Sunday, May 3, 2026
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NATIONAL :दिल्ली की लोअर कोर्ट के जज ने सुसाइड किया:पत्नी के दुपट्‌टे से फांसी लगाई; मरने से पहले पिता से कहा था- जीना मुश्किल हो गया है

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दिल्ली में कड़कड़डूमा लोअर कोर्ट में तैनात एक न्यायिक अधिकारी अमन कुमार शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस और मीडिया को दिए बयान में उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने पत्नी के दुपट्‌टे से फांसी लगाकर आत्महत्या की है।30 साल के अमन नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के कड़कड़डूमा कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) के फुल-टाइम सेक्रेटरी के रूप में काम करते थे। अमन ने 19 जून 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा जॉइन की थी।

उनकी पत्नी स्वाति भी एक न्यायिक अधिकारी है। रिश्तेदार का दावा है कि मरने से पहले पति-पत्नी के बीच जमकर झगड़ा हुआ था। अमन की पत्नी ने बीच-बचाव करने आए ससुर को भी पुलिस की धमकी दी थी।मौत से एक दिन पहले अमन ने अपने पिता से फोन पर कहा था कि वे बहुत परेशान हैं और उनका जीना मुश्किल हो गया है। इसके बाद उन्होंने जपनी जान दे दी। दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

जज अमन कुमार शर्मा के एक रिश्तेदार के मुताबिक शुक्रवार की रात करीब 10 बजे अमन ने अपने पिता को कॉल किया था। उसने पिता से कहा कि वह बहुत परेशान है। इसके बाद पिता अलवर से दिल्ली रवाना हुए और रात करीब 12 बजे अमन के पास पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि अमन का पत्नी से झगड़ा चल रहा था।

अमन की पत्नी भी ज्यूडिशियल अधिकारी है। पिता को देखकर उसने धमकी देते हुए कहा कि वे कमरे से बाहर नहीं गए तो वह पुलिस बुला लेगी। शनिवार सुबह दोनों में फिर झगड़ा हुआ तो पिता दूसरे कमरे में चले गए।कुछ देर बाद शोर बंद हुआ। अमन नहीं दिखा तो उन्होंने बेटे को कॉल किया। फोन बाथरूम के अंदर बजा। दरवाजा नहीं खुला। बाद में गार्ड शंकर खिड़की तोड़कर अंदर गया, जहां अमन फंदे से लटका मिला।

ऑफिशियल रिकॉर्ड के मुताबिक शर्मा 19 जून 2021 को दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज में शामिल हुए थे। सेवा के दौरान वे जेएमएफसी और सिविल जज के रूप में मामलों की सुनवाई कर चुके थे। पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से लॉ ग्रेजुएट शर्मा अक्टूबर 2025 से नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के कड़कड़डूमा कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) के फुल-टाइम सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे हैं।

NATIONAL : सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को लेकर चुनाव आयोग का समर्थन किया।

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सर्वोच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की चुनौती को खारिज करते हुए पश्चिम बंगाल में मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों की नियुक्ति के चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय ने कहा कि ऐसी नियुक्तियां चुनाव आयोग के विवेकाधिकार के अंतर्गत आती हैं और नियमों के विरुद्ध नहीं हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि पार्टी के प्रतिनिधि और राज्य के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। यह फैसला 4 मई को होने वाली मतगणना के लिए चुनाव आयोग के 13 अप्रैल के परिपत्र को बरकरार रखता है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को पक्षपात और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के विवेकाधिकार की पुष्टि की

टीएमसी के पूर्वाग्रह और निष्पक्षता पर तर्क

चुनाव आयोग की पारदर्शिता प्रतिज्ञा और प्रक्रिया संबंधी विवरण

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने फैसला सुनाया कि केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करना चुनाव आयोग के विशेषाधिकार के अंतर्गत आता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी नियुक्तियाँ नियमों के विरुद्ध नहीं हैं, भले ही सभी कर्मचारी एक ही समूह से हों, और मतगणना के दौरान पार्टी द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि और राज्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। यह कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा टीएमसी की याचिका को पहले खारिज किए जाने के फैसले के अनुरूप है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग के अधिकार को सुदृढ़ करता है।

“इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह केंद्र सरकार द्वारा नामित व्यक्ति है या नहीं। यह चुनाव आयोग की व्यक्तिगत संतुष्टि पर निर्भर करता है। आपके मतगणना एजेंट वहां मौजूद रहेंगे, और अन्य भी। फिर, एक मतगणना सहायक, एक मतगणना पर्यवेक्षक और एक सूक्ष्म पर्यवेक्षक हैं, जो केंद्र सरकार के अधिकारी हैं। हम यह नहीं कह सकते कि यह अधिसूचना नियमों के विपरीत है क्योंकि इनमें से एक केंद्र सरकार का अधिकारी है। फिर भी, अन्य लोग केंद्र सरकार के अधिकारी नहीं हैं, इसलिए वे केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हो सकते। पूरी तरह से एक ही समूह से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता।”

तृणमूल कांग्रेस ने तर्क दिया कि इस निर्देश से केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित कर्मियों की उपस्थिति में अनुचित वृद्धि हुई है, जिससे केंद्र में भाजपा के नियंत्रण को देखते हुए पक्षपात की आशंका पैदा होती है। उसने दावा किया कि यह बदलाव केवल बंगाल के लिए चुनिंदा है और इसमें स्पष्ट तर्क का अभाव है, जिससे निष्पक्षता और समान अवसर का उल्लंघन होता है। हालांकि, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने पाया कि सबूत के बिना मात्र आशंका हस्तक्षेप को उचित नहीं ठहरा सकती, खासकर जब सूक्ष्म पर्यवेक्षकों और पार्टी एजेंटों जैसे सुरक्षा उपाय मौजूद हों।

चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया कि 13 अप्रैल को जारी किया गया उसका परिपत्र, जिसमें केंद्रीय और राज्य स्तर के कर्मियों के मिश्रण को अनिवार्य किया गया है, अक्षरशः लागू किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के कर्मचारी होने के नाते, मतगणना अधिकारियों का सर्वोपरि नियंत्रण होगा और सभी दलों के मतगणना एजेंट उपस्थित रहेंगे। वरिष्ठ वकील डी.एस. नायडू ने इस प्रक्रिया को मतगणना प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप बताया।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार करने के बाद, 4 मई को होने वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा की मतगणना के लिए चुनाव आयोग के दिशानिर्देश लागू रहेंगे। टीएमसी की आपत्तियों के बावजूद, परिपत्र के अनुसार केंद्रीय सरकार के मतगणना कर्मचारी और राज्य के नामित प्रतिनिधि अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे। यह फैसला दक्षिण 24 परगना के 15 मतदान केंद्रों पर कथित ईवीएम छेड़छाड़ को लेकर पुनर्मतदान और टीएमसी द्वारा स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर की जा रही कड़ी निगरानी सहित बढ़े राजनीतिक तनाव के बीच आया है।

PUNJAB : शंभू रेल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड ‘बाबा बेअंत’ गिरफ्तार, 3 आतंकी घटनाएं सुलझीं

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पंजाब पुलिस को शंभू रेलवे ट्रैक ब्लास्ट केस में एक बड़ी कामयाबी मिली है। SSOC अमृतसर, पटियाला पुलिस और CI पठानकोट ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान मुख्य साजिशकर्ता जगरूप सिंह के करीबी गुरजिंदर सिंह उर्फ ​​बाबा बेअंत को गिरफ्तार किया है, जो गुरदासपुर के धारीवाल का रहने वाला है।

यह जानकारी शेयर करते हुए पंजाब के DGP गौरव यादव ने कहा कि शुरुआती जांच के मुताबिक, शंभू ब्लास्ट के साथ-साथ सरहिंद रेलवे ट्रैक ब्लास्ट और मोगा में CIA ऑफिस पर ग्रेनेड हमले में भी गुरजिंदर सिंह का रोल सामने आया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि, ये सभी घटनाएं विदेशी हैंडलर्स के कहने पर की गई हैं। पुलिस के मुताबिक, इस गिरफ्तारी और पहले हुई बरामदगी के साथ ही मोगा, सरहिंद और शंभू में हुई तीनों आतंकी घटनाएं सफलतापूर्वक सुलझ गई हैं।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस आतंकी नेटवर्क को खत्म करने और पूरे राज्य में शांति, सेफ्टी और सिक्योरिटी पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बताया जा रहा है कि, इस गिरफ्तारी से 3 आतंकी घटनाएं सुलझ गई हैं, जिनमें 27 अप्रैल को शंभू रेलवे ट्रैक ब्लास्ट, 23 जनवरी को सरहिंद रेलवे ट्रैक ब्लास्ट और 7 नवंबर 2025 को मोगा CIA पर ग्रेनेड हमला शामिल हैं।

