Tuesday, September 22, 2026
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International Peace Day: ‘युद्ध, जलवायु और विभाजन के बीच… कहां चली गई शांति, क्यों मनाया जाता है यह दिन

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Peace Day 2026 Theme: हर साल 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। 2026 की थीम ‘शांति में निवेश करें- हर किसी के लिए, हर जगह, हर दिन’ है। युद्ध, जलवायु संकट और बढ़ते वैश्विक विभाजन के बीच यह दिन शांति, अहिंसा, संवाद, न्याय और सहयोग की जरूरत को रेखांकित करता है।

हर साल 21 सितंबर को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह दिन शांति, अहिंसा और सहयोग के आदर्शों को मजबूत करने का अवसर है। 2026 में इसकी थीम है- Invest in Peace: For Everyone, Everywhere, Every Day। जिसका अर्थ है- शांति में निवेश करें- हर किसी के लिए, हर जगह, हर दिन।

दरअसल, इस थीम का मकसद है कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षा, सम्मान, अवसर और सहयोग का अनुभव करना चाहिए। शांति का अर्थ है- सुरक्षा, सम्मान, न्याय, संवाद, अवसर और ऐसा समाज जहां असहमति को हिंसा में बदलने की जरूरत न पड़े। संयुक्त राष्ट्र भी आज शांति को केवल युद्ध की अनुपस्थिति के बजाय सुरक्षा, गरिमा, अवसर और सहयोग से जोड़कर देखता है।

शांति दिवस का इतिहास और महत्व
1981 में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की शुरुआत हुई। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 36/67 के माध्यम से इसे स्थापित किया। हालांकि शुरुआत में इसकी कोई स्थायी तारीख नहीं थी। इसे सितंबर के तीसरे मंगलवार को मनाया जाता था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2001 में प्रस्ताव 55/282 के जरिए 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की स्थायी तारीख घोषित किया। इसी प्रस्ताव में इस दिन को वैश्विक युद्धविराम और अहिंसा के अवसर के रूप में भी निर्धारित किया गया।

इस दिन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जापानी शांति घंटी बजाई जाती है। यह घंटी 1954 में जापान से आई थी और बच्चों द्वारा दान किए गए सिक्कों से बनी है। यह युद्ध की भयावहता और स्थायी शांति की आकांक्षा का प्रतीक है।

संयुक्त राष्ट्र सभी देशों से अपील करता है कि इस दिन शत्रुता बंद रखें, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से शांति को बढ़ावा दें। शांति केवल कूटनीतिक समझौतों या शांति वार्ताओं तक सीमित नहीं।

युद्ध: शांति का सबसे बड़ा दुश्मन
आज विश्व में कई देशों के बीच युद्ध जारी है। इसमें ईरान और अमेरिका-इजरायल, रूस-यूक्रेन, गाजा युद्ध समेत कई संघर्ष चल रहे है। इन संघर्षों में सबसे ज्यादा बच्चे, महिलाएं और आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लाखों लोग विस्थापित हैं। स्कूलों की इमारत मलबों में तब्दील हो गई।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि संघर्ष पैमाने और जटिलता में बढ़ रहे हैं, सीमाओं को पार कर रहे हैं और भारी पीड़ा पहुंचा रहे हैं। ऐसे में शांति की खोज कठिन लगती है, लेकिन पहले से ज्यादा जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र के 2026 के संदेश में कहा गया है कि हिंसा और विभाजन से समुदाय प्रभावित हो रहे हैं, संघर्ष अधिक जटिल हो रहे हैं और संवाद कमजोर पड़ रहा है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने इस बात पर जोर दिया है कि शांति के निर्माण में आम नागरिक, स्वयंसेवक, सामाजिक संगठन, शांति-निर्माता और स्थानीय समुदाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जलवायु परिवर्तन: शांति के लिए नया खतरा
आज के समय शांति की चर्चा जलवायु परिवर्तन के बिना अधूरी है। बढ़ता तापमान, सूखा, बाढ़, समुद्र के बढ़ते स्तर और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं।

जलवायु संकट असमानता बढ़ाता है। गरीब देश और समुदाय ज्यादा प्रभावित होते हैं जबकि अमीर देशों का योगदान अधिक होता है। यह विभाजन शांति के लिए खतरा है। युद्ध के कारण जब लोग अपनी जमीन और आजीविका खोते हैं तो हताशा बढ़ती है। यह हिंसा को जन्म दे सकती है। इसलिए शांति में निवेश का मतलब जलवायु लचीलापन, हरित अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी है।

क्यों मनाया जाता है यह दिन?
शांति दिवस सभी देशों के बीच जागरुकता बढ़ाने, राजनीतिक इच्छाशक्ति जुटाने और कार्रवाई को प्रेरित करने का मंच है। यह हमें याद दिलाता है कि शांति संभव है। इतिहास में कई संघर्ष संवाद और समझौते से खत्म हुए। कोस्टा रिका जैसे देश सेना के बिना शांति बनाए हुए हैं।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि युद्ध की शुरुआत अक्सर हथियार उठाने से बहुत पहले हो जाती है। वह अविश्वास, नफरत, भेदभाव, संवाद की कमी और दूसरे पक्ष को इंसान के बजाय दुश्मन मानने की मानसिकता से शुरू हो सकती है।

इसी तरह शांति भी युद्ध खत्म होने के बाद अचानक पैदा नहीं होती। उसके लिए विश्वास बहाल करना पड़ता है, संवाद शुरू करना पड़ता है, न्याय और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ानी पड़ती है और प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन का अवसर देना पड़ता है।

BUSINESS : इस हफ्ते सोने में आई तेजी, चांदी में 10,000 रुपये का उछाल, एक्सपर्ट से जानिए कौन-से फैक्टर्स डाल रहे कीमतों पर असर

