Friday, July 31, 2026
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NATIONAL : BJP ने गिनाए राहुल गांधी के 6 झूठ: कहा- जेब में रखते हैं विक्टिम कार्ड, Gen-Z नहीं, इन्हें Gen-गांधी की चिंता

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लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के बाद भाजपा ने उनके आरोपों का तीखा जवाब दिया। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष के नेता ने छात्रों पर गोली चलने, गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका, संसद में उनकी मौजूदगी और माइक बंद किए जाने जैसे मुद्दों पर तथ्यहीन दावे किए। भाजपा ने कहा कि संसद मार्च के दौरान गोली नहीं चली थी और अमित शाह उसी समय सदन में मौजूद थे।

लोकसभा में बुधवार को नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर जमकर सियासी घमासान हुआ। राहुल गांधी ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने पहले संसद फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल के तमाम आरोपों का खंडन किया।

भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिलसिलेवार तरीके से राहुल गांधी के तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि छात्रों को ‘स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त’ जैसी श्रेणियों में बांटना अक्षम्य है। उन्होंने छात्रों पर गोली चलने के राहुल गांधी के दावे को भी पूरी तरह झूठा बताया।

छात्रों के संसद मार्च में नहीं चली गोली
संबित पात्रा ने कहा, ”देश को भ्रमित करने के लिए राहुल गांधी सदन में झूठ का पुलिंदा लेकर आए थे। राहुल गांधी के पास कोई तथ्य नहीं था। कांग्रेस सांसद ने छात्रों पर गोली चलाने का दावा किया, लेकिन उन्होंने यह झूठ बोला। भाजपा की ओर से पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा जाता है कि संसद मार्च पर गोली नहीं चलाई गई थी।” भाजपा सांसद ने कहा, ”राहुल गांधी ने अमित शाह के नाम पर झूठ बोला। जब गोली चली ही नहीं तो आदेश किसने दिया?”

संसद में ही मौजूद थे केंद्रीय गृह मंत्री
संबित पात्रा ने कहा, ”राहुल गांधी ने कहा कि देश के गृह मंत्री संसद में मौजूद क्यों नहीं हैं। मैं बताना चाहता हूं- केंद्रीय गृह मंत्री चोरी-छिपे विदेश नहीं जाते हैं. वह आपकी (राहुल) तरह चोरी-छिपे विदेश नहीं जाते। जब यह आरोप लगाए जा रहे थे, वह तब भी सदन में ही मौजूद थे।”

शाह के काफिले की तीस गाड़ियों पर क्या बोले पात्रा?
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में तीस गाड़ियां थीं। पात्रा ने कहा कि जो व्यक्ति सदन में पांच मिनट टिक कर बैठ नहीं सकता, वो गृह मंत्री के काफिले की गाड़ियां गिन रहे थे। उन्होंने कहा कि जो हर पांच मिनट में जेब में हाथ डालकर बाहर निकल जाते हैं, वो गाड़ियां गिन रहे थे। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वे काफिले की गाड़ियां गिनवाएं।

शाह के गाड़ी में बैठकर कांपने के आरोपों पर क्या बोली भाजपा?
संबित पात्रा ने कहा कि राहुल ने गाड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री के कांपने का दावा किया। उन्होंने हाथों के कांपने का इशारा भी किया। मैं उन्हें बताना चाहता हूं- अमित शाह को देखने के बाद नक्सली थरथराते हैं। उन्हें देखकर आतंकवादी कांपते हैं। जिन्होंने देश को नक्सलवाद से मुक्त कराया, वो कांपेगा। आप सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं।

जेनरेशन गांधी की रही चिंता
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ”बीते 75 वर्षों के दौरान जितने समय भी कांग्रेस की सरकार रही, उसमें जेन-Z की नहीं, जेन-G यानी जेनरेशन गांधी की चिंता की गई। किस तरह से गांधी परिवार को आगे बढ़ाया जाए, केवल इसकी चिंता की गई। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जब आंदोलन हुए थे, तब सैकड़ों छात्रों को गोली मरवा दी गई थी। जम्मू-कश्मीर में आप गोली चलवाते थे। असम में असम स्टूडेंट यूनियन के ऊपर गोलीबारी करवाई गई और 800 छात्रों की बर्बरतापूर्वक हत्या की गई।”

NATIONAL : स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त: राहुल ने छात्रों की बताई तीन कैटेगरी तो भाजपा हुई हमलावर, कहा- ये अक्षम्य

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लोकसभा में राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि छात्रों को ‘स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त’ जैसी श्रेणियों में बांटना अक्षम्य है। उन्होंने छात्रों पर गोली चलने के राहुल गांधी के दावे को भी पूरी तरह झूठा बताया। भाजपा ने राहुल गांधी के किन बयानों पर सबसे कड़ा विरोध जताया? साथ ही ये भी जानेंगे कि संबित पात्रा ने और क्या-क्या कहा?

