Thursday, October 1, 2026
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NATIONAL : टीएमसी सुप्रीमो पर शुभेंदु अधिकारी का वार – ममता बनर्जी के ‘एक हाथ में जमात, दूसरे में दिमागी नक्सल’

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक के लिए ममता बनर्जी के प्रस्तावित दिल्ली दौरे को लेकर उन पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ‘एक हाथ में जमात और दूसरे में दिमागी नक्सल’ को लेकर आगे बढ़ रही हैं. बंगाल के चीफ मिनिस्टर ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली जाकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेताओं के मिलकर साथ ‘नयी साजिश’ रचने वाली हैं.

‘दिल्ली पुलिस और आईबी ममता बनर्जी पर रखे नजर’
शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली पुलिस और खुफिया ब्यूरो से ममता बनर्जी की गतिविधियों पर नजर रखने का आग्रह किया. अधिकारी का यह बयान निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्षी दलों के बीच बढ़ते समन्वय के बीच आया है, जिनमें तृणमूल कांग्रेस और माकपा शामिल है.

टीएमसी-सीपीएम ने तेज कर दिया है चुनाव आयुक्त पर हमला
तृणमूल कांग्रेस और माकपा समेत विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है. ममता बनर्जी ने माकपा महासचिव एमए बेबी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बातचीत की है.

‘इंडिया’ की बैठक के लिए दिल्ली जा रहीं ममता
ममता बनर्जी बुधवार (30 सितंबर) को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की बैठक में शामिल हो सकती हैं, जिसमें विपक्ष की रणनीति पर चर्चा होगी.

‘नयी साजिश’ रचने के लिए ममता का दिल्ली दौरा
वाम दलों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री के संपर्क को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि उनका दिल्ली दौरा माकपा नेताओं के साथ मिलकर ‘नयी साजिश’ रचने के उद्देश्य से है. शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित जनता दरबार कार्यक्रम से इतर कहा कि लोग पहले भी दिल्ली गये हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी कथित तौर पर ‘देशविरोधी ताकतों’ के साथ जुड़ रही हैं.

बंगाल के सीएम ने कहा- आप (ममता) तथाकथित दिमागी नक्सलियों के साथ योजना बनाने जा रही हैं. हर कोई जानता है कि ‘आजादी’ के नारे लगाने वाला व्यक्ति क्या कर सकता है. मैं दिल्ली पुलिस और आईबी से अनुरोध करूंगा कि वे कड़ी नजर रखें, उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखें और सुनिश्चित करें कि किसी देशविरोधी ताकत के साथ कोई बैठक न हो.

NATIONAL : UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुए 7 नए प्लेस, अब दुनिया देखेगी भारत की खूबसूरती

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यूनेस्को ने हाल ही में भारत के 7 नए स्थलों को अपनी टेंटेटिव लिस्ट ऑफ वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किया है. इनमें महाराष्ट्र के डेक्कन ट्रैप्स, कर्नाटक के सेंट मेरीज़ द्वीप समूह, मेघालय की गुफाएं, नागालैंड के नागा हिल ओफियोलाइट, आंध्र प्रदेश के एरा माट्टी डिब्बालु और तिरुमाला हिल्स, केरल के वारकला क्लिफ्स शामिल हैं. ये स्थल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अहम हैं.

भारत में प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक खूबसूरती हर तरफ है. देश में कई पर्यटन स्थल हैं. अब इन पर्यटन स्थल को वैश्विक पहचान मिलेगी और टूरिज्म में भी बढ़त होगी. यूनेस्को ने हाल ही में देश के 7 अद्भुत प्राकृतिक स्थलों को अपनी ‘टेंटेटिव लिस्ट ऑफ वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स’ में शामिल किया है. भारत के लिए यह गर्व करने का मौका है. क्योंकि इसी के बाद अब टेंटेटिव लिस्ट ऑफ वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में भारत के 62 से 69 स्थल शामिल हो गए हैं.

