अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह लेबनान में सक्रिय अपने प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर नियंत्रण रखे। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि यदि ईरान हिजबुल्लाह को नहीं रोकता है, तो अमेरिका उस पर पिछले सप्ताह किए गए हमलों से भी ज्यादा बड़ा हमला कर सकता है। इसी बीच, अमेरिका और ईरान के मध्य स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक में महत्वपूर्ण बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय तनाव कम करने और संबंधों को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
उधर, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने कहा है कि लेबनान में लागू युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष दोबारा शुरू हो सकता है। उन्होंने सैनिकों को किसी भी संभावित परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया। जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह को हाल के संघर्षों में भारी नुकसान हुआ है और इजराइली सेना उसे फिर से मजबूत होने का मौका नहीं देना चाहती।
हिजबुल्लाह की स्थिति पर इजराइल का दावा इयाल जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है। उनके मुताबिक संगठन को सैन्य और रणनीतिक स्तर पर बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि इजराइल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर इजराइल में कराए गए एक सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने माना कि इस समझौते से ईरान को अधिक फायदा हुआ है। सर्वे के अनुसार, 92% इजराइली नागरिकों का मानना है कि युद्ध के बाद हुए इस समझौते से तेहरान को आर्थिक और कूटनीतिक लाभ मिला, जबकि इजराइल को अपेक्षित राजनीतिक बढ़त हासिल नहीं हो सकी।
ट्रम्प की भूमिका को अधिक प्रभावी मान रहे इजराइली सर्वे में शामिल 78% लोगों ने यह भी माना कि इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना में अधिक प्रभावशाली रही। प्रतिभागियों का मानना है कि अंतिम समझौते की दिशा तय करने और वार्ता को आगे बढ़ाने में वॉशिंगटन की भूमिका अधिक निर्णायक रही, जबकि इजराइल की अपेक्षाकृत सीमित भूमिका दिखाई दी।
स्वस्थ रहने के लिए रोजाना पांच बार फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन केवल मात्रा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खाद्य पदार्थों का चयन भी महत्वपूर्ण है। ताजा अध्ययन में सामने आया कि अधिकतर लोग ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं कर रहे हैं जिनमें प्राकृतिक फ्लैवानॉल यौगिक पाया जाता है। यह यौगिक हृदय रोग से होने वाली मृत्यु के जोखिम को कम करता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-डेविस और मार्स इंक. के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन फूड एंड फंक्शन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका और ब्रिटेन के 30 हजार से अधिक लोगों के आहार संबंधी आंकड़ों और जैविक संकेतकों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि 20% से भी कम लोग उस स्तर तक फ्लैवानॉल का सेवन कर रहे थे।
चौंकाने वाली बात यह रही कि कई लोग प्रतिदिन पांच बार फल और सब्जियां खाने के बावजूद भी पर्याप्त फ्लैवानॉल नहीं ले पा रहे थे। प्रमुख लेखक डॉ. जेवियर ओटावियानी के अनुसार लोग अक्सर मान लेते हैं कि फल और सब्जियां खाने से उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है। भोजन में कुछ विशेष फलों, सब्जियों और पेयों को शामिल करने से फ्लैवानॉल की मात्रा काफी बढ़ सकती है।
सही पांच फल चुनना जरूरी
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर गुंटर कूनले का कहना है कि दिन में पांच बार फल और सब्जियां खाने की सलाह सही है, लेकिन अब यह समझने की जरूरत है कि वे पांच विकल्प कौन से हों। अलग-अलग फल और सब्जियां केवल विटामिन और खनिज ही नहीं, बल्कि विभिन्न जैव-सक्रिय यौगिक भी प्रदान करती हैं, जिनके स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं।
शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर भाजपा पर जमकर निशाना साधा और कांग्रेस में विलय की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने 6 सांसदों की बगावत के बाद मतदाताओं से माफी मांगी और दावा किया कि इस संकट से शिवसैनिक निराश नहीं बल्कि और मजबूत हुए हैं। उन्होंने क्या-क्या कहा? जानिए…
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर विरोधियों को करारा जवाब दिया है। मुंबई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस के साथ पार्टी के विलय की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उद्धव ठाकरे ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब हमने 30 साल के गठबंधन के बाद भी भाजपा के साथ अपनी पार्टी का विलय नहीं किया, तो फिर कांग्रेस के साथ विलय करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
