रहे जबकि श्रीमाली पांच साल 280 दिन। श्रीमाल का रिकॉर्ड भी प्रधान अगले महीने में तोड़ देंगे।

अब बात धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के बीच पेपर लीक के लिए इस्तीफा मांगा जा रहा है लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि उनका इस्तीफा होगा। इसकी बड़ी वजह है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में क्रेडिबिलिटी की कमी और जोश अधिक है। सरकार को अपने आंकलन में उतना कोई बड़ा नुकसान होता नहीं दिख रहा है। मॉनसून सत्र जरूर चल रहा है लेकिन कोई चुनाव सिर पर नहीं है। तीसरी बात यह है कि पीएम मोदी की सरकार में हर मंत्री के कामकाज पर पीएमओ की सीधी नजर रहती है। अगर धर्मेंद्र प्रधान सही परफॉर्म नहीं कर रहे थे तो शायद ही 12 साल लगातर टिक पाते।

जिस नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक को आधार बनाकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा जा रहा है। वह परीक्षा हो चुकी है। रिजल्ट भी आ चुका है l मुझे लगता है अंग्रेज-कांग्रेस के जमाने से जो गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा था उसमें शिक्षा मंत्री बदलाव कर रहे हैं। इसलिए वामपंथी संगठन अधिक नाराज हैं। इस्तीफे और विरोध की बड़ी वजह भी यही लगती है। कॉकरोच जनता पार्टी की क्रेडिबिलिटी कम है, फिर उन्होंने अपने आंदोलन का राजनीतिकरण भी होने दिया।
दयानंद नेने, राजनीतिक विश्लेषक

ऐसे में चर्चा है कि उनका प्रदर्शन सरकार की अगुवाई करते पीएम मोदी और अमित शाह की नजर में ठीक है। चौथी बात है कि कॉकरोच जनता पार्टी जिसके प्रदर्शन को ‘Gen Z प्रोटेस्ट’ कहा जा रहा है उसकी मांगें ठीक नहीं है। वे इस्तीफा मांग रहे है कि लेकिन अल्टरनेट नहीं बता पा रहे हैं। आखिर क्या होना चाहिए? 20 जुलाई को पहली बार उन्होंने लिखित में पहली बार कुछ जेपी नड्‌डा को सौंपा। यह मात्र संयोग है कि जिन धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री (पहले मानव संसाधन विकास मंत्री) का पद संभाला था। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जुलाई महीने में दिल्ली अशांत है। मॉनसून सत्र में सदन नहीं चल पा रहा है।

पांचवीं और अहम बात यह है कि धर्मेंद्र प्रधान कोई आयातित नेता नहीं है। वे एबीवीपी से बीजेपी में आए हैं। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे हैं। अगर उनका इस्तीफा होता है तो पीएम मोदी के अब तक कार्यकाल में पहली बार विपक्ष या कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन देने वाले दलों को मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है अगर धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय चेंज हुआ या इस्तीफा तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, एबीवीपी, बीजेपी और पीएम मोदी के लिए असहज स्थिति का निर्माण होगा। इसके अलावा एक और दलील दी जा रही है कि उन्होंने पाठ्यक्रम में जिस तरह से आरएसएस की मर्जी के अनकूल बदलाव किए हैं, वह भी उनके विरोध का एक बड़ा कारण है। अब मुगल शासक ‘अकबर द ग्रेट’ पाठ्यक्रम में नहीं है बल्कि आपातकाल पढ़ाया जा रहा है।

NATIONAL : शांति और महज शांति, वांगचुक की छात्रों से अपील, कहा- दूसरा पक्ष कुछ भी करे, हमारा जवाब सिर्फ फूल होना चाहिए

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देर रात मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया है। केंद्र सरकार के दो मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के काफी मनाने के बाद उन्होंने अनशन तोड़ने का फैसला लिया। वहीं, इस बीच अब कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने एक्स हैंडल पर नया संदेश जारी कर दिया है। उन्होंने सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने पर बड़ी बात कही और इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी अहम बातें कहीं। उन्होंने आगे के प्रदर्शन को लेकर भी ऐलान किया।

देर रात अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि हमें बेहद राहत और कृतज्ञता है कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। सर, आपके असाधारण साहस और बलिदान के लिए धन्यवाद। अपनी जान जोखिम में डालकर आपने पूरे देश की अंतरात्मा को जगाया।
आपका जीवन इस देश के लिए अमूल्य है।

