Friday, July 3, 2026
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NATIONAL : अब किसकी होगी TMC…ममता या बागी सांसदों की? समझिए पश्चिम बंगाल के इस नए समीकरण की पूरी गणित

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पश्चिम बंगाल में TMC के 20 सांसदों और 60 से ज्यादा विधायकों के बागी होने के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर असली TMC किसकी होगी? क्या ममता बनर्जी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न बचा पाएंगी या बागी गुट दावा ठोकेगा? जानिए चुनाव आयोग के नियम, कानूनी गणित और शिवसेना-NCP जैसे मामलों से जुड़े पूरे समीकरण की विस्तृत कहानी.

पिछले 15 सालों से जिस सत्ता पर ममता बनर्जी और TMC का कब्जा था, वह अब BJP के पास जा चुकी है. सत्ता जाने के बाद ममता बनर्जी का किलकिला अचानक टूटने लगा और झटके लगने लगे. पहले 60 विधायकों का बागी होना, ऋतब्रत बनर्जी का नेता विपक्ष चुना जाएगा और फिर सांसदों के बागी होने के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी पारा काफी हाई है. इसी बीच रविवार को बागी सांसद काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय समेत कई नेताओं ने लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर संसद में अलग बैठने की मांग की है. साथ ही इन 20 बागी सांसदों ने TMC को छोड़ अपने आप को NPCI से जोड़ लिया है.

लेकिन अब ममता बनर्जी की असली टेंशन शुरू होने वाली है. विधायकों और सांसदों के बागी होने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या वे ममता बनर्जी से TMC का नाम और पार्टी चिह्न भी छीन लेंगे? ऐसा मामला पहले महाराष्ट्र में शिवसेना(उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे) और NCP(शरद पवार बनाम अजीत पवार) देखा जा चुका है और ऐसी ही स्थिति में ममता बनर्जी की पार्टी भी खड़ी हो सकती है. आइए विस्तार से जानते है पूरा समीकरण.

TMC के लिए ममता और बागी गुट की लड़ाई!
TMC के 28 में से 20 सांसद बागी हो गए और उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से संसद में अलग बिठाने के लिए अनुरोध किया है. वहीं काकोली घोष ने कहा है कि हम NDA को समर्थन देंगे, इसलिए ऐसा कहा जा रहा है कि इन बागियों को NDA के आसपास बैठने को जगह मिल सकती है. वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी TMC पर दावा जता रही है. TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा और बागी गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की है.

रविवार को काकोली घोष ने भी ऐलान कर दिया कि 20 सांसदों के साथ वो NCP में विलय कर रही है. ऐसे में एक सवाल उठता है कि जब बागी गुट के पास दो तिहाई से ज्यादा सांसद है, 60 से ज्यादा बागी विधायकों का समर्थन है तो अभी ही TMC के लिए दावा क्यों नहीं ठोका गया? कानून भी कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद वहां से निकल जाए तो वे पार्टी तोड़ सकते हैं और पार्टी पर कब्जा भी कर सकते है.

लेकिन संदीप बंदोपाध्याय ने पहले ही कहा है कि, जब दो-तिहाई सांसदों के साथ अलग होते है तो पहले ही दिन मूल पार्टी पर अपना दावा नहीं कर सकते हैं. इसलिए ही उन्होंने NCPI में विलय किया और अब आगे की लड़ाई जुलाई महीने में होगी, जब TMC के बागी नेता पार्टी का नाम और चिह्म का दावा करेंगे. यानी ऐसा लग रहा है कि अब आगे मामला कोर्ट तक जा सकता है.

क्या ममता के हाथ से छिनी जा सकती हैं TMC?
अब एक बड़ा सवाल आता है कि क्या ममता बनर्जी के हाथों से बागी सांसद TMC छीन सकते हैं? तो इसका सीधा जवाब है ‘हां’. तकनीकी और कानूनी रूप से देखा जाएं तो यह मुमकिन है, लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा. TMC के बागी सांसदों ने NCPI(नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) में विलय इसलिए किया ताकि वे दल-बदल विरोधी कानून से बच सकें. इसके साथ ही बागी गुट अब चुनाव आयोग जाकर खुद को ‘असली TMC’ होने का दावा ठोकने का प्लान कर रहे है.