अपनी पार्टी के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद मेरा संकल्प कमजोर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर पार्टी को मुझ पर भरोसा नहीं है, तो मैं अपना पद छोड़ने को तैयार हूं। उन्होंने कहा, ‘मैं किसी भी योग्य व्यक्ति को शिवसेना का अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार हूं। मैं संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं हूं, लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस जिम्मेदारी के सही आदमी नहीं हूं, उसी दिन यह पद छोड़ दूंगा।’
उद्धव ठाकरे ने भाजपा और कांग्रेस की राजनीति की तुलना करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारे हमेशा से तीखे राजनीतिक मतभेद रहे हैं। विचारों की यह लड़ाई जगजाहिर है। लेकिन कांग्रेस ने कभी भी शिवसेना को जड़ से खत्म करने की कोशिश नहीं की। इसके विपरीत, भाजपा आज शिवसेना का नामोनिशान मिटाने पर तुली हुई है। वह हमारी पार्टी को पूरी तरह बर्बाद करना चाहती है।
पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र में भी बगावत की खबर सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। हालांकि, इस बीच उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने साफ कहा कि इन सांसदों के दगा देने से शिवसैनिक बिल्कुल भी निराश या हताश नहीं हैं। इसके उलट, इस धोखे ने शिवसैनिकों के भीतर एक नई आग पैदा कर दी है। वे अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और एकजुट हो गए हैं।
भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे भावुक भी हुए। उन्होंने महाराष्ट्र के उन सभी मतदाताओं से हाथ जोड़कर माफी मांगी, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर जीते सांसदों को अपना कीमती वोट दिया था। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जनता ने चुनकर भेजा, उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंप दिया। मैं इन धोखेबाज सांसदों को वोट देने वाले अपने मतदाताओं से दिल से क्षमा मांगता हूं।
उद्धव ठाकरे ने देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हमारा देश ‘एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं’ की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो देश से लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। यह तानाशाही वाली सोच भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसके खिलाफ हम सबको मिलकर लड़ना होगा।
इसके साथ ही उन्होंने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया जो अक्सर उन पर घर से बाहर न निकलने का आरोप लगाते हैं। उद्धव ने तंज कसते हुए पूछा कि अगर मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से नहीं मिलता था या मैंने पूरे महाराष्ट्र का दौरा नहीं किया था, तो फिर हमने हालिया चुनाव कैसे जीत लिए? यह जीत इस बात का सबूत है कि हमारी जमीन मजबूत है और जनता हमारे साथ खड़ी है। मुंबई के इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने साफ कर दिया कि असली शिवसेना कौन है।
राम मंदिर चंदा विवाद और SIT जांच प्रकरण के बीच आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा है। मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं और ‘रामायण वैक्स संग्रहालय’ का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही पहली बार मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सरकारी प्रोटोकॉल से बाहर रखा है। इसके साथ गोंडा में कार्यक्रम प्रतावित है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (शुक्रवार) गोंडा के साथ-साथ अयोध्या के बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। राम मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित गबन के आरोपों को लेकर गरमाई राजनीति और चल रही SIT जांच के बीच सीएम का यह दौरा बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मुख्यमंत्री आज अयोध्या में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देने के साथ-साथ कई स्थानीय कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। हालांकि, इस पूरे दौरे में सबसे ज्यादा चर्चा मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की अनुपस्थिति को लेकर हो रही है।
चंपत राय को सीएम के कार्यक्रम से क्यों रखा गया दूर? अमूमन जब भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या आते हैं, तो राम मंदिर परिसर में खुद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय उनकी अगवानी करते हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब चंपत राय सीएम के आधिकारिक कार्यक्रम में नजर नहीं आएंगे। दरअसल, जिला प्रशासन द्वारा मंदिर ट्रस्ट को भेजे गए आधिकारिक प्रोटोकॉल के पॉइंट नंबर 29 में स्पष्ट रूप से चंपत राय से दूरी बनाने का अनुरोध किया गया है। प्रोटोकॉल में चंपत राय से कहा गया है कि वे मुख्यमंत्री के दर्शन-पूजन की व्यवस्था के लिए अपने स्तर से किसी अन्य व्यक्ति को नामित करें। माना जा रहा है कि मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों और जारी SIT जांच के बीच सरकार ने चंपत राय से दूरी बना ली है, ताकि मुख्यमंत्री की छवि पर कोई आंच न आए।
