Wednesday, September 16, 2026
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WORLD : पाकिस्तान ने आतंकी मसूद अजहर पर बढ़ाया इनाम, तो भारत ने इस कदम को बताया ‘नौटंकी’

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भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने इनाम बढ़ा दिया है, लेकिन इंडिया ने PAK के इस कदम को महज एक नौटंकी बताया है, क्योंकि JeM चीफ के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.

भारत ने JeM चीफ मसूद अजहर की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए इनाम की रकम बढ़ाने पर पाकिस्तान की आलोचना की है और इस कदम को ‘नौटंकी’ और ‘खोखला ऐलान’ बताया है. इंडिया का कहना है कि इस्लामाबाद को ऐसे ऐलान करने के बजाय, जिनका कोई खास असर नहीं होता, आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.

पाकिस्तान ने अजहर पर इनाम बढ़ाया
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अजहर को अपनी 2026 की सबसे ज्यादा वांटेड आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल किया है. खबरों के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए इनाम की रकम 20 लाख पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी गई है. इस खबर पर रिएक्ट करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का ऐसे कदमों को सार्थक कार्रवाई के तौर पर दिखाने की कोशिश करना कोई नई बात नहीं है. उन्होंने इस नए कदम को लोगों को गुमराह करने की कोशिश बताया और कहा कि पाकिस्तान को खोखले ऐलान करने के बजाय ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

FATF की बैठक से पहले ये कदम
पाकिस्तान 2021 से ही ये कहता आ रहा है कि अजहर अब देश में नहीं है और अफगानिस्तान चला गया है. FIA ने पहले उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 50 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम का ऐलान किया था. ये नई लिस्टिंग अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की मीटिंग से पहले आई है. पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में दोबारा शामिल होने से बचने की कोशिश कर रहा है; ये लिस्ट उन देशों पर नजर रखती है जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के खिलाफ उपायों में कमियां रखते हैं. खबरों के मुताबिक, FIA की नई ‘रेड बुक’ में 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल हैं.

मसूद अजहर क्यों है मोस्ट वांटेड?
मसूद अजहर भारत के सबसे ज्यादा वांटेड आतंकवादियों में से एक है और कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा है, जिनमें 2001 का संसद हमला, 2008 का मुंबई हमला, 2016 का पठानकोट हमला और 2019 का पुलवामा बम धमाका शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र ने JeM के फाउंडर को ग्लोबल टेररिस्ट भी घोषित किया है. भारत ने 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के हाइजैक के बाद बंधकों की रिहाई के लिए हुए समझौते के तहत उसे रिहा किया था.

BJP ने कहा- ‘PAK में मौजूद है मसूद’
बीजेपी की जम्मू-कश्मीर इकाई ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर ईनाम घोषित करना एक ‘बड़ा धोखा’ है. भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, ‘इस्लामबाद अपने सबसे कुख्यात आतंकवादियों में से एक को भगोड़ा घोषित करके अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकता. मसूद अजहर कहीं नहीं भागा, वह पाकिस्तान में सेना के संरक्षण में है.’ ठाकुर ने मांग की है कि पाकिस्तान खेल खेलना बंद करे और अजहर को भारत को सौंपे.

ठाकुर ने कहा, ‘पाकिस्तान की तरफ से मसूद अजहर को भगोड़ा दिखाने की कोशिश एक बड़े धोखे और पाखंड के अलावा कुछ नहीं है. वो पाकिस्तान से गायब नहीं हुआ है; वो वहीं है, और पाकिस्तान अच्छी तरह जानता है कि वो कहां है. अगर इस्लामाबाद आतंकवाद से लड़ने को लेकर सचमुच में गंभीर है, तो उसे बयान जारी करने और इनाम घोषित करने के बजाय अजहर को भारत को सौंप देना चाहिए.’

