Wednesday, September 23, 2026
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SPORTS : दूसरे दिन भारत ने जीते चार पदक: निशानेबाजों ने कराई चांदी, सुचिका ने एमएमए में दिलाया मेडल; टेटे में दिखा दम

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एशियन गेम्स के दूसरे दिन भी भारत ने पदक जीतने का सिलसिला जारी रखा। सोमवार को निशानेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि भारत की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) फाइटर सुचिका तरियाल ने ऐतिहासिक कांस्य पदक अपने नाम किया। भारत ने इस तरह दूसरे दिन दो रजत और दो कांस्य पदक अपने नाम किया। वहीं, हॉकी, बैडमिंटन और टेबल टेनिस में भी भारत को सफलता मिली। आइए जानते हैं एशियाड के दूसरे दिन भारतीय दल का प्रदर्शन कैसा रहा…

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन जारी है। पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत ने एक साथ दो पदक अपने नाम किए। हिमांशु ढिल्लन ने रजत, जबकि रुद्रांक्ष पाटिल ने कांस्य पदक जीता। हिमांशु ने फाइनल में 252.4 अंक हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, रुद्रांक्ष 230.9 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। रुद्रांक्ष पाटिल ने फाइनल में लंबे समय तक पदक की दौड़ में बढ़त बनाए रखी थी। वह लगातार स्वर्ण पदक की स्थिति में बने हुए थे, लेकिन बाद के दौर में चीन के शेन लिहाओ ने शानदार वापसी की। रुद्रांक्ष पहले स्वर्ण पदक की स्थिति से नीचे आए और इसके बाद 9.7 के एक खराब शॉट के कारण तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बाद उन्होंने वापसी की कोशिश की, लेकिन कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। रुद्रांक्ष और हिमांशु ने इससे पहले पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भी रजत पदक जीता। उनके साथ भारतीय टीम में पार्थ माने भी शामिल थे। चीन ने इस स्पर्धा में स्वर्ण और दक्षिण कोरिया ने कांस्य पदक जीता था। इस तरह रुद्रांक्ष और हिमांशु दोनों के खाते में एशियन गेम्स 2026 में अब दो-दो पदक हो गए हैं।

भारत की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) फाइटर सुचिका तरियाल ने ऐतिहासिक कांस्य पदक अपने नाम किया। महिलाओं की 60 किग्रा MMA सेमीफाइनल के आखिरी राउंड में सिंगापुर की तेओ हुई हून ने कई किक्स लगाईं। सुचिका कुछ हद तक रक्षात्मक रहीं और निर्णायक वार के मौके का इंतजार करती रहीं। मुकाबले के आखिरी पलों में सुचिका ने कुछ कॉम्बिनेशन पंच लगाए। वहीं, तेओ ने भी किक से जवाब दिया। अंतिम बजर बजने के बाद सुचिका ने अपनी प्रतिद्वंद्वी पर छलांग लगाकर उसे जमीन पर गिरा दिया। रेफरी को एक बार फिर दोनों खिलाड़ियों को अलग करना पड़ा।

मुकाबला खत्म होने के बाद सुचिका फैसले से खुश नहीं दिखीं। उन्होंने रेफरी से हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया और मैट पर ही भावुक होकर रोने लगीं। सुचिका को लगा कि उन्होंने फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त प्रदर्शन किया है, लेकिन जजों ने उन्हें मुकाबले में दूसरे स्थान पर रखा। इसके बावजूद सुचिका ने महिलाओं की 60 किग्रा MMA स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

हॉकी में भारतीय महिला टीम का दबदबा जारी

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार शुरुआत जारी रखते हुए इंडोनेशिया को करारी शिकस्त दी। उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराने के बाद भारत ने दूसरे मुकाबले में इंडोनेशिया को 17-1 से रौंद दिया। भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों ने पूरे मुकाबले में इंडोनेशियाई डिफेंस पर दबाव बनाए रखा और लगातार गोल दागे। भारत की ओर से दीपिका, ऋतुजा पिसाल और नवनीत कौर ने हैट्रिक लगाई। सुनेलिता टोप्पो, लालरेमसियामी और साक्षी राणा ने दो-दो गोल किए। कप्तान सलीमा टेटे और इशिका ने भी एक-एक गोल किया। भारत ने दो मैचों में अब तक कुल 36 गोल दाग दिए हैं। भारतीय टीम का अगला मुकाबला बुधवार, 23 सितंबर को थाईलैंड से होगा।

