Saturday, June 20, 2026
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ODISHA : स्कूली पाठ्यपुस्तकों में ‘त्रुटियां’; सरकार ने सुधार करने का आश्वासन दिया

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भुवनेश्वर, 16 जून (भाषा) ओडिशा के सरकारी स्कूलों के कुछ शिक्षकों ने पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए नयी पाठ्यपुस्तकों में कई ‘‘त्रुटियों’’ की ओर इशारा किया है, जिनमें ‘‘वर्तनी की अशुद्धियां’’ और प्रख्यात हस्तियों के ‘‘गलत नाम’’ शामिल हैं।

‘प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष ब्रह्मानंद महाराणा ने कहा कि स्कूल की इन पाठ्यपुस्तकों में 1,600 से अधिक ‘‘त्रुटियां’’ पाई गई हैं।

ये पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार तैयार की गई हैं और इन्हें 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाना है।

इन ‘‘त्रुटियों’’ में ‘‘वर्तनी की अशुद्धियां’’, प्रख्यात हस्तियों के गलत नाम और तथ्यों में गलतियों से लेकर गलत तस्वीरें तक शामिल हैं।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘पहली से आठवीं कक्षा तक की पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियां पाई गईं। ओडिशा विधानसभा की जगह कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है।’’

महाराणा ने बताया कि इसी तरह, ओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियों को झारखंड में स्थित बताया गया था।

उन्होंने मामले की जांच किये जाने, और त्रुटि के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को तुरंत त्रुटियों को ठीक करना चाहिए और छात्रों को संशोधित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराया जाना चाहिए।’’

स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने कहा, ‘‘विभाग त्रुटियों को लेकर चिंतित है और उन्हें ठीक करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि पाठ्यपुस्तकें नयी तैयार की गई हैं, इसलिए उनमें छपाई की कुछ गलतियां हो सकती हैं।’’

इस बीच, विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ओडिया शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रही है।

पार्टी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा कि ये पाठ्यपुस्तकें ‘‘राष्ट्रीय शर्म’’ का विषय हैं और ‘‘इस तरह की त्रुटियां न केवल उड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति को कमजोर करती हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य को भी खतरे में डालती हैं।’’

बीजद नेता ने सभी ‘‘त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों’’ को तुरंत वापस लेने और उच्च-स्तरीय जांच की मांग की।

NATIONAL : टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी बैन रहेगा या नहीं: फैसला सुरक्षित, NEET री-एग्जाम पेपर लीक पर हुई गरमागरम बहस

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टेलीग्राम ऐप पर केंद्र सरकार के अस्थायी बैन को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. केंद्र सरकार ने NEET री-एग्जाम पेपर लीक की चिंताओं के कारण ये बैन लगाया है. दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर गरमागरम बहस देखने को मिली. केंद्र सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं.

सॉलिसिटर जनरल की दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट में दलील दी, ‘कृपया जनहित का ध्यान रखें. हम छात्रों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते. उनके [Telegram] पास तारीख और समय बदलने का फीचर है. मान लीजिए कि 21 जून को सबके पास पेपर है, तो कोई उसे 22 जून को Telegram पर पोस्ट कर सकता है और तारीख व समय बदलकर यह दिखा सकता है कि इसे 18 जून को अपलोड किया गया था. ऐसा 2024 में हुआ था. हमने उचित कदम उठाए हैं. हमने ऐसे उपाय किए हैं, जिनसे कम से कम दखल हो.’

तुषार मेहता ने फाइनल ऑर्डर पढ़कर सुनाया और कहा कि Telegram पर लगाई गई रोक किसी खास घटना से जुड़ी है और कुछ समय के लिए है.

