Monday, September 7, 2026
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NATIONAL : यूपी, पंजाब समेत 5 राज्यों में इलेक्शन का काउंटडाउन, फरवरी-मार्च में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

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यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ऐसी सूचना है कि फरवरी मार्च में ही पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके लिए जरूरी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

भारती जैन, नई दिल्ली: अगले साल यानी 2027 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन चुनाव वाले चार राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना की प्रक्रिया तेजी आगे बढ़ रही है। वहीं पांचवें राज्य मणिपुर में जनगणना का पहला चरण टल गया है। इस तरह इन पांचों राज्यों में अगले विधानसभा चुनावों का शेड्यूल लगभग तय हो गया है। ऐसी सूचना है कि अगले साल फरवरी-मार्च में यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।

5 राज्यों में चुनाव पर बड़ा अपडेट
जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं इनमें मणिपुर असेंबली का कार्यकाल सबसे पहले 13 मार्च, 2027 को खत्म हो रहा है। गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च, 2027 को; पंजाब विधानसभा का 16 मार्च को; उत्तराखंड का 28 मार्च को खत्म होगा। वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल सबसे आखिर में 22 मई को खत्म होगा। पिछली बार यानी 2022 इलेक्शन में यूपी, पंजाब समेत पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ संपन्न हुए थे। हालांकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 22 मई, 2022 को हुई थी।

फरवरी-मार्च में हो सकते हैं इलेक्शन
अब चूंकि इन राज्यों में 2027 के चुनाव भी एक साथ होंगे, इसलिए चुनाव आयोग के सबसे पहले खत्म होने वाले विधानसभा कार्यकाल (13 मार्च) से पहले चुनाव पूरे करने का पारंपरिक तरीका अपनाने की संभावना है। इस तरह, यूपी में चुनाव विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने की तारीख से लगभग दो महीने पहले होंगे। यह पिछले तीन चुनावों के पैटर्न के अनुरूप है। चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार उसे किसी राज्य में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले कभी भी चुनाव कराने की इजाजत देता है।

यूपी में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से 2 महीने पहले इलेक्शन
यूपी जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य में कई चरणों में वोटिंग होना लगभग तय है। हालांकि बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से तय किए गए उदाहरण को देखें तो वोटिंग फेज की संख्या कम हो सकती है। अगर चुनाव आयोग बिहार की तरह चुनाव को दो चरणों तक सीमित करने का फैसला करता है, तो वोटिंग फरवरी या मार्च की शुरुआत में भी शुरू हो सकती है। चुनावों की घोषणा जनवरी 2027 में हो सकती है।

तीन राज्यों में पूरा हुआ SIR का काम
चूंकि चुनाव वाले तीन राज्यों में SIR (स्पेशल समरी रिवीजन) पहले ही पूरा हो चुका है और बाकी दो में चल रहा है, इसलिए विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले चुनाव आयोग के वहां सालाना समरी रिवीजन कराने की संभावना कम है। SIR के आखिर में, यूपी में वोटर्स की संख्या 13.4 करोड़ (13.2% की कमी), गोवा में 10.6 लाख (10.2% कम) और मणिपुर में 19.3 लाख (7.6% की गिरावट) थी। पंजाब और उत्तराखंड के लिए फ़ाइनल वोटर लिस्ट अगले कुछ महीनों में जारी की जाएगी।

चुनाव तैयारियों को लेकर केंद्र दिया बड़ा अपडेट
केंद्र ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के बर्फ से न ढके इलाकों और गोवा में जनगणना 2027 के जनसंख्या गिनती वाले चरण को पहले करने के अपने फैसले की जानकारी दी। इसके तहत यह काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच होगा और 5 जनवरी को रेफरेंस तारीख माना जाएगा। साथ ही, मणिपुर में जनगणना के हाउस-लिस्टिंग (घरों की सूची बनाने) वाले चरण को टालने की भी जानकारी दी गई।

चुनाव वाले चार अन्य राज्यों में जनसंख्या गिनती के चरण को पहले करने से उन लॉजिस्टिकल चुनौतियों से बचा जा सकेगा जो जनगणना और विधानसभा चुनावों की सामान्य समय-सीमा के टकराने से पैदा हो सकती थीं। चुनाव और जनगणना, दोनों के संचालन के लिए सरकारी कर्मचारियों- जिनमें ज्यादातर शिक्षक होते हैं, उनके एक ही समूह पर निर्भर रहना पड़ता है।

NATIONAL : ’13-14 करोड़ नाम हटाना स्कैम’: एसआईआर पर पूर्व सीईसी कुरैशी का बड़ा दावा, और क्या-क्या कहा?

