Monday, March 9, 2026
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Bollywood : शकीरा के इंडिया टूर को लेकर आया बड़ा अपडेट, अब दो नहीं बल्कि तीन शो करेंगी पॉप स्टार

ग्लोबल पॉप स्टार शकीरा एक बार फिर से इंडिया में परफॉर्म करने आ रही हैं. मुंबई और दिल्ली में शकीरा का कॉन्सर्ट होना है, वहीं अब अपडेट आया है कि वो दो नहीं बल्कि तीन शो करेंगी। ग्लोबल पॉप स्टार शकीरा के इंडिया आने की खबर से पहले ही फैंस काफी उत्साहित थे. अब इस एक्साइटमेंट को और बढ़ाते हुए उनके इंडिया टूर में एक और कॉन्सर्ट जोड़ दिया गया है. शानदार रिस्पॉन्स मिलने के बाद ऑर्गेनाइजर्स ने फैसला किया कि मुंबई में एक और शो किया जाएगा. पहले जहां मुंबई और दिल्ली में एक-एक शो होना था, अब मुंबई में दो कॉन्सर्ट होंगें. यानी शकीरा इंडिया में टोटल तीन लाइव कॉन्सर्ट करने वाली हैं.

फैंस काफी समय से उन्हें लाइव देखने का इंतजार कर रहे थे, इसलिए यह टूर उनके लिए किसी बड़े म्यूजिक इवेंट से कम नहीं है. शकीरा अपनी दमदार आवाज, एनर्जेटिक डांस और सुपरहिट गानों के लिए दुनियाभर में जानी जाती हैं, इसलिए उनके इंडिया कॉन्सर्ट को लेकर फैंस की एक्साइटमेंट लगातार बढ़ रही है.रिपोर्ट्स के मुताबिक टिकटों की भारी मांग के चलते ऑर्गेनाइजर्स ने मुंबई में एक और कॉन्सर्ट जोड़ने का फैसला किया है. शकीरा का पहला कॉन्सर्ट 10 अप्रैल को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में होगा.इसके अगले दिन 11 अप्रैल को इसी वेन्यू पर दूसरा शो ऑर्गेनाइज किया जाएगा. इसके बाद 15 अप्रैल को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में वह अपने फैंस के लिए परफॉर्म करेंगी.

शकीरा के कॉन्सर्ट के टिकट 1 मार्च से बुक करने के लिए अवेलेबल है. टिकट की कीमत 6000 हजार रुपये से शुरू होकर 32,000 हजार रुपये तक है.अलग-अलग प्राइस कैटेगरी में फैंस अपनी पसंद के हिसाब से टिकट खरीद सकते हैं.

बता दें, शकीरा करीब दो दशक बाद इंडिया में लाइव परफॉर्म करने जा रही हैं. इससे पहले उन्होंने 2007 में अपने ‘Oral Fixation Tour’ के दौरान मुंबई में शो किया था.अब 17 साल बाद उनका यह इंडिया टूर फैंस के लिए किसी बड़े म्यूजिकल सेलिब्रेशन से कम नहीं माना जा रहा.

Bihar news : बिहार में सरकारी नौकरी का मौका, पुलिस कॉन्स्टेबल से लेकर सिविल जज के पदों पर भर्ती

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बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर, प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर और सिविल जज के कुल 1466 पदों पर भर्ती निकली है.बिहार में अलग-अलग विभागों में कई पदों पर भर्ती निकली है. पुलिस विभाग से लेकर न्यायिक सेवा तक कई पदों पर आवेदन मांगे गए हैं. जो भी उम्मीदवार इन भर्तियों के लिए जरूरी योग्यता रखते हैं, वे आवेदन करके सरकारी नौकरी पाने का मौका हासिल कर सकते हैं.इन भर्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार तय समय के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि इन सभी भर्तियों के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे. ऑफलाइन या किसी अन्य तरीके से भेजे गए आवेदन मान्य नहीं होंगे.

बिहार में इस समय तीन प्रमुख पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है. इनमें पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर, प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर और सिविल जज के पद शामिल हैं. पुलिस विभाग में पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर के 993 पदों पर भर्ती निकाली गई है. इसके अलावा बिहार प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर के 300 पदों और बिहार सिविल जज के 173 पदों पर भी आवेदन मांगे गए हैं. इन तीनों भर्तियों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अलग-अलग तय की गई है, इसलिए उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन करना जरूरी है.

पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर भर्ती 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 रखी गई है. वहीं बिहार प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर भर्ती 2026 के लिए उम्मीदवार 20 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा बिहार सिविल जज भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 मार्च 2026 तय की गई है. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन कर लें, ताकि किसी तकनीकी समस्या के कारण परेशानी न हो. पुलिस कॉन्स्टेबल ऑपरेटर भर्ती 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 रखी गई है. वहीं बिहार प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर भर्ती 2026 के लिए उम्मीदवार 20 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा बिहार सिविल जज भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 मार्च 2026 तय की गई है. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन कर लें, ताकि किसी तकनीकी समस्या के कारण परेशानी न हो

बिहार सिविल जज पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री होना जरूरी है. इसके अलावा उम्मीदवार के पास कम से कम तीन साल का कार्य अनुभव होना चाहिए. इस पद के लिए आयु सीमा 22 साल से 35 साल के बीच तय की गई है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट दी जाएगी.

Top news : मिडिल ईस्ट में जंग के बीच सरकार ने लिया बड़ा फैसला, LPG सिलेंडर की बुकिंग का बढ़ा समय

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एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग को तीन दिन पहले ही 15 दिन से बढ़ाकर 21 दिन किया था, लेकिन अब 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है.मिडिल ईस्ट में जंग के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू गैस सिलेंडर (LPG) की बुकिंग का समय बढ़ा दिया है. सूत्रों के मुताबिक अब इसे 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है. ये फैसला ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग को लेकर लिया गया है. सरकार ने कहा है कि अभी तक घरेलू गैस या डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है.

मंत्रालय ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग को तीन दिन पहले ही 15 दिन से बढ़ाकर 21 दिन किया था, लेकिन अब 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है. यानी अब ग्राहकों को सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच 24 दिन का अंतर रखना होगा. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दो दिन पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में अब गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी का 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर 913 रुपये में मिलेगा जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी.

एक साल में ये दूसरी बार है जब एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए. कीमत में बढ़ोतरी 7 मार्च से लागू हो चुकी है. इससे पहले पिछले साल अप्रैल में कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. आईओसी की वेबसाइट के अनुसार, मुंबई में गैर-सब्सिडी वाली एलपीजी अब 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये की हो गई है.उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों यानी 2016 में योजना शुरू होने के बाद से मुफ्त एलपीजी कनेक्शन पाने वाले 10 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को एक साल में 12 बार 14.2 किलोग्राम के हर सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी.

होटल और रेस्तरां जैसे प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल की जाने वाली कॉमर्शियल एलपीजी की कीमत 19 किलोग्राम के हर सिलेंडर पर 114.5 रुपये बढ़ाई गई है. अब दिल्ली में इसकी कीमत 1,883 रुपये है. यह बढ़ोतरी एक मार्च को 19 किलोग्राम के हर सिलेंडर पर 28 रुपये बढ़ाए जाने के बाद की गई है. इस साल वाणिज्यिक एलपीजी की दरों में 302.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.

World : तेहरान के आसमान से बरसा तेल? एयरस्ट्राइक के बाद काले धुएं के बीच हुई अजीब बारिश

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इंटरनेट पर फैल रहे इन तस्वीरों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है. लोग हैरान हैं कि क्या सच में किसी शहर में “तेल वाली बारिश” हो सकती है.जंग जब शहरों के दरवाजे तक पहुंचती है तो उसका असर सिर्फ धमाकों और आग की लपटों तक सीमित नहीं रहता. वह हवा, पानी और आसमान तक को बदल देती है. इन दिनों ईरान की राजधानी तेहरान से सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो कुछ ऐसा ही डरावना मंजर दिखा रहे हैं. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे कई वीडियो में शहर के ऊपर काले धुएं के विशाल गुबार छाए हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का दावा है कि आसमान से गिरने वाली बारिश में तेल जैसा चिपचिपा पदार्थ मिला हुआ था.

