Thursday, July 16, 2026
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NATIONAL : मैदानी इलाकों में मानसून थमा: उत्तर-पश्चिम भारत में अभी 6-7 दिन बारिश होने के आसार नहीं; कब बदलेगा मौसम?

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दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल बारिश पर ब्रेक लग गया है। आईएमडी ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अगले छह-सात दिनों तक भारी बारिश का अनुमान जताया है, जबकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी और उमस बनी रहेगी।

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरे देश को कवर कर लिया है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में फिलहाल मानसून पर ब्रेक लग गया है। बारिश थम गई है और 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली गर्मी लौट आई है और उमस भी बेचैन करने लगा है। इस मुश्किल से अभी कम से कम इस हफ्ते तो राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में घनघोर बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश में एक लाख से अधिक लोग बारिश और बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि मिजोरम में भूस्खलन ने परेशानियां बढ़ा दी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके चलते, अगले 7 दिनों के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालय क्षेत्र यानी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ हिस्सों और विशेष रूप से दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत अगले 6-7 दिनों के दौरान बारिश बहुत कम होने की संभावना है। कुछ इलाकों में छिटपुट हल्की बारिश हो सकती है।

SPORTS : इंग्लैंड दौरे पर भारत की पहली जीत, टीम इंडिया ने 6 विकेट से जीता पहला वनडे; गिल-अक्षर-सुंदर चमके

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England vs India 1st ODI: इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया की यह पहली जीत है. इससे पहले पांच मैचों की टी20 सीरीज में टीम इंडिया कोई मैच नहीं जीती थी, लेकिन वनडे सीरीज का आगाज भारत ने जीत के साथ किया है.

इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया को आखिरकार पहली जीत मिल गई है. भारत ने बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेले गए पहले वनडे में इंग्लैंड को 6 विकेट से हरा दिया. इस जीत के साथ टीम इंडिया ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. पहले वनडे में इंग्लैंड ने पहले खेलने के बाद जो रूट और लियाम डॉसन के अर्धशतकों की बदौलत 258 रन बनाए थे. जवाब में टीम इंडिया ने 46वें ओवर में 6 विकेट से बाजी मार ली. भारत के लिए कप्तान शुभमन गिल ने 80 रनों की शानदार पारी खेली. वह रिटायर्ड हर्ट हुए. वहीं गेंदबाजी में चार विकेट लेने वाले अक्षर पटेल ने बल्ले से भी कमाल किया. अक्षर ने 57 रनों की मैच विनिंग पारी खेली. वाशिंगटन सुंदर ने महत्वपूर्ण 52 रन बनाए. दोनों भारत को मैच जिताकर नाबाद लौटे.

इंग्लैंड से मिले 259 रनों के लक्ष्य के जवाब में टीम इंडिया ने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के विकेट जल्दी गंवा दिए थे. रोहित शर्मा ने 21 गेंद में 11 और विराट कोहली ने छह गेंद में सिर्फ पांच रन बनाए. 48 रनों पर भारत के दो विकेट गिर गए थे. इसके बाद शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने 109 रनों की शानदार साझेदारी की. गिल शुरुआत से ही बेहतरीन लय में दिखे.

श्रेयस अय्यर 53 गेंद में 35 रन बनाकर रन आउट हुए. वहीं कप्तान गिल 75 गेंद में 80 रनों पर थे, तभी बैटिंग के दौरान उन्हें कमर दर्द उठा, और फिर वह रिटायर्ड हर्ट हो गए. इसके बाद वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल ने मोर्चा संभाला. सुंदर ने 63 गेंद में चार चौकों और एक छक्के की बदौलत 52 रन बनाए. वहीं अक्षर पटेल ने 52 गेंद में 57 रनों की पारी खेली. दोनों के बीच 102 रनों की शानदार शतकीय पारी हुई.
इससे पहले इंग्लैंड ने इस मैच में शानदार शुरुआत की थी. एक समय बिना किसी विकेट के इंग्लैंड का स्कोर 61 रन था, लेकिन इसके बाद 107 रनों पर 6 विकेट गिर गए. बेन डकेट 43, जैकब बेथेल 14, हैरी ब्रूक 01, जोस बटलर 05 और सैम कर्रन 00 पर आउट हुए. इसके बाद जो रूट ने नाबाद 76 और लियाम जॉसन ने 68 रनों की पारी खेली. दोनों खिलाड़ियों ने सातवें विकेट के लिए 134 गेंदों में 121 रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचा दिया.

