Tuesday, September 15, 2026
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NATIONAL : 5 राज्यों के चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 191 उम्मीदवार, पार्टियों ने नहीं बताई टिकट देने की वजह

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एडीआर ने पांच राज्यों और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की ओर से आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के चयन को लेकर जारी जानकारी का विश्लेषण किया। संगठन के मुताबिक, 1,405 उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे, लेकिन 191 के लिए टिकट देने का कारण उपलब्ध नहीं था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई दलों ने अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए समान या दोहराए गए कारणों का इस्तेमाल किया।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारण बताने में राजनीतिक दलों की ओर से नियमों का पालन नहीं किया गया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 51 राजनीतिक दलों के 3,539 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया। इनमें 1,405 उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें से 191 उम्मीदवारों के लिए जरूरी कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।

एडीआर के मुताबिक, राजनीतिक दलों ने 1,214 उम्मीदवारों के लिए फॉर्मेट सी-7 में जरूरी जानकारी जारी की थी। वहीं 191 यानी 14 प्रतिशत उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

किन राज्यों में कितने उम्मीदवारों की नहीं मिली जानकारी?
असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के चुनाव में कुल 8,848 उम्मीदवार मैदान में थे। एडीआर ने इन चुनावों में 51 राजनीतिक दलों की ओर से उतारे गए 3,539 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया।

तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 72 उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके लिए सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 55, केरल में 27, पुडुचेरी में 12 और असम में 10 उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

क्या है फॉर्मेट सी-7?
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, सी-7 खुलासे का मकसद मतदाताओं को यह बताना है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने के बावजूद पार्टी ने उसे टिकट क्यों दिया। साथ ही यह भी बताना होता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले किसी दूसरे उम्मीदवार को टिकट क्यों नहीं दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन के 72 घंटे के भीतर उन्हें टिकट देने के कारण सार्वजनिक किए जाएं। ये कारण उम्मीदवार की योग्यता, उपलब्धियों और मेरिट पर आधारित होने चाहिए, केवल उसकी ‘जितने की क्षमता’ यानी ‘विनेबिलिटी’ पर नहीं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया खातों और समाचार पत्रों में यह जानकारी प्रकाशित करने का निर्देश दिया था।

राज्यवार क्या है आंकड़ा?
तमिलनाडु में एडीआर ने 1,162 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया। इनमें 473 उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 72 उम्मीदवारों के लिए जरूरी खुलासा उपलब्ध नहीं था।

पश्चिम बंगाल में 1,516 उम्मीदवारों में से 559 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 55 उम्मीदवारों के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
केरल में विश्लेषण किए गए 431 उम्मीदवारों में 268 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 27 उम्मीदवारों के लिए सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था।
असम में 318 उम्मीदवारों में से 66 ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 10 उम्मीदवारों के लिए जरूरी सी-7 खुलासा उपलब्ध नहीं था।
पुडुचेरी में विश्लेषण किए गए 112 उम्मीदवारों में से 39 यानी 35 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 12 यानी 31 प्रतिशत उम्मीदवारों के लिए टिकट देने के कारण सार्वजनिक किए गए थे।

एक जैसे कारण देने का भी दावा
एडीआर ने पाया कि आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए राजनीतिक दलों की ओर से दिए गए कारण कई मामलों में एक जैसे या दोहराए गए थे। कई बार कारण उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्थिति के मुताबिक अलग-अलग नहीं थे। खुलासों में आमतौर पर उम्मीदवार की सार्वजनिक छवि, सामाजिक कार्य, अनुभव, लोकप्रियता, योग्यता और सीट के लिए उपयुक्तता जैसे कारण बताए गए। हालांकि, कई मामलों में कई उम्मीदवारों के लिए एक ही शब्दावली का इस्तेमाल किया गया।

तमिलनाडु में एडीआर ने पाया कि भाजपा, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और तमिलगा वेत्री कझगम समेत कुछ दलों ने आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के लिए अपने खुलासों में शब्दश: एक जैसे कारण दिए। रिपोर्ट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने के कारण बताने के लिए भी एक जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया।