ईरान में हो रही तेल की बारिश!
इंटरनेट पर फैल रहे इन वीडियो और तस्वीरों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है. लोग हैरान हैं कि क्या सच में किसी शहर में “तेल वाली बारिश” हो सकती है. वायरल हो रहे वीडियो में भी एक शख्स जमीन पर बिखरे तेल को दिखा रहा है और दावा कर रहा है कि यह तेल हवा में घुल चुका है और शहर के हर कोने में ऐसे हालात देखने को मिल रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि इजरायली हवाई हमलों के बाद तेहरान में कई तेल डिपो और ईंधन भंडारण केंद्रों में लगी भीषण आग के कारण यह अजीब स्थिति पैदा हुई. यही वजह है कि यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है और लाखों लोग इन वीडियो को देख रहे हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार रात इजरायल ने तेहरान और उसके आसपास स्थित कई ईंधन भंडारण और तेल सुविधाओं को निशाना बनाया. ईरानी मीडिया के अनुसार हमलों में उत्तर-पूर्व तेहरान के अगदासियेह ऑयल वेयरहाउस, शहर के उत्तर में स्थित शहरान ऑयल डिपो, दक्षिणी तेहरान की एक ऑयल रिफाइनरी और पास के कराज शहर में मौजूद तेल डिपो को निशाना बनाया गया. इन हमलों के बाद कई जगहों पर भीषण आग लग गई.ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि इस तरह की बारिश में जहरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे तत्व हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ये तत्व एसिड रेन जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं और इससे सांस लेने में दिक्कत, आंखों और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. तेहरान के गवर्नर ने नागरिकों से मास्क पहनने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने को कहा है. साथ ही घरों की खिड़कियों और दरवाजों को बंद रखने तथा गीले कपड़े से ढकने की सलाह दी गई है ताकि प्रदूषित हवा अंदर न आ सके.

Business : सिर्फ 200 रुपये की बचत से ही बेटियों के लिए बन सकता है 40 लाख का फंड, सरकार के इस स्कीम पर मिलता है जबरदस्त रिटर्न

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बेटी के जन्म के साथ ही माता-पिता के मन में उसके बेहतर भविष्य के सपने भी आकार लेने लगते हैं. अच्छी पढ़ाई और आगे चलकर शादी जैसी जिम्मेदारियों के लिए आर्थिक तैयारी करना भी उतना ही जरूरी हो जाता है. बेटी के जन्म के साथ ही माता-पिता के मन में उसके बेहतर भविष्य के सपने भी आकार लेने लगते हैं. अच्छी पढ़ाई, आत्मनिर्भर जीवन और आगे चलकर शादी जैसी जिम्मेदारियों के लिए आर्थिक तैयारी करना भी उतना ही जरूरी हो जाता है. अगर छोटी उम्र से ही सही जगह निवेश शुरू कर दिया जाए तो समय के साथ एक मजबूत फंड तैयार किया जा सकता है.

इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की है. यह योजना खास तौर पर बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए बनाई गई है. इसमें मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स-फ्री होता है, जिससे निवेश का पूरा लाभ सीधे बेटियों को मिलता हैं. आइए जानते हैं, आखिर कैसे इस योजना की मदद से बेटियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है.

सुकन्या समृद्धि योजना में अगर नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी बचत की जाए तो समय के साथ बड़ी रकम तैयार की जा सकती है. उदाहरण के तौर पर, रोजाना करीब 200 रुपये बचाकर अगर इसे निवेश किया जाए, तो महीने भर में लगभग 6,000 रुपये जमा होते हैं.इस योजना पर फिलहाल सरकार करीब 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज दे रही है. लंबे समय तक लगातार निवेश करने पर यही छोटी रकम धीरे-धीरे बड़ा फंड बन सकती है. जिससे बेटियों की उच्च शिक्षा और शादी-विवाह जैसी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकती है.

अगर हर महीने 6,000 रुपये का निवेश लगातार 21 साल तक जारी रखा जाए, तो कुल निवेशित राशि 15,12,000 रुपये हो जाती है. मौजूदा 8.2 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से इस पर करीब 25,21,942 रुपये का ब्याज मिल सकता है. इस तरह योजना की मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग 40.33 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.सुकन्या समृद्धि योजना के तहत निवेशक एक साल में अधिक से अधिक 1,50,000 रुपये जमा कर सकते है. वहीं न्यूनतम राशि 250 रुपये तय की गई है. इस योजना से सरकार हर वर्ग की बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास कर रही है.

Life style : AI का साइड इफेक्ट! ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग की सोचने की ताकत हो सकती है कम, हार्वर्ड स्टडी ने किया चौंकाने वाला खुलासा

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आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे लगभग हर पेशे का हिस्सा बन चुका है.

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे लगभग हर पेशे का हिस्सा बन चुका है. कोडिंग करने वाले डेवलपर्स से लेकर अकाउंटेंट, मार्केटिंग प्रोफेशन
ल और मैनेजर्स तक कई लोग रोजमर्रा के काम के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं. कई बार एक ही व्यक्ति अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है. हालांकि इससे काम तेज और आसान जरूर हो जाता है लेकिन लंबे समय में इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है.