गेंदबाजी में भारत के लिए अक्षर पटेल ने सबसे ज्यादा चार विकेट झटके. उन्होंने 9.5 ओवर में 62 रन देकर चार इंग्लिश बल्लेबाजों को आउट किया. प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ को दो-दो विकेट मिले. जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली.

WORLD : फ्रांस वर्ल्ड कप से हुआ बाहर, स्पेन 16 साल बाद फाइनल में पहुंचा; नहीं चला एम्बापे का जादू

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स्पेन ने सेमीफाइनल मुकाबले में फ्रांस को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है. स्पेन 16 साल बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा है. फ्रांस को वर्ल्ड कप जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन स्पेन पर अंडरडॉग का टैग लगा था. मुकाबले के दोनों गोल स्पेन की तरफ से हुआ, जबकि फ्रांस के सुपरस्टार किलियन एम्बापे एक भी गोल नहीं कर पाए.

सेमीफाइनल मुकाबले का पहला गोल 22वें मिनट में पेनल्टी से आया, जब मिकेल ओयारजबाल ने पेनल्टी को गोल में तब्दील कर स्पेन को 1-0 से बढ़त दिलाई. दूसरा गोल 58वें मिनट में आया जब पेड्रो पोरो ने स्पेन की बढ़त को 2-0 कर दिया, जो अंत तक कायम रही. अब फाइनल में स्पेन का सामना अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल मैच के विजेता से होगा.

पहले हाफ में स्पेन को पेनल्टी तब मिली जब फ्रांस के खिलाड़ी ने लमीन यमाल को ‘डी’ एरिया के अंदर हिट किया. इस पेनल्टी को मिकेल ओयारजबाल ने खाली नहीं जाने दिया. यह शायद फ्रांस का दिन नहीं था क्योंकि 30वें मिनट में विलियम सलीबा को कमर की चोट के चलते बाहर जाना पड़ा और उन्हें डिफेंडर लैकरॉक्स ने रिप्लेस किया.

फ्रांस नहीं लगा पाया हैट्रिक
किलियन एम्बापे की टीम फ्रांस लगातार तीसरे फाइनल की ओर आगे बढ़ रही थी. अब तक पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही थी, लेकिन सेमीफाइनल में स्पेन के आगे उसे घुटने टेकने पड़े. फ्रांस 2018 में क्रोएशिया को हराकर चैंपियन बनी थी. उसके बाद फ्रांस 2022 के फाइनल में भी पहुंचा, लेकिन इस बार अर्जेंटीना ने उसे पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से हराकर ट्रॉफी जीती थी. मगर इस बार किलियन एम्बापे का जादू नहीं चल सका.

दूसरी ओर स्पेन आखिरी बार 2010 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा था. 2014 में स्पेन ग्रुप स्टेज में बाहर हो गया था, वहीं 2018 में राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में उसे रूस ने हराया था. वहीं 2022 विश्व कप में स्पेन एक बार फिर राउंड ऑफ 16 से आगे नहीं बढ़ पाया था.

BUSINESS : रियल एस्टेट में गौतम अदाणी की बड़ी छलांग, DLF को भी छोड़ा पीछे

ग्रोहे (GROHE) और हुरुन इंडिया ने देश की टॉप 151 रियल एस्टेट कंपनियों की ‘2026 ग्रोहे-हुरुन इंडिया रियल एस्टेट 150’ लिस्‍ट जारी की है. इसके मुताबिक, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए ये साल कुछ खास नहीं रहा और इस साल अब तक की सबसे कम ग्रोथ दर्ज की गई है. इस सुस्ती के बावजूद देश के सबसे रईस उद्योगपतियों में शामिल गौतम अदाणी ने रियल एस्टेट क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. गौतम अदाणी बने रियल एस्टेट के नए ‘किंग’ बनकर उभरे हैं.

इस मंदी के दौर में भी अदाणी ग्रुप ने रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी बादशाहत साबित की है. गौतम अदाणी और उनके परिवार ने डीएलएफ (DLF) के राजीव सिंह और परिवार को पछाड़कर पहली बार ‘ग्रोहे-हुरुन इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट’ में नंबर-1 का स्थान हासिल किया है. गौतम अदाणी की संपत्ति में 73% का भारी उछाल आया है.