दरअसल, यूनेस्को की प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी स्थल को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल करने से पहले इसे टेंटेटिव लिस्ट (संभावित लिस्ट) में होना जरूरी है. इसी के बाद वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया जाता है. इसलिए टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना पहला और अहम कदम माना जाता है. अब भारत के 69 प्लेस टेंटेटिव लिस्ट का हिस्सा हैं, जिनमें 49 सांस्कृतिक स्थल हैं, 17 प्राकृतिक धरोहर स्थल और बाकी 3 मिश्रित श्रेणी में आते हैं. चलिए इन 7 स्थलों के बारे में जानते हैं-

कौन-कौन से प्लेस किए गए शामिल?
पंचगनी और महाबलेश्वर के डेक्कन ट्रैप्स (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के पंचगनी और महाबलेश्वर में बने डेक्कन ट्रैप्स बहुत पुराने ज्वालामुखी से निकले लावा से बने हैं. लगभग 6.5 करोड़ साल पहले यहां बड़े-बड़े ज्वालामुखी फटे थे. उस समय निकला लावा जमकर परतों वाली चट्टान में बदल गया. अब यह स्थल यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों का हिस्सा हैं. यह सबसे बड़ी ज्वालामुखी संरचनाओं में से एक है. ये जगहें कोयना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के अंदर आती हैं, जो पहले से ही यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में है.

सेंट मेरीज़ आइलैंड क्लस्टर, कर्नाटक
कर्नाटक के तट पर मौजूद यह द्वीप समूह अपनी अनोखी कॉलम्नर बेसाल्टिक चट्टानों के लिए मशहूर है. ये चट्टानें लगभग 8.5 करोड़ साल पुरानी हैं. माना जाता है कि ये तब बनी थीं जब मेडागास्कर भारत से अलग हो रहा था. यहां की विरासत टूरिस्ट को पृथ्वी के इतिहास की एक अद्भुत झलक दिखाती है.

मेघालय की गुफाएं
मेघालय की अद्भुत गुफाएं, खासकर माव्मलूह गुफा, पूरी दुनिया में मशहूर हैं. यह गुफा मेघालयन युग (होलोसीन काल का हिस्सा) की पहचान के लिए वैश्विक मानक मानी जाती है.

नागा हिल ओफियोलाइट, नागालैंड
नागालैंड में स्थित ये पहाड़ ओफियोलाइट चट्टानों के लिए मशहूर हैं. ये पहाड़ तब बने थे जब महासागरीय क्रस्ट महाद्वीपीय प्लेटों पर उठ गया था. ये दरअसल समुद्र की सतह के नीचे बनी चट्टानें हैं, जो बाद में जमीन की सतह पर ऊपर उठ आईं. इनसे हमें धरती की प्लेटों की हलचल (tectonic processes) और समुद्र के बीच बनने वाली पर्वतमालाओं (mid-ocean ridge) को समझने में बहुत मदद मिलती है.

एरा माट्टी डिब्बालु (लाल बालू की टीले), आंध्र प्रदेश
विशाखापट्टनम के पास पाई जाने वाली ये खूबसूरत लाल बालू की संरचनाएं बहुत खास हैं. ये पुराने समय के जलवायु बदलाव और तटीय भू-आकृति (समुद्र किनारे की बनावट) के बारे में बताती हैं. इनसे धरती के जलवायु इतिहास और उसके बदलते स्वरूप को समझा जा सकता है. यह फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन जगह है.

तिरुमाला हिल्स, आंध्र प्रदेश
यह स्थल बहुत अहम है क्योंकि यहां एपार्चियन अनकॉनफॉर्मिटी और फेमस सिलाथोरनम (प्राकृतिक मेहराब) मौजूद हैं. यह जगह धरती के 1.5 अरब साल पुराने इतिहास को सामने रखती है और भूविज्ञान के लिए बेहद खास मानी जाती है.