लोकसभा में राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस वार्ता कर कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों को लेकर जो टिप्पणी की, वह अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों को ‘स्टूडेंट, इडियट्स और अंधभक्त’ जैसी श्रेणियों में बांटने की कोशिश की, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों पर गोली चलने का जो आरोप लगाया, वह पूरी तरह झूठा है और तथ्यों पर आधारित नहीं है।

संबित पात्रा ने कहा कि संसद परिसर के भीतर राहुल गांधी खुद को भी ‘इडियट’ नहीं कह सकते और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद अपनी सच्चाई जानते हैं और देश भी उसे जानता है। पात्रा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश के मेधावी छात्र अपनी मांगों को लेकर सामने आए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने छात्रों से बातचीत की, समाधान निकाला और इसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि आजादी से लेकर वर्ष 2014 तक पेपर लीक रोकने, परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक माफिया के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई करने का मुद्दा लंबित रहा, लेकिन अब सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि छात्रों पर गोलियां चलाई गईं। भाजपा ने तथ्यों की जांच के बाद स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई मामला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रों पर कोई गोली नहीं चली और राहुल गांधी ने झूठा दावा किया है। पात्रा ने कहा कि बिना तथ्यों के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे भ्रम फैलता है।

भाजपा सांसद ने राहुल गांधी के उस सवाल पर भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में क्यों मौजूद नहीं थे। पात्रा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री केवल भाजपा के नहीं, बल्कि पूरे देश के गृह मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग गृह मंत्री का सम्मान करते हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह मंत्री उनकी तरह गुप्त विदेश यात्राओं पर नहीं जाते, बल्कि देश की जिम्मेदारियां निभाते हैं।

NATIONAL : राहुल गांधी के ‘दो बोल’ से बवाल! जानें सदन के अंदर और बाहर का हाल?

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राहुल गांधी के ‘इडियट-अंधभक्त’ बयान ने लोकसभा में एक नया विवाद खड़ा कर दिया. स्पीकर ने ‘इडियट’ शब्द को हटाने का आदेश दिया, लेकिन ‘अंधभक्त’ शब्द पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सदन में जमकर तकरार हो रही है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने सदन में भूचाल ला दिया. राहुल ने एक छात्रा के हवाले से कहा कि वह ‘इडियट’ को भगवान मानने वालों को ‘अंधभक्त’ मानती है. इस पर बीजेपी सांसदों ने जमकर हंगामा किया और स्पीकर ओम बिरला ने ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय करार देते हुए कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया. अब मामला सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाहर भी बवाल मचा है, लेकिन क्या…

लोकसभा में राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी बुधवार को लोकसभा के मानसून सत्र 2026 में CJP आंदोलन और शिक्षा प्रणाली पर बोल रहे थे. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि उनकी मुलाकात एक 18 साल उम्र की स्टूडेंट ‘लवली’ से हुई, जो CJP प्रदर्शन में शामिल थी. राहुल ने उसके हवाले से कहा कि छात्रों की तीन कैटेगरी हैं:

वे छात्र जो ‘अहंकारी’ होते हैं. वे सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है, वे सुनते नहीं, दूसरों के सच को नहीं समझते. राहुल ने कहा कि जब उन्होंने लवली से पूछा कि वह ऐसे छात्रों को क्या कहती हैं, तो उसने कहा, ‘मैं इन्हें इडियट समझती हूं.’ राहुल ने बताया कि लवली ने आगे कहा कि ये ‘इडियट’ किसी की नहीं सुनते और खुद को भगवान बताने की कोशिश करते हैं.राहुल ने कहा कि उन्होंने लवली से पूछा कि तीसरी कैटेगरी क्या है, तो उसने कहा- ‘अंधभक्त.’ यानी वे लोग जो ‘इडियट’ को भगवान मानते हैं और उसे फॉलो करते हैं.

