Thursday, February 26, 2026
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NATIONAL : फलों पर लगाई चूहे मारने की दवा…मलाड में दो फल वाले गिरफ्तार, दुकान सील

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मुंबई के मालाड इलाके में फलों पर चूहे मारने की दवा लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. शिकायत मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो विक्रेताओं को हिरासत में लिया और उनकी दुकान सील कर दी. आरोप है कि फलों को चूहों से बचाने के नाम पर जहरीला पदार्थ लगाया जा रहा था. मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

महाराष्ट्र में मुंबई के उत्तरी उपनगर मालाड में फलों की बिक्री से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि कुछ विक्रेता फलों पर चूहे मारने की दवा लगाकर उन्हें बाजार में बेच रहे थे, जिससे आम लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुकान सील कर दी और दो आरोपियों को हिरासत में लिया.

यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय नागरिक कुणाल सालुंके ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया था कि दो फल विक्रेता फलों को चूहों से बचाने के नाम पर उन पर जहरीला पदार्थ लगा रहे हैं. बताया गया कि यह पूरी घटना कैमरे में भी कैद हुई है, जिसे सबूत के तौर पर पुलिस को सौंपा गया.

मालाड पुलिस स्टेशन की टीम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच की. प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे फलों को चूहों से बचाने के लिए उन पर चूहा मारने की दवा लगाते थे. हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का कृत्य न केवल गैरकानूनी है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनोज कुमार केसरवानी और बिपिन केसरवानी के रूप में हुई है. दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 125, 274, 275 और 286 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने उनकी दुकान को सील कर आगे की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों के साथ इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित विभागों को भी कार्रवाई के लिए सूचित किया जाएगा.

ENTERTAINMENT : एक्ट्रेस डेजी शाह ने दिया सलीम खान का हेल्थ अपडेट, बोलीं- मैं सलमान खान के टच में हूं

दिग्गज स्क्रीनराइटर सलीम खान हॉस्पिटल में एडमिट हैं. अब एक्ट्रेस डेजी शाह ने उनकी हेल्थ को लेकर अपडेट दिया है. उन्होंने बताया कि वो सलमान खान के टच में हैं.दिग्गज स्क्रीनराइटर और सलमान खान के पिता सलीम खान कुछ समय पहले लीलावती हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे. उन्हें मिनिमल ब्रेन हेमरेज हुआ था. इसके बाद सलीम खान की सर्जरी हुई थी. अब सलीम खान की हेल्थ को लेकर एक्ट्रेस डेजी शाह ने रिएक्ट किया है.

हाल ही में एक इंटरव्यू में डेजी शाह ने कहा कि वो सलीम खान और उनकी फैमिली से हॉस्पिटल में मिली नहीं हैं. लेकिन वो सलमान खान के लगातार टच में हैं. वो सलीम खान का हेल्थ अपडेट ले रही हैं. डेजी ने कहा, ‘मैं सलीम सर से मिल नहीं पाई हूं. लेकिन मैं सलमान सर से लगातार बातचीत कर रही हूं. सलीम सर अब ठीक हैं. वो स्थिर हैं. सर्जरी अच्छे से हुई. वो ऑब्जर्वेशन में हैं. वो खतरे से बाहर हैं.’

बता दें कि सलीम खान की सर्जरी के बाद हॉस्पिटल ने मेडिकल बुलेटिन जारी किया था. डॉक्टर पारकर ने बताया था कि सलीम खान की एमआईआर, सीटी स्कैन और बल्ड टेस्ट किए गए हैं. उनकी डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी की गई है. सलीम खान को सुबह 8 बजे हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था. इसके बाद से पूरी फैमिली हॉस्पिटल में नजर आई. जब सलीम खान की तबीयत की खबर सलमान खान को पता चली थी तो उस वक्त वो शूटिंग कर रहे थे. वो सीधे शूटिंग से हॉस्पिटल पहुंचे थे.

सलीम खान से मिलने के लिए कई सेलेब्स भी पहुंचे. रितेश देशमुख से लेकर शाहरुख खान तक सलीम खान को मिलने हॉस्पिटल पहुंचे. जब सलीम खान हॉस्पिटल पहुंचे थे तब उका बीपी हाई थी. उन्हें मिनिमल ब्रेन हेमरेज था. इसीलिए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. अब सलीम खान बेहतर हैं और रिकवर कर रहे हैं.