टेटे टीम पाकिस्तान पर पड़ी भारी

भारतीय महिला और पुरुष टेबल टेनिस टीमों ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। इन दोनों ही टीमों ने पाकिस्तान को एकतरफा अंदाज में हराया। पहले भारतीय महिला टीम ने पाकिस्तान को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और फिर पुरुष टीम ने एकतरफा अंदाज में जीत दर्ज कर अंतिम आठ में प्रवेश किया। महिलाओं की तरह भारतीय पुरुष टेबल टेनिस टीम ने भी पाकिस्तान को 3-0 से हरा दिया।

पुरुष बैडमिंटन टीम की शानदार शुरुआत

बैडमिंटन पुरुष टीम इवेंट में भारत ने बांग्लादेश को 3-0 से हरा दिया। लक्ष्य सेन ने अयमान जमान को सीधे गेम में 21-4, 21-12 से हराकर भारत को बांग्लादेश के खिलाफ 1-0 की बढ़त दिला दी। लक्ष्य ने यह मुकाबला 24 मिनट में अपने नाम किया। दूसरे मुकाबले में आयुष शेट्टी ने गौरब सिंघा को 21-4, 21-13 से हरा दिया। फिर तीसरे मैच में किदांबी श्रीकांत ने अल अमीन जुमार को 21-15, 21-9 से शिकस्त दी।

कबड्डी में पुरुष-महिला टीमें जीतीं

भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जापान को हरा दिया। भारत ने पहले हाफ में 31 अंक जुटाकर मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली थी। इसके बाद दूसरे हाफ में टीम ने बढ़त को बरकरार रखते हुए जीत दर्ज की। वहीं, भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रुप ए के मुकाबले में बांग्लादेश को हराया। भारत ने बांग्लादेश पर दबदबा दिखाते हुए 42-21 से जीत हासिल की। हॉफ टाइन तक भारत 21-10 से आगे था। इसके बाद दूसरे हाफ में भी भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और 21-11 का स्कोर किया।

अन्य खेलों के नतीजे

तैराकी में पुरुषों के 50 मीटर बैकस्ट्रोक फाइनल में भारत के श्रीहरि नटराज कोई पदक नहीं जीत सके। वह 10 खिलाड़ियों के फाइनल में 25:52 सेकेंड के समय के साथ आखिरी स्थान पर रहे।
आकाश मणि और गितेश शाह पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल के फाइनल में जगह नहीं बना सके। धनुष सुरेश पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक के फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सके।
सॉफ्ट टेनिस में मिश्रित युगल ग्रुप बी में आध्या तिवारी और जय मीना ने कंबोडिया की वीवा चाओ और चानरोसेका खुन को 5-0 से हराया। वहीं, मिश्रित युगल राउंड ऑफ-16 में फिलीपींस की क्रिस्टी सनोसा और शेरविन नुगुइट ने आध्या तिवारी-जय मीना की जोड़ी को हराया।
वुशू में न्येमान वांगसू महिलाओं की चांगक्वान फाइनल में 15वें स्थान पर रहीं।
वुशू में ही नाओरेम रोशिबिना देवी ने महिलाओं के 60 किग्रा राउंड ऑफ-16 मुकाबले में बांग्लादेश की शिखा खातून को अंकों के अंतर से हराकर अगले दौर में जगह बना ली। शिखा पूरे मुकाबले में रोशिबिना को खास चुनौती नहीं दे सकीं।
सेपकटकरॉ के ग्रुप बी मुकाबले में जापान ने भारत को 2-1 से हराया।

BUSINESS : प्याज ने महंगाई की रेस में लगाई दौड़! बिना ब्रेक के भाग रहे दाम, अब रसोई में एन्ट्री बंद

