डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि अगले दो से तीन हफ्तों में हम ईरान को वापस पाषाण युग में ले जाएंगे, लेकिन इसका इकलौता तरीका भीषण बमबारी और परमाणु हमला है, जो अमेरिका नहीं कर सकता है.
ईरान के साथ चल रही जंग के 34वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया और जंग से जुड़े हालात के बारे में पूरी दुनिया को बताया. तकरीबन 20 मिनट लंबे इस संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के लोगों को ये यकीन दिलाने की कोशिश की कि अमेरिका ईरान से जंग जीत चुका है और इस जंग में ईरान बर्बाद हो चुका है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिख रही है. क्योंकि अपने भाषण में ट्रंप ने अमेरिका के लोगों से और पूरी दुनिया से कम से कम 10 ऐसे बड़े झूठ बोले हैं, जो साबित करने के लिए काफी हैं कि ट्रंप अब इस जंग से हताश हैं और किसी भी कीमत पर वो इस जंग को खत्म करना चाहते हैं.
झूठ नंबर 1: बर्बाद हो चुकी है ईरान की सेना
राष्ट्र को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की नेवी खत्म हो चुकी है और एयरफोर्स तबाह हो चुकी है. मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता में भारी कमी आई है और उनकी हथियारों की फैक्टरियां और रॉकेट लॉन्चर टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हैं. युद्ध के इतिहास में पहले कभी किसी दुश्मन को, महज कुछ ही हफ्तों के भीतर इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ा है.
जबकि हकीकत ये है कि ईरान अब भी लड़ रहा है और पहले के मुकाबले और भी मजबूती से लड़ रहा है. जब ट्रंप ईरान की मिसाइलें और ड्रोन को बर्बाद होने के दावे कर रहे थे तो उस दावे के चंद घंटों के अंदर ही ईरान ने इजरायल पर हमला किया है. जिस ईरानी नेवी के खत्म होने की बात ट्रंप कर रहे हैं, उसी के दम पर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है और ट्रंप उसे खुलवाने की स्थिति में भी नहीं हैं. लिहाजा वो कह चुके हैं कि अमेरिका को होर्मुज से कोई मतलब नहीं है और जिसको तेल चाहिए वो या तो होर्मुज खुलवाए या फिर अमेरिका से तेल खरीद ले. सीधा मतलब है कि ट्रंप का ये दावा झूठा हैं.
झूठ नंबर 2: ईरान में हुआ सत्ता परिवर्तन
अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व पुराने के मुकाबले कम कट्टर है, लेकिन ईरान की हकीकत ये है कि वहां सत्ता परिवर्तन तो हुआ है, लेकिन वैसा नहीं जैसा ट्रंप चाहते थे. अयातुल्लाह खमेनेई की मौत के बाद ईरान का नेतृत्व उनके ही बेटे मुज्तबा खमेनेई के हाथ में है, जो अपने पिता से ज्यादा कट्टर माने जाते हैं. अयातुल्लाह खमेनेई तो ईरान के राष्ट्रपति और फिर बाद में सुप्रीम लीडर बने थे जबकि मुज्तबा ईरान की सबसे एलिट फोर्स आईआरजीसी के कमांडर रह चुके हैं.
अयातुल्ला खमेनेई ने अपनी पूरी जिंदगी में जितने हथियार दागने के आदेश नहीं दिए होंगे, उससे ज्यादा ड्रोन और मिसाइल मुज्तबा के कार्यकाल में दागे जा चुके हैं. अब भी ईरान की ओर से साफ किया ही जा चुका है कि ईरान कोई समझौता नहीं करने वाला, वो कहीं नहीं रुकने वाला और उसके हमले लगातार तब तक जारी रहेंगे जब तक कि ईरान के दुश्मन अमेरिका और इजरायल घुटने न टेक दें.
झूठ नंबर 3: खत्म हो गई ईरान की परमाणु क्षमता
ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया है कि ईरान की परमाणु क्षमता खत्म हो गई है. हालांकि, सच्चाई यह है कि ट्रंप ने जब जून 2025 में ऑपरेशन मिड नाइट हैमर किया था, तब भी उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना ही था. वो ऑपरेशन जब खत्म हुआ तब भी ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता खत्म हो गई है क्योंकि तब नतांज और इस्फहान पर बी-2 स्टील्थ बॉम्बर से हमला किया गया था.