फिर हुए सवाल-जवाब
हाई कोर्ट ने पूछा, ‘हम 15 करोड़ लोगों के अधिकारों को सिर्फ़ इसलिए कैसे रोक सकते हैं क्योंकि नागरिकों का एक समूह परीक्षा दे रहा है?’
तुषार मेहता का जवाब, ‘इस प्लेटफॉर्म पर बहुत सारे ग्रुप और चैनल चल रहे हैं. हो सकता है कि माननीय जजों ने दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर इस तरह से चलने वाले चैनलों के बारे में कभी नहीं सुना हो.’
बेंच: सवाल यह है कि क्या आप किसी और के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों को रोक सकते हैं. जब किसी राज्य या राज्य के किसी हिस्से में इंटरनेट पर रोक लगाई जाती है, तो हो सकता है कि सिर्फ 10% लोग ही उपद्रवी हों. अगर कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी हो, तो इसकी इजाजत दी जा सकती है. यहीं पर ‘आनुपातिकता’ (proportionality) की कसौटी लागू होती है.
मामला क्या है
NEET परीक्षाओं के कारण 22 जून तक प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने वाले केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई थी. केंद्र सरकार का कहना है कि टेलीग्राम ‘फ्रेंकस्टीन’ जैसा है. वहीं टेलीग्राम का कहना है कि सरकार का आदेश जरूरत से ज़्यादा सख्त है और वह कानूनों का पालन कर रहा है.

टेलीग्राम पर गंभीर आरोप
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम नया ‘डार्क वेब’ बनता जा रहा है, जो अपराधियों को जोड़ता है और उनकी गैर-कानूनी गतिविधियों में मदद करता है. केंद्र सरकार ने ये बातें टेलीग्राम की उस याचिका के विरोध में कहीं, जिसमें उसने NEET-UG (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अंडरग्रेजुएट) की दोबारा परीक्षा से पहले भारत में अपनी सर्विस पर 22 जून तक रोक लगाने के सरकारी फैसले को चुनौती दी थी.
सरकार ने हाई कोर्ट को बताया, “टेलीग्राम नया ‘डार्क वेब’ बन गया है और यह गलत काम करने वालों को आपस में जोड़ता है. अपराधी तेजी से टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे ऐसे चैनलों पर लिंक पोस्ट करते हैं जो ‘डीप वेब’ लिंक के जरिए ‘डार्क वेब’ फोरम से जुड़ते हैं, जिससे अधिकारियों के लिए अपराधियों का पता लगाना और उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है.”
सरकार का यह फैसला इस चिंता पर आधारित था कि NEET-UG 2026 पेपर लीक में शामिल संगठित धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क ने टेलीग्राम का इस्तेमाल किया था. इसी लीक की वजह से मई 2026 में हुई परीक्षा रद्द कर दी गई थी.
केंद्र सरकार के किस विभाग ने जारी किए आदेश

स्पॉन्सर किया गया
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत एक आदेश जारी किया, जिसमें भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म तक पहुंच को 22 जून तक सीमित कर दिया गया. एक अन्य आदेश में प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया गया कि वह पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के लिए संदेश-संपादन (message-editing) सुविधा को 30 जून तक बंद कर दे. सरकार ने इस कदम को 21 जून को होने वाली पुन: परीक्षा की शुचिता (integrity) की रक्षा के लिए आवश्यक बताया.

अधिकारियों का तर्क था कि टेलीग्राम चैनलों का उपयोग लीक या नकली प्रश्न पत्र वितरित करने, धोखाधड़ी का समन्वय करने और प्लेटफॉर्म की संपादन सुविधा के माध्यम से संदेश टाइमस्टैम्प में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा था.

टेलीग्राम ने इसी आदेश को दी चुनौती
टेलीग्राम ने इस बैन को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की और तर्क दिया कि ऐप को इस तरह बड़े पैमाने पर ब्लॉक करना गैर-कानूनी और असंवैधानिक था. कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसने गैर-कानूनी NEET कंटेंट से जुड़े 900 से ज़्यादा लिंक हटा दिए हैं और नियमों के उल्लंघन की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग टूल्स और मैनुअल मॉडरेशन का इस्तेमाल किया है.

केंद्र सरकार ने ऐप पर लगाए गए अस्थायी बैन को सही ठहराने के लिए टेलीग्राम की याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया. अन्य तर्कों के अलावा, केंद्र सरकार ने बताया कि “Neet Mafia” नाम के एक टेलीग्राम चैनल की पहचान की गई थी, जिसके आखिरी बार जांचने पर लगभग 18,617 सब्सक्राइबर थे.