क्या है राम मंदिर चंदा विवाद और SIT जांच? पिछले कुछ दिनों से अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की रकम में हेराफेरी का मामला देश भर की सुर्खियों में है। विपक्ष और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट पर लगातार हमलावर हैं। विवाद बढ़ता देख उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो इस समय मंदिर परिसर में सघन जांच कर रही है।
सीएम योगी का आज का पूरा शेड्यूल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज का दिन काफी व्यस्त रहने वाला है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या और गोंडा के दौरे पर रहेंगे। सुबह 10:35 बजे वे रुदौली विधानसभा पहुंचकर कामाख्या मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे और झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। दोपहर 12:25 बजे गोंडा पहुंचकर लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा करेंगे। फिर 2:55 बजे अयोध्या के राम कथा पार्क हेलीपैड पहुंचेंगे और हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। 3:30 बजे ऋषभदेव दिगंबर जैन मंदिर जाएंगे और शाम 5:10 बजे रामायण वैक्स म्यूजियम का उद्घाटन करेंगे।
10 करोड़ की लागत से बने ‘रामायण वैक्स संग्रहालय’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री के इस दौरे का एक और बड़ा आकर्षण रामायण वैक्स संग्रहालय (Ramayana Wax Museum) का उद्घाटन है। अयोध्या की कांशीराम कॉलोनी के पास लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से इस शानदार मोम के संग्रहालय को तैयार किया गया है। अयोध्या के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस संग्रहालय में रामायण काल की प्रमुख घटनाओं को सजीव रूप में दर्शाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और संकटमोचन हनुमान सहित कई पौराणिक चरित्रों की मोम से बनी खूबसूरत मूर्तियां देख सकेंगे।
केंद्र सरकार ने तुषार मेहता को 1 जुलाई 2026 से तीन साल के लिए फिर भारत का सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया है। 2018 में इस पद पर नियुक्त मेहता का कार्यकाल 2020 और 2023 में भी बढ़ाया गया था। एसीसी ने उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी है।
केंद्र सरकार ने तुषार मेहता को भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में तीन साल के लिए फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगी। यह उनकी तीसरी बार पुनर्नियुक्ति की गई है। इससे पहले दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने देश के दूसरे सर्वोच्च विधि अधिकारी के रूप में तुषार मेहता के पद पर बने रहने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आदेश में कहा गया कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने तुषार मेहता को भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में तीन साल के लिए फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो।
मेहता को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में सेवा देने के बाद अक्टूबर 2018 में सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। केंद्र सरकार ने बाद में उन्हें 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी तीन साल के कार्यकाल के लिए और फिर 2023 में पुनः नियुक्त किया। नवीनतम कार्यकाल विस्तार के साथ, मेहता सॉलिसिटर जनरल के रूप में लगभग आठ वर्ष पूरे कर चुके हैं और नए कार्यकाल के अंत तक इस पद पर 11 वर्ष पूरे करने वाले हैं, जिससे वे देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले विधि अधिकारियों में से एक बन जाएंगे।
सॉलिसिटर जनरल के रूप में, मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, नीतिगत और आपराधिक मामलों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व किया है।
एसीसी ने सर्वोच्च न्यायालय के लिए पांच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों (एएसजी) की तीन साल के अतिरिक्त कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है।विक्रमजीत बनर्जी और केएम नटराज को 1 जुलाई, 2026 से पुनः नियुक्त किया गया है, जबकि एसवी राजू, एन वेंकटरामन और ऐश्वर्या भाटी को 30 जून, 2026 से पुनः नियुक्त किया गया है। एक अलग निर्णय में एसीसी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा की पुनर्नियुक्ति को भी मंजूरी दी है। उनका कार्यकाल 1 जुलाई, 2026 से छह माह के लिए या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा।
