Tuesday, October 27, 2026
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HEALTH : अस्पतालों में सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर सख्ती, मरीजों की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कदम

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अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और संक्रमण की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर सख्ती की है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) ने ऐसे उपकरणों के पुनः उपयोग से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी दी है। इस मुद्दे ने अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल और मरीजों के अधिकारों पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित किया है।

क्या होते हैं सिंगल-यूज मेडिकल उपकरण?

सिंगल-यूज मेडिकल उपकरण ऐसे चिकित्सा उत्पाद होते हैं जिन्हें निर्माता एक बार इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित करता है। इनका उपयोग मरीजों की जांच, उपचार या किसी चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान किया जा सकता है। उपकरण की प्रकृति के अनुसार इनमें कुछ प्रकार की ट्यूब, कैथेटर, सिरिंज और अन्य चिकित्सा सामग्री शामिल हो सकती हैं।

इन उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर उत्पाद की बनावट, सामग्री और उपयोग अलग होता है। कुछ उपकरणों को सुरक्षित तरीके से साफ करना या स्टरलाइज करना संभव नहीं होता। ऐसे उत्पादों को दोबारा इस्तेमाल करने से मरीजों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है।

दोबारा इस्तेमाल करने से क्या हो सकते हैं खतरे?

चिकित्सा उपकरणों का अनुचित पुनः उपयोग मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। यदि किसी उपकरण की सफाई और संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रिया पर्याप्त न हो, तो बैक्टीरिया या अन्य रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव एक मरीज से दूसरे मरीज तक पहुंच सकते हैं।

इसके अलावा, कुछ उपकरणों की संरचना एक बार इस्तेमाल के बाद प्रभावित हो सकती है। दोबारा इस्तेमाल करने पर उपकरण के ठीक से काम न करने, टूटने या उपचार के दौरान परेशानी पैदा होने की आशंका रहती है।

विशेष रूप से उन मरीजों के लिए संक्रमण का खतरा अधिक गंभीर हो सकता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जो पहले से किसी गंभीर बीमारी का उपचार करा रहे हैं।

अस्पतालों की जिम्मेदारी क्यों बढ़ जाती है?

अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा उपकरणों की खरीद, भंडारण, इस्तेमाल और निपटान की उचित व्यवस्था जरूरी है। स्वास्थ्य संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपकरणों का उपयोग निर्माता के निर्देशों और लागू चिकित्सा नियमों के अनुसार किया जाए।

अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण से संबंधित कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देना, इस्तेमाल किए गए उपकरणों का सुरक्षित निपटान करना और चिकित्सा कचरे के प्रबंधन के नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।

यदि किसी उपकरण को दोबारा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है, तो लागत बचाने या संसाधनों की कमी के कारण उसका पुनः उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना चिकित्सा संस्थानों की अहम जिम्मेदारी है।

मरीज और उनके परिजन किन बातों का ध्यान रखें?

मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले हर उपकरण की तकनीकी जानकारी होना जरूरी नहीं है। फिर भी वे उपचार के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां अपना सकते हैं।

  • चिकित्सा प्रक्रिया से पहले डॉक्टर या नर्स से जरूरी जानकारी लें।
  • जहां लागू हो, पैकिंग की सील और उपकरण की स्थिति पर ध्यान दें।
  • इस्तेमाल किए गए उपकरण को दोबारा इस्तेमाल किए जाने की आशंका हो, तो अस्पताल के कर्मचारियों से सवाल पूछें।
  • किसी प्रक्रिया के बाद असामान्य बुखार, सूजन, दर्द या संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
  • अस्पताल की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था या उपकरण के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता होने पर संबंधित अस्पताल प्रशासन से संपर्क करें।

हालांकि, केवल किसी उपकरण की पैकिंग देखकर उसकी पूरी सुरक्षा का आकलन नहीं किया जा सकता। चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और निर्धारित प्रक्रियाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

चिकित्सा व्यवस्था में निगरानी की अहम भूमिका

स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक और चिकित्सा उपकरणों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षित उपयोग और नियमों के पालन की निगरानी भी जरूरी हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पतालों में स्पष्ट प्रक्रियाएं, नियमित जांच और कर्मचारियों की जवाबदेही मरीजों को अनावश्यक जोखिम से बचाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, मरीजों को उपचार से जुड़ी जानकारी देना स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल से जुड़े जोखिम अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा के महत्व को उजागर करते हैं। चिकित्सा संस्थानों को लागू नियमों का पालन करना चाहिए और मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए।

