Friday, July 31, 2026
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WORLD : अमेरिका-चीन अब ह्यूमनॉइड और रोबोटिक डॉग पर भिड़े, US ने लगाया बैन, ये वजह

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अमेरिका ने चीन को एक बड़ा झटका दिया है. अब अमेरिका ने चीन से इंपोर्ट किए जाने वाला ह्यूमनॉइड और रोबोटिक डॉग पर बैन लगा दिया है. साथ ही चीन से आने वाले इन्वर्टर को भी बैन कर दिया है. ये जानकारी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है. फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चीन से आने वाले नए ह्यूमनॉइड (मानव जैसे) और चारों पैरों पर चलाने वाले रोबोट के इंपोर्ट पर पूरी तरह से बैन कर दिया है. FCC ने चीन में तैयार किए गए पावर इन्वर्टर मॉडल पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

चीन के रोबोट और रोबो डॉग पर बैन लगाने के पीछे की मुख्य वजह राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया है. FCC इस बैन की मदद से जोखिमों को कम करना चाहती है. महत्वपूर्ण उद्योगों के निर्माण को अमेरिका में बढ़ावा देना है. ट्रंप सरकार ने मंगलवार को इन नए बैन का ऐलान किया, जिसका मकसद चीन से आने वाले नए रोबोट और पावर इन्वर्टर के आयात को रोकना है. इससे अमेरिका में डेवलप हो रहे AI इंफ्रास्ट्रक्चर को राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधित खतरों से सुरक्षित रखा जा सके.

जिस इन्वर्टर पर रोक लगाई वो क्या करता है?

FCC के आदेश के तहत चीन से आने वाले नए ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले रोबोट के अलावा कनेक्टेड पावर इन्वर्टर पर भी रोक लगाई है. ये इन्वर्टर सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, बैटरियों, पावर ग्रिड और डेटा सेंटर उपकरणों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं.

साइबर अटैक का खतरा: इंटरनेट से कनेक्ट रहने वाले रोबोट और पावर इन्वर्टर किसी नेटवर्क में एंट्री करने का रास्ता बन सकते हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर: पावर इन्वर्टर बिजली ग्रिड, सोलर सिस्टम और डेटा सेंटर से जुड़े होते हैं. इनमें खामी पाई गई तो ये बिजली आपूर्ति या डेटा सेंटर के संचालन को प्रभावित कर सकते हैं.

रिमोटली कंट्रोल का खतरा: डिवाइस पर मैन्युफैक्चरर या हैकर द्वारा कंट्रोल कर लिया जाता है तो यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है.
सप्लाई चेन जोखिम: अगर एक देश पर ज्यादा निर्भरता हो और तनाव बढ़ जाए, तो जरूरी उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
ट्रंप का मकसद, संभावित खतरों से बचाव करना है

NATIONAL : वंदे मातरम् के अपमान पर 3 साल की जेल! विपक्ष के वॉकआउट के बीच राज्यसभा से बिल पास

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राज्यसभा में नीट विरोध प्रदर्शन पर गृह मंत्री के बयान की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पास हो गया।

नई दिल्ली: जंतर मंतर पर भले ही सीजेपी का प्रदर्शन खत्म हो गया हो। जहां विपक्षी दल सीजेपी की अगुआई में हुए संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस एक्शन को लेकर गृह मंत्री अमिक शाह के बयान पर अड़े हैं, वहीं पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ‘ वंदे मातरम् ’ के अपमान से जुड़े बिल को राज्यसभा में पास करवा लिया है।

आपको बता दें कि राज्यसभा में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या इसके गायन के दौरान व्यवधान को अपराध की श्रेणी में लाने के प्रावधान वाले राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन यानी वॉकआउच किया। हालांकि आम आदमी पार्टी (आप), बीजू जनता दल (बीजद), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया, जिसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई।

गृह मंत्री से मांग रहे थे स्पष्टीकरण
दोपहर के भोजनावकाश के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो उपसभापति हरिवंश ने आज की कार्यसूची में शामिल राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू कराई। इसी बीच विपक्षी दलों ने राजधानी में नीट पेपर लीक के प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।

