Wednesday, September 30, 2026
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WORLD : एलन मस्क का सबसे बड़ा दांव: पहली बार अंतरिक्ष में पहुंचा दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट; 26 स्टारलिंक V3 भी साथ

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एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने सोमवार को टेक्सास के स्टारबेस से अपने विशाल स्टारशिप-सुपर हेवी रॉकेट को लॉन्च किया। यह स्टारशिप की 14वीं परीक्षण उड़ान है और मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार इसे पृथ्वी की कक्षा में भेजने की योजना बनाई गई है। इस मिशन में 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में तैनात किए जाने हैं।

पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचेगा स्टारशिप

स्पेसएक्स की योजना के मुताबिक स्टारशिप करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाएगा। पूरा मिशन करीब 10 घंटे चलने की उम्मीद है। इसके बाद स्टारशिप के प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास स्प्लैशडाउन करने की योजना है। यह उड़ान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्टारशिप को पूरी तरह और तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले अंतरिक्षयान के रूप में विकसित करने के अगले चरण की शुरुआत होगी।

26 स्टारशिप V3 सैटेलाइट होंगे तैनात

इस मिशन में पहली बार स्टारलिंक V3 सैटेलाइट तैनात किए जाएंगे। स्पेसएक्स के अनुसार 26 सैटेलाइटों को कक्षा में भेजने की योजना है। कंपनी का कहना है कि नई पीढ़ी के ये सैटेलाइट स्टारलिंक नेटवर्क की क्षमता और इंटरनेट सेवा की गति को काफी बढ़ाने में मदद करेंगे। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट को ज्यादा डेटा क्षमता, अधिक पावर और बेहतर नेटवर्क क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध मिशन विवरण के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता जोड़ सकता है।

407 फीट ऊंचा है स्टारशिप

स्टारशिप-सुपर हेवी की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी लगभग 407 फीट है। इसमें दो मुख्य हिस्से हैं सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। स्पेसएक्स के लिए इसका लक्ष्य केवल एक बड़ी रॉकेट उड़ान भरना नहीं है। कंपनी लंबे समय से ऐसे लॉन्च सिस्टम को विकसित कर रही है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में चंद्रमा और मंगल से जुड़े मिशनों के लिए भी किया जा सके।

बूस्टर के सामने भी बड़ी चुनौती

फ्लाइट 14 में सुपर हेवी बूस्टर के लिए लॉन्च के बाद सफल चढ़ाई, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न महत्वपूर्ण परीक्षण होंगे। इसके बाद बूस्टर की लैंडिंग की योजना खाड़ी में एक समुद्री क्षेत्र में है। पिछले परीक्षण में सामने आई समस्याओं को देखते हुए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए हैं।

WORLD : ट्रंप का बड़ा दावा- जल्द खत्म हो सकता है अमेरिका-ईरान युद्ध, समझौते के ड्राफ्ट पर चर्चा तेज

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। दोनों देशों के बीच संभावित समझौते के ड्राफ्ट पर चर्चा आगे बढ़ने की बात भी सामने आई है।

करीब छह महीने से जारी अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि यह संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा और जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसी बीच दोनों देशों के बीच संभावित समझौते के ड्राफ्ट पर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों ने कूटनीतिक हलचल भी तेज कर दी है।

समझौता चाहता हूं, लोगों की जान नहीं लेना चाहता: ट्रंप
जंग को लेकर ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान में एक जरूरी सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। उनके मुताबिक, यह कदम इसलिए जरूरी था, क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि युद्ध जल्द ही खत्म होने वाला है। मुझे नहीं लगता कि वे ज्यादा समय तक टिक पाएंगे।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान पर हमला कर रहा है, लेकिन उनकी प्राथमिकता समझौता है, क्योंकि वह लोगों की जान नहीं लेना चाहते। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दूसरे विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े हमले की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान ईरान की ओर से उन्हें फोन कर बातचीत की अपील की गई, हालांकि बाद में इस दावे से इनकार कर दिया गया। ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिका का सम्मान करता है, लेकिन उसके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।

समझौते के मसौदे पर बातचीत आगे बढ़ी
युद्ध के साथ-साथ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर के अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के ड्राफ्ट पर चर्चा काफी आगे बढ़ चुकी है। उनका कहना है कि फिलहाल कोशिश एक अल्पकालिक कूटनीतिक समाधान निकालने की है।

हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव अभी भी बना हुआ है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में हालात सामान्य होने की उम्मीद की जा सकती है।

फरवरी में शुरू हुआ था युद्ध, दो बार हुआ युद्धविराम
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा युद्ध की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी। उसी समय अमेरिका और इजराइल ने मिलकर तेहरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार जारी है और अब इसे लगभग छह महीने पूरे होने वाले हैं।

इस दौरान दो बार अस्थायी सीजफायर भी हुआ। अप्रैल 2026 में दोनों देशों के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू किया गया था। इसके बाद जून 2026 में भी कुछ समय के लिए दोनों पक्षों ने संघर्ष रोका, लेकिन यह ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका। अब एक ओर ट्रंप युद्ध जल्द खत्म होने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर समझौते के मसौदे पर जारी बातचीत ने इस संघर्ष के भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

WEATHER : आज नौ राज्यों में आंधी-बारिश के आसार, मैदानी इलाकों में तापमान गिरा; कई जगह बारिश-भूस्खलन

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उत्तर भारत पहुंचे पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम का मिजाज बदल रहा है। पहाड़ों पर कहीं राहत तो कहीं आफत की बारिश हो रही है। उत्तराखंड में केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन के अलावा पहाड़ों इलाकों में बर्फबारी की खबर है। मैदानी इलाकों में बारिश से तापमान गिर रहा है।

पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय होने के कारण जम्मू-कश्मीर से उत्तराखंड तक पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदान में भारी बारिश जारी है। इससे पारा 10 डिग्री तक गिरा है। केदारनाथ मार्ग में लगातार दूसरे दिन भूस्खलन के बाद यात्रा रोक दी गई है। चट्टान की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि रास्ते पर मलबा आने से 1,500 से अधिक श्रद्धालु फंस गए, जिन्हें मुश्किल से सुरक्षित निकाल कर गौरीकुंड पहुंचाया गया। मौसम विभाग ने मौजूदा हालात पर सोमवार आधी रात के बाद करीब ढाई बजे अपडेट दिया। इसके मुताबिक उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बना गहरा निम्न दबाव पिछले 6 घंटों में 13 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है।

अगले दो दिनों में कैसा रहेगा मिजाज
मौसम विभाग ने बताया कि 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार रात करीब 1930 बजे से 2130 बजे के बीच गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र क्यैकटो के पूर्व में म्यांमार तट को पार कर गया। इस दौरान हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटे रही। इसके बाद, यह उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ गया। अगले दो दिनों के दौरान निम्न दबाव का क्षेत्र तटीय म्यांमार और उससे सटे पूर्वी मध्य और उत्तरपूर्वी बंगाल की खाड़ी और दक्षिणपूर्वी बांग्लादेश में उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ते रहने की संभावना है।

निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर, मौसम विभाग चक्रवाती हवा पर क्या बोला?
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर हो गया है, लेकिन चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है। वहीं, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके चलते ही सोमवार को उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, राजस्थान, बिहार और अंडमान-निकोबार में गरज के साथ बौछारें पड़ीं। वहीं, मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश हुई।

आज नौ राज्यों में आंधी-बारिश के आसार
उत्तर-पश्चिम समेत पूर्वी भारत के नौ से अधिक राज्यों में मंगलवार को आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है और बुधवार से राहत की उम्मीद है, लेकिन उमस बढ़ सकती है।

29-30 सितंबर को कहीं-कहीं बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिर सकती है।
पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण सड़कें बंद
हिमाचल प्रदेश में सोमवार को लगातार तीसरे दिन किन्नौर, लाहौल स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि राजधानी शिमला, धर्मशाला समेत अन्य जिलों में बादल बरसे। प्रदेश के अधिकतम तापमान में आठ से दस डिग्री की गिरावट आने से मौसम में ठंडक बढ़ गई है। प्रदेश में 61 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। 49 बिजली ट्रांसफार्मर भी बंद रहे।

फसलों को संभावित नुकसान से ग्रामीण चिंतित
उत्तराखंड की व्यास घाटी में आदि कैलाश, नाभीढांग, कुटी में दो से पांच फीट बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है इससे कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला यात्रा मार्ग बंद हो गया है। व्यास घाटी आदि कैलाश में पांच फीट तक बर्फ होने से जहां पर्यटक खुश हो गए। वहीं, फसलों को संभावित नुकसान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी।

बिहार में कई नदियां उफान पर
नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी बारिश से बिहार में गंडक, कोसी, बागमती नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। सुपौल और पश्चिम चंपारण जिले में करीब 82,000 लोग प्रभावित हुए हैं।

उत्तर भारत में बढ़ेगी उत्तर-पश्चिमी हवा
आईएमडी के अनुसार, जम्मू के आसपास बना पश्चिमी विक्षोभ अगले 36 घंटों में पहाड़ों से आगे निकल जाएगा। इसके बाद मंगलवार से निचले स्तरों पर तेज उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने लगेंगी, जिससे मौसम साफ होगा।

नेपाल में देखते-देखते ढही इमारत
नेपाल में लगातार जारी बारिश के बीच बांगलुंग में नगर पालिका भवन ढहने का वीडियो सामने आया है। नदी के कटाव के कारण इमारत का एक हिस्सा धराशायी हो गया और देखते ही देखते इमारत नदी में समा गई। उधर, पानी बढ़ने से नारायणी नदी में बंधे एक क्रूज शिप की रस्सी टूट गई। शिप करीब 100 मीटर तक नदी के बहाव के साथ बहता चला गया और पुल के पिलर से टकरा गया। नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर विकराल हो गई है।

SPORTS : एशियन गेम्स 2026 मेडल टैली: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट देखें

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आइची-नागोया में अब तक भारत ने 53 पदक जीते हैं, जिसमें छह गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। यहां भारत के सभी पदक विजेताओं के नाम और पूरी पदक तालिका देखें।

यह महाद्वीपीय मल्टी-स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का 20वां संस्करण है, जिसकी आधिकारिक शुरुआत 19 सितंबर को हुई और इसका समापन 4 अक्टूबर को निर्धारित है।

एशियन गेम्स 2026 में 43 खेलों और 71 डिसिप्लिन में कुल 469 पदक स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं।

एशियन गेम्स के पिछले संस्करण हांगझोऊ 2023 में 650 सदस्यीय भारतीय दल ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे। इसमें 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा था।

भारत के लिए एथलेटिक्स सबसे ज्यादा पदक जीतने वाला खेल रहा, जहां कुल 29 पदक मिले, जिसमें छह गोल्ड शामिल थे। इसके बाद शूटिंग का स्थान रहा, जिसने 22 पदक दिलाए, जिसमें सात गोल्ड मेडल शामिल थे।

भारत को उम्मीद है कि आइची-नागोया 2026 में उसके पदकों की संख्या में और इजाफा होगा। इसके लिए भारत ने जापान में होने वाले इस बड़े खेल आयोजन के लिए एक मजबूत दल उतारा है।

सुचिका तरियाल ने आइची-नागोया 2026 एशियन गेम्स में महिला ट्रेडिशनल -60 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक हासिल किया।

सेमी-फाइनल में पहुंचने के बाद जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भी वही कारनामा दोहराया।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने फ़ाइनल में श्रीलंका को हराकर अपना ख़िताब बरकरार रखा और इस टूर्नामेंट में देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता।

मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 1998 के बैंकॉक गेम्स के बाद वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए पहला एशियाई गेम्स मेडल हासिल किया।

