Sunday, May 31, 2026
Home Blog

WORLD : अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान तैयार, लेकिन रखी अहम शर्त

0

ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने बीबीसी से कहा है कि अगर अमेरिका दोबारा ईरान के साथ बातचीत शुरू करना चाहता है तो उसे भरोसा दिलाना होगा कि वो (अमेरिका) कोई और हमला नहीं करेगा.

माजिद तख्त-रवांची ने कहा, “ट्रंप प्रशासन ने मध्यस्थों के जरिए ईरान से कहा कि वो इस हफ्ते वार्ता दोबारा शुरू करना चाहता है. लेकिन आगे के हमलों से जुड़े बेहद ही महत्वपूर्ण सवाल पर अमेरिका ने स्थिति साफ नहीं की है.”

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी. लेकिन तभी इस महीने की शुरुआत में इसराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बुनियादी सैन्य ढांचे पर हमला किया. ईरान ने भी मिसाइलों के साथ जवाबी कार्रवाई की.

अमेरिका 21 जून को इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हुआ और उसने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बम गिराए.

तख्त-रवांची ने ये भी कहा कि ईरान शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन करने पर जोर देगा. उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि ईरान गुप्त तरीके से परमाणु बम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि ईरान को रिसर्च प्रोग्राम के लिए ‘परमाणु सामग्री’ नहीं मिल पा रही थी, इसलिए वे (ईरान) इसके लिए खुद पर ही निर्भर थे.

उप विदेश मंत्री ने कहा, “उसके (परमाणु प्रोग्राम) स्तर पर चर्चा की जा सकती है. क्षमता पर चर्चा की जा सकती है. लेकिन ये कहना कि आपको संवर्धन नहीं करना चाहिए. आपको बिल्कुल भी संवर्धन नहीं करना चाहिए. अगर आप इसके लिए सहमत नहीं होंगे तो हम आप पर बम गिरा देंगे. ये जंगल का क़ानून है.”

WORLD : प. एशिया संकट: होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी बरकरार, ईरान से सीजफायर पर भी सस्पेंस; वैश्विक बाजार में बढ़ा तनाव

0

होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को सख्ती से जारी रखा है। हालांकि ईरान के साथ 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार पर बातचीत चल रही है, लेकिन परमाणु शर्तों और लेबनान विवाद के कारण दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य तनाव फिलहाल कम नहीं हो रहा है। सिंगापुर के सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह लागू है। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ 60 दिनों के युद्धविराम पर विचार कर रहे हैं। इस नाकेबंदी से दुनिया के इस सबसे जरूरी तेल रास्ते में जहाजों की आवाजाही ठप है। अमेरिकी कार्रवाई के कारण अप्रैल के मध्य से अब तक 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों को वापस भेजा गया है।

युद्ध के लिए तैयार अमेरिका:पीट हेगसेथ
अमेरिकी युद्ध सचिव ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक के बाद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दोबारा युद्ध शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हथियारों का भंडार इस काम के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की है। सेना ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी बल पूरी तरह मुस्तैद हैं। दूसरी तरफ ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी सेना ने शनिवार को एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। वहीं, होर्मुज के बंद होने से वैश्विक बाजार में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है।

क्या है सीजफायर समझौते की शर्तें और विवाद?
पाकिस्तानी मध्यस्थों की मदद से एक अस्थायी समझौता तैयार किया गया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच लड़ाई को रोकना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में दो घंटे बैठक की। हालांकि अभी तक इस समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। इस समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुख्य विवाद इस प्रकार हैं:-

परमाणु प्रतिबंध: अमेरिका की शर्त है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मान रहा है।

मुक्त व्यापार: ट्रंप चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह टोल-फ्री हो। ईरान का कहना है कि वे नाकेबंदी हटने के बाद ही जहाजों को रास्ता देंगे।

समुद्री बारूदी सुरंगें: समझौते के तहत ईरान को 30 दिनों में समुद्री सुरंगें हटानी होंगी। अमेरिका ने पहले ही कई सुरंगों को नष्ट करने का दावा किया है।

