Wednesday, July 1, 2026
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Weather: दिल्ली-एनसीआर में दो-तीन दिन में मानसून की उम्मीद, असम और अरुणाचल में बाढ़-बारिश से जनजीवन प्रभावित

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चिलचिलाती गर्मी से राहत देते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। रफ्तार पकड़ते हुए मानसून ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व लद्दाख में दस्तक दे दी। हालांकि भीषण गर्मी झेल रहे दिल्ली-एनसीआर में मानसून के दो-तीन दिनों में पहुंचने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह छा गया है। अरुणाचल प्रदेश व असम में मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे दोनों राज्यों का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, मानसून ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बचे इलाकों को कवर कर लिया है।

वहीं, नौ दिन की देरी से पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के साथ ही मानसून पूर्वांचल समेत लगभग आधे उत्तरी हिस्से में छा गया है। अभी मानसून की उत्तरी रेखा गुजरात के सूरत, मध्य प्रदेश के इंदौर, सागर, सीधी, और उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, अयोध्या व बरेली से होते हुए उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के मंडी तक पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के बचे इलाकों, हिमाचल प्रदेश व लद्दाख के बाकी हिस्सों, पूरे जम्मू-कश्मीर, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली व पंजाब और राजस्थान में मानसून के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

आईएमडी के अनुसार, 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और एनसीआर में 6 जुलाई तक तेज हवाएं चलने के साथ ही गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसके अलावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3-5 जुलाई तक भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तराखंड में बुधवार को बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है।

यूपी में मंगलवार को कई हिस्सों में बारिश होने से किसानों को बड़ी राहत मिली। बरेली में सर्वाधिक 157 मिमी और ललितपुर में 106 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लखीमपुर खीरी में 99.4 मिमी, अयोध्या में 69 मिमी, अंबेडकरनगर में 66 मिमी बारिश हुई। इससे कई जिलों में तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून में प्रदेश में सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी यूपी में वर्षा 58 प्रतिशत और पश्चिमी यूपी में 47 प्रतिशत कम रही।

IND vs ENG: भारत के खिलाफ पहले टी20 के लिए इंग्लैंड ने घोषित की प्लेइंग-11, जोफ्रा आर्चर को नहीं मिली जगह

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इंग्लैंड और भारत के बीच बुधवार को पांच मैचों टी20 सीरीज का पहला मुकाबला होना है। इंग्लैंड ने इसके लिए प्लेइंग-11 की घोषणा कर दी है। जोफ्रा आर्चर को पहले मैच से आराम दिया गया है।

इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ बुधवार को होने वाले पांच मैचों की टी20 सीरीज के पहले मुकाबले के लिए अपनी प्लेइंग-11 घोषित कर दी है। 2026 टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत से हारने वाली इंग्लैंड टीम की तुलना में इस बार अंतिम एकादश में दो बड़े बदलाव किए गए हैं। साकिब महमूद को जेमी ओवरटन की जगह शामिल किया गया है, जबकि जोफ्रा आर्चर की जगह ल्यूक वुड की टीम में वापसी हुई है। जोफ्रा आर्चर और तेज गेंदबाज जोश टंग को हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए आखिरी टेस्ट मैच में शामिल होने के कारण इस सीरीज के लिए आराम दिया गया है।

हैरी ब्रूक के लिए बड़ी परीक्षा
इस सीरीज में स्टार बल्लेबाज हैरी ब्रूक टीम की कमान संभाल रहे हैं, जो उनके अब तक के कप्तानी करियर की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक होने वाली है। टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में टीम को पहुंचाकर ब्रूक ने अपनी साख मजबूत की है और उन्हें इंग्लैंड के अगले टेस्ट कप्तान के रूप में भी देखा जा रहा है। ब्रूक ने कहा, मैंने खुद को पूरी तरह से इंग्लैंड क्रिकेट के लिए समर्पित कर दिया है। मैंने साफ कर दिया है कि मैं द हंड्रेड को छोड़कर किसी भी अन्य फ्रेंचाइजी क्रिकेट में नहीं खेलना चाहता। मैं जो कुछ भी करना चाहता हूं, वह इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलना है। मैदान पर या मैदान से बाहर मेरा हर कदम सिर्फ इसलिए होता है ताकि मैं इंग्लैंड के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकूं।