NATIONAL : चंडीगढ़ सिविल सेक्रेटेरिएट में सनसनी… IAS ऑफिस से जुड़े अधिकारी ने लगाई छलांग, अस्पताल में मौत

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चंडीगढ़ में हरियाणा सिविल सेक्रेटेरिएट से एक अधिकारी द्वारा छलांग लगाने की घटना सामने आई है. गणेश दत्त नाम के इस अधिकारी को गंभीर हालत में सेक्टर 16 जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस मामले की सभी एंगल से जांच कर रही है.हरियाणा सिविल सेक्रेटेरिएट से एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर छलांग लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस घटना में अधिकारी की मौत हो गई, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.

जानकारी के अनुसार, मृतक अधिकारी की पहचान गणेश दत्त के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि वह एक आईएएस अधिकारी के कार्यालय में तैनात थे. घटना उस समय हुई जब उन्होंने हरियाणा सिविल सेक्रेटेरिएट की एक मंजिल से छलांग लगा दी. मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया.गंभीर हालत में गणेश दत्त को सेक्टर 16 जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अधिकारी ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया. पुलिस आत्महत्या और अन्य संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है.प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए सहकर्मियों से पूछताछ की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं.

इस दुखद घटना के बाद प्रशासनिक गलियारों में शोक की लहर है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा.

ENTERTAINMENT : ‘दारू बेचने वाले को कहीं नहीं जाना पड़ता लेकिन दूध बेचने वाले को…’, सोनू सूद के वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर मचाई हलचल

इन दिनों सोशल मीडिया पर अभिनेता सोनू सूद का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी के लिए पहचाने जाने वाले सोनू सूद इस बार किसी नई फिल्म या प्रोजेक्ट की वजह से नहीं, बल्कि अपने गहरे और सोचने पर मजबूर कर देने वाले वीडियो से चर्चा में हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह जिंदगी के कुछ ऐसे कड़वे सच सामने रखते नजर आ रहे हैं, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. उनके शब्द इंसान को खुद के बारे में सोचने पर मजबूर कर देते हैं.

वीडियो में सोनू सूद कहते हैं, ‘कभी सोचा है कि दारू बेचने वाले को कहीं नहीं जाना पड़ता, लेकिन दूध बेचने वाले को घर-घर और गली-गली जाना पड़ता है. हम दूध बेचने वाले से पूछते है कि तूने दूध में पानी तो नहीं मिलाया और दारू में खुद पानी मिलाकर पीते है. नमक की तरह कड़वा बोलने वाला हमेशा आपका दोस्त होता है इसीलिए कभी नमक में कीड़ा नहीं लगता और मिठाई में अक्सर कीड़े लग जाते है. कभी आपने सोचा है कि हम पूरी जिंदगी उस तस्वीर की तारीफ करते है. लेकिन उसका बोझ एक कील उठाती है, जिसे हम हमेशा भूल जाते है. मोमबत्ती जलाकर हम मुर्दों को याद करते है और मोमबत्ती बुझा कर हम जन्मदिन मनाते है. पायल जिसकी कीमत हजारों में होती है, वो पैरों में पहनी जाती है और बिंदी जिसकी कीमत सिर्फ 1 रुपया होती है वो माथे पर सजाई जाती है. ये है वो समय, जहां पर घर में पड़ी कुरान और गीता आपस में कभी नहीं लड़ती और जो लोग उसके लिए लड़ते है उन्होंने कभी उसे पढ़ा ही नहीं. वाह रे इंसान, सुधार जा, अभी भी समय हैं.’

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कई यूजर्स ने सोनू सूद की सोच की तारीफ की है और कमेंट सेक्शन में हार्ट और तालियों की इमोजी से उनकी सराहना कर रहे है. इस वीडियो को अबतक 6.2 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है. यह वीडियो सिर्फ कुछ लाइनों का संदेश नहीं, बल्कि खुद सोचने की एक पहल है. सोनू सूद का यह अंदाज एक बार फिर साबित करता है कि वह सिर्फ पर्दे के हीरो नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी लोगों को राह दिखाने की कोशिश करते रहते हैं.