लेबनान संकट से उलझा कूटनीतिक गणित
इस पूरे विवाद में लेबनान का मोर्चा सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान संकट नहीं सुझलगा, तब तक अमेरिका से कोई समझौता नहीं होगा। इस बीच इस्राइली सेना लेबनान के भीतर 30 किलोमीटर तक घुस चुकी है। वहां गांवों को खाली करने के आदेश जारी हैं। दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधि पेंटागन में सीधे बातचीत भी कर रहे हैं। कूटनीतिक बातचीत के बावजूद जमीन पर युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है।

IPL 2026 Final: महामुकाबले से पहले जानें बेंगलुरु और गुजरात की पूरी राइवलरी, हेड-टू-हेड आंकड़े में कौन आगे?

0

आईपीएल 2026 का फाइनल आज आरसीबी और गुजरात टाइटंस के बीच अहमदाबाद में खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच इस सीजन तीन मैच खेले जा चुके हैं और यह चौथी बार है जब दोनों टीम एक ही सीजन में भिड़ने जा रही है।

अहमदाबाद: क्रिकेट फैंस का लंबा इंतजार अब खत्म हो चुका है। आईपीएल 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर है और आज अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इस सीजन का सबसे बड़ा महामुकाबला होने जा रहा है। खिताबी भिड़ंत के लिए जो दो टीमें आमने-सामने खड़ी हैं, वे हैं डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस। इस ऐतिहासिक फाइनल मैच से पहले आइए पूरी तरह समझते हैं इन दोनों टीमों के बीच की राइवलरी, हेड-टू-हेड रिकॉर्ड, इस सीजन की जंग और उन खिलाड़ियों के बारे में जो आज मैच का पासा पलट सकते हैं।

हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में किसका पलड़ा भारी
आईपीएल के इतिहास में अब तक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच कुल 9 बार आमना-सामना हुआ है। इन आंकड़ों में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलती है। अब तक खेले गए इन 9 मुकाबलों में से आरसीबी ने 5 मैचों में जीत दर्ज की है, जबकि गुजरात टाइटंस की टीम 4 मैचों में विजयी रही है। इस प्रतिद्वंद्विता में आरसीबी का गुजरात के खिलाफ सर्वोच्च स्कोर 254 रन रहा है, जो इसी सीजन के क्वालीफायर-1 में बना था, जबकि उनका न्यूनतम स्कोर 155 रन रहा है। आंकड़ों के लिहाज से आरसीबी की टीम 5-4 से मामूली बढ़त बनाए हुए है, लेकिन आज होने वाला 10वां मुकाबला सीधे आईपीएल ट्रॉफी का फैसला करेगा।

एक ही सीजन में चौथी बार भिड़ेंगी दोनों टीमें
इस साल इन दोनों टीमों के बीच की सबसे रोमांचक चैप्टर लिखा गया है क्योंकि फाइनल से पहले इस सीजन में दोनों टीमें तीन बार आमने-सामने आ चुकी हैं। पहली भिड़ंत 24 अप्रैल को बेंगलुरु में हुई थी, जहां गुजरात ने साई सुदर्शन के 58 गेंदों में जड़े शानदार शतक की बदौलत 205/3 का विशाल स्कोर बनाया था, लेकिन जवाब में किंग विराट कोहली की 44 गेंदों में 81 रनों की आतिशी पारी और देवदत्त पडिक्कल के 27 गेंदों में 55 रनों की बदौलत आरसीबी ने इस लक्ष्य को 7 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया था।

NATIONAL : दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत के लोगों को मिलने वाली है भीषण गर्मी से राहत, आंधी और गरज-चमक से साथ बारिश का अलर्ट

0

उत्तरी और मध्य भारत भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में अगले 4-5 दिनों तक लू की स्थिति जारी रहेगी। उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में करोड़ों लोग झुलसा देने वाली गर्मी झेल रहे हैं और उन्हें तुरंत कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हालांकि अगले 4 दिन के बाद मौसम का मिजाज बदलने वाला है।