NATIONAL : राहुल गांधी को मानहानि मामले में बड़ी राहत, सुल्तानपुर की अदालत ने किया बरी; 2018 के बयान से जुड़ा था मामला

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित वर्ष 2018 के मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। यह मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक राजनीतिक बयान से जुड़ा था। अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी की ओर से अमित शाह को लेकर कथित टिप्पणी किए जाने पर मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

कई वर्षों तक चले इस मामले में अदालत के समक्ष संबंधित पक्षों की दलीलें और कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को इस मामले में बरी कर दिया।

फैसले के बाद राजनीतिक चर्चा तेज

राहुल गांधी को मिली इस राहत के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चा होने लगी है। कांग्रेस के लिए यह फैसला एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है, जबकि मामले की पृष्ठभूमि ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में नेताओं के बयानों और उनकी कानूनी जिम्मेदारियों पर बहस को सामने ला दिया है।

हालांकि, किसी भी अदालत के फैसले का आकलन संबंधित आदेश और कानूनी आधार के अनुसार किया जाना चाहिए। राजनीतिक दल इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख सकते हैं, लेकिन मामले की वास्तविक स्थिति समझने के लिए अदालत के फैसले का पूरा विवरण महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक बयानों और मानहानि कानून पर फिर ध्यान

भारतीय राजनीति में नेताओं के सार्वजनिक बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। चुनावी रैलियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर कई बार मानहानि की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में अदालत यह देखती है कि शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी रूप से क्या निष्कर्ष निकलता है।

मानहानि से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और लागू कानून के आधार पर तय होता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में आरोपों और न्यायिक फैसलों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

आगे क्या होगा?

सुल्तानपुर अदालत के फैसले के बाद इस मामले से संबंधित आगे की कानूनी स्थिति पर नजर रहेगी। फैसले के विस्तृत आदेश और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं से यह समझने में मदद मिलेगी कि निर्णय किन कानूनी आधारों पर दिया गया।

राहुल गांधी को 2018 के बयान से जुड़े मानहानि मामले में मिली राहत देश की राजनीति की एक प्रमुख खबर है। यह घटनाक्रम चुनावी बयानबाजी, मानहानि कानून और राजनीतिक नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में लाता है।

BUSINESS : अक्टूबर में भारत की कारोबारी गतिविधियों में तेजी, सर्विस सेक्टर ने संभाली अर्थव्यवस्था की रफ्तार

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भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अक्टूबर महीने से सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। एक नए कारोबारी सर्वेक्षण के अनुसार, देश में निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियां चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। सेवाओं की मांग में मजबूती और नए ऑर्डर मिलने से कारोबारी माहौल में सुधार देखा गया है। हालांकि, कंपनियों में नई भर्तियों की रफ्तार लगभग स्थिर बनी हुई है।

चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा बिजनेस ग्रोथ इंडेक्स

HSBC के फ्लैश इंडिया कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के अनुसार, अक्टूबर में भारत का कंपोजिट PMI बढ़कर 56.7 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 55.9 था। यह आंकड़ा बताता है कि निजी क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार जारी है। PMI का 50 से ऊपर रहना सामान्य तौर पर व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि का संकेत माना जाता है।

इस सुधार में सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका रही। कारोबारियों को नए ऑर्डर मिले और घरेलू मांग में मजबूती दिखाई दी। विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ा, हालांकि वहां भर्ती की धीमी रफ्तार के कारण वृद्धि की गति कुछ सीमित रही।

सर्विस सेक्टर बना विकास का प्रमुख आधार

भारत में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, परिवहन और अन्य व्यावसायिक सेवाओं का अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। अक्टूबर के सर्वेक्षण में सेवा क्षेत्र की गतिविधियां सितंबर के मुकाबले बेहतर रहीं। सेवा क्षेत्र का PMI 55.2 से बढ़कर 56.2 हो गया।

नए ऑर्डर बढ़ने से कंपनियों को आने वाले समय के लिए बेहतर कारोबारी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिलने वाली मांग में सुधार सभी क्षेत्रों में समान नहीं रहा। वस्तुओं के निर्यात से जुड़े ऑर्डर मजबूत हुए, जबकि विदेशी ग्राहकों से मिलने वाले सेवा ऑर्डर की वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर रही।

कंपनियों में भर्ती की रफ्तार क्यों नहीं बढ़ी?

