Saturday, August 15, 2026
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NATIONAL : मध्य प्रदेश में 4 दिन नहीं थमेगी बारिश, 48 जिलों में अलर्ट; ग्वालियर से शहडोल तक तेज वर्षा

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मध्य प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है. बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम के कारण अगले 4 दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने 48 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है. आने वाले दिनों में प्रदेश के किन जिलों में ज्यादा बारिश हो सकती है और कहां-कहां राहत मिल सकती है.

मध्य प्रदेश में इन दिनों मानसून पूरी तरह से एक्टिव है. प्रदेश के कई जिलों में पिछले चार दिनों से लगातार तेज बारिश हो रही है और इसके चलते आने वाले दिनों में भी बारिश से राहत मिलने की संभावना कम ही लग रही है. बंगाल की खाड़ी में मौसम का नया सिस्टम एक्टिव हुआ है, जिसके असर से आसपास एक नया लो-प्रेशर एरिया बनने की संभावना है. इसके कारण प्रदेश में अगले चार दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है.
बारिश का असर सिर्फ मध्य प्रदेश तक नहीं है बल्कि प्रदेश के आसपास बने हवा के दबाव और मौसम में बदलाव के कारण पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में भी तेज बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने आज मध्य प्रदेश के 48 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. कुछ जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई है.

पूर्वी मध्य प्रदेश में बढ़ेगा बारिश का असर
अब तक प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को जमकर हुई बारिश के बाद मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम पूर्वी एमपी की ओर बढ़ रहा है. शुक्रवार से जबलपुर, रीवा और शहडोल के कई जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है. इन इलाकों में अगले तीन दिनों तक बारिश का असर बना रह सकता है. मौसम विभाग ने जबलपुर, रीवा और शहडोल के जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है. वहीं, शिवपुरी और श्योपुर में भी गुरुवार को मौसम का असर देखने को मिल सकता है. इन जिलों में तेज बारिश हो सकती है.

आईएमडी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया लो-प्रेशर सिस्टम मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियों को और बढ़ा सकता है. ऐसे में लोगों को जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है.

MP के इन जिलों में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, एमपी के मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, उमरिया, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज में तेज बारिश हो सकती है. इन जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

वहीं, प्रदेश के कुछ अन्य जिलों में बारिश का असर कम रहेगा. बड़वानी, इंदौर, देवास, खरगोन, बुरहानपुर, बैतूल और हरदा में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने के आसार हैं। इन इलाकों में दिनभर आसमान में बादल छाए रह सकते हैं. इसके साथ ही बीच-बीच में तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है।

WORLD : ट्रंप के ‘होर्मुज पर पूरा कंट्रोल’ वाले दावे को ईरान ने किया खारिज; कहा- अभी भी बंद है जलमार्ग, शर्तें माने बिना नहीं खुलेगा

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ईरान ने ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के “पूर्ण नियंत्रण” के दावे को खारिज किया है। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य अभी बंद है और उसकी शर्तें पूरी होने तक नहीं खुलेगा।

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के “पूर्ण नियंत्रण” की बात कही थी। ईरान का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार किए जा रहे दावों से जमीनी हकीकत नहीं बदलती और जलमार्ग अभी भी बंद है।

ईरान के फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGSA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “अमेरिकी अधिकारियों के दावों से सच नहीं बदलता, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और जब तक ईरान की शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, इसे नहीं खोला जाएगा।”

ट्रंप का दावा -अमेरिका का स्टील वॉल की तरह पूर्ण नियंत्रण
ईरान का यह कड़ा जवाब राष्ट्रपति ट्रंप के ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर आए उस बयान के कुछ ही घंटों बाद आया है जिसमें उन्होंने लिखा था कि “अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नियंत्रण है और वह इसे बनाए रखेगा।” उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती को ‘स्टील की दीवार’ (Wall of Steel) बताते हुए दावा किया कि ईरान इसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया क ईरान का सैन्य ढांचा बुरी तरह कमजोर हो चुका है। ट्रंप ने लिखा, “उनके पास सिर्फ फेक न्यूज और 300% महंगाई बची है! ईरान केवल बातें करता है, कार्रवाई नहीं। वह अब मिडिल ईस्ट का दादा (Bully) नहीं रहा।” उन्होंने अपने बयान का अंत “Praise be to Allah” के साथ किया।

ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा कि अमेरिका को सभी शर्तें पूरी करनी होंगी। उनके मुताबिक ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिका द्वारा युद्ध और नाकाबंदी खत्म करना, अमेरिका में ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई संपत्तियां जारी करना और लेबनान व गाजा समेत पूरे क्षेत्र में युद्धविराम स्वीकार करना शामिल है। रेजाई ने कहा कि जब तक हमारी सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।

वैश्विक तेल व्यापार के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। इसके माध्यम से दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। हाल के हफ्तों में अमेरिका, इजरायल और ईरानी बलों के बीच हुए सीधे सैन्य संघर्षों के बाद इस इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष राजनयिक बातचीत भी चल रही है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य तनाव कम करना और होर्मुज के जरिए सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने की संभावना तलाशना है। लेकिन फिलहाल इस रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को कड़ी सुरक्षा और भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

WORLD : पाक पत्रकार ने पूर्व पीएम इमरान खान की मौत का किया दावा, पाकिस्तान सेना ने किया खंडन

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पाकिस्तान के सीनियर पत्रकार वजाहत एस. खान ने इमरान खान की मौत का दावा किया है। उनके इस दावे पर पीटीआई की सेंट्रल मीडिया डिपार्टमेंट ने ट्वीट किया। हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इमरान की मौत के दावों का खंडन किया।

पाकिस्तान के सीनियर पत्रकार वजाहत एस. खान ने पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की मौत का दावा किया। उनके इस दावे से दुनियाभर में हड़कंप मच गया। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार और सेना में मौजूद सूत्रों के हवाले से यह दावा किया। उसके बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने मंगलवार को कहा कि पार्टी के संस्थापक इमरान खान की सेहत को लेकर लगातार आ रही “चिंताजनक खबरों” से पूरे देश में बेचैनी और घबराहट फैल रही है। पार्टी ने सरकार से मांग की कि उन्हें इमरान खान से मिलने की इजाज़त दी जाए।

इमरान खान की मौत का दावा

इमरान खान की पार्टी पीटीआई का यह बयान पत्रकार वजाहत सईद खान की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें इमरान की हिरासत में कथित मौत की बात कही गई थी। इमरान की सेहत और उनसे न मिल पाने को लेकर पहले से ही चिंताएं थीं, और इस रिपोर्ट ने पार्टी के समर्थकों और चाहने वालों के बीच तीखी आलोचना को जन्म दिया।

अदियाला जेल में बंद हैं इमरान खान

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और अभी 190 मिलियन पाउंड के भ्रष्टाचार मामले में अदियाला जेल में सज़ा काट रहे हैं। उन पर 9 मई, 2023 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एंटी-टेररिज़्म एक्ट के तहत भी मुकदमे चल रहे हैं। PTI के सेंट्रल मीडिया डिपार्टमेंट ने X पर एक पोस्ट में कहा कि इमरान की सेहत को लेकर लगातार आ रही “चिंताजनक खबरों” ने “पूरे देश में गहरी चिंता और बेचैनी” पैदा कर दी है।

पीटीआई ने सेहत को लेकर जताई चिंता

PTI के बयान में कहा गया कि “सरकार को यह याद रखना चाहिए कि इमरान खान कोई आम राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि लाखों पाकिस्तानियों के चुने हुए और लोकप्रिय राजनीतिक नेता हैं। उनकी सेहत के बारे में जनता को भरोसे में लेना सरकार की ज़िम्मेदारी है।” इमरान देश की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय राजनीतिक पार्टी के नेता हैं और उनकी सेहत और सुरक्षा “लाखों पाकिस्तानियों की चिंताओं और भावनाओं से सीधे जुड़ी हुई है”। साथ ही यह भी कहा गया कि उनकी सेहत को लेकर अनिश्चितता को और नहीं खींचा जा सकता और यह “मंजूर नहीं” है।