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Gold Price Today: यूएस फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद सोने में गिरावट आई थी। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में कमी आते ही महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई और सोने में सपोर्ट देखने को मिला। कुल मिलाकर इस हफ्ते कीमतों में तेजी आई है।

सोने की कीमतों में इस हफ्ते तेजी दर्ज की गई है। घरेलू हाजिर और वायदा दोनों बाजारों में इस हफ्ते सोने में तेजी आई है। गुड रिटर्न्स के अनुसार, आज शनिवार, 19 सितंबर को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,55,990 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दिखाई दिया। जबकि बीते शनिवार 12 सितंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,54,730 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। इस तरह इस हफ्ते सोने की कीमत में 1260 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी दर्ज हुई है।

चांदी में 10,000 रुपये का उछाल
चांदी की हाजिर कीमतों में भी इस हफ्ते तेजी दर्ज हुई है। गुड रिटर्न्स के अनुसार, आज 19 सितंबर को दिल्ली में चांदी का हाजिर भाव सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखा। यह भाव बीते शनिवार 12 सितंबर को 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर था। इस तरह इस हफ्ते चांदी की कीमत में 10,000 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है।

कच्चे तेल में गिरावट से मिला सपोर्ट
सोने की कीमतों को सबसे बड़ा सपोर्ट कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से मिला है। तेल सस्ता होने से महंगाई का दबाव कम रहने की उम्मीद बढ़ी है। इसका असर बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ा और सोने की मांग को सपोर्ट मिला। अमेरिकी डॉलर में भी बहुत ज्यादा तेजी नहीं आई, जिससे बुलियन को राहत मिली। जो ब्रेंट क्रूड कुछ दिन पहले 108 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा था, वह अब 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड करता दिखा है।

फेड के फैसले के बाद गिरा था सोना
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को ब्याज दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इससे फेड रेट बढ़कर 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में पहुंच गई है। सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, ब्याज दर बढ़ने के बाद शुरुआत में सोने पर दबाव देखने को मिला था, क्योंकि ज्यादा ब्याज दरें निवेशकों को ऐसे विकल्पों की ओर आकर्षित करती हैं, जिनसे नियमित रिटर्न मिलता है। लेकिन बाद में तस्वीर बदल गई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम की और सोने को फिर से खरीदारी का सपोर्ट मिल गया।

डॉलर है सोने के लिए बड़ी चुनौती
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में फेड के फैसले के बाद बढ़त जरूर आई, लेकिन तेजी सीमित रही। डॉलर फिलहाल करीब 100.2 के स्तर पर बना हुआ है और सात सप्ताह के ऊंचे स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है। डॉ रवि के अनुसार, आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों की करेंसी में सोना महंगा हो जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है। इसके उलट डॉलर में कमजोरी सोने के लिए मददगार साबित होती है।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
Giottus.com के सीईओ विक्रम सुब्बराज के मुताबिक भारतीय निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि हाल की गिरावट के बाद सोने में मजबूत रिकवरी हुई है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव अभी काफी ज्यादा है। उनके मुताबिक अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 5 फीसदी के आसपास बनी हुई है, जबकि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। इन दोनों में बदलाव होने पर सोने की दिशा भी तेजी से बदल सकती है। भारतीय बाजार में रुपये की चाल भी अहम रहेगी। अगर रुपया कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर कम पड़ सकता है।

सुब्बराज का कहना है कि मौजूदा तेजी को देखकर निवेशकों को सिर्फ तेजी पकड़ने के लिए खरीदारी नहीं करनी चाहिए। लंबी अवधि के निवेश के लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना उतार-चढ़ाव को संभालने का एक तरीका हो सकता है। वहीं, लीवरेज के साथ ट्रेडिंग करने वालों को पोजीशन का आकार सीमित रखने और सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

आगे किन चीजों पर रहेगी बाजार की नजर?
च्वाइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद बनी है। इसका असर बॉन्ड यील्ड में भी नरमी के रूप में दिखा, जिससे बुलियन को सपोर्ट मिला। उनके मुताबिक चीन की ओर से सोने के भंडार में बढ़ोतरी और अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग में कमी ने भी बाजार के सेंटीमेंट को सपोर्ट दिया है। अब निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट के हालात, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों और ब्याज दरों से जुड़े अगले संकेतों पर रहेगी।

कुल मिलाकर, सोने ने हाल की गिरावट से अच्छी वापसी की है, लेकिन आगे की चाल एकतरफा नहीं मानी जा सकती। ब्याज दर, बॉन्ड यील्ड, डॉलर, कच्चा तेल, रुपये की चाल और वैश्विक घटनाक्रम मिलकर आने वाले दिनों में सोने की कीमत तय करेंगे।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

NATIONAL : ‘गर्मी में दम घुटता है, सही व्यवस्था हो’, लालबाग के राजा के पंडाल में बेटे को खोने पर परिजनों का छलका दर्द

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मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचे जलगांव के 25 वर्षीय जयदीप की अचानक मौत हो गई। कतार में तबीयत बिगड़ने के बाद जयदीप को तुरंत अस्पताल ले जाया गया था। परिवार ने भीड़ और वेंटिलेशन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचे जलगांव के 25 वर्षीय युवक की अचानक मौत से परिवार में शोक की लहर है। मृतक की पहचान जलगांव के जीवनमोती नगर निवासी जयदीप मेघराज नेमाडे के रूप में हुई है। जयदीप 17 सितंबर को अपने चार दोस्तों के साथ करीब 400 किमी का सफर तय कर मुंबई आया था। दर्शन के लिए कतार में खड़े रहने के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। पुलिस के अनुसार, युवक की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।

दर्शन की कतार में अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, जयदीप पिछले 4-5 वर्षों से हर साल अपने दोस्तों के साथ लालबागचा राजा के दर्शन के लिए मुंबई आता था। इस साल भी वह अपने चार दोस्तों के साथ मुंबई पहुंचा था। 17 सितंबर को लालबागचा राजा के दर्शन के लिए कतार में खड़े रहने के दौरान उसे अचानक बेचैनी महसूस हुई। कुछ ही देर में वह चक्कर खाकर नीचे गिर पड़ा।

