Wednesday, August 5, 2026
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E20 Petrol Protest : दिल्ली में फिर निकलेगा संसद मार्च… E20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को कौन उतरेगा सड़क पर?

सोशल मीडिया पर ‘ई-20 जनता पार्टी’ का आंदोलन शुरू होने के बाद, दिल्ली में ई-20 एथनॉल मिश्रण नीति के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक विरोध मार्च की घोषणा की गई है। संगठनों ने माइलेज और इंजन के नुकसान की आशंका को लेकर इसे वापस लेने की मांग की है।

E20 Petrol Protest: दिल्ली के परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति को वापस लेने की मांग को लेकर चार अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की। ‘दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन’ और अन्य संगठनों ने यह आह्वान किया।

‘दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि हम एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति को वापस लेने की मांग को लेकर चार अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं। हम इस मुद्दे पर अब तक चुप बैठे सांसदों को जागने का संदेश देना चाहते हैं, क्योंकि एथनॉल मिश्रण के कारण देशभर में वाहनों में समस्याएं सामने आ रही हैं।

‘हम इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते’
उन्होंने कहा कि हम इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते और न ही हमारा किसी ‘ई-20 जनता पार्टी’ या कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) या किसी अन्य राजनीतिक दल से कोई संबंध है। वो ई-20 ईंधन के खिलाफ जारी ऑनलाइन आंदोलन का जिक्र कर रहे थे। इसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।

संसद मार्च को ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ का मिला समर्थन
‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने कहा कि वो ई-20 ईंधन को उपभोक्ताओं के लिए एकमात्र विकल्प बनाने के सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने कहा है कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल यात्रियों पर जबरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए। लोगों के पास विकल्प होना चाहिए, लेकिन फिलहाल कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा है। हम संसद तक होने वाले विरोध मार्च का समर्थन कर रहे हैं। एसोसिएशन की ओर से अभी तक किसी हड़ताल का आह्वान नहीं किया गया है।

US Iran War Updates: डोनाल्ड ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अमेरिका-ईरान के बीच नई बातचीत कहां होगी और इसमें कौन-कौन शामिल होगा.

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अमेरिका-ईरान में आज फिर से बातचीत, ट्रंप के दावे और ईरान की चुप्पी के बीच कैसे आएगी शांति?US Iran Talks: ट्रंप का दावा- अमेरिका और ईरान की सोमवार को बैठक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ नई बातचीत सोमवार से शुरू होगी. उनका दावा है कि उन्होंने ईरान पर हमला करने की योजना फिलहाल टाल दी है, ताकि युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश की जा सके. ईरान ने अभी भी सार्वजनिक तौर पर इस बैठक की बात को नहीं कबूला है. यह युद्ध अब छठे महीने में पहुंच चुका है और पूरी दुनिया पर असर डाल रहा है. ट्रंप ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि बातचीत में होर्मुज (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का मुद्दा शामिल होगा. यह दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जो इस संघर्ष में बड़ा विवाद का कारण बन गया है. उन्होंने कहा कि बातचीत का अंतिम लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना है.

दूसरी तरफ, ईरान ने कहा कि वह ओमान के साथ होर्मुज से गुजरने वाले एक नए रास्ते पर समझौते के करीब पहुंच गया है. रविवार को इस इलाके के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट की खबर भी सामने आई, जिससे यह साफ हो गया कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग अभी भी बेहद अस्थिर बना हुआ है. ट्रंप द्वारा नई बातचीत की घोषणा के बाद सोमवार को एशियाई बाजार खुलते ही तेल की कीमतों में गिरावट आ गई. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 4.7 प्रतिशत गिरकर 80.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.

धमकी उम्मीद और धमकी… इस बार क्या कुछ बदलेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से युद्ध चल रहा है. उसी दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अचानक हमला किया था. हालांकि, पिछले कई महीनों में रुक-रुक कर चली कूटनीतिक बातचीत के कारण कुछ समय के लिए तनाव कम भी हुआ था. पिछले महीने फिर से हमले शुरू होने के बाद यह डर बढ़ गया था कि लड़ाई एक बार फिर तेज हो सकती है. ट्रंप ने ईरान पर “बहुत बड़ा हमला” करने की धमकी दी थी. खबरें थीं कि वह ईरान के ऊर्जा ढांचे पर भी नए हमलों पर विचार कर रहे हैं. इस बीच, पूरे क्षेत्र में अमेरिकी दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया था.