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पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी ने एसआईआर के तहत वोटरों के नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 13-14 करोड़ नाम हटने का दावा करते हुए इसे ‘स्कैम’ बताया। कुरैशी ने योग्य मतदाताओं के नाम हटाने को असांविधानिक और गैरकानूनी कहा। साथ ही उन्होंने 2002 की मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने और क्या-क्या कहा है? जानिए…

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भुवनेश्वर में रविवार को उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को ‘अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण’ बताया। कुरैशी ने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना एक ‘स्कैम’ है। उन्होंने दावा किया कि एक कृत्रिम प्रक्रिया के जरिए करीब 15 प्रतिशत आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया।

13-14 करोड़ नाम हटने पर क्या आपत्ति है?
पूर्व सीईसी कुरैशी ने कहा कि देशभर में करीब 13 से 14 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रुख पर भी हैरानी जताई। कुरैशी के मुताबिक, अदालत ने इस मामले में बहुत नरम रुख अपनाया, जिससे यह प्रक्रिया जारी रह सकी। उन्होंने कहा कि हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत लोग मतदान के योग्य हैं। इसी पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी लोग दूसरे स्थानों पर चले गए हैं?

अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया तो?
कुरैशी ने यह भी कहा कि अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया है, तो उसका नाम नई जगह की मतदाता सूची में जोड़ा जाना चाहिए। केवल नाम हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर कुछ मतदाता पलायन कर गए हैं, तो उनके नाम नई जगह पर जोड़े जाने चाहिए। हैरानी की बात है कि केवल नाम हटाए जा रहे हैं। क्या कोई दूसरी जगह से यहां नहीं आ रहा? क्या सिर्फ बाहर जाना ही हो रहा है? यह पूरी तरह अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण है।

एक योग्य वोटर का नाम हटाना कितना गंभीर?
एसवाई कुरैशी ने कहा कि भारत के हर नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी योग्य व्यक्ति का नाम किसी कारण या बहाने से हटाया जाता है, तो यह असांविधानिक और गैरकानूनी है। उन्होंने इसके लिए जवाबदेही तय करने और आपराधिक जिम्मेदारी की बात भी कही। उनका कहना था कि प्रक्रियागत या नौकरशाही कारणों से किसी नागरिक का मौलिक अधिकार नहीं छीना जा सकता।

2002 की वोटर लिस्ट पर भी सवाल क्यों?
एसआईआर में 2002 की मतदाता सूची से तुलना किए जाने पर भी कुरैशी ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उस सूची में भी गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पिता का नाम भी 2002 की सूची में गलत लिखा गया था। इसलिए उनके मुताबिक इस सूची का इस्तेमाल केवल संदर्भ के लिए किया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया, ‘क्या यह बाइबल से आई थी? क्या 2002 की मतदाता सूची में कोई गलती नहीं थी?’

BUSINESS : हवाई जहाजों के मंहगे टिकटों की मनमानी पर लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट में ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ पर आज सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट में S. Laxminarayanan द्वारा दायर जनहित याचिका (W.P.(C) No. 1124/2025) में आरोप लगाया गया है कि एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमन के एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग अपनाकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं।

नई दिल्ली: देश में त्योहारों, छुट्टियों, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक कई गुना बढ़ जाने की समस्या से दर आदमी परेशान है। इस सिलसिले की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। अब यही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।S. Laxminarayanan द्वारा दायर जनहित याचिका (W.P.(C) No. 1124/2025) में आरोप लगाया गया है कि एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमन के एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग अपनाकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं। याचिका में कहा गया है कि यह व्यवस्था आम यात्रियों के हितों के विपरीत है और इसमें पारदर्शिता का अभाव है।