NATIONAL : सुरक्षा बलों के तालमेल से जम्मू-कश्मीर में अब सब सामान्य, आतंकवाद से युवाओं का मोहभंग

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रक्षा मंत्रालय की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में प्रदेश में हिंसा की घटनाओं में भारी गिरावट, विरोध-प्रदर्शनों पर प्रभावी नियंत्रण और पथराव की घटनाओं के शून्य पर पहुंचने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में सुरक्षा बलों के प्रयासों के साथ स्थानीय जनता के सहयोग को भी शांति बहाली में महत्वपूर्ण बताया गया है।

भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के लगातार प्रयासों और आपसी समन्वय से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है। रक्षा मंत्रालय की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में प्रदेश में हिंसा की घटनाओं में भारी गिरावट, विरोध-प्रदर्शनों पर प्रभावी नियंत्रण और पथराव की घटनाओं के शून्य पर पहुंचने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में सुरक्षा बलों के प्रयासों के साथ स्थानीय जनता के सहयोग को भी शांति बहाली में महत्वपूर्ण बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की ओर से चलाए गए अभियानों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के कारण केंद्र शासित प्रदेश के माहौल में सुधार हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पार की अनिश्चितता के बावजूद मई 2025 में महानिदेशक सैन्य अभियान (डीजीएमओ) स्तर की वार्ताओं के बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्थिति काफी हद तक स्थिर बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बावजूद देश-विदेश के पर्यटकों का जम्मू-कश्मीर के प्रति विश्वास कायम रहा। वर्ष 2025 के दौरान रिकॉर्ड 2.3 करोड़ पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया, जबकि 4.13 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र श्री अमरनाथ यात्रा में हिस्सा लिया। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यह संख्या प्रदेश के सुरक्षा माहौल के प्रति भरोसे को दर्शाती है।

आतंकवाद से युवाओं का मोहभंग
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के युवाओं के आतंकवाद से दूर होने को महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में रेखांकित किया गया है। बीते वर्ष पूरे प्रदेश में केवल एक स्थानीय युवा के आतंकवाद से जुड़ने की जानकारी सामने आई। स्थानीय युवाओं का आतंकवाद से यह मोहभंग पाकिस्तान के उस नैरेटिव को भी चुनौती देता है, जिसके तहत वह कश्मीर में स्वदेशी आतंकवाद का दावा करता रहा है।

घुसपैठ के छह प्रयास नाकाम
सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र और सतर्क निगरानी के कारण एलओसी पर घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया गया। वर्ष 2025 के दौरान सीमा पार से घुसपैठ के छह प्रयास विफल किए गए और एलओसी पर 12 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, एलओसी पर पारंपरिक घुसपैठ में कमी आई है। हालांकि, पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के रास्ते हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिस पर सुरक्षा बलों की पैनी नजर है।

भीतरी इलाकों में 19 आतंकी ढेर
जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान जारी रखा। वर्ष 2025 में इन अभियानों के दौरान 19 खूंखार आतंकवादी मारे गए, जिनमें आठ पाकिस्तानी नागरिक थे। रिपोर्ट में यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध के पीछे पाकिस्तान की भूमिका की ओर भी संकेत करता है।

एलएसी पर चीनी सैनिकों की तैनाती घटी
उत्तरी सीमा की स्थिति पर रक्षा मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पार चीनी सेना की तैनाती में उल्लेखनीय कमी हुई है। हालांकि, किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना ने एलएसी के सभी सेक्टरों में अपनी तैनाती को मजबूत, संतुलित और सतर्क बनाए रखा है।

BUSINESS : UPI के बड़े व्यापारिक भुगतान पर लगेगा 0.4 प्रतिशत शुल्क, 15 अक्टूबर से होगा लागू

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सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जारी नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पाने पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लेना तय किया। इसमें 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा।…

