Friday, May 1, 2026
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PBKS vs RR: पंजाब किंग्स की आईपीएल 2026 में पहली हार के 3 बड़े कारण, क्यों डिफेंड नहीं हुए 222 रन

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 IPL 2026 में मंगलवार को हुए मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने पंजाब किंग्स को 6 विकेट से हराया. ये श्रेयस अय्यर एंड टीम की इस सीजन पहली हार है. जानिए हार के 3 बड़े कारण.

श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली पंजाब किंग्स का विजयी रथ राजस्थान रॉयल्स ने रोक दिया. 8 मैचों के बाद PBKS की IPL 2026 में ये पहली हार है. इस जीत के साथ RR अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गई है. मंगलवार को हुए मुकाबले की बात करें तो पहले बल्लेबाजी करते हुए पंजाब ने 222 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था, लेकिन इसे डिफेंड नहीं कर पाए.

राजस्थान रॉयल्स ने 19.2 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर 6 विकेट से शानदार जीत दर्ज की. डोनोवन फेरीरा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जिन्होंने चेज करते हुए 200 की स्ट्राइक रेट से नाबाद 52 रन बनाए. इससे पहले वैभव सूर्यवंशी ने टीम को विस्फोटक शुरुआत दिलाई, उन्होंने 16 गेंदों में 43 रन बनाए थे. यशस्वी जायसवाल ने 27 गेंदों में 51 रन बनाए.

पंजाब किंग्स ने 222 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था. राजस्थान ने शुरुआत तेज की, लेकिन जब यशस्वी जायसवाल आउट हुए तब पंजाब किंग्स वापसी कर सकती थी, लेकिन गेंदबाज अपनी योजनाओं जैसे धीमी गति की गेंदें या यॉर्कर, को सही तरह से लागू नहीं कर पाए. जबकि पिच पर गेंद रूककर आ रही थी, लेकिन पंजाब के गेंदबाजों ने कई फुल टॉस गेंदें, ये तेज गति की गेंदें डाली.

खासतौर पर अर्शदीप सिंह और लॉकी फर्ग्यूसन ने डेथ ओवर्स में काफी रन लुटाए, जो पंजाब किंग्स की हार का बड़ा कारण रहा. दोनों गेंदबाज तेज गति से गेंदें कर रहे थे, उनके द्वारा गति में मिश्रण देखने को नहीं मिला. क्योंकि फेरीरा और दुबे ने गेंद की गति का फायदा उठाकर ही रन बनाए, अगर यहां मिश्रण होता तो शायद बल्लेबाज फंस जाता.

 बेशक 222 रनों का स्कोर बड़ा था, लेकिन फिर भी पंजाब किंग्स की शुरुआत जैसी हुई थी उसे देखकर लगा कि उनका स्कोर 20-25 रन कम ही बन पाया. मिडिल ओवरों में 2 बार ऐसा हुआ जब 10 से ज्यादा गेंदें बिना बॉउंड्री के हुईं. मार्कस स्टोइनिस ने जहाँ 22 गेंदों में नाबाद 62 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर टीम का स्कोर 222 तक पहुंचाया, वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर ने 27 गेंदें खेलकर सिर्फ 30 ही रन बनाए.

WORLD : ट्रंप के गले की फांस बना ईरान युद्ध… लगातार घट रही लोकप्रियता, बाइडेन को बेहतर बता रहे अमेरिकी

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डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट जारी है और रॉयटर्स-IPSOS सर्वे के मुताबिक उनका अप्रूवल रेटिंग 34% पर आ गया है. अमेरिका में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें और ईरान के साथ युद्ध को लेकर असंतोष बढ़ रहा है. इसका असर मिडटर्म चुनावों पर भी पड़ सकता है, जहां मतदाताओं का रुझान बदलता नजर आ रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता लगातार घट रही है. ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग उनके मौजूदा कार्यकाल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स और मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म IPSOS के ताजा सर्वे के मुताबिक, केवल 34% अमेरिकी ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट हैं. इससे पहले अप्रैल के मध्य में हुए सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 36% थी.