जयदीप की हालत गंभीर देखते हुए लालबाग गणेशोत्सव मंडल के पदाधिकारियों ने उसे एंबुलेंस से पास के अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, पुलिस के अनुसार अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिवार को रात में दी गई जानकारी
घटना के बाद जयदीप के साथ मौजूद दोस्तों ने रात में उसके परिवार को इसकी जानकारी दी। खबर मिलते ही परिवार के सदस्य मुंबई के लिए रवाना हुए। इकलौते बेटे की अचानक मौत से नेमाडे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जयदीप के चाचा प्रमोद नेमाडे ने बताया कि जयदीप उनके भतीजे होने के बावजूद बेटे की तरह था। वह हर साल लालबागचा राजा के दर्शन के लिए जाता था, लेकिन इस बार दर्शन के लिए पहुंचने के बाद उसकी अचानक मौत हो गई।

‘जयदीप को कोई बीमारी नहीं थी’
परिवार के मुताबिक जयदीप को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। उसके चाचा प्रमोद नेमाडे ने कहा कि सब कुछ अचानक हुआ। जयदीप पुणे में नौकरी करता था। उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। दर्शन की कतार में काफी भीड़ थी और जयदीप ने घुटन तथा सांस लेने में परेशानी होने की बात कही थी।

परिवार ने भीड़ और वेंटिलेशन व्यवस्था पर उठाए सवाल
जयदीप की मौत के बाद परिवार ने लालबागचा राजा मंडल में भीड़ प्रबंधन और वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था करने की मांग की है। प्रमोद नेमाडे का कहना है कि लालबागचा राजा के दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। लंबी कतार और भारी भीड़ के बीच पर्याप्त वेंटिलेशन और बेहतर व्यवस्था जरूरी है।

परिवार का कहना है कि श्रद्धालुओं को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है। ऐसे में भीड़ वाले स्थानों पर उचित वेंटिलेशन और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था और प्रभावी होनी चाहिए।

पुलिस ने दर्ज किया आकस्मिक मौत का मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मध्य मुंबई के लालबागचा राजा गणेश पंडाल के पास जयदीप को अचानक सीने में तकलीफ हुई थी। इसके बाद उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

कालाचौकी पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, जयदीप के परिवार ने किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत नहीं की है और न ही किसी पर संदेह जताया है। पुलिस मामले की आवश्यक जांच कर रही है।

BIHAR : जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी का वीडियो वायरल होने पर SP की आई प्रतिक्रिया, आरोपियों की हुई पहचान

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Jamui student harassment video: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा का रास्ता रोककर कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि पीड़ितों के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान कर ली गई है।

Jamui Viral Video: बिहार के जमुई जिले में बाइक सवार नाबालिग छात्र और छात्रा का कुछ लोगों ने रास्ता रोक लिया। इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार भी किया। जिसका सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। अब इस पूरे मामले में पुलिस की प्रतिक्रिया सामने आई है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए एसपी विश्वजीत दयाल ने कहा कि आज सुबह यह वीडियो हमारे संज्ञान में आया, जिसमें दो नाबालिग छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि वीडियो के आधार पर हमने पीड़ितों की पहचान की और उनके बयान दर्ज किए। पूछताछ में पता चला कि यह घटना 19 सितंबर की शाम करीब 7 बजे हुई थी। दोनों दोस्त एक लड़का और एक लड़की कोचिंग के लिए गए थे और तस्वीरें खींचने के लिए उस इलाके में गए थे, जहां यह घटना हुई। यह घटना जमुई थाना क्षेत्र में हुई है।

आरोपियों की हुई पहचान- एसपी
एसपी ने कहा कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है। हम कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। पीड़ितों की ओर से कल कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी गई थी। आज जब पुलिस ने उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने आवेदन दिया, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि वीडियो में छह से सात लोग दिखाई दे रहे हैं। एफआईआर में किसी का नाम नहीं है, लेकिन जांच के दौरान हमने आरोपियों की पहचान कर ली है और उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।

ENTERTAINMENT : R. N. Kao कौन थे? भारत के पहले स्पाई पर फिल्म ला रहे करन जौहर, ‘धुरंधर’ को चटाएंगे धूल?

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करन जौहर ने आज अपनी अगली फिल्म का ऐलान कर दिया है. वो अब भारत के ‘सुपर स्पाई’ की असली कहानी लेकर आ रहे हैं.

इन दिनों बॉलीवुड में स्पाई और एक्शन थ्रिलर फिल्मों का जबरदस्त चलन है. ऐसी फिल्में ऑडियंस भी पसंद कर रही हैं. चाहें रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ हो या फिर सलमान खान की ‘टाइगर’, या शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ की. इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर तो ऐसी ही स्पाई और थ्रिलर फिल्मों का दबदबा है. बॉलीवुड के इस ‘स्पाई यूनिवर्स’ में अब तक काल्पनिक कैरेक्टर्स ही दिखे हैं और ऐसी फिल्मों ने रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है. लेकिन अब दिग्गज फिल्ममेकर करण जौहर ने बड़ी स्पाई फिल्म का ऐलान कर दिया है. वो सीधे उस शख्स की कहानी लेकर आ रहे हैं जिसने असल जिंदगी में भारत के खुफिया तंत्र की नींव रखी थी.

करण जौहर ने आज सोशल मीडिया के जरिए ऐलान किया है कि वो भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पहले प्रमुख और संस्थापक रामेश्वर नाथ काव (आर. एन. काव) के जीवन पर फिल्म बनाएंगे.

ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या पर्दे पर उतरने वाली देश के असली ‘मास्टर स्पाई’ की कहानी बॉलीवुड के ‘धुरंधरोंट को पटखनी देकर बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रचेगी? ये तो रिलीज के वक्त पता चल पाएगा लेकिन फिलहाल आपको बताते हैं कि जिस फिल्म का ऐलान करन जौहर ने किया है वो किस बारे में है और कब रिलीज होने वाली है.

करन जौहर ने आज इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘आज R&AW के 58 साल पूरे हो रहे हैं. हमें आर. एन. काव की कहानी पर अपनी फिल्म का ऐलान करते हुए बेहद खुशी हो रही है. यह कहानी उस शख्स की है, जिसने साए में रहकर काम किया. उन्होंने उस संस्था की नींव रखी, जिसे आज हम R&AW के नाम से जानते हैं. फिल्म में उनके पहले मिशन को भी दिखाया जाएगा.’

साथ ही करन जौहर ने ये भी बता दिया कि यह फिल्म नितिन गोखले की किताब ‘जेंटलमैन स्पाईमास्टर’ पर आधारित है. जो वीडियो करन जौहर ने पोस्ट किया है उसमें बताया गया है कि फिल्म का निर्माण करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस और लियो मीडिया कलेक्टिव मिलकर कर रहे हैं. इस फिल्म की कहानी में आर. एन. काव के शुरुआती दिनों को दिखाया जाएगा. साथ ही, 1968 में उनके सबसे पहले बड़े सीक्रेट मिशन को दिखाया जाएगा.

आर. एन. काव वो शख्स थे जिन्होंने देश में खुफिया तंत्र की नींव रखी थी. उन्हें जासूसी की दुनिया का सबसे बड़ा दिमाग माना जाता है. 21 सितंबर 1968 को जब R&AW बनी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें इसका पहला प्रमुख नियुक्त किया था.

आर. एन. काव का जन्म 10 मई 1918 को बनारस में हुआ था. 1940 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और इंडियन इंपीरियल पुलिस में शामिल हुए.
वर्ष 1968 में भारत की बाहरी खुफिया जरूरतों को पूरा करने के लिए R&AW का गठन किया.
R&AW गठन के महज 3 साल के भीतर काव ने ऐसा खुफिया नेटवर्क खड़ा किया कि 1971 के युद्ध में भारत को ऐतिहासिक सफलता मिली.

उन्होंने ‘मुक्ति वाहिनी’ को हथियार देने, ट्रेनिंग देने और पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य रणनीति तैयार करने में सैम मानेकशॉ के साथ मिलकर निर्णायक भूमिका निभाई.
सिक्किम को 1975 में भारत का 22वां राज्य बनाने की गुप्त कूटनीतिक और खुफिया रणनीति तैयार करने का मुख्य श्रेय आर. एन. काव को जाता है.
वो जवाहरलाल नेहरू सहित कई प्रधानमंत्रियों के करीबी सुरक्षा प्रमुख और सलाहकार रहे.

करन जौहर ने आज अपनी अगली फिल्म का ऐलान कर दिया है. वो अब भारत के ‘सुपर स्पाई’ की असली कहानी लेकर आ रहे हैं.

इन दिनों बॉलीवुड में स्पाई और एक्शन थ्रिलर फिल्मों का जबरदस्त चलन है. ऐसी फिल्में ऑडियंस भी पसंद कर रही हैं. चाहें रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ हो या फिर सलमान खान की ‘टाइगर’, या शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ की. इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर तो ऐसी ही स्पाई और थ्रिलर फिल्मों का दबदबा है. बॉलीवुड के इस ‘स्पाई यूनिवर्स’ में अब तक काल्पनिक कैरेक्टर्स ही दिखे हैं और ऐसी फिल्मों ने रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है. लेकिन अब दिग्गज फिल्ममेकर करण जौहर ने बड़ी स्पाई फिल्म का ऐलान कर दिया है. वो सीधे उस शख्स की कहानी लेकर आ रहे हैं जिसने असल जिंदगी में भारत के खुफिया तंत्र की नींव रखी थी.

करण जौहर ने आज सोशल मीडिया के जरिए ऐलान किया है कि वो भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पहले प्रमुख और संस्थापक रामेश्वर नाथ काव (आर. एन. काव) के जीवन पर फिल्म बनाएंगे.

ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या पर्दे पर उतरने वाली देश के असली ‘मास्टर स्पाई’ की कहानी बॉलीवुड के ‘धुरंधरोंट को पटखनी देकर बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रचेगी? ये तो रिलीज के वक्त पता चल पाएगा लेकिन फिलहाल आपको बताते हैं कि जिस फिल्म का ऐलान करन जौहर ने किया है वो किस बारे में है और कब रिलीज होने वाली है.

करन जौहर ने आज इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘आज R&AW के 58 साल पूरे हो रहे हैं. हमें आर. एन. काव की कहानी पर अपनी फिल्म का ऐलान करते हुए बेहद खुशी हो रही है. यह कहानी उस शख्स की है, जिसने साए में रहकर काम किया. उन्होंने उस संस्था की नींव रखी, जिसे आज हम R&AW के नाम से जानते हैं. फिल्म में उनके पहले मिशन को भी दिखाया जाएगा.’

साथ ही करन जौहर ने ये भी बता दिया कि यह फिल्म नितिन गोखले की किताब ‘जेंटलमैन स्पाईमास्टर’ पर आधारित है. जो वीडियो करन जौहर ने पोस्ट किया है उसमें बताया गया है कि फिल्म का निर्माण करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस और लियो मीडिया कलेक्टिव मिलकर कर रहे हैं. इस फिल्म की कहानी में आर. एन. काव के शुरुआती दिनों को दिखाया जाएगा. साथ ही, 1968 में उनके सबसे पहले बड़े सीक्रेट मिशन को दिखाया जाएगा.