प्रणव अदाणी और राजेश अदाणी के नेतृत्व वाली ‘अदाणी प्रॉपर्टीज’ (Adani Properties) इस लिस्ट में सबसे ज्यादा फायदा कमाने वाली कंपनी रही. कंपनी ने अपने वैल्यूएशन में 38,000 करोड़ रुपये जोड़कर 90,400 करोड़ रुपये का लेवल छू लिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भारतीय रियल्टी क्षेत्र में भारी मंदी का असर देखने को मिला है. सूची में शामिल कंपनियों की कुल वैल्यू (Cumulative Value) में इस साल महज 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह ग्रोथ 14 प्रतिशत थी. यह इस लिस्ट के इतिहास में अब तक की सबसे कम ग्रोथ है. रियल एस्टेट कंपनियों के मूल्य में आई इस गिरावट की मुख्य वजह बीएसई रियल्टी इंडेक्स (BSE Realty Index) में आई 20% की बड़ी गिरावट रही. इस साल सूची की सिर्फ 31 कंपनियों के वैल्यूएशन में बढ़ोतरी हुई, जबकि 74 कंपनियों के मूल्य में गिरावट दर्ज की गई.

कंपनी के तौर पर DLF का दबदबा कायम है. 1.47 लाख करोड़ की वैल्यूएशन के साथ DLF ने भारत की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी का अपना खिताब बरकरार रखा है, हालांकि इस साल इसकी वैल्यू में 29% का करेक्शन (गिरावट) आया है. लोढ़ा डेवलपर्स (Lodha Developers) 93,700 करोड़ रुपये की वैल्यू के साथ दूसरे और इंडियन होटल्स कंपनी (ताज ग्रुप) 93,300 करोड़ रुपये की वैल्यू के साथ तीसरे स्थान पर हैं.

रितेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली प्रिज्म (OYO) इस साल हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की सबसे बड़ी स्टार रही. इसने अपने वैल्यूएशन में 107% की भारी वृद्धि करते हुए 34,700 करोड़ जोड़े और कुल 67,200 करोड़ रुपये की वैल्यू के साथ 6 स्थानों की छलांग लगाकर सीधे 5वें नंबर पर (टॉप 10 में) एंट्री मार ली.

इस साल पूरी लिस्ट में जितनी भी कंपनियों की वैल्यू बढ़ी (कुल 34,300 करोड़ की संचयी वैल्यू, जो 2025 के 1.4 लाख करोड़ से बहुत कम है), उसमें से लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी अकेले अदाणी प्रॉपर्टीज (+38,000 करोड़) और प्रिज्म (+34,700 करोड़) की रही.

मुंबई के इस डेवलपर ने 5 स्थानों की छलांग लगाई और 61,700 करोड़ की वैल्यू के साथ 8वें स्थान पर रहकर टॉप 10 में अपनी जगह बनाई.

कुवैत की GDP के बराबर है इन कंपनियों की वैल्यू
2026 की इस लिस्ट में शामिल सभी कंपनियों की कुल संचयी वैल्यू 16.5 लाख करोड़ (171 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है. यह वैल्यूएशन कुवैत देश की कुल जीडीपी के बराबर है, और लक्ज़मबर्ग तथा बहरीन की संयुक्त जीडीपी से भी ज्यादा है.

रियल एस्टेट सेक्टर अब अधिक संस्थागत और पारदर्शी हो रहा है. लिस्ट में शामिल शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की संख्या दो साल पहले की 48 से बढ़कर अब 73 हो गई है, जो कुल लिस्ट की वैल्यू का 71% हिस्सा हैं.

इस साल लिस्ट में 37 नई कंपनियों ने एंट्री ली है, जिनमें से 20 ने सीधे टॉप 100 में जगह बनाई. इसमें 2024 में शुरू हुई नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट 51,500 करोड़ रुपये की वैल्यू के साथ साल की सबसे बड़ी न्यू-एंट्री और सबसे युवा एंटिटी बनी.

लिस्ट में अब 5 रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) शामिल हैं. नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट, एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट, बागमाने प्राइम ऑफिस रीट, ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट और नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट.

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का उभार: एक दशक पहले तक इस लिस्ट में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बहुत छोटा था, लेकिन 2026 में 151 में से 24 कंपनियां इसी सेक्टर से हैं, जिनकी कुल वैल्यू 2,85,500 करोड़ है. इसमें 1899 में स्थापित सबसे पुरानी कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी (93,300 करोड़) और हाल ही में अलग हुई ITC होटल्स (32,300 करोड़ का डेब्यू) शामिल हैं.

