Saturday, August 29, 2026
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WORLD : भारत-कनाडा बातचीत: द्विपक्षीय निवेश संधि पर वार्ता को हरी झंडी, 2030 तक ₹4.65 लाख करोड़ के कारोबार का लक्ष्य

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भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों में नया अध्याय जुड़ रहा है। नई दिल्ली में मार्च 2026 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक की प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों के वित्त मंत्रियों के बीच पहली आर्थिक और वित्तीय वार्ता संपन्न हुई। बैठक के बाद भारत ने कनाडा के साथ जल्द से जल्द ‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ (बीआईटी) पर बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई है। यह रणनीतिक कदम निवेश संबंधों को मजबूत करेगा और वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) और नया व्यापार लक्ष्य क्या है?
इस वार्ता का मुख्य ध्यान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना रहा। दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाने के संकल्प को दोहराया है। यह महत्वपूर्ण कदम मार्च 2026 में नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक की प्रतिबद्धताओं पर आधारित है। दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 के अंत तक ‘कनाडा-भारत व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता’ (सीईपीए) वार्ता को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।

इस बातचीत में किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया?
वित्त मंत्रियों- निर्मला सीतारमण और फ्रांसिस-फिलिप शैम्पेन ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और अपनी घरेलू नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा की। वार्ता में भारतीय बाजार में कनाडाई पेंशन फंडों की बड़ी मौजूदगी को रेखांकित किया गया और वित्तीय संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई। दोनों पक्षों ने निवेशकों के लिए स्थिर और निश्चित घरेलू कर कानूनों की आवश्यकता को महत्वपूर्ण माना।

संवाद में भुगतान प्रणालियों के आधुनिकीकरण, वित्तीय स्थिरता, फिनटेक इनोवेशन और वित्तीय अपराधों से निपटने पर सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई। इसमें सबसे बड़ा कदम कनाडा में भारत के ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) के विस्तार का स्वागत करना है। इसके लिए स्थानीय भुगतान सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी की जाएगी, जिससे सीमा पार प्रेषण (रेमिटेंस) तेज और सस्ता होगा। इसका लाभ दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा, व्यापार और छोटे व मध्यम स्तर के उद्यमों (एमएसएमई) को मिलेगा।

द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति क्या है और आगे क्या होगा?
वर्ष 2025-26 में भारत-कनाडा द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा है, जिसमें भारत का निर्यात 4.67 अरब डॉलर और आयात 3.28 अरब डॉलर था। इसे देखते हुए 2030 तक इसे 4.65 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य बेहद महत्वाकांक्षी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस यात्रा के दौरान कनाडाई कंपनियों के साथ ऊर्जा, एआई और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में चर्चा कर रही हैं। इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अगली आर्थिक और वित्तीय वार्ता वर्ष 2027 में आयोजित की जाएगी, जहां इसकी प्रगति की समीक्षा होगी।

NATIONAL : ‘मैं BJP की कठपुतली नहीं हूं’, कंगना रनौत का बड़ा बयान, खुद को बताया ‘बेहद डिमांडिंग एक्ट्रेस’

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बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने विचारों को खुले रूप से रखने के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, 2024 में बीजेपी से जुड़ने और हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद भी कई मौकों पर उनके बयान पार्टी की राय से अलग नजर आए हैं।

हाल ही में एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि वह बीजेपी की “कठपुतली” नहीं हैं। उन्होंने यह भी माना कि भविष्य में ऐसा हो सकता है कि पार्टी किसी मुद्दे पर उनका साथ न दे। इसके साथ ही कंगना ने अपने फिल्मी करियर को लेकर कहा कि आज भी कई निर्देशक उन्हें “बेहद डिमांडिंग एक्ट्रेस” मानते हैं।

कंगना ने आगे कहा कि अब उनकी दिलचस्पी ऐसे किरदार निभाने में ज्यादा है, जो उनकी उम्र के हिसाब से हों और जिनमें उन्हें किसी “खान या कुमार” के साथ कास्ट किया जाए। दूरदर्शन के साथ बातचीत में कंगना ने कहा कि “ऐसा नहीं है कि मैं अपनी पार्टी से दूर जाना चाहती हूं। लेकिन जब बहुत ज्यादा शोर होता है, तो अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए आवाज थोड़ी ऊंची करनी पड़ती है।”