उपसभापति हरिवंश ने सांसदों से की अपील
विपक्षी सदस्यों ने गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर भी नारे लगाए। उपसभापति हरिवंश ने विपक्षी सदस्यों से सदन में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने की अपील की।विपक्ष के विरोध के बीच उपसभापति ने सदन की कार्यवाही जारी रखी और चर्चा में हिस्सा लेने के लिए उन सदस्यों के नाम पुकारे, जिन्होंने बोलने के लिए अपने नाम दिए थे।

वंदे मातरम् का अपमान करने पर मिलेगी कितनी सजा
इस दौरान विपक्षी दल अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। बाद में जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले प्रस्तावित विधेयक पर बोल रहे थे, तब विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रस्तावित विधेयक में देश के राष्ट्रध्वज, संविधान और राष्ट्रगान सहित राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान या अनादर को अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान रखा गया है।

राज्यसभा में कब पेश हुआ था वंदे मातरम् बिल
आपको बता दें कि यह विधेयक उच्च सदन में 24 जुलाई को पेश किया गया था। लेकिन नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण इस पर चर्चा नहीं हो पाई थी।

NATIONAL : फोटो दिखाकर राहुल ने गृहमंत्री अमित शाह पर लगाए गंभीर आरोप, बोले- आपकी वजह से छात्रों पर हुई बर्बरता

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नई दिल्ली : नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में नहीं बोले दिए जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि छात्रों पर जितनी भी बर्बरता हुई उसके लिए गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं. राहुल गांधी ने कहा कि क्योंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है, लिहाजा जवाबदेही उनकी बनती है.

राहुल गांधी ने कहा कि बुधवार को लोकसभा में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह का सीधे तौर पर नाम लिया, जिनके आदेश की वजह से छात्रों पर कहर बरपाया गया. महिलाओं और छात्रों को पीटा गया. छात्रों को नुकीली लाठियों से हमला किया गया. लेकिन उन्हें सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई.
राहुल गांधी ने आगे कहा- मैंने खुद देखा कि गृह मंत्री अमित शाह पुलिस अधिकारियों से बात कर रहे थे. अब या तो वो नहीं जानते हैं कि उनके डिपार्टमेंट में क्या हो रहा है या फिर उन्होंने ही सभी आदेश दिए हैं. उन्हें लगातार ब्रीफिंग की जा रही थी.

बिल के पास होने पर राहुल गांधी ने कहा कि इससे स्थिति नहीं बदलेगी, क्योंकि सजा की अवधि तो बढ़ा दी गई है, लेकिन व्यवस्था वही पुरानी है. वहां पर आरएसएस के आदमी बैठे हैं.भाजपा ने मोदी और शाह की इमेज बनाई है. उनके आधार पर ही काम करते हैं. इसके लिए वे मीडिया, सुरक्षा एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं, यही वजह है कि उन्होंने छात्रों की पिटाई कर रहे हैं.

इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि जब उन्होंने इस ‘बर्बरता’ के लिए जिम्मेदार का नाम सदन में लिया तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें बोलने नहीं दिया.उन्होंने सदन में अमित शाह को लेकर गंभीर आरोप लगाया जिसके कारण सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखा विरोध किया और उनसे माफी की मांग की. सदन की कार्यवाही पहले ढाई बजे और फिर तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके जिम्मेदार का नाम लिया, गृह मंत्री अमित शाह. मुझे भाजपा ने बोलने नहीं दिया….माइक बंद कर सकते हैं – छात्रों की गूंज नहीं.’’लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने यह कहा है कि दो ही परिस्थितियां हो सकती हैं. एक यह है कि गृह मंत्री ने आदेश दिया और दूसरा यह कि उन्हें मालूम नहीं था कि गोली चलाई जा रही है. पहले मामले में वह दोषी हैं और दूसरी स्थिति में वह अक्षम हैं. इसमें तीसरी बात नहीं है.’’

उन्होंने सदन में गृह मंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर उन पर कटाक्ष किया और कहा कि भारत के ‘‘बहादुर’’ गृह मंत्री सदन में नहीं आए.