हुरुन इंडिया रियल एस्टेट लिस्ट की दिलचस्‍प बातें
मुंबई रियल एस्टेट की कैपिटल: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई 7.32 लाख करोड़ की कुल वैल्यू वाली 50 कंपनियों के साथ भारत की ‘रियल एस्टेट कैपिटल’ बनी हुई है. इसके बाद नई दिल्ली (19 कंपनियां), गुरुग्राम (18 कंपनियां) और बेंगलुरु (18 कंपनियां) का नंबर आता है.

महिला नेतृत्व: सूची में केवल तीन कंपनियां ऐसी हैं जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. द ललित की ज्योत्स्ना सूरी (3,000 करोड़), एपीजे सुरेंद्र पार्क होटल्स की प्रिया पॉल (2,500 करोड़) और अग्रवाल एसोसिएट्स ग्रुप की उमा अग्रवाल (1,700 करोड़).

सबसे युवा और बुजुर्ग लीडर: प्रिज्म (OYO) के रितेश अग्रवाल और स्मार्टवर्क्स कोवर्किंग स्पेसेस के नीतिश शारदा (उम्र 32 वर्ष) लिस्ट के सबसे युवा लीडर हैं. वहीं, इंटरग्लोब होटल्स के कपिल भाटिया (उम्र 93 वर्ष) सबसे बुजुर्ग लीडर हैं. लिस्ट में लीडर्स की औसत उम्र 60 वर्ष है.

रेसिडेंशियल सेक्टर का दबदबा: लिस्ट में 65% कंपनियां आवासीय (Residential) क्षेत्र से हैं (2% की गिरावट के साथ). इसके बाद हॉस्पिटैलिटी (16%, 1% की बढ़त) और कमर्शियल (13%, 1% की गिरावट) का नंबर आता है.

ग्रोथ लीडर्स: दिल्ली की पुरी कंस्ट्रक्शंस ने सालाना आधार पर सर्वाधिक 127% की वैल्यू ग्रोथ (2,500 करोड़) दर्ज की, जबकि गुरुग्राम की पिरामिड इन्फ्राटेक ने राजस्व (Revenue) के मामले में रिकॉर्ड 348% की सालाना ग्रोथ दर्ज की.

नॉन-मेट्रो शहरों की एंट्री: देश के 8 नॉन-मेट्रो (छोटे) शहरों की कंपनियों ने लिस्ट में जगह बनाई है, जिनकी कुल वैल्यू ~30,200 करोड़ है. इसमें कोच्चि का लुलु इंटरनेशनल शॉपिंग मॉल (10,100 करोड़) सबसे आगे है. इस साल नई एंट्री के तौर पर शालीमार कॉर्प (3,500 करोड़) के जरिए लखनऊ ने भी लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया है.

टॉप एम्प्लॉयर और सीएसआर (CSR): कंस्ट्रक्शन कंपनी NCC देश में 31,408 कर्मचारियों के कार्यबल के साथ सबसे बड़ी नियोक्ता (Top Employer) साबित हुई है. इसके साथ ही, यह कंपनी 33.3 करोड़ के खर्च के साथ नए सीएसआर (CSR) रैंकिंग में भी सबसे आगे रही है.

WORLD : हॉर्मुज़ में नाकेबंदी शुरू: अमेरिकी सेना ने ईरान पर फिर बरसाए बम, आईआरजीसी के ठिकानों को बनाया निशाना

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अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों के पास समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है। इससे एक घंटा पहले अमेरिकी सेना ने ईरान में सैन्य ठिकानों पर एक और दौर के हमले किए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी इस संवेदनशील सैन्य अभियान पर चर्चा करने के लिए नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इन हमलों का उद्देश्य उभरते खतरों को खत्म करना था।

ये हमले अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य कार्रवाई की ताजा कड़ी हैं। दोनों देशों के बीच यह तनाव पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर ईरानी हमलों के बाद शुरू हुआ था। सेंट्रल कमांड ने बताया कि हमलों का उद्देश्य होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईरानी क्षमताओं को कमजोर करना था।

ये हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिकी सेनाएं ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। यह नाकाबंदी अमेरिकी समयानुसार शाम चार बजे से प्रभावी हुई। वहीं, अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

इससे पहले भी अमेरिकी सेना ने ईरान के बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास में आईआरजीसी की रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया था।