एक्ट्रेस ने कहा “इसलिए कभी-कभी मैं कुछ कड़े बयान देती हूं। मेरा इरादा पार्टी की विचारधारा से अलग होने का बिल्कुल नहीं है। लेकिन अगर कभी एक इंसान के तौर पर मेरी राय अलग हो भी जाए, तो यह याद रखना चाहिए कि मैं कोई कठपुतली नहीं हूं। आज बीजेपी मेरे साथ है, हो सकता है कल न हो। मैं पिछले दो साल से सांसद हूं, जबकि एक अभिनेत्री के तौर पर मेरी पहचान और मेरा करियर पिछले 20 साल से है। मेरी अपनी एक पहचान पिछले 20 सालों से बनी हुई है।”

पहले एक्ट्रेस हूं फिर बीजेपी सांसद
कंगना का कहना था कि वो पहले एक एक्ट्रेस हैं, बाद में बीजेपी सांसद। उनकी पहचान आज भी बतौर अभिनेत्री ज्यादा है। एक्ट्रेस से जब पूछा गया कि उनके अगले 10 साल के प्लान क्या हैं। इस पर कंगना ने कहा कि ये बहुत मुश्किल सवाल है। आज भी कई निर्देशक उनके साथ काम करने के लिए एक्साइटेज हैं और उन्हें फिल्मों के ऑफर का इंतजार है। कंगना का कहना था कि कई डायरेक्टर उनसे पूछते हैं कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी क्यों बनाई।

बॉलीवुड में वापस फिल्मों में काम करने के बारे में एक्ट्रेस ने कहा कि अगर वह दोबारा पूरी तरह फिल्मों में लौटती हैं, तो क्या बॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउस उन्हें काम देंगे। इस पर उन्होंने कहा कि वह पहले खुद ही इन बड़े ऑफर्स को ठुकरा चुकी हैं।

अपनी फिल्म जयललिता का हवाला देते हुए कंगना कहती हैं कि कुछ रोल निभाने के लिए एक खास तरह का व्यक्तित्व, उम्र और अंदाज होना जरूरी है। इसलिए मुझे लगता है कि ये भूमिकाएं मेरे लिए किसी खान या कुमार के साथ पारंपरिक हीरोइन का किरदार निभाने से ज्यादा बेहतर और सहज हैं।

WORLD : नेपाल त्रासदी: 288 भारतीय लापता, इनमें अधिकतर कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री; विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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TGWनेपाल त्रासदी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में लापता लोगों के बारे में जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में 288 लोग ऐसे हैं, जिनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। साथ ही विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भेजी गई राहत सामग्री की भी जानकारी दी।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। इनके अलावा 37 और 39 लोगों के दो समूह तमिलनाडु के हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा तीसरा समूह 32 लोगों का है, जो पश्चिम बंगाल के हैं, वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा 61 लोग विभिन्न राज्यों के हैं, जो नेपाल में लापता हैं। साथ ही केरलम के 33 लोगों का भी एक समूह नेपाल में लापता है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूह लापता हैं।

केरलम
नोरका रूट्स ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के कारण केरलम के 53 लोग (जिनमें बच्चे भी शामिल हैं) वहां फंस गए हैं। नोरका रूट्स केरल सरकार की वह एजेंसी है जो विदेश में रहने वाले केरल के लोगों के मामलों और कल्याणकारी सेवाओं का कामकाज देखती है।

तमिलनाडु
तमिलनाडु और पुडुचेरी से कुल 106 लोग मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इनमें से 20 लोगों को बचा लिया गया है, जबकि 37 लोग अभी भी लापता हैं। सरकार ने कहा कि वह चेन्नई से गए अन्य 49 लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

कर्नाटक
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के कार्यालय ने गुरुवार को बताया कि कर्नाटक के कम से कम 13 लोग (जिनमें से 11 बंगलूरू शहरी जिले के हैं) नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

तमिलनाडु के 21 लोगों को सुरक्षित बचाया गया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तमिलनाडु के 21 लापता लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। जल्द ही इन लोगों को काठमांडू से नई दिल्ली लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कई कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री चीन में भी फंसे हुए हैं। इन लोगों का करीब 200 का आंकड़ा है। जिन्हें जल्द भारत लाया जाएगा।

भारत ने नेपाल भेजी 47 टन राहत सामग्री
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेपाल को इस मुश्किल समय में मदद के लिए भारत ने दो विमान भेजे हैं। जिनमें से एक सी-130 जे विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर बुधवार को नेपाल हुआ था। इनमें अस्थायी शेल्टर, दवाईयां आदि लेकर गया है। आज भी एक सी-17 विमान 37 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इनमें से आठ टन दवाईयां हैं और एक टन खाद्य पदार्थ हैं। इस तरह दो दिनों में नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जो भी राहत सामग्री भेजी गई है, वह नेपाल की मांग के आधार पर ही भेजी गई है।