बयान में मांग की गई कि सरकार इमरान की उनके परिवार के सदस्यों, निजी डॉक्टरों, वकीलों और पार्टी के ज़िम्मेदार राजनीतिक नेताओं से मुलाकात सुनिश्चित करने के लिए तुरंत इंतज़ाम करे। साथ ही यह भी कहा गया कि उनकी पूरी मेडिकल जांच और इलाज उनके निजी डॉक्टरों की देखरेख में, परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में और “पूरी पारदर्शिता” के साथ किया जाना चाहिए।

पाकिस्तानी सेना ने इमरान की मौत के दावों का खंडन किया

पाकिस्तान में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत में मौत की खबरों के बाद पाकिस्तानी सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया है, जबकि पत्रकार वजाहत सईद खान, जिन्होंने शुरू में खान की मौत की खबर दी थी, ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके सूत्रों ने असल में उनकी मौत की पुष्टि नहीं की थी। इस घटना ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक की हालत और उनके ठिकाने को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जो कई सालों से जेल में बंद हैं। इस विवाद ने उनकी कैद से जुड़ी गोपनीयता पर भी फिर से ध्यान खींचा है।

वजाहत सईद खान ने 11 अगस्त को ‘क्या खान अभी भी हमारे साथ हैं’ और ‘खान के बाद क्या होगा’ शीर्षक से दो भागों वाली एक सीरीज़ प्रकाशित की थी। अपनी शुरुआती रिपोर्ट में, उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान सेना के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) के एक सूत्र ने उन्हें बताया था कि इमरान खान की हिरासत में मौत हो गई है।

इस दावे से जल्द ही अटकलें शुरू हो गईं, लेकिन बाद में पत्रकार ने विस्तार से सफाई देते हुए कहा कि उनके सूत्रों ने इस बात की पुष्टि नहीं की थी कि पूर्व प्रधानमंत्री की मौत हो गई है। बाद में एक वीडियो में वजाहत ने कहा कि पाकिस्तान सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने खान की हालत और उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी, लेकिन उनकी मौत का कोई सबूत नहीं दिया था। खबरों के मुताबिक, उन्होंने कहा, “बिल्कुल साफ बात है। उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि इमरान खान की मौत हो गई है।”

पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग, ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस डायरेक्टरेट’ (ISPR) के इन खबरों को खारिज करने के बाद यह विवाद एक नया मोड़ ले गया। सेना ने इन खबरों को झूठा बताया और साफ तौर पर इस बात से इनकार किया कि हिरासत में इमरान खान की मौत हुई है। यह खंडन तब आया जब पत्रकार के शुरुआती दावों के बाद जेल में बंद PTI नेता की हालत को लेकर बड़े पैमाने पर अटकलें लगाई जाने लगी थीं।

वजाहत ने सेना के जवाब का स्वागत करते हुए कहा कि सेना का इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बात करना ही अपने आप में अहम है। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि ISPR ने जवाब दिया है – चाहे वह खबर झूठी हो या कुछ और – क्योंकि इसका मतलब है कि इमरान जिंदा हैं।”

WORLD : लद्दाख के लेह में सुबह-सुबह भूकंप के झटके, 5.5 रही तीव्रता, घरों से बाहर निकले लोग

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लद्दाख के लेह में गुरुवार सुबह 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। 10 किलोमीटर गहराई पर आए झटकों से लोग सहमे, हालांकि अभी तक किसी नुकसान की खबर नहीं है।

लेह: लद्दाख के लेह में आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। भूकंप सुबह करीब 6:05 बजे आया और इसका केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। झटके महसूस होने के बाद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना। हालांकि, अभी तक भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