हाल के दिनों में लगातार हो रहे हमलों ने अंतरिम शांति समझौते पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह समझौता 60 दिनों के भीतर स्थायी समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से किया गया था, जिसमें ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य मुद्दों का समाधान भी शामिल था। समझौते के तहत अमेरिका ने अप्रैल के मध्य में लगाई गई नाकेबंदी हटा ली थी। हालांकि, अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह दुबई समयानुसार बुधवार आधी रात से इसे फिर लागू किया जाएगा।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में 20 फीसदी शुल्क वसूलने की योजना पर यू-टर्न ले लिया है। ट्रंप की यह शुल्क लगाने की योजना अमेरिका की उस पुरानी नीति से अलग थी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के सभी जहाजों के लिए खुला रखने की बात कही जाती रही है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी क्षेत्र के दौरे के दौरान इसी नीति का समर्थन किया था।

अंतरिम समझौते के तहत ईरान ने 60 दिनों तक जलडमरूमध्य से बिना शुल्क के आवाजाही की अनुमति देने पर सहमति जताई थी। हालांकि, इसके बाद की व्यवस्था को लेकर समझौते में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। ईरान का कहना है कि उसे इस मार्ग पर यातायात नियंत्रित करने और शुल्क लेने का अधिकार है, जबकि अमेरिका इससे असहमत है।

WORLD : होर्मुज पर 20 परसेंट ट्रंप टैक्स, सही में लग गया तो हो जाएगा कबाड़ा, फंस जाएंगे LPG सिलेंडर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘Guardian of the Hormuz Strait’ घोषित करते हुए एक बड़ा फरमान सुनाया है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर कमर्शियल कार्गो और तेल टैंकर पर 20% का भारी-भरकम सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा. ईरान को सजा देने के इस तरीके की वजह से वैश्विक बाजारों का कबाड़ा होना तय माना जा रहा है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाले जहाजों पर यह टैक्स लगने से भारत में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतें आसमान छू सकती हैं और रसोई गैस की पूरी सप्लाई चेन बुरी तरह फंस सकती है.

तेहरान: दुनिया भर के बाजारों और आम जनता की जेब पर एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय बम फूटने वाला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा हैरान करने वाला फरमान सुनाया है, जिसने मिडिल ईस्ट से लेकर भारत के रसोई घरों तक हड़कंप मचा दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया कि अब से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले हर एक कमर्शियल कार्गो और तेल टैंकर पर 20% का भारी-भरकम सुरक्षा शुल्क यानी ‘ट्रंप टैक्स’ वसूला जाएगा. ट्रंप ने खुद को दुनिया के इस सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते का नया रखवाला यानी ‘Guardian of the Hormuz Strait’ घोषित कर दिया है.

ट्रंप ने कहा कि ईरान पर ब्लॉकेड को पूरी तरह लागू किया जा रहा है लेकिन बाकी दुनिया के जहाजों को सुरक्षा देने के बदले अमेरिका मोटा पैसा वसूलेगा. आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर ये 20 परसेंट टैक्स सच में लागू हो गया तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा होना तय है और भारत में आम आदमी के घरों तक पहुंचने वाले LPG सिलेंडर की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और सप्लाई पूरी तरह फंस जाएगी.

‘गार्जियन ऑफ द होर्मुज’: ट्रंप का नया वसूली मॉडल
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वो सबसे संकरा और अहम समुद्री रास्ता है, जहां से पूरी दुनिया के कुल तेल और गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा जहाजों के जरिए गुजरता है. अब तक इस रास्ते की सुरक्षा एक वैश्विक जिम्मेदारी मानी जाती थी, लेकिन ट्रंप ने इसे एक विशुद्ध बिजनेस डील में बदल दिया है.

फॉक्स न्यूज को दिए बयानों के मुताबिक, ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना इस रास्ते को खुला रखेगी और जहाजों की सुरक्षा करेगी. लेकिन इस सुरक्षा के बदले अमेरिका ‘मुफ्त की सेवा’ बंद कर रहा है. ट्रंप ने कहा, ‘हम गार्जियन ऑफ द होर्मुज स्ट्रेट हैं. हम सुरक्षा की इस पूरी व्यवस्था की लागत वसूलेंगे. वहां से गुजरने वाले हर कार्गो पर 20% शुल्क तुरंत प्रभाव से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है’.