संदीप बंदोपाध्याय के मुताबिक जुलाई में वो TMC को लेकर अपनी दावेदारी जताएंगे. बागी खेमे का प्लान है कि जुलाई में जब संसद का सत्र शुरू होगा, तब वे बहुमत के आधार पर खुद को ‘असली TMC’ घोषित करने की मांग करेंगे. फिर बागी नेता चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे और तब जाकर ममता बनर्जी को पार्टी का नाम और सिंबल छोड़ना पड़ सकता है. यह घटनाक्रम कुछ वैसे ही होगा जैसे शरद पवार और उद्धव ठाकरे को छोड़ना पड़ा था.

लीगली कौन कितना सही?
राजनीति में देखा गया है कि जब भी किसी पार्टी के दो गुट बनते हैं तब दोनों ही गुट खुद को ‘असली पार्टी’ बताते हैं, लेकिन फाइनल फैसला चुनाव आयोग करता है. इससे जुड़ी बातें ‘इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968’ के पारा 15 में साफ-साफ लिखा हुआ है.

ऐसे स्थिति में चुनाव आयोग यह देखता है कि पार्टी के निर्वाचित जन प्रतिनिधि यानी विधायक और सांसद कितनी संख्या में किस गुट के साथ है. मौजूदा स्थिति की बात करें तो TMC के 28 लोकसभा सांसद में से 20 सांसद बागी हो गए है. इसके अलावा 80 में से 60 से ज्यादा विधायकों के भी बागी होने का दावा है. ऐसे में बागी गुट सदन में आराम से बहुमत साबित कर देगा और अपनी दावेदारी को मजबूत करेगा.

इसके अलावा चुनाव आयोग यह भी देखता है की राष्ट्रीय कार्यकारिणी, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों की सूची में किसका पलड़ा कितना भारी है. ऐसे में ममता बनर्जी का पलड़ा भारी है क्योंकि संगठन पर अभी उनकी मजबूत पकड़ है. हालांकि शिवसेना और NCP के मामले में चुनाव आयोग ने संगठन से ज्यादा सांसद और विधायकों की संख्या को ज्यादा तरजीह दी थी.

ममता बनर्जी के पास क्या है उपाय?
चुनाव आयोग के सामने मामला जाने के बाद अगर उन्हें लगता है कि मामला गंभीर, उलझा हुआ है और तुरंत फैसला नहीं लिया जा सकता है तो वो TMC का नाम और सिंबल फ्रीज कर सकते है. फिर दोनों गुटों को ही अस्थायी नाम और सिंबल दिए जाएंगे. ऐसे में आयोग के फैसले के बाद ममता या बागी गुट, सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा. महाराष्ट्र में जब मामला फंसा था तब सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबी चली थी, इसलिए अगर ऐसी स्थिति पैदा हुई तो बंगाल में भी कुछ ऐसा ही हो सकता है.

ममता बनर्जी पार्टी का नाम और सिंबल आसानी से नहीं छोड़ेगी और अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मांग की है कि बागी गुट को मान्यता ना दी जाएं. अब चुनाव आयोग या लोकसभा स्पीकर के किसी भी फैसले पर जिसकी भी हार होगी, वह गुट तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा. यानी साफ है कि आने वाले दिनों में दिल्ली से कोलकाता तक लंबी कानूनी लड़ाई तय है.

NATIONAL : सिया गोयल ने दिया सिग्नल, चेतन ने केतन अग्रवाल को दिया धक्का, पुणे के लोहागढ़ किले पर उस रोज क्या हुआ था, पढ़िए

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रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले में खाई में धक्का देकर मारने की आरोपी उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी पिछले छह महीने से लगातार संपर्क में थे, दोनों ने एक-दूसरे को 2,004 बार फोन किया था और कुल 238 घंटे बातचीत की थी। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पुणे : 26 साल के रियल एस्टेट फर्म के डायरेक्टर केतन अग्रवाल की हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। महाराष्ट्र के पुणे में हुई इस वारदात की तुलना राजा रघुवंशी हत्याकांड से की जा रही है। सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन की हत्या की साजिश रची। पुणे पुलिस ने बताया कि लोहगढ़ किले की एक चट्टान से केतन अग्रवाल को धक्का चेतन चौधरी ने दिया था। केतन को धक्का देने का सिग्नल चेतन को सिया की तरफ से मिला था।