रॉयटर्स और IPSOS का सर्वे चार दिनों तक चला और सोमवार को पूरा हुआ. इस सर्वे के दौरान अधिकांश प्रतिक्रियाएं उस घटना से पहले दर्ज की गई थीं, जब व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान एक हमलावर ने कथित तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप पर हमला करने की कोशिश की थी. हालांकि हमलावर डिनर हॉल में एंटर हो पाता उससे पहले ही सुरक्षा बलों ने उसे रोक लिया था. इस घटना का ट्रंप की लोकप्रियता पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले सर्वे में पता चलेगा.

जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के समय डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 47% थी, लेकिन तब से उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट देखी जा रही है. खासतौर पर अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी, 2026 को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध के बाद ट्रंप की लोकप्रियता पर बुरा असर पड़ा है. इस युद्ध के चलते अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है.

सर्वे के मुताबिक, केवल 22% लोगों ने महंगाई और कॉस्ट ऑफ ​लिविंग को संभालने के मामले में डोनाल्ड ट्रंप के प्रदर्शन को सही ठहराया है, जो पहले 25% था. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 40% से ज्यादा बढ़कर करीब 4.18 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं. इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा है. यह स्थिति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में सत्ता गंवाने का खतरा बढ़ गया है.

हालांकि अब भी 78% रिपब्लिकन समर्थक डोनाल्ड ट्रंप के साथ हैं, लेकिन पार्टी के भीतर ही 41% लोग महंगाई से निपटने के उनके तरीके से असंतुष्ट हैं. हार्वर्ड सीएपीएस/हैरिसएक्स सर्वे (Harvard CAPS/HarrisX poll) के मुताबिक 85 प्रतिशत मतदाताओं को चिंता है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतें कॉस्ट ऑफ ​लिविंग को और बढ़ाएंगी, और 52% लोगों का कहना है कि ट्रंप के शासनकाल की तुलना में जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में थी.

अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी संघर्षविराम लागू है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. फारस की खाड़ी में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में ऊर्जा की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. सर्वे में केवल 34% लोगों ने ईरान के साथ संघर्ष को समर्थन दिया, जो पहले के मुकाबले कम है. यह सर्वे देशभर में ऑनलाइन किया गया, जिसमें 1,269 वयस्कों ने भाग लिया, जिनमें 1,014 पंजीकृत मतदाता शामिल थे. सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर लगभग 3 परसेंटेज पॉइंट है.

WORLD : ‘ईरान ढहने वाला नहीं, हम एक मजबूत देश’: मोजतबा के प्रतिनिधि ने UN पर उठाए सवाल, बताया अमेरिकी हमलों का असली सच

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भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के दूत डॉ. मोहम्मद होसैन जियाईनिया ने अमेरिका और ट्रंप पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ रहा है और संयुक्त राष्ट्र चुप है। जियाईनिया ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने बचाव में सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कई और खुलासे किए। आइए, विस्तार से समझते हैं।

क्या अमेरिका ने ईरान पर हमला कर सारी हदें पार कर दी हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि भारत में मौजूद ईरान के एक बड़े अधिकारी ने मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पश्चिमी देशों पर करारा हमला बोला है। ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय के उप प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद होसैन जियाईनिया ने साफ कहा है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा रहा है और संयुक्त राष्ट्र मूकदर्शक बनकर सब देख रहा है। उन्होंने ट्रंप के उस बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी है जिसमें ईरान के ऊर्जा ठिकानों को बम से उड़ाने की बात कही गई थी

