Thursday, August 6, 2026
Home Blog

NATIONAL : यमन के पास भारतीय जहाज पर हमला, विस्फोटकों से लदी सुसाइड बोट टकराई, जहाज डूबा, उसमें सवार सभी 13 भारतीय सुरक्षित

0

विस्फोटकों से भरी एक नाव द्वारा किए गए हमले के बाद, यमन के पश्चिमी तट के पास लाल सागर में भारत के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज डूब गया। इस जहाज पर चालक दल के 14 सदस्य सवार थे, जिनमें 13 भारतीय और एक यमनी नाविक था। यमनी बलों द्वारा सभी 14 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

MSV फैज नूर ओलिय्या नाम के जहाज पर हूथी के कब्जे वाले बंदरगाह शहर होदेइदाह से लगभग 13 नॉटिकल मील दक्षिण में हमला किया गया।

यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स, जिसे गार्ड्स ऑफ द रिपब्लिक के नाम से भी जाना जाता है, ने एक बयान में कहा कि कोस्ट गार्ड और नेवी की यूनिट्स ने नाविकों को बचाने के लिए एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया। उन्होंने हमले के लिए हूथी ग्रुप को भी जिम्मेदार ठहराया।

भारत ने की हमले की निंदा

भारत ने एक बयान में यमन के समुद्री इलाके के पास जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। केंद्रीय जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि उन्होंने डायरेक्टर जनरल मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन को निर्देश दिया है कि वे सभी एजेंसियों के साथ मिलकर उस इलाके में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बचाए गए क्रू को ज़रूरी मदद देने के लिए तुरंत कदम उठाएं।उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारत बिना किसी उकसावे के बिना सुरक्षा वाले मशीनीकृत सेलिंग जहाज पर हुए इस हमले की कड़ी निंदा करता है। हमारे लोगों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और मुझे यह बताते हुए राहत मिल रही है कि यमनी कोस्ट गार्ड ने सभी 14 नाविकों (जिनमें 13 भारतीय शामिल हैं) को सुरक्षित बचा लिया है और उन्हें मोखा बंदरगाह पहुंचा दिया है।

विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा कि रियाद स्थित दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है।

भारत ने भारतीय जहाजों पर हमलों की घटनाओं को बेहद चिंताजनक बताया और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने को रोकने की मांग की।

भारत ने बयान में कहा कि इस क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं। क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना बंद होना चाहिए, और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से आज़ाद और बिना रुकावट के नेविगेशन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भलाई भारत के लिए एक गंभीर मानवीय और कूटनीतिक संकट बन गई है। यह स्थिति दुनिया के संघर्ष वाले इलाकों में कमर्शियल मर्चेंट शिपिंग को निशाना बनाकर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों में अचानक हुई बढ़ोतरी का नतीजा है।

BUSINESS : आरबीआई एमपीसी बैठक 2026 रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित, वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि 6.7% रहने का अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज, 5 अगस्त 2026, बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी तीसरी द्विमासिक नीति बैठक 3 से 5 अगस्त तक आयोजित की।

आरबीआई एमपीसी ने नीतिगत रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने और ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखने का फैसला किया।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। बेंचमार्क उधार दर को अपरिवर्तित रखने के साथ-साथ, आरबीआई ने स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) की दर को भी 5% पर बरकरार रखा है, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) और बैंक ब्याज दर को 5.5% पर अपरिवर्तित रखा है।

अगस्त में होने वाली आरबीआई एमपीसी की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध के घरेलू विकास और मुद्रास्फीति की गतिशीलता पर चल रहे प्रभाव के बीच मैक्रोइकॉनॉमिक वातावरण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के फैसले की व्याख्या करते हुए, मल्होत्रा ​​ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो, भू-राजनीति और वैश्विक व्यापार नीति से संबंधित अनिश्चितताओं के कारण विकास का दृष्टिकोण अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने प्रतीक्षा करो और देखो की नीति अपनाई है, और आगे कहा, “कोई भी नीतिगत कार्रवाई करने से पहले, विशेष रूप से मुद्रास्फीति, उसके मार्ग और संरचना के संबंध में अधिक स्पष्टता सामने आने की आवश्यकता है।”