दूतावास हेल्पलाइन चलाकर लोगों की मदद कर रहे
विदेश मंत्रालय ने बताया कि एक कंट्रोल रूम विदेश मंत्रालय में स्थापित किया गया है और भारतीय दूतावास के हम लगातार संपर्क में हैं। रणधीर जायसवाल ने बताया कि बाढ़ के चलते नेपाल में नेटवर्क बुरी तरह से बाधित हुआ है, जिसके चलते भी कई लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। हमारे नेपाल और बीजिंग में मौजूद दूतावास 24 घंटे हेल्पलाइन चलाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। जायसवाल ने बताया कि जैसे-जैसे उनके पास अपडेट आएगा, वे लोगों को जानकारी देते रहेंगे।

NATIONAL : ‘फार्मा सेक्टर भारत की रणनीतिक ताकत’: शाह ने शोध और नवाचार पर दिया जोर; चीन से मुकाबले की क्या है तैयारी?

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत का दवा उद्योग देश की रणनीतिक ताकत है। सरकार का लक्ष्य दवाओं और मेडिकल उपकरणों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना और चीन के दबदबे को चुनौती देना है। क्या रिसर्च और नई योजनाओं से भारत इस लक्ष्य को हासिल कर पाएगा? पढ़िए रिपोर्ट।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि भारत का दवा उद्योग देश की ‘राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति’ है। उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ दवाओं के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बनना है। उसे पूरी दुनिया को दवाएं भी उपलब्ध करानी हैं।

चीन के दबदबे को कैसे कम करेगा भारत?
अमित शाह ने अहमदाबाद में एक पुरस्कार समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग के लिए बनाए गए थोक दवा निर्माण पार्क और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई योजना चीन के दबदबे को खत्म करने में बहुत प्रभावी होंगी। गृह मंत्री ने कहा, मुझे भरोसा है कि आने वाले समय में इन योजनाओं का बड़ा असर होगा।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दवा उद्योग को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। लेकिन आगे बढ़ने के लिए कंपनियों को अनुसंधान और नई तकनीक पर फोकस करना होगा। शाह ने कहा, एक समय भारत दवा उद्योग में बहुत आगे था। लेकिन धीरे-धीरे चीन ने उसकी जगह ले ली। इसके बावजूद मैं यह मानता हूं कि भारतीय दवा उद्योग भारत की राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति है। इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भारत की परंपरा का हिस्सा है।

उन्होंने यह बात फार्मइनोवा पुरस्कार समारोह 2026 में कही। यह समारोह फार्मास्युटिकल साइंस यानी दवा विज्ञान में शानदार शोध करने वालों को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया था। शाह ने कहा कि अब दवा उद्योग की जिम्मेदारी है। भारत को दवाओं के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दुनिया को दवाएं भी देनी होंगी।

कंपनियां रिसर्च पर कैसे करेंगी फोकस?
उन्होंने कहा, हर कंपनी को शोध (शोध) पर ध्यान देना होगा। शोध कर रहे छात्रों और प्रोफेसरों को बढ़ावा देना होगा। भारत सरकार ने शोध के लिए तीन योजनाएं शुरू की हैं। फिर भी अगर किसी कंपनी को लगता है कि वह छोटी कंपनी है, तो पांच कंपनियां मिलकर काम कर सकती हैं। वे मुनाफे में हिस्सेदारी के आधार पर साथ काम कर सकती हैं।

शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने दवा उद्योग में पीएलआई योजना लागू की है। इसका मकसद भारत में जरूरी एपीआई यानी दवाओं में इस्तेमाल होने वाले मुख्य कच्चे पदार्थ और मेडिकल उपकरण बनाने को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, थोक दवा और चिकित्सा उपकरण पार्क नीति के तहत दुनिया के स्तर का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) प्रणाली तैयार की जा रही है।

पीएलआई योजना का मकसद क्या है?
शाह ने कहा कि उन्होंने थोक दवा पार्क और पीएलआई योजना का विस्तार से अध्ययन किया है। ये दोनों योजनाएं दवा उद्योग के लिए हैं। आने वाले दिनों में ये चीन के दबदबे को खत्म करने में बहुत प्रभावी होंगी। उन्होंने बताया कि अब तक 67 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। वहीं, भारत से 3.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की दवाएं निर्यात की जा चुकी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है कि साल 2028 से पहले भारतीयों को बैंडेज, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन जैसी सभी चीजें देश में ही बनी मिलें। कई कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं।