SPORTS : स्वीडन के खिलाफ 3-0 से जीता फ्रांस, एमबाप्पे ने दागे दो गोल; राउंड-16 में बनाई जगह

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फ्रांस ने फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 मुकाबले में स्वीडन को 3-0 से हराकर अंतिम-16 में जगह बना ली। टीम की जीत के नायक किलियन एमबाप्पे रहे, जिन्होंने दो गोल दागे। फ्रांस की ओर से तीसरा गोल ब्रैडली बारकोला ने किया। ग्रुप चरण के सभी मुकाबले जीतने के बाद फ्रांस ने नॉकआउट में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

पहले हाफ में फ्रांस का दबदबा
मैच के पहले हाफ में फ्रांस ने पूरी तरह दबदबा बनाए रखा और लगातार स्वीडन के गोल पर हमले किए। पहले 45 मिनट में फ्रांस ने 15 शॉट लगाए। एमबाप्पे का एक गोल ऑफसाइड के कारण रद्द हो गया, जबकि उनका एक और प्रयास पोस्ट से टकरा गया। माइकल ओलीसे की शानदार ओवरहेड किक भी गोलपोस्ट से टकराकर बाहर चली गई।

एमबाप्पे ने दो गोल कर फ्रांस को दिलाई बढ़त
लगातार दबाव के बीच पहले हाफ के अतिरिक्त समय में एमबाप्पे ने शानदार गोल कर फ्रांस को बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ के 53वें मिनट में बारकोला ने बढ़त दोगुनी कर दी। इसके बाद 74वें मिनट में एमबाप्पे ने अपना दूसरा गोल कर फ्रांस की 3-0 की जीत सुनिश्चित कर दी।

मैच में फ्रांस से आगे नहीं निकल सका स्वीडन
दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद भी स्वीडन पर फ्रांस का दबदबा कायम रहा। फ्रांस लगातार स्वीडन के गोल पर हमले करता रहा। माइकल ओलीसे के शानदार पास पर ब्रैडली बारकोला ने पेनाल्टी बॉक्स के अंदर से बेहतरीन फिनिश करते हुए टीम की बढ़त दोगुनी कर दी। इसके बाद स्वीडन के गोलकीपर जैकब विडेल ज़ेटरस्ट्रॉम ने जूल्स कुंडे और लगातार आक्रामक खेल दिखा रहे ओलीसे के कई प्रयासों को रोककर अपनी टीम को और बड़े अंतर से हारने से बचाया।
मैच के 74वें मिनट में माइकल ओलीसे ने एक और शानदार असिस्ट दिया, जिस पर कप्तान किलियन एमबाप्पे ने शानदार गोल कर अपना दूसरा गोल पूरा किया। इस गोल के साथ एमबाप्पे के विश्व कप इतिहास में कुल 18 गोल हो गए, जबकि विश्व कप 2026 में यह उनका छठा गोल है। अब फ्रांस अंतिम-16 में 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्टेडियम में पराग्वे का सामना करेगा, जहां एमबाप्पे के पास अपने गोलों की संख्या और बढ़ाने का मौका होगा।

WORLD : डील के बाद तेहरान को मिलेंगे जब्त पैसे…ईरान के 120 अरब डॉलर किन-किन देशों में फंसे हैं?

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ईरान का दावा है कि उसके 120 अरब डॉलर रुपए फ्रीज किए गए हैं. अधिकांश पैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज के तहत रखा गया है. इसके अलावा कतर, अमेरिका, चीन, तुर्की और दक्षिण कोरिया में ईरान के पैसे फ्रीज किए गए हैं. ईरान चाहता है कि उसके पैसे वापस मिल जाएं.
डील के बाद तेहरान को मिलेंगे जब्त पैसे…ईरान के 120 अरब डॉलर किन-किन देशों में फंसे हैं?