जियाईनिया ने साफ कर दिया है कि ईरान चुप बैठने वाला देश नहीं है और वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करना जानता है। उनका कहना है कि ईरान पर हमला करने वाले लड़ाकू विमान सीधे अमेरिका से नहीं उड़ सकते, बल्कि वे ईरान के आसपास मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से उड़ान भर रहे हैं, जिसमें फलस्तीन की जमीन भी शामिल है। ईरान के अधिकारी ने पूछा है कि अगर आपके घर पर कोई चारों तरफ से हमला करे, तो क्या आप चुप रहेंगे? उन्होंने भारत और ईरान की सभ्यताओं की तुलना करते हुए कहा कि हम दोनों ही देश कभी हमलावर नहीं रहे, बल्कि हमें हमेशा बाहरी ताकतों से लड़ना पड़ा है।


डॉ. जियाईनिया ने कहा कि ईरान केवल उन लोगों को निशाना बना रहा है जिन्होंने उनके क्षेत्र में घुसपैठ की है।
एक लड़ाकू विमान अमेरिकी क्षेत्र से ईरान तक उड़ान नहीं भर सकता, इसलिए अमेरिका ने ईरान के चारों तरफ अपने सैन्य अड्डे बनाए हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आपके घर के चारों ओर मौजूद अड्डों से हमला हो, तो आप क्या करेंगे?
जियाईनिया ने स्पष्ट किया कि ईरान ऐसे हमलों के सामने चुप नहीं बैठेगा और अपनी रक्षा करना उसका कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि ईरान और भारत जैसी प्राचीन सभ्यताएं कभी हमलावर नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने हमेशा विदेशी ताकतों का सामना किया है।

ईरान के अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई देश खुलेआम अंतरराष्ट्रीय कानूनों को तोड़ने की बात कह रहा है।
ट्रंप ने ईरानी सभ्यता को मिटाने की बात कही, फिर भी कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा रही है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की इस मामले पर चुप्पी को लेकर ईरान ने गहरे सवाल खड़े किए हैं।
जियाईनिया ने पूछा कि इस दुनिया की ऐसी स्थिति क्यों हो गई है जहां ऐसी धमकियों पर कोई रोकटोक नहीं है।

ईरान में अंदरूनी कलह और नेतृत्व का संकट?

पश्चिमी मीडिया की उन रिपोर्ट्स को ईरान ने खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि ईरान में अंदरूनी कलह है।
डॉ. जियाईनिया ने कहा कि जो लोग ईरान के सिस्टम को नहीं समझते, वे ही ऐसे सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान एक गणराज्य है और यह किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है; यहां एक पूरा पदानुक्रम है।
पहले आर्थिक प्रतिबंधों के कारण कुछ मतभेद थे, लेकिन अब युद्ध के बाद ईरान की जनता पूरी तरह से एकजुट है।
ईरान के लोगों को अब समझ आ गया है कि उनकी आर्थिक समस्याओं की असली जड़ बाहरी दुश्मन हैं।

कुछ दिन पहले हुई बातचीत का हवाला देते हुए जियाईनिया ने कहा कि हजरत अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई की हालत बिल्कुल ठीक है। उनके स्वास्थ्य को लेकर उड़ाई जा रही सभी अफवाहें पूरी तरह से निराधार और झूठी हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि युद्ध की शुरुआत दुश्मनों ने की थी, लेकिन इसे कैसे खत्म करना है, यह फैसला ईरान करेगा।

GUJARAT : गुजरात निकाय चुनाव: 9200+ सीटों के नतीजे घोषित, सभी नगर निगमों पर BJP का कब्जा; कांग्रेस ने जीतीं 1740 सीटें

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गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज करते हुए अधिकांश सीटों पर कब्जा कर लिया। वहीं कांग्रेस ने हार स्वीकार करते हुए लोकतंत्र और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

गुजरात में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एकतरफा जीत हासिल की है। इस चुनावी हार के बाद गुजरात कांग्रेस ने परिणामों को स्वीकार कर लिया है और साथ ही जनता के अधिकारों, लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है।

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जीपीसीसी) के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि राज्य में पिछले लगभग तीन दशकों से सत्ता में काबिज भाजपा के खिलाफ लोगों में भारी नाराजगी और निराशा थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जनता की यह भावनाएं वोटों में पूरी तरह परिवर्तित नहीं हो सकीं।

चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 26 अप्रैल को 9,200 से अधिक सीटों के लिए मतदान हुआ था, जिनकी मतगणना मंगलवार को की गई। कांग्रेस ने इन चुनावों में कुल 1,740 सीटें हासिल की हैं। इसमें तालुका पंचायतों की 1,050 सीटें, जिला पंचायतों की 136, नगर पालिकाओं की 459 और नगर निगमों की 95 सीटें शामिल हैं।

वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चुनाव में शामिल सभी 15 नगर निगमों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा, 34 जिला पंचायतों में से 33 पर भाजपा का कब्जा रहा है। राज्य चुनाव आयोग (SEC) के आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश तालुका पंचायतों और नगर पालिकाओं में भी सत्ताधारी दल का ही बोलबाला रहा, जबकि कुछ स्थानों पर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है।

अमित चावड़ा ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘कांग्रेस जनता के अधिकारों और लोकतंत्र के लिए लड़ती रहेगी। हम नागरिकों द्वारा दिए गए जनादेश को स्वीकार करते हैं।’ उन्होंने भाजपा पर कुशासन और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता का गुस्सा वोटों में नहीं बदला। चावड़ा ने जोर देकर कहा कि जिन नगर पालिकाओं और तालुका पंचायतों में कांग्रेस को बहुमत मिला है, वहां भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित किया जाएगा और नागरिकों की चिंताओं का समाधान होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में कांग्रेस जनता की आवाज बनेगी और जहां भी टैक्स के पैसे का दुरुपयोग होगा, वहां पार्टी संघर्ष करेगी।

यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण चुनावी अभ्यास माना जा रहा है। इसमें 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के लिए 4.18 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया। ये चुनाव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के संशोधित नियमों के तहत कराए गए थे, जिसके लिए कई जिलों में वार्डों का नए सिरे से परिसीमन और पुनर्गठन किया गया था। अंत में चावड़ा ने कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी और पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने की बात कही।

NATIONAL : हर साल पिघल रही 1,390 करोड़ टन बर्फ, जल सुरक्षा पर संकट; तेजी से खाली हो रहे एशिया के हिम जल भंडार

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नासा के ग्रेस मिशन के दौरान उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों और जलवायु संबंधी डाटा के विश्लेषण के साथ वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग तकनीकों का भी उपयोग किया, जिसके अनुसार 2002 से 2023 के बीच हर साल औसतन 13.9 गीगाटन यानी करीब 1,390 करोड़ टन बर्फ खत्म हो रही है।

एशिया की जीवनरेखा हिमालय, तिब्बती पठार और आसपास की पर्वत शृंखलाओं में मौजूद ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन के अनुसार हाई माउंटेन एशिया क्षेत्र से हर साल औसतन 1,390 करोड़ टन बर्फ खत्म हो रही है, जिसके चलते पिछले दो दशकों में करीब 27,800 करोड़ टन बर्फ गायब हो चुकी है।

यह बदलाव केवल पहाड़ों पर जमी बर्फ के घटने तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा, कृषि, जलविद्युत, बुनियादी ढांचे और भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं हुआ तो यह संकट आने वाले वर्षों में और भी भयावह रूप ले सकता है।

हाई माउंटेन एशिया को अक्सर एशिया के हिम जल भंडार कहा जाता है, क्योंकि यही ग्लेशियर सालभर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेकोंग, येलो और यांग्त्जे जैसी बड़ी नदियों को जल उपलब्ध कराते हैं। इन नदियों पर करोड़ों लोगों की आजीविका, कृषि निर्भर करता है। लेकिन अब इनके तेजी से पिघलने से एक ओर बाढ़ और ग्लेशियल झील फटने जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में गंभीर जल संकट की आशंका गहरा रही है।

