Sunday, May 10, 2026
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NATIOANL : अब दक्षिण के राज्यों पर BJP की नजर, तमिलनाडु में अपनाएगी बंगाल वाला फॉर्मूला

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अरब सागर के तट से वर्ष 1980 में शुरू हुई भाजपा की राजनीतिक यात्रा 46 साल बाद गंगासागर तक पहुंच गई है। हालांकि, हिंद महासागर की सीमाई राज्यों तक पहुंचना अभी बाकी है। पार्टी का अगले एक दशक का लक्ष्य सारी समुद्री सीमाओं वाले प्रदेशों में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाना है। इसके लिए अब पार्टी अपने मिशन दक्षिण के लिए बदली हुई रणनीति पर काम करेगी। भाजपा की पहुंच से दूर रहा तेलंगाना उसका पहला लक्ष्य है। उसके बाद केरल और तमिलनाडु की व्यूह रचना पर काम होगा। कर्नाटक में उसे अगले ही चुनाव में वापसी की उम्मीद है।

साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही अमित शाह ने भाजपा की कमान संभाली थी। उन्होंने अपने पहले ही भाषण में भाजपा के पू्र्वोत्तर विस्तार और कोरोमंडल में पहुंच का विशाल रोड मैप पेश किया था। पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने और प्रमुख पूर्वी राज्यों बिहार, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में अपने मुख्यमंत्री बनाने के बाद अब वह अधूरे मिशन दक्षिण की ओर बढ़ने जा रही है।

दक्षिण के पांच राज्यों में भाजपा अभी आंध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम के साथ गठबंधन सरकार में है। कर्नाटक में कई बार सरकार बना चुकी पार्टी को अगले चुनाव में फिर से सत्ता में आने का भरोसा है। बाकी तीन राज्यों तेलंगाना, तमिलनाडु एवं केरल उसके अगले लक्ष्य हैं। तेलंगाना में भाजपा की जमीन तैयार हो चुकी है।

केरल और तमिलनाडु ही उसके लिए सबसे मुश्किल राज्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा तमिलनाडु में पश्चिम बंगाल का फॉर्मूला अपनाएगी और अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए अन्नाद्रमुक के कई प्रमुख नेताओं को अपने साथ लाएगी। यहां हाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने नागेंद्रन भी अन्नाद्रमुक से ही आए हैं।

केरल भाजपा से ज्यादा आरएसएस की मजबूती के लिए जाना जाता है। इस बार के चुनाव में भाजपा ने बदलाव वाले चुनाव में अपने लिए तीन सीट जीतकर तथा पांच सीट पर दूसरे स्थान पर रहकर अपने भावी अभियान की शुरुआत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा वाम दलों की हार के बाद अब उसका स्थान खुद हासिल करने की तैयारी में है। राज्य में हिंदू समुदाय की सालों से पसंद रहे वाम दलों की जगह अब भाजपा लेने की तैयारी में है। ईसाई समुदाय में भी भाजपा ने अपनी पकड़ बनाई है।

NATIOANL : रविवार को विधायक दल के नेता चुने जाएंगे हिमंत: 12 को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ; PM भी रहेंगे मौजूद

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असम विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा आज विधायक दल की बैठक में हिमंत बिस्व सरमा को औपचारिक रूप से अपना नेता चुनेगी। वे 12 मई को गुवाहाटी के खानापारा में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, जिसमें पीएम मोदी और 22 राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत राजग का भारी जमावड़ा होगा। वहीं, पुडुचेरी में भी सत्ता की तस्वीर साफ हो गई है।

गुवाहाटी में रविवार को होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक में सीएम हिमंत बिस्व सरमा नेता चुने जाएंगे। इसके बाद मंगलवार को वे पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम में बतौर मुख्यमंत्री अपनी तीसरी पारी का आगाज करेंगे। शपथग्रहण समारोह में भाजपा पश्चिम बंगाल की तरह ही राजग का शक्ति प्रदर्शन करेगी।

खानापारा वेटरनरी कॉलेज मैदान में 11 बजे होने वाले समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, मोदी सरकार के सभी वरिष्ठ मंत्री, राजगशासित सभी 22 राज्यों के मुख्यमंत्री व गठबंधन के सभी दलों के अध्यक्ष शिरकत करेंगे। पार्टी ने विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पर्यवेक्षक और हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी को सह पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