रोशिबिना देवी ने भी वुशू में लगातार अपना तीसरा कॉन्टिनेंटल मेडल जीता।

सीमा कुमारी ने भी एशियाई गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में मेडल जीतकर भारत के 16 साल बाद पदक जीता।

कमलजीत और सुरुचि सिंह ने मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतने के दौरान एशियन रिकॉर्ड की बराबरी की।

बरानिका इलांगोवन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता और एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय पोल वॉल्टर बन गईं।
सावन बरवाल ने नया नेशनल रिकॉर्ड बनाते हुए 1982 के बाद मैराथन में भारत का पहला मेडल जीता।

एशियन गेम्स 2026 मेडल टैली: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट देखें
आइची-नागोया में अब तक भारत ने 53 पदक जीते हैं, जिसमें छह गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। यहां भारत के सभी पदक विजेताओं के नाम और पूरी पदक तालिका देखें।

यह महाद्वीपीय मल्टी-स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का 20वां संस्करण है, जिसकी आधिकारिक शुरुआत 19 सितंबर को हुई और इसका समापन 4 अक्टूबर को निर्धारित है।

एशियन गेम्स 2026 में 43 खेलों और 71 डिसिप्लिन में कुल 469 पदक स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं।

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एशियन गेम्स के पिछले संस्करण हांगझोऊ 2023 में 650 सदस्यीय भारतीय दल ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे। इसमें 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा था।

भारत के लिए एथलेटिक्स सबसे ज्यादा पदक जीतने वाला खेल रहा, जहां कुल 29 पदक मिले, जिसमें छह गोल्ड शामिल थे। इसके बाद शूटिंग का स्थान रहा, जिसने 22 पदक दिलाए, जिसमें सात गोल्ड मेडल शामिल थे।

भारत को उम्मीद है कि आइची-नागोया 2026 में उसके पदकों की संख्या में और इजाफा होगा। इसके लिए भारत ने जापान में होने वाले इस बड़े खेल आयोजन के लिए एक मजबूत दल उतारा है।

सुचिका तरियाल ने आइची-नागोया 2026 एशियन गेम्स में महिला ट्रेडिशनल -60 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक हासिल किया।

सेमी-फाइनल में पहुंचने के बाद जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भी वही कारनामा दोहराया।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने फ़ाइनल में श्रीलंका को हराकर अपना ख़िताब बरकरार रखा और इस टूर्नामेंट में देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता।

मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 1998 के बैंकॉक गेम्स के बाद वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए पहला एशियाई गेम्स मेडल हासिल किया।

रोशिबिना देवी ने भी वुशू में लगातार अपना तीसरा कॉन्टिनेंटल मेडल जीता।

सीमा कुमारी ने भी एशियाई गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में मेडल जीतकर भारत के 16 साल बाद पदक जीता।

कमलजीत और सुरुचि सिंह ने मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतने के दौरान एशियन रिकॉर्ड की बराबरी की।

बरानिका इलांगोवन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता और एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय पोल वॉल्टर बन गईं।

सावन बरवाल ने नया नेशनल रिकॉर्ड बनाते हुए 1982 के बाद मैराथन में भारत का पहला मेडल जीता।

स्क्वैश में, अनाहत सिंह एशियन गेम्स में वूमेंस सिंगल्स सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।

पिंकी बल्हारा कॉन्टिनेंटल मीट में कई मेडल जीतने वाली पहली भारतीय कुराश खिलाड़ी बन गईं।

HEALTH : चलते हुए या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना किन बीमारियों का लक्षण हो सकता है?

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सीढ़ियां चढ़ते समय या थोड़ी तेज़ गति से चलते समय सांस फूलना कई लोगों के लिए आम बात है. उम्र बढ़ने, वजन बढ़ने, व्यायाम की कमी या शारीरिक फ़िटनेस की कमी के कारण भी कुछ हद तक सांस फूलना सामान्य माना जाता है.

हालांकि, अगर अचानक उन कामों को करते समय सांस फूलने लगे जो पहले आसानी से हो जाते थे, या थोड़ी सी मेहनत करने पर भी सांस फूलने लगे, या अगर यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जाए तो इसे केवल थकान या उम्र का असर मानकर नज़रअंदाज़ करना ख़तरनाक हो सकता है.

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, शारीरिक श्रम के दौरान सांस फूलना हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, एनीमिया, थायरॉइड डिसऑर्डर या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती लक्षण हो सकता है.

विशेष रूप से महिलाओं, बुज़ुर्गों और डायबिटीज़ के मरीजों में परिश्रम के दौरान सांस फूलना, सीने में दर्द से पहले के हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत हो सकता है.इसके अलावा डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या धूम्रपान करने वाले लोगों को इस लक्षण को अधिक गंभीरता से लेने की ज़रूरत है.

अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ़ के साथ-साथ सीने में जकड़न, चक्कर आना, दिल की धड़कन में अनियमितता, पसीना आना या पैरों में सूजन जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना ज़रूरी है.

सांस फूलने का कारण कैसे पता लगाया जाता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक सांस फूलना, तेज़ी से इसका बढ़ना या आराम करने के बाद भी इसका ठीक न होना एक गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है

इमेज कैप्शन,विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक सांस फूलना, तेज़ी से इसका बढ़ना या आराम करने के बाद भी इसका ठीक न होना एक गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है (सांकेतिक तस्वीर)
सीढ़ियां चढ़ते समय या चलते समय सांस फूलने का सही कारण केवल लक्षणों के आधार पर तय नहीं किया जा सकता.

हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, एनीमिया, थायरॉइड डिसऑर्डर, मोटापा, किडनी की बीमारी या कभी-कभी मानसिक तनाव भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं. इसलिए, सही डायग्नोसिस के लिए मरीज की विस्तृत मेडिकल जानकारी और ज़रूरी टेस्ट अहम हैं.