आठ महीने बाद ट्रंप फिर से वही बात दोहरा रहे हैं. कह रहे हैं कि परमाणु स्थलों को हमने बर्बाद कर दिया है और ईरान अब परमाणु की धूल तक नहीं पहुंच सकता. जबकि इससे पहले उन्होंने कहा था कि वो ईरान का संवर्धित यूरेनियम हासिल कर लेंगे, लेकिन अभी तक वो यूरेनियम ट्रंप के हाथ नहीं लगा, तो उनका परमाणु वाला दावा भी अभी झूठा है क्योंकि इसका कोई सबूत ट्रंप के पास नहीं है.
झूठ नंबर 4: मिडिल ईस्ट के सहयोगियों की मदद करते रहेंगे
ट्रंप ने अपने भाषण में मध्य पूर्व के सहयोगी देशों इजरायल, सऊदी अरब, कतर, UAE, कुवैत और बहरीन को धन्यवाद दिया है और कहा है कि हम उन्हें किसी भी तरह से चोट नहीं पहुंचने देंगे. पर हकीकत ये है कि ईरान सबसे ज्यादा चोट अमेरिका के इन्हीं दोस्तों को पहुंचा रहा है. सबसे ज्यादा हमले इन्हीं पर कर रहा है. ये वो देश हैं, जिन्हें अपना तेल और गैस बेचने के लिए होर्मुज का रास्ता चाहिए, लेकिन ईरान ने उस रास्ते को रोक रखा है और ट्रंप कह चुके हैं कि वो होर्मुज खुलवाने नहीं जाएंगे. अगर होर्मुज नहीं खुला तो मिडिल ईस्ट के देश तेल-गैस बेच नहीं पाएंगे और दुनिया उसे खरीद नहीं पाएगी तो नुकसान तो ट्रंप के दोस्तों का ही है, जिसे ट्रंप मान ही नहीं रहे हैं.
झूठ नंबर 5: ईरान को पाषाण युग में भेज देंगे
ट्रंप कह रहे हैं कि अमेरिका के सभी सैन्य लक्ष्यों को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा और अगले दो से तीन हफ्तों में हम उन्हें वापस पाषाण युग में ले जाएंगे, जहां के वो हकदार हैं. हालांकि, हकीकत ये है कि अभी अमेरिका ईरान पर हमले नहीं कर रहा है. ईरान को पाषाण युग में भेजने का इकलौता तरीका भीषण बमबारी और परमाणु हमला है, जो अमेरिका नहीं कर सकता है. ऐसे हमले में आम नागरिकों के भी मारे जाने का खतरा है और ट्रंप ये खतरा कभी मोल नहीं ले पाएंगे क्योंकि एक स्कूल पर हुए हमले में बच्चों की मौत के बाद से ही ट्रंप बैकफुट पर हैं.
वहीं, एक और तरीका ईरान में सेना भेजने का है, लेकिन ट्रंप साफ कर चुके हैं कि सेना ईरान में दाखिल नहीं होगी. इजरायल जैसे सहयोगी भी ईरान में बूट ऑन द ग्राउंड से इनकार कर चुके हैं तो ट्रंप का ईरान को पाषाण युग में भेजने का दावा भी हवा हवाई ही है.
झूठ नंबर 6: ईरान से जारी है बातचीत
ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान से बातचीत जारी है, वहां सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व समझदार है. जबकि इसकी सच्चाई यह है कि ईरान ट्रंप के इस दावे को बार-बार नकार रहा है. ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची हों या फिर उसके सैन्य प्रवक्ता, वो साफ कर चुके हैं कि कोई बातचीत नहीं होगी और ट्रंप जिस बातचीत के दावे कर रहे हैं, लगता है वो खुद से बातचीत कर रहे हैं. ईरान कह रहा है कि ट्रंप की बातें झूठी हैं और उन पर ध्यान नहीं देना चाहिए. खुद ट्रंप भी बातचीत की बात तो कह रहे हैं, लेकिन ये नहीं बता रहे हैं कि ईरान में उनकी बात असल में हो किससे रही है. लिहाजा ये दावा भी संदेहास्पद ही है.
झूठ नंबर 7: बिजली और तेल ठिकानों पर हमला
ट्रंप कह रहे हैं कि समझौता नहीं होता तो हम उनके बिजली संयंत्रों पर हमला करेंगे. हमने अभी तक उनके तेल क्षेत्रों पर हमला नहीं किया है, जबकि वह सबसे आसान लक्ष्य है. जबकि हकीकत ट्रंप के दावे से बिल्कुल उलट है.