आगे के आंदोलन पर बोले अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने आगे कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं, प्रवक्ता सौरव दास ने भी इस आंदोलन के जारी रहने की बात कही है। बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी ने आज यानी 24 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।

कॉकरोच के प्रदर्शन को लेकर देश में सुरक्षा व्यवस्था टाइट
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर मोदी सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। इस बीच अभिजीत दिपके ने भी साफ कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक यह आंदोलन जारी रहेगा। आज यानी 24 जुलाई को देशभर में आंदोलन होगा। सीजेपी ने पूरे देश के छात्रों से आंदोलन में भाग लेने के लिए कहा है।

बीते दिनों उग्र हुआ आंदोलन
बता दें कि बीते दिनों सीजेपी का आंदोलन उग्र हो गया। इसमें कई उपद्रवी भी घुस गए और जमकर बवाल मचाया। पुलिस ने जहां लाठीचार्ज किया तो वहीं दूसरी तरफ से भी पत्थर फेंके गए। कई पुलिसकर्मी बुरी तरह से घायल हो गए। हालांकि, कॉकरोच पार्टी के लोगों ने शांति बरतने की अपील की है।

NATIONAL : छात्रों के देशव्यापी प्रदर्शन पर हाईअलर्ट, एआई टूलकिट पर खुफिया एजेंसियों की नजर

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देशव्यापी छात्र प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय सुरक्षाबलों को भी तैयार रहने के लिए कहा गया है। खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया और कथित एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर रख रही हैं, क्योंकि आशंका जताई गई है कि कुछ असामाजिक या बाहरी तत्व आंदोलन की आड़ में अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसके मद्देनजर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को अलर्ट रहने को कहा है। केंद्रीय सुरक्षाबलों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। खुफिया एजेंसी के मल्टी एजेंसी सेंटर में इस तरह के इनपुट मिल रहे हैं कि प्रदर्शन की आड़ में देशविरोधी ताकतें अप्रिय घटना को अंजाम दे सकती हैं।

खासतौर पर, सीमावर्ती राज्यों में उपद्रवी तत्व बाहरी साजिशों के बहकावे में आकर दंगा भड़का सकते हैं। भड़काने वाली सामग्री का प्रचार प्रसार करने वाली एआई टूलकिट पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर है।

खुफिया एजेंसियां कर रही क्या तैयारियां?
खुफिया एजेंसियों को जिस तरह के इनपुट मिल रहे हैं, उनमें हिस्ट्रीशीटरों की ओर से हिंसा फैलाना, ट्रैफिक रोकना और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना आदि शामिल है। राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा बड़े शहरों के मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही गई है। वहीं, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की सभी बटालियनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जवानों से कहा गया है कि वे किसी भी वक्त एयरलिफ्ट के लिए तैयार रहें।

गौरतलब है कि पेपर लीक विवाद और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए हैं। महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों में छात्रों के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हुई। वहीं, झारखंड में भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के आमने-सामने आने से माहौल बिगड़ गया। इस दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की और अंडे फेके।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों को सरकार की ओर से एक बार फिर बातचीत का प्रस्ताव दिया गया है. सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आप जिस समय चाहें बातचीत हो सकती है. बातचीत में पेच यह फंस रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी यह चाहती है कि बातचीत जंतर-मंतर पर हो, जबकि सरकार यह कह रही है कि बातचीत जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में हो.
केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी को बातचीत के लिए एक बार फिर ऑफर दिया है. इस बार सरकार की ओर से कहा गया है कि वे जहां चाहते हैं और जिन मुद्दों पर बात करना चाहते हैं, हम बातचीत के लिए तैयार हैं.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के लोगों को पिछले 24 घंटे में 4 बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया है. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह बताया है. उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे स्टूडेंट्स से मेरी विनम्र अपील है कि वे जब चाहें, दिन के किसी भी समय और जितने समय के लिए चाहें सरकार बातचीत के लिए तैयार है.