नेशनल डेस्क : सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जारी नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पाने पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लेना तय किया। इसमें 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा। इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था समाप्त हो गई है। इस व्यवस्था को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था, लेकिन बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां लंबे समय से इस पर सवाल उठा रही थीं।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, नए बदलाव 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने कहा कि रेलवे, दूरसंचार और ईंधन जैसे आवश्यक क्षेत्रों में प्रति लेनदेन पांच रुपये का एकसमान शुल्क लगेगा, जबकि पूंजी बाजार में भुगतान के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत होगी। यूपीआई क्यूआर कोड के जरिये हर महीने एक लाख रुपये तक की आय वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेंगे।

सरकार का कहना है कि इस प्रावधान से व्यापारी लेनदेन के 96 प्रतिशत हिस्से पर नए शुल्क का कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, व्यक्ति से किसी व्यापारी को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाया जाएगा और 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

वहीं, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पी2पी यूपीआई लेनदेन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे हस्तांतरण यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का 37 प्रतिशत और मूल्य का 70 प्रतिशत हैं। नई व्यवस्था के तहत भुगतान ऐप प्रदाताओं को अलग से डिजिटल मंच शुल्क लगाने से रोक दिया गया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि व्यापारी एमडीआर की लागत ग्राहकों से न वसूलें। नए शुल्क से मिलने वाली राशि का पांचवां हिस्सा छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

NATIONAL : पीएम मोदी को भारत रत्न मिलेगा?: नड्डा ने साफ किया रुख, बोले- उचित समय पर फैसला लेगी भाजपा; राहुल पर भी हमला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिए जाने की चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा में इस मुद्दे पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ऐसे मामलों में उचित समय पर फैसला लेती है।

भारत रत्न पर BJP में कोई चर्चा नहीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नड्डा से पूछा गया कि क्या देशभर में चल रहे महीने भर के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंत में प्रधानमंत्री मोदी को भारत रत्न देने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस पर नड्डा ने कहा कि सर्वोच्च नागरिक सम्मान से जुड़े मामलों में पार्टी उचित समय पर निर्णय लेती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने सवाल पूछने वाले की इस सलाह को अच्छा बताया।

‘पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकतांत्रिक नेता’

विपक्ष के उस आरोप पर भी नड्डा ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी पर तानाशाह की तरह काम करने का आरोप लगाया जाता है। नड्डा ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी “दुनिया के सबसे लोकतांत्रिक नेता” हैं। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देश में बदलाव और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ना लोकतंत्र और जनता को साथ लेकर चलने के बिना संभव नहीं होता।

राहुल गांधी के आरोप पर भी दिया जवाब

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस आरोप पर भी नड्डा ने पलटवार किया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर आंकड़ों के जरिए देश की गलत तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया था। नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग अर्थशास्त्र का ‘ई’ तक नहीं जानते और जिस व्यक्ति का जिक्र सवाल में किया गया है, वह भी इसी श्रेणी में आते हैं।

NATIONAL : दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी चूक! बिना इमिग्रेशन क्लियरेंस 3 इटालियन नागरिक पहुंचे म्यूनिख, एयर इंडिया को नोटिस

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दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई, जहां तीन इटालियन नागरिक बिना इमिग्रेशन क्लियरेंस के म्यूनिख की फ्लाइट में सवार हो गए।मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया को नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा है।

नई दिल्ली: दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्री प्रबंधन में बड़ी लापरवाही सामने आई है। तीन इटालियन नागरिक बिना अनिवार्य इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली फ्लाइट में सवार हो गए। मामला सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने Air India को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एयरलाइन से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।

अमृतसर से दिल्ली आए, फिर म्यूनिख की फ्लाइट पकड़ी
घटना 4 सितंबर की सुबह की है। तीनों इटालियन नागरिक रात करीब 12:50 बजे Air India की फ्लाइट AI-1115 से अमृतसर से दिल्ली पहुंचे। करीब एक घंटे बाद, 1:45 बजे लुफ़्थान्सा की फ्लाइट LH-763 से म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने से पहले तीनों यात्रियों ने अनिवार्य इमिग्रेशन क्लियरेंस नहीं कराया।