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प्याज ने महंगाई की रेस में लगाई दौड़! बिना ब्रेक के भाग रहे दाम, अब रसोई में एन्ट्री बंद
संजय पाटीदार, भोपाल। अगर आप बाज़ार जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि किलो-दो किलो प्याज खरीदकर झोले में डाल लें, तो जरा अपने दिल पर हाथ रख लीजिए! मध्य प्रदेश के किचन में राज करने वाला प्याज अब सेब और अनार की तरह भाव खाने लगा है। जो प्याज कल तक 30 रुपये किलो में आपकी सब्जियों में तड़का लगा रहा था वो अब सीधे डबल होकर 55 से 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है।

तीन महीने में 82% उछाल, अब काटने की जरूरत ही नहीं… देखते ही आंसू आ जाएं!
कहते हैं कि प्याज को काटने पर आंसू आते हैं लेकिन अब तो सब्जी मंडी में इसके दाम सुनते ही आम आदमी की आंखों में आंसू छलक रहे हैं। बीते 3 महीनों के भीतर प्याज के दामों में 82 प्रतिशत की तगड़ी तेजी दर्ज की गई है। आलम यह है कि जो लोग पहले सलाद की थाली में प्याज के लंबे-लंबे छल्ले सजाते थे, अब वो सब्जी में भी आधा प्याज डालकर बाकी आधा फ्रिज में ‘तिजोरी’ की तरह छिपाकर रख रहे हैं।

पुराना स्टॉक खत्म, महाराष्ट्र-कर्नाटक से सप्लाई घटी…
व्यापारियों का कहना है कि प्याज का पुराना स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो चुका है और नए स्टॉक का नामोनिशान नहीं है। रही-सही कसर महाराष्ट्र और कर्नाटक से होने वाली आवक ने पूरी कर दी, जहां से सप्लाई में भारी गिरावट आई है। अब जब सप्लाई का दबाव बढ़ा, तो प्याज ने भी अपना रंग दिखा दिया और सीधा आसमान की तरफ उड़ चला।

किचन का बजट बिगड़ा, होटल-ठेले वालों ने भी दी चेतावनी
प्याज के इस कद्र नखरे दिखाने से आम गृहणियों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। पोहा, समोसा और चाट बेचने वाले ठेले वालों ने भी साफ कह दिया है- “भैया, चटनी-समोसा ले लो, पर प्याज एक्स्ट्रा मांगने की गलती मत करना!” अब देखना यह होगा कि प्याज के ये तेवर कब ठंडे होते हैं या फिर आम जनता को प्याज की जगह सिर्फ उसकी तस्वीरें देखकर ही सब्र करना पड़ेगा।

WORLD : राष्ट्रपति के खिलाफ एकजुट हो गए सभी चैनल्स, दर्ज कराया मुकदमा; कवरेज का भी बहिष्कार

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अमेरिकी समाचार संस्थानों सीएनएन, एमएस नाऊ और पोलिटिको ने वीकेंड में वाइट हाउस से कवरेज पर रोक लगाए जाने के बाद सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया।

अमेरिकी समाचार संस्थानों सीएनएन, एमएस नाऊ और पोलिटिको ने वीकेंड में वाइट हाउस से कवरेज पर रोक लगाए जाने के बाद सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। इन संस्थानों ने आरोप लगाया कि चुनिंदा तरीके से यह प्रतिबंध लगाया जाना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। प्रशासन की ओर से शुक्रवार को प्रतिबंध की घोषणा के बाद सप्ताहांत में राष्ट्रपति कार्यालय वाइट हाउस ने इन संस्थानों के कवरेज पर रोक लगा दी। ट्रंप लंबे समय से उन पत्रकारों की समाचार कवरेज पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जिनसे वह असहमत हैं।

यह अमेरिकी संविधान में प्रथम संशोधन से जुड़े अधिकारों की एक परीक्षा भी है, जहां संविधान सरकार को प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने से रोकता है। इन समाचार संस्थानों ने अपनी याचिका में कहा कि संविधान राष्ट्रपति या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को यह अधिकार नहीं देता कि वह केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर बिना किसी सूचना या प्रक्रिया का पालन किए प्रेस के प्रथम संशोधन से जुड़े अधिकारों, स्वतंत्रता और संपत्ति संबंधी हितों से वंचित कर दे।