राहुल ने यह भी कहा कि छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में अपनी बात कहने, सवाल पूछने और अपने जुनून को फॉलो करने की इजाजत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘शिक्षा व्यवस्था पर RSS का कब्जा हो चुका है.’ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘दिखावटी’ है, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय असल में RSS चलाता है.

इसके अलावा राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘गृह मंत्री ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया’ और ‘पैलेट गन’ चलाने की इजाजत दी.

जैसे ही राहुल ने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ शब्दों का इस्तेमाल किया, ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया. बीजेपी सांसदों ने कहा कि राहुल असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और एक छात्रा के नाम पर वे ऐसे शब्द बोल रहे हैं जो सदन की गरिमा के खिलाफ हैं. उन्होंने मांग की कि इन शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘जो शब्द असंसदीय होगा, उसे निकाल दिया जाएगा.’ उन्होंने राहुल से कहा कि वे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें.

इस पर राहुल ने कहा कि ‘इडियट शब्द की जगह मैं दूसरा शब्द दे देता हूं’. लेकिन स्पीकर ने साफ कहा, ‘इसके लिए आपको व्यवस्था देने की जरूरत नहीं है, मैं व्यवस्था दे चुका हूं.’ यानी स्पीकर ने पहले ही ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय घोषित कर दिया था और उसे कार्यवाही से हटाने का आदेश दे दिया था.

लोकसभा में असंसदीय शब्दों का नियम क्या है?

लोकसभा के नियम 380 के मुताबिक, अगर स्पीकर को लगता है कि किसी सदस्य का बोला शब्द या टिप्पणी मानहानि, अशोभनीय असंसदीय या सदन की गरिमा के खिलाफ है. लोकसभा अध्यक्ष उसे सदन की कार्रवाई से हटे का आदेश दे सकता है.

नियम 381 के मुताबिक, कार्यवाही से हटाए गए शब्द या टिप्पणी को रिकॉर्ड में बीप के साथ दिखाया जाता है और उसके नीचे ‘Expunged as ordered by the Chair’ लिखा जाता है. किसी शब्द को असंसदीय माना जाएगा या नहीं, इसका फैसला स्पीकर उस शब्द के मायने और परिस्थितियों को देखते हुए करते हैं. इस मामले में स्पीकर बिरला ने ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय माना.

‘छात्रों पर गोली चलाने’ के आरोप पर रिजिजू-राहुल में जमकर बहस

राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ‘गृह मंत्री ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया’ और ‘पैलेट गन’ चलाने की इजाजत दी. यह आरोप इतना गंभीर था कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और राहुल पर पलटवार किया.

रिजिजू ने कहा, ‘आप बिना सोचे-समझे बोल रहे हैं. ऐसा मत बोलिए. आपको गंभीरता से बोलना चाहिए. ये ठीक नहीं है. ये किस आधार पर आपने बयान दिया? आपको किसने बताया? आप माफी मांगिए. गोली चली, ये छोटी बात नहीं है. ऐसा कैसे कह सकते हैं कि किसी ने गोली चलाई? ये गंभीर आरोप है.’

राहुल ने अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया.

इस पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और ‘राहुल गांधी को बोलने दो, राहुल गांधी को बोलने दो’ नारे लगाए.

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो ये सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि छात्रों पर ऐसा व्यवहार करने वाले की जांच करे.’ लेकिन रिजिजू ने साफ कहा, ‘आप जांच की मांग करिए, लेकिन राहुल गांधी सीधे-सीधे गृह मंत्री पर आरोप लगा रहे हैं. आपको माफी मांगना होगा. झूठा आरोप लगाया है.’

लोकसभा के बाहर राहुल गांधी ने क्या कहा?

अपने भाषण के बाद संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, ‘गृह मंत्री शाह सदन में नहीं आए, जबकि उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए था. अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया. सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है और वह अधिकार मुझे मिलना चाहिए.’

राहुल ने यह भी कहा, ‘छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की इजाजत नहीं है. उन्हें वह बेतुका इतिहास मानना पड़ता है जिसकी कल्पना RSS करता है.’

स्पीकर बिरला का रुख: संतुलन की कोशिश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूरे मामले में संतुलन बनाने की कोशिश की. उन्होंने राहुल के ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय बताकर कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया, लेकिन साथ ही राहुल को बोलने का अवसर भी दिया.