इस 20 परसेंट ट्रंप टैक्स का सबसे सीधा और घातक असर भारत के आम नागरिकों की रसोई पर पड़ने वाला है. भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा एलपीजी (LPG- लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है. कतर और सऊदी से आने वाले एलपीजी के ये टैंकर सिर्फ और सिर्फ इसी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से होकर भारत के बंदरगाहों तक पहुंचते हैं.

लागत में 20% का सीधा उछाल: जब कतर या यूएई से निकलने वाले एलपीजी गैस के जहाजों पर अमेरिका 20% का भारी टैक्स वसूलेगा तो गैस कंपनियों की ट्रांसपोर्टेशन लागत अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी.
बढ़ेगी घरेलू सिलेंडरों की कीमत: कंपनियां इस बढ़े हुए टैक्स का बोझ खुद नहीं उठाएंगी, बल्कि इसे सीधे उपभोक्ताओं पर पास करेंगी. नतीजा ये होगा कि घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें अचानक बढ़ जाएंगी.
सप्लाई चेन में देरी: टैक्स वसूलने और सुरक्षा चेकिंग के नाम पर अमेरिकी नौसेना जब जहाजों को रोकेगी तो सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाएगी. समय पर गैस न मिलने से देश में एलपीजी की भारी किल्लत पैदा हो सकती है.

ईरान की घेराबंदी या ग्लोबल मार्केट का कबाड़ा?
डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम के पीछे ईरान को सजा देने का तर्क दिया है. उन्होंने कहा कि ‘ईरानी ब्लॉकेड’ को फिर से पूरी तरह कड़ा किया जा रहा है ताकि ईरानी जहाजों और उनके ग्राहकों को पूरी तरह अलग-थलग किया जा सके. ट्रंप का मकसद ईरान की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह तोड़ना है.
जानकारों का कहना है कि ईरान को सजा देने के चक्कर में ट्रंप पूरी दुनिया के बाजारों का कबाड़ा करने जा रहे हैं. अगर होर्मुज से गुजरने वाले हर कार्गो, चाहे उसमें तेल हो, गैस हो या अन्य व्यापारिक सामान पर 20% का सरचार्ज लगेगा तो इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का एक ऐसा तूफान आएगा जिसे संभालना किसी भी देश के वश में नहीं होगा.

NATIONAL : उद्धव सेना ने अपने 6 बागी सांसदों को भेजा लीगल नोटिस, एकनाथ शिंदे बोले- चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए अपने छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है. पार्टी का कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनन संभव नहीं है. वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस नोटिस को बेअसर बताते हुए कहा कि उनके सांसदों ने इस पत्र को कूड़ेदान में फेंक दिया और इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है.

शिवसेना (UBT) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को भेजे गए नोटिस में बगावत करने वाले 6 सांसदों से कहा कि उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में और शिवसेना (UBT) के चुनाव चिह्न पर लड़कर जीता था. उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव में इन सांसदों ने शिंदे गुट के उम्मीदवारों के खिलाफ जीत हासिल की थी. सावंत ने कहा कि मूल राजनीतिक दल यानी शिवसेना (UBT) ने न तो किसी विलय की प्रक्रिया शुरू की है और न ही शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी है.

अरविंद सावंत ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से जानकारी मिली है कि ये सांसद खुद को शिंदे गुट में विलय होने का दावा कर रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस विलय को मान्यता देने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि किसी विधायी दल (लेजिस्लेचर पार्टी) का विलय तभी संभव है, जब पहले मूल राजनीतिक दल का विधिवत विलय हो. मूल दल का विलय नहीं हुआ है, इसलिए संसदीय दल के विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता और ऐसा विलय कानून में मान्य भी नहीं है.

अरविंद सावंत ने बताया कि पार्टी पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आग्रह कर चुकी है कि शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुने गए सांसदों के किसी भी कथित विलय या अलग समूह को मान्यता न दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक लोकसभा अध्यक्ष ने इस संबंध में कोई फैसला नहीं दिया है. बता दें कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट), नागेश पाटिल-अष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) 22 जून को शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो गए थे.

हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने अब तक उनके विलय के दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई निर्णय नहीं सुनाया है. नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि सभी छह सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिल चुके हैं, जरूरी दस्तावेज जमा कर चुके हैं और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे सांसदों ने वह चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी. ऐसी चिट्ठियों पर कौन ध्यान देता है? सदन में दो-तिहाई बहुमत मायने रखता है. यह ठाकरे गुट की हताशा है और इस नोटिस का हमारे सांसदों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.’