पुलिस उपाधीक्षक गजानन टोम्पे के अनुसार, दोनों ने 18 जून को इस अपराध को अंजाम देने से पहले इसकी पूरी योजना बनाई थी। जांचकर्ताओं ने बताया कि चेतन चौधरी ने सिया गोयल और केतन अग्रवाल का पीछा किया और ‘विंचू काटा’ रिज के पास एक सुनसान चट्टान पर गोयल से पहले से तय सिग्नल का इंतजार किया।

एसपी गजानन टोम्पे ने कहा कि दोनों के बीच यह तय हुआ था कि सही समय का इशारा करने के लिए सिया गोयल नीचे बैठ जाएगी। सिग्नल मिलने के बाद चेतन चौधरी पीछे से अग्रवाल के पास गया, उसे चट्टान से धक्का दिया और मौके से भाग गया। पुलिस ने बताया कि चेतन ने पकड़े जाने से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन पुणे के मार्केट यार्ड इलाके में अपनी दुकान पर छोड़ दिया था और इसके बजाय एक कर्मचारी का फोन साथ ले गया था। उस कर्मचारी से अभी पूछताछ की जा रही है।

जांचकर्ताओं ने बताया कि अपराध के लिए चुनी गई जगह काफी सुनसान थी और वहां गवाह भी कम थे, क्योंकि आम तौर पर हफ्ते के दिनों में किले में कम लोग आते हैं। शक तब हुआ जब सिया गोयल ने घटना के बारे में अलग-अलग बातें कहीं। पुलिस ने बताया कि उसने पहले दावा किया कि तस्वीरें खिंचवाते समय अग्रवाल का पैर फिसल गया था, और बाद में कहा कि उसे पानी की बोतल देते समय वह गिर गया। जांचकर्ताओं को उसके फोन पर उस ट्रिप की कोई तस्वीर भी नहीं मिली।

आगे की जांच में पता चला कि सिया गोयल ने इस महीने की शुरुआत में बाली जाने की तय प्री-वेडिंग ट्रिप को खराब कर दिया था। उसने केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फाड़कर खालापुर टोल प्लाज़ा के पास फेंक दिया था। पुलिस ने बताया कि बाद में उसने ऐसा करने की बात कबूल कर ली क्योंकि चेतन चौधरी इस ट्रिप के खिलाफ था।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी सिया गोयल और केतन चौधरी के बीच करीबी रिश्ते का पता चला। पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच करीब आठ महीने से रिश्ता था (जबकि गोयल की सगाई हो चुकी थी) और जनवरी से जून के बीच उन्होंने 2,000 से ज़्यादा बार एक-दूसरे को कॉल किया और कुल 238 घंटे तक बात की।

सिया और चेतन ने पिछले छह महीने में एक-दूसरे को 2,004 बार फोन किया और कुल 238 घंटे बातचीत की। दोनों के बीच फोन पर कई बार दो-तीन घंटे से ज्यादा समय तक भी बातचीत हुई। जांच में यह भी पता चला है कि घटना वाले दिन सिया और चेतन लोहगढ़ किला जाने से पहले एक कैफे में मिले थे और उन्होंने केतन को खत्म करने की साजिश को अंतिम रूप दिया था।

लोहगढ़ किले की तलहटी से मिले CCTV फुटेज से मामले में बड़ी कामयाबी मिली। फुटेज में हुड पहने हुए चौधरी को जोड़े का पीछा करते हुए देखा गया। जांचकर्ताओं ने बताया कि फुटेज में सिया गोयल को उसे इशारा करते हुए भी देखा गया। पुलिस ने यह भी बताया कि चेतन चौधरी किले की चोटी पर 10 मिनट से भी कम समय तक रुका और 50 मिनट से भी कम समय में पूरी चढ़ाई पूरी कर ली। खबरों के मुताबिक, आरोपी एक-दूसरे को अपने परिवारों के बिज़नेस के ज़रिए जानते थे। जहां सिया गोयल का परिवार मसालों के व्यापार से जुड़ा है, वहीं चेतन चौधरी के परिवार की किराने की दुकान है। पुलिस अपनी जांच जारी रखे हुए है, जिसमें यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या हत्या की साजिश को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने लोहगढ़ किले की रेकी की थी।