बिरला ने कहा कि वे सदन की गरिमा बनाए रखना चाहते हैं और कोई भी सदस्य ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करे जो असंसदीय हों. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई सदस्य सदन की मर्यादा का उल्लंघन करेगा तो वे सख्त कार्रवाई करेंगे. हालांकि, बिरला के इस फैसले से न तो बीजेपी पूरी तरह संतुष्ट हुई और न ही विपक्ष.

बीजेपी चाहती थी कि राहुल को माफी मांगने के लिए मजबूर किया जाए, जबकि विपक्ष का कहना था कि स्पीकर को राहुल को बिना किसी रुकावट के बोलने देना चाहिए.

सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है?

राहुल के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. RahulGandhi, Idiot, BlindBhakt और CJPProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. बीजेपी समर्थक राहुल को ‘असंसदीय’ और ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बयान देने के लिए निशाना बना रहे हैं, तो कांग्रेस और विपक्षी समर्थक उनके बयान को ‘सच्चाई’ बता रहे हैं.

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि राहुल ने CJP आंदोलन के छात्रों की बात को सदन में उठाकर सही काम किया, लेकिन ‘इडियट’ शब्द का इस्तेमाल उन्हें नहीं करना चाहिए था. वहीं, कुछ यूजर्स का कहना है कि ‘अंधभक्त’ शब्द तो ठीक है क्योंकि यह व्यवस्था पर सवाल उठाता है, लेकिन ‘इडियट’ शब्द असंसदीय था.

NATIONAL : एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पास, राज्यसभा में कब आएगा?

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एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा में पास होने के बाद अब सभी की निगाहें राज्यसभा पर हैं. यह विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है.

Anti Paper Leak Bill : भारी हंगामे के बीच लोकसभा में एंटी पेपर लीक (पेपर लीक रोकथाम संशोधन 2026) बिल पास हो गया अब इसे चर्चा के लिए कल राज्यसभा में रखा जाएगा. राज्यसभा में यह बिल आज ही रखा जाना था, लेकिन वंदे मातरम् के अपमान संबंधी बिल पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए अस्थगित कर दी गई. इस वजह से इस वजह से पेपर लीक रोकथाम संशोधन संबंधित विधेयक 2026 कल राज्यसभा में पेश किया जाएगा.


नीट यूजी पेपर नीक को लेकर देश भर में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को संशोधन बिल पेश किया था. इस प्रस्तावित कानून का मकसद ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) एक्ट’ में संशोधन करना है. इसके तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख तक का जुर्माना शामिल है.

संगठित गिरोहों पर सख्ती: संगठित तरीके से पेपर लीक करने वाले नेटवर्क के लिए कम से कम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव.
फास्ट ट्रैक कोर्ट: सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का प्रावधान, जहाँ मामलों की दैनिक सुनवाई हो और चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

NATIONAL : इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का पाग पहनाकर स्वागत,

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संसद में मॉनसून सत्र चल रहा है. इस दौरान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान आज यानी सोमवार, 27 जुलाई को पहली बार संसद पहुंचे हैं. परिसर में पहुंचते ही भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सांसदों ने मकर द्वार पर गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया. इस दौरान नेताओं ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाए. वहीं, बीजेपी नेता और लोकसभा सांसद संजय जायसवाल ने धर्मेंद्र प्रधान को पाग पहनाया.

धर्मेंद्र प्रधान के आने से पहले बीजेपी सांसद मकर द्वार पर जमा हुए और उनके स्वागत का इंतजार करने लगे. जैसे ही वे संसद परिसर में दाखिल हुए, पार्टी के साथियों ने उन्हें अंदर तक पहुंचाया, उनका अभिवादन किया और एकजुटता दिखाते हुए उन्हें एक खास टोपी भी भेंट की.

धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने के बाद विपक्ष ने भी तुरंत प्रतिक्रिया किया. प्लेकार्ड और नारों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने ‘शिक्षा चोरी’ के नारे लगाए.

NEET विवाद के बाद देश में पेपर लीक रोकने वाले कानून को और सख्त बनाने के मकसद से लाए जा रहे ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पर संसद में चर्चा की तैयारी के बीच विपक्ष और NDA के बीच हंगामा हुआ.