संवाददाताओं के प्रवेश बैज शनिवार को निष्क्रिय किए जाने के बाद तीनों समाचार संस्थानों ने अपने संवाददाताओं को वाइट हाउस में प्रवेश से रोके जाने के दो दिन बाद संयुक्त रूप से मुकदमा दायर किया है। इससे एक दिन पहले ट्रंप ने घोषणा की थी कि वह इन संस्थानों को प्रतिबंधित कर रहे हैं, क्योंकि उनकी खबरों को वह फेक न्यूज मानते हैं।

प्रतिबंधित टीवी नेटवर्क सोमवार सुबह वाइट हाउस परिसर के ठीक बाहर एक सड़क से रिपोर्टिंग कर रहे थे। सोमवार को ही सीएनएन को उन पूल ड्यूटी से भी हटा दिया गया, जिन्हें प्रमुख समाचार नेटवर्क आपस में साझा करते हैं। वाइट हाउस ने मुकदमे पर टिप्पणी के अनुरोध का फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ पर लिखा कि वह उस चीज को महत्व देते हैं जिसे वह स्वतंत्र प्रेस कहते हैं।

ये भी पढ़ें:अब फैसले की बारी, ईरान पर आर या पार के मूड में डोनाल्ड ट्रंप; दे डाली चेतावनी
ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि वाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा…वह फेक न्यूज पर हमला कर रहा है, जो हमारे अमेरिका में कैंसर की तरह फैल गया है। यह भ्रष्ट, समन्वित और पूरी तरह नियंत्रण से बाहर है। यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और इसे अब रोका जाना चाहिए।

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

JAMMU : ससुराल की छत पर मिली बेटी की लाश, मायके वालों ने आंगन में ही जला दिया दहेज, फिर वहीं किया अंतिम संस्कार

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जम्मू के आरएस पुरा इलाके में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया. विवाहिता का शव उसके ससुराल की छत पर मिला. घटना की जानकारी मिलने के बाद मायके वाले ससुराल पहुंचे और पति समेत ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए. परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से उनकी बेटी को प्रताड़ित किया जा रहा था और उसके पति ने उसकी हत्या की है.

जम्मू के आरएस पुरा बॉर्डर इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों और इंसानी संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया. जिस घर में एक बेटी कभी दुल्हन बनकर आई थी, उसी घर की छत पर उसकी लाश मिली. बेटी की मौत की खबर सुनकर मायके वाले ससुराल पहुंचे तो उनके सामने बेटी की जिंदगी का सबसे दर्दनाक सच था.

विवाहिता की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन मायके वालों ने उसके पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को ससुराल में प्रताड़ित किया जा रहा था. मायके वालों ने आरोप लगाया कि बेटी की मौत के पीछे उसके पति का हाथ है.बेटी की मौत से परिवार इस कदर टूट गया कि उनका गुस्सा भी फूट पड़ा. मायके वालों ने ससुराल के आंगन में बेटी को शादी के समय दिया गया दहेज और उसका सामान इकट्ठा किया और आग के हवाले कर दिया. इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया.

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और मौत से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है. विवाहिता की मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.फिलहाल मायके पक्ष के आरोपों की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाहिता की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई. क्या यह कोई हादसा था, आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई आपराधिक वजह थी? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएगा. लेकिन इस घटना ने एक परिवार से उसकी बेटी छीन ली और पीछे छोड़ दिया कई ऐसे सवाल, जिनका जवाब अब पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलने का इंतजार है.