किस पार्टी ने बताए एक जैसे कारण?
असम में एआईयूडीएफ ने अपने सभी विश्लेषित उम्मीदवारों के लिए यह बताने में एक ही कारण इस्तेमाल किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले दूसरे उम्मीदवारों को क्यों नहीं चुना गया। भाजपा ने भी इस हिस्से में अपने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए एक जैसी भाषा का इस्तेमाल किया। गण सुरक्षा पार्टी ने विश्लेषण किए गए अपने सभी उम्मीदवारों के लिए दोनों हिस्सों में एक ही शब्दावली का इस्तेमाल किया।

एडीआर ने कहा कि उसके निष्कर्ष चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की वेबसाइटों और सोशल मीडिया खातों पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संभव है कि राजनीतिक दलों ने कुछ खुलासे अन्य माध्यमों से प्रकाशित किए हों, जो एडीआर के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो सके।

NATIONAL : कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों ने बढ़ाई चिंता, बोले- 90 के दशक का डर दोबारा नहीं लौटने देंगे

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जम्मू, 29 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की ओर से धमकी भरे पत्र मिलने के बाद एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इन धमकियों में कर्मचारियों की पहचान, फोन नंबर, तस्वीरें और वाहनों से जुड़ी जानकारी तक का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति ने इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि लगातार मिल रहे ऐसे पत्र डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। लेकिन, 90 के दशक का…

जम्मू, 29 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की ओर से धमकी भरे पत्र मिलने के बाद एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इन धमकियों में कर्मचारियों की पहचान, फोन नंबर, तस्वीरें और वाहनों से जुड़ी जानकारी तक का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है।

कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति ने इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि लगातार मिल रहे ऐसे पत्र डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। लेकिन, 90 के दशक का डर दोबारा नहीं लौटने देंगे।

कश्मीरी पंडित समुदाय के एक व्यक्ति ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह कोई पहली धमकी नहीं है। अगस्त के पहले सप्ताह में एक धमकी सामने आई थी, इसके बाद 23 अगस्त को और फिर 25 अगस्त को भी धमकी पत्र सामने आया। एक ही महीने में बार-बार इस तरह के पत्र सामने आना चिंता का विषय है। खासकर तब, जब इन पत्रों में नाम, मोबाइल नंबर, तस्वीरें और वाहन का नंबर और रंग जैसी जानकारियां शामिल होने की बात कही जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इतनी व्यक्तिगत जानकारी धमकी देने वालों तक कैसे पहुंच रही है?

उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में आतंक और हिंसा के माहौल के कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। उस दौर की यादें आज भी समुदाय के लोगों के मन में मौजूद हैं। ऐसे में घाटी में रोजगार के लिए वापस गए कर्मचारियों को धमकी मिलने से स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ती है। उन्होंने प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सरकार इन कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाती है, तो भविष्य में घाटी में समुदाय की व्यापक वापसी और पुनर्वास को लेकर भी सवाल खड़े होंगे।

धमकी पत्रों में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों पर आरएसएस और भाजपा के एजेंडे पर काम करने का आरोप लगाए जाने को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि घाटी में काम करने वाले लोग किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं गए हैं। वे रोजगार और अपने परिवारों का पालन-पोषण करने के लिए वहां गए हैं।

उन्होंने कहा कि देश के प्रति उनका विश्वास और भारतीय होने पर गर्व को किसी राजनीतिक संगठन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वे अपने देश के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं और देश उनके लिए सर्वोपरि है। धमकी देने वाले संगठनों की ओर से लोगों पर राजनीतिक या वैचारिक ठप्पा लगाना भी डर पैदा करने की रणनीति का हिस्सा है। कश्मीरी पंडितों ने पहले भी मुश्किल हालात का सामना किया है और अब केवल धमकी के कारण वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