कारोबारी गतिविधियों में तेजी के बावजूद रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर उतनी मजबूत नहीं रही। सर्वेक्षण के अनुसार, कंपनियों ने बढ़ते काम को मौजूदा कर्मचारियों की मदद से पूरा करने पर अधिक भरोसा किया। इसके कारण रोजगार में वृद्धि लगभग रुक गई।

विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि आर्थिक विकास का लाभ तभी व्यापक रूप से दिखाई देता है जब कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती करें और लोगों की आय में सुधार हो। यदि ऑर्डर लगातार बढ़ते हैं, तो भविष्य में कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने और नए कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, फिलहाल भर्ती में तेजी आने की गारंटी नहीं है।

महंगाई के मोर्चे पर मिली कुछ राहत

सर्वेक्षण में लागत के दबाव में कमी के संकेत भी सामने आए हैं। कंपनियों के लिए कच्चे माल और अन्य इनपुट की कीमतों में वृद्धि की गति लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे कारोबारियों को अपने खर्च नियंत्रित करने में कुछ मदद मिल सकती है।

फिर भी, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आने वाले महीनों में भारत के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर परिवहन, उत्पादन और अन्य व्यावसायिक लागतें बढ़ सकती हैं।

आगे क्या रहेगी कारोबारियों की नजर?

आने वाले समय में कारोबारी जगत की निगाहें घरेलू मांग, वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर रहेंगी। इन कारकों का असर निवेश, रोजगार और व्यावसायिक विस्तार पर पड़ सकता है। अक्टूबर में भारत की कारोबारी गतिविधियों में आई तेजी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। सेवा क्षेत्र की मजबूती और नए ऑर्डर कारोबारियों का भरोसा बढ़ा रहे हैं। हालांकि, भर्ती में ठहराव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण आने वाले महीनों में विकास की गति पर नजर रखना जरूरी होगा।

World : ब्राज़ील में लूला की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार राष्ट्रपति बनने से वैश्विक राजनीति में हलचल

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ब्रासीलिया, 26 अक्टूबर 2026। ब्राज़ील की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर चौथी बार देश की कमान संभालने का रास्ता साफ कर लिया है। चुनाव परिणाम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। लूला की जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव से पहले कई सर्वेक्षणों में मुकाबला बेहद कड़ा बताया जा रहा था।

अंतरराष्ट्रीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, ब्राज़ील के चुनावी प्राधिकरण ने लूला की जीत की पुष्टि की। इस परिणाम ने देश की राजनीतिक दिशा और लैटिन अमेरिका में बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस तेज कर दी है।

कड़े मुकाबले के बाद लूला को मिली जीत

ब्राज़ील में इस बार का राष्ट्रपति चुनाव राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। चुनाव में आर्थिक स्थिति, महंगाई, रोजगार, सामाजिक कल्याण और देश की अंतरराष्ट्रीय भूमिका जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। मतदाताओं के सामने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और विकास की प्राथमिकताओं को लेकर विकल्प मौजूद थे।

लूला की जीत को उनके राजनीतिक अनुभव और समर्थकों के भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद देश के सामने आर्थिक विकास को गति देने, सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने और राजनीतिक मतभेदों को कम करने जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है असर

ब्राज़ील लैटिन अमेरिका की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वैश्विक मंच पर भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि उत्पादों, प्राकृतिक संसाधनों, व्यापार और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर ब्राज़ील के फैसलों का दूसरे देशों पर असर पड़ सकता है।

लूला की सरकार के अगले कार्यकाल में अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख देशों के साथ संबंधों पर दुनिया की नजर रहेगी। साथ ही, जलवायु परिवर्तन, अमेज़न के वर्षावनों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे विषय भी उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

विशेषज्ञों के लिए यह देखना अहम होगा कि नई सरकार घरेलू विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच किस तरह संतुलन बनाती है। ब्राज़ील की नीतियां लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग की दिशा को भी प्रभावित कर सकती हैं।