हवाई यात्रा में मनमाने किराए और एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क लिए जाने से आम उपभोक्ता परेशान रहता है। लेकिन इस दिशा में कोई खास गाइडलाइन्स न होने की वजह से वो मजबूर है। ऐसे में यह याचिका एयरलाइंस कंपनियों के इस मनमाने रवैये के खिलाफ दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत में निजी एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमन के डायनेमिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) अपनाकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

सरल भाषा में समझाया जाए, तो कहा जा सकता है कि डायनेमिक प्राइसिंग, एक ऐसी कीमतों को निर्धारित करने वाली रणनीति है जहाँ कंपनियाँ बाज़ार की माँग, ग्राहकों के व्यवहार और वास्तविक समय के डेटा के आधार पर अपने उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में लगातार बदलाव करती हैं। इसी के आधार पर हवाई जहाज कंपनियां, किसी एक उड़ान के लिए एक तय कीमत तय करने के बजाय, मांग के अनुसार हर घंटे या दिन टिकट के दाम बदलती हैं। यदि किसी विशेष रूट पर अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है या किसी सीट की मांग अधिक होती है, तो कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।

NATIONAL : न निजीकरण होगा, न भूमिका घटेगी… प्राइवेटाइजेशन के दावों पर ISRO की सफाई, जानें क्या कहा

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ISRO ने अपने निजीकरण और भूमिका कम किए जाने की खबरों को सिरे से खारिज किया है. ISRO ने स्पष्ट किया कि उसका महत्व कम नहीं होगा, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी भूमिका पहले की तरह रहेगी.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण और उसकी भूमिका कम किए जाने की खबरों को पूरी तरह से निराधार और गलत बताते हुए सिरे से खारिज किया है. ISRO ने साफ सफाई देते हुए कहा कि ये दावे गलत और बेबुनियाद हैं. ISRO ने साफ कहा कि उसका न तो निजीकरण किया जा रहा है और न ही अंतरिक्ष क्षेत्र में उसका महत्व कम किया जाएगा. ISRO ने स्पष्ट किया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी भूमिका पहले की तरह बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी.

ISRO का यह बयान उन रिपोर्टों के सामने आने के कुछ बाद आया है जिनमें कहा गया था कि ISRO के हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 9 संगठनों ने अंतरिक्ष एजेंसी के विनिर्माण और परिचालन कार्यों को निजी संस्थाओं को सौंपने के प्रस्ताव पर स्पष्टीकरण मांगा था.

‘ निजीकरण की बात पूरी तरह गलत’
ISRO ने इन दावों को गलत बताते हुए बयान जारी किया. जिसमें उसने कहा कि हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि ISRO का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा. बयान में आगे कहा गया है ‘ISRO उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास, राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों, अंतरिक्ष विज्ञान और अन्वेषण, और महत्वपूर्ण एवं सीमांत अंतरिक्ष क्षमताओं के लिए भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगा’.

ISRO ने कहा, स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य किसी भी तरह से इसरो की भूमिका को कम करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इसरो को भारत के स्पेस प्रोग्राम की अगली पीढ़ी पर और ज्यादा मजबूती से फोकस करने में सक्षम बनाना है, जबकि इंडस्ट्री मैच्योर टेक्नोलॉजिज और क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करेगा.

‘कुछ बदलाव हो रहा है लेकिन…’
एजेंसी ने कहा कि जो भी कुछ बदलाव हो रहा है वो ISRO के लिए महत्व में नहीं हो रहा, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम के स्ट्र्क्चर और स्केल में हो रहा है.एजेंसी ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने का मतलब ISRO की भूमिका कम होना नहीं है. इसके बजाय इससे ISRO को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अगले चरण पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा. वहीं निजी क्षेत्र पहले से विकसित और परखी जा चुकी तकनीकों और क्षमताओं को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाएगा.

ISRO के मुताबिक, अंतरिक्ष क्षेत्र में उद्योगों, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य देश के मौजूदा अंतरिक्ष ढांचे और क्षमताओं का विस्तार करना है. एजेंसी ने कहा कि इन सुधारों को निजीकरण के बजाय अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार और क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने के रूप में देखा जाना चाहिए. ISRO के अनुसार, बदलाव उसकी अहमियत में नहीं बल्कि भारत के पूरे अंतरिक्ष तंत्र के आकार और काम करने के तरीके में हो रहा है.