NATIONAL : सरकार का विरोध नागरिकों का अधिकार…’, बॉम्बे HC ने मुंबई पुलिस को फटकारा

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस द्वारा एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को शहर से बाहर करने के आदेश को गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत नागरिकों को सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को शहर से एक साल के लिए बाहर (एक्सटर्न) करने के आदेश को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई को गलत बताया है. कोर्ट ने कहा कि, किसी नागरिक को सिर्फ इसलिए उसके अपने शहर से बेदखल नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया या नारे लगाए.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध और आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार है. अदालत ने मुंबई पुलिस के इस एक्शन को पुलिस शक्तियों का दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल भी बताया है.

जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी (49) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. चौधरी ने मुंबई पुलिस की ओर से जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें मुंबई और उसके उपनगरों की सीमा से 12 महीने के लिए बाहर कर दिया गया था.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पयोशी रॉय ने अदालत को बताया कि चौधरी के खिलाफ वर्ष 2019 से 2024 के बीच कुल पांच एफआईआर दर्ज की गई थीं. इनमें अधिकांश मामले केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े थे. इन आंदोलनों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), बाबरी मस्जिद ध्वंस, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन शामिल थे.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जामदार ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर ‘BJP सरकार मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने पर किसी व्यक्ति को शहर से बाहर करने जैसी कठोर कार्रवाई कैसे की जा सकती है. उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं, किसी मंत्री या सरकार के निजी कर्मचारी नहीं.

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने, प्रदर्शन करने और आंदोलन करने का अधिकार है. केवल विरोध-प्रदर्शन या नारेबाजी के आधार पर किसी व्यक्ति को उसके अपने शहर से बाहर करना कानून का दुरुपयोग है.

रिकॉर्ड के अनुसार, सईद अहमद चौधरी मुंबई के चेंबूर इलाके के निवासी हैं और सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं. उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था. उनकी याचिका में कहा गया कि 20 अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. इसके बाद दिसंबर 2025 में चेंबूर के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त ने उन्हें मुंबई शहर और उपनगरों से एक वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश पारित किया.

पुलिस ने अपने आदेश में कहा था कि चौधरी की गतिविधियों से लोगों में भय का माहौल बन रहा था और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो रहा था. बाद में कोंकण मंडल के मंडलायुक्त ने भी अपील में इस आदेश को बरकरार रखा. हालांकि चौधरी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन से जुड़े थे. इन मामलों में उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत आरोपी बनाया गया था, जो किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेश की अवहेलना से संबंधित है. उनका कहना था कि पुलिस ने निवारक कार्रवाई (Preventive Power) का इस्तेमाल लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के लिए किया.

याचिका में यह भी कहा गया कि एक्सटर्नमेंट आदेश के कारण उन्हें मुंबई नगर निगम चुनावों के महत्वपूर्ण समय में अपने ही क्षेत्र से बाहर रहना पड़ा. इससे वे अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियां नहीं कर सके. चौधरी का आरोप था कि पुलिस ने यह कहकर कार्रवाई की कि उनकी गतिविधियों से ‘आतंक का साम्राज्य’ बन गया है, जबकि स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने ऐसी किसी स्थिति से इनकार किया था.

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि इस मामले में एक्सटर्नमेंट का आदेश पुलिस शक्तियों का दुर्भावनापूर्ण और अनुचित इस्तेमाल है. अदालत ने माना कि केवल विरोध-प्रदर्शन आयोजित करना या उसमें भाग लेना महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को शहर से बाहर करने का वैध आधार नहीं हो सकता.

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस का आदेश पूरी तरह इस आधार पर टिका था कि याचिकाकर्ता ने विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन आयोजित किए और उनमें भाग लिया. अदालत के अनुसार यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार के साथ-साथ अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का भी उल्लंघन है.

इन्हीं टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस के एक्सटर्नमेंट आदेश और उसके खिलाफ अपील में पारित आदेश, दोनों को रद्द कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध को अपराध नहीं माना जा सकता तथा पुलिस अपनी निवारक शक्तियों का इस्तेमाल नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रताओं को कुचलने के लिए नहीं कर सकती.

