सूरत में हमीदा खातून की हत्या के मामले में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बेटे, बहू और समधी ने मिलकर गला घोंटकर महिला की हत्या की और लाश को बोरे में भरकर फेंक दिया गया था. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पढ़ें इस खूनी साजिश की पूरी कहानी.
सूरत के अमरोली इलाके में मौजूद कोसाड आवास कॉलोनी में 11 मार्च 2026 की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सफाई कर्मचारियों को सड़क किनारे एक संदिग्ध बोरा दिखाई दिया. शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि उस बोरे के अंदर क्या हो सकता है. लेकिन उस बोरे में एक खौफनाक राज छिपा था. जब कर्मचारियों ने बोरा खोलकर देखा तो सबके होश उड़ गए. बोरे में एक महिला की लाश थी, जिसके हाथ और पैर रस्सियों से कसकर बांधे गए थे.
लाश देखकर कर्मचारियों ने फौरन पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. तफ्तीश के कुछ ही घंटों में यह साफ हो गया कि यह कोई साधारण मौत नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या का मामला है. सबसे पहले पुलिस ने शिनाख्त की कार्रवाई को अंजाम दिया. पता चला कि मरने वाली महिला हमीदा खातून मंसूरी थी, जो उसी कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती थीं.
दरअसल, हमीदा खातून मंसूरी करीब 57 साल की थीं और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. उनके पति की कुछ साल पहले ही मौत हो चुकी थी, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी. वह अपने दो बेटों वसीम और परवेज के साथ कोसाड आवास में रहती थीं. परिवार में वसीम की पत्नी शबाना भी थी, जो तीन साल पहले इस घर में बहू बनकर आई थी.
पड़ोसियों के अनुसार, शुरुआत में परिवार सामान्य दिखाई देता था, लेकिन धीरे-धीरे घर में झगड़ों की आवाजें बढ़ने लगी थीं. किसी को अंदाजा नहीं था कि इन झगड़ों की जड़ इतनी गहरी है कि एक दिन यही रिश्ते खून के रिश्तों को भी खत्म कर देंगे. पुलिस की जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने हर किसी को हैरान कर दिया. दरअसल हमीदा का छोटा बेटा परवेज मंसूरी भटक चुका था, वो अपनी भाभी शबाना के साथ रिलेशनशिप में था.
बताया गया कि यह रिश्ता तब शुरू हुआ था जब शबाना शादी के बाद कुछ समय के लिए बिहार गई थी. उस दौरान परवेज भी वहां पहुंचा और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. समय के साथ यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि सूरत लौटने के बाद भी दोनों चोरी-छिपे मिलते रहे. जब हमीदा को इस अवैध संबंध की भनक लगी तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया. यहीं से घर में रोजाना झगड़े होने लगे और माहौल धीरे-धीरे जहरीला होता गया.
जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया. पुलिस के मुताबिक, हमीदा खातून का शबाना के पिता मोहम्मद फिरोज आलम के साथ भी एक अजीब तरह का पुराना विवाद था. बताया जाता है कि हमीदा जब अपने मायके गई थीं, तब दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं. हमीदा विधवा थीं और फिरोज की पत्नी भी लंबे समय से बीमार बताई जा रही थी. यही वजह थी कि दोनों के बीच संबंधों की चर्चा परिवार में तनाव का कारण बन गई. इस उलझे हुए रिश्तों के जाल ने घर के माहौल को और भी विस्फोटक बना दिया था.
सिर्फ रिश्तों की उलझन ही नहीं, बल्कि आर्थिक तनाव भी इस परिवार को तोड़ रहा था. पुलिस के मुताबिक, हमीदा अक्सर अपने बेटे और बहू को फिजूलखर्ची के लिए डांटती थीं. उन्हें लगता था कि घर की हालत ठीक नहीं है और ऐसे में खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है. लेकिन यह बात परवेज और शबाना को पसंद नहीं आती थी. छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े धीरे-धीरे गुस्से और नफरत में बदलने लगे. यही नफरत एक दिन इतनी खतरनाक हो गई कि खूनी साजिश तैयार होने लगी.