भूकंप उस समय आया जब लोग नींद में ही थे। अचानक भूकंप आने से इतने डर गए कि घर से निकलकर सड़क पर आ गए। लोगों ने बताया कि भूकंप के झटके इतने तेज थे कि नींद में भी महसूस हुआ कि पूरा घर हिल रहा है। शोर मचा और लोग दहशत में आ गए। अभी आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं, इस वजह से लोग डर के मारे घर में नहीं जा रहे हैं।

कहां आता है भूकंप
आपको बता दें कि भूकंप पृथ्वी की सतह से लेकर सतह के नीचे लगभग 700 किलोमीटर तक कहीं भी आ सकते हैं। USGS द्वारा जारी डेटा के अनुसार, वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भूकंप की इस 0-700 किलोमीटर की गहराई वाली रेंज को उथले, मध्यम और गहरे तीन जोन बांटा गया है।

उथले भूकंप होते हैं ज्यादा खतरनाक
डेटा के अनुसार उथले भूकंप आम तौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उथले भूकंपों से निकलने वाली भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप जमीन में तेज कंपन होता है और इससे ढांचों को अधिक नुकसान और जान-माल की अधिक हानि हो सकती है।

NATIONAL : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ की रेस में तीन पूर्व नौकरशाह फ्रंट रनर, 16 फाइनलिस्ट में तीन का होगा अंतिम चयन

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) के आवेदकों के 16 नाम शार्टलिस्ट हो गए हैं। आवेदकों का साक्षात्कार चयन समिति के तीनों सदस्यों सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी व डा. सुरेश हावड़े ने किया। इस दौरान मंदिर के प्रबंधन और इनके अनुभव से जुड़ी जानकारी ली गई है।

सीईओ साक्षात्कार चयन समिति ने कुल 5585 आवेदनों में से 16 का नाम शार्टलिस्ट किया है। साक्षात्कार के बाद समिति इनमें से सबसे योग्य तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपेगी। इस पर दो सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टी विचार-विमर्श करके सीईओ का चयन करेंगे।

रेस में तीन पूर्व नौकरशाह फ्रंट रनर
सूत्रों के अनुसार सीईओ की रेस में तीन पूर्व नौकरशाह फ्रंट रनर हैं। इनमें सेवानिवृत आईएएस योगेश्वर राम मिश्रा व दिनेश चंद्र के साथ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय का नाम काफी चर्चा में है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ (CEO) की रेस में 16 दिग्गज बचें हैं और इनमें से चयन समिति तीन नामों पर मुहर लगाएगी। इस पद के लिए 5585 आवेदनों से 16 फाइनलिस्ट चुने गए हैं।

बुधवार को अंतिम साक्षात्कार
चयन समिति के सदस्यों ने रामजन्मभूमि परिसर के ग्रीन हाउस में बुधवार को अंतिम साक्षात्कार लिया। इनमें एक आवेदक पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय भी थे। रामजन्मभूमि परिसर के ग्रीन हाउस में आयोजित हुए सीईओ पद के अंतिम साक्षात्कार के लिए चयन समिति ने 18 आवेदकों को अयोध्या आमंत्रित किया था।

35-40 मिनट तक विभिन्न विषयों पर प्रश्न
इनमें उत्तर प्रदेश के अनुभवी आईपीएस अधिकारी रहे राजेश कुमार पाण्डेय, राजस्थान की सेवानिवृत्त महिला आईएएस अधिकारी, बिहार के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी, सेना के ब्रिगेडियर सहित अन्य शामिल रहे। चयन समिति के सदस्यों ने आवेदकों के अनुभवों के साथ-साथ आपात स्थिति में प्रबंधन संभालने के बारे में पूछा। एक-एक आवेदक से लगभग 35-40 मिनट तक विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे गए। चयन समिति की ओर से सौंपे गए तीन नामों के पैनल पर विचारोपरांत अब दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में किसी एक नाम पर ट्रस्टियों की सहमति बन जाने की पूरी संभावना है।