घरेलू यात्री के तौर पर हुई पहचान
मंत्रालय के अनुसार, तीनों यात्री एयर इंडिया के हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत अमृतसर से दिल्ली आए थे। अमृतसर में उन्हें Air India की घरेलू यात्रा के लिए ‘D’ कैटेगरी के बोर्डिंग पास दिए गए। साथ ही, वहीं से आगे की लुफ़्थान्सा फ्लाइट के बोर्डिंग पास भी जारी किए गए थे।मंत्रालय ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाया है, क्योंकि एयर इंडिया की SOP में बोर्डिंग पास की दो श्रेणियां-‘D’ घरेलू और ‘I’ अंतरराष्ट्रीय निर्धारित हैं।

इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया तक कैसे पहुंचे?
मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली पहुंचने के बाद इन यात्रियों की पहचान अंतरराष्ट्रीय यात्री के रूप में होनी चाहिए थी और उन्हें इमिग्रेशन के लिए भेजा जाना चाहिए था। इसके बजाय उन्हें गेट 39 से इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया की ओर भेज दिया गया। वहां से वे प्रस्थान क्षेत्र में पहुंचे और लुफ़्थान्सा की फ्लाइट में सवार हो गए। मंत्रालय ने सवाल उठाया है कि घरेलू बोर्डिंग पास रखने वाले यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर क्षेत्र तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली।

एयर इंडिया की व्यवस्थाओं पर सवाल
मंत्रालय ने एयर इंडिया के डोमेस्टिक-इंटरनेशनल ऑपरेशंस SOP की पांच व्यवस्थाओं के कथित उल्लंघन को चिन्हित किया है। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग करना, केवल ‘I’ बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर डेस्क तक जाने की अनुमति देना और हब व स्पोक एयरपोर्ट पर चौबीसों घंटे नोडल अधिकारी व मॉनिटरिंग टीम की व्यवस्था शामिल है। मंत्रालय का कहना है कि इस मामले में यात्रियों की निगरानी और सही मार्ग पर भेजने की व्यवस्था प्रभावी नहीं रही।

7 दिन में जवाब, मैनुअल जांच में खुली चूक
मंत्रालय ने एयर इंडिया से पूछा है कि यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर क्षेत्र में जाने की अनुमति कैसे मिली, अमृतसर में लुफ़्थान्सा के बोर्डिंग पास क्यों जारी किए गए और इसमें एयर इंडिया और SATS के कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। नोडल अधिकारी और मॉनिटरिंग टीम की मौजूदगी और यात्रियों के रिकॉर्ड की जांच को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह गड़बड़ी बाद में मैनुअल रिकंसिलिएशन के दौरान सामने आई। एयर इंडिया को नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रशासनिक और नियामकीय कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

BUSINESS : सरकार का बड़ा एलान- ₹2000 तक के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा; किन यूजर्स को फायदा?

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डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की पहल के तहत सरकार ने बड़ा एलान किया है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि 2,000 रुपए तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर बैंक किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगा सकेंगे। इसी तरह, रुपे डेबिट कार्ड के जरिए 2,000 रुपए तक किए गए भुगतान पर भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना के अनुसार, रुपे डेबिट कार्ड और 2,000 रुपए तक के यूपीआई लेनदेन को आधिकारिक रूप से ‘इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम’ के रूप में अधिसूचित किया गया है।

किस कानून के तहत फैसला लिया गया?
अधिसूचना में कहा गया है कि कोई भी बैंक या भुगतान प्रणाली संचालक इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रकार का शुल्क नहीं वसूल सकता। सरकार ने यह फैसला पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के तहत अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है।

यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं, सरकार ने दूर किया भ्रम
वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले संभावित शुल्कों को लेकर बनी भ्रम की स्थिति को दूर करना है। पिछले महीने भी केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