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और कथित NEET पेपर लीक को लेकर हो रहे देशव्यापी विरोध का फायदा उठाने की कोशिश करने वाली ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ को रोकने के लिए लिया गया.

लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच एनडीए के किसी सीनियर मंत्री का इस्तीफा देना एक दुर्लभ घटना थी.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व वाले आंदोलन की मुख्य मांग थी और यह इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के तीसरे दौर से कुछ घंटे पहले ही आया.

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NATIONAL : करूर भगदड़ मामला: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार का फैसला बदला, पीड़ितों को नौकरी देने का आदेश रद्द

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मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के आदेश को रद्द कर दिया है. तमिलनाडु की विजय सरकार ने पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी. कोर्ट ने इस फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताया. कहा, अनुकंपा के आधार पर इस तरह नौकरियां देने से गलत नजीर बनेगी.

पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, इस तरह भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने से इसी आधार पर नौकरियों की मांग करने वालों की बाढ़ आ जाएगी. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 10 जुलाई 2026 को इस घटना में जान गंवाने वाले 31 लोगों के परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि यह फैसला पूरी तरह से गैर-कानूनी और राजनीतिक कदम था. वकील मोहम्मद रशीद के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मानवीय आधार पर नौकरी देने के लिए तय की गई चार प्रमुख गाइडलाइंस के तहत करूर भगदड़ के पीड़ित इस श्रेणी में पात्र नहीं आते हैं. सरकार का तर्क था कि यह नौकरियां एक नीतिगत फैसले के तहत दी गई थीं, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

हाई कोर्ट का फैसला युवाओं के लिए एक बड़ी जीत : याचिकाकर्ता के वकील
याचिकाकर्ता के वकील क्लीटस ने इस फैसले को राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ी जीत बताया. उन्होंने कहा, “यह पूरे भारत के लिए एक अहम फैसला है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मुआवजे के आदेशों का पालन करने के तरीके पर निर्देश और गाइडलाइंस दे चुका है. तमिलनाडु में मुआवजे के आदेशों के लिए पहले से ही एक सरकारी आदेश (GO) मौजूद है. उसी के आधार पर हमने अपनी दलीलें पेश कीं. इसके बाद, कोर्ट ने उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत करूर घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी दी जा रही थी. सरकार ने अपने पक्ष में चार घटनाओं का जिक्र किया था.”

NATIONAL : दलबदल कानून: 10वीं अनुसूची पर कपिल सिब्बल की याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस; क्या-क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की 10वीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती देने वाली वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। इस व्याख्या के तहत किसी राजनीतिक दल में विलय का रास्ता अपनाकर विधायक दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बच सकते हैं। कपिल सिब्बल ने यह याचिका खुद पक्षकार बनकर दायर की है।

सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका क्यों दायर की गई है। सिब्बल ने कहा कि विलय की वजह से देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से चुनाव में मिले बहुमत का फैसला अल्पमत में बदला जा सकता है।

उन्होंने गोवा मामले का भी जिक्र किया, जो अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सिब्बल ने कहा, इस प्रक्रिया से चुनाव का फैसला बदला जा सकता है। बहुमत अल्पमत में बदल सकता है और अल्पमत बहुमत बन सकता है।

जज ने क्या कहा?
नोटिस जारी करने के बावजूद जस्टिस नरसिम्हा ने इस मामले से कुछ दूरी बनाई। उन्होंने कहा, ऐसे मुद्दों का फैसला आमतौर पर विधायकों को करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें आमतौर पर सदन के अंदर उठाया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो तो कम से कम राजनीतिक दलों के सामने उठाया जाना चाहिए।

कपिल सिब्बल ने क्या चुनौती दी है?
अपनी याचिका में सिब्बल ने 10वीं अनुसूची में राजनीतिक दलों के विलय से जुड़े प्रावधानों की सांविधानिक व्याख्या पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्याख्या की वजह से छोटे गुट दूसरे राजनीतिक दलों के साथ विलय करके दलबदल कानून की सख्ती से बच निकलते हैं।

सिब्बल ने कहा कि इस तरह के कई मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने बताया कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से दायर याचिका भी जस्टिस नरसिम्हा की पीठ के सामने लंबित है। इस याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें शिवसेना के कुछ सांसदों के शिंदे गुट वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी गई थी।