पुराने हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव हैं पूर्व आईपीएस अधिकारी
उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे राजेश कुमार पाण्डेय वर्तमान में लखनऊ के अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव हैं। उन्हें अक्टूबर 2022 में सचिव नियुक्त किया गया था। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रबंधन को लेकर पुराना अनुभव है। सूत्रों ने बताया कि बुधवार को वह साक्षात्कार देने पहुंचे, तो चयन समिति के सदस्यों ने भीड़ प्रबंधन को लेकर उनसे विस्तृत सवाल किए। पाण्डेय स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) व आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर पर पांच जुलाई 2005 को हुए आतंकी हमले के मामले की जांच भी की थी।

13 जुलाई को इसके लिए आवेदन आमंत्रित
चढ़ावा चोरी उजागर होने के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति का निर्णय लिया है। 13 जुलाई को इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। लगभग 5200 आवेदन पत्रों की छंटनी के बाद पांच दर्जन आवेदकों का प्राथमिक साक्षात्कार लेकर लगभग 18 आवेदकों को अंतिम साक्षात्कार के लिए अयोध्या बुलाया गया था। मंगलवार को दस आवेदकों ने साक्षात्कार दिया।

NATIONAL : दुनिया सोच रही होगी कि किस तरह का इंसान है, राहुल गांधी पर बुरी तरह भड़कीं कंगना रनौत; बोलीं- कोई शर्म ही नहीं बची

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बीजेपी की लोकसभा सांसद और जानी मानी अभिनेत्री आज कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर बुरी तरह भड़क गईं। कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर देश तोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ये बार-बार अमित शाह से चर्चा की मांग करते हैं लेकिन जब चर्चा की बारी आती है तो भाग खड़े होते हैं।

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत बुरी तरह भड़क गईं। उन्होंने राहुल गांधी पर संसद का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया। कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांंधी में कोई शर्म और मर्यादा नहीं बची है। उन्हें पूरी दुनिया देख रही है और सोच रही होगी कि किस तरह का इंसान है। अब यह उनका आखिरी कार्यकाल होगा। राहुल गांधी बाहरी ताकतों के साथ मिलकर देश को तोड़ना चाहते हैं।

मुझे लगता है राहुल गांधी अब देश का मजाक बना रहे: कंगना रनौत
कंगना रनौत ने कहा कि मुझे लगता है कि वह देश का मजाक उड़ा रहे हैं। वह लगातार देश का मजाक बनाते हैं; उनके लिए सब कुछ एक मजाक है। यह पहली बार है जब मैं संसद का ऐसा मजाक बनते देख रही हूं। एक तरफ तो वह कहते हैं कि हम अमित शाह जी से जवाब चाहते हैं और दूसरी तरफ सरकार की बातें सुनना नहीं चाहते हैं। यह पूछना कि उन्होंने छात्रों के साथ ऐसा-वैसा किया या नहीं और साथ ही यह भी कहते हैं कि हम उनकी बात सुनने के लिए यहां नहीं हैं।

राहुल गांधी में अब कोई शर्म या मर्यादा नहीं बची
राहुल गांधी में अब कोई शर्म या मर्यादा नहीं बची है। पूरी दुनिया देख रही है और सोच रही है कि यह किस तरह का इंसान है। जिस तरह से वह अपनी हताशा निकाल रहे हैं और संसद का समय बर्बाद कर रहे हैं, और इस तरह पूरे देश और उसके नागरिकों का अपमान कर रहे हैं, उसे देखकर विपक्ष के नेता के तौर पर उनकी भूमिका को देखते हुए मुझे यकीन हो गया है कि यह उनका आखिरी कार्यकाल होगा।