वर्कला क्लिफ्स, केरल
केरल के समुद्र तट पर बने ये सुंदर चट्टानी किनारे बहुत खास हैं. यहां वारकली संरचना (मियो-प्लायोसीन काल की) दिखाई देती है. साथ ही यहां प्राकृतिक झरने और समुद्र की लहरों से बनी अनोखी आकृतियां मिलती हैं. यह जगह वैज्ञानिकों के लिए भी अहम है और टूरिस्ट के लिए भी आकर्षक है

NATIONAL : असम में NIA की बड़ी कार्रवाई, जिहादी गतिविधियों के आरोप में 6 लोग गिरफ्तार

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एनआईए ने असम के बारपेटा जिले में कथित जिहादी गतिविधियों और युवाओं को कट्टरपंथी संगठनों में शामिल करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

असम के बारपेटा जिले में कथित ‘जिहादी’ गतिविधियों और युवाओं को कट्टरपंथी संगठनों में शामिल करने के लिए प्रभावित करने के आरोप में एनआइए ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

एनआइए ने सोमवार रात होवली, बारपेटा रोड और सोरभोग थाना क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान सोरभोग क्षेत्र से तीन, बारपेटा रोड से दो और होवली से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार लोगों की पहचान सोरभोग के फारुक अब्दुल्ला, जाकिर हुसैन और चांदबर अली, बारपेटा रोड के मुस्तफिजुर रहमान, निशुका के याकूब अली और होवली के जाशिहाटीपारा गांव निवासी रकीबुल इस्लाम के रूप में हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपितों के पास से दस्तावेजों के अलावा लैपटाप और मोबाइल फोन समेत कई इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए गए। एनआइए का आरोप है कि इन लोगों के प्रतिबंधित जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के संगठन इमाम महमूदेर काफिला (आइएमके) से सीमा पार संबंध हैं।

NATIONAL : महाराष्ट्र में बेबी फूड पर FDA सख्त, पैकेजिंग के नियम भी बदले

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महाराष्ट्र FDA ने बेबी फूड के प्रचार और पैकेजिंग के नियम सख्त किए हैं. पैकेट पर ‘Mother’s Milk Is Best’ संदेश जरूरी होगा और नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बेबी फूड को लेकर नियम और सख्त कर दिए हैं. FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने साफ कहा है कि ऐसे प्रोडक्ट्स के प्रचार, पैकेजिंग और बिक्री में नियमों का पालन करना जरूरी है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. नए निर्देशों के तहत बेबी फूड के पैकेट पर ‘Mother’s Milk Is Best’ यानी ‘मां का दूध सर्वोत्तम है’ का संदेश देना जरूरी होगा.

इसका मकसद यह साफ करना है कि शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी प्रोडक्ट को मां के दूध से बेहतर बताकर प्रचारित नहीं किया जा सकता. FDA के मुताबिक, शिशु दूध के विकल्प, शिशु आहार और फीडिंग बोतलों से जुड़े विज्ञापन पर IMS Act, 1992 के तहत कई तरह की पाबंदियां हैं.

टीवी से सोशल मीडिया तक प्रचार पर रोक
इन प्रोडक्ट्स का प्रचार किसी भी माध्यम से नहीं किया जा सकता. टीवी, प्रिंट मीडिया, आउटडोर विज्ञापन, वेबसाइट, सर्च विज्ञापन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी नियम लागू होंगे. सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होने वाले प्रचार पर भी नजर रहेगी. जरूरी चेतावनी और जानकारी के बिना ऐसे प्रोडक्ट्स का प्रमोशन नहीं किया जा सकता.

कंपनियां अपने प्रोडक्ट को मां के दूध के बराबर या उससे बेहतर बताकर भी प्रचार नहीं कर सकतीं. इसके अलावा मुफ्त सैंपल, गिफ्ट, कूपन या किसी तरह का लालच देकर इन प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने पर भी रोक है.