हलफनामे के अनुसार, यह चैनल कथित NEET परीक्षा पेपर लीक, एडवांस बुकिंग की व्यवस्था, पेमेंट लेने के तरीकों और परीक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने के वादों से संबंधित कंटेंट को बड़े पैमाने पर फैला रहा था. केंद्र सरकार के जवाबी हलफनामे में कहा गया है, “इस चैनल का दायरा ही यह दिखाता है कि टेलीग्राम में एक साथ हज़ारों यूज़र्स तक परीक्षा से जुड़ा गैर-कानूनी कंटेंट बड़े पैमाने पर पहुंचाने की क्षमता है.” केंद्र सरकार के अनुसार, टेलीग्राम का खास टेक्निकल आर्किटेक्चर, जो पूरी तरह से क्लाउड-बेस्ड है, बड़ी मात्रा में कंटेंट भेजने की सुविधा देता है.

केंद्र के जवाबी हलफनामे में कहा गया है कि यह प्लेटफ़ॉर्म दो लाख सदस्यों तक के ग्रुप और ऐसे पब्लिक चैनल बनाने की सुविधा देता है जो लगभग असीमित लोगों तक कंटेंट पहुंचा सकते हैं, जिससे किसी भी गैर-कानूनी कंटेंट की पहुंच काफी बढ़ जाती है. केंद्र का यह भी तर्क है कि यह प्लेटफ़ॉर्म फ़ोन नंबर के बजाय बॉट और यूज़रनेम के इस्तेमाल की सुविधा देता है, जिससे यह उन लोगों के लिए आपराधिक गतिविधियों का अड्डा बन गया है, जो अपनी पहचान छिपाना चाहते हैं. जवाबी हलफनामे में जिन गैर-कानूनी गतिविधियों का ज़िक्र किया गया है, उनमें ड्रग तस्करी, आतंकवाद, बच्चों का शोषण, साइबर स्कैम और धोखाधड़ी शामिल हैं.

आतंकवादी संगठनों को भी पहुंचा रहा फायदा
हलफनामे में कहा गया है, “आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोग टेलीग्राम ग्रुप और चैनल के ज़रिए चरमपंथी हिंसक गतिविधियों और दूसरे कट्टरपंथी कंटेंट का प्रचार कर रहे हैं. इनका मकसद गलत जानकारी फैलाना या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना है.” सरकार ने यह भी दावा किया है कि इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) के साथ-साथ पायरेटेड फिल्में, वेब सीरीज़ और दूसरे पेड मीडिया कंटेंट को फैलाने के लिए किया जा रहा है.

केंद्र सरकार ने हलफनामे में यह भी बताया गया है कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर साइबर अपराध की शिकायतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. इन शिकायतों में कहा गया है कि धोखाधड़ी और आपराधिक साइबर गतिविधियों को अंजाम देने के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल किया गया था. केंद्र ने यह भी आरोप लगाया है कि टेलीग्राम बॉट्स नागरिकों के निजी डेटा, जिनमें निजी मोबाइल नंबर और आधार कार्ड विवरण शामिल हैं, तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं.

हलफनामे में कहा गया है, “जब इस तरह की जानकारी बार-बार और व्यापक रूप से प्रसारित होने लगती है, तो मध्यस्थ द्वारा होस्ट की गई सभी जानकारी को ब्लॉक करना ही एकमात्र विकल्प होता है, क्योंकि तकनीकी रूप से अवैध सामग्री को वैध सामग्री से अलग करना संभव नहीं है.” केंद्र ने आगे कहा है कि वह निष्पक्ष पुन: NEET परीक्षा आयोजित करने और उक्त पुन: परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. हलफनामे में कहा गया है, “धारा 69A के तहत जानकारी को ब्लॉक होने से रोकने में किसी भी देरी के परिणामस्वरूप अधिनियम की धारा 69A के तहत परिकल्पित परिणाम हो सकते थे और इससे बड़े पैमाने पर छात्र अशांति, सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान और संज्ञेय अपराध करने के लिए उकसाने की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी.”