WORLD : अमेरिका के साथ फिर छिड़ सकती है जंग, ट्रंप के बयान पर ईरान ने दी ‘महायुद्ध’ की चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बरकरार हैं। इस बीच ट्रंप ने ईरान को युद्ध की धमकी दी है। ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ जंग कभी भी छिड़ सकती है। ईरान ने अमेरिका को जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।

तेहरान: ईरान की सेना ने आशंका जताई है कि उनके देश के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले फिर शुरू हो सकते हैं। सेना ने यह भी कहा है कि “सबूत दिखाते हैं कि अमेरिका किसी भी समझौते या संधि के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है।” यह बयान तब आया है, जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार के लिए बैठक की है। ट्रंप ने पहले भी कई बार ईरान को चेतावनी देते हुए युद्धविराम जारी रखने और होर्मुज जलडमरूदध्य को खोलने को कहा है। हालांकि, ईरान होर्मुज को खोलने को तैयार नहीं है।

ईरानी सैन्य मुख्यालय के उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर असादी ने ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कहा, “अमेरिकी अधिकारियों के कार्य और बयान मुख्य रूप से मीडिया-प्रेरित हैं, जिनका पहला उद्देश्य तेल की कीमतों में गिरावट को रोकना और दूसरा, उस गड़बड़ी से खुद को बाहर निकालना है जो उन्होंने खुद पैदा की है।” उन्होंने आगे कहा, “सशस्त्र बल अमेरिकियों की किसी भी नई हिमाकत या मूर्खता का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।”

ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान किए गए हमलों में बचे बमों में विस्फोट हो जाने पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजी) के 14 सदस्य मारे गए। ईरान की मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के करीबी माने जाने वाली वेबसाइट ‘नूरन्यूज’ की खबर के अनुसार, यह विस्फोट तेहरान के उत्तर-पश्चिम में स्थित जंजन शहर के पास हुआ। सात अप्रैल को युद्धविराम शुरू होने के बाद से यह आईआरजी के सदस्यों की सबसे बड़ी संख्या में मौत का मामला है। खबर में कहा गया है कि युद्ध के दौरान गोला-बारूद समेत क्लस्टर बम गिराए गए थे।

ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा प्रस्तावों से वे ‘खुश नहीं हैं’, साथ ही यह भी कहा कि कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले हैं।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, जब वे मरीन वन से रवाना हो रहे थे, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं, तो देखते हैं आगे क्या होता है।” उन्होंने ईरान के नेतृत्व को बंटा हुआ और असमंजस में बताया।
ट्रंप ने कहा क‍ि वे सब समझौता करना चाहते हैं, लेकिन सब कुछ अस्त-व्यस्त है, और जोड़ते हुए कहा कि नेतृत्व ‘बहुत बिखरा हुआ’ है और अंदर ही अंदर मतभेद हैं।

प का कहना था कि ईरान के अंदर की ये खींचतान उसकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि वहां के नेता ‘एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं’ और ‘उन्हें खुद नहीं पता कि असली नेता कौन है’, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना काफी कमजोर हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार हाल के संघर्ष के बाद देश के पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, और रक्षा क्षमता भी सीमित रह गई है।

ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा क‍ि या तो तनाव बढ़ेगा या फिर समझौता होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य कदमों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार ऐसी मंजूरी पहले कभी नहीं ली गई और कई लोग इसे पूरी तरह असंवैधानिक मानते हैं।

WORLD : टूटने की कगार पर पाकिस्तान: बलूचिस्तान बनने जा रहा स्वतंत्र देश ! डर कर चीनी कंपनी ने समेटा बोरिया बिस्तर

पूर्व रॉ एजेंट Lucky Bisht के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने दावा किया कि Balochistan अब स्वतंत्र राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ चुका है और पाकिस्तान का वहां से नियंत्रण कमजोर हो गया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि Baloch Liberation Army ने 10 दिनों में 27 हमले किए, जिनमें 45 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। साथ ही कहा गया कि पाकिस्तानी सेना इतनी कमजोर हो चुकी है कि नियमित गश्त करने से भी डर रही है। लकी बिष्ट जो एक पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी, एनएसजी कमांडो और सुरक्षा विशेषज्ञ हैं, ने दावा किया कि US State Department ने लाहौर से अपने कर्मियों को हटा लिया है और ब्रिटेन ने पूरे बलूचिस्तान को “नो-गो ज़ोन” घोषित कर दिया।