नई सरकार के सामने होंगी कई चुनौतियां

चुनाव जीतना राजनीतिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन सरकार के सामने असली चुनौती चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की होगी। आम नागरिकों को बेहतर रोजगार, स्थिर कीमतों, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की उम्मीद रहती है। ऐसे में सरकार को आर्थिक नीतियों और सामाजिक योजनाओं के परिणामों पर विशेष ध्यान देना होगा।

इसके अलावा, राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करना और विभिन्न विचारधाराओं वाले समूहों के साथ संवाद बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। यदि सरकार आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के मोर्चे पर ठोस प्रगति करती है, तो इससे देश की राजनीतिक स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।

दुनिया की नजर ब्राज़ील के अगले कदम पर

लूला की जीत केवल ब्राज़ील तक सीमित राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है। इसका असर क्षेत्रीय सहयोग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक कूटनीति से जुड़ी चर्चाओं में भी दिखाई दे सकता है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां तय करेंगी कि यह चुनावी जीत देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में कितनी प्रभावी साबित होती है।

निष्कर्ष: ब्राज़ील में लूला की चौथी राष्ट्रपति जीत ने वैश्विक राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी समर्थन को ठोस नीतिगत उपलब्धियों में बदलने की होगी। दुनिया की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई सरकार आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मोर्चे पर क्या कदम उठाती है।

स्रोत: Reuters की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट और NDTV World की 26 अक्टूबर 2026 की खबरें।
[11:34 am, 26/10/2026] Rk🐅: Health Tips : નખનો રંગ બદલાવો છે સામાન્ય નહીં! આ બીમારીઓના હોઈ શકે છે લક્ષણ

SPORTS : भारत-न्यूजीलैंड टी20 सीरीज में टीम इंडिया का शानदार प्रदर्शन, तीसरे मुकाबले से पहले ईशान किशन बाहर

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भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज खेल रही है। टीम इंडिया ने शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। अब भारतीय टीम की नजर तीसरे मैच में जीत दर्ज करके अपनी बढ़त और मजबूत करने पर होगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

ईशान किशन चोट के कारण तीसरे टी20 से बाहर

भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में नहीं खेल पाएंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के मुताबिक, ईशान किशन पहले मैच के दौरान दाहिनी जांघ के अंदरूनी हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव से जूझ रहे हैं। उनकी चोट में सुधार हो रहा है, लेकिन वह अभी पूरी तरह मैच खेलने के लिए फिट नहीं हैं।

ईशान की गैरमौजूदगी में टीम प्रबंधन को विकेटकीपर और बल्लेबाजी क्रम को लेकर विकल्पों पर विचार करना होगा। कुमार कुशाग्र टीम के साथ बने रहेंगे। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भी मौका मिलने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, हालांकि अंतिम प्लेइंग इलेवन का फैसला टीम प्रबंधन करेगा।

टीम इंडिया के सामने जीत की लय बरकरार रखने की चुनौती

सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम आत्मविश्वास से भरी हुई है। बल्लेबाजों और गेंदबाजों के संयुक्त प्रदर्शन ने टीम को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। तीसरे मैच में भी भारत की कोशिश होगी कि बल्लेबाजी में निरंतरता बनाए रखी जाए और गेंदबाज विपक्षी टीम पर दबाव बनाएं।

दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के लिए यह मुकाबला बेहद अहम होगा। सीरीज में बने रहने के लिए टीम को अपनी रणनीति में सुधार करना होगा और भारतीय बल्लेबाजों को बड़े स्कोर बनाने से रोकना होगा।

कब खेला जाएगा तीसरा मुकाबला?

भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 27 अक्टूबर 2026 को वेलिंगटन में खेला जाना निर्धारित है। भारतीय प्रशंसकों की निगाहें टीम की प्लेइंग इलेवन, खिलाड़ियों की फिटनेस और सीरीज में लगातार तीसरी जीत की संभावना पर रहेंगी।

भारतीय टीम ने सीरीज में मजबूत शुरुआत की है, लेकिन ईशान किशन की चोट टीम के लिए चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि तीसरे मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी जीत की लय बनाए रख पाते हैं या न्यूजीलैंड वापसी करने में सफल होता है।

ENTERTAINMENT : रामायण’ के नए गाने ‘मंगल रंग’ ने जीता दर्शकों का दिल, रणबीर कपूर और साई पल्लवी की जोड़ी चर्चा में