NATIONAL : 250 जिलों में 25% युवा ‘बेकाम’, न नौकरी मिल रही न पढ़ाई कर रहे, सर्वे में खुलासा

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भारत को अपनी युवा आबादी पर नाज है. यंग लोग किसी भी देश की ताकत होते हैं. भारत के लिए भी हैं लेकिन क्या उनकी ‘शक्तियों’ का सही इस्तेमाल हो पा रहा है. मानव संसाधन के तौर पर क्या उनकी क्षमता देश के काम आ पा रही है? ऐसे समय में जब देश में बेरोजगारी एक बड़ा संकट है, सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी किए गए एक डेटा ने टेंशन और बढ़ा दी है. इसमें बताया गया कि देश के करीब 250 जिलों में 15 से 29 साल की उम्र 25 फीसदी युवा एकदम खाली हैं. यानी न तो वो कोई नौकरी कर रहे हैं, न उनकी पढ़ाई चल रही है और न ही वो रोजगारपरक स्किल की ट्रेनिंग ले रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि यूपी और बिहार जैसे उत्तर भारत के राज्यों में ये हालात ज्यादा चिंताजनक हैं.

सांख्यिकी मंत्रालय ने शुक्रवार, 18 सितंबर को ‘Periodic Labour Force Survey’ (PLFS) की रिपोर्ट शेयर की.साल 2025 में जिला स्तर पर यह सर्वे कराया गया था. सर्वे में बताया गया कि देश के 250 जिलों में युवाओं की अच्छी-खासी आबादी कोई काम नहीं कर रही. 15 साल से लेकर 29 साल तक के 25 फीसदी युवा देश बनाने में कोई प्रोडक्टिव योगदान नहीं दे रहे.

सर्वे में एक खास तरह के बेरोजगार युवाओं की कैटिगरी दर्शाने के लिए एक टर्म इस्तेमाल किया जाता है- NEET. इसका मतलब है- Not in employment, Education or Training. यानी न नौकरी में, न पढ़ाई में और न किसी तरह की ट्रेनिंग में.

सर्वे के मुताबिक, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के तकरीबन दो तिहाई जिलों में एक चौथाई युवा ऐसे हैं, जो NEET में आते हैं. यानी हर 4 में से एक युवा के पास कोई काम नहीं है. हर 4 में से एक युवा न वह पढ़ाई कर रहा है और न ही किसी काम में प्रशिक्षित ही हो रहा है. दक्षिण और पूर्वोत्तर का भी यही हाल है. आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम और तेलंगाना के करीब आधे जिलों में 25 फीसदी युवा NEET कैटेगरी में हैं.

कुछ वक्त पहले नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि देश भर में करीब 9 करोड़ युवा ऐसे बेरोजगार हैं जो पढ़ाई भी नहीं कर रहे. यानी एकदम खाली बैठे हैं.

युवाओं में बेरोजगारी की दर होने की जो वजह बताई जाती है, उसमें प्रमुख है कि वे पढ़ाई कर रहे होंगे या फिर कोई स्किल सीख रहे होंगे. लेकिन NEET में तो वो लोग आते हैं जो ये भी नहीं कर रहे. इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का इस कैटिगरी में होना किसी भी देश की नींद उड़ाने के लिए काफी है.

इसके पीछे वजह क्या होगी?
रिपोर्ट में बताया गया कि इसकी कई वजहें हो सकती हैं. कुछ लोग घर के काम में बिजी होते हैं. चूंकि ये सैलरी वाला काम नहीं है, इसलिए रोजगार में नहीं गिना जा सकता. खासकर ज्यादातर युवा महिलाओं के मामले में वजह आमतौर पर यही होती है कि उन्हें घर संभालने की जिम्मेदारी दे दी जाती है.

यह एक दूसरी और बड़ी चिंता है जो इस रिपोर्ट में सामने आई है. सर्वे में शामिल करीब तीन चौथाई जिलों में 25 फीसदी से ज्यादा युवा महिलाएं NEET कैटेगरी में हैं. यानी न रोजगार है. न पढ़ाई चल रही है. न ट्रेनिंग. ये आंकड़े दिखाते हैं कि आज भी महिलाओं पर बिना किसी मेहनताने वाले घरेलू कामों का बोझ ज्यादा है. महिलाओं की पढ़ाई या रोजगार से जुड़ने की सबसे बड़ी बाधा है.

सर्वे में NEET कैटिगरी में बढ़ती युवा आबादी की एक वजह ये भी बताई गई कि बहुत से लोगों ने इसलिए नौकरी तलाशना बंद कर दिया क्योंकि उन्हें उनके पसंद का रोजगार नहीं मिला.