कई दलों के नेताओं के विलय का मामला
हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी से जुड़े कई विधायक भाजपा और दूसरे दलों में शामिल हुए हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित है।

इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि किसी राजनीतिक दल की मंजूरी के बिना भी उसका विधायक दल किसी दूसरे दल में विलय कर सकता है।

NATIONAL : सीजेपी प्रदर्शन हिंसा: उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को भेजी चिट्ठी

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा तथा तोड़फोड़ में शामिल अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप), यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और भारतीय बौद्ध समेत विभिन्न संगठनों ने आग्रह बढ़ाया है, कुछ संगठनों ने गृह मंत्री अमित शाह तथा दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

सामाजिक व धार्मिक संगठनों का कहना है कि संगठनों ने कहा है कि प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों पर पथराव करने और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने वाले पहचाने गए अपराधियों के खिलाफ तुरंत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

उन्होंने साफ किया कि जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए। लेकिन जिनके आपराधिक इतिहास हैं, उन पर सख्त कार्रवाई कर समाज को कड़ा संदेश देना जरूरी है। संगठनों ने सीजेपी से भी आग्रह किया है कि ऐसे तत्वों के पक्ष में न उतरें।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि सीजेपी ने खुद माना है कि प्रदर्शन में अराजकतत्व घुस गए थे। ऐसे में जरूरी है कि प्रदर्शनकारियों और अपराधियों में अंतर कर सीजेपी उनसे दूरी बनाकर समाज को साफ संदेश दें।

सीजेपी ने नीट परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था सुधार की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पथराव, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए तथा कई सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए। पुलिस ने दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और लोक सेवक पर हमले के आरोप में चार एफआईआर दर्ज कीं। जांच में सीसीटीवी, ड्रोन और बाडी कैमरे की फुटेज के साथ चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल कर प्रदर्शन स्थलों पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की जा रही है।

अब तक 989 ऐसे अपराधियों की पहचान
अब तक 989 ऐसे अपराधियों की पहचान हुई है जो जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल थे। इसमें हत्या आरोपित 101, हत्या के प्रयास वाले 62, डकैती व लूट के 284, दुष्कर्म के 61, पॉक्सो के छह, छेड़छाड़ के 25 समेत कई अन्य मामलों में आरोपित या लिप्त अपराधियों की पहचान हुई है।

भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में अपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने पुलिस से अपील की है कि पहचाने गए अपराधियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जा सकें।

यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह प्रदर्शन एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा लग रहा है। गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में उन्होंने मामले में कार्रवाई के साथ विस्तृत जांच पर जोर दिया है।

NATIONAL : एंटी-रैगिंग नियमों की अनदेखी पर केंद्र सरकार की सख्ती, देश के 107 बड़े शिक्षण संस्थानों को थमाया नोटिस

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देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए बनाए गए कड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इस बात की जानकारी सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का पालन न करने पर देश के 107 उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन लापरवाह संस्थानों में 18 बड़े मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं।

क्यों हुई कार्रवाई और क्या थीं कमियां?
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद में जानकारी दी कि इन संस्थानों ने रैगिंग रोकने से जुड़े सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया था। जांच में मुख्य तौर पर दो बड़ी कमियां पाई गईं।

सुकांत मजूमदार ने पहली कमी के तौर पर शपथपत्र की अनदेखी पर जोर दिया। मजूमदार ने बताया कि इन संस्थानों ने अपने यहां पढ़ने वाले नए छात्रों और उनके माता-पिता या अभिभावकों से अनिवार्य रूप से ‘एंटी-रैगिंग शपथपत्र’ नहीं भरवाए थे।

इसके अलावा रिपोर्ट जमा न करना भी एक बड़ा कारण बना। मंत्री ने बताया कि संस्थानों ने यूजीसी द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट भी जमा नहीं की थी।

रैगिंग के खिलाफ सख्त है सरकार
इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी का साफ निर्देश है कि देश के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। इसके तहत हर संस्थान के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे प्रवेश के समय ही छात्रों से एंटी-रैगिंग शपथपत्र लें और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखें।

Iran-US War: क्या ईरान ने मानी हार? ट्रंप बोले- ‘हमले रोकने की गुहार लगाई; खुद बढ़ाया बातचीत का हाथ

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका से सैन्य हमले रोकने और बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है। ट्रंप के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और यदि समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर हमले रोकने और बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि दोनों देशों के बीच नया युद्धविराम समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।