NATIONAL : ‘शीश महल, स्विमिंग पूल और बालिकाएं…’ शंकराचार्य की शिष्या नील मणि ने कहा- सभी आरोप गलत

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वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मठ और उन पर लगे आरोपों के बीच अब शंकराचार्य परंपरा से जुड़ी उनकी पुरानी शिष्या नील मणि शास्त्री सामने आई हैं. उन्होंने मठ की संरचना, यहां की शिक्षा व्यवस्था, बालिकाओं की मौजूदगी और तथाकथित शीश महल व स्विमिंग पूल जैसे दावों पर विस्तार से अपनी बात रखी है.

वाराणसी के केदार घाट स्थित विद्या मठ को लेकर इन दिनों विवाद और आरोपों का दौर जारी है. प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज FIR में गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों के बीच मठ से लंबे समय से जुड़ीं और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की शिष्या नील मणि शास्त्री से बातचीत की गई, तो उन्होंने एक-एक आरोप पर विस्तार से जवाब दिया.

नील मणि शास्त्री ने बताया कि उनकी दीक्षा वर्ष 1986 में हुई थी, जबकि यह मठ 1996 में बना. यानी वह इस स्थान और परंपरा को उसकी स्थापना से पहले से जानती हैं. उनके अनुसार, वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को तब से जानती हैं, जब वे शंकराचार्य भी नहीं बने थे. उनका कहना है कि इस मठ की परंपरा बेहद पुरानी और अनुशासित रही है और यहां की गतिविधियां पूरी तरह पारदर्शी हैं.

नील मणि शास्त्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस मठ में कभी भी बालिकाएं नहीं पढ़तीं. उन्होंने बताया कि बालिकाओं की शिक्षा के लिए अलग से मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में एक आश्रम है, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं उनके पास है. वहां बच्चियां रहती हैं और पढ़ाई करती हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वाराणसी स्थित इस मठ का उस व्यवस्था से कोई सीधा संबंध नहीं है.

काशी में स्थित मठ में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर भी कई सवाल उठे. इस पर उन्होंने बताया कि यहां केवल वेदपाठी ब्राह्मण बालक ही पढ़ते हैं, जिनका एडमिशन पांचवीं कक्षा के बाद होता है. आमतौर पर 10 से 15 साल की उम्र के बच्चों को यहां प्रवेश दिया जाता है.उन्होंने कहा कि यहां वेदों की पढ़ाई का छह साल का कोर्स होता है और हर छात्र का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है. बिना रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज के किसी का भी प्रवेश संभव नहीं है.

आरोपों में जिन दो छात्रों का जिक्र किया गया है, उन पर नील मणि शास्त्री ने कहा कि उन्होंने ऐसे किसी छात्र को कभी मठ में नहीं देखा. उन्होंने यह भी बताया कि मठ में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड दर्ज होता है.उनके मुताबिक, जब 300 से ज्यादा छात्रों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, तो सिर्फ दो छात्रों का कोई रिकॉर्ड न होना ही इस बात का संकेत है कि आरोपों में दम नहीं है.

मठ को लेकर एक और बड़ा दावा किया गया था कि यह पांच मंजिला है, इसमें शीश महल और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं हैं. इस पर उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे आरोप लगा रहे हैं, वे खुद आकर देख सकते हैं.उन्होंने कहा कि मठ की संरचना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कहीं ऊंची इमारत है भी, तो उसमें गलत क्या है- जब तक वहां कोई गलत गतिविधि न हो.

स्विमिंग पूल के आरोप पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई मनोरंजन के लिए बनाया गया पूल नहीं था, बल्कि पूर्व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के स्वास्थ्य कारणों से एक पानी की टंकी (हौदी) बनाई गई थी, ताकि वह उसमें बैठकर व्यायाम कर सकें. उनके अनुसार, अब उस स्थान का कोई विशेष उपयोग नहीं है और वहां सामान्य सामान रखा हुआ है.

नील मणि शास्त्री ने यह भी कहा कि उन्हें POCSO कानून के बारे में जानकारी ही नहीं थी, जब तक कि यह मामला सामने नहीं आया. उन्होंने कहा कि पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और सच्चाई सामने लानी चाहिए.