नियमों के तहत कंपनियां अपने प्रोडक्ट के प्रचार के लिए गर्भवती महिलाओं या माताओं से किसी भी तरह का संपर्क नहीं कर सकतीं. FDA का कहना है कि ऐसे मामलों में IMS Act, 1992 और Infant Nutrition Regulations, 2020 का पालन जरूरी है. FDA को नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले सामने आने के बाद यह सख्ती की जा रही है.

डॉक्टर और अस्पताल भी नहीं कर सकेंगे प्रचार
FDA ने डॉक्टरों और अस्पतालों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं. किसी डॉक्टर, अस्पताल या मेडिकल एसोसिएशन का इस्तेमाल इन प्रोडक्ट्स के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता.

IMS Act की धारा 9 के तहत निर्माता या वितरक किसी स्वास्थ्यकर्मी को आर्थिक फायदा या गिफ्ट नहीं दे सकते. सेमिनार, बैठक, कॉन्फ्रेंस, शैक्षणिक कार्यक्रम, रिसर्च, फेलोशिप या स्पॉन्सरशिप के नाम पर भी इस तरह का आर्थिक लाभ देने पर रोक है.

CME और CPD जैसे कार्यक्रम भी इन नियमों के दायरे में आएंगे. ऐसे कार्यक्रमों में स्टॉल, बैनर, सब-सेशन या वैज्ञानिक प्रस्तुतियों के जरिए भी इन प्रोडक्ट्स का प्रचार नहीं किया जा सकता.

पैकेट पर हर पोषक तत्व की जानकारी जरूरी
बेबी फूड की पैकेजिंग को लेकर भी FDA ने नियमों पर जोर दिया है. प्रोडक्ट के पैकेट, डिब्बे या बोतल पर उसमें मौजूद सामग्री और पोषक तत्वों की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए.

इसमें ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स समेत दूसरे पोषक तत्वों की जानकारी शामिल है. इसके अलावा प्रिजर्वेटिव, रंग, फ्लेवरिंग एजेंट और दूसरी मिलाई गई सामग्री का विवरण भी देना होगा.

‘शुगर फ्री’ लिखा है तो नियमों का पालन जरूरी
FDA ने चीनी को लेकर भी नियमों का पालन करने की बात कही है. कुल कार्बोहाइड्रेट में सुक्रोस या फ्रुक्टोज की मात्रा तय सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए. दी गई जानकारी के मुताबिक यह सीमा 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए.

अगर पैकेट पर ‘No Added Sugar’ या ‘Sugar Free’ लिखा है तो उसमें वास्तव में अतिरिक्त चीनी नहीं होनी चाहिए. पैकेज पर दी गई जानकारी भी सही और स्पष्ट होनी जरूरी है.

FDA की कार्रवाई सिर्फ निर्माता तक सीमित नहीं रहेगी. जांच में यह भी देखा जाएगा कि प्रोडक्ट के लिए कच्चा माल कहां से आया, इसे किसने बनाया, इसकी मार्केटिंग कौन कर रहा है, इसे कहां स्टोर किया गया और किन अस्पतालों, डॉक्टरों या मेडिकल स्टोर पर यह उपलब्ध है. जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां कार्रवाई की जाएगी.

IAP और IMA जैसी संस्थाओं के साथ होगी बैठक
FDA के निर्देश स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग को भी भेजे गए हैं. आने वाले समय में इंडियन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और अस्पतालों से जुड़ी एसोसिएशनों के साथ बैठक की जाएगी. इन संस्थाओं को भी नियमों के पालन और जागरूकता अभियान में शामिल किया जाएगा.

FDA के मुताबिक, बेबी फूड से जुड़े कारोबार में FSSAI के नियमों के साथ IMS Act का पालन भी जरूरी है. रजिस्ट्रेशन, मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और बिक्री से जुड़े सभी नियमों का पालन करना होगा.