व्यापारियों से जुड़ी नीति पर क्या है सरकार का रुख?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शुल्क नहीं लेने का फैसला लेते हुए कहा था कि व्यापारियों (मर्चेंट्स) पर भी कोई व्यापक रूप से लागू होने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नहीं लगाया जाएगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यदि भविष्य में एमडीआर लागू किया भी जाता है, तो वह केवल कुछ विशेष श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर, एक निश्चित सीमा से अधिक राशि वाले भुगतानों पर और बेहद मामूली दर पर ही लागू होगा।

स्पष्टीकरण की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में भी शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लगने वाले एमडीआर की तुलना में काफी कम होगा। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब हाल ही में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में किए गए संशोधनों के बाद यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की आशंकाओं को लेकर चर्चा चल रही थी। ऐसे में अब सरकार ने तस्वीर साफ कर दी है कि 2,000 रुपए तक के यूपीआई भुगतान और रुपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

BUSINESS : अब पुरानी ट्रेनों की भी बढ़ेगी रफ्तार,160 की स्पीड से भरेंगी फर्राटा; जानें क्या है प्लान

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भारतीय रेलवे पुरानी यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नई तकनीक की मदद से इन ट्रेनों को 160 किमी प्रति घंटे तक चलाने की योजना है।

भारतीय रेलवे यात्री ट्रेनों को तेज और बेहतर बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत 6,000 हॉर्स पावर के नए और कम ऊर्जा खपत वाले इंजन खरीदे जाएंगे। ये इंजन शोर भी कम करेंगे। इन्हें ट्रेन के आगे और पीछे लगाकर पुश-पुल तकनीक से चलाया जाएगा। इससे ट्रेन तेजी से रफ्तार पकड़ सकेगी। दोनों इंजन मिलकर 12,000 हॉर्स पावर की ताकत देंगे।

इन इंजनों की खरीद और रखरखाव के लिए निजी और सरकारी तकनीकी कंपनियों के साथ करार किया जाएगा। ट्रेनों में नए इंजन लगने के बाद अलग से पावर जनरेटर कोच लगाने की जरूरत नहीं होगी। इसी व्यवस्था से कोच की लाइट, पंखे और एसी के लिए बिजली मिलेगी। इससे सामान्य यात्री ट्रेनों में भी यात्रा अधिक आरामदायक होने की उम्मीद है। जिन रूट को ज्यादा रफ्तार के लिए तैयार किया गया है, उन पर इन इंजनों की मदद से ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकेंगी। अभी सामान्य यात्री ट्रेनों में 5,000 से 6,000 हॉर्सपावर के इंजन इस्तेमाल होते हैं।

इन इंजनों की खरीद और रखरखाव के लिए निजी और सरकारी तकनीकी कंपनियों के साथ सप्लाई और रखरखाव के लिए करार किए जाएंगे। इस योजना के रेलवे के ट्रेक विस्तार और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने जैसे दूसरे आधुनिकीकरण कार्यों के साथ आगे बढ़ेगी। इसका मकसद मेल-एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनों की रफ्तार और संचालन को बेहतर करना है। वंदे भारत में ट्रेन को चलाने वाली मोटर कोच के नीचे लगी होती हैं। वहीं, नई पुश-पुल व्यवस्था में ट्रेन के आगे और पीछे अलग-अलग इंजन लगाए जाएंगे। यानी मौजूदा कोच को बदले बिना इन नए इंजनों की मदद से ट्रेन की रफ्तार और संचालन बेहतर किया जा सकेगा।

NATIONAL : उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर कसा तंज, कहा-परीक्षा लीक, महंगाई और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जूझ रहा है महाराष्ट्र