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अगर उन्होंने कुछ नहीं किया है, कोई आदेश नहीं दिया तो सफाई दे दें.’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मुख्य बात है कि सदन में बोलने का मेरा अधिकार बनता है और यह हक मुझे दिया जाना चाहिए.’’

इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने छात्रों पर बलप्रयोग का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए.

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने तीखा विरोध किया और कहा कि राहुल गांधी ने गलत बयान दिया और उन्होंने अपने विशेषाधिकार का हनन करते हुए बयान दिया जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.

WORLD : थाईलैंड में पाकिस्तानी ने करवाया 3 भारतीय पर्यटकों का अपहरण, मांगी करोड़ों रुपए की फिरौती

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थाईलैंड में तीन भारतीय पर्यटकों के अपहरण के मामले में पांच भारतीय नागरिक गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, उन्हें यह काम दुबई में बैठे एक पाकिस्तानी नागरिक ने सौंपा था। अपहरणकर्ताओं ने प्रत्येक परिवार से 40 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी। भारतीय…

थाईलैंड में पांच भारतीय नागरिकों को अपने ही देश के तीन लोगों का अपहरण करने और उनकी रिहाई के लिए फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ‘बैंकॉक पोस्ट’ ने पुलिस के हवाले से अपनी खबर में कहा कि पांचों आरोपियों को मंगलवार को बैंकॉक के क्लोंग तान इलाके के एक होटल से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे विदेश भागने की फिराक में थे। खबर के अनुसार संदिग्धों की पहचान अवतार सिंह (38), जगजीत सिंह (38), रामबालक कुमार (24), सुखबीर सिंह (37) और कुलरा सिंह (27) के रूप में की गई है। आरोपियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें एक पाकिस्तानी नागरिक ने तीन भारतीय पुरुषों (सभी पर्यटक) का अपहरण करने का निर्देश दिया था।

उन्होंने बताया कि वे उस पाकिस्तानी नागरिक को पिछले एक महीने से एक ‘चैट एप्लिकेशन’ के माध्यम से जानते थे। खबर के अनुसार माना जा रहा है कि इस कथित षडयंत्रकर्ता का ठिकाना दुबई में है और उसने फिरौती की रकम ‘क्रिप्टोकरेंसी’ के रूप में हासिल करने की योजना बनाई थी। पुलिस ने मीडिया को बताया कि आरोपियों को यह काम पूरा करने के बाद थाईलैंड छोड़ने के लिए कीमती सामान, नकदी और हवाई टिकट देने का वादा किया गया था। समाचार पत्र ‘द नेशन’ की खबर के अनुसार इस मामले में जांच की शुरुआत तब हुई, जब पीड़ितों के परिजनों की शिकायतों के बाद थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने 21 जुलाई को चोनबुरी आव्रजन पुलिस और पटाया सिटी पुलिस को सतर्क किया।

खबर के अनुसार अपहरणकर्ताओं ने प्रत्येक पीड़ित के परिवार से 40 लाख रुपये (41,831 अमेरिकी डॉलर) की फिरौती मांगी थी। इसके अनुसार पुलिस ने खुफिया जानकारी और सुरक्षा कैमरों की फुटेज के आधार पर सोमवार को पटाया में दो मंजिला एक इमारत में छापेमारी की और तीन भारतीय पुरुषों मोहित (23), आशीष (24) और हिमांशु (20) को बचाया।

WORLD : जोर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल हमला, डोनाल्ड ट्रंप बोले- ‘अब बहुत बड़ा हमला करेंगे’

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29 जुलाई 2026 को जोर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया गया. अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य प्रहार की चेतावनी दी है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से भारतीय नागरिकों, यात्रियों और वैश्विक ईंधन बाजार पर असर पड़ेगा.

29 जुलाई 2026 को जोर्डन में स्थित अमेरिकी सेना के हवाई अड्डे और सेंट्रल कमांड सेंटर पर ईरान की तरफ से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने इस हमले को रियल टाइम में नाकाम कर दिया. इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए भारी हमला करने की सीधी चेतावनी दी है.

