WORLD : भारत-रूस मिलकर लगाएंगे बड़ी यूरिया फैक्ट्री, मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता घटाने की तैयारी

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भारत और रूस मिलकर रूस के समारा में 20 लाख टन क्षमता की यूरिया फैक्ट्री लगाएंगे। जानिए कैसे इससे मिडिल-ईस्ट पर निर्भरता घटेगी और किसानों को फायदा मिलेगा।

ईरान संकट और वैश्विक सप्लाई चेन के दबाव के बीच भारत ने यूरिया आयात को लेकर बड़ा कदम उठाया है,भारत और रूस अब संयुक्त रूप से रूस के समारा क्षेत्र में एक विशाल यूरिया फैक्ट्री लगाने जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को भारत की खाद सुरक्षा और किसानों की जरूरतों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है करीब 20 हजार करोड़ रुपए के इस संयुक्त प्रोजेक्ट का निर्माण अगले दो वर्षों में पूरा होने की संभावना है। भारत की तीन सरकारी कंपनियां और रूस की प्रमुख केमिकल कंपनी मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगी।

इस जॉइंट वेंचर में भारत की इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCFL) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) शामिल हैं तीनों भारतीय कंपनियां मिलकर लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेंगी, जबकि बाकी निवेश रूस की केमिकल कंपनी ‘यूरालकेम ग्रुप’ करेगी. प्रोजेक्ट की तकनीकी जिम्मेदारी प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL) को दी गई है, जिसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप दी है।

भारत कृषि प्रधान देश है और यहां यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में देश में हर साल करीब 400 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 300 लाख मीट्रिक टन ही है, यानी हर साल करीब 100 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करना पड़ता है। इसी आयात पर 2025 में भारत ने लगभग 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किएअभी भारत अपनी जरूरत का करीब 71% यूरिया मिडिल-ईस्ट देशों से मंगाता है। ऐसे में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय किसानों और खाद आपूर्ति पर पड़ता है।

हाल के वर्षों में अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता ने खाद आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है,इसी वजह से भारत सरकार ने 2026 के लिए 25 लाख टन अतिरिक्त यूरिया आयात को मंजूरी दी है। यह सप्लाई अब अल्जीरिया, नाइजीरिया, ओमान और रूस जैसे देशों से वैकल्पिक मार्गों के जरिए मंगाई जा रही है विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में अपना स्थायी उत्पादन केंद्र बनने से भारत भविष्य के किसी भी वैश्विक संकट में खाद आपूर्ति सुरक्षित रख सकेगा।

यूरिया उत्पादन में सबसे महंगा और जरूरी कच्चा माल नेचुरल गैस होती है। रूस दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में शामिल है.भारत में गैस सीमित मात्रा में उपलब्ध है और इसे आयात करना महंगा पड़ता है। ऐसे में रूस में उत्पादन करना लागत के लिहाज से ज्यादा किफायती माना जा रहा है, इसके अलावा रूस के पास पहले से आधुनिक फर्टिलाइजर तकनीक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, जिससे प्रोजेक्ट तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

यूरिया खेती के लिए सबसे जरूरी नाइट्रोजन आधारित खाद है. चावल, गेहूं और मक्का जैसी फसलों की पैदावार बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका होती है, विशेषज्ञों के अनुसार सही मात्रा में यूरिया के इस्तेमाल से उत्पादन 20% से 50% तक बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार खाद की सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं आने देना चाहती।

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