FIFA WC: स्विस टीम ने दूसरे हाफ में दिखाया दम, मन्जांबी ने दागे दो गोल; झाका ने पेनाल्टी से जीत पर लगाई मुहर

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फीफा विश्व कप 2026 के ग्रुप-बी मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से करारी शिकस्त दी। लंबे समय तक संघर्षपूर्ण रहे इस मुकाबले में स्विस टीम ने अंतिम 20 मिनट में आक्रामक खेल दिखाते हुए चार गोल दागे और टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की।

लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले का पहला हाफ गोलरहित रहा। दोनों टीमों ने सावधानीपूर्वक खेल दिखाया, लेकिन कोई भी पक्ष बढ़त हासिल नहीं कर सका। दूसरे हाफ में स्विट्जरलैंड ने दबाव बढ़ाया और मैच के अंतिम चरण में बोस्नियाई रक्षा पंक्ति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

74वें मिनट में युवा खिलाड़ी जोहान मंजाम्बी ने शानदार गोल कर स्विट्जरलैंड का खाता खोला। इसके बाद 84वें मिनट में रूबेन वर्गस ने बढ़त को दोगुना कर दिया। 90वें मिनट में मन्जांबी ने अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 3-0 कर दिया और मैच लगभग स्विट्जरलैंड की झोली में डाल दिया।

रेड कार्ड बना टर्निंग पॉइंट

बोस्निया-हर्जेगोविना की मुश्किलें 80वें मिनट में और बढ़ गईं, जब डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच को अंतिम खिलाड़ी के रूप में फाउल करने पर सीधे लाल कार्ड दिखाया गया। इसके बाद टीम 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गई और स्विट्जरलैंड ने इसका पूरा फायदा उठाया।

अंतिम मिनटों में गोलों की बारिश

इंजरी टाइम में बोस्निया-हर्जेगोविना के एरमिन माहमिक ने 90+3 मिनट में शानदार गोल कर अंतर कम किया और स्कोर 3-1 कर दिया। हालांकि, इसके तुरंत बाद स्विट्जरलैंड को पेनल्टी मिली, जिसे कप्तान ग्रेनिट झाका ने 90+7 मिनट में गोल में बदलकर टीम की 4-1 की शानदार जीत पर मुहर लगा दी।

ग्रुप-बी में मजबूत हुई स्विट्जरलैंड की स्थिति

पहले मैच में ड्रॉ खेलने के बाद स्विट्जरलैंड के लिए यह जीत बेहद अहम रही। इस परिणाम के साथ स्विस टीम ने ग्रुप-बी में नॉकआउट चरण की अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। वहीं बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए अब अगले मुकाबले में जीत लगभग अनिवार्य हो गई है। करीब 70 मिनट तक संतुलित दिखने वाला मुकाबला अंतिम चरण में पूरी तरह स्विट्जरलैंड के नाम रहा। मन्जांबी और वर्गास की प्रभावशाली मौजूदगी, झाका की कप्तानी और बोस्निया के रेड कार्ड ने मैच का रुख बदल दिया। स्विट्जरलैंड ने दिखा दिया कि दबाव के क्षणों में वह किसी भी टीम के खिलाफ घातक साबित हो सकता है।

NATIONAL : बागी गुट ही असली TMC, ममता की पार्टी के कांग्रेस में विलय होने की अटकलों पर बोले ऋतब्रत बनर्जी

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बुधवार (10 जून 2026) को दावा किया कि उनका गुट ही ‘असली तृणमूल’ है. उन्होंने इसी के साथ टीएमसी के कांग्रेस में विलय की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया. ऋतब्रत का यह बयान पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात और उनके नीत गुट के भविष्य को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच आया है.

ऋतब्रत ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में बागी गुट के विधायकों की संख्या 58 से बढ़कर 64 हो गई है. उन्होंने कहा कि उनके नीत गुट को पार्टी के ज्यादातर विधायकों और बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन हासिल है और वे तृणमूल कांग्रेस के बैनर तले ही काम करते रहेंगे. बंगाल विधानसभा के बाहर उन्होंने कहा, ‘हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं. हम कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं.’