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मुंबई, 26 अक्टूबर 2026। बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल नितेश तिवारी की रामायण एक बार फिर सुर्खियों में है। फिल्म के निर्माताओं ने 25 अक्टूबर को नया गाना ‘मंगल रंग’ रिलीज किया, जिसमें रणबीर कपूर भगवान श्रीराम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आ रहे हैं। गाने में दोनों के पवित्र रिश्ते, विवाह समारोह और जीवन के विभिन्न पड़ावों को खूबसूरती से दिखाया गया है। रिलीज के बाद से ही इस गाने को लेकर मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।

अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आवाज ने बढ़ाया आकर्षण

‘मंगल रंग’ को खास बनाने में इसके संगीत और गायकी की अहम भूमिका है। गाने का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि हिंदी संस्करण को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। इसके बोल डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इन कलाकारों के साथ आने से गाने को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

गाने के वीडियो में मिथिला में माता सीता के स्वयंवर से लेकर श्रीराम और सीता के विवाह तक के दृश्य दिखाए गए हैं। इसके बाद अयोध्या में उनके जीवन और वनवास की झलक भी देखने को मिलती है। भव्य दृश्य, पारंपरिक परिधान और विवाह समारोह का चित्रण फिल्म की पौराणिक पृष्ठभूमि को सामने लाता है।

पांच भाषाओं में रिलीज हुआ गाना

फिल्म के निर्माताओं ने ‘मंगल रंग’ को केवल हिंदी में ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी जारी किया है। इससे फिल्म को देश के अलग-अलग क्षेत्रों के दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग गायकों की आवाजों के जरिए इस गाने को प्रस्तुत किया गया है।

गाने को लेकर सामने आई दर्शकों की प्रतिक्रियाओं में संगीत, भावनात्मक प्रस्तुति और रणबीर कपूर-साई पल्लवी की जोड़ी की चर्चा शामिल है। हालांकि, किसी फिल्म की वास्तविक सफलता का पता उसकी रिलीज और दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया के बाद ही चलेगा।

फिल्म की स्टारकास्ट भी है खास

रामायण में रणबीर कपूर और साई पल्लवी के अलावा यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। वहीं, रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है। इसकी भव्य प्रस्तुति और दमदार स्टारकास्ट के कारण यह पहले से ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

मेकर्स के अनुसार, रामायण: पार्ट 1 को 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है। अब दर्शकों को फिल्म के ट्रेलर, संगीत और बड़े पर्दे पर इसकी प्रस्तुति का इंतजार है।

निष्कर्ष: ‘मंगल रंग’ ने रामायण के प्रति दर्शकों की उत्सुकता को एक बार फिर बढ़ा दिया है। ए.आर. रहमान का संगीत, अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की गायकी तथा राम-सीता के रिश्ते पर केंद्रित दृश्य इस गाने को फिल्म के प्रचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।

स्रोत: India Today, The Indian Express और Cinema Express की 25 अक्टूबर 2026 की मनोरंजन रिपोर्टें।
[11:32 am, 26/10/2026] Hina Chauhan: भारत-न्यूजीलैंड टी20 सीरीज में टीम इंडिया का शानदार प्रदर्शन, तीसरे मुकाबले से पहले ईशान किशन बाहर

LIFESTYLE : रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाएं ये 5 आदतें, सेहत और मूड दोनों रहेंगे बेहतर

आज की व्यस्त जिंदगी में काम, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच लोग अक्सर अपनी सेहत और आराम को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें अपनाकर जीवन को अधिक व्यवस्थित और बेहतर बनाया जा सकता है।

  1. सुबह की शुरुआत सकारात्मक तरीके से करें

सुबह उठकर कुछ समय खुली हवा में बिताएं और हल्की स्ट्रेचिंग या टहलने की आदत डालें। इससे दिन की शुरुआत सक्रिय महसूस करने में मदद मिल सकती है।

  1. खाने में रखें संतुलन

अपने भोजन में फल, सब्जियां, दालें और पर्याप्त पानी शामिल करें। नियमित समय पर भोजन करना और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित रखना भी उपयोगी है।