आज 22 जून 2026 को जेष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमीहै। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पांच दिन के ओडिशा और मध्य प्रदेश दौरे का आज आखिरी दिन है। इसके साथ ही अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि भारत पहुंचेगे।
राष्ट्रपति का मध्य प्रदेश दौरा
शुरुआत राष्ट्रपति से। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिन से ओडिशा और मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। सोमवार को इस दौरे का आखिरी दिन है। राष्ट्रपति आज मध्य प्रदेश स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में सहरिया जनजाति के सदस्यों, चीता ट्रैकर्स, टूरिस्ट गाइड और कूनो फील्ड टीम के सदस्यों के साथ संवाद करेंगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अलीगढ़ के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान नौरंगीलाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और क्वार्सी ओवर ब्रिज सहित कई प्रमुख विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। उम्मीद है इस दौरान जनपद के कई अधिकारियों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए समीक्षा बैठक भी की जाएगी।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि भारत पहुंचेंगे
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर सोमवार को भारत के दौरे पर आएंगे। वह 23 और 24 जून को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इससे पहले 2 से 4 जून के बीच अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में अमेरिकी टीम ने भारतीय अधिकारियों के साथ समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत की थी। 5 जून को पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अगले महीने के मध्य तक लागू किए जाने की संभावना है।
भाजपा अध्यक्ष नतीन नवीन पंजाब के दौरे पर हैं। इस दौरान वह सोमवार को पंजाब के सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों तथा युवा प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, भाजपा नेतृत्व इस दौरे के माध्यम से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने, संगठन को धरातल पर मजबूत करने और पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी पर अंकुश लगाने की दिशा में काम कर रहा है।
‘पुष्पा 2’ भगदड़ मामले में सुनवाई
4 दिसंबर 2024 को ‘पुष्पा 2’ की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान भारी भीड़ जमा होने से भगदड़ हो गई थी। इस मामले में अभिनेता अल्लू अर्जुन सोमवार को कोर्ट में पेश होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अल्लू अर्जुन अपनी कार के सनरूफ से बाहर आकर फैंस को हाथ हिला रहे थे, तभी अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में रेवती नाम की एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका बेटा श्री तेजा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने इस मामले में अल्लू अर्जुन को आरोपी नंबर 11 (A11) बनाया है। वहीं, थिएटर मैनेजमेंट को आरोपी नंबर 1 से 10 तक रखा गया है। कुल 19 लोगों को समन जारी किए गए हैं और 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। (संबंधित खबर यहां पढ़ें)
ब्रिक्स देशों के एनएसए की दो दिवसीय 16वीं बैठक सोमवार से भारत में होगी। बैठक में सुरक्षा, आतंकवाद और तकनीकी खतरों पर चर्चा होगी। इसमें अजीत डोभाल और चीन के वांग यी शामिल होंगे। भारत सीमा विवाद पर सख्त रुख रखते हुए डैपसांग और डेमचोक से चीनी सैनिकों की वापसी का मुद्दा उठा सकता है।
भारत की मेजबानी में सोमवार से ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) और उच्च प्रतिनिधियों की 16वीं बैठक शुरू हो रही है। दो दिवसीय इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। सितंबर में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित यह बैठक सदस्य देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक का औपचारिक एजेंडा गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों, आतंकरोधी सहयोग और नई प्रौद्योगिकियों से जुड़े खतरों पर केंद्रित है। वहीं, भारत और चीन के बीच जारी सीमा गतिरोध की पृष्ठभूमि इसे अतिरिक्त महत्व प्रदान कर रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक का मुख्य विषय दुनिया के सामने तेजी से उभर रही गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां होंगी। सदस्य देशों के प्रतिनिधि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, नई तकनीकों के दुरुपयोग से पैदा हो रहे खतरों और उनसे निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श करेंगे। इसके अलावा आतंकरोधी सहयोग तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित उपयोग पर गठित ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों के निष्कर्षों की भी समीक्षा की जाएगी।