उधर, अधिकांश बागी सांसदों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हिंगोली से सांसद नागेश अष्टीकर ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें इसका जवाब देने की कोई जरूरत नहीं लगती. इस बीच, शिवसेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि छहों सांसदों ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. पार्टी के मुताबिक, अमित शाह ने उनके संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग और पर्याप्त वित्तीय सहायता का भरोसा दिया.

NATIONAL : ‘पवार को कांग्रेस में विलय करने के बजाय NDA में शामिल होना चाहिए’, NCP के विलय पर बोले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले

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विपक्षी कांग्रेस और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के संभावित विलय की अटकलों के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठले ने कहा है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी को भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में शामिल हो जाना चाहिए।

रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया (आठवले गुट) के प्रमुख ने शनिवार को कहा कि उन्होंने स्वयं अतीत में पवार को अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी थी।

लेकिन अब कांग्रेस की ताकत खत्म हो चुकी है। कांग्रेस में जाने के स्थान पर उन्हें राजग में आना चाहिए। व्यंग करते हुए कहा कि वह आरपीआई में भी अपनी पार्टी का विलय कर सकते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने हाल ही में सुझाव दिया था कि तृणमूल कांग्रेस और राकांपा (शरदचंद्र पवार) जैसी पार्टियों का कांग्रेस में विलय हो जाना चाहिए जिससे भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प तैयार किया जा सके। राउत ने यह भी कहा था कि शरद पवार को इन छोटी पार्टियों को कांग्रेस में विलय कराने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय की नाकामी पर मुहर! सरकार को सौंपी जाएगी SIT की रिपोर्ट

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है. दान चोरी केस में पूर्व महासचिव चंपत राय की नाकामी पर मुहर लग सकती है. मामले में एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है. रिपोर्ट बुधवार (15 जुलाई) यानी आज शासन को सौंपी जा सकती है. रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की लापरवाही और निगरानी में कमी की बात कही गई है.

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने बिना नाम लिए चंपत राय की जिम्मेदारी की ओर इशारा किया है. इस आपराधिक साजिश में चंपत राय की भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है, हालांकि मामले में पुलिस विवेचना जारी है. एसआईटी द्वारा मामले में अनिल मिश्रा को नियमों में बदलाव का सबसे बड़ा जिम्मेदार माना गया है.

राम मंदिर के भक्तों का UP विधानसभा स्पीकर ने उड़ा मजाक? बोले- ‘जिन्होंने श्रद्धा से दान नहीं दिया उनका पैसा चोरी’

रिपोर्ट में सामने आ रही चोरी की प्रमुख वजह
रिपोर्ट में बैंक के साथ तय SOP में बदलाव और नियमों को शिथिल करना चोरी की प्रमुख वजह बताई गई है. दान की गणना करने के लिए भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी को भी चोरी का बड़ा कारण माना गया. एसआईटी की रिपोर्ट में पता चला है कि आउटसोर्सिंग के जरिए हाउसकीपिंग कर्मियों से चढ़ावे की गणना कराई जा रही थी.

एसआईटी के अनुसार ट्रस्ट पदाधिकारियों की सिफारिश पर गणना के लिए कर्मियों की भर्ती हुई थी. कमजोर निगरानी और ढीली व्यवस्था के कारण चंदा चोरी की गुंजाइश बनी. एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे होने की आशंका है. इसको लेकर बुधवार को शासन के पास रिपोर्ट सौंपी जा सकती है.

मामले के दो आरोपियों की रिमांड
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में की जांच कर रही अयोध्या पुलिस को दो आरोपियों की रिमांड मिली है. मंगलवार को अदालत ने दो आरोपियों रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की 14 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर कर ली. मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने कोर्ट से सात दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने 14 घंटे की पुलिस कस्टडी की अनुमति दी.