ग्राउंड इंटेल रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान के 45 से ज्यादा सोल्जर मारे गए हैं और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना अब बलूचिस्तान में पेट्रोलिंग करने…

उन्होंने कहा कि CIA और MI6 की कथित रिपोर्ट ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि Baloch Liberation Army ने हाल के दिनों में कई हमले किए और पाकिस्तानी सेना पर भारी दबाव है। उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान-पाकिस्तान विवाद नया नहीं, बल्कि 7 दशक से चला आ रहा एक लंबा संघर्ष है।पिछले दशकों में कई बार विद्रोह हुए, जिनमें Baloch Liberation Army (BLA) जैसे संगठनों ने पाकिस्तानी सेना और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने इसे सुरक्षा और आतंकवाद का मुद्दा बताते हुए सैन्य कार्रवाई की।

यह संघर्ष तब और जटिल हो गया जब चीन ने China Pakistan Economic Corridor के तहत बलूचिस्तान में भारी निवेश किया। खासकर ग्वादर पोर्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और उग्रवादी हमलों के कारण कई बार चीनी परियोजनाएं भी निशाने पर आई हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। बलूचिस्तान में पाकिस्तान का कंट्रोल कम होने कारण ग्वादर में काम कर रही चीनी कंपनी Han Geng Trade Company ने पाकिस्तान में अपना प्लांट बंद करने का फैसला किया है। दावा है कि कंपनी ने बलूचिस्तान में बढ़ते संघर्ष को देखते हुए बोरिया बिस्तर समेट लिया है । कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह अब सामान्य तरीके से काम जारी नहीं रख सकती। हालांकि कंपनी के अनुसार, उसने सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों का पालन किया, लेकिन इसके बावजूद उसे जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं मिली और उसका निर्यात बार-बार रुकता रहा। इससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

कंपनी ने यह भी बताया कि पिछले कुछ महीनों में उसे वेतन, बिजली, जुर्माना और अन्य खर्चों का बोझ उठाना पड़ा, जिससे स्थिति और खराब हो गई। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि नीतियों और सिस्टम से जुड़ी है।ग्वादर, जो कि China Pakistan Economic Corridor का अहम हिस्सा है, वहां से इस तरह का कदम उठना निवेश माहौल के लिए चिंता की बात मानी जा रही है। कंपनी ने साफ कहा कि निवेश के लिए स्थिर और स्पष्ट नीतियां जरूरी हैं। कंपनी ने अन्य निवेशकों को भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान में निवेश करने से पहले नीतिगत और प्रशासनिक जोखिमों को अच्छे से समझ लेना चाहिए। कंपनी ने अपने कर्मचारियों से माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने हर संभव कोशिश की, लेकिन हालात ऐसे हो गए कि काम जारी रखना संभव नहीं रहा।

1947 में पाकिस्तान बनने के समय बलूचिस्तान की स्थिति अलग थी। कुछ बलूच नेताओं का दावा था कि वे स्वतंत्र रहना चाहते थे लेकिन1948 में पाकिस्तान ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। यहीं से असंतोष और विद्रोह की शुरुआत हुई। बलूचिस्तान में कई बार सशस्त्र विद्रोह हुए ।

1948 – पहला विरोध
1958-59 – सैन्य कार्रवाई
1973-77 – बड़ा विद्रोह, हजारों लोग मारे गए
2000 के बाद – आधुनिक उग्रवाद और आतंकी हमले

संघर्ष के मुख्य कारण
बलूचिस्तान–पाकिस्तान संघर्ष एक जटिल मुद्दा है, जिसमें संसाधनों के बंटवारे, राजनीतिक अधिकारों की कमी और सैन्य कार्रवाई प्रमुख कारण हैं। अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं, जबकि पाकिस्तान इसे सुरक्षा चुनौती मानता है। चीन की मौजूदगी ने इस संघर्ष को और संवेदनशील बना दिया है। Balochistan पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो प्राकृतिक संसाधनों (गैस, सोना, तांबा) से भरपूर है। इसके बावजूद यह क्षेत्र विकास के मामले में सबसे पिछड़ा माना जाता है। बलूच समुदाय का आरोप है कि उनके प्राकृतिक संसाधनों गैस, सोना और खनिज का फायदा उन्हें नहीं मिल रहा और राजनीतिक अधिकार भी सीमित हैं।स्था नीय लोगों का आरोप है कि वे गरीबी की दलदल में धंसते जा रहे हैं जबकि इनका फायदा पंजाब और केंद्र सरकार ले रही है। बलूच नेताओं का कहना है कि उन्हें सत्ता में बराबर हिस्सेदारी नहीं मिलती। उन्होंने जबरन गायब किए जाने (missing persons) का मुद्दा भी उठाया और सैन्य ऑपरेशन और दमन के आरोप लगाए