बैठक में चीन का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधि वांग यी करेंगे। डोभाल के निमंत्रण पर उनकी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की बातचीत के बाद कुछ विवादित बिंदुओं से सैनिकों की आंशिक वापसी जरूर हुई है, लेकिन पूर्ण सैन्य वापसी और गश्त के अधिकारों को लेकर गतिरोध अब भी कायम है।
यही कारण है कि यह बैठक केवल बहुपक्षीय सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण नजर से देखा जा रहा है। डोभाल और वांग यी की मौजूदगी में होने वाला यह संवाद इस बात का संकेत है कि दोनों देश मतभेदों के बावजूद बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहते हैं। हालांकि भारत का रुख इस मामले में पहले से स्पष्ट और सख्त रहा है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा पर पूर्ण शांति और स्थिरता बहाल हुए बिना द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य नहीं माना जा सकता।
इस बैठक को चीन की कथनी और करनी की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। एक ओर चीन बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और साझेदारी की बात करता है, वहीं दूसरी ओर सीमा विवाद से जुड़े मुद्दे अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं। भारत के लिए यह अवसर चीन के वास्तविक रुख को परखने का भी माना जा रहा है। इसके पूरे आसार हैं कि भारत चीनी पक्ष के सामने डैपसांग और डेमचोक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की पूर्ण वापसी का मुद्दा उठाए। इस दृष्टि से बैठक दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।
चीन की रणनीति लंबे समय से सीमा विवाद को अलग रखते हुए व्यापारिक और बहुपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की रही है। बीजिंग यह संदेश देना चाहता है कि सीमा पर मतभेदों के बावजूद दोनों बड़ी एशियाई शक्तियां ब्रिक्स जैसे मंचों पर मिलकर काम कर सकती हैं। वांग यी की भारत यात्रा को इसी रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
चीन की इस सक्रियता के पीछे उसकी भूराजनीतिक चुनौतियां भी मानी जा रही हैं। पश्चिम के साथ बढ़ते व्यापार युद्ध और अमेरिका की घेराबंदी के बीच चीन ब्रिक्स को एक मजबूत पश्चिम-विरोधी मंच के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। इसके लिए उसे भारत जैसे प्रमुख सदस्य देश के सहयोग की आवश्यकता है। हालांकि भारत इस समीकरण को भलीभांति समझता है और वह ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहता कि सीमा पर जारी विवादों को नजरअंदाज कर सामान्य सहयोग की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
ऐसे में नई दिल्ली में शुरू हो रही यह बैठक केवल सुरक्षा सहयोग और उभरती चुनौतियों पर चर्चा का मंच नहीं होगी, बल्कि भारत-चीन संबंधों के भविष्य, सीमा विवाद पर प्रगति की संभावनाओं और चीन की वास्तविक प्रतिबद्धताओं को परखने का अवसर भी साबित हो सकती है। इसी वजह से ब्रिक्स एनएसए बैठक पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर अगले सप्ताह भारत दौरे पर आएंगे। वह 23 और 24 जून को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि 22 जून को भारत पहुंचने वाले हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि उनकी अपेक्षा है कि बातचीत का केंद्र उस फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देना होगा, जिस पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की हालिया यात्रा के दौरान चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी चर्चा करेंगे, जिस पर लगातार वार्ता चल रही है। इससे पहले 2 से 4 जून के बीच अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में अमेरिकी टीम ने भारतीय अधिकारियों के साथ समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत की थी। 5 जून को पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे और द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अगले महीने के मध्य तक लागू किए जाने की संभावना है। अग्रवाल ने कहा कि भारत, अमेरिकी सेक्शन 301 जांचों के मुद्दे पर भी अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है।
अभिषेक बनर्जी के करीबी के खिलाफ अदालत का गिरफ्तारी वारंट पश्चिम बंगाल के कथित भूमि घोटाले में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी सुमित रॉय के खिलाफ अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस का कहना है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और कई प्रयासों के बावजूद उनका पता नहीं चल सका। रॉय ने अग्रिम जमानत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की जांच फिलहाल जारी है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, भूमि घोटाले के मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके पूर्व मेदिनीपुर विधायक सुजय हाजरा से पूछताछ के दौरान सुमित रॉय का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने मामले में उनकी भूमिका की जांच शुरू की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित भूमि सौदों और वित्तीय लेन-देन में उनकी क्या भूमिका रही।