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नियमों के उल्लंघन पर FSSAI Act के तहत कार्रवाई हो सकती है. भ्रामक विज्ञापन के मामले में 10 लाख रुपये तक, बिना लाइसेंस या संबंधित उल्लंघनों में 5 लाख रुपये तक और मिसब्रांडिंग के मामलों में 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

अगर कोई प्रोडक्ट असुरक्षित पाया जाता है तो कानून के तहत गंभीर सजा का भी प्रावधान है. शिकायत के लिए संबंधित पोर्टल और टोल-फ्री नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है.

NATIONAL : देश में पहली बार झरनों की गिनती: 10 राज्यों में 14,468 जलस्रोत मिले, सैकड़ों पर मंडरा रहा खतरा!

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देश में पहली बार हो रहे झरना सर्वेक्षण के दूसरे भाग में 10 राज्यों के 14,468 झरनों की पहचान हुई, जिसमें मणिपुर और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं। रिपोर्ट ने खतरे में पड़े झरनों की मैपिंग, संरक्षण और पुनर्जीवन पर जोर दिया है, क्योंकि करीब 20 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से झरनों के पानी पर निर्भर हैं।

नई दिल्ली: जल शक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में पहली बार किए जा रहे झरना सर्वेक्षण के दूसरे भाग में 10 राज्यों के 14,468 झरनों की गणना की गई है। इनमें मणिपुर और महाराष्ट्र के झरनों की संख्या सबसे अधिक है। यह रिपोर्ट 25 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित नौवें ‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह’ (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू)-2026 के समापन समारोह में जारी की गई। सर्वेक्षण में मणिपुर में 3,941, महाराष्ट्र में 3,652, ओडिशा में 1,957, पश्चिम बंगाल में 1,686, गोवा में 1,196, त्रिपुरा में 1,049, असम में 792, तेलंगाना में 148, आंध्र प्रदेश में 34 और राजस्थान में 13 झरनों की पहचान की गई।

कमजोर झरनों की पहचान से संरक्षण तक, रिपोर्ट ने सुझाए ठोस कदम
‘फर्स्ट सेंसस ऑफ स्प्रिंग्स’ (खंड-दो, भाग-दो)’ नामक इस रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कमजोर और गंभीर स्थिति वाले झरनों की पहचान के लिए व्यवस्थित मानचित्रण करने, बुनियादी ढांचा विकास के दौरान इनका संरक्षण सुनिश्चित करने और झरना क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत बताई गई है।

महाराष्ट्र में 3,652 झरने, 265 पर मंडरा रहा खतरा
इससे पहले खंड-दो की एक रिपोर्ट, जिसमें बिहार, कर्नाटक, केरलम, लद्दाख, सिक्किम और तमिलनाडु को शामिल किया गया था, 2026 में ‘भारत जल दिवस’ पर जारी की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में 2,629 स्थायी झरने, 909 मौसमी झरने और 114 सूख चुके झरने हैं। राज्य के कुल 3,652 झरनों में से 3,612 ग्रामीण क्षेत्रों में और 40 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें करीब 86.5 प्रतिशत झरने सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं, जबकि 13.5 प्रतिशत निजी स्वामित्व वाले हैं। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र में 265 यानी 7.6 प्रतिशत झरने खतरे का सामना कर रहे हैं।