वहीं, बहुत से छात्र ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी की तैयारियों में लगे रहते हैं.

हालांकि, कुछ जिलों में आंकड़े थोड़ी राहत देने वाले भी हैं. तकरीबन 25 जिलों में NEET युवाओं की संख्या 10 फीसदी से कम बताई गई है. इनमें छत्तीसगढ़ का कबीरधाम, राजनांदगांव और उत्तर बस्तर कांकेर, हिमाचल प्रदेश का चंबा, केरल का एर्नाकुलम और मध्य प्रदेश का मंडला शामिल है. ओडिशा के नबरंगपुर में NEET युवाओं की दर सबसे कम 4.1 फीसदी है.

NATIONAL : मायावती ने अखिलेश पर कसा तंज: कहा- वोटों की खातिर गिरगिट की तरह रंग बदल रहे सपा सुप्रीमो

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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर रंग को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने सपा के लाल रंग को लेकर अखिलेश पर तंज कसा है. साथ ही पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के छात्र क्रिकेट की ड्रेस का कलर नीला करने पर भी अखिलेश को आधे हाथों लिया.

मायावती ने कहा कि अब मुसलमान भी समाजवादी पार्टी से रूठ गए हैं, इसीलिए उन्होंने लाल कलर को भगवा ज्यादा किया है. इससे अन्य जाति धर्म के लोग उन्हें वोट करें, लेकिन ऐसा भी नहीं होगा. मुसलमान उनकी हकीकत जान चुका है और अब वह पहले की तरह बहुजन समाज पार्टी के साथ आ रहा है और 2007 की तरह ब्राह्मण समाज भी पहले से ही बसपा के साथ है. सपा का कुछ होने वाला नहीं है.

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की है. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए समाजवादी पार्टी प्रमुख का प्रचारित ‘पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम और आरएसएस/भाजपा के ‘भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है. ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है?

मायावती ने कहा कि वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद यह पार्टी (सपा) यूपी व केंद्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाई. अब भी वो सोच रहे हैं कि इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाए. और इस मामले में अब वे अपर कास्ट में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बीएसपी के पक्ष में बदल रहे हैं, क्योंकि बीएसपी यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण और विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरन लेडी राज यहां कई बार स्थापित करके दिखा चुकी हैं. जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है.

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसके साथ ही सपा को यह भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिए कि अब इनके ‘पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन्होंने कभी ‘पीडी’ को ‘पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ‘पीडी’ को ‘पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ‘अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बीएसपी का ‘नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, लेकिन इसको लोगों ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया.

इसके विपरीत बीएसपी सर्वसमाज के लिए ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है. सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का जीवन जीने की पक्षधर है, इसीलिए सर्वसमाज में बीएसपी का अपना सम्मान है.

WORLD : ‘मिडटर्म चुनाव के बाद खत्म होगी जंग’: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर किया बड़ा दावा, तेल की कीमतों पर भी की भविष्यवाणी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जारी जंग को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने डबलिन से बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद खत्म हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने तेल की कीमतों को लेकर भी बड़ी भविष्यवाणी की।

क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि उम्मीद है कि युद्ध जल्द खत्म होगा,लेकिन संभवतः नवंबर के मिडटर्म चुनावों के बाद। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान चुनाव तक संघर्ष को खींचने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिकी चुनाव को प्रभावित किया जा सके। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जनता इस रणनीति को समझती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द होगा। संभवतः मिडटर्म चुनावों के ठीक बाद।” ट्रंप ने आगे कहा कि संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी।

ईरान बोला-न युद्ध चाहते हैं, न संघर्ष जारी रखना
वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार को कहा कि पश्चिम एशिया को अमेरिका की ओर से किसी ‘क्षेत्रीय पुलिसकर्मी’ की जरूरत नहीं है। उन्होंने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात के दौरान यह बात कही। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि क्षेत्र की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की गारंटी वही देश दे सकते हैं, जो इस क्षेत्र का हिस्सा हैं। उन्होंने बाहरी शक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही।