यह मिसाइल हमला 28 जुलाई 2026 को इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की तरफ से ईरान समर्थित लड़ाकों पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के तुरंत बाद हुआ है. मध्य पूर्व में दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत का खतरा काफी बढ़ गया है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और वैश्विक हवाई यात्राएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एरोस्पेस फोर्स ने जोर्डन में अमेरिकी बेस और सेंट्रल कमांड सेंटर पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है. ईरानी राज्य मीडिया (IRIB) के अनुसार आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना की आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है. आईआरजीसी ने बयान जारी कर चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी धमकियां और गैर-कानूनी हस्तक्षेप बंद नहीं होते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.

दूसरी तरफ फॉक्स न्यूज से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जवानों के पास इस हमले पर प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ ही मिनट थे. रियल टाइम में जवानों ने एक-दूसरे को कोऑर्डिनेट्स बताए और मिसाइलों को निशाने तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया गया. ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका इस हमले का जवाब बहुत ही सख्त सैन्य कार्रवाई के रूप में देगा और ईरान के ठिकानों पर करारा प्रहार किया जाएगा.

जोर्डन में हुए इस मिसाइल हमले से ठीक एक दिन पहले, 28 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी अरब की सशस्त्र सेनाओं ने पूर्वी इराक में बड़ा संयुक्त सैन्य ऑपरेशन चलाया था. इस ऑपरेशन में दोनों देशों के फाइटर जेट्स ने इराक सरकार के साथ तालमेल बनाकर ईरान समर्थित लड़ाकों के हथियारों और रसद (लॉजिस्टिक्स) ठिकानों पर सटीक बमबारी की थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने इन लड़ाकों को दुनिया के लिए ‘कैंसर’ करार दिया और आगे भी कार्रवाई के संकेत दिए.

सेंटकॉम की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों के भीतर आईआरजीसी के निर्देश पर किए गए 30 से अधिक हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में की गई थी. सेंटकॉम ने कहा कि उनके ये ड्रोन हमले पूरी तरह असफल रहे. इसके अलावा अमेरिकी सेना ने खुलासा किया कि फरवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच ही इराक में एक्टिव ईरान समर्थित आतंकी गुटों ने 600 से अधिक बार अमेरिकी नागरिकों और ठिकानों पर हमलों के प्रयास किए हैं. सेंटकॉम ने आईआरजीसी और उसके प्रॉक्सी गुटों को तुरंत हमले रोकने की चेतावनी दी है.

29 जुलाई 2026 को जोर्डन में अमेरिकी बेस पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और इराक में 28 जुलाई के संयुक्त हवाई हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है. आम नागरिकों और विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए जरूरी है कि वे शांति बनाए रखें और केवल विदेश मंत्रालय के अधिकृत बयानों पर ही नजर रखें.

NATIONAL : BJP ने गिनाए राहुल गांधी के 6 झूठ: कहा- जेब में रखते हैं विक्टिम कार्ड, Gen-Z नहीं, इन्हें Gen-गांधी की चिंता

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लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के बाद भाजपा ने उनके आरोपों का तीखा जवाब दिया। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष के नेता ने छात्रों पर गोली चलने, गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका, संसद में उनकी मौजूदगी और माइक बंद किए जाने जैसे मुद्दों पर तथ्यहीन दावे किए। भाजपा ने कहा कि संसद मार्च के दौरान गोली नहीं चली थी और अमित शाह उसी समय सदन में मौजूद थे।

लोकसभा में बुधवार को नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर जमकर सियासी घमासान हुआ। राहुल गांधी ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने पहले संसद फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल के तमाम आरोपों का खंडन किया।

भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिलसिलेवार तरीके से राहुल गांधी के तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि छात्रों को ‘स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त’ जैसी श्रेणियों में बांटना अक्षम्य है। उन्होंने छात्रों पर गोली चलने के राहुल गांधी के दावे को भी पूरी तरह झूठा बताया।

छात्रों के संसद मार्च में नहीं चली गोली
संबित पात्रा ने कहा, ”देश को भ्रमित करने के लिए राहुल गांधी सदन में झूठ का पुलिंदा लेकर आए थे। राहुल गांधी के पास कोई तथ्य नहीं था। कांग्रेस सांसद ने छात्रों पर गोली चलाने का दावा किया, लेकिन उन्होंने यह झूठ बोला। भाजपा की ओर से पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा जाता है कि संसद मार्च पर गोली नहीं चलाई गई थी।” भाजपा सांसद ने कहा, ”राहुल गांधी ने अमित शाह के नाम पर झूठ बोला। जब गोली चली ही नहीं तो आदेश किसने दिया?”