ममता बनर्जी की कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात और राष्ट्रीय राजधानी में अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत की खबरों के बाद लगाई जा रही अटकलों के बीच उनकी ये टिप्पणियां आई है. इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में ममता नीत धड़े के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े अंदरूनी संकट से जूझ रही है.

ऋतब्रत ने हालांकि उन सुझावों को खारिज कर दिया कि संगठन कांग्रेस के नेतृत्व वाली किसी व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है. उन्होंने कहा, ‘हमारे साथ विधायकों की संख्या पहले ही 64 के पार हो चुकी है. कल एक और विधायक के हमारे साथ जुड़ने पर यह संख्या 65 हो सकती है. जाहिर है, असली तृणमूल कांग्रेस हम ही हैं. दिल्ली में कौन किससे मिलता है, यह उनका मामला है और हमारे लिए इसका कोई महत्व नहीं है.’ बागी नेता ने कहा कि विधानसभा में गुट की बदली हुई ताकत को दर्शाने वाला एक नया पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा.

उन्होंने दावा किया कि बागी गुट को न केवल विधायकों का, बल्कि सांसदों, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और जिला-स्तर के नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है. ऋतब्रत ने सवाल किया, ‘ज्यादातर विधायक कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं. ज्यादातर सांसद भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं. कई जिला नेता और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं तो फिर विलय का सवाल ही कहां उठता है?’ उन्होंने दोहराया कि लोकसभा में बागी सांसद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन जारी रखेंगे.

ऋतब्रत का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में एक अलग संसदीय गुट बनाने की जानकारी दे दी है और एनडीए को समर्थन देने का संकल्प व्यक्त किया है. इस हफ्ते की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस का संकट तब और गहरा गया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के भीतर शुरू हुई बगावत संसद तक पहुंच गई.

इस माहौल में दिल्ली में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातों का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है. ऐसी अटकलें भी तेज हैं कि ममता बनर्जी नीत तृणमूल का धड़ा कांग्रेस के साथ नजदीकी रिश्ते बनाने या पार्टी के विलय पर विचार कर सकता है. किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से विलय के बारे में बात नहीं की है, लेकिन इन बैठकों ने इतनी राजनीतिक चर्चा पैदा कर दी है कि बागी खेमे को बार-बार अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है.

ऋतब्रत से जब यह पूछा गया कि अगर ममता बनर्जी अपने धड़े का कांग्रेस में मिलाने का फैसला करती हैं तो क्या होगा, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया. उन्होंने कहा, ‘कल के सवालों का जवाब कल ही मिलेगा. आज की बात करें तो यह संख्या 64 है और बढ़ रही है.’

NATIONAL : राम मंदिर के चढ़ावे में गबन की जांच के लिए पीएमओ से पहुंचे अफसर, आज पहुंचेगी एसआईटी

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राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी। इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है।

मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है। इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।

इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं। चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।

अधिकारियों से मिले बिना लखनऊ रवाना हुए विनय कटियार
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर अधिकारियों से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराने का एलान करने वाले पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार रविवार को अधिकारियों से मिले बिना ही लखनऊ रवाना हो गए।

विनय कटियार ने शनिवार को अयोध्या पहुंचने के दौरान कहा था कि वह रविवार सुबह डीआईजी और एसएसपी से मिलकर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित घपला करने वालों के खिलाफ शिकायत करेंगे तथा दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं के दान में गड़बड़ी की है तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। हालांकि रविवार को उनके अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम नहीं हो सका और वह बिना किसी औपचारिक शिकायत के ही लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

नृपेंद्र मिश्र ने लिया दानपेटियों का जायजा
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को श्रीराम जन्मभूमि परिसर में दानपेटियों और चढ़ावे के प्रबंधन की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने चढ़ावा संग्रह, सुरक्षा और बैंक में जमा कराने तक की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने रामलला के गर्भगृह में रखी दान पेटियां भी देखीं। मिश्र ने जांच के लिए गठित एसआईटी पर भरोसा जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे से भी कम समय में जांच समिति गठित कर दी। समिति की संस्तुतियां का क्रियान्वयन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच : अवधेश प्रसाद
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने रविवार को सिविल लाइंस स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता कर राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला सामान्य वित्तीय गड़बड़ी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की एसआईटी पर उन्हें भरोसा नहीं है। मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट को भंग कर सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को पदों से हटाया जाए।