गौरतलब है कि असम में भाजपा की अगुवाई में राजग ने जीत की हैट्रिक लगाने के साथ अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। पार्टी ने 126 सीटों में से 82 सीटें जीत कर पहली बार अपने दम पर बहुमत और सहयोगियों बीपीएफ-एजीपी के साथ सौ का आंकड़ा पार किया है।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को एन रंगासामी को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी का मुख्यमंत्री नियुक्त किया। गृह मंत्रालय की अधिसूचना में में यह जानकारी दी गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अधिसूचना के बाद उपराज्यपाल के कैलाशनाथन ने रंगासामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। रंगासामी 13 मई को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। 4 मई को आए चुनाव परिणाम में अखिल भारतीय एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) के नेतृत्व वाले एनडीए की शानदार जीत के बाद रंगासामी पांचवीं बार मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने जा रहे हैं।

NATIONAL : पूर्व IAS अधिकारी सुब्रत गुप्ता बने बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के सलाहकार, बंगाल चुनाव में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

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सेवानिवृत आईएएस अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता को चुनाव आयोग की तरफ से हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव 2026 में स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया था.

पश्चिम बंगाल में शनिवार (9 मई, 2026) को भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने नवनिर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर लिया है. मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण और राज्य में भाजपा सरकार बनने के तुरंत बाद ही पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों की शुरुआत हो गई है. इसी क्रम में सेवानिवृत आईएएस अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का सलाहकार नियुक्त किया गया है. डॉ. सुब्रत गुप्ता की नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना भी राज्य सरकार की ओर से जारी कर दी गई है.

डॉ. सुब्रत गुप्ता पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं, जो अब रिटायर हो चुके हैं. हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव 2026 में सेवानिवृत आईएएस अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता को चुनाव आयोग की तरफ से स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया था. हालांकि, राज्य में चुनावी प्रक्रिया के सफलतापूर्वक समापन के बाद चुनाव आयोग ने गुरुवार (7 मई, 2026) को डॉ. सुब्रत गुप्ता को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया.

पश्चिम बंगाल के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता की नियुक्ति की अधिसूचना शनिवार (9 मई, 2026) को जारी की गई. अधिसूचना में कहा गया कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि (R. N. Ravi) ने सेवानिवृत आईएएस अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता को तत्काल प्रभाव के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सलाहकार के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. बताया जा रहा है कि सुब्रत गुप्ता का प्रशासनिक अनुभव शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार को नीति और गवर्नेंस संबंधी मामलों में मदद करेगी.

सेवानिवृत आईएएस अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता को केंद्रीय चुनाव आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्बर के तौर पर पश्चिम बंगाल में नियुक्त किया था. जिन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से लेकर विधानसभा चुनाव 2026 के पूरा होने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. चुनाव आयोग ने सुब्रत गुप्ता को नवंबर, 2025 में ही बंगाल के स्पेशल रोल ऑब्जर्बर के तौर पर नियुक्त किया था, ताकि 2026 में होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के एसआईआर की देखरेख की जा सके.

WORLD : दुबई चॉकलेट के चक्कर में महंगा हुआ पिस्ता, ईरान युद्ध ने बढ़ाई टेंशन

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध होने के कारण सिर्फ तेल के कीमतों में इजाफा देखने को नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही एक और चीज है जो पिछले 8 सालों के रिकॉर्ड को तोड़कर बहुत तेजी से महंगा होता जा रहा है। उसका नाम है ‘पिस्ता’, इस खाने की चीज पर भी तेल जैसा असर देखने को मिल रहा है।ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में यह महंगा मिल रहा है। दरअसल, ईरान और अमेरिका मिलकर दुनिया की लगभग 80% पिस्ता आपूर्ति पूरी करते हैं, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा उत्पादक है। ईरान पर हुए हमले ने पिस्ता के बाजार का समीकरण ही बदल दिया है।

ईरान संघर्ष ने पिस्ता के निर्यात को बाधित कर दिया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण कीमतें 8 साल के उच्चतम स्तर $4.57 (430 रुपये) प्रति पाउंड पर पहुंच गई हैं। दुनिया के सबसे बड़े पिस्ता उत्पादकों में से एक देश को निर्यात में रुकावटों, शिपिंग में अड़चनों और आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, साल 2023 के आखिर से ही पिस्ता के कीमतें लगभग 30% बढ़ चुकी थीं। इसी दौरान वायरल दुबई चॉकलेट का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला था। ब्लूमबर्ग ने आगे बताया कि सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण मार्च में पिस्ता की कीमतें अचानक से बढ़कर $4.57 (लगभग ₹430.52) प्रति पाउंड तक पहुंच गई, जो मई 2018 के बाद से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