  1. नींद को न करें नजरअंदाज

पर्याप्त नींद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय नियमित रखने तथा रात में मोबाइल का इस्तेमाल कम करने से नींद की दिनचर्या बेहतर हो सकती है।

  1. तनाव कम करने के लिए निकालें समय

दिन में कुछ मिनट अपनी पसंद की गतिविधि, संगीत, किताब पढ़ने या ध्यान लगाने के लिए निकालें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना भी भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

  1. रोजाना करें शारीरिक गतिविधि

पैदल चलना, साइकिल चलाना या अपनी पसंद का व्यायाम करना सक्रिय रहने का आसान तरीका है। शुरुआत अपनी क्षमता के अनुसार करें और धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाएं।

बेहतर जीवनशैली के लिए बड़े बदलाव करना जरूरी नहीं है। नियमित दिनचर्या, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधि जैसी छोटी आदतें लंबे समय में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

NATIONAL : चक्रवात ‘अर्नब’ का खतरा बढ़ा, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में अलर्ट; लाखों लोगों की सुरक्षा के लिए तैयारियां तेज

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नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026 | भारत समाचार

बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा चक्रवात ‘अर्नब’ भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए चिंता का कारण बन गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, यह तूफान 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। संभावित खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा में प्रशासन ने राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों को सतर्क रहने, संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

28 अक्टूबर को तट से टकराने की संभावना

मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम चक्रवाती तूफान में बदल चुका है और इसके आगे बढ़ने के साथ इसकी तीव्रता बढ़ने की आशंका है। अनुमान है कि तूफान आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र के पास पहुंच सकता है। इस दौरान तेज हवाएं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, तूफान की गति बढ़ने पर हवा के झोंके लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। ऐसे हालात में पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने, सड़कों पर जलभराव होने और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

आंध्र प्रदेश में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी

आंध्र प्रदेश प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करते हुए संभावित निकासी की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 5.7 लाख लोगों को संभावित खतरे के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने और समुद्र में मौजूद नौकाओं को वापस लौटने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों तथा आपातकालीन सेवाओं को भी तैयार रहने को कहा गया है, ताकि तूफान के दौरान लोगों को समय पर सहायता मिल सके।

ओडिशा के पांच जिलों में विशेष सतर्कता

ओडिशा सरकार ने भी संभावित प्रभाव को देखते हुए राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा है। गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगढ़ा और मलकानगिरी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की है। इन जिलों में सरकारी अधिकारियों को अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल और कॉलेज बंद रखने की घोषणा भी की गई है।

आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए। जरूरी दस्तावेज, दवाइयां, पीने का पानी और मोबाइल चार्ज रखने जैसी तैयारियां उपयोगी हो सकती हैं।

लोगों को समुद्र, नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए। तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। किसी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए।

अगले 48 घंटे क्यों हैं महत्वपूर्ण?

आने वाले समय में चक्रवात की दिशा, गति और तीव्रता पर लगातार नजर रखी जाएगी। मौसम विभाग के नए पूर्वानुमान यह निर्धारित करने में मदद करेंगे कि किन इलाकों में अधिक सतर्कता और राहत व्यवस्था की आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष: चक्रवात ‘अर्नब’ के संभावित खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से राहत पहुंचाना है। नागरिकों को अफवाहों से बचते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।

स्रोत: Reuters और The Indian Express की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें।
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लाइफस्टाइल न्यूज़ | 26 अक्टूबर 2026

Wrong UPI Payment : गलत नंबर पर पैसे भेजने के बाद क्या करें? जानें जरूरी स्टेप्स

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आजकल चाय की टपरी पर दस रुपये देने हों से लेकर शॉपिंग मॉल में हजारों का बिल चुकाना हो. ज्यादातर लोग कैश पेमेंट करने के बजाय ऑनलाइन UPI पेमेंट करते हैं. जिसमें महज कुछ सेकेंड्स का समय लगता है. लेकिन कई बार जल्दबाजी में नंबर टाइप करने में एक गड़बड़ी हो जाती है और पैसे किसी और के खाते में चले जाते हैं. जैसे ही इसका पता चलता है कि किसी और को पैसे पहुंच गए हैं तो लोग परेशान हो जाते हैं.