नासा के ग्रेस मिशन के दौरान उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों और जलवायु संबंधी डाटा के विश्लेषण के साथ वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग तकनीकों का भी उपयोग किया, जिसके अनुसार 2002 से 2023 के बीच हर साल औसतन 13.9 गीगाटन यानी करीब 1,390 करोड़ टन बर्फ खत्म हो रही है। यदि पूरे 20 वर्षों का हिसाब लगाया जाए, तो यह आंकड़ा 27,800 करोड़ टन से अधिक हो जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से बढ़ता रहा और दुनिया एसएसपी 585 परिदृश्य की ओर बढ़ी तो ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार हर साल 19.5 गीगाटन यानी 1,950 करोड़ टन तक पहुंच सकती है। अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार हाई माउंटेन एशिया दुनिया के सबसे जटिल भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में से एक है। यह करीब 50 लाख वर्ग किमी में फैला है, जिसमें भारत, चीन, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं। इस क्षेत्र में हिमालय, काराकोरम, हिंदू कुश, पामीर और तियान शान जैसी प्रमुख पर्वत शृंखलाएं मौजूद हैं। अध्ययन के अनुसार यहां 95,000 से अधिक ग्लेशियर हैं, जो लगभग एक लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं। ये ग्लेशियर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेकोंग, येलो और यांग्त्जे जैसी नदियों को पोषण देते हैं, जिन पर करोड़ों लोगों का जीवन निर्भर है।

NATIONAL : बंगाल में सेकेंड फेज की 142 सीटों पर आज वोटिंग

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कोलकाता, पश्चिम बंगाल में सेकेंड फेज की 142 सीटों पर आज वोटिंग है। इनमें ज्यादातर सीटें ऐसी हैं, जहां से टीएमसी पिछले दो या तीन बार से लगातार चुनाव जीत रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 142 में 123 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

सेकेंड फेज के चुनाव में सबसे कड़ा मुकाबला भवानीपुर सीट पर होने वाला है। यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है। ममता के खिलाफ भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं। सुवेंदु 2021 में ममता को नंदीग्राम से हरा चुके हैं।

142 सीटों में भांगड़ में सबसे ज्यादा 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। गोगाट में सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं। क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र कल्याणी है, जबकि सबसे छोटा जोरासांको है। बंगाल में पहले फेज में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। 4 मई को चुनाव के रिजल्ट आएंगे।

WORLD : भारत-रूस मिलकर लगाएंगे बड़ी यूरिया फैक्ट्री, मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता घटाने की तैयारी

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भारत और रूस मिलकर रूस के समारा में 20 लाख टन क्षमता की यूरिया फैक्ट्री लगाएंगे। जानिए कैसे इससे मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता घटेगी और किसानों को फायदा मिलेगा।

ईरान संकट और वैश्विक सप्लाई चेन के दबाव के बीच भारत ने यूरिया आयात को लेकर बड़ा कदम उठाया है,भारत और रूस अब संयुक्त रूप से रूस के समारा क्षेत्र में एक विशाल यूरिया फैक्ट्री लगाने जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को भारत की खाद सुरक्षा और किसानों की जरूरतों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है करीब 20 हजार करोड़ रुपए के इस संयुक्त प्रोजेक्ट का निर्माण अगले दो वर्षों में पूरा होने की संभावना है। भारत की तीन सरकारी कंपनियां और रूस की प्रमुख केमिकल कंपनी मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगी।

इस जॉइंट वेंचर में भारत की इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCFL) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) शामिल हैं तीनों भारतीय कंपनियां मिलकर लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेंगी, जबकि बाकी निवेश रूस की केमिकल कंपनी ‘यूरालकेम ग्रुप’ करेगी. प्रोजेक्ट की तकनीकी जिम्मेदारी प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL) को दी गई है, जिसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप दी है।