इसके साथ ही पिस्ता का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश तुर्कि है। वहीं, ईरानी पिस्ता का एक बड़ा हिस्सा सीधे प्रतिबंधों से बचने के लिए तुर्की के रास्ते भेजा जाता है। इससे एक और रणनीतिक परेशानी पैदा हो गई है। जिसके कारण दाम में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इसके अलावा पिस्ता के दाम बढ़ने के पीछे एक और बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि, युद्ध के कारण ईरान के पिस्ता गोदामों को काफी नुकसान हुआ। जिसके कारण सप्लाई बाधित हो गया। सूत्रों की माने तो, अमेरिका और इजरायल की सेना ने पिस्ता की खेती पर भी सीधा हमला किया। इन हमलों में कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिसमें ईरान के पिस्ता गोदाम भी शामिल थे।

मार्केट रिसर्च कंपनी मोर्डोर इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक पिस्ता बाजार का मूल्य 2026 में $5.49 बिलियन है और 2031 तक इसके $7.02 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। ईरान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पिस्ता उत्पादक देश है। इस देश का वैश्विक पिस्ता उत्पादन में लगभग पांचवां हिस्सा और निर्यात में लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जबकि अमेरिका वैश्विक उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा उत्पादित करता है।

वहीं, साल 2011 से अमेरिका लगातार सबसे बड़े निर्यातक के रूप में आगे बढ़ा है। अमेरिका ने इस दौरान ईरान को काफी पीछे छोड़ दिया। जिसके कारण युद्ध में उलझते ही पूरी दुनिया में पिस्ता के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौजूदा समय में ईरान पूरे वैश्विक पिस्ता उत्पादन का सिर्फ 20% हिस्सा ही उत्पादन कर पा रहा है।

बता दें कि, पिस्ता मूल रूप से ईरान और मध्य एशिया का ड्राई फ्रूट है। वैसे तो दुनिया में इसकी खेती हजारों सालों से की जा रही है, लेकिन प्राचीन समय में इसे फारस (ईरान) में अमीरी की निशानी माना जाता था। पिस्ता के पेड़ सूखे और गर्म इलाकों में अच्छे से उगते हैं। आज भी ईरान दुनिया के सबसे बड़े पिस्ता उत्पादकों में से एक है। वहां के ‘अकबरी’ और ‘फंदोकी’ पिस्ता काफी मशहूर किस्मों में से हैं। यह स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

NATIONAL : एक मिसाइल, कई टारगेट, 5000KM की रेंज… भारत की बड़ी छलांग, अग्नि-5 का सफल परीक्षण, खौफ में चीन-PAK

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भारत ने अपनी रक्षा ताकत को और मजबूत करते हुए एडवांस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस मिसाइल में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल यानी MIRV तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इस तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल कई अलग-अलग जगहों पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती है और कई न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकती है.

अग्नि-5 मिसाइल का यह परीक्षण शुक्रवार (8 मई 2026) को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से किया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस टेस्ट के दौरान मिसाइल को कई पेलोड के साथ लॉन्च किया गया और हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर मौजूद टारगेट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया. मंत्रालय ने कहा कि मिशन के सभी लक्ष्य पूरी तरह सफल रहे. मिसाइल की लॉन्च पर लगातार नजर रखने के लिए जमीन और समुद्र में मौजूद कई ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों का इस्तेमाल किया गया. इन सिस्टम ने मिसाइल के लॉन्च होने से लेकर लक्ष्य तक पहुंचने की पूरी जानकारी रिकॉर्ड की.

इस सफल परीक्षण के बाद भारत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह एक ही मिसाइल से कई ठिकानों पर हमला करने की क्षमता रखता है. हालांकि सरकार की तरफ से यह नहीं बताया गया कि अग्नि-5 का MIRV वर्जन कितने वॉरहेड ले जा सकता है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह चार या पांच वॉरहेड ले जाने में सक्षम हो सकता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO और सेना को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी और बढ़ते खतरों से निपटने में मदद करेगी.