ट्रंप ईरान के बिजली संयंत्रों पर तो हमला कर सकते हैं, लेकिन तेल क्षेत्र पर हमला आत्मघाती साबित हो सकता है. ईरान का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र खार्ग आइलैंड है. खार्ग इतना सुरक्षित है उस पर हमला करना लगभग नामुमकिन है. इस पर न तो जमीन से हमला किया जा सकता है और न ही आसमान से. समुद्र से हमला भी लगभग नामुमकिन ही है, लेकिन एक बार को अगर मान लें कि अमेरिका पूरी ताकत लगाकर खार्ग पर हमला कर ही दे, तो फिर उस आइलैंड पर मौजूद तेल में आग लग जाएगी और उस आग से जो गर्मी पैदा होगी, वो दुनिया भर की तमाम अर्थव्यवस्थाओं को झुलसा देगी.
पूरा ग्लोबल ऑयल मार्केट ध्वस्त हो जाएगा, दुनिया भर में तेल की कीमतें कुछ घंटों के अंदर आसमान छूने लगेंगी और उससे जो वैश्विक मंदी आएगी, तो फिर उबरना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. क्योंकि खार्ग पर एक वक्त में तकरीबन 20 मिलियन बैरल तेल होता है. यानी कि तकरीबन दो करोड़ बैरल तेल और एक बैरल तेल को जलाने से तकरीबन 6.1 गीगाजूल उर्जा निकलती है. अगर कुल तेल के जलने से निकली उर्जा की बात की जाए, तो ये तकरीबन 29 मेगाटन टीएनटी होगी. बता दें कि 1945 में जब जापान के नागासाकी में अमेरिका ने परमाणु हमला किया था तो उसकी क्षमता सिर्फ 15 किलोटन थी. जब 15 किलोटन के बम ने इतनी तबाही मचाई कि उसके निशान 81 साल बाद भी देखे जा सकते हैं तो आप सोच भी नहीं सकते कि खर्ग पर मौजूद तेल भंडार में आग लगी तो अंजाम क्या होगा.
झूठ नंबर 8: अमेरिका में नहीं है महंगाई
ट्रंप का दावा है कि उन्होंने इतिहास की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई है और अब अमेरिका में कोई महंगाई नहीं है. ट्रंप के इस दावे में सच्चाई जरूर है, लेकिन जब से जंग शुरू हुई है अमेरिका के शेयर बाजार में भूचाल आया हुआ है. ट्रंप जंग खत्म करने की बात करते हैं तो बाजार चढ़ता है फिर ईरान इनकार करता है तो बाजार गिर जाता है.
जंग की वजह से तेल के दाम ऑल टाइम हाई के करीब हैं. होर्मुज के बंद होने से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है और ट्रंप चाहे जितने दावे करें, अगर ये नहीं खुला तो परेशानी अमेरिका को भी होगी, क्योंकि अमेरिका के पास तेल-गैस उतना ही है, जितना उसका खुद का इस्तेमाल है. वो दुनिया को बहुत कम तेल-गैस बेच पाता है. अगर होर्मुज नहीं खुला तो अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा, जिससे तेल के दाम और बढ़ेंगे और ये दाम अमेरिका में भी बढ़ेंगे ही बढ़ेंगे.
झूठ नंबर 9: दो-तीन हफ्तों में खत्म कर देंगे जंग
ट्रंप का यह भी दावा है कि वो दो-तीन हफ्तों में जंग खत्म कर देंगे, लेकिन यह दावा भी पूरी तरह से झूठा है, क्योंकि ट्रंप ने इस जंग की शुरुआत में दो-तीन दिन में जंग खत्म करने की बात की थी. अब एक महीना बीतने के बाद भी वो और 20-25 दिन जंग चलने की बात कर रहे हैं तो यकीन कैसे हो.
बाकी ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान की तबाही की तो बात की है, लेकिन वो एक बार भी नहीं बोल पाए कि इस जंग में अमेरिका का कितना नुकसान हुआ है. अमेरिकी एयर फोर्स को कितना नुकसान हुआ है और अमेरिका के कितने फाइटर प्लेन इस जंग में बर्बाद हुए हैं.
कुल मिलाकर अपने भाषण में ट्रंप ने कोई भी नई बात नहीं कही है. उल्टे-पुलटे बातों में इतने झूठ बोल दिए हैं कि अब किसी को नहीं समझ में आ रहा कि जंग के खत्म होने का रास्ता क्या है और इसका नतीजा शेयर बाजार पर साफ तौर दिख रहा है, जो ट्रंप के बयान के बाद लगातार गिरता ही जा रहा है