Maharashtra: शरद पवार ने सचिन अहीर से फोन पर की बात, डिप्टी चेयरमैन बनने पर दी बधाई; सियासी चर्चाएं तेज

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सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन निर्विरोध चुने गए हैं। इस जीत के बाद शरद पवार ने उन्हें फोन कर बधाई दी। अहीर ने हाल ही में उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थामा है। इस घटनाक्रम से राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने सचिन अहीर को फोन किया है। पवार ने उन्हें महाराष्ट्र विधान परिषद का डिप्टी चेयरमैन निर्विरोध चुने जाने पर बधाई दी। सचिन अहीर का यह चुनाव राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।

अहीर का चौंकाने वाला फैसला
सचिन अहीर को शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे का बेहद भरोसेमंद साथी माना जाता था। लेकिन मंगलवार को उन्होंने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने सत्ताधारी एकनाथ शिंदे की शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में डिप्टी चेयरमैन पद के लिए अपना पर्चा भरा। अहीर पहले अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में थे। इसके बाद वह 2019 के चुनाव से पहले अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए थे। अब उनका शिंदे गुट में जाना ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा झटका है।

शरद पवार से मांगा आशीर्वाद
इस बीच, एक वीडियो सामने आया है जिसमें सचिन अहीर फोन पर शरद पवार से बात कर रहे हैं। इस बातचीत में अहीर शरद पवार से हमेशा अपना आशीर्वाद बनाए रखने के लिए कह रहे हैं। शरद पवार का अहीर को फोन करना काफी अहम है। पवार की पार्टी अभी उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सहयोगी है, जबकि अहीर ने हाल ही में उद्धव का साथ छोड़ा है।

विधान भवन में पत्रकारों ने सचिन अहीर से सवाल किया कि क्या उन्होंने उद्धव ठाकरे से बात की है। इस पर अहीर ने बताया कि उन्हें उद्धव ठाकरे का भी एक संदेश मिला है। हालांकि, उन्होंने इस संदेश में क्या लिखा था, इसकी जानकारी नहीं दी। अहीर के इस कदम ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन के भीतर खलबली मचा दी है।

NATIONAL : अन्ना हजारे ने किया अनशन का ऐलान, RTI नियमों में बदलाव वापस न लेने पर 5 जुलाई से शुरू करेंगे आंदोलन

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मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे एक बार फिर से अनशन कर सकते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर राज्य सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) नियमों में किए गए बदलावों को तुरंत वापस नहीं लिया तो वह 5 जुलाई से अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हजारे ने अपने पत्र में कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 जून को लागू किए गए ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ RTI कानून की मूल भावना के खिलाफ हैं।

नए नियमों से पारदर्शिता कमजोर होगी
उनका कहना है कि इन नए नियमों से पारदर्शिता कमजोर होगी और आम नागरिकों के लिए जानकारी हासिल करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। अन्ना हजारे ने खास तौर पर RTI आवेदन फीस में बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने फीस बढ़ाने के पीछे कोई ठोस तर्क या वित्तीय विश्लेषण पेश नहीं किया है। हजारे ने स्पष्ट किया कि RTI कानून का उद्देश्य सरकार के लिए राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि जनता को सूचना का अधिकार देना है। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि फीस बढ़ाई जाती है, तो जानकारी देने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़ाया जाना चाहिए।

हजारे ने कड़ा विरोध जताया
इसके अलावा, नए नियमों में RTI आवेदन के साथ पहचान पत्र देना अनिवार्य किए जाने पर भी हजारे ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि RTI एक्ट की धारा 6(2) के तहत आवेदक को अपनी निजी जानकारी या आवेदन का कारण बताने की कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान व्हिसलब्लोअर और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
सरकार को RTI कानून की धारा 4 के तहत स्वेच्छा से अधिक जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार आवेदन करने की जरूरत ही न पड़े।
अन्ना हजारे