आर. एन. काव वो शख्स थे जिन्होंने देश में खुफिया तंत्र की नींव रखी थी. उन्हें जासूसी की दुनिया का सबसे बड़ा दिमाग माना जाता है. 21 सितंबर 1968 को जब R&AW बनी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें इसका पहला प्रमुख नियुक्त किया था.

आर. एन. काव का जन्म 10 मई 1918 को बनारस में हुआ था. 1940 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और इंडियन इंपीरियल पुलिस में शामिल हुए.
वर्ष 1968 में भारत की बाहरी खुफिया जरूरतों को पूरा करने के लिए R&AW का गठन किया.
R&AW गठन के महज 3 साल के भीतर काव ने ऐसा खुफिया नेटवर्क खड़ा किया कि 1971 के युद्ध में भारत को ऐतिहासिक सफलता मिली.

उन्होंने ‘मुक्ति वाहिनी’ को हथियार देने, ट्रेनिंग देने और पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य रणनीति तैयार करने में सैम मानेकशॉ के साथ मिलकर निर्णायक भूमिका निभाई.
सिक्किम को 1975 में भारत का 22वां राज्य बनाने की गुप्त कूटनीतिक और खुफिया रणनीति तैयार करने का मुख्य श्रेय आर. एन. काव को जाता है.
वो जवाहरलाल नेहरू सहित कई प्रधानमंत्रियों के करीबी सुरक्षा प्रमुख और सलाहकार रहे.

NATIONAL : ‘ बुलाए थे बैठक और हो गई कुश्ती’, अखिलेश यादव पर राजभर ने कसा तंज

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भासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर हमला किया और उन्होंने पीडीए का नया मतलब ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ भी बताया.

सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने तंज किया कि अखिलेश यादव ने बैठक चुनावी रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी, लेकिन उनके सामने ही नेताओं में कुश्ती हो गई. उन्होंने पीडीए का नया मतलब भी ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ बताया.

राजभर ने लिखा, ‘अखिलेश यादव जी! क्या से क्या हो गया, देखते-देखते. बुलाए थे बैठक और हो गई कुश्ती.’ उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की जगह अपराधियों को भरकर रखा जाएगा तो नतीजा ऐसा ही होगा. इसी के साथ उन्होंने कहावत लिखी, ‘बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय.’

सत्ता मिली नहीं, अभी से ‘पैसे की गर्मी’
राजभर ने एटा-कासगंज की बैठक में हुए विवाद और इसके बाद दोनों जिलों की पार्टी इकाइयां भंग किए जाने को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा. उन्होंने अखिलेश की ‘पैसे की गर्मी’ वाली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि टिकट अभी बंटा नहीं, चुनाव आया नहीं और सत्ता मिली नहीं, लेकिन ‘पैसे की गर्मी’ अभी से चढ़ गई है.

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही नेता आपस में भिड़ जाएं और अध्यक्ष को बैठक छोड़कर जाना पड़े, वहां अनुशासन का हाल समझा जा सकता है. राजभर ने कटाक्ष किया कि ‘सपा और अनुशासन’ एक साथ नहीं आ सकते.

राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज करते हुए कहा कि यदि पार्टी को चुनाव जिताना है तो प्रदेश की पार्टी इकाई भी भंग कर देनी चाहिए. सिर्फ एटा-कासगंज के नेताओं को ही ‘पैसों की गर्मी’ नहीं आई है, बल्कि हाल सब जगह एक जैसा है. पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण, जय महाराजा सुहेलदेव’ लिखा.

भासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर हमला किया और उन्होंने पीडीए का नया मतलब ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ भी बताया.

सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने तंज किया कि अखिलेश यादव ने बैठक चुनावी रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी, लेकिन उनके सामने ही नेताओं में कुश्ती हो गई. उन्होंने पीडीए का नया मतलब भी ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ बताया.

राजभर ने लिखा, ‘अखिलेश यादव जी! क्या से क्या हो गया, देखते-देखते. बुलाए थे बैठक और हो गई कुश्ती.’ उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की जगह अपराधियों को भरकर रखा जाएगा तो नतीजा ऐसा ही होगा. इसी के साथ उन्होंने कहावत लिखी, ‘बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय.’

सत्ता मिली नहीं, अभी से ‘पैसे की गर्मी’
राजभर ने एटा-कासगंज की बैठक में हुए विवाद और इसके बाद दोनों जिलों की पार्टी इकाइयां भंग किए जाने को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा. उन्होंने अखिलेश की ‘पैसे की गर्मी’ वाली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि टिकट अभी बंटा नहीं, चुनाव आया नहीं और सत्ता मिली नहीं, लेकिन ‘पैसे की गर्मी’ अभी से चढ़ गई है.

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही नेता आपस में भिड़ जाएं और अध्यक्ष को बैठक छोड़कर जाना पड़े, वहां अनुशासन का हाल समझा जा सकता है. राजभर ने कटाक्ष किया कि ‘सपा और अनुशासन’ एक साथ नहीं आ सकते.

भासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर हमला किया और उन्होंने पीडीए का नया मतलब ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ भी बताया.

सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने तंज किया कि अखिलेश यादव ने बैठक चुनावी रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी, लेकिन उनके सामने ही नेताओं में कुश्ती हो गई. उन्होंने पीडीए का नया मतलब भी ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ बताया.

राजभर ने लिखा, ‘अखिलेश यादव जी! क्या से क्या हो गया, देखते-देखते. बुलाए थे बैठक और हो गई कुश्ती.’ उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की जगह अपराधियों को भरकर रखा जाएगा तो नतीजा ऐसा ही होगा. इसी के साथ उन्होंने कहावत लिखी, ‘बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय.’

सत्ता मिली नहीं, अभी से ‘पैसे की गर्मी’
राजभर ने एटा-कासगंज की बैठक में हुए विवाद और इसके बाद दोनों जिलों की पार्टी इकाइयां भंग किए जाने को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा. उन्होंने अखिलेश की ‘पैसे की गर्मी’ वाली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि टिकट अभी बंटा नहीं, चुनाव आया नहीं और सत्ता मिली नहीं, लेकिन ‘पैसे की गर्मी’ अभी से चढ़ गई है.