उन्होंने पूरे मामले को सिर्फ व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पर हमला बताया. उनका कहना है कि इस तरह के आरोप न सिर्फ किसी व्यक्ति बल्कि पूरी धार्मिक व्यवस्था को निशाना बनाते हैं.उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि अंततः सत्य की जीत होती है और उन्हें भरोसा है कि जांच में भी सच सामने आएगा.

मठ से जुड़े अन्य स्थानों- जैसे जबलपुर या जोशीमठ को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि सभी आश्रम स्वतंत्र रूप से संचालित होते हैं. वहां के छात्र, शिक्षक और व्यवस्थाएं अलग-अलग हैं.उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों का एक आश्रम से दूसरे आश्रम में जाना सामान्य प्रक्रिया नहीं है, और पढ़ाई व्यवस्थित तरीके से अपने-अपने स्थान पर ही होती है.

नील मणि शास्त्री ने कहा कि मठ पूरी तरह खुला है और कोई भी व्यक्ति आकर यहां की व्यवस्था देख सकता है. उन्होंने दावा किया कि यहां कोई भी गतिविधि छिपाकर नहीं की जाती.वाराणसी के इस मठ को लेकर जहां एक तरफ गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर मठ से जुड़े लोगों का पक्ष भी सामने आ रहा है. नील मणि शास्त्री ने अपने अनुभव और जानकारी के आधार पर इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है.

UP : मौसी के घर आई युवती को मौसा से ही हो गया प्यार, साथ रहने की जिद पर अड़ी……..

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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां एक युवती को सगे मौसा से ही प्यार हो गया. जिसके बाद वह मौसा के साथ ही रहने की जिद पर अड़ गई. उसके परिजन जब उसे लेने आए तो वह मौसा के घर चिल्लाने लगी. सड़क पर ही वह चिल्ला-चिल्लाकर कहती रही कि “खालू” के साथ… वहीं इसकी जानकारी लगते ही उसके परिजन भी वहां पहुंच गए और जबरन ऑटो में बैठाकर उसे घर ले गए.

फतेहपुर जिले में एक युवती अपने ही मौसा के साथ रहने की जिद पर अड़ गई. मामला इतना बढ़ा कि सड़क पर ही घंटों यह ड्रामा चलता रहा और आसपास के सैकड़ों लोग तमाशबीन बनकर जुट गए.बताया जाता है कि युवती शादीपुर स्थित अपने मौसा के घर आई थी. जहां से उसके परिजन उसे जबरन ऑटो में भरकर ले जा रहे थे. इस दौरान युवती अपने मौसा के साथ रहने की जिद करने लगी. साथ ही वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी कि वह अपने “खालू” के साथ ही रहना चाहती है.

युवती से बात करने पर वह बार-बार कह रही थी कि उसे अपने खालू के साथ रहना है और वह उन्हीं की पत्नी बनकर रहना चाहती है, जबकि मौसा पहले से विवाहित हैं. इस पर भी युवती अपने फैसले पर अड़ी रही और कहती है कि सबकी दो बीवियां होती हैं, मुझे उनके साथ ही रहना है. घटना के दौरान सड़क पर भारी भीड़ जमा हो गई. स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब कई घंटों तक यह ड्रामा चलता रहा और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया.

परिवारिक मामला होने के कारण परिजनों ने थाने में कोई तहरीर नहीं दी है. फिलहाल यह हाईप्रोफाइल ड्रामा इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस विषय पर तरह- तरह की बातें कर रहे हैं. मौसी ने बताया कि युवती उनकी सगी बहन की बेटी है और करीब 18 महीने पहले बच्ची के जन्म के समय मेरे ऑपरेशन के दौरान मदद के लिए बुलाने पर घर आई थी. जिसके बाद से उसके और उनके पति के बीच नजदीकियां बढ़ीं. पत्नी का आरोप है कि इस विवाद को लेकर घर में कई बार तनाव हुआ और मारपीट की नौबत भी आ गई.