जितेंद्र सिंह ने कहा कि हम उन सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं जिस पर आंदोलन हुआ है. इसके अलावा इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर भी बात करने के लिए सरकार तैयार है. बातचीत खुले मन से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के घर पर हो सकती है और बेशक मैं उनके साथ रहूंगा. बातचीत नड्डा के घर या ऑफिस में या दोनों में से जहां भी आप चाहें हो सकती है.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोेदी बहुत ही संवेदनशील हैं. वे यह चाहते हैं कि छात्रों की समस्याओं का समाधान हो. सरकार ने बातचीत करने को अपनी प्रतिष्ठा से जुड़ा मुद्दा नहीं बनाया है. हम सहजता से यह चाहते हैं कि छात्रों से बातचीत हो. इसकी वजह यह है कि बातचीत होगी, तभी आगे का रास्ता निकलेगा और समस्याओं का समाधान होगा. जितेंद्र सिंह ने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर भी बातचीत के ऑफर का वीडियो अपलोड किया है.

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नीट पेपर लीक मामले में बढ़ते छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और मानसून सत्र में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने की घोषणा की। सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर नए अधिकारियों की नियुक्ति भी की।
नीट पेपर लीक मामले में युवाओं के आक्रोश और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच सरकार फास्ट ट्रैक मोड में आ गई है। गुरुवार की सुबह से लेकर देर रात तक सरकार ने ताबड़तोड़ कई घोषणाएं और फैसले किए। सबसे पहले सुबह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एलान करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, दोषी किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे। युवाओं का कल्याण और हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अमित शाह के नेतृत्व में हुई कई बैठकें
इस घोषणा के बाद सरकार में गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में उच्च स्तर पर बैठकों के कई दौर चले और देर रात होते-होते दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। हालांकि सरकार की तत्परता यहीं नहीं रुकी।

पीएम मोदी के करीबी अफसर का तबादला
छात्रों के प्रदर्शन की गाज उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी पर गिरी। पीएम मोदी के करीबी अधिकारियों में गिने जाने वाले जोशी को सरकार ने पंचायती राज विभाग के सचिव के रूप में तबादला कर दिया और पशुपालन सचिव नरेश गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव बना दिए गए। टीके अनिल कुमार नए शिक्षा सचिव बनाए गए हैं।

पीएम मोदी ने की अहम घोषणा
इसके बाद, आधी रात के करीब पीएम मोदी ने तीसरी बड़ी घोषणा की। उन्होंने एक्स पर वीडियो संदेश पोस्ट कर कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून बनाने जा रही है। खास बात यह है कि पीएम मोदी ने इसी मानसून सत्र में यह कानून लाने का एलान किया।

प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी सीजेपी
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने गुरुवार को कहा कि पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा में जवाबदेही के मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ने का एलान किया। पीएम मोदी के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधान की एक तस्वीर साझा की। इस पर लिखा था, हाय, मेरा कोई नाम नहीं है।

पीएम की प्रतिक्रिया का सीजेपी ने किया स्वागत
वहीं सीजेपी ने पोस्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने आखिरकार इस पर ध्यान दिया। शायद उनके विदेश दौरे खत्म हो गए हैं और वे भारत लौट आए हैं, जो कि एक अच्छी बात है। लेकिन पेपर लीक हो जाने के बाद आप क्या सजा दे रहे हैं? इससे पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी। असली सवाल यह है कि पेपर लीक हो ही क्यों रहे हैं। इस सवाल का जवाब मिलना चाहिए।

‘सरकार ने हमारी शर्तें मानीं…हिंसा टालने के लिए तोड़ा अनशन’
नीट पेपर लीक मुद्दे पर 26 दिन से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात 12:48 बजे अनशन तोड़ दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल में जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। नड्डा के साथ केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो भी मौजूद थीं। अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश में फैलने वाली संभावित हिंसा टालने के लिए अनशन खत्म करने का फैसला लिया है।

नड्डा ने कहा-वांगचुक से ये वादे किए
वांगचुक का अनशन खत्म कराने के बाद केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार ने वांगचुक से जो वादे किए उनमें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों और 22 जुलाई को संसद मार्च करने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी। नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वालों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। पेपर लीक पर लगाम लगाने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के लिए सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है।

सीजेपी के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत आज
नीट पेपर लीक पर सीजेपी के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे वार्ता होगी। हालांकि बैठक की जगह का खुलासा नहीं किया गया है। सीजेपी ने इससे पहले, देश के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस कार्रवाई के शिकार लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए 24 जुलाई को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की थी।

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