भारत ने पहली बार मार्च 2024 में MIRV तकनीक वाली अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण किया था. उस मिशन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन दिव्यास्त्र नाम दिया था. इस तकनीक के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया जिनके पास MIRV मिसाइल सिस्टम है. इस सूची में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन जैसे देश शामिल हैं. अग्नि-5 मिसाइल की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. इसमें तीन चरण वाला सॉलिड फ्यूल इंजन इस्तेमाल किया गया है. MIRV तकनीक वाली मिसाइलें सामान्य मिसाइलों से ज्यादा ताकतवर मानी जाती हैं क्योंकि इनमें एक साथ कई न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की क्षमता होती है.

DRDO ने अग्नि मिसाइल के कई दूसरे वर्जन भी बनाए हैं. इनमें अग्नि-1 की रेंज 700 किलोमीटर, अग्नि-2 की 2,000 किलोमीटर, अग्नि-3 की 3,000 किलोमीटर और अग्नि-4 की 4,000 किलोमीटर है.अग्नि-5 के MIRV सिस्टम में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसमें भारतीय एवियोनिक्स और हाई एक्यूरेसी सेंसर लगाए गए हैं. खास बात यह है कि 2024 में हुए पहले परीक्षण का नेतृत्व DRDO की एक महिला वैज्ञानिक ने किया था और उस टीम में कई महिला वैज्ञानिक शामिल थीं.

भारत की न्यूक्लियर नीति नो फर्स्ट यूज पर आधारित

भारत की न्यूक्लियर नीति नो फर्स्ट यूज पर आधारित है. इसका मतलब है कि भारत पहले न्यूक्लियर हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर भारत पर न्यूक्लियर हमला होता है तो उसका जवाब बहुत बड़े स्तर पर दिया जाएगा. भारत में न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल का फैसला केवल राजनीतिक नेतृत्व ही ले सकता है. प्रधानमंत्री न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी की पॉलिटिकल काउंसिल के प्रमुख होते हैं. भारत के पास जमीन, हवा और समुद्र तीनों रास्तों से न्यूक्लियर हमला करने की क्षमता है. हाल ही में भारतीय नौसेना ने अपनी तीसरी न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन INS अरिदमन को सेवा में शामिल किया है. इससे भारत की समुद्री सुरक्षा और न्यूक्लियर ताकत और मजबूत हुई है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 तक भारत के पास करीब 180 न्यूक्लियर वॉरहेड थे. रिपोर्ट में चीन के पास 600 और पाकिस्तान के पास 170 न्यूक्लियर वॉरहेड होने का अनुमान लगाया गया है.

NATIONAL : योगी मंत्रिमंडल का विस्तार आज, मनोज पांडे और भूपेंद्र चौधरी समेत इन 6 नेताओं का बढ़ा कद; जानें पूरा समीकरण

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उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद अहम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का दूसरा विस्तार आज यानी रविवार दोपहर 3:30 बजे होने जा रहा है। राजभवन के गांधी सभागार में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 6 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाएंगी। शनिवार शाम को मुख्यमंत्री योगी की राज्यपाल से हुई मुलाकात के बाद इस फेरबदल पर अंतिम मुहर लग गई है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस विस्तार में भाजपा ने जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस विस्तार में 2 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसमें पिछड़े (OBC), दलित (SC) और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति साफ दिख रही है। आइए जानते हैं इनके नाम।

भूपेंद्र चौधरी: 55 वर्षीय भूपेंद्र चौधरी यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और पश्चिमी यूपी के कद्दावर जाट नेता हैं। मुरादाबाद से आने वाले चौधरी की जाट समुदाय में मजबूत पकड़ है। पहले ये पंचायती राज कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2016 में पहली बार एमएलसी बने और 2022 में उन्हें दोबारा मनोनीत किया गया। ये जाट समुदाय में अच्छी पैठ के लिए जाने जाते हैं।

मनोज पांडे: मनोज पांडे ऊंचाहार (रायबरेली) से विधायक हैं और सपा के बागी नेता के रूप में जाने जाते हैं। वे लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं, 2012, 2017 और 2022 में सपा के टिकट पर जीत हासिल की। ब्राह्मण समाज से आने वाले पांडे अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं और सपा के मुख्य सचेतक की भूमिका निभा चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने सपा छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 58 वर्षीय मनोज पांडे का राजनीतिक सफर रायबरेली की राजनीति में एक अहम स्थान रखता है।