28 मई से बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के पुर्वानुमान के अनुसार, 28 मई से एक ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) एक्टिव हो रहा है। इसकी वजह से 28 और 29 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ , दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके साथ 60-70 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जगहों पर 80 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। पूर्वी यूपी में 28 मई से 31 मई तक खराब मौसम बना रह सकता है।

इन राज्यों में बारिश के आसार

मौसम विभाग ने मंगलवार को बताया कि 27-30 मई के दौरान पश्चिम बंगाल में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। बिहार, झारखंड और ओडिशा में अगले 7 दिनों के दौरान, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 40-50 किमी की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। बिहार में 29 मई को 60-80 किमी रफ्तार से आंधी चल सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में 28-30 मई के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की काफी संभावना है।

27-28 मई के दौरान केरल माहे, लक्षद्वीप में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की काफी संभावना है। 27-30 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना और रायलसीमा में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की छिटपुट संभावना है।

दिल्ली में बुधवार को आसमान ज़्यादातर साफ़ रहेगा। कुछ जगहों पर लू चलने की स्थिति रहेगी। दिन के समय 40 किमी की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 44°C से 46°C और 27°C से 29°C के बीच रहने की संभावना है।

28 मई को आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। शाम/रात के समय गरज/बिजली कड़कने और 40-50 किमी की तेज़ हवाओं के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 42°C से 44°C और 28°C से 30°C के बीच रहने की संभावना है। 29 मई आसमान आम तौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह या दोपहर के समय हल्की बारिश का एक दौर आ सकता है। इस दौरान 40-50 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 35°C से 37°C और 25°C से 27°C के बीच रहने की संभावना है।

BUSINESS : कॉटन इंपोर्ट पर ड्यूटी छूट से MSME टेक्सटाइल यूनिट्स को मिलेगा बड़ा फायदा, सस्ता होगा कच्चा माल

केंद्र सरकार द्वारा 30 अक्टूबर 2026 तक कॉटन इंपोर्ट पर सभी कस्टम ड्यूटी हटाने के फैसले का टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने कहा कि यह कदम घरेलू इंडस्ट्री के लिए कॉटन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, प्रोडक्शन कॉस्ट को कम करेगा और इंडियन टेक्सटाइल प्रोडेक्ट्स की ग्लोबल प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाएगा। वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार यह ड्यूटी छूट 1 जून 2026 से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने कहा कि कपास के ऑफ-सीजन के दौरान लागू किया गया यह फैसला टेक्सटाइल इंडस्ट्री, विशेष रूप से MSME इकाइयों को राहत देगा। इससे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी, इनपुट कॉस्ट पर दबाव कम होगा और किसानों के हितों की रक्षा के साथ बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने इसे अपैरल इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत बताया है। AEPC के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि कपास और यार्न की बढ़ती कीमतों से जूझ रही छोटी और मध्यम इकाइयों को इस फैसले से बड़ा फायदा होगा। उन्होंने स्पिनिंग मिलों से भी अपील की कि वे सस्ती कॉटन का लाभ यार्न की कीमतों में कमी के रूप में आगे बढ़ाएं, ताकि पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन को फायदा मिल सके और निर्यातक अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर ऑर्डर हासिल कर सकें।

इंडस्ट्री के लिए क्या थी बड़ी बाधा
वहीं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टैक्सटाइल इंडस्ट्री के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए बड़ी बाधा बन गया था, जबकि एशिया के कई प्रतिस्पर्धी देशों को ड्यूटी-फ्री कपास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क के कारण पूरी वैल्यू चेन में लागत बढ़ रही थी और भारत के टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाने के प्रयास प्रभावित हो रहे थे।

भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट मुख्य रूप से कपास आधारित है और देश ने वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल एवं अपैरल एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है। इंडस्ट्री का मानना है कि कॉटन इंपोर्ट पर अस्थायी ड्यूटी छूट से भारतीय निर्यातक विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगे और ग्लोबल बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेंगे।