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गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए, शिवसेना नेता उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने सोमवार को महाराष्ट्र के बढ़ते सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकट के लिए सत्तारूढ़ महायुति सरकार की कड़ी आलोचना की। ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में राज्य की भयावह तस्वीर पेश की, जो “मुद्रास्फीति, व्यवस्थागत भ्रष्टाचार, कृषि संकट और बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से ग्रस्त” है – यह तर्क देते हुए कि वर्तमान शासक स्वयं महाराष्ट्र और राष्ट्र के सामने सबसे बड़ा “विघ्न” (बाधा) बन गए हैं। संपादकीय में त्योहारों के मौसम से पहले जनता…

मुंबई, 14 सितंबर (आईएएनएस)। गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए, शिवसेना नेता उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने सोमवार को महाराष्ट्र के बढ़ते सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकट के लिए सत्तारूढ़ महायुति सरकार की कड़ी आलोचना की।

ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में राज्य की भयावह तस्वीर पेश की, जो “मुद्रास्फीति, व्यवस्थागत भ्रष्टाचार, कृषि संकट और बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से ग्रस्त” है – यह तर्क देते हुए कि वर्तमान शासक स्वयं महाराष्ट्र और राष्ट्र के सामने सबसे बड़ा “विघ्न” (बाधा) बन गए हैं।

संपादकीय में त्योहारों के मौसम से पहले जनता की परेशानी बढ़ाने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की गई। चीनी, दूध, सीएनजी, घरेलू एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि का हवाला देते हुए अखबार ने कहा कि आम आदमी के त्योहारी बजट पर भले ही बुरा असर पड़ा हो, लेकिन भक्त भगवान गणेश का श्रद्धापूर्वक स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

संपादकीय में पुणे के कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हुए हालिया हमले पर जानकारी दिया, जिन्होंने सार्वजनिक समारोहों के दौरान उच्च ध्वनि वाले डीजे सिस्टम का कड़ा विरोध किया था। संपादकीय में दावा किया गया कि ध्वनि प्रदूषण को दूर करने के बजाय, सत्ताधारी दल ने कार्यकर्ता को “शहरी नक्सल” और “बाहरी” करार दिया, जबकि मुख्यमंत्री ने निर्णायक कार्रवाई के बजाय टालमटोल का रुख अपनाया।

अल नीनो के गंभीर प्रभाव का हवाला देते हुए, ठाकरे खेमे ने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और बिगड़ने की चेतावनी दी है। झुलसे हुए खेतों में खरीफ की फसलें सूख रही हैं और अपर्याप्त वर्षा आगामी रबी मौसम पर संकट का साया डाल रही है, जिससे ग्रामीण आजीविका गंभीर खतरे में है और किसानों की आत्महत्याएं लगातार जारी हैं।

संपादकीय में बार-बार हो रहे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की भी आलोचना की गई। नेट और टीईटी में हुए घोटालों के बाद, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।

सरकार द्वारा घोषित एसआईटी जांच और प्रशासनिक सुधार के दावों को खोखला बताते हुए संपादकीय में सवाल उठाया गया कि हजारों महत्वाकांक्षी युवाओं के चकनाचूर सपनों के लिए कौन जवाबदेह होगा।

लोकमान्य तिलक के सार्वजनिक गणेश उत्सव की जड़ों का पता लगाते हुए, संपादकीय में इस बात पर खेद व्यक्त किया गया कि इसकी संस्थापक सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि कॉरपोरेट अधिग्रहण और घटिया राजनीतिक दिखावे से नष्ट हो रही है।

संपादकीय में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों, प्रतिदिन निर्दोष लोगों की जान लेने वाली खराब सड़कों और गैर-स्थानीय ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए स्थानीय मराठी भाषा के मानदंडों को लागू करने में सरकार की विफलता पर भी प्रकाश डाला गया।

NATIONAL : ‘यह मेरी आखिरी मुलाकात हो सकती है’: मुंबई मार्च से पहले भावुक हुए मनोज जरांगे; अपील करते हुए क्या-क्या कहा?