कृष्णा पासवान: फतेहपुर की खागा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक एक दलित महिला चेहरा हैं, जिन्होंने अब तक चार बार जीत दर्ज की है। उन्होंने पहली बार 2002 में चुनाव जीता और इसके बाद 2012, 2017 तथा 2022 में भी विजय हासिल की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से राजनीति में कदम रखने वाली यह नेता SC समाज से आती हैं और अपनी जमीनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। 63 वर्ष की उम्र में भी वे सक्रिय राजनीति में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए हैं। हाल ही में नवनिर्मित सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए फावड़े से खुदाई करती हुई उनकी एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसने उन्हें और अधिक चर्चा में ला दिया।

हंसराज विश्वकर्मा: हंसराज विश्वकर्मा ने बूथ कार्यकर्ता से लेकर मंत्रिमंडल तक का सफर तय किया है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आते हैं और वर्तमान में वाराणसी बीजेपी जिलाध्यक्ष हैं। ओबीसी वर्ग के विश्वकर्मा समाज से जुड़े होने के कारण उन्हें पार्टी का महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है। पीएम मोदी के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले 57 वर्षीय हंसराज विश्वकर्मा अब मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे।

कैलाश राजपूत: कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक 67 वर्षीय नेता लोधी समाज से आते हैं। वे अखिलेश यादव के गढ़ में भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी चेहरे के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उनकी राजनीतिक मौजूदगी इस क्षेत्र में बीजेपी को सामाजिक समीकरणों के लिहाज से मजबूती देती है।

सुरेंद्र दिलेर: मंत्रिमंडल में शामिल सबसे युवा चेहरा 31 वर्षीय विधायक हैं, जो अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से आते हैं। वे 2024 के उपचुनाव में पहली बार जीतकर विधानसभा पहुंचे। एससी समाज से जुड़े इस नेता को राजनीति विरासत में मिली है। इनके दादा किसान लाल दिलेर हाथरस से चार बार सांसद और पांच बार विधायक रहे, जबकि पिता राजवीर दिलेर भी हाथरस से सांसद और खैर सीट से विधायक रह चुके हैं। इस तरह परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने इन्हें कम उम्र में ही बड़ा मंच दिलाया है।

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही सोमेंद्र तोमर, अजीत पाल और नरेंद्र कश्यप के प्रमोशन की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, असीम अरुण, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह और संजय सिंह गंगवार का कद बढ़ाया जा सकता है। वहीं, कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में कटौती या बदलाव की भी संभावना है। फिलहाल किसी भी मंत्री को हटाए जाने की खबर नहीं है।

योगी सरकार में वर्तमान में 54 मंत्री हैं। आज के विस्तार के बाद यह संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी। इससे पहले मार्च 2024 में पहला विस्तार हुआ था, जिसमें ओमप्रकाश राजभर और दारा सिंह चौहान जैसे नेताओं को जगह मिली थी।

NATIONAL : आतंकी हमले की धमकी के बाद दिल्ली बीजेपी मुख्यालय की बढ़ी सुरक्षा, DDU मार्ग पर अलर्ट; बंगाल चुनाव से कनेक्शन!

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दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के केंद्रीय कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में आतंकी धमकी मिलने के बाद वृद्धि कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात कर दिए हैं।कार्यालय के आसपास बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और सीसीटीवी निगरानी को भी सख्त कर दिया गया है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि एक कारण यह भी है कि बंगाल में शपथग्रहण के बाद यहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि विपक्ष यहां पर प्रदर्शन न कर सके।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मिली खुफिया जानकारी में भाजपा कार्यालय को निशाना बनाने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत सजग हो गईं।आसपास के इलाकों में भी गश्त बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि धमकी की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा के सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बल की तैनाती की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में सुरक्षा इनपुट्स के आधार पर आतंकी अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद भाजपा के मुख्यालय और आसपास की सरकारी इमारतों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। एजेंसियों को आशंका है कि डीडीयू मार्ग स्थित कार्यालयों को आत्मघाती हमले, कार बम, गोलीबारी और आईईडी वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में शपथग्रहण को ध्यान में रखकर पुलिस बैरिकेड लगाकर पहले की तुलना में अधिक पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं ताकि विपक्ष यहां प्रदर्शन न कर सके।