NATIONAL : दिल्ली साकेत में 5 मंजिला इमारत ढही, 4 की मौत और कई घायल

0

नई दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुआ हादसा राजधानी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया और वहां मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दस लोग घायल हैं जिन्हें तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी में जुटे हैं।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो लोग पास में मौजूद थे, उन्होंने सबसे पहले शोर सुना और फिर धूल का बड़ा गुबार उठता देखा। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार जिस जगह इमारत गिरी वहां एक मेडिकल संस्थान से जुड़ी कैंटीन भी संचालित हो रही थी, जिससे हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। देर रात तक कई बार रुक-रुक कर काम किया गया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब तक की जानकारी के मुताबिक लगभग 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से कुछ को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के इलाज में जुटी है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोग जो इमारत के पास मौजूद थे, उन्होंने बताया कि पहले हल्की आवाज आई और फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग गिर गई। आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया, जिससे कुछ देर के लिए दृश्यता भी बेहद कम हो गई।

पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। आसपास के भवनों को भी एहतियातन खाली कराया गया है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल इमारत गिरने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में निर्माण संबंधी कमजोरी या संरचनात्मक खामी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत अचानक कैसे गिर गई।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मरम्मत और निरीक्षण किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को धीमी लेकिन बेहद सावधानीपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रातभर मशीनों की आवाज और राहत दलों की गतिविधियां घटनास्थल पर जारी रहीं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास जमा हैं, हालांकि पुलिस उन्हें सुरक्षित दूरी पर रखने की कोशिश कर रही है। माहौल में चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। कई लोग अपने परिचितों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

यह हादसा न सिर्फ जान-माल का नुकसान लेकर आया है, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजरें राहत कार्य और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।

नई दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुआ हादसा राजधानी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा मलबे में बदल गया और वहां मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दस लोग घायल हैं जिन्हें तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी में जुटे हैं।

हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो लोग पास में मौजूद थे, उन्होंने सबसे पहले शोर सुना और फिर धूल का बड़ा गुबार उठता देखा। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार जिस जगह इमारत गिरी वहां एक मेडिकल संस्थान से जुड़ी कैंटीन भी संचालित हो रही थी, जिससे हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। देर रात तक कई बार रुक-रुक कर काम किया गया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

अब तक की जानकारी के मुताबिक लगभग 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से कुछ को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के इलाज में जुटी है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोग जो इमारत के पास मौजूद थे, उन्होंने बताया कि पहले हल्की आवाज आई और फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग गिर गई। आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया, जिससे कुछ देर के लिए दृश्यता भी बेहद कम हो गई।

पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। आसपास के भवनों को भी एहतियातन खाली कराया गया है, ताकि किसी और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल इमारत गिरने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में निर्माण संबंधी कमजोरी या संरचनात्मक खामी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत अचानक कैसे गिर गई।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मरम्मत और निरीक्षण किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को धीमी लेकिन बेहद सावधानीपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रातभर मशीनों की आवाज और राहत दलों की गतिविधियां घटनास्थल पर जारी रहीं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल के आसपास जमा हैं, हालांकि पुलिस उन्हें सुरक्षित दूरी पर रखने की कोशिश कर रही है। माहौल में चिंता और डर साफ देखा जा सकता है। कई लोग अपने परिचितों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।

यह हादसा न सिर्फ जान-माल का नुकसान लेकर आया है, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब सभी की नजरें राहत कार्य और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।

NATIONAL : देश के 166 जलाशयों में मात्र 24.75% पानी, एक महीने में 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कमा, 15 बांधों में स्टॉक सामान्य से आधा