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही नेता आपस में भिड़ जाएं और अध्यक्ष को बैठक छोड़कर जाना पड़े, वहां अनुशासन का हाल समझा जा सकता है. राजभर ने कटाक्ष किया कि ‘सपा और अनुशासन’ एक साथ नहीं आ सकते.

राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज करते हुए कहा कि यदि पार्टी को चुनाव जिताना है तो प्रदेश की पार्टी इकाई भी भंग कर देनी चाहिए. सिर्फ एटा-कासगंज के नेताओं को ही ‘पैसों की गर्मी’ नहीं आई है, बल्कि हाल सब जगह एक जैसा है. पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण, जय महाराजा सुहेलदेव’ लिखा.

भासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर हमला किया और उन्होंने पीडीए का नया मतलब ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ भी बताया.

सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने तंज किया कि अखिलेश यादव ने बैठक चुनावी रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी, लेकिन उनके सामने ही नेताओं में कुश्ती हो गई. उन्होंने पीडीए का नया मतलब भी ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ बताया.

राजभर ने लिखा, ‘अखिलेश यादव जी! क्या से क्या हो गया, देखते-देखते. बुलाए थे बैठक और हो गई कुश्ती.’ उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की जगह अपराधियों को भरकर रखा जाएगा तो नतीजा ऐसा ही होगा. इसी के साथ उन्होंने कहावत लिखी, ‘बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय.’

सत्ता मिली नहीं, अभी से ‘पैसे की गर्मी’
राजभर ने एटा-कासगंज की बैठक में हुए विवाद और इसके बाद दोनों जिलों की पार्टी इकाइयां भंग किए जाने को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा. उन्होंने अखिलेश की ‘पैसे की गर्मी’ वाली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि टिकट अभी बंटा नहीं, चुनाव आया नहीं और सत्ता मिली नहीं, लेकिन ‘पैसे की गर्मी’ अभी से चढ़ गई है.

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही नेता आपस में भिड़ जाएं और अध्यक्ष को बैठक छोड़कर जाना पड़े, वहां अनुशासन का हाल समझा जा सकता है. राजभर ने कटाक्ष किया कि ‘सपा और अनुशासन’ एक साथ नहीं आ सकते.

NATIONAL : पश्चिम बंगाल में उपचुनाव: उम्मीदवारों पर पुलिस की कार्रवाई जारी, अब रेजीनगर के निर्दलीय प्रत्याशी गिरफ्तार

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पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवारों सहित कई नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जानें क्या है पूरा मामला।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पुलिस ने रेजीनगर उपचुनाव में भाग्य आजमा रहे निर्दलीय उम्मीदवार को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 2021 के एक पुराने मामले में की गई है। इससे पहले नंदीग्राम सीट से ताल ठोक रहे कांग्रेस के प्रत्याशी पर भी कार्रवाई हुई है।

6 अक्तूबर को होने हैं चुनाव
रेजीनगर में हुई कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) से भी जुड़े हैं। एजेयूपी का नेतृत्व हुमायूं कबीर करते हैं। सैफुल की गिरफ्तारी से एक दिन पहले नंदीग्राम में कांग्रेस के मिलन प्रधान को भी पकड़ा गया था। मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार हैं। सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी भूमि अधिग्रहण आंदोलन के लगभग दो दशक पुराने मामले में हुई। गौरतलब है कि 6 अक्तूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने हैं।

किन दो सीटों पर उपचुनाव की नौबत, कारण क्या?
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली की है, जबकि हुमायूं कबीर ने 2026 विधानसभा चुनाव में नवादा सीट बरकरार रखने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ दी। एजेयूपी ने रेजीनगर उपचुनाव के लिए कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है।

एजेयूपी प्रमुख पर क्या आरोप हैं?
बहरामपुर पुलिस ने शनिवार को एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर को नोटिस भेजा। उन्हें 21 सितंबर को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने को कहा गया है। यह मामला दो समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कथित साजिश से जुड़ा है। पुलिस ने गत 14 सितंबर को मामला दर्ज करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जारी की थी।

पार्टी के राज्य सचिव क्यों गिरफ्तार हुए?
पुलिस ने 18 सितंबर को एजेयूपी के राज्य सचिव आशिक इकबाल को भी गिरफ्तार किया। उन्हें मुर्शिदाबाद जिले में वाहन जांच के दौरान पुलिस पिकेट पर पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक उनके पास से बड़ी मात्रा में नकली मुद्रा और अवैध हथियार मिले। इकबाल के साथ यात्रा कर रहे एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है।

BUSINESS : नई आफत की दस्‍तक, तेल से ज्यादा पड़ रहा जहाज का किराया,LPG-CNG सप्‍लाई पर संकट

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ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल लाने वाले टैंकरों का किराया रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. जानिए महंगे क्रूड और शिपिंग कॉस्ट से भारत को कितना नुकसान हो सकता है और पेट्रोल-डीजल के अलावा LPG, LNG और CNG पर इसका क्या असर पड़ेगा.

अगर आप इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं क‍ि पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, एलपीजी का संकट अब नहीं होगा. तो रुक‍िये. एक नई आफत दस्‍तक देने वाली है. ईरान युद्ध ने तेल की दुनिया में एक ऐसा खेल शुरू कर दिया है, जिसका असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमत पर नहीं पड़ रहा. अब तेल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना भी बहुत महंगा हो गया है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि फारस की खाड़ी से चीन तक तेल ले जाने वाले बड़े सुपरटैंकरों का किराया इस हफ्ते पहली बार 10.35 लाख डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपये रोज के पार पहुंच गया. युद्ध से पहले यही किराया करीब 2.08 लाख डॉलर रोज था. यानी जहाज का खर्च करीब पांच गुना हो गया.एक तरह से तेल से ज्‍यादा पड़ रहा जहाज का क‍िराया. पेट्रोल-डीजल की सप्‍लाई तो आसानी से हो जाएगी, लेकिन LPG-CNG सप्‍लाई पर संकट है.