संसद में ही मौजूद थे केंद्रीय गृह मंत्री
संबित पात्रा ने कहा, ”राहुल गांधी ने कहा कि देश के गृह मंत्री संसद में मौजूद क्यों नहीं हैं। मैं बताना चाहता हूं- केंद्रीय गृह मंत्री चोरी-छिपे विदेश नहीं जाते हैं. वह आपकी (राहुल) तरह चोरी-छिपे विदेश नहीं जाते। जब यह आरोप लगाए जा रहे थे, वह तब भी सदन में ही मौजूद थे।”

शाह के काफिले की तीस गाड़ियों पर क्या बोले पात्रा?
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में तीस गाड़ियां थीं। पात्रा ने कहा कि जो व्यक्ति सदन में पांच मिनट टिक कर बैठ नहीं सकता, वो गृह मंत्री के काफिले की गाड़ियां गिन रहे थे। उन्होंने कहा कि जो हर पांच मिनट में जेब में हाथ डालकर बाहर निकल जाते हैं, वो गाड़ियां गिन रहे थे। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वे काफिले की गाड़ियां गिनवाएं।

शाह के गाड़ी में बैठकर कांपने के आरोपों पर क्या बोली भाजपा?
संबित पात्रा ने कहा कि राहुल ने गाड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री के कांपने का दावा किया। उन्होंने हाथों के कांपने का इशारा भी किया। मैं उन्हें बताना चाहता हूं- अमित शाह को देखने के बाद नक्सली थरथराते हैं। उन्हें देखकर आतंकवादी कांपते हैं। जिन्होंने देश को नक्सलवाद से मुक्त कराया, वो कांपेगा। आप सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं।

जेनरेशन गांधी की रही चिंता
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ”बीते 75 वर्षों के दौरान जितने समय भी कांग्रेस की सरकार रही, उसमें जेन-Z की नहीं, जेन-G यानी जेनरेशन गांधी की चिंता की गई। किस तरह से गांधी परिवार को आगे बढ़ाया जाए, केवल इसकी चिंता की गई। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जब आंदोलन हुए थे, तब सैकड़ों छात्रों को गोली मरवा दी गई थी। जम्मू-कश्मीर में आप गोली चलवाते थे। असम में असम स्टूडेंट यूनियन के ऊपर गोलीबारी करवाई गई और 800 छात्रों की बर्बरतापूर्वक हत्या की गई।”

NATIONAL : स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त: राहुल ने छात्रों की बताई तीन कैटेगरी तो भाजपा हुई हमलावर, कहा- ये अक्षम्य

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लोकसभा में राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि छात्रों को ‘स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त’ जैसी श्रेणियों में बांटना अक्षम्य है। उन्होंने छात्रों पर गोली चलने के राहुल गांधी के दावे को भी पूरी तरह झूठा बताया। भाजपा ने राहुल गांधी के किन बयानों पर सबसे कड़ा विरोध जताया? साथ ही ये भी जानेंगे कि संबित पात्रा ने और क्या-क्या कहा?