ISRO ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही इसकी मौजूदा क्षमताओं को भी बढ़ाया और विस्तारित किया जा रहा है, इसलिए इन सुधारों को निजीकरण के बजाय पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और क्षमता वृद्धि के रूप में देखा जाना चाहिए.

स्पेस विजन 2047 के लिए जरूरी बदलाव
ISRO ने कहा कि यह बदलाव उसके अंतरिक्ष विजन 2047 के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना करना, 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजना है. इसके अलावा अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट विकसित करना, चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की लंबे समय तक खोज जारी रखना और भारत को दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल करना भी इस योजना का हिस्सा है.

बयान में कहा गया है कि ये तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण मिशन हैं जिनके लिए ISRO को उन्नत अनुसंधान और क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित रखना होगा, जिन्हें व्यावसायिक गतिविधियों से आसानी से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है. इसलिए इसका उद्देश्य उद्योग को परिपक्व क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम बनाना है, जबकि ISRO भारत को अगली तकनीकी सीमा की ओर ले जा रहा है.

ISRO ने कहा कि जहां उपयुक्त होगा, वहां संचालन और सेवाओं में निजी भागीदारी को सक्षम बनाया जाएगा और यह राष्ट्रीय सुरक्षा, संरक्षा और अन्य नियामक आवश्यकताओं के अधीन रहेगी. रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व की क्षमताओं का संचालन सुरक्षा, संरक्षा, गुणवत्ता और राष्ट्रीय हित के संदर्भ में होता रहेगा.

कर्मचारियों में क्यों बढ़ी चिंता
निजीकरण की खबरों के बाद ISRO के कर्मचारियों में चिंता पैदा हुई थी. 4 सितंबर को 9 कर्मचारी संगठनों ने ISRO अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को पत्र लिखकर सरकार की निजीकरण नीति और संगठन की भविष्य की भूमिका पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी.

इन संगठनों में ISRO के कई केंद्रों से जुड़े कर्मचारी संगठन शामिल हैं. उन्होंने कहा था कि मीडिया में आई खबरों से कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच चिंता का माहौल बना है. संगठनों ने यह भी पूछा था कि प्रस्तावित बदलाव का मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य में होने वाली भर्तियों पर क्या असर पड़ेगा.

पवन गोयनका ने भी दी सफाई
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने भी रविवार (6 सितंबर) को कहा कि ISRO की भूमिका कम नहीं की जा रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि 2020 से किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य भारत के पूरे अंतरिक्ष तंत्र का विस्तार करना है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को प्रक्षेपण यान, उपग्रह और दूसरी तकनीकों के निर्माण और बड़े स्तर पर उत्पादन की जिम्मेदारी धीरे-धीरे देने का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता बढ़ाना है.

IN-SPACe अंतरिक्ष विभाग के अधीन एक स्वायत्त निकाय है जो गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देता है, सक्षम बनाता है, अधिकृत करता है और उनकी देखरेख करता है. दरअसल हाल ही में गोयनका के इस बयान के बाद कर्मचारियों में चिंता बढ़ी थी कि भविष्य में ISRO खुद कोई प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और इसका निर्माण निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां करेंगी, जिसके बाद कर्मचारियों ने पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था.

NATIONAL : हरसंभव मदद में जुटे अफसर… सत्य निकेतन हादसे पर छलका PM मोदी का दर्द, पीड़ितों का बढ़ाया हौसला

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दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर PM मोदी ने दुख जताया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए राहत-बचाव कार्य की जानकारी दी।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि घटनास्थल पर अधिकारी राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। हादसे से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