0

गर्मियों के चरम पर पहुंचते ही देश के तालाबों में संकट गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार मई की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के प्रमुख जलाशयों से पानी का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के अंतिम सप्ताह तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है, जो इनकी कुल क्षमता का मात्र 24.75% है। मई के शुरुआती हफ्ते में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी था, जो कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा मतलब यह है कि इस एक महीने के भीतर ही गर्मी और भारी खपत के कारण देश के मुख्य जल स्रोतों से करीब 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो चुका है। एक दिन पहले ही मौसम विभाग ने अल नीनो के चलते सूखे की आशंका जताई है। ऐसे में यह एक नई चिंता है क्योंकि 15 बांधों में स्टॉक सामान्य से आधा रह गया है। राहत की बात यह है कि यह वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस साल के औसत से थोड़ा बेहतर बना हुआ है, लेकिन तेजी से खाली हो रहे बांध आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर रहे हैं।

गंभीर संकट वाले बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 मई के महीने में पारा चढ़ने के साथ ही जलाशयों से पानी का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। महीने की शुरुआत में जल भंडारण की स्थिति काफी नियंत्रण में दिख रही थी और देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से अधिक था। लेकिन भीषण गर्मी के कारण महीने के अंत तक आते-आते अत्यधिक खाली हो चुके और गंभीर संकट वाले बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। दक्षिण भारत न्यूनतम स्तर पर जल पानी की कमी की सबसे भयावह तस्वीर दक्षिण भारत के राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर न्यूनतम स्तर पर है। मई की शुरुआत में इनमें कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा हुआ था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर केवल 17.55% रह गया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में किल्लत बढ़ गई है। कई जलाशय पूरी तरह सूख चुके देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वहां के बड़े बांध पूरी तरह मैदान में तब्दील हो चुके हैं। महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे जलाशय मई की शुरुआत से लेकर महीने के अंत तक लगातार पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया है। 6 जल विद्युत प्रोजेक्ट पर असर पानी की इस भारी गिरावट का सीधा असर देश के बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। देश की 20 जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से मई की शुरुआत में जहां 8 परियोजनाओं में पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे था, वहीं अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति नाजुक है।

NATIONAL : डीके शिवकुमार कर्नाटक के 24वें CM होंगे:सिद्धारमैया ने नाम बढ़ाया, उनका बेटा भी मंत्री बनेगा, राज्य को 4 डिप्टी सीएम भी मिलेंगे

0

कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार अब राज्य के 24वें मुख्यमंत्री बनेंगे। बेंगलुरु में शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया। 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले सिद्धारमैया ने उनके नाम प्रस्ताव रखा। इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि 3 जून की शाम डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बैठक में बाद शिवुकमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की।

सूत्रों के मुताबिक CM के साथ-साथ कैबिनेट भी बदलेगी। मौजूदा कैबिनेट से 10 मंत्री हटाए जा सकते हैं। नई कैबिनेट में सिद्धारमैया और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे भी शामिल होंगे। 4 डिप्टी CM भी बनाए जा सकते हैं।शिवकुमार ‘सीएम रोटेशनल फॉर्मूला’ के तहत मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। सिद्धारमैया 20 मई 2023 से 28 मई 2026 तक मुख्यमंत्री रहे हैं। आज की बैठक में कर्नाटक कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। दोनों को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

सभी विधायकों ने मिलकर प्रस्ताव पास किया, इसमें यह तय किया गया कि नए नेता का फैसला कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप करेगी।
इसके बाद सिद्धारमैया ने खुद डीके शिवकुमार का नाम नए CLP नेता के तौर पर पेश किया। गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने प्रस्ताव का समर्थन किया, सभी विधायकों ने एकमत से इसका समर्थन किया।
शिवकुमार ने एक प्रस्ताव रखकर सिद्धारमैया का शुक्रिया अदा किया।
बैठक के दौरान सिद्धारमैया, वेणुगोपाल और सुरजेवाला अलग कमरे में चले गए और आपस में बात की। इसके बाद बैठक फिर शुरू हुई और शिवकुमार को नेता चुना गया।

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में हैं। उनके पास ₹1413 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। वह रियल एस्टेट, खनन, होटल कारोबारी भी हैं। दिलचस्प ये है कि इतनी संपत्ति के बावजूद उनके चुनावी हलफनामे में एक टोयोटा क्वालिस कार दर्ज है। 263 करोड़ का कर्ज भी है।