भारत कृषि प्रधान देश है और यहां यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में देश में हर साल करीब 400 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 300 लाख मीट्रिक टन ही है, यानी हर साल करीब 100 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करना पड़ता है। इसी आयात पर 2025 में भारत ने लगभग 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किएअभी भारत अपनी जरूरत का करीब 71% यूरिया मिडिल-ईस्ट देशों से मंगाता है। ऐसे में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय किसानों और खाद आपूर्ति पर पड़ता है।

हाल के वर्षों में अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता ने खाद आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है,इसी वजह से भारत सरकार ने 2026 के लिए 25 लाख टन अतिरिक्त यूरिया आयात को मंजूरी दी है। यह सप्लाई अब अल्जीरिया, नाइजीरिया, ओमान और रूस जैसे देशों से वैकल्पिक मार्गों के जरिए मंगाई जा रही है विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में अपना स्थायी उत्पादन केंद्र बनने से भारत भविष्य के किसी भी वैश्विक संकट में खाद आपूर्ति सुरक्षित रख सकेगा।

यूरिया उत्पादन में सबसे महंगा और जरूरी कच्चा माल नेचुरल गैस होती है। रूस दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में शामिल है.भारत में गैस सीमित मात्रा में उपलब्ध है और इसे आयात करना महंगा पड़ता है। ऐसे में रूस में उत्पादन करना लागत के लिहाज से ज्यादा किफायती माना जा रहा है, इसके अलावा रूस के पास पहले से आधुनिक फर्टिलाइजर तकनीक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, जिससे प्रोजेक्ट तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

यूरिया खेती के लिए सबसे जरूरी नाइट्रोजन आधारित खाद है. चावल, गेहूं और मक्का जैसी फसलों की पैदावार बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका होती है, विशेषज्ञों के अनुसार सही मात्रा में यूरिया के इस्तेमाल से उत्पादन 20% से 50% तक बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार खाद की सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं आने देना चाहती।

NATIONAL : ‘सीमापार आतंकवाद पर दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं’, राजनाथ सिंह ने चीन के सामने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा

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पश्चिम एशिया संकट के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देने को लेकर भारत के निशाने पर रहा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकी समूहों को पाकिस्तान की ओर से दिए जाने वाले समर्थन की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए कहा कि एससीओ को राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करने वाले सरकार-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इस पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि इस आपरेशन ने भारत के इस दृढसंकल्प को प्रदर्शित किया है कि आतंकवाद के पनाहगार अब न्यायसंगत दंड से अछूते नहीं रहेंगे। किर्गिस्तान के बिश्केक में मंगलवार को एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादियों को उकसाने, आश्रय देने और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में संगठन को हिचकिचाना नहीं चाहिए।

साथ ही कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से बिना किसी अपवाद के निपटकर हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और समृद्धि की आधारशिला में बदल सकते हैं। आतंकवाद विरोधी उपायों को सर्वोपरि बताते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि संगठन आतंकवाद के खिलाफ इस खतरे से लड़ने के लिए ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा करता है। पिछले वर्ष के तियानजिन घोषणापत्र का जिक्र किया जिसमें आतंकवाद के खिलाफ भारत का दृढ और सामूहिक रुख स्पष्ट हुआ था।

उन्होंने इसे आतंकवाद और इसके अपराधियों के प्रति भारत के जीरो टालरेंस दृष्टिकोण का प्रमाण बताते हुए कहा कि सामूहिक विश्वसनीयता की असली कसौटी निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या विचारधारा नहीं होती।

एससीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण: राजनाथ
राष्ट्रों को आतंकवाद के खिलाफ दृश और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए। वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए एससीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि आज वैश्विक दृष्टि खंडित होती दिख रही तो देश खुद को तेजी से अपने में समेटते जा रहे हैं। इस संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हमें एक नई विश्व व्यवस्था की आवश्यकता है या एक अधिक व्यवस्थित दुनिया की।

हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए, जहां मतभेद विवाद न बनें और विवाद आपदाओं का कारण न बनें। क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित में एससीओ की जिम्मेदारी की चर्चा करते हुए राजनाथ ने कहा कि हमें संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए न कि बल प्रयोग का। यह हिंसा और युद्ध का युग नहीं, बल्कि शांति और समृद्धि का युग बनाना चाहिए। रक्षामंत्री ने इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस संदेश ‘आंख के बदले आंख’ सबको अंधा कर देती है की याद दिलाते हुए कहा कि रक्षा एवं सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होने के नाते, भाईचारे और सद्भाव की भावना को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।

रक्षामंत्री ने एससीओ के कार्यक्रम कार्यान्वयन में रचनात्मक योगदान देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि समानता, पारस्परिक सम्मान और गहरी समझ पर आधारित सहयोग तथा आपसी विश्वास इस संगठन को आशा और शांति का प्रतीक बना सकता है। रक्षा मंत्री ने बैठक में सदस्य देशों के साथ मिलकर क्षेत्र को प्रभावित करने वाले सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरपंथ से संबंधित पहलुओं तथा वैश्विक शांति तथा स्थिरता पर इसके व्यापक प्रभावों को लेकर चर्चा की।

NATIONAL : महंगे ATF के कारण फ्लाइट ऑपरेशन मुश्किल… विमानन कंपनियों ने सरकार को लिखी चिट्ठी

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महंगे ATF और बढ़ती लागत से एयरलाइंस संकट में हैं. एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट ने सरकार से राहत और टैक्स में कटौती की मांग की है, चेतावनी दी कि हालात नहीं सुधरे तो उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं.देश की प्रमुख एयरलाइंस एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट ने सरकार को चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में एयरलाइन इंडस्ट्री बेहद दबाव में है और ऑपरेशन बंद करने की कगार पर पहुंच सकती है. कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में राहत और वित्तीय मदद की मांग की है.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. इसके साथ ही कई देशों के एयरस्पेस में पाबंदियों के कारण उड़ानों के रूट लंबे हो गए हैं, जिससे एयरलाइंस का खर्च और बढ़ गया है. खासकर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा असर पड़ा है.एयरलाइंस के कुल ऑपरेशन खर्च में ATF का हिस्सा करीब 40% तक होता है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ते ही कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ जाती है.

एयरलाइंस की संस्था भारतीय एयरलाइंस महासंघ (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर कई अहम मांगें रखी हैं. इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक समान फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम लागू करने की मांग शामिल है, जैसा पहले क्रैक बैंड मैकेनिज्म में किया गया था.इसके अलावा, एयरलाइंस ने ATF पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी तौर पर हटाने की भी अपील की है, ताकि मौजूदा संकट से उबरने में मदद मिल सके.

हाल ही में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत में बढ़ोतरी को 15 रुपए प्रति लीटर तक सीमित रखा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह बढ़ोतरी 73 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई. एयरलाइंस का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन लगभग घाटे का सौदा बन गया है.FIA के मुताबिक, अगर ATF की कीमतों में इस तरह का अंतर बना रहा, तो कंपनियों को भारी नुकसान होगा और कई विमानों को ग्राउंड करना पड़ सकता है, जिससे फ्लाइट कैंसिलेशन भी बढ़ेंगे.

एयरलाइंस ने जेट फ्यूल पर लगने वाले भारी टैक्स को भी समस्या बताया है. FIA के अनुसार, दिल्ली में ATF पर 25% VAT लगता है, जबकि तमिलनाडु में यह 29% तक है. मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में यह 16% से 20% के बीच है.ये छह बड़े शहर देश की कुल एयरलाइन ऑपरेशंस का आधे से ज्यादा हिस्सा संभालते हैं, इसलिए टैक्स का असर पूरे सेक्टर पर पड़ता है.