अमेरिका से परमाणु समझौते के तहत ईरान को सबसे बड़ी राहत जब्त पैसे का मिलना है. आर्थिक प्रतिबंधों के तहत दुनिया के कई देशों में ईरान के करीब 120 अरब डॉलर पैसे फ्रीज हैं. ईरान की कोशिश पहले स्लॉट में करीब 24 अरब डॉलर को निकालने की है. इसके लिए कतर की राजधानी दोहा में हाईलेवल मीटिंग चल रही है. जब्त पैसे कतर के माध्यम से ही ईरान को मिलेंगे. क्योंकि, जो समझौता हो रहा है, उसमें कतर की बड़ी भूमिका है.

मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पैसे चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में जब्त किए गए हैं. अमेरिका के दबाव के कारण इन देशों से ईरान को पैसे अब तक नहीं मिल पाए हैं. परमाणु समझौते के तहत अब ईरान को पैसे मिलने की उम्मीद है.

दक्षिण कोरिया के पास ईरान का 6 अरब डॉलर फंसा हुआ है. ईरान ने सियोल को तेल बेचा था, लेकिन बाद में ये पैसे उसे नहीं मिले थे. इसी तरह 2023 में बाइडेन प्रशासन ने 5 कैदियों की रिहाई के बदले कतर के माध्यम से ईरान को 6 अरब डॉलर की राशि देने की बात कही थी. ये पैसे अभी कतर के पास है.

इसके अलावा ईरान के पैसे तुर्की और अमेरिका के पास जब्त है. ब्रिटेन के पास भी ईरान की कुछ जब्त संपत्ति है. ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का एक बंगला ब्रिटेन में है.वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय बैंकों में भी ईरान के पैसे फ्रीज किए गए हैं. ईरान का कहना है कि यह अमेरिका के आदेश पर किया गया है. उसके अधिकांश पैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकों में ही फ्रीज किए गए हैं.

2015 में ओबामा प्रशासन ने समझौते के बाद 50 अरब डॉलर की राशि अनफ्रीज करने की घोषणा की थी. हालांकि, बाद में ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को ही रद्द कर दिया था.

ईरान-अमेरिका समझौते में क्या है?
सीएनएन के मुताबिक ईरान और अमेरिका दोनों परमाणु को लेकर अंतरिम समझौता करने जा रहा है. इसके तहत ईरान होर्मुज जलमडमरूमध्य को पूरी तरह खोलेगा. साथ ही किसी भी पड़ोसी देशों पर ईरान कोई हमला नहीं करेगा. इसके अलावा ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को खत्म करने के लिए विकल्पों पर अमेरिका के साथ बातचीत करेगा.

बदले में अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा. लेबनान पर भी हमला नहीं होगा. साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों में ईरान को छूट दी जाएगी. ईरान की चाहत है कि उसके 120 अरब डॉलर में से 24 अरब डॉलर लौटा दिए जाए.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में लिखा- जब तक ईरान न्यूक्लियर डस्ट को खत्म नहीं करता, तब तक उसे डॉलर नहीं मिलेगा. वहीं ईरान की कोशिश राहत एवं बचाव अभियान के नाम पर पैसे लेने की है.

