Crude Oil Price- भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली मामूली गिरावट भी देश के खजाने पर बड़ा सकारात्मक असर डालती है. भारत द्वारा आयातीत कच्चे तेल की औसत कीमत में कमी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल के दाम का रेट कम करने का मौका दे रही है.
नई दिल्ली. भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की औसत लागत कई वर्षों के अंतराल के बाद 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में अब तक भारतीय कच्चे तेल बास्केट’ (Indian Crude Oil Basket) का औसत रेट 59.92 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. फरवरी 2021 के बाद यह पहला मौका है जब तेल की कीमतें इस स्तर तक नीचे आई हैं. दिसंबर 2025 में यह औसत 62.2 डॉलर प्रति बैरल था. वैश्विक बाजार में आपूर्ति की अधिकता और मांग में नरमी के चलते यह गिरावट आगे भी जारी रह सकती है. कच्चे तेल के सस्ते होने से आने वाले समय में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत कम होने की संभावनाए बनती हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में आ रही इस कमी को केवल एक अस्थायी गिरावट के रूप में नहीं देखा जा रहा है. एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार के मौजूदा रुझान संकेत दे रहे हैं कि भारतीय बास्केट में अभी और नरमी आएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2026 तक कच्चे तेल की कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी नीचे जा सकती हैं. वहीं, कुछ बाजार जानकारों का कहना है कि मार्च 2026 तक ही कीमतें घटकर 53.31 डॉलर प्रति बैरल तक आने की प्रबल संभावना है. यदि ऐसा होता है तो तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ी कटौती कर सकती हैं.

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली मामूली गिरावट भी देश के खजाने पर बड़ा सकारात्मक असर डालती है. आंकड़ों के गणित को समझें तो कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल महज 1 डॉलर की गिरावट होने से भारत के वार्षिक तेल आयात खर्च में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है.
पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में भारत ने तेल आयात पर 161 अरब डॉलर खर्च किए थे. हालांकि, चालू वित्त वर्ष में रूस से मिलने वाली छूट और वैश्विक कीमतों में कमी के कारण नवंबर तक यह बिल घटकर 80.9 अरब डॉलर रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 92 अरब डॉलर था. यह बचत सरकार को राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) कम करने और बुनियादी ढांचे के विकास में अधिक निवेश करने की सुविधा प्रदान करती है.
क्यों गिर रही है कच्चे तेल की कीमत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण मांग के मुकाबले आपूर्ति का अधिक होना है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति, मांग से लगभग 38.5 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) अधिक होगी. यह अतिरिक्त आपूर्ति वैश्विक मांग का लगभग 4% है, जो कीमतों पर भारी दबाव बनाए रखेगी.
हालांकि, वर्तमान में वेनेजुएला के राजनीतिक हालात और अन्य भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखे जा रहे हैं, लेकिन लंबी अवधि का नजरिया मंदी की ओर ही इशारा कर रहा है. वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 62 डॉलर और अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 58 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहे हैं.
दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब ने भी बाजार की बदलती परिस्थितियों को भांप लिया है. सऊदी अरब ने लगातार तीसरे महीने एशियाई खरीदारों के लिए अपने कच्चे तेल की कीमतों में कटौती की है. फरवरी लोडिंग के लिए उनके प्रमुख ‘अरब लाइट क्रूड’ की कीमत में कमी की गई है, जो इस बात का संकेत है कि सऊदी अरब को एशियाई देशों में तेल की मांग कमजोर होने की आशंका है. विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब द्वारा कीमतों में की गई यह कटौती भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित होगी, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन उत्पादन की लागत कम होगी.
बाजार विश्लेषकों ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया है. वैश्विक मानक ब्रेंट (Brent) और अमेरिकी बेंचमार्क WTI के बीच मूल्य का अंतर घटकर अब केवल 4 डॉलर प्रति बैरल रह गया है. आमतौर पर अमेरिका में लॉजिस्टिक्स और पाइपलाइन क्षमता की कमी के कारण WTI की कीमतें काफी कम रहती थीं, जिससे अमेरिकी तेल खरीदना फायदेमंद होता था. इक्रा (ICRA) लिमिटेड के विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों का यह अंतर कम होने से अमेरिकी कच्चे तेल की प्रतिस्पर्धात्मकता घट सकती है. चूंकि अब अमेरिकी तेल की कीमत अन्य प्रतिस्पर्धियों के करीब पहुंच गई है, इसलिए ऊंची परिवहन लागत (Logistics Cost) के कारण भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी तेल के बजाय मध्य-पूर्व या अन्य क्षेत्रों से तेल खरीदना पसंद कर सकती हैं.