NATIONAL : नेशनल लॉ स्कूल ने दीक्षांत समारोह किया रद्द:CJI सूर्यकांत चीफ गेस्ट थे, छात्रों ने हटाने की मांग की थी

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बेंगलुरु के NLSIU ने 12 सितंबर का 34वां दीक्षांत समारोह रद्द किया। CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाने पर 700 से ज्यादा छात्रों ने आपत्ति जताई थी।

नेशनल लॉ स्कूल ने दीक्षांत समारोह किया रद्द:CJI सूर्यकांत चीफ गेस्ट थे, छात्रों ने हटाने की मांग की थी
➤ NLSIU ने 12 सितंबर का 34वां दीक्षांत समारोह किया रद्द
➤ 700 से ज्यादा छात्रों और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाने पर जताई थी आपत्ति
➤ एक महीने में चार संस्थानों में CJI को लेकर दीक्षांत समारोह पर विरोध का असर

बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने 12 सितंबर को होने वाला अपना 34वां दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया है। यह फैसला CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाए जाने को लेकर छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध के बीच आया है। यूनिवर्सिटी ने 27 अगस्त को समारोह रद्द किए जाने की जानकारी दी। हालांकि, जारी किए गए नोटिस में छात्रों के विरोध का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

पिछले एक महीने में यह चौथा संस्थान है, जहां CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर विवाद सामने आया और कार्यक्रम को या तो रद्द किया गया, स्थगित किया गया या मुख्य अतिथि की व्यवस्था में बदलाव किया गया।

700 से ज्यादा छात्रों ने जताई थी आपत्ति
NLSIU के 700 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों और पूर्व छात्रों की ओर से जारी बयान पर कुल 700 से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

इनमें 165 मौजूदा स्नातक छात्र, 409 वर्तमान छात्र और 128 पूर्व छात्र शामिल थे। छात्रों की ओर से BCI से NALSAR के छात्रों और शिक्षकों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी की गई थी।

NLSIU की ओर से समारोह रद्द किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद अब इस पूरे विवाद में एक और संस्थान का नाम जुड़ गया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी के आधिकारिक नोटिस में कार्यक्रम रद्द करने की वजह के तौर पर छात्रों के विरोध का उल्लेख नहीं किया गया है।

CJI की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

CJI सूर्यकांत को लेकर लॉ यूनिवर्सिटीज में विरोध की शुरुआत NALSAR हैदराबाद से हुई थी। विवाद की पृष्ठभूमि CJI सूर्यकांत की उस टिप्पणी से जुड़ी है, जिसे छात्रों ने आपत्तिजनक माना। इसके बाद TISS मुंबई, NALSAR बेंगलुरु और OP Jindal Global University, पानीपत में भी CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाए जाने को लेकर छात्रों की आपत्तियां सामने आईं।

NALSAR में करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। यहां करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाने का निमंत्रण वापस लेने की मांग की थी। उस समय समारोह की तारीख तय नहीं हुई थी।

छात्रों ने CJI की ‘युवाओं को कॉकरोच’ वाली टिप्पणी के अलावा दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कार्यवाही को लेकर भी सवाल उठाए थे।

NALSAR में विरोध के बाद BCI तक पहुंचा मामला
NALSAR में छात्रों के विरोध के बाद मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) तक पहुंच गया था। BCI ने कुछ समय के लिए 2026 के NALSAR स्नातकों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। हालांकि, बाद में यह निर्देश वापस ले लिया गया।

इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा था कि उन्होंने NALSAR का निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था। NALSAR के दीक्षांत समारोह की नई तारीख भी सामने नहीं आई है।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) का 86वां दीक्षांत समारोह 2 अगस्त को होना था, लेकिन संस्थान ने इसे स्थगित कर दिया था। TISS ने कार्यक्रम स्थगित करने के लिए अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला दिया था।

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि CJI सूर्यकांत की मौजूदगी को लेकर छात्रों के संभावित विरोध की चिंता थी। इसके बाद 22 अगस्त को समारोह नए मुख्य अतिथि डॉ. सीएस प्रमेश के साथ आयोजित किया गया। यानी TISS ने समारोह को रद्द करने के बजाय उसकी तारीख और मुख्य अतिथि दोनों में बदलाव किया।
OP Jindal Global University, सोनीपत में भी CJI सूर्यकांत को लेकर विवाद सामने आया था। यूनिवर्सिटी ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की व्यवस्था में बदलाव किया।