BUSINESS : पिछले 6 महीने में सोना 20% और चांदी 43% सस्ती:सेंसेक्स 11% और निफ्टी 8.6% गिरा; ईरान जंग और डॉलर की मजबूती का असर

साल के पहले छह महीने निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान 29 जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 20% और चांदी 43% तक सस्ती हो गई।

वहीं, सेंसेक्स में 11% और निफ्टी में 8.6% की गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें कम न करने के संकेत से सोने-चांदी पर दबाव बना। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान जंग से शेयर मार्केट दबाव में रहा।

सोने और सेंसेक्स में गिरावट के 2 कारण…

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख के बाद निवेशकों को ब्याज दरों में जल्द राहत की उम्मीद कम हो गई। इसका असर सोने की मांग पर पड़ा।
ईरान जंग से तनाव के कारण ग्लोबल ग्रोथ और बढ़ती महंगाई के कारण शेयर मार्केट का सेंटिमेंट कमजोर हुआ।

अगले 6 महीने में सोने में 12% तेजी संभव, स्माल कैप और मिडकैप फायदेमंद रहेंगे

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि शॉर्ट टर्म में ETF से निकासी और उतार-चढ़ाव की वजह से सोने में 2% से 5% तक और गिरावट आ सकती है। हालांकि, साल के अंत तक इसमें 12% से 15% की तेजी आने की उम्मीद है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च प्रा. लि. के संस्थापक जी. चोकालिंगम का कहना है कि अगले छह महीनों में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर, सेंसेक्स और निफ्टी जैसे लार्जकैप शेयरों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

एसबीआई सिक्युरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी अभी कंसोलिडेशन में है। 23,730–23,700 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट होगा।

विदेशी निवेशकों को लौटने में वक्त लगेगा

आकर्षक वैल्यूएशन और रिकवरी की गुंजाइश: स्मॉलकैप सेगमेंट में अभी भी कई ऐसे शेयर हैं जो सितंबर 2024 के अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे हैं और बेहतर वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, इस सेगमेंट में यूनिक बिजनेस मॉडल, अधिग्रहण के मौके और बेहतरीन वैल्यू मौजूद है।
FIIs की वापसी में वक्त लगेगा: विदेशी संस्थागत निवेशकों को बाजार में पूरी तरह लौटने में अभी 1 से 2 तिमाही का समय लग सकता है। वे रुपए की विनिमय दर में स्थिरता आने का इंतजार करेंगे।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।

असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है।

आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है।

स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है।

क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है।

सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 5,097 रुपए गिरकर 1.40 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 20 जून को 1.45 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.32 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.17 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 15,432 रुपए कम हुई।

NATIONAL : ‘दूसरी शादी करनी थी तो कर लेती…’, पंजाब के रोपड़ में मां ने 3 मासूमों को नहर में फेंका, सास का छलका दर्द

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पंजाब के रूपनगर (रोपड़) में एक महिला ने अपने तीन मासूम बच्चों को नहर में फेंकने के बाद खुद भी छलांग लगा दी. घटना में तीनों बच्चों की मौत हो गई, जिनमें से दो के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि तीसरे की तलाश जारी है. पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है.
‘दूसरी शादी करनी थी तो कर लेती…’, पंजाब के रोपड़ में मां ने 3 मासूमों को नहर में फेंका, सास का छलका दर्द

पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक महिला ने अपने तीन मासूम बच्चों को नहर में फेंकने के बाद खुद भी छलांग लगा दी. इस दर्दनाक घटना में तीनों बच्चों की मौत हो गई. अब तक दो बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीसरे बच्चे की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है. घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है.

पहले बच्चों को नहर में फेंका, फिर खुद लगाई छलांग
जानकारी के मुताबिक, मृतका की पहचान शकुंतला उर्फ सुमन के रूप में हुई है. बताया जा रहा कि उसने अपने तीन बच्चों- तपिश (10), तनवी (7) और नितिन (4) को एक-एक कर रोपड़ नहर में फेंक दिया. इसके बाद उसने खुद भी नहर में छलांग लगा दी. सूचना मिलते ही पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची. राहत एवं बचाव अभियान के दौरान दो बच्चों के शव बरामद कर लिए गए, जबकि तीसरे बच्चे की तलाश जारी है. दो बच्चों का अंतिम संस्कार मोहाली में कर दिया गया.