मणिपुर में सर्वेक्षण किए गए 3,941 झरनों में से 3,419 बारहमासी, 457 मौसमी और 65 सूख चुके झरने हैं। इस पूर्वोत्तर राज्य में 91.4 प्रतिशत झरने सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं। यहां के 1,336 झरने खतरे का सामना कर रहे हैं। राज्य में 3,127 झरनों का इस्तेमाल स्थानीय निवासी, 634 का इस्तेमाल गैर-निवासी और 113 का इस्तेमाल जंगली जानवर करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में कुल 1,957 झरने हैं, जिनमें 1,568 बारहमासी, 315 मौसमी और 74 सूखे चुके झरने शामिल हैं। इनमें करीब 96 प्रतिशत झरने सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं और 99.2 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। यहां के 295 यानी 15.7 प्रतिशत झरने खतरे में हैं।
इसी तरह, पश्चिम बंगाल में कुल 1,686 झरने हैं, जिनमें से 1,568 ग्रामीण क्षेत्रों और 118 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें दार्जिलिंग में 1,200 और कलिम्पोंग में 427 झरने हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन जिलों के कई ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए झरने पीने के पानी का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
गोवा के 1,196 झरनों में से 1,105 बारहमासी, 66 मौसमी और 25 सूखे चुके झरने हैं। इनमें से 662 सार्वजनिक स्वामित्व वाले और 509 निजी स्वामित्व वाले हैं। गोवा के 61 यानी 5.2 प्रतिशत झरनों पर खतरा मंडरा रहा है।
त्रिपुरा में 661 बारहमासी, 378 मौसमी और 10 सूखे चुके झरने हैं। राज्य के सभी ऐसे जलस्रोत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। सबसे अधिक 398 झरने धलाई जिले में हैं, इसके बाद उत्तर त्रिपुरा में 238 और खोवाई में 205 दर्ज किए गए।

असम में कुल 792 झरने दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 587 ग्रामीण और 205 शहरी क्षेत्रों में हैं। इनमें 662 बारहमासी, 127 मौसमी और तीन सूखे चुके झरने हैं।
तेलंगाना में 148 झरने और राजस्थान में 13 झरने दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के 13 झरनों में से 10 ग्रामीण क्षेत्रों में और तीन शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें आठ बारहमासी और पांच मौसमी झरने हैं। ये सभी 13 झरने सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं।
रिपोर्ट में जल सुरक्षा के लिए हिमालयी क्षेत्र में झरनों की पहचान और पुनर्जीवन से संबंधित नीति आयोग के कार्य समूह की रिपोर्ट (वर्ष 2018) का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश की करीब 15 प्रतिशत आबादी (लगभग 20 करोड़ लोग) अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से झरनों के पानी पर निर्भर है।

NATIONAL : SIR पर INDIA ब्लॉक की बैठक आज, AAP-DMK ने बनाई दूरी, अखिलेश भी नहीं होंगे शामिल

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30 सितंबर यानी आज इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक होने वाली है, जो एक अलग वजह से चर्चा में है. जब साल 2023 में बिहार की राजधानी पटना में इसकी पहली बैठक हुई थी, तब कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU समेत देश की कई विपक्षी पार्टियां शामिल हुईं थीं, लेकिन इस बार की बैठक में इसमें से कई पार्टियां ऐसी हैं, जो शामिल नहीं होंगी. आम आदमी पार्टी भी उन्हीं में से एक है. सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी खुद को इंडिया ब्लॉक से अलग कर चुकी है, क्योंकि कांग्रेस उसे बीजेपी की B-टीम बता चुकी है, इसलिए AAP को न्योता ही नहीं दिया गया.

वहीं, डीएमके और बीजेपी की दूरी देखते हुए कांग्रेस उसपर मेहरबान हुई और उसको वोट चोरी के मसले पर इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने का न्योता दिया, लेकिन डीएमके ने ये कहकर आने से मना कर दिया कि जब कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके को छोड़ विजय के साथ जाने का फैसला किया, तभी डीएमके ने इंडिया ब्लॉक से नाता तोड़ लिया. साथ ही संसद के दोनों सदनों में भी इंडिया ब्लॉक अलग बैठने की मांग रख दी.

DMK प्रवक्ता ने क्या कहा?
डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि कांग्रेस से मतभेदों के कारण कई पार्टियां बैठक में शामिल होने से हिचकिचा रही थीं. हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी वैचारिक रूप से एकजुट है और भारतीय जनता पार्टी का विरोध करने के उद्देश्य को साझा करती है.