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मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन के 17वें दिन कहा कि सलाइन और पानी बंद करने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ रही है। मुंबई रवाना होने से पहले उन्होंने इसे महाराष्ट्र के लोगों से अपनी आखिरी मुलाकात तक बताया। उन्होंने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में-

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपने अनशन के 17वें दिन बेहद भावुक अपील की। पाटिल ने बताया कि उन्होंने सलाइन और अन्य चिकित्सा सहायता लेना बंद कर दिया है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मुंबई की उनकी आगामी यात्रा महाराष्ट्र के लोगों के साथ उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।

मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, आज मेरे अनशन का 17वां दिन है। सलाइन हटाने के बाद पेट में फिर से जलन शुरू हो गई है। मैं मुंबई के लिए लगभग अकेला निकलूंगा, मेरे साथ केवल चार-पांच साथी होंगे। मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा हूं, इसलिए रास्ते में मेरे स्वागत के कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं। अगर मुझमें ताकत होगी तो मैं लोगों से बात करूंगा। आप मुझसे मिलने आ सकते हैं। यह शायद हमारी आखिरी मुलाकात हो सकती है। सड़कों पर आकर मुझे आशीर्वाद दें, लेकिन अभी मुंबई मार्च में शामिल न हों। यह गोदावरी क्षेत्र और महाराष्ट्र से मेरी आखिरी विदाई भी हो सकती है।

जरांगे ने क्या अपील की?
उन्होंने मराठा समाज से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय को किसी भी हाल में हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा शरीर जहां गिरे, गिर जाए, लेकिन मराठा समाज इतनी मजबूती से लड़ाई लड़े कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कहें कि वह मर गया, लेकिन झुका नहीं। मैं यूं ही मरना नहीं चाहता, बल्कि अपने समाज को उसका अधिकार दिलाते हुए मरना चाहता हूं। समाज की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए।

मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाया?
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। समुदाय को सरकार की हर चाल का जवाब देना होगा। मराठा आंदोलन को बदनाम करने और उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समाज को संगठित रहना चाहिए।

मराठा समाज के नेतृत्व पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मराठा समाज में नेतृत्व की कोई कमी नहीं है। यदि एक नेता नहीं रहेगा तो दूसरा सामने आएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे उसी व्यक्ति या दल का समर्थन करें जो आरक्षण दिलाने में मदद करे। केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद से समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। जरांगे पाटिल ने दावा किया कि 5.5 करोड़ मेहनतकश मराठा किसी भी समय मुंबई को रोक सकते हैं, जबकि राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली वर्ग आबादी का एक छोटा हिस्सा है।

उपचार लेने से क्यों किया इनकार?
उन्होंने बताया कि सरकार और समाज की अपील पर उन्होंने कुछ समय के लिए चिकित्सा सहायता स्वीकार की थी, लेकिन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण दोबारा इलाज लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात-आठ दिनों तक सलाइन की वजह से उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब सलाइन और पानी बंद करने के बाद शरीर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं।

मुंबई के लिए बिना औपचारिक पुलिस अनुमति के रवाना होने की तैयारी कर रहे जरांगे पाटिल ने अपने समर्थकों से कहा कि वे उनके स्वागत में माला या शॉल न पहनाएं, क्योंकि इससे संक्रमण और रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने लंबे मंच बनाने के बजाय रास्ते में छोटे विश्राम केंद्र बनाने की सलाह दी, जहां वे यात्रा के दौरान कुछ समय आराम कर सकें।

उन्होंने समर्थकों से यह भी अपील की कि वे अभी उनसे मिलने के लिए पैसे खर्च न करें। इसके बजाय अंतिम और बड़े मुंबई मार्च के लिए धन और वाहनों की व्यवस्था बचाकर रखें।

NATIONAL : ‘यह मेरी आखिरी मुलाकात हो सकती है’: मुंबई मार्च से पहले भावुक हुए मनोज जरांगे; अपील करते हुए क्या-क्या कहा?