यूनिवर्सिटी के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने समारोह की अध्यक्षता करने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता में समारोह आयोजित किया गया।

मई 2026 में टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बना ‘कॉकरोच जनता पार्टी’

CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद मई 2026 में सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक समूह या ट्रेंड सामने आया। देखते ही देखते इसके लाखों फॉलोअर्स हो गए।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच 15 जनवरी को वकील संजय दुबे की दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता सीनियर वकील का दर्जा पाना चाहता था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सवाल किया था कि सीनियर एडवोकेट का टैग केवल स्टेटस सिंबल है या न्याय व्यवस्था में भागीदारी का जरिया भी है।

इसी दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था कि कॉकरोच की तरह बहुत से युवा ऐसे हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। उनके मुताबिक, ऐसे लोग सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म की ओर जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हजारों लोग काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर गंभीर संदेह है।

CJI की इसी टिप्पणी को लेकर बाद में सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम सामने आया और इसके बाद कई लॉ यूनिवर्सिटीज में उनके कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर छात्रों की आपत्तियां सामने आती गईं।

NLSIU का दीक्षांत समारोह रद्द होने के साथ ही पिछले एक महीने में चार संस्थानों में CJI सूर्यकांत को लेकर दीक्षांत समारोह से जुड़ा विवाद सामने आ चुका है। NALSAR में छात्रों ने निमंत्रण वापस लेने की मांग की, TISS ने समारोह की तारीख और मुख्य अतिथि बदले, OP Jindal Global University में अध्यक्षता की व्यवस्था बदली और अब NLSIU ने 12 सितंबर का अपना 34वां दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया है।

हालांकि, NLSIU की ओर से जारी नोटिस में छात्रों के विरोध को समारोह रद्द किए जाने का कारण नहीं बताया गया है। ऐसे में यूनिवर्सिटी के इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह उसके नोटिस में स्पष्ट नहीं की गई है।

अब NLSIU के फैसले पर सबकी नजर
NLSIU का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब छात्रों और पूर्व छात्रों की ओर से CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई जा चुकी थी। 700 से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर वाले बयान के बाद अब 12 सितंबर का प्रस्तावित समारोह ही रद्द कर दिया गया है।

पिछले एक महीने के घटनाक्रम को देखें तो CJI सूर्यकांत को लेकर लॉ संस्थानों में छात्रों की आपत्तियां लगातार चर्चा में रही हैं। NALSAR से शुरू हुआ विवाद अब NLSIU तक पहुंच गया है और चार संस्थानों में दीक्षांत समारोह की व्यवस्था पर इसका असर दिखाई दिया है।

NATIONAL : परिसीमन पर खड़गे ने मोदी को लिखी चिट्ठी

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लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर हो रही तैयारियों और संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्‌ठी लिखी। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि सरकार बुलडोज करके यानी जबरदस्ती करके परिसीमन बिल पास कराने का प्रयास न करे। खड़गे ने चिट्ठई लिख कर परिसीमन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे परिसीमन के लिए सरकार के प्रस्तावों को सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा करें। उन्होंने सभी दलों और राज्य सरकारों को इन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। इतना ही नहीं खड़गे ने लोकसभा में मौजूदा संख्या को अगले 25 साल तक 543 बनाए बनाए रखने की मांग की है। उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 से महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने को भी कहा है।

खड़गे ने चिट्ठी में लिखा है, ‘मैंने इससे पहले 16 जुलाई को पीएम को पत्र लिखकर परिसीमन के लिए सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था’। उन्होंने आगे लिखा है, ‘केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत दिए जाने के बाद मैं कहना चाहता हूं कि कृपया फिर से जबरदस्ती करने की कोशिश न करें, जैसा कि आपने 16 और 17 अप्रैल को किया था’। गौरतलब है कि विशेष सत्र बुलाए जाने के सवाल पर एक इंटरव्यू में किरेन रिजिजू ने कहा था कि संसद सत्र बुलाने का फैसला सरकार का ही होता है।

NATIONAL : पीएम मोदी का मध्य एशिया दौरा आज: उज्बेकिस्तान-किर्गिजस्तान की यात्रा पर होंगे रवाना, एससीओ बैठक में लेंगे हिस्सा

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मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक रिश्तों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिजस्तान (बिश्केक) की यात्रा का विशेष महत्व का होगा।

पीएम मोदी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे और कुछ वैश्विक नेताओं से भी मिलेंगे।