WORLD: चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट को PAK में लगा झटका, घाटे में डूबी कंपनी तो जड़ा ताला; निकाले सारे कर्मचारी

पाकिस्तान के ग्वादर फ्री जोन में चीनी कंपनी ने भारी नुकसान और खराब कारोबारी माहौल का हवाला देते हुए अपना प्लांट बंद कर दिया है और कर्मचारियों को निकाल दिया है। यह कदम चीन-पाकिस्तान आर्थिक संबंधों पर सवाल खड़े करता है।

पाकिस्तान के ग्वादर फ्री जोन में काम कर रही एक चीनी कंपनी ने अपना फैक्ट्री संचालन बंद कर दिया है और सभी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। कंपनी ने इसके पीछे लगातार बढ़ते नुकसान और खराब कारोबारी माहौल को मुख्य कारण बताया है।

कंपनी ने दावा किया कि उसने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उत्पादन और निर्यात तो किया, लेकिन उसकी खेप (शिपमेंट) लगातार अटकी रही। इससे व्यापार को भारी नुकसान हुआ। कंपनी के अनुसार, पिछले तीन महीनों से वह संबंधित अधिकारियों के संपर्क में थी, ताकि समस्या का समाधान निकाला जा सके, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

सभी बकाया भुगतान निपटाए, कर्मचारियों को राहत देने का दावा
फैक्ट्री बंद करने से पहले कंपनी ने दावा किया कि उसने अपने सभी वित्तीय दायित्व पूरे कर दिए हैं। इसमें शामिल हैं:-
तीन महीने का वेतन
जुर्माना भुगतान
बिजली बिल
कंटेनर डेमरेज चार्ज
हालांकि, कर्मचारियों की नौकरी जाने से स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की एक प्रमुख परियोजना है। कंपनी ने कहा कि उसका निवेश दोनों देशों के सहयोग की भावना से किया गया था, लेकिन स्पष्ट और स्थिर नीति वातावरण की कमी के कारण कारोबार जारी रखना मुश्किल हो गया। कंपनी ने यह भी कहा कि भविष्य के निवेशक ग्वादर जैसी परियोजनाओं में निवेश से पहले जोखिमों का सावधानीपूर्वक आकलन करें। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के चीन दौरे की तैयारी चल रही है। इस दौरे में व्यापार और निवेश पर चर्चा होनी है। ऐसे में इस फैसले ने विदेशी निवेश और CPEC परियोजनाओं की स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

SPORTS : 159 रन का बचाव नहीं कर पाई एमआई, चेन्नई ने कैसे पलटा मैच? कप्तान Ruturaj Gaikwad ने खोला राज

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आईपीएल 2026 के 44वें मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने मुंबई इंडियंस (MI) को एकतरफा अंदाज में 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। सीएसके के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने कप्तानी पारी खेली और युवा सनसनी कार्तिक शर्मा के पहले आईपीएल अर्धशतक के दम पर चेन्नई ने मुंबई के ‘विजय रथ’ को रोक दिया।

दरअसल, मैच में मुंबई इंडियंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन बनाए। चेन्नई के गेंदबाजों ने डेथ ओवर्स में जिस तरह वापसी की, उसने मैच का रुख वहीं मोड़ दिया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने शुरुआत से ही मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने एक बार फिर जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हुए नाबाद 67 रनों की शानदार पारी खेली। उनके साथ युवा बल्लेबाज कार्तिक शर्मा ने अपनी पहली आईपीएल फिफ्टी जड़ते हुए टीम को जीत की राह पर मजबूती से बनाए रखा।

दोनों के बीच हुई साझेदारी पर मुंबई के गेंदबाज कभी भी दबाव बना ही नहीं पाए। चेन्नई ने महज दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