आप सोच रहे होंगे क‍ि आख‍िर जहाज वालों ने क‍िराया इतना क्‍यों बढ़ा द‍िया, तो जवाब है क‍ि खतरा बढ़ गया है. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज से न‍िकलना खतरे से खाली नहीं. कभी भी म‍िसाइलें आकर ग‍िर सकती हैं. इसीलिए इंश्योरेंस महंगा हो गया है और कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते पर जहाज भेजने से बच रही हैं. नतीजा यह कि जो जहाज जोखिम लेकर जा रहे हैं, वे उसका पैसा भी वसूल रहे हैं. एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, टैंकरों की कमी ने फ्रेट रेट को ऊपर धकेला है.
भारत के ल‍िए क्‍यों आफत

भारत के लिए मुश्क‍िल ज्‍यादा है. क्योंकि भारत दुनिया का बड़ा क्रूड इंपोर्टर है और अरब देशों से आने वाले तेल को भी समुद्र के रास्ते लाना पड़ता है. सितंबर में अरबियन गल्फ से भारत आने वाले VLCC टैंकर का फ्रेट अगस्त के मुकाबले करीब दोगुना हो गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक रोज का चार्टर रेट करीब 2.5 लाख डॉलर तक पहुंच गया. इसके साथ इंश्योरेंस और जहाज के ईंधन की लागत भी बढ़ी है.

यानी भारत के लिए मुसीबत सिर्फ यह नहीं कि तेल 100 डॉलर के आसपास पहुंच गया. असली बात यह है कि एक बैरल तेल को भारत तक लाने की लागत में कई चीजें जुड़ रही हैं. जैसे क्रूड की कीमत, जहाज का किराया, युद्ध का इंश्योरेंस और लंबा समुद्री रास्ता. अगस्त में भारत ने करीब 1.9 करोड़ टन क्रूड इंपोर्ट किया, लेकिन इसके लिए बिल 11.7 अरब डॉलर रहा. पिछले साल इसी महीने 1.96 करोड़ टन तेल के लिए बिल 9.9 अरब डॉलर था. यानी मात्रा करीब 3% कम हुई, लेकिन बिल 18% बढ़ गया.

फर्क क्‍या पड़ेगा
भारत को विदेश से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा तो रिफाइनरी की लागत बढ़ेगी. ऊपर से उस तेल को भारत तक लाने का जहाज भी महंगा हो गया तो खर्च और बढ़ गया. रिपोर्ट के मुताबिक भारत का अप्रैल-जुलाई का क्रूड इंपोर्ट बिल 63.37 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था, जो एक साल पहले के मुकाबले 56% ज्यादा था. एक अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी भारत के सालाना इंपोर्ट बिल पर करीब 18,000 करोड़ रुपये का असर डाल सकती है.

असली च‍िंता गैस की
लेकिन यहां कहानी सिर्फ पेट्रोल और डीजल की नहीं है. असली चिंता गैस की तरफ भी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सिर्फ क्रूड ऑयल ही नहीं गुजरता, बल्कि दुनिया की बड़ी मात्रा में LNG और LPG भी इसी रास्ते से आती-जाती है. सितंबर में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य औसत से काफी नीचे चली गई और एक दिन सिर्फ चार जहाजों के गुजरने का डेटा सामने आया. इसी दौरान एक बड़े गैस कैरियर के जरिए करीब 4.7 लाख बैरल LPG के निकलने की जानकारी भी सामने आई.

यही वजह है कि भारत के लिए LPG और LNG की सप्लाई ज्यादा मुश्क‍िल हो गया है. भारत के क्रूड इंपोर्ट को रूस समेत दूसरे स्रोतों से कुछ हद तक संभाला जा सकता है, लेकिन गैस की सप्लाई में समुद्री रास्ते का जोखिम अलग तरह का है. Kpler के मुताबिक भारत की क्रूड सप्लाई फिलहाल काफी हद तक संभली हुई है, लेकिन लंबे समय तक होर्मुज में परेशानी रही तो LPG और LNG की सप्लाई तथा शिपिंग लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
और यहीं से CNG का कनेक्शन आता है. CNG सीधे LPG या क्रूड से नहीं बनती, लेकिन देश के गैस सिस्टम में LNG और सीएनजी की उपलब्धता और कीमत अहम होती है. अगर अंतरराष्ट्रीय LNG महंगी होती है या सप्लाई में दिक्कत आती है तो गैस की कुल लागत पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए पेट्रोल पंप पर खड़ी कार के मालिक को सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं देखनी चाहिए. लंबे संकट की स्थिति में गैस से चलने वाले वाहनों और उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है. भारत के ऊर्जा आयात में LPG और LNG दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है.

तो फिर भारत कर क्या रहा है?
पहला तरीका है तेल खरीदने के रास्ते और देशों को बदलना. रूस भारत का बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है और भारतीय रिफाइनर अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर किसी एक रास्ते पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं. S&P Global के मुताबिक भारतीय रिफाइनरों ने सितंबर तक की क्रूड जरूरत के लिए सप्लाई सुरक्षित कर रखी थी और रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ था. इसके अलावा भारत ने वेनेजुएला जैसे दूसरे स्रोतों से भी खरीद बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं.