ज्यादातर लोग ऐसे वक्त में घबरा जाते हैं कि उनके पैसे अब डूब गए हैं. लेकिन अगर आप शुरुआती कुछ घंटों में घबराने के बजाय सही कदम उठा लें तो आपका पूरा पैसा वापस मिल सकता है. रिजर्व बैंक और NPCI ने इसके लिए बकायदा एक सीधा प्रोसेस बनाया हुआ है. चलिए आपको बताते हैं ऐसी सिचुएश में आपको क्या करना चाहिए.

सबसे पहले करें ये काम

गलत ट्रांजेक्शन होते ही सबसे पहला काम यह करें कि उस पेमेंट की स्क्रीन का तुरंत स्क्रीनशॉट ले लें जिसमें UTR नंबर यानी ट्रांजेक्शन ID, तारीख और समय साफ दिख रहा हो. इसके बाद जिस नंबर पर पैसे गए हैं उस पर एक बार कॉल करके आराम से अपनी बात बताएं. कई बार सामने वाला इंसान ईमानदार होता है और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक करके आपके पैसे तुरंत वापस लौटा देता है.

लेकिन ध्यान रहे कि पैसे वापस मंगाने के चक्कर में सामने वाले के भेजे किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपना UPI पिन डालें. अगर वह इंसान फोन नहीं उठाता है या पैसे लौटाने से साफ मना कर देता है तो बिना देर किए अपने Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे App के Help Section में जाएं. वहां उस गलत ट्रांजेक्शन को सेलेक्ट करके Having Issue With This Payment पर क्लिक करें और Wrong Account Transfer की शिकायत दर्ज करा दें. जिससे App की टीम तुरंत एक्शन ले सके.

NPCI पोर्टल और टोल-फ्री नंबर पर दर्ज कराएं शिकायत

पेमेंट App पर रिपोर्ट करने के साथ ही आपको तुरंत NPCI पर शिकायत करनी चाहिए, इसके लिए अपने फोन या लैपटॉप के ब्राउजर में जाकर npci.org.in वेबसाइट खोलें. वहां UPI का सेक्शन मिलेगा जिसमें डिस्प्यूट रिड्रेसल मैकेनिज्म का टैब दिखाई देगा. इस पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक शिकायत फॉर्म खुल जाएगा. यहां ट्रांजेक्शन वाले हिस्से में नेचर ऑफ ट्रांजेक्शन चुनें और इश्यू के अंदर इनकरेक्टली ट्रांसफर्ड टू अनदर अकाउंट सेलेक्ट करें.

इसके बाद अपनी ट्रांजेक्शन ID, बैंक का नाम, गलत गया हुआ अमाउंट, तारीख और अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भर दें. तो साथ में अपने Bank Statement का स्क्रीनशॉट अपलोड करके फॉर्म सबमिट कर दें. इसके अलावा आप तुरंत टोल-फ्री नंबर 1800-120-1740 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी पैसे होल्ड होने के चांस उतने ही ज्यादा रहते हैं.

48 घंटे के अंदर अपनी बैंक ब्रांच में करें शिकायत

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की गाइडलाइंस कहती हैं कि अगर Digital Payment में कोई गलती होती है. तो यूजर को 24 से 48 घंटे के भीतर अपने बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए. इसलिए ऑनलाइन शिकायत करने के बाद अपनी होम बैंक ब्रांच में जाएं और मैनेजर को एक लिखित Application के साथ गलत ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट सौंप दें. आपका बैंक तुरंत उस बैंक से संपर्क करेगा जिस खाते में पैसे गए हैं. बैंक अधिकारी सामने वाले अकाउंट होल्डर से बात करके आपकी रकम को लियन यानी होल्ड पर डाल देते हैं और उसकी मंजूरी लेकर पैसे आपके खाते में रिवर्स कर देते हैं. अगर सामने वाला व्यक्ति पैसे निकालने के बाद भी आनाकानी करता है तो बैंक की मदद से उस पर कानूनी दबाव बनाया जा सकता है.

Technology : स्मार्ट टीवी की स्लो स्पीड से हैं परेशान? इन टिप्स से मिनटों में बढ़ाएं रफ्तार

आज के दौर में लगभग हर घर में स्मार्ट टीवी लग चुका है. शाम को ऑफिस से थककर आने के बाद जब हम सोफे पर बैठकर अपनी पसंदीदा Web Series और Movie लगाने के लिए Remote उठाते हैं. तो कई बार TV इतना धीमा चलता है कि सारा मूड खराब हो जाता है. बटन दबाने के कई सेकंड बाद स्क्रीन हिलती है. Apps खुलने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है और कई बार तो वीडियो चलते-चलते TV बीच में ही अटक जाता है.