एक हालिया स्टडी, जो Harvard Business Review में प्रकाशित हुआ, इसी विषय पर रोशनी डालता है. इस रिसर्च में अमेरिका के 1,488 कर्मचारियों से उनके काम में AI के इस्तेमाल और उससे होने वाले मानसिक प्रभाव के बारे में सवाल किए गए.

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे लगभग हर पेशे का हिस्सा बन चुका है. कोडिंग करने वाले डेवलपर्स से लेकर अकाउंटेंट, मार्केटिंग प्रोफेशन
ल और मैनेजर्स तक कई लोग रोजमर्रा के काम के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं. कई बार एक ही व्यक्ति अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है. हालांकि इससे काम तेज और आसान जरूर हो जाता है लेकिन लंबे समय में इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है.एक हालिया स्टडी, जो Harvard Business Review में प्रकाशित हुआ, इसी विषय पर रोशनी डालता है. इस रिसर्च में अमेरिका के 1,488 कर्मचारियों से उनके काम में AI के इस्तेमाल और उससे होने वाले मानसिक प्रभाव के बारे में सवाल किए गए.

रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन कर्मचारियों को AI ब्रेन फ्राय का अनुभव हुआ उनमें निर्णय लेने की थकान लगभग 33 प्रतिशत ज्यादा थी. इससे गलत फैसले और छोटी-बड़ी गलतियों की संभावना भी बढ़ जाती है. इतना ही नहीं जिन लोगों पर AI का दबाव ज्यादा था उनमें नौकरी छोड़ने की इच्छा भी ज्यादा देखने को मिली.

AI का सही इस्तेमाल भी फायदेमंद

हालांकि रिसर्च में यह भी स्पष्ट किया गया कि AI हमेशा नकारात्मक असर ही नहीं डालता. जब AI का इस्तेमाल दोहराए जाने वाले या उबाऊ कामों को कम करने के लिए किया गया तो कर्मचारियों में तनाव कम देखा गया. ऐसे लोगों ने काम में ज्यादा रुचि और बेहतर सहयोग का अनुभव भी बताया. इससे यह साफ है कि AI का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कैसे और किस मात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा है.

Business : योगी सरकार की ODOP योजना ने बदला महिलाओं का भाग्य, 10 लाख के कर्ज से शुरू किया स्मार्ट लॉक बिजनेस

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अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कोविड के कठिन समय में ओडीओपी योजना के तहत डिजिटल लॉक यूनिट शुरू कर स्थानीय रोजगार सृजित किया और व्यवसाय में सफलता हासिल की.उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कठिन समय को सफलता की नई शुरुआत में बदल दिया. ताला नगरी के नाम से मशहूर अलीगढ़ में उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत एक डिजिटल लॉक यूनिट की स्थापना की. यह यूनिट न केवल लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है, बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम भी बन गई है.

दरअसल, नीलम ने वर्ष 2019 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी. उसी समय देश कोविड महामारी के संकट से जूझ रहा था. आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप थीं. बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया था. ऐसे कठिन समय में नीलम ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर एक ऐसा व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा, जिससे स्थानीय लोगों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके.अलीगढ़ पहले से ही ताला उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है. नीलम ने पारंपरिक ताले को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का फैसला किया. इसी सोच के साथ उन्होंने “ओव्लॉक्स इंडिया” के नाम से डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट शुरू की. इसकी शुरुआत आसान नहीं थी क्योंकि आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी.

ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के माध्यम से बैंक ऑफ़ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ. इसमें लगभग ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त हुई. योगी सरकार की इस योजना के सहयोग से उनके सपनों को साकार करने के लिए मजबूत नींव तैयार हो गई. आज उनका यह व्यवसाय 10 करोड़ रुपये के पार जा चुका है. जब इस यूनिट की शुरुआत हुई थी, तब यहां केवल पांच-छह कर्मचारी काम करते थे. धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज यहां 20 से 25 लोग काम कर रहे हैं. इस यूनिट से जुड़े कर्मचारी अपने काम के अनुसार हर महीने लगभग 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं. इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है.

इस यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को असेंबल कर आधुनिक डिजिटल लॉक तैयार किए जाते हैं. इन लॉक को आरएफआईडी कार्ड, मोबाइल फोन और सामान्य चाबी के माध्यम से संचालित किया जा सकता है. यही आधुनिक तकनीक इन्हें पारंपरिक तालों से अलग बनाती है.

