भारतीय स्टार सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने गुरुवार को रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा लिया। उन्होंने दिग्गज साथी खिलाड़ी मिताली राज को पीछे छोड़ते हुए महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में सबसे अधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी का खिताब हासिल किया। 30 वर्षीय मंधाना ने यह उपलब्धि दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में हांगकांग के खिलाफ महिला एशिया कप 2026 ग्रुप ए के मैच के दौरान प्राप्त की।
मंधाना ने अपनी 303वीं अंतरराष्ट्रीय पारी में यह उपलब्धि हासिल की और मिताली राज के 10,868 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अब यह शानदार बाएं हाथ की बल्लेबाज न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स (10,740 रन) और संन्यास ले चुकी मिताली राज से आगे निकलकर सर्वकालिक सूची में शीर्ष पर पहुंच गई हैं।
महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक रन:
10880 – स्मृति मंधाना
10868 – मिताली राज
10740 – सूज़ी बेट्स
10273 – शार्लोट एडवर्ड्स
10007 – स्टेफनी टेलर
यह ऐतिहासिक क्षण मंधाना की शानदार पारी के दौरान आया, जिन्होंने अंतिम ओवर में रन आउट होने से पहले 64 गेंदों में 124 रन बनाए। उनकी इस पारी ने भारत को 193/5 के स्कोर तक पहुंचाया और साथ ही यह उनका 18वां शतक भी था, जो महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक शतकों का रिकॉर्ड है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान मेग लैनिंग के 17 शतकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।मंधाना ने महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना 93वां अर्धशतक भी बनाया, जिससे उन्होंने विश्व में किसी भी खिलाड़ी द्वारा संयुक्त रूप से सबसे अधिक अर्धशतक बनाने के मामले में मिताली राज के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। महिला क्रिकेट द्वितीय विश्व युद्ध में उनका 37वां अर्धशतक पहले ही एक रिकॉर्ड बन चुका है, जबकि दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर ऑस्ट्रेलिया की बेथ मूनी का 33 है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को एक अहम अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने सुबह 2 बजकर 55 मिनट पर उड़ान भरी और EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया.
यह GSLV की 19वीं उड़ान है और भारत के लिए इसलिए खास है क्योंकि EOS-05 देश का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है.
36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से रखेगा नजर
EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में पहुंचने के बाद पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करना है.
इस कक्षा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सैटेलाइट पृथ्वी के घूमने के साथ तालमेल बनाए रखता है. ऐसे में भारत और उसके आसपास के बड़े इलाके पर लंबे समय तक लगातार नजर रखना संभव होता है.
अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले कई अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अपेक्षाकृत निचली कक्षाओं में घूमते हैं. वे किसी इलाके के ऊपर से गुजरते हैं और फिर दोबारा उसी जगह की तस्वीर लेने में समय लगता है.
ईओएस-05 की जियोसिंक्रोनस तैनाती इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में बड़ा कदम है.आपदा से लेकर खेती तक आएगा काम
ईओएस-05 का सबसे बड़ा फायदा इसकी लगातार निगरानी की क्षमता होगी. इससे बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बड़े इलाकों की स्थिति पर तेजी से नजर रखने में मदद मिल सकती है.
इस तरह के अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा का इस्तेमाल खेती, जल संसाधन, शहरी योजना, जंगलों, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है.
किसी बड़े इलाके में तेजी से बदल रही स्थिति की तस्वीर मिलने से प्रशासन और वैज्ञानिकों को फैसले लेने में मदद मिल सकती है.
8 महीने बाद ISRO की वापसी
ISRO के इस मिशन की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह 2021 के असफल जीएसएलवी-एफ10 मिशन के बाद उसी तरह की क्षमता को आगे बढ़ाने वाला मिशन है.
अगस्त 2021 में GSLV-F10 के जरिए भेजा गया EOS-03 तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था. बाद की जांच में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में दबाव से जुड़ी समस्या सामने आई थी.
ईओएस-05 को इसी कार्यक्रम की अगली कड़ी माना जा रहा है. मिशन की सफलता से इसरो के जियोसिंक्रोनस इमेजिंग और भारी उपग्रहों को इस तरह की कक्षा में पहुंचाने के अनुभव को मजबूती मिलेगी.