पुलिस जांच के मुताबिक, 10 मार्च को इस खौफनाक साजिश की शुरुआत हुई. शबाना ने अपने पिता फिरोज आलम से शिकायत करते हुए कहा कि उसकी सास हमीदा उसे लगातार परेशान करती हैं. बताया जाता है कि फिरोज ने फोन पर परवेज से बात की और कहा कि वह हमीदा को रास्ते से हटाने का प्लान बना रहा है. परवेज भी अपनी मां की डांट और विरोध से नाराज था, इसलिए उसने इस योजना के लिए हामी भर दी. इसके बाद तय हुआ कि मौका देखकर हमीदा की हत्या कर दी जाएगी ताकि हमेशा के लिए यह झगड़ा खत्म हो जाए.
अगले दिन सुबह जब दोनों बेटे काम पर निकल गए, तब फिरोज आलम उनके घर पहुंचा. पुलिस के मुताबिक, उसने हमीदा को बातचीत के बहाने कमरे में बुलाया. कुछ देर बाद अचानक उसने कपड़े से उनका गला घोंट दिया. इस दौरान घर में मौजूद शबाना सब कुछ देख रही थी. हमीदा की मौत होते ही शबाना ने तुरंत परवेज को फोन किया. परवेज घर लौटा और तीनों ने मिलकर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. यह सब कुछ इतनी जल्दी और ठंडे दिमाग से किया गया कि पड़ोसियों को जरा भी शक नहीं हुआ.
हत्या के बाद आरोपियों ने हमीदा की लाश को एक प्लास्टिक के बोरे में डाल दिया और रस्सी से कसकर बांध दिया. दोपहर करीब 12:30 बजे फिरोज आलम बोरा कंधे पर उठाकर घर से निकला. एक सीसीटीवी फुटेज में वह साफ दिखाई दिया, जिसमें वह सफेद बोरा लेकर चलता हुआ नजर आ रहा था. उसने घर से करीब 300 से 500 मीटर दूर एक मंदिर के पास उस बोरे को फेंक दिया. इसके बाद वह सीधे रेलवे स्टेशन पहुंचा और बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़ने की कोशिश करने लगा. उसे लगा कि इस तरह वह आसानी से पुलिस से बच जाएगा.
जब पुलिस ने बोरे में मिले शव की पहचान हमीदा खातून के रूप में की, तो जांच की दिशा बदल गई. क्राइम ब्रांच की टीम ने उनके घर की तलाशी ली. वहां उन्हें वही रस्सी और धागा मिला, जिससे लाश को बोरे में बांधा गया था. यही धागा पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बन गया. वैज्ञानिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस को यकीन हो गया कि हत्या की वारदात को घर के ही लोगों ने अंजाम दिया है. इसके बाद पुलिस ने सख्ती से घरवालों से पूछताछ की तो पूरा राज खुलकर सामने आ गया.
जांच पूरी होते ही पुलिस ने परवेज मंसूरी और उसकी भाभी शबाना को सूरत से गिरफ्तार कर लिया. वहीं मुख्य आरोपी मोहम्मद फिरोज आलम हत्या के बाद बिहार भाग गया था. लेकिन सूरत क्राइम ब्रांच ने बिहार एसटीएफ को सूचना दी, जिसके बाद उसे पटना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया. इस सनसनीखेज मामले ने पूरे इलाके को दहला दिया है. लोगों के लिए यह यकीन करना मुश्किल है कि एक बेटा, अपनी मां के खिलाफ ऐसी खौफनाक साजिश का हिस्सा बन सकता है. यह वारदात एक बार फिर साबित करती है कि जब रिश्तों में भरोसा खत्म हो जाता है, तो इंसान किसी भी खतरनाक हद तक जा सकता है.