भारत इन दोनों देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने तथा आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ व्यापक समन्वय की तैयारी में है। एससीओ की स्थापना का मूल उद्देश्य भी इन्हीं तीन चुनौतियों से निपटना रहा है।

प्रधानमंत्री 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में होंगे, जबकि 31 अगस्त व एक सितंबर को किर्गिजस्तान जाएंगे। यह उनकी उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा होगी। एससीओ की यह बैठक संगठन की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर हो रही है।

भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है। पीएम मोदी भारत की तरफ से सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा अवसर के एजेंडे पर संगठन में भारत की प्राथमिकताएं रखेंगे। एससीओ बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी मौजूद रहेंगे।

हालांकि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की कोई संभावना नहीं बताई जा रही है। इसके विपरीत मोदी की कुछ अन्य नेताओं से मुलाकात संभव है। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं। चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग के साथ भी वार्ता हो सकती है।

ईरान के राष्ट्रपति भी बैठक में भाग लेंगे। एससीओ की ओर से जारी होने वाले संयुक्त बयान पर सभी की नजर रहेगी। बहुत संभव है कि इस बयान में ईरान पर अमेरिकी हमले की खुलकर निंदा की जाए। वजह यह है कि इसमें अमेरिका का पक्ष रखने वाला कोई अहम देश सदस्य नहीं है।

वैसे रूस, चीन और ईरान के राष्ट्रपति दो हफ्ते बाद ही नई दिल्ली भी आ रहे हैं, जहां वे ब्रिक्स शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। इस लिहाज से बिश्केक की बैठक आने वाले दिनों की कूटनीति की तैयारी भी मानी जा रही है।

यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि बिश्केक सम्मेलन में ही पाकिस्तान को अध्यक्षता सौंपी जाएगी। यानी वर्ष 2027 में एससीओ शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में होगा।

इसके पहले वर्ष 2023 में भारत ने अध्यक्षता की थी और पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो इसमें हिस्सा लेने के लिए गोवा आए थे। तब शिखर सम्मेलन का आयोजन ऑनलाइन किया गया था।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जार्ज से पूछा गया कि क्या भारत पाकिस्तान की अध्यक्षता में होने वाले एससीओ में हिस्सा लेगा तो उनका जवाब था कि ‘सही समय पर इस बारे में फैसला किया जाएगा।’

मध्य एशिया में कनेक्टिविटी के लिए चाबहार एक अहम पहलू : विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि चाबहार पोर्ट मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी को मजबूत करने की भारत की कोशिशों का एक अहम हिस्सा है।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिजस्तान की यात्रा से पहले मीडिया से बात करते हुए ये बातें कहीं।

वह भारत और मध्य एशिया के बीच कनेक्टिविटी की संभावनाओं पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

जॉर्ज ने कहा कि कनेक्टिविटी इस क्षेत्र के साथ हमारे रिश्तों का एक बहुत अहम पहलू है। हमारा हमेशा से यह रुख रहा है कि मध्य एशिया की भारत तक भरोसेमंद, सुरक्षित और व्यावसायिक रूप से फायदेमंद पहुंच होनी चाहिए और हम इस कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। चाबहार उस जुड़ाव के अहम पहलुओं में से एक है। हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं और इसे आगे बढ़ाएंगे।

NATIONAL : इंफाल पूर्व में पुलिस और सेना की बड़ी कार्रवाई, भारी मात्रा में हथियार समेत 3 उग्रवादी गिरफ्तार

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मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े तीन सक्रिय कैडरों को जबरन वसूली और गैर-कानूनी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तलाशी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों…

इंफाल : मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े तीन सक्रिय कैडरों को जबरन वसूली और गैर-कानूनी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तलाशी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, गोलियां और वसूली की पर्चियां बरामद की हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि सोमवार को कियामगेई अवांग लीकाई में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के एक सक्रिय कैडर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार उग्रवादी की पहचान एन संजू मेइती के रूप में हुई है। उसके कब्जे से एक एके राइफल, एक एसएमजी कार्बाइन, 9 मैगजीन और 737 कारतूस बरामद किए गए।

बयान में कहा गया है कि एक अलग अभियान में प्रतिबंधित संगठन एसओआरईपीए के दो सक्रिय कैडरों को 28 असम राइफल्स से मिली विश्वसनीय और पुष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर खुराई थांगजाम लीकाई से गिरफ्तार किया गया। दोनों की पहचान 37 वर्षीय एल रॉकी सिंह और 36 वर्षीय पी कुमारजीत सिंह के रूप में हुई है।