NATIONAL : सास- ससुर से झगड़े में बहू ने घोंट दिया 22 दिन की बेटी का गला, विदेश में रहता है पति

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बागेश्वर के बैजनाथ थाना क्षेत्र के जैसर गांव में 22 दिन की नवजात बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने की पुष्टि होने के बाद दादा की तहरीर पर मां के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पारिवारिक विवाद के पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है.

उत्तराखंड के बागेश्वर में बैजनाथ थाना क्षेत्र के जैसर गांव में एक ऐसी क्रूर घटना सामने आई है, जिसने माँ की ममता को कलंकित कर दिया. एक निर्दयी मां ने अपनी महज 22 दिन की नवजात बेटी का गला दबाकर हत्या कर दी. यह घटना पूरे इलाके में सनसनी फैला रही है और ग्रामीण समाज में स्त्री-शिशु सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्ची की हत्या के बाद परिवार में हड़कंप मच गया.

मासूम बच्ची के दादा केशर सिंह ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया, जिसमें डॉक्टरों ने स्पष्ट पुष्टि की है कि बच्ची का गला दबाया गया था. रिपोर्ट के आधार पर केशर सिंह ने बैजनाथ थाना कोतवाली में आरोपी माँ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. उन्होंने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. परिवार के सदस्यों का कहना है कि माँ का यह कृत्य बेहद दुःखद है, जिसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया. गांव में शोक की लहर दौड़ गई है.

पुलिस उपाधिक्षक अजय साह ने बताया कि केशर सिंह द्वारा थाना बैजनाथ में तहरीर देकर अवगत कराया है कि उनके बहु द्वारा अपनी 22 दिन की बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गयी है, जिसमें आज हमने थाने में मुकदमा पंजीकृत कर दिया है.उन्होंने बताया की पुलिस पुरे मामले में विधिक कार्यवाही कर रही है. केशर सिंह ने बताया की उनके दो बेटे हैं. बड़ा बेटा विदेश में नौकरी करता है, जबकि छोटा बेटा घर के कामों में माता-पिता का हाथ बंटाता है. बड़े बेटे की अप्रेल 2025 में शादी हुई थी. केशर सिंह के अनुसार, शादी के तीन महीने तक सब ठीक रहा, लेकिन उसके बाद बहू छोटी-छोटी बातों पर कलह करने लगी. उसके माता-पिता ने भी बेटी का पक्ष लेते हुए तांत्रिकों के कहने पर अलग-अलग आरोप लगाए, जिससे घर में हमेशा अशांति रहने लगी. कुछ समय बाद जब घर में नन्ही किलकारी गूंजी, तब भी मासूम की मां का छोटी-छोटी बातों पर अपने सास ससुर से कलह जारी रहा.

अपनी पुत्रबधु की प्रताड़ना से परेशान होकर केशर सिंह ने पुलिस अधीक्षक बागेश्वर को अपनी पुत्रबधु के विरुद्ध एक शिकायति पत्र दिया था जिस पर महिला हेल्प लाइन में काउंसलिंग चल रही थी. लेकिन बहू नहीं गयी बल्कि उल्टा वन स्टॉप सेंटर में फोन के माध्यम से सास ससुर पर ही झूठी शिकायत कर दी . घटना की दिन सुबह वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारी घर आये और सास ससुर व बहू की काउंसलिंग करवाई गयी, जिसमें बहू ने अपने सास ससुर से अलग रहने खाने का लिखित में कथन किया.उसके सास ससुर द्वारा उसे अलग रहने खाने के लिए उसके मुताबिक कमरा दे दिया गया लेकिन उसी शाम ये घटना हो गयी.

दुःखद घटना के बाद शक होने पर मासूम बच्ची के दादा केशर सिंह ने शव का पोस्टमॉर्टम कराये जाने का आग्रह किया गया. पोस्टमार्टम होने के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट पुष्टि की कि बच्ची का गला दबाया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने बैजनाथ थाना कोतवाली में आरोपी पुत्रबधु के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. उन्होंने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

NATIONAL : ‘अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता’, यौन शोषण का आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा

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प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज पॉक्सो एफआईआर के बाद अब वादी आशुतोष ब्रह्मचारी ने मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने पुलिस अधिकारी के साथ वायरल फोटो को AI जनित बताते हुए स्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं कोर्ट में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ एफिडेविट दाखिल किए हैं.