लोकसभा में राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस वार्ता कर कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों को लेकर जो टिप्पणी की, वह अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों को ‘स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त’ जैसी श्रेणियों में बांटने की कोशिश की, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों पर गोली चलने का जो आरोप लगाया, वह पूरी तरह झूठा है और तथ्यों पर आधारित नहीं है।

संबित पात्रा ने कहा कि संसद परिसर के भीतर राहुल गांधी खुद को भी ‘इडियट’ नहीं कह सकते और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद अपनी सच्चाई जानते हैं और देश भी उसे जानता है। पात्रा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश के मेधावी छात्र अपनी मांगों को लेकर सामने आए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने छात्रों से बातचीत की, समाधान निकाला और इसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि आजादी से लेकर वर्ष 2014 तक पेपर लीक रोकने, परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक माफिया के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई करने का मुद्दा लंबित रहा, लेकिन अब सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि छात्रों पर गोलियां चलाई गईं। भाजपा ने तथ्यों की जांच के बाद स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई मामला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रों पर कोई गोली नहीं चली और राहुल गांधी ने झूठा दावा किया है। पात्रा ने कहा कि बिना तथ्यों के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे भ्रम फैलता है।

भाजपा सांसद ने राहुल गांधी के उस सवाल पर भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में क्यों मौजूद नहीं थे। पात्रा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री केवल भाजपा के नहीं, बल्कि पूरे देश के गृह मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग गृह मंत्री का सम्मान करते हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह मंत्री उनकी तरह गुप्त विदेश यात्राओं पर नहीं जाते, बल्कि देश की जिम्मेदारियां निभाते हैं।

NATIONAL : राहुल गांधी के ‘दो बोल’ से बवाल! जानें सदन के अंदर और बाहर का हाल?

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राहुल गांधी के ‘इडियट-अंधभक्त’ बयान ने लोकसभा में एक नया विवाद खड़ा कर दिया. स्पीकर ने ‘इडियट’ शब्द को हटाने का आदेश दिया, लेकिन ‘अंधभक्त’ शब्द पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सदन में जमकर तकरार हो रही है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने सदन में भूचाल ला दिया. राहुल ने एक छात्रा के हवाले से कहा कि वह ‘इडियट’ को भगवान मानने वालों को ‘अंधभक्त’ मानती है. इस पर बीजेपी सांसदों ने जमकर हंगामा किया और स्पीकर ओम बिरला ने ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय करार देते हुए कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया. अब मामला सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाहर भी बवाल मचा है, लेकिन क्या…

लोकसभा में राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी बुधवार को लोकसभा के मानसून सत्र 2026 में CJP आंदोलन और शिक्षा प्रणाली पर बोल रहे थे. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि उनकी मुलाकात एक 18 साल उम्र की स्टूडेंट ‘लवली’ से हुई, जो CJP प्रदर्शन में शामिल थी. राहुल ने उसके हवाले से कहा कि छात्रों की तीन कैटेगरी हैं:

वे छात्र जो ‘अहंकारी’ होते हैं. वे सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है, वे सुनते नहीं, दूसरों के सच को नहीं समझते. राहुल ने कहा कि जब उन्होंने लवली से पूछा कि वह ऐसे छात्रों को क्या कहती हैं, तो उसने कहा, ‘मैं इन्हें इडियट समझती हूं.’ राहुल ने बताया कि लवली ने आगे कहा कि ये ‘इडियट’ किसी की नहीं सुनते और खुद को भगवान बताने की कोशिश करते हैं.राहुल ने कहा कि उन्होंने लवली से पूछा कि तीसरी कैटेगरी क्या है, तो उसने कहा- ‘अंधभक्त.’ यानी वे लोग जो ‘इडियट’ को भगवान मानते हैं और उसे फॉलो करते हैं.

राहुल ने यह भी कहा कि छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में अपनी बात कहने, सवाल पूछने और अपने जुनून को फॉलो करने की इजाजत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘शिक्षा व्यवस्था पर RSS का कब्जा हो चुका है.’ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘दिखावटी’ है, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय असल में RSS चलाता है.

इसके अलावा राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘गृह मंत्री ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया’ और ‘पैलेट गन’ चलाने की इजाजत दी.

जैसे ही राहुल ने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ शब्दों का इस्तेमाल किया, ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया. बीजेपी सांसदों ने कहा कि राहुल असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और एक छात्रा के नाम पर वे ऐसे शब्द बोल रहे हैं जो सदन की गरिमा के खिलाफ हैं. उन्होंने मांग की कि इन शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘जो शब्द असंसदीय होगा, उसे निकाल दिया जाएगा.’ उन्होंने राहुल से कहा कि वे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें.