घटना पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। नेताओं ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और राहत-बचाव अभियान तेजी से चलाए जाने की बात कही।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना अत्यंत दुखद है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। संबंधित अधिकारी घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं और प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता की जा रही है।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की दुखद घटना से वह बेहद दुखी हैं। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली में इमारत गिरने से बहुमूल्य जानों का नुकसान बेहद पीड़ादायक है। इस दुख की घड़ी में उनकी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव अभियान जारी है और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने सभी प्रभावित लोगों की सुरक्षा और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के निकट सत्य निकेतन में निजी इमारत गिरने की खबर से वह गहरे दुखी हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बात की, जो स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि बचाव और राहत के सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मलबे में फंसे लोगों की सुरक्षित निकासी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी
इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से हादसे और रेस्क्यू अभियान की विस्तृत जानकारी ली। दिल्ली पुलिस के अनुसार, हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी थी। इमारत में एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका उपयोग पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में किया जा रहा था। घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का कार्य चल रहा था। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

NATIONAL : दिल्ली पीजी हादसा : मलबे से निकाले गए 7 शव, रेस्क्यू डॉग्स और कैमरे से जारी तलाश

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को हुए दर्दनाक हादसे में मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांच मंजिला गिरी इमारत के मलबे में से अब तक 7 शव को निकाला गया है। इस हादसे में 12 लोगों को बचाया गया है, जबकि 5 लोग गंभीर घायल हैं, जिन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है। रेस्क्यू डॉग और कैमरे के सहायता से लोगों की तलाश की जा रही है।

कैसे हुआ ये हादसा
हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। करीब 40 साल पुरानी इमारत में बेसमेंट से जुड़ा काम चल रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां करीब सात दिनों से तोड़फोड़ और खुदाई की जा रही थी। बेसमेंट पहले से कमजोर था और उसमें पानी भी जमा था। इसी दौरान एक पिलर खिसकने से पूरी इमारत भरभराकर गिर गई।

पास की इमारत भी खाली कराई
हादसे के बाद आसपास की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई। पास की एक दूसरी इमारत में दरारें मिलने के बाद उसे खाली करा लिया गया। बचाव दल ने बताया कि मलबा हटाते समय इस इमारत के गिरने का खतरा है। इसे सहारा देने के लिए सपोर्टिंग पिलर लगाए जा रहे हैं, ताकि रेस्क्यू अभियान सुरक्षित तरीके से चलाया जा सके।

मालिक पर FIR, जांच के आदेश
पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही की धाराओं में FIR दर्ज की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। मेयर प्रवेश वाही ने अवैध निर्माण पर सख्ती की बात कही है। MCD ने सत्य निकेतन की जर्जर और खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

छात्रों का प्रमुख इलाका है सत्य निकेतन
सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। आसपास वेंकटेश्वर, आर्यभट्ट, मोतीलाल नेहरू और मैत्रेयी कॉलेज हैं। इसी कारण इलाके में दिनभर छात्रों की आवाजाही रहती है।

तीन साल में 1133 इमारत हादसे
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच दिल्ली में इमारत गिरने की 1133 घटनाएं हुईं। इनमें 98 लोगों की जान गई। दिल्ली फायर विभाग को रविवार दोपहर 1:33 बजे हादसे की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद बचाव दल रवाना किया गया। दमकल, NDRF और अन्य टीमों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

WORLD : ‘नफरत नहीं, शुद्ध सात्विक प्रेम है हमारे काम का आधार’; लंदन में बोले मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को उन दावों को खारिज किया कि गहरी नफरत उनकी गतिविधियों का आधार है। उन्होंने कहा कि शुद्ध सात्विक प्रेम ही संगठन के काम का आधार है और 100 वर्षों बाद भी यह भावना कमजोर नहीं पड़ी है। आपको स्वयंसेवकों के व्यवहार और संघ के माहौल में वही शुद्ध सात्विक प्रेम देखने को मिलेगा।

लंदन में एक संवाद के दौरान भागवत ने कहा कि अपनापन यानी एकता व जुड़ाव की भावना ही हिंदू सोच और आरएसएस के नजरिये का केंद्र बिंदू है।

उन्होंने कहा कि अपनेपन की भावना व्यक्ति से शुरू होकर परिवार, समुदाय, समाज और पूरी मानवता तक फैलती है। इसलिए हिंदू सिर्फ एक व्यक्ति नहीं है; वह परिवार, अपना समुदाय, अपना समाज और मानवता भी है। हम सभी जानते हैं कि हिंदू प्रकृति से प्रेम करते हैं। वे न सिर्फ प्रकृति की पूजा करते हैं, बल्कि उससे प्रेम भी करते हैं।