‘दूसरी शादी करनी थी तो कर लेती, बच्चों को क्यों मारा?’
घटना के बाद मृतका की सास का दर्द छलक पड़ा. रोते-बिलखते हुए उन्होंने कहा कि करीब 10 महीने पहले उनके बेटे की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुमन अपने बच्चों के साथ ससुराल में ही रह रही थी. सास के मुताबिक, सुमन अक्सर दूसरी शादी की बात करती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उसके पास दो मोबाइल फोन थे और वह किससे बात करती थी, इसकी जानकारी परिवार को नहीं थी. सास ने भावुक होकर कहा, “अगर उसे दूसरी शादी करनी थी तो कर लेती, लेकिन मेरे मासूम पोते-पोतियों को क्यों मार डाला? उनका क्या कसूर था?”

हर एंगल से जांच में जुटी पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. मटौर थाना के एसएचओ अमनदीप सिंह ने बताया कि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है. प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि महिला मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रही थी. हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और सभी तथ्यों की गहन जांच की जा रही है.

परिजनों की शिकायत के आधार पर होगी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है. यदि परिजनों की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दी जाती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, नहर के आसपास पुलिस और प्रशासन की टीमें तैनात हैं और लापता बच्चे की तलाश लगातार जारी है.

इलाके में शोक का माहौल
इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है. एक साथ तीन मासूम बच्चों की मौत और मां के इस खौफनाक कदम ने हर किसी को झकझोर दिया है. फिलहाल पुलिस घटना के पीछे की वास्तविक वजह जानने के लिए परिवार, रिश्तेदारों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है. जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी.

NATIONAL : राम मंदिर में चंदा चोरी पर भड़की करणी सेना, पूछा- कब चलेगा बुलडोजर? 50 सीटों पर यूपी चुनाव लड़ने का एलान

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अयोध्या में स्थित राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर में अपनी श्रद्धा से दान में रुपये, पैसे और बहुमूल्य वस्तुएं दी जाती हैं। अब राम मंदिर में दिए गए दान की धनराशि को चोरी करने का मामला उजागर हुआ है, इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

करणी सेना इस मामले में चुप नहीं बैठेगी, हमारा सवाल है कि अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं की गई है, चंदा चोरी करने वालों के घर बुलडोजर कब चलाया जाएगा। यह बातें करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने मंगलवार को आरडीसी में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी।

इसके बाद कविनगर थाने में करणी सेना की ओर से चंदा चोरी प्रकरण में एफआइआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है, तहरीर में राम मंदिर निर्माण समिति और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं।

सूरजपाल अम्मू ने कहा कि राम मंदिर में चंदा चोरी कब से हो रही है, यह कौन बताएगा। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से वीडियो डिलीट करने का मामला भी सामने आया है, इससे साफ पता चलता है कि मंदिर के अंदर से चंदा चोरी कर करोड़ों लाेगों की आस्था को चोट पहुंचाने का कार्य किया गया है।

इससे ट्रस्ट के पदाधिकारी सवालों के घेरे में है, ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद भी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह पूर्व में भाजपा के प्रवक्ता रह चुके हैं लेकिन वर्तमान में सरकार द्वारा तानाशाही की जा रही है। जनता को डराया जा रहा है लेकिन डर की राजनीति अब और नहीं चलेगी।

चंदा चोरी प्रकरण में एफआईआर की मांग
इसलिए करणी सेना ने चंदा चोरी प्रकरण में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। करणी सेना ने 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के 40 जिलों में 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।

इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है, प्रत्याशी के चयन के लिए 11 सदस्यीय कोर कमेटी गठित की गई है। सभी वर्ग के लोगों को टिकट दिया जाएगा, यदि कोई राष्ट्रवादी मुस्लिम व्यक्ति भी टिकट के लिए आवेदन करेगा तो करणी सेना उसको भी टिकट देगी।

NATIONAL : राम मंदिर में चंदा चोरी पर भड़की करणी सेना, पूछा- कब चलेगा बुलडोजर? 50 सीटों पर यूपी चुनाव लड़ने का एलान