एयरलाइंस ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि फ्यूल प्राइसिंग को संतुलित किया जा सके और इंडस्ट्री को राहत मिल सके. कंपनियों का कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो एयरलाइन नेटवर्क अस्थिर हो सकता है और सेवाएं प्रभावित होंगी. महंगे ATF, बढ़ते टैक्स और वैश्विक तनाव ने भारतीय एविएशन सेक्टर को मुश्किल दौर में ला खड़ा किया है. अब नजर सरकार के फैसलों पर है, जो तय करेंगे कि इंडस्ट्री को राहत मिलती है या संकट और गहराता है.

NATIONAL : काशी में पीएम मोदी ने दी 6350 करोड़ की सौगात, बोले- मैं नारी शक्ति का आशीर्वाद लेने आया, दिलाकर रहूंगा आरक्षण का हक

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अपने वाराणसी दौरे के दौरान पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान वे विपक्षियों पर जमकर बरसे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सपा और कांग्रेस जैसे दलों की वजह से हमारा यह प्रयास संसद में सफल नहीं हो पाया लेकिन मैं आप सभी बहनों को फिर से भरोसा देता हूं कि आपके आरक्षण का हक लागू हो,इसमें कोई कोर कसर बाकी नहीं छोडूंगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान करीब 6300 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। साथ ही उन्होंने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों (बनारस-पुणे (हडपसर) और अयोध्या-मुंबई (लोकमान्य तिलक टर्मिनस)) को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान वे नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। यहां अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मैं यहां नारी शक्ति का आशीर्वाद लेने आया हूं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी काशी माता श्रृंगार गौरी, माता अन्नपूर्णा, माता विशालाक्षी, माता संकठा और मां गंगा, ऐसी दिव्य शक्तियों की भूमि है। ऐसे में आप सभी बहन-बेटियों के इस समागम ने इस अवसर को बहुत दिव्य बना दिया है। हम काशी की भूमि पर आप सब मां-बहनों को प्रणाम करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का अवसर नारी शक्ति वंदन और विकास का उत्सव है। कुछ ही समय पहले, यहां आधारशिला रखी गई और हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इनमें काशी में सभी प्रकार के विकास से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं। काशी और अयोध्या के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए भी काम चल रहा है। कुछ समय पहले, दो अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। एक काशी से पुणे और दूसरी अयोध्या से मुंबई। ये दोनों अमृत भारत ट्रेनें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संपर्क को और बेहतर बनाएंगी। अब मुंबई, पुणे और पूरे महाराष्ट्र के लोगों के पास अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने का एक और आधुनिक विकल्प है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को विकसित बनाने का मिशन अनवरत चल रहा है और जब मैं विकसित भारत की बात करता हूं,तो उसका सबसे मजबूत स्तंभ भारत की नारी शक्ति है। काशी के सांसद के तौर पर देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे देशहित के एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आपका आशीर्वाद चाहिए और यह बड़ा लक्ष्य है-लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करना। अभी कुछ दिन पहले सपा और कांग्रेस जैसे दलों की वजह से हमारा यह प्रयास संसद में सफल नहीं हो पाया लेकिन मैं आप सभी बहनों को फिर से भरोसा देता हूं कि आपके आरक्षण का हक लागू हो,इसमें कोई कोर कसर बाकी नहीं छोडूंगा।

अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की नीतियों में निरंतर महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। 2014 में आपने हमें सेवा का अवसर दिया तो देश में 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बने। 30 करोड़ से ज्यादा बहनों के बैंक खाते खुले। 2.5 करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया।12 करोड़ से ज्यादा घरों में नल से जल पहुंचाया। यानी अनेक बड़ी योजनाओं के केंद्र में बहनों-बेटियों को रखा गया।

पीएम मोदी ने कहा कि सुविधा और सुरक्षा का विश्वास देने के साथ-साथ हमने बहनों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया है। बीते 11 वर्षों में देश की करीब 10 करोड़ बहनें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, इन समूहों को लाखों रुपये की मदद मिल रही है, जिससे बहनें अपना काम कर रही हैं। ऐसे ही प्रयासों से 3 करोड़ बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं।

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