भारत ने समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना में रविवार को तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कोलकाता में इन तीनों जहाजों को नौसेना में कमीशन किया गया। ये तीनों प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। एक ओर आईएनएस दूनागिरी दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला करने में सक्षम है, तो दूसरी ओर आईएनएस अग्रय दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकार कर सकता है। वहीं आईएनएस संशोधक समुद्र की गहराइयों का अध्ययन और समुद्री मार्गों की मैपिंग करेगा। इन तीनों युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ गई है।
आईएनएस दूनागिरी को नौसेना का नया ब्रह्मास्त्र क्यों कहा जा रहा है? आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट-17ए के तहत बना पांचवां स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने किया है। यह युद्धपोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस है और सतह, हवा तथा पानी के नीचे मौजूद खतरों का एक साथ मुकाबला कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका बेहद कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे दुश्मन के लिए इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। लगभग 6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।
हनुमान जी से आईएनएस दूनागिरी का क्या संबंध? आईएनएस दूनागिरी का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत के नाम पर रखा गया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत को उठाकर लाए थे। नौसेना के अनुसार, यह युद्धपोत हनुमान जी की शक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। आईएनएस दूनागिरी के कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा कि युद्धपोत उसी समर्पण और सेवा भावना से देश की रक्षा करेगा। यह आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के लिए इसका पता लगाना मुश्किल होता है। इसमें बराक-8 मिसाइल, स्वदेशी वरुणास्त्र टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं। आईएनएस दूनागिरी के करीब 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दर्शाते हैं।
आईएनएस संशोधक की भूमिका क्या होगी? आईएनएस संशोधक किसी पारंपरिक युद्धपोत की तरह सीधे युद्ध नहीं करेगा, लेकिन इसकी भूमिका भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम है। यह सर्वे वेसल (लार्ज) श्रेणी का चौथा जहाज है। इसका मुख्य काम समुद्र की मैपिंग, समुद्री डेटा संग्रह, तटीय और गहरे समुद्री क्षेत्रों का हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। यह जहाज बंदरगाहों, समुद्री व्यापार मार्गों और नौवहन चैनलों का सर्वेक्षण भी करेगा। आईएनएस संशोधक एक बार में करीब 12,000 किलोमीटर तक लगातार यात्रा कर सकता है। यह रक्षा के साथ-साथ नागरिक उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। समुद्री आपदा प्रबंधन, समुद्री संसाधनों की पहचान और सुरक्षित नौवहन में इसकी बड़ी भूमिका होगी।
ज्ञान, अनुसंधान और खोज की भारतीय परंपरा से संशोधक का क्या संबंध? दरअसल ‘संशोधक’ का अर्थ होता है शोध करने वाला, खोज करने वाला या अनुसंधानकर्ता। आईएनएस संशोधक का मुख्य काम समुद्र की गहराई, समुद्री मार्गों और समुद्र तल का सर्वेक्षण करना है। यह युद्धपोत समुद्र के भीतर की जानकारी जुटाकर नौसेना को रणनीतिक और तकनीकी सहायता प्रदान करता है। इसे एक तरह से समुद्र में तैरती हुई अत्याधुनिक प्रयोगशाला माना जाता है। आईएनएस संशोधक हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री नक्शे तैयार करने, समुद्री डेटा एकत्र करने और नौवहन मार्गों का अध्ययन करने में सक्षम है। इसका उद्देश्य लड़ाई लड़ना नहीं, बल्कि युद्धपोतों और पनडुब्बियों को सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे सुरक्षित और प्रभावी तरीके से ऑपरेशन कर सकें।
इसीलिए आईएनएस संशोधक को भारत की वैज्ञानिक क्षमता, समुद्री अनुसंधान और ज्ञान-आधारित नौसैनिक शक्ति का प्रतीक माना जा रहा है। आईएनएस अग्रय की मारक क्षमता कितनी है? आईएनएस अग्रय में लाइटवेट टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, अत्याधुनिक सोनार सिस्टम, 30 मिमी नेवल गन और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें हल-माउंटेड सोनार और वेरिएबल डेप्थ सोनार भी मौजूद हैं, जो समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं। इसके अलावा, यह दुश्मन के टॉरपीडो को निष्क्रिय करने के लिए उन्नत डिकॉय सिस्टम से भी लैस है। यह युद्धपोत 25 नॉट की गति से चल सकता है और लगभग 3,300 किलोमीटर तक यात्रा कर सकता है।