दूसरा तरीका है बीमा और स्टॉक की सुरक्षा. सरकार ने मई में 1.5 अरब डॉलर का भारत मैरीटाइम इंश्‍योरेंस पूल शुरू किया था, जिसमें 1.4 अरब डॉलर की सरकारी गारंटी है, ताकि युद्ध जैसे हालात में समुद्री बीमा की उपलब्धता बनी रहे. साथ ही भारतीय रिफाइनर पहले से क्रूड खरीदकर सप्लाई को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं. यानी भारत का प्लान साफ है क‍ि जहां संभव हो वहां होर्मुज पर निर्भरता घटाओ, दूसरे देशों से तेल लो और जरूरी ऊर्जा सप्लाई पहले से सुरक्षित रखो. लेकिन अगर युद्ध और समुद्री जोखिम लंबे समय तक चलते हैं तो महंगा फ्रेट, महंगा क्रूड और महंगा गैस इंपोर्ट आखिरकार भारत की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर दबाव डाल सकता है.

NATIONAL : भारतीय नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी INS ‘मालवन’, पनडुब्बी रोधी क्षमता होगी मजबूत

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आईएनएस ‘मालवन’ का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है। पुराने ‘मालवन’ को 19 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2003 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था।

करवार: भारतीय नौसेना की ताकत में एक और इजाफा हुआ है। स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी के दूसरे ‘एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) आईएनएस ‘मालवन’ को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। करवार में आयोजित कमीशनिंग समारोह में इस युद्धपोत को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। आईएनएस ‘मालवन’ को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है। इसके नौसेना में शामिल होने से समुद्री सीमाओं की निगरानी के साथ-साथ पनडुब्बी रोधी अभियानों में भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ कर सकेगा अभियान

भारतीय नौसेना के अनुसार, आईएनएस ‘मालवन’ बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वय करते हुए विभिन्न अभियानों में हिस्सा लेने में सक्षम है। इसे उथले पानी में निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

आईएनएस ‘मालवन’ का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों के साथ किया गया है। यह माहे श्रेणी का दूसरा पनडुब्बी रोधी शैलो वाटर क्राफ्ट है। युद्धपोत को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में बढ़ती स्वदेशी निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इसके निर्माण से देश की नौसैनिक डिजाइन, उपकरण निर्माण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण की क्षमता को भी बढ़ावा मिला है।

‘बाघ नख’ से प्रेरित है युद्धपोत का प्रतीक चिह्न

आईएनएस ‘मालवन’ के प्रतीक चिह्न में ‘बाघ नख’ को दर्शाया गया है। इसे साहस, युद्ध कौशल, फुर्ती और दुश्मन पर सटीक प्रहार की क्षमता का प्रतीक माना गया है। प्रतीक चिह्न के चारों ओर बनी समुद्री लहरें भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति नौसेना की सतर्कता और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पोत का ध्येय वाक्य ‘साइलेंट क्लॉज’ इसकी गुप्त, तेज और प्रभावी कार्रवाई की क्षमता को दर्शाता है।

पूर्व माइंसवीपर पोत के नाम पर रखा गया ‘मालवन’

आईएनएस ‘मालवन’ का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है। पुराने ‘मालवन’ को 19 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2003 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था।

एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की कमीशनिंग

आईएनएस ‘मालवन’ के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की। समारोह में पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि युद्धपोतों के निर्माण में नौसेना अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण का प्रभावी मॉडल है। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने भविष्य के युद्धों में सफलता के लिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त अभियानों की जरूरत पर भी जोर दिया।

ENTERTAINMENT : दिशा सालियान के पिता ने आदित्य ठाकरे को भेजा 500 करोड़ का नोटिस, जानें वजह

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मुंबई के चर्चित दिशा सालियान डेथ केस की जांच अब सीबीआई कर रही है। सीबीआई के जांच संभालने के बाद इस मामले में दिशा के पिता सतीश सालियान ने आदित्य ठाकरे और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को नोटिस भेजा है।

मुंबई: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में सीबीआई जांच के बीच आरोपों में घिरे आदित्य ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दिशा के पिता सतीश सालियन ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी (एसपी) नेता व महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। दिशा के पिता ने इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन की न्याय की लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।

दिशा सालियन मौत का मामला
28 साल की दिशा सालियन की मौत 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची रिहायशी इमारत से गिरने के कारण हुई थी। पुलिस ने इस घटना को आकस्मिक मौत माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की। इसके छह दिन बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच मुंबई पुलिस ने की थी लेकिन दिशा सालियान के पिता इससे संतुष्ट नहीं हुए थे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। काफी लंबी जद्दोजहद के बाद अब इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

पिता के निशाने पर आदित्य ठाकरे
दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट जो याचिका दाखिल की थी। उसमें नए सिर से एफआईआर दर्ज करके जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली सहित कई लोगों से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की गई थी। 500 करोड़ रुपये के नोटिस में पिता ने आदित्य ठाकरे पर इंसाफ की लड़ाई के उद्देश्य पर सवाल उठाने और इसे राजनीति से प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।

नोटिस में क्या कहा गया है
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि ऊपर बताए गए आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी भरोसेमंद सबूत या आधार के लगाए गए हैं और इनका मकसद सिर्फ आपके गलत और छिपे हुए इरादों को पूरा करना है। ये आरोप मेरे क्लाइंट (सतीश सालियन) की ईमानदारी, विश्वसनीयता और नेकनीयती पर सीधा और गंभीर सवाल उठाते हैं। इसमें एक दुखी पिता को जो सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता था। एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद से न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। नोटिस में ठाकरे पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उन्होंने (आदित्य ठाकरे) ने गलत तरीके से यह दावा किया कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच कर ली है और उन्हें क्लीन चिट दे दी है।

सार्वजनिक माफी की मांग
सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से माफी की मांग की है, जो लिखित और सार्वजनिक हो। यह माफी सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित की जानी चाहिए। वीडियो माफी कम से कम तीन मिनट की होनी चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए। गौरतलब हो कि सीबीआई द्वारा इस मामले में अपनी एफआईआर में नाम शामिल किए जाने के दो दिन बाद बुधवार को आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया।

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