लेकिन शनिवार को ट्रंप अपने इस रुख से पीछे हट गए. उन्होंने कहा कि समझौते की रूपरेखा तैयार हो चुकी है. हालांकि सच्चाई यह है कि यह पहली बार नहीं था जब ट्रंप शांति की उम्मीद को चिंगारी दे रहे थे. रविवार को एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “अब हम नेगोशिएशन के जरिए उनसे बात कर रहे हैं. यह कल दोपहर से शुरू होगी.” हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि बातचीत कहां होगी और इसमें कौन-कौन शामिल होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के अलावा अमेरिका के सहयोगी देश सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने भी उनसे हमला रोकने की अपील की थी. ट्रंप ने दावा किया कि अगर हमला होता, तो वह “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला” होता. हालांकि, ईरानी मीडिया ने इस बात से इनकार किया कि तेहरान ने ट्रंप से हमला न करने की कोई अपील की थी.

WORLD : भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को नई रफ्तार, जयशंकर बोले- अब साझेदारी को माइनिंग सेक्टर तक ले जाना चाहते हैं

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भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल हुई है. दोनों देशों ने व्यापार, माइनिंग, रेयर अर्थ मिनरल्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है. इस साझेदारी से दोनों देशों को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है.

रत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में अहम पहल हुई है. चार दिवसीय भारत दौरे पर आए उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, रेयर अर्थ मिनरल्स, माइनिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की. भारत ने साफ किया कि अब वह उज्बेकिस्तान के साथ साझेदारी को माइनिंग सेक्टर तक ले जाना चाहता है.

माइनिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स पर रहेगा फोकस
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने एक्सटेंडेड नेवरहुड (विस्तारित पड़ोस) का अहम हिस्सा मानता है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और व्यापार का संबंध सदियों पुराना है और अब यह रिश्ता नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है. जयशंकर ने कहा कि निर्माण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा के बाद अब दोनों देश माइनिंग सेक्टर, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मौजूदा व्यापार लगभग एक अरब डॉलर का है, लेकिन दोनों देशों की क्षमता इससे कहीं अधिक है. इसलिए व्यापार और निवेश को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा.

राष्ट्रपति मुर्मू ने बताई अपार संभावनाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाकात में कहा कि दोनों देशों के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और माइनिंग के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम का भी स्वागत किया और कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को नई दिशा मिलेगी.

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत के ITEC और स्कॉलरशिप कार्यक्रमों के तहत अब तक 3,000 से अधिक उज्बेक अधिकारी, पेशेवर और छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 16,000 से अधिक भारतीय छात्र फिलहाल उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं.

NAM अध्यक्षता पर भारत का समर्थन, आतंकवाद पर साझा रुख
बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2027-29 के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को भारत का समर्थन देने की घोषणा की. साथ ही BRICS में साझेदार देश के रूप में भारत की अध्यक्षता के दौरान सहयोग के लिए उज्बेकिस्तान का आभार भी जताया.

जयशंकर ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर समान सोच रखते हैं. उन्होंने उज्बेकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने हर प्रकार के आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है.

सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति
दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि उच्चस्तरीय बैठकों और लगातार बढ़ते संवाद से भारत-उज्बेकिस्तान के रिश्ते और मजबूत होंगे. दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग, तकनीक और मध्य एशिया में साझेदारी को लेकर भविष्य में और बड़े कदम उठाए जाएंगे.