इस पर राहुल ने कहा कि ‘इडियट शब्द की जगह मैं दूसरा शब्द दे देता हूं’. लेकिन स्पीकर ने साफ कहा, ‘इसके लिए आपको व्यवस्था देने की जरूरत नहीं है, मैं व्यवस्था दे चुका हूं.’ यानी स्पीकर ने पहले ही ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय घोषित कर दिया था और उसे कार्यवाही से हटाने का आदेश दे दिया था.

लोकसभा में असंसदीय शब्दों का नियम क्या है?

लोकसभा के नियम 380 के मुताबिक, अगर स्पीकर को लगता है कि किसी सदस्य का बोला शब्द या टिप्पणी मानहानि, अशोभनीय असंसदीय या सदन की गरिमा के खिलाफ है. लोकसभा अध्यक्ष उसे सदन की कार्रवाई से हटे का आदेश दे सकता है.

नियम 381 के मुताबिक, कार्यवाही से हटाए गए शब्द या टिप्पणी को रिकॉर्ड में बीप के साथ दिखाया जाता है और उसके नीचे ‘Expunged as ordered by the Chair’ लिखा जाता है. किसी शब्द को असंसदीय माना जाएगा या नहीं, इसका फैसला स्पीकर उस शब्द के मायने और परिस्थितियों को देखते हुए करते हैं. इस मामले में स्पीकर बिरला ने ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय माना.

‘छात्रों पर गोली चलाने’ के आरोप पर रिजिजू-राहुल में जमकर बहस

राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ‘गृह मंत्री ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया’ और ‘पैलेट गन’ चलाने की इजाजत दी. यह आरोप इतना गंभीर था कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और राहुल पर पलटवार किया.

रिजिजू ने कहा, ‘आप बिना सोचे-समझे बोल रहे हैं. ऐसा मत बोलिए. आपको गंभीरता से बोलना चाहिए. ये ठीक नहीं है. ये किस आधार पर आपने बयान दिया? आपको किसने बताया? आप माफी मांगिए. गोली चली, ये छोटी बात नहीं है. ऐसा कैसे कह सकते हैं कि किसी ने गोली चलाई? ये गंभीर आरोप है.’

राहुल ने अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया.

इस पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और ‘राहुल गांधी को बोलने दो, राहुल गांधी को बोलने दो’ नारे लगाए.

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो ये सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि छात्रों पर ऐसा व्यवहार करने वाले की जांच करे.’ लेकिन रिजिजू ने साफ कहा, ‘आप जांच की मांग करिए, लेकिन राहुल गांधी सीधे-सीधे गृह मंत्री पर आरोप लगा रहे हैं. आपको माफी मांगना होगा. झूठा आरोप लगाया है.’

लोकसभा के बाहर राहुल गांधी ने क्या कहा?

अपने भाषण के बाद संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, ‘गृह मंत्री शाह सदन में नहीं आए, जबकि उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए था. अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया. सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है और वह अधिकार मुझे मिलना चाहिए.’

राहुल ने यह भी कहा, ‘छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की इजाजत नहीं है. उन्हें वह बेतुका इतिहास मानना पड़ता है जिसकी कल्पना RSS करता है.’

स्पीकर बिरला का रुख: संतुलन की कोशिश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूरे मामले में संतुलन बनाने की कोशिश की. उन्होंने राहुल के ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय बताकर कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया, लेकिन साथ ही राहुल को बोलने का अवसर भी दिया.

बिरला ने कहा कि वे सदन की गरिमा बनाए रखना चाहते हैं और कोई भी सदस्य ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करे जो असंसदीय हों. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई सदस्य सदन की मर्यादा का उल्लंघन करेगा तो वे सख्त कार्रवाई करेंगे. हालांकि, बिरला के इस फैसले से न तो बीजेपी पूरी तरह संतुष्ट हुई और न ही विपक्ष.

बीजेपी चाहती थी कि राहुल को माफी मांगने के लिए मजबूर किया जाए, जबकि विपक्ष का कहना था कि स्पीकर को राहुल को बिना किसी रुकावट के बोलने देना चाहिए.

सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है?

राहुल के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. RahulGandhi, Idiot, BlindBhakt और CJPProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. बीजेपी समर्थक राहुल को ‘असंसदीय’ और ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बयान देने के लिए निशाना बना रहे हैं, तो कांग्रेस और विपक्षी समर्थक उनके बयान को ‘सच्चाई’ बता रहे हैं.

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि राहुल ने CJP आंदोलन के छात्रों की बात को सदन में उठाकर सही काम किया, लेकिन ‘इडियट’ शब्द का इस्तेमाल उन्हें नहीं करना चाहिए था. वहीं, कुछ यूजर्स का कहना है कि ‘अंधभक्त’ शब्द तो ठीक है क्योंकि यह व्यवस्था पर सवाल उठाता है, लेकिन ‘इडियट’ शब्द असंसदीय था.

NATIONAL : एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पास, राज्यसभा में कब आएगा?

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एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा में पास होने के बाद अब सभी की निगाहें राज्यसभा पर हैं. यह विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है.

Anti Paper Leak Bill : भारी हंगामे के बीच लोकसभा में एंटी पेपर लीक (पेपर लीक रोकथाम संशोधन 2026) बिल पास हो गया अब इसे चर्चा के लिए कल राज्यसभा में रखा जाएगा. राज्यसभा में यह बिल आज ही रखा जाना था, लेकिन वंदे मातरम् के अपमान संबंधी बिल पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए अस्थगित कर दी गई. इस वजह से इस वजह से पेपर लीक रोकथाम संशोधन संबंधित विधेयक 2026 कल राज्यसभा में पेश किया जाएगा.


नीट यूजी पेपर नीक को लेकर देश भर में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को संशोधन बिल पेश किया था. इस प्रस्तावित कानून का मकसद ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) एक्ट’ में संशोधन करना है. इसके तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख तक का जुर्माना शामिल है.

संगठित गिरोहों पर सख्ती: संगठित तरीके से पेपर लीक करने वाले नेटवर्क के लिए कम से कम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव.
फास्ट ट्रैक कोर्ट: सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का प्रावधान, जहाँ मामलों की दैनिक सुनवाई हो और चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

NATIONAL : इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का पाग पहनाकर स्वागत,

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संसद में मॉनसून सत्र चल रहा है. इस दौरान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान आज यानी सोमवार, 27 जुलाई को पहली बार संसद पहुंचे हैं. परिसर में पहुंचते ही भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सांसदों ने मकर द्वार पर गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया. इस दौरान नेताओं ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाए. वहीं, बीजेपी नेता और लोकसभा सांसद संजय जायसवाल ने धर्मेंद्र प्रधान को पाग पहनाया.

धर्मेंद्र प्रधान के आने से पहले बीजेपी सांसद मकर द्वार पर जमा हुए और उनके स्वागत का इंतजार करने लगे. जैसे ही वे संसद परिसर में दाखिल हुए, पार्टी के साथियों ने उन्हें अंदर तक पहुंचाया, उनका अभिवादन किया और एकजुटता दिखाते हुए उन्हें एक खास टोपी भी भेंट की.

धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने के बाद विपक्ष ने भी तुरंत प्रतिक्रिया किया. प्लेकार्ड और नारों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने ‘शिक्षा चोरी’ के नारे लगाए.

NEET विवाद के बाद देश में पेपर लीक रोकने वाले कानून को और सख्त बनाने के मकसद से लाए जा रहे ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पर संसद में चर्चा की तैयारी के बीच विपक्ष और NDA के बीच हंगामा हुआ.

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और कथित NEET पेपर लीक को लेकर हो रहे देशव्यापी विरोध का फायदा उठाने की कोशिश करने वाली ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ को रोकने के लिए लिया गया.

लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच एनडीए के किसी सीनियर मंत्री का इस्तीफा देना एक दुर्लभ घटना थी.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व वाले आंदोलन की मुख्य मांग थी और यह इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के तीसरे दौर से कुछ घंटे पहले ही आया.

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