आमतौर पर प्रारंभिक अवस्था में ब्लड प्रेशर की जांच, ईसीजी, छाती का एक्स-रे और अलग-अलग ब्लड टेस्ट किए जाते हैं. ब्लड में हीमोग्लोबिन का स्तर, ब्लड शुगर, थायरॉइड फंक्शन, किडनी और लीवर के फंक्शन की भी जांच की जा सकती है.

अगर हृदय संबंधी समस्या का संदेह हो तो इकोकार्डियोग्राफी, ट्रेडमिल स्ट्रेस टेस्ट या सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है. कुछ मामलों में फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच की भी ज़रूरत हो सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक सांस फूलना, तेज़ी से इसका बढ़ना या आराम करने के बाद भी इसका ठीक न होना एक गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में जल्द से जल्द डायग्नोसिस और इलाज मिलने से हार्ट डिज़ीज़, हार्ट फेलियर या अन्य गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है.

व्यायाम के दौरान, उदाहरण के लिए सीढ़ियाँ चढ़ते समय, सांस फूलने (घबराहट) के कारण का पता लगाने में सही डायग्नोसिस पहला कदम है. अगर समस्या नई है, धीरे-धीरे बढ़ रही है, या किए जा रहे परिश्रम की मात्रा से अधिक गंभीर है, तो इसका डायग्नोसिस विशेष तौर पर ज़रूरी है.

हमने मुंबई स्थित न्यूबर्ग अजय शाह लेबोरेटरी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अजय शाह से टेस्ट की ज़रूरतों के बारे में पूछा.

उन्होंने बताया, “बीमारी को डायग्नोस करते समय हम सबसे पहले मरीज की डीटेल्ड मेडिकल हिस्ट्री देखते हैं. इसमें सांस लेने में तकलीफ की प्रकृति, समय और गंभीरता के बारे में जानकारी शामिल होती है. साथ ही, सीने में दर्द, धड़कन, खांसी, घरघराहट, कमज़ोरी और पैरों में सूजन जैसे संबंधित लक्षणों के बारे में भी पूछताछ की जाती है. इसके अलावा मरीज की जीवनशैली से जुड़ी आदतें और अन्य बीमारियों को भी ध्यान में रखा जाता है.”

“शारीरिक परीक्षण से समस्या के कारण के बारे में अहम सुराग भी मिल सकते हैं. डायग्नोसिस करते हुए हमारा काम डॉक्टरों को समस्या का सटीक कारण पता लगाने में मदद करना और उन्हें निदान तक पहुंचने में मदद करने के लिए सही टेस्ट की सिफारिश करना है, न कि केवल लक्षणों का इलाज करना.”

इमेज कैप्शन,डॉक्टर बताते हैं कि छाती का एक्स-रे फेफड़ों या हृदय में किसी भी प्रकार की ख़राबी का पता लगाने में मददगार होता है
शुरुआती अवस्था में किए जाने वाले टेस्ट के बारे में पूछे जाने पर डॉ. अजय शाह कहते हैं, “टेस्ट का चयन मरीज के लक्षणों के आधार पर किया जाता है. हालांकि, कुछ डायग्नोस्टिक टेस्ट लगभग हर बार ज़रूरी होते हैं.”

वह बताते हैं, “ब्लड टेस्टों में सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन समस्याओं के बारे में जानकारी देता है जो सांस लेने में तकलीफ़ का कारण बन सकती हैं. जैसे एनीमिया या संक्रमण. इसके अलावा, ब्लड शुगर लेवल की जांच, लीवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, थायरॉइड प्रोफ़ाइल और शरीर में सूजन की जांच भी की जा सकती है. अगर मरीज में हृदय रोग की आशंका हो तो कार्डियक बायोमार्कर टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है.”

डॉ. शाह बताते हैं, “छाती का एक्स-रे फेफड़ों या हृदय में किसी भी प्रकार की ख़राबी का पता लगाने में उपयोगी होता है. ईसीजी टेस्ट से हृदय की लय सही है या नहीं और हृदय पर कोई अतिरिक्त दबाव है या नहीं, यह जानने में भी मदद मिलती है.”

जल्दी डायग्नोसिस क्यों ज़रूरी है?
सांकेतिक तस्वीरइमेज स्रोत,Getty Images
इमेज कैप्शन,जल्दी डायग्नोसिस कराने से बीमारी का पता शुरुआती समय में ही लग सकता है
चलते समय सांस फूलने या अचानक थकान महसूस होने पर जल्द से जल्द जांच और डायग्नोसिस करवाना बहुत ज़रूरी है. सांस फूलना किसी समस्या का लक्षण हो सकता है. इसलिए, डायग्नोसिस में देरी होने पर शरीर के अंदर मौजूद समस्या का पता नहीं चल पाएगा और उसकी गंभीरता बढ़ सकती है.

हार्ट फेलियर, कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़, क्रोनिक लंग डिज़ीज़, पल्मोनरी एम्बोलिज़्म (फेफड़ों की ब्लड वेसेल में ब्लड क्लॉट), एनीमिया और अलग-अलग मेटाबॉलिक डिज़ीज़ जैसी स्थितियों में जल्दी डायग्नोसिस से इलाज के परिणामों में सुधार देखा गया है.

जांचों की मदद से डॉक्टर समय रहते मरीज की समस्या का पता लगा सकते हैं और तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं. इससे भविष्य में होने वाली जटिलताओं, बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरतों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है. इससे मरीज के जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है.

इसके अलावा कई मरीज़ सांस फूलने के कारण को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और इसका दोष अपनी उम्र या अपनी कमज़ोर शारीरिक क्षमता पर डाल देते हैं. इससे डायग्नोसिस में देरी होती है. शुरुआती जांच और सही डायग्नोसिस से इस देरी को रोका जा सकता है और समय पर ज़रूरी इलाज मिल सकता है.

अगर आपको थोड़ी सी भी मेहनत करने पर या रोज़मर्रा के काम करते समय भी सांस फूलने की समस्या आती है और यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जाए, आराम करने के बाद भी आराम न मिले, या इसके साथ-साथ सीने में जकड़न, दर्द, चक्कर आना या पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो ये हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में आपको बिना समय बर्बाद किए हृदय रोग के विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए.