पेजेश्कियन ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध या लगातार जारी संघर्ष नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि अपने लोगों के साथ हुई तमाम ज्यादतियों के बावजूद ईरान न तो युद्ध चाहता है और न ही इसे जारी रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि शांति ईरान की प्राथमिकता है।

छह महीने से जारी संघर्ष, तेल की कीमतों पर असर
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर हमले से ये युद्ध शुरू हुआ था। इसके बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी हमले किए और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद से अमेरिका और ईरान के बीच इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर तनाव बना हुआ है। छह महीने से अधिक समय से जारी नाकाबंदी ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इसी सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

BUSINESS : ₹1000 प्रति लीटर मिलेगा पेट्रोल… मिडिल ईस्ट तनाव से बिगड़े हालात, पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री की चेतावनी

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मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में फिर से गहराते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान पर एक बार फिर गंभीर पेट्रोलियम संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देश के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने रविवार को बेहद सख्त लहजे में आगाह करते हुए कहा कि यदि देश में ईंधन की किल्लत उत्पन्न होती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल की दरें ₹1,000 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर को भी छू सकती हैं।

लाहौर में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि देश में ईंधन की कीमतों में पहले ही 50 प्रतिशत तक का बड़ा उछाल आ चुका है। केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में भी पेट्रोलियम उत्पादों के दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहे हैं।

गरीबी को बनाया ताकत, आर्थिक तंगी के बाद मजदूरी की, शहडोल के संजीव कुमार बैगा बने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ‘हुती विद्रोहियों’ के हमलों को कतई स्वीकार नहीं करता। अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों के बीच, सरकार ईंधन में बढ़ोतरी का बोझ सीधे आम जनता पर नहीं डालने का प्रयास कर रही है और प्रभावित वर्गों को आर्थिक राहत दी जा रही है।

घरेलू कच्चे तेल से उम्मीदें
ऊर्जा संकट से पार पाने के लिए मंत्री ने बताया कि देश के भीतर ही तेल के कुओं पर खनन व अन्वेषण कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर तक स्थानीय स्तर पर कच्चा तेल मिलना शुरू हो जाएगा, जिससे विदेशों से होने वाले महंगे आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

यह संकट ऐसे समय में गहराया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) के बंद होने और मिडिल ईस्ट में नए सिरे से उपजे तनाव के चलते वैश्विक क्रूड ऑयल मार्केट में भारी उथल-पुथल बनी हुई है।

वर्तमान दरें और लक्षित सब्सिडी योजना
पाकिस्तान में हालिया संशोधन के बाद वर्तमान में पेट्रोल की कीमत ₹389.14 प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल ₹424.04 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच चुकी है।

बढ़ती महंगाई को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले रविवार को एक विशेष लक्षित राहत योजना की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत 800 सीसी तक के चार पहिया वाहनों के चालकों, दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल) मालिकों, ऑटो-रिक्शा और चिंगची चालकों को पेट्रोल की खरीद पर प्रति लीटर ₹100 की सीधी छूट दी जा रही है।

NATIONAL : ‘छोटी घटनाएं बड़ी न बनें’, लोगों की समस्याएं सुन सीएम योगी बोले- डीएम-एसपी रखें नजर

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राजधानी लखनऊ में सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘जनता दर्शन’ में लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान विभिन्न जिलों से लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। प्रार्थना पत्रों का अवलोकन करके सीएम ने कहा कि समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले लोग मामूली घटनाओं को बड़ा बनाना चाहते हैं। ऐसे में जिलों में हर छोटी से छोटी घटना पर डीएम-एसपी नजर रखें। घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों की सुनवाई करें। दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई करें। चेतावनी दी कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता व लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

हर पीड़ित से मिले सीएम, समयबद्ध निस्तारण का दिया निर्देश
‘जनता दर्शन’ में सीएम योगी हर पीड़ित से मिले। उनकी समस्याओं व शिकायतों को सुना। प्रशासन, पुलिस, राजस्व, विद्युत आदि से जुड़ी शिकायतों पर उन्होंने कहा कि अधिकारी पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ दिलाएं। मरीजों के इलाज की व्यवस्था कराएं। भूमाफिया/दबंगों पर कठोरतम कार्रवाई करें।