इस दौरान कमीडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ के लेटेस्ट एपिसोड में कथित तौर पर कश्मीरी पंडितों को लेकर की गई टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि लंबे समय तक राजनीतिक दलों पर कश्मीरी पंडितों के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया जाता रहा, लेकिन अब सोशल मीडिया और यूट्यूब से जुड़े लोग भी समुदाय के नाम और उसके विस्थापन को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं। बाहर से किसी घटना पर टिप्पणी करना आसान है, लेकिन जिस व्यक्ति ने अपना घर छोड़ा हो, उसके दर्द को समझना आसान नहीं है। 1990 के दशक में जब परिवारों ने घाटी छोड़ी तो कई लोगों के पास रहने के लिए स्थायी छत और पर्याप्त आर्थिक साधन तक नहीं थे। उन्हें अलग-अलग राज्यों में कठिन परिस्थितियों में जीवन शुरू करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इन परिवारों ने तमाम परेशानियों के बावजूद अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया। आज उन्हीं परिवारों की अगली पीढ़ी डॉक्टर, इंजीनियर और बड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंची है। यह संघर्ष और मेहनत समुदाय की पूरी कहानी का हिस्सा है, जिसे किसी मजाक या हल्की टिप्पणी में समेटना उचित नहीं है। अगर किसी ने समुदाय की पीड़ा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है तो उसे अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने विस्थापन के दर्द को समझाने के लिए कहा कि अगर एक चिड़िया का घोंसला भी टूट जाए तो वह बेचैन हो जाती है, जबकि कश्मीरी पंडितों ने अपने घर, संपत्ति और जड़ों से दूर होने का दर्द झेला है।

GUJARAT : गुजरात तट पर बड़ा हादसा, दो जहाजों के बीच हुई टक्कर, 21 लोगों को बचाया गया

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गुजरात के कांडला पोर्ट के बाहरी एंकरेज क्षेत्र में दो मर्चेंट जहाज आपस में टकरा गए. हादसे के बाद भारतीय तटरक्षक बल ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 24 में से 21 क्रू मेंबरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.

गुजरात तट पर बड़ा हादसा, दो जहाजों के बीच हुई टक्कर, 21 लोगों को बचाया गयाकांडला पोर्ट के पास समुद्री हादसाNDTV
गुजरात के कांडला पोर्ट के पास बड़ा हादसा हुआ है. कांडला के बाहरी एंकरेज (OTB) के पास दो मर्चेंट जहाज आपस में टकरा गए. हादसे के बाद इंडियन कॉस्ट गार्ड ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. अब तक 21 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. जानकारी के अनुसार जहाज पर 24 क्रू मेंबर्स थे.

इंडियन कॉस्ट गार्ड ने किया रेस्क्यू
इंडियन कॉस्ट गार्ड ने एक्स पर इस घटना की जानकारी दी. ICG ने लिखा, ‘कांडला बंदरगाह के बाहरी एंकरेज (OTB) के पास दो मालवाहक जहाज, MV KMAX EMPEROR और MV TRUE MARINER, आपस में टकरा गए. इसके बाद कोस्ट गार्ड ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया. कोस्ट गार्ड ने MV KMAX EMPEROR पर सवार 24 में से 21 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. हालांकि जहाज के संचालन और जरूरी कामकाज के लिए 3 क्रू मेंबर अभी भी जहाज पर मौजूद हैं.

इसके साथ ही कॉस्ट गार्ड ने समुद्र में किसी भी तरह के प्रदूषण को रोकने के लिए बड़े स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. इस काम में वह शिपिंग महानिदेशालय, केंद्र सरकार की एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहा है. कोस्ट गार्ड ने कहा है कि वह पूरी तरह सतर्क है और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ गुजरात के तटीय पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है.

NATIONAL : ‘शिक्षा व्यवस्था युवा पीढ़ी को कर रही निराश’: राहुल गांधी ने उठाए सवाल, छात्रों से पूछा- क्यों उठा भरोसा?

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राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधे उनके अनुभव जानने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, बढ़ती फीस और खराब आधारभूत सुविधाओं जैसी समस्याएं युवाओं को प्रभावित कर रही हैं। कांग्रेस नेता ने लोगों से शिक्षा व्यवस्था की खामियों से जुड़े अनुभव, प्रमाण और सुझाव साझा करने को कहा है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था उस युवा पीढ़ी को ही निराश कर रही है, जिसके विकास के लिए इसे तैयार किया गया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से पूछा कि उनका शिक्षा व्यवस्था से भरोसा क्यों उठ गया है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भारत की शिक्षा व्यवस्था उसी पीढ़ी को निराश कर रही है, जिसे आगे बढ़ाने के लिए इसे बनाया गया था। पेपर लीक। भारी फीस। खराब होती आधारभूत सुविधाएं। लाखों युवा भारतीय ईमानदारी से मेहनत करते हैं और फिर भी व्यवस्था उन्हें निराश करती है।’

छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से की क्या अपील?
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘इसे ठीक करने की शुरुआत उन लोगों की बात सुनने से होगी, जो हर दिन इसकी खामियों का सामना करते हैं। छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, मुझे बताइए: आपका शिक्षा व्यवस्था से भरोसा क्यों उठ गया है?’ राहुल गांधी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से उनके अनुभव, इससे जुड़े प्रमाण और सुझाव साझा करने को कहा। इसके लिए उन्होंने एक ऑनलाइन लिंक भी साझा किया। उन्होंने कहा, ‘मिलकर हम फिर से उम्मीद जगाएंगे।’

छात्रों की गूंज कार्यक्रम के पांचवें संस्करण से पहले राहुल की टिप्पणी
कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी उनके ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के पांचवें संस्करण से पहले आई है। इसका आयोजन 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में होगा। राहुल गांधी का कहना है कि व्यवस्था में बदलाव के लिए देश के हर छात्र की आवाज सुनना जरूरी है। राहुल गांधी अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ के चार कार्यक्रम कर चुके हैं। 22 अगस्त को पुणे में हुआ पिछला कार्यक्रम छात्राओं के लिए आयोजित किया गया था।

जेन जी से जुड़ने की कोशिश में जुटे कांग्रेस सांसद
इससे पहले राहुल गांधी ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा था, ”मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के जेन जी, आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।”

NATIONAL : AI बना बड़ी मुसीबत! जानें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्यों दी चेतावनी?

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने AI को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि यह कार्यकुशलता तो बढ़ाता है, लेकिन इसके साथ आने वाले तकनीकी जोखिम और

Nirmala Sitharaman speech Global Fintech Fest AI double edged sword innovation and risks 2026 AI बना बड़ी मुसीबत! जानें वित्त मंत्री वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक टेक्नोलॉजी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक दोधारी तलवार की तरह है.

उन्होंने आगाह किया कि जहां एक तरफ इस तकनीक की मदद से डिजिटल धोखाधड़ी और फ्रॉड को पकड़ा जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ अपराधी इसका इस्तेमाल बड़े घोटालों को अंजाम देने के लिए भी कर रहे हैं. वित्त मंत्री ने टेक कंपनियों और फिनटेक सेक्टर को सलाह दी कि वे नई तकनीकों को इस तरह विकसित करें जिससे सिस्टम की कार्यकुशलता तो बढ़े, लेकिन उससे सुरक्षा को लेकर कोई नया खतरा पैदा न हो.

समाज और चुनावों को प्रभावित कर सकती है टेक्नोलॉजी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने AI, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स LLMs और साइबर स्पेस से जुड़े खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक तकनीक इतनी ताकतवर हो चुकी है कि यह न सिर्फ आम समाज को प्रभावित कर सकती है, बल्कि लोकतांत्रिक देशों में होने वाले चुनावों के नतीजों तक को बदल सकती है.

उन्होंने बताया कि आज के नए डिजिटल मॉडल्स जमीनी स्तर पर लोगों की राय और जनमत को इस तरह प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, जिसके बारे में आम जनता को अंदाजा तक नहीं हो पाता. यही वजह है कि तकनीक के इन बढ़ते जोखिमों को समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी हो गया है.

रेगुलेशन और नई खोजों के बीच संतुलन जरूरी
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के मंच से वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारों और केंद्रीय बैंक को एआई से जुड़े इन खतरों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि नियम ऐसे होने चाहिए जो बाजार में नई खोजों को बढ़ावा दें, न कि उन्हें दबाएं.

वित्त मंत्री ने बताया कि उन्होंने RBI के साथ इस विषय पर चर्चा की है. उन्होंने आरबीआई से सॉफ्ट-टच रेगुलेशन अपनाने की बात की है ताकि फिनटेक सेक्टर बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि हाल ही में आरबीआई ने फिनटेक सेक्टर के लिए यूनिफाइड फिनटेक फोरम को एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन के रूप में मान्यता दे दी है, जो इस बदलते दौर की बड़ी जरूरत थी.

भारत की युवा आबादी और डिजिटल इकोनॉमी की तारीफ
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने भारत के युवाओं की क्षमता और देश के युवा आबादी के फायदे पर भी खुलकर बात की. उन्होंने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो भारत की युवा आबादी की ताकत पर संदेह करते हैं. उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी आज निराशा से आगे निकल चुकी है और देश के भविष्य का निर्माण कर रही है.