मैच जीतने के बाद सीएसके के कप्तान गायकवाड़ (CSK Captain Ruturaj Gaikwad) ने प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीतने के बाद अपनी रणनीति पर खुलासा किया। उन्होंने कहा,

“मुंबई ने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन पावरप्ले के बाद हमारे गेंदबाजों ने शानदार वापसी की। हमें लगा कि लक्ष्य 20-30 रन कम है। मेरा काम बस अंत तक टिके रहना था।”

गायकवाड़ ने खास तौर पर युवा गेंदबाज कम्बोज और स्पिनर नूर की तारीफ की। ऋतुराज ने कहा, “तो जाहिर है अच्छा लग रहा है। देखिए, वो एक ऐसा खिलाड़ी है जो चीजों को बहुत सिंपल रखता है, अपनी प्रोसेस पर डटा रहता है, समझता है कि पिच कैसा खेल रही है। उसका दिमाग बिल्कुल एक बल्लेबाज की तरह चलता है। तो मुझे लगता है यही चीज उसे सबसे अलग बनाती है और नूर एक ऐसा खिलाड़ी है जिसे बस थोड़ी लय की जरूरत थी और ऐसी विकेट जहां वो अपना असर दिखा सके। तीसरे मैच से मुझे लगता है उसने कुछ बदलाव किए हैं और काफी अच्छा आया है। तो हमारे लिए आगे के लिए ये बहुत अच्छा संकेत है।”

प्लेइंग इलेवन में अकील हुसैन की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए, लेकिन कप्तान ने साफ किया कि ये पूरी तरह रणनीतिक फैसला था।उन्होंने कहा कि टीम को नंबर 8 पर ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी जो बल्लेबाजी में गहराई दे सके। इसी सोच के तहत युवा खिलाड़ियों वीर और घोष को मौका दिया गया, जिन्होंने अभ्यास मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया था।शर्मा की पारी पर सीएसके के कप्तान ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ ‘हिटर’ कहना गलत होगा। उन्होंने कहा,

वो सिर्फ बड़े शॉट नहीं लगाते, बल्कि सही गेंदबाज को चुनकर अटैक करते हैं। स्पिन और पेस, दोनों के खिलाफ उनका नियंत्रण शानदार है। जैसा मिस्टर क्रिकेट ने उस दिन कहा था कि वो ऐसा खिलाड़ी है जो एक बार लय में आ गया तो आने वाले सालों में हमें और भी बहुत कुछ देगा।

जीत के बाद गायकवाड़ भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपनी पत्नी, टीम मैनेजमेंट और फैंस का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, “हमसे गलतियां होंगी, लेकिन हम हर बार वापसी करेंगे। ये टीम इस जर्सी के लिए सब कुछ देने को तैयार है।”

बता दें कि इस जीत के साथ चेन्नई सुपर किंग्स ने न सिर्फ दो अहम अंक हासिल किए, बल्कि यह भी दिखा दिया कि चेपॉक में उन्हें हराना अभी भी आसान नहीं है।

NATIONAL : तिरुपति लड्डू विवाद:बिना जांच किए इस्तेमाल हुआ 70 लाख किलो घी; न सप्लायर्स को ब्लैक लिस्ट किया, न खरीद रोकी

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आंध्र प्रदेश में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के लड्डू प्रसाद के लिए घी खरीद में गंभीर अनियमितताओं और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एक सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 लाख किलो घी बिना अनिवार्य जांच के खरीदा गया और कई मामलों में लैब रिपोर्ट आने से पहले ही उसे प्रसाद में इस्तेमाल कर लिया गय.समिति ने बड़े स्तर पर प्रशासनिक विफलताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन, संभावित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि इन्हीं वजहों से मिलावटी घी की सप्लाई संभव हो सकी।

रिपोर्ट में पूर्व कार्यकारी अधिकारी एवी धर्मा रेड्डी को प्रमुख जिम्मेदार बताया गया है। समिति ने उन पर टेंडर नियमों को कमजोर करने, मिलावट की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई न करने, संदिग्ध सप्लायर्स को काम जारी रखने देने जैसे आरोप लगाए हैं।धर्मा रेड्डी पहले कह चुके हैं कि सभी फैसले खरीद समिति के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए। कॉन्ट्रैक्ट नियमों के मुताबिक दिए गए।