इस संबंध में हमने पुणे के बानेर स्थित मणिपाल हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट और कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अभिजीत जोशी से कुछ सवाल पूछे.

सवाल: हृदय रोग में सांस फूलना और सांस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण कितने आम हैं?

डॉ. अभिजीत जोशी: कई मरीजों में, ख़ासकर महिलाओं, बुज़ुर्गों और डायबिटीज़ के मरीजों में, परिश्रम के दौरान सांस फूलना हृदय रोग का शुरुआती लक्षण हो सकता है, यहां तक ​​कि सीने में दर्द से पहले भी. इसलिए, इस लक्षण को नज़रअंदाज करना सही नहीं है.

सवाल: क्या सीने में दर्द न होने पर भी हृदय रोग की संभावना हो सकती है?

डॉ. अभिजीत जोशी: हार्ट से जुड़ी सभी बीमारियों में सीने में दर्द नहीं होता. कुछ मरीजों में सांस लेने में तकलीफ़, जल्दी थकान, हृदय गति बढ़ना, चक्कर आना या कमज़ोरी मुख्य लक्षण हो सकते हैं. डायबिटीज़ के मरीज़ों में विशेष रूप से ‘साइलेंट’ हार्ट डिज़ीज़ का ख़तरा ज़्यादा होता है.

सवाल: हार्ट की ब्लड पंप करने की क्षमता में कमी के क्या प्रभाव होते हैं?

डॉ. अभिजीत जोशी: अगर हार्ट की ब्लड पंप करने की क्षमता कम हो जाती है, तो शरीर के विभिन्न अंगों को पर्याप्त ब्लड और ऑक्सीजन नहीं मिल पाते. इससे थकान, सांस फूलना, पैरों में सूजन और फेफड़ों में पानी जमा होने की आशंका बढ़ जाती है. इससे रोज़मर्रा गतिविधियों के दौरान भी सांस लेने में कठिनाई हो सकती है.

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इमेज कैप्शन,सांस लेने में तकलीफ़, सीने में दर्द या दबाव, बेहोशी, गंभीर चक्कर आना, धड़कन तेज़ होना, होंठ नीले पड़ना, पैरों में सूजन, खून की उल्टी होना या आराम करते समय भी सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण महसूस होने पर मेडिकल सहायता लें
सांस फूलने की बात करें तो, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कार्यक्षमता स्वाभाविक रूप से कुछ हद तक कम हो जाती है. मांसपेशियों की ताकत कम हो जाती है और हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता भी घट सकती है. इसलिए, पहले की तुलना में थोड़ी अधिक सांस फूलना स्वाभाविक है. हालांकि, यह मान लेना सही नहीं है कि अचानक सांस फूलना या सामान्य से अधिक होना सिर्फ उम्र के कारण है. डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीजों को इस पर विशेष तौर पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

वह कहते हैं., “डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के जोखिम के प्रमुख कारक हैं. इसलिए ऐसे व्यक्तियों में सांस फूलना, हृदय रोग का लक्षण होने की ज़्यादा आशंका है.”

“अगर इन कारकों में से किसी से भी प्रभावित व्यक्ति को व्यायाम करने की क्षमता में कमी महसूस हो या पहले आसानी से किए जाने वाले परिश्रम के दौरान सांस फूलने लगे, तो उन्हें डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. जल्दी डायग्नोसिस और इलाज मिलने से हार्ट अटैक या हार्ट फ़ेल जैसी गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है.”

हमने डॉ. राहुल गुप्ता से पूछा कि क्या ऐसे कोई आसान संकेत हैं जिनसे पता चल सके कि किसी व्यक्ति की कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस (हृदय से जुड़ी फिटनेस) में सुधार हो रहा है.

उन्होंने कहा, “कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस का एक व्यावहारिक संकेतक यह है कि क्या कोई व्यक्ति बहुत ज़्यादा थकान या सांस फूलने का अनुभव किए बिना अपनी दैनिक गतिविधियां कर सकता है. उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति बिना किसी लक्षण के एक या दो मंजिल की सीढ़ियां चढ़ सकता है या लगभग 30 मिनट तक तेज़ गति से चल सकता है, तो उसे अच्छी शारीरिक स्थिति में माना जाता है. हालांकि, स्मार्टवॉच या ख़ुद से मूल्यांकन करने जैसी चीज़ें चिकित्सा जांच का विकल्प नहीं हो सकते. अगर सांस फूलना जारी रहता है या स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है, तो डॉक्टर से परामर्श करना ज़रूरी है.”

अगर आपको सांस लेने में तकलीफ़, सीने में दर्द या दबाव, बेहोशी, गंभीर चक्कर आना, धड़कन तेज़ होना, होंठ नीले पड़ना, पैरों में सूजन, खून की उल्टी होना या आराम करते समय भी सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत मेडिकल सहायता लें.

ये लक्षण हृदय या फेफड़ों से जुड़ी किसी गंभीर आपात स्थिति के संकेत हो सकते हैं. इसलिए समय पर इलाज जीवन बचा सकता है और लंबे समय तक के लिए स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बना सकता है.

अगर आप अपनी जीवनशैली में कोई महत्वपूर्ण बदलाव करना चाहते हैं, अपने भोजन में बदलाव करना चाहते हैं, दवा लेना चाहते हैं या शारीरिक व्यायाम शुरू करना चाहते हैं, तो डॉक्टर और एक योग्य प्रशिक्षक की मदद लेना महत्वपूर्ण है.

बेहतर यही होगा कि आप अपने शरीर और लक्षणों की डॉक्टर से ठीक से जांच करवाएं और उनकी सलाह पर ही जीवनशैली में बदलाव करें. डॉक्टर से परामर्श किए बिना ख़ुद से इलाज करना ख़तरनाक हो सकता है.