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अयोध्या में स्थित राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर में अपनी श्रद्धा से दान में रुपये, पैसे और बहुमूल्य वस्तुएं दी जाती हैं। अब राम मंदिर में दिए गए दान की धनराशि को चोरी करने का मामला उजागर हुआ है, इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

करणी सेना इस मामले में चुप नहीं बैठेगी, हमारा सवाल है कि अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं की गई है, चंदा चोरी करने वालों के घर बुलडोजर कब चलाया जाएगा। यह बातें करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने मंगलवार को आरडीसी में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी।

इसके बाद कविनगर थाने में करणी सेना की ओर से चंदा चोरी प्रकरण में एफआइआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है, तहरीर में राम मंदिर निर्माण समिति और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं।


सूरजपाल अम्मू ने कहा कि राम मंदिर में चंदा चोरी कब से हो रही है, यह कौन बताएगा। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से वीडियो डिलीट करने का मामला भी सामने आया है, इससे साफ पता चलता है कि मंदिर के अंदर से चंदा चोरी कर करोड़ों लाेगों की आस्था को चोट पहुंचाने का कार्य किया गया है।

इससे ट्रस्ट के पदाधिकारी सवालों के घेरे में है, ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद भी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह पूर्व में भाजपा के प्रवक्ता रह चुके हैं लेकिन वर्तमान में सरकार द्वारा तानाशाही की जा रही है। जनता को डराया जा रहा है लेकिन डर की राजनीति अब और नहीं चलेगी।

चंदा चोरी प्रकरण में एफआईआर की मांग
इसलिए करणी सेना ने चंदा चोरी प्रकरण में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। करणी सेना ने 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के 40 जिलों में 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।

इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है, प्रत्याशी के चयन के लिए 11 सदस्यीय कोर कमेटी गठित की गई है। सभी वर्ग के लोगों को टिकट दिया जाएगा, यदि कोई राष्ट्रवादी मुस्लिम व्यक्ति भी टिकट के लिए आवेदन करेगा तो करणी सेना उसको भी टिकट देगी।

NATIONAL : पहली बार भारत आ रहीं जापानी PM, बातचीत के लिए दिल्ली-अहमदाबाद की जगह गुवाहाटी को क्यों चुना गया?

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जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची अगले महीने भारत का दौरा कर सकती हैं. यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी. 50 बिजनेस लीडर भी उनके साथ होंगे. वह गुवाहाटी में पीएम मोदी के साथ सालाना समिट में शामिल होंगी. यह दौरा भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करेगा. मगर सवाल यह है कि बातचीत के लिए दिल्ली-अहमदाबाद की जगह गुवाहाटी क्यों?.

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के अगले महीने भारत आने की संभावना है. प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी. इस दौरान वह 1-3 जुलाई के बीच वह असम के गुवाहाटी का दौरा कर सकती हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ताकाइची 50 बिजनेस लीडर्स के साथ भारत का दौरा करेंगी. उनके साथ यात्रा करने वाले अधिकारियों में सुज़ुकी मोटर के प्रेसिडेंट तोशिहिरो सुजुकी भी शामिल होंगे. इस दौरे के दौरान तकाइची असम में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ सालाना समिट में शामिल होंगी. इस दौरान दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने और एक्ट ईस्ट नीति के तहत पूर्वोत्तर में निवेश पर चर्चा करेंगे. बता दें कि ताकाइची ने पिछले साल अक्टूबर में पीएम का पदभार संभाला था. इसके बाद यह उनकी भारत की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी.