मिलावट के सबूत के बावजूद घी का इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अगस्त 2022 की लैब रिपोर्ट में सभी जांचे गए सैंपल में सिटोस्टेरॉल मिला। इसे वनस्पति तेल की मिलावट का संकेतक माना जाता है। इसके बावजूद रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई। सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया। खरीद प्रक्रिया बिना रोकटोक चलती रही।

खरीद व्यवस्था ने मिलावट को बढ़ावा दिया: खरीद का ढांचा ही मिलावट को बढ़ावा देने वाला था। असामान्य रूप से कम बोली स्वीकार की गई। कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आई कि शुद्ध घी की सप्लाई व्यावहारिक नहीं रह जाती। कई मामलों में नियमों के खिलाफ नीलामी के बाद अनौपचारिक बातचीत के जरिए कीमत घटाने की अनुमति दी गई।

अनिवार्य नियमों की अनदेखी: समिति ने कहा कि अनिवार्य फूड सेफ्टी नियमों की अनदेखी हुई। 1 जुलाई 2022 से β-सिटोस्टेरॉल की जांच अनिवार्य होने के बाद भी वाईएसआरसीपी कार्यकाल में टीटीडी ने इसे खरीद प्रक्रिया में लागू नहीं किया।काम कर रहा था नेटवर्क: संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसमें एक प्रमुख सप्लायर ने वनस्पति तेल, एडिटिव्स का इस्तेमाल कर मिलावटी घी बनाया। अयोग्य घोषित होने के बाद भी वह बीच की डेयरियों के जरिए सप्लाई जारी रखता रहा।

सख्त कार्रवाई, ब्लैकलिस्टिंग, सिस्टम में बदलाव की सिफारिश: समिति ने जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इसमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने टेंडर नियमों में कथित ढील को मंजूरी दी। वे भी शामिल हैं, जिन्होंने मिलावट की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं की।
टीटीडी के पूर्व चेयरमैन, खरीद समिति भी घेरे में: खरीद समिति की भूमिका भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट में पूर्व वाईएसआरसीपी विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, भुमना करुणाकर रेड्डी पर आरोप लगाए गए हैं। भुमना करुणाकर रेड्डी टीटीडी के पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं। समिति के अन्य सदस्यों के साथ इन लोगों ने ऐसे फैसलों में हिस्सा लिया, जिनसे टेंडर नियम कमजोर हुए, सुरक्षा उपाय ढीले पड़े।

क्या है मामला: आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि राज्य में 2019 से 2024 के बीच पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में लड्डू प्रसादम बनाने में मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ। वाईएसआरसीपी ने कहा है कि आरोप राजनीतिक मकसद से लगाए जा रहे हैं।

यह समिति फरवरी 2026 में बनाई गई थी। इसमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार शामिल हैं। समिति को टेंडर नियमों में कथित ढील की पहचान करने, घी में मिलावट के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करने, खरीद व्यवस्था में हुई चूक की जांच का काम सौंपा गया था।

NATIONAL : केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया।

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पार्टी सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता पर पूर्ण अविश्वास व्यक्त करते हुए दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष पेश न होने का फैसला किया है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता को लिखे पत्र में केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया कि वे स्वयं या वकील के माध्यम से उनके समक्ष उपस्थित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करने का निर्णय लिया है।

“न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता जी से न्याय मिलने की मेरी आशा टूट गई है। इसलिए, मैंने गांधीजी के सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का फैसला किया है। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर मैंने यह निर्णय लिया है,” केजरीवाल ने पत्र में कहा, जैसा कि आम आदमी पार्टी के सूत्रों ने बताया है।उन्होंने आगे कहा, “मैं उनके फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”

यह घटना दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आबकारी नीति मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता को हटाने की उनकी याचिका खारिज करने के बाद घटी है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने न्यायाधीश के बच्चों को केंद्र सरकार के वकील के रूप में नियुक्त किए जाने से हितों के टकराव का आरोप लगाया था और तर्क दिया था कि इससे पक्षपात की आशंका पैदा होती है।दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना कि आरोप अनुमान पर आधारित थे और पूर्वाग्रह की उचित आशंका के कानूनी मानक को पूरा करने में विफल रहे।