NATIONAL : बारिश की कमी और अल नीनो के खतरे से चावल उत्पादन में 1 करोड़ टन कमी की संभावना : मिडिया रिपोर्ट्स

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भारत में इस साल चावल उत्पादन एक दशक में पहली बार घटने की संभावना है। कम बारिश और फसल के पकने की अवधि के दौरान नमी की कमी से पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। बिजनेस टुडे में प्रकाशित खबर के अनुसार, उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि उत्पादन में करीब 1 करोड़ मीट्रिक टन की गिरावट आ सकती है। वर्ष 2026-27 में चावल का उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन से घटकर करीब 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यह लगभग 6.5 प्रतिशत की गिरावट होगी और 2009-10 के बाद सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट हो सकती है। वर्ष 2009-10 में अल नीनो के कारण पड़े सूखे से चावल उत्पादन प्रभावित हुआ था।

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्ण राव ने रॉयटर्स को बताया कि, बारिश में कमी के कारण पैदावार घटने की संभावना है। उनके अनुमान के अनुसार, चावल उत्पादन में करीब 1 करोड़ मीट्रिक टन की कमी आ सकती है।भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है। इस समय देश में बारिश की भारी कमी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से शुरू हुए चार महीने के मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। देश के कुछ प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी 42 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

धान की बुवाई का रकबा भी घटा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11 सितंबर तक गर्मी के मौसम में बोए गए धान का क्षेत्रफल 4.268 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 4 प्रतिशत कम है। गर्मी के मौसम में बोई जाने वाली धान की फसल भारत के कुल चावल उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है। शेष उत्पादन सर्दियों में बोई जाने वाली फसल से आता है।

जलाशयों में कम पानी से रबी चावल पर भी असर की आशंका

ओलम एग्री इंडिया के डिप्टी कंट्री हेड नितिन गुप्ता ने रॉयटर्स को बताया कि, जलाशयों में सामान्य से कम पानी होने के कारण सर्दियों में बोई जाने वाली चावल की फसल का उत्पादन अनुमान भी कमजोर हो सकता है। उत्पादन में संभावित गिरावट का असर बाजार पर दिखाई देने लगा है। कम उत्पादन की आशंका के बीच घरेलू चावल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। इसके चलते निर्यात कीमतें एक साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। हालांकि, भारत के पास चावल का बड़ा सरकारी भंडार मौजूद है, जो निर्यात पर उत्पादन में कमी के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है।

रिकॉर्ड भंडार से निर्यात को मिल सकता है सहारा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक राज्यों के पास बिना मिलिंग किए धान सहित चावल का कुल भंडार रिकॉर्ड 5.96 करोड़ टन था। इसके मुकाबले सरकार ने 1 अक्टूबर तक करीब 1.03 करोड़ टन का लक्ष्य रखा था। नई दिल्ली स्थित एक वैश्विक ट्रेडिंग कंपनी के एक डीलर ने रॉयटर्स को बताया कि बड़े भंडार के कारण भारत बिना निर्यात प्रतिबंध लगाए भी चावल का निर्यात जारी रखने की स्थिति में रह सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, उत्पादन में अनुमानित गिरावट के बावजूद पर्याप्त भंडार भारत को निर्यात को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, घरेलू बाजार में उपलब्धता कम होने और स्थानीय कीमतों में बढ़ोतरी से भारतीय चावल का निर्यात महंगा हो सकता है। ऐसे समय में थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों में भी चावल की कीमतें बढ़ रही हैं।

अल नीनो से सूखे मानसून का खतरा

मजबूत हो रहा अल नीनो भारत को 17 वर्षों के सबसे कमजोर मानसून की ओर ले जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन पर असर पड़ने और व्यापक खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून से सितंबर के मानसून सीजन में संचयी बारिश दीर्घकालिक औसत से 15 प्रतिशत कम चल रही है। यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो भारत 2009 के बाद अपने सबसे कमजोर मानसून का सामना कर सकता है। वर्ष 2009 में बारिश सामान्य से 18 प्रतिशत कम रही थी। यह बारिश की कमी मौसम विभाग के मई में जारी अनुमान से भी काफी अधिक है। उस समय पूरे मानसून सीजन में सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश होने का अनुमान लगाया गया था।

UP : यूपी के फतेहपुर में गैस सिंलेंडर ब्लास्ट से घर गिरा, आधा दर्जन लोग मलबे में दबे, रेस्क्यू जारी

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फतेहपुर : उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में गैस सिलेंडर फटने से एक बड़ा हादसा हो गया। मलवां थाना क्षेत्र के कस्बे में सोमवार शाम करीब 5:30 बजे हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। गैस सिलेंडर में हुए जोरदार विस्फोट से दो मंजिला पक्का मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया। धमाका इतना भयानक था कि 2 किलोमीटर तक आवाज गूंजी और आस-पास के आधा दर्जन से अधिक मकानों की छतें, दीवारें और लेंटर क्षतिग्रस्त हो गए। मलबे में दबने से 4 लोगों की मौत हो गई। वहीं, एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, जबकि 2 लोग खतरे से बाहर हैं।

मलवा थाना क्षेत्र की घटना
जानकारी के मुताबिक मलवा थाना क्षेत्र के एक घर में खाना बनाते समय यह हादसा हुआ। अचानक गैस सिलेंडर फटने से तेज आवाज हुई और इलाके में हड़कंप मच गया। चारों और चीख पुकार मच गई। सिलेंडर ब्लास्ट इतना जबर्दस्त था कि जिस घर में ब्लास्ट हुआ वह पूरी तरह से जमींदोज हो गया था। पूरी बिल्डिंग के परखच्चे उड़ गए और घर के अंदर रह रहे लोग मलबे में दब गए। बताया जा रहा है कि इस घटना में दो मंजिला बिल्डिंग गैस सिलेंडर फटने से उड़ी है। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के 4 से 5 घर भी क्षतिग्रस्त हो गए ।