ट्रस्ट भवन में लगा नया लॉकर
राम मंदिर के दान से जुड़े प्रकरण के बाद व्यवस्थाओं में बदलाव शुरू हो गया है। इसी क्रम में ट्रस्ट कार्यालय में नया उच्च सुरक्षा वाला लॉकर लगाया गया है। इसका उद्देश्य दानपेटियों से प्राप्त नकदी, बहुमूल्य आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपनी देखरेख में नए लॉकर को अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थापित करवाया है।

BUSINESS : लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स में 711 अंकों की गिरावट

नई दिल्ली, 19 जून (हि.स)। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार लाल निशान पर खुला। शुरुआत बेहद खराब रही है। भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए।

इस वजह से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 710.77 अंक यानी 0.92 फीसदी की गिरावट के साथ 76,699.20 के स्तर पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 194.20 अंक यानी 0.80 फीसदी फिसलकर 23,973.80 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है।

आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा करीब 6 फीसदी तक की गिरावट है। इंफोसिस के शेयर में 8 फीसदी, टीसीएस 6 फीसदी, टेक महिंद्रा 6 फीसदी और एचसीएल टेक शेयर में 5 फीसदी तक गिरावट है। वहीं, भारतीय मुद्रा रुपया शुरुआती कारोबार में 10 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.30 पर कारोबार कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि गरुवार को शेयर बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 254.36 अंक यानी 0.33 फीसदी की उछाल के साथ 77,409.98 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 82.30 अंक यानी 0.34 फीसदी चढ़कर 24,168 के स्तर पर बंद था।

NATIONAL : नारी शक्ति के दावों की खुली पोल: आरक्षण कानून के बाद भी महिलाएं उपेक्षित, चुनावों में मिले सिर्फ 10 फीसदी टिकट

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संसद से महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी 2024 से अब तक के चुनावों में दलों ने सिर्फ 10% टिकट महिलाओं को दिए। देश में 152 लोकसभा सीटें ऐसी थीं जहां एक भी महिला उम्मीदवार नहीं थी। यह स्थिति दिखाती है कि बिना कानूनी मजबूरी के राजनीतिक दल महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार नहीं हैं।

देश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव सुधारों पर काम करने वाली संस्था एडीआर ने एक नया खुलासा किया है। संसद से महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी हालात नहीं बदले हैं। राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट देने में अब भी भारी कंजूसी कर रहे हैं। साल 2024 के बाद से हुए चुनावों में केवल 10 फीसदी महिलाओं को ही उम्मीदवार बनाया गया है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 51,708 उम्मीदवारों के आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया है। यह अध्ययन महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद हुए लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनावों पर आधारित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कुल उम्मीदवारों में से केवल 5,095 ही महिलाएं थीं। यह कुल संख्या का महज 10 प्रतिशत बैठता है।

साल 2024 के लोकसभा चुनाव की तस्वीर भी बेहद निराशाजनक रही। इस चुनाव में कुल 8,360 उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया था। इनमें से महिला उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 800 थी। देश के कुल 543 संसदीय क्षेत्रों में से 152 सीटें ऐसी थीं, जहां एक भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरी। यही वजह है कि वर्तमान 18वीं लोकसभा में केवल 74 महिला सांसद हैं, जो पूरे सदन का सिर्फ 14 फीसदी हिस्सा है।

महिलाओं को आगे बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करने वाले दलों की पोल इस रिपोर्ट ने खोल दी है। राष्ट्रीय दलों में भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा 16 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिए। कांग्रेस और माकपा इस मामले में 13-13 प्रतिशत पर रहीं। बहुजन समाज पार्टी ने केवल आठ प्रतिशत महिलाओं को मैदान में उतारा। वहीं आम आदमी पार्टी ने इस विश्लेषण के दायरे में आए अपने 22 उम्मीदवारों में से एक भी महिला को टिकट नहीं दिया।