तीक्ष्ण टिप्पणियों के साथ शुरुआत करते हुए, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि “न्यायालय धारणाओं का रंगमंच नहीं बन सकता” और चेतावनी दी कि किसी शक्तिशाली राजनीतिक व्यक्ति को भी ठोस सबूत के बिना किसी मौजूदा न्यायाधीश पर आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि न्यायपालिका के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर भी निष्पक्षता का वही मानक लागू होता है और चेतावनी दी कि ऐसी दलीलों पर विचार करने से संस्थागत विश्वसनीयता को ठेस पहुंचेगी।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का मामला सबूतों के बजाय “संकेतों और आरोपों” पर आधारित था, और ऐसे तर्कों को स्वीकार करना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। न्यायालय ने टिप्पणी की कि किसी न्यायाधीश को केवल इसलिए मामले से हटने के लिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि वादी को प्रतिकूल परिणाम की आशंका है, और कहा कि “न्याय को धारणा के आधार पर नियंत्रित नहीं किया जा सकता।”

बाद में, अदालत ने अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष 13 अप्रैल की कार्यवाही से संबंधित सभी सोशल मीडिया लिंक को हटाने का भी निर्देश दिया।

NATIONAL : पिता है या हैवान! अपने दो बच्चों को कमरे में बंद कर आग लगाई, चीखें सुन दौड़े पड़ोसी

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छतरपुर : बच्चे सबसे ज्याादा भरोसा अपने माता-पिता पर ही करते हैं और अगर कोई पिता अपने ही बच्चों की वीभत्स तरीके से जान लेने पर उतारू हो जाए तो सिवाय धिक्कारने और थू-थू करने अलावा और क्या कहेंगे. ऐसी ही घटना घटी छतरपुर से 25 किलोमीटर दूर नौगांव थाना इलाके में. पिता ने ही अपने कलेजे के टुकड़ों के साथ पहले मारपीट की और जिंदा जलान का प्रयास किया.

नौगांव थाना इलाके के छतरपुर रोड स्थित धर्म कांटा के पास तिवारी मोहल्ले में राघवेंद्र तिवारी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता है. वह ड्राइवरी करता है. वह मूल रूप से टीकमगढ़ जिले के थाना पलेरा निवासी है. उसकी पत्नी शुक्रवार सुबह से अपने मायके चली गई. शाम को राघवेंद्र तिवारी ने अपने 8 साल के बेटा और 5 साल की बेटी से पहले मारपीट की. इसके बाद एक कमरे में बंद कर दिया और आग लगा दी. इसी दौरान पत्नी का पति के फोन पर कॉल आया. पत्नी ने बच्चों के बारे में पूछा. उसे बच्चों के रोने और चीखने की आवाजें सुनाई दी.

इसी बीच आसपास के लोगों ने मकान में आग लगी और धुआं उठता देखा और तुरंत मौके पर पहुंचकर दरवाजा खोला. पड़ोसियों ने अंदर जाकर देखा तो दोनों बच्चे घबराए हुए कमरे के एक कोने में लिपटे बैठे थे. पड़ोसी साग़र सिंह ने अपने दोस्त के साथ तत्काल आग पर काबू पाया और बच्चों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर किया. रेस्क्यू के दौरान बच्चों का पिता पत्थर से लेकर पड़ोसियों को डराता रहा. इससे डरे बगैर पड़ोसियों ने दोनों बच्चों को तुरंत नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू हो गया. घटना के बाद बच्चे इतने सहमे हुए हैं कि वे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे हैं.

सूचना मिलते ही नौगांव पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी पिता राघवेंद्र तिवारी को हिरासत में लेकर थाने ले गई. रेस्क्यू करने वाले पड़ोसी सागर सिंह ने बताया “जब वह अपने दोस्त के साथ निकला तो देखा कि एक मकान में आग लगी है. बच्चों के चीखने की आवाजें आ रही है. उसने पड़ोसियों की मदद से मकान में एंट्री की तो देखा कमरे में बच्चों के कपड़ों में आग लगी है. दोनों झुलस रहे थे.” नौगांव टीआई संजय राय का कहना है “युवक को हिरासत लिया गया. उससे पूछताछ की जा रही है.”

पूछताछ में पता चला है कि युवक बीते दिनों गुजरात से स्कूटी चलाकर नौगांव आया था. वह गुजरात में ड्राइवरी का काम करता है. उसकी मानसिक स्थिति खराब बताई जा रही है. पुलिस को पूछताछ में ये जानकारी भी मिली कि आरोपी कुछ दिनों से किसी तांत्रिक के संपर्क में था.

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