आईएनएस अग्रय को अर्जुन के गांडीव से क्यों जोड़ा गया? आईएनएस अग्रय अर्णाला श्रेणी का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसका इंसिग्निया महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के गांडीव धनुष से प्रेरित है। गांडीव धनुष अपनी अचूकता और सटीक निशाने के लिए प्रसिद्ध था। आईएनएस अग्रय का मुख्य उद्देश्य दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर उन्हें नष्ट करना है। इसके कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सुनील मल्होत्रा के अनुसार, जिस तरह अर्जुन का गांडीव कभी लक्ष्य नहीं चूकता था, उसी तरह यह युद्धपोत भी दुश्मन पर सटीक वार करने में सक्षम है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह जहाज आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से लैस एक घातक प्लेटफॉर्म है। इसमें स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और रिमोट कंट्रोल गन जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां लगी हैं। यह युद्धपोत तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
भारतीय नौसेना के लिए ये तीनों जहाज कितने महत्वपूर्ण हैं? भारतीय नौसेना के पास इस समय लगभग 140 से 145 सक्रिय युद्धपोत हैं और 2030 तक इसे 150 से 160 युद्धपोतों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। भारत के लिए समुद्री शक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का करीब 90 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी कमान चीन की गतिविधियों पर नजर रखती है, जबकि मुंबई और कारवार स्थित पश्चिमी कमान अरब सागर में पाकिस्तान और समुद्री डाकुओं पर निगरानी रखती है। अंडमान और निकोबार कमान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत की समुद्री रणनीति में इन जहाजों की क्या भूमिका होगी? आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय केवल युद्धपोत नहीं हैं, बल्कि ये भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के प्रतीक भी हैं। एक ओर दूनागिरी दुश्मनों के खिलाफ आक्रामक क्षमता बढ़ाएगा, वहीं अग्रय तटीय क्षेत्रों को पनडुब्बी खतरों से सुरक्षित करेगा। दूसरी तरफ आईएनएस संशोधक समुद्री सुरक्षा और नौवहन को मजबूत बनाएगा। इन तीनों जहाजों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।
मैनचेस्टर, 21 जून (हि.स.)। आईसीसी महिला टी-20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम को अपनी पहली हार का सामना करना पड़ा। मैनचेस्टर में खेले गए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को छह विकेट से पराजित कर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। दक्षिण अफ्रीका की अनुभवी ऑलराउंडर मारिजान कैप ने गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी टीम की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने आक्रामक शुरुआत की। शेफाली वर्मा ने तेज बल्लेबाजी करते हुए शुरुआती ओवरों में रन गति को बनाए रखा, जबकि स्मृति मंधाना ने भी उपयोगी योगदान दिया। पावरप्ले में भारत ने तेज शुरुआत का फायदा उठाया, लेकिन इसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी।
मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा और अन्य बल्लेबाजों ने उपयोगी पारियां खेलीं, जिससे भारत निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट के नुकसान पर 158 रन तक पहुंच सका। दक्षिण अफ्रीका की ओर से गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन करते हुए भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम की शुरुआत धीमी रही और शुरुआती ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाया। भारतीय स्पिनरों ने शुरुआती सफलताएं दिलाकर टीम को मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
हालांकि इसके बाद मारिजान कैप और ताजमिन ब्रिट्स ने संयमित और आक्रामक बल्लेबाजी का शानदार मिश्रण पेश किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी ने दक्षिण अफ्रीका को मैच में वापस ला दिया। कैप ने अंतिम ओवरों में तेज बल्लेबाजी करते हुए भारत की जीत की उम्मीदों को समाप्त कर दिया।
भारतीय टीम को बीच के ओवरों में कैप को आउट करने के अवसर भी मिले, लेकिन कुछ कैच छूटने का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। अंतिम दो ओवरों में दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए अपेक्षाकृत कम रन चाहिए थे और कैप ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम को जीत दिला दी।
मारिजान कैप ने ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए गेंदबाजी में भी महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए और बल्लेबाजी में नाबाद अर्धशतकीय पारी खेली। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
इस हार के बावजूद भारतीय टीम अंक तालिका में मजबूत स्थिति में बनी हुई है। अब टीम की नजर अगले मुकाबले पर होगी, जहां जीत उसे सेमीफाइनल की दौड़ में और मजबूत स्थिति में पहुंचा सकती है।