विधानसभा चुनावों के आंकड़े भी कुछ ऐसे ही हैं। बिल पास होने के बाद से देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराए गए। इनमें उतरे कुल 31,429 उम्मीदवारों में से सिर्फ 3,273 महिलाएं थीं। यह आंकड़ा भी लगभग 10.2 प्रतिशत ही ठहरता है। किसी भी राज्य में महिला उम्मीदवारों का ग्राफ 14 प्रतिशत से ऊपर नहीं गया। साल 2024 में ओडिशा इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां 13.9 फीसदी महिला प्रत्याशी थीं। इसके बाद 2025 में दिल्ली में 13.7 फीसदी और 2026 में पुडुचेरी में 13.6 फीसदी महिला उम्मीदवार थीं।

देश में महिलाओं की आबादी लगभग 49 प्रतिशत है। कुल 66.29 करोड़ मतदाता महिलाएं हैं। इसके बावजूद राजनीतिक ताकत के मामले में भारत बहुत पीछे है। 1 मार्च 2025 की आईपीयू रैंकिंग के अनुसार, संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत दुनिया के 185 देशों में 151वें स्थान पर खड़ा है।

महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) संसद से पास तो हो चुका है, लेकिन इसके तहत 33 प्रतिशत सीटें मिलने में अभी वक्त लगेगा। यह कानून देश में अगली जनगणना और फिर होने वाले परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा। रिपोर्ट की मानें तो इसके लिए साल 2026-27 में प्रस्तावित जनगणना का समय पर होना बहुत जरूरी है, तभी साल 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से महिलाओं को उनका असली हक मिल पाएगा।

Jharkhand : झारखंड राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सियासी रोमांच, क्रॉस वोटिंग के गणित से बढ़ी महागठबंधन की टेंशन

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झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। एक सीट झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने से रिक्त हो रही है।

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों समेत देशभर की 24 सीटों पर चुनाव की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन से खाली हो रही एक सीट और भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण दूसरी सीट पर चुनाव होना है। ऐसे में दोनों सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है।

विधानसभा में संख्या बल के आधार पर महागठबंधन खुद को मजबूत स्थिति में मान रहा है। झामुमो के पास 34 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक हैं। इसी संख्या के आधार पर गठबंधन दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है।

हालांकि अंदरखाने सीट बंटवारे को लेकर खींचतान भी सामने आने लगी है। कांग्रेस एक सीट पर अपना दावा ठोक रही है, लेकिन अब तक महागठबंधन में अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

बीजेपी की आक्रामक रणनीति

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी संख्या बल कम होने के बावजूद चुनाव को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाए हुए है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दोनों सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने का दावा किया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि एनडीए की नजर क्रॉस वोटिंग और सत्तापक्ष में सेंधमारी की संभावना पर टिकी हुई है।

चुनाव कार्यक्रम भी हुआ तय

राज्यसभा चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी हो चुकी है। 8 जून तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 11 जून तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे और 18 जून को मतदान कराया जाएगा। उसी दिन चुनाव परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।

बिहार-बंगाल की सफलता से उत्साहित बीजेपी

हाल ही में बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में मिली राजनीतिक सफलता से भाजपा काफी उत्साहित नजर आ रही है। वहीं इन राज्यों में झामुमो की अनदेखी को लेकर महागठबंधन के भीतर भी असहजता की चर्चा हो रही है। ऐसे में झारखंड का यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक रणनीति और अंदरूनी समीकरणों की बड़ी परीक्षा भी समझा जा रहा है।

NATIONAL : शाह बोले- डिजिटल मार्केट प्लेस और अंतरराष्ट्रीय विस्तार से होगी सहकारी उत्पादों की पहचान

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सहकारी बैंकिंग, जैविक उत्पादों और सहकारी निर्यात को मजबूत करने के लिए बनाए गए राष्ट्रीय रोडमैप की समीक्षा की। गृह मंत्री ने उन उपायों की जानकारी दी, जिसके माध्यम से सहकारी क्षेत्र को विस्तार का मौका मिलेगा। को-आप मार्क, डिजिटल मार्केट प्लेस और अंतरराष्ट्रीय विस्तार से सहकारी उत्पादों की पहचान होगी। इसके जरिए सहकारी उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी और वे बाजार में मजबूती से टिक पाएंगे।