NATIONAL : असम में बाढ़ का कहर जारी: दो और लोगों की गई जान, 1.28 लाख लोग प्रभावित; केरल में भी बारिश से 15 मौतें

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असम के बाढ़ से दो और लोगों की मौत हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दोनों मौतें शिवसागर जिले में हुईं। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है।

सोमवार को जारी बुलेटिन के अनुसार सात जिलों में 1.28 लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। असम सरकार ने बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित 75 हजार से अधिक परिवारों के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये की पहली किस्त अंतरिम राहत के रूप में जारी की।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने डिब्रूगढ़ से अंतरिम राहत की पहली किस्त जारी की। सिवासागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त घरों वाले लगभग 75 हजार परिवारों को 15- 15 हजार रुपये मिले। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत प्रभावित पात्र परिवारों के लिए भी सब्सिडी जारी की गई।

केरलम में भी अबतक 15 लोगों की गई जान
केरलम में बारिश से जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 15 हुई एएनआई के अनुसार केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने सोमवार को बताया कि केरल में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है।

अब भी सात लोग लापता हैं। मुख्यमंत्री ने बारिश से जुड़ी घटनाओं में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये देने की घोषणा की। तिरुअनंतपुरम में सभी जिला कलेक्टरों के साथ बैठक के बाद सतीसन ने बताया कि लगभग 165 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है, जिससे 3,596 किसान प्रभावित हुए हैं।

मुआवजे को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
केरलम सरकार ने फसल का नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का फैसला किया है और इस मामले पर अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। राज्य के पथनामथिट्टा, कोट्टायम और अन्य इलाकों में एनडीआरएफ और सुरक्षा बलों की टीमें तैनात की गई हैं।

इस बीच मौसम विभाग ने राज्य के 10 जिलों में आरेंज अलर्ट जारी किया। चार जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य में हो रही भारी बारिश के कारण जिला कलेक्टरों ने 12 जिलों में सभी शिक्षण संस्थानों के लिए छुट्टी की घोषणा की है।

BUSINESS : 54000 करोड़ की डिजिटल धोखाधड़ी सरासर डकैती, कोर्ट ने कहा- पूरे देश में लागू हो एसओपी

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर बड़ा आदेश देते हुए केंद्र सरकार को आरबीआई की एसओपी को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ₹54,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी और डकैती के समान है।

देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए इसे डकैती या लूट करार दिया है। अदालत ने कहा कि अब तक ₹54,000 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगी के जरिए निकाली जा चुकी है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को पूरे देश में औपचारिक रूप से लागू किया जाए, ताकि डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों की लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और बैंकों से कहा कि वे ऐसे मामलों में समय पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। सुनवाई के दौरान अदालत ने बताया कि आरबीआई ने पहले ही एक एसओपी तैयार किया है, जिसके तहत साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर अस्थायी रूप से डेबिट कार्ड को होल्ड पर डालने जैसी त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को तुरंत रोकना है।

अंतर-विभागीय समन्वय के लिए बड़ा आदेश
डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अंतर-विभागीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए चार सप्ताह के भीतर एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) तैयार किया जाए। अदालत ने साफ शब्दों में कहा हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह आरबीआई की एसओपी को औपचारिक रूप से अपनाए और पूरे भारत में लागू करे, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो सके। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह देशभर में सामने आए डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान करे और उनसे जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जाए।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और दिल्ली सरकारों से कहा है कि जिन मामलों की पहचान की जाए, उनमें जांच के लिए आवश्यक मंजूरी (सैंक्शन) बिना देरी के प्रदान की जाए, ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरबीआई, दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य संबंधित एजेंसियां आपस में समन्वय कर एक संयुक्त बैठक आयोजित करें। इस बैठक का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी ढांचा तैयार करना होगा।

पीड़ितों के प्रति उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देते समय तकनीकी जटिलताओं में उलझने के बजाय एक व्यावहारिक और उदार रवैया अपनाया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसे अपराधों में आम नागरिक मानसिक और आर्थिक रूप से गहरा नुकसान झेलता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

WhatsApp Under Review: बिना चेतावनी बंद हुए कई WhatsApp अकाउंट, फूटा यूजर्स का गुस्सा; जानें कंपनी ने क्या कहा