1962 में बेंगलुरु के पास कनकपुरा में जन्मे डीके वोक्कालिगा समुदाय से हैं। वह कनकपुरा से ही विधायक हैं। कांग्रेस में उनकी पहचान ऐसे नेता की है जो पार्टी विधायकों को टूटने से बचाते हैं। किसी भी बड़े ऑपरेशन, चुनाव मैनेजमेंट, प्रचार या गुप्त रणनीतियों के लिए जिस वित्तीय और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की जरूरत होती है, उसे वे बखूबी मैनेज कर लेते हैं।

डीके पर 19 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। ईडी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो केस में जांच कर रही है। 2017 में आयकर विभाग के छापे में इनके घर 8.5 करोड़ रु. मिले थे। इसी केस में वह 2019 में गिरफ्तार हुए। उन्हें 50 दिन तिहाड़ में बिताने पड़े थे। सीबीआई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जांच कर रही है।

ज्योतिषी का दावा- शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे

डिप्टी सीएम शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने भविष्यवाणी की है कि शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे। उन्होंने कहा- मैंने शिवकुमार को शपथ के लिए 31 मई, 5 जून और 6 जून की तारीखें दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिवकुमार 2028 के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में वापसी करेंगे।

ज्योतिषी ने कहा, वह कोई एक दिन के मुख्यमंत्री या एक बार के CM नहीं हैं। वह एक लंबे समय तक इस पद पर बने रहेंगे। उनकी कुंडली बहुत अच्छी है। वह कर्नाटक के लिए लंबे समय तक काम करेंगे।

NATIONAL : ‘भगवान मंत्रियों का इंतजार नहीं करते, सब बराबर हैं’, मद्रास हाई कोर्ट ने मंदिरों में VIP दर्शन पर उठाए सवाल

0

मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंदू मंदिरों में सशुल्क वीआईपी दर्शन गलत और भेदभावपूर्ण है। न्यायालय ने कहा कि गिरजाघरों और मस्जिदों में ऐसी कोई प्रथा नहीं अपनाई जाती है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की अवकाशकालीन पीठ ने टिप्पणी की , “मंत्रियों और विधायकों को यह नहीं सोचना चाहिए कि वे जब चाहें मंदिर में जा सकते हैं और भगवान उनका इंतजार कर रहे होंगे। हमें वीआईपी दर्शन की आवश्यकता ही क्यों है? भगवान के समक्ष सभी समान हैं।”

पीठ ने राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल पी.वी. बालासुब्रमण्यम की तरफ से दिए गए इस तर्क को खारिज कर दिया कि सशुल्क वीआईपी दर्शन को वापस लेने से मंदिरों को राजस्व का नुकसान होगा।

पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों और संवैधानिक अधिकारियों को छोड़कर मंदिरों में ‘वीआईपी दर्शन’ और ‘विशेष दर्शन’ को पूरी तरह से खत्म करने की मांग की गई थी।

विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी पी. चोकलिंगम की तरफ से दायर की गई याचिका में मानव संसाधन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग के अधीन मंदिरों में प्रचलित ‘वीआईपी दर्शन’ की प्रथा को खत्म करने की मांग की गई है। उनके वकील बी. जगन्नाथ ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विशेष दर्शन और वीआईपी सिस्टम को खत्म करने के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए। इस संबंध में समिति ने पिछले हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

पिछली सुनवाई के दौरान अवकाशकालीन पीठ ने यह जानने की कोशिश की कि क्या तिरुप्पारनकुंड्रम मंदिर के अधिकारियों ने नए मंत्री आर निर्मलकुमार और उनके सहयोगियों को दर्शन सुनिश्चित करने के लिए मंदिर को निर्धारित समय से अधिक खुला रखकर नियमों का कोई उल्लंघन किया था।

शुक्रवार को सरकार ने बताया कि मंत्री के दौरे के दौरान किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। इस दलील को दर्ज करते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि मंत्रियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि वे कानून से ऊपर हैं और देवता उनका इंतजार कर रहे होंगे। इसके बाद अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए छह हफ्ते का समय स्थगित कर दिया।