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी नीतिगत कार्रवाई में विकास-मुद्रास्फीति की बदलती गतिशीलता के अनुरूप नीतिगत दरों के पुनर्समायोजन की आवश्यकता को ध्यान में रखना होगा, विशेष रूप से अंतर्निहित मुद्रास्फीति के अब तक के सौम्य स्तरों से सामान्यीकरण को ध्यान में रखना होगा।

जीडीपी और मुद्रास्फीति के अनुमान

आरबीआई ने घरेलू विकास की संभावनाओं में विश्वास जताते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान को 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।

इसने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया और दूसरी तिमाही के पूर्वानुमान को 6.3% से बढ़ाकर 6.4% कर दिया। केंद्रीय बैंक ने तीसरी तिमाही के अनुमान को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा और चौथी तिमाही के अनुमान को 6.8% पर बरकरार रखा, जिससे संकेत मिलता है कि उसे वित्त वर्ष के शेष भाग में विकास की गति के मजबूत बने रहने की उम्मीद है।

इस बीच, इस वर्ष के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान अब 5% लगाया गया है, जो हमारे पहले के 5.1% के अनुमान से 10 आधार अंक कम है।

इसने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के मुद्रास्फीति अनुमान को 4.2% से घटाकर 4.1% कर दिया और दूसरी तिमाही के पूर्वानुमान को 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया। तीसरी तिमाही का अनुमान 5.9% पर बरकरार रखा गया, जबकि चौथी तिमाही के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 5.4% से 5.5% कर दिया गया।

NATIONAL : मंगल मिलन बैठक से रहे नदारद, NCPI के तीन मुस्लिम सांसदों ने बनाई दूरी:क्या TMC के बागियों में पड़ी दरार?

0

एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक से एनसीपीआई के तीन सांसदों की लगातार दूसरी बार गैरमौजूदगी ने टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के समूह में मतभेद की अटकलों को हवा दे दी है। तीनों सांसदों ने भाजपा और एनडीए से दूरी बनाए रखने की बात कही, जबकि समूह के अन्य नेता एकजुटता का दावा कर रहे हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं ने मंगलवार को संसद परिसर में आयोजित सत्तारूढ़ गठबंधन की साप्ताहिक संसदीय बैठक ‘मंगल मिलन’ में हिस्सा लिया। हालांकि, इस बैठक में एनसीपीआई के तीन सांसदों खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान की अनुपस्थिति सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही। टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के इस समूह के भीतर एनडीए के साथ रिश्तों को लेकर मतभेद के संकेत भी सामने आ रहे हैं। इससे पहले 28 जून को हुई पहली ‘मंगल मिलन’ बैठक में भी ये तीनों सांसद शामिल नहीं हुए थे।

क्या बोले अबू ताहेर खान, क्यों बनाई NDA से दूरी?
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अबू ताहेर खान ने साफ कहा कि हम एनडीए के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में जा रहे हैं। आज भी एनडीए की बैठक थी, लेकिन हम तीनों उसमें शामिल नहीं हुए। हालांकि मुख्यमंत्री (सुवेंदु अधिकारी) द्वारा बुलाई गई बैठक में जरूर जाएंगे क्योंकि वह मेरे संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़ी है। साथ ही हम मुसलमानों के खिलाफ किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेंगे।

शुभेंदु अधिकारी के संसद पहुंचने के क्या मायने हैं?
मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी संसद भवन पहुंचे। हालांकि उनके दौरे को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई, लेकिन इसे राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या मुस्लिम बहुल सीटों का दबाव बना वजह?
सूत्रों के अनुसार, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद और बहारामपुर जैसे मुस्लिम बहुल लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीन सांसदों ने अपने मतदाताओं की नाराजगी को देखते हुए एनडीए की बैठक से दूरी बनाए रखी। मतदाताओं के बीच भाजपा के साथ उनकी कथित नजदीकी को लेकर सवाल उठ रहे थे।
इन तीन सांसदों की अनुपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा में 20 सदस्यीय एनसीपीआई समूह को अभी तक स्पीकर ओम बिरला से आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।

दल-बदल कानून के तहत क्या चुनौती सामने है?
यदि यह अलग हुआ समूह दल-बदल विरोधी कानून के तहत संरक्षण चाहता है, तो उसे टीएमसी के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई यानी आवश्यक संख्या अपने साथ होने का दावा साबित करना होगा। ऐसे में किसी भी तरह की अंदरूनी असहमति उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।