पुलिस ने बताया कि दोनों कथित तौर पर जबरन वसूली की रकम लेने के लिए इलाके में आए थे। उनके पास से एक हस्तलिखित वसूली पर्ची बरामद की गई जिस पर एक मोबाइल फोन नंबर और एसओआरईपीए नाम लिखा था।

WORLD : डिजिटल करंसी से सोने और शिपिंग तकः ट्रंप ने ईरान पर चौतरफा आर्थिक शिकंजा कसा, भारत का अरबों का कारोबार भी होगा प्रभावित

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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नया व्यापक आर्थिक अभियान शुरू करते हुए करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। डिजिटल एसेट, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग भी निशाने पर हैं। भारत को चावल, चाय और दवाओं के निर्यात, भुगतान और शिपिंग में नई…

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव का नया मोर्चा खोल दिया है और इसका असर अब भारत तक पहुंचने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए प्रतिबंधों का नया और व्यापक अभियान शुरू किया है।ट्रंप प्रशासन ने करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं और ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी संस्थानों को भी चेतावनी दी है। सबसे बड़ी चिंता भारत के लिए है, क्योंकि अमेरिकी दबाव और दुबई के रास्ते कारोबार में आई रुकावट से भारतीय चावल, चाय और दवा निर्यात प्रभावित हो सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों और उससे जुड़े विदेशी नेटवर्क पर इतना दबाव बनाना है कि तेहरान के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन करना मुश्किल हो जाए।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे अभूतपूर्व अभियान बताया है। वॉशिंगटन ने साफ संकेत दिया है कि जो देश और कंपनियां ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी आगे सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अमेरिका ने नए पैकेज के तहत करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे नेटवर्क शामिल हैं जिन पर ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के लिए सामान उपलब्ध कराने, साइबर गतिविधियों तथा तेल के निर्यात और उससे होने वाली कमाई को स्थानांतरित करने में मदद करने का आरोप है। लेकिन इस बार निशाना सिर्फ ईरान के अंदर मौजूद संस्थाएं नहीं हैं। अमेरिका विदेशी कंपनियों और बिचौलियों पर भी दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

नए अभियान में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है। डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग अब प्रतिबंधों के संभावित दायरे में और ज्यादा मजबूती से शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल धन के लेन-देन और प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है। सोने का इस्तेमाल वह अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए करता है, जबकि विमानन और समुद्री नेटवर्क के जरिए उपकरण, पैसा और तेल स्थानांतरित किए जाते हैं। अमेरिका के नए प्रतिबंधों का सीधा असर भारत के ईरान को होने वाले निर्यात पर पड़ने की आशंका है। रॉयटर्स के मुताबिक, भारत लंबे समय से ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 के करीब 17 अरब डॉलर के स्तर से 90 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है।

अब भारत से ईरान को मुख्य रूप से मानवीय आधार पर छूट प्राप्त वस्तुओं का निर्यात होता है। इनमें खास तौर पर चावल, चाय और दवाएं शामिल हैं।भारतीय निर्यातकों को डर है कि अमेरिका की नई पाबंदियां और ईरान के साथ वित्तीय लेन-देन में बढ़ती मुश्किलें इस कारोबार को और कमजोर कर सकती हैं। भारत के लिए परेशानी सिर्फ अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से नहीं है। ईरान को भारतीय सामान का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से दुबई के रास्ते भेजा जाता रहा है। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ईरान के साथ कुछ व्यापारिक और वित्तीय गतिविधियों को रोकने से यह रास्ता भी प्रभावित हुआ है। रॉयटर्स के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में भारत ने ईरान को करीब 383 मिलियन डॉलर का चावल और 14 मिलियन डॉलर की चाय निर्यात की थी।

नए प्रतिबंधों और दुबई के रास्ते में रुकावट से खासकर भारतीय बासमती चावल कारोबार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। दवाओं का निर्यात भी चिंता का विषय है। मानवीय वस्तुओं को आम तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ छूट मिलती है, लेकिन बैंकिंग, बीमा, भुगतान और शिपिंग में आने वाली अतिरिक्त अड़चनें भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं। भारतीय निर्यातकों को अब वैकल्पिक रास्तों और भुगतान व्यवस्था पर विचार करना पड़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, कुछ निर्यातक तुर्किये के रास्ते जैसे विकल्प तलाश रहे हैं। अमेरिकी अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान की तेल से होने वाली कमाई है। चीन लंबे समय से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। अमेरिका पहले भी चीन तक ईरानी तेल पहुंचाने वाले जहाजों, रिफाइनरियों और बिचौलियों पर प्रतिबंध लगाता रहा है।