उन्होंने गर्व से कहा कि हमारे युवा आज कल के लिए कोडिंग लिख रहे हैं, बड़े और टिकाऊ बिजनेस खड़े कर रहे हैं. आज भारत की UPI जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था पूरी दुनिया में सबसे ताकतवर बनकर उभरी है, जिसके जरिए हर महीने अरबों रुपयों का डिजिटल लेनदेन हो रहा है. इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में नए मुकाम हासिल कर रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

NATIONAL : वित्त मंत्री का तंज: ‘नाराज फूफा’ भारत की क्षमताओं पर संदेह करने का कोई मौका नहीं छोड़ते, बोलीं सीतारमण

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ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की तेज वृद्धि और युवा शक्ति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वास्तविक समय में अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का अनुभव कर रहा है। देश डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में विश्व में अग्रणी है। यूपीआई के जरिए अरबों के लेनदेन हो रहे हैं। भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्द ‘नाराज फूफाजी’ का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भारत की आगे बढ़ने की गति और युवाओं की क्षमताओं पर संदेह करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उनके पास ऐसा करने के लिए कारण कभी कम नहीं पड़ते। वे टेलीविजन स्टूडियो में बहस करते हुए समय बिताते हैं। उनका सवाल होता है कि क्या जनसांख्यिकीय लाभांश हाथ से निकल गया है या बोझ बन गया है।

क्या भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश एक बोझ है?
वित्त मंत्री ने इस सोच को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह जनसांख्यिकीय लाभांश भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा तय कर रहा है। हमें इस प्रगति का उत्सव मनाना चाहिए। नकारात्मक सोच वाले लोगों की तरह नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। यह देश के भविष्य के लिए एक मजबूत आधार है।

प्रौद्योगिकी परिवेश को कैसे मजबूत करें?
निर्मला सीतारमण ने एक संघीय उद्योग मंच बनाने पर जोर दिया। यह मंच व्यापक भारतीय प्रौद्योगिकी परिवेश को एक साथ लाएगा। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक को थोक और खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा पायलट को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। यह कदम डिजिटल वित्तीय प्रणाली को मजबूत करेगा। यह नवाचार को बढ़ावा देने में सहायक होगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरों से कैसे बचें?
वित्त मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को दोधारी तलवार बताया। उन्होंने कहा कि यह धोखाधड़ी का पता लगाने में मदद करती है। साथ ही धोखाधड़ी करने में भी इसका उपयोग हो सकता है। हमें सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना होगा। नवाचार दक्षता बढ़ाए, लेकिन नई प्रणालीगत नाजुकता न लाए। प्रौद्योगिकी का उपयोग सावधानी और जिम्मेदारी से होना चाहिए।

NATIONAL : पीएम मोदी वर्ल्ड लीडर्स के साथ करेंगे डिनर:मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल

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कल पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग समेत कई वर्ल्ड लीडर्स को होस्ट करेंगे। डिनर के मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल हैं।

वहीं, लग्ज़री होटलों में मेहमानों के स्वागत की तैयारी कई हफ्तों से चल रही है। इसमें क्षेत्रीय भारतीय खान-पान, खास मेन्यू, पारंपरिक उपहार और कस्टमाइज्ड व्यक्तिगत सुविधाएं शामिल हैं।

ITC मौर्या में रूस के राष्ट्रपति पुतिन और ताज पैलेस में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ठहरने की उम्मीद है। वहीं, UAE के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल द लीला पैलेस और मिस्र का प्रतिनिधिमंडल शेरेटन नई दिल्ली में ठहरेगा।

समिट से होटलों में मांग बढ़ी

समिट के बीच राजधानी के लग्जरी होटलों में कमरों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई प्रमुख होटलों में समिट की तारीखों के आसपास कमरे बहुत कम बचे हैं या उपलब्ध नहीं हैं।

प्रतिनिधिमंडलों, सुरक्षा कर्मियों, मीडिया और दूसरे अधिकारियों की मांग के कारण कमरों के किराए में भी तेज बढ़ोतरी हुई है।

समिट के दौरान द ललित के 460 कमरों में करीब 90% कमरे भरे होंगे। होटल का औसत दैनिक किराया सामान्य से 30 से 40% ज्यादा रहेगा।