सरकार की ओर से चीनी के आयात की अनुमति दिए जाने और थोक उपभोक्ताओं तथा कारोबारियों के लिए भंडारण के नियम सख्त किए जाने के बाद देशभर में इसकी औसत खुदरा कीमत एक सप्ताह में 3.85 प्रतिशत घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
चीनी का औसत खुदरा मूल्य एक सप्ताह पहले 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम था। हालांकि, कीमतें अब भी पिछले महीने के 49.33 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से करीब 27 प्रतिशत अधिक हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीनी का औसत थोक मूल्य भी दो सितंबर को घटकर 57.62 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जो एक सप्ताह पहले 60.39 रुपये प्रति किलोग्राम था।
सूत्रों के मुताबिक, थोक कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में कुछ समय लगता है। इसकी वजह यह है कि खुदरा विक्रेताओं ने पहले ऊंची कीमतों पर चीनी का भंडारण किया था। ऐसे में वे पुराने भंडारण को घाटे में बेचने के बजाय मौजूदा कीमतों पर ही बेचते हैं।
आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी की 50-50 किलोग्राम की 10 से 15 बोरियां होती हैं। नया भंडारण कम कीमत पर खरीदे जाने के बाद ही खुदरा कीमतों में गिरावट का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “खुदरा कीमत में बदलाव का असर सामने आने में कम से कम 10 दिन लगते हैं।” चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति देना और थोक उपयोगकर्ताओं तथा कारोबारियों के लिए भंडारण रखने के नियम सख्त करना शामिल है।
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। हालांकि, 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। देश में वार्षिक चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।
रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब दिया है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने दौरे पर यूक्रेन की राजधानी कीव में थे. यहां उन्होंने कहा कि भारत अगर रूस से तेल खरीदना कम भी कर दे, तो इससे यूक्रेन की जंग नहीं रुकेगी. उन्होंने पश्चिमी देशों की उस बात को खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा है कि रूस की कमाई का जरिया बंद करने से वह जंग छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा.
मीडिया से बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह जंग अब पांचवें साल में पहुंच चुकी है और इसे सिर्फ बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही खत्म किया जा सकता है. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा से मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा, “यह जंग आज पांचवें साल में है. यह इस वजह से खत्म नहीं होगी कि कोई तेल, एल्युमिना, खनिज, धातु या खाद खरीद रहा है या नहीं खरीद रहा. यह जंग बातचीत, कूटनीति और समझौते से ही खत्म होगी.”
जयशंकर ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की मुश्किलों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा की जरूरत पूरी करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत और यूक्रेन, दोनों के नजरिए का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “यह भी जरूरी है कि आप सभी समझें कि ऐसे समय में 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा का इंतजाम करना कितना मुश्किल है, जब दुनिया में ऊर्जा की स्थिति बहुत कठिन है. यूक्रेन का इस मुद्दे पर अपना नजरिया है, जिसका हम सम्मान करते हैं. हमारा भी अपना नजरिया है और मैं उम्मीद करता हूं कि दूसरे देश भी उसका सम्मान करेंगे.”
भारत पर पश्चिमी देशों का दबाव जयशंकर से पूछा गया था कि अगर अमेरिका उन देशों पर प्रतिबंध या टैक्स लगाने वाला कानून पास करता है, जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं, तो क्या भारत रूस से तेल खरीदना कम करेगा. इस सवाल के जवाब में उन्होंने उपर बताई गईं बातें कहीं. दरअसल अमेरिका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देश यूक्रेन की इस बात का समर्थन करते हैं कि रूस के ऊर्जा कारोबार को रोकने से उसकी कमाई कम होगी. इससे यूक्रेन में चल रही जंग के लिए रूस को मिलने वाला पैसा भी कम हो जाएगा.