दुनियाभर में चल रहे संघर्षों, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों और डिजिटल युग के असर के बीच हिंदू सभ्यता दुनिया को क्या दे सकती है, इस सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि हिंदू सोच इस विचार पर आधारित है कि दुनिया में दिख रही विविधता के बावजूद असल में अस्तित्व एक ही है।

उन्होंने कहा, एक को अनेक बनना होता है; इसलिए अनेक का सम्मान किया जाता है। इसलिए अनेक के साथ व्यवहार करें, क्योंकि यह व्यावहारिक है; आपको प्रकृति के अनुसार चलना होगा। लेकिन उनसे निपटते समय, आपको उन्हें अलग-अलग चीजों के रूप में नहीं देखना चाहिए। हम एक हैं। सब एक हैं।

उन्होंने दलील दी कि मानवता को आपस में जुड़ा हुआ मानने से झगड़ों को सुलझाने में मदद मिल सकती है, क्योंकि इससे प्रतियोगिता व दुश्मनी के बजाय दोनों की जीत वाले समाधानों को बढ़ावा मिलता है। भागवत ने मानव विकास को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा और कहा कि तरक्की प्रकृति की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। विकास और तरक्की को एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए।

पर्यावरण के अनुकूल समाधान का विचार इसी संतुलन को दिखाता है, क्योंकि समाधानों में इंसानी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी होनी चाहिए। वर्तमान परिस्थिति में एक नया मॉडल बनाना होगा। इसके अलावा कोई और समाधान नहीं है।

ब्रिटिश हिंदुओं की निष्ठा अपनी कर्मभूमि के प्रति
भागवत ने कहा कि हिंदुत्व का नजरिया साफ है कि आपकी निष्ठा वहीं होती है जहां आपकी कर्मभूमि होती है और ब्रिटिश हिंदुओं के लिए वह ब्रिटेन है। हिंदू समुदाय की जन्मभूमि और कर्मभूमि के बीच निष्ठा के बंटने के डर के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब में संघ प्रमुख ने कहा, असल में कोई टकराव नहीं है। अगर ब्रिटिश हिंदू अच्छे, पक्के और सच्चे हिंदू हैं, तो ब्रिटेन और भारत के हितों के बीच कभी कोई टकराव नहीं होगा।

उन्होंने कहा, अगर ऐसा कभी होता भी है, तो जाहिर है कि ब्रिटिश हिंदू ब्रिटेन का ही साथ देंगे। अपवाद हो सकते हैं, लेकिन हिंदुत्व इस मामले में स्पष्ट है।

गुरुद्वारे और मंदिर भी गए थे भागवत
मोहन भागवत ने पिछले हफ्ते लंदन में 1908 में स्थापित ऐतिहासिक खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा साहिब का दौरा किया और सिख समुदाय के साथ सार्थक संवाद किया। उन्होंने लंदन के विलेसेडेन में स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर का भी दौरा किया, वह ऐसे समय मंदिर पहुंचे जब जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था।

NATIONAL : RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- हिंदू केवल धर्म नहीं, सांस्कृतिक पहचान और जीवन को समझने का नजरिया है

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लंदन में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू सभ्यता के मूल तत्व पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द को केवल किसी धर्म या भौगोलिक सीमा में सीमित करके नहीं देखा जा सकता. यह जीवन और दुनिया को समझने का एक सांस्कृतिक नजरिया है. भागवत ने जोर दिया कि विविधता में एकता ही हिंदू संस्कृति का मूल स्वभाव है. एकता के लिए सबको एक जैसा बनाना जरूरी नहीं होता, बल्कि आपसी मतभेदों को मिटाकर सह-अस्तित्व के साथ जीना ही टकरावों का असली समाधान है.

लंदन. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने लंदन में एक सभा को संबोधित करते हुए ‘हिंदू’ शब्द और उसकी सभ्यता के सार को बड़े ही सरल और गहरे अंदाज में समझाया. उन्होंने साफ कहा कि हिंदू को सिर्फ एक मजहब या किसी खास भूगोल की सीमाओं में बांधकर नहीं देखा जा सकता. वास्तव में, हिंदू एक व्यापक सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान है. यह जीवन, अस्तित्व और पूरी दुनिया के साथ हमारे रिश्ते को समझने का एक खास नजरिया है.