क्या बोले फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय?
एनसीपीआई के फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय भी मंगलवार को पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। वे 28 जून की बैठक में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं। एनसीपीआई पूरी तरह एकजुट है। यह एक अच्छा अनुभव रहा। उन्होंने बागी सांसदों के बीच मतभेद की अटकलों को खारिज करने की कोशिश की।

NATIONAL : 36 देशों से 274 भगोड़ों को लाया गया वापस, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति भी अटैच

0

केंद्र सरकार ने मंगलवार (4 अगस्त) को बताया कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़ों को वापस लाया गया है। यह संख्या प्रतिवर्ष औसतन करीब 40 है जो 2004-13 की अवधि की तुलना में 10 गुना अधिक है। उस वक्त हर साल करीब चार भगोड़ों को वापस लाया गया था। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार ने इस दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की है।

इसमें दावा किया गया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भगोड़ों को वापस लाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। जबकि (नरेंद्र) मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।बयान के अनुसार, 2019 से 2026 (जुलाई तक) के बीच वापस लाए गए भगोड़ों में से नौ लोग आर्थिक अपराधों, 17 लोग आतंकी मामलों, 42 लोग संगठित आपराधिक गतिविधियों, 62 लोग हत्या, डकैती और हिंसक अपराधों, 53 लोग यौन अपराधों और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों, 16 लोग मादक पदार्थ की तस्करी, 12 लोग तस्करी और जाली नोट वगैरह, 18 लोग मानव तस्करी और 45 लोग अन्य अपराधों के मामलों में वांछित थे।

गृह मंत्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा, “मोदी सरकार ने एकीकृत, खुफिया जानकारी आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित अभियान शुरू किए हैं, जिनके जरिए विदेशों में छिपे भगोड़ों का लगातार पता लगाया जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “तीन नए कानूनों में (आरोपियों की) अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधान ने न्याय व्यवस्था को फरार अपराधियों के खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही शुरू करने का अधिकार दिया है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के सख्त अनुपालन के चलते 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं और 18,762 करोड़ रुपये की बरामदगी सुनिश्चित की गई।”

विदेशों में छिपे भगोड़ों पर शिकंजा

शाह ने कहा कि मजबूत और सुरक्षित भारत की परिकल्पना के तहत मोदी सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़ों पर शिकंजा कस दिया है। उन्होंने कहा, “वे भागकर चाहे किसी भी देश में गए हों, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत के नये दृष्टिकोण ने वर्ष 2019 से अब तक 274 अपराधियों की स्वदेश वापसी सुनिश्चित की है, जबकि संप्रग शासन के दौरान औसतन केवल चार अपराधियों को ही हर वर्ष वापस लाया जाता था।”

उन्होंने कहा, “वे दिन अब बीत चुके हैं जब अपराधी व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर बच निकलते थे। नये भारत ने नये कानूनों, संस्थानों और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से पुरानी व्यवस्था की हर कमी को दूर कर एक अभेद्य सुरक्षा जाल तैयार किया है।”

‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी करने की संख्या में वृद्धि

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इंटरपोल द्वारा ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी किये गए हैं। बयान में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ ‘रेड कार्नर नोटिस’ जारी किए गए हैं।

‘रेड कार्नर नोटिस’ दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने का अनुरोध होता है, ताकि उसके प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण कराने या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

गृह मंत्रालय ने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, अब प्रत्यर्पण के अनुरोध अधिक पेशेवर और मानक तरीके से तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिस देश से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है, उसकी दस्तावेजी जरूरतों और कानूनी अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिखित आश्वासन भी दिए जाते हैं।”

बयान में यह भी कहा गया है कि 2004 से 2013 के बीच भारत औसतन हर साल सिर्फ चार भगोड़ों को ही प्रत्यर्पित करा सका, जबकि प्रत्यर्पण के 110 अनुरोध लंबित पड़े रहे। मंत्रालय ने कहा कि 2014 से पहले देश का प्रत्यर्पण ढांचा पुराना हो चुका था। भारत की प्रत्यर्पण संधियां केवल 37 देशों के साथ थीं। साथ ही, आर्थिक भगोड़ों से निपटने या उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं था।

NATIONAL : 5 महीने में दाल 8 रुपए, तेल 6 रुपए तक महंगा, दूध-चीनी समेत राशन की 99% चीजों के बढ़े दाम