देशभर में आज आस्था, भक्ति और उल्लास के साथ भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। मथुरा की पावन जन्मभूमि से लेकर गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर, दिल्ली के इस्कॉन व बिड़ला मंदिर और जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर तक सुबह मंगला आरती के साथ जन्मोत्सव के आयोजनों की शुरुआत हुई। मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। ब्रज मंडल में 75 लाख भक्तों के जुटने का अनुमान, काशी से पहुंचे उपहार भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा-वृंदावन में गुरुवार रात से ही देश-विदेश से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है: विशाल जनसैलाब: प्रशासन के अनुसार जन्मोत्सव के पावन अवसर पर समूचे ब्रज मंडल में करीब 75 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। काशी विश्वनाथ से आया नजराना: वर्ष 2024 से शुरू हुई परंपरा के तहत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से विशेष टोली मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची और लड्डू गोपाल के लिए पारंपरिक उपहार व पूजन सामग्री भेंट की।
जगन्नाथ पुरी: भगवान जगन्नाथ मां यशोदा का रूप धर देंगे कान्हा को जन्म ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में जन्माष्टमी के दिन एक अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक परंपरा निभाई जाती है: 5 घंटे बंद रहेंगे कपाट: इस विशेष गुप्त रस्म के संपादन के लिए मुख्य मंदिर के कपाट करीब 5 घंटे तक आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। अनूठी परंपरा: इस अनुष्ठान के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं माता यशोदा का वात्सल्य रूप धारण कर श्रीकृष्ण (कान्हा) को जन्म देने की प्रतीकात्मक धार्मिक रस्म पूरी करते हैं। नाथद्वारा में 352 साल पुरानी परंपरा: 21 तोपों की सलामी से गूंजा श्रीनाथजी धाम राजस्थान के राजसमंद स्थित पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख तीर्थ श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा में जन्मोत्सव की अनूठी परंपरा का निर्वहन किया गया: तोपों की गर्जना: कृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्रीनाथजी को 21 तोपों की शाही सलामी दी गई। सांस्कृतिक विरासत: नाथद्वारा में तोपों की सलामी देकर ठाकुरजी का जन्मोत्सव मनाने की यह गौरवशाली परंपरा पिछले 352 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। देशभर से लाइव रंग: उधमपुर में भव्य शोभायात्रा, सतरंगी रोशनी में नहाए धाम उधमपुर (जम्मू-कश्मीर): सनातन सभा के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में सजे सैकड़ों नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मन मोह लिया। स्थानीय संगठनों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। रोशनी से जगमगाए मंदिर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक बिड़ला मंदिर व इस्कॉन मंदिर, देवभूमि द्वारका के मुख्य द्वारकाधीश मंदिर और बिहार की राजधानी पटना के इस्कॉन मंदिर को आकर्षक सतरंगी लाइटों व फूलों से सजाया गया है। मध्यरात्रि में निशीथ काल के दौरान पंचामृत अभिषेक और महाआरती के साथ जन्मोत्सव का चरम उल्लास मनाया जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के अकाबा के पास एक सैन्य ठिकाने पर मौजूद अमेरिकी मरीन के कैंप को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया. ईरानी पक्ष का कहना है कि हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए.
जॉर्डन में US मरीन कैंप को निशाना बनाने का दावा
ईरान के IRGC के मुताबिक, अमेरिकी मरीन कैंप टिटिन पर भारी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. ईरानी मीडिया संस्था तस्नीम के अनुसार, IRGC ने दावा किया कि हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए.
ईरानी दावे के मुताबिक, हमले में कई महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाएं और अमेरिकी हमलावर हेलीकॉप्टर भी नष्ट हुए हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले की खबर
ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया है कि ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया है. इस हमले को लेकर भी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है.
इसी बीच अमेरिकी सेना का कहना है कि वह ईरान में उन ठिकानों को निशाना बना रही है, जिन पर शिपिंग को निशाना बनाने की कोशिशों से जुड़े होने का आरोप है. ईरानी मीडिया ने इस दौरान असालुयेह, जिरोफ्ट, बंदर अब्बास, किश द्वीप, कोनारक, चाबहार, जास्क, सिरिक और लावान में धमाकों की खबरें दी हैं.
ईरान के संसद स्पीकर बोले- कूटनीति के जरिए आत्मसमर्पण नहीं
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है. उन्होंने कहा कि पहले इस रास्ते से हर 24 घंटे में कम से कम 120 जहाज गुजरते थे.
राज्य टेलीविजन के टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में गालिबाफ ने कहा कि अगर अब कुछ रातों में दो या तीन जहाज भी होर्मुज से गुजर पा रहे हैं, तो यह भी इस बात का संकेत है कि पूरे जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण है.
उन्होंने आरोप लगाया कि हाइब्रिड युद्ध में दुश्मन का मकसद ईरान के भीतर अशांति और अराजकता पैदा करना है. उन्होंने कहा कि दूसरा प्रयास कूटनीति के जरिए ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का हो सकता है, लेकिन ईरान ऐसा कभी नहीं करेगा.
होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर ओमान से बातचीत
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में स्थित ओमान के साथ जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए एक व्यवस्था पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह योजना अमेरिका को स्वीकार होगी या नहीं. खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के दोबारा खोलने की जरूरत पर जोर दिया है.