इस नए नियम को भी अनावश्यक बताया
हजारे ने ‘एक विषय, एक आवेदन’ जैसे नए नियम को भी अनावश्यक बताया। उनका कहना है कि इससे नागरिकों को बार-बार अलग-अलग आवेदन करने पड़ेंगे, जिससे प्रक्रिया जटिल और महंगी हो जाएगी। उन्होंने अपील खारिज करने, सुनवाई में कानूनी मदद पर रोक और आवेदक की मौत पर केस बंद करने जैसे प्रावधानों की भी आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो वह 5 जुलाई से रालेगण सिद्धि के यादव बाबा मंदिर में अनशन शुरू करेंगे।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज, SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा से पूछे ये सवाल

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अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित चोरी को लेकर एसआईटी ने महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से दान राशि की गिनती को लेकर कई सवाल पूछे हैं.

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित चोरी को लेकर एसआईटी का गठन किया गया है. जहां, एसआईटी ने मंदिर से संलिप्त ट्रस्ट पदाधिकारियों से दान राशि को लेकर कई सवाल पूछे हैं. बताया जा रहा है कि दान राशि की गड़बड़ी का यह मामला 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन किया था. जिसमें कल (18 जून) टीम राम मंदिर पहुंची और लगातार जांच जारी रखी.

वहीं इस मामले में एसआईटी ने मामले पर श्री राम जन्मभूमि के महासचिव चंपत राय और तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से दान राशि की गिनती और इस प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल पूछे गए हैं .

राम मंदिर निर्माण में चंदे के कथित घोटाले को लेकर समाजवादी पार्टी के आरोपों पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और मंत्री राजभर ने कहा कि जांच में सरकार ने SIT का गठन किया है. रिपोर्ट में जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी. अगर SIT की जांच से पहले सपा के पास कोई कानून हो तो वो बताए? मंत्री ने आगे कहा कि जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका भी चर्चा में है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर विवाद में सपा से जुड़े नाम क्यों सामने आते हैं?

अजय राय की हाई कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने कि की मांग
श्री राम मंदिर में भक्तों के चढ़ाए चढ़ावे की डकैती एवं भ्रष्टाचार में संलिप्त ट्रस्ट पदाधिकारियों पर कार्रवाई हेतु कथावाचक, कौशल किशोर ठाकुर ने जांच समिति के गठन से लेकर रघुवंशी सूर्यवंशी समाज के प्रतिनिधित्व तक पांच मांगो का पत्र मुख्यमंत्री योगी को लिखा है. पत्र में कथावाचक द्वारा मांग की गई है कि ट्रस्ट की गतिविधियों में पारदर्शिता लाने हेतु रघुवंशी सूर्यवंशी समाज को सम्मिलित किया जाए. वहीं यूपी के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मामले पर कहा कि ‘हमारी मांग है कि हाई कोर्ट के सिटिंग जज से तुरंत जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके’.

NATIONAL : ‘हमें नहीं पता जांच में क्या हो रहा, अगर लीपापोती की कोशिश हुई तो…’, चंदा चोरी को लेकर भड़का VHP

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अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक फिर दोहराया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच में क्या-क्या हो रहा है इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमारा भी सरकार से आग्रह है कि जो-जो आरोप लगे हैं सबकी जांच होनी चाहिए. जिसके भी खिलाफ आरोप लगे हैं उसकी जांच हो. अगर लीपापोती करने की कोशिश हुई तो हिंदू समाज कभी माफ नहीं करेगा.

आलोक कुमार ने कहा, ‘चंपत राय को उनके खिलाफ हो रहे क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन को पूरा करने तक जनता के सामने आना है कि नहीं आना है ये उनका निर्णय है और इसलिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि वे कैमरे को फेस करें. कुछ लोगों ने कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट से करा लीजिए. मैं कांग्रेस के एक सांसद का पत्र भी देखा जो उन्होंने पीएम मोदी को लिखा था. इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने का फैसला प्रधानमंत्री नहीं कर सकते. वो इसका आदेश नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट ये आदेश दे सकता है.’

इस पूरे विवाद के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने सफाई देते हुए कई अहम बातें कही हैं. ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि दान की रकम की गिनती ट्रस्ट के कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि बैंक की ओर से नियुक्त आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से की जाती थी. ऐसे में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट की नहीं बल्कि बैंक और उसकी व्यवस्था की बनती है. उनके अनुसार, कई बार बिना ठोस आधार के भी आरोप लगाए जाते हैं, खासकर तब जब कोई संगठन या संस्था बड़े धार्मिक या सार्वजनिक कार्यों से जुड़ी हो.