अखिलेश क्यों नहीं होंगे बैठक में शामिल?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि पार्टी ने लखनऊ में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन बुलाया है. इसके अलावा वह राज्यसभा चुनाव नामांकन मे भी मौजूद रहेंगे.उनके बदले पार्टी की ओर से बैठक में सांसद हरेंद्र मलिक और रामपुर से सपा सांसद मौलाना मुहिबिल्लाह नदवी शामिल होंगे. सपा के ये दोनों सांसद बैठक में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे.

हालांकि सूत्रों का कहना है कि इसका कारण आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए समाजवादी पार्टी पर दबाव डाल रही है.

कांग्रेस ने यह भी कहा है कि वह एक सम्मानजनक समझौता चाहती है और बातचीत विफल होने पर अकेले चुनाव लड़ने का संकेत भी दिया है. वहीं, दूसरी ओर सपा ने संकेत दिया कि वह कठोर सौदेबाजी करने का इरादा रखता है और किसी भी प्रकार की दबाव की रणनीति के आगे नहीं झुकेगा.

बैठक में कौन शामिल होगा?
इंडिया (I.N.D.I.A.) ब्लॉक की यह बैठक SIR और चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई है. इस बैठक में कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी के भी इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद है.

आरजेडी की ओर से तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे.

NATIONAL : बस गैंगरेप केस में अहम सबूत बने सीमन और बाल के नमूने, 398 पन्नों की चार्जशीट

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ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही स्लीपर बस में किशोरी से गैंगरेप केस में पुलिस ने 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। बस से मिले सीमन और बाल के जैविक नमूने आरोपियों के खिलाफ मुख्य सबूत बने हैं।

ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही स्लीपर बस में 17 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी अदालत में बस चालक कुलदीप और परिचालक संदीप के खिलाफ 398 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 70(2) (सामूहिक दुष्कर्म), 137 (अपहरण) और पॉक्सो की धारा के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र में 50 सरकारी गवाहों के बयान, चिकित्सीय और फॉरेंसिक रिपोर्ट समेत जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

सीमन और बाल के नमूने बने अहम सबूत
जांच में बस से मिले सीमन (वीर्य) और बाल के नमूनों समेत जैविक साक्ष्यों को आरोपियों के खिलाफ अहम सबूत माना गया है। अदालत चार्जशीट पर संज्ञान ले चुकी है। अदालत के इस कदम के साथ ही दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

ड्राइवर और कंडक्टर पर आरोप
घटना अगस्त में हुई थी। आरोप है कि सफर के दौरान बस चालक और परिचालक ने 17 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। करीब 47 किलोमीटर चलने के बाद उसे आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पास बस से उतार दिया गया था।

सीसीटीवी फुटेज की मदद से खोज निकाला
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से बस को तिमारपुर की पार्किंग में खोज निकाला और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। बस को जांच के लिए जब्त किया गया था। उससे मिले जैविक नमूने फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजे गए। इनमें सीमन और बाल के नमूने आरोपियों के खिलाफ अहम सबूत बने।

बस पर लंबित थे 11 चालान
जांच में बस से जुड़े कई सुरक्षा नियमों पर भी सवाल उठे हैं। पुलिस को बस के खिलाफ 11 लंबित चालान मिले, जिनमें से सात केवल जुलाई में ही जारी हुए थे। इनमें गति सीमा और परमिट संबंधी उल्लंघन शामिल थे।

चालक और परिचालक को नौकरी देने से पहले पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था। बस का सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था और खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगे थे, जिससे बाहर से अंदर देखना मुश्किल था। पुलिस यह भी जांच रही है कि बस में जीपीएस या अन्य ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन लगे थे या नहीं और घटना के समय वे काम कर रहे थे या नहीं।

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।

NATIONAL : राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव में SC की एंट्री, रिजल्ट पर लगाई रोक

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव 2026 के नतीजों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. मतदान जारी रहेगा, लेकिन मतपत्र सुरक्षित रखे जाएंगे और फिलहाल रिजल्ट घोषित नहीं होगा.