प्रयागराज के झूंसी थाने में एडीजे पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ यौन शोषण की एफआईआर दर्ज हुई है. वादी आशुतोष ब्रह्मचारी ने 25 फरवरी 2026 के आसपास बयान जारी कर दावा किया कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं जो आरोपियों को जेल पहुंचाएंगे. उन्होंने पुलिस अधिकारी के साथ अपनी वायरल फोटो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनी फर्जी तस्वीर करार दिया. यह कानूनी विवाद नाबालिग शिष्यों के शोषण के आरोपों और एक-दूसरे के आपराधिक इतिहास को लेकर शुरू हुआ है. आशुतोष ने इसे ‘धार्मिक लड़ाई’ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आशुतोष ब्रह्मचारी को आपराधिक इतिहास वाला व्यक्ति बताया था. इसके जवाब में आशुतोष ने चुनौती दी है कि स्वामी कोई भी ऐसा अदालती सबूत पेश करें जो उन्हें अपराधी साबित करे. आशुतोष का कहना है कि उनके खिलाफ 21 मुकदमों की जो लिस्ट वायरल की गई है, वह पूरी तरह फर्जी है और पुलिस ने भी ऐसी किसी सूची की पुष्टि नहीं की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद पीड़ित नहीं बल्कि केवल एक ‘सूचनाकर्ता’ हैं जो बटुकों (बच्चों) को न्याय दिलाना चाहते हैं.

बातचीत के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तुलना ‘कालनेमी’ से की. उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी एक डिप्टी सीएम के इशारे पर माघ मेले में धरने पर बैठे थे, जिसकी जांच के लिए डीजीपी को पत्र भेजा गया है. आशुतोष ने घोषणा की है कि वे जल्द ही ‘सनातन न्याय यात्रा’ निकालेंगे ताकि स्वामी की असलियत जनता के सामने ला सकें. उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ गवाहों को डराया जा रहा है और झूठी साजिशें रची जा रही हैं.

बीते शुक्रवार को एडीजे पॉक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान स्वामी मुकुंदानंद के वकील ने 104 पेज का एफिडेविट दाखिल किया. इसमें आशुतोष पर 27 मुकदमे होने का दावा करते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा 22 और 23 के तहत कार्रवाई की मांग की गई. आरोप है कि आशुतोष ने पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक की है. वहीं, आशुतोष ने इन दावों को झूठा बताते हुए कोर्ट से मोहलत मांगी है और ‘इन पर्सन’ यानी खुद बहस करने की इच्छा जताई है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च के बाद होगी.

ENTERTAINMENT : डॉल जैसी दिखती हैं राजपाल यादव की छोटी बेटी, क्यूटनेस में देती हैं राहा और तैमूर को मात

राजपाल यादव इन दिनों मुश्किलों से घिरे हुए नजर आ रहे हैं.हालांकि, अब धीरे-धीरे उनकी जिंदगी ट्रैक पर लौटती हुई दिखाई दे रही है. इसी बीच एक्टर की फैमिली भी सुर्खियों में छाई हुई है.राजपाल यादव इन दिनों मुश्किलों से घिरे हुए नजर आ रहे हैं.हालांकि, अब धीरे-धीरे उनकी जिंदगी ट्रैक पर लौटती हुई दिखाई दे रही है. इसी बीच एक्टर की फैमिली भी सुर्खियों में छाई हुई है.

राजपाल यादव की बेटी रेहांशी की क्यूटनेस और मासूमियत के तो लोग फैन हो चुके हैं. यही वजह है कि रेहांशी की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.राजपाल यादव अक्सर अपनी लाडली के संग सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करते रहते हैं. साथ ही वो इस बात को जाहिर करना कभी नहीं भूलते कि उनकी बेटियां उनके लिए कितनी इंपॉर्टेंट हैं.