0

आम आदमी की रसोई पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 5 महीनों में खाने-पीने की लगभग हर जरूरी चीज महंगी हुई है। 28 फरवरी से 3 अगस्त के बीच, यानी करीब पांच महीने में 16 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं।5 महीने में राशन की लगभग हर जरूरी चीज महंगी

उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच महीनों में राशन की 16 प्रमुख वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं। इस दौरान दाल, खाद्य तेल, दूध, चीनी और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों में लगातार तेजी दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से कीमतों में तेजी का दौर शुरू हुआ। यही वह समय था, जब अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव और संघर्ष बढ़ा था, जिसका असर वैश्विक कमोडिटी बाजार और भारत की खाद्य कीमतों पर भी पड़ा।

दाल और तेल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

पिछले पांच महीनों में सबसे ज्यादा तेजी दालों और खाद्य तेलों में रही।

चना दाल: 4.65 रुपए प्रति किलो महंगी
अरहर दाल: 5.96 रुपए प्रति किलो महंगी
उड़द दाल: 5.71 रुपए प्रति किलो महंगी
मूंग दाल: 4.55 रुपए प्रति किलो महंगी
खाद्य तेल: करीब 6 रुपए तक महंगा
सरसों तेल: 7.56 रुपए प्रति लीटर महंगा
दूध, चीनी और चावल भी हुए महंगे
दूध: 3 रुपए प्रति लीटर महंगा
चीनी: 2.25 रुपए प्रति किलो महंगी
चावल: 1.57 रुपए प्रति किलो महंगा
नमक: 0.85 रुपए प्रति किलो महंगा

चीनी महंगी होने की क्या है वजह?

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की लगातार बढ़ती मांग है। इसके साथ ही चीनी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहने से बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

आटा क्यों रहा लगभग स्थिर?

दूसरी ओर, गेहूं की सरकारी खरीद बेहतर रहने और पर्याप्त सरकारी भंडार उपलब्ध होने से बाजार में गेहूं की सप्लाई बनी रही। यही वजह है कि आटे की कीमतों में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी हुई।

अगस्त से त्योहारी सीजन बढ़ा सकता है महंगाई

विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त से शुरू होने वाला त्योहारी सीजन खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ा सकता है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली के दौरान दाल, खाद्य तेल, चीनी और अन्य खाद्य उत्पादों की खपत बढ़ती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में नरमी नहीं आई और आयात लागत ऊंची बनी रही, तो आने वाले महीनों में दाम और बढ़ सकते हैं।

कमजोर मानसून भी बड़ी वजह

दालों की कीमतों में तेजी के पीछे इस बार कमजोर और असमान मानसून को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। जुलाई के आखिर तक खरीफ दालों की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 7 फीसदी कम रहा। इससे उत्पादन घटने और आयात बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिसका असर बाजार में कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

ईरान संकट और वैश्विक बाजार का भी असर

इंफोमेरिक रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा के अनुसार, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर अभी भी दबाव बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कमजोर मानसून के कारण दालों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

वहीं भारत खाद्य तेलों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोया ऑयल की कीमतों में तेजी, साथ ही पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आयात लागत बढ़ गई है। इसी वजह से घरेलू बाजार में खाद्य तेल और दालों की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

NATIONAL : उदयनिधि स्टालिन 8 घंटे बाद रिहा:सीएम विजय की करीबी एक्ट्रेस तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी

0

तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। तमिलनाडु पुलिस ने उनसे 8 घंटे तक पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

बाहर आकर उन्होंने कहा कि विजय की पुलिस ने मेरे साथ आतंकवादी जैसा सुलूक किया। मैंने किसी महिला का अपमान करने की कोशिश नहीं की।

उदयनिधि सोमवार को तंजावुर में कावेरी जल विवाद पर आयोजित रैली में भी मौजूद थे। इसी दौरान भीड़ में “तृषा, तृषा” के नारे लगे। आरोप है कि इस पर उदयनिधि ने कहा, “पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए।” बाद में सफाई दी कि उनका इशारा कावेरी के पानी की ओर था।

विजय की चुनाव में जीत के बाद मिलने पहुंची थीं तृषा

4 मई को तमिलनाडु विधानसभा के रिजल्ट आए थे। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीती थीं। उस दिन तृषा का बर्थडे था। रिजल्ट आने से पहले वो तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं।