सबसे खास बात यह है कि ओव्लॉक्स इंडिया के डिजिटल लॉक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में सप्लाई किए जा रहे हैं. इससे अलीगढ़ की पारंपरिक ताला उद्योग की पहचान को एक नई तकनीकी दिशा मिल रही है.

नीलम का कहना है कि “पहले अलीगढ़ में अधिकतर हैंडमेड और की-बेस्ड लॉक बनाए जाते थे. इनमें मजदूरों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी और आय भी सीमित होती थी लेकिन डिजिटल लॉक के इस नए उद्योग ने काम के स्वरूप को बदल दिया है. आज यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर आय मिल रही है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि उनके हाथों से बने उत्पाद देश-विदेश तक लोकप्रिय हो रहे हैं.”यह कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों में भी अवसर तलाशती है. नीलम की यह पहल बताती है कि जब परंपरा और तकनीक साथ मिलती हैं, तो स्थानीय उद्योग भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं.

World : नेवी के मामले में नंबर-1 है अमेरिका तो दूसरा कौन, जानें कहां खड़ा है अपना भारत?

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दुनिया की टॉप नौसेनाओं की रैंकिंग में अमेरिका नंबर-1 पर बना हुआ है. आइए जानें कि इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर किस देश की सेना का नाम शामिल है और भारत की स्थिति आखिर क्या है.समंदर की लहरों पर राज करने की होड़ ने दुनिया के शक्ति संतुलन को बदल दिया है. वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स (WDMMW) की रिपोर्ट ने कुछ वक्त पहले वैश्विक नौसैनिक ताकतों की एक नई तस्वीर पेश की थी. जिसमें अमेरिकी नौसेना अपनी परमाणु शक्ति और विशाल बेड़े के साथ अब भी शीर्ष पर काबिज है, लेकिन दूसरे स्थान पर कौन से देश की पकड़ है? आइए जान लेते हैं.

वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स (WDMMW) की रैंकिंग में अमेरिकी नौसेना पहले स्थान पर बनी हुई है. अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसके 11 विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जिनमें से ज्यादातर परमाणु ऊर्जा से संचालित होते हैं. यह तकनीक अमेरिकी बेड़े को बिना ईंधन की चिंता किए महीनों तक समंदर में तैनात रहने की क्षमता प्रदान करती है. अमेरिका के पास न केवल जहाजों की संख्या अधिक है, बल्कि उसके पास आधुनिक लॉजिस्टिकल सपोर्ट और दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने की बेजोड़ क्षमता मौजूद है.

इस सूची में दूसरे नंबर पर काबिज भारत के पड़ोसी देश चीन ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन कई मामलों में तकनीकी रूप से अमेरिका के करीब पहुंच चुका है और जल्द ही उसे पछाड़ने की क्षमता रख सकता है. चीनी नौसेना का आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट इतनी तेजी से चल रहा है कि WDMMW ने अनुमान लगाया है कि वह आने वाले समय में दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना बन जाएगी. दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सक्रियता और उसके नए युद्धपोतों की संख्या इसका स्पष्ट प्रमाण है.दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली नौसेना का खिताब रूस के पास है. रूसी नौसेना को एक जटिल ताकत के रूप में देखा जाता है, क्योंकि उसकी असली मजबूती उसकी पनडुब्बियों में छिपी है. रूस के पास ऐसा पनडुब्बी बेड़ा है जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और समंदर की गहराई से दुश्मन को तबाह कर सकता है. इसके अलावा, रूस की एडवांस्ड एंटी-शिप मिसाइलें उसे रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों ही मोर्चों पर एक घातक खिलाड़ी बनाती हैं.


हैरानी की बात यह है कि चौथे नंबर पर इंडोनेशिया की नौसेना का कब्जा है. इंडोनेशिया के पास लगभग 245 अलग-अलग तरह के युद्धपोत हैं और वह अपनी ‘ब्लू वॉटर’ ऑपरेशन्स की क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है. वहीं, पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया है, जिसकी नौसेना को एशिया की सबसे आधुनिक नौसेनाओं में गिना जाता है. दक्षिण कोरिया ने अपनी तकनीक और जहाजों की बनावट पर इतना निवेश किया है कि उसने जापान और कई यूरोपीय देशों को भी पीछे छोड़ दिया है.

विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति और क्षमता

भारतीय नौसेना इस सूची में सातवें स्थान पर है, जिसे 100.5 की ट्रू वैल्यू रेटिंग दी गई है. भारत के पास वर्तमान में दो ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर- INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य मौजूद हैं. इसके अलावा भारतीय बेड़े में 19 पनडुब्बियां और 74 फ्लीट कोर शामिल हैं. हालांकि भारत टॉप-5 से बाहर है, लेकिन हिंद महासागर में भारत का एम्फीबियस असॉल्ट दस्ता और उसकी रणनीतिक स्थिति उसे एक बेहद प्रभावशाली ताकत बनाती है. लेकिन चीन के बढ़ते कद को देखते हुए भारत को अपने आधुनिकीकरण की गति तेज करनी होगी.

Business : मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल में उछाल से भारत में बढ़ेगी महंगाई? निर्मला सीतारमण का बड़ा जवाब

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वेस्ट एशिया में पैदा हुए इस संकट को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश में महंगाई पर सीमित रह सकता है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है. चार साल में पहली बार क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार पहुंचकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. वहीं खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ईरान द्वारा बंद करने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि मिडिल ईस्ट में यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है. भारत जैसे देशों के लिए यह चुनौती और बड़ी है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है.

हालांकि वेस्ट एशिया में पैदा हुए इस संकट को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश में महंगाई पर सीमित रह सकता है. संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में वस्तुओं की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हैं, इसलिए क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है. गौरतलब है कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 26 प्रतिशत तक उछाल देखा गया. यह तेजी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा खामनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है.

एक सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्ला खामनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की धमकी दी गई, जिसके चलते खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल निर्यातक देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने शिपमेंट में कटौती की घोषणा की है.मोज्तबा खामनेई को ऐसे समय में ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी नियुक्ति को मान्यता देने से इनकार कर दिया है. वहीं इजरायल ने भी चेतावनी दी है कि ईरान का जो भी नया नेतृत्व होगा, वह उसके निशाने पर रहेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी को तनाव बढ़ने से पहले पिछले एक साल के दौरान इंडियन क्रूड बास्केट की कीमतों में गिरावट का रुख था. उनके अनुसार फरवरी के अंत में इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत बढ़कर 69.01 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी, जो 2 मार्च को बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. हालांकि उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद भारत के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत मामूली रहेगा.

World : ‘पाकिस्तान का रक्षा बजट बढ़ाएं’, मिडिल ईस्ट के हालात देखकर घबराए ख्वाजा आसिफ, लगाई ये गुहार

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ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान की तरफ से किए गए हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान फितना अल-खारीज जैसे आतंकवादी समूहों से किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा.अफगानिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के साथ तनाव और मिडिल ईस्ट के हालात पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश का रक्षा बजट बढ़ाने आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि देश के आसपास जो हालात हैं, और पिछले दिनों बलूचों और अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में जिस तरह हमले किए, उसको और देश की सुरक्षा के लिए चुनौतियों को देखते हुए जरूरी है कि रक्षा बजट बढ़ाया जाए.

पाकिस्तानी न्यूज चैनल समा टीवी के साथ बात करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मौजूदा हालात देखते हुए, यह जरूरी है कि हम रक्षा बजटा बढ़ाएं ताकि हम हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रह सकें। उन्होंने मिडिल ईस्ट संकट के भू-राजनीतिक प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट होर्मुज से होकर गुजरता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय देश अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने से बच रहे हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर व्यापक रूस से इसको अच्छा नहीं कहा जा रहा है.

ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान की तरफ से किए गए हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान फितना अल-खारीज जैसे आतंकवादी समूहों से किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा. ख्वाजा आसिफ ने कहा, ‘अफगान सरकार और वहां के लोगों का मौजूदा व्यवहार न तो अतीत में स्वीकार्य था, न वर्तमान में और न ही भविष्य में.’

ख्वाजा आसिफ ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ बातचीत के जरिए सुरक्षा मुद्दों को सुलझाने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन उन्होंने इन प्रयासों को अविश्वसनीय बताया. उन्होंने कहा, ‘हम उनसे दो बार मिल चुके हैं, फिर भी धमकियां बरकरार हैं. जब तक खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक अभियान जारी रहना चाहिए.’उन्होंने अफगानिस्तान पर ऐतिहासिक रूप से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाया और दावा किया कि अफगान समर्थन के बिना, पाकिस्तान की सेना ने इन समूहों को पहले ही खत्म कर दिया होता. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वर्तमान स्थिति को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना आवश्यक है.’

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