लंदन के एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारतीय और हिंदू चिंतन की सबसे बड़ी ताकत यह मानना है कि विविधता और एकता दोनों एक साथ रह सकते हैं. उन्होंने समझाया कि दुनिया में तरह-तरह के लोग, विचार और संस्कृतियां होना बेहद स्वाभाविक है. ये सारे फर्क दरअसल उस एक ही मूल सत्य के अलग-अलग रूप और श्रंगार हैं. भागवत ने जोर देकर कहा कि हमें बाहरी विविधता को स्वीकार करते हुए कभी यह नहीं भूलना चाहिए कि अंदर से हम सब एक हैं.
संघ प्रमुख ने दुनिया में बढ़ते टकरावों पर बात करते हुए कहा कि विवाद तब आसानी से सुलझ जाते हैं, जब इंसान दूसरों को दुश्मन समझना बंद कर देता है. किसी को दबाने, हराने या अपनी सोच थोपने की जगह समाज को मिलकर आगे बढ़ने का रास्ता खोजना चाहिए. उन्होंने कहा कि मूल रूप से इंसान की बुनियादी जरूरतें और मंजिलें एक जैसी हैं, इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि दूसरे को कैसे पछाड़ा जाए, बल्कि यह होना चाहिए कि सब मिलकर साझा लक्ष्यों को कैसे हासिल करें.

NATIONAL : शाह बोले- नक्सलवाद के बाद नशा भी खत्म करेंगे:रेड कॉरिडोर की सोच वालों ने हथियार डाले; नॉर्थईस्ट में 10 हजार युवाओं का आत्मसमर्पण

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केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने रविवार को गोवा में कहा कि सरकार ने नक्सलवाद खत्म कर दिया है। अब नशीले पदार्थों की समस्या से भी उसी तरह निपटा जाएगा।

उन्होंने कहा कि, “नक्सलवाद के बाद नशीले पदार्थों की समस्या से भी उसी तरह निपटेंगे। जिन्होंने तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर की कल्पना की थी, उन्होंने अब अपने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।”

दरअसल, अमित शाह गोवा के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए ये बयान दिया।

कहा- देश नशा मुक्त भारत का समर्थन करेगा, 3 बातें…

3 साल का अभियान: अमित शाह ने कहा- पूरा देश नशा मुक्त भारत के तीन साल के अभियान का समर्थन करेगा। आज आपसे बात करने का उद्देश्य गोवा के पूरे मीडिया से यह अनुरोध करना भी है कि भारत को नशा मुक्त बनाने के इस लक्ष्य को हासिल करने में हमारी मदद करें।

1 करोड़ किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ जब्त: उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 तक कांग्रेस शासन के दौरान, 26 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए थे। जबकि, 2014 और 2026 के बीच, यह आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गया।

1 लाख नशामुक्ती मित्र तैयार किए जाएंगे: गृह मंत्री ने कहा कि अभियान 50 करोड़ नागरिकों तक पहुंचेगा। अभी हाल ही में, प्रधानमंत्री ने एक ही कार्यक्रम में 1 करोड़ युवाओं के साथ बातचीत की। हम 1 लाख ‘नशामुक्ति मित्रों’ को प्रशिक्षित करने जा रहे हैं

पीएम ने कहा था- भारत में ड्रग्स सप्लाई आतंकी साजिश का हिस्सा

पीएम मोदी ने 2 अगस्त को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ लॉन्च किया। उन्होंने कहा था कि भारत में ड्रग्स की सप्लाई दुश्मन देशों की आतंकी साजिश का हिस्सा है।

पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संबोधन में कहा था- दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में धकेलना चाहते हैं। इस साजिश को मिलकर नाकाम करना होगा।

सवालः नार्को-टेररिज्म क्या है?

जवाबः जब ड्रग्स बेचकर कमाए गए पैसे का इस्तेमाल आतंक फैलाने, हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियां चलाने में होता है, तो इसे नार्को-टेररिज्म कहा जाता है।

सवालः नशा फैलाने में पाकिस्तान का नाम क्यों आता है?