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मेटा के स्वामित्व वाले मोबाइल मैसेजिंग एप- व्हाट्सएप के कई यूजर्स के खाते बंद किए जाने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को बिना किसी चेतावनी के भारत सहित कई देशों के यूजर के अकाउंट अचानक बंद कर दिए। कंपनी ने इन सभी अकाउंट को 24 घंटे के लिए समीक्षा के तहत डाल दिए।

क्या यूजर की सुरक्षा के लिए अकाउंट बैन?
व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने कहा कि हम हमेशा अपनी सेवा का दुरुपयोग करने वालों से आगे रहने और अन्य यूजर को सुरक्षित रखने के लिए अकाउंट को बैन करने की दिशा में काम करते हैं। कभी-कभी हमसे गलती हो जाती है, और यदि ऐसा होता है, तो हम लोगों को वापस चैट करने में सक्षम बनाने के लिए इसे जल्द से जल्द ठीक करने का प्रयास करते हैं।

कंपनी को अकाउंट गतिविधियों और डिवाइस की क्या जानकारी चाहिए?
यह समस्या रात लगभग 8 बजे के आसपास सामने आई। एप खोलने के बाद स्क्रीन पर यह संदेश दिखाई दे रहा था, अकाउंट समीक्षा में है। अनुरोध की तारीख 3 अगस्त 2026। आपकी अकाउंट गतिविधियों और डिवाइस की जानकारी की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह हमारी सेवा की शर्तों का पालन करता है। हम आमतौर पर 24 घंटे के भीतर आपको परिणाम की सूचना देंगे।

सोशल मीडिया पर यूजर्स का फूटा गुस्सा
बिना किसी गलती या चेतावनी के अकाउंट ब्लॉक होने पर यूजर्स ने एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने अपना गुस्सा निकाला और व्हाट्सएप से तुरंत मदद मांगी:

एक यूजर ने लिखा कि मेरा WhatsApp अकाउंट बिना किसी वजह के डिसेबल कर दिया गया है। मैंने अपील कर दी है, लेकिन रिव्यू पेज पर सिर्फ एक आम मैसेज दिख रहा है कि 24 घंटे के अंदर समीक्षा होगी। मेरी तुरंत मदद करें।वहीं एक्स पर पर सलोनी नाम की यूजर ने पोस्ट किया कि मेरा व्हाट्सएप अकाउंट बिना किसी वॉर्निंग के अचानक डिसेबल कर दिया गया। मैं सिर्फ ऑफिशियल एप ही इस्तेमाल करती हूं और मेरा पूरा काम व्हाट्सएप पर निर्भर करता है। प्लीज मेरी मदद करें।

अब आगे क्या होगा?
कंपनी के आधिकारिक बयान से यह साफ है कि अगर आपका अकाउंट किसी तकनीकी गड़बड़ी या सिस्टम की गलती की वजह से समीक्षा में गया है, तो समीक्षा प्रक्रिया पूरी होते ही 24 घंटे के भीतर आपका व्हाट्सएप अकाउंट अपने आप रिस्टोर कर दिया जाएगा।

NATIONAL : कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द संभव: शिवकुमार सरकार में 20 पद हैं खाली, मंत्री के बयान से क्या संकेत?

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कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने संकेत दिए हैं कि राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र से पहले नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पास करीब 20 विभागों का अतिरिक्त प्रभार है।

कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द हो सकता है। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने रविवार को संकेत दिए कि अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र से पहले नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। मीडिया से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार कभी भी और जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र अगस्त में प्रस्तावित है और उससे पहले पूरी मंत्रिपरिषद का गठन होना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पास करीब 20 विभागों का अतिरिक्त प्रभार है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सभी विभागों की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रियों को सौंप दी जाए, ताकि विधानसभा सत्र के दौरान कामकाज बेहतर ढंग से चल सके।

अभी केवल 14 मंत्री, जबकि 34 तक हो सकते हैं
वर्तमान में कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। नियमों के अनुसार राज्य में अधिकतम 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी अभी मंत्रिमंडल में कई पद खाली हैं, जिन्हें जल्द भरा जा सकता है।

NATIONAL : पहाड़ों में सावन का पहला सोमवार: केदारनाथ से लेकर हरिद्वार तक उमड़ी भक्तों की भीड़, भारी बारिश में उत्साह