हालिया अमेरिकी कदमों में चीन के बड़े वित्तीय संस्थानों को सीधे निशाना बनाने से फिलहाल परहेज किया गया है, लेकिन वॉशिंगटन का संदेश साफ है कि ईरान के साथ कारोबार करने वालों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। ईरान पर यह नया आर्थिक दबाव ऐसे समय आया है जब देश पहले से ही लंबे सैन्य संघर्ष और व्यापारिक रुकावटों का सामना कर रहा है। तेल निर्यात में गिरावट, विदेशी व्यापार में मुश्किल, महंगाई और मुद्रा की कमजोरी ने आम ईरानियों पर भी असर डाला है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात में भारी गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी चिंता में डाल दिया है।

ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान ने नए प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा है कि वह अपने हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों का जवाब देने का अधिकार रखता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि ईरान जवाब में तेल निर्यात या होर्मुज के रास्ते समुद्री यातायात को और बाधित करता है, तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कच्चे तेल की कीमत, शिपिंग लागत और भारत समेत दुनिया भर में ऊर्जा आयात प्रभावित हो सकता है।

Pakistan: ‘पाकिस्तान का GSP+ दर्जा छीनने की साजिश’, UNHCR में भाषण के बाद इमरान के बेटे पर सरकार ने लगाया आरोप

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पाकिस्तान सरकार ने पूर्व पीएम इमरान खान के बेटे कासिम खान पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूएनएचआरसी में भाषण देकर देश के जीएसपी प्लस दर्जे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जबकि पीटीआई ने इन आरोपों को खारिज किया। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-

पाकिस्तान सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खाने के बेटे कासिम खान पर आरोप लगाया कि उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपने भाषण के जरिये देश के जीएसपी प्लस दर्जे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। इस दर्जे के तहत पाकिस्तान को अपने निर्यात पर कम शुल्क (टैरिफ) का लाभ मिलता है।

किन मंत्रियों ने लगाए कासिम खान पर आरोप?
केंद्रीय सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार, पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी और सिंध के सूचना मंत्री शरजील मेमन ने मिलकर कासिम और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेता जुल्फी बुखारी की आलोचना की। उन्होंने कहा, यह पाकिस्तान का जीएसपी दर्जा छीनने की सोची-समझी साजिश है।

कासिम ने यूएनएचआरसी के सत्र को किया था संबोधित
कासिम ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के सम्मेलन को संबोधित किया था। उन्होंने परिषद से अपील की थी कि वह दखल दे और पाकिस्तान सरकार पर उनके पिता की तुरंत रिहाई के लिए दबाव डाले। इमरान खान अगस्त 2023 से कई मामलों में जेल में बंद हैं।

कासिम ने परिषद के 61वें सत्र के दौरान कहा कि यह परिषद और ओएचसीएचआर पाकिस्तान से इमरान खान के खिलाफ हो रहे कथित उत्पीड़न को तुरंत रोकने के लिए कहे। उन्होंने कहा, पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र के कार्य समूह की राय का पालन करना चाहिए और उनके पिता को रिहा करना चाहिए।

मंत्रियों ने क्या आरोप लगाए?
मंत्रियों ने कहा, कासिम और उनके साथियों का मकसद पाकिस्तान का जीएसपी प्लस दर्जा खत्म करवाना है। उन्होंने आरोप लगाया, यह पाकिस्तान विरोध समूह यूरोपीय संघ में इस्राइली नीति और प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की एक इकाई बीएमएम के नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, जीएसपी प्लस दर्जा मिलने के बाद पाकिस्तान के निर्यात में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है, जिससे कपड़ा क्षेत्र को बड़ा फायदा हुआ और हजारों नौकरियां बनीं।उन्होंने यह भी कहा, पीटीआई अब अपने राजनीतिक फायदे के लिए लोगों की रोजी-रोटी छीनने की कोशिश कर रही है।

मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर जवाब देते हुए मंत्रियों ने कहा, पीटीआई के शासनकाल में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की नेता मरियम नवाज को उनके पिता नवाज शरीफ के सामने गिरफ्तार किया गया था।

इमरान खान की पार्टी ने आरोपों को खारिज किया
हालांकि, पीटीआई ने सरकार के इन आरोपों को खारिज किया। पार्टी ने कहा कि वह पाकिस्तान के जीएसपी प्लस दर्जे को नुकसान पहुंचाने की कोई कोशिश नहीं कर रही।

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