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मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन के 17वें दिन कहा कि सलाइन और पानी बंद करने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ रही है। मुंबई रवाना होने से पहले उन्होंने इसे महाराष्ट्र के लोगों से अपनी आखिरी मुलाकात तक बताया। उन्होंने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए क्या कहा?
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपने अनशन के 17वें दिन बेहद भावुक अपील की। पाटिल ने बताया कि उन्होंने सलाइन और अन्य चिकित्सा सहायता लेना बंद कर दिया है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मुंबई की उनकी आगामी यात्रा महाराष्ट्र के लोगों के साथ उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।

मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, आज मेरे अनशन का 17वां दिन है। सलाइन हटाने के बाद पेट में फिर से जलन शुरू हो गई है। मैं मुंबई के लिए लगभग अकेला निकलूंगा, मेरे साथ केवल चार-पांच साथी होंगे। मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा हूं, इसलिए रास्ते में मेरे स्वागत के कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं। अगर मुझमें ताकत होगी तो मैं लोगों से बात करूंगा। आप मुझसे मिलने आ सकते हैं। यह शायद हमारी आखिरी मुलाकात हो सकती है। सड़कों पर आकर मुझे आशीर्वाद दें, लेकिन अभी मुंबई मार्च में शामिल न हों। यह गोदावरी क्षेत्र और महाराष्ट्र से मेरी आखिरी विदाई भी हो सकती है।

जरांगे ने क्या अपील की?
उन्होंने मराठा समाज से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय को किसी भी हाल में हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा शरीर जहां गिरे, गिर जाए, लेकिन मराठा समाज इतनी मजबूती से लड़ाई लड़े कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कहें कि वह मर गया, लेकिन झुका नहीं। मैं यूं ही मरना नहीं चाहता, बल्कि अपने समाज को उसका अधिकार दिलाते हुए मरना चाहता हूं। समाज की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए।

मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाया?
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। समुदाय को सरकार की हर चाल का जवाब देना होगा। मराठा आंदोलन को बदनाम करने और उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समाज को संगठित रहना चाहिए।

मराठा समाज के नेतृत्व पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मराठा समाज में नेतृत्व की कोई कमी नहीं है। यदि एक नेता नहीं रहेगा तो दूसरा सामने आएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे उसी व्यक्ति या दल का समर्थन करें जो आरक्षण दिलाने में मदद करे। केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद से समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। जरांगे पाटिल ने दावा किया कि 5.5 करोड़ मेहनतकश मराठा किसी भी समय मुंबई को रोक सकते हैं, जबकि राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली वर्ग आबादी का एक छोटा हिस्सा है।

उपचार लेने से क्यों किया इनकार?
उन्होंने बताया कि सरकार और समाज की अपील पर उन्होंने कुछ समय के लिए चिकित्सा सहायता स्वीकार की थी, लेकिन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण दोबारा इलाज लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात-आठ दिनों तक सलाइन की वजह से उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब सलाइन और पानी बंद करने के बाद शरीर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं।

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मुंबई के लिए बिना औपचारिक पुलिस अनुमति के रवाना होने की तैयारी कर रहे जरांगे पाटिल ने अपने समर्थकों से कहा कि वे उनके स्वागत में माला या शॉल न पहनाएं, क्योंकि इससे संक्रमण और रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने लंबे मंच बनाने के बजाय रास्ते में छोटे विश्राम केंद्र बनाने की सलाह दी, जहां वे यात्रा के दौरान कुछ समय आराम कर सकें।

उन्होंने समर्थकों से यह भी अपील की कि वे अभी उनसे मिलने के लिए पैसे खर्च न करें। इसके बजाय अंतिम और बड़े मुंबई मार्च के लिए धन और वाहनों की व्यवस्था बचाकर रखें।

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