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सावन के सोमवार पर शिव मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। भारी बारिश के बीच भी आज मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा हुआ है। केदारनाथ मंदिर में भी बारिश के बीच श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कांवड़ियों के साथ ही सुबह से ही भक्त बाबा केदार के दर्शनों के लिए कतार में लगे हुए हैं। भारी बारिश के बीच भक्तों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

बता दें कि पहाड़ों में सावन का पहला सोमवार आज है। मैदानी इलाकों में पक्ष के हिसाब से जबकि पहाड़ों में हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास शुरू होने के बाद पहले सोमवार को ही सावन मास का पहला सोमवार गिना जाता है। 4 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार पड़ेगा। ऐसे में आज पहाड़ों में शिव मंदिरों में सुबह से ही भारी भीड़ जुट रही है।

सावन माह के सोमवार के अवसर पर केदारनाथ में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। कांवड़ियों के साथ ही सुबह से ही भक्त बाबा केदार के दर्शनों के लिए कतार में लगे हुए हैं। भारी बारिश के बीच भक्तों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बारिश के बावजूद भी तड़के सुबह से ही शिव भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। सुबह 4 बजे से मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस बीच पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

सावन का महीना शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और तपस्या का प्रतीक है। बागेश्वर स्थित बाबा बागनाथ मंदिर में आज सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने पवित्र सरयू और गोमती नदियों के संगम में स्नान कर भोलेनाथ को गंगाजल, बेलपत्र और दूध अर्पित किया। हर तरफ ‘बम बम भोले’ के जयकारों की गूंज थी और भक्तगण जलाभिषेक के लिए कतारबद्ध नजर आए।

इस अवसर पर विशेष रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और श्रृंगार पूजन किया गया। पंडित कैलाश उपाध्याय ने बताया कि बाबा बागनाथ का यह मंदिर पौराणिक काल से श्रद्धा का केंद्र रहा है। मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने यहां व्याघ्र रूप में तप किया था, इसलिए इन्हें व्याग्रेश्वर महादेव कहा जाता है। समय के साथ यही नाम बागनाथ और फिर पूरे क्षेत्र का नाम बागेश्वर पड़ा।

हरिद्वार के शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। हरिद्वार में भी कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। अब तक करीब ढाई करोड़ कांवड़ियां जल भरकर अपने गंतव्य को पहुंच चुके हैं।हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही शिव भक्त लाइन में लगे दिखाई दिए। श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार कर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं।

सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है, कनखल भगवान महादेव का ससुराल है। भगवान शिव ने राजा दक्ष को वचन दिया था कि सावन के एक महीने वह यहीं पर वास करेंगे। इसलिए भगवान शिव सावन के एक महीने दक्ष प्रजापति मंदिर में ही वास करते हैं। देहरादून के टपकेश्वर समेत शिव मंदिरो में बारिश के बीच ही शिव भक्त पहुंच रहे हैं। हर तरफ लोग शिव भक्ति में रंगे हुए नजर आ रहे हैं।​ शिव मंदिरों को फुलों से भव्य तरीके से सजाया गया है।

NATIONAL : महिला पहलवान यौन शोषण केस में बरी होते ही बृजभूषण बोले- मैंने जो कहा था वो सही हुआ

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महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली राउज़ एवेन्यू कोर्ट से बृज भूषण शरण सिंह बरी हो गए हैं. कोर्ट के फैसले के बाद भूषण शरण सिंह ने

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया. अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण सिंह ने पहली प्रतिक्रिया दी है.

कासगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के फैसले के बाद कहा, ‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा… पहले दिन, जब मेरा पहला बयान आया, तो मैंने कहा था कि अगर कोई फैसला या कोई आरोप साबित होता है, तो मैं फांसी लगा लूंगा. आज, कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया. मैंने जो कहा था, वही सही साबित हुआ.’