राहुल गांधी देश को तोड़ने का काम कर रहे
कंगना ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। एक ऐसे लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेता के, जिन्हें लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए भारी जनादेश मिला है। उन्हें लगता है कि इस देश में उनके अलावा किसी और का अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए। फिर उनके दूसरे काम भी हैं, सोरोस या अंतरराष्ट्रीय ताकतों के साथ मिलकर देश को तोड़ने और बर्बाद करने की कोशिश करना।

आखिरकार, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किसके इस्तीफे की मांग करते हैं या क्या चाहते हैं, क्योंकि जनता को उनकी कोई परवाह नहीं है। उनकी इटैलियन मां ही किसी तरह विपक्ष को उन्हें अपना नेता मानने के लिए मजबूर कर रही हैं; वरना, सौ चुनाव हारने के बाद उनकी कोई हैसियत ही नहीं होती।

NATIONAL : जंतर-मंतर का सीजन-2 आने वाला है, CJP फाउंडर अभिजीत दीपके का एलान

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर के सीजन-2 को लेकर बड़ा एलान किया है। उन्होंने लोगों को बताया है कि जंतर-मंतर का सीजन-2 जल्दी ही आएगा।अभिजीत दीपके ने कहा, ‘बहुत से लोग इंस्टाग्राम पर कमेंट कर रहे थे कि जंतर-मंतर का सीजन 2 कब शुरू होगा। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि जंतर-मंतर का सीजन 2 बहुत जल्द शुरू होने वाला है।’

वॉलंटियर्स मीट के लिए नहीं मिल रहा हॉल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वे लोग उन्हें वॉलंटियर्स मीट के लिए हॉल नहीं मिलने दे रहे।

दीपके ने आज बुधवार को कहा कि आज दिल्ली में हमारी वॉलंटियर्स मीट होनी थी, दूर-दूर से हमारी पार्टी से जुड़े लोग आए थे, लेकिन हमारी मीटिंग नहीं होने दी जा रही।अभिजीत दीपके ने कहा, ‘आज दिल्ली में हमारे वॉलंटियर्स की मीटिंग होनी थी। हम हॉल ढूंढ रहे थे, लेकिन कोई भी हमें हॉल किराए पर देने को तैयार नहीं था। हर कोई यही कह रहा था कि ऊपर से दबाव है।’

दीपके ने आगे बताया, ‘बड़ी मुश्किल से हमें यह हॉल मिला था। हमारे पास इसकी रसीद भी है। लेकिन आज सुबह ही हॉल के मालिकों को धमकियां मिलीं। उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने CJP की मीटिंग यहां होने दी, तो उन्हें उल्टा लटका दिया जाएगा।’सीजेपी फाउंडर ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘यह सब BJP कर रही है। उनकी हरकतों और बातों से साफ पता चलता है कि वे देश के युवाओं से डरे हुए हैं।अगर उन्हें लगता है कि ऐसी छोटी-मोटी हरकतों से हम डर जाएंगे, तो वे बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं।’

NATIONAL : वायुसेना की बढ़ेगी ताकत: 60 ट्रांसपोर्ट विमानों के लिए ₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी; किन कंपनियों के बीच टक्कर?

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भारतीय वायुसेना के पुराने कार्गो विमानों के बेड़े को बदलने के लिए रक्षा मंत्रालय ने करीब ₹1 लाख करोड़ का बड़ा टेंडर जारी किया है। इसके तहत 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे और भारतीय कंपनियां प्रमुख भूमिका में होंगी। कितने विमान भारत में बनेंगे? किन कंपनियों के विमान मुकाबले में हैं?