ईरानी सेना ने अमेरिका को भारी नुकसान की चेतावनी दी
ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB पर पढ़े गए एक बयान में ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अमेरिकी हमलों का जवाब देने की चेतावनी दी. बयान में कहा गया कि सिस्तान और बलूचिस्तान तथा होर्मोजगान प्रांतों में अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरानी सशस्त्र बल अमेरिका के खिलाफ करारा और विनाशकारी हमला करेंगे.
ईरानी सेना ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई जारी रखती है, तो उसे और अधिक तथा भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
बयान में यह भी कहा गया कि ईरान पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुका है कि वह किसी भी परिस्थिति में ईरानी लोगों के अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा और अमेरिकी दुश्मन पर भारी कीमत थोपेगा.
दावों के बीच बढ़ता सैन्य तनाव
ईरान के अमेरिकी ठिकानों पर हमले के दावे और अमेरिका की ईरान में सैन्य कार्रवाई के बीच क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. हालांकि, ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों की मौत और सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. ऐसे में दोनों पक्षों के बयानों को दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है.
नेपाल सीमा के पास तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पिछले सप्ताह अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है, जबकि 541 लोग अब भी लापता हैं। चीन के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने तिब्बत में एक आधिकारिक ब्रीफिंग के हवाले से बताया कि 30 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में 261 विदेशी नागरिक हैं, जिनमें भारत के 49 और अन्य देशों के 22 नागरिक हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को यहां प्रेसवार्ता में बताया कि नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब भी पता नहीं चल पाया है।
उन्होंने कहा कि चीन की ओर से नेपाल को दी जा रही आपात राहत सामग्री की दूसरी खेप मंगलवार को काठमांडू पहुंच गई। उन्होंने बताया कि नेपाल के अनुरोध पर चीन ने पांच डीएनए फोरेंसिक विशेषज्ञ भेजे हैं।
गुओ ने कहा कि चीन नेपाल के अनुरोध के आधार पर आपात राहत सामग्री की तीसरी खेप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें बेली ब्रिज, शव रखने वाले रेफ्रिजरेटर, महामारी से बचाव की सामग्री और आपात संचार उपकरण शामिल होंगे।प्रवक्ता ने कहा कि चीन डीएनए विशेषज्ञों का एक दूसरा दल भी भेजेगा। उन्होंने बताया कि नेपाली पक्ष ने तत्काल और अधिक राहत सामग्री भेजने तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए चीन का आभार जताया है।
तिब्बत में ग्लेशियरों के लगातार पीछे हटने और इस संवेदनशील क्षेत्र को प्रभावित करने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए पड़ोसी देशों के साथ समन्वय तंत्र बनाने को लेकर चीन की रजामंदी के बारे में पूछे जाने पर गुओ ने कहा कि बीजिंग ने काठमांडू के साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें, उपग्रह और जलविज्ञान संबंधी आंकड़े साझा किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चीनी और नेपाली विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान के दीर्घकालिक प्रभावों ने ग्लेशियरों को अस्थिर कर दिया है और यह आपदा नेपाल में एक हिमनद के ढहने से शुरू हुई, जिसके परिणामस्वरूप बर्फ और चट्टानों का तेज बहाव हुआ और पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बह गया।’’
गुओ ने कहा, ‘‘हम राहत प्रयासों में नेपाल को मजबूत समर्थन देते रहेंगे और आपदा रोकथाम एवं न्यूनीकरण के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करेंगे।’’
हिमनदों के पीछे हटने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी मानवता के सामने मौजूद साझा चुनौती है।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी देश ऐसे जोखिमों से अछूता नहीं रह सकता। चीन जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को प्रभावी ढंग से रोकने और कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर आदान-प्रदान और सहयोग करता रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पिछले माह पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर धर्माचार्यों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा था कि ‘महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है।’ उनके इस बयान को लेकर अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद ने कड़ी आपत्ति जताई है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक और सनातन ज्ञान पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम ने राहुल गांधी के बयान को निंदनीय और अक्षम्य बताया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हिंदुओं को आकर्षित करने के लिए स्वयं को ब्राह्मण बताते हैं, लेकिन हर मौके पर सनातन धर्म, उसकी परंपराओं और ग्रंथों का अपमान करते हैं।