उन्होंने आरोप लगाने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग पहले से ही ट्रस्ट के विरोध में रहे हैं, वे इस तरह के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं.प्रकाश गुप्ता ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ना अपने आप में अच्छी बात है क्योंकि इससे पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह तय करना होगा कि वे किस समय से जांच शुरू करें, क्या यह जांच ट्रस्ट के गठन से शुरू होगी या किसी विशेष अवधि से. यह पूरी तरह जांच एजेंसी यानी एसआईटी पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में जांच को आगे बढ़ाती है.

NATIONAL : क्या आपका PF, पेंशन या बीमा दावा 20 दिन में नहीं निपटा?: अब अधिकारी पर होगी कार्रवाई, जानिए EPFO के नए नियम

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत ईपीएफओ की तीन नई योजनाएं अधिसूचित की हैं। नई व्यवस्था में पीएफ, पेंशन और बीमा दावों का 20 दिनों में निपटारा अनिवार्य होगा। देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की तीन नई योजनाएं अधिसूचित कर दी हैं। इनमें कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-2026 शामिल हैं। नई योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने और भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन तथा बीमा दावों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत यदि भविष्य निधि, पेंशन या बीमा का दावा सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूरा होने के बावजूद 20 दिनों के भीतर नहीं निपटाया जाता, तो संबंधित आयुक्त पर 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकेगा। यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी। मंत्रालय का कहना है, इससे दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी और कर्मचारियों को समय पर उनका पैसा मिलेगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले भी देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे स्पष्ट रूप से 12 प्रतिशत तय कर दिया गया है। पहले अधिकारियों को पीएफ पर घोषित ब्याज दर के अनुसार भुगतान करना पड़ता था।

कर्मचारियों और नियोक्ताओं का अंशदान पहले जैसा रहेगा
नई योजनाएं लागू होने के साथ कर्मचारी भविष्य निधि योजना-1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना-1971, कर्मचारी पेंशन योजना-1995 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-1976 की जगह लेंगी। हालांकि, कर्मचारियों व नियोक्ताओं के अंशदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान देंगे। नियोक्ता के अंशदान में से 8.33 प्रतिशत राशि पेंशन योजना में जाएगी, जबकि केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत का योगदान देगी।

नई योजनाओं में नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि सदस्य पीएफ निकासी, पेंशन, बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ पूरी तरह ऑनलाइन और बिना देरी के ले सकें।

NATIONAL : भारतीय सेना को मिलेंगी हैमर मिसाइलें: रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक आज, आधुनिक सैन्य हथियारों की खरीद का रास्ता साफ

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रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है।इनमें हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल, वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम), स्यूडो सैटेलाइट और ड्रोन रोधी प्रणालियां प्रमुख हैं। इन प्रस्तावों के लागू होने से तीनों सेनाओं की मारक क्षमता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

कई महीनों बाद हो रही इस बैठक में चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन पहली बार अपने नए पद पर शामिल होंगे।

स्वदेशी एमपी-एटीजीएम पर सबसे ज्यादा जोर
बैठक में डीआरडीओ द्वारा विकसित मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना है। करीब 2,600 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत सेना को 100 लांचर, 2,300 मिसाइलें और पांच सिमुलेटर मिलेंगे। इनका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करेगी, जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों की भी भागीदारी प्रस्तावित है।

राफेल और तेजस की ताकत बढ़ाएंगी हैमर मिसाइलें
डीएसी के सामने करीब 600 हैमर प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। लगभग 2,400 करोड़ रुपये की लागत वाली इन मिसाइलों का निर्माण फ्रांस की सैफरन कंपनी और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) के सहयोग से भारत में किया जाएगा।

इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना के राफेल और एलसीए तेजस लड़ाकू विमान लैस होंगे, जबकि नौसेना इन्हें राफेल-एम विमानों के लिए इस्तेमाल करेगी। गलवान संघर्ष के बाद इन मिसाइलों को आपात खरीद के तहत भी शामिल किया गया था।

वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा
थलसेना के लिए रूसी मूल के वर्बा वेरी शार्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (वी-शोर्ड्स) की खरीद पर भी मुहर लग सकती है। यह मौजूदा इगला मिसाइल प्रणाली का उन्नत संस्करण है और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान, हेलीकॉप्टर तथा ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम है। इसका उत्पादन भारत में अडाणी डिफेंस करेगी।

ड्रोन और स्यूडो सैटेलाइट पर भी फैसला संभव
बैठक में साफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, कामिकाजी ड्रोन, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, स्कार्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों से जुड़े उपकरण, फिक्स्ड-विंग स्यूडो सैटेलाइट और नेवल शिपबोर्न एरियल सिस्टम जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने पर भारतीय सशस्त्र बलों की निगरानी, वायु रक्षा और सटीक हमले की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

BUSINESS : Whatsapp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर लग सकती है रोक, मोदी सरकार को सता रही धोखाधड़ी की चिंता

Whatsapp के अपकमिंग फीचर ‘यूजरनेम’ को लेकर केंद्र सरकार चिंतित है। रिपोर्टों के अनुसार, इस फीचर की जांच की जाएगी। सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। उसे चिंंता है कि इस फीचर के कारण धोखाधड़ी हो सकती है। ऐसे में इस फीचर पर रोक लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर इस तरह के स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे हैं जो दावा करते हैं कि लोग दूसरों के नाम पर यूजरनेम को बुक करा रहे हैं।
Whatsapp के इस साल आने वाले ‘यूजरनेम’ फीचर पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार को इस फीचर के कारण धोखाधड़ी और दूसरों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाने की चिंता सता रही है। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी सरकार इस फीचर की जांच करेगी। हमारी सहयोगी वेबसाइट ET ने बताया है कि सरकार वॉट्सऐप के अपकमिंग ‘यूजरनेम’ (Username) फीचर पर रोक लगाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। सोमवार रात वॉट्सऐप यूजरनेम फीचर की बुकिंग शुरू हुई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने यूजरनेम रिजर्व कराए हैं। हालांकि ऐसी खबरें भी सोशल मीडिया में आई थीं कि लोगों ने दूसरों के नाम पर यूजरनेम बुक किए हैं, जिनमें PMNarendraModi और Whatsapp जैसे नाम रिजर्व किए जाने की खबरें हैं।

क्या है वॉट्सऐप यूजरनेम
वॉट्सऐप के अनुसार, वॉट्सऐप यूजरनेम कंपनी का अबतक का सबसे बड़ा प्राइवेसी फीचर है। इसे लोगों के फोन नंबर को सेफ रखने के लिए डिजाइन किया गया है। लोग अपना फोन नंबर किसी को बताए बिना उनसे वॉट्सऐप पर कनेक्ट हो पाएंगे। खास बात है कि लोग अपनी पसंद का यूजरनेम चुन सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि वह यूजरनेम किसी अन्य ऐप के हैंडल से मेल खाता हो। वॉट्सऐप ने स्पष्ट किया है कि यह एक प्राइवेसी फीचर है, सोशल मीडिया हैंडल नहीं।

कंपनी ने बताया है कि फीचर को इस साल के अंत तक लाया जाएगा। हालांकि उससे पहले ही यूजरनेम को रिजर्व कराया जा सकता है। वॉट्सऐप के अनुसार, जब यह फीचर आ जाएगा, तो लोगों को उनके ऐप में नोटिफिकेशन मिल जाएगा। वॉट्सऐप ने सुझाव दिया है कि लोगों के लिए ऐसा अनोखा वॉट्सऐप यूजरनेम चुनना सही रहेगा, जो सिर्फ उन्हीं लोगों को पता हो जिनसे यूजर संपर्क करना चाहता है।

धोखाधड़ी की संभावना
हालांकि केंद्र सरकार ने जिस चिंता को जाहिर किया है, वह गंभीर है। अगर इस फीचर का गलत उपयोग हुआ तो लोगों के साथ धोखाधड़ी हो सकती है। ऐसे में संभव है कि कानूनी विकल्पों पर विचार के कारण इस फीचर का भारत में आना इतना आसान ना हो।

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