जब नया टीवी खरीदकर लाते हैं तब तो वह एकदम बढ़िया की तरह चलता है. लेकिन एक-दो साल बाद उसमें यह हैंग होने की बीमारी आम हो जाती है. लोग सोचते हैं कि टीवी पुराना हो गया है. जबकि असल वजह हमारे इस्तेमाल करने के तरीके में छिपी होती है. कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर इसे फिर से सुपरफास्ट बनाया जा सकता है. जान लीजिए पूरी खबर.

Cache मेमोरी साफ करें और फालतू Apps हटाएं
जिस तरह हमारे फोन में ऐप्स चलाते-चलाते बहुत सारा डेटा जमा हो जाता है. ठीक वैसा ही हाल टीवी के साथ भी होता है. दरअसल स्मार्ट टीवी में रैम और इंटरनल स्टोरेज फोन के मुकाबले काफी कम होती है, जो आमतौर पर महज 1.5GB से 2GB रैम और 8GB से 16GB स्टोरेज तक ही सीमित रहती है. जब हम रोज Netflix, Youtube और Hotstar जैसे बड़े ऐप्स चलाते हैं,. तो बैकग्राउंड में ढेर सारा Cache डेटा इकट्ठा होता रहता है जो मेमोरी को पूरी तरह चोक कर देता है.

इसे साफ करने के लिए अपने TV की Settings में जाएं वहां Apps वाले सेक्शन को खोलें और एक-एक करके सभी भारी Apps का क्लियर Cache कर दें. इसके अलावा TV में पहले से कई ऐसे Apps इंस्टॉल आते हैं जिन्हें हम साल भर में एक बार भी नहीं खोलते हैं. ऐसे तमाम अनचाहे Apps को तुरंत Uninstall कर दें जिससे TV की स्टोरेज खाली हो सके और प्रोसेसर को सांस लेने की जगह मिले.

बैकग्राउंड प्रोसेस पर लगाएं रोक और एनिमेशन करें कम

अक्सर हम टीवी पर कोई एक ऐप देख रहे होते हैं और रिमोट का Home बटन दबाकर सीधे दूसरे App पर चले जाते हैं. हमें लगता है कि पिछला App बंद हो गया लेकिन असल में वह Background में लगातार चल रहा होता है और टीवी की RAM खा रहा होता है. अगर आपके टीवी में चार-पांच Apps पीछे खुले रहेंगे तो फिर टीवी तो हैंग होगी तय है. इस दिक्कत को जड़ से खत्म करने के लिए आप टीवी के डेवलपर ऑप्शन का सहारा ले सकते हैं.

सॉफ्टवेयर अपडेट कोल्ड रीबूट करें

हम लोग TV बंद करने के लिए सिर्फ रिमोट का लाल बटन दबा देते हैं और हमें लगता है कि टीवी बंद हो गया. लेकिन रिमोट से बंद करने पर TV पूरी तरह ऑफ नहीं होता बल्कि स्टैंडबाय मोड यानी नींद में चला जाता है. महीनों तक मेन स्विच बंद न होने की वजह से इसकी मेमोरी कभी रिफ्रेश ही नहीं हो पाती है. इसलिए हफ्ते में कम से कम दो-तीन बार TV को मेन पावर प्लग से बंद करें और पांच मिनट बाद चालू करें जिसे कोल्ड रीबूट कहा जाता है.

इसके अलावा समय-समय पर टीवी की सेटिंग्स में जाकर सिस्टम अपडेट भी चेक करते रहें. क्योंकि कंपनियां नए अपडेट के जरिए पुराने बग्स को ठीक करती हैं. अगर आपका TV चार-पांच साल से ज्यादा पुराना हो चुका है और इन सारी ट्रिक्स के बाद भी प्रोसेसर साथ नहीं दे रहा है. तो नया टीवी खरीदने में हजारों रुपये बर्बाद न करें. बस एक नया फायर TV स्टिक या गूगल टीवी स्टिक लगा लें जिससे आपका पुराना टीवी एकदम नए जैसा दौड़ने लगेगा.

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