भारतीय वायुसेना के पुराने हो रहे कार्गो विमानों के बेड़े को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों को प्रमुख भूमिका दी गई है। HAL, टाटा और महिंद्रा इस दौड़ में शामिल हैं।

किन भारतीय कंपनियों के साथ कौन-सी विदेशी कंपनियां मैदान में हैं?
महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्राएर के साथ साझेदारी की है और उसके C-390 ट्रांसपोर्ट विमान की पेशकश की जाएगी। वहीं, टाटा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है और C-130 विमान की पेशकश करेगा। C-130 पहले से ही भारतीय वायुसेना में विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

कितने विमान भारत में बनाए जाएंगे?
इस कार्यक्रम के तहत करीब 20 प्रतिशत विमान सीधे तैयार स्थिति में भारतीय वायुसेना को मिलेंगे। बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है। विमानों का निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विमान निर्माता कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा। इस परियोजना में HAL की भी भूमिका रहेगी

वायुसेना के पास अभी कितने C-130J विमान हैं?
भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल 12 C-130J Super Hercules विमान हैं। इसके अलावा, वायुसेना Airbus के साथ C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। करीब 70 C-295 विमान वायुसेना में शामिल किए जाने हैं, जिनमें अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा।

क्या वायुसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा है यह योजना?
मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। वायुसेना ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भी टेंडर जारी किया है। इसके अलावा, पुराने हॉक ट्रेनर विमानों को बदलने और पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से अधिक ट्रेनर विमानों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।

क्या इन विमानों से हवा में ईंधन भरने का काम भी लिया जाएगा?
मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल केवल सैनिकों और उपकरणों की तेज आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय वायुसेना इन विमानों का इस्तेमाल हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर के रूप में भी कर सकती है। इसके अलावा, इनसे उपकरणों और सैनिकों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

NATIONAL : 13 आरोपियों पर राउज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा, आज से आरोपों पर दलील संभव

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एजेंसी ने कहा कि चार्जशीट के हिस्से लगातार अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जो बातें अभी तक अदालत में नहीं कही गईं और चार्जशीट का हिस्सा हैं, उनका मीडिया में सार्वजनिक होना बेहद चौंकाने वाला है।

राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। अदालत में बृहस्पतिवार (13 अगस्त) से आरोपों पर दलीलें शुरू होने की संभावना है। यह मामला सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है।

कार्यवाही के दौरान सीबीआई ने बताया कि मीडिया में प्रकाशित हो रहे गवाहों के नामों में कुछ नाबालिग भी हो सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि चार्जशीट के हिस्से लगातार अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जो बातें अभी तक अदालत में नहीं कही गईं और चार्जशीट का हिस्सा हैं, उनका मीडिया में सार्वजनिक होना बेहद चौंकाने वाला है। कोर्ट ने जिम्मेदार मीडिया से ऐसी सामग्री प्रकाशित करने से बचने को कहा। सीबीआई के अनुसार, एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ-रसायन विज्ञान के पीवी कुलकर्णी, भौतिकी की मनीषा संजय हवालदार तथा वनस्पति एवं प्राणि विज्ञान की मनीषा गुरुनाथ मांढरे पेपर लीक के प्रमुख स्रोत थे।

राजस्थान से शुरू हुई कार्रवाई, मई में 13 आरोपियों तक पहुंची जांच
सीबीआई ने 13 मई को राजस्थान में मंगीलाल, दिनेश और विकास बिवल को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल से 29 अप्रैल को टेलीग्राम के जरिए लीक पीडीएफ मिलने की बात सामने आई। इसी दिन गुरुग्राम के यश यादव, नासिक के शुभम खैरनार और पुणे के धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया गया। लोखंडे पर सबूत मिटाने के लिए मोबाइल नष्ट करने की कोशिश का आरोप है।
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14 मई को पुणे से मनीषा संजय वाघमारे पकड़ी गईं। चार्जशीट के मुताबिक वह मौद्रिक लाभ के लिए पेपर लीक और उसके प्रसार की साजिश में प्रमुख भूमिका निभा रही थीं। वह उम्मीदवारों और विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी थीं। उनकी पूछताछ के बाद 15 मई को लातूर से कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी, 16 मई को पुणे से मनीषा मांढरे और 17 मई को लातूर के कोचिंग सेंटर संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर गिरफ्तार हुए। 22 मई को मनीषा संजय हवालदार तथा 26 मई को तेजस शाह और डॉ. मनोज शिरुरे की गिरफ्तारी हुई।