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी RCA के चुनाव को लेकर मंगलवार (29 सितंबर 2026) को बड़ा अपडेट सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने आज हो रहे चुनाव के नतीजे जारी करने पर रोक लगा दी है. हालांकि, कोर्ट ने मतदान की प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी है.

कोर्ट के आदेश के मुताबिक मतदान के बाद मतपत्रों को सुरक्षित रखा जाएगा और फिलहाल चुनाव का रिजल्ट घोषित नहीं किया जाएगा. नतीजे तब तक जारी नहीं होंगे, जब तक इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से कोई आदेश नहीं आता.

मतदान पर रोक नहीं
RCA चुनाव के लिए मंगलवार को मतदान शुरू हुआ. चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 36 जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि और दो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं. अध्यक्ष पद के लिए धनंजय सिंह खींवसर और बृजकिशोर उपाध्याय के बीच मुकाबला है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी वोटिंग जारी रहेगी. हालांकि, मतदान पूरा होने के बाद मतपत्रों की गिनती या नतीजे की घोषणा फिलहाल नहीं की जाएगी.

पूर्व एडहॉक कमेटी कन्वीनर की याचिका पर सुनवाई

यह मामला RCA की पूर्व एडहॉक कमेटी के कन्वीनर डीडी कुमावत की ओर से दायर याचिका से जुड़ा बताया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब चुनाव की प्रक्रिया तो आगे बढ़ेगी, लेकिन परिणाम अदालत के अगले आदेश तक रोका रहेगा. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 29 सितंबर की सुनवाई से जुड़ी लिस्टिंग और 28 सितंबर को अपलोड किए गए मामलों की जानकारी उपलब्ध है. हालांकि, इस मामले के विस्तृत आदेश की पूरी प्रति उपलब्ध होने पर ही आदेश की सभी कानूनी बातों की पुष्टि की जा सकेगी.

ढाई साल बाद हो रहा है RCA चुनाव

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में करीब ढाई साल बाद चुनाव हो रहा है. इससे पहले एडहॉक कमेटी का कार्यकाल कई बार बढ़ाया गया था. चुनाव के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की गई थी. इस बार अध्यक्ष पद का चुनाव खास तौर पर चर्चा में है. नाम वापसी के बाद मुकाबला धनंजय सिंह खींवसर और बृजकिशोर उपाध्याय के बीच रह गया है.

NATIONAL : सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का बड़ा फैसला, तीन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को SC जज बनाने की सिफारिश

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की है। कॉलेजियम की 28 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में इन नामों पर फैसला लिया गया।

कॉलेजियम ने इन नामों की सिफारिश
कॉलेजियम ने गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की है।

कॉलेजियम ने जारी किया बयान
कॉलेजियम की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर, 2026 को हुई अपनी बैठक में हाई कोर्ट के निम्नलिखित चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किए जाने की सिफारिश की है।

केंद्र सरकार के पास जाएगी सिफारिश
कॉलेजियम की यह सिफारिश केंद्र सरकार के पास जाएगी। केंद्र की मंजूरी के बाद ये तीनों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में पदभार ग्रहण करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल 38 जज का पद सेंक्शन है जिसमें 34 पद पर जस्टिस कार्यरत हैं चार पद खाली है। मौजूदा कॉलेजियम बैठक में तीन पद के लिए सिफारिश की गई है।

BUSINESS : ईरान की मुद्रा अबतक के सबसे निचले स्तर 25 लाख रियाल प्रति डॉलर पर

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ईरान की मुद्रा रियाल मंगलवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। तेहरान में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 25 लाख रियाल से अधिक की दर पर कारोबार किया।

तेहरानः ईरान की मुद्रा रियाल मंगलवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। तेहरान में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 25 लाख रियाल से अधिक की दर पर कारोबार किया। यह गिरावट दो सितंबर को दर्ज पिछले रिकॉर्ड 22 लाख रियाल प्रति डॉलर के स्तर के केवल 27 दिन बाद हुई है। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी मुद्रा की विनिमय दर में लगतार गिरावट आ रही है।

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