जवाबः पंजाब और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान सीमा से हेरोइन और दूसरे नशे की तस्करी बड़ी चुनौती है। ड्रोन और सीमा पार नेटवर्क के जरिए नशा भेजा जाता है। हालांकि, भारत में आने वाले कुल ड्रग्स में पाकिस्तान का कितना हिस्सा है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

सवालः नशे से आतंकवाद को कैसे फायदा होता है?

जवाबः ड्रग्स बेचकर मिलने वाले पैसे से आतंकी संगठन हथियार खरीदते हैं, नए लोगों को जोड़ते हैं और अपने नेटवर्क को चलाते हैं। इसलिए सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी मानती है।

सवालः भारत तस्करों के निशाने पर क्यों है?

जवाबः भारत दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध ड्रग्स उत्पादन क्षेत्रों गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान) और गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के बीच स्थित है।

इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर तस्कर भारत का इस्तेमाल ड्रग्स को दूसरे देशों तक पहुंचाने के रास्ते (ट्रांजिट रूट) और बड़े बाजार दोनों के रूप में करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि भारत ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क के निशाने पर रहता है।


NATIONAL : पहले प्यार, फिर कोर्ट मैरिज और दो महीने बाद हत्या… पति ने पत्नी के सिर पर रॉड मारकर ली जान

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कानपुर देहात में दो महीने पहले हुई लव मैरिज का दर्दनाक अंत हो गया. पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान गजेंद्र संखवार ने पत्नी सपना उर्फ आसमा के सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया. गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. वारदात के बाद आरोपी ने खुद पुलिस को फोन कर हत्या की सूचना दी.

कानपुर देहात में घरेलू विवाद के बाद पति ने पत्नी के सिर पर रॉड मारकर हत्या कर दी. अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र में RTO कार्यालय के पास किराए के मकान में रहने वाली महिला पर उसके पति ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. गंभीर चोट लगने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

जानकारी के मुताबिक, मृतका की पहचान 29 वर्षीय सपना उर्फ आसमा के रूप में हुई है. वह डेरापुर थाना क्षेत्र के डुडौली गांव की रहने वाली थी. सपना अपने 30 वर्षीय पति गजेंद्र संखवार के साथ अकबरपुर में रह रही थी. गजेंद्र मिस्त्री का काम करता है.

पुलिस के मुताबिक, रविवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे सपना मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी. इसी दौरान किसी बात को लेकर पति-पत्नी में कहासुनी शुरू हो गई. देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और गजेंद्र ने लोहे की रॉड उठाकर सपना के सिर पर हमला कर दिया.

हमले में सपना के सिर पर गंभीर चोट आई और वह लहूलुहान हालत में जमीन पर गिर पड़ी. घटना के बाद गजेंद्र ने खुद पुलिस को फोन किया और बताया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा.

पुलिस ने सपना को अकबरपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की.

वारदात के बाद आरोपी पति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उससे घटना को लेकर पूछताछ की जा रही है. शुरुआती जानकारी में पुलिस के सामने घरेलू विवाद को हत्या की वजह बताया गया है.

सपना और गजेंद्र ने करीब दो महीने पहले ही माती कोर्ट में कोर्ट मैरिज की थी. दोनों ने परिवार से अलग अपना घर बसाया था. शादी को अभी ज्यादा वक्त भी नहीं बीता था कि मामूली विवाद ने रिश्ते का दर्दनाक अंत कर दिया.

जिस रिश्ते की शुरुआत साथ जीवन बिताने के फैसले से हुई थी, वह महज दो महीने बाद हत्या की वारदात में बदल गया. घटना के बाद इलाके में भी सनसनी फैल गई है. पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है.

कानपुर देहात के अपर पुलिस अधीक्षक आलोक प्रसाद ने बताया कि दोनों ने करीब दो महीने पहले कोर्ट मैरिज की थी. घरेलू विवाद के चलते गजेंद्र ने रॉड से हमला कर पत्नी की हत्या कर दी. मृतका का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई जा रही है.

पुलिस आरोपी पति को हिरासत में लेकर घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है. विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ था और हमले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं, इसे लेकर पूछताछ की जा रही है.

फिलहाल पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. आरोपी द्वारा खुद पुलिस को सूचना दिए जाने की बात भी जांच का हिस्सा है.

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