द लीला पैलेस के मेन्यू में दाल मखनी, बिरयानी, दिल्ली स्टाइल चाट और भारतीय फलों के साथ सत्तू, बाजरा व रागी डोसा जैसे मिलेट व्यंजन शामिल हैं। यहाँ मिलेट्स कुकीज, ग्रेनोला बार और खास गुलाब, केसर व इलायची से बना खाने योग्य कमल भी परोसा जा रहा है।

द ललित और ताज महल होटल में भी खास मेन्यू

ताज महल होटल ने देश भर के मशहूर स्नैक्स पेश कर रहा है। इसमें कश्मीर के मसालेदार अखरोट, पुरानी दिल्ली का मैदा काजू, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी, राजस्थान की मिनी कचौड़ी, बंगाल की कूचो निमकी और तमिलनाडु का मुरुक्कू शामिल हैं।

द ललित में गलौटी कबाब, तंदूरी रोटियां और दक्षिण भारतीय डोसा व अप्पम के साथ बाजरा-ज्वार के मिलेट व्यंजन मिल रहे हैं। यहां मिलेट्स कुकीज, ग्रेनोला बार और खास गुलाब, केसर व इलायची से बना खाने योग्य कमल भी परोसा जा रहा है।

डिनर डिप्लोमेसी के की अहमियत

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों में ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का मतलब होता है औपचारिक बैठकों और सख्त प्रोटोकॉल से हटकर, रात के खाने की मेज पर अनौपचारिक बातचीत करना।

एक साथ खाना खाते हुए नेताओं के बीच का माहौल सहज हो जाता है, जिससे तनाव कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और विवादित मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने में आसानी होती है।

कई बार जो मुश्किल समझौते बंद कमरों की औपचारिक चर्चा में नहीं सुलझ पाते, उनकी जमीन ऐसे ही डिनर के दौरान अनौपचारिक बातचीत से तैयार होती है।

भारत मंडपम में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के स्टॉल

ब्रिक्स सम्मेलन में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें देश भर के 70 अनोखे कला और हथकरघा उत्पाद दिखाए गए हैं।

यह प्रदर्शनी 770 जिलों के 1,200 से अधिक अनोखे उत्पादों को दुनिया के सामने लाने की मुहिम का हिस्सा है।

इसमें तीन महिलाओं की आकृतियां हैं। इन्हें पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों में रंगा गया है। यह शैली आंध्र प्रदेश के मशहूर ‘कोंडापल्ली’ या ‘एटिकोप्पका’ खिलौनों की पहचान है।
इसमें तीन महिलाओं की आकृतियां हैं। इन्हें पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों में रंगा गया है। यह शैली आंध्र प्रदेश के मशहूर ‘कोंडापल्ली’ या ‘एटिकोप्पका’ खिलौनों की पहचान है।

NATIONAL : भारत दौरे पर आएंगे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक संभव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दरअसल शनिवार को चीनी राष्ट्रपति भारत दौरे पर आएंगे। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक आमने-सामने की बातचीत हो सकती है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं…

साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प के बाद अब पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शी जिनपिंग नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने शनिवार को भारत आएंगे। इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं शी जिनपिंग
भारत इस बार 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सिलसिले में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे। अगर जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो यह 2020 के सीमा विवाद और गलवान झड़प के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालयों ने भारत दौरे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।

गलवान के खूनी टकराव के बाद कैसे बदले भारत-चीन के रिश्ते?
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत और चीन के सैनिक बलिदान हुए थे। इस घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच राजनैतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंध बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, बीते कुछ महीनों में सैन्य और राजनयिक बातचीत के जरिए सीमा के कई तनाव वाले बिंदुओं से सेनाएं पीछे हटी हैं।

क्या सीमा विवाद के बीच बातचीत की मेज सजाना संभव है?
गलवान हिंसा के बाद दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बैठकें की हैं, ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके। हाल ही में कजाकिस्तान के बिश्केक में हुए एससीओ सम्मेलन में दोनों नेता एक साथ मंच पर दिखे और हाथ भी मिलाया, लेकिन वहां औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई थी। अब दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस संभावित बैठक से ठीक पहले पर्दे के पीछे क्या कूटनीति चली?
शी जिनपिंग के भारत आने से ठीक पहले भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने चीन का दौरा किया था। इसके अलावा, भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म (डब्ल्यूएमसीसी) और दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी उच्च स्तरीय बातचीत हुई है। इन्हीं बैठकों के आधार पर दोनों शीर्ष नेताओं की मुलाकात की जमीन तैयार की गई है। वहीं, लद्दाख में भले ही तनाव कुछ कम हुआ हो, लेकिन अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद बना हुआ है। चीन अरुणाचल को ‘ज़ंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत बताता है, जिसे भारत सिरे से खारिज करता आया है।