NATIONAL : पीएम का आज 3 राज्यों का दौरा:कर्नाटक में PM मोदी ने कहा- सत्ता बदलते ही कांग्रेस ने पुराने सहयोगी DMK की पीठ में छुरा घोंपा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार से तीन राज्यों के दौरे पर हैं। सुबह 11 बजे वे कर्नाटक के बेंगलुरु पहुंचे। यहां ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। यहां एक ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन किया और एक जनसभा को संबोधित किया।तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा- कांग्रेस और DMK के बीच पिछले 25-30 साल से करीबी संबंध रहे हैं। DMK ने कई बार कांग्रेस को संकट से बाहर निकाला। 2014 से पहले केंद्र में 10 साल तक चली कांग्रेस सरकार भी DMK के समर्थन की वजह से ही टिकी रही।

DMK ने हर समय कांग्रेस के हित में काम किया, लेकिन जैसे ही सत्ता का समीकरण बदला, कांग्रेस ने पहली ही मौके पर DMK की पीठ में छुरा घोंप दिया।

3 बजे तेलंगाना रात को गुजरात जाएंगे PM

पीएम दोपहर में 3 बजे के करीब तेलंगाना जाएंगे। हैदराबाद में 9,400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की नींव रखेंगे। कुछ का इनॉगरेशन करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

इसके बाद शाम को पीएम गुजरात जाएंगे, रविवार रात को जामनगर में रुकेंगे। 11 मई को पीएम सुबह लगभग 10.15 बजे सोमनाथ मंदिर में ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में शामिल होंगे। बाद में, वे वडोदरा जाएंगे, जहां ‘सरदारधाम हॉस्टल’ का उद्घाटन करेंगे। यहां एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

BUSINESS : सर्राफा बाजार में कमजोरी का रुख, सोना और चांदी की घटी कीमत

नई दिल्ली, 10 मई (हि.स.)। घरेलू सर्राफा बाजार में आज शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली कमजोरी का रुख नजर आ रहा है। सोना आज 290 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 320 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है। इसी तरह चांदी की कीमत में आज 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक की सांकेतिक गिरावट दर्ज की गई है। कीमत में गिरावट के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,52,350 रुपये से लेकर 1,54,370 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,39,650 रुपये से लेकर 1,41,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। वहीं चांदी की कीमत में भी गिरावट आने के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में ये चमकीली धातु आज शुरुआती कारोबार के दौरान 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है।

साप्ताहिक आधार पर देखें तो पिछले सप्ताह के कारोबार में सोना की कीमत में तेजी दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह के कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,640 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की मजबूती आ गई। इसी तरह 22 कैरेट सोना साप्ताहिक आधार पर 1,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया। चांदी के भाव में भी पिछले सप्ताह के कारोबार में तेजी दर्ज की गई। इस तेजी के कारण चांदी पिछले सप्ताह के भाव की तुलना में 10 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो गई।

दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 1,52,500 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,39,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,52,350 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,650 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,39,700 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।

इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,54,370 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,41,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,52,350 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,650 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,39,700 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,39,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,39,700 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोने के भाव में गिरावट का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,52,350 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,39,650 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

ASSAM : भाजपा नीत एनडीए विधायक दल की बैठक में नेता के चुनाव की तैयारी

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गुवाहाटी, 10 मई (हि.स.)। असम प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में आज भाजपा नीत एनडीए गठबंधन की बैठक आयोजित होने जा रही है। बैठक में विधायक दल के नेता का चुनाव होगा। इसके बाद सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।

भाजपा के राष्ट्रीय पर्ववेक्षक के रूप में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा एवं उप पर्यवेक्षक हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। वाजपेयी भवन में भाजपा एवं सहयोगी दलों के विधायक लगभग पहुंच चुके हैं। उल्लेखनीय है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 126 सीटों में से 82 सीटों पर जीत हासिल की है। जबकि, सहयोगी पार्टी असम गण परिषद (अगप) 10 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) 10 समेत कुल 102 सीटों पर एनडीए ने जीत हासिल की है।

विधायक दल की बैठक को लेकर भाजपा मुख्यालय में आज उत्सव सरीखा माहौल है। उल्लेखनीय है कि आगामी 12 मई को गुवाहाटी के खानापाड़ा खेल मैदान में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं।

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