NATIONAL : ‘विपक्ष के लिए सारे दरवाजे खोल दें..’: चुनाव आयोग पर भड़के पूर्व CEC एसवाई कुरैशी, बोले-मेरी वजह से BJP को फायदा

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देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एसवाई कुरैशी अपनी एक नई किताब को लेकर अभी खूब चर्चा में हैं। अब उन्होंने मौजूदा चुनाव आयोग (ECI) पर यह आरोप लगाकर कि वह विपक्ष के साथ अन्यायपूर्ण रवैया अपना रहा है, सनसनी मचा दी है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है कि यह सिर्फ आरोप नहीं है, चुनाव आयोग विपक्ष के साथ सही बर्ताव नहीं कर रहा है।

‘विपक्ष को सहयोग की जरूरत होती है’
पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सीईसी ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाले मौजूदा चुनाव आयोग की अपने कार्यकाल से तुलना की है और कहा है कि उनके समय विपक्ष को प्राथमिकता देने की नीति थी, जबकि अभी उसके साथ अनुचित व्यवहार हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘मेरी घोषित नीति थी कि विपक्ष का साथ दें..क्योंकि वे उपेक्षित होते हैं.. सत्ता से दूर होते हैं, उन्हें हमारे सहयोग की जरूरत है…सरकार के पास तो बहुत कुछ होता है।’

मैंने अपने सभी अधिकारियों से कहा था विपक्ष के लिए अपने सारे दरवाजे खोल दें..। अगर वे कल का समय मांगते हैं तो उन्हें आज का समय दें। अगर आपके पास दो तरह के अनुरोध आते हैं, एक विपक्ष से और दूसरा सरकार से तो विपक्ष को प्राथमिकता दें।


एसवाई कुरैशी, पूर्व सीईसी

‘मेरे कार्यकाल में विपक्ष बहुत कंफर्टेबल था’
कुरैशी का दावा है कि उनके कार्यकाल में विपक्ष, खास तौर पर बीजेपी को बहुत फायदा हुआ, क्योंकि उन्होंने नीति ही ऐसी बना रखी थी। उनके मुताबिक, ‘..क्योंकि हमें पूरे देश का भरोसा जीतना होता है, विशेष तौर पर विपक्ष का। इसलिए हमारे समय में विपक्ष हमारे साथ बहुत ही ज्यादा कंफर्टेबल था।’

‘मेरी नीति से बीजेपी को फायदा हुआ’
एसवाई कुरैशी ने यहां तक दावा किया कि ‘मेरे पूरे कार्यकाल में बीजेपी सबसे प्रमुख विपक्षी पार्टी थी..अगर उसके कुछ नेता आज मेरी आलोचना करते हैं तो वे इसे नजरअंदाज कर रहे हैं…मेरी नीति से विपक्ष को लाभ होता था, खासकर बीजेपी को, इसे याद रखना बहुत जरूरी है।’ एसवाई कुरैशी अपनी किताब में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के उस बयान को शामिल करने को लेकर चर्चित हुए हैं, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने आत्महत्या करने की बात कही थी।

‘विपक्ष के प्रति चुनाव आयोग बहुत अन्यायपूर्ण’
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त से जब यह पूछा गया कि क्या आपको भी लगता है कि मौजूदा चुनाव आयोग का विपक्ष के साथ रवैया थोड़ा अन्यायपूर्ण है, तो उन्होंने कहा, ‘थोड़ा अन्यायपूर्ण…यह बहुत ही कम है…बेशक यह बहुत ही ज्यादा अन्यायपूर्ण है।…यही वजह है कि 23 विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई हैं।’

‘चुनाव आयोग का रवैया अन्यायपूर्ण’
कुरैशी ने मौजूदा चुनाव पर सीधा मोर्चा खोलते हुए यहां तक आरोप लगाया कि ‘चुनाव आयोग उन्हें (विपक्ष) सुनने का मौका नहीं दे रहा है,यह स्वीकार्य नहीं है। वो जो कर रहे हैं और जिस तरह से बचकर निकल रहे हैं, वह मुझे हैरान कर रहा है। चुनाव आयोग से यह उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्हें सबको साथ लेकर चलना है।’ पूर्व सीईसी का यह बयान इसलिए बहुत अहम हो जाता है कि विपक्ष ने अभी चुनाव आयोग और खासकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

मीडिया पर भी बरसे एसवाई कुरैशी
उन्होंने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि ‘इसका बड़ा हिस्सा सरकार से सवाल पूछने की जगह विपक्ष से सवाल पूछता है। नेहरू के समय चली जाती है।’
‘लोकतंत्र में आपको सरकार से सवाल पूछना चाहिए और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है।’
‘हम यहां देख रहे हैं कि विपक्ष मुलाकात के लिए भीख मांगता रहता है और आप समय नहीं देते हैं। इसलिए विपक्ष को सीजेआई को लिखना पड़ा है।’

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