मृतकों और घायलों के नाम
ग्रामीणों के अनुसार मृतकों में 9 वर्षीय वेद गुप्ता, 15 वर्षीय अर्पित गुप्ता, 7 वर्षीय टुक्कू और 11 वर्षीय कुणाल गुप्ता शामिल हैं। वहीं, 26 वर्षीय आलोक गुप्ता, सोनेलाल गुप्ता और एक महिला गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें से एक 90 प्रतिशत झुलसने के कारण वेंटिलेटर पर है और हालत नाजुक बनी हुई है।

जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त घर में 10 लोग थे। पांच लोग तो किसी तरह घर से निकलने में सफल रहे लेकिन परिवार के पांच लोग मलबे में दब गए। इन लोगों को फायर ब्रिगेड की टीम ने रेस्क्यू कर बाहर निकाला और मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

2 किमी दूर तक ब्लास्ट की आवाज सुनाई दी
ब्लास्ट इतना भयानक था कि करीब 2 किमी दूर तक इसकी आवाज सुनी गई। आसपास के करीब आधा दर्जन मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। जिस मकान में ब्लास्ट हुआ वह सुरेश गुप्ता का मकान बताया जा रहा है। सुरेश गुप्ता और उनके भाई का परिवार इस मकान में रहता था। परिवार में 5 छोटे बच्चे भी थे। सुरेश गुप्ता फल की दुकान लगाने का काम करते थे।

पूरे कस्बे में शोक की लहर
घटना की सूचना पर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक और जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स मौके पर पहुंचीं और निरीक्षण किया। एसपी ने बताया कि फॉरेंसिक और फायर टीम जांच कर रही है कि ब्लास्ट का वास्तविक कारण सिलेंडर ही है या कुछ और। एहतियात के तौर पर एसडीआरएफ को भी बुलाया गया है। रात में मलबा हटाने के लिए बिजली विभाग से बड़ी लाइटों की व्यवस्था कराई गई है। गांव के 9 युवकों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद पूरे कस्बे में शोक की लहर है।

NATIONAL : मंत्री प्रवेश वर्मा के थप्पड़ कांड पर एक्शन: पुलिस ने दर्ज की एनसीआर, आप विधायक जनरैल सिंह पर एफआईआर

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तिलक नगर में हुई झड़प और थप्पड़ मारने की घटना के बाद पीड़ित पक्ष की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने त्वरित कदम उठाया है। पुलिस ने प्राप्त शिकायत के आधार पर मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ एनसीआर दर्ज कर ली है।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ थप्पड़ मारने की शिकायत पर नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (एनसीआर) दर्ज की है। वहीं पुलिस ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की शिकायत पर आप विधायक विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

प्रवेश वर्मा पर नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (एनसीआर) दर्ज कर ली है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115 के तहत दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि साहिब सिंह नाम के शख्स ने साहिब सिंह प्रवेश वर्मा के खिलाफ थप्पड़ मारने की शिकायत दी थी। इस शिकायत के आधार पर कानूनन जो केस बनता था, उसके हिसाब से दिल्ली पुलिस ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ एनसीआर (नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट) दर्ज कर ली है और अब इस मामले की जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि प्रवेश वर्मा के खिलाफ बीएनएस की धारा 115 के तहत केस दर्ज किया गया है।

पुलिस को मिली पांच शिकायतें
दिल्ली पुलिस का कहना है कि पुलिस को पांच शिकायतें मिल चुकी हैं। ये शिकायतें तिलक नगर व विकासपुरी पुलिस स्टेशन में दी गई हैं। पुलिस के मुताबिक, शिकायतों में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं और फिलहाल उनकी जांच की जा रही है।

भाजपा की ओर से दो शिकायतें
पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रवेश वर्मा से जुड़े इस विवाद में मिलीं कुल पांच शिकायतों में से एक शिकायत उस व्यक्ति साहिब सिंह की ओर से है, जिसे वायरल वीडियो में प्रवेश वर्मा के साथ विवाद के दौरान थप्पड़ लगते हुए देखा गया था। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों की तरफ से जरनैल सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ दो शिकायतें दी गई हैं। वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं की तरफ से भी दो शिकायतें दी गई हैं। इनमें प्रवेश वर्मा के साथ कथित बदसलूकी का आरोप लगाया गया है।

दो पुलिस स्टेशनों में क्यों पहुंचीं शिकायतें
रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद से जुड़ी सड़क का दोनों तरफ का हिस्सा विकासपुरी थाना क्षेत्र में आता है, जबकि गुरुद्वारा वाला हिस्सा तिलक नगर थाना क्षेत्र में आता है। इसी वजह से घटना से जुड़ी शिकायतें दोनों थाना क्षेत्रों में पहुंची हैं, इसलिए इसे केवल इस आधार पर नहीं देखा जा सकता कि शिकायत दो थानों में गई हैं तो दो अलग-अलग एफआईआर होनी चाहिए। पुलिस पहले शिकायतों और संबंधित घटनाओं की जांच कर रही है।

ऐसे शुरू हुआ प्रवेश वर्मा थप्पड़ कांड
यह पूरा विवाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर हुए निरीक्षण के दौरान शुरू हुआ। रविवार को दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा पश्चिमी दिल्ली के इलाके में सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे थे। मौके पर आप विधायक जरनैल सिंह और उनके साथ कुछ लोग भी मौजूद थे। सड़क की गुणवत्ता को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। एक वीडियो में जरनैल सिंह सड़क की सतह का एक हिस्सा हाथ से निकालकर दिखाते हुए नजर आते हैं। इसके बाद माहौल गर्म होने की बात सामने आई। इसी दौरान एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें प्रवेश वर्मा एक व्यक्ति के मोबाइल की तरफ हाथ बढ़ाते और उसके बाद उसे थप्पड़ मारते हुए दिखाई देते हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया।बाद में उस व्यक्ति की पहचान साहिब सिंह के तौर पर है। वह जरनैल सिंह से जुड़े सोशल मीडिया काम से जुड़ा बताया गया है। साहिब सिंह का कहना है कि वह मौके की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साहिब सिंह के खिलाफ दो जून एमसीडी के कर्मचारियों के साथ मारपीट की एफआईआर दर्ज है। इस मामले में वह गिरफ्तार हुआ था और फिलहाल जमानत में पर है।