डिलीट चैट और लीक प्रश्नपत्र वाले पीडीएफ से साजिश के सबूत मिले
सीबीआई के मुताबिक मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग में डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और लीक प्रश्नों वाले पीडीएफ बरामद हुए। एजेंसी ने जब्त डिजिटल व संचार उपकरणों तथा दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया।

NATIONAL : कैश कांड में पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ पाई

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जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में लोकसभा की तीन सदस्यीय जांच समिति ने तीनों आरोप साबित माने हैं। समिति के अनुसार, सरकारी आवास में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिली, सबूतों से छेड़छाड़ हुई।

नई दिल्ली: घर में नकदी मिलने के मामले में लोकसभा की जांच समिति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने उनके सरकारी आवास से बरामद बेहिसाब नकदी को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण को टालमटोल वाला और असंतोषजनक बताया है।

तीन सदस्यीय न्यायाधीश जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी। समिति ने कहा कि वर्मा के सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिलने, महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ और जांच के दौरान टालमटोल व भ्रामक स्पष्टीकरण देने के आरोप साबित हुए हैं।

क्या है मामला?
यह मामला 14-15 मार्च 2025 की दरम्यानी रात नई दिल्ली स्थित पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में लगी आग के बाद सामने आया था। उस समय वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे। आग बुझाने के बाद स्टोर रूम में जले और अधजले 500 रुपये के नोटों के बंडल और ढेर मिलने की बात सामने आई थी। बाद में नकदी जलने का एक वीडियो भी सामने आया था। वर्मा ने आरोपों से इनकार करते हुए इसे उन्हें फंसाने की साजिश बताया था।

तत्कालीन भारत के सीजेआई के आदेश पर हुई आंतरिक जांच में वर्मा के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने की थी। समिति के गठन के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले ही यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। अब यह स्पष्ट नहीं है कि संसद समिति की रिपोर्ट और निष्कर्षों पर आगे की कार्रवाई करेगी या नहीं। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम का इस्तेमाल केवल पद पर कार्यरत न्यायाधीश के खिलाफ ही किया जा सकता है।

सबूत नहीं रखे गए सुरक्षित
जांच में समिति ने यह दर्ज किया कि बरामद नकदी को न तो जब्त किया गया और न ही उसकी गिनती की गई। मौके पर कोई इन्वेंट्री या पंचनामा तैयार नहीं हुआ और नकदी के नमूने भी सुरक्षित नहीं रखे गए। इसके बावजूद समिति ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य नकदी की मात्रा को बहुत बड़ी और पर्याप्त साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

समिति ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा के स्पष्टीकरण समय के साथ बदलते रहे। शुरुआती जवाब में उन्होंने नकदी की जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि उनके परिवार या कर्मचारियों ने ऐसी नकदी नहीं देखी या हटाई।

बाद में उनके बचाव में नकदी की जब्ती और गिनती नहीं होने, नकली नोट होने की संभावना, नकदी प्लांट किए जाने, साजिश, कर्मचारियों की भूमिका और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले लोगों द्वारा नकदी हटाए जाने जैसी दलीलें सामने आईं। हालांकि, समिति ने कहा कि नकदी प्लांट किए जाने, चोरी, छेड़छाड़ या किसी साजिश को लेकर कोई शिकायत या एफआईआर सामने नहीं लाई गई।

जांच में खुद गवाही देने नहीं आए वर्मा
समिति के मुताबिक, अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पूरे होने और बचाव पक्ष की गवाही का चरण शुरू होने के बाद न्यायमूर्ति वर्मा कार्यवाही से हट गए। उन्होंने खुद गवाही नहीं दी और न ही अपने परिवार, निजी कार्यालय, घरेलू कर्मचारियों या सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी व्यक्ति को गवाह बनाया।

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