बातचीत के लिए गुवाहाटी क्यों?
सूत्रों के मुताबिक, गुवाहाटी को वेन्यू के रूप में इसलिए चुना गया है क्योंकि जापान भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत नॉर्थ ईस्ट में परियोजनाओं पर काम कर रहा है. हालांकि, वैसे अगर देखा जाए तो आमतौर पर भारत आने वाले राष्ट्राध्यक्षों की मीटिंग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में या तो अहमदाबाद में होती है. मगर यह बैठक गुवाहाटी में होने जा रही है.बता दें कि पिछले हफ्ते G7 समिट के दौरान पीएम मोदी ने फ्रांस में अपने जापानी समकक्ष से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि ताकाइची के साथ उनकी शानदार बातचीत हुई. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान व्यापार और निवेश को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करना जारी रखेंगे.

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जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को दिसंबर 2019 में गुवाहाटी आना था. लेकिन उस समय सीएए और एनआरसी के खिलाफ हो विरोध प्रदर्शनों के चलते उनका यह दौरा रद्द हो गया था. बता दें कि शिंजो आबे को ताकाइची का गुरु माना जाता है. ताकाइची जब से जापान की प्रधानमंत्री बनी हैं, तब से पिछले 8 महीनों में उनकी और पीएम मोदी की कुछ बार मुलाकात हो चुकी है.

पिछले साल अक्टूबर में पीएम मोदी ने ताकाइची से बात की थी. दोनों नेता आर्थिक सुरक्षा, डिफेंस सहयोग और दोनों देशों के बीच टैलेंट के लेन-देन को बढ़ाने पर सहमत हुए थे. इसके बाद नवंबर में दक्षिण अफ्रीका में हुए जी-20 समिट के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी. ताकाइची जापान की एक कट्टरपंथी रूढ़िवादी नेता हैं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इशिबा की जगह ली.

सत्तारूढ़ LDP की हुई थी करारी हार
जुलाई में जापान के ऊपरी सदन के चुनावों में वहां की पुरानी सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की करारी हार हुई थी. इसके बाद पार्टी ने निचले सदन में भी अपना बहुमत खो दिया था. ताकाइची साल 1996 में एलडीपी पार्टी में शामिल हुईं. पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के कार्यकाल में वे पहली बार कैबिनेट मंत्री बनीं. इससे पहले वो ओकिनावा और नॉर्थ रीजन मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं.

PM के रूप में कितने साल का कार्यकाल
ताकाइची एलडीपी पार्टी की नीति अनुसंधान परिषद (पॉलिसी रिसर्च काउंसिल) का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं. इसके अलावा वे जापान की आंतरिक मामलों की मंत्री (होम मिनिस्टर) के रूप में सबसे लंबे समय तक काम करने वाली नेता भी हैं. 2022 से 2024 तक ताकाइची जापान की आर्थिक सुरक्षा मंत्री रहीं. पीएम के रूप में उनका कार्यकाल केवल उतने ही समय का होगा, जितना पूर्व प्रधानमंत्री इशिबा के तीन साल के कार्यकाल में से बचा हुआ था. अगस्त 2025 में पीएम मोदी ने जापान का दौरा किया था.

इस दौरान उन्होंने तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री इशिबा से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा संबंधों और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए 10 साल के रोडमैप सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे. भारत को उम्मीद है कि जापान की नई पीएम ताकाइची भी इन वादों और समझौतों को जारी रखेंगी. भारत चाहता है कि नई पीएम भी आबे की पुरानी नीतियों पर चलें.

NATIONAL : ‘हाथ में बाज’… भारतीय सेना की ड्रोन क्रांति, हर इन्फेंट्री बटालियन में एक प्लाटून

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भारतीय सेना ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम को तेजी से बढ़ा रही है. ‘हाथ में बाज’ अवधारणा हर सैनिक को ड्रोन चलाने में सक्षम बनाएगी. देहरादून, महू और चेन्नई में ड्रोन सेंटर शुरू हुए. सेना प्रमुख ने लिकाबाली में ड्रोन सुविधा देखी. हर बटालियन में ड्रोन प्लाटून और आर्टिलरी में काउंटर-ड्रोन सिस्टम होंगे. यह सेना को आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार करेगा.