पीडब्ल्यूडी की शिकायत में ये आरोप हैं
पुलिस को पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों और ठेकेदार की ओर से भी शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि जरनैल सिंह ने सड़क का काम रोकने की कोशिश की और पैसे की मांग की। एक शिकायत में नई बनी सड़क को नुकसान पहुंचाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर भी पुलिस जांच कर रही है।

तिलक नगर/विकासपुरी इलाके में कल हुए कथित थप्पड़ मारने की घटना के संबंध में साहिब सिंह और पीडब्ल्यूडी के असिस्टेंट इंजीनियर की शिकायतों के आधार पर कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।इस घटना के संबंध में कुछ अन्य शिकायतें भी मिली हैं, जिन पर जांच के दौरान कार्रवाई की जाएगी। -हरेस्वर वी स्वामी, पुलिस उपायुक्त, पश्चिमी जिला

NATIONAL : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा, दिल्ली-UP समेत देशभर में प्रदर्शन

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कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक अंदाज में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. पार्टी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में मार्च कर रही है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार (28 सितंबर) को जयपुर में भी विरोध प्रदर्शन किया. पार्टी ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की बहाली की राह में पहला कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा है. वहीं केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर तंज कसा है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि आयोग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नागरिकता निर्धारित करने के मामले में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि निर्वाचन आयोग का काम नागरिकता निर्धारित करना नहीं है. उन्होंने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया के एक हालिया साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और संसद द्वारा समय-समय पर किए गए उसके संशोधनों के तहत होता है.

दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया. यूथ कांग्रेस ने इस दौरान विरोध मार्च भी किया. दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोड को ब्लॉक की थी, लेकिन कार्यकर्ता जंतर-मंतर रोड पर मार्च के लिए निकल गए. दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्नाव में प्रदर्शन किया. वहीं मुरादाबाद में ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया.

राजस्थान में भी कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही है. जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता शहीद स्मारक से निकलकर चुनाव आयोग के प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले. पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग करके रोकने की कोशिश की, साथ ही वाटर कैनन मशीनें भी लगाई गईं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन मशीन के जरिए पानी की बौछार की गई. इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई.

महाराष्ट्र के नासिक में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने प्रदर्शन किया. महाराष्ट्र के और भी हिस्सों में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया. पुणे के कार्यकर्ताओं ने भी सड़क पर निकलकर विरोध दर्ज करवाया. कोल्हापुर में भी कांग्रेस की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर यह आंदोलन किया गया. सांसद शाहू महाराज और सतेज पाटील भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे.

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पर सोमवार को लिखा, ‘कांग्रेस और INDI गठबंधन देश की प्रगति से हताश है. इनके मनगढ़ंत आरोप बार-बार तथ्यों की कसौटी पर ध्वस्त हुए हैं. जब न नीति होती है, न विजन, तब भ्रम और अराजकता फैलाने का सहारा लिया जाता है.’

उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग ने इनके आरोपों पर तथ्य स्पष्ट कर दिए हैं, फिर भी माहौल बिगाड़ने की कोशिश जारी है. राहुल गांधी कान खोलकर सुन लें, झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता. जनता विपक्ष की नकारात्मक राजनीति और दोहरे रवैये को समझ चुकी है.’

NATIONAL : संसदीय समिति की बैठक आज, FCRA संशोधन के हर पहलू पर होगी चर्चा

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नई दिल्ली: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर संसद में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की दूसरी बैठक आज आयोजित होगी। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय के अधिकारी समिति के सामने अपनी प्रस्तुति देंगे। इस दौरान FCRA से जुड़े विभिन्न प्रावधानों, बदलावों और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। JPC का गठन FCRA संशोधन विधेयक से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए किया गया है। समिति का उद्देश्य प्रस्तावित बदलावों का अध्ययन करना और सभी संबंधित पक्षों की राय के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करना है। बैठक में मंत्रालयों की ओर से कानून के मौजूदा प्रावधानों और प्रस्तावित संशोधनों की जानकारी दी जाएगी।

गृह मंत्रालय देगा कानून से जुड़ी जानकारी
गृह मंत्रालय विदेशी अंशदान से जुड़े मामलों की निगरानी और नियमन के लिए प्रमुख विभाग है। बैठक में मंत्रालय के अधिकारी विदेशी फंडिंग, पंजीकरण प्रक्रिया, अनुपालन नियमों और निगरानी व्यवस्था से जुड़े विषयों पर जानकारी रख सकते हैं।
FCRA के तहत भारत में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों (NGO) और अन्य संस्थाओं को विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन करना होता है। सरकार समय-समय पर इन नियमों में बदलाव करती रही है, ताकि विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

JPC की बैठक में कानून मंत्रालय के अधिकारी प्रस्तावित संशोधनों के कानूनी पहलुओं पर प्रस्तुति देंगे। समिति यह समझने की कोशिश करेगी कि नए बदलाव मौजूदा कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किस तरह लागू किए जा सकते हैं। बैठक के दौरान समिति के सदस्य संशोधनों से जुड़े सवाल भी पूछ सकते हैं। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

FCRA को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सरकार का कहना है कि विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है। वहीं, कुछ संस्थाएं नियमों के प्रभाव और अनुपालन से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर करती रही हैं। JPC सभी पहलुओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी।

FCRA संशोधन को लेकर होने वाली JPC की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गृह और कानून मंत्रालय की प्रस्तुति के बाद समिति के सामने इस कानून से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी उपलब्ध होगी। अब देखना होगा कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होती है और समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट में किन बिंदुओं को शामिल करती है।

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