अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी से कांग्रेस में लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि बंगाल में कांग्रेस उनका नेतृत्व स्वीकार करेगी. इस पर TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आने पर पार्टी इस पर चर्चा करेगी.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से कांग्रेस में लौटने की अपील की. उन्होंने कहा कि ममता अपने साथ बचे हुए विधायकों और सांसदों को लेकर कांग्रेस में शामिल हो जायें. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार करने और उनके साथ काम करने के लिए तैयार है.
अलग इकाई की जरूरत नहीं : चौधरी
तृणमूल कांग्रेस में जारी बगावत का हवाला देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हार के बाद पार्टी के पास ज्यादा कुछ नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि इस समय किसी अलग राजनीतिक इकाई की जरूरत नहीं है. ममता बनर्जी ने करीब तीन दशक पहले कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनायी थी.
‘आपके नेतृत्व में बंगाल में काम करेंगे’
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन का सहारा ले चुकी हैं. इसलिए उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बंगाल में कांग्रेस उनके नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार है. चौधरी ने ममता से अपना ‘बोझ पीछे छोड़कर’ कांग्रेस में शामिल होने की अपील भी की.

‘बोझ’ वाले बयान में अभिषेक का संदर्भ
चौधरी की ‘बोझ’ वाली टिप्पणी को ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के संदर्भ के तौर पर देखा गया. हालांकि, अधीर रंजन ने अपने बयान में अभिषेक का नाम नहीं लिया.
TMC ने कहा- औपचारिक प्रस्ताव आये तो होगी चर्चा
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने अधीर रंजन के प्रस्ताव पर कहा कि पार्टी इस पर तभी विचार करेगी, जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव आता है. उन्होंने कहा कि चौधरी ने वही कहा, जो उन्हें लगा और फिलहाल तृणमूल एक अलग पार्टी है.
सौगत रॉय बोले- अभिषेक के बिना फैसला संभव नहीं
सौगत रॉय ने अधीर रंजन चौधरी की ‘बोझ’ वाली टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी के बारे में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता. उन्होंने अभिषेक को तृणमूल का नेता और राष्ट्रीय महासचिव बताया. साथ ही कहा कि अगर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव आता है, तो उस पर पार्टी में चर्चा हो सकती है.
TMC के भीतर संगठनात्मक संकट का दावा
यह बयान ऐसे समय आया है, जब तृणमूल कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के बाद संगठनात्मक संकट और बगावत को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है. खबर है कि कुछ बागी विधायकों ने खुद को भाजपा सरकार के सामने वास्तविक विधायी विपक्ष के रूप में पेश करने की कोशिश की है.
बागी सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता चुना
बागी सांसदों के एक समूह ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया है. वे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गये हैं और केंद्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दिया है.
BJP ने TMC के राजनीतिक भविष्य पर उठाए सवाल
इस बीच, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता देवजीत सरकार ने भी तृणमूल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि तृणमूल का गठन कांग्रेस से अलग होकर माकपा से लड़ने के लिए हुआ था. उसी मुद्दे पर वह सत्ता में आयी थी. देवजीत ने कहा कि अब तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर है. इसलिए उसके पास कोई और मकसद नहीं बचा है.