विजय और तृषा की केमिस्ट्री काफी चर्चा में रही है। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं।

तमिलनाडु पुलिस ने उनसे 8 घंटे तक पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

BOLLYWOOD : लगान’, ‘गजनी’, ‘छत्रपति’ और ‘वीरम’ समेत कई ब्लॉकबस्टर और चर्चित फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता प्रदीप रावत का निधन

लगान’, ‘गजनी’, ‘छत्रपति’ और ‘वीरम’ समेत कई ब्लॉकबस्टर और चर्चित फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता प्रदीप रावत के निधन की दुखद खबर आई है। अभिनेता प्रदीप रावत के मैनेजर सिद्धार्थ ने बातचीत में उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा, ‘हां, यह खबर सही है… उनका कुछ घंटे पहले निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के भिवंडी इलाके के अस्पताल में अंतिम सांस ली’।

बुधवार दोपहर अभिनेता प्रदीप रावत का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। ‘चार साल पहले उन्हें कैंसर हुआ था’
अभिनेता प्रदीप रावत कैंसर से जंग हार गए। आज 04 अगस्त को 74 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। अभिनेता के मैनेजर के मुताबिक, उन्हें चार साल पहले उन्हें कैंसर हुआ था। उन्होंने कहा, ‘करीब चार साल पहले उन्हें कैंसर हुआ था, लेकिन उन्होंने उस बीमारी को मात दे दी थी। करीब डेढ़ महीने पहले कैंसर फिर से लौट आया’।

अस्पताल में भर्ती थे अभिनेता
करीब डेढ़ महीने पहले अभिनेता प्रदीप को फिर कैंसर का पता चला। इसके बाद से वे लगातार अस्पताल में भर्ती थे। उनका उपचार जारी थी। प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिर गए। इसके अलावा उन्हें बुखार भी भी हो गया था। सिद्धार्थ ने आगे कहा, ‘अचानक उनके प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिर गए। इसी बीच उन्हें वायरल फीवर भी हो गया था। यही वजह रही कि उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्हें बचाया नहीं जा सका’।

‘कोकिलाबेन अस्पताल से भिवंडी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था’
सिद्धार्थ के मुताबिक, ‘पहले उनका इलाज करीब तीन सप्ताह तक कोकिलाबेन अस्पताल में चल रहा था। इसके बाद उन्हें बांद्रा के एक कैंसर विशेषज्ञ अस्पताल में शिफ्ट किया गया। फिलहाल मुझे उस अस्पताल का नाम याद नहीं है, लेकिन पिछले करीब 10 दिनों से उनका इलाज वहीं चल रहा था। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली’।

NATIONAL : राहुल गांधी बोले- RSS इतिहास बदलने की कोशिश कर रहा, इनके पीछे एक खतरनाक विचारधारा है, देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा

0

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि RSS देश का इतिहास बदलने की कोशिश कर रहा है। इसके पीछे एक खतरनाक विचार है। भारत अपने इतिहास के कुचले जाने को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा-देश के छात्र दर्द में हैं। उन्हें PM नरेंद्र मोदी की माफी की जरूरत नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि PM अपनी सरकार के कामों के लिए माफी मांगें।

राहुल गांधी मंगलवार को पूर्व कांग्रेस सांसद वाइको की किताब वाइको इन पार्लियामेंट के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे।छात्रों के पास काम नहीं, परीक्षा में निष्पक्षता चाहते हैं

राहुल ने कहा, “हम अजीब दौर से गुजर रहे हैं, जहां छात्र सड़कों पर हैं, उनके पास काम नहीं है और वे परीक्षाओं में निष्पक्षता तथा एक बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं।

दूसरी तरफ PM उन्हें माफ कर रहे हैं। नहीं पता कि PM को यह विचार कहां से आता है कि वे उन्हें या भारत के भविष्य को माफ कर सकते हैं।

हर राज्य के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो- राहुल

  • कुछ ऐसे नासमझ लोग हैं जो तमिल, मराठी और बंगाली लोगों को नहीं समझते और कहते हैं कि इनमें से कोई भी इतिहास या कल्पना काम की नहीं है।
  • संविधान में स्पष्ट लिखा है कि इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ है और राज्य भारत के लोगों की अभिव्यक्ति हैं।

सैनिक स्कूलों में RSS की दखल बढ़ रही

राहुल गांधी ने मंगलवार को ही रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सैनिक स्कूलों में RSS की दखल बेवजह बढ़ रही है।