शाह ने कहा, सहकारी बैंक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा प्रणाली और साझा सेवाओं को जल्द से जल्द अपनाएं। ग्रामीण सहकारी बैंक ‘सहकार सारथी’ से और शहरी सहकारी बैंक एनयूसीएफडीसी से जुड़ें। गृह मंत्री ने सहकारी बैंकों को साइबर क्राइम से सचेत रहने की सलाह दी है। इसके लिए उन्होंने म्यूल हंटर. एआई का इस्तेमाल करने की बात कही है। इसे गृह मंत्रालय के I4C के साथ एकीकृत कर सहकारी बैंकों में धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन और साइबर सुरक्षा की तैयारियों को मजबूत किया जा सकेगा।

सहकार सारथी ने एईपीएस सेवाएं शुरू की हैं। इसके जरिए चुनिंदा सहकारी बैंकों में ई-केवाईसी लाइव के माध्यम से अगस्त 2026 तक 100 सहकारी बैंकों को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

एनयूसीएफडीसी सभी शहरी सहकारी बैंकों को तकनीकी समाधान और संस्थागत मदद देने के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाने का काम कर रहा है। एनसीओएल जैविक किसानों से खरीद बढ़ाएगा और परीक्षण, प्रमाणन तथा बाजार संपर्क को मजबूत करेगा। एनसीईएल सहकारी उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाएगा।

WORLD : ‘प्रिय मित्र नरेंद्र…’, मैक्रों ने हिंदी बोलकर चौंकाया, PM मोदी ने कहा- वादा निभाना है

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत इनोवेट्स 2026 के उद्घाटन के दौरान मैक्रों ने औपचारिक रूप से पीएम मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी.

फ्रांस में आयोजित सालाना G7 समिट का समापन हो गया है. ऐसे में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की सफल यात्रा पर आभार जताया. लेकिन चौंकाने वाली बात ये रही कि उन्होंने हिंदी में वीडियो शेयर कर पीएम मोदी को विदाई दी.

मैक्रों ने हिंदी में कहा कि प्रिय मित्र नरेंद्र, मुझे बहुत खुशी है, दौरे के लिए स्वागत करते हुए. फ्रांस और भारत की दोस्ती अमर रहे. इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी में कहा कि मुझे उम्मीद है कि मैंने हिंदी सही तरीके से बोली. आपकी इस यात्रा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. हमारी दोस्ती के लिए शुक्रिया. ये दौरा बेहद कामयाब रहा. फ्रांस आपसे प्यार करता है. हम फरवरी में आपसे दोबारा मिलने के लिए उत्सुक हैं. जय हिंद.

मैक्रों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पीएम मोदी के साथ एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वह पीएम मोदी का फ्रांस दौरे के लिए आभार जताते हैं. इस पर पीएम मोदी उनसे कहते हैं कि अब आपको भी अपना वादा पूरा करना है और भारत आना है. इस पर मैक्रों कहते हैं कि वह अगले साल फरवरी में जरूर भारत आएंगे.

इससे पहले भारत इनोवेट्स 2026 के उद्घाटन के दौरान मैक्रों ने औपचारिक रूप से पीएम मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी. इस उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए मैक्रों ने कहा था कि यह मील का पत्थर प्रधानमंत्री के नेतृत्व और भारतीय लोकतंत्र की मजबूती दोनों को दर्शाता है.

उन्होंने कार्यक्रम में कहा था कि यह आपके दृढ़ संकल्प वाले कार्यों, आपके देश की ताकत और उसकी महान उपलब्धियों के बारे में बहुत कुछ बताता है. यह वास्तव में अद्भुत है. बता दें कि 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा किया था, जिससे उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का 4,398 दिनों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया था. नेहरू ने यह कार्यकाल 1952 से 1964 के बीच पूरा किया था.

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