क्या ईरान ने खुद अमेरिका से बातचीत की पहल की?
वॉटरफोर्ड टाउनशिप जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए संपर्क किया है। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने हमसे बेहद विनम्रता से कहा, ‘कृपया हमले रोकिए, आइए बैठकर बात करते हैं।’ फिलहाल हम उसी स्थिति में हैं। अब देखते हैं क्या होता है। अगर समझौता नहीं हुआ तो हम फिर पहले जैसी कार्रवाई करेंगे।”

हमले रोकने के पीछे क्या वजह रही?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगभग दो सप्ताह तक ईरान पर सैन्य हमले करता रहा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श शुरू किया। सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने के संभावित परिणामों को लेकर प्रशासन के भीतर भी गंभीर चर्चा हुई।

क्या अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी जताई थी चिंता?
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने सैन्य अभियान के विस्तार को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने अमेरिकी हथियारों के भंडार, विशेष रूप से गोला-बारूद की उपलब्धता और अन्य रणनीतिक प्रभावों पर सवाल उठाए थे।

सेंटकॉम कमांडर ने क्या सलाह दी थी?
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास चल रहे बमबारी अभियान को रोकने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि यह अभियान अपनी प्रभावशीलता की सीमा तक पहुंच चुका है और अब इससे अपेक्षित सैन्य लाभ नहीं मिल रहा है।

क्या कई सलाहकारों की राय ने बदला ट्रंप का फैसला?
एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एडमिरल कूपर की सलाह के अलावा कई सैन्य और असैन्य सलाहकारों की राय ने भी ट्रंप के फैसले को प्रभावित किया। इन्हीं सुझावों के बाद शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान पर अपने सैन्य हमलों को रोकने का निर्णय लिया।

क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और दोनों देशों के बीच सीधे तथा मध्यस्थों के जरिए संपर्क बना हुआ है। उन्होंने कहा, “हम अभी ईरान से बात कर रहे हैं। बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है।”

ट्रंप ने बातचीत को लेकर क्या दावा किया?
ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की मांग नहीं करता। उन्होंने कहा, “अगर हम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे होते तो वे बैठक की मांग नहीं करते। वे सिर्फ इसलिए मिलना चाहते हैं क्योंकि हमने उन पर बहुत कड़े हमले किए हैं।”

क्या ईरान ने सीधे और परोक्ष दोनों माध्यमों से संपर्क किया?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अपने प्रतिनिधियों (सुरोगेट्स) के जरिए भी संदेश भेजा और सीधे तौर पर भी संपर्क किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से और सीधे दोनों तरह से बैठक का अनुरोध किया और अब हम बातचीत कर रहे हैं।”

मिसाइल इंटरसेप्टर को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका के पास विभिन्न प्रकार के पर्याप्त हथियार और मिसाइल इंटरसेप्टर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि देश लगातार अपने रक्षा भंडार को और मजबूत कर रहा है।

बाइडन प्रशासन पर क्यों साधा निशाना?
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की आलोचना करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में बड़ी मात्रा में हथियार यूक्रेन भेजे गए। उन्होंने कहा, “हम अपने रक्षा भंडार को फिर से मजबूत कर रहे हैं। हमारे पास पर्याप्त हथियार हैं, यहां तक कि मध्यम श्रेणी के हथियार भी हमारी जरूरत से कहीं ज्यादा हैं।”

पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को लेकर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है। उनके मुताबिक, देश अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए लगातार इन प्रणालियों का निर्माण कर रहा है।

क्या बातचीत नाकाम होने पर फिर होंगे हमले?
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति पूरी तरह मौजूदा वार्ता के परिणाम पर निर्भर करेगी। उन्होंने दोहराया कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई और कोई समझौता नहीं बन पाया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि हमने ईरान की सैन्य क्षमता को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है। वे मिलना चाहते हैं और हम मिल रहे हैं। देखते हैं क्या होता है। समझौते की संभावना है। उन्होंने अपने प्रतिनिधियों के जरिए और सीधे दोनों तरह से बैठक का अनुरोध किया है। अच्छी बातें हो सकती हैं। अगर वे बैठक चाहते हैं तो इसकी वजह यही है कि हमने उन पर बहुत कड़े हमले किए हैं

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