तमिल फिल्म ‘करप्पू’ पर प्रतिबंध लगाने को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। इसमें आरोप लगाए गए थे कि फिल्म में न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश हुई है। इसको लेकर कोर्ट ने कहा है कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार है, और जज कोई पवित्र गाय नहीं है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…

NATIONAL : ‘शासक ही हत्यारे बन गए…’, भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर ममता बनर्जी का रिएक्शन

0

पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ। वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों के परिवारों से मिलने वहां गए थे। हमले को लेकर अब बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “शासक हत्यारे बन गए। भाजपा पर शर्म आती है।”

तृणमूल कांग्रेस ने भी इस हमले की निंदा की। पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “अपने वादे पर कायम रहते हुए, अभिषेक बनर्जी ने संजू कर्मकार के शोकाकुल परिवार को अकेला छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। बंगाल बीजेपी-समर्थित गुंडों के जानलेवा हमले के बाद भी, हमारे राष्ट्रीय महासचिव ने पीछे हटना मंजूर नहीं किया। इसके बजाय, वे उस परिवार के साथ खड़े रहे, जो कथित तौर पर बीजेपी-समर्थित गुंडों द्वारा पहुंचाए गए एक अकल्पनीय सदमे से टूट चुका था।”

पार्टी ने आगे लिखा, “यही फर्क है करुणा से प्रेरित राजनीति और नफरत से प्रेरित राजनीति के बीच। शुभेंदु अधिकारी ने, आज की घटनाओं ने एक बार फिर उस तरह की राजनीति का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है, जिसका आप नेतृत्व करते हैं। एक ऐसी राजनीति जिसकी बुनियाद ही डराने-धमकाने, हिंसा और बदले की भावना पर टिकी है।”

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए सोनारपुर की यात्रा के दौरान उन पर हमला किया गया।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, “अगर मेरे साथ तैनात दो सुरक्षा अधिकारी इस घटना की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दे रहे हैं, फिर भी कोई फोर्स नहीं आ रही है, तो यह साफ है कि ऊंचे अधिकारी चाहते हैं कि यह पूरी घटना चलती रहे और राज्य सरकार की तरफ से इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हो रही है। इससे साफ पता चलता है कि जिस तरह यहां एक मौत हुई, उसी तरह 2-4 और मौतें होनी चाहिए, तभी उन्हें कुछ चैन मिलेगा। उन्हें जो करना है, करने दो। हमारे पास सब कुछ रिकॉर्ड है। हम कोर्ट जाएंगे। मैं इस केस को लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा।”

अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा, “उन्होंने ईंट फेंकी, अंडा फेंका और पत्थर बरसाए। कृपया मुझे बताएं कि यह क्या है और आस-पास खड़े सभी लोग, उस इलाके के लोग। वे अब भी हमसे मिल रहे हैं और अब भी प्यार और इज्जत से हमारा स्वागत कर रहे हैं। जाकर उनसे पूछो जो यहां गुंडागर्दी कर रहे हैं। हमारे पास सभी वीडियो सबूत हैं। पास में ही एक कम्युनिटी हॉल है। सुबह 11 बजे से ही, उस कम्युनिटी हॉल में गुंडों को पत्थर फेंकने के लिए रखा गया था।”

तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा, “देखो मेरे चश्मे का क्या हाल हो गया है। उन्होंने मेरी आंख पर ईंट मारी और मैं अपनी आंख खोल नहीं पा रहा हूं। उसने मेरी पीठ, छाती, बांह और पैर पर घूंसे मारे हैं। मैंने हेलमेट पहना हुआ था, वरना मेरा सिर दो टुकड़ों में बंट गया होता। तुम मेरे शरीर को गिरा सकते हो, लेकिन मेरा इरादा मजबूत है, मेरा जुनून और जोश अब भी कायम है और यह सिर कभी नहीं झुकेगा।” यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…

- Advertisement -

News of the Day