भारतीय सेना ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम को तेजी से बढ़ा रही है. ड्रोन अब सेना का अहम हिस्सा बन रहे हैं. देहरादून के इंडियन मिलिट्री एकेडमी, महू के इन्फेंट्री स्कूल और चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में ड्रोन सेंटर शुरू हो चुके हैं. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अरुणाचल प्रदेश के लिकाबाली में एक ड्रोन सुविधा का दौरा किया. सेना का लक्ष्य हर सैनिक को ड्रोन चलाने में सक्षम बनाना है.

सेना ने ‘हाथ में बाज’ (Eagle in the Arm) की अवधारणा अपनाई है. इसका मतलब है कि जैसे हर सैनिक बंदूक रखता है, वैसे ही उसे ड्रोन चलाना आना चाहिए. ड्रोन युद्ध, निगरानी, सामान पहुंचाने या मेडिकल निकासी के लिए इस्तेमाल होंगे. हर सैनिक का काम अलग हो सकता है, लेकिन ड्रोन उनकी ताकत बढ़ाएंगे. साथ ही, दुश्मन के ड्रोन रोकने के लिए काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी तैयार किए जा रहे हैं.

सेना ने ड्रोन को हर सैनिक की जरूरत बनाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं. देहरादून, महू और चेन्नई जैसे प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में ड्रोन सेंटर बनाए गए हैं. यहां सैनिकों को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. लिकाबाली में सेना प्रमुख ने एक ड्रोन सुविधा देखी, जो दिखाता है कि सेना ड्रोन क्षमता को कितनी गंभीरता से ले रही है.

26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस पर द्रास में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ड्रोन क्रांति की बात की. उन्होंने कहा था कि हर इन्फेंट्री बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून होगी.

आर्टिलरी रेजिमेंट्स को काउंटर-ड्रोन सिस्टम और लॉइटर म्यूनिशन्स (हवा में रुकने वाले हथियार) मिलेंगे.
‘दिव्यास्त्र’ बैटरी बनाई जाएंगी, जो सटीकता और सुरक्षा बढ़ाएंगी.
उन्होंने कहा था कि हमारी मारक क्षमता अब कई गुना बढ़ जाएगी. यह दिखाता है कि सेना आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार हो रही है.

ड्रोन का इस्तेमाल: सैनिक ड्रोन से निगरानी, हमला, सामान ढोना और मेडिकल मदद जैसे काम करेंगे. इससे सैनिकों की नजर, पहुंच और ताकत बढ़ेगी.
काउंटर-ड्रोन सिस्टम: दुश्मन के ड्रोन को रोकने के लिए सिस्टम बनाए जा रहे हैं. यह एक लेयर्ड रक्षा होगी, जो ड्रोन के खतरे को खत्म करेगी.
ड्रोन अब युद्ध के मैदान का जरूरी हिस्सा हैं. पहले ये खास मौकों पर इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब हर सैनिक की जरूरत बन रहे हैं.

क्यों जरूरी है ड्रोन क्रांति?
आधुनिक युद्ध बदल रहा है. ड्रोन सस्ते, तेज और प्रभावी हैं. ये दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं, सटीक हमले कर सकते हैं. सैनिकों की जान बचा सकते हैं. भारत जैसे देश, जिसकी सीमाएं चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से जुड़ी हैं के लिए ड्रोन बहुत जरूरी हैं. 2025 में लद्दाख और अरुणाचल में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है. काउंटर-ड्रोन सिस्टम दुश्मन के ड्रोन को नाकाम करेंगे.

सेना ड्रोन को अपने ढांचे में शामिल कर रही है. ड्रोन प्लाटून, आर्टिलरी में लॉइटर म्यूनिशन्स और दिव्यास्त्र बैटरी से सटीक हमले और रक्षा मजबूत होगी. ड्रोन सेंटर सैनिकों को ट्रेनिंग दे रहे हैं, ताकि हर सैनिक ड्रोन विशेषज्ञ बने.

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