सीएम के समक्ष पुलिस व राजस्व से जुड़ीं शिकायतें अधिक रहीं। इस पर उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जनसमस्याओं का निराकरण कराएं। यदि किसी मातहत द्वारा लापरवाही की शिकायत मिले तो उस पर भी कार्रवाई करें। राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

बच्चे से पूछा- कैसे हो, कहां पढ़ते हो
इस दौरान मां के साथ आए नन्हें बच्चे से सीएम ने हालचाल पूछा। फिर पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। उसकी तरफ चॉकलेट बढ़ाई तो उसने झट से ले ली। चॉकलेट वापस मांगी तो बच्चे ने मना कर दिया। इस पर पूरा हॉल खिलखिला उठा। सीएम ने सुखद भविष्य का आशीर्वाद देते हुए बच्चे से मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा।

NATIONAL : पुलिस की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, गैरकानूनी गिरफ्तारी के बाद दोबारा पकड़ने से पहले मजिस्ट्रेट की लेनी होगी मंजूरी

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी आरोपी को गिरफ्तारी का कारण न बताने की वजह से रिहा किया गया है, तो पुलिस उसे अपनी मर्जी से दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। मनमानी पर लगाम कसते हुए कोर्ट ने दोबारा गिरफ्तारी के लिए बेहद सख्त और स्पष्ट नियम तय किए हैं।

जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने अपने फैसले में साफ किया कि यदि किसी व्यक्ति की पहली गिरफ्तारी गैर-कानूनी साबित हो चुकी है, तो उसे दोबारा पकड़ने के लिए पुलिस को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अर्जी दाखिल करनी होगी।

पुलिस मनमाने ढंग से यह कदम नहीं उठा सकती। इसके लिए दो शर्तें अनिवार्य की गई हैं कि पहला, आरोपी को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में दिए जाएं, और दूसरा, इस अर्जी पर उस अधिकारी के सीनियर (तुरंत ऊपर वाले अधिकारी) की मुहर लगी हो, जिसने पहली बार उसे गिरफ्तार किया था।

दोषी पुलिस अधिकारी पर गिरेगी गाज
अदालत ने पुलिस की जवाबदेही तय करते हुए निर्देश दिया है कि मजिस्ट्रेट को दी जाने वाली अर्जी में यह साफ बताना होगा कि आखिर पहली बार गिरफ्तारी का कारण क्यों नहीं बताया गया था। इसके साथ ही, जिस पुलिस अधिकारी ने संविधान के नियमों को ताक पर रखकर पहली गिरफ्तारी की थी, उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। मामले की जांच भी किसी अन्य अधिकारी को सौंप दी जाएगी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस भुयान ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब कोई अधिकारी एक बार संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन कर चुका है, तो दोबारा गिरफ्तारी का फैसला उसी की मर्जी पर नहीं छोड़ा जा सकता। इसे पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।

जब मजिस्ट्रेट इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएंगे कि शुरुआत में गिरफ्तारी का कारण क्यों नहीं बताया जा सका और अब दोबारा गिरफ्तारी क्यों जरूरी है, तभी इसकी अनुमति मिलेगी। वरिष्ठ अधिकारी भी अर्जी आते ही केस दूसरे अफसर को देंगे और दोषी अधिकारी के खिलाफ जांच बैठाएंगे। दोष साबित होने पर उसकी सर्विस बुक में भी इसकी एंट्री की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025)’ के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि ये नए नियम किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए गए हैं। अदालत ने एक अहम बात यह भी जोड़ी कि अनुच्छेद 22(1) किसी एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर प्रकार के विशेष और सामान्य कानूनों के तहत होने वाली गिरफ्तारी पर लागू होता है।

यह एक मौलिक अधिकार है, इसलिए आरोपी को यह साबित करने की जरूरत बिल्कुल नहीं है कि गिरफ्तारी का कारण न बताने से उसका कोई नुकसान हुआ है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नियम के उल्लंघन पर होने वाली रिहाई को ‘जमानत’ (Bail) नहीं माना जाएगा।

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