इस पर समिति के चेयरमैन राधा मोहन सिंह ने राहुल से अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करने को कहा है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि राहुल जो भी दस्तावेज देंगे, उन्हें स्पष्टीकरण के लिए संबंधित मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।

NATIONAL : कर्ज में डूबे लोकसभा के संयुक्त निदेशक ने की आत्महत्या, 10 पन्नों के सुसाइड नोट में आर्थिक तंगी उजागर

0

भारी कर्ज में दबे लोकसभा के संयुक्त निदेशक ने आत्महत्या कर ली। अधिकारी का शव रविवार को उनके घर में फंदे से लटका मिला। उनकी पत्नी घटना के वक्त घर पर नहीं थीं। लौटने के बाद उनकी सूचना पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को घर से 10 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें आर्थिक तंगी और लगभग 70 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख है।

पुलिस के अनुसार, गौरव गौतम (40) केंद्रीय विहार-2 के पॉकेट-7 में परिवार के साथ रहते थे। रविवार शाम उनकी पत्नी दिल्ली गई थीं और घर पर कोई नहीं था। जब वह लौटीं तो गौरव का शव पंखे से लटका मिला। उनके रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उन्हें तत्काल सेक्टर-110 स्थित यथार्थ अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


जांच टीम ने कमरे से मिले सुसाइड नोट को सुरक्षित रख लिया है। पुलिस का कहना है कि नोट की हैंडराइटिंग और अन्य तथ्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि हो सके। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गौरव गौतम लंबे समय से आर्थिक दबाव में थे।
कर्ज और मानसिक तनाव में उठाया आत्मघाती कदम
सुसाइड नोट में लिखा है कि कई कारणों से उन पर करीब 70 लाख रुपये का कर्ज हो गया था और वह उसे चुकाने की स्थिति में नहीं थे। इसी मानसिक तनाव के चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी मौत के लिए परिवार का कोई सदस्य जिम्मेदार नहीं है।

एसीपी दीक्षा सिंह ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। सुसाइड नोट, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा। पुलिस आर्थिक लेनदेन, कर्ज और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

NATIONAL : इंश्योरेंस नहीं तो न दें पेट्रोल’, SC का केन्द्र को निर्देश- तैयार करें पायलट प्रोजेक्ट

0

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को लेकर मंगलवार (4 अगस्त 2026) को पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया. इसके तहत बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपो पर ईंधन देने से मना किया जा सके.

कोर्ट ने ऐसी गाड़ियों की पहचान करने और उन पर जुर्माना लगाने के लिए टेक्नोलॉजी पर अधारित सिस्टम बनाने का भी आदेश दिया. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांस कुमार मिश्रा की बेंच ने कई निर्देश जारी किए हैं. 

निर्देशों में क्या-क्या शामिल है? 

इन निर्देशों में बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के लिए ऑटोमैटिक ई-चालान जारी करने के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों को इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ना, ट्रैफिक पुलिस को इंश्योरेंस स्टेटस की तुरंत जांच के लिए हैंडहेल्ड डिवाइस देना, नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाना, पुराने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों को तेजी से निपटारा करना. शामिल हैं. भारत में चलने वाली 56 प्रतिशत गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के हैं. 

कोर्ट ने कहा, ‘मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाना ही नहीं है. बल्कि यह भी है कि उन्हें लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई में न पड़ना पड़े. इसके अलावा कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और IRDAI को एक ऐसे पायलट प्रोजेक्ट की जांच करने का निर्देश दिया है. इसके तहत ईंधन की सप्लाई को गाड़ी के इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाएगा.’

बेंच ने अपने आदेश में क्या कहा है? 

बेंच ने आदेश देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो संबंधित गाड़ी को पेट्रोल पंपों पर तबतक ईंधन नहीं दिया जाएगा, जबतक कि वैध इंश्योरेंस न ले लिया जाए. बेंच ने जोर देते हुए कहा कि ऐसा सिस्टम बिना इंश्योरेंस और बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों की पहचान करने में मदद करेगा. मालिकों को वैध इंश्योरेंस बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा. कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इस प्रोजेक्ट के ANPR कैमरों का इस्तेमाल करके लागू किया जा सकता है. 

- Advertisement -

News of the Day