घर पहुंचने पर फूलों की पंखुड़ियां से हुआ स्वागत
फैसले के बाद बृजभूषण ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें शुरुआत से ही अदालत पर पूरा भरोसा था. उन्होंने आगे कहा, ‘मैं शुरू से कहता रहा कि यह एक साजिश थी. तीन साल बाद अदालत ने मुझे बरी कर दिया. मैंने कभी खुद को अपराधी महसूस नहीं किया. आज मेरे और मेरे समर्थकों के लिए खुशी का दिन है.’

कोर्ट से बरी किए जाने के बाद बृज भूषण शरण सिंह के घर पर जश्न का माहौल है. उनके समर्थन और कार्यकर्ता आतिशबाजी और पटाखे फोड़कर खुशी मना रहे हैं. कोर्ट से बरी होने के बाद जब बृज भूषण शरण सिंह अपने घर पहुंचे तो उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं.

WFI की कुर्सी छोड़नी पड़ी, सांसद टिकट नहीं मिला
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे. राउज़ एवेन्यु कोर्ट ने 10 मई 2024 को बृज भूषण के खिलाफ धारा 354 और 354A के तहत आरोप तय किया था. साथ ही उनके सहयोगी विनोद तोमर के खिलाफ भी आरोप तय किया था.

हालांकि, कोर्ट ने बृजभूषण को छठी महिला पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों में बरी भी किया था. अब अदालत के ताजा फैसले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों को बरी कर दिया गया है. इस विवाद के कारण बृजभूषण सिंह को न सिर्फ भारतीय कुश्ती महासंघ की कुर्सी छोड़नी पड़ी, बल्कि बीजेपी ने उन्हें सांसदी का टिकट भी नहीं दिया था.

NATIONAL : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सरकार का बड़ा बयान; छात्रों पर केस नहीं होगा, 2700 आरोपियों पर FIR रहेगी कायम

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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि छात्रों के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल 2700 आरोपियों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी। कोर्ट ने भी सख्ती बरतने वाले अधिकारियों को बचाने से इनकार किया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने छात्रों को राहत देने वाला बड़ा बयान दिया। सरकार ने अदालत को बताया कि जिन छात्रों का प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से कोई संबंध नहीं पाया गया है, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी।

जिन लोगों की पहचान हिंसा, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में हुई है, उनके खिलाफ दर्ज लगभग 2700 एफआईआर को वापस नहीं लिया जाएगा। इन मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, ड्रोन रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की है। केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनकी भूमिका हिंसक घटनाओं में स्पष्ट रूप से सामने आई है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष छात्र या नागरिक को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान है। अदालत ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी पुलिस अधिकारी या सुरक्षा बल के जवान ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है या नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को केवल उसके पद या वर्दी के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ बिना पर्याप्त साक्ष्य के कार्रवाई न हो। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर होना जरूरी है।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले पर छात्र संगठनों ने सरकार के बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत मिलना सकारात्मक कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी मांग की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी निर्दोष छात्र को गलत तरीके से आरोपी न बनाया जाए।

सरकार के इस रुख से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होगा। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो केवल अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जबकि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत अब जांच की प्रगति, दर्ज एफआईआर और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने छात्रों को राहत देने वाला बड़ा बयान दिया। सरकार ने अदालत को बताया कि जिन छात्रों का प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से कोई संबंध नहीं पाया गया है, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी।

जिन लोगों की पहचान हिंसा, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में हुई है, उनके खिलाफ दर्ज लगभग 2700 एफआईआर को वापस नहीं लिया जाएगा। इन मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, ड्रोन रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की है। केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनकी भूमिका हिंसक घटनाओं में स्पष्ट रूप से सामने आई है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष छात्र या नागरिक को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान है। अदालत ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी पुलिस अधिकारी या सुरक्षा बल के जवान ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है या नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को केवल उसके पद या वर्दी के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ बिना पर्याप्त साक्ष्य के कार्रवाई न हो। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर होना जरूरी है।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले पर छात्र संगठनों ने सरकार के बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत मिलना सकारात्मक कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी मांग की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी निर्दोष छात्र को गलत तरीके से आरोपी न बनाया जाए।

सरकार के इस रुख से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होगा। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो केवल अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जबकि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत अब जांच की प्रगति, दर्ज एफआईआर और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

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