भारत दौरे पर आ रहे हैं एंटोनियो गुटेरेस
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इस सप्ताह भारत के दौरे पर नई दिल्ली आ रहे हैं। वह 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। वर्ष 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस दौरान गुटेरेस 13 सितंबर को मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।

अपने संबोधन में एंटोनियो गुटेरेस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत करेंगे। उनका मानना है कि दुनिया के आर्थिक और राजनीतिक हालात 1945 जैसे नहीं रहे हैं। आज के समय में दुनिया को संतुलित बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव बेहद जरूरी है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। इस सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

NATIONAL : दिल्ली में लगा दिग्गज नेताओं का जमघट, आज जिनपिंग भी पहुंच रहे, दुनिया देखेगी भारत की कूटनीतिक ताकत

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BRICS Summit 2026: ब्रिक्स समिट 2026 के लिए दुनिया भर के तमाम नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी आज दोपहर पहुंचेंगे। दो दिवसीय इस सम्मेलन की आज भारत मंडपम में शुरुआत होगी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। शनिवार को पीएम की चीनी राष्ट्रपति से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। इस समिट पर दुनिया भर की नजरें लगी हैं। ब्रिक्स का यह सम्मेलन वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का परिचय कराने के साथ-साथ दिल्ली की कूटनीति का भी जयघोष करेगा।

क्यूबा, थाईलैंड, इंडोनेशिया के नेताओं का आगमन
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पार्रिला, थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेटकेव और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्त नदायिशिमिये नई दिल्ली पहुंच गए हैं। इसके अलावा, विश्व व्यापार संगठन (WTO) की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंच गई हैं।

फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड पहुंचे भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट के जरिए इन विशिष्ट नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर का स्वागत करते हुए जायसवाल ने कहा कि वह 2026 में आसियान (ASEAN) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर का स्वागत केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने किया।

‘एक्ट ईस्ट’ नीति में फिलीपींस अहम स्तंभ
जायसवाल ने X पर लिखा, ‘फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर का नई दिल्ली पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। वह आसियान के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे हैं। उनका स्वागत राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने किया।’ उन्होंने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और भारत-आसियान साझेदारी में फिलीपींस की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में फिलीपींस एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जिसका फोकस व्यापार, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर है।

UN महासचिव से की मुलाकात
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अलग-अलग जगहों पर जारी संघर्ष, नौवहन की स्वतंत्रता, सतत विकास, मानव-केंद्रित एआई और वैश्विक खाद्य सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने बहुध्रुवीय विश्व के महत्व और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) समेत बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि वे “वर्तमान वास्तविकताओं” को दर्शा सकें। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर संयुक्त राष्ट्र महासचिव से मुलाकात की।

NATIONAL : युद्ध नहीं, कूटनीति और संवाद से ही शांति…, ईरानी राष्ट्रपति से PM मोदी ने की मुलाकात, पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा

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राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह है कि बीते दो हफ्तों से भी कम समय में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी सीधी मुलाकात है।

ईरानी राष्ट्रपति के रूप में मसूद पेजेश्कियान की यह पहली भारत यात्रा है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स से जुड़ी बैठकों और बिजनेस फोरम में ईरान की निरंतर और उच्चस्तरीय भागीदारी के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ईरान का ब्रिक्स के कार्यक्रमों में लगातार शामिल होना इस मंच की मजबूती को दर्शाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में आपसी सहयोग, स्थिरता और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है।द्विपक्षीय वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा बिगड़ते हालातों पर गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र से जुड़े किसी भी विवाद या मुद्दे का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों द्वारा मिलकर प्रयास किए जाने की जरूरत पर बल दिया।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव के कारण लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही और वाणिज्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने जहाजों पर तैनात नाविकों (सीफेरर्स) की सुरक्षा और उनके कल्याण को प्राथमिकता देने की बात कही। दोनों नेताओं की यह लगातार हो रही मुलाकातें भारत और ईरान के बीच मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाती हैं, जो क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम हैं।

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