चिल्ड्रेन डे हो डॉटर्स डे हो या फिर बर्थडे, राजपाल यादव अपनी लाडली पर जमकर प्यार बरसाते हैं और एक से बढ़कर एक तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं.राजपाल यादव और उनकी बेटियों के बीच शानदार बॉन्ड देखने को मिलता है. लेकिन, तस्वीरें देख लगता है कि छोटी बेटी उनकी सबसे ज्यादा लाडली है.राजपाल यादव की छोटे बेटी रेहांशी का जन्म 2018 में हुआ था. एक्टर अपनी बेटी को प्यार से रेहू बुलाते हैं.

रेहांशी अब 8 साल की हो चुकी हैं. लेकिन, क्यूटनेस में तो वो राहा और तैमूर को भी मात देती हुई दिखाई देती हैं.रेहांशी तस्वीरों में एक से बढ़कर एक पोज देती हुई दिखाई देती हैं. उनका ये अंदाज लोगों को काफी पसंद आ रहा है.वैसे तो राजपाल यादव की तीनों बेटियां ही लाइमलाइट से दूर रहती हैं. लेकिन, इन दिनों उनका पूरा परिवार ही सुर्खियों में छाया हुआ है.रेहांशी की मां राजपाल यादव की दूसरी पत्नी हैं. एक्टर की पहली बेटी ज्योति की मां उनकी पहली पत्नी थी.

NATIONAL : नॉर्थ ईस्ट की लड़कियों पर नस्लीय कमेंट करने वाली महिला गिरफ्तार… दिल्ली पुलिस ने लिया एक्शन

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राजधानी नई दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों के साथ नस्लीय और आपत्तिजनक कमेंट के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक्शन लिया है. पुलिस ने आरोपी महिला और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया है. जांच के दौरान मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं. अब केस की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी की निगरानी में की जा रही है.

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों के साथ नस्लीय टिप्पणी और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया था. एक मामूली विवाद, जो एयर कंडीशनर (AC) लगाने के दौरान शुरू हुआ, देखते ही देखते गंभीर आरोपों में बदल गया और सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल हो गया. इस मामले में पुलिस ने आरोपी महिला और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया है.

दरअसल, यह मामला 20 फरवरी का है. अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली तीन युवतियां अपने किराए के फ्लैट में AC लगवा रही थीं. इंस्टॉलेशन के दौरान ड्रिलिंग और कामकाज के चलते कुछ धूल-मिट्टी नीचे वाले फ्लैट की ओर गिर गई. यही बात नीचे रहने वाली पड़ोसी महिला को नागवार गुजरी और उसने इस पर आपत्ति जताई.

शुरुआत में यह मामला सामान्य पड़ोसी विवाद जैसा ही था, लेकिन जल्द ही यह तीखा हो गया. आरोप है कि महिला ने गुस्से में आकर युवतियों के खिलाफ नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं. इसी दौरान किसी ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

वीडियो सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया. वीडियो में आरोपी महिला को युवतियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते देखा और सुना जा सकता है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया और कई यूजर्स ने इसे नस्लीय भेदभाव का मामला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की.

पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ भेदभाव के मुद्दे पर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है, और इस घटना ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को सामने ला दिया.घटना के बाद पीड़ित युवतियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. शुरुआती जांच में वीडियो और अन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया.

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मामले में अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लागू हो सकती हैं, जिसके बाद केस में इन प्रावधानों को जोड़ा गया. जांच के आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने आरोपी महिला, जिसकी पहचान रूबी जैन के रूप में हुई है, को गिरफ्तार कर लिया. इसी के साथ उसके पति हर्ष जैन को भी अरेस्ट कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद आगे की पूछताछ जारी है और मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में की जा रही है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और वीडियो के अलावा अन्य साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके.

इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से भी सफाई सामने आई है. आरोपी महिला के परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि विवाद को एकतरफा तरीके से पेश किया गया है. उनका दावा है कि AC इंस्टॉलेशन के दौरान सिर्फ धूल ही नहीं, बल्कि कुछ भारी कण और मलबा भी नीचे गिरा था, जिससे नुकसान की आशंका बनी.

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गुस्से में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जो नहीं होना चाहिए था. आरोपी पक्ष ने इसके लिए माफी भी मांगी है और कहा है कि उनकी मंशा किसी का अपमान करने की नहीं थी. फिलहाल, पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है. आरोपी महिला को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच ACP स्तर के अधिकारी द्वारा की जा रही है.

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