दंडी संन्यासियों ने किया बहिष्कार का निर्णय जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम के अनुसार दंडी संन्यासियों ने आपसी सहमति से राहुल गांधी के बहिष्कार का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपना बयान वापस लेकर क्षमा मांगनी चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनका धार्मिक रूप से बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दंडी संन्यासी राहुल गांधी को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में आमंत्रित नहीं करेंगे। साथ ही यदि राहुल गांधी की ओर से उन्हें किसी कार्यक्रम में बुलाया जाता है तो वे वहां भी शामिल नहीं होंगे।
परिवार के सदस्यों के बहिष्कार की भी बात स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि राहुल गांधी के साथ उनकी मां, बहन समेत परिवार के सभी सदस्यों का भी बहिष्कार किया जाएगा। उनका कहना है कि राहुल गांधी के कथित कृत्य में परिवार के सदस्य अपरोक्ष रूप से भागीदार हैं और किसी ने उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया। माघ मेले में होगी बैठक, पारित होगा प्रस्ताव उन्होंने बताया कि जनवरी 2027 में प्रयागराज में होने वाले माघ मेले के दौरान दंडी संन्यासियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में राहुल गांधी के बहिष्कार को लेकर प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके बाद बहिष्कार की विधिवत घोषणा की जाएगी। इस बयान के बाद राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को लेकर संत समाज और कांग्रेस नेता के बीच विवाद और बढ़ने के संकेत हैं।
Middle East में चल रहे भीषण युद्ध के बीच एक बेहद दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरान के तटीय इलाके सिरिक में एक शादी समारोह पर हुए अमेरिकी हमले में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई और 50 अन्य घायल हो गए।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “इस क्रूरता को उन अत्याचारों की कड़ी से अलग नहीं किया जा सकता जो इससे पहले हुए थे।” उन्होंने मिनाब के एक गर्ल्स स्कूल में हुए उस धमाके जैसी घटनाओं का ज़िक्र किया, जिसमें मौजूदा युद्ध के पहले दिन 160 लोग मारे गए थे।
पेंटागन ने मिनाब हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है, लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला अमेरिका द्वारा पुराने टारगेटिंग डेटा के इस्तेमाल का नतीजा हो सकता है।
सिरिक में शादी समारोह के दौरान हुई यह घातक घटना ऐसे समय में हुई जब हफ़्तों की सबसे बड़ी झड़प के बाद बुधवार को अमेरिका और ईरान फिर से युद्ध की स्थिति में आ गए हैं, और वाशिंगटन ने और भी विनाशकारी हमले करने की धमकी दी है।यह युद्ध में आम नागरिकों के हताहत होने के सबसे अहम मामलों में से एक हो सकता है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर कई हमले किए, जिनमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियां और सुविधाएं, माइन-लेइंग क्षमताएं और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल थीं।
मध्य भारत के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ से लेकर मैदान तक मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। नदियों में उफान से ज्यादातर इलाके बाढ़ की चपेट में हैं, भूस्खलन होने से 200 से अधिक सड़कें बंद हैं और कई इलाकों से संपर्क कट गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है और 12 से अधिक राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है।
उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते आदि कैलाश और चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी सड़क दो दिन से बंद है इससे व्यास घाटी का संपर्क कटा है। दारमा और चौदास घाटी को जोड़ने वाली धारचूला-तवाघाट बॉर्डर रोड पर भी आठ घंटे यातायात ठप रहा। राज्य में भूस्खलन के चलते 150 से ज्यादा सड़कों पर यातायात बाधित रहा, जिसके चलते लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बुधवार को मूसलाधार बारिश से चार धाम यात्रा मार्ग पर भी दिन भर यातायात बाधित होता रहा। कई लिंक मार्गों के बंद होने से कई गांवों अलग-थलग पड़ गए हैं।
अनंतनाग : गाड़ी पर गिरा पत्थर, एक पर्यटक की मौत जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में भारी बारिश से सहार खड्ड में बाढ़ आ गई और आसपास के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया। कठुआ में 101.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। अनंतनाग जिले में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में एक इनोवा गाड़ी के आने से ओडिशा के एक पर्यटक की मौत हो गई।हरियाणा में भारी बारिश पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हरियाणा के अंबाला, रोहतक, फरीदाबाद, पलवल, कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद के कुछ एरिया में बारिश हुई। वहीं, यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज के पास लापता हुए नाहन की पैराट्रूप यूनिट के दो कमांडो में से एक कमांडों का शव देर शाम बरामद कर लिया है। दूसरे का अभी तक सुराग नहीं लगा। सर्च टीम दो हेलिकॉप्टरों की मदद से लगातार तलाश में जुटी है। बिहार में नदियां उफनाई बिहार और नेपाल में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है। रोहतास जिले के इंद्रपुरी में सोन बैराज के सभी 69 फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।